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बंगाल में डबल इंजन सरकार की रफ्तार: सीएम की पहली कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले, बॉर्डर एरियाज की जमीन BSF को 45 दिनों में ट्रांसफर

कोलकाता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार अस्तित्व में आ गई है. शुभेंदु सरकार सत्ता में आते ही फॉर्म में आ गई. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 5 मंत्रियों के साथ अपनी पहली कैबिनेट बैठक की, जिसमें बॉर्डर पर फेंसिंग करने और बीजेपी के मारे गए 321 कार्यकर्ताओं को सम्मान देने समेत 6 अहम फैसले लिए गए। पहली कैबिनेट बैठक के बाद सीएम शुभेंदु ने बताया कि उनकी पश्चिम बंगाल सरकार ने बांग्लादेश के साथ सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों में नौकरी के आवेदकों की आयु सीमा पांच साल बढ़ाने की मंजूरी दी गई. यह वादा गृह मंत्री अमित शाह ने किया था।  पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पहली कैबिनेट बैठक की. इसमें पांच बड़े फैसले किए गए. मीटिंग में शुभेंदु के साथ सभी पांच कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का रोडमैप इस सरकार की प्राथमिकता होगी।  पहली कैबिनेट बैठक में राज्य के मतदाताओं, चुनाव आयोग और इस विशाल चुनाव प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया गया।  शुभेंदु सरकार के पहले पांच बड़े ऐलान 1. आयुष्मान भारत योजना को लागू किया जाएगा. राज्य और केंद्र सरकार मिलकर राज्य में इसे लागू करने के लिए काम करेंगे।  2. नियमों के मुताबिक, आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।  3. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार (ममता सरकार) ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।  4. बॉर्डर एरियाज में जमीन ट्रांसफर का काम आज से शुरू होगा. 45 दिनों के अंदर जमीन BSF को ट्रांसफर की जाएगी।   5. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बता दें कि बीजेपी का ऐसा दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।  नौकरी की सुरक्षा में विस्तार: कैबिनेट की बैठक में छठा अहम फैसला राज्य सरकार की सभी नौकरियों के लिए 5 साल का विस्तार दिया गया है. इस तरह से ये कदम पश्चिम बंगाल में शासन, सुरक्षा और कल्याण की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देते हैं. पश्चिम बंगाल में साल 2015 से कोई भर्ती नहीं हुई है, इसी वजह से सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की ऊपरी आयु सीमा में 5 साल की वृद्धि की गई है आयुष्मान भारत लागू बीजेपी ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्‍ता में आने पर राज्‍य में आयुष्‍मान भारत स्‍कीम को लागू किया जाएगा. अब ये वादा पूरा होने जा रहा है. शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य ने आधिकारिक तौर पर केंद्र की स्वास्थ्य योजना 'आयुष्मान भारत' से जुड़ने का फैसला किया है. CM ने कहा कि अब PM की सभी योजनाएं बंगाल में लागू की जाएंगी।  नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और BNS लागू सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पिछली CM ममता बनर्जी द्वारा रोकी गई नौकरशाहों की केंद्रीय ट्रेनिंग और तैनाती को मंजूरी दे दी गई है. साथ ही, बंगाल में अब तक लागू न हुई भारतीय न्याय संहिता यानी BNS आज से प्रभावी हो गई है. अब सभी नए केस नए कानून के तहत दर्ज होंगे।  2015 से बंद भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी मुख्‍यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सरकार ने माना कि 2015 से राज्य में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई. CM ने वादे के मुताबिक नई भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने का ऐलान किया.कैबिनेट बैठक के बाद CM सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ये फैसले "नए बंगाल" की दिशा तय करेंगे. विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।  आयुष्मान भारत योजना से गरीब और कमजोर परिवारों को इलाज मिलता है. इसमें हर साल पांच लाख रुपये तक सालाना कवरेज मिलता है. ये इलाज कैशलेस होता है. कैबिनेट बैठक के बारे में और जानकारी देते हुए सीएम शुभेंदु ने कहा, 'बंगाल के सीमावर्ती जिलों में लगातार बदलती जनसंख्या को देखते हुए, हमारे मंत्रिमंडल ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को आवश्यक भूमि सौंपने की प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है. मुख्य सचिव और राज्य के भूमि एवं भू-राजस्व विभाग के सचिव को अगले 45 दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है।  अधिकारी ने आगे बताया कि टीएमसी सरकार ने संविधान और जनता के साथ विश्वासघात किया और जानबूझकर बंगाल में जनगणना प्रक्रिया को रोके रखा ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण को रोका जा सके. लेकिन अब मंत्रिमंडल ने राज्य में परिपत्र को तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दे दी है।  मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) मतलब नया आपराधिक कानून, जो पूर्ववर्ती आईपीसी और सीआरपीसी की जगह ले रहा है, राज्य में टीएमसी सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया था और कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में नए कानून को लागू करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।  बता दें कि बंगाल (293 सीट) में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है. इस चुनाव में बीजेपी को 207 सीट मिली हैं. वहीं सत्ताधारी ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई।  चुनावी जीत के बाद शुभेंदु को सीएम बनाया गया. उन्होंने ही भवानीपुर विधानसभा से ममता बनर्जी को हराया है. भवानीपुर में शुभेंदु को 73,917 वोट मिले. वहीं ममता 58,812 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. उनको 15105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। 

सोमनाथ अमृत महोत्सव: पीएम मोदी ने हिस्सा लिया और जताई खुशी

सोमनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में भाग लिया। उन्होंने कहा कि यहां पर आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जय सोमनाथ! यहां आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। हम इस पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं।" उन्होंने आगे लिखा कि पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर पावनधाम सोमनाथ आकर दिव्य अनुभूति हुई है। इस अवसर पर मंदिर मार्ग पर भगवान सोमनाथ के भक्तों के जोश और प्रचंड उत्साह को देखकर मन अभिभूत और भावविभोर है! मैं आज यहां उस क्षण को जी रहा हूं, जिसका अनुभव भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पुनर्निर्मित मंदिर के लोकार्पण के अवसर पर किया होगा। सोमनाथ अमृत महोत्सव का भक्तिमय वातावरण हर तरफ अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को गुजरात पहुंचे, जहां सोमनाथ में एक रोडशो किया। यह रोडशो सोमनाथ अमृत महोत्सव से पहले आयोजित किया गया था। गुजरात के गिर सोमनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। आज सुबह गुजरात के प्रभास पाटन में श्री सोमनाथ महादेव ज्योतिर्लिंग मंदिर में पूजा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष महा पूजा में शामिल हुए, इसके बाद कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण समारोह संपन्न हुए, जो मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण की रीतियों के प्रतीक हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 11 तीर्थ स्थलों से लाए गए जल को मंदिर के शिखर पर अर्पित किया गया। 90 मीटर ऊंची क्रेन की सहायता से, मंदिर के शीर्ष पर कलश स्थापित किया गया। पीएम ने लिखा कि सोमनाथ में, हर कोने में भक्ति का अनुभव किया जा सकता है। पुनर्निर्मित मंदिर के भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अनगिनत लोग एक साथ एकत्रित हुए हैं। वह दिन वास्तव में भारत की सभ्यतागत यात्रा में एक मील का पत्थर था। वहीं, भारतीय वायु सेना की 'सूर्य किरण' एरोबेटिक्स टीम ने बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर में आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के दौरान हवाई करतब दिखाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में एक 'विशेष महापूजा' में भी हिस्सा लिया। बता दें कि ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आयोजित समारोहों में मंदिर के जीर्णोद्धार और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1951 में इसके उद्घाटन की स्मृति को याद किया गया। धार्मिक समारोहों से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने जामनगर से सोमनाथ पहुंचने के बाद वहां रोड शो किया। वह रविवार रात गुजरात पहुंचने के बाद जामनगर में रुके थे। रोड शो में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे। इस दौरान प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए मंदिर के पास स्थित वीर हमीरजी सर्कल तक हेलीपैड से लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हजारों लोग जमा हो गए। जब उनका काफिला इलाके से गुजरा तो समर्थकों ने झंडे लहराए और नारे लगाए, जबकि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के कलाकारों ने मार्ग में निर्धारित स्थानों पर पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए।   अस्तित्व की गवाही और सनातन के गौरव की गौरवगाथा  यह नाम सुनते ही हर भारतीय के मन में गर्व और श्रद्धा का भाव जाग उठता है. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की अटूट आस्था, भारतीय सभ्यता की जीवटता, भारत भूमि के आत्मसम्मान और राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रतीक है. गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर केवल पत्थरों से बना एक देवालय नहीं है, बल्कि सनातन धर्म के कभी न हारने वाले संकल्प का सजीव तथ्य है. ‘सोमनाथ हमारा स्वाभिमान’… यह उस सत्य की घोषणा है जिसने सदियों के आक्रमणों, लूट और विध्वंस के बाद भी अपनी चमक फीकी नहीं पड़ने दी. एक हजार साल पहले 1026 में महमूद गजनवी के हमले से लेकर आज तक सोमनाथ हमें बताता है कि आस्था को तोड़ा जा सकता है, लेकिन उसके विश्वास को मिटाया नहीं जा सकता।  सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में अरब सागर के किनारे स्थित है. यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है. पुराणों के अनुसार चंद्रदेव ने सबसे पहले सोने का मंदिर बनवाया था. बाद में रावण ने चांदी का, भगवान कृष्ण ने चंदन का और कई राजाओं ने पत्थर का मंदिर बनाया. यह स्थान केवल पूजा और अराधना का केंद्र नहीं थी, यहां व्यापार, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम होता था. लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते थे. मंदिर की भव्यता और धन-दौलत की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी।  विनाश का काला अध्याय और सनातन का धैर्य सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्षों की लंबी गाथा है. विदेशी आक्रांताओं ने इस मंदिर की अकूत संपदा और हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंचाने के लिए इसे बार-बार निशाना बनाया. महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक, हर बार मंदिर को तोड़ा गया, लूटा गया और अपवित्र करने का प्रयास किया गया. लेकिन हर विनाश के बाद, सनातनियों का संकल्प और भी मजबूत होकर उभरा।  1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया. उसने मंदिर लूटा, तोड़ा और लाखों श्रद्धालुओं की हत्या की. लेकिन यह पहला हमला नहीं था और आखिरी भी नहीं. अलाउद्दीन खिलजी, औरंगजेब समेत कई आक्रमणकारियों ने मंदिर को निशाना बनाया. इतिहासकार बताते हैं कि मंदिर को 16-17 बार तोड़ा गया. हर बार तोड़ने के बाद भारतीयों ने आत्मबल और आस्था के विश्वास से अपने स्वाभिमान को फिर से खड़ा किया. आक्रांताओं ने मंदिर की दीवारें तो ढहाईं, लेकिन वे लोगों के हृदय में बसे महादेव को नहीं निकाल सके. दरअसल, यह सिर्फ ईंट-पत्थर का खेल नहीं था, यह सनातन की अटूट इच्छाशक्ति का प्रमाण था।  लौह पुरुष का संकल्प और आधुनिक मंदिर का उदय स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ का आधुनिक पुनरुद्धार आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे बड़ी सांस्कृतिक घटना के रूप में वर्णित है. जूनागढ़ की आजादी के बाद, जब लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने प्रभास पाटन की धरती पर पैर रखा तो उन्होंने समुद्र का जल हाथ में लेकर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया. उन्होंने निर्णय किया कि सोमनाथ मंदिर को फिर से भव्य रूप में खड़ा किया जाएगा. उनके इस … Read more

इंडेन, HPCL और भारत गैस का एलपीजी डिलीवरी पर ताजा अपडेट, जानें क्या बदला

नई दिल्ली एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी अब 100 पर्सेंट DAC कोड के जरिए होने लगी है। इससे एक भी सिलेंडर का दाएं-बाएं होना अब मुश्किल है। LPG सिलेंडर के डिस्ट्रीब्यूशन और सही उपभोक्ता तक उसकी पहुंच के लिए यह सिस्टम बेहद सुरक्षित है। हालांकि, फेक DAC कोड के जरिए लोगों को लूटने के लिए साइबर फ्रॉड भी सक्रिय हो गए हैं। LPG सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनियों ने DAC को लेकर अपडेट जारी की हैं। आइए देखें किसने क्या कहा और आगे खबर में यह भी जानेंगे कि असली और फेक DAC की पहचान कैसे करें? असली और फेक DAC कोड की कैसे करें पहचान LPG डिलीवरी मैसेज की पहचान को लेकर एचपीसीएल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि स्कैमर्स LPG डिलीवरी के नाम पर फर्जी मैसेज भेज सकते हैं, लेकिन असली HP Gas मैसेज की पहचान जानकर आप सुरक्षित रह सकते हैं। Delivery Authentication Code साझा करने से पहले हमेशा जांच करें। इस पोस्ट में कंपनी ने आगे लिखा है, "मैसेज आधिकारिक sender name “VM-HPGASc-S” से आया हो। उसमें 4 अंकों का OTP हो और OTP केवल सिलेंडर डिलीवरी के समय ही इस्तेमाल किया जाए। ध्यान रखें, HP Gas के कर्मचारी कभी भी फोन कॉल, WhatsApp या किसी संदिग्ध लिंक के जरिए OTP नहीं मांगते। अगर मैसेज जल्दबाजी में कार्रवाई करने को कहे, अजीब लगे या अलग फॉर्मेट में हो, तो उस पर भरोसा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। HP Gas के साथ साइबर फ्रॉड से बचें।" इसी तरह की अपील भारत गैस ने भी की है। इंडेन के उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह बताते हैं कि इंडेन के मैसेज को उदाहरण के साथ बताते हैं कि सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने सिलेंडर बुक कराया था या नहीं। अगर बिना बुक कराए कोई डिलीवरी मैसेज है तो उसपर ध्यान न दें। अगर बुक कराया तो यह देखें कि मैसेज किसी आधिकारिक सेंडर ID (जैसे VK-INDANE, VM-INDANE आदि) से आया हैं कि नहीं। इसके बाद यह देखें कि मैसेज में बुकिंग या इनवायस नंबर दिया गया है या नहीं और 6 अंकों का DAC Code है और इसे केवल डिलीवरी बॉय को शेयर करने की बात कही गई है या नहीं। अंत में Indane का नाम है या नहीं। DAC/OTP केवल तब शेयर करें जब डिलीवरी बॉय आपके घर सिलेंडर लेकर पहुंच जाए। उससे पहले कभी साझा न करें। एलपीजी सिलेंडर के क्या हैं आज के रेट इंडेन के मुताबिक बेंगलुरु में घरेलू ₹915.50 और कमर्शियल ₹3152 में बिक रहा है। हैदराबाद में घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट ₹965 और कमर्शियल ₹3315 है। इंदौर में घरेलू सिलेंडर 941 रुपये का है और कमर्शियल 3176.5 रुपये का। रायपुर में घरेलू सिलेंडर 984.5 रुपये और कमर्शियल 3294.5 रुपये में है। पटना में आज घरेलू सिलेंडर ₹1002.50 और कमर्शियल ₹3346.5 का है। जयपुर में एलपीजी घरेलू सिलेंडर ₹916.5 और 19 किलो वाला कमर्शियल ₹3099 में बिक रहा है। देहरादून में घरेलू सिलेंडर ₹932 और कमर्शियल ₹3129 का है। अंडमान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट ₹989 हैं तो कमर्शियल के ₹3490 है।

ब्रिक्स मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा, अमेरिका संग कारोबार पर फोकस, डॉलर नीति पर नजर

 नई दिल्ली  अगले हफ्ते (14-15 मई) भारत की अध्यक्षता में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की तैयारियों में चीन और रूस की ओर से गैर-डॉलरीकरण को और तेजी देने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन भारत इस प्रस्ताव को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने को लेकर कोई स्पष्ट या मजबूत टिप्पणी शामिल किए जाने की संभावना नहीं है। भारत सरकार का मानना है कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत अभी जारी है। इसलिए वह ऐसे किसी मुद्दे को हवा नहीं देना चाहती जिसे वाशिंगटन संवेदनशील मानता हो। अमेरिका के साथ भारत का सालाना कारोबार करीब 200 अरब डॉलर का है, जबकि 50 लाख से अधिक भारतीय वहां रहते हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी अत्यंत मजबूत है। भारत की अगुवाई में हो रही इस बैठक में वह स्पष्ट संदेश नहीं देना चाहता कि ब्रिक्स मंच का इस्तेमाल अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। चीन और रूस लगातार ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच अमेरिकी डॉलर की जगह राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। लेकिन भारत ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर से अलग होने का कोई प्लान नहीं है और ब्रिक्स समूह भी ऐसा नहीं कर रहा। फिर भी, ब्रिक्स के संयुक्त घोषणा-पत्रों में स्थानीय मुद्रा कारोबार को प्रोत्साहन देने का जिक्र नियमित रूप से होता रहा है। जुलाई 2025 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद जारी रियो डी जनेरियो घोषणा-पत्र में इस मुद्दे पर कहा गया था: “हम ब्रिक्स इंटरबैंक कोऑपरेशन मैकेनिज्म (आईसीएम) के प्रयासों का स्वागत करते हैं, जो परियोजनाओं और कार्यक्रमों के लिए नवाचारी वित्तीय प्रथाओं और तरीकों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण के स्वीकार्य तंत्र ढूंढना शामिल है।'' वर्ष 2024 की शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की एक समिति भी बनाई गई थी जिसने स्थानीय मुद्रा में कारोबार व भुगतान उपकरणों पर साझा सहयोग की रिपोर्ट तैयार की है। हालांकि इस रिपोर्ट के आधार पर अभी तक कोई अहम फैसला नहीं किया गया है। इस बार भी बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्रा कारोबार का सामान्य जिक्र हो सकता है, लेकिन कोई नया ठोस प्रस्ताव या समयबद्ध रोडमैप शामिल किए जाने की उम्मीद नहीं है। वैसे भारत द्विपक्षीय स्तर पर ब्रिक्स और गैर-ब्रिक्स दोनों देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की नीति पर लगातार काम कर रहा है। रूस के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा है कि भारत के साथ उसके कुल कारोबार का 95 फीसदी हिस्सा अब स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में हो रहा है। भारत ब्रिक्स के कुछ अन्य देशों जैसे यूएई व चीन के साथ भी स्थानीय मुद्रा में कारोबार करता है। यूएई के साथ तो भारत का द्विपक्षीय से समझौता भी है। उधर, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई वरिष्ठ अमेरिकी नेताओं ने ब्रिक्स पर अमेरिकी डॉलर को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। जुलाई 2025 में ब्राजील शिखर सम्मेलन के घोषणा-पत्र के बाद ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में इसे लागू नहीं किया गया।  

हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसा, चंबा में खाई में गिरी कार, 6 की मौत

 चंबा हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया. जिसमें छह पर्यटकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसा चंबा जिले के ककीरा क्षेत्र में उस वक्त हुआ, जब गुजरात से आए पर्यटकों का वाहन अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा. हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए मौके पर पहुंचे।  जानकारी के मुताबिक पर्यटक हिमाचल प्रदेश घूमने आए थे और ककीरा क्षेत्र से गुजर रहे थे. इसी दौरान पहाड़ी रास्ते पर एक मोड़ के पास चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा. देखते ही देखते गाड़ी सड़क से नीचे सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरी. हादसा इतना भीषण था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए।  कुछ घायलों की हालत है गंभीर घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव टीम मौके पर पहुंच गई. स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. काफी मशक्कत के बाद घायलों और मृतकों को खाई से बाहर निकाला गया. घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है. डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है. सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी है. प्राथमिक जांच में माना जा रहा है कि पहाड़ी रास्ते पर तेज रफ्तार और मोड़ पर संतुलन बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ. हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है. दुर्घटना के बाद कुछ समय के लिए सड़क मार्ग भी बाधित रहा।  हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है. वहीं, पुलिस ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सावधानी बरतने और निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने की अपील की है। 

होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का असर: ईरानी तेल टैंकर फंसे, स्टोरेज भरने से समुद्र में रिसाव की आशंका

नई दिल्ली ईरान इस समय क्रूड ऑयल को स्टोर करने को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास की गई नाकेबंदी के चलते ईरानी तेल टैंकरों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में ईरान का कच्चा तेल उसके मुख्य निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर तेजी से जमा हो रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस इलाके के समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल फैला हुआ नजर आया है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि स्टोरेज क्षमता खत्म होने के बाद तेल समुद्र में छोड़ा जा रहा है या फिर पुराने ढांचे से रिसाव हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान प्रतिदिन 30 लाख बैरल से अधिक कच्चे तेल का उत्पादन करता है और इसका बड़ा हिस्सा खार्ग द्वीप से निर्यात होता है। फिलहाल अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण टैंकर फारस की खाड़ी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ईरान ने पुराने जहाजों और फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकरों का उपयोग शुरू किया, फिर भी स्टोरेज क्षमता तेजी से भरती चली गई। अगर तेल उत्पादन रोका जाता है तो कई तेल कुओं को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसलिए तेहरान के सामने उत्पादन जारी रखने और अतिरिक्त तेल को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। 45 वर्ग किमी तक फैला तेल का धब्बा सैटेलाइट इमेजरी में खार्ग द्वीप के आसपास समुद्र में लगभग 20 से 45 वर्ग किलोमीटर तक फैला तेल का धब्बा देखा गया है। कुछ रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया कि हजारों बैरल तेल समुद्र में रिस चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिसाव पुरानी पाइपलाइन, टैंकरों पर बढ़ते दबाव या युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण हो सकता है। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो फारस की खाड़ी के समुद्री जीवन, तटीय क्षेत्रों और मछली उद्योग पर गंभीर असर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। ईरान-अमेरिका तनाव और समुद्री टकराव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी भारी अस्थिरता देखी जा रही है। कई देशों को डर है कि अगर यह संकट और गहराया तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। भारत समेत एशियाई देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि वे पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं।

मुख्यमंत्री बनते ही एक्शन, विजय ने एक विधानसभा सीट छोड़ी

चेन्नई तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय ने रविवार को तिरुचिरापल्ली ईस्ट विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में दो सीटों, पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट से जीत दर्ज करने वाले विजय ने पेरम्बूर सीट को अपने पास रखने का फैसला किया है। रविवार को ही विजय ने चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद उन्होंने ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज स्थित सचिवालय में पदभार संभाला। वास्तविक धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय का दौर शुरू होगा- विजय शपथ ग्रहण समारोह के बाद बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों को संबोधित करते हुए विजय ने कहा कि उनकी सरकार तमिलनाडु में वास्तविक, धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय के नए युग की शुरुआत करेगी। उन्होंने खुद को आम जनता का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि वह किसी राजघराने से नहीं आते, बल्कि एक साधारण परिवार से निकले व्यक्ति हैं। राजनीति में आने का उनका उद्देश्य जनता का ऋण चुकाना- विजय विजय ने कहा, "मैं आम लोगों की जिंदगी और उनकी भावनाओं को अच्छी तरह समझता हूं। मेरा जन्म एक साधारण असिस्टेंट डायरेक्टर के घर हुआ। मैं किसी शाही परिवार से नहीं आता। मैं खुद को आपका बेटा, बेटी, बड़ा भाई या छोटा भाई मानता हूं। आपने भी मुझे उसी तरह अपनाया और सिनेमा में इतना बड़ा स्थान दिया। उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में आने का उनका उद्देश्य जनता का ऋण चुकाना है।" उन्होंने कहा कि जब मैंने राजनीति में आने का फैसला किया, तब आपने मुझे भरपूर प्यार और समर्थन दिया। इस सफर में मुझे कई कठिनाइयों और अपमानों का सामना करना पड़ा, लेकिन मेरे समर्थकों ने भी मेरे लिए सब कुछ सहा। आज जब मैं ‘आई, जोसेफ विजय…’ कहता हूं, तो यह आपके भरोसे और समर्थन की वजह से संभव हुआ है। झूठे वादे नहीं करूंगा- विजय मुख्यमंत्री विजय ने अपने भाषण में कहा कि वह लोगों से अवास्तविक या झूठे वादे नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं कोई दिव्य दूत या पैगंबर नहीं हूं। मैं एक सामान्य इंसान हूं जो सामान्य जीवन जीता है। मैं केवल वही वादा करूंगा जो संभव है। लेकिन जब करोड़ों लोग मेरे साथ खड़े हों, तो मुझे विश्वास है कि हम मिलकर किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। 2024 में बनी पार्टी, 2026 में सत्ता तक पहुंची तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की औपचारिक शुरुआत 2024 में हुई थी। हालांकि विजय लंबे समय से अपनी फिल्मों और सामाजिक गतिविधियों के जरिए एक सामाजिक रूप से जागरूक सार्वजनिक व्यक्तित्व के तौर पर देखे जाते रहे हैं। उनकी फिल्मों में भ्रष्टाचार, नशे की समस्या और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया, जिसके कारण 2009 से ही उनके राजनीति में आने की अटकलें लगाई जाती रही थीं। राजनीति में औपचारिक प्रवेश से पहले भी विजय कई सामाजिक अभियानों और जनकल्याण गतिविधियों से जुड़े रहे। दो सीटों से लड़े, दोनों पर मिली जीत 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। उन्होंने दोनों सीटों पर जीत हासिल की। अब संवैधानिक प्रावधानों के तहत एक सीट छोड़ते हुए उन्होंने त्रिची ईस्ट सीट से इस्तीफा दे दिया है, जबकि पेरम्बूर सीट को बरकरार रखा है।  

“लीडर पर हमला परमाणु युद्ध”, किम की मौत पर ऑटोमैटिक न्यूक्लियर स्ट्राइक का आदेश

नई दिल्ली उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में बड़ा बदलाव किया है. अब अगर किम जोंग उन की हत्या हो जाती है या विदेशी हमले में देश की कमांड व्यवस्था नष्ट हो जाती है, तो सेना को ऑटोमैटिक परमाणु हथियारों से जवाबी हमला करना होगा. इसके लिए किसी अलग आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी. दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने यह जानकारी दी है. यह बदलाव ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद किया गया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके कई सलाहकार मारे गए थे. नया संवैधानिक प्रावधान क्या कहता है? उत्तर कोरिया की 15वीं सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक 22 मार्च को प्योंगयांग में हुई थी. इसी में यह संशोधन पास किया गया.नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (NIS) ने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि अब न्यूक्लियर फोर्सेस पर नियंत्रण अगर दुश्मन के हमले से खतरे में पड़ जाए तो ऑटोमैटिक और तुरंत परमाणु हमला किया जाएगा. नए नियम के मुताबिक, किम जोंग उन के कमांड सिस्टम को खतरा होने पर कोई इंतजार नहीं होगा. परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अपने आप हो जाएगा. इससे पहले यह नीति मौखिक रूप से हो सकती थी, लेकिन अब इसे संविधान में लिखित रूप से मजबूत कर दिया गया है. ईरान की घटना क्यों बनी वजह? ईरान पर हालिया हमलों ने उत्तर कोरिया को बड़ा सबक दिया. अमेरिका और इजरायल ने जिस तेजी से ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाया, उसे देखकर किम जोंग उन और उनकी सरकार डर गई. प्रोफेसर आंद्रेई लैंकोव ने कहा कि ईरान घटना उत्तर कोरिया के लिए वेक-अप कॉल साबित हुई. उन्होंने देख लिया कि नेतृत्व को एक साथ खत्म करने वाले हमले कितने प्रभावी हो सकते हैं. उत्तर कोरिया अब ऐसी स्थिति से बचना चाहता है. अगर किम या उनकी कमांड टीम मारी जाती है तो देश का परमाणु जवाब अपने आप एक्टिव हो जाएगा. किम की हत्या करना कितना मुश्किल है? किम जोंग उन अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं. वे हमेशा भारी सुरक्षा घेरे में रहते हैं. वे हवाई यात्रा से बचते हैं. ज्यादातर बख्तरबंद ट्रेन से सफर करते हैं. उत्तर कोरिया की सीमाएं पूरी तरह बंद हैं. विदेशी लोग बहुत कम आते हैं. उनकी निगरानी सख्ती से की जाती है. ईरान में इजरायली खुफिया एजेंसियों ने ट्रैफिक कैमरों को हैक करके नेताओं की लोकेशन पता की थी, लेकिन प्योंगयांग में सीसीटीवी और इंटरनेट की व्यवस्था बहुत सीमित है. इसलिए वहां ऐसी जानकारी हासिल करना बेहद कठिन है. फिर भी उत्तर कोरिया सैटेलाइट तकनीक और अन्य खुफिया खतरे से चिंतित है. दक्षिण कोरिया की सीमा पर नया खतरा उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास नई आर्टिलरी तैनात करने की घोषणा की है. किम जोंग उन ने हाल ही में एक हथियार फैक्ट्री का दौरा किया जहां नई 155 मिलीमीटर की सेल्फ-प्रोपेल्ड गन का परीक्षण हुआ. यह तोप लगभग 60 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है. इससे दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल और आसपास के महत्वपूर्ण इलाके इसके दायरे में आ जाएंगे. उत्तर कोरिया का कहना है कि यह नया हथियार उनकी जमीनी सेना को बड़ी ताकत देगा. उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से अब भी युद्ध की स्थिति में हैं. 1950-53 का युद्ध केवल संघर्षविराम पर खत्म हुआ था. शांति संधि नहीं हुई. हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने एकीकरण की पुरानी बातों को अपने संविधान से हटा दिया है. दक्षिण कोरिया को मुख्य दुश्मन बताता है. दक्षिण कोरिया की शांति पहल के बावजूद उत्तर कोरिया अपनी आक्रामक नीति जारी रखे हुए है. परमाणु हथियारों को लेकर नया प्रावधान पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है. दुनिया के लिए क्या मतलब? यह बदलाव दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपने नेता की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को कितनी अहमियत देता है. अगर किम पर हमला होता है तो परमाणु युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ जाती है. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की सेना नेतृत्व के प्रति वफादार है. किसी भी हमले को अस्तित्व का खतरा मानकर जवाबी कार्रवाई करेगी.   यह घटनाक्रम पूर्वी एशिया में सुरक्षा की स्थिति को और जटिल बना रहा है. दक्षिण कोरिया और अमेरिका दोनों इस विकास पर नजर रखे हुए हैं. यह संवैधानिक बदलाव उत्तर कोरिया की 'अगर मैं मरा तो सब कुछ नष्ट' वाली नीति को और मजबूत करता है. दुनिया के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है.

शपथ लेते ही एक्शन में सीएम विजय, सचिवालय पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था पर की बड़ी बैठक

 तमिलनाडु   तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने शपथ लेने के तुरंत बाद राज्य सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अपनी पहली आधिकारिक बैठक की अध्यक्षता की। अपनी पहली बैठक दौरान सीएम विजय ने राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। दरअसल, आज यानी रविवार को टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ लेने के बाद तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने सचिवालय की पहली बैठक की अध्यक्षता की और कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मौजूदा सुरक्षा और प्रशासनिक स्थितियों के बारे में जानकारी दी। यह विजय की सरकार प्रमुख के रूप में पहली आधिकारिक समीक्षा थी। मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का एकमात्र उद्देश्य तमिलनाडु की प्रगति और जन-कल्याण है। पीएम मोदी को दिया धन्यवाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। विजय ने एक पोस्ट में कहा, "मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाओं के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हार्दिक धन्यवाद देता हूं।" अपनी सरकार की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए विजय ने कहा कि उनके प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य तमिलनाडु के लोगों का कल्याण और प्रगति होगा। उन्होंने राज्य के निरंतर विकास के लिए केंद्र सरकार के सक्रिय समर्थन और सहयोग की आशा भी व्यक्त की। 17वीं विधानसभा का पहला सत्र 11 मई से 17वीं तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र सोमवार, 11 मई, 2025 को सुबह 9.30 बजे चेन्नई स्थित सचिवालय के विधानसभा कक्ष में आयोजित करने के लिए बुलाया गया है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस दिन नव निर्वाचित विधायक सत्र के दौरान शपथ ग्रहण करेंगे। विधानसभा सचिवालय ने सभी निर्वाचित सदस्यों को शपथ ग्रहण के समय अपना चुनाव प्रमाण पत्र साथ लाने का निर्देश दिया है। वहीं, तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव मंगलवार, 12 मई को सुबह 9:30 बजे होंगे।

तमिलनाडु में शपथ समारोह पर विवाद, ‘तमिल थाई वाजथु’ की अनदेखी से सियासत गरमाई

चेन्नई  तमिलनाडु में जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री बनते ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। CPI केराज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने रविवार को कहा कि सरकारी समारोहों में प्रोटोकॉल में 'तमिल थाई वाजथु' (तमिलनाडु का राज्य गीत) को सबसे पहला स्थान दिया जाना चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह के बाद जारी एक पत्र में वीरपांडियन ने समारोह के दौरान गीतों के बजाए जाने के क्रम पर आपत्ति जताई। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' से हुई, उसके बाद राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाया गया, जबकि 'तमिल थाई वाजथु' तीसरे नंबर पर बजाया गया। CPI नेता ने कहा कि यह क्रम तमिलनाडु की पुरानी परंपरा का उल्लंघन है, जहां सरकारी समारोहों की शुरुआत पारंपरिक रूप से 'तमिल थाई वाजथु' से होती है और समापन राष्ट्रगान से होता है। वीरपांडियन ने पत्र लिखकर उठाए सवाल वीरपांडियन ने पत्र में लिखा कि राजभवन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' गीती को प्राथमिकता देना और तमिल गीत को तीसरे स्थान पर रखना,स्थापित परंपरा का उल्लंघन है। तमिलनाडु सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार था। टीवीके को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 'तमिल थाई वाजथु' को ही प्राथमिकता दी जाए। 'तमिल थाई वाजथु' सबसे पहले बजाया जाए- वीरपांडियन उन्होंने लिखा कि इस तरह की गलती को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय और प्रोटेम स्पीकर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कल होने वाले विधानसभा सत्र में, जो विधायकों के शपथ ग्रहण के लिए बुलाया गया है, साथ ही सभी सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में 'तमिल थाई वाजथु' सबसे पहले बजाया जाए और राष्ट्रगान अंत में बजाया जाए। वीरपांडियन ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे के ऐतिहासिक और वैचिरिक निहितार्थ हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही यह तय हो गया था कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता, क्योंकि यह गीत एक विशिष्ट देवी को समर्पित था और इसका स्वरूप सांप्रदायिक-धार्मिक था। यह विवाद विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शुरू हुआ, जिसमें लोगों की भारी भीड़ और कई प्रमुख राजनेता भी शामिल हुए थे।