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मुगलकालीन विज्ञान की अनमोल धरोहर: एस्ट्रोलेब में विज्ञान और संस्कृति का अनोखा संगम

लंदन जयपुर के शाही संग्रह की सबसे बेशकीमती वैज्ञानिक विरासतों में से एक 17वीं शताब्दी का एक विशाल ‘एस्ट्रोलेब’ (खगोलीय गणना यंत्र) आगामी 29 अप्रैल को लंदन के सोथबी नीलामी घर में वैश्विक बोली के लिए तैयार है। पीतल से बने इस अद्भुत यंत्र को विशेषज्ञ अपनी बहुमुखी क्षमताओं के कारण उस दौर का ‘सुपरकंप्यूटर’ और ‘प्राचीन स्मार्टफोन’ करार दे रहे हैं। सोथबी के ‘इस्लामिक एंड इंडियन आर्ट’ विभाग के प्रमुख बेनेडिक्ट कार्टर ने इस यंत्र को अब तक का सबसे विशाल और दुर्लभ खगोलीय उपकरण बताया है। इसकी ऐतिहासिक जड़ें जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय के निजी संग्रह से जुड़ी हैं। महाराजा के निधन के बाद यह उनकी पत्नी और विश्वप्रसिद्ध महारानी गायत्री देवी के पास रहा, जहां से यह कालांतर में एक निजी संग्रह का हिस्सा बन गया। अब पहली बार इसे सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित और नीलाम किया जा रहा है। टूट सकता है वर्ल्ड रिकॉर्ड तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टि से यह यंत्र अपने समय की कला का शिखर है। इसका वजन 8.2 किलोग्राम और ऊंचाई लगभग 46 सेंटीमीटर है, जो सामान्य एस्ट्रोलेब की तुलना में चार गुना बड़ा है। इसकी दुर्लभता और शाही जुड़ाव को देखते हुए, विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह 1.5 से 2.5 मिलियन पाउंड (लगभग 15 से 25 करोड़ रुपए) के बीच बिक सकता है, जो खगोलीय यंत्रों की नीलामी के पिछले सभी विश्व रिकॉर्ड तोड़ सकता है। इस यंत्र की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘ऑल-इन-वन’ गैजेट होना है। ऑक्सफोर्ड की इतिहासकार डॉ. फेडेरिका गिगेंटे के अनुसार, इसके जरिए 17वीं सदी में खगोलशास्त्री सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, तारों की सटीक स्थिति, किसी कुएं की गहराई और इमारतों की ऊंचाई माप सकते थे। इसके अलावा, इसका उपयोग मक्का की दिशा निर्धारित करने और पंचांग की सहायता से सटीक कुंडलियां तैयार करने के लिए भी किया जाता था। विज्ञान और संस्कृति का समन्वय सांस्कृतिक रूप से यह यंत्र मुगलकालीन भारत की मिली-जुली विरासत का जीवंत प्रमाण है। इसे 17वीं सदी की शुरुआत में लाहौर (अब पाकिस्तान) के मशहूर ‘लाहौर स्कूल’ के दो भाइयों कायम मुहम्मद और मुहम्मद मुकीम ने बनाया था। इस यंत्र पर तारों के नाम फारसी में अंकित हैं, जिनके ठीक बगल में उनके संस्कृत समकक्ष नाम देवनागरी लिपि में उकेरे गए हैं। यह उस दौर में विज्ञान और संस्कृति के अद्भुत समन्वय को दर्शाता है। आज भी बिल्कुल सटीक गणना यह एस्ट्रोलेब लाहौर के तत्कालीन प्रशासक आका अफजल के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था, जो मुगल सम्राट जहांगीर और शाहजहां के शासनकाल में ऊंचे पदों पर तैनात थे। इसमें 94 शहरों के अक्षांश और देशांतर के साथ-साथ 38 तारों के पॉइंटर्स दिये गये हैं, जो आज भी इतने सटीक हैं कि किसी भी खगोलीय पिंड की ऊंचाई की एकदम सही डिग्री बता सकते हैं। विश्व भर के संग्रहालय और निजी संग्रहकर्ता इस अनूठी वैज्ञानिक धरोहर को हासिल करने के लिए उत्सुक हैं।

भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड डील: निर्यात और MSME सेक्टर को बड़ा फायदा

 नई दिल्ली  भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आज भारत मंडपम में हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे। यह समझौता मार्च 2025 में शुरू हुई बातचीत के बाद दिसंबर 2025 में अंतिम रूप से तैयार हुआ था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है। पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता आने वाले महीनों में लागू होगा और इससे भारत-न्यूजीलैंड के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी। भारत को क्या होगा फायदा? इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले करीब 70 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा। पीयूष गोयल के मुताबिक, इससे आगरा के लेदर उद्योग, उत्तर प्रदेश के हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों को नए मौके मिलेंगे। यह समझौता खास तौर पर श्रम आधारित और MSME सेक्टर के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। इस समझौते में सेवा क्षेत्र को भी शामिल किया गया है। इसके तहत भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल 5000 अस्थायी वीजा दिए जाएंगे, जिनकी अवधि तीन साल तक होगी। इन वीजा के तहत आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक भी इसमें शामिल होंगे। नियमों में राहत और कृषि सहयोग FTA के तहत नियमों को आसान बनाया जाएगा और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम किया जाएगा। इससे भारतीय दवाओं और मेडिकल उपकरणों को न्यूजीलैंड में जल्दी मंजूरी मिल सकेगी। कृषि क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। कीवी, सेब और शहद जैसे उत्पादों पर एग्री-टेक्नोलॉजी प्लान के जरिए सहयोग बढ़ाया जाएगा। इस समझौते का लक्ष्य अगले पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार को 2.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा? इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को भारत में अपने 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में छूट या समाप्ति का लाभ मिलेगा। इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पाद शामिल हैं, जबकि कुछ उत्पादों पर कोटा लागू होगा। हालांकि भारत ने डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि घरेलू किसानों और उद्योगों की सुरक्षा हो सके। हस्ताक्षर से पहले पीयूष गोयल और टॉड मैक्ले ने अपने परिवार के साथ ताजमहल का दौरा किया और करीब दो घंटे वहां बिताए। इस दौरान गोयल ने आगरा के उद्योगपतियों से भी मुलाकात की, जिसमें लेदर, टेक्सटाइल, मसाले, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और कारपेट सेक्टर के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कहा कि आगरा भविष्य में निर्यात के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा और यहां के उद्योगों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही देशभर में 100 इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की योजना के तहत आगरा के पास भी एक नया औद्योगिक पार्क बनाने पर विचार किया जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर,भारत की नई रणनीतिक सैन्य सोच का प्रदर्शन

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद, मई 2025 में भारत की प्रतिक्रिया अब किसी अचानक बदलाव के बजाय अधिक एक विकसित रणनीतिक सोच के रूप में दिखाई देती है। पहलगाम आंतकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद, नई दिल्ली की कार्रवाई सिर्फ प्रतिक्रियात्मक नहीं थी। यह सोची-समझी संतुलित एक स्पष्ट जवाब देने वाली पहल थी, कि भारत अब अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए क्षमता के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति भी रखता है। पीछे मुड़कर देखने पर, सिंदूर एक ऐसा क्षण बनकर उभरा जहां इरादा और क्षमता असाधारण स्पष्टता के साथ एकरूप हो गए। सैन्य स्तर पर देखें तो इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता तीनों सेनाओं थल, जल और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय रहा। जिस व्यवस्था को अक्सर आपसी तालमेल की कमी के लिए आलोचना झेलनी पड़ती थी, उसने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के नेतृत्व में एकीकृत और प्रभावी संचालन का प्रदर्शन किया। स्वदेशी प्रणालियों के प्रभावी उपयोग ने इसे और भी पुष्ट किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयास ठोस युद्धक्षेत्र लाभों में तब्दील होने लगे हैं। इससे समय के साथ ऐसी क्षमताओं को बनाए रखने की भारत की क्षमता में विश्वास मजबूत हुआ है। स्थिति को अनियंत्रित किए बिना भी बनाया जा सकता है दबाव इस ऑपरेशन का एक और महत्वपूर्ण पहलू युद्धक्षेत्र का विस्तार रहा। नियंत्रण रेखा के पार जाकर पाकिस्तान के रणनीतिक क्षेत्रों में कार्रवाई करके भारत ने यह स्पष्ट किया कि परमाणु निरोध (न्यूक्लियर डिटरेंस) की सीमाएं उतनी कठोर नहीं हैं जितनी पहले मानी जाती थीं। भारत ने दिखाया कि बिना स्थिति को अनियंत्रित किए संतुलित और सीमित पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के जरिए भी दबाव बनाया जा सकता है। इसमें नौसेना की सक्रियता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे ऑपरेशन का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़े। कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारत का रुख स्पष्ट कूटनीतिक मोर्चे पर भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का रुख अधिक स्पष्ट और आत्मविश्वास भरा नजर आता है। पाकिस्तान के साथ संबंधों में अब यह संकेत दिया गया है कि संवाद और सहयोग उसके व्यवहार पर निर्भर करेगा। जल और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों को भी सुरक्षा से जोड़कर भारत ने यह स्पष्ट किया है कि आतंकवाद को समर्थन देने की कीमत केवल सैन्य नहीं, बल्कि बहुआयामी होगी। ऑपरेशन सिंदूर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया खासकर अमेरिका का रुख, भारत के रणनीतिक माहौल को समझने में अहम संकेत देता है। अमेरिका ने भारत की कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ कदम के रूप में स्वीकार तो किया, लेकिन यह समर्थन पूरी तरह स्थायी या बिना शर्त नहीं था। दरअसल, भारत-अमेरिका संबंधों में एक तरह का व्यवहारिक (ट्रांजैक्शनल) दृष्टिकोण अभी भी मौजूद है। ट्रंप के दावे ने कम किया प्रभाव अमेरिका के लिए भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, लेकिन पाकिस्तान से जुड़े संकटों के मामले में इस साझेदारी की सीमाएं हैं। डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे ने, जिसमें उन्होंने संघर्ष विराम में अपनी भूमिका बताई, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की छवि को कुछ हद तक चुनौती दी। चाहे यह दावा कितना भी सही या गलत क्यों न हो, इससे भारत के उस रुख पर असर पड़ता है, जिसमें वह कश्मीर जैसे मुद्दों पर किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को नकारता रहा है। इस तरह के बयान भारत के ऑपरेशन सिंदूर के मैसेज को कमजोर कर सकते हैं। वहीं ट्रंप के इस दावे का साया आज भी छाया हुआ है और भारत-अमेरिका संबंधों पर इसका प्रभाव, चाहे कितना भी सूक्ष्म क्यों न हो, आज भी बना हुआ है। नैरेटिव की लड़ाई अहम पाकिस्तान के लिए, ऐसे दावे एक तरह से कूटनीतिक राहत लेकर आए। इससे उसे अपने पुराने एजेंडे भारत के साथ विवादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने को आगे बढ़ाने का मौका मिला। इस पूरे घटनाक्रम में नैरेटिव की लड़ाई उतनी ही अहम बन गई है जितनी वास्तविक सैन्य कार्रवाई। ऑपरेशन सिंदूर जहां भारत के लिए एक नई निरोधक नीति स्थापित करने का प्रयास था, वहीं उसकी व्याख्या को लेकर अस्पष्टता पाकिस्तान के लिए फायदेमंद रही। हालांकि, जमीनी स्तर पर इस ऑपरेशन के परिणामों ने पाकिस्तान के लिए यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रॉक्सी आतंकवाद की रणनीति अब अधिक महंगी साबित हो रही है। इससे दोनों देशों के संबंधों में एक कठोरता आई है और इस्लामाबाद को अपनी रणनीतिक सीमाओं का एहसास भी हुआ है। भारत के लिए चीन के नजरिए से भी ऑपरेशन सिंदूर महत्वपूर्ण रहा। पाकिस्तान के पास मौजूद चीनी हथियारों और प्रणालियों के प्रदर्शन के साथ-साथ भारत की बहु-आयामी कार्रवाई ने बीजिंग को यह संकेत दिया है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय चुनौती नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक क्षमता वाला देश बन रहा है। एक साल बाद यह साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर किसी कठोर सिद्धांत की बजाय एक व्यवहारिक पैटर्न को दर्शाता है। भारत ने यह दिखाया है कि वह जरूरत पड़ने पर संतुलित और उद्देश्यपूर्ण तरीके से सैन्य शक्ति का उपयोग कर सकता है, साथ ही स्थिति को नियंत्रित भी रख सकता है। ऑपरेशन सिंदूर भारत की रणनीतिक परिपक्वता का संकेत है। आगे की चुनौती यही होगी कि इस संतुलन को बनाए रखा जाए जहां आक्रामकता हो, लेकिन उसके साथ विवेक भी बना रहे।

कोल थॉमस एलन ने मचाया हड़कंप, कई हथियारों के साथ पकड़ा गया संदिग्ध

वॉशिंगटन वाइट हाउस के हिल्टन होटल में आयोजित करेंस्पॉन्डेंट डिनर के दौरान जो कुछ हुआ उससे 45 साल पुरानी यादें फिर ताजा हो गईं। पत्रकारों के लिए आयोजित किए गए इस डिनर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कैबिनेट के सीनियर नेता मौजूद थे। उसी सयम बैंक्वेट के बाहर एक हथियारोंसे लैस 31 साल के युवक ने गोलीबारी शुरू कर दी। सीक्रेट सर्विस ने तुरंत ट्रंप समेत सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उधर हमलावर को दबोच लिया गया। इस होटल में यह अपनी तरह की कोई पहली घठना नहीं है। 45 साल पहले भी एक राष्ट्रपति के साथ ऐसा ही हो चुका है। इसी होटल के बाहर रोनाल्ड रीगन पर भी हुआ था हमला अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपतियों की हत्या हो चुकी है। वहीं रोनाल्ड रीगन पर जानलेवा हमला किया गया था। 1981 में वह वॉशिंटन हिल्टन से बाहर निकले ही थे की एक शख्स ने उनपर गोलियां चला दीं। एक गोली उनके सीने में जा लगी। उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। उनकी जान बचा लगी गई थी। एफबीआई की आर्काइव के मुताबिक जॉन हिंकली जूनियर ने 6 गोलियां दागी थीं। होटल से सीधे एलिवेटर के जरिए उन्हें सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया। इस हममले में उनके साथ मौजूद सीक्रेट सर्विस के एजेंट भी घायल हो गए थे। 45 साल बाद फिर हिल्टन होटल में वैसा ही वाकया देखने को मिला। हालांकि इस बार कोई घायल नहीं हुआ। हमलावर को को मैग्नेट स्कैनिंग के दौरान बैंक्वेट में जाने से रोक दिया गया था और उसने वहीं फायरिंग शुरू कर दी। होटल की सुरक्षा रहती है चुस्त वॉशिंगटन होटल की काफी सुरक्षा रहती है। आम तौर पर यहां समान्य गेस्ट भी आते हैं लेकिन बालरूम में सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन होता है। ऐसे में इसकी खास सुरक्षा रहती है। डिनर के कार्यक्रम के चलते इस होटल को आम लोगों के लिए दोपहर 2 बजे से रात के 8 बजे तक बंद कर दिया गया था। बालरूम में उस वक्त 2300 गेस्ट मौजूद थे। सभी अतिथियों को भी कई चरणों की सुरक्षा को पार करके आना था। दहशत का माहौल प्रत्यक्षदर्शियों  ने बताया कि गोलीबारी के कारण स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गयी थी, लेकिन किसी भी खास मेहमान के घायल होने की खबर नहीं है। हमले के पीछे के मकसद की अभी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और फॉरेंसिक टीमें घटनास्थल से सबूत जुटाने में लगी हैं। कई हथियारों से लैस था हमलावर वाइट हाउस ने पुष्टि की है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।। कानून प्रवर्तन सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध हमलावर की पहचान कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है। वह 31 वर्ष का है और कैलिफोर्निया के टोरेंस का रहने वाला है। उसके पास से एक शॉटगन, एक हैंडगन और कई चाकू बरामद हुआ है। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावर उसी होटल में ठहरा हुआ था, जहां कार्यक्रम आयोजित था। इसी वजह से वह सुरक्षा के बाहरी घेरे को पार करने में सफल रहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सीक्रेट सर्विस की बहादुरी की प्रशंसा की है और कहा है कि सुरक्षाबलों ने बहुत ही 'तेजी और निडरता' से काम किया।

हाफिज सईद के सहयोगी की पाकिस्तान में हत्या, अज्ञात हमलावरों ने गोलियों से भूना

पाकिस्तान पाकिस्तान में एक बार फिर से एक बड़े आतंकवादी की अननोन गनमैन ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी है। इस बार हाफिज सईद का खास और खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर ए तैयबा कै चीफ शेख यूसुफ आफरीदी निशाना बना है। पाकिस्तान में एक बार फिर से 'अननोन गनमैन' का ऐक्शन देखने को मिला है। इस बार निशाना आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी बना है। अफरीदी को लश्कर प्रमुक हाफिर सईद का सबसे खास आदमी माना जाता है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा में हमलावरों ने अफरीदी के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसकी वजह से उसकी तत्काल ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही पाकिस्तान पुलिस मौके पर पहुंची। हालांकि अभी तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख यूसुफ अफऱीदी लंबे समय से लश्कर का प्रमुख गुर्गा रहा है। यह खैबर पख्तूनख्वा से मुजाहिद तैयार करने का काम करता था। यहां से इन्हें कश्मीर और अन्य जगह भेजा जाता था। अफरीदी को लश्कर की खैबर पख्तूनख्वा का प्रमुख माना जाता था। उसका लश्कर चीफ हाफिज सईद के साथ भी करीबी नाता है। अफरीदी कई बार हाफिज सईद के साथ सार्वजनिक तौर पर नजर भी आ चुका है। स्थानीय मीडिया आउटलेट्स से बात करते हुए पुलिस ने बताया कि इस मामले की हर ऐंगल से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में यह टारगेट किलिंग का मामला लग रहा है। हमलावरों की तलाश की जा रही है। अभी तक इस हत्या की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है। बता दें, पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से अननोन गनमैन लगातार भारत विरोधी तत्वों को उनके कर्मों की सजा देते आ रहे हैं। भारत में ऐसे लोगों को कुछ लोग हीरो के तौर पर देखते हैं। हाल में आई फिल्म धुरंधर की कहानी को देखने के बाद कई लोग इस बात को मानते हैं कि पाकिस्तान में बैठे यह भारतीय खुफिया एजेंसी के एजेंट्स हैं, जो पाकिस्तान की धरती पर भारत के हितों की रक्षा करते हैं। हालांकि इस बारे में भारत सरकार का रुख साफ है कि वह किसी भी देश के संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करती है और न ही किसी इंसान की हत्या में शामिल होती है।

सायोनी घोष ने मंच से पढ़े संस्कृत मंत्र और कलमा, चुनावी सभा में चर्चा तेज

भवानीपुर सायोनी घोष ने भवानीपुर को मिनी इंडिया करार देते हुए कहा कि यहां देश की विविधता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं और यही भारत ताकत है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सायोनी घोष का भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह भाषण पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में आयोजित चुनावी रैली के दौरान दिया गया था, जहां उन्होंने विभिन्न धर्मों की प्रार्थनाओं और मंत्रों का उल्लेख करते हुए एकता व भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने इस वीडियो को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया, जिसके बाद यह चर्चा में आ गया। राजनीतिक हलकों से लेकर आम जनता तक, हर जगह इस भाषण को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इसे लेकर बहस तेज हो गई है। सायोनी घोष ने भवानीपुर को मिनी इंडिया करार देते हुए कहा कि यहां देश की विविधता साफ तौर पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं और यही भारत की असली ताकत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में छिपी है और इसे बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके इस बयान को समर्थकों ने सराहा और इसे सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताया। कई धर्मों से जुड़े मंत्रों और प्रार्थनाओं का जिक्र भाषण के दौरान सायोनी घोष ने कई धर्मों से जुड़े मंत्रों और प्रार्थनाओं का जिक्र किया। उन्होंने संस्कृत का प्रसिद्ध मंत्र 'या देवी सर्वभूतेषु' पढ़ा, इस्लाम का कलमा 'ला इलाहा इल्लल्लाह' दोहराया, सिख धर्म का 'इक ओंकार' गाया और हनुमान चालीसा की पंक्तियां भी सुनाईं। इस तरह उन्होंने विभिन्न धार्मिक परंपराओं को एक मंच पर जोड़ने की कोशिश की। रैली में मौजूद लोगों ने भी उनके इस प्रयास का समर्थन किया और जोरदार तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया। इस मौके पर सायोनी घोष ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह समाज को धर्म के आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जहां लोग सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं, वहां विभाजन की राजनीति करना देशहित में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि 'हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई – हम सब एक हैं' और इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जहां विपक्षी दलों ने इसे चुनावी रणनीति करार दिया है।  

ट्रंप का बड़ा दावा, वाइट हाउस डिनर शूटिंग के पीछे नफरत से भरा हमला

न्यूयोर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर में गोलीबारी करने वाले कथित हमलावर में काफी लंबे समय से बहुत अधिक नफरत भरी हुई थी। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि शूटर लंबे समय से नफरत से भरा हुआ था। यही कारण था कि उसने गोलीबारी की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी की घटना पर कहा है कि कथित हमलावर में लंबे समय से बहुत अधिक नफरत भरी हुई थी। फॉक्स न्यूज से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि शूटर लंबे समय से नफरत से भरा हुआ था, यही वजह थी कि उसने गोलीबारी की। ट्रंप ने इस घटना को पत्रकारिता के पेशे की खतरनाक प्रकृति का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह एक ‘खतरनाक पेशा’ है। उन्होंने बताया कि गोलीबारी के बाद वे कार्यक्रम जारी रखना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अनुमति नहीं दी। इस घटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने वाइट हाउस परिसर के अंदर एक विशाल और अत्यधिक सुरक्षित ‘बॉलरूम’ के निर्माण कार्य को तेज करने की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि कल रात जो हुआ, वह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि पिछले 150 वर्षों से हर राष्ट्रपति और सुरक्षा एजेंसियां वाइट हाउस के भीतर एक सुरक्षित आयोजन स्थल की मांग क्यों करती रही हैं। ट्रंप ने बताया कि वर्तमान में वाइट हाउस के अंदर ‘मिलिट्री टॉप सीक्रेट बॉलरूम’ का निर्माण चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगर यह बॉलरूम तैयार होता तो कल रात की घटना कभी नहीं होती।’ उन्होंने निर्माण कार्य को और तेज करने पर जोर देते हुए कहा कि यह न केवल सुंदर होगा बल्कि इसमें सुरक्षा के उच्चतम स्तर के फीचर्स भी होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दुनिया की सबसे सुरक्षित इमारत यानी वाइट हाउस के अंदर होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने बॉलरूम निर्माण के खिलाफ दायर मुकदमों की भी निंदा की है। उन्होंने इन्हें ‘हास्यास्पद’ बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ‘कुत्ता घुमाने वाली एक महिला’ द्वारा दायर याचिका में कोई आधार नहीं है और किसी भी चीज को इस जरूरी निर्माण कार्य में बाधा नहीं बनने दी जानी चाहिए। इस दौरान ट्रंप ने यह भी जानकारी दी कि बॉलरूम का निर्माण कार्य तय बजट के भीतर है और समय-सीमा से काफी आगे चल रहा है। उन्होंने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा होटलों या बाहरी आयोजन स्थलों में ऊपरी मंजिलों पर असुरक्षित लोग रहते हैं, जो सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं, जबकि नया बॉलरूम इन सभी जोखिमों से पूरी तरह मुक्त होगा।

ईरान-अमेरिका वार्ता ठप, पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

वाशिंगटन अमेरिका के साथ उच्च स्तरीय शांति वार्ता ठप पड़ने के बीच ईरान गंभीर डिजिटल आपातकाल का सामना कर रहा है। फरवरी के अंत में शुरू हुआ देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट अब दूसरे महीने में प्रवेश करने वाला है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स ने इसे किसी भी संप्रभु देश में लगा अब तक का सबसे लंबा राष्ट्रव्यापी इंटरनेट शटडाउन घोषित किया है। नेटब्लॉक्स के अनुसार, विस्तारित सेंसरशिप के मानवीय और आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं। यह कनेक्टेड समाज में शटडाउन का नया वैश्विक रिकॉर्ड है। बता दें कि ईरानी शासन ने अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के तुरंत बाद फरवरी के अंत में यह ब्लैकआउट लागू किया था। इसके बाद से देश की 9 करोड़ से अधिक जनता पर बाहरी डिजिटल पहुंच लगभग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। यह कार्रवाई जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान लगाए गए लंबे इंटरनेट शटडाउन की तर्ज पर की गई है। नेटब्लॉक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में पिछले 57 दिनों से इंटरनेट पूरी तरह बंद है। इससे पहले का रिकॉर्ड सूडान के नाम था, जहां 2021 में करीब 35-36 दिन इंटरनेट बंद रहा था। म्यांमार और एथियोपिया में कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट महीनों तक बंद रहा, लेकिन पूरे देश स्तर पर लगातार और एकसाथ शटडाउन के मामले में ईरान अब दुनिया में नंबर एक पर है। ईरान का अपना पुराना रिकॉर्ड 2019 का था, जब केवल सात दिनों के लिए इंटरनेट बंद किया गया था। इस बार का ब्लैकआउट उससे कहीं अधिक गंभीर और लंबा साबित हो रहा है। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह शटडाउन और लंबा चला तो ईरान की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर और गंभीर असर पड़ सकता है। ईरान ने एकता का संदेश दिया, ट्रंप के दावों को खारिज किया गौरतलब है कि ईरान में पूर्ण इंटरनेट बंदी का दूसरा महीना समाप्त होने वाला है, लेकिन तेहरान सरकार मजबूत एकता का प्रदर्शन कर रही है। अधिकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आंतरिक विभाजन और रियायतों के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्हें ईरान के साथ समझौता करने की कोई जल्दी नहीं है और बिना सबूत के दावा किया कि ईरानी नेतृत्व विभाजित है। ईरानी अधिकारियों ने इसे खारिज करते हुए सरकारी मीडिया के माध्यम से समन्वित बयान जारी किए हैं। सैन्य, सुरक्षा, न्यायपालिका और सरकारी निकाय अब एकरूप शब्दावली और प्रारूप का इस्तेमाल करते हुए समान संदेश जारी कर रहे हैं। इन संदेशों में सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के प्रति 'पूर्ण आज्ञापालन' का आह्वान भी किया जा रहा है। वार्ता स्थगित, पाकिस्तान जारी रखेगा मध्यस्थता इधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के ओमान दौरे के बाद इस्लामाबाद लौटने की उम्मीद है, हालांकि ईरान-अमेरिका के बीच आमने-सामने की वार्ता फिलहाल स्थगित है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख मतभेदों के कारण ईरान सीधी बातचीत के लिए तैयार नहीं है। तेहरान अमेरिकी रुख को 'अतिवादी' बता रहा है और अमेरिकी मांगों को अस्वीकार्य मानता है। पाकिस्तान ने मध्यस्थता जारी रखने की इच्छा जताई है। अराघची के इस्लामाबाद में आगे की बातचीत की संभावना है, जबकि उनका प्रतिनिधिमंडल निर्देश लेने के लिए तेहरान लौट गया है। शरीफ और पेजेशकियान में 50 मिनट की फोन वार्ता पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात की और शांति प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों नेताओं ने हालिया राजनयिक संपर्कों की समीक्षा की और समन्वय जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान संवाद का समर्थन करने और क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सूत्रधार की भूमिका निभाने को तैयार है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने पचास मिनट तक चली सौहार्दपूर्ण बातचीत में क्षेत्रीय स्थिति और शांति-स्थिरता के प्रयासों पर विस्तृत चर्चा की।

थंथनिया कालीबाड़ी पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, 300 साल पुराने मंदिर और अनोखी परंपरा ने खींचा ध्यान

नॉर्थ कोलकाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्थ कोलकाता में अपना रोड शो शुरू करने से पहले थंथनिया कालीबाड़ी में मां काली का आशीर्वाद लिया। थंथनिया कालीबाड़ी कोलकाता के सबसे प्राचीन और श्रद्धेय काली मंदिरों में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1703 में हुई थी, यानी इसका इतिहास 300 साल से भी पुराना है। यह शहर के औपचारिक विकास से भी पहले का है। यहां मां काली की पूजा मां सिद्धेश्वरी के रूप में की जाती है और मंदिर की अधिष्ठात्री देवी को जाग्रत माना जाता है। मान्यता है कि रामकृष्ण परमहंस अक्सर इस मंदिर में आते थे और मां सिद्धेश्वरी के लिए भक्ति गीत गाया करते थे। उन्होंने यहां जो वाणी कही थी, उसे मंदिर की दीवारों पर अंकित किया गया है, जैसे कि शंकर के हृदय में मां काली विराजमान हैं। यह भारत के उन चुनिंदा काली मंदिरों में से एक है, जहां देवी को मांसाहारी प्रसाद अर्पित किया जाता है। इस परंपरा की शुरुआत भी रामकृष्ण परमहंस ने ही की थी। कहा जाता है कि उन्होंने डाब-चिंगरी (नारियल और झींगा) का भोग लगाकर मां सिद्धेश्वरी से केशव चंद्र सेन के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की थी। उस दिन के बाद से मंदिर में मांसाहारी प्रसाद चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। जब रामकृष्ण देव श्यामापुकुर में बीमार पड़े थे, तब उनके अनुयायियों ने मां सिद्धेश्वरी से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए इसी मंदिर में मांसाहारी प्रसाद अर्पित कर प्रार्थना की थी। सालभर लगी रहती है भक्तों की भीड़ थंथनिया कालीबाड़ी में सालभर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन विशेष अवसरों पर यहां अलग ही माहौल देखने को मिलता है। खासकर काली पूजा और दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है। इन दिनों दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं और मां काली के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत से पूरा परिसर भक्तिमय हो जाता है। मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कोलकाता की सांस्कृतिक विरासत का भी एक अहम हिस्सा है। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि इस ऐतिहासिक स्थल की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव भी करते हैं।  

“हम नहीं रुकेंगे”: ईरान के खिलाफ रणनीति जारी रखने पर अडिग ट्रंप

 वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार को व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर के दौरान हुई फायरिंग के बाद बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना से वह ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को जीतने के अपने इरादे से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप ने कहा कि यह हमला उन्हें डराने या रोकने वाला नहीं है। यह घटना हिल्टन होटल वॉशिंगटन में आयोजित वार्षिक व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर के दौरान हुई। फायरिंग की घटना के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। ट्रंप इस दौरान सुरक्षित बच गए और उन्हें कोई चोट नहीं आई। ईरान युद्ध से संबंध पर क्या बोले ट्रंप पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप से पूछा गया कि क्या यह हमला ईरान युद्ध से जुड़ा हो सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता, लेकिन आप कभी नहीं जानते। यह मुझे ईरान में युद्ध जीतने से नहीं रोकेगा। हम अपना काम जारी रखेंगे और बहुत अच्छा काम करेंगे। ट्रंप ने बताया कि जांच एजेंसियां हमलावर के मकसद की जांच कर रही हैं। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे लोन वुल्फ यानी अकेले काम करने वाला हमलावर बताया गया है। आरोपी की पहचान 31 वर्षीय कोल टॉमस के रूप में हुई है। ट्रंप ने कहा कि वह कई हथियारों से लैस होकर सुरक्षा चेकपॉइंट की तरफ बढ़ा था। सीक्रेट सर्विस एजेंट पर चलाई गोली ट्रंप के अनुसार आरोपी ने एक सीक्रेट सर्विस एजेंट पर गोली चलाई, लेकिन एजेंट की बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से उसकी जान बच गई। उन्होंने कहा कि आरोपी लगभग 50 गज दूर से तेजी से दौड़ता हुआ आया था। इसी बीच ट्रंप ने अपने अधिकारियों की पाकिस्तान यात्रा भी रद्द कर दी। यह टीम पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए जाने वाली थी। उन्होंने कहा कि बातचीत का कोई फायदा नहीं दिख रहा था, इसलिए यात्रा रद्द की गई। ट्रंप ने कहा, “हमारे पास सारे पत्ते हैं। वे जब चाहें हमें कॉल कर सकते हैं, लेकिन अब 18 घंटे की उड़ान भरकर बेकार बैठने की जरूरत नहीं है।” ईरान नेतृत्व पर भी साधा निशाना ट्रंप ने दावा किया कि जैसे ही उन्होंने दौरा रद किया, 10 मिनट के भीतर ईरान की तरफ से नया प्रस्ताव आया, जो पहले से बेहतर था। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमें एक पेपर दिया था जो बेहतर होना चाहिए था। मैंने यात्रा रद्द की और तुरंत नया पेपर आया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां भारी अंदरूनी कलह और भ्रम की स्थिति है। उन्होंने लिखा कि उन्हें खुद नहीं पता कि वहां कौन प्रभारी है।