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एमपी बीजेपी की महत्वपूर्ण बैठक, कैबिनेट विस्तार और निगम-मंडल पर होगी चर्चा; जानें कौन होंगे शामिल

भोपाल आज यानी 14 अप्रैल को एमपी बीजेपी ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। भाजपा कोर कमेटी की यह बैठक भोपाल में आयोजित होने जा रही है। बैठक में कैबिनेट विस्तार और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर अहम चर्चा हो सकती है। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित प्रदेश के 16 दिग्गज नेता शामिल होंगे। इसी के साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल भी मौजूद रहेंगे। बैठक में वर्तमान मुद्दों और आगे की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व की बड़ी बैठक आज मंगलवार को एमपी बीजेपी की बड़ी बैठक है। यह बैठक भोपाल में स्थित सीएम निवास में आयोजित की जाएगी। शाम करीब सात बजे बैठक शुरु होगी। इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पार्टी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल शामिल होंगे। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह व ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रहेंगे। इन दो मुद्दों पर होगी खास चर्चा सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी प्रदेश कोर कमेटी की इस बैठक में राज्य के निगम-मंडलों में नियुक्तियों और मंत्रीमंडल के विस्तार जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है। इन दोनों मामलों को लेकर पार्टी में काफी समय से असमंजस बना हुआ है। उम्मीद है कि आज की बैठक में शीर्ष नेता इन मुद्दों पर स्थिति साफ कर सकते हैं। प्रदेश कोर समिति के ये 16 सदस्य होंगे शामिल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह और सांसद वीडी शर्मा, सांसद लता वानखेड़े, नरोत्तम मिश्रा व अरविंद भदौरिया शामिल होंगे।

हेमंत खंडेलवाल ने बैलगाड़ी पर चढ़कर ‘गांव-बस्ती चलो अभियान’ को दिया नया आयाम, घर-घर पहुंचने का दिया संदेश

बैतूल मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने‘गांव-बस्ती चलो अभियान'के तहत घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का दौरा कर जनसंपर्क अभियान को नई गति दी। दौरे के दौरान उनका अनोखा अंदाज उस समय देखने को मिला, जब वे ग्राम चिरापाटला में बैलगाड़ी पर सवार होकर पहुंचे। उनके इस सादगीपूर्ण और पारंपरिक रूप ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया और क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चिरापाटला सहित आसपास के कई गांवों का भ्रमण किया। बैलगाड़ी से गांव में प्रवेश करते हुए उन्होंने ग्रामीण जीवनशैली और परंपराओं के प्रति अपने जुड़ाव का संदेश दिया। गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों, ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण का भरोसा दिलाया। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया और लोगों को जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने स्थानीय धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों का भी दौरा किया। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि‘गांव-बस्ती चलो अभियान'का उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना, उसकी समस्याओं को समझना और समाधान के लिए पहल करना है। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियां गांव, गरीब, किसान और वंचित वर्ग के उत्थान पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि की वास्तविक ताकत उसकी सादगी और जनता के बीच सक्रिय मौजूदगी में होती है। सीधे संवाद से ही समस्याओं की सही पहचान और समाधान संभव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। हालांकि कार्यक्रम के दौरान कुछ स्थानों पर छोटे नेताओं में बैलगाड़ी पर सवार प्रदेश अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचवाने की होड़ देखी गई, जिससे कुछ ग्रामीणों में नाराजगी भी सामने आई।

कांग्रेस ने एमपी के वरिष्ठ नेता को 6 वर्ष के लिए निष्कासित किया, पार्टी में खलबली

भोपाल  एमपी कांग्रेस में अंदरुनी कलह लगातार जारी है। इंदौर नगर निगम में कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के कथित अपमान के मामले में कार्रवाई पर पार्टी का अंतर्विरोध सामने आ चुका है। इस बीच कांग्रेस ने एक वरिष्ठ नेता को निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सिंगरौली के भास्कर मिश्रा पर ये कार्रवाई की है। उन्हें कांग्रेस से 6 वर्ष के लिए निष्कासित करने का आदेश जारी किया गया है। पार्टी की इस सख्ती से खलबली सी मची है। पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा पर अनुशासनहीनता करने पर ये सख्ती दिखाई गई। इससे पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। कांग्रेस ने भास्कर मिश्रा से स्पष्टीकरण तलब किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया गया। सिंगरौली शहर अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने पूर्व प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा को कांग्रेस की सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई की है। भास्कर को इससे पहले पार्टी की ओर से पांच बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था शहर अध्यक्ष प्रवीण सिंह चौहान ने बताया कि अनुशासनहीनता पर भास्कर को इससे पहले पार्टी की ओर से पांच बिंदुओं पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने तय समय सीमा के भीतर इसका कोई जवाब नहीं दिया। जीतू पटवारी से मांगा जवाब इधर इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के कथित अपमान का मामला राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है। देशभर में चर्चा के बीच कांग्रेस की ओर से सख्त कार्रवाई न होने पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के रुख को बेहद आपत्तिजनक बताया। रविवार को चर्चा में भार्गव ने कहा कि दोनों पार्षदों ने राष्ट्रगीत के बाद मीडिया में बयान देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। ऐसे में अनुशासन समिति की जांच की बात किस आधार पर हो रही है, यह कांग्रेस ही स्पष्ट करे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस कार्यालय में भी वंदे मातरम् गाया जाता है, तो जो लोग नहीं गाते, उनके खिलाफ पार्टी क्या रुख अपनाती है, इस पर पटवारी को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। महापौर ने कहा कि शनिवार को पत्रकार वार्ता में जीतू पटवारी ने चुनौती देते हुए कहा था कि कोई ईमानदार है तो हाथ उठाए, हम उसका भ्रष्टाचार सिद्ध करेंगे। इस पर भार्गव ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप है तो प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं। ईमानदारी का प्रश्न उठाकर सिद्ध करने की परिपाटी कब से शुरू हुई? उन्होंने कहा कि जिन पर जनता पहले ही निर्णय दे चुकी है, उन्हें ऐसे आरोप शोभा नहीं देते। एक दिन का सदन बुलाने की मांग पर महापौर ने कहा कि परिषद जल्द ही सदन बुलाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत का अपमान करने वाले पार्षदों की पार्षदी समाप्त करने का प्रस्ताव भी लाया जाएगा।

राहुल गांधी को कांग्रेस से हटाने का माहौल, महाराष्ट्र CM का बड़ा बयान

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस में उन्हें हटाने का माहौल बन रहा है, क्योंकि वह पार्टी को चुनाव में जीत नहीं दिला पा रहे हैं। फडणवीस ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कहा कि गांधी केवल अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं और अपने नेतृत्व को लगातार मिल रही हार से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। फडणवीस ने दावा किया, 'कांग्रेस में राहुल गांधी को हटाने का माहौल बन रहा है, क्योंकि वह पार्टी के लिए चुनावी जीत सुनिश्चित करने में असमर्थ हैं।' उन्होंने कहा कि गांधी ने अपनी पार्टी के भीतर जारी संघर्ष से ध्यान हटाने के लिए ऐसे बयान दिए हैं। राहुल गांधी का बयान राहुल ने आरोप लगाए थे कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का उद्देश्य संविधान को खत्म करना है क्योंकि वे नहीं चाहते कि भारत में सभी को समान माना जाए। उन्होंने मंडी हाउस से 14 अप्रैल को भीमराव आंबेडकर की जयंती से पहले यहां 'रन फॉर आंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टीट्यूशन' मैराथन शुरू होने से पहले एकत्रित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'आंबेडकर जी का मुख्य संदेश संविधान का था। संविधान के बिना जिसे हम भारत कहते हैं, वह नहीं होता। उन्होंने कहा था, 'आज जो लोग आरएसएस-भाजपा की सोच के हैं, वे संविधान को खत्म करना चाहते हैं। वे कुछ भी कहें, उनका असली उद्देश्य संविधान को मिटाना है क्योंकि वे नहीं चाहते कि भारत में सभी को समान माना जाए।' उन्होंने कहा, 'वे (आरएसएस-भाजपा) चाहे जो करें, वे आंबेडकर जी की प्रतिमा के सामने सिर भी झुकाते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य संविधान को खत्म करना है। हमारा उद्देश्य संविधान की रक्षा करना और उसे मजबूत करना है।' PM मोदी से की थी बातचीत शनिवार को समाज सुधारक ज्योतिराव फुले की स्मृति में आयोजित समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की मुलाकात हुई थी। यह बातचीत इसलिए खास है क्योंकि सार्वजनिक कार्यक्रमों में दोनों नेताओं को शिष्टाचार का आदान-प्रदान करने के अलावा शायद ही कभी एक-दूसरे से बात करते देखा जाता है। प्रधानमंत्री जब फुले की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे, तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी सहित कई गणमान्य व्यक्ति एक पंक्ति में खड़े थे। सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन करने के बाद पीएम, गांधी के पास रुके और उनसे बातचीत करने लगे। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि एक मिनट की इस बातचीत के दौरान उन्होंने किस बारे में बात की।

‘जिसे कोई नहीं जानता होगा वही बनेगा CM’, पप्पू यादव के बयान से बढ़ी चर्चा

पटना बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह सवाल बिहार की सियासत का सबसे अहम प्रश्न बन गया है। पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने जो दावा किया है उसके अनुसार डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी सीएम नहीं बन पाएंगे। बिहार का सीएम वही बनेगा जिसे कोई नहीं जानता हो। उन्हेंने कहा है कि जदयू को निशांत कुमार को सीएम बना देना चाहिए क्योंकि बिहार को एक विनम्र शासक की जरूरत है। पप्पू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार को अभी बिहार नहीं छोड़ना चाहिए। बेगूसराय में पत्रकारों से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में अनुकंपा पर ही सीएम बनना है। जिसे कोई नहीं जानता हो उसे ही बीजेपी मुख्यमंत्री बना देगी। जिसका भी नाम आ गया हो उसे भाजपा मौका नहीं देती है। कोई ऐसा व्यक्ति सीएम बनेगा जिसे कोई नहीं जानता होगा। बिहार में मुख्यमंत्री दिल्ली से बनाया जाएगा। पत्रकारों के सवाल के जवाब में यह भी कहा कि नीतीश कुमार को अभी बिहार नहीं छोड़ना चाहिए था। एनडीए को 25 से 30 फिर से नीतीश के नाम पर बहुमत जनता ने दिया। पप्पू यादव ने यह भी कहा कि बिहार में अनुकंपा पर सीएम बनाया जाएगा। किसी मजबूत आदमी को भाजपा सीएम नहीं बनाएगी। लेकिन, सीएम जनता दल यू से बनाया जाना चाहिए। नीतीश कुमार नहीं रहते हैं तो निशांत को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। बिहार को एक विनम्र व्यक्ति की जरूरत है। निशांत कुमार हिन्दू, मुलमान, जात पात नहीं करेंगे। वे पढ़े लिखे, विनम्र और सरल व समझदार व्यक्ति हैं। सीएम के रूप में वह बिहार को बेहतर नेतृत्व देंगे। कहा कि बीजेपी से मुख्यमंत्री बनते हैं तो दल्ली के आदेश पर बिहार में किसी को सीएम की कुर्सी पर चढ़ा दिया जाएगा। पप्पू यादव पहले भी निशांत कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत कर चुके हैं। नई सरकार और सीएम पद से लिए बिहार में कई दिनों से हलचल है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 14 अप्रैल को सीएम पद से त्याग पत्र दे देंगे। उससे पहले कैबिनेट की बैठक होगी। 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है। नए सीएम के साथ कुछ मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है। राज्य में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनेगी। मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को जगह मिल सकती है। कुछ मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। राज्य में पहली बार बीजेपी के मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। अभी तक सीएम चेहरा तय नहीं किया गया है।

रील से रियल पॉलिटिक्स तक: अंकिता परमार की एंट्री, पार्टी में ही विरोध

बड़ोदरा गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है और जैसे ही भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, वडोदरा की पोर जिला पंचायत सीट अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई. बीजेपी ने यहां से सोशल मीडिया स्टार अंकिता परमार को चुनावी मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया है. अंकिता के इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन चुनावी राजनीति की जमीन पर उनकी एंट्री इतनी आसान नहीं दिख रही. दरअसल, अंकिता को टिकट मिलते ही पार्टी के अंदर पुरानी और जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है. भाजपा की ही पुरानी कार्यकर्ता नयना परमार ने अंकिता के खिलाफ खुलेआम बागी तेवर अपना लिए हैं. नयना ने न केवल विरोध जताया, बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है. माना जा रहा है कि नयना का यह कदम अंकिता के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है. इस बगावत की वजह से भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का बड़ा डर है. पार्टी के लिए अब चुनौती यह है कि वह अपनों को कैसे मनाए, क्योंकि अगर वोट बंटते हैं तो इसका सीधा फायदा विरोधियों को मिल सकता है. . राजनीति और सोशल मीडिया का मेल अंकिता परमार के लिए राजनीति कोई नई चीज नहीं है. 5 साल पहले वे तालुका पंचायत की सदस्य चुनी गई थीं और ढाई साल तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली. रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी से बी.कॉम करने वाली अंकिता फिलहाल प्रदेश युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं. उन्होंने राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी एक जबरदस्त पहचान बनाई है. यही वजह है कि उनकी रील के साथ-साथ उनकी कार्यशैली की भी चर्चा होती रही है. वे जानती हैं कि आज के दौर में जनता तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म कितना जरूरी है और इसी का फायदा उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है. अंकिता का जन्म वडोदरा में हुआ, लेकिन उनकी शादी पोर गांव में हुई. उनके ससुर 45 सालों तक सक्रिय राजनीति में रहे और उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए अंकिता ने इस फील्ड में कदम रखा. अंकिता का मानना है कि महिलाओं को 'इंडिपेंडेंट' यानी आत्मनिर्भर होना चाहिए. वे पीएम मोदी के 'फिट इंडिया' अभियान की बड़ी फैन हैं और खुद का जिम भी चलाती हैं, जहाँ वे रोज जमकर वर्कआउट करती हैं. वे अक्सर अपने वीडियो के जरिए युवाओं को स्वस्थ रहने का संदेश देती हैं, जिससे उनकी एक अलग ही 'फैन फॉलोइंग' बन गई है. भाजपा को उम्मीद है कि अंकिता की लोकप्रियता का फायदा उन्हें चुनावों में मिलेगा. पार्टी को लगता है कि एक युवा चेहरा, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हो, युवाओं और महिलाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से पार्टी से जोड़ सकता है. अब देखना होगा कि सोशल मीडिया पर रील से दिल जीतने वाली अंकिता, क्या जनता का वोट भी जीत पाती हैं. क्या उनकी डिजिटल लोकप्रियता उन्हें जिला पंचायत की दहलीज तक पहुंचा पाएगी, यह आने वाले चुनाव के नतीजे तय करेंगे.

शिवराज मामा की रायसेन में बढ़ती सक्रियता, क्या विदिशा से मोहभंग या नया सियासी गणित?

रायसेन  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प हलचल देखने को मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का झुकाव तेजी से रायसेन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। कभी उनकी राजनीति का केंद्र रहे विदिशा क्षेत्र से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हाल ही में आयोजित सांसद खेल महोत्सव के बाद अब रायसेन में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन कराया जा रहा है। यह महज कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक परिदृश्य संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लगातार हो रहे आयोजनों से साफ है कि शिवराज सिंह चौहान का फोकस अब इस क्षेत्र पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है। राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, विदिशा में पिछले कुछ समय से भाजपा के अंदरूनी समीकरण और खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी ने भी सियासी माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में रायसेन में बढ़ती सक्रियता को विदिशा से मोहभंग के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी स्तर पर इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इधर रायसेन में भाजपा के वरिष्ठ नेता रामपाल सिंह के साथ शिवराज सिंह चौहान की बढ़ती नजदीकियां भी जन चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी और समन्वय से यह संकेत मिल रहे हैं कि जिले में संगठनात्मक और राजनीतिक मजबूती के लिए नए समीकरण तैयार किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में डॉ चौधरी का रामपाल सिंह राजपूत के करीब आना भी कई मायनों में अहम माना जा रहा है। वहीं, वर्ष 2020 के बाद से डॉ नरोत्तम मिश्रा शेजवार (डॉ शेजवार) और शिवराज मामा के बीच बनी दूरी भी सियासी जन चर्चा का केंद्र रही है। पहले जहां दोनों के बीच मजबूत तालमेल देखने को मिलता था। वहीं अब राजनीतिक मंचों पर यह सामंजस्य पहले जैसा नजर नहीं आता। इसका सीधा असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी परिसीमन (डिलिमिटेशन) को लेकर भी बीजेपी के कद्दावर लोकप्रिय बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। रायसेन में शिवराज मामा के लगातार हो रहे बड़े आयोजन कहीं न कहीं इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भविष्य के चुनावी नक्शे को ध्यान में रखकर राजनीति की नई जमीन तैयार की जा रही है। यदि परिसीमन में बदलाव होता है, तो रायसेन क्षेत्र का महत्व और बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, विदिशा से दूरी और रायसेन में बढ़ती सक्रियता को केवल संयोग नहीं माना जा सकता। यह सियासत का सोचा-समझा कदम भी हो सकता है, जिसमें सत्ता संगठन, समीकरण और भविष्य की संभावनाओं का पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव केवल कार्यक्रमों तक सीमित रहता है या फिर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है।

वंदे मातरम विवाद में कांग्रेस बैकफुट पर, अल्पसंख्यक नेताओं की चुप्पी से नाराजगी, भाजपा हुई आक्रामक

इंदौर  इंदौर के नगर निगम सम्मेलन में ‘वंदे मातरम्’ विवाद से राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के दो पार्षदों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाए जाने और विवादित बयान देने पर कांग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। कांग्रेस नेताओं ने दोनों महिला पार्षदों का बचाव नहीं किया। इससे कांग्रेस पार्टी के अन्य अल्पसंख्यक नेता नाराज़ हो गए हैं। इस पूरे मामले में कांग्रेस बैकफुट पर नज़र आ रही है, जबकि भाजपा अब इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। शुक्रवार को इंदौर के कई वार्डों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के पुतले जलाए और ‘वंदे मातरम्’ गीत गाया। विवाद सामने आने के बाद इंदौर शहर कांग्रेस ने सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गीत अनिवार्य कर दिया है। पार्षद रुबीना इक़बाल के खिलाफ निष्कासन का प्रस्ताव भी भोपाल भेज दिया गया है। उधर, इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी चुप्पी साध रखी है। छतरपुर दौरे में मीडियाकर्मियों ने जब उनसे इस मामले में सवाल पूछा, तो पटवारी ने हाथ जोड़ लिए और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए।   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘वंदे मातरम्’ जैसे मुद्दे पर चुप्पी साधना कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहा है। फिलहाल, जीतू पटवारी की इस चुप्पी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस विवाद पर आधिकारिक रूप से क्या रुख अपनाती है।  कांग्रेस नेता अमीनुल खान सूरी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ गाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी आपत्ति शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा इसे कार्यक्रमों में अनिवार्य किए जाने पर है। उन्होंने कहा, “हम कांग्रेस में उसकी विचारधारा से जुड़े हैं। सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। इसे इस तरह अनिवार्य करना अनुचित है। देशभक्ति कोई आदेश नहीं, बल्कि एक एहसास है। निगम सभापति ने संभाग आयुक्त को लिखा पत्र इंदौर निगम सभापति मुन्नालाल यादव ने भी संभागयुक्त को पत्र लिखकर दोनों पार्षदों को पद से हटाने और केस दर्ज कराने की मांग की। पार्षदों की इस हरकत के खिलाफ खेल मंत्री विश्वास सारंग भी कूद पड़े। उन्होंने मीडिया से कहा, हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम् गाना ही होगा। सारंग ने कहा, यह गीत धर्म विशेष का नहीं है। राष्ट्र भावना का प्रतिनिधित्व करता है। जो मातृभूमि की इज्जत नहीं करता उसे जीने का अधिकार नहीं। वो पाकिस्तान चले जाएं। 'गाएं न गाएं, अपमान नहीं होना चाहिए' एडवोकेट अभिनव धनोतकर ने बताया, केंद्र सरकार ने सर्कुलर जारी कर सभी संस्थानों और कार्यक्रमों में वंदेमातरम् गायन अनिवार्य किया था। इस पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर को निराकृत कर कहा था कि वंदेमातरम् गायन में आप शामिल हों या न हों। आपकी इच्छा पर है। लेकिन अपमान नहीं होना चाहिए। कांग्रेस में मतभेद वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस में भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे राजनीतिक ब्लैकमेलिंग बताया, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी अमीनुल खान सूरी ने कहा कि दोनों पार्षदों की बात का तरीका गलत था, लेकिन वंदे मातरम की अनिवार्यता का आदेश उचित नहीं है। सूरी ने मामले में कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के फैसले पर भी सवाल उठाए। जानें मुस्लिम क्यों करते हैं राष्ट्रगीत गाने का विरोध राष्ट्रगीत का अर्थ: 'वंदे' का अर्थ वंदना या पूजा करना है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सजदा या वंदना केवल अल्लाह के सामने ही की जा सकती है, किसी और के सामने नहीं। मूर्ति पूजा का निषेध: इस गीत में मातृभूमि को मां दुर्गा या देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो इस्लाम के एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर) के सिद्धांत के विरुद्ध है। विकल्प भी: मुसलमान अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम को 'मादरे वतन जिंदाबाद' (मातृभूमि की जय) कहकर व्यक्त करते हैं। इतिहास में भी दर्ज है विरोध: 1937 में भी मौलाना अबुल कलाम आजाद और अन्य मुस्लिम विद्वानों ने इसके कुछ अंशों को अपनी आस्था के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध जताया था

कांग्रेस ने अजित पवार के सम्मान में उम्मीदवारी वापस ली, सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत पक्की

मुंबई  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव नहीं लड़ेगी, जहां से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार अपने पति अजित पवार के मृत्यु के बाद चुनाव मैदान में हैं। चेन्निथला ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस की राज्य इकाई को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि नामांकन वापस लेने की बृहस्पतिवार को अंतिम तिथि है। उन्होंने कहा- अजित पवार के निधन के कारण बारामती उपचुनाव आवश्यक हो गया। उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कांग्रेस इस उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। कांग्रेस के आकाश मोरे ने 23 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। चेन्निथला का यह बयान शरद पवार, सुप्रिया सुले और रोहित पवार समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के शीर्ष नेताओं के आग्रह के बाद आया जिसमें उन्होंने कांग्रेस से बारामती उपचुनाव में राकांपा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के खिलाफ उम्मीदवारी वापस लेने की अपील की थी। शरद पवार ने कहा कि यह उपचुनाव विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु की पृष्ठभूमि में हो रहा है, इसलिए वह कांग्रेस को चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारने के लिए कहेंगे। क्या बोले थे शरद पवार? पवार ने कहा- कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और हम उसे अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का निर्देश नहीं दे सकते। हालांकि, महाराष्ट्र ने एक दुखद दुर्घटना में एक कुशल नेता को खो दिया, जिसके कारण बारामती सीट खाली हुई। अगर मुझसे पूछा जाए, तो मैं कांग्रेस को सुझाव दूंगा कि इस उपचुनाव को निर्विरोध कराया जाना उचित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय कांग्रेस का होगा। अजित पवार की पत्नी एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बारामती सीट से नामांकन दाखिल किया है। हालांकि, निर्विरोध चुनाव की अपीलों के बीच कांग्रेस ने 23 अप्रैल के लिए निर्धारित उपचुनाव के लिए अधिवक्ता आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाया। सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से इसी तरह की अपील की राकांपा (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से इसी तरह की अपील की। उन्होंने कहा- अजितदादा ने पहले कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और हमेशा आपकी पार्टी के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे। बारामती में निर्विरोध चुनाव उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगा। उन्होंने कहा, "इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी से विनम्र अनुरोध करती हूं कि कृपया अपनी उम्मीदवारी वापस लें और यह सुनिश्चित करें कि यह चुनाव निर्विरोध हो।" रोहित पवार ने किया था अनुरोध इससे पहले, राकांपा (शप) विधायक रोहित पवार ने कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से मुलाकात कर पार्टी से उम्मीदवार वापस लेने का आग्रह किया, ताकि सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो सके। रोहित पवार ने कहा, "मुझे विश्वास है कि कांग्रेस अपने नेतृत्व से चर्चा के बाद उचित और सकारात्मक निर्णय लेगी।" सूत्रों के अनुसार, एक दिन पहले सुनेत्रा पवार ने भी सपकाल से बात कर उनसे अनुरोध किया था कि वह सुनिश्चित करें कि कांग्रेस उम्मीदवार उनके खिलाफ नामांकन वापस ले। कांग्रेस ने कहा था कि वह चुनाव से तभी हटेगी जब जनवरी में हुई विमान दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत के मामले में महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। सुनेत्रा पवार के बेटे ने कांग्रेस पर साधा था निशाना पवार की मृत्यु के कारण ही बारामती में उपचुनाव जरूरी हो गया है। चुनाव की तैयारियों के बीच माहौल उस समय तल्ख हो गया जब सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार ने हाल में कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारने की आलोचना की। रोहित पवार ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने अपने चचेरे भाई पार्थ पवार की टिप्पणियों पर खेद जताया है। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस अपने नेतृत्व से चर्चा के बाद उचित और सकारात्मक निर्णय लेगी।" सुनेत्रा पवार और कांग्रेस के आकाश मोरे सहित कुल 53 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि नौ अप्रैल है। राकांपा (शप) नेता ने कहा कि कांग्रेस ने यह सही संदेश दिया है कि विमान दुर्घटना मामले में न्याय मिलना चाहिए और महाराष्ट्र में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। बारामती विमान दुर्घटना की लगातार उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे रोहित पवार ने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आज दिल्ली में मौजूद सुनेत्रा पवार केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मिलेंगी और मामले की सीबीआई जांच की मांग करेंगी।" भाजपा ने दी थी चेतावनी शरद पवार नीत राकांपा (शप) ने पहले ही घोषणा की है कि वह सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता एवं राज्य सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यदि कांग्रेस ने राकांपा अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को बारामती विधानसभा उपचुनाव में निर्विरोध जीतने नहीं दिया, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। बावनकुले ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, अगर कांग्रेस सुनेत्रा पवार को बारामती से निर्विरोध नहीं जीतने देती है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। यदि वह अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं लेती है, तो उसका पतन बारामती से ही शुरू होगा।" एक अन्य सवाल के जवाब में बावनकुले ने कहा कि असम और केरल में पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में भाजपा का प्रदर्शन इस बार अधिक मजबूत होगा। असम, केरल और पुडुचेरी में बृहस्पतिवार को एक ही चरण में मतदान हो रहा है। उन्होंने कहा, "ये चुनाव एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाएंगे।

आसनसोल में PM मोदी का बड़ा बयान: ‘TMC के पाप का घड़ा भर चुका है, अब डबल इंजन सरकार बनेगी बंगाल में’

आसनसोल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (गुरुवार) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए राज्य में एक ही दिन में तीन बड़ी रैलियां कर रहे हैं. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद राज्य की पीएम मोदी की यह दूसरी यात्रा है. बीजेपी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया टाउनशिप में पहली रैली की. इसके बाद पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल में पोलो ग्राउंड के आउटडोर स्टेडियम में दूसरी रैली को संबोधित किया. वहीं, बीरभूम जिले के सूरी शहर के चंदमारी मैदान में तीसरी जनसभा होगी।  बता दें कि विधानसभा चुनाव 2026 के तहत पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोटिंग होगी. पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी जबकि दूसरे चरण में 142 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. बंगाल चुनाव से जुड़े लेटेस्ट अपडेट्स के लिए इस पेज को रीफ्रेश करते रहें।  पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा कि '4 मई के बाद बंगाल में कानून का राज स्थापित होगा. हर तरह की गुंडागर्दी का हिसाब लिया जाएगा, एक-एक करके जवाबदेही तय होगी.' उनके इस बयान को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सीधा हमला माना जा रहा है।  इसके साथ ही उन्होंने हाल के चर्चित मामलों का जिक्र करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि आरजी कर जैसे घटनाक्रम और संदेशखाली की घटना यह दिखाती है कि टीएमसी सरकार कैसे दुष्कर्मियों के साथ खड़ी नजर आती है. उन्होंने दावा किया कि यही वजह है कि राज्य में महिलाओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है और एसिड अटैक के मामलों में भी इजाफा हुआ है।  प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में घुसपैठ के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि 'बंगाल में घुसपैठ सबसे बड़ी समस्या है. घुसपैठिए यहां जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं और जनसांख्यिकी में बदलाव हो रहा है.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर लोगों को पूजा करने की अनुमति नहीं दी जाती और कहीं-कहीं दुर्गा पूजा भी नहीं करने दी जाती।  उन्होंने इन सभी मुद्दों के लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पहले हिंदू नरसंहार को लेकर चेतावनी संकेत दिए गए थे और अब वही काम टीएमसी कर रही है।  पलायन को मजबूर बंगाल को लोग: पीएम मोदी ने TMC पर किया वार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आसनसोल कोयला बेल्ट का बड़ा क्षेत्र है, फिर भी टीएमसी के राज में कोयला व्यापार पर सिंडिकेट का कब्जा हो गया है. कोयला ब्लैक मार्केटिंग, कोयला माफिया, रेत माफिया और जमीन माफिया – ये सभी इस पूरे इलाके पर भारी बोझ बन गए हैं. बंगाली लोग इनसे परेशान हैं. आसनसोल-दुर्गापुर का इलाका कभी पूरे देश का बड़ा औद्योगिक केंद्र था. यहां साइकिल से लेकर रेलवे कोच, कागज से लेकर स्टील, एल्यूमिनियम से लेकर ग्लास तक की फैक्टरियां थीं. देश के कोने-कोने से लोग यहां काम करने आते थे लेकिन आज स्थिति यह है कि युवाओं को मजबूरन घर छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है।  बंगाल में अब बनेगी डबल इंजन की सरकार, आसनसोल में बोले मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पापों का घड़ा अब भर चुका है. बंगाल में अगली सरकार डबल इंजन सरकार बनेगी. 4 मई के बाद बंगाल विकास के नए युग में प्रवेश करेगा. बंगाल के विकास के लिए TMC से मुक्ति जरूरी है।  पीएम मोदी बोले- बंगाल में परिवर्तन होने जा रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आसनसोल में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल में बदलाव होने जा रहा है. बंगाल से जो आवाज उठ रही है, वह दूर तक जाएगी. यह आवाज दुर्गापुर, रानीगंज, साल्टोरा और रघुनाथपुर तक पहुंचेगी।  प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ठीक से लागू नहीं कर रही है टीएमसी: PM मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जहां भी भाजपा या एनडीए की सरकार है, वहां मछली उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. भाजपा सरकार की नीतियों से बिहार में मछली उत्पादन लगभग दोगुना हो गया है. आज बिहार मछली नहीं मंगवाता, बल्कि खुद दूसरों को मछली भेजता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में मछली और झींगे के उत्पादन में भारी बढ़ोतरी का बड़ा कारण प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना है. लेकिन टीएमसी सरकार को इस योजना का "पीएम" वाला नाम पसंद नहीं है. मछुआरों के भले के लिए बनी योजना को टीएमसी ठीक से लागू नहीं कर रही है. प्रधानमंत्री ने बंगाल के मछुआरों से अपील की कि वे इस चुनाव में बदलाव लाएं, ताकि बंगाल में भी मछली उत्पादन बढ़े और मछुआरे खुशहाल जीवन जी सकें।  PM मोदी बोले- TMC ने बंगाल के युवाओं के साथ गद्दारी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि टीएमसी सरकार ने बंगाल के युवाओं के साथ जो कुछ किया है, वह अपना पाप अगले 100 साल में भी नहीं धो पाएगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, टीएमसी ने बंगाल के युवाओं के साथ गद्दारी की है. यहां निजी क्षेत्र में नौकरियां नहीं हैं और जो थोड़ी बहुत हैं, वे भी घुसपैठियों को दे दी गई हैं. सरकारी पदों को टीएमसी के मंत्री लूट रहे हैं।  TMC के राज में सिर्फ घुसपैठियों की फैक्ट्री फली-फूली है: पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक समय में देश भर के लोग हल्दिया में काम करने आते थे. लेकिन आज हालात यह हैं कि खुद हल्दिया के युवा रोजगार की तलाश में अंडमान, ओडिशा और दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "टीएमसी सरकार के राज में सिर्फ घुसपैठियों  घुसपैठियों की फैक्ट्री फली-फूली है. टीएमसी सरकार फर्जी दस्तावेज बनाने और गाय तस्करी का काम कर रही है. टीएमसी की राजनीति डर पर टिकी हुई है।  पीएम मोदी जी ने आगे कहा कि पहले हल्दिया काम का केंद्र था, लेकिन टीएमसी शासन में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. वे मजबूर होकर दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है. प्रधानमंत्री ने जनसभा में लोगों से अपील की कि इस बार बंगाल को बदलने के लिए वोट दें ताकि युवाओं को अपने घर में ही रोजगार मिल सके और बंगाल फिर … Read more