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भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई: मेहुल चोकसी की संपत्तियां होंगी नीलाम

अहमदाबाद 23 हजार करोड़ के पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी की 13 संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। पीएमएलए अदालत ने 46 करोड़ रुपये की कंपनियों की नीलामी की इजाजत दे दी है। इनमें बोरीवली का एक फ्लैट (कीमत 2.6 करोड़ रुपये), बीकेसी में भारत डायमंड बोर्स और कार पार्किंग का स्पेस (कीमत 19.7 करोड़), गोरेगांव की 6 फैक्ट्रियां (18.7 करोड़), चांदी की ईंटें, कीमती रत्न और कंपनी की कई मशीनें शामिल हैं। विशेष जज एवी गुजराती ने कहा, अगर इन संपत्तियों के ऐसा ही पड़ा रहने दिया जाता है तो इनकी कीमत घटती ही चली जाएगी। इसलिए उन्हें तुरंत नीलाम करना जरूरी है। जज ने कहा कि लिक्विडेटर को फिर से प्रॉपर्टी का वैल्युएशन करवाने का अधिकार है। इसके बाद संपत्तियों की नीलामी की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि लिक्विडेटर इससे प्राप्त राशि को जमा करने के लिए आईसीआईसीआई बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट कर सकता है। बता दें कि एनसीएलटी ने 7 फरवरी 2024 को लिक्विडेटर की नियुक्ति की थी। इसके बाद कोर्ट ने नीरव मोदी और चोकसी की संपत्तियों की कीमत निर्धारित करने को अनुमति दे दी थी। बता दें कि इस समय नीरव मोदी यूके की जेल में है और चोकसी बेल्जियम की जेल में है। बेल्जियम के सुप्रीम कोर्ट पहूंचा मेहुल चोकसी मेहुल चोकसी ने बेल्जियम के सुप्रीम कोर्ट में 17 अक्टूबर को एंटवर्प की अपीलीय अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को ‘लागू करने योग्य’ करार दिया गया था। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। एंटवर्प स्थित अपीलीय अदालत के सरकारी अभियोजक ने कहा कि चोकसी ने 30 अक्टूबर को ‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ (उच्चतम न्यायालय) में अपील दायर की थी। महाधिवक्ता केन विटपास ने जवाब में कहा, “यह अपील पूरी तरह से कानूनी तथ्यों तक सीमित है और इसका निर्णय शीर्ष अदालत द्वारा किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान, प्रत्यर्पण की प्रक्रिया निलंबित रहेगी।” 17 अक्टूबर को एंटवर्प की अपीलीय अदालत के चार सदस्यीय अभियोग कक्ष ने जिला अदालत के प्री-ट्रायल कक्ष द्वारा 29 नवंबर 2024 को जारी आदेशों में कोई खामी नहीं पाई। अदालत ने मुंबई की विशेष अदालत द्वारा मई 2018 और जून 2021 में जारी गिरफ्तारी वारंटों को ‘लागू करने योग्य’ करार दिया, जिससे मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण का मार्ग प्रशस्त हो गया। अपीलीय अदालत ने फैसला सुनाया कि 13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े चोकसी को भारत प्रत्यर्पित किए जाने पर निष्पक्ष सुनवाई से वंचित किए जाने या दुर्व्यवहार का सामना किए जाने का “कोई खतरा” नहीं है। सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया है कि 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले में अकेले चोकसी ने 6,400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। घोटाले का पता चलने से कुछ दिन पहले जनवरी 2018 में एंटीगुआ और बारबुडा भाग गए चोकसी को बेल्जियम में देखा गया, जहां वह कथित तौर पर इलाज कराने के लिए पहुंचा था। भारत ने मुंबई की विशेष अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर 27 अगस्त, 2024 को बेल्जियम को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा। भारत ने चोकसी की सुरक्षा, भारत में मुकदमे के दौरान उसके सामने आने वाले आरोपों, जेल व्यवस्था, मानवाधिकारों और चिकित्सा आवश्यकताओं के संबंध में बेल्जियम को कई आश्वासन दिए हैं।

पाकिस्तान की नई रणनीति? दशकों बाद बांग्लादेश में दिखा उसका युद्धपोत

बांग्लादेश बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार हटने और मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार गठित होने के बाद से ही भारत के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं। वहीं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ता ही जा रहा है। अब पाकिस्तानी सेना का एक युद्धपोत बांग्लादेश के कटगांव पोर्ट पर पहुंच गया है। 1971 के युद्ध के बाद पहली बार है जब यहां कोई पाकिस्तानी पोत पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी नौसेना का पीएनएससैफ (PNF SAIF) युद्धपोत चटगांव पहुंचा है। बांग्लादेशी नौसेना ने पाकिस्तानी युद्धपोत का जबरदस्त स्वागत भी किया। पाकिस्तान का युद्धपोत चटगांव पहुंचना भारत के लिए चुनौती वाली बात है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान किसी तरह से भारत की घेराबंदी करने का प्लान बना रहा है। 1971 के बाद से ही बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंध अच्छे नहीं रहे हैं लेकिन पिछले कुछ महीने में सब कुछ बदल गया है। इस समय पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख ऐडमिरल नावीन अशरफ भी बांग्लादेश की यात्रा पर हैं। पाकिस्तान के टॉप मिलिट्री कमांडर जनरल साहिर श्मशाद मिर्जा कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश की यात्रा पर गए थे। उन्होंने मोहम्मद यूनुस से भी मुलाकात की थी। बता दें कि बांग्लादेश में पिछले साल अगस्त में हिंसक छात्र आंदोलन हुआ था। इसके बाद शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा था। फिलहाल वह भारत की शरण में हैं। वहीं मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। अफगानिस्तान से खराब होते संबंधों के बीच पाकिस्तान बांग्लादेश में नई संभावनाएं तलाश कर रहा है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और भारत के बीच संबंध लागातार मजबूत हो रहे हैं। वहीं अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस्तांबुल में तीसरे चरण की शांति वार्ता का भी कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। ऐसे में वह चाहता है कि बांग्लादेश से करीबी बढ़ाकर भारत को धौंस दिखाने की कोशिश की जाए। हालांकि बांग्लादेश में यह स्थिति कब तक रहेगी यह भी कहा नहीं जा सकता है। फरवरी में ही बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं। आवामी लीग ने यूनुस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है।  

गौरव का पल: ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर विश्वभर में हुआ विशेष आयोजन

वाशिंगटन  दुनिया भर में भारतीय दूतावासों ने देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक समारोहों के साथ प्रवासी भारतीयों में एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रतिबिंबित किया। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित, वंदे मातरम को सबसे पहले उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया गया था और बाद में यह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक नारा बन गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को इसकी 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में साल भर जारी रहने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सात नवंबर को भारतीय प्रवासी छात्रों द्वारा सामूहिक गायन के साथ इस मील के पत्थर को चिह्नित किया गया। ओटावा में, उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने भारतीय प्रवासी सदस्यों और उच्चायोग के अधिकारियों के साथ ‘वंदे मातरम' गायन का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में ओडिसी नृत्य का प्रदर्शन भी किया गया। मिशन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस अमर स्तुति का सम्मान करते हुए, हम एक आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और पुनरुत्थानशील विकसित भारत 2047 के प्रति अपने संकल्प की पुष्टि करते हैं।'' दोहा में, राजदूत विपुल ने एक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन का नेतृत्व किया, जिसे दूतावास ने राष्ट्र को जोड़ने वाली देशभक्ति और एकता की भावना के प्रति एक सम्मान बताया। रियाद में, राजदूत सुहेल एजाज खान ने भारतीय समुदाय के साथ ‘वंदे मातरम' गायन में भाग लिया और कहा कि उन्हें मातृभूमि की भावना को महसूस करने पर ‘‘गर्व'' हो रहा है। कैनबरा स्थित भारतीय उच्चायोग ने पर्थ में एक सामुदायिक सभा का आयोजन किया, जहां उच्चायुक्त डी. पी. सिंह ने राष्ट्रगीत गायन का नेतृत्व किया। मिशन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘इस सामूहिक गायन में आईएएसवी त्रिवेणी पर सवार तीनों सेनाओं के अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा' की सभी महिला दल की सदस्य भी शामिल हुईं-जो समुद्र के पार भारत की भावना, एकता और नारी शक्ति के प्रति एक सम्मान है।'' लंदन में, उच्चायोग के अधिकारियों ने राष्ट्रगीत गाकर इसे मातृभूमि के लिए एक सम्मान बताया, जो भारत के लिए एकता, गौरव और प्रेम को प्रेरित करती रहती है। इसी तरह नेपाल, पेरू, चिली, अर्जेंटीना, कोलंबिया, दुबई, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका सहित कई अन्य देशों के भारतीय मिशन ने भी राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में गायन और सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। भारत की संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को आधिकारिक तौर पर ‘वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को अपने भाषण में कहा कि वंदे मातरम ‘‘हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है और हमारे भविष्य को नया साहस देता है''। इस गीत को हर युग में प्रासंगिक बताते हुए मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘जब दुश्मन ने आतंकवाद का इस्तेमाल करके हमारी सुरक्षा और सम्मान पर हमला करने का दुस्साहस किया, तो दुनिया ने देखा कि भारत दुर्गा का रूप धारण करना जानता है।''    

मोहन भागवत का कांग्रेस पर निशाना: हिंदू धर्म का उदाहरण देते हुए दिया जवाब

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्ट्रेशन पर कांग्रेस के सवाल के बाद आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने जवाब दिया है कि आखिर उन्होने संगठन का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं करवाया। मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस की स्थापना 1925में ही हो गई थी। ऐसे में क्या ब्रिटिश सरकार के साथ इसका रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए था? मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस की पहचान व्यक्तियों के संगठन के तौर पर है। भागवत बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। मोहन भागवत ने कहा, आजादी के बाद भारत सरकार ने रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं किया था। हम विशेष पहचान रखने वाले संगठन हैं और यह जनता का निकाय है। इसे आयकर से भी छूट दी गई है। उन्होंने कहा, हमें तीन बार बैन किया गया। इसका मतलब सरकार ने हमें मान्यता दी है। अगर हमारी मान्यता ही ना होती तो फिर बैन कैसे किया जाता? उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और अदालतें भी आरएसएस को बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स के रूप में मान्यता देती हैं। बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। जैसे कि हिंदू धर्म का भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। केवल भगवा झंडे को सम्मान देने के आरोपों पर भागवत नेकहा कि भगवा को आरएसएस में गुरु के तौर पर सम्मान दिया जाता है। वहीं भारत के तिरंगे का सम्मान किसी मायने में कम नहीं है। हम हमेशा तिरंगे का सम्मान करते हैं और उसकी सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। बतादें कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि आरएसएस को बैन कर देना चाहिए। यहीं देश में फसाद की जड़ है। खरगे के बेटे और कर्टाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की थी कि सार्वजनिक स्थानों पर आरएसएस की शाखाओं को बैन कर दिया जाए। उन्होंने आरएसएस के रजिस्ट्रेशन नंबर को लेकर भी सवाल किया था। एक दिन पहले ही मोहन भागवत ने कहा था कि आरएसएस का लक्ष्य हिंदू समाज को सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव के लिए संगठित करना है और हिंदू भारत के लिए ‘‘जिम्मेदार’’ हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कोई "अहिंदू" नहीं है, क्योंकि सभी एक ही पूर्वजों के वंशज हैं और देश की मूल संस्कृति हिंदू है। उन्होंने कहा, "शायद उन्हें यह बात पता नहीं है, या उन्होंने यह बात भुला दी है।" उन्होंने कहा, "जानबूझकर या अनजाने में, हर कोई भारतीय संस्कृति का पालन करता है, इसलिए कोई भी अहिंदू नहीं है, और प्रत्येक हिंदू को यह समझना चाहिए कि वह हिंदू है, क्योंकि हिंदू होने का मतलब भारत के लिए जिम्मेदार होना है।"  

भारत-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई में सफलता, जॉर्जिया से पकड़े गए हरियाणा के दो कुख्यात अपराधी

जॉर्जिया सुरक्षा एजेंसियों और हरियाणा पुलिस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी सफलता मिली है। विदेशों में छिपे गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए गए एक विशेष ऑपरेशन के तहत भारत के दो मोस्ट वांटेड अपराधी वेंकटेश गर्ग और भानु राणा को क्रमश: जॉर्जिया और अमेरिका में हिरासत में ले लिया गया है। ये दोनों गैंगस्टर हरियाणा और पंजाब में कई संगीन आपराधिक मामलों में वांछित थे। जॉर्जिया में वेंकटेश गर्ग गिरफ्तार कुख्यात गैंगस्टर वेंकटेश गर्ग को जॉर्जिया में हिरासत में लिया गया है। वह लंबे समय से विदेश भागकर अपने आपराधिक नेटवर्क को सक्रिय रखे हुए था। वेंकटेश गर्ग कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के गैंग से जुड़ा हुआ है। इसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उसे जल्द ही जॉर्जिया से प्रत्यर्पित (Extradited) किया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए हरियाणा पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष टीम जॉर्जिया पहुंच चुकी है।  अमेरिका में पकड़ा गया कुख्यात अपराधी भानु राणा दूसरी तरफ हरियाणा का कुख्यात गैंगस्टर भानु राणा अमेरिका में हिरासत में लिया गया है। यह गिरफ्तारी भारत की ओर से दिए गए इनपुट और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा है। भानु राणा को भी जल्द ही अमेरिका से डिपोर्ट करके भारत भेजा जाएगा।  लॉरेंस बिश्नोई गैंग कनेक्शन पुलिस जांच में सामने आया है कि भानु राणा लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है। उसका नेटवर्क हरियाणा, पंजाब और दिल्ली तक फैला हुआ है। पंजाब में हुए एक ग्रेनेड हमले की जांच में उसका नाम सामने आया था। जांच एजेंसियों के अनुसार अमेरिका में बैठे उसके कुछ संपर्क भी इस नेटवर्क से जुड़े थे। पुलिस पहले ही भानु राणा के कई साथियों को गिरफ्तार कर चुकी है और उसके खिलाफ कई मामलों में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि विदेशों में छिपे गैंगस्टरों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।  

गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के नए नियम, मछुआरों को मिलेगा फिशर आईडी कार्ड

  नई दिल्ली केंद्र सरकार ने समुद्री संसाधनों के बेहतर उपयोग और मछुआरों की सहायता के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया है। इन नियमों का मकसद मछुआरों, सहकारी समितियों और छोटे स्तर के मछुआरों को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही नए बदलावों का मकसद विदेशी जहाजों को भारतीय जलसीमा में मछली पकड़ने से रोकना भी है। क्या है नए नियमों की खास बातें? सरकार की ओर से बनाए गए नए नियमों के मुताबिक अब कोई भी विदेशी मछली पकड़ने वाला जहाज भारतीय समुद्री सीमा में मछली नहीं पकड़ सकेगा। इससे देश के छोटे मछुआरों के हितों की रक्षा होगी। नए नियमों में यह भी कहा गया है कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए अब मछुआरा सहकारी समितियों और मछली पालक उत्पादक संगठनों (FFPOs) को प्राथमिकता दी जाएगी। ये संगठन आधुनिक तकनीक से लैस नावों का इस्तेमाल कर सकेंगे। मछुआरों से जुड़ी सरकार की नई व्यवस्था में ‘मदर-चाइल्ड वेसल’ की भ्ी अवधारणा लाई गई है। इसकी सहायता से समुद्र के बीच में ही मछलियों का आदान-प्रदान संभव होगा। यह व्यवस्था खासकर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीपों के लिए फायदेमंद साबित होगी। यह क्षेत्र भारत के ईईजेड का 49% हिस्सा रखते हैं। सरकार की ओर से अधिसूचित नए नियमों में पर्यावरण की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। नए नियमों में एलईडी लाइट से मछली पकड़ना, पेयर ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग जैसी हानिकारक प्रथाओं पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, मछलियों को पड़नने के लिए कानूनी रूप से उनकी न्यूनतम लंबाई तय की जाएगी और राज्यों के साथ मिलकर मत्स्य प्रबंधन योजनाएं बनाई जाएंगी। मछुआरों को अब एक्सेस पास भी जारी किया जाएगा। अब बड़े और मोटर चालित जहाजों को EEZ में मछली पकड़ने के लिए ‘एक्सेस पास’ लेना होगा। यह पास मुफ्त में ReALCRaft पोर्टल से ऑनलाइन जारी किया जएएगा। छोटे और पारंपरिक मछुआरों को इससे छूट दी गई है। नए नियमों में कहा गया है कि सभी गहरे समुद्र में जाने वाले जहाजों में ट्रांसपोंडर लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, मछुआरों को QR कोड वाले आधार या फिशर ID कार्ड दिए जाएंगे। इससे सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में मदद मिलेगी। निर्यात को मिलेगा बढ़ावा ReALCRaft पोर्टल को एमपीईडीए और ईआईसी से जोड़ा जा रहा है। इससे मछलियों की पकड़ और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी किए जा सकें। इससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। मछुआरों को मिलेगा सरकारी सहयोग सरकार मछुआरों को ट्रेनिंग, अंतरराष्ट्रीय दौरे, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और ब्रांडिंग में मदद देगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य एवं जलकृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF) के तहत कर्ज की सुविधा भी दी जाएगी। भारत की समुद्री ताकत भारत के पास 11,099 किलोमीटर लंबा समुद्री तट और 23 लाख वर्ग किलोमीटर का EEZ क्षेत्र है, जो 50 लाख से ज्यादा मछुआरों की आजीविका का आधार है। भारत मछली उत्पादन और जलकृषि में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, और हर साल करीब 60,000 करोड़ रुपये का समुद्री उत्पाद निर्यात करता है। अब तक क्यों नहीं हो पाया ईईजेड का पूरा उपयोग? हालांकि भारत के पास विशाल समुद्री क्षेत्र है, लेकिन गहरे समुद्र में मौजूद ट्यूना जैसी कीमती मछलियों का दोहन अब तक सीमित रहा है। वहीं, श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया और यूरोपीय देश भारतीय महासागर से बड़ी मात्रा में ट्यूना मछली पकड़ते हैं। नए नियमों से क्या बदलेगा? ये नियम भारत को समुद्री उत्पादों के वैश्विक व्यापार में और मजबूत बनाएंगे। साथ ही, यह एक ऐसा मॉडल पेश करते हैं जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इससे न केवल मछुआरों को फायदा होगा, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की भी रक्षा होगी।  

Aadhaar Data Vault पेश: डिजिटल भारत को मिलेगी मजबूत डेटा सुरक्षा कवच

नई दिल्ली भारत में डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में UIDAI ने एक नई पहल की है। अब आपके Aadhaar नंबर और उससे जुड़े eKYC डेटा को सुरक्षित रखने के लिए Aadhaar Data Vault लॉन्च किया गया है। यह आधुनिक डिजिटल स्टोरेज सिस्टम विशेष एन्क्रिप्शन तकनीक के जरिए आपकी संवेदनशील जानकारी को चोरी और गलत इस्तेमाल से बचाएगा। डेटा की सुरक्षा का नया तरीका ADV में सभी Aadhaar नंबर टोकनाइजेशन के माध्यम से एन्क्रिप्टेड फॉर्म में सुरक्षित होंगे, जिससे असली नंबर कहीं भी लीक नहीं होगा। केवल अधिकृत एजेंसियां ही सीमित रूप से इस डेटा तक पहुंच पाएंगी। साथ ही, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और ऑडिट ट्रेल्स की मदद से डेटा सुरक्षा को और भी मजबूत बनाया गया है। कौन-कौन कर पाएंगे इसका उपयोग बैंक, फिनटेक कंपनियां और सरकारी संस्थाएं, जो Aadhaar के जरिए पहचान की प्रक्रिया करती हैं, ADV का उपयोग अनिवार्य रूप से करेंगी। इसका उद्देश्य पर्सनल डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव करना है। नागरिकों के लिए भरोसे की गारंटी अब यूजर्स को भरोसा मिलेगा कि उनका संवेदनशील डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। Aadhaar KYC या ऑथेंटिकेशन करते समय डेटा हमेशा एन्क्रिप्टेड रहेगा, जिससे प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा। डिजिटल भारत के लिए एक बड़ा कदम Aadhaar Data Vault डिजिटल भारत मिशन को मजबूती देगा और साइबर खतरों से बचाव में मदद करेगा। यह कदम भारत की पहचान सुरक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाएगा और आपके डिजिटल वजूद को संरक्षित रखेगा। ADV के साथ अब निवेश, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और अन्य डिजिटल सेवाओं में आपकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी, जिससे नागरिकों को डिजिटल दुनिया में अधिक सुरक्षा और भरोसा मिलेगा।  

ट्रंप के फैसले से 4.2 करोड़ अमेरिकियों की खाद्य सहायता पर खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने दी अस्थायी रोक की मंजूरी

अमेरिका में लाखों गरीब परिवारों के लिए बुरी खबर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नवंबर महीने के लिए मिलने वाली फूड सहायता की आधी राशि रोक दी है और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को अस्थायी मंजूरी दे दी है. यह राहत "सप्लिमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम" (SNAP) के तहत दी जाती है, जिससे करीब 4.2 करोड़ अमेरिकियों को हर महीने खाने का सामान मिलता है. दरअसल, सरकार में चल रहे शटडाउन (सरकारी कामकाज बंद होने) की वजह से फंड्स की कमी बताई जा रही है. प्रशासन ने कहा कि फिलहाल सिर्फ 4.65 अरब डॉलर की आंशिक फंडिंग ही संभव है, जबकि प्रोग्राम की पूरी फंडिंग के लिए करीब 9 अरब डॉलर की जरूरत होती है. सुप्रीम कोर्ट की जज केतानजी ब्राउन जैक्सन ने कहा कि यह आदेश सिर्फ तब तक लागू रहेगा जब तक निचली अदालत इस मामले पर फैसला नहीं दे देती. कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को कुछ समय दिया जा रहा है ताकि वह स्थिति संभाल सके. इससे पहले रोड आइलैंड के एक जज जॉन मैककोनेल ने सरकार को आदेश दिया था कि वह तुरंत पूरी राशि जारी करे. उन्होंने कहा था कि सरकार गरीबों की मदद रोककर राजनीतिक खेल खेल रही है लेकिन ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि निचली अदालत का आदेश "शटडाउन की अराजकता को और बढ़ा देगा." सरकार के इस रुख की आलोचना भी हो रही है. डेमोक्रेसी फॉरवर्ड नामक संगठन ने कोर्ट में कहा कि ट्रंप प्रशासन गरीब अमेरिकियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है. फिलहाल कोर्ट ने प्रशासन को राहत दे दी है, लेकिन इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो हर महीने इसी सहायता से अपना पेट पालते हैं. अब आगे फैसला फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स करेगा कि ट्रंप प्रशासन को पूरी SNAP राशि देनी होगी या नहीं. गरीब तबके में चिंता है कि अगर फंडिंग समय पर नहीं आई, तो लाखों लोगों के सामने "खाने के लाले" पड़ सकते हैं.

भविष्य की तकनीक: जमीन पर उड़ने वाला पुष्पक विमान, 4 घंटे में 1000 किलोमीटर और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

मुंबई दुनिया के कई देश हाई-स्‍पीड ट्रेन प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहे हैं. भारत में भी मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है. हाई-स्‍पीड ट्रेन प्रोजेक्‍ट का काफी काम पूरा हो चुका है. बुलेट ट्रेन की लिस्‍ट में जल्‍द ही एक एक और नया नाम जुड़ने वाला है. यूरोप में भी साल 2040 तक हाई-स्‍पीड रेल का नेटवर्क बिछाने की योजना है. यूरोपीय कमीशन की ओर से इसका ऐलान किया गया है. प्रोजेक्‍ट के पूरा होने पर तकरीबन आधे समय में गंतव्‍य तक ट्रेन से यात्रा पूरी की जा सकेगी. यूरोप के कई देशों को बुलेट ट्रेन से कनेक्‍ट करने की योजना है. यूरोप में रेल यात्रा एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. यूरोपीय आयोग (European Commission) ने महाद्वीप के कई प्रमुख शहरों और देशों को जोड़ने वाले एक नए हाई-स्पीड ट्रेन नेटवर्क की योजना को हरी झंडी दे दी है. इस परियोजना का लक्ष्य यात्रा समय को आधा करना और सीमा-पार कनेक्टिविटी को आसान बनाना है. इसे यूरोप का रेल पुनर्जागरण कहा जा रहा है, जो यात्रियों के लिए तेज, सस्ती और पर्यावरण हितैषी परिवहन सुविधा का नया युग लेकर आएगा. 250 KMPH की स्‍पीड यूरोपीय आयोग द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, यह हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पूरी तरह साल 2040 तक ऑपरेट होगा. हालांकि, कई प्रमुख रूट 2030 से ही शुरू हो जाएंगे. इन ट्रेनों की गति 250 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी. बर्लिन से कोपेनहेगन की यात्रा, जो अभी लगभग 7 घंटे लेती है, साल 2030 तक सिर्फ 4 घंटे में पूरी होगी. सोफिया से एथेंस की यात्रा में भी बड़ा बदलाव होगा. जहां अभी करीब 14 घंटे लगते हैं, वहीं साल 2035 तक यह समय 6 घंटे हो जाएगा. प्रस्तावों में पेरिस से लिस्बन (मैड्रिड के रास्ते) और वारसॉ से टालिन (रीगा के रास्ते) जैसी नई सीधी हाई-स्पीड लिंक भी शामिल हैं. लंबी दूरी की यात्रा अब और आसान यूरोप भर में यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह नेटवर्क क्रांतिकारी साबित होगा. यूरोपीय कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, प्राग से रोम की यात्रा सिर्फ 10 घंटे में संभव होगी. स्टॉकहोम से कोपेनहेगन की यात्रा 4 घंटे में सिमट जाएगी. इन तेज ट्रेनों और सुगम कनेक्टिविटी से पर्यटन के साथ-साथ व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा. पर्यावरण हित में बड़ा कदम यह पूरी परियोजना यूरोपीय आयोग की महत्वाकांक्षी Trans-European Transport Network (TEN-T) योजना का हिस्सा है. TEN-T का उद्देश्य रेलवे, सड़क, पोर्ट और हवाई यातायात सहित पूरे महाद्वीप में एकीकृत परिवहन ढांचा विकसित करना है. हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से यूरोप में कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि लोग विमान और कार की तुलना में रेल यात्रा को तरजीह देंगे. पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लंबी दूरी की यात्राओं में ट्रेनें विमान का विकल्प बनती हैं, तो इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में हजारों टन की कमी आ सकती है. यात्रियों की जेब पर क्या असर? अभी लागत का पूरा विवरण सामने नहीं आया है. यूरोपीय आयोग के अधिकारी केवल यही कह रहे हैं कि हाई-स्पीड रेल यात्रियों के लिए सस्ती और सुलभ विकल्प के तौर पर उपलब्ध होगी. यात्रा समय कम होने से यह नेटवर्क बजट फ्लाइट्स का भी मजबूत विकल्प बनेगा. संक्षेप में यूरोप में ट्रेन से यात्रा अब न केवल तेज़ और सुविधाजनक होगी, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर साबित होगी. तेज ट्रेनों का यह नेटवर्क महाद्वीप के शहरों को पहले से कहीं ज्यादा निकट ले आएगा और रेल यात्रा को एक बार फिर यूरोप की जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बना देगा.

हथियारबंद महिला जासूसों ने किया चौंकाने वाला काम, मुस्लिम देश का गुप्त राज हुआ दुनिया के सामने

यरूशलेम  बात जब मैदान-ए-जंग की आती है तो कोई भी चाल बेईमानी नहीं होती. कई बार देश एक-दूसरे के टॉप सीक्रेट्स निकलवाने के लिए ‘अप्सराओं’ को जमीन पर उतार देते हैं. इन अप्सराओं को ‘हनीट्रैप’ का मास्टरमाइंड कहा जाता है. कुछ ऐसा ही एक मुस्लिम देश के साथ हुआ था लेकिन इस बार एक नहीं बल्कि ऐसी कई अप्सराएं एक साथ उतर आई थीं. इतनी खूबसूरती एक साथ देखकर इस मुस्लिम देश ने मदहोशी में अपनी इज्जत ही लुटा दी थी. इसके बाद दुनिया के सामने वो राज खुला जिसे सुनकर हर कोई कांप गया. खुफिया एजेंसी ने भर्ती के लिए रखी थी ये शर्त इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने एक वक्त पर लेडी ब्रिगेड में खूबसूरत और खौफनाक अप्सराएं हायर की थीं. उन्हें टीम में लेने के लिए शर्त ये थी कि उनकी खूबसूरती के आगे दुश्मन सुध-बुध खो दे. फिर उन्हें मोसाद की ट्रेनिंग देकर खौफनाक बनाया गया. इसके बाद ये अप्सराएं ईरान की जमीन पर उतारी गईं. इन हसीनाओं ने सबसे पहले ईरान के 9 न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स को अपना निशाना बनाया था. उनसे राज खुलवाए फिर उनके लिए नर्क के दरवाजे खोल दिए. Israel को 1 साल तक सप्लाई किए सीक्रेट बताया जाता है मोसाद की इस लेडी ब्रिगेड ने इतनी सफाई से काम किया उनका ये राज आज भी कोई नहीं जानता है. उन अप्सराओं ने अफसरों के दिल नहीं घरों में भी जगह बनाई थी. उनके परिवार से मिलीं और 1 साल तक ईरान के सीक्रेट इजरायल को सप्लाई करती रहीं. इजरायल को इन 9 न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स के खाने-पीने, रहने और आने-जाने तक की सारी खबर मिलती रही. यही वजह है कि नेतन्याहू ने ठीक उन जगहों पर ही सटीक एयरस्ट्राइक की, जहां पर इन्हें छुपाकर रखा गया था. जब तक ईरान को इन अप्सराओं की कुछ खबर चलती वो हवा में गायब हो चुकी थीं. इस लेडी ब्रिगेड को ही ‘हथियार वाली अप्सराएं’ कहा जाता है. बताया जाता है कि ये दुश्मन की आंखों के सामने रहती हैं लेकिन कभी दिखाई नहीं देती हैं. मोसाद को इनकी वजह से ही ईरान का टॉप सीक्रेट पता चला था. अब दुनिया के सामने ये सच आ चुका है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा था, जिसे उसने कभी खुलकर एक्सेप्ट नहीं किया.