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प्लेटफार्म नंबर 2 और 3 पर धर्म विशेष का प्रचार, यात्रियों ने रेल प्रशासन से की शिकायत

भिलाई  दुर्ग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म को भी धर्म विशेष के प्रचार माध्यम बना लिया गया है। स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-2 और 3 पर कई स्थानों पर धर्म विशेष के प्रचार वाला पेंपलेट चिपका दिया गया है। स्टेशन परिसर में इस तरह की पंपलेट चिपकाए जाने को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए, वहीं इस ओर रेल प्रशासन का ध्यान नहीं होने पर नाराजगी जताई। हालांकि नईदुनिया द्वारा इस संबंध में सवाल किया गया तब हरकत में आए रेलवे अधिकारियों ने इसे तुरंत हटवाया। बता दें कि मतांतरण के प्रयास के लिए मानव तस्करी का मामला दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बीते दिनों सामने आया था। कांकेर क्षेत्र की तीन युवतियों को दो नन एवं एक स्थानीय युवक के साथ स्टेशन पर पकड़ा गया था। हिंदूवादी संगठनों ने इसकी जानकारी शासकीय रेल पुलिस को दी थी। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर तक उठा था। इस पूरे मामले में रेल पुलिस भी कटघरे में आ गई थी। वहीं अब फिर से रेलवे स्टेशन को धर्म विशेष के प्रचार प्रसार का माध्यम बनाने का मामला सामने आया है।   दुर्ग रेलवे स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज को सपोर्ट देने लगाए गए लोहे के पाेल एवं बैठने के लिए बनाए गए स्थान पर पांच छह स्थानों पर एक धर्म विशेष के लिए प्रेरित करने वाला पंपलेट चिपकाया गया है। स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो एवं तीन के बीच रैंप वाले स्थान पर यह लगा हुआ है। रेलवे स्टेशन प्रशासन पर उठ रहे सवाल यात्रियों ने इसे लेकर नाराजगी जताई, वहीं लोगों का यह भी कहना था कि इस संबंध में रेल प्रशासन को गंभीर होना चाहिए जिससे इस तरह स्टेशन परिसर का उपयोग धर्म विशेष के प्रचार प्रसार के लिए न किया जा सके। यह पंपलेट कब से लगा हुआ था इसकी जानकारी नहीं है। परंतु रेलवे के अधिकारी एवं सफाई कर्मियों द्वारा इसे अब तक न देखना और हटाए न जाने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।     स्टेशन परिसर में ऐसा नहीं होना चाहिए। इसे चेक कराने के साथ ही पंपलेट को तत्काल हटवा दिया गया है। दोबारा इसका ध्यान भी रखा जाएगा।     -हिमांशु कुमार, स्टेशन अधीक्षक, दुर्ग रेलवे स्टेशन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाल्मीकि जयंती पर महान ऋषि को किया नमन, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

वाल्मीकि समाज ने मुख्यमंत्री का किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में आदिकवि, महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती पर महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उनका नमन किया। साथ ही सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के आदर्शों एवं मूल्यों को पवित्र रामायण के माध्यम से उन्होंने समूची दुनिया को मनुष्यता एवं मर्यादा की नई राह दिखाई। उनकी शिक्षाएं समर्थ समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने  राम और रामायण को देश के घर-घर पहुंचाकर अमर कर दिया। इस अवसर पर वाल्मीकि समाज के वरिष्ठजन भी उपस्थित थे। समाजजनों ने मुख्यमंत्री डॉ यादव का पुष्प गुच्छ, शाल फल, रामायण और महर्षि वाल्मीकि जी का चित्र भेंटकर स्वागत अभिनन्दन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी समाज-जनों से कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामभक्ति से आत्म विभोर होकर रामायण की रचना की। वही रामायण आज देश की जीवनधारा है। समाजजनों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया।  

Deadly Cough Syrup केस: बच्चों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, CBI जांच की मांग

भोपाल  मध्यप्रदेश में कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ़’ पीने से 16 बच्चों की मौत के मामले एसआईटी जांच के बाद अब सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका में दूषित कफ सिरप के निर्माण, विनियमन, परीक्षण और वितरण की सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच और पूछताछ की मांग की गई है। अब तक की कार्रवाई में कफ सिरप पीने से 16 बच्चों की मौत मामले में डॉ. प्रवीन सोनी को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि प्रवीण ने ही ज्यादातर बच्चों को ये कफ सिरप लिखा था। साथ ही कफ सिरप बनाने वाली कंपनी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया और ड्रग कंट्रोलर का तबादला कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने जांच के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार विषैले सिरप बनाने वाली कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं, उन्हें बंद किया जाए और उनके उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने का इंतजाम किया जाए. साथ ही, देश में एक सख्त 'ड्रग रिकॉल पॉलिसी' बनाई जाए. दवाओं में प्रयुक्त खतरनाक रसायन डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल की बिक्री और निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं.बच्चों की मौत के मामले में विभिन्न राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर को एक जगह ट्रांसफर करके जांच कराई जाए, ताकि जांच में समन्वय बना रहे.याचिका में कहा गया है कि यह मामला केवल कुछ कंपनियों की गलती का नहीं, बल्कि देश की ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम की विफलता का है, जिसकी वजह से कई राज्यों में मासूमों की जान गई है. औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा गौरव शर्मा, औषधि निरीक्षक जबलपुर शरद कुमार जैन और राज्य के उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित और आईएएस अधिकारी ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा प्रकरण के संबंध में सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उच्च स्तरीय बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।   जब्त किए जाए मौजूदा कफ सिरफ का स्टॉक वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर जनहित याचिका में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग/विशेषज्ञ समिति से जांच की मांग की गई है। जगह-जगह बैन किए गए मौजूदा कोल्ड्रिफ कफ सिरफ के सभी स्टॉक को जब्त करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में हो जांच इसके साथ ही याचिका में कहा गया कि सभी FIR की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। कफ सिरप के निर्माण, रेगुलेशन, टेस्टिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की जांच और पूछताछ सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में की जाए। सबसे ज्यादा एमपी के छिंदवाड़ा में बच्चों की गई जान बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक दोनों राज्यों में कुल 18 बच्चों की जान जा चुकी है, जिनमें से 16 मौतें मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में और 2 राजस्थान के भरतपुर व सीकर में दर्ज की गई हैं।  जांच में सिरप में 48.6% डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला रसायन पाया गया, जो किडनी फेलियर का कारण बन रहा है।  जानिए अब तक क्या हुआ एक्शन? केंद्र सरकार ने छह राज्यों में 19 दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू कर दिया है, जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर तत्काल जांच और नकली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर: राजस्थान में भारी बारिश और ठंडक

जयपुर राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर मंगलवार को भी जारी रहा। पूर्वी जिलों में बादल छाए रहे और कई जगह हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग ने 9 जिलों में अलर्ट जारी किया है। 8 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ और सूखा रहने की संभावना है। सोमवार को जयपुर, नागौर, हनुमानगढ़, सीकर समेत कई जिलों में 4 इंच तक तेज बारिश हुई, जिससे खेतों में पानी भर गया और खरीफ की फसलें खराब हो गईं। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में भारी गिरावट देखी गई। हनुमानगढ़ में दिन और रात के तापमान में सिर्फ 1 डिग्री का अंतर रहा। जयपुर में देर रात तक होती रही बारिश राजधानी जयपुर में सोमवार सुबह से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। मंगलवार सुबह भी करीब 3 बजे तक बारिश का दौर चला। बीते 24 घंटों के दौरान जयपुर में  92MM बरसात रिकॉर्ड की गई। जयपुर में छापरवाड़ा बांध के पास 92MM बारिश दर्ज हुई। दिल्ली रोड पर चांदवास पर 53, जालसू, दूदू, मौजमाबाद में 27-27, जोबनेर में 40, बैराठ में 52, शाहपुरा में 56, फागी में 35, चौमूं में 26, सांगानेर में 29MM बारिश हुई है। बारिश से पारा भी लुढ़का बारिश की वजह से प्रदेश में पारे में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 12 डिग्री तक गिरा। सीकर सबसे ठंडा रहा, जहां दिन का तापमान 22.5°C दर्ज हुआ। जयपुर 25.1°C, पिलानी 24.7°C, अलवर 24°C, चूरू 24.1°C, बीकानेर 29.3°C, उदयपुर 29°C और झुंझुनूं 24.9°C तक सीमित रहा। अब 8 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।  

दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ व आम्रपाली दुबे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, जानें क्या है मामला?

मुजफ्फरपुर जफ्फरपुर जिले में भोजपुरी फिल्म स्टार और बीजेपी के आजमगढ़ सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ तथा अभिनेत्री आम्रपाली दुबे के खिलाफ सिविल कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने मुजफ्फरपुर शहर में आयोजित एक मॉल के उद्घाटन समारोह के दौरान सड़क जाम की स्थिति पैदा कर दी, जिससे आम लोगों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मामला सिविल कोर्ट के अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा द्वारा दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने परिवाद को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई की तिथि 18 अक्टूबर 2025 तय की है। दरअसल, 4 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर शहर के काजी मोहम्मदपुर थाना क्षेत्र स्थित कलमबाग चौक के पास एक मॉल का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बीजेपी सांसद और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ तथा अभिनेत्री आम्रपाली दुबे को बुलाया गया था। जैसे ही दोनों स्टार मॉल उद्घाटन के लिए पहुंचे, उन्हें देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान आयोजकों और दोनों कलाकारों के कारण सड़क जाम की स्थिति बन गई। इससे कई बीमार लोग और आम नागरिक घंटों फंसे रहे। यहां तक कि मरीजों को लेकर जा रही एंबुलेंसें भी ट्रैफिक जाम में फंस गईं। करीब एक घंटे तक लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में दोनों कलाकारों के कार्यक्रम स्थल से जाने के बाद स्थिति सामान्य हो सकी। घटना के बाद अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने इस पूरे मामले में मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट में अपराधिक परिवाद दर्ज कराया। परिवाद में निरहुआ और आम्रपाली दुबे के साथ-साथ तीन अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223, 189(6), 191(1), 190, 61(1), 280, 272, 298, और 199(बी) के तहत दर्ज किया गया है। परिवादी सह अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने कहा कि मॉल उद्घाटन का आयोजन “बेहद खतरनाक और जानलेवा” तरीके से किया गया था। उन्होंने कहा कि “इस तरह की स्थिति में तमिलनाडु जैसी भगदड़ की घटना भी हो सकती थी।” उन्होंने बताया कि उन्होंने कोर्ट में बीजेपी सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ, अभिनेत्री आम्रपाली दुबे, एसडीओ पूर्वी, और कार्यक्रम आयोजक के खिलाफ परिवाद दाखिल किया है। कोर्ट ने मामले को स्वीकार करते हुए 18 अक्टूबर 2025 को सुनवाई की तारीख तय कर दी है।

खगोलशास्त्री महर्षि वाल्मीकि, जब ‘शोक’ से ‘श्लोक’ जन्मा और विज्ञान झुका श्रद्धा से

भोपाल भारतभूमि की यह विशेषता रही है कि यहाँ अध्यात्म और विज्ञान कभी परस्पर विरोधी नहीं रहे, ज्ञान के हर रूप का उद्गम ऋषियों के चिंतन से हुआ। इसी परंपरा में एक ऐसा नाम अमर है, महर्षि वाल्मीकि। वे केवल आदि कवि नहीं थे, बल्कि भारत के प्रथम खगोलशास्त्री भी थे, जिन्होंने आकाश की नक्षत्रीय गतियों को साहित्य के छंदों में पिरो दिया। वाल्मीकि जयंती के इस पावन अवसर पर यह जानना रोमांचक है कि ‘रामायण’ केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि खगोलीय दस्तावेज़ भी है, एक ऐसा दस्तावेज़ जिसमें हर ग्रह, नक्षत्र और तिथि वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ आज भी सत्य सिद्ध होती है। महर्षि वाल्मीकि का खगोलबोध, जब कविता बनी विज्ञान की भाषा ‘रामायण’ में श्रीराम के जन्म का वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने जिस सटीकता से किया है, वह आधुनिक खगोलशास्त्र की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है। जब कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया, उस समय सूर्य, मंगल, शनि, बृहस्पति और शुक्र, ये पाँचों ग्रह अपने-अपने उच्च स्थानों में थे, और लग्न में चंद्रमा बृहस्पति के साथ स्थित थे। भारतीय वेदों पर वैज्ञानिक शोध संस्थान की पूर्व निदेशक सुश्री सरोज बाला ने प्लैनेटेरियम गोल्ड सॉफ्टवेयर 4.1 के माध्यम से इस गणना की पुष्टि की। उन्होंने पाया कि यदि यह आकाशीय स्थिति 27° उत्तर और 82° पूर्व (अयोध्या के अक्षांश, रेखांश) पर डाली जाए, तो यह 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व, दोपहर 12 से 2 बजे के बीच का समय बताती है, अर्थात श्रीराम का जन्मकाल! विज्ञान ने दी वाल्मीकि को पुष्टता की मुहर सरोज बाला और उनके दल ने ‘रामायण की कहानी, विज्ञान की जुबानी’ शीर्षक से 16 वर्षों के गहन शोध में यह सिद्ध किया कि वाल्मीकि के खगोलीय संदर्भ पूर्णतः प्रामाणिक हैं। उन्होंने Stellarium, Sky Guide, और Planetarium Simulation जैसे सॉफ्टवेयरों से तुलना की, परिणाम अद्भुत रहे। हर ग्रह की गति, हर नक्षत्र की स्थिति और हर खगोलीय घटना, रामायण में बताए क्रम के अनुरूप मिली। इन सॉफ्टवेयर परीक्षणों के साथ-साथ पुरातत्व, भूविज्ञान, समुद्रविज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान और उपग्रह चित्रों ने भी वाल्मीकि के वर्णनों की पुष्टि की। यह अपने आप में एक अनूठा संगम है, जहाँ श्रद्धा और विज्ञान एक दूसरे को प्रमाणित करते हैं। सत्य का साक्ष्य, रामायण की कालगणना और भू-साक्ष्य महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के वनवास के दौरान सूर्यग्रहण, चंद्रमा की कलाएँ, और ऋतुओं का सूक्ष्म वर्णन किया है। डॉ. राम अवतार शर्मा ने इन स्थलों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया, अयोध्या से लेकर रामेश्वरम् तक। उन्होंने पाया कि हर स्थान, हर आकाशीय स्थिति, और हर ऋतु-वर्णन वास्तविक भू-परिस्थितियों से मेल खाता है। नासा द्वारा प्रकाशित पाक जलडमरूमध्य में डूबे मानव-निर्मित पुल के उपग्रह चित्र भी इस बात का समर्थन करते हैं कि रामसेतु एक वास्तविक संरचना थी, वही पुल जिसे रामायण में ‘सेतुबंध’ कहा गया है। वाल्मीकि, साहित्य से विज्ञान तक का सेतु वाल्मीकि केवल ‘रामायण’ के रचयिता नहीं थे, वे ज्ञान और सृजन के अद्वितीय संयोग थे। उन्होंने एक क्रौंच पक्षी के शोक से ‘श्लोक’ की रचना कर दी, और वहीं से काव्य का जन्म हुआ। यह वही संवेदना थी जो आकाश की गति और जीवन की गति को एक सूत्र में बाँध देती है। माता सीता उनके आश्रम में रही, लव-कुश उनके शिष्य बनकर बड़े हुए, यह दिखाता है कि समाज-व्यवस्था से परे ज्ञान का कोई जातिगत बंधन नहीं होता। शूद्र वर्ण से आने वाले इस महर्षि ने दिखा दिया कि महानता कर्म से होती है, जन्म से नहीं।  ऋषि का विज्ञान आज भी प्रासंगिक है आज जब आधुनिक विज्ञान जेम्स वेब टेलिस्कोप से ब्रह्मांड के रहस्य खोज रहा है, तब भी महर्षि वाल्मीकि का ज्ञान एक ज्योति-स्तंभ की तरह सामने आता है। वे हमें बताते हैं कि कविता केवल भावना नहीं, ब्रह्मांड की गति का अनुभव भी हो सकती है। ‘रामायण’ केवल कथा नहीं, बल्कि खगोलशास्त्र का काव्य है, जहाँ हर श्लोक में आकाश का सत्य निहित है। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि को उनके प्राकट्य पर्व पर शत-शत नमन, जिन्होंने “शोक” को “श्लोक” में बदलकर यह दिखाया कि जब हृदय में वेदना हो और दृष्टि में ब्रह्मांड, तब कविता विज्ञान बन जाती है। आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की सादर आत्मीय शुभकामनाएं   – *डॉ विश्वास चौहान ( प्राध्यापक विधि  , शासकीय स्टेट लॉ कॉलेज भोपाल )

MP में अब मानसून की विदाई की तैयारी, अगले 2 दिन हल्की बारिश के आसार

भोपाल  मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ बारिशों का दौर अब थमने जा रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में तेज बारिश ने जहां गर्मी से राहत दी, वहीं अब मौसम साफ होने की ओर है। मौसम विभाग की मानें तो 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो जाएगा, और इसके बाद राज्य में सुहावना और साफ मौसम लौटेगा। अगले दो दिनों तक हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन कहीं भी भारी बारिश का खतरा नहीं है। यानी अब लोगों को न जलभराव की चिंता होगी, न ही अचानक आने वाली तेज बारिश की। इन जिलों में हुई बारिश सोमवार को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिवनी, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, रतलाम, मंदसौर, धार, बड़वानी, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, भोपाल, राजगढ़ और विदिशा जिलों में आंधी के साथ बारिश हुई थी। इनमें से भोपाल, रायसेन, गुना और हरदा भारी बारिश दर्ज की गई थी।   आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट     भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सिवनी, बालाघाट, पांढुर्णा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, इंदौर, देवास, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सागर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, मंडला, डिंडोरी, मैहर, छिंदवाड़ा, अनूपपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर     सीहोर, राजगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर कलां में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। वर्तमान में सक्रिय है कई मौसम प्रणालियां     अगले 3-4 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की और वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। चक्रवातीय तूफान “शक्ति” वर्तमान में 19.6° उत्तरी अक्षांश और 60.5° पूर्वी देशांतर के पास केंद्रित है। यह मसीरा (ओमान) से लगभग 210 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 310 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 900 किमी दक्षिण-पश्चिम, द्वारका से 940 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 960 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।     इसके पूर्व- दक्षिण-पूर्व की ओर पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर पर बढ़ने और 7अक्टूबर की सुबह तक एक निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। उत्तरी अफगानिस्तान के ऊपर चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में स्थित पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान और उससे सटे पाकिस्तान के ऊपर 3.1 से 5.8 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर स्थित है, और ऊपरी क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में एक ट्रफ 7.6 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर देशांतर 69° पूर्व से अक्षांश 23° उत्तर तक फैली हुई है।     एक चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित है, जो समुद्र     तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। एक चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के ऊपर भी स्थित है, जो समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नया वेदर सिस्टम बनने से मानसून की वापसी में देरी हो रही है। हालांकि 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। 1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

लंबे समय से बीमार कांग्रेस नेता भरत सिंह का इंतकाल, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

जयपुर हाड़ौती क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री भरत सिंह का सोमवार रात जयपुर के एसएमएस अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। शुरुआत में कोटा में इलाज चला, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर रैफर किया गया था। करीब एक महीने से उनका इलाज एसएमएस अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर से कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक जताया और भरत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुद्दों पर डटे रहने वाले नेता भरत सिंह को मुद्दों पर अडिग रहने वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उनके करीबी और कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष कुशल पाल सिंह पानाहेड़ा ने बताया कि भरत सिंह ने राजनीति में कभी लाभ-हानि की चिंता नहीं की। वे गांधीवादी विचारधारा को मानते थे और उनकी ईमानदारी की सराहना विपक्षी नेता भी किया करते थे। राजनीतिक सफर भरत सिंह का जन्म 15 अगस्त 1950 को हुआ था। उन्होंने एमएस बड़ौदा यूनिवर्सिटी (गुजरात) से स्नातक की पढ़ाई की थी। वे 1993 में पहली बार खानपुर (झालावाड़) से विधायक बने। 1998 में लोकसभा चुनाव में वसुंधरा राजे से हार गए। 2003 में दीगोद (कोटा) से विधायक बने, जहां उन्होंने भाजपा के ललित किशोर चतुर्वेदी को हराया। 2008 में सांगोद से चुनाव जीते, 2013 में हारने के बाद पंचायत चुनाव लड़ा और वार्ड पंच बने। उनकी पत्नी मीना कुमारी उस समय सरपंच रहीं। 2018 में भरत सिंह एक बार फिर सांगोद से विधायक चुने गए। नहीं लड़ा 2023 का चुनाव 2023 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने राजनीति से खुद को अलग करने का फैसला लिया। उन्होंने साफ कहा था कि वे न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही परिवार के किसी सदस्य को टिकट दिलाएंगे। इसके बाद सांगोद से कांग्रेस ने भानु प्रताप सिंह को टिकट दिया। भरत सिंह तीन बार कुंदनपुर से सरपंच और दस साल तक सांगोद पंचायत समिति के प्रधान भी रहे। अंतिम संस्कार आज भरत सिंह का अंतिम संस्कार आज  उनके पैतृक गांव कुंदनपुर में किया जाएगा। गहलोत सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जताया दुख भरत सिंह के निधन पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने दुख प्रकट किया है। गहलोत ने बयान जारी कर कहा-  पूर्व मंत्री  भरत सिंह कुंदनपुर के निधन का समाचार मिला। मैं कल ही SMS अस्पताल जाकर उनसे कुशलक्षेम पूछकर आया था। डॉक्टरों ने उनकी तबीयत में सुधार बताया था परन्तु आज ऐसा समाचार मेरे लिए व्यथित करने वाला है। भरत सिंह कुंदनपुर राजनीति एवं जनसेवा में बेबाकी एवं ईमानदारी की मिसाल थे। वो हाड़ौती क्षेत्र के कद्दावर नेता थे। मेरे उनके परिवार से संबंध उनके पिताजी के समय से थे जब मैं उनके साथ लोकसभा सांसद बना था। भरत सिंह कुंदनपुर मेरे साथ मंत्री भी रहे। मैं ईश्वर से श्री भरत सिंह जी की आत्मा को शांति एवं उनके परिजनों को हिम्मत देने की प्रार्थना करता हूं।

69वें आधारशिला दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे नामकरण पट्टिका अनावरण का सम्मान समारोह

उज्जैन  सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय अपने 69वें आधारशिला दिवस की तैयारी कर रहा है। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय की नामकरण पट्टिका का अनावरण भी करेंगे।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में कार्यपरिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहेंगे। विश्वविद्यालय का नामकरण हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29वें दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल की उपस्थिति में यह घोषणा की थी। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश के राजपत्र में भी इस नामकरण का प्रकाशन हो चुका है। विश्वविद्यालय की आधारशिला 23 अक्टूबर 1956 को तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने रखी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मार्च 1957 को हुई थी।  

गया में जन सुराज नेता पर जानलेवा हमला, चुनावी माहौल हुआ तनावपूर्ण

गयाजी बिहार विधानसभा 2025 चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद से चुनावी हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इसी क्रम में गयाजी के जन सुराज नेता और नगर निगम पार्षद  गजेंद्र सिंह पर बाइक सवार अपराधियों ने गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया। घटना में अपराधियों ने स्कॉर्पियो वाहन पर गोली चलाई, जिसमें एक गोली वाहन को लगी और दो गोलियां चूक गईं। हालांकि, नेता बाल-बाल बच गए। जानकारी के अनुसार,  गजेंद्र सिंह सोमवार की देर रात गयाजी शहर के चंदौती थाना क्षेत्र से अपने वाहन से लौट रहे थे। वे उस दौरान एक परिचित से मिलने गए थे। इसके बाद वह अपने आवास एपी कॉलनी लौट रहे थे। चंदौती रोड में, एलआईसी कार्यालय के पास, बाइक सवार अपराधियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। गोलीबारी के दौरान  गजेंद्र सिंह ने वाहन को तेज रफ्तार में भगाया और रामपुर थाना पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। रामपुर थाना की पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष दिनेश बहादुर सिंह ने बताया कि वारदात ऐसी जगह पर हुई है, जहां कोई CCTV कैमरा नहीं लगा हुआ था। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है और जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। गजेंद्र सिंह वर्तमान में गयाजी नगर निगम के वार्ड पार्षद हैं। वे गयाजी टाउन विधानसभा क्षेत्र से जनसुराज पार्टी के संभावित प्रत्याशी भी माने जा रहे हैं। उन्होंने वारदात में शामिल अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग उठाई है।