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आर्मी चीफ की हुंकार: PAK के 8 कैंपों पर सेना की नजर, संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत एक्शन होगा

 नई दिल्ली भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 दोपहर 12 बजे से मानेकशॉ सेंटर में वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा कि IB और LC के सामने 8 आतंकी कैंप हैं. जिसमें ट्रेनिंग जैसी गतिविधि चल रही है. सेना की नजर है. अगर एक गलती की तो तुरंत सख्त एक्शन लिया जाएगा.  यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आर्मी डे (15 जनवरी) से पहले हुई, जिसमें उन्होंने देश की सुरक्षा स्थिति, सीमाओं पर हालात, आधुनिकीकरण और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की.  उत्तरी सीमाओं पर स्थिति सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी सीमाओं (चीन के साथ) पर स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. उच्च स्तर पर बातचीत से मदद मिल रही है. स्थिति स्थिर है, लेकिन लगातार सतर्क रहने की जरूरत है. सेना की तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है. पश्चिमी मोर्चा और ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम हमले के बाद 22 मिनट में 'ऑपरेशन रीसेट' रणनीति से कार्रवाई की गई. ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है. पाकिस्तान की कोई भी भविष्य की गलती का सख्त जवाब दिया जाएगा. जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील है, लेकिन नियंत्रण में है. पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को भारत-चीन सीमा पर बेअसर कर दिया गया है. मणिपुर और पूर्वोत्तर की स्थिति मणिपुर में स्थिति स्थिर हो रही है. सुरक्षा बलों और सरकार के समन्वित प्रयासों से सुधार हुआ है. म्यांमार में चुनाव खत्म होने के बाद भारत और म्यांमार की सेनाएं बेहतर तरीके से सहयोग कर सकेंगी. पूर्वोत्तर में कुल मिलाकर हालात सुधर रहे हैं. आधुनिकीकरण पर फोकस सेना का मुख्य ध्यान अब आधुनिकीकरण पर है. जनरल द्विवेदी ने कहा कि उन्नत ब्रह्मोस मिसाइल, बेहतर क्षमता वाले ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन (घूमने वाली मिसाइलें) जल्द आने वाली हैं. 90 प्रतिशत से ज्यादा गोला-बारूद अब स्वदेशी बन रहा है. महिलाओं की भर्ती CMP (कॉमन मेडिकल पैरामेडिकल?) के बाद अब AEC (आर्मी एजुकेशनल कोर) और मेडिकल (नॉन-टेक्निकल) में महिलाओं को सैनिक/अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाएगा. अन्य महत्वपूर्ण बातें सेना 2026 को 'नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी का वर्ष' घोषित कर चुकी है, जिससे रियल-टाइम निर्णय और युद्ध क्षमता बढ़ेगी. सेना प्रमुख ने जोर दिया कि सेना स्वदेशी तकनीक, संयुक्तता और नवाचार पर काम कर रही है.

ईरान में उथल-पुथल, US ने नागरिकों को निकलने को कहा , मलाला का महिलाओं को समर्थन संदेश

तेहरान   ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. करीब 15 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं. इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को राजधानी तेहरान से हुई थी, जो देखते ही देखते पूरे देश में फैल गए. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक शुरुआत में आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उठी आवाजें अब व्यापक असंतोष का रूप ले चुकी हैं. एजेंसी का दावा है कि ये प्रदर्शन अब ईरान के 186 शहरों और कस्बों तक पहुंच चुके हैं. अमेरिका में स्थित एक मानवाधिकार संगठन के मुताबिक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक लगभग 646 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो पाई है. इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी तेज होती जा रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान में हस्तक्षेप के लिए कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है. ट्रंप के बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. वहीं ईरान की ओर से सख्त लेकिन संतुलित रुख सामने आया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि ईरान का किसी पर सैन्य कार्रवाई करने का इरादा नहीं है, लेकिन अगर देश पर हमला हुआ तो वह युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. इससे जुड़ी हुई हर अपडेट हम आपको दे रहे हैं, तो लगातार हमारे साथ बने रहिए.   ईरान में हालात बिगड़े, अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा ‘तुरंत ईरान छोड़ दें’ अमेरिका ने ईरान में चल रहे हालात के बीच अपने नागरिकों से कहा है कि वे देश छोड़ दें. अमेरिका का कहना है कि प्रदर्शन हिंसक भी हो सकते हैं. ऐसे में गिरफ्तारियां और लोगों के घायल होने का खतरा है. सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, कई सड़कें बंद हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित है और इंटरनेट भी कई जगह बंद कर दिया गया है. ईरान सरकार ने मोबाइल, लैंडलाइन और देश के इंटरनेट नेटवर्क पर पाबंदी लगा रखी है और एयरलाइंस ने ईरान आने-जाने वाली उड़ानें रद्द या सीमित कर दी हैं. ऐसे में अमेरिकी वर्चुअल एंबेसी ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि इंटरनेट बंद रह सकता है, इसलिए दूसरे तरीके से संपर्क की तैयारी रखें. अगर सुरक्षित हो तो ईरान छोड़कर जमीन के रास्ते आर्मेनिया या तुर्की जाने पर विचार करें. उपद्रव के बीच मलाला यूसुफजई का क्या संदेश नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये विरोध अचानक नहीं हुए। ईरान में सरकार ने बहुत पहले से ही लड़कियों और महिलाओं की आजादी पर सख्त पाबंदियां लगा रखी हैं। खासकर शिक्षा में उन्हें बहुत कम अधिकार मिलते हैं। उन्होंने कहा, ‘दुनिया की बाकी लड़कियों की तरह ईरानी लड़कियां भी सम्मान और गरिमा के साथ जीना चाहती हैं। वे सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी में अपनी मर्जी से फैसले लेना चाहती हैं।’ मलाला यूसुफजई ने कहा, ‘ईरान के लोग कई सालों से इस अन्याय के खिलाफ बोलते आ रहे हैं। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर भी उनकी आवाज दबा दी जाती रही है। ये नियम सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं हैं। पूरे समाज में महिलाओं पर अलग तरह के नियंत्रण हैं – जैसे अलग-अलग बैठना, हर समय निगरानी रखना और गलती करने पर सजा मिलना।’ उन्होंने कहा कि इन सबकी वजह से महिलाओं को अपनी पसंद की जिंदगी जीने, फैसले लेने और सुरक्षित महसूस करने का हक नहीं मिल पाता। ईरानी महिलाएं और लड़कियां अब अपनी आवाज सुनाई देने और अपना भविष्य खुद तय करने की मांग कर रही हैं। ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी बोलीं – वे जरूरी समझेंगे, तो भेज देंगे सेना व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बड़ी खासियत यह है कि वे हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं. उन्होंने बताया कि हवाई हमले भी उन कई विकल्पों में शामिल हैं, जिन पर अमेरिकी राष्ट्रपति विचार कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप के लिए कूटनीति हमेशा पहली पसंद रहती है. लेविट के मुताबिक राष्ट्रपति ने पिछली रात कहा था कि ईरानी सरकार सार्वजनिक रूप से जो बयान दे रही है, वह उन संदेशों से अलग हैं, जो अमेरिकी प्रशासन को निजी तौर पर मिल रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्पों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते. अगर और जब वे इसे जरूरी समझेंगे, तो सेना का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे. लेविट ने कहा कि यह बात ईरान से बेहतर कोई नहीं जानता. ईरानी महिलाओं के समर्थन में क्या कहा मलाला यूसुफजई ने साफ कहा कि वे ईरान की जनता और खासकर लड़कियों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का भविष्य ईरान के लोग ही खुद बनाएं और इसमें महिलाओं व लड़कियों की अहम भूमिका हो। कोई बाहर का देश या दमनकारी सरकार इसमें दखल न दे। मालूम हो कि अभी ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं के अधिकारों पर रोक के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। मलाला की यह बात दुनिया भर में ईरानी महिलाओं के संघर्ष को मजबूत समर्थन दे रही है।     तुरंत ईरान छोड़ दें और ऐसा प्लान बनाएं जिसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न रहना पड़े.     अगर नहीं निकल सकते, तो किसी सुरक्षित जगह पर रहें और अपने पास खाना, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान जमा करके रखें. अमेरिका ने ईरान पर टैरिफ बम फोड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान पर और दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ बम फोड़ दिया है. उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को चूर करने के लिए उन देशों पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो ईरान के साथ मौजूदा हालात में कारोबार कर रहे हैं. अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करके उन्होंने ये जानकारी दी कि आगे ईरान और उसके साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाएगा. हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि इसे … Read more

ब्लिंकिट हटाएगा 10 मिनट डिलीवरी फीचर, सरकार की चेतावनी के बाद जोमैटो-स्विगी से भी मंत्री ने की चर्चा

 नई दिल्ली 10 मिनट में डिलीवरी वाले क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर अब सरकार सख्त हो गई है. डिलीवरी बॉय की सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए अब सरकार ने हस्तक्षेप किया है. सरकार के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने अभी सभी ब्रांड से 10 मिनट डिलीवरी का फीचर हटाने का ऐलान कर दिया है. श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मुद्दे पर क्विक कॉमर्स सेक्टर में सक्रिय कंपनियों से बात की थी. इसका असर अब दिखने लगा है. ब्लिंकिट अब अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट में डिलीवरी की बात हटाने जा रहा है. सूत्रों की मानें तो ब्लिंकिट के बाद बाकी कंपनियों की ओर से भी जल्द ही इस तरह का ऐलान किया जा सकता है. केंद्रीय श्रम मंत्री ने ब्लिंकिट के अलावा जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी बात की है और उन्हें भी डिलीवरी ब्यॉज की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। यह कदम दिसंबर के आखिर में अलग-अलग प्लेटफॉर्म के डिलीवरी वर्कर्स की हड़ताल के कुछ हफ़्ते बाद आया है। गिग वर्कर्स के संगठन ने इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की स्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी जैसे मुद्दे उठाए थे। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया को सभी कंपनियों ने आश्वासन दिया है कि वो अपने ब्रांड के विज्ञापनों, सोशल मीडिया से 10 मिनट में डिलीवरी की समय सीमा हटाएंगे. बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों से बात की थी. मनसुख मांडविया ने इन कंपनियों के अधिकारियों से डिलीवरी के लिए समय सीमा हटाने की बात कही थी. केंद्रीय मंत्री के साथ बातचीत में सभी कंपनियों ने टाइम लिमिट अपने विज्ञापनों से हटाने पर सहमति व्यक्त की थी. गौरतलब है कि डिलीवरी बॉय की सिक्योरिटी को लेकर चिंता जताते हुए 10 मिनट डिलीवरी के खिलाफ पूरे देश में एक मुहिम सी चल पड़ी थी.  गिग वर्कर्स ने की थी हड़ताल गिग वर्कर्स का तर्क था कि इतने कम समय में डिलीवरी का वादा न केवल यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए उकसाता है, बल्कि उनकी जान को भी जोखिम में डालता है. हड़ताल की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यवसाय का मॉडल कर्मचारियों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं चलाया जा सकता. मंत्रालयों की बैठक और कड़े फैसले इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, केंद्रीय मंत्री ने क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों- ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक का मुख्य एजेंडा डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा और उन पर पड़ने वाले मानसिक व शारीरिक दबाव को कम करना था. ब्लिंकिट ने हटाई 10 मिनट की डिलीवरी सूत्रों के अनुसार, ब्लिंकिट (Blinkit) ने पहले ही निर्देश पर कार्रवाई की है और अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट की डिलीवरी का वादा हटा दिया है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अन्य एग्रीगेटर भी इसी राह पर चलेंगे। इस कदम का उद्देश्य गिग वर्कर्स (अस्थायी या फ्रीलांस काम करने वाले) की सुरक्षा, संरक्षा और काम करने की बेहतर स्थिति सुनिश्चित करना है। राघव चड्ढा ने की थी मांग हाल के संसद सत्र में आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भारत के गिग वर्कर्स की परेशानियों के बारे में आवाज उठाई थी। उन्होंने क्विक कॉमर्स और अन्य ऐप-आधारित डिलीवरी और सेवा व्यवसायों के लिए नियमों की मांग की थी। साथ ही गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों की आवश्यकता पर जोर दिया था। संसद में अपने हस्तक्षेप में राज्यसभा सदस्य ने गिग वर्कर्स के लिए गरिमा, सुरक्षा और उचित वेतन की मांग की। क्या है पूरा मामला? हैदराबाद में जान गंवाने वाले शख्स को जेप्टो ने अपना कर्मचारी नहीं बताया था। पहले मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि वह शख्स जेप्टो के काम करता था। यह हादसा शहर के मेहदीपट्टनम पुलिस इलाके में हुआ। अभिषेक नाम के एक डिलीवरी राइडर की दोपहिया गाड़ी एक बस से टकरा गई, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों ने शुरू में बताया था कि मृतक जेप्टो के लिए डिलीवरी का काम करता था। इसके बाद गिग वर्कर्स यूनियन ने मृतक के परिवार के लिए न्याय और मुआवजे की मांग की थी। जेप्टो ने ऑनलाइन जारी अपने बयान में मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की थी। लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि उनकी आंतरिक जांच के अनुसार, वह व्यक्ति जेप्टो के डिलीवरी बेड़े का हिस्सा नहीं था। जेप्टो ने कहा, 'हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जिस व्यक्ति का उल्लेख किया गया है, उसका जेप्टो से कोई संबंध नहीं था और वह हादसे के समय जेप्टो के लिए डिलीवरी नहीं कर रहा था। यह हमारे डेटाबेस की गहन जांच, फेशियल रिकग्निशन और हमारे स्टोर नेटवर्क पर सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के माध्यम से पुष्टि की गई है।' पुलिस को दी जानकारी कंपनी ने बताया था कि उन्होंने अपनी जांच के नतीजे मेहदीपट्टनम पुलिस को सौंप दिए हैं ताकि शुरुआती गलतफहमी को दूर किया जा सके। जेप्टो पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। जेप्टो ने यह भी बताया कि उनके सभी सक्रिय डिलीवरी पार्टनर एक व्यापक बीमा पॉलिसी के तहत कवर होते हैं। इस पॉलिसी में 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा और 1 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा शामिल है। राजेश भारती

1 लाख करोड़ का परमाणु युद्धपोत, समंदर में बना महाबली, 25 साल तक फ्यूल की जरूरत नहीं

नई दिल्ली कल्पना कीजिए समंदर के सीने पर तैरते एक ऐसे लोहे के पहाड़ की जिसके एक इशारे पर दुनिया के किसी भी कोने में तबाही का मंजर बिछाया जा सकता है. यह कोई हॉलीवुड फिल्म का दृश्य नहीं बल्कि अमेरिकी नौसेना का गेराल्ड आर. फोर्ड विमानवाहक पोत है. जब यह 1 लाख टन वजनी दैत्य समंदर की लहरों को चीरता हुआ आगे बढ़ता है तो दुश्मन देशों के रडार कांपने लगते हैं और सैटेलाइट्स की नजरें इसी पर टिक जाती हैं. इसे समंदर का अजेय किला कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इसकी सुरक्षा में तैनात मिसाइलें और लेजर गन परिंदे को भी पर मारने की इजाजत नहीं देते. यह सिर्फ एक जहाज नहीं बल्कि अमेरिका का वो घमंड है जिसे चुनौती देने की हिम्मत फिलहाल दुनिया की किसी भी सेना में नहीं है. फोर्ड क्लास की बेजोड़ खासियतें फोर्ड क्लास के विमानवाहक पोत अपने पूर्ववर्ती ‘निमित्ज़ क्लास’ से कई गुना उन्नत हैं. इसकी सबसे बड़ी क्रांति EMALS (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम) है. पहले विमानों को भाप (Steam) के जरिए लॉन्च किया जाता था लेकिन अब शक्तिशाली चुंबकीय तरंगों का उपयोग होता है, जिससे भारी से भारी और हल्के से हल्के (ड्रोन) विमानों को तेजी से लॉन्च किया जा सकता है. • मारक क्षमता: यह पोत एक दिन में 160 से 220 सॉर्टीज़ (उड़ानें) संचालित कर सकता है. इस पर 75 से अधिक लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं, जिनमें F-35C और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट शामिल हैं. • स्वचालन (Automation): इसमें उन्नत तकनीक के कारण निमित्ज क्लास के मुकाबले 700 से 1,000 कम सैनिकों की जरूरत पड़ती है, जिससे परिचालन लागत कम होती है. • A1B न्यूक्लियर रिएक्टर: इसमें दो शक्तिशाली परमाणु रिएक्टर लगे हैं जो इसे असीमित रेंज देते हैं. यह 25 साल तक बिना ईंधन भरे समंदर में रह सकता है. • दोहरी रडार प्रणाली: इसमें ‘डुअल बैंड रडार’ (DBR) लगा है, जो दुश्मन की मिसाइल और विमानों को बहुत दूर से ही ट्रैक कर लेता है. लागत और मालिकाना हक फोर्ड क्लास दुनिया का सबसे महंगा सैन्य प्रोजेक्ट माना जाता है. पहले USS Gerald R. Ford (CVN 78) को बनाने में लगभग 13.3 बिलियन डॉलर (करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये) की लागत आई है. इसके अलावा इसके अनुसंधान और विकास (R&D) पर अलग से 5 बिलियन डॉलर खर्च किए गए. किन देशों के पासफोर्ड क्लास की ताकत? वर्तमान में यह तकनीक केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है. अमेरिकी नौसेना ने कुल 10 फोर्ड-क्लास कैरियर बनाने की योजना बनाई है. 1. USS Gerald R. Ford (CVN 78): वर्तमान में सेवा में है. 2. USS John F. Kennedy (CVN 79): परीक्षण के अंतिम चरण में है. 3. USS Enterprise (CVN 80) और USS Doris Miller (CVN 81): निर्माणाधीन हैं. जियो पॉलिटिक्स: समंदर का ‘सुपरपावर’ संदेश जियो पॉलिटिक्स में फोर्ड क्लास एक डिप्लोमैटिक टूल की तरह काम करता है. जब भी अमेरिका को किसी देश (जैसे चीन या ईरान) को चेतावनी देनी होती है तो वह उस क्षेत्र में अपना विमानवाहक पोत तैनात कर देता है. • इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती: दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए फोर्ड क्लास एक बड़ा हथियार है. यह ताइवान की सुरक्षा और मुक्त व्यापार मार्ग सुनिश्चित करने का प्रमुख जरिया है. • शक्ति का संतुलन: एक फोर्ड क्लास कैरियर के साथ पूरा ‘कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ चलता है जिसमें विध्वंसक, पनडुब्बियां और क्रूजर शामिल होते हैं. यह किसी छोटे देश की पूरी वायुसेना को अकेले तबाह करने की क्षमता रखता है. क्या यह भविष्य के युद्धों के लिए तैयार है? विशेषज्ञों के बीच एक बहस यह भी है कि क्या ‘हाइपरसोनिक मिसाइलों’ के दौर में इतने महंगे जहाज सुरक्षित हैं? चीन और रूस जैसे देश अब कैरियर किलर मिसाइलें विकसित कर रहे हैं. हालांकि, फोर्ड क्लास के पास उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम और लेजर हथियारों की क्षमता है जो इसे सुरक्षा कवच प्रदान करती है. फोर्ड क्लास केवल एक जहाज नहीं बल्कि अमेरिकी तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक है. उच्च लागत के बावजूद यह अमेरिका को वैश्विक शक्ति संतुलन में वह बढ़त देता है जिसे तोड़ पाना फिलहाल किसी भी देश के लिए नामुमकिन है. यह 2026 और उसके बाद के दशकों में अमेरिकी नौसेना की रीढ़ बना रहेगा.

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का डेलिगेशन भाजपा दफ्तर पहुंचा, गलवान घटना के बाद पहली बार हुआ संवाद

नईदिल्ली  चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल  भाजपा के मुख्यालय पहुंचा। 2020 में गलवान घाटी में हुए खूनी संघर्ष के बाद यह पहला मौका था, जब चीन के एक मात्र राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल भारत की सत्ताधारी पार्टी से संवाद के लिए पहुंचा। चीनी डेलिगेशन का नेतृत्व सुन हाइयान कर रहे थे, जो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अंतरराष्ट्रीय विभाग के वाइस मिनिस्टर हैं। उनके साथ चीनी डेलिगेशन के भाजपा दफ्तर पहुंचने की जानकारी बीजेपी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाइवाले ने एक्स पर दी। उन्होंने बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के डेलिगेशन के साथ इस बात को लेकर चर्चा हुई कि कैसे संवाद को बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से वार्ता का नेतृत्व भाजपा की ओर से महासचिव अरुण सिंह ने किया। इस बैठक में भारत में चीन के राजदूत शू फेइहॉन्ग भी मौजूद थे। अरुण सिंह ने भी इस बैठक की जानकारी एक्स पर दी है। उन्होंने लिखा, 'आज भाजपा दफ्तर में सुन हाइयान की लीडरशिप में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का डेलिगेशन आया। इस बैठक के दौरान हमने चर्चा की कि कैसे भाजपा और सीपीसी के बीच संवाद को बढ़ाया जा सकता है।' ऐतिहासिक रूप से भाजपा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक औपचारिक संवाद वर्ष 2000 से ही जारी रहा। हालांकि इसका सिलसिला बीच-बीच में बाधित भी हुआ है। खासतौर पर गलवान में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के बीच जो तनाव पैदा हुआ था, उसके 6 साल बाद ऐसी कोई औपचारिक मीटिंग हुई है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सहजता अक्तूबर 2024 के बाद से आई है। जब पीएम नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से रूस के कजान में मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग के बाद लद्दाख में सेना भी दोनों देशों ने कम की है। इसके अलावा कूटनीतिक स्तर पर संवाद भी शुरू हुआ है। दरअसल बीजिंग से संवाद को लेकर भारत की राजनीति में भी पसोपेश की स्थिति रही है। इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं।

निपाह वायरस का खतरा फिर बढ़ा बंगाल में, 2 लोग भर्ती; CS ने SOP के पालन पर जोर दिया

कोलकाता: निपाह वायरस का डर एक बार फिर पश्चिम बंगाल में लौट आया है. वायरस से संक्रमित होने के बाद दो लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. उन्हें बारासात के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है. पता चला है कि दोनों पीड़ित पेशे से नर्स हैं और उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है. वायरस से संक्रमित लोगों की उम्र 22 से 25 साल के बीच है. हेल्थ डिपार्टमेंट ने उनकी पहचान गुप्त रखी है. खबर है कि राज्य सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार सुबह स्थिति का जायजा लेने के लिए अस्पताल गया. स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर कड़ी नज़र रख रहा है. उन्होंने लोगों के सवालों और चिंताओं को दूर करने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर शुरू करने की घोषणा की है. नंबर हैं 033-2333-0180 और 9874708858. संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए एक खास स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया गया है. राज्य के स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम ने कहा, 'घबराने की कोई बात नहीं है. हम स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं. सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं, और संक्रमण को कंट्रोल में रखने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है.' वायरस के स्रोत और फैलने के बारे में राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने कहा, 'निपाह वायरस संक्रमण का स्रोत चमगादड़ हैं. इसलिए, चमगादड़ जिन चीजों को खाते हैं, उन्हें खाने से बचने की सलाह दी जाती है.' चीफ सेक्रेटरी नंदिनी चक्रवर्ती ने कहा, 'निपाह से निपटने के लिए तय एसओपी को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है. आम लोगों से मैं कहना चाहूंगी कि वे ऐसे फल या खाने की चीजें न खाएं जो चमगादड़ों से दूषित हो सकती हैं. क्योंकि चमगादड़ निपाह वायरस के वाहक माने जाते हैं.' स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार प्रभावित दोनों नर्सें निजी कारणों से पुरबा बर्धमान गई थी. हालांकि, उनका राज्य से बाहर यात्रा करने का कोई इतिहास नहीं है. उनका फिलहाल एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है, और उनकी हालत पर करीब से नजर रखी जा रही है. उनके खून के सैंपल एम्स कल्याणी भेजे गए हैं. स्वास्थ्य सचिव ने आगे कहा कि राज्य में निपाह वायरस की टेस्टिंग के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है. खास नोडल अस्पतालों की पहचान की गई है, और किसी भी इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं. प्रभावित लोगों के परिवार के सदस्यों को भी मेडिकल निगरानी में रखा गया है. इस स्थिति में कई डॉक्टरों के संगठनों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कोई भी साफ तौर पर दिखने वाला जन जागरूकता अभियान या इमरजेंसी पब्लिक हेल्थ उपाय नहीं किए हैं. एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी को एक पत्र लिखकर कहा, 'संक्रमण को रोकने के लिए 'युद्ध स्तर पर' जिस तरह के कदम उठाने की जरूरत है, वे असल में दिख ही नहीं रहे हैं. इससे यह शक होता है कि क्या प्रशासन जानबूझकर स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रहा है या मामले की गंभीरता को समझने में नाकाम हो रहा है.'मेडिकल कम्युनिटी के कुछ लोगों के अनुसार, स्थिति और भी चिंताजनक है क्योंकि पश्चिम बंगाल ने 2001 में सिलीगुड़ी में निपाह वायरस के विनाशकारी प्रकोप और उसके गंभीर परिणामों को पहले ही देखा है. इस अनुभव के बावजूद तेजी से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, क्वारंटाइन और अन्य जरूरी महामारी विज्ञान उपायों को लागू करने में देरी पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इस स्थिति में संबंधित संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग और निदेशालय से तुरंत दखल देने की जोरदार मांग की है. उनका तर्क है कि घबराहट फैलाने के बजाय, वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर जनता को शिक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है. व्यक्तिगत स्वच्छता के तरीकों, संक्रमण से बचाव के तरीकों और वास्तविक स्थिति को साफ तौर पर समझाने के लिए सरकार की ओर से तुरंत घोषणा की जरूरत है. उन्होंने कोविड -19 महामारी के अनुभव से सीखते हुए विस्तृत दैनिक स्वास्थ्य बुलेटिन प्रकाशित करने की भी मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई न जाए और जानकारी में कोई असमानता न हो.

भारत ने जो JF-17 गिराया था, पाकिस्तान ने अब इंडोनेशिया से डील की, विमान को ठिकाने लगा रहा है

इस्लामाबाद चीन की मदद से लड़ाकू विमान बना रहा पाकिस्तान अब इसे दूसरे देशों को बेचने के लिए छटपटा रहा है. बांग्लादेश के बाद अब पाकिस्तान JF-17 को लेकर इंडोनेशिया के साथ डील करने वाला है. बताया जा रहा है कि लड़ाकू विमान की खरीद को लेकर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री और पाकिस्तानी वायुसेना चीफ के बीच एक बैठक हुई है. इस बैठक में JF-17 और किलर ड्रोन को लेकर बातचीत की गई.  ये बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान कई देशों के साथ डिफेंस डील को लेकर बातचीत कर रहा है. हाल ही में बांग्लादेश के एयर चीफ मार्शल ने भी पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की थी, जिसमें JF-17 की डील को लेकर चर्चा हुई थी. इसके साथ ही लीबिया और सूडान की सेना के साथ भी डील को लेकर बातचीत चल रही है. अब इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री सफरी शम्सुद्दीन और पाकिस्तानी वायुसेना के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात की है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है. रॉयटर्स ने बताया कि इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और पाकिस्तानी सेना से जुड़े सूत्रों ने इस मुलाकात की पुष्टि की है. सूत्रों ने बताया कि ये बातचीत JF-17 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर हुई थी. ये एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर बनाया है. ये वही JF-17 है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने मार गिराया था. रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बातचीत के दौरान 40 से ज्यादा JF-17 की बिक्री को लेकर चर्चा की गई. एक सूत्र ने ये भी कहा कि इंडोनेशिया की पाकिस्तान की शह पर ड्रोन खरीदने में भी दिलचस्पी है. इंडोनेशिया को क्यों चाहिए JF-17? इंडोनेशिया की वायुसेना के ज्यादातर विमान पुराने हो चुके हैं, इसलिए उसे नए विमानों की जरूरत है. सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान JF-17 जेट और एयर डिफेंस सिस्टम की बिक्री को लेकर चर्चा कर रहा था. रिटायर्ड एयर मार्शल आसिम सुलेमान ने बताया कि इंडोनेशिया की डील पाइपलाइन में है और वह 40 JF-17 खरीद सकता है. पिछले महीने ही इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने दो दिन का पाकिस्तान का दौरा किया था. इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच संबंध बेहतर बनाने के साथ-साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना था. इंडोनेशिया ने पिछले कुछ सालों में लड़ाकू विमान के लिए कई ऑर्डर दिए हैं. 2022 में उसने 8.1 अरब डॉलर में फ्रांस से 42 राफेल खरीदने पर डील की थी. पिछले साल तुर्की के साथ 48 KAAN फाइटर जेट को लेकर डील हुई थी. ये सौदे इसलिए हो रहे हैं, ताकि इंडोनेशियाल अपने पुरानी फ्लीट को बदल सके. बताया जा रहा है कि इंडोनेशिया की चीन के साथ J-10 फाइटर जेट और अमेरिका के साथ F-15EX जेट खरीदने पर भी बात चल रही है. डिफेंस डील कर रहा पाकिस्तान पाकिस्तान कई देशों के साथ डिफेंस डील कर रहा है. पाकिस्तान अपने JF-17 को बेचने की भरपूर कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ भी एक डिफेंस डील करना चाहता है, जिसके तहत मुशाक ट्रेनिंग जेट और JF-17 की बिक्री शामिल है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब के साथ भी एक डील के लिए बातचीत कर रहा है, जिसकी कीमत 2 से 4 अरब डॉलर हो सकती है. अगर ये समझौता होता है तो पाकिस्तान को सऊदी से जो लोन मिला है, उसके बदले में उसे मिलिट्री सप्लाई की जाएगी.  

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: कॉन्ट्रेक्ट पर काम करने वालों को सरकारी कर्मचारियों के समान अधिकार नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी एजेंसी के जरिए अनुबंध पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी सरकारी महकमों/ निकायों के नियमित कर्मचारियों के बराबर समानता का दावा नहीं कर सकते। शीर्ष अदालत ने सरकारी महकमों/निकायों के नियमित नौकरी को सार्वजनिक संपत्ति बताया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि नियमित नियुक्तियां पारदर्शी प्रक्रिया से होती हैं, जिससे सभी योग्य उम्मीदवारों को बराबर मौका मिलता है। पीठ ने कहा कि किसी एजेंसी/ठेकेदार के जरिए नौकरी देना उसकी मर्जी पर छोड़ दिया जाता है, जिससे कानून में दोनों श्रेणी पूरी तरह से अलग हो जाती हैं। शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 2018 में पारित फैसला रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने किसी तीसरे पक्ष (ठेकेदार) द्वारा नगर निगम के लिए 1994 में अनुबंध पर रखे गए कर्मियों को नियमित कर्मचारी के समान वेतन एवं भत्ता से संबंधित लाभ देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक नियमित और अनुबंध कर्मचारियों के बीच फर्क नहीं होंगे, तो अलग-अलग नियुक्ति तरीकों (स्थायी, अनुबंध और तदर्थ) के मूलभूत आधार अपनी पवित्रता खो देंगे। पीठ ने कहा कि कानून में इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि किसी राज्य प्राधिकार के तहत नौकरी एक सार्वजनिक संपत्ति है और देश के हर नागरिक को इसके लिए आवेदन करने का हक है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियमित नियुक्ति में सुरक्षा उपाय इसलिए हैं ताकि कोई पक्षपात या अन्य बाहरी विचार न हो, जहां लोगों को, केवल योग्यता के आधार पर, कानून में ज्ञात पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती किया जाता है। यह था मामला सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में नंदयाल नगरपालिका परिषद की अपील पर यह फैसला दिया है। अपील में हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती दी गई थी। यह मामला ठेकेदार जरिए नौकरी पर रखे गए सफाई कर्मचारियों से जुड़ा था और इस समय-समय पर ठेकेदार भी बदलता रहा।

EPFO का बड़ा फैसला, अब UPI के जरिए आसानी से निकाल सकेंगे PF का पैसा

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव किया है. अब PF खाते से पैसा निकालने के लिए लंबे फॉर्म और बैंक वेरिफिकेशन की झंझट नहीं रहेगी. नया नियम UPI आधारित निकासी को संभव बनाता है, जिससे सेकंडों में पैसा सीधे खाते में ट्रांसफर होगा. यह सुधार खासकर सैलरीड क्लास और मध्यम वर्ग के लिए राहत है, जो इमरजेंसी में PF पर निर्भर रहते हैं. NPCI के साथ साझेदारी से शुरू हुई यह सुविधा डिजिटल इंडिया की दिशा में एक अहम कदम है. अब तक PF निकालने की प्रक्रिया बेहद लंबी और पेपरवर्क से भरी होती थी. कर्मचारी को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे, बैंक वेरिफिकेशन और कई स्तर की जांच से गुजरना पड़ता था. इस कारण निकासी में कई बार हफ्तों का इंतजार करना पड़ताथा. यही वजह थी कि EPFO ने तकनीकी बदलाव की ओर कदम बढ़ाया और UPI को PF निकासी से जोड़ने का फैसला किया. नए नियम से कर्मचारियों को सबसे बड़ा फायदा समय की बचत का होगा. अब मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई या शादी जैसे अचानक आने वाले खर्चों में PF तुरंत मददगार बनेगा.पेपरवर्क खत्म होने से क्लेम रिजेक्शन की संभावना भी घटेगी. पारदर्शिता बढ़ेगी क्योंकि पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जाएगा. यह सुविधा PF को बैंक खाते जितना लिक्विड बना देगी. UPI आधारित निकासी NPCI के सहयोग से शुरू की गई है. शुरुआत BHIMUPI से होगी और धीरे-धीरे Paytm, PhonePe, GPay जैसे लोकप्रिय ऐप्स भी जुड़ेंगे. RBI की गाइडलाइन के अनुसार, सामान्य ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹1 लाख प्रतिदिन होगी, जबकि मेडिकल, एजुकेशन और IPO से जुड़े मामलों में यह सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाई जाएगी. इससे सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने की गारंटी मिलेगी. लेबर मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह बदलाव कर्मचारियों को पेपरवर्क से मुक्त करेगा और क्लेम रिजेक्शन कम करेगा. उद्योग जगत के विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम डिजिटल इंडिया की रणनीति को मजबूत करेगा और कर्मचारियों को वित्तीय आत्मनिर्भरता देगा. फिनटेक सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा अवसर है क्योंकि UPI प्लैटफॉर्म पर PF निकासी जुड़ने से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और व्यापक होगा. EPFO ने संकेत दिया है कि शुरुआत छोटे अमाउंट से होगी और धीरे-धीरे बड़े अमाउंट पर भी यह सुविधा लागू होगी. कर्मचारियों को EPFOऐप पर अपनी UPI ID लिंक करनी होगी और KYC अपडेट रखना होगा. आने वाले समय में यह सुधार PF को रिटायरमेंट प्लानिंग का और भी मजबूत स्तंभ बना देगा.

DRDO ने KK रेंज में किया MPATGM मिसाइल का सफल परीक्षण, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पर काम

नई दिल्ली भारत की रक्षा तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 11 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर के KK रेंज में मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल फ्लाइट टेस्ट किया. यह मिसाइल टॉप अटैक मोड में चलते हुए टारगेट (मूविंग टैंक) को मारने में पूरी तरह सफल रही. यह भारत की सेना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह आधुनिक मुख्य युद्ध टैंकों (Main Battle Tanks) को आसानी से नष्ट कर सकती है. MPATGM मिसाइल क्या है और इसमें क्या खास है? MPATGM एक तीसरी पीढ़ी की फायर एंड फॉरगेट (Fire & Forget) मिसाइल है. इसका मतलब है कि सैनिक मिसाइल छोड़ने के बाद उसे गाइड नहीं करना पड़ता—मिसाइल खुद ही लक्ष्य को ढूंढकर मारती है. यह मिसाइल बहुत हल्की है, जिसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर उठाकर ले जा सकता है. मुख्य विशेषताएं     टॉप अटैक मोड: मिसाइल टैंक के ऊपर से (टॉप) हमला करती है, जहां टैंक की सबसे कमजोर जगह होती है (टैंक का ऊपरी हिस्सा पतला होता है).     इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर: दिन और रात दोनों में काम करती है. यह थर्मल इमेजिंग से टारगेट को देखती है.     टैंडम वॉरहेड: दो विस्फोटक हेड्स—पहला टैंक के रिएक्टिव आर्मर को तोड़ता है, दूसरा मुख्य बॉडी को नष्ट करता है. आधुनिक टैंकों को भी हरा सकती है.     ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल सिस्टम: बहुत तेज और सटीक.     उच्च प्रदर्शन साइटिंग सिस्टम: सैनिक को टारगेट साफ दिखाई देता है.     प्रोपल्शन सिस्टम: तेज और दूर तक मार करने में सक्षम.     लॉन्च तरीका: ट्राइपॉड (तीन पैरों वाला स्टैंड) या सैन्य वाहन से लॉन्च की जा सकती है. इस टेस्ट में क्या हुआ? DRDO की हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) ने इस टेस्ट को अंजाम दिया. टारगेट के रूप में एक थर्मल टारगेट सिस्टम इस्तेमाल किया गया, जिसे जोधपुर की डिफेंस लेबोरेटरी ने बनाया था. यह सिस्टम एक चलते हुए टैंक की तरह दिखता और महसूस होता है. मिसाइल ने टॉप अटैक मोड में चलते टारगेट को सटीक निशाना लगाकर सफलतापूर्वक नष्ट किया. इस मिसाइल को किस-किसने बनाया? यह पूरी तरह स्वदेशी है. DRDO की कई लैबोरेटरीज ने मिलकर इसे विकसित किया…     रिसर्च सेंटर इमरत (RCI), हैदराबाद – सीकर और गाइडेंस     टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL), चंडीगढ़ – वॉरहेड टेस्टिंग     हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL), पुणे – विस्फोटक सामग्री     इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (IRDE), देहरादून – साइटिंग सिस्टम उत्पादन पार्टनर: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL). रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, इंडस्ट्री और पार्टनर्स को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी. कमत ने कहा कि यह सफल परीक्षण हथियार प्रणाली को भारतीय सेना में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. क्यों महत्वपूर्ण है यह टेस्ट? भारतीय सेना को आधुनिक एंटी-टैंक हथियार मिलेगा, जो दुश्मन के टैंकों (जैसे चीन या पाकिस्तान के) को आसानी से रोक सके. टॉप अटैक क्षमता से टैंक के सबसे मजबूत रिएक्टिव आर्मर को भी पार कर सकती है. फायर एंड फॉरगेट से सैनिक सुरक्षित रहते हुए हमला कर सकता है.  यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है—अब भारत विदेशी मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह सफलता DRDO की लगातार बढ़ती क्षमता को दिखाती है. जल्द ही MPATGM भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा को और मजबूत बनाएगी.