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इंदौर में कड़ाके की ठंड, पारा 4.5° तक गिरा, 10 साल में सबसे कम तापमान, पचमढ़ी भी ठंडी

भोपाल   मध्य प्रदेश में बुधवार को भीषण सर्दी का असर देखने को मिला। शहडोल का कल्याणपुर ठंड से कांप उठा। यहां सीजन में पहली बार न्यूनतम तापमान 3 डिग्री दर्ज हुआ। आज गुरुवार को भी कई जगहों पर शीतलहर चलने की चेतावनी दी गई है। आइए एक नजर डालते है मौसम के ताजा हाल पर… मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 222 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिससे एमपी में भीषण ठंड पड़ रही है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी हो रही है। जिससे प्रदेश में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। आज भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर और सीहोर में कोल्ड वेव का अलर्ट है। पचमढ़ी में पारा 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 5 बड़े शहरों में भोपाल में 6.6 डिग्री, ग्वालियर में 9.2 डिग्री, उज्जैन में 8.2 डिग्री और जबलपुर में तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार, बीती रात अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे ही रहा। रायसेन में 5 डिग्री, रीवा में 5.9 डिग्री, शिवपुरी में 6 डिग्री, उमरिया में 6.1 डिग्री, बालाघाट के मलाजखंड में 6.8 डिग्री, नौगांव में 7.1 डिग्री, मंडला में 7.3 डिग्री, खजुराहो में 7.4 डिग्री, रायसेन-छिंदवाड़ा में 7.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.2 डिग्री, छिंदवाड़ा में 8.4 डिग्री, सतना में 8.6 डिग्री, दमोह में 8.8 डिग्री, रतलाम में 9.2 डिग्री, श्योपुर-गुना में पारा 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसलिए बढ़ी सर्दी मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर भी है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 222 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। इस कारण गुरुवार को भी शीतलहर का अलर्ट है। सबसे ठंडा शहडोल का कल्याणपुर बात करें बीती रात की तो इस सीजन में पहली बार पारा 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। शहडोल के कल्याणपुर में 3 डिग्री दर्ज हुआ। उमरिया में 4.9 डिग्री, राजगढ़-पचमढ़ी में 5.2 डिग्री, इंदौर में 5.4 डिग्री, शाजापुर के गिरवर में 5.5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। जबकि रीवा में 5.8 डिग्री, मलाजखंड में 6.7 डिग्री, भोपाल में 6.8 डिग्री, मंडला-नौगांव में 7 डिग्री, रायसेन में 7.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 7.8 डिग्री, शिवपुरी में 8 डिग्री, सतना में 8.1 डिग्री, बैतूल में 8.2 डिग्री, खजुराहो में 8.4 डिग्री, उज्जैन में 8.7 डिग्री, दमोह में 8.8 डिग्री, नरसिंहपुर में 9 डिग्री, जबलपुर में 9.1 डिग्री और ग्वालियर में 9.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान में भी गिरावट मध्य प्रदेश में जहां न्यूनतम में काफी गिरावट दर्ज की गई है तो वहीं अधिक तापमान भी लुढ़का है। बालाघाट के मलाजखंड में पारा 22.7 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। वहीं नरसिंहपुर, धार, सीधी, रीवा और बैतूल में पारा 26 डिग्री से कम रहा। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की मानें तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ाएगी। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही होना है। उत्तर से बर्फीली हवाएं आ रही देश के उत्तरी हिस्से यानी, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी हुई है। इस वजह से हवा की रफ्तार उत्तरी हो गई है। बर्फीली हवा की वजह से ही प्रदेश में शीतलहर की स्थिति है। बुधवार को भोपाल, इंदौर, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर और रायसेन में शीतलहर का असर देखा गया। दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी मौसम विभाग की मानें तो इस बार सर्दी का असर तेज है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी है। ऐसी ही सर्दी दिसंबर में भी है। इंदौर में दिसंबर की सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। नवंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का।

सागर में सड़क हादसे में मरे चार पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में दी गई अंतिम विदाई, हर आंख नम

मुरैना ड्यूटी के दौरान हुए दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में बीडीडीएस टीम के चार जांबाज़ पुलिसकर्मियों की मौत के बाद आज पुलिस लाइन का पूरा परिसर शोक में डूबा दिखाई दिया। गुरुवार सुबह उनके पार्थिव शरीर जैसे ही पुलिस लाइन लाए गए, माहौल अचानक गमगीन हो गया। साथी जवानों की आंखें भर आईं और पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि, भारी पुलिस बल मौजूद श्रद्धांजलि समारोह में डीआईजी, एडिशनल एसपी सहित जिलेभर का बड़ा पुलिस अमला मौजूद रहा। चारों शहीद जवानों के ताबूत तिरंगे में लिपटे थे, जिनके सामने खड़े होकर हर किसी की भावनाएं छलक उठीं। पूरे परिसर में सिर्फ एक ही आवाज़ गूंज रही थी— “अमर रहें हमारे वीर जवान”। सागर सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मुरैना पुलिस के चार जवानों का गुरुवार को अंतिम संस्कार किया जा रहा है। रात 2 बजे सभी की पार्थिव देह मुरैना पहुंची। यहां पुलिस लाइन में सभी को श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि स्थल पर डीआईजी ने हादसे में जान गंवाने वाले सभी पुलिसकर्मियों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए के चेक दिए। वहीं, चार-चार लाख रुपए के चेक बाद में दिए जाएंगे। सरकार अंतिम संस्कार के लिए कुल पांच लाख रुपए देती है। हादसे में जान गंवाने वाले परिमाल सिंह तोमर को मुरैना जिले के ग्राम नख्ती, डॉग मास्टर विनोद शर्मा को मुरैना के जौरा, प्रद्युम्न दीक्षित को भिंड के फूप और अनिल सिंह कौरव को भिंड के ग्राम टेंटोन में अंतिम विदाई दी जाएगी। हादसा बुधवार सुबह सागर जिले के बांदरी थाना क्षेत्र में हुआ था। मुरैना बीडीडीएस (बम निरोधक दस्ता) पुलिस टीम की गाड़ी (MP03 A 4883) सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई थी। ये सभी जवान बालाघाट में नक्सल विरोधी अभियान में अपनी ड्यूटी पूरी कर वापस मुरैना लौट रहे थे। 4 पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल आरक्षक राजीव चौहान को सागर से एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजा गया है। परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल— शव पैतृक गांव रवाना श्रद्धांजलि के बाद चारों जवानों के पार्थिव शरीरों को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ उनके-उनके पैतृक गांव के लिए रवाना कर दिया गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। घरों में मातम पसरा हुआ है, परिवार अपने लाड़लों को अंतिम बार देखने के लिए तड़प उठा। अंतिम संस्कार के लिए दी गई एक-एक लाख की सहायता राशि पुलिस विभाग की ओर से मृतक जवानों के परिवारों को अंतिम संस्कार हेतु एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई। डीआईजी ने कहा— “हमने अपने चार बहादुर साथी खो दिए हैं, उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी।” कैसे हुआ हादसा? डीआईजी ने बताया कि बीडीडीएस की टीम बालाघाट में ड्यूटी पूरी कर मुरैना लौट रही थी, तभी सागर जिले में तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहन से हुए भीषण हादसे में चार जवानों की मौके पर ही मौत हो गई। एक जवान गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज जारी है। शहर में पसरा मातम— पुलिस परिवार सदमे में पूरा पुलिस बल अपने साथियों की शहादत से स्तब्ध है। जवानों को अंतिम सलामी देते वक्त हर चेहरे पर दुख और गर्व दोनों दिखाई दिए।

जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा, सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में जल जीवन मिशन की बुधवार को समीक्षा बैठक में कहा कि प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जल स्रोतों में किसी भी स्थिति में सीवरेज का दूषित जल न मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन मध्यप्रदेश इस मिशन को मार्च 2027 तक पूरा कर देश में मिसाल पेश करेगा। मिशन के संचालन और संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जल आपूर्ति कभी प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंच और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। पिछले दस वर्षों में जल संकट का सामना करने वाले गांवों की रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल वितरण का समय पानी की उपलब्धता के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराया जाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन मिल चुके हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत है। वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य पूरा किया गया और 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। प्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने वाला पहला राज्य बन गया है और “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला है। एकल नल जल योजनाओं में 93 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है। डिजिटल मॉनिटरिंग, NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं और सौर-ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से जल जीवन मिशन को तकनीकी और ऊर्जा सुरक्षा के साथ संचालित किया जा रहा है। बैठक में बताया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। नए ग्राम, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्रों में जल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इस योजना के पूरा होने से मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश में अग्रणी राज्य बन सकेगा।  

मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: SIR प्रक्रिया अंतिम चरण में, लाखों नाम हो सकते हैं डिलीट

भोपाल प्रदेश में मतदाताओं के गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन शत-प्रतिशत हो गया है। गुरुवार रात 12 बजे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो जाएगी। 16 दिसंबर को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन होगा। इसमें प्रदेश भर के 30 से 35 लाख मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। इनमें मृत, स्थानांतरित, दो स्थान पर नाम वाले मतदाता शामिल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जिले के विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची से नाम अधिक कटने की संभावना है।   वहीं, जिनके गणना पत्रक तो जमा हो गए लेकिन आवश्यक जानकारी नहीं दी गई है, उन्हें रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा नोटिस देकर दस्तावेज मांगे जाएंगे। एसआईआर में जो गणना पत्रक दिए गए, वे मतदाताओं को भरकर देने थे। इसमें वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता, दादा-दादी में से किसी एक के नाम की जानकारी भी देनी थी। जिन मतदाताओं ने वर्ष 2003 के एसआईआर के आधार पर जानकारी न देकर केवल हस्ताक्षर करके गणना पत्रक दिए हैं, उनके नाम तो प्रारूप सूची में आएंगे लेकिन उन्हें नोटिस जारी होंगे। ऐसे मतदाताओं की संख्या करीब 12 लाख है। चूंकि, गणना पत्रक सभी मतदाताओं को जारी किए गए हैं इसलिए जिन मतदाताओं ने एक से अधिक स्थान पर गणना पत्रक जमा किए हैं, उनके नाम केवल एक स्थान पर रहेंगे।   इंदौर में 1.94 लाख मतदाताओं का नहीं मिला 2003 का रिकॉर्ड, अब देने होंगे दस्तावेज भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर सहित अन्य शहरी क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं के नाम अधिक कटेंगे क्योंकि यहां अपेक्षाकृत अधिक मतदाता रोजगार, पढ़ाई आदि कारणों से स्थानांतरित होते रहते हैं। मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की अलग से सूची बनेगी। यह संख्या 18 से 23 लाख हो सकती है। इनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं आएंगे। प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि बूथ लेवल एजेंटों से जो जानकारी प्राप्त हो रही है, उसके अनुसार सूची में ऐसे मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में दर्ज हैं, जिनका या तो निधन हो चुका है या फिर दर्शाए पते पर रहते ही नहीं हैं। ऐसे सभी मतदाताओं के नाम सूची से हटेंगे। प्रारूप प्रकाशन के बाद बूथवार मतदाताओं का सत्यापन कराया जाएगा। इसके आधार पर दावा-आपत्ति होंगे। 16 दिसंबर को होगा प्रारंभिक प्रकाशन मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 16 दिसंबर को होगा। इसमें जो नाम शामिल नहीं होंगे, उन्हें विलोपित माना जाएगा। सूची के आधार पर 15 जनवरी, 2026 तक दावा-आपत्ति होंगे। सात फरवरी तक इनका निराकरण रजिस्ट्रीकरण अधिकारी करेंगे। प्रारूप सूची में नाम नहीं आया तो भी अवसर यदि किसी भी कारण से प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं आता है तो भी नाम जुड़वाने का अवसर रहेगा। इसके लिए दावा या आपत्ति की प्रक्रिया में भाग लेना होगा। रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को निर्धारित पहचान पत्र बताने होंगे। इस आधार पर निर्णय होगा। एक नजर में 27 अक्टूबर, 2025 की स्थिति में मतदाता- 5,74,06,143 मतदान केंद्र- 65,014 गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन हुआ- 5,74,06,098

भोपाल मेट्रो सीमित सुविधाओं के साथ होगी लॉन्च, कई स्टेशन पर निर्माण जारी रहेगा

भोपाल लंबे इंतजार के बाद भोपाल मेट्रो का 21 दिसंबर को लोकार्पण किया जाएगा, लेकिन मेट्रो यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाएं आज भी नदादर है। जबकि मेट्रो प्रोजेक्ट की डीपीआर में यात्री सुविधाओं को शामिल किया गया। इनमें सबसे खास मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी और नेशनल कामन मोबिलिटी कार्ड जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं आज भी कागजों में कैद है। चौकाने वाली बात यह है कि जमीनी स्तर पर इन सुविधाओं को शुरू करने के लिए अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। मेट्रो स्टेशन के नीचे एंट्री-एग्जिट स्टेशन पर सिर्फ साइकिल डेक, ड्रॉप ऑफ, पिक पाइंट जैसी बेसिक सुविधाओं के साथ भोपाल मेट्रो को पटरियों पर दौड़ाया जाएगा। यह देखकर कहना गलत नहीं होगा कि एमपी मेट्रो प्रबंधन ने लोकार्पण को मजाक बना दिया है। जबकि यात्रियों सुविधाओं को इसलिए ध्यान दिया जाता है, ताकि शहर के नागरिक अधिक से अधिक मेट्रो का उपयोग कर सकें, लेकिन जब मेट्रो तक पहुंचने के लिए कनेक्टिविटी ही नहीं होगी तो यात्री मेट्रो स्टेशन तक पहुंचेंगे कैसे। इसका खामियाजा आने वाले दिनों में मेट्रो प्रबंधन को भुगतना पड़ेगा। मेट्रो चलेगी, लेकिन यात्रियों को नहीं मिलेंगी ये सुविधाएं लोकार्पण के साथ मेट्रो तो चलेगी, लेकिन मेट्रो यात्रियों को यह सुविधाएं पहले दिन से नहीं मिलेंगी। इनमें सबसे खास स्टेशन पर मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी के तहत आने वाली सुविधाएं हैं। जिनमें एलिवेटेड मेट्रो, आईटीपी, फीडर-बे, पार्किंग, बस-बे शामिल हैं। इन सुविधाओं के लिए मेट्रो यात्रियों को कम से कम दो से तीन महीने का इंतजार करना पड़ेगा। यह वह सुविधाएं हैं, मेट्रो स्टेशन से यात्रियों की कनेक्टिविटी को जोड़ती हैं । मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि एम्स मेट्रो स्टेशन पर पार्किंग के लिए जगह मिल गई है। जबकि आरकेएमपी मेट्रो स्टेशन पर रेलवे स्टेशन की पार्किंग का उपयोग करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। इसी तरह एमपी नगर में भी विकल्प देखे जा रहे हैं। बस इन्हीं सुविधाओं के साथ शुरू होगी मेट्रो लोकार्पण के बाद भोपाल मेट्रो बस इन्हीं सुविधाओं के साथ शुरू होगी। इनमें लिफ्ट, एस्केलेटर, सीढ़ी, एआइ सीसीटीवी, अत्याधुनिक प्रणाली, कोच में स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम, मैनुअल टिकट, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित स्थान पर स्वचालित दरवाजे, कोच में आपातकालीन संपर्क और आपातकालीन द्वार, पुरुष, महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडरों के लिए शौचालय, यात्री सूचना प्रदर्शन प्रणाली, साइनेज, आडियो अनाउंसमेंट, कस्टममेर केयर सेंटर, साइकिल डेक, ड्राप आफ और पिक पाइंट की सुविधाओं के साथ मेट्रो शुरू होगी। बाहरी निर्माण कार्य दो माह तक चलते रहेंगे मेट्रो स्टेशनों के नीचे व आसपास चल रहे काम आगामी दो माह तक चलते रहेंगे। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इन कामों के चलते मेट्रो के परिचालन में कोई दिक्कत नहीं आएगी। सभी स्टेशनों की गत दिवस धुलाई और सफाई का काम करवाया गया है।   एक बार में 750 यात्री कर सकेंगे यात्रा एम्स से सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक एक बार में 750 यात्री मेट्रो में यात्रा कर सकेंगे। तीन कोच की इस ट्रेन के प्रत्येक कोच की क्षमता 250 यात्रियों की है। फिलहाल तीन कोच की एक मेट्रो ही अप-डाउन करेगी। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर दो से तीन मेट्रो चलाई जा सकती हैं। इसके लिए मेट्रो प्रशासन तैयार है।

धरती ने बदली तकदीर: पन्ना के किसान को मिला 3.39 कैरेट का हीरा, कीमत करोड़ों में पहुंच सकती है

पन्ना किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जो सब्र और लगन से काम करते हैं। लकवाग्रस्त किसान राजेन्द्र सिंह बुंदेला के साथ कुछ आज ऐसा ही हुआ है। वर्षों की मेहनत और आस्था का फल उन्हें कृष्णा कल्याणपुर पटी की उथली खदान में चमचमाते हुए 3.39 कैरेट के जैम्स क्वालिटी हीरे के रूप में मिला है। हीरे की क्या है कीमत? खजुराहो निवासी बुंदेला करीब डेढ़ साल पहले लकवे से पीड़ित हुए थे। ठीक होने के बाद, उन्होंने मेहनत न कर पाने के कारण हीरा कार्यालय से पट्टा बनवाकर खदान लगाई। ​इस हीरे की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी जा रही है।    पूरी राशि को हीरे की खोज में लगाएंगे राजेंद्र सिंह किसान बुंदेला इसे अपने ईष्ट भगवान जुगल किशोर जु की कृपा मानते हैं। उनका सपना है कि नीलामी से मिलने वाली पूरी राशि को वह फिर से हीरे की खोज में लगाएंगे ताकि हीरा कार्यालय में लगी बड़े हीरों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर दर्ज हो सके। यह उनके लिए महज शुरुआत है। बुंदेला का यह विश्वास और जिद्द उन्हें सफलता की नई राह पर ले जा रहा है। उन्होंने दोपहर करीब ढाई बजे इस हीरे को हीरा कार्यालय में जमा किया।

भोपाल मेट्रो बस से सस्ती पड़ेगी! फ्री ट्रायल के बाद कम किराया, जानें कैसे बनेगा यह सबसे किफायती विकल्प

भोपाल  भोपाल में बनने जा रही मेट्रो सिर्फ शहर की रफ्तार ही नहीं बढ़ाने वाली, बल्कि जेब पर भी हल्की पड़ने वाली है. ऐसा पहली बार हो सकता है कि एयर-कंडीशन्ड मेट्रो, शहर की बसों से भी सस्ती साबित हो जाए वो भी सिर्फ शुरुआती ऑफर में नहीं, बल्कि आने वाले महीनों तक. 21 दिसंबर से मेट्रो की यात्री सेवा शुरू होने जा रही है, और शुरुआत होगी एक हफ्ते के फ्री ट्रायल राइड्स के साथ. उसके बाद किराया धीरे-धीरे तीन हफ्तों में 25%, 50% और 75% तक बढ़ेगा. यानी शुरुआत में बेहद कम दाम और आगे भी जेब पर ज्यादा दबाव नहीं. अब बात बसों की BCLL का बस नेटवर्क पिछले दो साल से लगभग आधा ही चल रहा है. 220 बसें स्वीकृत हैं, लेकिन सड़क पर सिर्फ 50 से 90 के बीच ही दौड़ पा रही हैं. नतीजा ये है कि पूरे शहर का फीडर नेटवर्क कमजोर पड़ गया है और कई रूट सीधे-सीधे मेट्रो को सपोर्ट भी नहीं कर पा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई रूट पर डायरेक्ट बस ही नहीं मिलती जैसे सुभाष नगर से AIIMS भोपाल तक. TR-4B रूट तो सुभाष नगर डिपो से होकर जाता था, लेकिन करोंड रूट पर मेट्रो निर्माण की वजह से अब उसे डायवर्ट कर दिया गया है. बसें अब डिपो से गुजरती ही नहीं, बल्कि सीधे RoB पार करके बोर्ड ऑफिस/ISBT की तरफ चली जाती हैं. ऐसे में यात्रियों को बीच रास्ते में बस बदलनी पड़ती है, जिसका मतलब है दूसरा टिकट. अगर कोई यात्री AIIMS तक बस से जाना चाहे, तो लगभग 9 किमी की यात्रा में पहले 12 रुपये और फिर 9 रुपये देने पड़ते हैं यानी कुल 21 रुपये. इतना देकर भी पूरा सफर धीमा, भीड़भाड़ वाला और मौसम की मार झेलने वाला होगा. वहीं मेट्रो वही दूरी तेज़, स्मूथ और AC आराम में लगभग इतने ही या इससे कम किराये में तय करवा सकती है. यही वजह है कि मेट्रो लांच होते ही बस की तुलना में ज्यादा किफायती और प्रैक्टिकल विकल्प बनकर सामने आएगी. मेट्रो में अभी टोकन, बाद में कॉमन मोबिलिटी कार्ड शुरुआत में यात्रियों को फिजिकल टोकन लेने होंगे. स्टेशन में प्रवेश, कंकर्स पर टोकन लेना, सिक्योरिटी, रेल लेवल पर चढ़ना ये बेसिक प्रोसेस रहेगा. अभी स्मार्ट कार्ड या पास सिस्टम शुरू नहीं होगा. लेकिन जैसे ही मेट्रो का पूरा 16 किमी का करोंड AIIMS कॉरिडोर चालू होगा, कॉमन मोबिलिटी कार्ड लाया जाएगा. इससे मेट्रो और शहर की बस दोनों का किराया एक ही कार्ड से, कैशलेस तरीके से UPI से भी दे सकेंगे. MPMRCL जल्द ही किराया संरचना की आधिकारिक घोषणा करेगा, लेकिन फिलहाल संकेत हैं कि इंदौर मेट्रो की तरह 10 से 20 रुपये तक का किराया रखा जा सकता है. यात्रियों के लिए खास इंतज़ाम हर कोच में 4 सीटें महिलाओं के लिए और 2 सीटें दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित होंगी. यानी शुरुआत भले ही साधारण टोकन सिस्टम से हो, लेकिन आने वाले महीनों में भोपाल की मेट्रो यात्रा और भी स्मार्ट, तेज़ और सस्ती होने वाली है.

महाकालेश्वर मंदिर में ड्रेस कोड लागू, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए नया नियम प्रभावी

उज्जैन  उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में नए साल 2026 से एक बड़ा और व्यवस्था बदलने वाला नियम लागू हो गया है। मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि सभी पुजारी, पुरोहित और उनके प्रतिनिधियों को ड्रेस कोड का पालन करना होगा। उन्हें अपना आईडी प्रदर्शित करना होगा। यह नियम सुरक्षा, अनुशासन और उनकी स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने के लिए लागू किया जा रहा है। जानें क्यों उठाया ये कदम? बता दें कि पिछले कुछ समय से महाकाल मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। खासतौर पर त्यौहारों, विशेष अवसरों और सामान्य दिनों में भी उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ की वजह से कई बार सुरक्षा एजेंसी कर्मचारियों को पहचानना मुश्किल हो जाता था। कई बार गैर रजिस्टर्ड लोग भी खुद को मंदिर का सेवक या प्रतिनिधि बताकर मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर चुके हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए मंदिर समिति अब सख्त व्यवस्था लागू कर रही है। किस पर लागू होगा ये नया नियम ड्रेस कोड का ये नया नियम केवल मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों समेत उनके प्रतिनिधियों और मंदिर सेवकों के लिए ही लागू किया जा रहा है। -16 रजिस्टर्ड पुजारी – 22 पुरोहित – 45 प्रतिनिधि (इनमें एजेंट/सहयोगी भी शामिल) कैसी होगी ड्रेस मंदिर प्रशासन एक मानक पोशाक तय कर रहा है। जिसमें रंग, डिजाइन और पहनने का तरीका एकदम समान होगा। ताकि भीड़ में भी इन्हें तुरंत पहचाना जा सके। ये ड्रेस इनकी परम्परा से मेल खाती हो, इसका विशेष ध्यान रखते हुए ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। ID कार्ड भी अनिवार्य -आईडी कार्ड मंदिर प्रशासन की ओर से जारी किए जाएंगे -ताकि अधिकृत व्यक्तियों की पहचान आसान हो सके -फर्जी प्रतिनिधियों पर लगेगी रोक – सुरक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी कदम यहां करें महाकाल भस्म आरती के दर्शन जानें क्या कहती है मंदिर समिति? मामले में महाकालेश्वर उज्जैन मंदिर समिति सदस्यों का कहना है कि महाकाल मंदिर की गरिमा, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाने की तैयारी की है। नए साल में हर पुजारी, पुरोहित तय नियम में ही सेवा दे पाएगा। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी, 76 किमी लंबा फोरलेन और 42 जंक्शन से होगा विकास का नया युग

 खजुराहो बुंदेलखंड विश्व प्रसिद्ध खजुराहो की वास्तुकला, मंदिरों और मूर्तियों की नक्काशी के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। दूसरी ओर सिंचाई सुविधाओं, उद्योगों की कमी से रोजगार के अवसरों का भी अभाव है। अब बुंदेलखंड का वैभव और बढ़ेगा। युवाओं को रोजगार देने वाला बनेगा। बुंदेलखंड के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। सागर के मसवासी ग्रंट में औद्योगिक क्षेत्र को विशेष औद्योगिक पैकेज के तहत विकसित किया जाएगा। 24,240 करोड़ का संभावित निवेश आएगा। नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाया जाएगा। बुंदेलखंड वीरों-हीरों की धरती: सीएम छतरपुर. सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1857 करोड़ की 31वीं किस्त जारी की। योजना के तहत अब तक 46500 करोड़ रुपए बहनों के खातों में भेजे जा चुके हैं। लाड़ली बहना सम्मेलन राजनगर में हुआ। संबोधन में सीएम ने कहा, बुंदेलखंड हीरों और महावीरों की पवित्र धरती है। क्षेत्र की गरिमा और गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर – मसवासी ग्रंट में उद्योगों की स्थापना से 29 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। एक रुपए प्रति वर्गमीटर की दर पर निवेशकों को जमीन दी जाएगी। विकास शुल्क चुकाने के लिए 20 समान वार्षिक किस्तों की सुविधा मिलेगी। – सागर से दमोह के बीच फोरलेन पर 13 अंडरपास, तीन बड़े पुल, 9 मध्यम पुल, एक आरओबी, 13 बड़े जंक्शन और 42 मध्यम जंक्शन बनाए जाएंगे। -भू-अर्जन एवं अन्य कार्यों के लिए 323.41 करोड़ का भुगतान राज्य बजट से होगा। – एमपी के दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेज के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स कर्मी मिलेंगे। प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में 330 नियमित और 205 व्यक्तियों को आउटसोर्स पर रखा जाएगा। – दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना 165 करोड़ 6 लाख की होगी। 17 गांवों का 3600 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।

इंदौर में रियल एस्टेट में आया बड़ा उछाल, नवंबर में 43% अधिक रजिस्ट्री, पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन

इंदौर  मध्य प्रदेश का आर्थिक शहर इंदौर अब रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर जिले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में 43 प्रतिशत तक बढ़ गया। शहर के चारों उप पंजीयन कार्यालयों में यह तेजी साफ नजर आई, जिनमें सबसे ज्यादा उछाल इंदौर-4 में दर्ज किया गया। कुल मिलाकर अप्रेल से नवंबर 2025 तक जिले में पिछले साल की तुलना में 1091 रजिस्ट्रियां ज्यादा हुई हैं। नवंबर महीने में जिले में कुल 14,140 संपत्तियों का पंजीयन हुआ, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 9905 थीं। इसमें इंदौर-1 में पिछले साल की तुलना में 1262 अधिक रजिस्ट्रियां हुईं। इंदौर-2 में 822, इंदौर-3 में 934 और इंदौर-4 में रिकॉर्ड 1225 रजिस्ट्रियों का उछाल देखने को मिला। यह रुझान बताता है कि खरीदारों का भरोसा अब भी मजबूत है और बाजार की गति तेज होती जा रही है। इंदौर 2, 3 और 4 में खरीद-बिक्री बढ़ी अप्रेल से नवंबर की अवधि में जिले में कुल 1,12,588 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 1,11,497 थी। इंदौर-2, इंदौर-3 और इंदौर-4 क्षेत्रों में खरीद-बिक्री बढ़ी है, वहीं इंदौर-1 में कुछ गिरावट दर्ज की गई। बावजूद पूरे जिले में प्रॉपर्टी बाजार ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों ने बताई प्रॉपर्टी खरीद में तेजी की वजह इंदौर में प्रॉपर्टी खरीद में आई इस तेजी के कई कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में लगातार होती इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नए मार्गों और रिंग रोड के विस्तार, मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति और सुदृढ़ होती कनेक्टिविटी ने रियल एस्टेट को मजबूती दी है। प्रॉपर्टी बाजार बढ़ने के कई और भी कारण 1- रोजगार, स्टार्टअप और आइटी कंपनियों में तेजी शहर में आइटी पार्क, स्टार्टअप इकॉनमी और मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी ने युवाओं और प्रोफेशनल्स का आवागमन बढ़ाया है। इससे मकान, फ्लैट और कमर्शियल स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है। 2- लगातार विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर कॉरिडोर, रिंग रोड, बीआरटीएस, मेट्रो प्रोजेक्ट, नए फ्लाइओवर और कनेक्टिविटी में सुधार ने शहर को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। 3- सेफ और ग्रोथ-ओरिएंटेड सिटी की छवि स्वच्छता में लगातार देश का नंबर-1 शहर रहने से लोगों का विश्वास बढ़ा है। बाहर से आने वाले परिवार इंदौर में बसना पसंद कर रहे हैं, जिससे मकान और प्लॉट की खरीद बढ़ी है। 4- निवेशकों का भरोसा, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा शहर में प्रॉपर्टी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फिर भी मेट्रो शहरों की तुलना में सस्ती दरें मिलती हैं। यही कारण है कि लोग इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। 5- नई टाउनशिप, हाई-राइज और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की भरमार सुपर कॉरिडोर, पीथमपुर रोड, स्कीम नंबर 94, 114 और बायपास क्षेत्रों में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं। नई टाउनशिप्स की बढ़ती संख्या से लोगों को सुविधाजनक और प्रीमियम आवास विकल्प मिल रहे हैं।