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‘PM मोदी ने यूक्रेन पर परमाणु हमला टाला’, पुतिन को कैसे किया समझाया, जानें राज

नई दिल्ली पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव बार्टोशेव्स्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय भूमिका की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक अहम हस्तक्षेप करते हुए हालात को और बिगड़ने से रोका था. IANS से बातचीत में बार्टोशेव्स्की ने दावा किया कि वर्ष 2022 के आखिर में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे बातचीत की थी. इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन में टैक्टिकल परमाणु हथियार के इस्तेमाल को लेकर रूस को पीछे हटने के लिए राजी किया. पोलैंड के उप विदेश मंत्री के मुताबिक, यह प्रधानमंत्री मोदी की बेहद सकारात्मक और जिम्मेदार वैश्विक भूमिका का उदाहरण है. उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया में जिस तरह की भूमिका निभा रहा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. पोलैंड भारत के साथ अपने रिश्तों को बेहद अहम मानता है और भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है. भारत के साथ पोलैंड के सौहार्दपूर्ण रिश्तों की चर्चा करते हुए बार्टोशेव्स्की ने कहा, ‘हमारे भारत के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं और हम दुनिया में भारत की भूमिका को स्वीकार करते हैं.’ क्या यूक्रेन पर होने वाला था परमाणु हमला? फिर उन्होंने रूस-यूक्रेन जंग में भारतीय प्रधानमंत्री की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘जैसा कि मैंने नई दिल्ली में अपने एक इंटरव्यू में बताया था, प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 के आखिर में राष्ट्रपति पुतिन से बात की थी और उन्हें यूक्रेन में टैक्टिकल न्यूक्लियर डिवाइस का इस्तेमाल करने की कोशिश करने से रोका था. यह एक सकारात्मक भूमिका थी जो प्रधानमंत्री मोदी ने निभाई और जो भारत दुनिया के मामलों में निभाता है, और मुझे उम्मीद है कि यह जारी रहेगा.’ 45 साल बाद पोलैंड की यात्रा पर गए थे पीएम मोदी पीएम मोदी के पोलैंड दौरे को याद करते हुए बार्टोशेव्स्की ने कहा, ‘हमने 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. तब वो भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर पोलैंड आए थे; 45 साल में हमारे देश आने वाले वो भारत के पहले पीएम थे. यह एक बहुत अच्छी यात्रा थी, और अब हमने ईयू के साथ विदेश व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, हम भी इसका हिस्सा हैं. मैं अभी विदेश मंत्रालय से लौटा हूं, जहां हमने सैन्य सहयोग, डिजिटल उद्योग सहयोग, सुरक्षा मुद्दे, हाई-टेक में आईटी निवेश, अंतरिक्ष में सहयोग और अन्य चीजों से जुड़े कई व्यावहारिक कदमों पर चर्चा की.’ जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने दूसरे देशों की तुलना में अमेरिका के साथ ज्यादा फायदेमंद ट्रेड डील की है, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि भारत एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति है. आप अब दुनिया में जीडीपी के मामले में चौथे नंबर पर हैं, और प्रधानमंत्री मोदी ने यह साफ कर दिया है कि आपका लक्ष्य बहुत जल्द दुनिया की तीसरी बड़ी शक्ति बनना है. भारत एक बहुत बड़ा बाजार है; लगभग डेढ़ अरब लोग यहां रहते हैं, और इस वजह से भी यह एक बहुत ही उन्नत बाजार है. इतनी क्षमता वाले देश को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है.’ भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या कहा? भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पोलैंड के डिप्टी विदेश मंत्री बोले, ‘ट्रेड डील न होने के बजाय ट्रेड डील होना बेहतर है, क्योंकि आम तौर पर टैरिफ खुशहाली की गारंटी नहीं हैं. अगर आप किसी चीज पर टैरिफ लगाते हैं, तो ये टैरिफ आमतौर पर, आखिर में, कंज्यूमर ही चुकाता है इसलिए मुझे लगता है कि टैरिफ जितने कम होंगे, उतना ही अच्छा होगा. यह अच्छी बात है कि भारत और अमेरिका एक ऐसे समझौते पर पहुंचे जिससे टैरिफ में भारी कटौती की गई.’

SC का अहम फैसला: महिला की इच्छा के बिना मां बनने के लिए अदालत नहीं कर सकती मजबूर, गर्भपात की दी अनुमति

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में महिला के प्रजनन संबंधी अधिकारों और उसकी स्वायत्तता को सर्वोपरि माना है। कोर्ट ने शुक्रवार को एक 18 वर्षीय युवती को 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। साथ ही हाई कोर्ट ने सुझाव दिया था कि युवती को बच्चे को जन्म देना चाहिए और बाद में उसे गोद दे देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा- अदालत किसी भी महिला को उसकी गर्भावस्था पूरी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, यदि वह ऐसा नहीं करना चाहती है। पूरा मामला क्या है? युवती ने 17 साल की उम्र में गर्भधारण किया था, और अब वह 18 साल 4 महीने की है। यह गर्भ एक मित्र के साथ संबंध के कारण ठहरा था। कोर्ट ने माना कि इस गर्भावस्था को जारी रखना युवती के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद दर्दनाक होगा। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि गर्भपात की प्रक्रिया से युवती की जान को कोई गंभीर खतरा नहीं है। कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां युवती के वकील ने तर्क दिया कि अवैध बच्चे को जन्म देने से जुड़े सामाजिक कलंक के कारण उसे गहरा मानसिक आघात पहुंचेगा। कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि अपीलकर्ता के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है, भले ही निर्णय लेने में देरी हुई हो। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया- हमें किसके हित को देखना चाहिए? एक अजन्मा बच्चा या वह मां जो उसे जन्म दे रही है? जस्टिस नागरत्ना ने चिंता जताई कि जब डॉक्टर कानूनी जटिलताओं के कारण मना कर देते हैं, तो महिलाएं मजबूरन झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाती हैं, जो उनके जीवन के लिए खतरनाक है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि यहां मुख्य मुद्दा यह है कि लड़की गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती। अदालत ने कहा- यह प्रश्न नहीं है कि संबंध सहमति से था या नहीं। वास्तविकता यह है कि बच्चा अवैध है और मां बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती। मां की प्रजनन स्वायत्तता को महत्व दिया जाना चाहिए। कानून क्या कहता है? भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कानून के तहत 20 सप्ताह तक महिला स्वयं गर्भपात का निर्णय ले सकती है। 20 से 24 सप्ताह के बीच मेडिकल बोर्ड की राय जरूरी होती है। 24 सप्ताह के बाद गर्भपात की अनुमति केवल अदालत दे सकती है। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए 30 सप्ताह की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी और याचिकाकर्ता से इसके लिए लिखित सहमति देने का निर्देश दिया।

इरान में महिलाओं के लिए बाइक चलाने की अनुमति, एक ऐतिहासिक बदलाव

तेहरान   ईरान की सरकार ने महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उन्हें कानूनी रूप से मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति दे दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान के मंत्रिमंडल ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे अब महिलाओं को भी दोपहिया वाहन चलाने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। दशकों पुरानी कानूनी अस्पष्टता का अंत ईरान में अब तक महिलाओं के मोटरसाइकिल चलाने पर कोई सीधा कानूनी प्रतिबंध नहीं था, लेकिन प्रशासन उन्हें लाइसेंस देने से इनकार कर देता था। इस अस्पष्टता के कारण महिलाएं सड़क पर वाहन नहीं चला पाती थीं। उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार को यातायात संहिता (Traffic Code) को स्पष्ट करने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इस वर्षों पुराने गतिरोध को समाप्त कर दिया है। घायल होने पर महिलाओं को ही माना जाता था दोषी लाइसेंस न होने के कारण ईरानी महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यदि सड़क हादसे में कोई महिला घायल होती थी, तो लाइसेंस के अभाव में उसे ही जिम्मेदार मान लिया जाता था। नए कानून के लागू होने से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और दुर्घटनाओं की स्थिति में उन्हें न्याय मिल सकेगा। ट्रैफिक पुलिस के लिए अनिवार्य निर्देश ईरानी समाचार एजेंसी इलना (ILNA) के अनुसार, सरकार ने यातायात पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं…     महिला आवेदकों को व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण देना होगा।     पुलिस की सीधी देखरेख में ड्राइविंग परीक्षा आयोजित करनी होगी।     योग्य महिलाओं को अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल चालक लाइसेंस जारी करना होगा।  

PAK में कंगाली की हालत, गटर के ढक्कन तक हो गए गायब, सख्त कानून लाने की तैयारी

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में खुले मैनहोल का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर ट्रेंड कर रहा है. दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक कराची और लाहौर से कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग सड़क पर चलते-चलते अचानक 'गायब' होते दिखते हैं. ये कोई मैजिक या ट्रिक वीडियो नहीं, बल्कि खुले मैनहोल और चोरी हुए ढक्कनों की वजह से हो रहे खतरनाक हादसे हैं. 3 साल के बच्चे का दर्दनाक वीडियो वायरल पाकिस्तान के कई मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसे कई मामलों का जिक्र है, जहां ढक्कन चोरी या गायब होने के कारण लोगों की जान पर बन आई है. सबसे ज़्यादा वायरल वीडियो कराची के निपा चौरंगी का है, जहां 3 साल का बच्चा इब्राहिम दुकान से बाहर निकलकर दौड़ता है और अचानक खुले मैनहोल में गिर जाता है. यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से फैली और पूरे पाकिस्तान में गुस्से की लहर दौड़ गई. लोगों ने नगरपालिका पर लापरवाही का आरोप लगाया और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए. मां-बेटी की मौत ने हिला दिया पंजाब लाहौर के भत्ती गेट इलाके में भी एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. यहां एक मां और उसकी 10 महीने की बच्ची खुले मैनहोल में गिरकर डूब गईं. यह वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ और पूरे पंजाब में हड़कंप मच गया. इसके अलावा शहर में बच्चों और महिलाओं के अचानक सड़क के भीतर गिरने के कई अन्य वीडियो भी सामने आए, जिन्होंने आम जनता में डर और नाराजगी दोनों बढ़ा दी. डेली पाकिस्तान के मुताबिक, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इन हादसों के बाद कड़ा कदम उठाया है. उन्होंने घोषणा की कि अब मैनहोल ढक्कन चुराने, खरीदने या बेचने वालों को 1 से 10 साल की जेल और भारी जुर्माना लगेगा. मरियम ने अफसरों को फटकारते हुए कहा कि वे हर रात यह जांचती हैं कि कहां-कहां ढक्कन गायब हैं, क्योंकि यह लोगों की जान का मामला है.मरियम नवाज ने पूरे पंजाब में ऐसे नए ढक्कन लगाने का आदेश दिया है जिन्हें बेचा न जा सके. कुछ जिलों में GPS ट्रैकर वाले कवर लगाने की योजना भी चर्चा में है, ताकि चोरी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके. ढक्कन चोरी का बढ़ता रैकेट ढक्कन चोरी की घटनाओं ने पाकिस्तान की सड़कों को और असुरक्षित बना दिया है. कई वायरल क्लिप्स में देखा गया कि कुछ लोग महंगी कारों से उतरकर मैनहोल के ढक्कन चुरा रहे हैं. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि इस्लामाबाद में 1600 से ज्यादा मैनहोल कवर गायब होने की रिपोर्ट सामने आई है. सोशल मीडिया पर लोग तंज कसते दिखे-पाकिस्तान में अब गटर के ढक्कन भी सुरक्षित नहीं! पाकिस्तान में (खासकर लाहौर, कराची जैसे बड़े शहरों में) गटर के ढक्कन की चोरी का मुख्य कारण आर्थिक संकट और स्क्रैप (कबाड़) में लोहे की ऊंची कीमत है.इस लोहे को चुराकर कबाड़ी बाजार, फैक्ट्रियों या हार्डवेयर दुकानों में बेच दिया जाता है, जिससे चोरों को तुरंत कुछ सौ से हजार रुपये मिल जाते हैं.

जुमे की नमाज के दौरान इस्लामाबाद में बड़ा धमाका, 31 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

 इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में स्थित इमाम बारगाह खदीजत-उल-कुबरा में जोरदार धमाका हुआ है. धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंच गईं और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, यह ब्लास्ट जुमे की नमाज के दौरान हुआ जिसमें 31   से अधिक लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हो गए. इस्लामाबाद से संवाददाता हमजा आमिर ने बताया कि धमाका शुक्रवार को तब हुआ जब जुमे की नमाज अदा की जा रही थी. इसमें 31  लोगों की मौत हो गई और 80 से ज्यादा घायल हो गए. हालांकि अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है. पूरे शहर में इमरजेंसी घोषित अधिकारियों के मुताबिक, हालात को देखते हुए पूरे शहर में इमरजेंसी लागू कर दी गई है. सुरक्षा एजेंसियों ने इमाम बारगाह और आसपास के इलाके को घेर लिया है और किसी भी अनहोनी से बचने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है. फिलहाल31   से अधिक लोगों के हताहत होने की खबर है. धमाके के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. जांच एजेंसियां मौके से सबूत जुटा रही हैं और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि विस्फोट कैसे और किन हालात में हुआ. मामले में आगे की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. धमाके में कई घायल पाकिस्तानी मीडिया डॉन न्यूज के मुताबिक, इस विस्फोट में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की आशंका जताई जा रही है. यह धमाका इस्लामाबाद के शहज़ाद टाउन इलाके में स्थित तरलाई इमामबाड़ा में हुआ. घायलों को तुरंत अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है. इस्लामाबाद के पॉलीक्लिनिक, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) और सीडीए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित की गई है. PIMS के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि मुख्य इमरजेंसी, ऑर्थोपेडिक, बर्न सेंटर और न्यूरोलॉजी विभाग को सक्रिय कर दिया गया है. घायलों को PIMS और पॉलीक्लिनिक अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है.  

“आप 75 के हो गए,” पर पीएम मोदी ने जवाब दिया, “अभी तो 25 बाकी हैं”

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पर चर्चा के दौरान छात्रों से संवाद में अहम बात कही। उन्होंने कहा कि किसी को भी बीते वक्त का हिसाब लगाने की बजाय भविष्य के बारे में विचार करना चाहिए। पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन के एक वाकये का जिक्र किया और कहा, 'एक नेता ने मुझे मेरे जन्मदिन पर फोन किया था। 17 सितंबर को फोन करके मुझसे कहा कि आपके 75 हो गए हैं। इस पर मैंने कहा कि अभी 25 बाकी हैं। मैं बीते हुए को गिनता नहीं हूं, जो बचा है, उसकी गिनती करता हूं।' इसी को लेकर उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि इसलिए मैं आप लोगों से भी कहता हूं कि बीता है, उसकी गिनती में समय बर्बाद मत कीजिए। जो बचा है, उसे जीने के बारे में सोचिए। यह बात प्रधानमंत्री ने तब कही, जब पूर्वोत्तर की एक छात्रा ने उनसे कहा कि मेरा जन्मदिन भी 17 सितंबर को ही होता है। पीएम मोदी ने इस दौरान परीक्षा को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि कई बार अखबारों में छपता है कि इस बार परीक्षा काफी कठिन रही। आखिर इसका क्या कारण होता है? पेपर तो सिलेबस से बाहर का नहीं होता है। फिर ऐसा क्यों कहा जाता है कि परीक्षा कठिन थी। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों को शॉर्ट में पढ़ने की आदत होती जा रही है। पहले स्योर सजेशन दिए जाते थे। फिर मॉडल पेपर बढ़े जाने लगे और अंत में यह हुआ कि बीते 10 सालों के प्रश्न पत्र आने लगे। परीक्षा में चर्चा में स्टूडेंट को पीएम मोदी ने ऐसा क्यों कहा? परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण आज यानी 6 फरवरी को सुबह 10 बजे आयोजित किया गया था. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल एग्जाम के मुद्दे पर बात की बल्कि छात्रों के साथ हंसी-मजाक भी की. उन्होंने स्टूडेंट्स को एग्जाम स्ट्रेस से निपटने के साथ ही कई विषयों पर टिप्स दिए हैं. लेकिन इस दौरान एक वाक्या को लोग बार-बार देख रहे हैं और खूब हंस रहे हैं.  वहां पर मौजूद बच्चों ने पीएम मोदी को अपने-अपने देश की यूनिक चीजें गिफ्ट की. इस दौरान वहां पर मौजूद एक छात्रा ने उन्हें चाय की पत्ति गिफ्ट किया.  इसे देखकर पीएम ने कहा कि चाय वाले को चाय… यह सुनते वहां का माहौल पूरा बदल गया और सारे छात्र हंसने लगे. फिर छात्रा उन्हें बताती है कि ये आर्गेनिक चाय है. पीएम ने उस छात्रा को ये भी कहा कि तुम कविता अच्छा लिखती हो, लिखना जारी रखना. अब जो छात्र बीते 10 साल के पेपर ही पढ़कर पहुंचे हैं और यदि उनसे अलग सिलेबस की कोई और चीज पूछ ली गई तो उन्हें परीक्षा कठिन लगती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बीमारी तब भी थी, जब मैं पढ़ता था। इस बीमारी को फैलाने का कम कुछ टीचर भी फैलाते हैं। उन्हें लगता है कि मेरी क्लास का रिपोर्ट कार्ड अच्छा रहे। इसलिए वही चीज पढ़ाते हैं, जिससे नंबर मिलें। लेकिन अच्छे अध्यापक सर्वांगीण विकास की बात करते हैं और पूरा सिलेबस पढ़ाते हैं। इस दौरान उन्होंने एक गेंदबाज का उदाहरण दिया और कहा कि यदि वह अपने कंधे को ही मजबूत करता रहे तो क्या अच्छा खिलाड़ी बन पाएगा। पीएम ने लाइट किया छात्रों का मूड  प्रधानमंत्री का यह भाव हल्के‑फुल्के अंदाज में छात्रों को जोड़ने और माहौल को सहज बनाने का तरीका था. पीएम मोदी अक्सर अपनी निजी यात्रा और जीवन की शुरुआत का जिक्र करते हैं, जब वे रोज रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले “चाय वाले” की भूमिका भी निभा रहे थे. यह उदाहरण उन्होंने साधारण जीवन के अनुभव और मेहनत का संदेश देने के लिए कई बार इस्तेमाल किया है.  इस दौरान पीएम मोदी ने छात्रों से उनके पढ़ाई, मार्क्स, AI, टीचर्स समेत कई विषयों पर संवाद किया है.  जो पढ़ते हैं, वो भूल जाते हैं… कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पीएम मोदी से पूछा गया कि अक्सर ही ऐसा होता है कि हम जो भी पढ़ते हैं, वह बहुत जल्दी भूल जाते हैं. इसके जवाब में पीएम ने छात्रों से कहा कि आपको हमेशा आज का दिन याद रहेगा क्योंकि आप इसमें पूरी तरह से इनवॉल्व हैं. ऐसे में आप खुद को कम होशियार बताएं और ज्यादा होशियारी से बात करें या राय लें.   मार्क्स बन गई है बीमारी  इस दौरान पीएम मोदी ने उन्हें ये भी बताया कि उन्हें केवल मार्क्स के पीछे नहीं भागना चाहिए. उन्होंने मार्क्स को बीमारी बताया है. ऐसे में अपने मन को नंबर से जोड़ने के बजाय जीवन में कहां जाएं, इसपर ध्यान देने की जरूरत है.  PM मोदी बोले- पढ़ाई एक माध्यम है, उसके लिए जिंदगी नहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि उसके लिए यह जरूरी है कि पूरा शरीर मजबूत हो। मानसिक रूप से सक्षम हो। इसी तरह परीक्षा के लिए पूरी जिंदगी नहीं है। यह जिंदगी को संवारने का एक माध्यम है, लेकिन यही अंतिम लक्ष्य नहीं है। अंतिम लक्ष्य यह है कि संपूर्ण जिंदगी बेहतर बने। हमें 10 सालों के पेपर पढ़ने जैसी सोच के साथ खुद को सीमित नहीं करना चाहिए। जिंदगी सबसे उत्तम बने, इसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए।

लोकसभा में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित, 9 फरवरी तक नहीं होगी बैठक

नई दिल्ली लोकसभा में आज भी कार्यवाही की हंगामेदार शुरुआत हुई. लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य पोस्टर लहराते हुए वेल में आ गए. स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आप नियोजित तरीके से गतिरोध उत्पन्न करना चाहते हैं, गरिमा नहीं रखना चाहते. तो ऐसा सदन मैं नहीं चला सकता.लोकसभा में जोरदार हंगामा, नहीं चल सकी कार्यवाही, 9 फरवरी तक स्थगित. स्पीकर ने सदस्यों को दूसरी तरफ जाकर किसी भी तरह की बातचीत करने से भी सख्ती से मना किया और इसके बाद कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. वहीं, राज्यसभा में कार्यवाही की आज शांतिपूर्ण शुरुआत हुई है. राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही चल रही है. शून्यकाल के दौरान सदस्य जनहित से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं. विपक्षी सांसदों ने लगाए जय संविधान के नारे, कार्यवाही 9 फरवरी तक स्थगित विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में जय संविधान के नारे लगाए. 12 बजे कार्यवाही जब दूसरी बार शुरू हुई, विपक्षी सांसद हाथों में प्लेकार्ड लेकर नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए. विपक्षी सदस्यों से पीठासीन ने अपनी चेयर पर जाने की अपील की, लेकिन इसका असर नहीं हुआ. इसके बाद पीठासीन ने सदन की कार्यवाही 9 फरवरी को दिन में 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.  'प्ले कार्ड लेकर नहीं दिखा सकते, ये नियमों के विपरीत', पीठासीन की विपक्ष को नसीहत पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की. उन्होंने कहा कि हम सदन चलाना चाहते हैं. पीठासीन ने कहा कि हम बजट पर चर्चा शुरू कराना चाहते हैं. लेकिन हम ऐसे सदन नहीं चला सकते. आप प्ले कार्ड लेकर आएंगे, लहराएंगे, ये नियमों के अनुरूप नहीं है. पीठासीन की बार-बार अपील के बावजूद हंगामा जारी रहा. इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही 9 फरवरी, 11 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी. लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू, हंगामे के बीच लिए जा रहे लिस्टेड बिजनेस लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है. सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया है. हंगामे के बीच ही सदन में आज के लिए लिस्टेड बिजनेस लिए जा रहे हैं.

मुंबई मेयर चुनाव की रेस में बीजेपी के 3 नाम, शिंदे की रणनीति क्या होगी?चौंका सकता है उद्धव गुट

मुंबई  महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनाव नतीजे आने के तीन हफ्ते के बाद अब मुंबई में बीएमसी के मेयर चुनाव काउंटडाउन शुरू हो गया है. मुंबई से सटे सभी शहरों में मेयर चुने जाने के बाद अब कहीं जाकर बीएमसी की बारी है. बीएमसी मेयर पद के लिए 11 फरवरी को चुनाव है, जिसके लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो रही है. ऐसे में सभी की निगाहे लगी है कि मुंबई का नया मेयर कौन होगा?  मुंबई का मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है. ऐसे में मेयर के लिए 6 फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है और 7 फरवरी तक चलेगी.  इसके बाद 11 फरवरी को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है और उसी दिन मेयर और डिप्टीमेयर के लिए चुनाव होंगे.  बीएमसी चुनावों में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला है.  ऐसे में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं, जिसका समर्थन हासिल कर अपने मेयर बना सकती है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी कैसे शिंदे के साथ बैलेंस बनाकर अपना मेयर बनाती है?  बीएमसी का मेयर चुनाव बना रोचक मुंबई के 227 सीटों वाली बीएमसी में मेयर के लिए 114 नगर सेवकों की जरूरत होती है. बीएमसी में बीजेपी के पास सबसे अधिक 89 नगर सेवक हैं जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 29 पार्षद हैं. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 नगर सेवक हैं तो कांग्रेस के पास 24 सीटें है.  शरद पवार की पार्टी एनसीपी के पास महज एक पार्षद है तो अजित पवार की एनसीपी के 3 पार्षद हैं. राज ठाकरे की पार्टी मनसे के 6 पार्षद हैं तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के 8  और समाजवादी पार्टी के 2 पार्षद हैं.  मुंबई में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को कुल मिलाकर 118 नगर सेवक हो रहे हैं. इस तरह से महायुति को स्पष्ट बहुमत का नंबर होने के बावजूद मेयर पद के लिए दोनों की सहमति  नहीं बन पा रही है. वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी मेयर के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने का ऐलान करके मुकाबले को रोचक बना दिया है. शिंदे-बीजेपी में कैसा बनेगा फॉर्मूला बीएमसी चुनाव के नतीजे ऐसे आए हैं कि कोई भी पार्टी अपने दम पर अपना मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है. मुंबई चुनाव में बीजेपी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए एकनाथ शिंदे की बैसाखी की जरूरत होगी. शिदे बीएमसी में 29 पार्षद लेकर किंगमेकर के रोल में है, जिनके समर्थन के बिना बीजेपी के सियासी मंसूबे के कामयाब नहीं होंगे.  बीजेपी अजित पवार की एनसीपी के पार्षद को मिलाकर भी अपना मेयर नहीं बना सकती है. ऐसे में शिंदे के साथ ही सहमति का फॉर्मूला बनाना होगा. शिंदे भी मुंबई में अपना मेयर चाहते हैं, जिसके लिए सार्वजनिक रूप से मांग भी उठा चुके हैं. ऐसे में बीजेपी बीएमसी में कब्जा जमाने के लिए डिप्टीमेयर का पद शिंदे की शिवसेना को देने का ऑफर दे सकती है. इसके बाद ही बीजेपी अपना मेयर बना पाएगी, लेकिन उसके लिए शिंदे की रजामंदी जरूरी है.  उद्धव ठाकरे का क्या है सियासी गेम  मुंबई के मेयर पद लेकर उद्धव ठाकरे खेमा एक्टिव है.  शिवसेना (यूबीटी) मुंबई मेयर और उपमेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने का दांव चल सकती है. मेयर चुनाव को लेकर शुक्रवार दोपहर मातोश्री में पार्टी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिवसेना (UBT) के मुंबई के विधायक और कुछ प्रमुख पार्षद मौजूद रहेंगे.  मेयर चुनाव को लेकर इसी बैठक में यह अंतिम फैसला लिया जाएगा कि पार्टी बीएमसी में अपना उम्मीदवार उतारेगी या नहीं. बीएमसी में शिवसेना(यूबीटी) के नेता किशोरी पेडणेकर ने व्हीप जारी कर सभी पार्षदों को 11 फरवरी तक मुंबई से बाहर नहीं जाने के आदेश दिए हैं. संजय राउत ने दावा किया है कि शिवसेना खेमे के कई पार्षद और एकनाथ शिंदे खुद भी नहीं चाहते हैं कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बने?  BMC मेयर के लिए BJP से रेस में 3 नाम  बैठक होगी और नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा. बीजेपी की ओर से मेयर पद के लिए तीन नामों पर चर्चा हो रही है. इनमें राजश्री शिरवलकर, ऋतु तावड़े और शीतल गंभीर का नाम शामिल है.  वहीं, डिप्टी मेयर का पद शिंदे गुट की शिवसेना के खाते में जाएगा. शिवसेना को दिए जाने वाले डिप्टी मेयर के पद के लिए दो नामों पर चर्चा हो रही है. इसमें तृष्णा विश्वासराव और यामिनी जाधव का नाम शामिल है. वहीं स्थायी समिति के अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास रहेगा. मुंबई महानगरपालिका में सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षण की घोषणा की गई है. इसलिए, मुंबई की बागडोर एक महिला के हाथों में होगी. क्या मुंबई में मेयर चुनाव निर्विरोध होंगे?  एबीपी माझा के मुताबिक, मुंबई मेयर को लेकर चर्चा के बीच यह भी खबर है कि ठाकरे की शिवसेना मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए उम्मीदवार उतारेगी. इस संबंध में ठाकरे की शिवसेना के नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने भी संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि हमारे लोग काम कर रहे हैं. इसलिए, ठाकरे की शिवसेना की ओर से 7 फरवरी को महापौर पद के लिए आवेदन दाखिल करने की संभावना है.  बीएमसी चुनाव में बहुमत न मिलने के बावजूद, ठाकरे की शिवसेना (UBT) अपना उम्मीदवार उतारेगी. बीजेपी-शिंदे गठबंधन के 138 सदस्य हैं, जिनमें बीजेपी के 89 और शिंदे शिवसेना के 29 पार्षद शामिल हैं. इसलिए, बीजेपी के मेयर के चुनाव में कोई समस्या नहीं होगी. कैसे की जाती है स्थायी समिति की गणना? स्थायी समिति के नतीजों के बाद आए आंकड़ों के अनुसार, विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों को 13-13 सदस्य मिले. इसलिए, स्थायी समिति में अपनी ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से शिंदे शिवसेना और बीजेपी ने एनसीपी के अजित पवार गुट की मदद लेने का फैसला किया है. शिंदे शिवसेना ने अपना गुट रजिस्टर्ड करा लिया है और अजित पवार गुट एनसीपी के साथ सहयोगी गुट के रूप में पंजीकरण कराने के लिए बातचीत चल रही है. हालांकि, … Read more

ट्रंप की नजर दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार पर, बलूचिस्तान में अमेरिकी निवेश से पाक का खजाना लुटेगा

वाशिंगटन  पाकिस्तान के बलूचिस्तान को खजानों की धरती कहा जाता है. बलूचिस्तान की बंजर जमीन के अंदर खूब खजाने दबे हैं. बलूचिस्तान रेयर अर्थ मिनिरल्स से भरा है. दुनिया के सबसे बड़े सोने का भंडार भी यहीं है. यही कारण है कि चीन भी इसमें इंट्रेस्ट लेता रहा है. अब इसी बलूचिस्तान की धरती पर अमेरिका की नजर पड़ गई है. जी हां, बलूचिस्तान के सोना-चांदी और तांबा समेत कई रेयर अर्थ मिनिरल्स को पाने की ख्वाइश में अमेरिका पाकिस्तान में पानी की तरह पैसा बहाने जा रहा है. अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में दुनिया के सबसे बड़े सोने-तांबे के भंडार ‘रेको डीक माइन में 1.3 अरब डॉलर (करीब 117,594,574,500 करोड़ रुपये) का निवेश करने का ऐलान कर दिया है. यह पैसा अमेरिका के नए प्रोजेक्ट ‘वॉल्ट’ का हिस्सा है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिन ही लॉन्च किया था. दरअसल, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह अपने ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के हिस्से के रूप में पाकिस्तान की रेको डिक खदान में 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा. बुधवार को विदेश विभाग की ओर से घोषित इस परियोजना का मकसद महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी के लिए वैश्विक बाजार को नया आकार देना है. अमेरिका का मकसद चीन से भी जुड़ा है. रेयर अर्थ मिनिरल्स का बादशाह चीन है. उसे टक्कर देने के लिए ही अमेरिका ने यह चाल चली है. कहां है यह खजाने का भंडार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेको डिक बलूचिस्तान प्रांत में है, यह दुनिया का सबसे बड़ा सोने और तांबे का भंडार है. अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार, रेको डिक ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के लिए अमेरिका के बाहर किया गया एकमात्र निवेश भी है. प्रोजेक्ट वॉल्ट की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी, 2026 को की थी, जो यूनाइटेड स्टेट्स एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के चेयरमैन के नेतृत्व में एक पहल थी. रेको डीक में क्या खजाना है? पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रेको डिक खदान दुनिया के सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडारों में से एक है. रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में अनुमानित 5.9 बिलियन टन अयस्क है, जिसमें 0.41 फीसदी तांबा और 41.5 मिलियन औंस सोने का भंडार है. यानी दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड-कॉपर डिपॉजिट. बलूचिस्तान के चागई पहाड़ों में यह स्थित है. इलाका ज्वालामुखी चेन का हिस्सा है, जो अफगानिस्तान बॉर्डर तक फैला हुआ है. अब समझते हैं कि आखिर प्रोजेक्ट वॉल्ट क्या है? डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिका की ‘स्ट्रैटेजिक क्रिटिकल मिनरल्स रिजर्व’ बनाने के लिए शुरू किया है. इसका मकसद है- रेयर अर्थ मिनिरल्स के मामले में चीन पर निर्भरता कम करना और ग्लोबल मार्केट को रीशेप करना. अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ने इसके लिए 10 अरब डॉलर का सबसे बड़ा लोन मंजूर किया है. कुल 12 अरब डॉलर का यह प्रोजेक्ट अमेरिका के अंदर कई माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च हो रहा है. लेकिन एक ही विदेशी निवेश है और वह है पाकिस्तान का रेको डीक. विवाद क्या 2011 में पाकिस्तान ने चिली की एंटोफागास्टा और कनाडा की बैरिक गोल्ड की कंपनी टेथियन को माइनिंग राइट्स देने से मना कर दिया था. मामला इंटरनेशनल कोर्ट तक गया. अब बैरिक गोल्ड फिर से प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, लेकिन हाल ही में बलूचिस्तान में सुरक्षा घटनाओं के कारण उसने पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा शुरू कर दी है. फिर भी अमेरिका का 1.3 अरब डॉलर का निवेश आगे बढ़ रहा है. अमेरिका क्यों आया बलूचिस्तान? अमेरिका को क्रिटिकल मिनरल्स (तांबा, सोना, रेयर अर्थ्स) की जरूरत है. .ये रेयर अर्थ मिनिरल डिफेंस, इलेक्ट्रिक कार, टेक्नोलॉजी सबके लिए जरूरी हैं. चीन इनकी सप्लाई चेन पर दबदबा रखता है. रेको डीक में निवेश इसका सबसे बड़ा विदेशी कदम है. बलूचिस्तान में अलगाववादी मूवमेंट और सुरक्षा इश्यूज हैं, फिर भी अमेरिका ने दांव लगाया है. अमेरिका की नजर अब बलूचिस्तान के सोने पर टिक गई है. और लगता है आसिम मुनीर की वाइट हाउस में बिरयानी वाली लंच की कीमत अमेरिका इसी से वसूलेगा.

भारत की खाड़ी देशों से मजबूत व्यापारिक दोस्ती, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने  एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए बातचीत फिर से शुरू होने जा रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं। GCC छह खाड़ी देशों का संगठन है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग 5000 साल पुराने हैं। वर्तमान में, लगभग 1 करोड़ भारतीय इन देशों में रह रहे हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और नीतियों में स्थिरता लाना है। पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते का एंगल भारत और GCC के बीच यह बातचीत उस समय फिर से शुरू हो रही है जब क्षेत्र की भू-राजनीति काफी जटिल है। सितंबर 2025 में, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक 'सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता' (SMDA) पर हस्ताक्षर किए थे। यह रक्षा समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य गतिरोध (ऑपरेशन सिंदूर) के कुछ महीनों बाद हुआ था। ज्ञात हो कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में खटास एक तरफ जहां पाकिस्तान और सऊदी अरब करीब आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है। विमानतल सौदा रद्द: UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के कुछ ही समय बाद UAE ने पाकिस्तान के साथ एक बड़ा समझौता रद्द कर दिया। पाकिस्तानी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, UAE ने इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रबंधन से जुड़ा सौदा इसलिए स्थगित कर दिया क्योंकि पाकिस्तान किसी स्थानीय साझेदार को नामित नहीं कर सका। सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तानी पक्ष ने अंतिम कॉल लेटर भेजकर स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन UAE ने यह कहते हुए असमर्थता जताई कि वह अब तक किसी नामित इकाई की पुष्टि नहीं कर सका है। रणनीतिक कारण: पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता करने के बाद से UAE और पाकिस्तान के बीच दूरियां बढ़ी हैं। भारत-UAE की बढ़ती नजदीकियां: UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की हालिया दिल्ली यात्रा ने इन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। भारत-UAE: $200 बिलियन का लक्ष्य UAE के राष्ट्रपति की संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण भारत यात्रा के कुछ ही घंटों बाद, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 2032 तक 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। खाड़ी देशों में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी और दूसरी ओर UAE के भारत के साथ बढ़ते संबंध इस खाड़ी देश की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाते हैं।