samacharsecretary.com

पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG तक असर! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव ने बढ़ाई भारत की चिंता

नई दिल्ली  भारत पर एक बार फिर तेल-एलपीजी वाला नया खतरा मंडराने लगा है. भारत से कोसों दूर हुई घटना ने एक बार फिर सबके कान खड़े कर दिए हैं. जी हां, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है. ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है. ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को चेतावनी दी है. इससे भारत की एलपीजी और तेल सप्लाई पर एक बार फिर असर पड़ सकता है।  दरअसल, अपाचे हेलिकॉप्टर के गिराए जाने से अमेरिका गुस्से में है. अमेरिका दो दिनों से ईरान पर लगातार अटैक कर रहा है. इसके जवाब में ईरान ने अब होर्मुज को बंद करने का फैसला लिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है. होर्मुज के रास्ते भारत का करीब 60 फीसदी से अधिक एलपीजी और तेल आता है. इतना ही नहीं, वैश्विक स्तर पर करीब 20% तेल और बड़ी मात्रा में LNG इसी होर्मुज के रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है।  होर्मुज बंद होने से मचेगा हाहाकार होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया में हाहाकार मचेगा. इसकी झलक पूरी दुनिया पिछले कुछ समय में देख चुकी है. ईरान ने जब पहली बार होर्मुज बंद किया तो पूरी दुनिया में एलपीजी से लेकर तेल की किल्लत हो गई. मगर बात में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होने के बाद होर्मुज खुल गया था. मगर अब अमेरिकी हमलों के कारण ईरान ने फिर इसे बंद करने का फैसला किया है. अगर होर्मुज फिर से लंबे वक्त तक बंद रहता है तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा।  भारत के लिए कितनी चिंता की बात भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कच्चे तेल का करीब 40-50% हिस्सा, LNG का करीब 60% हिस्सा और LPG की बड़ी मात्रा इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश इसी रास्ते पर निर्भर हैं. भारत क्योंकि एलपीजी और तेल का आयातक देश है, तो इसकी भी निर्भरता होर्मुज पर ही है।  एलपीजी सप्लाई पर बढ़ेगा दबाव अगर होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो भारत में सबसे पहले LPG सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. भारत में करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं और LPG का बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है.  ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ सकता है. वैसे भी अब भी भारत में एलपीजी सप्लाई पहले की तरह नॉर्मल नहीं हो पाया है।  तेल के भी बढ़ेंगे दाम? इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. अगर तनाव और बढ़ता है तो तेल और महंगा हो सकता है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ेगा और घरेलू ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है. हालांकि, भारत के पास अब भी तेल और गैस का भंडार है।  फर्टिलाइजर की आपूर्ति भी होगी प्रभावित इतना ही नहीं, होर्मुज के बंद होने से सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है. भारत यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए भी खाड़ी क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर है. ऐसे में लंबे समय तक संकट रहने पर कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों के पास कुछ समय के लिए रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मौजूद हैं, जिससे तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है। 

अपराधियों को सख्त संदेश! जहांगीर खान के गढ़ में पुलिस की अनोखी हाफ पैंट परेड

कलकत्ता एक समय जिस इलाके में तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान का दबदबा और खौफ माना जाता था, वहीं अब एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आई है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जहागीर खान को हाफ पैंट पहनाकर सड़कों पर पैदल घुमाया, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मियों के बीच जहागीर खान सड़क पर चलते नजर आ रहे हैं. यह तस्वीर उस छवि से बिल्कुल उलट है, जिसमें कभी उनका रसूख और दबदबा चर्चा में रहता था और अब वही शख्स सरेआम इस तरह पेश किया जा रहा है।  भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान जहांगीर खान को उत्तरी बंगाल के पानीटंकी इलाके में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ़्तार किया गया था. खान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली. इस सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होने से कुछ दिन पहले से ही खान को दक्षिण 24 परगना ज़िले के उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं देखा गया था।  डायमंड हार्बर की एक अदालत ने सरकारी पक्ष की अपील पर, फाल्टा पुलिस थाने में खान के खिलाफ दर्ज सात प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26 मई को खान को मिला अंतरिम संरक्षण हटा दिया था. खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा पुलिस थाने में सात प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।  जहांगीर के ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पुष्पा: द राइज़' के 'झुकेगा नहीं' मशहूर डॉयलॉग को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई थी. उपचुनाव से पहले केंद्रीय बलों और पुलिस ने जहांगीर के घर पर छापा मारा था. इस कार्रवाई का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षकों में से एक अजय पाल शर्मा ने किया था. इस घटना के बाद तृणमूल ने पुलिस पर्यवेक्षक के अधिकार पर सवाल उठाए थे. जहांगीर ने कहा था कि यदि वह पुलिस अधिकारी 'शेर' है, तो वह भी 'पुष्पा' है. वे चुनाव आयोग के कथित पक्षपाती व्यवहार के आगे नहीं झुकेंगे। 

Nipah Virus Alert: केरल में मिला नया मामला, 43 साल के शख्स के संक्रमित होने से बढ़ी चिंता

कोझिकोड केरल में निपाह वायरस के एक मामले की पुष्टि हो गई है. शुरुआती जांच में 43 साल के व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. कोझिकोड के फेरोक के रहने वाले संदिग्ध मरीज की शुरुआती जांच में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है. यह जांच कोझिकोड के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में की गई थी.स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ अस्पताल के आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) में आया था और माना जा रहा है कि निपाह का संदिग्ध मरीज़ माने जाने से पहले वह कई लोगों के संपर्क में आया था।  अधिकारियों को शक है कि यह संक्रमण किसी गोदाम की सफाई के दौरान हुआ हो सकता है, हालांकि इसके सही स्रोत की अभी पुष्टि नहीं हुई है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV) से अंतिम पुष्टि गुरुवार को होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि मरीज़ की हालत अभी स्थिर है. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार सुबह मेडिकल बोर्ड की बैठक बुलाई गई है. कोझिकोड ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक अलग समीक्षा बैठक भी होगी. कंटेनमेंट ज़ोन घोषित करने और पाबंदियां लगाने का फ़ैसला समीक्षा बैठकों और NIV टेस्ट के नतीजों के आधार पर लिया जाएगा.स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज़ के कई लोगों के संपर्क में आने की वजह से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है।  घबराने की जरूरत नहीं: केरल के स्वास्थ्य मंत्री केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने बुधवार को कहा कि कोझिकोड के जिस व्यक्ति की शुरुआती जांच में निपाह की पुष्टि हुई है, वह कई लोगों के संपर्क में आया था, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय घबराने की कोई वजह नहीं है.मंत्री ने कहा कि 43 साल के मरीज़ ने उस प्राइवेट अस्पताल के कई विभागों का दौरा किया था जहां उसने शुरू में इलाज कराया था, जिससे दूसरों के भी संक्रमित होने की चिंता बढ़ गई है.मंत्री ने बताया कि एहतियात के तौर पर, अस्पताल के जिन कर्मचारियों के मरीज़ के संपर्क में आने की संभावना है, उन्हें क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया है।  मंत्री ने आगे कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है और वे हालात पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. हालात का जायज़ा लेने और आगे के कदमों पर फ़ैसला करने के लिए गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में स्वास्थ्य मंत्री के ऑफ़िस में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई है. मरीज़ का सैंपल पुष्टि के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी भेजा गया है, जबकि ज़िला और राज्य स्तर के स्वास्थ्य अधिकारी तैयारी के उपाय कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि मरीज़ की हालत स्थिर बनी हुई है।   

वाहन चालकों के लिए खुशखबरी! ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर अब नहीं देनी होगी एक्साइज ड्यूटी

  नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण सप्लाई लाइन प्रभावित हुई है. पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित होने का असर कीमतों पर नजर भी आ रहा है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इस बीच अब भारत सरकार ने ईंधन को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने एथेनॉल के अधिक मिश्रण वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त कर दी है. अब अधिक एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी।  भारत सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 22 से 30 फीसदी तक एथेनॉल के मिश्रण वाला पेट्रोल अब एक्साइज ड्यूटी के दायरे से बाहर कर दिया गया है. यानी अब ई-22, ई-25, ई-27 और ई-30 श्रेणी के पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं देनी होगी।  सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस फैसले का तेल कंपनियों से लेकर आम किसान और उपभोक्ता तक, सभी को फायदा होगा. सरकार के इस कदम को पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. एथेनॉल के ज्यादा मिश्रण से पेट्रोल की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिल सकेगी।  एथेनॉल का मिश्रण अधिक होने को किसानों के लिए भी लाभदायक बताया जा रहा है. एथेनॉल का कनेक्शन कृषि क्षेत्र से है. सरकार के इस फैसले का तत्कालिक प्रभाव जो भी रहे, इसके पीछे दीर्घकालिक रणनीति बताई जा रही है. ज्यादा एथेनॉल के मिश्रण वाले पेट्रोल एक्साइज ड्यूटी शून्य हो जाने के बाद ई-20 या प्रीमियम पेट्रोल के मुकाबले कहीं सस्ते होंगे।  इससे इसकी मांग बढ़ेगी. हालांकि, ये पेट्रोल सभी वाहनों में अभी से ही इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे, लेकिन वाहन बनाने वाली कंपनियां ऐसे इंजन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित होंगी जो ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर चल सकें. बता दें कि हाल ही में ई-85 पेट्रोल भी लॉन्च कर दिया गया था. हालांकि, यह पेट्रोल केवल फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में ही इस्तेमाल हो सकेगा।   

US Inflation Crisis: ईरान संघर्ष ने बढ़ाई ट्रंप की टेंशन, महंगाई पर काबू पाना हुआ मुश्किल

वाशिंगटन मिडिल ईस्ट में युद्ध एक बार फिर तेज हो गई है. लगातार दूसरे दिन अमेरिका-ईरान के बीच हमलों का सिलसिला जारी है. इस बीच कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है. ईरान युद्ध न सिर्फ दुनिया के तमाम अन्य देशों के लिए, बल्कि खुद अमेरिका के लिए भी बड़ी सिरदर्दी बनता जा रहा है और अमेरिकियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।  ईरान युद्ध के चलते तेल-गैस की सप्लाई में रुकावट और एनर्जी प्राइस में तगडी़ बढ़ोतरी से अमेरिका भी पीड़ित है और यहां महंगाई की तगड़ी मार पड़ रही है. मई महीने में अमेरिका में महंगाई दर के आंकड़े आ गए हैं और ये डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाले हैं. दरअसल, US Inflation मई में तीन साल के हाई पर पहुंच गई।  4 फीसदी के पार US में महंगाई रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जंग के चलते पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अमेरिका में महंगाई के रूप में देखने को मिला है. अमेरिकी लेबर स्टेटिस्टिक्स ब्यूरो ने बुधवार को बताया कि रिटेल महंगाई (CPI) मई में सालाना आधार पर बढ़कर 4.2% हो गई, जो कि अप्रैल 2023 के बाद सबसे ज्यादा है. उस समय ये 3.8 फीसदी पर पहुंची थी।  अब अमेरिकियों की सेविंग पर संकट  अमेरिका में महंगाई दर के ये अनुमान इकोनॉमिस्ट के सर्वे और अनुमानों के अनुरूप ही रहे हैं. महंगाई में लगातार तीसरे महीने मजबूत उछाल ने अमेरिकी परिवारों पर बढ़ते दबाव को उजागर किया है. साक्ष्य बताते हैं कि ज्यादातर लोग अब अपने खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी बचत का भी उपयोग कर रहे हैं. ये लगातार दूसरा महीना है, जबकि महंगाई दर वेतन वृद्धि से अधिक रही, जिससे आर्थिक ग्रोथ पर भी दबाव पड़ सकता है।  युद्ध, महंगाई और अमेरिकी बाजार क्रैश  ईरान के साथ एक बार फिर शुरू हुए युद्ध ने ग्लोबल टेंसन को चरम पर पहुंचा दिया है, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में फिर से आग लगने लगी है और खबर लिखे जाने तक ये 95 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था. इस बीच अमेरिका में पड़ी महंगाई की मार का सीधा अमेरिकी शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है. US Inflation Data आते ही यहां कोहराम सा मच गया. Dow Jones 953 अंक की बड़ी गिरावट लेकर बंद हुआ।  ट्रंप की राजनीति पर पड़ेगा असर  अमेरिका में बढ़ती महंगाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक राजनीतिक बोझ बनती जा रही है, जो नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश कर रही है. बता दें कि ट्रंप ने 2024 का राष्ट्रपति चुनाव के दौरान महंगाई को कम करने के वादे किए थे और इसका फायदा उन्हें मिला था। 

सीमा पर बवाल: BSF की कार्रवाई के बाद घुसपैठियों का हंगामा, भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बढ़ा तनाव

कलकत्ता पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बुधवार को बवाल हो गया. दरअसल, सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा कथित रूप से एक बांग्लादेशी नागरिक को वापस भेजने की कार्रवाई के बाद दोनों देशों की सीमा पर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव की घटनाएं सामने आईं. घटना मेघालय के दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के महेंद्रगंज क्षेत्र स्थित नंदिर चार सीमा इलाके की बताई जा रही है।  स्थानीय सूत्रों के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश किया था. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में लेने के बाद BSF ने उसे बांग्लादेश की ओर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की. हालांकि मामला उस समय उलझ गया जब बांग्लादेश सीमा रक्षक बल (BGB) और सीमा पार मौजूद स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।  बताया जा रहा है कि BGB के इनकार के बाद वह व्यक्ति दोनों देशों की सीमा के बीच फेंसिंग के पास ही फंस गया. इससे इलाके में भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताया था, लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेश की ओर से उसे अपने कब्जे में लेने से इनकार कर दिया गया. घटना की खबर फैलते ही सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे. देखते ही देखते सैकड़ों लोग सीमा के पास पहुंच गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया।  दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सीमा पर जुटी भीड़ के बीच कहासुनी के बाद दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगी बाड़ के आर-पार पत्थर फेंके गए, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई. हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है, लेकिन घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. BSF और BGB दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।  सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल होने लगे हैं. इन वीडियो में सीमा के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और तनावपूर्ण माहौल दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।  हालात पर नजर, बातचीत से समाधान की कोशिश सूत्रों के मुताबिक, मामले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के सीमा प्रबंधन तंत्र के तहत बातचीत की संभावना है. BSF और BGB के अधिकारी स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार संपर्क में हैं और स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. फिलहाल नंदिर चार सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और सीमा पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से सहयोगात्मक सीमा प्रबंधन की व्यवस्था रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों की एजेंसियां बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाल लेंगी और सीमा क्षेत्र में शांति बहाल हो जाएगी। 

मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात! ईरान ने बहरीन, कुवैत और होर्मुज में खोला मोर्चा, दुनिया की बढ़ी चिंता

तेहरान  अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव एक बार फिर खुली सैन्य भिड़ंत में बदलता दिखाई दे रहा है. अमेरिका के ताजा हमलों के बाद ईरान ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया गया. इन घटनाओं के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐलान किया कि होर्मुज स्ट्रेट को "अगले आदेश तक" बंद कर दिया गया है।  IRGC के मुताबिक, गुरुवार तड़के कुवैत के अली अल सलेम और अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर ड्रोन हमले किए गए. इनके अलावा बहरीन में शेख ईसा एयरबेस को निशाना बनाया गया. संगठन का दावा है कि ये कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर किए गए नए सैन्य हमलों के जवाब में की गई है और अमेरिका के 18 प्रमुख सैन्य संपत्तियों को तबाह कर दिया है. ईरान ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से "अवैध रूप से" गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों पर भी हमले किए गए हैं।  ईरानी सेना ने अमेरिका पर अप्रैल में हुए युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है. उसका कहना है कि अमेरिकी सेना लगातार ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रही है, जिसके कारण जवाबी कदम उठाने पड़े. IRGC ने साफ चेतावनी दी कि होर्मुज से गुजरने वाला हर तरह का समुद्री यातायात अब प्रभावित होगा।  बहरीन में ईरानी हमलों का टारगेट फिफ्थ फ्लीट IRGC ने दावा किया कि आर्मी के ड्रोन हमलों की इस लहर में, फिफ्थ फ्लीट के पैट्रियट सिस्टम के कम्युनिकेशन एंटीना और रडार इंस्टॉलेशन को निशाना बनाया गया है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, जॉर्डन में स्थित अल-अजराक एयर बेस और मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर जोरदार विस्फोटों की खबर सामने आई है. ये दोनों सैन्य ठिकाने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कर्मियों की मौजूदगी और अमेरिकी अभियानों के समर्थन के लिए जाने जाते हैं. हालांकि विस्फोटों की वजह और नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।  दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के भीतर कई ठिकानों पर हमले किए गए. अमेरिका का कहना है कि ये हमले ईरान की "लगातार और अनुचित आक्रामकता" के जवाब में किए गए हैं।  अमेरिका के ताजा हमले का कहां-कहां हुआ असर? ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद केशम द्वीप, बंदर अब्बास, सीरिक और करगान जैसे इलाकों में जोरदार विस्फोट हुए. दक्षिणी शहर करगान में हुए धमाकों में कम से कम दो लोगों के घायल होने की भी खबर है. इससे पहले बीते दिन अमेरिका ने केशम द्वीप, सीरिक, जास्क और बंदर अब्बास के आसपास सैन्य ठिकानों, रडार और सर्विलांस सिस्टम को निशाना बनाया था।  होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी हेलीकॉप्टर मार गिराया गया यह पूरी घटना उस घटना के बाद सामने आई है जिसमें होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया गया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच लगातार जवाबी हमले हो रहे हैं. बुधवार को ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट, कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और जॉर्डन के अज्राक एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया था।  इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर शांति वार्ता को जानबूझकर लंबा खींचने का आरोप लगाया है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर "बहुत कड़ा प्रहार" करेगा. जवाब में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि देश किसी भी दबाव या धमकी के सामने झुकने वाला नहीं है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। 

चीन-पाकिस्तान के लिए बढ़ी चुनौती? भारत की नई परमाणु रणनीति को लेकर तेज हुई चर्चाएं

बेंगलुरु  भारत की परमाणु रणनीति को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने बड़ा दावा किया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ईयरबुक 2026 के मुताबिक भारत ने पहली बार अपने कुछ परमाणु हथियारों को ऑपरेशनल रूप से तैनात किया है. अगर यह आकलन सही साबित होता है तो इसे भारत की परमाणु नीति और सैन्य तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।  रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब SIPRI ने दुनिया को चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर एक नई परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो चुकी है. भू-राजनीतिक तनाव, सैन्य आधुनिकीकरण और हथियार नियंत्रण समझौतों के कमजोर पड़ने के कारण परमाणु जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।  भारत ने बदली परमाणु नीति? SIPRI के अनुसार जनवरी 2026 तक भारत के पास अनुमानित 190 परमाणु हथियार थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 180 बताई गई थी. रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से करीब 12 परमाणु वारहेड अब ऑपरेशनल फोर्स के साथ तैनात हो सकते हैं. अब तक माना जाता रहा है कि भारत शांति काल में अपने परमाणु हथियार और मिसाइल सिस्टम को अलग-अलग रखता है, ताकि किसी भी परमाणु कार्रवाई पर अंतिम नियंत्रण राजनीतिक नेतृत्व के पास रहे ।  विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित संख्या में वारहेड की तैनाती भारत की अधिक तेज और प्रभावी प्रतिरोध क्षमता की दिशा में उठाया गया कदम हो सकता है. खासकर तब, जब भारत अपनी समुद्र आधारित परमाणु क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।  आक्रमण नहीं, हिफाजत के लिए परमाणु हथियार भारत की परमाणु नीति लंबे समय से ‘नो फर्स्ट यूज’ और ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ यानी विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध क्षमता के सिद्धांत पर आधारित रही है. इसका मतलब यह है कि भारत परमाणु हथियारों को आक्रमण के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन को हमले से रोकने के लिए रखता है. SIPRI की रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि भारत की आधिकारिक परमाणु नीति में बदलाव हुआ है, लेकिन यह जरूर संकेत दिया गया है कि रणनीतिक बलों की तैयारियों का स्तर पहले से अधिक मजबूत हुआ है।  चीन भी तेजी से बढ़ा रहा परमाणु जखीरा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की परमाणु आधुनिकीकरण प्रक्रिया पर सबसे बड़ा प्रभाव चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमता का है. SIPRI के मुताबिक चीन दुनिया में सबसे तेजी से अपना परमाणु जखीरा बढ़ा रहा है. इसी वजह से भारत ने ऐसी नई मिसाइल प्रणालियां विकसित की हैं जो चीन के भीतर दूर तक स्थित लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत की रणनीतिक सोच अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रही है।  हालांकि पाकिस्तान भी भारत की सुरक्षा गणनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है. पिछले एक दशक में दोनों देशों ने नई मिसाइल प्रणालियों और परमाणु हथियारों को ले जाने वाले प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं. ऐसे में दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखना भारत की प्राथमिकता बना हुआ है।  दुनियाभर में कितने परमाणु हथियार? वैश्विक स्तर पर भी परमाणु हथियारों का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है. SIPRI के अनुसार दुनिया के नौ परमाणु संपन्न देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु वारहेड हैं. इनमें से लगभग सभी देश अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण में जुटे हुए हैं. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सुरक्षा रणनीतियों में परमाणु हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दुनिया धीरे-धीरे एक नए न्यूक्लियर आर्म्स रेस की ओर बढ़ रही है।  इसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य में भारत की कथित ऑपरेशनल तैनाती को भी देखा जा रहा है. भले ही इसकी संख्या सीमित हो, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की प्रतिरोध क्षमता को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है. खासकर ऐसे दौर में जब चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। 

8th Pay Commission Update: कर्मचारियों की बढ़ सकती है चांदी, नया फॉर्मूला लागू हुआ तो मिल सकता है भारी एरियर

नई दिल्ली भारत के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों की आयोग के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। 8वें वेतन आयोग में अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो लेवल-14 के कर्मचारियों का 20 महीने में अनुमानित एरियर करीब 53 लाख के पार पहुंच सकता है। 15 जून 2026 तक आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 22-23 जून को लखनऊ में भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी और उन्हें कितना एरियर (Arrears) मिल सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए दिए गए 18 महीने के समय को देखते हुए इसका क्रियान्वयन 2027 की दूसरी छमाही में हो सकता है। नवंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल तय किया गया था और अगर यह मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपता है, तो उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इस स्थिति में अगस्त या सितंबर 2027 तक नई सैलरी लागू होने की संभावना है। चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है। अगर लागू होने में लगभग 20 से 21 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिल सकती है। वेतन स्तर (Pay Level) सामान्य प्रारंभिक बेसिक वेतन प्रमुख पद (Common Designations) लेवल 11 ₹67,700 उप सचिव (Deputy Secretary), ग्रुप-A में पदोन्नत वरिष्ठ सेक्शन अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer), डिप्टी कमांडेंट लेवल 12 ₹78,800 निदेशक (Director), संयुक्त निदेशक (Joint Director), केंद्रीय संस्थानों में प्रोफेसर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लेवल 13 ₹1,23,100 कुछ संगठनों में संयुक्त सचिव स्तर के पद, वरिष्ठ निदेशक, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), उच्च ग्रेड के वैज्ञानिक लेवल 14 ₹1,44,200 वरिष्ठ संयुक्त सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) स्तर के अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बड़े विभागों के प्रमुख लेवल 11 से 14 के कर्मचारी, जो आमतौर पर ग्रुप-A अधिकारी होते हैं, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा लाभ पाने वालों में शामिल हो सकते हैं। इनमें डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर, प्रोफेसर, चीफ इंजीनियर, वैज्ञानिक, वरिष्ठ संयुक्त सचिव और अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में लेवल 11 का शुरुआती बेसिक वेतन ₹67,700, लेवल 12 का ₹78,800, लेवल 13 का ₹1,23,100 और लेवल 14 का ₹1,44,200 है। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से लेकर 2.86 तक का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल 11 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर पर ₹1.35 लाख और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लगभग ₹1.94 लाख तक पहुंच सकती है। इसी तरह लेवल 14 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹4 लाख रुपये के करीब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 20 महीने के एरियर की गणना की जाए तो कई कर्मचारियों को लाखों रुपये का एकमुश्त भुगतान मिल सकता है। 8वें वेतन आयोग (2.0 फिटमेंट फैक्टर) पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,35,400 ₹67,700 ₹13,54,000 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,57,600 ₹78,800 ₹15,76,000 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,46,200 ₹1,23,100 ₹24,62,000 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹2,88,400 ₹1,44,200 ₹28,84,000 8वें वेतन आयोग (2.15 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,45,555 ₹77,855 ₹15,57,100 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,69,420 ₹90,620 ₹18,12,400 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,64,665 ₹1,41,565 ₹28,31,300 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,10,030 ₹1,65,830 ₹33,16,600 8वें वेतन आयोग (2.28 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,54,356 ₹86,656 ₹17,33,120 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,79,664 ₹1,00,864 ₹20,17,280 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,80,668 ₹1,57,568 ₹31,51,360 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,28,776 ₹1,84,576 ₹36,91,520 8वें वेतन आयोग (2.57 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर 20 माह के संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,73,989 ₹1,06,289 ₹21,25,780 लेवल 12 ₹78,800 ₹2,02,516 ₹1,23,716 ₹24,74,320 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,16,367 ₹1,93,267 ₹38,65,340 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,70,594 ₹2,26,394 ₹45,27,880 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 11-14 के कर्मचारियों को मिलने वाले 20 महीनों के अनुमानित एरियर लेवल वर्तमान मूल वेतन संशोधित मूल वेतन मूल वेतन में वृद्धि 20 महीनों का एरियर 11 67,700 1,93,622 1,25,922 25,18,440 12 78,800 2,25,368 1,46,568 29,31,360 13 1,23,100 3,52,066 2,28,966 45,79,320 14 1,44,200 4,12,412 2,68,212 53,64,240   ध्यान देने वाली बात यह है कि एरियर केवल बढ़ी हुई बेसिक सैलरी पर मिलता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) जैसे अन्य भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता, क्योंकि नए वेतन आयोग में इनकी दरें अलग से संशोधित की जाती हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की रहने वाली है। 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर रिपोर्ट 2027 में लागू होती है और कर्मचारियों को 20 महीने का एरियर मिलता है, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों के खातों में बड़ी रकम आ सकती है। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा।

भारत के लिए रूस की मेहरबानी! कच्चे तेल पर भारी छूट, वैश्विक बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है।  रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है।  क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी।  चीन ने कर द‍िया था मना चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं।