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समाधान योजना से 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ: ऊर्जा मंत्री तोमर

समाधान योजना में 25 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं ने लिया लाभ : ऊर्जा मंत्री तोमर 31 मार्च तक एकमुश्त राशि जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि समाधान योजना में अब तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं में सरचार्ज में छूट का लाभ लिया है। उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के द्वितीय व अंतिम चरण को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पूर्व में यह योजना 28 फरवरी तक लागू थी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 3 नवम्बर को समाधान योजना 2025-26 की शुरुआत हुई थी। समाधान योजना में तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्ताओं को एकमुश्त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री तोमर ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि वे तीन माह से अधिक के बकाएदार हैं और योजना में अभी तक शामिल नहीं हो पाए वे अब 31 मार्च तक योजना में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। 420 करोड़ 93 लाख का सरचार्ज हुआ माफ मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अभी तक 25 लाख 75 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने इस योजना का लाभ लिया है। कुल 1231 करोड़ 68 लाख रूपये जमा किये गये हैं, जबकि 420 करोड़ 93 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 7 लाख 63 हजार बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 701 करोड़ 91 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 301 करोड़ 22 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 9 लाख 62 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 275 करोड़ 46 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 83 करोड़ 77 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 8 लाख 50 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लिया है। कंपनी के खाते में 254 करोड़ 31 लाख रूपये जमा हुए हैं, जबकि 35 करोड़ 94 लाख रूपये का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में एक मुश्त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी के पोर्टल पर पंजीयन करना है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखी जा सकती है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश नवीनीकरण के लिए 28 मार्च तक खुला रहेगा पोर्टल

स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश नवीनीकरण के लिए 28 मार्च तक खुला रहेगा प्रवेश पोर्टल स्नातक (द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष) तथा स्नातकोत्तर (तृतीय सेमेस्टर) के परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश नवीनीकरण के लिए विशेष अवसर भोपाल उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के विद्यार्थियों के व्यापक शैक्षणिक हितों एवं भविष्य की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, स्नातक (द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष) तथा स्नातकोत्तर (तृतीय सेमेस्टर) के परीक्षार्थियों के लिए प्रवेश नवीनीकरण (Admission Renewal) के लिए विशेष अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ दिवा मिश्रा ने बताया कि यह विशेष सुविधा उन विद्यार्थियों के लिए प्रदान की गई है, जो प्रवेश नवीनीकरण के लिए निर्धारित तिथि के उपरांत पूरक परीक्षा परिणामों की घोषणा के कारण नियत समय-सीमा में अपनी प्रवेश औपचारिकताएं पूर्ण करने से वंचित रह गए थे। प्रवेश पोर्टल को 28 मार्च 2026 तक सक्रिय (Activate) किया जा रहा है। संबंधित विद्यार्थी, इस विस्तारित अवधि का लाभ उठाकर अपने प्रवेश नवीनीकरण की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूर्ण करें। समस्त शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों के शेष पात्र विद्यार्थियों का त्वरित चिन्हांकन कर, उनका प्रवेश नवीनीकरण एवं शुल्क समय सीमा में जमा करवाना सुनिश्चित करें। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा सीमित अवधि के लिए ही उपलब्ध होगी, इसलिए सभी संबंधित विद्यार्थी एवं संस्थान निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करें, जिससे किसी भी विद्यार्थी की शैक्षणिक निरंतरता बाधित न हो।  

भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का विस्तार: आष्टा और सोनकच्छ तक, छह जिलों के 2500 गांव होंगे शामिल

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया की पहली रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल 12 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें सीहोर जिले का आष्टा और देवास जिले का सोनकच्छ इलाका भी शामिल होगा, जो भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाला बड़ा जंक्शन बनेगा। रिपोर्ट अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी गई है। वहीं इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा।  छह जिलों की 30 तहसीलें शामिल  भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों की कुल 30 तहसीलें और लगभग 2500 गांव शामिल किए जाएंगे। नर्मदापुरम जिले का सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें लिया गया है। इटारसी को इस एरिया में नहीं जोड़ा गया है। इसमें शामिल प्रमुख तहसीलें और इलाके में बैरसिया, हुजूर, कोलार, आष्टा, बुधनी, दोराहा, इछावर, जावर, रेहटी, सीहोर, श्यामपुर, गोहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर, ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचौर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया, गुलाबगंज, विदिशा, डोलरिया, होशंगाबाद, माखन नगर आदि शामिल हैं।  इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया भी बढ़ेगा इंदौर विकास प्राधिकरण ने पहले सर्वे में 39 शहरों और 1786 गांवों को मिलाकर 9989 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल बताया था। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब इसमें और इलाके जोड़े जा रहे हैं। नया क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। यह फायदा होगा दोनों शहरों की बड़ी परियोजनाएं अब मिलकर बनाई जाएंगी। शहरों को जोड़ने, सड़क-बिजली-नल-पानी जैसी सुविधाएं देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण या विभागों के बीच तकरार जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। केंद्र सरकार बड़े शहरों के विकास के लिए अलग से पैकेज देगी। ट्रिलियन प्लस आबादी वाले शहरों को विशेष फंड मिलेगा। दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को भी 5-5 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मिलेगी। 6 माह में तैयार होगी रिपोर्ट  बीडीए ने सभी शामिल इलाकों की पूरी जानकारी मांगी है। कृषि, राजस्व, परिवहन, लोक निर्माण, उद्योग, पर्यटन, जल संसाधन समेत कई विभागों से जनसंख्या, उद्योग, लोगों की आय और रोजगार संबंधी आंकड़े मांगे गए हैं। रिपोर्ट तैयार करने में 6 महीने और लग सकते हैं। इसके बाद विस्तृत प्लानिंग शुरू होगी। इस फैसले से भोपाल-इंदौर क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हो जाएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

CM योगी का बयान: घबराहट में सिलेंडर-ईंधन न खरीदें, अफवाहों से बचें, सप्लाई पूरी तरह सामान्य

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोग बेवजह घबराकर रसोई गैस और ईंधन के लिए लाइन में लग रहे हैं, जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले एक गैस सिलेंडर एक महीने तक चलता था, लेकिन अब लोग 5-6 दिन में ही नया सिलेंडर लेने पहुंच रहे हैं, जो सही नहीं है।  उन्होंने साफ किया कि सरकार ने प्रदेश में व्यवस्था बनाई है कि गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी पहले की तरह जारी रहेगी. जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि एजेंसियां लोगों के घर तक सिलेंडर पहुंचाएं, इसलिए लाइन लगाने की जरूरत नहीं है।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग अफवाह फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और अव्यवस्था पैदा करना चाहते हैं. ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है और अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब जरूरत हो तभी पेट्रोल और डीजल लेने जाएं, अनावश्यक खरीदारी से स्थिति बिगड़ती है।  उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में, खासकर मध्य पूर्व में युद्ध और अस्थिरता का माहौल है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो इसका असर हर व्यक्ति पर पड़ सकता है, इसलिए लोगों को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौती के समय सरकार के साथ मिलकर चलना ही सच्ची राष्ट्र भक्ति है और देशहित में लिए गए फैसलों का समर्थन करना चाहिए।  बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने साथ मिलकर ईरान पर हमला किया था. इस हमले में ईरान के टॉप लीडरशिप की मौत हो गई. इसके बाद बड़े स्तर पर पश्चिम एशिया में जंग छिड़ गई. ईरान ने होर्मुज के रास्ते को बंद कर दिया. नतीजतन दुनिया के कई मुल्कों में ऊर्जा संकट गहरा गया. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित एशिया के मुल्क हो रहे हैं।   

भोपाल में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रियों में तेजी, सात दिनों में 4,399 रजिस्ट्रियां, 96.61 करोड़ रुपये का कारोबार

भोपाल  जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 में 740 स्थानों पर प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि होना लगभग तय है। इसका प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति ने केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया है, जिस पर गुरुवार को बैठक भी आयोजित की गई है। ऐसे में प्रॉपर्टी की दरों में वृद्धि का असर प्रॉपर्टी के कारोबार में दिखाई देने लगा है। नवरात्र के शुभ मुहूर्त और वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिनों में पंजीयन कार्यालयों में जमकर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। जानकारी के अनुसार आईएसबीटी, परी बाजार और बैरसिया में स्थित पंजीयन कार्यालयों में सुबह 10 से देर रात तक दस्तावेज रजिस्टर्ड करने का काम तेजी से किया जा रहा है। 19 मार्च से शुरू हुए नवरात्र के साथ अब तक सात दिन में करीब चार हजार 399 रिकॉर्ड रजिस्ट्रियां हुई हैं, जिनसे लगभग 96.61 करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को प्राप्त हुआ है। कार्यालयों में बुधवार को भी बड़ी संख्या में लोग जमीन, मकान, प्लॉट और रीसेल प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने पहुंचे। सुबह से शुरू हुआ काम रात करीब आठ बजे तक चलता रहा, इस दौरान एक दिन में रिकॉर्ड 820 रजिस्ट्रियों के साथ 19.23 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रॉपर्टी के खरीदारों की संख्या बढ़ते देख विभाग ने कार्यालय का समय बढ़ाते हुए सात बजे कर दिया है और प्रति सब रजिस्ट्रार को 65 स्लॉट कर दिए हैं। ऐसे में अब एक दिन में 13 सब रजिस्ट्रार 800 रजिस्ट्रियां कर सकेंगे। 31 मार्च तक जारी रहेगा रजिस्ट्रियों का सिलसिला वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास पहुंच चुका है। बोर्ड प्रस्ताव को पास कर देता है तो जिले के 740 स्थानों पर औसत 12 प्रतिशत वृद्धि होगी। वहीं अनेक स्थान ऐसे हैं जहां पर 30 प्रतिशत से लेकर 150 प्रतिशत तक प्रापर्टी की दरें बढ़ जाएंगी। ऐसे में वर्तमान दरों पर रजिस्ट्री करवाने के लिए 31 मार्च तक रजिस्ट्रियों का सिलसिला जारी रहेगा। सात दिन में हुईं रजिस्ट्रियां और राजस्व दिन रजिस्ट्री राजस्व गुरुवार65307 शुक्रवार5925.54 शनिवार3172.50 रविवार377 09 सोमवार58541 मंगलवार 67812.40 बुधवार82019.23 कुल 4,39996.61 (नोट- राशि करोड़ों रुपये में) संपदा टू सॉफ्टवेयर से मिल रही रफ्तार वरिष्ठ जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा ने बताया कि संपदा टू सॉफ्टवेयर बेहतर तरीके से काम कर रहा है। सब रजिस्ट्रार तय समय पर लोगों की रजिस्ट्रियां कर रहे हैं, ऐसे में प्रति आधा घंटे में एक दर्जन रजिस्ट्रियां की जा रही हैं। इसके जरिए लोग आसानी से स्लॉट भी बुक कर पा रहे हैं।

एमपी में 7 दिन में व्हाट्सएप पर बर्थ सर्टिफिकेट, नया डिजिटल मॉडल होगा फायदेमंद

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार अब आम लोगों को बड़ी सुविधा देने जा रही है। बचपन से लेकर स्कूल, नौकरी और सरकारी कार्यों तक के लिए जरूरी माना जाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है जन्म प्रमाण पत्र। जिसे लेने के लिए बच्चों के माता पिता या अन्य परिजनों को कई बार लगातार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। यहां तक कि लंबी लाइन में इंतजार भी करना होता है। लेकिन अब इस पूरी झंझट को खत्म करने और इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार यह नई सुविधा करने जा रही है। इसके तहत अब 7 दिन में आपके व्हाट्सएप (Whatsapp) मोबाइल नंबर पर बच्चे का जन्मप्रमाण पत्र (Birth Certificate) आ जाएगा। प्रदेश भर में लागू होगा नया डिजिटल मॉडल यह नया डिजिटल मॉडल (MP New Digital Model) प्रदेश भर में लागू करने की तैयारी है। मॉडल लागू होते ही करोड़ों परिवार इसका लाभ ले सकेंगे। इन्हें घर बैठे ही अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र मिल जाएगा। वह भी केवल 7 दिन में बता दें कि वर्तमान में यह सुविधा (Whatsapp) केवल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ही चल रही है। वहां इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अब सरकार ने इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू करने का फैसला लिया है। क्या होंगे फायदे? -जन्म प्रमाण पत्र बनाने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी। -परिजनों को अस्पताल जाकर बार-बार फॉलो-अप करने या लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पडे़गी। -जन्म के 7 दिन के अंदर प्रमाण पत्र वॉट्सएप पर ही उपलब्ध हो जाएगा। -यह प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी। सबसे ज्यादा राहत इन्हें इस नये डिजिटल मॉडल की पहल (Birth Certificate on whatsapp) से खासकर नवजात शिशु के माता-पिता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। क्यों कि अभी तक जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए इन्हें कई बार अस्पताल जाना पड़ता था और प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। नया मॉडल इस परेशानी को पूरी तरह खत्म कर देगा। डिजिटल इंडिया की ओर एक और महत्वपूर्ण कदम सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया में एक और महत्वपूर्ण प्रयास है। नया मॉडल लागू होने के बाद मध्य प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया और अधिक सुगम और आसान हो जाएगी।

बड़े तालाब में अतिक्रमण का खुलासा, 300 से ज्यादा बंगलों और होटलों पर लाल निशान, कार्रवाई जल्द

 भोपाल  शहर की लाइफ लाइन बड़े तालाब की सीमाओं को चिह्नित करने के लिए पिछले महीने सीमांकन की कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके तहत संत हिरदाराम नगर और टीटीनगर वृत्त के राजस्व अमले ने सीमांकन करते हुए एफटीएल से 50 मीटर दायरे में कोठी, बंगले, फार्म हाउस, होटल सहित 300 से अधिक निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इन सभी पर राजस्व अमले ने लाल निशान लगाकर निर्माणकर्ताओं को नोटिस देकर दस्तावेज पेश करने का समय तक दिया था। इसको लेकर तहसीलदारों ने अतिक्रमणों की रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही एसडीएम द्वारा कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ही इन पर बुलडोजर चलाने का फैसला लिया जाएगा। सोमवार को हुई समय सीमा बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बड़े तालाब की सीमा में हुए अतिक्रमणों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। जानकारी के अनुसार, संत हिरदराम नगर वृत्त के राजस्व अमले ने टीएंडसीपी, नगर निगम व वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में 25 फरवरी से वीआईपी रोड पर सीमांकन शुरू करवाया था। इस दौरान वीआइपी रोड पर शासकीय बंगला, निजी इमारत, कोचिंग सेंटर, खानूगांव में मैरिज गार्डन, लान, झुग्गी, आर्मी का खेल परिसर, डेयरी, हलालपुर में मैरिज गार्डन, स्टील फैक्ट्री, बोरवन, बेहटा सहित अन्य में करीब 150 झुग्गियां 50 मीटर दायरे में चिह्नित की गई थी। इसी तरह टीटीनगर वृत्त के राजस्व अमले ने प्रेमपुरा, सूरज नगर, गौरा, सेवनियां गौड़, बिशनखेड़ी सहित अन्य क्षेत्र में बड़े तालाब की सीमाओं को चिह्नित करने सीमांकन कराया गया था। इस दौरान आलीशान कोठी, बंगले, फार्म हाउस, होटल, रेस्टोरेंट सहित 100 से अधिक निर्माण मिले थे। दोनों ही वृत्त के तहसीलदारों ने चिह्नित निर्माण के आधार पर नाम सहित रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें निजी व शासकीय दोनों ही भूमि 50 मीटर दायरे में स्थित हैं। अब दस्तावेज के आधार पर किया जाएगा फैसला तहसीलदारों ने दोनों वृत्त की रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम को सौंप दी है, अब जल्द ही कलेक्टर के साथ होने वाली बैठक में वह रिपोर्ट पेश करेंगे। सभी निर्माणकर्ताओं को दस्तावेज पेश करने का समय दिया था, लेकिन अधिकांश ने अनुमति संबंधी दस्तावेज नहीं दिए हैं। ऐसे में जल्द ही जिला प्रशासन, नगर निगम के साथ मिलकर अतिक्रमणों को तोड़ने की बड़ी कार्रवाई कर सकता है।     बड़े तालाब के एफटीएल से 50 मीटर दायरे में सीमांकन की कार्रवाई लगभग पूरी हो चुकी है। राजस्व अमले ने अतिक्रमण चिह्नित किए हैं, जिनके निर्माण हैं उन्हें दस्तावेज पेश करने का समय दिया गया था। अब जल्द ही अतिक्रमण हटाने और तालाब को संरक्षित करने की कार्रवाई की जाएगी। कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे बनेगा कोटा-इटावा के बीच, NHAI 3 जिलों की जमीन लेकर देगा दो गुना पैसा

 भोपाल  कोटा से इटावा के बीच 404 कि.मी लंबे अटल प्रोग्रेस-वे अब पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाने की योजना है। राज्य शासन से संकेत मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (NHAI) ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित 90 गांवों की पूर्व में चिह्नित की गई जमीन का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांव भी इसमें शामिल हैं, जिनके सत्यापन होना है। तीन साल पहले चिन्हित की गई जमीनों का दोबारा सत्यापन कराने के पीछे कारण ये है कि, इस गैप के दौरान किसानों ने अधिग्रहण के लिए चिह्नित जमीनों को कहीं बेच तो नहीं दिया। सत्यापन के बाद जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों के नाम उनके गांव और रकबा प्रकाशित किया जाएगा। दावे-आपत्ति पूरी होते ही खातों ट्रांसफर होगा पैसा दावे-आपत्ति के बाद किसानों के बैंक खातों में उनसे ली गई जमीन का पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा। अटल प्रोग्रेस-वे का पुराना रूट अलाइनमेंट 90 गांव से होकर गुजरेगा। इसमें सबलगढ़ के 11 गांव, जौरा के 29 गांव, मुरैना के 15 गांव, अंबाह के 10 गांव, पोरसा के 25 गांव की जमीन शामिल हैं। नए रूट अलाइनमेंट के विरोध के बाद रोकी गई थी कार्रवाई 6 साल पहले 2020 में जब इस प्रोजेक्ट का सर्वे किया गया तो किसानों की जमीन का अधिग्रहण किए जाने के लिए उनकी सूची तैयार की गई थी। भूमि अधिग्रहण होता उससे पहले केंद्र सरकार ने अटल प्रोग्रेस-वे का रूट अलाइनमेंट चेंड कर दिया। लेकिन, नए रूट अलाइनमेंट के बाद किसानों में असंतोष दिखने लगा, क्योंकि नए रूट अलाइनमेंट में किसानों की ज्यादा जमीनें जा रही थी। इस दौरान सबलगढ़ से पोरसा के बीच किसानों में कड़ा विरोध भी देखने को मिला, जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई अप्रैल 2023 में तत्काल प्रभाव से रुकवा दी। 3 साल बाद धरातल पर आया प्रोजेक्ट इसके बाद 3 साल ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन अब एक बार फिर ये धरातल पर आया है। केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 हजार 645 करोड़ रुपए लागत के अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराने के आदेश दिए हैं। कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा मिलेगा इसमें अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण किसानों को उनकी जमीन लेने के बदले कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देगा। पुराने रूट अलाइनमेंट में कम जाएगी किसानों की जमीन अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराए जाने की दशा में 90 गांव के 2089 किसानों की महज 488.01 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। 450 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन बची वहीं, अगर नए रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण होता तो 96 गांव के 14137 किसानों की 935.3 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जाती। अंतर साफ स्पष्ट है कि पुराने रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे बनाने से 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से अधिक जमीन बच रही है, जो आजीवन उनकी केती के इस्तेमाल में आती रहेगी। फिर सड़कों पर उतरेंगे किसान अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर मप्र किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा देने के आदेश मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से करने चाहिए। किसान दो गुना मुआवजा में तो अपनी जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए कतई नहीं देंगे। आंदोलन पहले भी हुआ था और अब फिर से सड़कों पर उतरेंगे किसान। मध्य प्रदेश में एंट्री श्योपुर से होगी कोटा से 78 किलोमीटर दूरी के बाद प्रोग्रेस-वे की श्योपुर से प्रदेश में एंट्री होगी। श्योपुर के 48 गांव से ये हाइवे गुजरेगा। यहां के छीताखेड़ी, जालेरा, जुवाड़, सिरसोद, जैनी समेत 26 गांव ऐसे हैं, जो कि बीहड़ क्षेत्र में मौजूद हैं या उससे बिल्कुल सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों में अच्छे पहुंच मार्ग भी अभी नहीं हैं। 43 गांव चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं श्योपुर के बाद मुरैना के सबलगढ़, जौरा, मुरैना, अंबाह, पोरसा से होते हुए 90 गांव से ये हाईवे जुड़ेगा। जिनमें 43 गांव ऐसे हैं जो कि चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं या उसमें ही मौजूद हैं। यहां गढुला, बंथर, अटार, गरजा, डंडोली, गूंज, रछेड़, धोर्रा समेत अन्य गांव बीहड़ के कारण विकास की मुख्य धारा से आज भी पिछड़े हुए हैं। पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा मुरैना के पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा। यहां के 25 गांव से होते हुए इसे उप्र के इटावा से जोड़ा जाएगा। शुरुआत में प्रोग्रेस वे भिंड शहर से सटे बरही और रानीपुरा गांव से गुजरेगा। इसके बाद अटेर क्षेत्र के 23 गांव से प्रोग्रेस-वे गुजरना है। भिंड के 13 गांव ऐसे हैं जो बीहड़ में मौजूद हैं या उससे सटे हुए। 3 राज्यों को कवर कर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से मिलेगा अटल प्रोग्रेस-वे अटल प्रोग्रेस-वे को राजस्थान से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक ले जाया जाएगा। 404 किलोमीटर लंबा ये प्रोग्रेस वे राजस्थान में कोटा के सीमाल्या गांव से शुरू होगा और फिर श्योपुर, मुरैना से भिंड होते हुए इटावा तक पहुंचेगा। वहां इटावा के ननवा गांव से प्रोग्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। पूरे मार्ग में करीब 150 गांव प्रोग्रेस-वे से कवर होंगे और इमनें से 85 गांव ऐसे हैं जो चंबल के बीहड़ कहलाते हैं या उन बीहड़ों से सटे हैं।

क्या नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने वाले हैं? ताबड़तोड़ परियोजनाओं के उद्घाटन के बीच खरमास का इंतजार

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं, लेकिन सीएम पद की कुर्सी नहीं छोड़ी है. दो दशकों से सत्ता की बागडोर संभाल रहे नीतीश ने  केंद्र की राजनीति में लौटने का फैसला किया है और राज्यसभा जा रहे हों, लेकिन बिहार में अपनी सियासी पकड़ को कमजोर नहीं होने देना चाहते. ऐसे में नीतीश बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा कर रहे और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे हैं।   नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पूरी तरह से एक्टिव रहने के चलते सवाल यही है कि मुख्यमत्री पद कब छोड़ेंगे? क्या खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं? मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होना. बिहार के नए सीएम को लेकर बीजेपी के कई नामों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन सबके मन में एक ही सवाल है कि नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे? उसके बाद ही मुख्यमंत्री और सरकार गठन की असल तस्वीर साफ हो सकेगी?  नीतीश कुमार 21 साल बाद दिल्ली करेंगे कूच नीतीश कुमार अपने राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं, 21 साल पहले सांसद रहते हुए बिहार के मुख्यमंत्री बने थे और फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत को राजनीतिक पारी शुरू कराने के साथ ही बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के व्यापक दौरे कर विकास परियोजनाओं का लगातार उद्घाटन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य सीधे जनता से संवाद स्थापित करना और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करना है।  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का फैसला किया और सदस्य चुन लिए भी गए हैं. इसके बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं और बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी छोड़ेंगे, चर्चा है कि नीतीश एक साथ बिहार की राजनीति नहीं छोड़ेंगे, बल्कि दो किस्तों में इस्तीफा देंगे।   नीतीश अभी मुख्यमंत्री होने के साथ ही बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. वे राज्यसभा सदस्य भी चुन लिए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी नहीं छोड़ा. ऐसे में सवाल यही है कि कब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।  नीतीश कुमार कब देंगे सीएम पद से इस्तीफा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2)के तहत प्रावधान है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में एक ही सदन का सदस्य रह सकता है. संसद के लोकसभा, राज्यसभा और राज्य के विधानमंडल के विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य एक साथ नहीं सकता है.अगर ऐसा होता है तो उसे एक निश्चित समयसीमा के अंदर एक सदन से त्यागपत्र देना होगा. समयसीमा का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियम से तय होगा।  प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 में तय की गई है. इस नियम के तहत दो सदनों के सदस्य निर्वाचित होने की स्थिति में व्यक्ति को 14 दिनों के अंदर अपना पद छोड़ना होगा. चुनाव नतीजों के परिणाम के केंद्रीय या राज्य गजट में प्रकाशन की तारीख से से समय तय होता है. निर्वाचन की तारीख और गजट का प्रकाशन का समय अलग-अलग होता है।  नियम कहता है कि कोई भी व्यक्ति गजट नोटिफिकेशन के 14 दिनों के अंदर इस्तीफा देने के लिए बाध्य होता है, न कि निर्वाचन की तारीख से. राज्यसभा चुनाव के परिणामों का गजट प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, ऐसे में नीतीश कुमार पर विधान परिषद की सदस्यता त्यागने की बाध्यता फिलहाल नहीं है. इसके चलते नीतीश कुमार विधान परिषद सदस्य के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य हैं. इसके चलते मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं।   नीतीश कुमार ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव जीता था. इसीलिए कहा जा रहा है कि नीतीश 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता नहीं छोड़ते हैं, तो संसद के उच्च सदन के सदस्य नहीं बन पाएंगे. इसलिए उनका एमएलसी पद से इस्तीफा की बात कही जा रही थी, लेकिन अभी तक गजट ही जारी नहीं हुआ है तो वो एक साथ दोनों पद पर बने हुए हैं।  खरमास के बाद क्या छोड़ें सीएम की कुर्सी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद न छोड़ने की पीछे कहीं खरमास वजह तो नहीं है, जिसके चलते वो किसी नए सफर की तरफ अपने कदम नहीं बढ़ा रहे. खरमास का महीना 13 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इसके बाद 14 अप्रैल की सुबह से सभी मांगलिक और शुभ कार्य किए जा सकेंगे. बीजेपी नया और शुभ काम खरमास के महीने में नहीं करती है. नीतीश कुमार के इस्तीफा देने के बाद बीजेपी को फौरन अपने किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाना है, जिसके चलते ही खरमास खत्म होने का इतंजार किया जा रहा है।  बिहार के पांच राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है, जिनकी सीटों पर 16 मार्च को चुनाव हुए हैं और नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं. इसके चलते ही माना जा रहा है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से खरमास खत्म होने के साथ ही इस्तीफा दे देंगे ताकि दूसरे दिन बीजेपी बिहार में सरकार गठन कर लगे।  बिहार में सरकार गठन का क्या होगा फॉर्मूला नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बीजेपी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती है तो पहली बार होगा जब बीजेपी का अपना सीएम होगा. बीजेपी से कई नेताओं के नाम सीएम की रेस में चल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी नाम पर फाइनल मुहर नहीं लगी है. सम्राट चौधरी से लेकर नित्यानंद राय तक के नाम चर्चा में है. देखना है कि बीजेपी किसे सीएम बनाती है।  बिहार में बीजेपी का सीएम बनता है तो फिर जेडीयू से बिहार में डिप्टी सीएम पद मिलेगा. सियासी गलियारे में ऐसी चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके अलावा पार्टी के किसी सीनियर लीडर को दूसरा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा है. बीजेपी से 15 और जेडीयू से 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 

किसानों से अपील : भूमि धारिता एवं पात्रता अनुसार ही उर्वरक का करें भंडारण, ताकि सभी किसान हो सकें लाभान्वित

रायपुर कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा है कि राज्य सरकार ने आगामी खरीफ सीजन के लिए रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस तरह की जानकारी संज्ञान में आ रही है कि फास्फेटिक उर्वरक के प्रमुख स्रोत डी.ए.पी. का अनियमित उठाव कृषक भाइयों द्वारा किया जा रहा है, जिससे अन्य कृषकों में प्रतिकूल वातावरण निर्मित होने की संभावना है।  केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा समन्वय से किये जा रहे प्रयासों से राज्य के कृषकों का हित संरक्षण सुनिश्चित किया गया है। कृषक भाइयों से अनुरोध है कि भूमि धारिता एवं पात्रता अनुसार ही उर्वरकों का भंडारण करें ताकि समस्त कृषक अग्रिम भंडारण की योजना से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने बताया कि वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए सरकार ने किसानों को शत-प्रतिशत पहचान पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि उर्वरकों की कालाबाजारी रुक सके और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचे। मंत्री  नेताम ने यह भी कहा कि खरीफ मौसम में उर्वरकों का वितरण एग्रीस्टेक पोर्टल में दर्ज रकबे के आधार पर होगा। यदि इसमें किसी प्रकार की त्रुटि पायी जाती है तो अन्य कृषकों को पर्याप्त उपलब्धता के दृष्टिगत समस्त वैधानिक कार्यवाईयां सुनिश्चित करने के लिए शासन सजग है।  उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आवश्यक होने पर वैकल्पिक पौध पोषण स्रोतों की व्यवस्था के लिए आकस्मिक कार्य योजना भी तैयार कर ली गई है, ताकि पौध पोषण में किसी प्रकार की कमी ना हो। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा राज्य के लिए चिन्हित “नील हरित काई” के मदर कल्चर के उत्पादन की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है तथा माह अप्रैल से इसका वृहद उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्रों, शासकीय उद्यान रोपणियों एवं शासकीय  कृषि प्रक्षेत्रों में किया जाएगा।  उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में ज्यादा से ज्यादा कृषकों को इसका कल्चर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कृषक इनका उपयोग कर वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर कर यूरिया के समरूप पोषक तत्व पौधों को उपलब्ध करा सकें। इसके अलावा, हरी खाद के रूप में वर्गीकृत ढेंचा तथा अन्य दलहनी फसलों के कृषक प्रक्षेत्र में अनुप्रयोग को बढ़ावा देने आवश्यक राशि की व्यवस्था मंडी निधि से की जा रही है। इस हेतु समस्त जिलों को कृषक एवं क्षेत्र चयन के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री  नेताम ने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों के अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर विक्रय तथा समस्त अन्य गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु उड़न दस्ता तथा निरीक्षकों की नियुक्ति संबंधी आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। नैनो उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता भी प्रदेश में होगी ताकि न्यूनतम कास्त लागत पर प्रति इकाई अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। नैनो उर्वरक के प्रभावी उपयोग के संबंध में कृषकों को जागरूक करने एवं प्रशिक्षण हेतु सघन अभियान चलाया जाएगा।  कृषि मंत्री  नेताम ने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़, भारत के कृषि परिदृश्य में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, जहाँ धान खरीदी और किसान कल्याण की योजनाओं ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विगत तीन वर्षों के धान खरीदी के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने न केवल धान खरीदी के अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का देश में सबसे अधिक मूल्य सुनिश्चित कर एक मिसाल पेश की है। खरीफ सीजन 2025-26 में 142 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी को मिलाते हुए पिछले तीन खरीफ सीजन में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार ने लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जिससे किसानों के खाते में लगभग 1 लाख 40 हजार करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है।  गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे संकट के बीच प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए केन्द्र और राज्य सरकार अलर्ट मोड पर काम कर रही है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर निरंतर उच्चस्तरीय बैठक भी की जा रही है। केन्द्र और राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है, कि किसानों को खाद-बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता के लिए किसी प्रकार से दिक्कत की सामना न करना पड़े।