samacharsecretary.com

दुबई एयरपोर्ट पर ईरान युद्ध के बीच धुंआ, भारत से जा रहे विमान को बीच रास्ते में वापस लौटना पड़ा, 19 भारतीय गिरफ्तार

दुबई कोच्चि से दुबई जाने वाली एमिरेट्स की एक उड़ान हवाई अड्डे से मिली सुरक्षा संबंधी सूचना के बाद सोमवार को यहां लौट आई। कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (CIAL) के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि उड़ान ईके533 यहां सीआईएएल से सुबह 4:30 बजे 325 यात्रियों को लेकर रवाना हुई। रास्ते में दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अचानक बंद होने के कारण विमान को लौटने का निर्देश दिया गया। उन्होंने बताया कि सुबह 8:30 बजे विमान यहां उतरा। प्रवक्ता ने कहा, 'दुबई के डीएक्सबी (अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) पर स्थिति की समीक्षा होने तक यात्रियों को विमान में ही बैठे रहने की सलाह दी जाती है। हवाई अड्डे पर परिचालन फिर से शुरू होने के बाद ही सेवा संचालित होगी।' अधिकारियों ने हवाई अड्डे के पास आग लगने की घटना के बाद एहतियाती सुरक्षा उपाय के रूप में परिचालन रोक दिया। वहीं क्षेत्रीय तनाव के बीच सोशल मीडिया पर भ्रामक और मनगढ़ंत वीडियो क्लिप साझा करने के आरोप में 19 भारतीय नागरिकों समेत 35 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। दुबई एयरपोर्ट पर अफरा तफरी दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सोमवार को ड्रोन हमले के बाद उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं। अधिकारियों ने हवाई अड्डे के पास आग लगने की घटना के बाद एहतियाती सुरक्षा उपाय के रूप में परिचालन रोक दिया। दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने निलंबन की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम यात्रियों एवं हवाई अड्डे के कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। प्राधिकरण ने एक बयान में कहा, 'यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी उड़ानों के संबंध में नवीनतम जानकारी के लिए अपनी संबंधित एयरलाइनों से संपर्क करें, स्थिति की समीक्षा करने के बाद आधिकारिक चैनलों के माध्यम से आगे की जानकारी दी जाएगी।' अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले के कारण हवाई अड्डे की सीमा के पास आग लग गई जिसे आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत बुझा दिया। दुबई मीडिया कार्यालय ने कहा कि हवाई रक्षा प्रणालियों ने उड़ान संचालन को अस्थायी रूप से रोकने से पहले ही आग की घटना पर प्रतिक्रिया दी। हवाई क्षेत्र हो रहा प्रभावित यह व्यवधान पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत में अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच उत्पन्न हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप कई खाड़ी देशों में ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं और हवाई क्षेत्र पर रुक-रुक कर प्रतिबंध लगाए गए हैं। क्षेत्रीय विमानन को पहले ही काफी व्यवधान का सामना करना पड़ा है, पिछली बार उड़ानों के निलंबन से दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अल मकतूम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे प्रभावित हुए थे जिसके परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में 1,800 से अधिक उड़ानें रद्द हुई थीं। दुबई से होकर गुजरने वाले भारत के कई यात्रियों सहित सभी यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपडेट उड़ान समय सारिणी की जानकारी एयरलाइन की वेबसाइटों या मोबाइल एप्लिकेशन से प्राप्त करें क्योंकि चल रही बाधाओं के बावजूद बुकिंग अभी भी सक्रिय चालू रह सकती है।

भारत ने होर्मुज से अपने जहाज को सुरक्षित निकाला, ईरान को किया मनाने में सफल; जयशंकर ने बताया तरीका

नई दिल्ली ईंधन संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने दो भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने की अनुमति दी थी। अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस फैसले के पीछे की वजह का खुलासा किया है। उन्होंने यह भी साफ किया है कि जहाज गुजरने देने के बदले भारत ने ईरान से कोई सौदा नहीं किया है। अमेरिका और इजरायल से संघर्ष के बीच ईरान ने स्ट्रेट पर रोक लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जयशंकर ने कहा, 'फिलहाल मैं उनसे (विदेशी पक्षों से) बातचीत कर रहा हूं और मेरी इस बातचीत के कुछ सकारात्मक नतीजे भी निकले हैं। यह प्रक्रिया अभी जारी है। अगर मुझे इसके नतीजे मिल रहे हैं, तो स्वाभाविक रूप से मैं इसे आगे भी जारी रखूंगा।' उन्होंने कहा, 'भारत के नज़रिए से यह बेहतर है कि हम तर्क-वितर्क करें, आपसी समन्वय बनाएं और किसी समाधान तक पहुंचें।' क्या हुआ है कोई सौदा? उन्होंने कहा कि दिल्ली और तेहरान के बीच लेनदेन का इतिहास रहा है…। उन्होंने कहा कि इसके आधार पर ही उनके साथ बातचीत हुई। विदेश मंत्री ने कहा, 'यह एक्सचेंज का मुद्दा नहीं है। भारत और ईरान का संबंध है। और यह एक संघर्ष है, जिसे हम दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं।' उन्होंने कहा, 'अभी तो बस शुरुआत है। हमारे और भी कई जहाज वहाँ मौजूद हैं। इसलिए, हालांकि यह एक स्वागत योग्य घटनाक्रम है, लेकिन बातचीत अभी भी जारी है क्योंकि उस दिशा में अभी काफी काम किया जाना बाकी है।' दो और देशों से की बात जयशंकर ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रियों से पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। जयशंकर ने शनिवार रात यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत की। माना जाता है कि जयशंकर की दोनों विदेश मंत्रियों के साथ हुई बातचीत में भारत की ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल था। क्यों जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। खास बात है कि 60 प्रतिशत कच्चा तेल भारत का होर्मुज मार्ग से आता है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा LNG इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

सिंथन टॉप पर बर्फबारी में फंसे 200 से ज्यादा पर्यटकों को सेना और पुलिस ने सफलतापूर्वक बचाया

श्रीनगर  दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित सिंथन टॉप पर भारी बर्फबारी के बीच फंसे 200 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है। भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक संयुक्त अभियान के तहत इन लोगों का रेस्क्यू किया। भारतीय सेना के अनुसार, 19 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस (अनंतनाग) के साथ मिलकर सिंथन दर्रे पर बचाव अभियान शुरू किया। यह कदम तब उठाया गया जब लगातार हो रही बर्फबारी, सड़कों के फिसलन भरे होने और बहुत कम विजिबिलिटी (दिखाई देने की क्षमता) के कारण कई वाहन और यात्री वहां फंस गए थे। कठिन मौसम की परिस्थितियों और दुर्गम रास्तों का सामना करते हुए संयुक्त टीमों ने 214 फंसे हुए पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर उन्हें वहां से निकालने में सफलता हासिल की। भारतीय सेना ने बताया कि यह बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद चलाया गया, जिससे इस ऊंचे पहाड़ी दर्रे पर फंसे हुए सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी। कश्मीर घाटी के विभिन्न प्रमुख शहरों में मौसम ठंडा बना हुआ है। सोमवार को गुलमर्ग में तापमान लगभग 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जहां हवा शांत रही और आर्द्रता 100 प्रतिशत रही। जम्मू शहर में तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहा और लगभग 20.4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि आर्द्रता 94 प्रतिशत दर्ज की गई। पहलगाम में तापमान 1.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है और यहां भी हवा शांत रही। श्रीनगर शहर में तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यहां उत्तर-पूर्वी दिशा से लगभग 3.7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और आर्द्रता 94 प्रतिशत रही। बनिहाल में तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस रहा। कटरा में तापमान 9.8 डिग्री सेल्सियस रहा और उत्तर-पश्चिमी दिशा से लगभग 3.7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। वहीं कुपवाड़ा में तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में ताजा बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश के कारण रविवार को तापमान में भारी गिरावट आई, जिससे फरवरी के बाद पहली बार तापमान सामान्य से नीचे चला गया। पीर की गली, सिंथन टॉप, मरगन टॉप, गुलमर्ग, दूधपथरी, गुरेज घाटी, साधना टॉप, पहलगाम के ऊपरी इलाकों और सोनमर्ग-जोजिला मार्ग समेत कई ऊंचे इलाकों में 4 से 6 इंच तक बर्फबारी हुई। रास्तों के फिसलन भरे होने के कारण, कश्मीर को कारगिल और लेह से जोड़ने वाली गुरेज-बांदीपोरा सड़क और सोनमर्ग-जोजिला सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद रही। पुलिस प्रशासन की ओर से कश्मीर को पीर पंजाल क्षेत्र से जोड़ने वाली मुगल रोड को भी बंद कर दिया गया। इसके साथ ही, कश्मीर को चिनाब घाटी से जोड़ने वाले सिंथन टॉप और मरगन टॉप मार्गों को भी बंद कर दिया गया। जम्मू संभाग के किश्तवाड़ जिले के कई हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बर्फबारी की सूचना मिली, जिसमें मरवाह और वारवान की जुड़वां घाटियां और रामबन जिले के ऊपरी इलाके शामिल हैं।

यूक्रेन खाड़ी देशों को देगा कोचिंग, ईरान के खतरनाक हथियार के खिलाफ होगी तैयारियां

कीव  ईरान युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने खाड़ी देशों और अमेरिका को मदद भेजने की पेशकश की, लेकिन बदले में उन्होंने वित्तीय मदद और तकनीक की मांग की है, जबकि ईरान ने इसे 'मजाक' बताया है। ईरान युद्ध के चलते खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और मिसाइल-ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को मदद देने की पेशकश की है। लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने साफ कह दिया है कि यह मदद बिना शर्त नहीं होगी। उन्होंने कहा है कि यूक्रेन ड्रोन पर अपनी विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे रूस से लड़ने के लिए आर्थिक सहायता और नई तकनीक की जरूरत है। रूस के साथ चार साल से जारी युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ईरान के डिजाइन वाले 'कामिकाजे' ड्रोन से लड़ने का बड़ा अनुभव हासिल किया है। यही अनुभव अब यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार बना रहा है। भारत भी करता है इस्तेमाल दरअसल ‘शाहेद ड्रोन' कामिकाजे ड्रोन का ही एक प्रकार है जिसे ईरान और रूस इस्तेमाल करते हैं। इन्हें अमेरिका, भारत और यूक्रेन खुद भी इस्तेमाल करते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन ने खाड़ी के चार देशों में अपने विशेषज्ञ भेजे हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि हर टीम में कई दर्जन विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये टीमें 'स्थिति का विशेष आकलन करेंगी और दिखाएंगी कि ड्रोन-रोधी सुरक्षा प्रणाली कैसे काम करनी चाहिए।' एक्सपर्ट्स भेजे यूक्रेन का कहना है कि रूस के साथ युद्ध में उसने ईरान के 'शाहेद' ड्रोन के खिलाफ काफी अनुभव हासिल किया है। रूस ने इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेनी शहरों और बुनियादी ढांचे पर हमलों में बड़े पैमाने पर किया है। इसलिए यूक्रेन का कहना है कि वह उन देशों की मदद करना चाहता है जो समान खतरे का सामना कर रहे हैं। यूक्रेन के मुताबिक उसके विशेषज्ञ कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में काम शुरू कर चुके हैं। यूक्रेन का कहना है कि वह अपनी एंटी-ड्रोन तकनीक और विशेषज्ञता साझा कर सकता है, लेकिन इसके बदले उसे सहयोगियों से मजबूत समर्थन चाहिए होगा। यूक्रेन की जरूरतें कीव लंबे समय से पश्चिमी देशों से वायु-रक्षा मिसाइलों और मॉडर्न तकनीक की मांग कर रहा है। यूक्रेन का मानना है कि रूस के लगातार हमलों के कारण उसे इन प्रणालियों की सख्त जरूरत है। जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस मुद्दे पर कई बार यूक्रेन से संपर्क किया है। लेकिन इस मामले में अलग-अलग बयान सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंपने फॉक्स न्यूज रेडियो से कहा कि उनके देश को ड्रोन रक्षा के लिए 'यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है।' इसके बावजूद यूक्रेन अपनी विशेषज्ञता को एक रणनीतिक संपत्ति के तौर पर पेश कर रहा है, जिससे उसे आर्थिक सहायता और नई सैन्य तकनीक मिल सके। ईरान की तीखी प्रतिक्रिया यूक्रेन के इस कदम पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कीव में ईरान के दूत शाह्रियार अमूजेगर ने यूक्रेन की भूमिका को खारिज करते हुए कहा, 'जहां तक खाड़ी देशों में ड्रोन के खिलाफ यूक्रेन की कार्रवाइयों का सवाल है, हम इसे मूल रूप से मजाक और दिखावटी कदम से ज्यादा कुछ नहीं मानते।' उन्होंने यह भी कहा, 'दुर्भाग्य से यूक्रेन अब प्रभावी रूप से हमारे साथ सीधे टकराव के चरण में प्रवेश कर चुका है; यानी उसने खुद को हमारे दुश्मनों के साथ खड़ा कर लिया है।' अमूजेगर ने यह दावा भी किया कि ईरान रूस के आक्रमण में शामिल नहीं है और वह यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है। उनके मुताबिक कीव ने 'पश्चिम से अधिक संसाधन हासिल करने के लिए ‘ईरान कार्ड' खेला है।' ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा कि अब यूक्रेन ने 'अपने पूरे क्षेत्र को ईरान के टारगेट में बदल दिया है।' उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए इसे 'आत्मरक्षा' का अधिकार बताया। हालांकि यूक्रेन ने इस बयान को तुरंत खारिज कर दिया। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉर्जी तिखी ने कहा कि यह दावा 'बेतुका' है और यह 'ऐसा है जैसे कोई सीरियल किलर अपने अपराधों को सही ठहराने के लिए आपराधिक संहिता का हवाला दे।'

होर्मुज संकट में ट्रंप को झटका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मना किया, साउथ कोरिया ने दिया असमंजसपूर्ण जवाब

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Iran War) में ईरानी घमकियों के मद्देनजर डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से Hormuz Strait की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी. दुनिया के 20% तेल की आवाजाही के लिए जरूरी इस समुद्री रूट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति आर-पार के मूड में हैं और बड़ा बयान देते हुए कहा कि ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन से देश हमारे अनुरोध को ठुकराते हैं और हमारी मदद के लिए युद्धपोत नहीं भेजता है. इस बीच बता दें कि जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और तुर्की तक ने होर्मुज में अपने युद्धपोत भेजने से लगभग इनकार कर दिया है। ट्रंप बोले- हम 7 देशों से कर रहे बात  होर्मुज को लेकर ईरान की धमकियों (Iran Warnings On Hormuz) के बीच ट्रंप ने कई देशों से युद्धपोत भेजने का आह्वान बीते दिनों किया था. इस बीच एयर फोर्स वन में बोलते हुए Donald Trump ने कहा कि वह होर्मुज की निगरानी के लिए अन्य देशों से सहयोग के लिए बातचीत कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनका प्रशासन Hormuz Strait की सुरक्षा को लेकर 7 देशों से बातचीत कर रहा है. ट्रंप ने ईरान युद्ध के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने के साथ क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसके प्रभाव पर जोर दिया। 'मदद करे तो अच्छा, न करे तो बहुता अच्छा' Donald Trump होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पूरी तर अब आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं और सहयोगी देशों से मदद की अपील में भी उनकी सख्ती साफ झलक रही है. उन्होंने कहा है कि अगर ये देश हमारी मदद करते हैं तो बहुत अच्छा है और अगर नहीं करते हैं, तो भी बहुत अच्छा है. ट्रंप ने आगे कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा देश Hormuz Strait को खुला रखने जैसे छोटे से प्रयास में हमारी मदद नहीं करेगा। इन देशों से सहयोग की आस राष्ट्रपति ने कहा कि खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर देशों को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी ही चाहिए. मैं मांग करता हूं कि ये देश आगे आएं और अपने क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका क्षेत्र है, यह वह स्रोत है जहां से उन्हें ऊर्जा मिलती है. हालांकि ट्रंप ने सभी 7 देशों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि कई देश होर्मुज के जरिए होने वाले तेल यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया, जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है. हालांकि, किसी भी देश ने अभी तक ट्रंप की इस अपील पर आगे आकर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही युद्धपोत भेजे हैं। जापान-ऑस्ट्रेलिया से तुर्की तक का इनकार ट्रंप के युद्धपोत भेजने की अपील पर जापान का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में मदद के लिए वॉरशिप भेजने को कहा था, लेकिन वह समुद्री सुरक्षा ऑपरेशन पर विचार नहीं कर रहा है. जापानी प्रधानमंत्री (Japan PM) का कहना है कि जापान को अभी तक US से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए अपनी नेवी भेजने का रिक्वेस्ट नहीं मिला है, इसलिए जवाब देना मुश्किल है। वहीं दूसरी ओर एएफपी की रिपोर्ट की मानें, तो ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के रिक्वेस्ट के बाद वह होर्मुज स्ट्रेट में नेवी शिप नहीं भेजेगा. नाटो में अमेरिका के पार्टनर तुर्की ने इस जंग से पहले ही पल्ला झाड़ लिया है. वहीं साउथ कोरिया इस बात पर ध्यान से विचार करने की बात कह रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में अपना वॉरशिप तैनात किया जाए या नहीं। फ्रांस ने भी झाड़ लिया पल्ला  न सिर्फ जापान, कोरिया, तुर्की और ऑस्ट्रेलिया, बल्कि अब फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन ने भी ट्रंप के अनुरोध पर दो टूक जबाव दिया है. उन्होंने कहा है कि जब तक युद्ध बढ़ता रहेगा, फ्रांस Hormuz Strait में अपने जंगी जहाज नहीं भेजेगा. वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल ने ऑपरेशन के बढ़ने की संभावना पर शक जताया और जर्मन ब्रॉडकास्टर ARD को बताया कि EU मिशन असरदार नहीं था, इसीलिए मुझे बहुत शक है कि एस्पाइड्स को होर्मुज तक बढ़ाने से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। ईरान की झमता लगभग खत्म! अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि ईरान की उत्पादन क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है, यही कारण है कि वह कम मिसाइलें दाग रहा है. ऐसे में होर्मुज की सुरक्षा और निगरानी का यह एक छोटा प्रयास है, हमने पहले ही ईरान की उत्पादन क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. उसकी ओर से मिसाइलें ही नहीं, बल्कि दागे जा रहे ड्रोनों की संख्या भी बहुत कम हो गई है और ये पहले की तुलना में करीब 20% रह गए हैं। इन देशों से सहयोग की उम्मीद हालांकि ट्रंप ने सभी सात सरकारों का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कई देश होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले समुद्री यातायात को सुचारू रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे, जहां से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम उन देशों में लिया जिनसे उन्हें सहयोग की उम्मीद है।  इतना खास क्यों है Hormuz? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वो देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं जो सीधे तौर पर इस चोक पॉइंट से जुड़े हैं और तेल आयात पर निर्भर हैं. भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी सीधे तौर पर इस रास्ते पर निर्भर हैं. ऐसे में यहां रुकावट इनकी आर्थिक हालात बिगड़ने में अहम रोल निभा सकती हैं. बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम चोक पॉइंट है, जहां से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल, यानी दुनिया की कुल खपत का करीब 20 प्रतिशत, गुजरता है. इसके साथ ही दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी इसी रास्ते से भेजी जाती है।

ओडिशा के हॉस्पिटल में भयानक आग, ICU में भर्ती 10 मरीजों ने गंवाई जान

 भुवनेश्वर ओडिशा के कटक स्थित SCB मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया. अस्पताल के मेडिसिन विभाग की इमारत में स्थित ट्रॉमा केयर ICU में भीषण आग लग गई. इस हादसे में अब तक कम से कम 10 मरीजों की मौत की खबर है। सोमवार सुबह करीब 3 बजे ट्रॉमा केयर यूनिट की पहली मंजिल पर आग लगी. कुछ ही मिनटों में पूरी ICU वार्ड में धुआं भर गया. उस समय वार्ड में कई गंभीर मरीज लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे। अस्पताल के कर्मचारी और अग्निशमन कर्मियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया. हालांकि, कई नाजुक हालत वाले मरीज धुएं और आग की तेज लपटों की चपेट में आ गए। अस्पताल प्रशासन और दमकल विभाग की मुस्तैदी से दर्जनों मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. जो मरीज बच गए और जिनकी हालत गंभीर थी, उन्हें तुरंत 'न्यू मेडिसिन ICU' में शिफ्ट किया गया ताकि उनका इलाज जारी रह सके. आग पर काबू पाने के लिए दमकल की तीन गाड़ियों को लगाया गया, जिन्होंने घंटों की मशक्कत के बाद आग बुझाई। मुख्यमंत्री ने लिया जायजा हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन माझी घटनास्थल पर पहुंचे. उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं.  मौके पर स्वास्थ्य सचिव, कटक जिला कलेक्टर और डीसीपी भी राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए मौजूद रहे। हादसे में 10 लोगों की मौत मुख्यमंत्री मांझी ने कहा, 'उस वार्ड में 23 मरीज भर्ती थे. बचाव अभियान से पहले ही वार्ड के अंदर 7 लोगों की मौत हो गई. बचाए जाने के बाद 3 लोगों की मौत चोटों और धुएं के कारण हुई. कुल मिलाकर 10 लोगों की मौत हुई. कम से कम पांच मरीज गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज करा रहे अस्पताल के दो कर्मचारी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। सीएम ने मृतकों के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा भी की. कैसे लगी आग? शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि ICU के एयर कंडीशनिंग सिस्टम या किसी मेडिकल उपकरण में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की वजह से ये आग लगी होगी. सरकार ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. जांच में ये भी पता लगाया जाएगा कि क्या अस्पताल में फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल के पालन में कोई लापरवाही बरती गई थी।

महिला ने कहा- पति नहीं चाहिए, लेकिन उसके स्पर्म से बच्चा चाहती हूं, हाईकोर्ट का दिमाग हुआ चकराया

मुंबई  मुंबई की एक महिला का अनोखा कानूनी विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है. 46 साल की यह महिला अपने अलग रह रहे पति के साथ बनाए गए 16 फ्रीज्ड भ्रूण (एम्ब्रियो) का इस्तेमाल कर मां बनना चाहती है. हालांकि पति इसके लिए रजामंदी नहीं दे रहा है. इसी को लेकर अब महिला ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और कहा है कि उसकी ‘मातृत्व की आखिरी उम्मीद’ कानूनी अड़चनों के कारण खत्म हो रही है। यह मामला दक्षिण मुंबई के एक दंपती से जुड़ा है, जिन्होंने 2021 में शादी की थी. इसके बाद 2022 में दोनों ने आईवीएफ प्रक्रिया के तहत पति के स्पर्म और पत्नी के अंडाणु से 16 भ्रूण तैयार कर उन्हें एक फर्टिलिटी क्लिनिक में फ्रीज करवा दिया था. हालांकि 2023 में दोनों के रिश्ते खराब हो गए और वे अलग रहने लगे. इसके बाद इन भ्रूणों के इस्तेमाल को लेकर विवाद शुरू हो गया। महिला ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में इसे वापस लेकर राष्ट्रीय असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) और सरोगेसी बोर्ड के पास पहुंची. बोर्ड ने फरवरी 2026 में उसकी मांग को खारिज कर दिया. इसके बाद महिला ने अब दिल्ली हाईकोर्ट में नई याचिका दायर कर दी है। पति की सहमति बनी कानूनी अड़चन रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का कहना है कि वह अपनी फ्रीज्ड एम्ब्रियो को एक क्लिनिक से दूसरे क्लिनिक में ट्रांसफर कराकर गर्भधारण करना चाहती है. लेकिन असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के तहत भ्रूण के इस्तेमाल या ट्रांसफर के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति जरूरी होती है. महिला का आरोप है कि उसका पति जानबूझकर सहमति नहीं दे रहा और इस तरह वह उसके मातृत्व के अधिकार को रोक रहा है। ‘मातृत्व का आखिरी मौका छिन रहा’ अपनी याचिका में महिला ने कहा कि उसकी उम्र 46 साल हो चुकी है और अब उसके पास मां बनने का बहुत कम समय बचा है. उसने अदालत से कहा कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो वह अपने ही जेनेटिक मटेरियल से मां बनने का मौका हमेशा के लिए खो सकती है. महिला ने यह भी बताया कि गर्भधारण की उम्मीद में उसने फरवरी 2024 में एक बड़ी गर्भाशय सर्जरी भी करवाई थी, जिसका पूरा खर्च उसने खुद उठाया। पति पर गंभीर आरोप याचिका में महिला ने अपने पति पर दुर्व्यवहार और छोड़ देने का आरोप लगाया है. उसका कहना है कि पति ने ‘दुर्भावना से’ अपनी सहमति रोक रखी है, जबकि उसके खिलाफ वैवाहिक और आपराधिक मामले पहले से चल रहे हैं. महिला के मुताबिक उसका पति पहले से ही अपनी पिछली शादी से एक बच्चे का पिता है, लेकिन फिर भी वह उसे मां बनने से रोक रहा है। महिला का कहना है कि एआरटी एक्ट के सेक्शन 22 के अनुसार शादी के दौरान बने भ्रूण के इस्तेमाल के लिए पति-पत्नी दोनों की सहमति जरूरी है, लेकिन कानून में यह साफ नहीं है कि अगर शादी पूरी तरह टूट चुकी हो या पति पत्नी को छोड़ चुका हो तो क्या होगा. याचिका में कहा गया है कि यह ‘कानूनी खालीपन’ उन महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन जाता है, जिनकी शादी खत्म होने की कगार पर है लेकिन कानूनी तौर पर तलाक नहीं हुआ है। मुस्लिम पर्सनल लॉ भी बना बाधा महिला ने अदालत को बताया कि उसके सामने दोहरी कानूनी समस्या है. एक तरफ पति की सहमति न होने के कारण वह एम्ब्रियो का इस्तेमाल नहीं कर सकती, दूसरी ओर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आईवीएफ जैसी प्रक्रिया सिर्फ वैध शादी के दौरान ही स्वीकार्य मानी जाती है. ऐसे में अगर वह तलाक ले लेती है तो भी आईवीएफ कराकर बच्चा पैदा करना संभव नहीं रहेगा। अदालत से क्या मांग की? महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि उसे पति की सहमति के बिना एम्ब्रियो को दूसरे क्लिनिक में ट्रांसफर करने और उन्हें अपने गर्भ में प्रत्यारोपित कराने की अनुमति दी जाए. इसके अलावा उसने अदालत से यह भी कहा है कि एआरटी एक्ट की कुछ धाराओं की व्याख्या बदली जाए या फिर राष्ट्रीय एआरटी बोर्ड को निर्देश दिया जाए कि वह ऐसे मामलों के लिए कानून में संशोधन की सिफारिश करे। महिला ने अदालत से इस मामले में जल्द सुनवाई की मांग की है, क्योंकि उसकी उम्र और घटती प्रजनन क्षमता को देखते हुए समय बेहद महत्वपूर्ण है. बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट आने वाले कुछ हफ्तों में इस याचिका पर सुनवाई कर सकता है।

8वें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में 35% इजाफा, जनवरी से एरियर का मिलेगा भुगतान

नई दिल्ली भारत सरकार द्वारा नवंबर 2025 में आधिकारिक तौर पर गठित 8वां केंद्रीय वेतन आयोग जल्द ही 7वें वेतन आयोग का स्थान लेगा, जो 2016 से प्रभावी है।भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो एक बड़ा कदम है और लाखों कर्मचारियों और सेवानिवृत्तों के वेतन, पेंशन और भत्तों में व्यापक बदलाव लाएगा। वित्त मंत्रालय वर्तमान में एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, कर्मचारी संघों और अन्य हितधारकों से 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट को तैयार करने में सहायता हेतु सुझाव आमंत्रित कर रहा है। यह सुझाव आमंत्रित करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2026 है। नवंबर 2025 में औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद से आयोग को अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। यह समीक्षा भारत में वेतन संशोधनों के लंबे इतिहास के बाद हो रही है—हाल ही में 2016 में 7वां वेतन आयोग आया था—और हालांकि न्यूनतम वेतन बढ़ाने के लिए उच्च फिटमेंट फैक्टर को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन अंतिम वित्तीय समायोजन तभी होंगे जब सरकार आयोग की अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी देगी। 7वें वेतन आयोग के तहत, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया था, जबकि अधिकतम मूल वेतन 2.5 लाख रुपये प्रति माह तय किया गया था। कर्मचारियों को बकाया कब मिलेगा? 8वें वेतन आयोग के तहत, सरकार द्वारा अंतिम सिफारिशों को मंजूरी देने में कितना भी समय लगे, 1 जनवरी, 2026 से पूर्वव्यापी बकाया मिलने की उम्मीद है। CA मनीष मिश्रा, GenZCFO के संस्थापक के अनुसार, “बकाया राशि की गणना संभवतः 1 जनवरी, 2026 से की जाएगी, जो 7वें वेतन आयोग की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है, भले ही आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद भुगतान किया जाए।” कर्मचारियों को कितनी वेतन वृद्धि की उम्मीद हो सकती है? विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन में 20-35% की संभावित वृद्धि होगी, जिसमें फिटमेंट फैक्टर 2.4 और 3.0 के बीच रहने की संभावना है। कितनी बढ़ेगी सैलरी अगर पिछली वेतन आयोगों की बात करें तो हर बार वेतन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। 7वें वेतन आयोग के लागू होने पर केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दी गई थी, जबकि अधिकतम बेसिक सैलरी 2.5 लाख रुपये प्रति माह तय की गई थी। अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में उम्मीद है कि इस बार भी सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर पर चर्चा सबसे बड़ी चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। फिटमेंट फैक्टर वही गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी तय की जाती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 20% से 35% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल के प्रतीक वैद्य के अनुसार, 8वें वेतन आयोग के अंतिम आंकड़े मुद्रास्फीति के रुझान, सरकार की वित्तीय स्थिति और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेंगे। इंडिया टुडे के अनुसार, उन्होंने कहा, “6वें वेतन आयोग ने लगभग 40% की औसत वृद्धि दी, जबकि 7वें वेतन आयोग का वेतन और भत्तों पर समग्र प्रभाव लगभग 23-25% के आसपास माना जाता है, जिसमें एक समान फिटमेंट फैक्टर 2.57 है।” “अंतिम आंकड़ा अगले 12-18 महीनों में मुद्रास्फीति, 16वें वित्त आयोग के बाद उपलब्ध राजकोषीय संसाधनों, करों में वृद्धि और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। मेरा मानना ​​है कि सरकार भत्तों और महंगाई भत्ते में समायोजन की अधिक संतुलित संरचना के साथ एक स्पष्ट और प्रभावी वृद्धि देने का प्रयास करेगी।”

भारत में IAS-IPS-IFS के 2834 पद खाली, SC-ST-OBC के कितने अधिकारी हैं?

नई दिल्ली देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सर्विस को लेकर हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं. इसके अनुसार पूरे देश में आईएएस-आईपीएस और आईएफएस अफसरों की भारी कमी है. तीनों प्रमुख सेवाओं में कुल 2834 पद खाली पड़े हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में बड़े अफसरों का बड़ा संकट है. इसके अलावा अन्य राज्यों में भी काफी पद खाली पड़े हैं. दरअसल, हाल ही में कार्मिक मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब दिया. इसमें उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं (IAS-IPS-IFS) में अफसरों की कमी के बारे में जानकारी दी. बताया कि देश में आईएएस के सबसे ज्यादा 1300 पद खाली पड़े हैं. इसी तरह आईपीएस में 505 जबकि आईएफएस में 1029 पद रिक्त हैं. इसके बाद फिर से यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission) चर्चा में है. इसे लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है. ये हैरान करने वाले आंकड़े उस दौरान सामने आए जब हाल ही में UPSC ने सिविल सर्विसेस परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत की है. इसकी अंतिम तिथि 24 फरवरी है. साल 2025 की एक जनवरी तक इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS), इंडियन पुलिस सर्विस (IPS), इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) के कुल स्वीकृत पद कितने हैं?, कितने पदों पर अफसर तैनात हैं?, कितने पद खाली पड़े हैं?, ईटीवी भारत की इस रिपोर्ट में इसके बारे में राज्यवार विस्तार से जानेंगे. यह भी जानेंगे कि इस कैडर पर देश में SC-ST-OBC वर्ग से कितने अफसर हैं?. एजीएमयूटी कैडर के राज्यों की स्थिति : इसके तहत अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम, दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर सहित सभी केंद्र शासित प्रदेश आते हैं. यहां आईएएस के कुल स्वीकृत पद 542 हैं. जबकि मौजूदा समय 406 अफसर तैनात हैं. कुल 136 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 457 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 427 पर तैनाती है. जबकि कुल 30 पद रिक्त हैं. वहीं आईएफएस के कुल 302 पद स्वीकृत हैं. 201 पर तैनाती है, जबकि 101 पद खाली हैं. आंध्र प्रदेश : आंध्र प्रदेश में IAS के 239 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 195 पर तैनाती है. जबकि 44 पद खाली हैं. इसी तरह IPS के 174 पद स्वीकृत हैं. 140 पर तैनाती है. जबकि 34 पद रिक्त हैं. आईएफएस के 82 पद स्वीकृत हैं. 67 पर तैनाती है. 15 पद खाली हैं. असम-मेघालय : इन दोनों राज्यों में IAS के 263 पद स्वीकृत हैं. 214 पर तैनाती है. जबकि 49 पद खाली हैं. IPS के 195 पद स्वीकृत हैं. 157 पर तैनाती है. 38 पद खाली हैं. आईएफएस के 142 पद स्वीकृत हैं. 90 पर तैनाती है. 52 पद रिक्त हैं. राज्यसभा में उठा खाली पदों का मुद्दा. बिहार : बिहार में IAS के 359 पद स्वीकृत हैं. 303 पर तैनाती है. जबकि 56 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 242 पद स्वीकृत हैं. 241 पर तैनाती है. जबकि एक पद खाली है. IFS के कुल 74 पद स्वीकृत हैं. 50 पर तैनाती है. 24 पद खाली हैं. छत्तीसगढ़ : IAS के 202 पद स्वीकृत हैं. 164 पर तैनाती है. जबकि 38 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 142 पद स्वीकृत हैं. 135 पर तैनाती है. जबकि 7 पद खाली हैं. IFS के कुल 153 पद स्वीकृत हैं. 116 पर तैनाती है. 37 पद खाली हैं. गुजरात : IAS के कुल 313 पद हैं. 255 पर अफसरों की तैनाती है. 58 पद खाली हैं. आईपीएस के 208 पद हैं. 203 पर तैनाती है. 5 पद खाली हैं. आईएफएस के 125 पद हैं. 77 पर अफसरों की तैनाती है. 48 पद रिक्त हैं. हरियाणा : यहां आईएएस के 215 पद हैं. इसकी तुलना में 172 पदों पर तैनाती है. 43 पद खाली है. आईपीएस के 144 पद हैं. इनमें से 127 पर तैनाती है. 17 पद खाली हैं. वहीं आईएफएस के 58 पद हैं. इनमें से 44 पर तैनाती है. जबकि 14 पद खाली हैं. हिमाचल प्रदेश : हिमाचल में 153 पद आईएएस के स्वीकृत हैं. इनमें से 117 पर तैनाती है. जबकि 36 पद खाली हैं. आईपीएस के 96 पद स्वीकृत हैं. 84 पर तैनाती है. जबकि 12 पद रिक्त हैं. इसी तरह आईएफएस के 114 पद स्वीकृत हैं. 90 पर अफसरों की तैनाती है. जबकि 24 पद खाली हैं. झारखंड : यहां आईएएस के 224 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 177 पर तैनाती है. जबकि 47 पद खाली हैं. आईपीएस के 158 पद हैं. इनमें से 143 पर तैनाती है. जबकि 15 पद खाली हैं. आईएफएस के 142 पद स्वीकृत हैं. 84 पर तैनाती है. जबकि 58 पद खाली हैं. कर्नाटक : यहां आईएएस के 314 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 273 पर तैनाती है. जबकि 41 पद खाली है. आईपीएस के 224 पद हैं. इनमें से 203 पर तैनाती है. जबकि 21 पद खाली हैं. आईएफएस के 164 पद हैं. इनमें से 113 पर तैनाती है. जबकि 51 पद खाली हैं. केरल : यहां आईएएस के 231 पद हैं. इनमें से 157 पर तैनाती है. जबकि 74 पद खाली हैं. आईपीएस के 172 पद हैं. इनमें से 150 पर तैनाती है. जबकि 22 पद रिक्त हैं. आईएफएस के 107 पद हैं. 78 पर तैनाती है. जबकि 29 पद खाली हैं. मध्य प्रदेश : एमपी में आईएएस के 459 पद हैं. इनमें से 391 पर तैनाती है. जबकि 68 पद खाली हैं. आईपीएस के 319 पद हैं. 271 पर तैनाती है. 48 पद खाली हैं. इसी कड़ी में आईएफएस के 296 पद हैं. इनमें से 209 पर तैनाती है. जबकि 87 पद खाली हैं. महाराष्ट्र : महाराष्ट्र में IAS के 435 पद स्वीकृत हैं. इनमें 359 पर अफसरों की तैनाती है. जबकि 76 पद खाली हैं. इसी तरह आईपीएस के 329 पद हैं. इनमें से 306 पदों पर तैनाती है. जबकि 23 पद खाली हैं. इसी कड़ी में आईएफएस के 206 पद हैं. इनमें 139 पर तैनाती है. जबकि 67 पद रिक्त हैं. मणिपुर : यहां आईएएस के 115 पद खाली हैं. इनमें से 80 पर तैनाती है. जबकि 35 खाली है. आईपीएस के 91 पद हैं. 85 पर तैनाती है. जबकि 6 पद रिक्त हैं. इसी तरह आईएफएस के 58 पद स्वीकृत हैं. 25 पर तैनाती … Read more

1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम, FASTag Annual Pass की कीमतों में वृद्धि

नई दिल्ली FASTag Annual Pass New Price: देश के हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. नेशनल हाईवे पर टोल पेमेंट को आसान बनाने के लिए शुरू की गई फास्टैग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) स्कीम अब थोड़ी महंगी होने जा रही है. सरकार ने फाइनेंशियल ईयर  2026-27 के लिए इस पास की कीमत में हल्की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक 1 अप्रैल से निजी वाहनों के लिए FASTag एनुअल पास की कीमत बढ़ाकर 3,075 रुपये कर दी गई है. इससे पहले इसकी कीमत 3,000 रुपये थी. यह पास प्राइवेट कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल वाहनों के लिए लागू होता है। FASTag Annual Pass क्या है बता दें कि, फास्टैग एनुअल पास को पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुरू किया गया था. इसका मकसद हाईवे पर बार-बार टोल भुगतान की परेशानी को कम करना और डिजिटल टोल कलेक्शन को बढ़ावा देना था. इस योजना के तहत अगर किसी प्राइवेट व्हीकल में वैलिड FASTag लगा है तो वह इस पास को ले सकता है. ये एनुअल पास एक्टिव होने के बाद वाहन एक साल तक या फिर अधिकतम 200 ट्रिप्स (जो भी पहले पूरा हो) तक के लिए वैलिड होगा। तेजी से बढ़ रहे हैं यूजर्स सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के आंकड़ों के मुताबिक यह योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है. फिलहाल देशभर में 50 लाख से ज्यादा वाहन मालिक फास्टैग एनुअल पास का इस्तेमाल कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि नेशनल हाईवे पर प्राइवेट कारों से होने वाले करीब 28 प्रतिशत टोल लेन-देन अब इसी एनुअल पास के जरिए किए जा रहे हैं. इससे साफ है कि नियमित रूप से हाईवे पर सफर करने वाले लोगों के बीच यह योजना काफी पसंद की जा रही है। भारत में FASTag सिस्टम की शुरुआत 2016 में हुई थी और अब यह टोल पेमेंट का मुख्य तरीका बन चुका है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 11.86 करोड़ FASTag जारी किए जा चुके हैं. इनमें से लगभग 5.9 करोड़ FASTag अभी एक्टिव हैं और देशभर के टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. मौजूदा समय में नेशनल हाईवे पर टोल से होने वाली 98 प्रतिशत से ज्यादा कमाई FASTag के जरिए ही हो रही है।