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MP में भी लागू होगा ‘SIR’ अभियान: चुनाव आयोग की निगरानी में 5.75 लाख वोटर संदेह के घेरे में

रीवा निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम  की शुरुआत हो गई है। इसमें 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाताओं का मिलान किया जाएगा। जिन मतदाताओं के माता-पिता के नाम उस समय की वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं थे, उनका सत्यापन किया जाएगा और उनसे जरूरी दस्तावेज मांगे जाएंगे। रीवा और मऊगंज जिले की प्रारंभिक रिपोर्ट आयोग को भेज दी गई है। कुल 5,72,250 मतदाता इस जांच के दायरे में आएंगे। घर-घर जाकर होगी जांच निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 2014 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) डोर-टू-डोर सर्वे करेंगे। रीवा जिले में 1463 और मऊगंज जिले में 518 पोलिंग बूथ शामिल हैं। 1200 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केन्द्रों को विभाजित किया जा रहा है, जिससे दोनों जिलों में करीब 350 नए बूथ बढ़ जाएंगे। कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे जिन परिवारों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें अपना नाम लिस्ट में बनाए रखने के लिए 2–3 दस्तावेज देने होंगे। जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें पिता से संबंध प्रमाणपत्र के साथ कोई एक मान्य दस्तावेज देना होगा। इसके लिए आपको पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार पत्र, जाति प्रमाणपत्र (OBC/SC/ST), आधार कार्ड, पारिवारिक रजिस्टर, जन्म प्रमाणपत्र, बैंक या सरकारी पहचान पत्र, भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र, पेंशन आदेश आदि देना होगा। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में बढ़े मतदाता? आयोग को भेजी रिपोर्ट के अनुसार शहरी रीवा विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 11,239 कम हुई है। वहीं ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता तेजी से बढ़े हैं जैसे…     त्योंथर: +37,287     मनगवां: +93,659     गुढ़: +50,605     सिरमौर: +36,321     मऊगंज: +59,468     देवतालाब: +78,308     2008 में अस्तित्व में आई सेमरिया विधानसभा में अब 2,27,841 मतदाता हैं। BLO का काम हुआ और कठिन पुनरीक्षण कार्य से बूथ लेवल ऑफिसरों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वर्तमान में वे नगरीय निकायों की वोटर लिस्ट तैयार करने में भी लगे हैं, जिससे शिक्षक BLOs का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। जल्द ही आयोग की ओर से डोर-टू-डोर सर्वे की विस्तृत कार्ययोजना जारी की जाएगी। जिला उप निर्वाचन अधिकारी सुधीर बेक का बयान निर्वाचक नामावली के गहन पुनरीक्षण में 2003 की सूची से संबंधित मतदाताओं एवं उनके माता-पिता के नामों का मिलान किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी आयोग को भेज दी गई है, आगे के निर्देशानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी।  

चिराग को सीटें तो मिलीं, लेकिन क्या पसंदीदा इलाके भी मिलेंगे? NDA में खींचतान तय!

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में रविवार को सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया गया है. बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर-बराबर सीटों पर लड़ने का फॉर्मूला तय हुआ है, तो चिराग पासवान की मन की मुराद पूरी हो गई है. चिराग की पार्टी एलजेपी (आर) को 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान को एनडीए में मन के मुताबिक सीटों की संख्या तो मिली, लेकिन क्या पसंदीदा सीटें भी मिल पाएंगी? एनडीए में अभी यह पूरी तरह से तय नहीं हुआ है कि एलजेपी किन 29 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. 2020 के चुनाव में चिराग एनडीए का हिस्सा नहीं थे, उस समय जेडीयू 115 सीट पर चुनाव लड़ी थी और बीजेपी ने 110 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. जेडीयू और बीजेपी चिराग को सीटें देने के लिए कम सीटों पर लड़ने को राज़ी हो गई हैं, लेकिन असली मामला अब उन सीटों पर फंसा है, जहां पर जेडीयू, बीजेपी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का कब्ज़ा है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू और बीजेपी दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. बाकी सीटें छोटे सहयोगी दलों को दी गई हैं. इनमें सबसे ज़्यादा फ़ायदा चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) को हुआ. एनडीए में चिराग की पार्टी को 29 सीटें मिली हैं. चिराग की पार्टी लगातार 30 से 35 सीटें मांग रही थी और उसी लिहाज़ से उसे 29 सीटें मिली हैं. चिराग पासवान का एनडीए में बढ़ता क़द अब किसी से छिपा नहीं है. बिहार की राजनीति में उन्हें अब 'किंगमेकर' के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल ये है कि चिराग पासवान में ऐसी क्या ख़ास बात है कि बीजेपी और जेडीयू दोनों अपनी सीटों का नुक़सान उठाकर भी उन्हें ज़्यादा महत्व देने का काम किया है.  चिराग को पसंदीदा सीटें भी मिलेंगी? एनडीए में सीट शेयरिंग के मामले में चिराग पासवान 30-35 सीटों पर दावेदारी कर रहे थे, लेकिन बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के दख़ल के बाद चिराग पासवान 29 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हुए हैं. इसका ऐलान भी रविवार को केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कर दिया, ऐसे में मामला उन सीटों पर फंस सकता है, जहां पर बीजेपी और जेडीयू ने 2020 में कब्ज़ा जमाया था. चिराग पासवान ने जिन 29 सीटों पर चुनाव लड़ने का अभी तक प्लान बनाया है, उनमें से कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर जेडीयू और बीजेपी का कब्ज़ा है. बीजेपी और जेडीयू क्या अपनी जीती हुई सीटें एलजेपी के लिए छोड़ने को तैयार होंगी? जेडीयू ने जिस तरह से पिछले चुनाव में सीटें जीती थीं, उनमें से छोड़ना उसके लिए आसान नहीं है. माना जा रहा है कि एलजेपी की दावे वाली चार सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है तो तीन सीटों पर जेडीयू के विधायक हैं. इसके अलावा एक सीट पर जीतनराम मांझी की पार्टी का कब्ज़ा है. चिराग का बढ़ता सियासी क़द चिराग पासवान अपने पिता और बिहार के दिग्गज दलित नेता राम विलास पासवान की सियासी विरासत को संभाल रहे हैं. राम विलास पासवान का बिहार में गहरी जड़ें वाला दलित वोट बैंक था. दलितों में ख़ासकर दुसाध समुदाय में है, यह समुदाय राज्य में एक बड़ा जनसमूह है. एनडीए के लिए इनका साथ जीत में बड़ी भूमिका निभा सकता है.  2020 में चिराग पासवान की पार्टी एनडीए से बाहर रहकर 135 सीटों पर लड़ी थी और सिर्फ़ 1 सीट जीत पाई थी. चिराग पासवान भले ही सीटें जीतने में सफल नहीं रहे, लेकिन एनडीए से बाहर जाकर लड़ने पर नीतीश कुमार की पार्टी को गहरा झटका दिया था. एनडीए में पहली बार बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.  2025 के विधानसभा चुनाव में चिराग को लेकर 2020 से बिल्कुल अलग रणनीति है। चिराग की पार्टी एनडीए के साथ ही चुनाव लड़ रही है. गठबंधन में उन्हें लड़ने के लिए 29 सीटें मिली हैं, जिस पर वह ख़ुश हैं. चिराग की कैसे बढ़ी अहमियत 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था. वह पांच सीटों पर चुनाव लड़े थे और सभी पांचों पर जीत दर्ज किए थे. यह नतीजा उनके संगठन और जनाधार की मज़बूती दिखाता है. इसी के बाद से बीजेपी और जेडीयू दोनों को यह समझ में आ गया कि चिराग पासवान अब केवल सहयोगी दल के नेता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़ी ताक़त बन चुके हैं. बीजेपी को बिहार में जहां सवर्ण और शहरी वोटरों का समर्थन मिलता है तो जेडीयू को कुर्मी और पिछड़े वर्ग का. ऐसे में चिराग की पार्टी दलित समुदाय को जोड़ती है, जिससे गठबंधन की सामाजिक पकड़ और मज़बूत होती है. यही वजह है कि उन्हें 29 सीटें तो मिल गई हैं, लेकिन क्या मनमर्ज़ी वाली सीटें भी मिलेंगी? चिराग की सियासी महत्वाकांक्षा चिराग पासवान की सियासी महत्वाकांक्षा अब सिर्फ़ कुछ सीटें जीतने तक सीमित नहीं है. वह ख़ुद को बिहार की अगली पीढ़ी के नेताओं में स्थापित करना चाहते हैं. वह बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं, जिससे बीजेपी के साथ उनका रिश्ता और मज़बूत हुआ है. इस बार किंगमेकर बनने का सपना लेकर चुनावी मैदान में उतर रहे हैं, जिसके लिए एक-एक सीट पर नज़र गड़ाए हुए हैं. बिहार में इस बार के सीट बंटवारे ने यह साफ़ कर दिया है कि एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान अब छोटे सहयोगी नहीं, बल्कि मुख्य चेहरा बन गए हैं. चिराग की पार्टी की मज़बूती और दलित वोट बैंक पर पकड़, आने वाले चुनावों में एनडीए के लिए चिराग कितनी रोशनी साबित होते हैं या फिर अपनी सियासी उम्मीदों को उजाला करेंगे?

भोपाल की सड़कें बनीं जानलेवा, ट्रैफिक पुलिस ने बताए 16 हादसे वाले पॉइंट, 5 स्थान बेहद संवेदनशील

भोपाल राजधानी में सड़क सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस साल 1 जनवरी से 31 अगस्त के बीच, शहर में सड़क हादसों में 21 लोगों की जान गई और 75 घायल हुए। यह आंकड़ा सिर्फ मिसरोद पुलिस स्टेशन इलाके का है, जो शहर के सबसे खतरनाक ब्लैकस्पॉट 'ग्यारह मील' के पास स्थित है। तीसरे नंबर पर कोलार पुलिस स्टेशन का इलाका आंकड़ों के मुताबिक, मिसरोद पुलिस स्टेशन इलाके में 114 सड़क हादसों में 21 लोगों की मौत हुई और 75 लोग घायल हुए। इसके बाद कोह-ए-फिजा का नंबर आता है, जहां 132 हादसों में 16 लोगों की जान गई और 102 घायल हुए। तीसरे नंबर पर कोलार पुलिस स्टेशन इलाका है, जहां 100 हादसों में 15 लोगों की मौत हुई और 93 घायल हुए। कहां हुईं सबसे ज्यादा मौत पूरे शहर की बात करें तो, जोन-4 में सबसे ज्यादा मौतें हुईं। इस जोन में 479 हादसों में 60 लोगों की जान गई और 372 लोग घायल हुए। जोन-4 में कोलार, चुनाभट्टी, निशातपुरा, छोला, गांधी नगर, खुजरी और बैरागढ़ पुलिस स्टेशन इलाके आते हैं। जोन-2 में 667 हादसों में 47 मौतें और 480 घायल हुए। जोन-1 में 461 हादसों में 24 मौतें और 379 घायल हुए। वहीं, जोन-3 में 319 हादसों में 26 मौतें और 242 घायल हुए। मिसरोद सबसे खतरनाक स्पॉट मिसरोद इलाका भोपाल-होशंगाबाद हाईवे पर पड़ता है और यहां ट्रैफिक बहुत ज्यादा रहता है। इसी वजह से यहां लगातार हादसे हो रहे हैं। ट्रैफिक अधिकारी बताते हैं कि तेज रफ्तार, लापरवाही से गाड़ी चलाना और सड़क नियमों का पालन न करना हादसों के मुख्य कारण हैं। अतिरिक्त डीसीपी (ट्रैफिक) बसंत कौल ने बताया कि मिसरोद में होशंगाबाद रोड और जोन-4 में इंदौर रोड पर हादसे ज्यादा होते हैं। रात में ज्यादा हादसे रात में भारी वाहन तेज रफ्तार से शहर की सड़कों पर आते हैं, जिससे खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, देर रात पार्टी करने वाले युवा भी तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हैं और हेलमेट व सीटबेल्ट का इस्तेमाल नहीं करते, जिससे रात में होने वाले हादसों का खतरा बढ़ जाता है। कौल ने यह भी कहा कि पुलिस, लोक निर्माण विभाग और भोपाल नगर निगम के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है, खासकर जोन-4 के हादसों के आंकड़ों का विश्लेषण करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए। ट्रैफिक पुलिस ने ढूंढे 16 ब्लैक स्पॉट भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही शहर में 16 'ब्लैक स्पॉट्स' (ज्यादा हादसे वाली जगहें) की पहचान की थी। यह पहचान पिछले तीन सालों (2022-2024) के हादसों के आंकड़ों के आधार पर की गई थी। हालांकि, इन जगहों पर इंजीनियरिंग की खामियों को दूर करने के लिए बार-बार सिफारिशें की गईं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि कुछ जगहों पर सिर्फ अस्थायी समाधान किए गए, जबकि असली समस्या जस की तस बनी हुई है।  

देश के श्रेष्ठ संस्थानों में शामिल हुआ IIT पटना, मिला छठा स्थान, वर्ल्ड रैंकिंग में भी शानदार जगह

पटना  आईआईटी पटना ने एक बार फिर अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का लोहा मनवाया है। प्रतिष्ठित टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में संस्थान को विश्वस्तर पर 601–800 रैंक बैंड में जगह मिली है। देश के सभी आईआईटी में आईआईटी पटना छठे स्थान पर रहा है। संस्थान के निदेशक प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे आईआईटी पटना परिवार के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा, यह सफलता हमारे शिक्षकों, छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व छात्रों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। यह हमारी उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग में विश्वविद्यालयों को शिक्षण, शोध, उद्योग सहयोग और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण जैसे कई मानकों पर परखा जाता है। आईआईटी पटना ने सभी मानकों पर संतुलित प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से संस्थान को शोध गुणवत्ता में 70.4 का उत्कृष्ट स्कोर प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, शिक्षण में 34.8, शोध परिवेश में 22.5, उद्योग सहयोग में 36.0 तथा अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण में 22.8 का स्कोर प्राप्त हुआ। संस्थान का कुल स्कोर 39.0 से 43.5 के बीच रहा, जो मुख्य शैक्षणिक और शोध मानकों में संतुलित प्रगति को दर्शाता है। आईआईटी पटना अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानचित्र पर लगातार अग्रसर है, जहां निरंतर विकास, नवाचार और वैश्विक सहयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है।  

भोपाल में हवा हुई ज़हरीली: AQI 39 से बढ़कर 128, एक्सपर्ट बोले- हालात और बिगड़ सकते हैं

भोपाल  सांस और हार्ट के मरीजों के लिए खतरे की घंटी है। शहर की हवा में प्रदूषण बढ़ने लगा है। सात दिन में प्रदूषण तीन गुना बढ़ गया है। हवा में धूल के साथ ओजोन गैस की मात्रा अधिक पाई गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आंकड़ों में यह बात सामने आई है। टीटी नगर में इसका असर सबसे अधिक है। हवा की गुणवत्ता जांचने शहर में सात स्थानों पर जांच हो रही है। इनमें तीन रियल टाइम मॉनिटरिंग हैं। एयर क्वालिटी रिपोर्ट में ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को एक्यूआइ औसत 128 मापा गया है, जबकि 6 अक्टूबर को यह 39 था। इसमें पीएम 10 और ओजोन बड़ा कारण रहा। टीटी नगर, अरेरा कॉलोनी और ईदगाह हिल्स क्षेत्र में रियल टाइम जांच में हवा की यह रिपोर्ट सामने आई। ये हैं नुकसान -हवा में धूल-धुएं के बढ़ने से सबसे पहले नाक, गला और आंखों में जलन -फेफड़ों में सूजन की समस्या -कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वालों को दिक्कत -हृदय पर तनाव बढ़ेगा ऐसे करें बचाव -सामान्य मास्क की जगह 95 मास्क का इस्तेमाल करें। -सुबह के समय धूल के कण अधिक होते हैं, इसलिए बचें। -इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए ताज़े फल और पानी ज्यादा पीएं। एक्सपर्ट बोले अभी और बिगड़ेगी स्थिति पर्यावरणविद् एसके दुबे के मुताबिक शहर में धूल उड़ है। टूटी सड़कें बड़ा कारण है, वहीं कचरा जलाने के मामले बढ़े हैं। यह ओजोन का स्तर बढऩे का कारण है। सर्दी बढ़ने के साथ हवा का प्रदूषण अभी और बढ़ेगा। एक्यूआर का स्तर बढ़ रहा है। धूल इसका प्रमुख कारण है। मौसम खुलने से धूल और धुंआ का स्तर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में पीएम 10 सहित वाहनों का धुआं एक्यूआइ बढ़ा रहा है। सर्दी बढऩे के साथ यह स्तर और बढ़ेगा। ब्रजेश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

नोटिस का खेल? I Love योगी-मोदी क्यों बोलने लगे मुस्लिम परिवार? बरेली में एक नोटिस से मचा सियासी तूफान

बरेली  उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की फिजा अब बदल चुकी है, जहां पहले आई लव मोहम्मद पोस्टर विवाद को लेकर तनाव फैला हुआ था. वहीं अब कुछ परिवार आई लव योगी और आई लव मोदी कह रहे हैं. बीते 26 सितंबर को हुई हिंसा के बाद से शासन-प्रशासन सख्त रवैया अपना रहा है, जिसका असर शहर में देखने को मिल रहा है. दरअसल,  बरेली में 27 अवैध कब्जेदारों को नोटिस दी गई है. नोटिस में नगर निगम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर 15 दिन में अवैध कब्जा नहीं हटाया तो मकान-दुकान पर बुलडोजर चलेगा. अब इस नोटिस के मिलने के बाद से मुस्लिम परिवार सीएम योगी से न्याय की गुहार लगा रहा है. नगर निगम की नोटिस से बदला हाल बता दें कि बरेली में अवैध कब्जेदारों पर पुलिस और प्रशासन की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद अब मुस्लिम परिवारों ने आई लव योगी और आई लव मोदी कहकर रहम की गुहार लगाई है. मुस्लिम परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों ने जो गलती की है उन्हें माफ कर दिया जाए और उनके घरों को ना तोड़ा जाए. तो वहीं नगर निगम के एक्सईएन राजीव कुमार राठी ने बताया कि यह जमीन नगर निगम की संपत्ति है. 8 अक्टूबर को की गई स्थलीय और अभिलेखीय जांच में यह अतिक्रमण पुख्ता पाया गया. पुलिस पर पेट्रोल बम मारने वाला पकड़ा गया उन्होंने कहा कि कब्जेदारों को नोटिस देकर 15 दिन की मोहलत दी गई है. तय समय में कब्जा नहीं हटाने पर निगम खुद कार्रवाई करेगा. खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा और पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा. बरेली पुलिस ने 26 सितंबर को शाहमत गंज में हिंसा के दौरान पुलिस टीम पर पेट्रोल बम से हमला करने के मुख्य आरोपी आरिफ को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. मौलाना तौकीर के कहने पर फैली थी हिंसा पुलिस के अनुसार इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान की अपील पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की थी. पुलिस का कहना है कि इस दौरान आरिफ ने हिंसा में अहम भूमिका निभाई और उसके खिलाफ कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं. विवाद ‘आई लव मुहम्मद’ लिखे पोस्टरों को लेकर शुरू हुआ था, जिसका कथित तौर पर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने के लिए इस्तेमाल किया गया था. बाद में दंगाइयों ने पथराव किया, गोलीबारी की, दुकानों में तोड़फोड़ की और पुलिस पर पेट्रोल से भरी बोतलें फेंकी, जिससे अफरा-तफरी मच गई.  

केंद्र से 3% पीछे मप्र का डीए-डीआर, कर्मचारी बोले—बढ़े महंगाई भत्ता और मिले फेस्टिवल बोनस

भोपाल  केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) दे दी है। इसे लेकर मध्यप्रदेश के कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं। कर्मचारियों ने दीपावली से पहले 3% डीए एवं डीआर और बोनस देने की मांग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि दीपावली से पहले ये लाभ दे दिया जाए, ताकि कर्मचारियों के परिवार त्योहार खुशियों के साथ मना सकें। प्रदेश के कर्मचारियों ने फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। उधर, माना जा रहा है कि राज्य सरकार जल्द ही कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। प्रदेश में मिल रहा 55% डीए, केंद्र में बढ़कर हुआ 58% वर्तमान में मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डीए अब 3% बढ़कर 58% हो गया है। राज्य के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2025 से ड्यू है, जिसे अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें हमेशा केंद्र के बाद देरी से डीए वृद्धि मिलती है। 29 साल से बंद है बोनस कर्मचारी संगठनों ने याद दिलाया कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है। उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में दिया जाता था। केंद्र सरकार और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस देती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा वर्षों से बंद है। कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार कहती है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना उनकी ‘कथनी और करनी’ में फर्क दिखाता है। केंद्र सरकार अक्टूबर में फिर बढ़ा सकती है डीए सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अक्टूबर माह में अपने कर्मचारियों का डीए 3% बढ़ाने की घोषणा कर सकती है। इससे डीए 58% से बढ़कर 61% तक पहुंच जाएगा। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी का कहना है- आमतौर पर मध्यप्रदेश सरकार केंद्र के बाद ही डीए वृद्धि का ऐलान करती है। इसलिए उम्मीद है कि केंद्र के फैसले के बाद राज्य सरकार भी जल्द घोषणा करेगी। अक्टूबर में आएगी एरियर की आखिरी किस्त प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2025 में कर्मचारियों का डीए 5% बढ़ाया था, जिससे दर 55% हो गई थी। इसके साथ ही सरकार ने एरियर का भुगतान 5 किस्तों में करने का निर्णय लिया था। अब अक्टूबर में एरियर की अंतिम किस्त कर्मचारियों के खातों में आने वाली है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि उसी समय डीए वृद्धि और बोनस का ऐलान भी किया जाएगा। 10 हजार फेस्टिवल एडवांस की मांग राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा- केंद्रीय कर्मचारियों को कभी डीए क मांग नहीं करनी पड़ती, लेकिन मध्यप्रदेश में बार-बार आग्रह करना पड़ता है। इस बार उम्मीद है कि सरकार दीपावली से पहले समय पर डीए और बोनस देगी। उन्होंने साथ ही यह मांग भी रखी कि कर्मचारियों को 10 हजार रुपए का फेस्टिवल एडवांस दिया जाए, ताकि वे त्योहार के दौरान आर्थिक रूप से सहज रह सकें। 10 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स होंगे प्रभावित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा 55% डीए वर्तमान में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 58% डीए प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के कर्मचारियों का जुलाई 2025 से डीए ड्यू है। 29 साल से बंद बोनस देने की मांग कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है, जबकि उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में मिलता था। केंद्र और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस दे रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। यह फिर से शुरू किया जाना चाहिए। संगठनों ने कहा कि सरकार एक ओर दावा करती है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना “कथनी और करनी में अंतर” दर्शाता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दीपावली से पहले कर्मचारियों को राहत देने का फैसला लेकर त्योहार की खुशियां दो गुनी करेंगे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों को दीपावली के पहले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य के कर्मचारी भी मोहन सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहा है कि एमपी में काम कर रहे कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देकर बोनस दिया जाए ताकि कर्मचारी त्यौहार खुशियों के साथ मना सकें। इसके साथ ही फेस्टिवल एडवांस भी बढ़ी हुई राशि के साथ देने की मांग की जा रही है। उधर माना जा रहा है कि जल्दी ही राज्य सरकार भी कर्मचारियों के लिए डीए देने का ऐलान कर सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जिस प्रकार से केंद्र एवं रेलवे द्वारा दीपावली के अवसर पर बोनस एवं 3% महंगाई भत्ता, महंगाई राहत एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों को प्रदान कर दी गई है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार भी दीपावली के त्योहार पर कर्मचारियों को आर्थिक रूप से खुशियां दे। प्रदेश में वर्ष 1996 से बोनस बंद है। वर्ष 1996 तक 1079 रुपए बोनस के रूप में कर्मचारियों को प्राप्त होते थे। वर्तमान में प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आज भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है वहीं मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को बोनस से वंचित कर दिया गया है। संगठनों के अनुसार एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा कहा जाता है कि केंद्र के समान … Read more

गौ-शालाओं और पशुपालकों को आयोजन में बनायें सहभागी: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाए गोवर्धन पर्व : मुख्यमंत्री डॉ.यादव गौ-शालाओं और पशुपालकों को आयोजन में बनायें सहभागी: मुख्यमंत्री डॉ.यादव दुग्ध उत्पादन तथा पशुपालन में विशेष उपलब्धियां दर्ज कराने और नवाचार करने वाले उद्यमियों को करें सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवर्धन पर्व संबंधी बैठक में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 21 अक्टूबर को गोवर्धन पर्व लोक अनुष्ठान और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाए। आयोजन में गौशालाओं तथा पशुपालकों को विशेष रूप से सहभागी बनाया जाए। साथ ही गोवर्धन पर्व पर पशुपालन तथा दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियां दर्ज करने और नवाचार करने वाले उद्यमियों को सम्मानित भी किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव गोवर्धन पर्व आयोजन के संबंध में सोमवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्य सचिव  अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की गौ-शालाओं में गोवर्धन पर्व का सामुदायिक आयोजन होगा। गोवर्धन पर्व का मुख्य आयोजन रवीन्द्र भवन भोपाल में किया जाएगा, जिसमें गोवर्धन पूजन, परिक्रमा, अन्नकूट भोग मुख्य होगा। इस अवसर पर पशुचारक समुदायों की कला, बरेदी और ठाट्या नृत्य आदि का प्रस्तुतीकरण होगा। कार्यक्रम में जैविक उत्पादक, दुग्ध उत्पाद, गोबर आधारित शिल्प के स्टॉल लगाए जाएंगे, साथ ही पशुपालन, कृषि, सहकारिता विभाग की योजनाओं की जानकारी देने के लिए विशेष व्यवस्था होगी। इसके साथ ही ग्रामीण आजीविका के लिए दुग्ध उत्पादन और वृंदावन ग्राम योजना के विस्तार के लिए भी गतिविधियों का संचालन होगा। गोवर्धन पर्व पर सभी जिलों में गतिविधियां संचालित की जाएंगी। आंगनवाड़ी केंद्रों में पंचगव्य उत्पाद जैसे घी, दूध, पनीर और दही से बनी सामग्री का वितरण किया जाएगा।  

घर की सफाई में लगा जैकपॉट! पुराने डिब्बे से निकला नोटों का खजाना

नई दिल्ली दिवाली नजदीक आते ही देशभर में लोग अपने घरों की सफाई और सजावट में जुटे हैं। ऐसा माना जाता है कि साफ-सुथरे घर में मां लक्ष्मी का वास होता है और वे धन-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी परंपरा के बीच एक परिवार की दिवाली सफाई ने उन्हें सच में लक्ष्मीप्राप्ति करवा दी। एक Reddit यूजर ने पोस्ट कर बताया कि उनकी मां को दिवाली सफाई के दौरान घर के पुराने DTH बॉक्स में 2 लाख के पुराने 2000 रुपये के नोट मिले। उन्होंने लिखा, "शायद ये पैसे मेरे पापा ने नोटबंदी के वक्त रख दिए होंगे और भूल गए होंगे। अभी तकलहमने उन्हें बताया भी नहीं है।"   कहां एक्सचेंज किया जा सकता है नोट यह पोस्ट Reddit पर 'Biggest Diwali Safai of 2025' टाइटल से शेयर की गई और देखते ही देखते वायरल हो गई। कई यूजर्स ने मजेदाक कमेंट्स किए। एक यूजर ने लिखा, "भगवान करे मुझे भी इतना पैसा मिले कि रखकर भूल जाऊं।" दूसरे ने कहा, "इन नोटों को भी RBI में एक्सचेंज किया जा सकता है, बस लिमिट 20 हजार रुपये तक है।" किसी ने सलाह दी, "RBI जाने से पहले अपने चार्ट्ड अकाउंट (CA) से सलाह जरूर लें और सही कारण बताएं।" इस बात एक अन्य यूजर ने कहा, नोट बंद नहीं हुए हैं, बस चलन से बाहर हैं, इसलिए आप इन्हें 5-10 बार में जाकर बदल सकते हैं। RBI में भी बदले जा सकते हैं 2000 रुपये के नोट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 19 मई 2023 को 2000 के नोटों को चलन से वाापस लेने का एलान किया था। हालांकि, ये अभी भी कानूनी मुद्रा हैं और RBI के 19 दफ्तरों में बदले जा सकते हैं। RBI के अनुसार, 2000 के नोटों की कुल वैल्यू 3.56 लाख करोड़ थी, जिसमें से 98.35% नोट वापस आ चुके हैं, जबकि करीब 5884 करोड़ के नोट अभी भी प्रचलन में हैं। नोट बदलने की सुविधा अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़. चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पटना, बेलापुर और तिरुवनंतपुरम के RBI दफ्तरों में उपलब्ध है।  

RJD ने खोले पत्ते! तेज प्रताप यादव महुआ से लड़ेंगे, 21 सीटों पर उम्मीदवार घोषित

पटना तेजप्रताप यादव ने नवगठित जनशक्ति जनता दल के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। लिस्ट में 21 उम्मीदवारों के नाम हैं। बिहार चुनाव 2025 के लिए तेज प्रताप यादव की अध्यक्षता वाली जनशक्ति जनता दल ने 21 प्रत्याशियों का एलान किया है। तेज प्रताप यादव खुद भी चुनाव लड़ेंगे. तेज प्रताप यादव महुआ विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे। वहीं महनार- जय सिंह राठी, हिसुआ- रवि राज कुमार , शाहपुर- मदन यादव और पटना साहिब से मीनू कुमारी को टिकट दिया गया है।   जनशक्ति जनता दल के 21 उम्मीदवार महुआ           तेज प्रताप यादव  मनेर           शंकर यादव बेलसन           विकास कुमार कवि बख्तियारपुर   गुलशन यादव शाहपुर           मदन यादव पटना साहिब  मीनू कुमारी महुआर          जय सिंह राठी हिसुआ          रवि राज कुमार बिक्रमगंज     अजीत कुशावाहा जगदीशपुर     नीरज राय  अत्री           अविनाश वजीरगंज     प्रेम कुमार प्रत्याशी बेनीपुर          अवध किशोर झा दुमाओ          दिनेश कुमार सूर्या  गोविंदगंज     आशुतोष प्रत्याशी मधेपुरा            संजय यादव नरकटियागंज     तौरीफ रहमान बरौली          धर्मेंद्र क्रांतिकारी कुचायकोट     ब्रज बिहारी भट्ट बनियापुर        पुष्पा कुमारी मोहिउद्दीन नगर     सुरभि यादव  RJD से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल के नाम से नई पार्टी बना ली थी। अब वह अपनी दम पर चुनावी मैदान में हैं और अपने परिवार के खिलाफ बगावती तेवर दिखा चुके हैं। इससे वह आरजेडी को चुनाव में काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं।