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अगले 12 महीनों तक इस मार्ग से नहीं होगा आवागमन, मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी

नई दिल्ली दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि GRG सर्कल और PM सर्कल के बीच स्थित पंडित पंत मार्ग 23 फरवरी (सोमवार) से लगभग एक साल के लिए बंद रहेगा। पुलिस के अनुसार, यहां ‘युगे युगीन भारत’ अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है, जिसके चलते अगले 12 महीनों तक इस मार्ग पर आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। यह फैसला सुरक्षा और निर्माण कार्य को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए लिया गया है। इस बंदी का सबसे ज्यादा असर लुटियंस दिल्ली (सेंट्रल दिल्ली) से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि यह इलाका राजधानी का प्रमुख प्रशासनिक और यातायात केंद्र है। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें और यात्रा से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर जांच लें, ताकि जाम और असुविधा से बचा जा सके। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने GRG सर्कल और PM सर्कल के बीच पंडित पंत मार्ग बंद होने के कारण लोगों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए वैकल्पिक मार्गों की सलाह जारी की है। पुलिस के अनुसार, गोल डाक खाना से पंडित पंत मार्ग की ओर आने वाले वाहन चालक डॉ. बिशंबर दास मार्ग का उपयोग करें। इसके बाद वे गुरुद्वारा रकाबगंज रोड (GRG रोड) की ओर बढ़ते हुए चर्च रोड पहुंचने के लिए चर्च लेन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी तरह, चर्च रोड से आने वाली गाड़ियों को GRG रोड, तालकटोरा रोड होते हुए पंडित पंत मार्ग की दिशा में जाने के लिए संबंधित लेन लेने की सलाह दी गई है। इलाके में भीड़ कम करने और ट्रैफिक को सुचारु बनाए रखने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई वैकल्पिक मार्ग सुझाए हैं। पुलिस के अनुसार वाहन चालक संसद मार्ग, पटेल चौक गोल चक्कर, अशोक रोड, बाबा खड़क सिंह मार्ग, बिशंबर दास रोड, गुरुद्वारा रकाब गंज रोड और महादेव रोड जैसे मार्गों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, ISBT, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट की ओर जाने वाले यात्रियों को विशेष सलाह दी गई है कि वे यातायात प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें और अपनी यात्रा की योजना सावधानी से बनाएं, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या असुविधा से बचा जा सके। एडवाइजरी में सुझाए गए मार्ग गोल डाक खाना से PP मार्ग की ओर आने वाले वाहन: डॉ. बिशंबर दास मार्ग से होते हुए गुरुद्वारा रकाबगंज रोड (GRG रोड) जाएं और फिर चर्च लेन के जरिए चर्च रोड की ओर बढ़ें। चर्च रोड की ओर से आने वाले वाहन: चर्च लेन का उपयोग करते हुए GRG रोड, तालकटोरा रोड और आगे पंडित पंत मार्ग की दिशा में जा सकते हैं। ये सड़क रहेगी बंद GRG सर्कल और PM सर्कल के बीच पंडित पंत मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सुझाए गए वैकल्पिक मार्ग यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस ने संसद मार्ग, पटेल चौक गोल चक्कर, अशोक रोड, बाबा खड़क सिंह मार्ग, बिशंबर दास रोड, गुरुद्वारा रकाब गंज रोड और महादेव रोड जैसे रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। पुलिस की अपील एडवाइजरी में यात्रियों से प्रभावित हिस्से से बचकर या उसे बायपास करके गुजरने की अपील की गई है। साथ ही सुरक्षित और आसान यात्रा के लिए लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे मेट्रो और बस का अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई है।  

दिल्ली में बड़ा खतराः लाल किला और चांदनी चौक के मंदिर पर लश्कर ए तैयबा का धमाका अलर्ट

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर आतंकवादियों के निशाने पर है. खुफिया विभाग के सूत्रों ने एक हाई अलर्ट जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आंतकी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के सामने IED हमले की साजिश रच रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित इस आतंकी संगठन ने चांदनी चौक इलाके में स्थित प्रमुख मंदिरों को भी टारगेट करने की योजना बनाई है. यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच अभी चल रही है, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी. खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा भारत में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है. सूत्रों का कहना है कि लश्कर ने कश्मीर में बिलाल मस्जिद हमले का बदला लेने के लिए दिल्ली को चुना है, जहां नवंबर 2025 के ब्लास्ट के बाद एक वायरल पोस्ट में LeT ने जिम्मेदारी ली थी. उस पोस्ट में कहा गया था, ‘नई दिल्ली पर हमला लश्कर-ए-तैयबा के बहादुर शेरों ने किया है. यह कश्मीर में शहीदों का बदला है. हम हर मस्जिद के ईंट का बदला लेंगे और हर मंदिर तक पहुंचेंगे.’ लाल किले के सामने IED हमले की साजिश अलर्ट के अनुसार, लश्कर के स्लीपर सेल दिल्ली के लाल किले के मुख्य द्वार के पास भीड़भाड़ वाले इलाके में IED प्लांट करने की योजना बना रहे हैं. लाल किला पहले भी आतंकी हमलों का शिकार रहा है. दिसंबर 2000 में LeT ने लाल किले पर हमला किया था, जिसमें तीन लोग मारे गए थे. नवंबर 2025 के कार ब्लास्ट में भी लाल किले के पास मेट्रो स्टेशन के बाहर विस्फोट हुआ था, जिसमें 13 लोगों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए थे. जांच एजेंसियों ने इसे ‘आतंकी घटना’ करार दिया था और UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत केस दर्ज किया था. खुफिया सूत्रों ने बताया कि लश्कर के हैंडलर्स ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) की मदद से पंजाब स्थित गैंगस्टरों के साथ मिलकर IED सप्लाई कर रहे हैं. ये IED हाई-इंटेंसिटी वाले हैं, जो वाहनों या बैग्स में छिपाकर लगाए जा सकते हैं. दिल्ली पुलिस ने अलर्ट के बाद लाल किले के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडोज, डॉग स्क्वाड और AI आधारित फेशियल रिकग्निशन कैमरे तैनात किए गए हैं. दिल्ली मेट्रो और रेलवे स्टेशनों पर भी हाई अलर्ट है. चांदनी चौक के मंदिर निशाने पर अलर्ट में विशेष रूप से चांदनी चौक इलाके के मंदिरों को खतरा बताया गया है. लाल किले से सटे चांदनी चौक में कई प्राचीन मंदिर जैसे दिगंबर जैन मंदिर, गौरी शंकर मंदिर और सीस गंज गुरुद्वारा हैं. ये जगहें रोजाना हजारों श्रद्धालुओं से भरी रहती हैं, जिससे हमले की स्थिति में बड़ा नुकसान हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, लश्कर के आतंकी IED या सुसाइड बॉम्बर का इस्तेमाल कर इन मंदिरों को निशाना बना सकते हैं. यह साजिश धार्मिक स्थलों को टारगेट कर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश है. यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि लश्कर ISI की मदद से भारत में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है. जनता से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और सतर्क रहें. जांच एजेंसियां साजिशकर्ताओं की तलाश में जुटी हैं, और जल्द ही बड़े खुलासे की उम्मीद है.

AI समिट बना सियासी अखाड़ा, कांग्रेस पर भड़कीं सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली  दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट में इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के इस प्रदर्शन को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बेहद ही शर्मनाक बताया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि भारत मंडपम में जारी 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' आज भविष्य की दिशा तय कर रहा है, लेकिन कांग्रेस द्वारा किया गया तमाशा बेहद शर्मनाक है। जब भी देश अपना सामर्थ्य दिखाता है या कोई बड़ा वैश्विक आयोजन होता है तो कांग्रेस को जैसे मरोड़ उठने लगती है और वह बाधा बनकर खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों के सामने आज जो हुड़दंग मचाया गया, वह भारत की साख बिगाड़ने का कांग्रेस द्वारा सुनियोजित षड्यंत्र है। राहुल गांधी का नकारात्मक नेतृत्व एक सोची-समझी रणनीति के तहत देश की छवि धूमिल करने पर उतारू दिखाई देता है। यह कृत्य हर उस भारतीय को शर्मिंदा करने वाला है जो देश की प्रगति पर गर्व करता है। जनता देख रही है कि एक ओर भारत ‘प्रौद्योगिकी महाशक्ति’ बन रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस केवल नकारात्मक राजनीति का स्मारक और सड़क छाप तमाशों की केवल खबर बनकर रह गई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में नाटकीय प्रदर्शन कर विश्व समुदाय के सामने भारत की छवि धूमिल करने के प्रयास ने एक बार फिर कांग्रेस की राष्ट्र विरोधी विचारधारा को उजागर किया है। भारत का विरोध कर देश के दुश्मनों का एजेंडा चलाने वाली कांग्रेस ने आज करोड़ों देशवासियों के स्वाभिमान को चुनौती दी है। हालिया व्यापार समझौतों को लेकर भ्रम फैलाना हो या ऑपरेशन सिंदूर और गलवान पर वीर जवानों के पराक्रम पर सवाल उठाना, आज कांग्रेस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह एक कमजोर विपक्ष ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा कि राष्ट्रीय गौरव से ऊपर राजनीति नहीं हो सकती। राजनीतिक हताशा में देश की प्रतिष्ठा पर वार करना लोकतंत्र नहीं, राष्ट्र के सम्मान के खिलाफ साजिश है। जब देश विश्वस्तरीय एआई समिट की मेजबानी कर तकनीक, नवाचार और नेतृत्व की नई पहचान स्थापित कर रहा है, उस समय कांग्रेस के नेतृत्व में किया गया अशोभनीय प्रदर्शन न केवल गैर-जिम्मेदाराना बल्कि अत्यंत निंदनीय है। राजनीतिक विरोध के नाम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को धूमिल करने का यह प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय गरिमा दोनों के विपरीत है। उन्होंने आगे कहा कि आज जब भारत विश्व की अग्रणी तकनीकी शक्तियों में स्थान बना रहा है, तब ऐसे कृत्य यह प्रश्न उठाते हैं कि क्या कुछ दलों के लिए दलगत राजनीति राष्ट्रहित से भी ऊपर है। भारत की प्रतिष्ठा और सम्मान किसी भी राजनीतिक एजेंडे से बड़े नहीं हैं, और उन्हें आघात पहुंचाने वाला हर व्यवहार स्पष्ट रूप से निंदनीय है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पोस्ट में लिखा कि यह बहुत निंदनीय और शर्मनाक है। यह बहुत शर्म की बात है कि कांग्रेस पार्टी इतने नीचे गिर गई है। आज भारत मंडपम में उन्होंने जो किया, वह उनकी भारत विरोधी हरकतों का प्रदर्शन है जो चरम पर है, और वे एक बार फिर बेनकाब हो गए हैं। यह दुनिया के सामने भारत के टेक लीडरशिप के ऐतिहासिक पल को रोकने के लिए एक सिस्टमैटिक, अच्छी तरह से प्लान की गई स्ट्रैटेजी थी। बहुत शर्म की बात है। हम ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा करते हैं और भारत के नाम और सम्मान को खराब करने की क्रूर कोशिश के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं।

गरीबों को बड़ी राहत: दिल्ली में खुलीं 24 अटल कैंटीन, 5 रुपये में मिलेगी थाली

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में सस्ती और सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराने वाली योजना को बड़ा विस्तार मिला है। 24 नई अटल कैंटीनों की शुरुआत के साथ शहर में इनकी कुल संख्या बढ़कर 70 हो गई है। कृष्णा नगर की नर्सरी बस्ती से डिजिटल माध्यम से आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में विनय कुमार सक्सेना और रेखा गुप्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने आम नागरिकों के साथ बैठकर भोजन किया और योजना की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि नई अटल कैंटीनों के शुरू होने से राजधानी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कम कीमत पर भोजन की सुविधा और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। उनके अनुसार, सस्ती दरों पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने से दिहाड़ी मजदूरों, जरूरतमंदों और निम्न आय वर्ग के लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिल रहा है। उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि शहर के अधिक से अधिक इलाकों तक इस योजना का विस्तार किया जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति भूखा न रहे और सम्मान के साथ भोजन प्राप्त कर सके।     दिल्ली को चलाने वाले, दिल्ली को बनाने वाले हर मेहनतकश, हर जरूरतमंद के लिए अटल कैंटीन एक भरोसा है कि यह शहर उसका भी है, और यह व्यवस्था उसके साथ खड़ी है। सम्मानजनक और पौष्टिक भोजन पर जोर रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार की नई कैंटीन पहल मेहनतकश और कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि मात्र पांच रुपये में पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और स्वाद के मानकों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक भोजन मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि योजना पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है और इसका उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों सहित उन लोगों को राहत देना है जो रोज कमाकर जीवन यापन करते हैं। इन कैंटीनों का संचालन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा किया जा रहा है। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, शहरी विकास मंत्री आशीष सूद और कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल सहित कई जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कैंटीनों का मुख्य उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी संचालकों, सफाई कर्मचारियों और अन्य कम आय वर्ग के लोगों को स्वच्छ, सस्ता और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि महंगाई के दौर में उन्हें राहत मिल सके। अटल जयंती से शुरू हुई योजना उपराज्यपाल ने जानकारी दी कि इस जनकल्याणकारी योजना की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर की गई थी। उन्होंने बताया कि तब से इस पहल को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक थाली पर 25 रुपये की सब्सिडी दे रही है, जिससे गरीब और मेहनतकश लोगों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके। यह योजना खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वर्ग के लोगों के लिए राहत का काम कर रही है। 100 कैंटीन का लक्ष्य, समावेशी विकास पर फोकस मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य राजधानी में 100 अटल कैंटीन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल सस्ता भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को सुरक्षा तथा सम्मान का एहसास दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री का कहना था कि कैंटीनों के विस्तार के साथ अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिलेगा, खासकर दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वर्ग के परिवारों को। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार के सतत प्रयासों से राजधानी में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए, इस लक्ष्य की ओर लगातार काम किया जा रहा है।

दिल दहला देने वाला हादसा: जनकपुरी में तेज़ रफ्तार कार से पलटा ई-रिक्शा, मासूम की गई जान

जनकपुरी (पश्चिम दिल्ली) इलाके में एक दर्दनाक सड़क हादसे में कार की टक्कर से ई-रिक्शा पलट गया, जिससे उसमें सवार छह वर्षीय बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसकी नानी घायल हो गईं। पुलिस के अनुसार, 17 फरवरी की सुबह माता चानन देवी अस्पताल से पीसीआर को सूचना मिली कि एक नाबालिग लड़की समेत दो लोग सड़क दुर्घटना में घायल हुए हैं। हादसे में बच्ची और उसकी नानी मर्सी जेवियर (57) को पहले माता चानन देवी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें द्वारका स्थित एक उन्नत चिकित्सा केंद्र में रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान बच्ची ने तोड़ा दम अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान मर्सी जेवियर (57) ने पुलिस को बताया कि 17 फरवरी को सुबह करीब 7:40 बजे वह अपनी नातिन के साथ ई-रिक्शा में यात्रा कर रही थीं। जब उनका ई-रिक्शा जनकपुरी दमकल केंद्र के पास पहुंचा, तभी एक कार से टकराकर पलट गया। हादसे के बाद दोनों सड़क पर गिर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। आसपास के लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों और कार चालक की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। जनकपुरी थाने में मामला दर्ज जनकपुरी (पश्चिम दिल्ली) में हुए दर्दनाक ई-रिक्शा हादसे में घायल मर्सी जेवियर का इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच के आधार पर जनकपुरी थाना में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान दुर्घटना में शामिल वाहन को जब्त कर लिया गया है। अधिकारी ने बताया कि आरोपी चालक की पहचान संजीव के रूप में हुई है और उसे बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस गवाहों के बयान दर्ज कर रही है तथा घटनाक्रम को स्पष्ट करने के लिए जनकपुरी दमकल केंद्र और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। इस घातक हादसे ने शहर में बड़ी संख्या में चल रहे ई-रिक्शा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में दो लाख से अधिक ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, जिससे सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ गई है। मदद मांगी तो तुरंत कार लेकर भाग गया- मृतक की मां दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाली 6 वर्षीय बच्ची प्रेक्षेल की मां और नानी ने घटना की भयावह आपबीती बताई है। बच्ची की नानी ने बताया कि वे घर से स्कूल जाने के लिए निकली थीं और एक 16 वर्षीय ई-रिक्शा चालक उन्हें छोड़ने जा रहा था। रिक्शा सामान्य गति से चल रहा था, तभी अचानक एक तेज रफ्तार सफेद कार ने टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही ई-रिक्शा पलट गया और बच्ची, नानी तथा चालक तीनों सड़क पर गिर पड़े। उन्होंने बताया कि बच्ची जमीन पर गिरी और गंभीर रूप से घायल हो गई। नानी को भी चोट आई, जिससे वह उठ नहीं पा रही थीं। उन्होंने पास खड़ी सफेद कार से मदद मांगी और बच्चे को अस्पताल ले चलने को कहा, लेकिन चालक वहां से कार लेकर भाग गया। बच्ची की मां सौम्या ने बताया कि वह मैक्स हॉस्पिटल द्वारका में नर्स हैं। नाइट ड्यूटी खत्म कर लौट रहे अस्पताल स्टाफ ने उन्हें हादसे की सूचना दी और बताया कि एक ई-रिक्शा पलटा हुआ है तथा एक महिला मदद मांग रही है। उन्होंने कहा कि कई गाड़ियों को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। सौम्या के अनुसार, उनकी मां को यह नहीं पता था कि जिस कार से उन्होंने मदद मांगी, वही वाहन टक्कर मारने वाला था। मदद मांगने पर चालक मौके से फरार हो गया। यह हादसा 17 फरवरी की सुबह करीब 7:45 बजे हुआ। परिवार का कहना है कि उन्हें पुलिस की FIR की प्रति मिली है, लेकिन उन्होंने अभी उस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। मामले की जांच जारी है। सरकार को हार्श ड्राइविंग पर कंट्रोल करना चाहिए- मृतक की नानी प्रेक्षेल की नानी ने सड़क सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है और अब सड़कों पर निकलने से भी डर लगने लगा है। नानी ने बताया कि उनका बेटा जर्मनी से आया हुआ है। हादसे के बारे में सुनकर उसने कहा कि वहां यातायात नियमों का सख्ती से पालन होता है और वाहन अनुशासन में चलते हैं, जबकि यहां लोग लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि “वह जर्मनी है, लेकिन दिल्ली में कोई नियंत्रण नहीं है, यहां कभी भी किसी की मौत हो सकती है।” उन्होंने सरकार से मांग की कि तेज और लापरवाह ड्राइविंग पर सख्त नियंत्रण किया जाए, ताकि निर्दोष लोगों की जान न जाए। उनका कहना था कि “जो व्यक्ति तेज गाड़ी चला रहा है, वह अपने साथ दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डालता है।” परिवार ने बताया कि बच्ची का अंतिम संस्कार कर वे लौटे हैं, लेकिन गम और डर अभी भी बना हुआ है। इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ई-रिक्शा की वास्तविक संख्या काफी अधिक दिल्ली में हुए दर्दनाक हादसे के बाद सड़कों पर चल रहे ई-रिक्शा की सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रवर्तन एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शहर में चलने वाले ई-रिक्शा की वास्तविक संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई वाहन बिना उचित पंजीकरण या सुरक्षा मानकों का पालन किए सड़कों पर दौड़ रहे हैं। एक पुलिस सूत्र ने बताया कि बड़ी संख्या में ई-रिक्शा भीड़भाड़ वाले आवासीय और बाजार क्षेत्रों में चलते हैं, जहां अक्सर यातायात नियमों का पालन नहीं किया जाता। कई मामलों में वाहन क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जाता है या सीमित प्रशिक्षण वाले चालक इन्हें चलाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

डिजिटल भुगतान पर खतरा! UPI फ्रॉड को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली ऑनलाइन पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच दिल्ली में UPI फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने UPI फ्रॉड रोकने तथा पीड़ितों को तुरंत राहत देने के लिए ठोस गाइडलाइंस बनाने की मांग पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी की घटनाएं भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच रही हैं। अदालत ने वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब देने को कहा है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि UPI फ्रॉड रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए कौन-सी व्यवस्था मौजूद है। दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी पर चिंता जताई याचिकाकर्ता पंकज निगम ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि फरवरी 2024 में ऑनलाइन किराये का फ्लैट ढूंढते समय उनसे 1.24 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। उन्होंने कहा कि मकान किराये पर दिलाने के नाम पर आरोपियों ने डिजिटल पेमेंट के जरिए पैसे ट्रांसफर करवा लिए, जिसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हुआ। याचिकाकर्ता के अनुसार, घटना की शिकायत संबंधित एजेंसियों से करने के बावजूद न तो उनकी रकम वापस मिली और न ही आरोपियों के बारे में कोई ठोस जानकारी दी गई। उन्होंने अदालत को बताया कि ऐसे मामलों में आम लोग खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करते हैं, क्योंकि न तो त्वरित कार्रवाई होती है और न ही पीड़ितों को समय पर राहत मिलती है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि UPI और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में सख्त दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की ठगी से बचाया जा सके और पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। क्या कहा याचिका में ? याचिका में कहा गया है कि फर्जी या अधूरी जानकारी वाले बैंक खातों के जरिए होने वाली ठगी रोकने के लिए केवल फुल KYC (पूर्ण सत्यापन) वाले बैंक अकाउंट को ही UPI से जोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके अलावा एक यूनिफाइड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म बनाने की भी मांग की गई है, जो साइबर क्राइम हेल्पलाइन को UPI ऐप, बैंकों, पेमेंट कंपनियों और टेलीकॉम सेवाओं से जोड़ सके। इससे ठगी के शिकार लोगों को अलग-अलग जगह भटकने के बजाय एक ही मंच पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिल सकेगी। याचिका में कहा गया है कि ऐसा सिस्टम होने पर फ्रॉड की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुंचेगी और संदिग्ध लेनदेन को समय रहते रोका जा सकेगा। अदालत ने इस मामले में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से जवाब मांगा है, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली को और सुरक्षित बनाया जा सके। याचिका दाखिल कर SOP बनाने की मांग UPI फ्रॉड के बढ़ते मामलों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में और भी कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि 10 लाख रुपये तक के UPI फ्रॉड मामलों को ई-जीरो FIR सिस्टम में शामिल किया जाए, ताकि पीड़ित को तुरंत कानूनी कार्रवाई का लाभ मिल सके। याचिकाकर्ता का कहना है कि गंभीर मामलों में अपने-आप FIR दर्ज होने की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे पुलिस कार्रवाई में देरी न हो और आरोपियों तक जल्दी पहुंचा जा सके। इससे साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती “गोल्डन टाइम” का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा, जब रकम को ट्रैक या फ्रीज करना संभव होता है। इसके अलावा, अलग-अलग राज्यों में अलग नियमों के कारण जांच में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए पूरे देश में एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एक समान व्यवस्था होने से एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर होगा और पीड़ितों को समय पर राहत मिल सकेगी। मामले में अदालत पहले ही वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से विस्तृत जवाब मांग चुकी है, ताकि डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस दिशा-निर्देश तय किए जा सकें।

घर बैठे बना करोड़पति! भारतीय मूल के आरोपी ने अमेरिकी कंपनी को लगाया लाखों डॉलर का चूना

नई दिल्ली फर्जीवाड़े के कई मामले आपने सुने होंगे, लेकिन यह मामला सुनकर आपकी आंखें भी चौंधिया जाएंगी कि ऐसा भी संभव है। अमेरिका में भारतीय मूल के करण गुप्ता (47 वर्ष) को अपने 'जीवन भर के दोस्त' को नौकरी पर रखकर कंपनी से 12 लाख डॉलर (लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक) की ठगी करने के आरोप में दोषी ठहराया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ( DOJ) और मिनेसोटा जिले के अटॉर्नी कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, करण गुप्ता पर वायर फ्रॉड की साजिश, 10 काउंट्स में वायर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के आरोप सिद्ध हुए हैं। बताया गया कि करण गुप्ता यूनाइटेडहेल्थ ग्रुप की सहायक कंपनी ऑप्टम में सीनियर डायरेक्टर ऑफ डेटा एनालिटिक्स के पद पर कार्यरत थे। डीओजे के अनुसार, 2015 में गुप्ता ने अपने अयोग्य दोस्त को एक फर्जी रिज्यूमे देकर ऑप्टम में डेटा इंजीनियरिंग या संबंधित उच्च पद पर नियुक्त करवा दिया। गुप्ता खुद उसके सुपरवाइजर बन गए। इसके बाद करीब चार साल तक उस दोस्त ने कंपनी के लिए बिल्कुल कोई काम नहीं किया। न कोई मीटिंग, न ईमेल, और कई हफ्तों तक वह अपने ऑफिशियल कंप्यूटर में भी लॉग इन नहीं करता था। फिर भी उसे 1 लाख डॉलर से ज्यादा का सालाना वेतन मिलता रहा, जो बोनस और बढ़ोतरी के साथ और बढ़ता गया। बताया गया कि करण गुप्ता खुद अपने करियर के चरम पर ऑप्टम से 2.6 लाख डॉलर से अधिक सालाना कमाते थे। दोस्त ने अपनी सैलरी का आधे से ज्यादा हिस्सा गुप्ता को रिश्वत (Kickback) के रूप में दिया। रिश्वत की रकम ट्रांसफर करने के लिए शुरुआत में दोस्त न्यू जर्सी में रहते हुए अपने बैंक से कैश निकालता और गुप्ता के न्यू जर्सी बैंक खाते में जमा करता, ताकि गुप्ता कैलिफोर्निया से उस तक पहुंच सके। बाद में दोस्त ने नया चेकिंग अकाउंट खोला, उसे ऑप्टम के डायरेक्ट डिपॉजिट के लिए लिंक किया और गुप्ता को डेबिट कार्ड भेज दिया। गुप्ता कैलिफोर्निया के एटीएम से इस रकम को नकद निकाल लेता था। कैसे हुआ खुलासा यह मामला तब सामने आया जब 2019 में गुप्ता को किसी अन्य धोखाधड़ी के मामले में ऑप्टम ने बर्खास्त कर दिया। कंपनी की जांच में यह 'घोस्ट एम्प्लॉयी' स्कीम सामने आई और मामला संघीय एजेंसियों को सौंप दिया गया। एफबीआई के मिनियापोलिस फील्ड ऑफिस के कार्यवाहक विशेष एजेंट रिक इवानचेक ने कहा कि गुप्ता ने अपने भरोसे के पद का दुरुपयोग कर एक फर्जी कर्मचारी की नियुक्ति की और अमेरिका की सबसे बड़ी हेल्थकेयर प्रदाता कंपनी से सैकड़ों हजारों डॉलर की ठगी की।  

राजधानी को बड़ी सौगात: 24 अटल कैंटीन शुरू, जरूरतमंदों को मिलेगा सस्ता भोजन

नई दिल्ली दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को राजधानी में 24 नई ‘अटल कैंटीनों’ की शुरुआत की। कृष्णा नगर की नर्सरी बस्ती से डिजिटल तरीके से इन कैंटीनों का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में अटल कैंटीनों की कुल संख्या बढ़कर 70 हो गई। सरकार ने जल्द ही इनकी संख्या बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा है उद्घाटन के बाद उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य अतिथियों ने कैंटीन में बैठकर आम लोगों के साथ खाना भी खाया। इस अवसर पर उपराज्यपाल ने कहा कि यह योजना गरीबों और जरूरतमंदों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। उधर सीएम ने इस मौके पर कहा कि यह योजना इसी सोच से प्रेरित है कि दिल्ली में रहने वाला कोई भी शख्स भूखा न सोए। घर लौटकर खाना बनाने के तनाव से मिलेगी मुक्ति कृष्णा नगर में अटल कैंटीन का उद्घाटन करने के बाद मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि यह पहल गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, 'आज अटल कैंटीन का उद्घाटन हम सबको संतुष्टि देने वाला है। यह हर उस मजदूर, श्रमिक, जरूरतमंद, गरीब, बेसहार भाई-बहन के काम आने वाली रसोई है, जहां उसे भरपेट खाना मिलता है। आपने कितनी ही बार देखा होगा कि परिवार गांव में रहता है, और शहर में घर पर कोई खाना बनाने वाला नहीं रहता, मजदूर भाई अपनी ड्यूटी करके आता है, आकर घर में चूल्हा जलाकर अपने लिए खाना बनाता है। क्योंकि अगर बाजार में जाए तो वही थाली उसे 100 रुपए या 150 रुपए में मिलती है, आज मात्र 5 रुपए में उसे खाना मिलना उसके सम्मान को बचाकर रखने जैसा है। साफ-सुथरा पौष्टिक भोजन हम सब दिल्लीवासियों की सेवा में दे रहे हैं, जिनको इसकी जरूरत है।' सीएम ने बताया थाली में है क्या-क्या? मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि कैंटीनों में दाल, चावल, रोटी और सब्जी जैसे संतुलित भोजन परोसे जा रहे हैं। व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु रखने के लिए डिजिटल टोकन सिस्टम और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है। भोजन स्टील की थाली में दिया जाता है और बिलिंग पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड है। समाज की भागीदारी बढ़ाने के लिए अटल कैंटीन का कॉर्पस फंड बनाने का सुझाव भी दिया गया है ताकि समाजसेवी विशेष अवसरों पर भोजन प्रायोजित कर सकें। LG बोले- हर थाली पर इतनी सब्सिडी दे रही सरकार वहीं उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस अवसर पर कहा कि दिल्ली सरकार हर थाली पर 25 रुपए की सब्सिडी दे रही है, ताकि जरूरतमंद लोगों को सम्मान के साथ खाना मिल सके। कैंटीनों में खाने की गुणवत्ता पर नियमित नजर रखी जाती है और साफ-सफाई व पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनकी टीम को इस पहल के लिए बधाई दी और कहा कि इस योजना को आगे भी इसी तरह सफलतापूर्वक चलाया जाना चाहिए। सीएम ने की इस विभाग के अधिकारियों की तारीफ सीएम गुप्ता ने कम समय में अटल कैंटीन योजना को पूरा करने के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के अधिकारियों की तारीफ की और कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्शों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि अटल कैंटीन का उद्देश्य दिल्ली भर में शहरी गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और जरूरतमंद लोगों को किफायती भोजन उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल सुनिश्चित करेगी कि कोई भी भूखा न सोए। हर दिन 1 लाख लोगों को सस्ता भोजन देने की व्यवस्था बता दें कि राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी के श्रमिकों, गरीबों और अन्य जरूरतमंद निवासियों को किफायती और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। सरकार ने इस योजना के संचालन और प्रबंधन के लिए 104.24 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। प्रत्येक अटल कैंटीन में हर दिन लगभग 1,000 लोगों को भोजन परोसा जाएगा, जिससे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हर दिन 1,00,000 से ज्यादा लोगों को फायदा होगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल के अलावा केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद और भाजपा विधायक अनिल गोयल भी उपस्थित थे।

क्या हम प्लास्टिक पी रहे हैं? यमुना वॉटर में खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक का खुलासा

नई दिल्ली  जिसे आप पानी समझकर पी रहे हैं वह पानी नहीं प्लास्टिक है.हाल ही में आई द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) की एक रिसर्च काफी डराने वाली है. टेरी की ओर से एक साल तक किए गए वैज्ञानिक अध्ययन में दिल्ली से गुजरने वाली यमुना नदी, नलों से आने वाले भूजल, शहर के खुले नालों और बाढ़ क्षेत्र की मिट्टी में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक के कण मिले हैं. टेरी की स्टडी ऑन माइक्रोप्लास्टिक्स इन रिवर यमुना एंड ग्राउंडवॉटर इन दिल्ली (2024–25) बताती है कि शोधकर्ताओं ने दिल्ली के सभी 11 जिलों की विभिन्न जगहों से 88 नमूने लिए थे और उनकी जांच की थी, जिनमें से हर सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा काफी ज्यादा मिली है. इस स्टडी को दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने करवाया था. जिसके परिणाम काफी डराने वाले आए हैं. खबर के मुताबिक टेरी की ये रिपोर्ट पिछले साल के अंत में दिल्ली सरकार को सौंप दी गई थी. रिपोर्ट बताती है कि मौसम के अनुसार यमुना जल सहित बाकी जल स्त्रोतों में प्रदूषण का स्तर बदलता रहता है. जहां बारिश यानि मानसून से पहले यमुना नदी के पानी में बहाव और जल की आपूर्ति बढ़ने के कारण माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा ज्यादा देखी गई और मॉनसून के बाद यह कम हो जाती है क्योंकि यह गंदगी और प्लास्टिक आसपास की मिट्टी में फैल जाती है. माइक्रोप्लास्टिक क्या होती है? माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक के कण होते हैं जो पानी में मिले रहते हैं और दिखाई भी नहीं देते लेकिन अगर इस पानी को पीया जाता है तो यह कण अपने साथ जहरीले रसायनों को चिपका कर शरीर के अंदर ले जाते हैं और भारी नुकसान पहुंचाते हैं. माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा शरीर में पहुंचने के चलते काफी सारी गंभीर बीमारियां सामने आ सकती हैं. जांच में पाया गया कि करीब 95 फीसदी कण माइक्रोफाइबर (बहुत छोटे रेशे) थे. इससे अंदाजा लगाया गया कि घरों से निकलने वाला कपड़े धोने का पानी और कपड़ा उद्योग से निकलने वाला कचरा भी इस प्रदूषण का बड़ा कारण हो सकता है. सबसे खास बात है कि इस परीक्षण में पानी के अंदर 13 तरह के प्लास्टिक कण पाए गए, जिससे पता चलता है कि ये कण घरों के कचरे, फैक्ट्रियों के गंदे पानी और पैकेजिंग सामग्री जैसे कई स्रोतों से आकर मिल रहे हैं. मौसम के अनुसार बदला स्तर स्टडी कहती है कि मॉनसून में यानि मई–जून 2024 में यमुना के पानी में औसतन 6,375 माइक्रोप्लास्टिक कण प्रति घन मीटर मिले. जबकि दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 (मानसून के बाद) यह घटकर 3,080 कण प्रति घन मीटर रह गए. यानी लगभग 50 फीसदी की कमी देखी गई. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कमी प्लास्टिक कम बनने से नहीं, बल्कि बारिश के कारण पानी बढ़ने से कण बह जाने और पतले पड़ने (डायल्यूशन) की वजह से हुई. मानसून के दौरान तेज बहाव कणों को नीचे की ओर बहा देता है, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि नदी किनारे की मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा चार गुना से ज्यादा बढ़ गई. मानसून से पहले औसतन 24.5 कण प्रति किलो मिट्टी थे, जो बाद में बढ़कर 104.45 कण प्रति किलो हो गए.

अश्लील साइट्स की लत ने उजाड़ा घर, पति ने पत्नी का 13 मिनट का वीडियो किया वायरल

नई दिल्ली डिजिटल दौर में फेम और व्यूज की भूख इंसान को किस हद तक गिरा सकती है इसकी एक भयावह मिसाल मध्य प्रदेश के रीवा से सामने आई है। यहां एक शख्स ने अपनी ही पत्नी की अस्मत को इंटरनेट पर नीलाम कर दिया। आरोपी ने अपनी पत्नी का 13 मिनट 14 सेकेंड का निजी वीडियो एक पोर्न साइट पर अपलोड कर दिया ताकि वह ऑनलाइन स्टार बन सके। भरोसे का कत्ल: पोर्न स्टार बनने की थी चाह पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ है वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने वाला है। आरोपी पति लंबे समय से अश्लील साइट्स देखने का आदी था और खुद को पोर्न इंडस्ट्री का स्टार समझने लगा था। इसी सनक में उसने पत्नी के साथ निजी पलों का वीडियो रिकॉर्ड किया। जब पत्नी ने वीडियो वायरल होने पर विरोध किया तो पति ने बिना किसी पछतावे के कहा कि उसने यह सब जानबूझकर किया है ताकि लोग उसे पहचानें और वह पॉपुलर हो जाए। दहेज विवाद और बदले की साजिश पीड़िता के परिवार का आरोप है कि इस घिनौनी करतूत के पीछे सिर्फ सनक नहीं बल्कि दहेज का लालच भी था। 10 मई को हुई शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष 3 लाख रुपये की मांग कर रहा था। 1 लाख रुपये बकाया होने के कारण आरोपी अक्सर विवाद करता था। आरोप है कि दहेज की रकम न मिलने पर उसने अपनी पत्नी से बदला लेने के लिए उसका वीडियो सार्वजनिक कर दिया और उसे कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा।   सोशल मीडिया पर आक्रोश: यह इंसान नहीं, दरिंदा है वीडियो वायरल होने के बाद जब रिश्तेदारों और गांव वालों तक यह बात पहुंची तो सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई। यूजर्स ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उसने मेरी जिंदगी तबाह कर दी। वह वीडियो मेरे परिचितों को भी भेजता रहा। यूजर्स की प्रतिक्रिया: लोग इसे सिर्फ साइबर क्राइम नहीं बल्कि एक महिला की गरिमा की हत्या मान रहे हैं। मुंबई फरार हुआ आरोपी, पुलिस की दबिश जारी रीवा के समान थाना क्षेत्र में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर ली है। पता चला है कि वह मुंबई फरार हो गया है। सीएसपी राजीव पाठक के मुताबिक पुलिस की एक टीम मुंबई भेजी जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस ने इस मामले में आईटी एक्ट और दुष्कर्म व धमकी की धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।