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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, ईरान ने MQ-9 ड्रोन गिराने का किया दावा

तेहरान  खाड़ी में चल रहे बवाल के खत्म होने के आसार नजर आ ही रहे थे कि अचानक अमेरिका की ओर से हुए हमले ने एक बार फिर से खाड़ी में गोले-बारूद की आवाज गुंजा दी है. पहले अमेरिका ने दावा किया कि उसने अपनी रक्षा में दक्षिणी ईरान की नावों पर हमला किया है. इसके जवाब में अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है. IRGC ने ये भी दावा किया हैहा कि उसने अमेरिकी RQ-4 ड्रोन और F-35 लड़ाकू विमान को ईरानी हवाई क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, IRGC ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।  इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खाड़ी देशों और अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब खाड़ी क्षेत्र के देश अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेंगे. अल जजीरा के मुताबिक खामेनेई ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि अब अमेरिका के लिए खाड़ी क्षेत्र सुरक्षित ठिकाना नहीं रहेगा. बकरीद के मौके पर जारी अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि समय को पीछे नहीं मोड़ा जा सकता और अब क्षेत्र के देश पहले जैसे हालात स्वीकार नहीं करेंगे. ईरानी सरकारी टीवी और AFP की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का प्रभाव पश्चिम एशिया में लगातार कमजोर हो रहा है और हर गुजरते दिन के साथ उसकी स्थिति पहले से कम होती जा रही है।  हमलों के साथ वार्ता भी है जारी इसी बीच ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने को लेकर बातचीत भी आगे बढ़ती दिख रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 14 बिंदुओं वाले संभावित समझौता ज्ञापन पर कई मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, हालांकि अंतिम समझौता अभी दूर है. बताया जा रहा है कि बातचीत का मुख्य फोकस युद्ध रोकना और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटाना है. इसके बदले ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और क्षेत्र में तनाव कम करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।  परमाणु मुद्दे पर अटकी हुई है बात दरअसल परमाणु मुद्दा अभी भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे, जबकि तेहरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा. इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और हिज्बुल्लाह जैसे ईरान समर्थित समूहों को लेकर भी मतभेद जारी हैं. रॉयटर्स के मुताबिक अगर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल इस समझौते को मंजूरी देती है, तो इसे अंतिम स्वीकृति के लिए मोजतबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा. वहीं अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि खामेनेई पहले ही इस समझौते की व्यापक रूपरेखा को समर्थन दे चुके हैं। 

शादी में दिखी मिसाल, बेटे के विवाह पर 3500 ग्रामीणों को मिला बीमा सुरक्षा का गिफ्ट

 नांदेड महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कंधार तालुका स्थित बहादरपुरा गांव में एक शादी सामाजिक सरोकार और मानवता की मिसाल बन गई. आमतौर पर शादी समारोहों में लाखों रुपये सजावट, आतिशबाजी और भव्य आयोजनों पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन बहादरपुरा के पेठकर परिवार ने अपने बेटे सिद्धेश्वर पेठकर के विवाह को समाज सेवा से जोड़ते हुए एक अनोखी पहल की।  पेठकर परिवार ने पूरे गांव का कराया बीमा सिद्धेश्वर पेठकर और मंजुषा के विवाह समारोह के अवसर पर परिवार ने पूरे गांव के करीब 3500 लोगों का दुर्घटना बीमा कराने का निर्णय लिया. इस पहल का उद्देश्य गांव के लोगों को भविष्य में किसी भी दुर्घटना या अप्रिय घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है. परिवार का मानना है कि शादी केवल व्यक्तिगत खुशी का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम होना चाहिए।  गांव में जैसे ही इस पहल की जानकारी सामने आई, लोगों में खुशी और गर्व का माहौल बन गया. ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने पहली बार किसी शादी में ऐसा सामाजिक संदेश देखा है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह पहल आने वाले समय में अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।  पेठकर परिवार ने बताया कि आज के समय में अचानक होने वाली दुर्घटनाएं कई परिवारों को आर्थिक संकट में डाल देती हैं. ऐसे में यदि पहले से बीमा जैसी सुविधा उपलब्ध हो तो कठिन समय में लोगों को सहारा मिल सकता है. इसी सोच के साथ विवाह समारोह को सामाजिक सुरक्षा अभियान से जोड़ने का निर्णय लिया गया।  चर्चा में बनी ये पहल परिवार के इस कदम की इलाके में व्यापक चर्चा हो रही है. सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल की सराहना की है. लोगों का कहना है कि अगर समाज के सक्षम लोग अपने निजी आयोजनों को सामाजिक हित से जोड़ें, तो कई जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है।  बहादरपुरा गांव में अब यह शादी केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक चेतना और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई है. “वधू का आगमन हुआ और गांव सुरक्षित हो गया”. यह संदेश अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. पेठकर परिवार की इस अनोखी पहल ने यह साबित कर दिया कि खुशियों के अवसर पर समाज के बारे में सोचने से बदलाव की नई शुरुआत की जा सकती है। 

क्वाड बैठक में अमेरिका का बड़ा संदेश, मार्को रुबियो बोले- रूस-चीन भी नहीं चाहेंगे होर्मुज बंद हो

नई दिल्ली दिल्ली में आज क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक शुरू हो गई. इस बैठक की शुरुआत में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और कहा कि क्वाड देशों के बीच साझा गतिविधियों और साझा चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की जा रही है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में कई बड़े मौके और चुनौतियां सामने हैं, जिन पर मिलकर काम करने की जरूरत है।  वहीं इस बैठक में शामिल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हर हाल में खुला रहना चाहिए और रहेगा. उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जो कुछ हो रहा है, वह गैरकानूनी, अस्थिर और दुनिया के लिए अस्वीकार्य है।  माना जा रहा है कि बैठक का सबसे बड़ा फोकस चीन के बढ़ते प्रभाव और खासकर क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में उसके दबदबे को चुनौती देना होगा. दरअसल, पिछले साल क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स पहल शुरू की गई थी. अब इस बैठक में सप्लाई चेन को विविध बनाने और आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई बड़े कदमों का ऐलान हो सकता है. अमेरिका इस पहल की अगुवाई कर रहा है और माना जा रहा है कि QUAD देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।  इस बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा होगी. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर को देखते हुए क्वाड देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर साझा रणनीति बना सकते हैं. इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, ट्रांसनेशनल क्राइम, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।  समुद्र, मिनरल्स और ऊर्जा… QUAD ने खोला नया मोर्चा, जयशंकर बोले- हुई बेहद अहम बैठक दिल्ली में हुई QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि चारों देशों के बीच बेहद ‘उपयोगी और उत्पादक’ चर्चा हुई है. भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई बड़े फैसलों पर सहमति बनाई है।  इंडो-पैसिफिक में क्वाड की नई रणनीति, अमेरिका ने लॉन्च किया सर्विलांस प्लान दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह साझेदारी अब सिर्फ चर्चा का मंच नहीं रह गई है, बल्कि ‘फ़ोरम ऑफ एक्शन’ बन चुकी है. उन्होंने भारत को सफल मेज़बानी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि बैठक में बेहद उपयोगी और सार्थक चर्चा हुई. रुबियो ने कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया चारों देश मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।  अमेरिकी विदेश मंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि QUAD देशों ने इंडो-पैसिफिक सर्विलांस लॉन्च करने का फैसला किया है. उनका कहना था कि इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम समुद्री क्षेत्र है, जहां से करीब 60 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार गुजरता है. ऐसे में समुद्री सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।  रुबियो ने कहा कि बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क लॉन्च करने का भी फैसला लिया गया है. माना जा रहा है कि इसका मकसद चीन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक सप्लाई चेन को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि QUAD सिर्फ सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और अन्य देशों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।  इंडो-पैसिफिक पर क्वाड का फोकस, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर बनी रणनीति दिल्ली में आयोजित क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक खत्म होने के बाद भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने साझा बयान जारी किया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वांग और जापान के विदेश मंत्री मोटेगी ने बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया।  इस बैठक के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि QUAD देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि चारों देशों ने सुरक्षित समुद्री व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।  जयशंकर ने कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए सप्लाई चेन को मजबूत और भरोसेमंद बनाना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि QUAD देशों ने इस दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. विदेश मंत्री के मुताबिक बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, फर्टिलाइजर्स और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. माना जा रहा है कि चीन पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क तैयार करने को लेकर QUAD देशों के बीच रणनीतिक तालमेल और मजबूत हुआ है।   

बंजर से उपजाऊ बनेगा लद्दाख, इगू-फे नहर का पानी लाएगा हरित क्रांति

 स्पितुक   उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की देखरेख में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्पितुक इलाके की बंजर भूमि को हरा भरा बनाने की दिशा में अभियान ने जोर पकड़ लिया है। लद्दाख के स्पितुक गांव में लगभग 800 एकड़ बंजर व क्षतिग्रस्त भूमि के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वाकांक्षी पारिस्थितिक व भूमि पुनर्स्थापन अभियान छेड़ दिया गया है। यह जानकारी रविवार को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य सरल व किफायती फ्रेशवाटर इंजीनियरिंग तकनीक के माध्यम से सदियों से सूखी पड़ी भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना है। इस पहल के तहत हाल ही में पुनर्जीवित किए गए इगू–फे नहर से अतिरिक्त पानी को साधारण मशीनों की मदद से स्पितुक क्षेत्र की बंजर भूमि तक पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर मीठे पानी के प्रवाह से सूखी मिट्टी में नमी लौटने से नुकसान दायक तत्व बाहर निकल जाएंगे व प्राकृतिक वनस्पति का विकास शुरू हो जाएगा। 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही इससे धीरे-धीरे यह बंजर इलाका उपजाऊ व नमी-संरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र में बदल सकेगा। उपराज्यपाल ने स्पितुक इलाकों का दौरा कर क्षेत्र में हरियाली लाने की दिशा में हो रहे कार्याें के बारे में जानकारी ली। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने का अभियान लद्दाख में पहले से सफल रहे प्रोजेक्ट हिम सरोवर की उपलब्धियों को आगे बढ़ाता है। यह इगू–फे नहर पुनर्जीवन परियोजना का पूरक भी है। इस नहर के जरिए इस समय लद्दाख में 4,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई हो रही है। बंजर इलाकों में नहर से पानी पहुंचने से वहां पर पेड़ पौधे लगाने की मुहिम जोर पकड़ लेगी। बंजर भूमि को उपजाउ बनाने की परियोजना से भूजल स्तर में सुधार, मिट्टी का कटाव रोकने, भूमि की उर्वरता बढ़ाने व टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है। पहल से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह माडल भविष्य में लद्दाख सहित अन्य शुष्क क्षेत्रों में भी पारिस्थितिक बदलाव व बंजर भूमि पुनर्जीवन के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।

मुसलमानों को बनाया निशाना! शरिया स्कीम के जरिए हजारों करोड़ की ठगी का आरोप

 नई दिल्ली शरिया कानून के मुताबिक ब्याज (रिबा) कमाना हराम होता है और कई मुसलमान इस वजह से अपना पैसा बैंकों में भी जमा नहीं कराते हैं। ऐसे ही मुसलमानों को टारगेट करके एक महिला ने 6 हजार करोड़ रुपये जुटा लिए और 3000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। लालच दिया जाता था कि शरिया के नियमों का पालन करते हुए निवेश पर सालाना 36 फीसदी का मुनाफा मिलेगा। शुरुआत में कुछ लोगों को इसी तरह मोटा मुनाफा देकर विश्वास जीता गया और फिर हजारों करोड़ रुपये डकार लिए गए। पीटीआई के मुताबिक, ईडी ने कहा कि शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य पर 36 प्रतिशत से अधिक वार्षिक मुनाफे का वादा करके लोगों से 5,978 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाने का आरोप है। हालांकि, वे मूल राशि भी वापस करने में विफल रहे जिससे 1.72 लाख से अधिक निवेशकों से 3,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में ईडी की अब तक की जांच और अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि पिछले सप्ताह गुरुग्राम से गिरफ्तार की गई नौहेरा शेख ने शरिया कानून के मुताबिक मुसलमानों को निवेश और भारी मुनाफे का लालच दिया था और हजारों करोड़ रुपये जुटा लिए। सुप्रीम कोर्ट की ओर से बेल खारिज किए जाने और सरेंडर के आदेश के बाद नौहेरा एक महीने से अधिक समय से फरार चल रही थी। महाठगी की आरोपी शेख ने अदालतों और जांच एजेंसियों को कई बार गच्चा दिया था। उसने सुप्रीम कोर्ट को यह कहकर भी भ्रमिक करने की कोशिश की कि उसने हैदराबाद पुलिस के सामने सरेंडर किया था, लेकिन उसे हिरासत में लेने से इनकार कर दिया गया। नौहेरा शेख की 400 करोड़ की संपत्ति जब्त नौहेरा शेख के पास मौजूद 400 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और पीड़ितों को इसे लौटाने की प्रक्रिया चल रही है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, नौहेरा शेख, उसके परिजनों और अन्य ने लाखों लोगों को अपनी पोंजी स्कीम में निवेश के लिए लालच दिया और उनकी कमाई हड़प ली। शुरुआत में निवेश करने वालों को भारी-भरकम मुनाफा भी दिया गया, लेकिन बाद में करीब 1.7 लाख जमाकर्ताओं ने अपनी गाढ़ी कमाई शरिया वाले निवेश के नाम पर गंवा दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जांच का आदेश दिया था और ईडी से कहा था कि जब्त संपत्तियों की नीलामी करके पीड़ितों को रकम लौटाई जाए। आरोपी और उसके सहयोगियों ने कई शपथ पत्र दायर करके संपत्तियों की बिक्री में देरी की भरसक कोशिश की। उसके एक सहयोगी ने अपना नाम 'कल्याण बनर्जी' बताते हुए खुद को पीएमओ का अधिकारी बताने की कोशिश की। उसे जनवरी में गिरफ्तार कर लिया गया था। हीरा ग्रुप के जरिए की गई ठगी 2024 में जब एजेंसी ने नौहेरा के घर पर छापेमारी की तो 12 लग्जरी गाड़ियां बरामद की गईं, जिनमें बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज बेंज जैसी महंगी कारें शामिल थीं। 92 लाख रुपये कैश भी बरामद किया गया था। नौहेरा शेख ने 'हीरा ग्रुप' नाम से कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए इतनी बड़ी रकम की ठगी की गई। शेख ने हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। उसने खासतौर पर मुसलमानों को टारगेट बनाया जो शरिया के कानून के मुताबिक निवेश करना चाहते थे। ईडी के मुताबिक उसने 36 फीसदी सालाना मुनाफे का लालच दिया। लेकिन बाद में लोगों को मूलधन भी वापस नहीं कर पाई। गुरुग्राम में पहचान बदल रह रही थी नौहेरा गुरुग्राम में पकड़ी गई नौहेरा शेख यहां अपनी पहचान बदलकर रह रही थी। ईडी और हरियाणा पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन के दौरान पकड़ी गई नौहेरा शेख सेक्टर 45 में रह रही थी। फर्जी आधार के जरिए उसने अपना नाम शेख खामर जहां बताया था।

Crude Oil सस्ता होने से खुशखबरी, पेट्रोल-डीजल और LPG को लेकर बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्‍ली  कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लुढ़ककर दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 4.55% की गिरावट के साथ 98.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 4.73% टूटकर 92.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. दोनों ही अनुबंधों के लिए 7 मई के बाद का यह सबसे निचला स्तर है. क्रूड की कीमतों में आई यह गिरावट भारत के लिए बड़ी राहत है।  भारत के लिहाज से सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस संभावित समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का संकट टल सकता है. तनाव से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और एलएनजी का परिवहन इसी मार्ग से होता था. इस रूट के सुचारू होने से भारत में गैस और तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहेगी, जिससे देश में एलपीजी की किल्लत का खतरा पूरी तरह टल जाएगा और आपूर्ति चेन मजबूत होगी।  अमेरिका-ईरान में शांति की उम्मीद से टूटे दाम तेल की कीमतों में यह बड़ी गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि दोनों देश एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर “काफी हद तक बातचीत पूरी” कर चुके हैं. इस समझौते के तहत मध्य पूर्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को दोबारा पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है।  भले ही ते बाजार इस खबर से झूम उठा हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अभी पूरी तरह जश्न मनाना जल्दबाजी होगी. राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों से ईरान के साथ किसी भी समझौते में जल्दबाजी न करने को कहा है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रुकावटों समेत कई जटिल मुद्दों पर दोनों पक्षों में मतभेद अभी भी बरकरार हैं।   

EV Buyers Alert: इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी में होने जा रहा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र सरकार अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पर मिलने वाली सब्सिडी को और बढ़ा सकती है। भारी उद्योग मंत्रालय इस योजना के लिए अतिरिक्त फंड की डिमांड करने की तैयारी में है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल वाहनों की जगह EV टू-व्हीलर अपनाएं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सस्ता हो सकता है। यही वजह है कि EV कंपनियों के शेयरों में भी उत्साह देखा जा रहा है। सरकार पहले ही PM ई-ड्राइव स्कीम के तहत FY2026 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सब्सिडी के लिए करीब ₹10,900 करोड़ आवंटित कर चुकी है। ऑटो इंडस्ट्री की मांग के बाद इस योजना को जुलाई तक बढ़ा दिया गया था। अब नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार इस योजना को और मजबूत बनाना चाहती है। हालांकि, अतिरिक्त फंड कितना होगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो महीनों से मंत्रालय इस पर चर्चा कर रहा है कि किन योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर इस सूची में सबसे ऊपर है। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हों, ताकि तेल आयात पर दबाव कम किया जा सके। खास बात यह है कि अब EV केवल एक ट्रेंड नहीं बल्कि जरूरत बनते जा रहे हैं। हाल के आंकड़े भी यही कहानी बताते हैं। मई के पहले आधे हिस्से में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में 13.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि कुल टू-व्हीलर बिक्री में 5.5% की गिरावट रही। इसका मतलब साफ है कि लोग अब पेट्रोल स्कूटर की जगह इलेक्ट्रिक स्कूटर को प्राथमिकता देने लगे हैं। एथर (Ather Energy) के चीफ बिजनेस ऑफिसर रवनीत सिंह फोकेला ने कहा कि पहले हर घर में पेट्रोल वाहन जरूरी माना जाता था, लेकिन अब हर परिवार कम से कम एक EV रखना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि EV अब घर की दूसरी गाड़ी के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ऑफिस जाने, बच्चों को स्कूल छोड़ने या रोजमर्रा के छोटे कामों के लिए लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कम रनिंग कॉस्ट है। जहां पेट्रोल स्कूटर चलाने में प्रति किलोमीटर कई रुपये खर्च होते हैं, वहीं EV स्कूटर की लागत करीब 30 से 50 पैसे प्रति किलोमीटर तक आ जाती है। रात में घर पर चार्जिंग कर लेना और पेट्रोल पंप की लाइन से बचना लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। अगर सरकार सब्सिडी और बढ़ाती है, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमतों में और कमी आ सकती है। इससे ओला (Ola Electric), एथर (Ather Energy), TVS iQube, बजाज चेतक (Bajaj Chetak) जैसे ब्रांड्स को बड़ा फायदा मिल सकता है। साथ ही चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी टेक्नोलॉजी में भी तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। भारत की EV क्रांति अब अगले बड़े चरण में प्रवेश करती दिख रही है, जहां सरकार, कंपनियां और ग्राहक तीनों मिलकर क्लीन मोबिलिटी को नई रफ्तार देने की तैयारी में हैं।

Heatwave से परेशान लोगों को राहत, IMD ने बताया कब और कहां होगी बारिश

नई दिल्ली इस समय पूरा उत्तर और मध्य भारत भीषण लू और टेम्परेचर का टॉर्चर झेल रहा है और फिलहाल इससे राहत मिलने के आसार दिखाई नदीं दे रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक, उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अगले 7 दिनों तक लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि, IMD ने इसी बीच मॉनसून पर बड़ी खुशखबरी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो-तीन दिन में मॉनसून भारत में यानी केरल तट पर दस्तक दे सकता है। इसके लिए अनुकूल मौसमी स्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन में कहा है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व तथा पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान, असम, मेघालय, लक्षद्वीप, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा उत्तर आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। दिल्ली में पिछले 14 सालों सबसे गर्म रात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार (25 मई) को न्यूनतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 5.7 डिग्री अधिक है और लगभग 14 वर्षों में मई महीने की सबसे गर्म रात दर्ज की गई। IMD के अनुसार, इस महीने में न्यूनतम तापमान मई के महीने में इससे पूर्व आखिरी बार 26 मई, 2012 को न्यूनतम तापमान इससे अधिक 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। IMD के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मई महीने की शुरुआत में भी इसी तरह की स्थिति देखी गई थी, जब इस साल 21 मई को न्यूनतम तापमान 31.9 डिग्री सेल्सियस था। सोमवार को दिल्ली में आंधी-बरिश आईएमडी के अनुसार, पालम में न्यूनतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक है, लोदी रोड में न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। वहीं, रिज में यह 30.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 4.4 डिग्री अधिक है और आयानगर में यह 32 डिग्री सेल्सियस बना रहा जो सामान्य से 5.3 डिग्री अधिक है। IMD के एक अधिकारी ने कहा, ''सफदरजंग, लोदी रोड और आयानगर में गर्म रात की स्थिति दर्ज की गई है।'' IMD ने 25 मई को शाम के समय बहुत हल्की बारिश या धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई है, जिससे मामूली राहत मिल सकती है। IMD का येलो अलर्ट आईएमडी के अनुसार, गर्म रात तब घोषित की जाती है जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहता है और न्यूनतम तापमान में सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होती है। आईएमडी ने सोमवार को लू चलने की आशंका जताते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है जिसके कारण अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में भी अगले 3-5 दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी। IMD के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में विदर्भ के ब्रह्मपुरी में सबसे अधिक 47.1°C तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि 29 मई से अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। गर्मी के बीच राहत की खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आगे बढ़ रहा है। 24 मई तक मॉनसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E से लेकर 17°N/95°E तक पहुँच चुकी है। अगले 2-3 दिनों में इसके दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बनी हुई हैं। भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट एक तरफ जहाँ उत्तर भारत तप रहा है, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। पिछले 24 घंटों में असम और मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा (21 सेमी या अधिक) दर्ज की गई है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक में भी भारी से बहुत भारी बारिश हुई है। IMD ने केरल, माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के लिए भी अगले 4-5 दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने कहा है कि एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू और आसपास के क्षेत्रों पर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बना हुआ है।इसकी वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया है। पंजाब-हरियाणा से लेकर पश्चिमी यूपी तक बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, इससे कुछ राहत मिल सकती है। IMD के मुताबिक, 25 से 27 मई के दौरान उप-दहमालयी पश्चिम बंगाल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा 25 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी वर्षा होने की भी संभावना है। इसके अलावा 28 से 30 मई के बीच, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गरज-बिजली के साथ मध्यम स्तर की बारिश होने का अनुमान है।

कांगो-युगांडा में इबोला का कहर, भारत सतर्क; मेडिकल सहायता भी भेजी गई

नई दिल्ली वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला फैलने को लेकर अलर्ट जारी किया है. इससे पहले 17 मई को WHO ने बढ़ते इन्फेक्शन और मौतों की संख्या को देखते हुए इसे इंटरनेशनल लेवल की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था. यह फैसला इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन 2005 के तहत लिया गया था।  संदिग्ध मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि आपको बता दें, इबोला एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. कांगो के अधिकारियों ने कहा है कि देश के पूर्वी हिस्से में इबोला ('बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन) के संदिग्ध मामलों की संख्या अब 900 से ज्यादा हो गई है. कांगो के कम्युनिकेशन मंत्रालय ने रविवार को एक पोस्ट में कहा कि 904 संदिग्ध मामले और 119 संदिग्ध मौतें हुई हैं. अधिकारियों ने पहले 700 से ज्यादा संदिग्ध इबोला मामलों और 170 से ज्यादा संदिग्ध मौतों की घोषणा की थी, जिनमें से ज्यादातर इतुरी प्रांत में थीं, जहां यह बीमारी फैली हुई है, जहां यह बीमारी एंडेमिक है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि इस बीमारी के फैलने से अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के लिए बहुत ज्यादा खतरा है, लेकिन दुनिया भर में बीमारी फैलने का खतरा कम है. देश में हेल्थ अथॉरिटीज को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे इस बीमारी को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।  भारत ने भेजी चिकित्सा सहायता इस बीच, भारत ने बड़ा दिल दिखाते हुए इबोला से प्रभावित देशों DRC और युगांडा को मदद दी है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप के बीच, भारत ने दुनिया भर में एकजुटता दिखाते हुए मानवीय और मेडिकल सहायता दी है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कन्फर्म किया है कि भारत ने 'अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (अफ्रीका CDC) को तुरंत मेडिकल सप्लाई और सेफ्टी किट की पहली खेप भेज दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, इस कंसाइनमेंट में मेडिकल सप्लाई, सेफ्टी किट और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा के लिए दूसरे जरूरी इक्विपमेंट शामिल हैं।  भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी भारत सरकार द्वारा मदद भेजने के साथ ही, सरकार ने अपने नागरिकों के लिए DRC, युगांडा और साउथ सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर इबोला से प्रभावित इलाकों से आने वाले यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।  देश के सभी राज्यों में हाई अलर्ट भारत सरकार की इस एडवाइजरी के बाद, देशभर के सभी राज्यों की सरकारें भी अलर्ट मोड में आ गई हैं. पूरे देश में एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया गया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के कांगो और युगांडा में इबोला फैलने को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने के बाद, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी और सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है. राहत की बात यह है कि अब तक भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है. हालांकि, सुरक्षा और सावधानी के तौर पर, सभी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (खासकर दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट) समेत और बंदरगाहों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।  कांगो, युगांडा और साउथ सूडान (जिन्हें हाई-रिस्क वाले देश माना गया है) से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और डिटेल्ड मेडिकल जांच जरूरी कर दी गई है. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसी कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने हेल्थ डिपार्टमेंट को तैयार कर दिया है, इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध मामले को संभालने के लिए खास आइसोलेशन वार्ड और अस्पताल (जैसे जयपुर में RUHS अस्पताल) तैयार रखे गए हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने राज्यों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी किए हैं, जिसमें यात्रियों को सलाह दी गई है कि अगर उनमें इबोला के कोई भी लक्षण दिखें, तो वे 21 दिनों तक खुद पर नजर रखें।  इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन बेहद खतरनाक इबोला का 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन वास्तव में एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है. इस स्ट्रेन से होने वाली मौतों की दर (केस फैटालिटी रेट) लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक होती है, जो इसे अत्यंत घातक बनाती है. जहां इबोला के कुछ अन्य स्ट्रेन (जैसे जायर स्ट्रेन) के लिए टीके और इलाज मौजूद हैं, वहीं बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई भी लाइसेंस्ड टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है. यह वायरस किसी इन्फेक्टेड या मरे हुए व्यक्ति के खून, लार, पसीने, उल्टी या शरीर के दूसरे लिक्विड के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. इसके लक्षण 21 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू हो सकते हैं. इन लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं, जिसके बाद गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के कई अंगों का काम करना बंद कर देना (मल्टी-ऑर्गन फेलियर) जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला है, जिसके चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को इसे 'इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी। 

सुप्रीम कोर्ट की NTA को फटकार, NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले हुए नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) से कोई सबक नहीं सीखा है. साथ ही, मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम कराने के लिए टेस्टिंग एजेंसी की जगह एक मज़बूत और स्वायत्त निकाय (ऑटोनॉमस बॉडी) बनाने की अर्जी पर केंद्र, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और सीबीआई से जवाब मांगा है।  यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच के सामने आया. बेंच ने निर्देश दिया कि अर्जी की कॉपी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अलावा दूसरी पार्टियों को भी दी जाए और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, जो नीट एग्जाम कराने के लिए जिम्मेदार है, से कहा कि वह 2024 में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के पालन पर गुरुवार तक एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे।  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आगे कहा कि, यह दुख की बात है कि, उन्होंने (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने अपना सबक नहीं सीखा है. यह मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट के समझ आ चुका है. एक कमेटी, एक मॉनिटरिंग कमेटी थी जिसने कुछ सिफारिशें की थीं और उन्हें मान लिया गया था. हम चाहते हैं कि एनटीए कमेटी द्वारा सुझाई गई सिफारिशों के पालन के लिए उठाए गए कदमों पर एक हलफनामा दाखिल करे।  बेंच ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की वकील तन्वी दुबे के जरिए फाइल की गई याचिका पर नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सभी एक जैसे मामलों को एक साथ जोड़ रहा है. मेडिकल बॉडी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह नीट यूजी कराने के लिए एनटीए को पुनर्गठन करने या उसकी जगह एक मजबूत और स्वायत्त प्रणाली लाने का निर्देश दे. कोर्ट ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से 22.7 लाख से ज़्यादा छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला हो रहा है।  मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए एनटीए ने 3 मई को जो अंडरग्रेजुएट स्तर का नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) लिया था, उसे 12 मई को पेपर लीक के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था, जिसकी अब सीबीआई जांच कर रही है।