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जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र अब पूरी तरह ऑनलाइन

अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के आधार कार्ड हेतु ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र की कोई बाध्यता नहीं रायपुर भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2023 में संशोधित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाए जा रहे हैं। इस प्रकार, छत्तीसगढ़ राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र का ऑनलाइन बनाया जाना अनिवार्य किया गया है। उल्लेखनीय है कि जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में वर्ष 2023 में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों की जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही एकमात्र वैध आधार होगा। अर्थात, इस तिथि के पूर्व जन्मे बच्चों के मामलों में अन्य वैकल्पिक दस्तावेज भी जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में मान्य रहेंगे। परंतु अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए केवल जन्म प्रमाण पत्र ही तिथि प्रमाण का एकमात्र स्रोत होगा। राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से जन्मे प्रत्येक बच्चे के लिए ऑनलाइन जारी जन्म प्रमाण पत्र को ही मान्य किया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि अक्टूबर 2023 के पूर्व जन्मे बच्चों के जन्म तिथि प्रमाणन के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य नहीं है। उनके लिए अन्य दस्तावेज भी मान्य हैं। लेकिन अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही जन्म प्रमाण का एकमात्र आधार होगा। पूर्व में जिन बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र मैन्युअल पद्धति से जारी किया गया था, उनके लिए भी अब पोर्टल में ऑनलाइन प्रमाण पत्र बनाने का प्रावधान उपलब्ध है। इससे पुराने प्रमाण पत्र भी डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किए जा सकेंगे। यह संज्ञान में आया है कि कुछ जिलों में केवल उन्हीं जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं जिनमें क्यूआर कोड (QR Code) है। यह विषय संज्ञान में आने पर इस विषय में राज्य सरकार द्वारा सहायक प्रबंधक, UIDAI हैदराबाद से अनुरोध किया गया है कि वे राज्य के सभी आधार केंद्रों को उचित दिशा-निर्देश जारी करें।  यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में संशोधित पोर्टल के लॉन्च के बाद प्रारंभिक चरण में कुछ तकनीकी कठिनाइयाँ आई थीं, जिन्हें भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा समाधान कर दिया गया। साथ ही राज्य के सभी रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को नए पोर्टल के संबंध में आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आवश्यकता अनुसार जिला स्तर पर भी नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो रही है। राज्य में अप्रैल 2023 के बाद से सभी जन्म प्रमाण पत्र केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बनाए जा रहे हैं, और वर्तमान में पोर्टल पूरी तरह से तकनीकी रूप से सुचारू रूप से संचालित है।

आमातालाब के घाट पर उगते सूर्य को छठ व्रतियों ने दी उषा अर्घ्य देकर 4 दिवसीय पवित्र अनुष्ठान का समापन किया

रायपुर  आज मंगलवार की सुबह प्रातः 6 बजकर 30 मिनट पर व्रती महिलाएं ने आमा तालाब घाट के पवित्र जल में खड़े होकर सूर्य देव को पूर्ण विधि-विधान से अर्घ्य अर्पित किया. भगवान सूर्यदेव को प्रात:कालीन अर्घ्य के साथ आज महापर्व छठ का शुभ समापन हुआ। चार दिवसीय इस अनुष्ठान के दौरान छठ पूजा की भव्य परंपरा के अद्भुत दिव्य दर्शन भी हुए।   छठ पूजन समिति के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने बताया कि छठ महापर्व का मंगलवार को आखिरी दिन था। 4 दिन का ये महापर्व 25 अक्टूबर को नहाय खाय से शुरू हुआ था। आज उगते सूरज को 'ऊषा अर्घ्य' के साथ समापन हो गया। सुबह 3 बजे से व्रती महिलाओं ने पवित्र बेदी के समक्ष बास की टोकनी में जिसे कोसी कहा जाता है। कोसी में मौसमी फल,ठेकुआ,गुड,आदि लेकर पुरुष वर्ग अपने सर पर उठा कर अपने अपने घरों से पैदल बाजे गाजे के साथ छठ घाट में पहुंचे। घने बादलों में सूर्य देव के दर्शन के लिए सभी बहुत उत्साहित थे। छठ घाट पर आए कलाकारों के द्वारा धार्मिक गीतों की सुंदर प्रस्तुति से सब का मन झूम उठा।  धार्मिक गीतों से सूर्य देव के दर्शन मिलते ही श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिला भगवान सूर्यदेव एवं छठ मैय्या के जयकारों से पूरा घाट गुजायमान हो गया। तत्पश्चात सभी ने धार्मिक विधि विधान से छठ पूजन,छठ कथा,आरती कर भगवान सूर्य देव के दर्शन कर दूध जल से निर्मित अर्घ्य अर्पण किया। व्रती ने इस अवसर पर छठी मैया से अपने परिवार एवं समाज की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में नई ऊर्जा की कामना की. इसी के साथ चार दिनों के कठिन तप और 36 घंटे का निर्जला उपवास का आज समापन हुआ. अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण कर बनाए गए प्रसाद के रूप में ठेकुआ, गुड़, केला, नारियल और मौसमी फल ग्रहण किया। इस अवसर पर उत्तर विधान सभा के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा जी ने घाट पर नौका विहार कर सभी श्रद्धालुओं का अभिवादन कर सभी को छठ पर्व की शुभकामनाएं दी साथ ही जवाहर नगर मंडल अध्यक्ष श्री संदीप जंघेल जी,तात्यापारा वार्ड की पार्षद एवं जोन 7 अध्यक्ष श्रीमती श्वेता विश्वकर्मा जी,इंदिरा गांधी वार्ड के पार्षद mic सदस्य श्री अवतार सिंह बागल जी,पूर्व पार्षद श्रीमती भारती बागल,कांग्रेस प्रवक्ता श्री सुबोध हरितवाल जी, सचिव अमित तिवारी,अमित शर्मा (लल्लू), युवा मोर्चा महामंत्री अर्पित सूर्यवंशी,मंत्री अश्विनी विश्वकर्मा,मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन विशेष रूप से उपस्थित थे।

भव्य आयोजन के लिए तैयार राज्योत्सव, 1 लाख लोगों के जुटने का अनुमान, BJP नेता करेंगे भीड़ इकट्ठा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष में आयोजित होने जा रहे राज्योत्सव 2025 को इस बार बेहद भव्य बनाने की तैयारी चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 नवंबर को नवा रायपुर में आयोजित मुख्य समारोह में शामिल होंगे। कार्यक्रम स्थल पर इस बार अस्थायी पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) भी बनाया गया है, जहां से पीएम विजिट की मॉनिटरिंग की जाएगी। पीएम इसी अस्थाई कार्यालय में लंच भी लेंगे। बताया जा रहा है कार्यक्रम में करीब 1 लाख लोगों की भीड़ जुटेगी। इसकी जिम्मेदारी भाजपा नेताओं को दी गई है। PM साढ़े तीन लाख परिवारों को देंगे घर की चाबी इस बार राज्योत्सव में पीएम मोदी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत साढ़े तीन लाख परिवारों को घर की चाबी सौंपेंगे। साथ ही करीब 1250 करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में अंतरित करेंगे। बस्तर, सरगुजा और अन्य जिलों के 5 से 10 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री मंच से खुद चाबी प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न स्थलों का किया निरीक्षण मुख्यमंत्री साय ने सबसे पहले नवा रायपुर स्थित श्री सत्य साईं हॉस्पिटल का निरीक्षण किया. उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा, सभागार व्यवस्था, मंच और आमंत्रित अतिथियों के बैठने की व्यवस्था का जायजा लिया. इसके पश्चात मुख्यमंत्री साय प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ध्यान केंद्र पहुंचे, जहांउन्होंने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की बिंदुवार समीक्षा की. उन्होंने ध्यान केंद्र के सभागार, मेडिटेशन रूम एवं बाहरी परिसर का निरीक्षण करते हुए सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए. ट्राइबल म्यूज़ियम बनेगा जनजातीय अस्मिता का अमर प्रतीक मुख्यमंत्री साय ने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय जनजातीय समाज की वीरता, बलिदान और अस्मिता का अमर प्रतीक बनेगा. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संग्रहालय के प्रत्येक अनुभाग को इस प्रकार तैयार किया जाए कि वह आगंतुकों को छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली अध्याय से गहराई से परिचित करा सके. उन्होंने प्रदर्शनी दीर्घाओं, मल्टीमीडिया गैलरी, स्मृति कक्ष और बाहरी परिसर की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की. राज्य स्थापना दिवस समारोह को सफल और ऐतिहासिक बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। कार्यक्रम की निगरानी की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और वन मंत्री केदार कश्यप को दी गई है। वहीं पार्टी संगठन की ओर से प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी और क्रेडा चेयरमैन भूपेंद्र सिंह सवन्नी को कार्यकर्ताओं की व्यापक उपस्थिति सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है। अनुमान है कि इस आयोजन में करीब एक लाख लोग शामिल होंगे। राज्योत्सव स्थल बनेगा छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का दर्पण मुख्यमंत्री साय ने नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल का भी दौरा किया और तैयारियों की जानकारी ली. उन्होंने मुख्य मंच, पार्किंग क्षेत्र, विभागीय डोम, प्रदर्शनी दीर्घा, वीआईपी दीर्घा और आमजन के लिए बनाए गए मार्गों का निरीक्षण किया. उन्होंने कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, संस्कृति और आत्मविश्वास का उत्सव है, इसलिए यह आयोजन उत्कृष्टता की नई मिसाल बने. मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं और सुरक्षा, स्वच्छता तथा आमजन की सुविधा से जुड़े सभी बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाए. इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, सचिव श्री राहुल भगत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे. सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सख्त प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। एडीजी दीपांशु काबरा को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके साथ 5 से अधिक आईजी, 12 डीआईजी, और करीब 2000 पुलिस जवान तैनात रहेंगे। 29 अक्टूबर से फोर्स नवा रायपुर में तैनाती शुरू करेगी। 1 नवंबर से भारी वाहनों की नो एंट्री 1 नवंबर को भारी वाहनों और बसों की नो-एंट्री रहेगी। आम लोगों के मार्ग भी बदले जाएंगे। प्रधानमंत्री का रूट एयरपोर्ट से सेक्टर-24, फिर सत्य साईं अस्पताल, विधानसभा भवन और ट्राइबल म्यूजियम तक रहेगा। एयरपोर्ट का मुख्य द्वार बंद रहेगा और यात्रियों को पुराने टर्मिनल से आवाजाही करनी होगी। 16 पार्किंग स्थल बनाए गए भीड़ और जाम से बचने के लिए प्रशासन ने 16 पार्किंग स्थल बनाए हैं, जो मेला स्थल से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर होंगे। यहां 10 हजार बाइक, 5 हजार बसें और 3 हजार कारें पार्क की जा सकेंगी। पार्किंग से लोगों को लाने-ले जाने 100 ई-रिक्शे लगेंगे राज्योत्सव समारोह में आने वाले लोग कहीं भी ट्रैफिक जाम न फंसे और आने-जाने वालों को कोई दिक्कत न हो। इसलिए नवा रायपुर में 16 जगहों पर पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। ये सभी पार्किंग मेला स्थल से एक से सवा किमी दूरी पर हैं। पार्किंग से मेला स्थल पहुंचने के लिए लोगों को किसी भी तरह की तकलीफ न हो इसलिए वहां हर दिन 100 ई-रिक्शों के साथ ही बसें भी तैनात की जाएंगी। लोग इन पर निशुल्क यात्रा कर मेला स्थल में पहुंच सकेंगे। 30 स्टॉलों में सरकारी योजनाओं की झलक राज्योत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ शासन की अलग-अलग योजनाओं और उपलब्धियों को दर्शाने के लिए 30 आकर्षक स्टॉलों की प्रदर्शनी लगाई जा रही है। शिल्पग्राम में झलकेगी लोकसंस्कृति की पहचान राज्योत्सव मेला ग्राउंड के दूसरे हिस्से में शिल्पग्राम और प्रदर्शनी क्षेत्र का निर्माण किया जा रहा है। यहां प्रदेश के कई जिलों से आए शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे और हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री भी कर सकेंगे। शिल्पग्राम में प्रवेश से लेकर निकास तक आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा की झलक देखने मिलेगी। नवा रायपुर की दिशा से आने वाले दर्शक पहले गेट से सीधे शिल्पग्राम में प्रवेश कर पाएंगे। फन पार्क बनेगा आकर्षण का केंद्र राज्योत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ फन पार्क और मीनाबाजार दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण रहेंगे। फन पार्क में मनोरंजक गेम जोन बनाए गए हैं, जबकि मीनाबाजार में पारंपरिक झूले और खेलों का आनंद लिया जा सकेगा। दर्शकों की सुविधा के लिए इनके समीप फूड कोर्ट तैयार किया गया है, जहां लोग स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे। इनमें सभी प्रमुख विभागों की योजनाएं प्रदर्शित होंगी। कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और संबंधित विभागीय मंत्रियों के बड़े कटआउट्स भी लगाए जाएंगे। सरकारी विभागों के … Read more

नियुक्तियों को लेकर Chhattisgarh HC ने GGU के शीर्ष अधिकारियों से मांगा जवाब

 बिलासपुर  गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग के अंतर्गत हो रही नियुक्तियों में निर्धारित मापदंडों को लेकर दायर याचिका पर जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता के जवाब के बाद कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के कुलपति व रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। बीते सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा था कि यह विश्वविद्यालय का दायित्व बनता है कि वह यह स्पष्ट करे कि विज्ञापन किस विषय से संबंधित है और क्या वह एनसीटीई द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के अनुरूप है। अदालत ने इस संबंध में विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। आज इस मामले की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। बता दें कि गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षा विभाग के अंतर्गत हो रही नियुक्ति पर शिक्षा विभाग को मान्यता देने वाली संस्था नेशनल काउंसिल फार टीचर एजुकेशन के नियमों की अनदेखी संबंधी मामला याचिकाकर्ता नवीन चौबे की ओर से अधिवक्ता आशुतोष शुक्ल ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिवक्ता कोर्ट में संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। कोर्ट ने अपने पिछले आदेश नौ अक्टूबर का उचित परिपालन विश्वविद्यालय द्वारा नहीं किए जाने के पर जवाब मांगा है। विश्वविद्यालय से हाई कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण हाई कोर्ट ने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके द्वारा जारी की गई भर्ती विज्ञापन में किस विषय या विशेषज्ञता क्षेत्र के लिए पद निकाले गए हैं और क्या यह विज्ञापन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद विनियम 2014 के अनुरूप है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बीते सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशुतोष शुक्ला ने अदालत को बताया था कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि उसमें संबंधित विषय या विशेषज्ञता का उल्लेख नहीं है। अधिवक्ता ने पेश किया जवाब गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने जवाब प्रस्तुत किया था। उन्होंने दलील दी थी कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 1993 के अधिनियम की धारा 32(2) के अंतर्गत 2014 में जो विनियम बनाए गए हैं, उनके अनुसार पर्सपेक्टिव इन एजुकेशन या फांउडेशन कोर्स के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास समाजशास्त्र, मनोविज्ञान या अन्य सामाजिक विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर डिग्री, न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ। एमए. या एमएड में भी कम से कम 55 प्रतिशत अंक। साथ ही बीएड या बीएएलएड में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक वाली योग्यताएं होनी चाहिए। याचिकाकर्ता के अनुसार, जब तक विश्वविद्यालय यह स्पष्ट नहीं करता कि यह विज्ञापन किस विषय या कोर्स के लिए है, तब तक यह अस्पष्ट और अपूर्ण माना जाएगा।

सुरक्षा के लिए बड़ा कदम: छत्तीसगढ़ में सभी स्लीपर और एसी बसों का निरीक्षण

रायपुर  राजस्थान और आंध्र प्रदेश में बसों में आग लगने की हाल में हुई घटना के बाद छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग भी सतर्क हो गया है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश में संचालित सभी स्लीपर और एसी बसों की सुरक्षा जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में प्रतिदिन हजारों बसें विभिन्न मार्गों पर संचालित होती हैं, जिनसे लाखों यात्री यात्रा करते हैं। हाल के हादसों को देखते हुए विभाग ने बस ऑपरेटरों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब हर बस में फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास व्यवस्था और इलेक्ट्रिकल वायरिंग सिस्टम की नियमित जांच होगी। 600 से अधिक बसों को रोज संचालन राज्य से प्रतिदिन 600 से अधिक स्लीपर बसें पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, ओड़िशा, झारखंड, बिहार, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों के लिए रोज संचालित हो रही हैं। 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक की लागत वाली इन लक्जरी बसों में सेफ्टी डिवाइस लगे होने के दावे किए जाते हैं। रेल टिकट न मिलने के कारण यात्री 400 से 1200 किलोमीटर की यात्रा भी स्लीपर बसों से करने लगे हैं, लेकिन बढ़ते हादसों से लोगों में चिंता बढ़ गई है। तकनीकी खामियों को लेकर बस संचालकों को किया सर्तक परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रियर इंजन बसों में आग लगने का खतरा ज्यादा होता है, हालांकि ऐसी बसें राज्य में सीमित संख्या में हैं। ज्यादातर बसें फ्रंट इंजन वाली हैं। विभाग ने बस मालिकों व ड्राइवरों को स्पार्किंग जैसी तकनीकी खामियों को लेकर सतर्क रहने और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं। जांच पूरी कर रिपोर्ट जल्द विभाग को सौंपी जाएगी। सख्त सुरक्षा जांच के निर्देश  

ED कोर्ट का आदेश: चैतन्य को नहीं मिली जमानत, इन्वेस्टिगेशन प्रभावित होने की चिंता

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय के कोर्ट में 24 अक्टूबर को सुनवाई हुई थी. जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था.  ईडी कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया. एक बार फिर से चैतन्य बघेल को बेल नहीं मिल पाई. चैतन्य बघेल पिछले 100 दिनों से रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद हैं. प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को भिलाई के निवास से गिरफ्तार किया था. चैतन्य बघेल को नहीं मिली जमानत: प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडेय ने बताया कि "प्रवर्तन निदेशालय अपनी जांच कर रहा था और यह जांच मुख्य रूप से शराब घोटाला से जुड़े हुए मामले में हो रहा था. जांच के दौरान ऐसे प्रमाण मिले जिसमें ऐसा लगा कि शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल की मुख्य भूमिका रही है. प्रत्यक्ष रूप से चैतन्य बघेल इससे लाभ लेने के साथ बहुत सारा पैसा का हैंडलिंग भी किया है. हैंडलिंग करने वाले पैसा लगभग 1000 करोड़ के आसपास है. शराब घोटाला के लगभग 20 करोड़ के लगभग लाभ चैतन्य बघेल ने लिया है. इसी भूमिका को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था. 24 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया गया । ED की स्पेशल कोर्ट ने कहा कि चैतन्य बघेल की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। चैतन्य बघेल ने इससे पहले हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी, लेकिन किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिल सकी। 17 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को वैध बताया था, जिसके बाद यह याचिका विशेष अदालत में दायर की गई थी। चैतन्य बघेल मनी लॉन्ड्रिंग केस में 101 दिन से जेल में बंद है। चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले- ED दरअसल, शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को भी आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले की रकम से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। शराब घोटाले से मिले ब्लैक मनी को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया गया। ED के मुताबिक चैतन्य बघेल ने ब्लैक मनी को वाइट करने के लिए फर्जी निवेश दिखाया है। साथ ही सिंडिकेट के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपए की हैंडलिंग (हेराफेरी) की गई है। ED ने चैतन्य बघेल को मनी लॉन्ड्रिंग केस में जुलाई में गिरफ्तार किया था। बर्थडे के दिन चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी चैतन्य के वकीलों ने अदालत में इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि 18 जुलाई को ईडी ने उनके भिलाई स्थित घर से जन्मदिन के दिन उन्हें गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार, कुल घोटाले में करीब 1,000 करोड़ रुपए को विभिन्न चैनलों के जरिए सफेद किया गया है। चैतन्य के प्रोजेक्ट में 13-15 करोड़ इन्वेस्ट ED ने अपनी जांच में पाया कि, चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले के पैसे को इन्वेस्ट किया गया है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने रिकॉर्ड जब्त किए थे। प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन ने बताया कि, इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ था। जबकि रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ ही दिखाया गया। जब्त डिजिटल डिवाइसेस से पता चला कि, बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया, जो रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया। फर्जी फ्लैट खरीदी के जरिए पैसों की हेराफेरी ED ने अपनी जांच में पाया है कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए। ढिल्लन ने ये फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे लेकिन पेमेंट त्रिलोक ढिल्लो ने खुद दिया। ED ने जब ढिल्लन के कर्मचारियों से पूछताछ की तो कर्मचारियों ने बताया कि, ये फ्लैट की खरीदी उन्हीं के नाम पर हुई, लेकिन पैसे ढिल्लो ने दिए। ये सारा ट्रांजेक्शन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ। ED ने कहा कि ब्लैक को लीगल करने के लिए यह एक पूर्व-योजना के तहत किया गया लेन-देन था। इसका मकसद पैसे को छिपाकर चैतन्य बघेल तक पहुंचाना था।

मतदाता सूची अपडेट: छत्तीसगढ़ में SIR की तैयारी पूरी, फरवरी तक रहेगी खुली प्रक्रिया

रायपुर  बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआइआर) का काम पूरा होने के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर के दूसरे चरण की घोषणा की। यहां एसआइआर का काम मंगलवार यानी आज 28 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा और सात फरवरी तक चलेगा। प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की तैयारी पूरी कर ली गई है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मंगलवार से प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रदेश में 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार मतदाता हैं। प्रदेश में पंचायत चुनाव में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने 1 जनवरी 2025 की तिथि में मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 11 लाख 5,391 बताई थी। इसमें 1 करोड़ 4 लाख 27,834 पुरुष, 1 करोड़ 6 लाख 76,821 महिला और 736 तृतीय जेंडर मतदाता शामिल हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर को लेकर पुरानी और वर्तमान लिस्ट का मिलान किया जा चुका है। प्रदेश के सभी जिलों में एसआईआर एक साथ लागू किया जाएगा। सर्वे को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। एसआईआर में नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और लिस्ट में सामने आने वाली गलतियों को सुधारा जाएगा। बीएलओ घर-घर जाकर 2003 की लिस्ट से मिलान करेंगे और कमियों को दूर करेंगे। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किया निर्णय का स्वागत उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के एसआईआर के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जो पात्र और देश के नागरिक हो, उनके ही नाम मतदाता सूची में होने चाहिए। एसआईआर का निर्णय स्वागत योग्य है। भूपेश बघेल ने सरकार पर साधा निशाना पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केद्रीय निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए अवैध प्रवासियों की पहचान पर स्पष्टता की मांग की है। दिल्ली रवाना होने से पहले सोमवार को राजधानी के स्वामी विवेकानंद विमानतल पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि एसआईआर की घोषणा हो गई है, लेकिन चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि बिहार में कितने बांग्लादेशी चिन्हित किए गए और उनमें से कितने की सूची केंद्र सरकार को दी गई है। इनमें कितने लोग बाहर हुए हैं क्योंकि एसआईआर से विदेशी नागरिक भगाने की बात कही गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय अभी तक यह नहीं बता पाया है कि छत्तीसगढ़ में कितने पाकिस्तानी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया था कि तीन दिनों के भीतर जितने भी पाकिस्तानी हैं, उन्हें बाहर किया जाए। लेकिन, राज्य सरकार अभी तक पाकिस्तानी लोगों की पहचान नहीं कर पाई है। 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता जिन 12 राज्यों में दूसरे चरण में एसआइआर का काम होने जा रहा है, उनमें मतदाता की संख्या करीब 51 करोड़ है। इनमें सबसे अधिक 15.44 करोड़ मतदाता अकेले उत्तर प्रदेश में है, जबकि बंगाल में 7.66 करोड़, तमिलनाडु में 6.41 करोड़, मध्य प्रदेश में 5.74 करोड़, राजस्थान में 5.48 करोड़ व छत्तीसगढ़ में 2.12 करोड़ मतदाता हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस दौरान साफ किया है कि जिन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर की घोषणा की गई है, उन सभी राज्यों की मतदाता सूची में तत्काल प्रभाव से फेरबदल पर रोक लगा दी है। इस बीच इनमें न तो कोई नाम जोड़ा जा सकेगा और न ही हटाया जा सकेगा। एसआइआर के दौरान प्रत्येक मतदाता को एक यूनिक फॉर्म दिया जाएगा। इसमें पुराना पता, फोटो आदि छपा हुआ होगा। यदि मतदाता उस पते पर नहीं रह रहा है तो वह उसमें संशोधन कर सकता है। आयोग ने इस दौरान मतदाताओं को सुझाव दिया है कि गणना फार्म में अपने रंगीन फोटो लगाएं ताकि जो पहचान पत्र जारी किए जाने हैं, उनमें चेहरे उभरकर सामने आ सकें। इन 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में होगा एसआइआर उत्तर प्रदेश, बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, राजस्थान, केरल, गुजरात, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार। इनमें से बंगाल, तमिलनाडु, केरल व पुडुचेरी में अगले साल यानी 2026 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा में 2027 में विधानसभा होने हैं। यह रहेगा मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम     गणना पत्रों की छपाई व बीएलओ को प्रशिक्षण: 28 अक्टूबर से तीन नवंबर तक।     घर-घर जाकर पुनरीक्षण का काम- चार नवंबर से चार दिसंबर तक।     मतदाता सूची के मसौदे का प्रकाशन- नौ दिसंबर दावे और आपत्तियों का समय- नौ दिसंबर से आठ जनवरी 2026 तक।     दस्तावेजों की जांच के लिए नोटिस, सुनवाई, सत्यापन : नौ दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक ।     अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन- सात फरवरी 2026। अब तक आठ बार एसआइआर मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण का काम देश में कोई पहली बार नहीं हो रहा है। 1951 से 2004 तक यह आठ बार हो चुका है। अंतिम बार यह 21 साल पहले 2002 से 2004 के बीच देश के अधिकांश राज्यों में हुआ था। आयोग ने कहा कि एसआइआर का यह काम राजनीतिक दलों की ओर से लगातार मतदाता सूची की गडबड़ियों को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बाद शुरू किया गया है। इसके जरिए मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य है। आखिर, एसआइआर क्यों जरूरी? आयोग ने बताया कि एसआइआर क्यों जरूरी है? उसके मुताबिक, बदलते शहरीकरण में लोगों का तेजी से विस्थापन हो रहा है। यह इसकी एक बड़ी वजह है। दूसरा इसके चलते काफी लोगों के मतदाता सूची में दो-दो जगह नाम दर्ज हैं। तीसरा मतदाता सूची में मतदाताओं के मृत होने के बाद भी नामों का हटाया नहीं जाना है। चौथी वजह देश के तमाम हिस्सों में गलत तरीके से घुसपैठ करके बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जुड़वा लिया है। एसआइआर के दौरान इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच हो सकेगी। सभी राज्य सरकारें सहयोग के लिए प्रतिबद्ध, किसी दल से कोई मनमुटाव नहीं बंगाल में एसआइआर को लेकर सत्ताधारी दलों की ओर से की जा रही विरोधी टिप्पणियों से जुड़े सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने कहा कि एसआइआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है। संविधान के तहत … Read more

छत्तीसगढ़ के माओवादी नेता बंडी प्रकाश ने समर्पण किया, DGP के सामने हथियार सौंपे

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता बंदी प्रकाश ने तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है। बंदी प्रकाश नक्सलियों के तेलंगाना स्टेट कमेटी का मेम्बर और स्पेशल जोनल कमेटी मेम्बर भी है। बंदी प्रकाश पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। बंदी प्रकाश का नाम माओवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल है। बंदी प्रकाश उर्फ ​​प्रभात, अशोक, क्रांति मंचेरियल जिले के मंदामरी से हैं। प्रकाश के पिता सिंगरेनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 1982-84 के बीच "गाँव चलो" आंदोलन के माध्यम से रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) के लिए संघर्ष किया। इसके बाद वे माओवादी पार्टी से संबद्ध सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने और वहाँ से राज्य समिति के सदस्य बने। छात्र नेता से बना माओवादी नेता संगठन में ‘प्रभात’, ‘अशोक’ और ‘क्रांति’ जैसे नामों से पहचाने जाने वाला बंडी प्रकाश तेलंगाना के मंचेरियल जिले के मंदामरी क्षेत्र का रहने वाला है। उसके पिता सिंगरेनी कोलियरी में कर्मचारी हैं। छात्र जीवन में ही वह वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ और 1982–84 के बीच हुए गांव चलो आंदोलन के दौरान रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ गया। इसके बाद सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष के रूप में काम किया और धीरे-धीरे संगठन की ऊंची कमेटियों तक पहुंच गया। हाल के महीनों में माओवादियों पर बढ़ते दबाव और शीर्ष नेताओं के मारे जाने व मुख्यधारा में लौटने के बाद उसने भी मुख्यधारा का रास्ता चुन लिया। यहां बता दें कि कुछ दिन पहले पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केंद्रीय क्षेत्रीय ब्यूरो प्रमुख भूपति और केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश के नेतृत्व में 271 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके एक दिन बाद कांकेर क्षेत्र में 20 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। बताया जा रहा है कि बंडी प्रकाश के आत्मसमर्पण से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इकाई की गतिविधियों पर असर पड़ना तय है। इससे पहले भूपति की पत्नी तारक्का, उसकी भाभी सुजाता, और माओवादी नेता सुधाकर की पत्नी ककराला सुनीता भी आत्मसमर्पण कर चुकी हैं। लगातार आत्मसमर्पण की यह श्रृंखला माओवादी संगठन में तेजी से घटते मनोबल और आंतरिक असंतोष की ओर संकेत करती है। सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों में दहशत ज्ञात हो कि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस के अवसर पर माओवादियों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कुछ माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बाकी भी जन-जीवन में शामिल होकर देश के विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के प्रभाव से पार्टी के प्रमुख सदस्य एक के बाद एक अपनी सेना के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं। पिछले 45 वर्षों से नक्सल संगठन में थे सक्रिय बंदी प्रकाश माओवादी पार्टी में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संगठनकर्ता हैं। पिछले 45 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे उनके आत्मसमर्पण को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका कहा जा सकता है।

छठ पर्व पर मुख्यमंत्री साय ने सूर्य को अर्घ्य दिया, प्रदेश में खुशहाली और उन्नति की की प्रार्थना

रायपुर : मुख्यमंत्री  साय ने जशपुर में दुलदुला छठ घाट में सूर्य को दिया अर्घ्य: प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी मती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में पहुँचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य का अवसर है कि मुझे छठ पर्व में सम्मिलित होने का अवसर मिला।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह से ही उन्हें जनसेवा का अवसर मिला है, और वे क्षेत्र के विकास एवं जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री  साय ने दुलदुला क्षेत्रवासियों की माँग पर छठ घाट के सौन्दर्यीकरण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी छठ पर्व तक दुलदुला छठ घाट का सौन्दर्यीकरण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुनकुरी छठ घाट का सौन्दर्यीकरण लगभग ₹5 करोड़ 17 लाख की लागत से किया गया है, जहाँ इस वर्ष व्रती महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष  रामकुमार सिंह, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक  शशिमोहन सिंह सहित छठ व्रत करने वाली महिलाएँ, जनप्रतिनिधिगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छठ पर्व पर महिलाओं ने अर्पित किया अर्घ्य, आमातालाब घाट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

लोक आस्‍था के पर्व छठ पर महिलाओं ने अस्‍ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्‍य, आमातालाब छठ घाट पर उमड़े श्रद्धालु रायपुर लोक आस्था का महापर्व छठ पर  व्रती महिलाओं राजधानी रायपुर के आमातालाब छठ घाट पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया. 4 दिनों तक चलने वाले इस लोक आस्था के पर्व का आज तीसरा दिन है। रायपुर विश्वकर्मा समाज के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने बताया कि राजधानी रायपुर के आमातालाब छठ घाट पर लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. सोमवार शाम को अस्‍ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य देने के लिए आमातालाब छठ घाट पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. पारंपरिक गीतों और पूजा के बीच माहौल आस्थामय नजर आया. इस मौके पर भोजपुरी इंडस्‍ट्री के कलाकार भी भक्ति में सराबोर नजर आए. घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष टीम तैनात की थी. छठ पूजा की खासियत यह रही कि लोग सुबह से ही तैयारी में जुटे रहे और शाम होते ही सूर्य को अर्घ्‍य देने के लिए घाटों पर पहुंचे. सोमवार को इस पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। कल 28 अक्टूबर को प्रातः 6 बजे उषा अर्घ्य उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस अवसर पर क्षेत्र के विधायक एवं पार्षद गण,मंडल अध्यक्ष सहित समाज के सभी सदस्य सपरिवार उपस्थित रहेंगे। आज के कार्यक्रम में विशेष रूप से  विश्वकर्मा समाज के पूजन व्यवस्था हेतु युवा वर्ग से सुरज शर्मा,विनय शर्मा,रोहित,विश्वकर्मा संतोष विश्वकर्मा,शंकर शर्मा,सुनील शर्मा,सन्नी शर्मा,आकाश शर्मा एवं अन्य सदस्यों ने अपना योगदान दिया है।