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भाजपा की चार्जशीट से गरमाया बंगाल: ममता सरकार पर गंभीर आरोप

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी की है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह चार्जशीट टीएमसी सरकार के 15 सालों के काले कारनामों का संकलन है। भाजपा ने 40 पन्नों की चार्जशीट 'टीएमसी के 15 साल, पश्चिम बंगाल लहूलुहान' में तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 साल की खामियों को गिनाया है। इसमें घुसपैठ, व्यापक भ्रष्टाचार और संस्थागत पतन, वित्तीय कुप्रबंधन, प्रशासनिक विफलता, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, कृषि संकट, स्वास्थ्य सेवा का पतन और घोटालों का जिक्र है। चार्जशीट में आरोप लगाए गए हैं कि टीएमसी समर्थित सिंडिकेट घुसपैठियों को 'वोट बैंक' बनाने में मदद करने के लिए नकली आईडी कार्ड उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकी खतरे में पड़ रही है। पश्चिम बंगाल की 2,216.7 किलोमीटर लंबी सीमा में से 569 किलोमीटर सीमा पर अभी भी बाड़ नहीं लगी है, जिसका कारण टीएमसी सरकार की ओर से घुसपैठ को बढ़ावा देने के लिए जमीन अधिग्रहण में की गई देरी है। 'बंगाल में सिंडिकेट राज' का आरोप लगाते हुए भाजपा ने कहा है कि कोयला, पीडीएस, एसएससी और मनरेगाजैसे क्षेत्रों में संस्थागत भ्रष्टाचार व 'कट-मनी' (कमीशन) की संस्कृति सभी नागरिक सेवाओं में फैल चुकी है। भाजपा ने चार्जशीट में दावा किया कि बंगाल में 2016 से अब तक 300 राजनीतिक हत्याएं और 13,000 से ज्यादा हत्या के प्रयास हुए। मुर्शिदाबाद, मोमिनपुर और महेशतला में बार-बार सांप्रदायिक अशांति फैली। महिलाओं के खिलाफ अपराधों का जिक्र करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि पार्क स्ट्रीट से लेकर संदेशखाली तक न्याय दिलाने में सरकार विफल रही है। बंगाल में अकेले 2023 में महिलाओं के खिलाफ 34,738 अपराध दर्ज किए गए। भाजपा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल से 6,688 कंपनियों का पलायन और 18,450 एमएसएमई बंद हुए हैं। इसी कारण बड़े पैमाने पर पूंजी का पलायन हुआ है। वहीं, बेरोजगारी दर के कारण 40 लाख से ज्यादा युवाओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, "यह चार्जशीट बंगाल की जनता की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लगाई हुई है, जिसे भाजपा एक आवाज दे रही है। एक प्रकार से आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता को तय करना है कि भय को चुनना है या भरोसे को चुनना है।" उन्होंने कहा कि यह चार्जशीट, सोनार बांग्ला का स्वप्न दिखाकर सिंडिकेट राज स्थापित कर बंगाल की जनता का शोषण करने वाले शासन की कहानी है। टीएमसी के कुशासन में बंगाल भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुका है। ऊपर से नीचे तक आपराधिक सिंडिकेट जनता को परेशान कर रहे हैं। विकास के अभाव में बंगाल उद्योग के लिए एक प्रकार से कब्रिस्तान बन चुका है। अमित शाह ने कहा कि इस बार बंगाल की जनता ने तय किया है कि प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाई जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 6 मई को पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी और 45 दिन में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जो भूमि उपलब्ध करानी है, वह भारत सरकार को बंगाल की भाजपा सरकार उपलब्ध करा देगी और हम घुसपैठ को रोकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ढेर सारी भर्तियों में जो घोटाले हुए, उनमें कई युवाओं की उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है। हम इसमें 5 साल का रिलैक्सेशन देंगे, और जिन युवाओं की भर्ती के लिए उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है, उन्हें एसएससी भर्तियों में मौका भी देंगे, साथ ही पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे।

तबादलों को लेकर गरमाई सियासत, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले के जरिए भाजपा को विधानसभा चुनावों में फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पश्चिम बर्दवान जिले के रानीगंज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं और अब एक 'लक्ष्मण रेखा' तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, जिसे उन्होंने 'वैनिशिंग कमीशन' कहा, ने राज्य के 50 से 100 अधिकारियों का तबादला कर उन्हें केरल और तमिलनाडु भेज दिया है।  ममता बनर्जी ने कहा कि ये अधिकारी स्थानीय हालात से भली-भांति परिचित थे, लेकिन उन्हें हटाकर बाहर भेज दिया गया। उनके मुताबिक, यह कदम जनता पर दबाव बनाने, अवैध धन, नशीले पदार्थों और बाहरी गुंडों के प्रवेश को आसान बनाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे दंगों को भड़काने की कोशिश हो रही है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा और कहा कि इस मामले में भी सीमाएं लांघी जा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में एक मर्यादा होनी चाहिए और उसे पार नहीं किया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में राम नवमी के जुलूस के दौरान हुई झड़पों का जिक्र करते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में है, इसलिए उन्हें इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरे सभी अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है और अब रघुनाथगंज में दंगे भड़काए जा रहे हैं। दुकानों में लूटपाट हुई और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। जब समय आएगा, तो हम हिंसा भड़काने वालों को नहीं छोड़ेंगे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो बुलडोजर की राजनीति शुरू हो जाएगी और लोगों को बेघर कर दिया जाएगा। बेहाला में बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने प्रभावित लोगों से माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि उनकी दुकानों और संपत्तियों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्ट कहती है, वहीं दूसरी ओर खुद अवैध कोयला खनन से पैसा जुटाती है। रैली के दौरान ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यहां सभी धर्मों के लोग मिलकर राम नवमी, दुर्गा पूजा, ईद और क्रिसमस जैसे त्योहार मनाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने रानीगंज के भूस्खलन प्रभावित इलाकों के लिए पुनर्वास पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जो लोग इन जोखिम भरे क्षेत्रों से सुरक्षित स्थान पर जाना चाहते हैं, उन्हें 10 लाख रुपए और दो फ्लैट दिए जाएंगे। सरकार स्थानांतरण का पूरा खर्च भी उठाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक 2,000 फ्लैट बनाए जा चुके हैं और 4,000 और बनाने की योजना है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर विचार करें, क्योंकि किसी बड़े भूस्खलन से हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन बोले– उकसाया गया तो ईरान करेगा करारा पलटवार

तेहरान सैन्य संघर्ष के 29वें दिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दावा किया है कि वो अमेरिका-इजरायल की ओर से हो रही हर कार्रवाई का पूरी ताकत से जवाब देंगे। सोशल मीडिया पोस्ट में चेतावनी दी कि पहल ईरान नहीं करता लेकिन अगर उस पर आक्रमण किया जाता है तो वो फिर पीछे हटता भी नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति ने एक्स पर चेतावनी दी कि अगर ईरान के इन्फ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक ठिकानों पर हमला हुआ, तो जोरदार जवाब दिया जाएगा।  उन्होंने क्षेत्र के अन्य देशों को भी आगाह करते हुए लिखा कि "अगर वे विकास और सुरक्षा चाहते हैं, तो अपने देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान के दुश्मनों को युद्ध के लिए न करने दें।" तेहरान की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि वो सिर्फ अमेरिका के ठिकानों को निशाना बनाता है। लेकिन खाड़ी देशों के अधिकारी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि हमलों में होटल, एयरपोर्ट और रिहायशी इलाकों पर भी स्ट्राइक की जा रही है। इस बीच इराक के रक्षा मंत्रालय ने ऑयलफील्ड में गिरे ड्रोन की जानकारी दी है। विभाग ने बताया कि दक्षिणी हिस्से में स्थित मजनून ऑयलफील्ड में एक ड्रोन गिर गया, लेकिन वह फटा नहीं, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। इराक के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। मजनून ऑयलफील्ड इराक के सबसे अहम तेल क्षेत्रों में से एक है। वहीं, ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उसने दुबई में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है। ईरान की मिलिट्री यूनिट 'खतम अल-अंबिया ऑफिस' के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी के मुताबिक, ईरानी सेना ने मिसाइल और ड्रोन से दो जगहों पर हमला किया, जहां 500 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। उनके अनुसार इन हमलों में भारी नुकसान हुआ। ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना पहले ही अपने ठिकानों से भागकर छिप रही है। हालांकि, ईरान के इन दावों की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।

मिडिल ईस्ट में हलचल: UAE और कतर से हाथ मिलाकर ज़ेलेंस्की की नई रणनीति, ‘सुरक्षा दीवार’ पर उठे सवाल

वाशिंगटन अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग के चलते यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने शनिवार को मध्य पूर्व के देशों की एक महत्वपूर्ण यात्रा की, जिसके तहत उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर (Qatar) के साथ रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया है। सऊदी अरब के दौरे के तुरंत बाद ज़ेलेंस्की ने इन दोनों देशों के साथ सुरक्षा और सैन्य सहयोग (Defense Cooperation) पर विस्तृत चर्चा की। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इस दौरान विशेष रूप से ईरानी हमलों (Iranian Attacks) और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा (Strait of Hormuz Security) पर चिंता व्यक्त की। चार साल से रूस के साथ जारी भीषण युद्ध (Ongoing Conflict) के अनुभवों को साझा करते हुए यूक्रेन ने अपने सहयोगियों को आधुनिक सुरक्षा तकनीक (Security Systems) देने की पेशकश की है, जो दुश्मन के घातक ड्रोन और मिसाइलों को आसमान में ही ढेर कर सकती है। यूएई के साथ सुरक्षा और ईरानी हमलों पर मंथन यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ मुलाकात के दौरान ज़ेलेंस्की ने ईरान की ओर से किए जाने वाले हमलों और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य की संभावित नाकाबंदी पर लंबी बात की। ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि यूक्रेन के पास रूसी हमलों का मुकाबला करने का व्यापक अनुभव है और वे अपनी एयर डिफेंस विशेषज्ञता यूएई के साथ साझा करने को तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की है जो दुश्मन के हमलों को रोकने में अत्यधिक प्रभावी साबित हुई है। उनका मानना है कि तेल बाजारों की स्थिरता और निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए यह सहयोग आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।   कतर के साथ 10 साल की ऐतिहासिक रक्षा साझेदारी यूएई के बाद वलोडिमिर ज़ेलेंस्की कतर की राजधानी दोहा पहुंचे, जहाँ उनका स्वागत कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने किया। इस ऐतिहासिक मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा क्षेत्र में एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत दोनों देश संयुक्त रूप से रक्षा उद्योग परियोजनाओं पर काम करेंगे और सैन्य उपकरणों के उत्पादन के लिए सह-उत्पादन सुविधाएं स्थापित करेंगे। ज़ेलेंस्की ने कतर के नेतृत्व को रूस द्वारा यूक्रेन पर किए जा रहे लगातार हमलों और रूस-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य गठजोड़ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। हवाई सुरक्षा को मजबूत करना यूक्रेन की सर्वोच्च प्राथमिकता कतर की यात्रा के दौरान ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन के लिए इस समय अपनी हवाई रक्षा प्रणालियों (Air Defense) को मजबूत करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि रूस और ईरान के बीच गहराते सैन्य सहयोग ने यूक्रेन और मध्य पूर्व दोनों के लिए सुरक्षा चुनौतियां पैदा की हैं। यूक्रेन अब अपने साझेदार देशों के साथ तकनीकी और रणनीतिक अनुभवों का एकीकरण कर रहा है ताकि रूसी मिसाइल और ड्रोन खतरों का डटकर मुकाबला किया जा सके। ज़ेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि खाड़ी देशों का समर्थन न केवल यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता को भी बढ़ावा देगा। काउंटर करने के लिए नए और मजबूत सहयोगियों की तलाश यूक्रेन का खाड़ी देशों की ओर यह झुकाव दिखाता है कि ज़ेलेंस्की अब रूस-ईरान गठबंधन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काउंटर करने के लिए नए और मजबूत सहयोगियों की तलाश में हैं। इस समझौते के बाद जल्द ही यूक्रेन और कतर के रक्षा विशेषज्ञों की एक टीम संयुक्त उत्पादन इकाइयों के लिए जमीन और तकनीकी पहलुओं का निरीक्षण शुरू कर सकती है। ज़ेलेंस्की की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है, जिससे यह साफ होता है कि यूक्रेन अपनी सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक तेल राजनीति में भी अपनी भूमिका देख रहा है।

अबू धाबी हादसा: मिसाइल के टुकड़ों से लगी भीषण आग, 6 लोग जख्मी

अबू धाबी यूएई की राजधानी अबू धाबी और दुबई के बीच मौजूद खलीफा इकोनॉमिक जोन कीईजेडएडी में शनिवार सुबह आग लग गई। बैलिस्टिक मिसाइलों के टुकड़े गिरने से लगी आग में 6 लोग घायल हो गए। अबू धाबी के गवर्नमेंट मीडिया ऑफिस के अनुसार, इंटरसेप्ट की गई बैलिस्टिक मिसाइलों के मलबे गिरने से तीन जगह आग लगी। पहले बताया गया था कि शहर के खलीफा इकोनॉमिक जोन में मिसाइल का मलबा गिरने से दो जगह आग लग गई थी, जिसे बुझाने के लिए टीमें काम कर रही थीं। अधिकारियों ने तीसरी बार आग लगने की पुष्टि की है। उनके अनुसार, यह घटना एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोकने के बाद गिरे मलबे की वजह से हुई थी। अधिकारियों ने पहले 5 भारतीयों के घायल होने की पुष्टि की थी। बाद में बताया कि इस घटना में एक पाकिस्तानी नागरिक की भी चोट आई, जिससे घायलों की कुल संख्या छह हो गई। सभी को मामूली से लेकर मध्यम चोट आई है। मीडिया ऑफिस के अनुसार, अधिकारियों ने तीनों आग पर काबू पा लिया है और कूलिंग प्रोसेस चल रहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक सोर्स से ही जानकारी लें और अफवाहें या बिना वेरिफाइड जानकारी फैलाने से बचें। अमीरात के मीडिया ऑफिस का कहना है कि आज अबू धाबी में बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने से गिरे मलबे की वजह से तीन आग लगने से छह लोग घायल हो गए। इसमें आगे कहा गया है कि तीनों आग पर काबू पा लिया गया है, और कूलिंग प्रोसेस चल रहा है। खलीफा इकोनॉमिक जोन्स अबू धाबी के एडी पोर्ट्स ग्रुप, इकोनॉमिक सिटीज और फ्री जोन्स का हिस्सा है। इस बीच, सैन्य संघर्ष के 29वें दिन ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर हमले जारी हैं। शनिवार सुबह तक अलग-अलग देशों से हमलों और इंटरसेप्शन की खबरें सामने आई हैं। यूएई के अलावा ओमान के सलालाह पोर्ट पर ड्रोन अटैक, सऊदी अरब की राजधानी रियाद में (रक्षा मंत्रालय के मुताबिक एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया गया), बहरीन और कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला (रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा) किया गया या उन्हें नष्ट करने के दौरान हादसा हुआ।

बेटे की सुसाइड के बाद माता-पिता का अनोखा फैसला, मूर्ति से निभा रहे शादी की रस्म

तेलंगाना तेलंगाना में एक दंपति पिछले 23 वर्षों से अपने दिवंगत बेटे की शादी का अनुष्ठान हर साल मनाते आ रहे हैं। वर्ष 2003 में बेटे राम कोटी ने प्रेम विवाह का विरोध होने पर आत्महत्या कर ली थी। कुछ दिनों बाद उनकी प्रेमिका ने भी सुसाइड कर ली, जिससे दोनों परिवार सदमे में चले गए। इस दुखद घटना के बाद दंपति लालू और सुक्कम्मा खुद को माफ नहीं कर पाए। एक दिन सपने में बेटे ने मां से मंदिर बनाने और अपनी शादी कराने की इच्छा जताई। इसके बाद दंपति ने घर में छोटा सा मंदिर बनाया और दोनों की मूर्तियां स्थापित कीं। शादी का अनुष्ठान रामनवमी के दिन किया जाता है, जिसमें पूजा, भोग और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन होता है। शुरू में यह व्यक्तिगत श्रद्धांजलि थी, लेकिन अब पूरे गांव की परंपरा बन चुकी है। राम कोटी की मौत के बाद उनके माता-पिता का जीवन पूरी तरह बदल गया। उन्होंने बेटे की याद को मिटने नहीं दिया और मंदिर में मूर्तियों को दिव्य रूप मानकर उनकी शादी का आयोजन करने लगे। यह अनुष्ठान भगवान राम और सीता के दिव्य विवाह की तरह मनाया जाता है, जो तेलंगाना में बड़े विश्वास के साथ मनाया जाता है। रामनवमी पर मंदिर में विशेष पूजा हर साल रामनवमी पर मंदिर में प्रार्थनाएं की जाती हैं, भोग लगाया जाता है और पूरे रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। गांव वाले, रिश्तेदार और आसपास के क्षेत्र के लोग भी इसमें शामिल होते हैं। यह परंपरा न केवल माता-पिता की भावनाओं को संतुष्ट करती है बल्कि पूरे समुदाय को एकजुट भी रखती है। यह 23 वर्ष पुरानी परंपरा दुख को श्रद्धा में बदलने का अनोखा उदाहरण है। लालू और सुक्कम्मा हर साल इस अनुष्ठान के माध्यम से बेटे की याद को जीवित रखते हैं। मंदिर में स्थापित मूर्तियां अब पूरे गांव के लिए पूज्य हैं। लोग मानते हैं कि इससे दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है। शुरू में परिवार का निजी दुख था, लेकिन समय के साथ यह स्थानीय परंपरा बन गई है। गांव के लोग इसमें सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और प्रार्थनाओं में शामिल होते हैं। यह रिवाज तेलंगाना की सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है, जहां रामनवमी को विशेष महत्व दिया जाता है। आज भी लालू और सुक्कम्मा इस अनुष्ठान को बड़ी निष्ठा से निभाते हैं। यह कहानी दर्शाती है कि प्यार और यादें कभी नहीं मरतीं। माता-पिता की यह भक्ति पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है।  

भीड़ पर लगाम के लिए प्रशासन सख्त, कर्तव्य पथ पर कैमरों से निगरानी शुरू

नई दिल्ली राजधानी के प्रमुख पर्यटन स्थलों इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास बढ़ती भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने भीड़ कम करने का अभियान शुरू किया है। गर्मी के दिनों में यहां छात्रों, परिवारों और पर्यटकों की संख्या बढ़ने के कारण यह कदम उठाया गया है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, मार्च 2026 में इस इलाके में कुल 2253 चालान किए गए। इनमें 1720 चालान अवैध पार्किंग के लिए, 293 कैमरे के जरिए, 180 वाहनों को टो किया गया, जबकि 60 चालान बिना हेलमेट के किए गए। यातायात नियमों के पालन को सख्ती से लागू करने के लिए प्रमुख चौराहों पर रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन कैमरे लगाए जा रहे हैं। ये कैमरे मथुरा रोड-भैरों मार्ग, रिंग रोड-भैरों रोड और जनपथ-टॉलस्टॉय मार्ग पर स्थापित किए जा रहे हैं, जो रेड लाइट तोड़ने वालों का स्वतः चालान करेंगे। पुलिस ने वायलेशन ऑन कैमरा प्रणाली भी लागू की है। इसके तहत यदि कोई वाहन नो-पार्किंग में खड़ा पाया जाता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो पुलिसकर्मी मोबाइल के जरिए चालान जारी कर सकता है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को जुर्माना भरने के लिए कोर्ट में पेश होना होगा। पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने कई सार्वजनिक पार्किंग स्थल निर्धारित किए हैं। मान सिंह रोड पर नेशनल म्यूजियम के पास पी1 और पी2, जनपथ पर पी5 और रफी मार्ग पर पी6 पार्किंग उपलब्ध है। पी1 पार्किंग में बसों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जबकि अन्य पार्किंग स्थलों पर दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े किए जा सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सड़क किनारे या फुटपाथ पर वाहन पार्क न करें और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करें, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। साथ ही, किसी भी सहायता के लिए नागरिक 112 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं या नजदीकी ट्रैफिक पुलिसकर्मी से मार्गदर्शन ले सकते हैं।

ईरान का बड़ा वार! अमेरिकी जहाज बना निशाना, मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण

ईरान मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान की सेना ने एक बार फिर से अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया है। यह जहाज अमेरिकी सेना को लॉजिस्टिक मुहैया करवाने में मदद करता था। ईरानी सेना ने शनिवार कहा कि उसने ओमान के सलालाह बंदरगाह के पास एक अमेरिकी लॉजिस्टिक्स जहाज पर हमला किया। ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने सरकारी टीवी पर जारी एक बयान में कहा, "आक्रामक अमेरिकी सेना को सहायता पहुंचाने वाले एक लॉजिस्टिक्स जहाज को, ओमान के सलालाह बंदरगाह से काफी दूरी पर, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाओं द्वारा निशाना बनाया गया।" इससे पहले, ईरानी मीडिया ने शनिवार को बताया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में कई रिहायशी इलाके निशाना बने, जिससे रातभर में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। फार्स न्यूज एजेंसी ने प्रांत के अधिकारी घोडरातोल्लाह वलादी के हवाले से बताया कि पश्चिमी प्रांत लोरेस्तान के शहर बोरुजेर्द के रिहायशी इलाकों पर हुए हमलों में सात लोग मारे गए और 36 अन्य घायल हो गए। ISNA ने शहर के राजनीतिक उप-गवर्नर अली सादेघी के हवाले से बताया कि शनिवार को उत्तर-पश्चिमी शहर जंजन में भी इसी तरह के हमले हुए, जिनमें कम से कम पांच लोग मारे गए और सात अन्य घायल हो गए। इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए, जिसमें इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता मारे गए और एक ऐसा युद्ध छिड़ गया जो तब से पूरे मध्य पूर्व में फैल चुका है। ईरान ने अभी तक मौतों का कुल आंकड़ा जारी नहीं किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 8 मार्च को जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों में 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत बताई गई है, जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रात भर ईरानी राजधानी में धमाकों की गूंज सुनाई दी। शहर के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हुए हमलों से इमारतों को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि रात भर हुए इन हमलों में अन्य स्थानों को भी निशाना बनाया गया था या नहीं। ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान बहुत अच्छी स्थिति में: ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान बेहतरीन ढंग से आगे बढ़ रहा है ।लेकिन इसी दौरान ईरान ने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें 12 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गयी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा, "ईरान में हमारा सैन्य अभियान बहुत अच्छा चल रहा है," हालांकि उन्होंने इस पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।''  

मोदी-ट्रंप कॉल की पुष्टि, मस्क के बयान को सरकार ने किया खारिज

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 24 मार्च को हुई बातचीत में कोई तीसरा व्यक्ति शामिल नहीं था, भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को कहा, 'हमने इस खबर को देखा है। 24 मार्च को हुई टेलीफोन बातचीत केवल पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई थी। जैसा कि पहले कहा गया था, इसमें पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिला।' इससे पहले, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिका के अज्ञात अधिकारियों के हवाले से खबर दी कि मंगलवार को ट्रंप और मोदी की फोन पर हुई बातचीत में एलन मस्क भी शामिल हुए थे। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच दो देशों के प्रमुखों के बीच हुई बातचीत में सरकार के इतर किसी नागरिक का मौजूद होना असामान्य है। खबर में कहा गया कि अरबपति कारोबारी एलन मस्क के इस बातचीत में शामिल होने की 2 अमेरिकी अधिकारियों की ओर से पुष्टि की गई। इससे संकेत मिलता है कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति मस्क के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संबंध फिर बेहतर हो गए हैं। मस्क के सरकार से पिछले साल बाहर निकलने के बाद उनके व ट्रंप के संबंधों में खटास आ गई थी। मस्क को सरकार में कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने का काम सौंपा गया था। खबर में कहा गया कि यह स्पष्ट नहीं है कि एलन मस्क इस बातचीत में शामिल क्यों थे या उन्होंने इस दौरान कोई बात की थी या नहीं। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच यह पहली बातचीत रही। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट को खुला, सुरक्षित और सुलभ बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह विश्व में शांति, स्थिरता और आर्थिक खुशहाली के लिए अहम है।  

दुनिया के सामने आई सच्चाई: भारत के दुश्मनों को पनाह देता पाकिस्तान

इस्लामाबाद पाकिस्तान अभी भी भारत के खिलाफ सक्रिय आतंकवादी समूहों का गढ़ बना हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान में कई प्रमुख आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं, जो जम्मू-कश्मीर और भारत पर केंद्रित हैं। इस रिपोर्ट में एक परेशान करने वाला संदेश है- भारत, विशेषकर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को निशाना बनाने वाले आतंकी संगठन पाकिस्तानी धरती से बेखौफ और बिना किसी रोक-टोक के अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। 25 मार्च को जारी CRS की 'इन फोकस' रिपोर्ट में 15 आतंकी संगठनों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इनमें से कई गुटों को अमेरिका द्वारा 'विदेशी आतंकवादी संगठन' (FTO) घोषित किया जा चुका है। रिपोर्ट में 'भारत और कश्मीर-केंद्रित आतंकी समूहों' से लगातार बने हुए खतरों की ओर इशारा किया गया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-     लश्कर-ए-तैयबा (LeT)     जैश-ए-मोहम्मद (JeM)     हरकत-उल जिहाद इस्लामी (HUJI)     हरकत उल-मुजाहिदीन (HuM)     हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) प्रमुख आतंकी संगठनों की स्थिति लश्कर-ए-तैयबा (LeT): 1980 के दशक के अंत में बने इस संगठन को 2001 में FTO घोषित किया गया था। यह अभी भी पाकिस्तान के पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार, 'वर्तमान में जेल में बंद हाफिज सईद के नेतृत्व वाले इस गुट ने प्रतिबंधों से बचने के लिए अपना नाम बदलकर 'जमात-उद-दावा' कर लिया है।' इसके पास 'कई हजार लड़ाके' हैं और इसी संगठन ने 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रची थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे। जैश-ए-मोहम्मद (JeM): साल 2000 में मसूद अजहर द्वारा स्थापित इस गुट को भी 2001 में FTO घोषित किया गया था। इसने 2001 के भारतीय संसद हमले में लश्कर का साथ दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जैश के पास लगभग 500 हथियारबंद आतंकी हैं जो भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में काम करते हैं। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में 'मिलाना' है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 'जैश ने खुले तौर पर अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की हुई है।' हिज्बुल मुजाहिदीन (HM): 1989 में बने इस कश्मीर-केंद्रित समूह को 2017 में अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके पास लगभग 1500 कैडर (आतंकी) हैं जो 'कश्मीर की आजादी या जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में विलय' की मांग करते हैं। ये समूह अल-कायदा और भारतीय उपमहाद्वीप में इसके सहयोगी संगठन (AQIS) जैसे वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं। पाकिस्तान की विफलता और मदरसों की भूमिका रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान आतंकी गुटों को खत्म करने में नाकाम रहा है। हवाई हमलों और लाखों 'खुफिया-आधारित ऑपरेशनों' सहित कई बड़े सैन्य अभियान, अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इन आतंकवादी समूहों को हराने में विफल रहे हैं। 2014 के 'नेशनल एक्शन प्लान' का उद्देश्य भी इन गुटों को खत्म करना था, लेकिन ये आज भी मौजूद हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए "कुछ कदम" उठाए थे, लेकिन वहां के मदरसे अभी भी ऐसे सिद्धांत पढ़ा रहे हैं जो "हिंसक चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा" दे सकते हैं। पीड़ित भी और समर्थक भी: पाकिस्तान का दोहरा चरित्र दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के. एलन क्रोनस्टेड द्वारा तैयार की गई यह CRS रिपोर्ट पाकिस्तान को 'पीड़ित और समर्थक' दोनों के रूप में चित्रित करती है। एक तरफ जहां इस्लामाबाद खुद घरेलू हिंसा (अशांत बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववाद और खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ते हालात) से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह उन आतंकी नेटवर्कों की मेजबानी कर रहा है जो लंबे समय से भारत को निशाना बनाते आए हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी और अन्य गुटों को पांच व्यापक, और अक्सर आपस में जुड़े हुए, वर्गों में बांटा गया है।     वैश्विक स्तर पर सक्रिय     अफगानिस्तान-केंद्रित     भारत और कश्मीर-केंद्रित     घरेलू स्तर पर सक्रिय     सांप्रदायिक (शिया-विरोधी) भारत का रुख पाकिस्तान की इन गुटों को पूरी तरह से खत्म करने में अक्षमता या अनिच्छा के कारण पड़ोसियों के साथ उसका तनाव बना हुआ है। भारत लगातार इस बात पर कायम है कि स्थायी शांति के लिए सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। पाकिस्तानी धरती पर मौजूद आतंकी ढांचे के बारे में अमेरिका के इस ताज़ा आकलन ने भारत के इस रुख को और मजबूती दी है।