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अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती देने से राष्ट्रीय पहचान तक: वंदे मातरम की कहानी और विरोध के कारण

नई दिल्ली भारत की स्वतंत्रता संग्राम की गूंज में एक ऐसा गीत है जो न केवल राष्ट्रप्रेम की भावना जगाता है, बल्कि मातृभूमि को देवी के रूप में पूजने की परंपरा को जीवंत करता है। 'वंदे मातरम'- ये दो शब्द आज भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में गूंजते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गीत कैसे और कब रचा गया? कैसे यह बंगाल के एक उपन्यास से निकलकर पूरे देश की आवाज बन गया? और कैसे यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बना, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी? आइए, इतिहास की उन पन्नों को पलटें जहां राष्ट्रवाद की लौ पहली बार प्रज्वलित हुई। वंदे मातरम की जड़ें 19वीं सदी के बंगाल में हैं, जब भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। इस गीत के रचयिता थे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, जिन्हें बंगाली साहित्य का पितामह कहा जाता है। बंकिम चंद्र एक प्रशासनिक अधिकारी थे, लेकिन उनकी रचनाएं राष्ट्रवाद की आग से भरी हुई थीं। गीत की रचना 7 नवंबर 1875 को हुई, जब बंकिम चंद्र अपने घर में बैठे थे। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, यह गीत एकाएक प्रेरणा से लिखा गया। बंकिम ने इसे संस्कृत और बंगाली के मिश्रण में रचा, जहां संस्कृत श्लोक मातृभूमि की महिमा गाते हैं और बंगाली हिस्सा भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। गीत की पहली पंक्तियां हैं: वंदे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्। शस्यशामलां मातरम्॥ यह गीत सबसे पहले उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ, जो 1882 में पूरा हुआ और धारावाहिक रूप में बंगाली पत्रिका बंगदर्शन में छपा। उपन्यास की पृष्ठभूमि 18वीं सदी का संन्यासी विद्रोह है, जहां भूखे संन्यासी ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह करते हैं। 'वंदे मातरम' उपन्यास में संन्यासियों का युद्धगीत है, जो मातृभूमि को दुर्गा देवी के रूप में चित्रित करता है। बंकिम चंद्र ने गीत को संगीतबद्ध करने के लिए अपने भतीजे को प्रेरित किया, लेकिन मूल धुन बाद में जादवपुर विश्वविद्यालय के संगीतकारों द्वारा विकसित की गई। गीत की रचना का उद्देश्य स्पष्ट था – भारतीयों में मातृभूमि के प्रति प्रेम और विदेशी शासन के खिलाफ संघर्ष की भावना जगाना। स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका: ब्रिटिशों की नींद उड़ाने वाला नारा वंदे मातरम महज एक गीत नहीं रहा; यह स्वतंत्रता संग्राम का युद्धघोष बन गया। 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार इसे सार्वजनिक रूप से गाया गया, जब रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे अपनी धुन में प्रस्तुत किया। टैगोर की आवाज ने गीत को अमर बना दिया। 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान यह गीत स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक बना। बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेता इसे रैलियों में गाते थे। ब्रिटिश सरकार इतनी भयभीत हुई कि 1907 में उन्होंने गीत गाने पर प्रतिबंध लगा दिया। फिर भी, क्रांतिकारी जैसे अरविंद घोष और सुभाष चंद्र बोस इसे गुप्त रूप से गाते रहे। महात्मा गांधी ने भी इसे सराहा, लेकिन पूरे गीत को अपनाने में संकोच किया क्योंकि इसमें हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख था, जो मुस्लिम समुदाय को अलग कर सकता था। फिर भी, आंदोलन में इसका प्रभाव असीम था। 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे ऑर्केस्ट्रा में प्रस्तुत किया, जिसने इसे वैश्विक स्तर पर पहुंचाया। राष्ट्रीय गीत का दर्जा: 1950 की ऐतिहासिक घोषणा स्वतंत्रता के बाद वंदे मातरम को राष्ट्रीय सम्मान मिला। 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत घोषित किया। यह निर्णय डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में लिया गया। उसी दिन जना गना मन को राष्ट्रीय गान बनाया गया।राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल उपन्यास के पहले दो छंदों को अपनाया गया, क्योंकि पूरे गीत में विद्रोही तत्व थे और धार्मिक संदर्भ मुस्लिम लीग की आपत्तियों के कारण विवादास्पद थे। जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद ने समझौता किया। आज, सरकारी समारोहों में पहले दो छंद गाए जाते हैं। वंदे मातरम विवादों से अछूता नहीं रहा। 2006 में शताब्दी समारोह के दौरान कुछ मुस्लिम संगठनों ने धार्मिक आधार पर विरोध किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे राष्ट्रप्रेम का प्रतीक माना। गीत की विरासत फिल्मों, स्कूलों और खेल आयोजनों में जीवित है। देश भर में हो रहा आयोजन राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में 150 महत्वपूर्ण स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ऐसे ही एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होने वाले उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि होंगे। समारोह सात नवंबर की सुबह सार्वजनिक स्थानों पर स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों, अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों सहित नागरिकों की भागीदारी के साथ 'वंदे मातरम' के पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन के साथ शुरू होगा। मंत्रालय ने कहा कि गीत के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रव्यापी समारोहों को मंजूरी दी थी। अधिकारियों ने बताया कि उद्घाटन समारोह में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम, 'वंदे मातरम' के 150 वर्षों के इतिहास पर एक प्रदर्शनी, एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन और एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा। मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलमा ने ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम को बताया गैर-इस्लामिक, सरकार से निर्देश वापस लेने की मांग जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के धार्मिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) ने बुधवार को केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार के एक आदेश की कड़ी आलोचना की है। इस आदेश में स्कूलों को ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रम आयोजित करने तथा सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। एमएमयू की अगुवाई मीरवाइज उमर फारूक कर रहे हैं। उन्होंने इस निर्देश को 'गैर-इस्लामिक' और 'आरएसएस प्रेरित हिंदू विचारधारा थोपने की कोशिश' करार दिया है। संयुक्त बयान में ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम और मौलाना रहमतुल्लाह समेत कई धार्मिक नेताओं ने कहा कि यह आदेश इस्लाम की मूल आस्था- तौहीद (अल्लाह की एकता) के सिद्धांत के विरुद्ध है। उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस … Read more

अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा: ट्रंप ने दागी मिसाइल, पुतिन ने किया युद्ध का संकेत

मॉस्को  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बुधवार को परमाणु हथियार परीक्षण दोबाना शुरू करने को कह दिया है. उन्होंने न्यूक्लियर टेस्ट के लिए प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया है. ये आदेश पुतिन का ऐलान-ए-जंग माना जा रहा है क्योंकि कुछ घंटों पहले ही अमेरिका ने अपनी न्यूक्लियर मिसाइल दागी है. पिछले हफ्ते ट्रंप ने ये दावा करते हुए अमेरिका में न्यूक्लियर टेस्ट शुरू करवाया था कि रूस, चीन और पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करवा रहे हैं. इसके बाद पुतिन ने भी जवाबी कार्रवाई करनी शुरू कर दी है. उन्होंने ट्रंप को न्यूक्लियर टेस्ट बैन समझौता भी याद दिलाया है. Putin क्यों हुए आग बबूला? पुतिन ने कहा कि रूस ने हमेशा व्यापक परमाणु परीक्षण बैन समझौते (CTBT) के तहत अपने दायित्वों का सख्ती से पालन किया है, लेकिन अगर संयुक्त राज्य अमेरिका या कोई अन्य परमाणु शक्ति देश ऐसे हथियार का परीक्षण करता है, तो रूस भी ऐसा जरूर करेगा. पुतिन ने कहा, ‘मैं विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय… विशेष सेवाओं और संबंधित नागरिक एजेंसियों को निर्देश दे रहा हूं कि वे इस मुद्दे पर अतिरिक्त जानकारी जुटाने, सुरक्षा परिषद में इसका विश्लेषण करने, और परमाणु हथियार परीक्षणों की तैयारी के लिए काम शुरू करें और सहमत प्रस्ताव बनाने के लिए हर संभव प्रयास करें’. Russia कहां करेगा न्यूक्लियर हथियारों का परीक्षण? रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव ने पुतिन को बताया कि अमेरिका की हालिया टिप्पणियों और एक्शन्स को देखते हुए ‘बड़े पैमाने पर परमाणु परीक्षणों की तैयारी तुरंत करना सही कदम होगा’. बेलौसोव ने कहा कि रूस के आर्कटिक परीक्षण स्थल नोवाया जेमल्या (Novaya Zemlya) में जल्द ही परमाणु हथियारों के परीक्षण का काम शुरू किया जाएगा. America ने ऐसा क्या किया? बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने भी 50 साल पुरानी न्यूक्लियर मिसाइल Minuteman 3 का परीक्षण किया है. इस मिसाइल की रेंज 14000 किमी बताई जा रही है, यानी ये रूस और चीन जैसे देशों तक आसानी से पहुंच सकती है. अमेरिका ने ये भी कह दिया है कि मिनटमैन 3 को रिप्लेस करने वाले वर्जन को तैयार किया जा रहा है, जो 2030 तक पूरा होगा और तब तक ऐसे परीक्षण चलते रहेंगे.

मैक्रों ने किया फैसला, फ्रांस में ड्रैगन की सेक्स डॉल को लेकर भड़का विवाद

पेरिस  बच्चों जैसी दिखने वाली सेक्स डॉल्स की बिक्री को लेकर उठे विवाद के बाद फ्रांस सरकार ने चीनी मूल की फास्ट-फैशन कंपनी शीन (Shein) की वेबसाइट पर कार्रवाई करते हुए उसके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि यह कदम तब तक लागू रहेगा, जब तक कंपनी यह साबित नहीं कर देती कि उसकी ऑनलाइन सामग्री फ्रांसीसी कानूनों के अनुरूप है. मंत्रालय ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया कि इस निर्णय से पेरिस स्थित शीन के पहले स्थायी स्टोर पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं. बता दें कि यह फैसला उस समय आया जब पेरिस में स्थित प्रतिष्ठित बीएचवी मरैस डिपार्टमेंटल स्टोर में शीन के पहले स्टोर के उद्घाटन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी. उद्घाटन के कुछ ही घंटों बाद सरकार ने यह कदम उठाया. उद्घाटन कार्यक्रम के बाहर कई पर्यावरण संगठनों और बाल संरक्षण समूहों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने कंपनी पर नैतिकता और श्रम उल्लंघन के आरोप लगाते हुए #BoycottShein के नारे लगाए. कंपनी ने दी सफाई विवाद तब भड़का जब यह खुलासा हुआ कि शीन की वेबसाइट पर बच्चों जैसी दिखने वाली सेक्स डॉल्स बिक्री के लिए सूचीबद्ध थीं. आलोचना के बाद कंपनी ने सफाई दी कि उसने ऐसे सभी उत्पादों पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया है और अपने वयस्क उत्पाद सेक्शन को अस्थायी रूप से समीक्षा के लिए हटा दिया है. साथ ही कंपनी ने यह जांच शुरू की है कि प्लेटफॉर्म के फिल्टरिंग सिस्टम को कैसे दरकिनार किया गया. कंपनी की इस सफाई के बावजूद, फ्रांसीसी सरकार ने शीन के ऑनलाइन संचालन पर रोक लगा दी है.  वहीं, बीएचवी मरैस स्टोर के मालिक समूह (SGM) ने इस विवाद को अस्वीकार्य बताया, लेकिन शीन की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की. समूह के सीओओ कार्ल-स्टीफन कॉटेंडिन ने कहा कि हमें खुशी है कि कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी दिखाई. हमने यह सुनिश्चित किया है कि उनके सभी उत्पाद यूरोपीय और फ्रांसीसी नियमों का पालन करें. बता दें, शीन की शुरुआत 2012 में चीन में हुई थी और जिसका मुख्यालय अब सिंगापुर में है. शीन वैश्विक स्तर पर फास्ट-फैशन उद्योग का बड़ा नाम बन चुका है. हालांकि, कंपनी को लंबे समय से पर्यावरण प्रदूषण, सस्ते श्रम शोषण और शिनजियांग प्रांत में जबरन मजदूरी जैसे गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. फ्रांस ने हाल ही में फास्ट-फैशन कंपनियों पर सख्त निगरानी शुरू की है. सरकार एक नए कानून पर काम कर रही है जो सस्ते आयातित उत्पादों पर टैक्स, विज्ञापन प्रतिबंध, और अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को कड़ा करेगा. यह कानून शीन, टेमू और अलीएक्सप्रेस जैसी एशियाई ई कॉमर्स कंपनियों को सीधे प्रभावित करेगा. इस बीच, फ्रांसीसी फैशन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने इस विवाद को उद्योग के लिए काला दिन बताया. फ्रेंच वुमेंस रेडी-टू-वियर फेडरेशन के अधिकारी थिबॉट लेडुनोइस ने कहा कि शीन फ्रांस में अपने लिए एक शानदार शोकेस तैयार कर रहा है, लेकिन यह उन सभी भयावह व्यावसायिक प्रथाओं को वैध ठहराता है जो वह दुनिया भर में लागू कर रहा है. फिलहाल फ्रांस सरकार ने शीन से स्पष्ट जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि यदि कंपनी फ्रांसीसी साइबर और नैतिक मानकों का पालन करने में विफल रहती है, तो उस पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है. 

दिनदहाड़े शर्मनाक हरकत! मेक्सिको की राष्ट्रपति से छेड़खानी की कोशिश, सुरक्षा पर उठे सवाल

मेक्सिको मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम संग सड़क हुई पर छेड़छाड़ के बाद उन्होंने बुधवार को पूरे देश में यौन उत्पीड़न को अपराध घोषित करने की मांग की है। हमले के बाद पूरे देश में महिलाओं के सामने मौजूद खतरों को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। इससे पहले 63 वर्षीय शीनबाम पर हमला तब हुआ जब वे मंगलवार को मेक्सिको सिटी में राष्ट्रपति भवन के पास समर्थकों का अभिवादन स्वीकार कर रही थीं। जानकारी के मुताबिक क्लाउडिया एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जा रही थीं। तभी अचानक एक शराबी शख्स उनके पास आया, उनके कंधे पर हाथ रखा और दूसरे हाथ से उनकी छाती को छुआ, साथ ही उनकी गर्दन को चूमने की कोशिश की। हालांकि राष्ट्रपति सुरक्षा दल के एक सदस्य ने उसे तुरंत दूर खींच लिया। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब देश भर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। इस मामले में मेक्सिको के रिकॉर्ड भी चिंताजनक हैं। देश में यौन उत्पीड़न आम है और अधिकार समूह गंभीर संकट की चेतावनी दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 70 प्रतिशत मेक्सिकन महिलाओं को अपने जीवन में कम से कम एक बार यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मेक्सिको में हर दिन औसतन 10 महिलाओं की हत्या होती है। घटना के बाद अब शीनबाम ने बुधवार को कहा है कि सरकार यौन उत्पीड़न से संबंधित राष्ट्रव्यापी कानून की जल्द से जल्द समीक्षा करेगी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, "मेरी सोच यह है। अगर मैं शिकायत दर्ज नहीं कराउंगी, तो बाकी मैक्सिकन महिलाओं का क्या होगा? अगर राष्ट्रपति के साथ ऐसा हुआ, तो हमारे देश की सभी महिलाओं का क्या होगा?" राष्ट्रपति ने कहा, "यह एक आपराधिक अपराध होना चाहिए और हम इसके लिए एक अभियान शुरू करने जा रहे हैं।"

महादेव ऐप घोटाले में UAE ने दी झटका, आरोपी को सौंपने से इनकार कर भारत को निराश किया

दुबई महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े 6000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्य आरोपी रवि उप्पल दुबई से गायब हो गया है। इस घटनाक्रम से भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मजबूत संबंधों पर पहली बार दरार पड़ने के संकेत मिले हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लंबित प्रत्यर्पण याचिका के बावजूद उप्पल की रिहाई और उसके गायब होने से भारतीय जांच एजेंसियां हैरान हैं। यूएई ने उसके ठिकाने को लेकर भी भारत को कोई जानकारी नहीं दी है। बताया जा रहा है कि यूएई ने न तो भारत को उसकी रिहाई के बारे में पहले से जानकारी दी और न ही यह बताया कि वह अब किस देश में चला गया है। रवि उप्पल को भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा था, क्योंकि वह महादेव ऐप के अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमुख संचालकों में से एक हैं। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) सहित कई एजेंसियां कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया था कि कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वतें पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल से जुड़ी थीं। दिसंबर 2023 में हुई थी गिरफ्तारी  रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर दुबई पुलिस ने रवि उप्पल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद भारत सरकार ने आधिकारिक राजनयिक चैनलों के माध्यम से यूएई को उनका प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था। परंतु अब यह मामला विवाद में आ गया है। भारत के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, यूएई को प्रत्यर्पण अनुरोध "समय पर और सत्यापनीय प्रमाणों के साथ" भेजा गया था। हालांकि, यूएई अधिकारियों ने बाद में दावा किया कि उन्हें ऐसा कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ, और उन्होंने उप्पल को रिहा कर दिया। भारत हैरान, यूएई की चुप्पी रहस्यमय भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, यह दावा यूएई की ओर से उपलब्ध दस्तावेजों के विपरीत है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि MEA के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 45 से 60 दिनों के भीतर प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा जाना चाहिए और यदि आरोपी को रिहा भी कर दिया गया हो, तो बाद में दोबारा गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण संभव है। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने विदेश मंत्रालय (MEA) से अनुरोध किया है कि इस मामले को “सर्वोच्च कूटनीतिक स्तर” पर उठाया जाए ताकि यूएई द्वारा प्रत्यर्पण संधि की शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों को यह समझ नहीं आ रहा कि इतने हाई-प्रोफाइल आरोपी को औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित रहते हुए और इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस सक्रिय होने के बावजूद हिरासत से कैसे रिहा कर दिया गया। साथी आरोपी भी है हिरासत में महादेव ऐप सिंडिकेट के दूसरे प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भी इंटरपोल के समान रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद इंटरपोल नोटिस और प्रत्यर्पण अनुरोध जारी किए गए थे। महादेव ऐप घोटाला महादेव ऑनलाइन बुक ऐप को कथित तौर पर भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इसका नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ था और करोड़ों रुपये की गैरकानूनी कमाई को विदेशी खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था। MEA अब यूएई से औपचारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहा है ताकि यूएई यह स्पष्ट करे कि रवि उप्पल को रिहा क्यों किया गया और वह वर्तमान में कहां हैं।

सर्दी ने दी दस्तक: कोहरे से थमी रफ्तार, मौसम विभाग की कड़ी चेतावनी जारी

नई  दिल्ली मौसम विभाग ने अगले 10 दिनों के लिए उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में ठंड तथा कुछ हिस्सों में बारिश-तूफान की चेतावनी (IMD Weather Update) जारी की है। बारिश के बाद कई क्षेत्रों में तापमान में तेज गिरावट की संभावना है और सुबह-शाम सिहरन वाली हवाएं चल रही हैं। UP-बिहार-झारखंड में कोहरा और ठंड, राजस्थान-MP में शुष्क मौसम के साथ पारा घटना और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी व तेज हवाओं की संभावना है। दक्षिण और पूर्वी तटों पर भी अलग-अलग दिनों में वर्षा का प्रभाव दिखेगा। बिहार-झारखंड: सिहरन और घटता तापमान बिहार में ठंड की दस्तक हो चुकी है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार सुबह-शाम सिहरन वाली हवाएँ बहने लगी हैं और रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। आगामी दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना है तथा कई स्थानों पर कोहरा भी छाने लगा है। झारखंड में भी राजधानी रांची समेत कई जिलों में सुबह-शाम ठंड सताने लगी है और न्यूनतम तापमान घट रहा है। मध्य प्रदेश: गरज-चमक के साथ बारिश की आशंका मध्य प्रदेश में भी बिजली कड़कने और गरज-चमक के साथ तूफानी हवाओं की संभावना बनी हुई है; कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय स्तर पर असुविधा रह सकती है। राजस्थान: शुष्क मौसम और तेज ठंड मौसम विभाग ने राजस्थान में आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहने और तापमान में गिरावट आने का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश भागों में 5 नवंबर से अगले एक सप्ताह उत्तर-पश्चिम हवाओं के प्रभाव से न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र: बारिश और बर्फबारी के साथ तूफानी हवाएँ विभाग के मुताबिक 5 नवंबर तक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश व बर्फबारी हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद क्षेत्रों में बिजली कड़कने और तेज हवाओं का भी खतरा है; हवा की गति 40 से 50 किमी/घंटा तक पहुँचने की संभावना बताई गई है। 4 नवंबर को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र: 5-6 नवंबर को तूफानी बारिश मौसम विभाग ने 5 और 6 नवंबर को कोंकण और गोवा तथा मध्य महाराष्ट्र में बिजली कड़कने के साथ तूफानी हवा और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जतायी है। आवाम को अस्थिर मौसम के मद्देनजर सतर्क रहने की सलाह दी गयी है। पूर्वोत्तर: नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में 5 नवंबर अलर्ट विभाग के अनुसार 5 नवंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बिजली कड़कने और तूफानी हवाओं के साथ बारिश की चेतावनी जारी है। स्थानीय प्रशासन और लोगों को आवश्यक सतर्कता बरतने को कहा गया है। तमिलनाडु व दक्षिणी तट: 8 नवंबर तक जारी रहेगी बारिश तमिलनाडु में 8 नवंबर तक अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी। साथ ही तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा तथा उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में गरज-चमक के साथ वर्षा का दौर देखा जा सकता है।

जिस मिसाइल से कांपता था पाकिस्तान, अब वही हथियार खरीदने जा रहा इस्लामिक दुनिया का सबसे बड़ा देश

नई दिल्ली दक्षिण एशिया के सबसे घातक हथियारों में शुमार ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में खूब तबाही मचाई थी। मई में भारतीय वायुसेना ने इस सुपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया, जिससे दुश्मन की हवाई क्षमता ध्वस्त हो गई। अब इसी मिसाइल को दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने खरीदने का फैसला किया है। लगभग 45 करोड़ डॉलर की इस डील से इंडोनेशिया न केवल अपनी नौसेना को मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने में भी सक्षम हो जाएगा। यह डील भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि वार्ता की लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अब केवल रूसी पक्ष से अंतिम स्वीकृति का इंतजार है, जिसके बाद कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए जा सकेंगे। भारत और इंडोनेशिया के बीच यह सौदा लंबे समय से चर्चा में है। इस वर्ष जनवरी में इंडोनेशिया के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत हुई थी। भारत पहले ही ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री फिलीपींस को कर चुका है और अब इस अनोखी हथियार प्रणाली के लिए नए बाजार तलाश रहा है। विशेष रूप से मई महीने में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए हालिया संघर्ष के दौरान इस मिसाइल प्रणाली ने खुद को युद्ध के मैदान में साबित भी किया है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल ही में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने इंडोनेशिया का दौरा किया था। उनका यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की जनवरी में हुई भारत यात्रा ने भी दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई दिशा दी थी। भारत ने कुछ वर्ष पहले फिलीपींस के साथ लगभग 3,500 करोड़ रुपये का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा किया था। भारत ने न केवल मिसाइलें बल्कि आवश्यक लॉन्चिंग और समर्थन प्रणाली भी वहां पहुंचाई हैं। यह सौदा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित करने वाला रहा, क्योंकि इसे फिलीपींस द्वारा अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। ब्रह्मोस का जन्म: भारत-रूस की साझेदारी का कमाल ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्रा नदी और रूस की मॉस्को नदी से लिया गया है। यह मिसाइल भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और रूस की NPO Mashinostroyeniya के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की गई है। 1998 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का मकसद था एक ऐसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाना जो दुश्मन के जहाजों और जमीन के ठिकानों को चंद सेकंडों में नेस्तनाबूद कर दे। रूस की P-800 ओनिक्स मिसाइल पर आधारित यह हथियार 2005 से भारतीय सेनाओं में शामिल हो चुका है। ब्रह्मोस की खासियत यह है कि यह जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है। इसका वजन 3,000 किलोग्राम (शिप/ग्राउंड वर्जन) है, लंबाई 8.2 मीटर और व्यास 0.67 मीटर। यह 300 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाती है, जो दुश्मन के कवच को चीर सकता है। सबसे बड़ी ताकत? इसकी 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक- एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद ही टारगेट पर पहुंच जाती है, बिना किसी अतिरिक्त मार्गदर्शन के। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंडोनेशिया के साथ यह समझौता होता है, तो यह दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा और स्वदेशी ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी के लिए निर्यात के नए द्वार खोलेगा। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से विकसित की गई है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ने वाली, अत्यंत सटीकता वाली मिसाइल है, जो जमीन, समुद्र और वायु से लॉन्च की जा सकती है। अगर सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यह न केवल भारत की रक्षा कूटनीति की बड़ी सफलता होगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी एक नया वैश्विक मुकाम दिलाने में मदद करेगा। पाकिस्तान में तबाही: ऑपरेशन सिंदूर का 'फायर एंड फॉरगेट' हमला ब्रह्मोस का असली जलवा तब दिखा जब मई 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर पहुंच गया। 10 मई को शुरू हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी एयरबेस पर कई ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं। इनमें से कुछ ने भोलारी एयरबेस पर सीधा निशाना साधा, जहां एक AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान तबाह हो गया। पाकिस्तानी रिटायर्ड एयर मार्शल ने खुद माना कि चार ब्रह्मोस मिसाइलों ने उनके हैंगर को उड़ा दिया। यह ऑपरेशन पाकिस्तान के आतंकी हमलों का जवाब था। ब्रह्मोस ने न केवल एयरबेस को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तानी रडार सिस्टम (जैसे चाइनीज HQ-9) को भी चकमा दिया। स्रोतों के मुताबिक, लगभग 15 ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई लॉन्च क्षमता को ठप कर दिया, जिससे वे काउंटर-अटैक की योजना डालने को मजबूर हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2025 को कानपुर में भाषण देते हुए इसकी पुष्टि की। इंडोनेशिया की सैन्य आधुनिकीकरण यात्रा: ब्रह्मोस से नई ताकत इंडोनेशिया, दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप राष्ट्र और आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। वह अपनी नौसेना को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता, खासकर नटुना द्वीपों पर दावे, ने जकार्ता को चिंतित कर दिया है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, जो पूर्व रक्षा मंत्री रह चुके हैं, उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी है। 2025 में इंडोनेशिया ने BRICS में शामिल होकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की। ब्रह्मोस खरीद इसकी कड़ी है। जनवरी 2025 में प्रबोवो की भारत यात्रा के दौरान (जहां वे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि थे) बातचीत तेज हुई। इंडोनेशियाई नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने ब्रह्मोस मुख्यालय का दौरा किया। डील में शोर-बेस्ड और शिप-माउंटेड वर्जन शामिल हैं, जो नटुना सागर में 290 किमी रेंज से चीनी जहाजों को निशाना बना सकेंगे। भारत ने CAATSA (रूस से हथियार खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध) से मुक्त होने का आश्वासन दिया, क्योंकि ब्रह्मोस के मुख्य पार्ट्स भारत में बने हैं।

केरल में POCSO मामला: मां को अपराध के लिए उकसाने का दोषी पाया, अदालत ने कही यह बात

तिरुवनंतपुरम केरल की एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने महिला और उसके पुरुष साथी को 180 साल की सजा सुनाई है। दरअसल, पुरुष पर महिला की 12 साल की बेटी के साथ बार-बार बलात्कार के आरोप थे। वहीं, महिला पर आरोप थे कि उसने बेटी के खिलाफ रेप में आरोपी की मदद की और उसे अपराध के लिए उकसाया भी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया था कि महिला अपनी बच्ची को शारीरिक संबंध बनाते हुए देखने के लिए मजबूर भी करती थी।  रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने दोनों को 180 साल की सजा और दोनों को ही 11.7 लाख रुपये जुर्माना देने की सजा सुनाई है। जज अशरफ एएम ने पाया है कि दोनों पॉक्सो और आईपीसी और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के कई प्रावधानों के तहत आरोपी हैं। एक ओर जहां आरोपी पलक्कड़ का रहने वाला है। वहीं, पीड़िता की मां और इस केस में दूसरी आरोपी तिरुवनंतपुरम से है। विशेष लोक अभियोजक सोमसुंदरन ए ने कहा कि महिला पति और बच्ची के साथ तिरुवनंतपुरम में रहती थी और फोन पर बातचीत के जरिए 33 साल के आरोपी के संपर्क में आई थी। इसके बाद वह आरोपी के साथ भाग गई थी और दोनों पलक्कड़ और मलप्पुरम में साथ रहे। खास बात है कि इस दौरान बच्ची भी उनके साथ ही थी। महिला की उम्र 30 साल है। अभियोजन ने बताया है कि महिला के साथी ने दिसंबर 2019 और नवंबर 2020 के बीच बच्ची के साथ कई बार यौन हिंसा की। यही सिलसिला दिसंबर 2020 से अक्तूबर 2021 तक चला। केस में मां को यौन उत्पीड़न के लिए उकसाने का दोषी पाया गया है। अभियोजन के आरोप हैं कि आरोपी मां अपराध की गवाह है और वह नाबालिग बच्ची को मजबूर करती थी कि वह दोनों को संबंध बनाते हुए देखे। इसके अलावा महिला पर बच्ची को पोर्न वीडियो दिखाने और बीयर पिलाने के आरोप भी लगाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला ने बच्ची को धमकाया था कि उसके दिमाग में सीसीटीवी लगाया गया और अगर वह किसी को कुछ बताएगी तो उन्हें पता चला जाएगा। कैसे सामने आया मामला रिपोर्ट के अनुसार, सोमसुंदरन का कहना है कि महिला मलप्पुरम थाने पहुंची थी और उसने माता-पिता पर आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज नहीं देने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा, 'पुलिस ने महिला के पैरेंट्स को सर्टिफिकेट देने के लिए कहा था। जब वह महिला के घर पहुंचे और कहा कि वह पोती को देखना चाहते हैं, तो आरोपी ने इनकार कर दिया।' उन्होंने कहा, 'बाद में पड़ोसियों ने बताया कि घर में बच्ची की हालत खराब है और उसे भोजन भी नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने चाइल्ड लाइन से संपर्क किया और बच्ची को स्नेहिता सेंटर पहुंचाया। यहां बच्ची ने उसके साथ हुई वारदात को बताया।' कोर्ट के आदेश हैं कि जुर्माने की रकम पीड़िता को दी जाए। खास बात है कि जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोनों पर 20 महीने की सजा और बढ़ जाएगी।

अदृश्य ‘अभिमन्यु’ से बढ़ेगी भारत की शक्ति, S-400 और THAAD को झेलना होगा झटका

नई दिल्ली भारतीय नौसेना अपनी कैरियर एयर विंग्स में अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (एनआरटी) द्वारा विकसित ‘अभिमन्यु’ ड्रोन इस पहल की अगुवाई कर रहा है. यह ड्रोन नेवल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयर व्हिकल (एन-सीसीएवी) प्रोग्राम का आधार बन रहा है, जो भारत को वैश्विक ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन्स की तर्ज पर क्रूड फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ तैनाती करने वाला देश बनाने की दिशा में ले जा रहा है. साल 2026 तक उड़ान भरने की योजना वाले इस जेट-पावर्ड स्टील्थ ड्रोन में एआई-ड्रिवन क्षमताएं, मैन्‍ड-अनमैन्ड टीमिंग (एमयूएम-टी) और एयर-टू-एयर किल क्षमता शामिल होगी, जो नौसेना की स्ट्राइक ग्रुप्स को नई ताकत प्रदान करेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे कैच कर पाना काफी मुश्किल होगा. दिलचस्‍प बात यह है कि ‘अर्जुन’ नाम से टैंक पहले से ही इंडियन आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहा है. अब अभिमन्‍यु की बारी की बारी है. अभिमन्यु एक जेट-पावर्ड, लो रडार क्रॉस-सेक्शन (आरसीएस) ड्रोन है, जो विशेष रूप से भारतीय नौसेना के मौजूदा और भविष्य के कैरियर-बेस्ड फाइटर्स जैसे मिग-29K और आने वाले राफेल-M के साथ लॉयल विंगमैन के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका डिजाइन स्वेप्ट विंग्स, हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर्स, सिंगल वर्टिकल टेल और रियर फ्यूजलाज के दोनों तरफ ट्विन नैरो एयर इंटेक्स से युक्त है. एक खास फीचर है फ्यूजलाज के चारों ओर लपेटी गई कंटीन्यूअस चाइन-लाइन, जो रडार रिफ्लेक्शन्स को कम करके कंटेस्टेड एनवायरनमेंट्स में सर्वाइवेबिलिटी बढ़ाती है. हालांकि, अभिमन्यु में कई स्टील्थ-इंस्पायर्ड फीचर्स हैं, लेकिन यह पूरी तरह लो-ऑब्जर्वेबल प्लेटफॉर्म नहीं है. इसका कॉन्फिगरेशन रडार सिग्नेचर को कम करने और कॉस्ट-इफेक्टिवनेस के बीच संतुलन बनाता है. महंगे इंटरनेशनल समकक्षों की तुलना में यह रैपिड प्रोडक्शन और एक्सपेंडेबिलिटी पर फोकस करता है. एआई-ड्रिवन सिस्टम्स इसे ऑटोनॉमस ऑपरेशन्स के लिए सक्षम बनाते हैं, जबकि एयर-टू-एयर किल क्षमता इसे दुश्मन एयरक्राफ्ट को न्यूट्रलाइज करने में सक्षम बनाएगी. एमयूएम-टी कॉन्फिगरेशन में यह क्रूड पायलट्स के साथ टीम बनाकर काम करेगा, सेंसर रीच बढ़ाएगा और सिचुएशनल अवेयरनेस प्रदान करेगा. ऑपरेशनल रोल और स्ट्रैटेजिक विजन एन-सीसीएवी कार्यक्रम के तहत अभिमन्यु ड्रोन्स भारतीय नौसेना के फाइटर्स के साथ एमयूएम-टी में उड़ान भरेंगे. ये ड्रोन्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की सेंसर रीच बढ़ाएंगे, सिचुएशनल अवेयरनेस को मजबूत करेंगे और कैरियर-बेस्ड तथा ऑनशोर ऑपरेशन्स में टैक्टिकल फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करेंगे. हाई-रिस्क या कॉम्प्लेक्स मिशन्स को संभालकर ये ह्यूमन पायलट्स के एक्सपोजर को कम करेंगे और कैरियर एयर विंग्स की ऑफेंसिव-डिफेंसिव क्षमताओं को बढ़ाएंगे. नौसेना एक फ्लीट ऑफ अभिमन्यु ड्रोन्स को विभिन्न क्षमताओं के साथ तैनात करने की योजना बना रही है, जो इटरेटिव डेवलपमेंट साइकिल्स से हासिल होगी. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, स्ट्राइक और स्वार्मिंग मिशन्स के लिए स्पेशलाइज्ड वैरिएंट्स उभर सकते हैं. यह वर्तमान और भविष्य की नौसेना ऑपरेशन्स को सपोर्ट करेगा, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर. अभिमन्यु न केवल फोर्स मल्टीप्लायर बनेगा, बल्कि स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की नींव रखेगा. इंडियन नेवी को और मजबूत बनाने की तैयारी है.  डेवलपमेंट स्टेटस और फंडिंग अभिमन्यु प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय की इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) पहल से आंशिक फंडिंग मिल रही है. साथ ही एनआरटी से इंटरनल फंडिंग भी की जा रही है. आईडीईएक्स के तहत वर्तमान फंडिंग सीलिंग करीब 2.85 मिलियन डॉलर है, लेकिन ऑपरेशनल स्टेटस और फ्यूचर वैरिएंट्स के लिए काफी अधिक निवेश की जरूरत होगी. भारतीय नौसेना ने एन-सीसीएवी के ऑपरेशनल रेडीनेस पर पहुंचने पर मिनिमम परचेज क्वांटिटी की प्रतिबद्धता जताई है, जो प्रोडक्शन और डिप्लॉयमेंट के लिए बेसलाइन सुनिश्चित करेगी. 2026 तक पहली उड़ान का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रोजेक्ट की तेज गति को दर्शाता है. अभिमन्यु भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (सीएटीएस) प्रोग्राम के लिए विकसित एचएएल वॉरियर से काफी छोटा और हल्का है. वॉरियर जहां हाई परफॉर्मेंस और ग्रेटर पेलोड कैपेसिटी पर जोर देता है, वहीं अभिमन्यु की ताकत मॉड्यूलैरिटी, कॉस्ट-इफेक्टिवनेस और लार्ज-स्केल डिप्लॉयमेंट में है. इंटरनेशनल स्तर पर यह चीन के जीजे-11 शार्प स्वॉर्ड या यूएस नेवी के एक्सपेंडेबल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) ड्रोन्स की तुलना में लोअर-एंड सॉल्यूशन है. फिर भी, यह भारत की जरूरतों के अनुरूप प्रैग्मैटिक अप्रोच अपनाता है, जहां अफोर्डेबिलिटी और रैपिड इटरेशन प्राथमिकता हैं. चुनौतियां भी कम नहीं मोमेंटम के बावजूद प्रोग्राम कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. कैरियर एविएशन के डिमांडिंग एनवायरनमेंट में रिलायबल ऑटोनॉमस ऑपरेशन हासिल करना प्रमुख है. हाई-स्पीड, हाई-ऑल्टीट्यूड क्रूड फाइटर्स और अभिमन्यु के बीच परफॉर्मेंस गैप को ब्रिज करना भी जरूरी. इसके अलावा, सस्टेन्ड फंडिंग सुनिश्चित करना और भारत की ऐतिहासिक डिफेंस प्रोक्योरमेंट डिले को पार करना चुनौतीपूर्ण रहेगा. फिर भी अभिमन्यु प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना एविएशन के लिए पिवोटल स्टेप है. यह अनमैन्ड सिस्टम्स को फ्यूचर कॉम्बैट ऑपरेशन्स में इंटीग्रेट करने की नौसेना की कमिटमेंट को सिग्नल करता है. सफल होने पर एन-सीसीएवी प्रोग्राम नौसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी, सर्वाइवेबिलिटी और स्ट्राइक कैपेबिलिटी को काफी बढ़ाएगा. साथ ही, यह स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की एडवांसमेंट्स की नींव बनेगा.

1 जनवरी से पैन कार्ड रहेगा गैरमान्य, आयकर विभाग ने दी अहम चेतावनी

नई दिल्ली अगर आपने बार-बार की डेडलाइन के बाद भी अभी तक अपने पैन कार्ड (PAN Card) को आधार कार्ड (Aadhaar Card) से ल‍िंक नहीं कराया है तो यह खबर आपके ल‍िए है. जी हां, ऐसा नहीं करने वालों का पैन (PAN) 1 जनवरी 2026 से काम नहीं करेगा. इनकम टैक्‍स व‍िभाग की तरफ से इसको लेकर बड़ा ऐलान क‍िया गया है. जी हां, आयकर व‍िभाग की तरफ से साफ शब्‍दों में कहा गया है क‍ि यद‍ि आपका पैन कार्ड (PAN Card) आधार कार्ड से नहीं जुड़ा तो 1 जनवरी 2026 से वह काम नहीं करेगा. 31 दिसंबर आधार से ल‍िंक करा लें पैन पैन कार्ड के काम नहीं करने के बाद आपके ल‍िए इनकम टैक्‍स भरने से लेकर रिफंड लेने तक सब मुश्किल हो जाएगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की तरफ से कहा गया क‍ि 1 अक्टूबर 2025 से पहले बने पैन को 31 दिसंबर 2025 तक आधार से ल‍िंक कराया जाना जरूरी है. नहीं तो आपका पैन (PAN) बंद हो जाएगा. आपको बता दें पैन (PAN) 10 ड‍िज‍िट का एक नंबर है. इसे आयकर विभाग की तरफ से जारी क‍िया जाता है. PAN से जुड़ी रहती है सभी टैक्स संबंधी जानकारी पैन (PAN) से आपकी सभी टैक्स संबंधी जानकारी जुड़ी रहती है. इसके जर‍िये आप टैक्स भरना, टीडीएस कटौती और रिटर्न भरने आद‍ि के काम करते हैं. आयकर विभाग की तरफ से फ्रॉड को रोकने के लिए पैन (PAN) को आधार से जोड़ना जरूरी क‍िया गया है. पहले इसको लेकर आयकर व‍िभाग की तरफ से कई बार तारीख बढ़ाने का ऐलान क‍िया गया ताकि लोगों को ज्‍यादा टाइम म‍िल सके. इसमें देरी पर 1000 रुपये का जुर्माना भी है. पैन कार्ड बंद होने से क्‍या नुकसान होगा? > आप टैक्स रिटर्न नहीं भर सकेंगे. > पुराने रिटर्न प्रोसेस नहीं होंगे. > रिफंड नहीं मिलेगा. > गलत रिटर्न के मामले रुक जाएंगे. > ज्यादा टीडीएस कटेगा. ऑनलाइन पैन को आधार से कैसे ल‍िंक करें? > सबसे पहले आयकर व‍िभाग की वेबसाइट www.incometax.gov.in पर जाएं. > इसके बाद क्‍व‍िक लिंक में जाकर 'लिंक आधार' क्लिक करें. > अब पैन (10 अंक) और आधार (12 अंक) दर्ज करें. > यह ध्‍यान रखें क‍ि आप अपना आधार वाला नाम ही लिखें. > 'मैं आधार डिटेल वैलिडेट करने को सहमत हूं' पर टिक करें. > अब वैलिडेट क्लिक करें. 31 दिसंबर के बाद जोड़ने पर 1000 रुपये जुर्माना यद‍ि आप 31 दिसंबर 2025 के बाद पैन और आधार को ल‍िंक कर रहे हैं तो आपको 1000 रुपये जुर्माना देना होगा. ल‍िंक करने का प्रोसेस करने के बाद आपको पॉप-अप आएगा 'पेमेंट डिटेल नहीं मिली'. यहां आप 'ई-पे टैक्स' (E-Pay Tax) पर क्लिक करें. अब अपना पैन नंबर डालकर, मोबाइल नंबर डालें, उसके ऊपर ओटीपी आएगा. अब असेसमेंट ईयर स‍िलेक्‍ट करें. नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड आदि से पेमेंट करें. आपको चालाना म‍िल जाएगा.