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ऑपरेशन सिंदूर में ढेर हुआ था J-10CE, अब बांग्लादेश बना चीन के इस जेट का खरीदार

ढाका  मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिनों के सैन्य टकराव ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीनी J-10CE फाइटर जेट की नाकामी सामने आई थी. लेकिन अब बांग्लादेश इस जेट को खरीदने की योजना बना रहा है. 20 J-10CE जेट्स के लिए 2.2 अरब डॉलर का सौदा हो रहा है. ये खबर भारत के लिए नई चिंता पैदा कर रही है. ऑपरेशन सिंदूर क्या था? चीनी जेट की फेलियर की पूरी कहानी ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत की तरफ से पाकिस्तान पर हवाई हमला था. भारतीय वायुसेना (IAF) ने पाकिस्तानी एयर फोर्स (PAF) के 12-13 जेट्स मार गिराए, जिनमें 4-5 F-16 भी शामिल थे. J-10CE की पूरी परफॉर्मेंस फेल रही. ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक PAF J-10CE जेट को ऑपरेशन के दौरान हार्ड लैंडिंग हो गई, जो क्रैश की तरह लग रही थी. कुछ रिपोर्ट्स में इसे पायलट की गलती या दबाव बताया गया. कुल मिलाकर, चीनी हथियारों ने कई जगह फेलियर दिखाया – जैसे रडार सिस्टम और मिसाइल गाइडेंस में खराबी.  पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके चीनी हथियार बहुत अच्छा काम किए लेकिन हकीकत में भारी नुकसान हुआ. ये ऑपरेशन चीनी टेक्नोलॉजी की कमजोरियों को उजागर करने वाला था.  बांग्लादेश क्यों खरीद रहा है ये 'फेल' जेट? डील की डिटेल्स ऑपरेशन सिंदूर की नाकामी के बावजूद, बांग्लादेश अपनी एयर फोर्स को मॉडर्न बनाने के लिए J-10CE पर दांव लगा रहा है. 20 J-10CE जेट्स का सौदा 2.2 अरब डॉलर का है. इसमें ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और दूसरे खर्चे शामिल हैं. J-10CE चीन के J-10C का एक्सपोर्ट वर्जन है। ये मल्टीरोल फाइटर जेट तेज उड़ान भरता है. हवा-से-हवा, हवा-से-जमीन हमले कर सकता है. हर जेट की बेस प्राइस 60 मिलियन डॉलर है, यानी 20 के लिए 1.2 अरब. बाकी 820 मिलियन ट्रेनिंग और शिपिंग पर जाएंगे. जेट्स 2026-2027 में मिलेंगे. पेमेंट 10 सालों (2036 तक) में होगा. बांग्लादेश ने अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया. बांग्लादेश एयर फोर्स के पास अभी 212 विमान हैं, जिनमें 44 फाइटर जेट. ज्यादातर 36 पुराने चीनी F-7 हैं, जो कोल्ड वॉर के जमाने के हैं. 8 MiG-29B मॉडर्न हैं. कुछ रूसी Yak-130 लाइट अटैक के लिए. J-10CE इन पुरानी मशीनों को रिप्लेस करेंगे और नेशनल एयर डिफेंस मजबूत करेंगे. हाल ही में बांग्लादेश में एक F-7 जेट क्रैश हुआ, जो चीनी हथियारों की पुरानी समस्याओं को दिखाता है. लेकिन बांग्लादेश चीन पर भरोसा कर रहा है. भारत और इलाके के लिए क्या मतलब? नई चुनौतियां ये डील भारत के लिए खतरे की घंटी है. पूर्वी बॉर्डर पर बांग्लादेश की हवाई ताकत बढ़ेगी. J-10CE ऑपरेशन सिंदूर में फेल हुआ. अगर बांग्लादेश के पास ये जेट्स आए, तो भारत को दो-मोर्चे (पाकिस्तान-चीन) के अलावा तीसरा मोर्चा झेलना पड़ सकता है. चीन भारत को घेरने के लिए बांग्लादेश जैसे पड़ोसियों को हथियार बेच रहा है. अमेरिका भी पाकिस्तान को AMRAAM मिसाइलें दे रहा है. साउथ एशिया में तनाव बढ़ रहा है. एक्सपर्ट्स कहते हैं, भारत को अपनी राफेल, S-400 जैसी सिस्टम्स को अपग्रेड करना होगा और डिप्लोमेसी से पड़ोस संभालना पड़ेगा. जानिए इस फाइटर जेट की ताकत J-10C फाइटर जेट चौढ़ी पीढ़ी से थोड़ा बेहतर फाइटर जेट है. जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर जंग के लिए जाना जाता है. इसमें एडवांस एवियोनिक्स, AESA राडार है. साथ ही ये कई तरह के हथियारों को लेकर हमला करने की क्षमता रखता है. इसे चेंगदू एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री बनाती है. इस फाइटर जेट को एक पायलट उड़ाता है.     55.5 फीट लंबे जेट का विंगस्पैन 32.2 फीट है.      मैक्सिमम टेकऑफ वजन 19,227 किलोग्राम है.      यह अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है.      इसकी कॉम्बैट रेंज 550 किलोमीटर और फुल रेंज 1850 किलोमीटर है.      यह अधिकतम 2205 km/hr की अधिकतम गति से उड़ान भर सकता है.     इसमें इंटरनल फ्यूल 4950 लीटर आता है. जबकि तीन ड्रॉप टैंक्स लगाकर इसे और बढ़ाया जा सकता है. कितने तरह के हथियार लगा सकते हैं इसमें 1 ग्रिजनेव शिपुनोव डीएसएच-23 तोप लगी होती है. इसके अलावा इसमें 11 हार्डप्वाइंट्स होते हैं, जिसमें हथियार लगाए जाते हैं. यह फाइटर जेट 90 मिलिमीटर के अनगाइडेड रॉकेट पॉड्स भी लगा सकता है. इसके अलावा इसमें हवा से हवा में मार करने वाली चार तरह की मिसाइलें लग सकती हैं. या फिर हवा से सतह पर मार करने वाली दो तरह की मिसाइलें लगा सकते हैं. जैसे- केडी-88 स्टैंडऑफ लैंड अटैक मिसाइल और वाईजे-91 एंटी-रेडिएशन मिसाइल.  इसमें लेजर गाइडेड बम, ग्लाइड बम, सैटेलाइट गाइडेड बम, अनगाइडेड बम लगा सकते हैं. या फिर इन सभी हथियारों का मिश्रण लगाया जा सकता है. वह हमले और मिशन के आधार पर तय किया जाता है. अगर बांग्लादेश इस फाइटर जेट को भारतीय सीमा के पास तैनात करता है तो भारत की तीनों सेनाओं को अलर्ट पर आना होगा. 

हमास को मनाने के लिए ट्रंप तुर्की की शरण में, गाजा शांति योजना पर बढ़ा दबाव

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर इजरायल और हमास के बीच शांति लाना चाहते हैं. इसके लिए उनका महत्वाकांक्षी गाजा पीस प्लान तैयार है. लेकिन इस प्लान पर हमास की हां-ना, हां-ना के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. ऐसे में ट्रंप ने अब तुर्की की मदद मांगी है. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एर्दोगन का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पीस प्लान को लेकर उनसे मदद मांगी है. ट्रांप चाहते हैं कि हम हमास को रजामंद करें कि वह इस पीस प्लान को बिना किसी शर्त के स्वीकार कर ले. हमास को किसी भी तरह यह प्लान मानने के लिए तैयार किया जाए. उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हम हमास के संपर्क में हैं. हम सभी पक्षों के संपर्क में हैं. हम उन्हें समझा रहे हैं कि सबसे सही तरीका कौन सा है और फिलिस्तीन के लोगों के लिए क्या सही है. अमेरिकी दौरे और ट्रंप के साथ फोन वार्ता में हमने उन्हें समझाया कि किस तरह उद्देश्य को हासिल किया जा सकता है. एर्दोगन ने कहा कि इस दौरान ट्रंप ने अनुरोध किया कि हम हमास से बातचीत करें और उन्हें इस पीस प्लान को मानने के लिए तैयार करें. इसके बाद हम तत्काल इसमें जुट गए. बता दें कि मिस्र में इजरायल और हमास वार्ता के दौरान तुर्की के इंटेलिजेंस चीफ इब्राहिम कालिन भी मौजूद थे. इससे पहले हमास ने कहा कि वह ट्रंप के प्लान को लेकर मिस्र में हो रही बातचीत को लेकर आशान्वित हैं. हमास ने इस दौरान उन इजरायली बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों की सूची भी सौंपी, जिन्हें इस स्वैप डील के तहत छोड़ा जाना है. लेकिन हमास ने इसके लिए कुछ शर्तें रखी हैं. संगठन ने स्पष्ट किया है कि कुछ शर्तें पूरी किए बिना सौदा संभव नहीं है. मिस्र के शर्म अल-शेख में इजरायल और हमास के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हो रही है. यह वार्ता ट्रंप के 20 प्वॉइंट प्लान पर आधारित है, जिसका मकसद गाजा में स्थायी शांति लाना है.  इजरायल और हमास के बीच दो साल से जंग चल रही है. गाजा से शुरू हुई जंग की आंच मध्यपूर्व के बाकी देशों तक भी पहुंची है. इजरायल की बमबारी से गाजा खंडहर में तब्दील हो चुका है. इस दो साल की जंग में गाजा में 67 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में अनुमान जताया है कि इस जंग ने गाजा को 69 साल पीछे धकेल दिया है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, गाजा से मलबा हटाने में ही 21 साल का समय लग जाएगा.

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा: Zoho Mail पर शिफ्ट हुए अमित शाह, फाउंडर का रिएक्शन चर्चा में

नई दिल्ली भारत सरकार Zoho नाम की कंपनी को खूब प्रोमोट कर रही है. हाल ही में कई केंद्रिय मंत्रियों ने Zoho के प्रोडक्ट्स की तारीफ़ की और लोगों से इन्हें यूज़ करने को कहा. Zoho का WhatsApp राइवल Arattai को भी सरकार प्रोमोट कर रही है.  होम मिनिस्टर अमित शाह ने भी X पर एक पोस्ट किया है. इस पोस्ट में लिखा है कि उन्होंने Zoho मेल पर स्विच कर लिया है. इतना ही नहीं, इस पोस्ट में अमित शाह ने अपनी नई जोहो की ईमेल आईडी भी शेयर की है. इस पोस्ट की लास्ट लाइन भी दिलचस्प है. अमित शाह ने लिखा है, ‘मेरी नई ईमेल आईडी amitshah.bjp@zohomail.in है. मेल के जरिए फ्यूचर कॉरेंस्पॉन्डेंस के लिए इसी ईमेल आईडी का इस्तेमाल करें’  आखिरी लाइन में अमित शाह ने लिखा है, ‘Thank you for your kind attention to this matter’. दिलचस्प ये है कि X पर पोस्ट के आखिर में ये लाइन इन दिनों अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. अमित शाह के X पोस्ट के बाद Zoho का रिप्लाई भी आ गया है. Zoho Workplace ने रिप्लाई में शाह का शुक्रिया अदा किया है. कंपनी ने लिखा है कि नैशनल लीडर्शिप का इंडियन इनोवेशन को अपनाना बेहद इंस्पायरिंग है. Zoho के फाउंडर का आया रिप्लाई  अमित शाह के पोस्ट के बाद Zoho फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने एक पोस्ट किया है जिसमें Amit Shah को टैग करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया है. वेम्बू ने लिखा है कि वो इस मोमेंट को उन इंजीनियर्स को डेडिकेट करना चाहते हैं जो पिछले 20 सालों से हार्ड वर्क कर रहे हैं.  ग़ौरतलब है कि Zoho बेंगलुरू बेस्ड प्राइवेट कंपनी है जिसे श्रीधर वेम्बू ने शुरू किया था. इस कंपनी के पास 45 से ज्यादा प्रोडक्ट्स और सर्विसेज हैं. छोटे बिजसनेसेज के लिए ख़ास तौर पर कंपनी के पास दर्जनों टूल्स अवेलेबल हैं. WhatsApp राइवल सव्देशी ऐप अरट्टई भी Zoho का ही है और ये भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है. Zoho के पास माइक्रोसॉफ्ट और गूगल के टूल्स के राइवल भी हैं. यानी MS Word से लेकर PowerPoint जैसे विकल्प Zoho कम कीमत पर प्रोवाइड करता है. हाल ही में कंपनी का Arattai ऐप काफी वायरल हो रहा है.  Zoho Workplace के तहत भी कंपनी गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के कई टूल्स का विकल्प देती है. अगर कॉस्ट अनालिसिस करें तो Zoho के टूल्स छोटे व्यापारियों और कंपनियों के लिए सस्ता है. क्योंकि Zoho के पास बिज़नेस से जुड़ी हर ऐक्टिविटी मेंटेन करने से लेकल बिल जेनेरेट करने तक का टूल अवेलेबल है.  हाल ही में Zoho मे Paytm और PhonePe की तरह ही POS मशीन भी लॉन्च किया है. इसमें साउंडबॉक्स और QR कोड सिस्टम शआमिल हैं. यानी दुकानों पर अब आपको Zoho के QR कोड और मशीन दिख सकते हैं. 

UN पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: शरणार्थी मुद्दे पर आलोचना और सख्त आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी द्वारा भारत में प्रवासियों को 'शरणार्थी कार्ड' जारी करने की प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की है। जस्टिस कांत ने कहा, “उन्होंने यहां शोरूम खोल रखा है और प्रमाणपत्र बांट रहे हैं।” यह टिप्पणी उस समय आई जब न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ सूडान के एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो वर्ष 2013 से भारत में रह रहा है। ऑस्ट्रेलिया में शरण की कोशिश लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने बताया कि उसकी पत्नी और बच्चे को संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) द्वारा 'शरणार्थी कार्ड' जारी किए गए हैं। उसका कहना था कि वह ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने की प्रक्रिया में है और इस दौरान भारत में उसे अस्थायी सुरक्षा प्रदान की जाए। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने दलील दी कि जिन व्यक्तियों को UNHCR से 'शरणार्थी कार्ड' मिले हैं, उन्हें गृह मंत्रालय और विदेशी नागरिक पंजीकरण कार्यालय (FRO) द्वारा अलग तरीके से देखा जाता है। मुरलीधर ने यह भी बताया कि रिफ्यूजी कार्ड जारी करने से पहले कड़ी जांच की जाती है और यह प्रक्रिया कई वर्षों तक चलती है। उन्होंने कहा, "इसके लिए दस्तावेज और फॉर्म भरे जाते हैं, जो रिफ्यूजी स्थिति को कुछ महत्व देते हैं।" उन्होंने यहां शोरूम खोल रखा है- जस्टिस सूर्य कांत हालांकि, इस पर न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “उन्होंने (संयुक्त राष्ट्र एजेंसी) यहां शोरूम खोल रखा है, वे प्रमाणपत्र जारी कर रहे हैं… हम उन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।” न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने यह भी कहा कि भारत ने अभी तक शरणार्थियों के अधिकारों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधि यानी 'रिफ्यूजी कन्वेंशन' पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, “हमारे देश के आंतरिक कानून में शरणार्थियों के लिए कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।” मुरलीधर ने स्वीकार किया कि भारत ने उस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन उन्होंने अदालत को बताया कि पिछले दो महीनों से दिल्ली में अफ्रीकी मूल के लोगों को बिना वजह हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह वास्तविक भय और आशंका का विषय है… हम ऑस्ट्रेलिया में शरण पाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं और इसी बीच यह कार्रवाई शुरू हो गई है।” “सीधे ऑस्ट्रेलिया क्यों नहीं चला जाता” इस पर न्यायमूर्ति बागची ने पूछा कि याचिकाकर्ता सीधे ऑस्ट्रेलिया क्यों नहीं चला जाता। मुरलीधर ने उत्तर दिया कि वह ऐसा करना चाहता है, लेकिन तब तक अदालत से अस्थायी संरक्षण की उम्मीद रखता है। हालांकि, पीठ इस पर सहमत नहीं हुई। जस्टिस कांत ने अंतरिम राहत देने में अनिच्छा जताते हुए कहा, "हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी। लाखों लोग यहां बैठे हैं। अगर कोई इस तरह का प्रयास करता है, तो…" जब मुरलीधर ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है, तब अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि वह आयोग से किसी भी आगे की दिशा में राहत (जैसे, ‘नो कोर्सिव एक्शन’) की मांग कर सकता है। यह उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष मई माह में न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता की पीठ ने भी रोहिंग्या शरणार्थियों से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि भारत में UNHCR कार्ड के आधार पर कोई राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह कानूनी रूप से मान्य दस्तावेज नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का CBI को कड़ा नोटिस: गिरफ्तारी के लिए जरूरी है कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में एक आदिवासी शख्स की मौते के मामले में सीबीआई को फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा है कि इस मामले के आरोपी दो पुलिस अफसरों को पकड़ने के लिए कोर्ट के आदेश की जररूत क्यों है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने राज्य सरकार से निलंबित अधिकारियों के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई के बारे में भी जानकारी देने को कहा है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा, आप इतने दिनों में उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर पाए? सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन इस तरह नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि हमने कहा था कि हम मुख्य सचिव को आज उपस्थित रहने के लिए कहेंगे, इसलिए आपने कार्रवाई की। आप बताइए कि ऐसा क्यों हुआ। हम इस मामले को बंद नहीं करेंगे। ये मामला जुलाई 2024 में एक आदिवासी युवक देव पारधी की पुलिस हिरासत में मौत से जुड़ा है। मध्य प्रदेश के म्याना पुलिस स्टेशन के दो अधिकारियों पर देव पराधी प्रताड़ित कर मार डालने का आरोप है। आरोप है कि पीड़ित के चाचा, जो एकमात्र चश्मदीद गवाह थे, उन पर भी बेरहमी से हमला किया गया और कथित तौर पर उनकी गवाही को कमज़ोर करने के लिए उन्हें कई मामलों में फसाया गया। इस साल मई में, सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय जांच कई खामियां पाई थीं जिसके बाद, मामला सीबीआई को सौंप दिया और एक महीने के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया।चार महीने से ज़्यादा समय तक भी जब गिरफ्तारी नहीं हुई तो पीड़ित परिवार ने अदालत की अवमानना ​​की याचिका के साथ फिर से कोर्ट का रुख किया, जिसमें अदालत के 15 मई के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने का आरोप लगाया गया। इससे पहले 25 सितंबर को, पीठ ने फरार पुलिस अधिकारियों का वेतन देना जारी रखने और उनको सस्पेंड करने में देरी करने के लिए राज्य की कड़ी आलोचना की थी। वहीं इसके एक दिन बाद कोर्ट ने दो पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार न करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार और सीबीआई को फिर से फटकार लगाई और उन्हें कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का एक आखिरी मौका दिया। आज, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे ने कोर्ट को सूचित किया कि दोनों अधिकारियों उत्तम सिंह और संजीव सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। सीबीआई की ओर से वरिष्ठ वकील ने कहा, हमने निर्देशों का पालन किया है और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उत्तम सिंह को इंदौर में गिरफ्तार किया गया था, और संजीव सिंह को 5 अक्टूबर को शिवपुरी में हिरासत में लिया गया था। हालांकि कोर्ट ने कहा कि वह इस बात का सफाई चाहता है कि कोर्ट की अवमानना ​​याचिका दायर होने के बाद ही गिरफ्तारी क्यों हुई।

पाकिस्तानी सेना पर TTP का हमला तेज, बम धमाके के बाद ताबड़तोड़ फायरिंग, 2 अफसर भी ढेर

इस्लामाबाद पाकिस्तान के अफगानिस्तान सीमा के पास बुधवार को उग्रवादियों ने एक सैन्य काफिले पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें नौ पैरामिलिट्री सैनिक और दो अधिकारी मारे गए. इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी तालिबान ने ली है. पाकिस्तान सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि काफिले पर सड़क किनारे बम लगाए गए थे और उसके बाद काफिले पर गोलीबारी की गई. यह हमला उत्तर-पश्चिमी जिले कुर्रम में हुआ. पाकिस्तानी तालिबान, जिन्हें तेहरिक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) कहा जाता है, हाल के महीनों में पाकिस्तान के सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों को तेज कर चुके हैं. ये समूह सरकार को उखाड़ फेंककर कड़े इस्लामी शासन की स्थापना चाहता है. अफगानिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आते हैं मिलिटेंट इस्लामाबाद का आरोप है कि तालिबान के मिलिटेंट अफगानिस्तान की सीमापार से अपनी ट्रेनिंग लेते हैं और पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की योजना बनाते हैं. हालांकि, काबुल यह आरोप झूठा मानता है. सुरक्षा स्थिति बिगड़ी, हिंसा में बढ़ोतरी इस्लामाबाद में सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) ने सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें पिछले तीन महीनों में पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों और सैन्य कार्रवाई में हुई हताहतों के आंकड़े बताए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन महीनों में कम से कम 901 लोग मारे गए और 599 घायल हुए. यह कुल 329 हिंसक घटनाओं में हुआ, जिसमें आतंकवादी हमले और सेना के ऑपरेशन शामिल थे. यह पिछली तिमाही की तुलना में हिंसा में 46 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है.

जुबीन गर्ग के निधन मामले में नया मोड़, DSP और संदीपन गर्ग को असम पुलिस ने किया गिरफ्तार

असम गायक जुबीन गर्ग के निधन मामले में चल रही जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने गायक के चचेरे भाई और असम पुलिस सेवा अधिकारी संदीपन गर्ग को गिरफ्तार कर लिया है। वह सिंगापुर में उस नौका पर गायक के साथ मौजूद थे, जहां उनका निधन हुआ था। एसआईटी/सीआईडी ने अब तक इस मामले में कार्यक्रम आयोजक श्यामकानु महंत, जुबीन गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, जुबीन के बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी और सह-गायक अमृतप्रभा महंत सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया सीआईडी की तरफ से की गई कई पूछताछ के बाद संदीपन गर्ग को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले दिवंगत गायक के कई करीबी सहयोगियों के साथ भी पूछताछ की गई थी। संदीपन गर्ग को आज चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में पेश किया जाएगा। संदीपन गर्ग से पहले, पुलिस ने इस मामले में चार अन्य को गिरफ्तार किया था। शेखर ज्योति गोस्वामी ने आरोप लगाया था कि गायक के मैनेजर और सिंगापुर में जिस कार्यक्रम में उन्हें परफॉर्म करना था, उसके आयोजक ने उन्हें जहर दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने इस बात को छिपाने के लिए खास तौर पर एक विदेशी जगह चुनी। 19 सितंबर को हुआ था निधन ख्याल रहे कि असमिया गायक जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में एक द्वीप के पास तैरते समय निधन हो गया था। वह नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में परफॉर्म करने के लिए सिंगापुर में थे और नौका यात्रा पर गए थे। उनके निधन के बाद उनके शव को दिल्ली लाया गया। इसके बाद असम में लाया गया। यहां दोबारा पोस्टमार्टम के बाद उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।  

टेक्नोलॉजी में भारत की छलांग: पीएम मोदी ने किया इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 का उद्घाटन, बोले – एक कप चाय से भी कम में 1GB डेटा

नई दिल्ली भारत और एशिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी मेले के तौर पर पहचान रखने वाले इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 का आज आगाज हो गया है। आईएमसी 2025 का आयोजन 8 से 11 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इस इवेंट का उद्घाटन करते हुए लोगों को संबोधित किया। मोदी बोले- 'तेजी से बदल रही है टेक्नोलॉजी' पीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी टेक क्रांति में अहम योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि पहले फ्यूचर का मतलब अगला शतक या अगले 10-20 साल होते थे, लेकिन टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि अब हम कहते हैं, "द फ्यूचर इज हेयर एंड नाऊ।" चाय की कीमत से भी कम में डेटा पीएम मोदी ने भारत में सस्ते मोबाइल डेटा की ओर ध्यान खींचते हुए कहा, "आज देश में 1 जीबी वायरलेस डेटा की कीमत एक कप चाय की कीमत से भी कम है। डेटा खपत की बात करें, तो भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इसका मतलब है कि डिजिटल कनेक्टिविटी अब कोई विलासिता या विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।" मोदी ने कहा,"मैंने प्रदर्शनी में लगे कुछ स्टॉल्स देखे जिसमें मुझे भविष्य की झलक दिखी। टेलीकॉम कनेक्टिविटी, 6जी टेक्नोलॉजी, एआई, साइबर सिक्योरिटी सेमीकंडक्टर्स, ड्रोन-स्पेस टेक्नोलॉजी, डीप-सी और ग्रीन-टेक आदि समेत अन्य टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में आने वाला समय बिलकुल ही अलग होने जा रहा है।" पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि 6जी टेक्नोलॉजी में भारत दुनिया को लीड करेगा। मोदी ने इंटरनेट स्पीड का महत्व बताते हुए कहा कि इंटरनेट स्पीड केवल नंबर और रैंकिंग के लिए ही नहीं होते, बल्कि अच्छी इंटरनेट स्पीड "इज ऑफ लिविंग" को भी बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा, "इंटरनेट स्पीड बढ़ने से कनेक्टिविटी और आसान हो जाती है। टेक्नोलॉजी ने आम नागरिकों को वो अधिकार दिलाने में सहायता की है जो पहले मिलना मुश्किल थे और इसमें टेलीकॉम सेक्टर ने बड़ी भूमिका निभाई है।" 2 लाख ग्राम पंचायतों में पहुंचा केबल इंटरनेट पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत नेट प्रोजेक्ट ने 2 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ा है। मोदी ने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब (ATL) मिशन में 10,000 लैब्स के जरिए 75 लाख बच्चों को कटिंग-एज टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा चुका है। पीएम ने आगे कहा कि आज तकनीकी संस्थानों में 100 यूज्ड केस लैब्स की शुरूआत से इसका ग्राफ बढ़ने वाला है। एशिया का सबसे बड़ा टेक और टेलीकॉम इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस एशिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम, मीडिया और टेक्नोलॉजी इवेंट है। इस बार इसमें दुनिया भर के उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता, और टेक इनोवेटर्स हिस्सा लेंगे। चार दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्युनिकेशन, 6G, और फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर्स जैसे कई अहम विषयों पर प्रदर्शनी और चर्चा होगी। IMC 2025 में 150 से ज्यादा देशों के 1.5 लाख से अधिक विजिटर्स और 400 से ज्यादा कंपनियां भाग ले रही हैं। कार्यक्रम में 800 से ज्यादा स्पीकर्स और 100 से अधिक सेशन होंगे, जिनमें जापान, कनाडा, ब्रिटेन, रूस, आयरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे। इस इवेंट को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

भारतीय वायुसेना का 93वां स्थापना दिवस: शक्ति, शौर्य और समर्पण का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री ने दी बधाई

गाजियाबाद वायुसेना दिवस पर मुख्य आयोजन गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर किया जाएगा। यह पहला अवसर है, जब वायुसेना इस आयोजन को दो हिस्सों में कर रही है। हिंडन एयरबेस पर वायुसैनिकों की परेड और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का उद्बोधन होगा। वायुसेना आज अपना 93वां स्थापना दिवस मना रही है। इस मौके पर बुधवार सुबह ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर वायुसेना को बधाई दी। मुर्मू ने लिखा, "वायुसेना दिवस पर सभी वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई दी।" वहीं, पीएम मोदी ने कहा, "भारतीय वायुसेना वीरता, अनुशासन और सटीकता की प्रतीक है। उन्होंने हमारे आकाश की सुरक्षा में, अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी, महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। उनकी प्रतिबद्धता, व्यावसायिकता और अदम्य साहस पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है।" दूसरी तरफ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद सभी गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पहुंचे, जहां वायुसैनिकों की परेड का आयोजन हुआ। वायुसेना प्रमुख ने परेड का निरीक्षण किया और वायुसैनिकों से सलामी ली। इसके बाद उनका उद्बोधन होगा। गौरतलब है कि वायुसेना दिवस पर मुख्य आयोजन गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर किया जा रहा है। यह पहला अवसर है, जब वायुसेना इस आयोजन को दो हिस्सों में कर रही है। हिंडन एयरबेस पर वायुसैनिकों की परेड और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का उद्बोधन हो रहा है, जबकि लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के हवाई करतब का प्रदर्शन 9 नवंबर को गुवाहाटी में किया जाएगा। हिंडन पर इस बार मिग-21 भी खड़ा नजर आया। छह दशक की सेवा के बाद यह विमान पिछले ही दिनों वायुसेना से रिटायर हुआ है। हालांकि, इस दौरान राफेल और सुखोई-30 जैसे मारक एयरक्राफ्ट भी लोगों के मुख्य आकर्षण का विषय होंगे, जिन्होंने पाकिस्तान को मजा चखाने में अहम भूमिका निभाई। गुवाहाटी में फ्लाई पास्ट की ये है वजह इस साल वायुसेना दिवस पर हिंडन में फ्लाई पास्ट न होने की वजह राजधानी क्षेत्र का बढ़ता एयर ट्रैफिक है। फ्लाई पास्ट आयोजित करने की सूरत में अभ्यास के लिए भी कुछ दिन एयर ट्रैफिक बाधित करना पड़ता। इसके अलावा सघन आबादी क्षेत्र होने के कारण यहां बर्ड हिट का अंदेशा हमेशा बना रहता है। इसीलिए फ्लाई पास्ट को गुवाहाटी शिफ्ट किया गया है। गुवाहाटी का मौसम भी इन दिनों फ्लाई पास्ट के अनुकूल नहीं है, लिहाजा इसके लिए 9 नवंबर का दिन चुना गया है।  

कैंसिलेशन चार्ज हटाया, रेल टिकट रद्द करने पर अब नहीं लगेगी कोई फीस

नई दिल्ली  अब अगर आपकी यात्रा की तारीख बदल जाए तो टिकट रद्द करने और कैंसिलेशन चार्ज देने की टेंशन नहीं रहेगी. भारतीय रेलवे ने एक नया नियम लागू करने की घोषणा की है जिसके तहत यात्री अपनी कन्फर्म ट्रेन टिकट की तारीख बिना किसी रद्दीकरण शुल्क (cancellation fee) के बदल सकेंगे. यह सुविधा जनवरी 2026 से लागू होगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने बताया कि इस नई पॉलिसी का मकसद यात्रियों को ज्यादा लचीलापन और सुविधा देना है. फिलहाल अगर किसी को अपनी यात्रा स्थगित करनी होती है, तो टिकट रद्द करनी पड़ती है और उसका शुल्क भी देना पड़ता है. नई व्यवस्था से यह झंझट खत्म हो जाएगा और यात्री आसानी से अपनी यात्रा की तारीख बदल पाएंगे. कैसे काम करेगी नई सुविधा नई व्यवस्था के तहत यात्री अपनी टिकट की तारीख केवल तब बदल सकेंगे जब नई तारीख पर सीट उपलब्ध होगी. अगर नई टिकट का किराया पुरानी से ज्यादा होगा तो यात्री को किराये का अंतर देना होगा. लेकिन अगर किराया समान है या कम है, तो किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. रेलवे ने बताया कि इस सुविधा का लाभ सिर्फ उन्हीं टिकटों पर मिलेगा जो कन्फर्म होंगी. यानी वेटिंग या आरएसी टिकटों पर फिलहाल यह सुविधा लागू नहीं होगी. यात्रियों को क्या फायदा होगा यह कदम रेलवे के यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. पहले टिकट रद्द करने पर बेस फेयर का 25 से 50 प्रतिशत तक कैंसिलेशन चार्ज कट जाता था, लेकिन अब यात्री सिर्फ तारीख बदलवाकर बिना नुकसान के यात्रा कर सकेंगे. इस फैसले से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी योजनाएं अचानक बदल जाती हैं. चाहे ऑफिस मीटिंग आगे बढ़े या पारिवारिक वजह से यात्रा टल जाए, अब टिकट दोबारा खरीदने की जरूरत नहीं होगी. क्या है रेलवे का मकसद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा कि रेलवे यात्रियों को “ट्रैवल फ्रेंडली” अनुभव देने की दिशा में लगातार सुधार कर रहा है. डिजिटल टिकटिंग सिस्टम के विस्तार के साथ अब यात्रियों को ज्यादा नियंत्रण और सुविधा देने की कोशिश की जा रही है. रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के बाद बुकिंग सिस्टम और आईआरसीटीसी (IRCTC) प्लेटफॉर्म में तकनीकी बदलाव किए जाएंगे ताकि यात्री आसानी से ऑनलाइन ही अपनी यात्रा की तारीख बदल सकें.