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बीड़ी-खनन श्रमिकों के बच्चों के लिए सरकार की बड़ी योजना, छात्रवृत्ति 1,000–25,000 रुपये

बीड़ी और खनन श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई में सरकार देगी सहयोग, ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ राज्य सरकार देगी 1,000 से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति बीड़ी-खनन श्रमिकों के बच्चों के लिए सरकार की बड़ी योजना, छात्रवृत्ति 1,000–25,000 रुपये सरकारी छात्रवृत्ति योजना: बीड़ी और खनन श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई में मदद, ऑनलाइन आवेदन शुरू बीड़ी व खनन श्रमिकों के बच्चों के लिए 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति, आवेदन ऑनलाइन शिक्षा में समान अवसर: श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगी आर्थिक सहायता, ऑनलाइन आवेदन जारी बीड़ी-खनन श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई को बढ़ावा, सरकार देगी 1,000–25,000 रुपये की छात्रवृत्ति भोपाल  शैक्षणिक सत्र-2025-26 के लिए शिक्षा के लिये वित्तीय सहायता योजना के अंतर्गत मान्यता प्राप्त शिक्षण-संस्थाओं में अध्ययनरत प्रदेश के बीड़ी, चूना पत्थर एवं डोलोमाट और लौह-मैग्रीज-क्रोम अयस्क खनन श्रमिक एवं उनके पुत्र-पुत्रियों को शिक्षा के लिये कक्षा एक से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति की राशि रूपये 1000/- से 25000/- स्वीकृत की गई है। योजनांतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिये पात्र विद्यार्थियों के लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (https://scholarships.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया दिनांक-02.06.2025 से प्रारम्भ हो चुकी है। इसकी अंतिम तिथि प्री. मेट्रिक के लिये 31 अगस्त 2025 एवं पोस्ट मेट्रिक के लिये 31 अक्टूबर 2025 निर्धारित है। छात्रवृत्ति के लिये आवेदन करने के लिए ओ.टी.आर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) और फेस ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। आवेदन की पात्रता व संबंधित अन्य जानकारी/शर्तें नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर उपलब्ध है। ऑनलाइन आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेजों को स्कैन कर अपलोड करें जो कि स्पष्ट और पठनीय हो। ऑनलाइन आवेदन करने संबंधी अन्य किसी भी प्रकार की जानकारी के लिये जबलपुर मुख्यालय के दूरभाष क्रमांक 0761-4039511, 4039510 या e-mail ID -wc.jabalpur@rediffmail.com. wcjab@mp.gov.in तथा कल्याण प्रशासक कार्यालय, इन्दौर के दूरभाष क्रमांक- 0731-2703530 व e-mail-ID waind@mp.gov.in पर संपर्क स्थापित किया जा सकता है। मध्यप्रदेश परिक्षेत्र में संचालित अपने नजदीकी औषधालयों एवं केन्द्रीय चिकित्सालय सागर में व्यक्तिगत रूप से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। शिक्षण संस्थान द्वारा सत्यापित नहीं किए गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जायेगा। सभी विद्यार्थियों से अनुरोध है कि आवेदन के पश्चात् अपने विद्यालय/महाविद्यालय में संपर्क स्थापित कर अपने आवेदन को स्कॉलरशिप पोर्टल (https://scholarships.gov.in) के माध्यम से ही सत्यापित करवाना सुनिश्चित करें।  

टमाटर 80, शिमला मिर्च 120 रुपए किलो: बरसात में सब्जियों की कीमतें हो गईं महंगी

रांची  बरसात के मौसम में सब्जियों की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. सब्जियां महंगी होने से रसोई के बजट और खाने के स्वाद पर भी असर पड़ा है. झारखंड की राजधानी रांची की सब्जी मंडी में टमाटर 80 रुपए तो फूलगोभी और बींस 100 रुपए प्रति किलो के भाव पर है. भिंडी से लेकर तमाम दूसरी सब्जियां भी महंगी हैं और हरी सब्जी बमुश्किल ही 80 या 70 रुपये किलो से कम के भाव पर मिल पाए. गाजर भी आम लोगों के पहुंच से बाहर है. वहीं, शिमला मिर्च तो आंसू निकाल रही है, उसके भाव 120 रुपए किलो हैं. दुकानदारों का कहना है कि सुबह से वो दुकान सजाकर बैठे हैं लेकिन ग्राहक नदारद हैं. सब्जी बेशक महंगी है लेकिन दुकानदारों का कहना है कि इसमें उनका कोई कुसूर नहीं, उन्हें भी सब्जी महंगे दाम पर मिल रही है. दुकानदारों का कहना है कि उन्हें पता चला कि किसानों को लगातार बीते 3 महीनों से हो रहे बारिश के कारण नुकसान हुआ है. लिहाजा सामान कम है और डिमांड ज्यादा. जिसकी पूर्ति वो नहीं कर पा रहे हैं.सब्जियां खेतो में ही खराब हो गई हैं, जिसकी वजह से दाम आसमान छू रहे हैं. इधर ग्राहकों की कमी की ये भी वजह मानी जा रही है कि हरी सब्जियों की खरीदारी वो जरूरत के मुताबिक करते हैं और सप्लीमेंट्री सब्जी यानी चना, सोयाबीन वगैरह पर निर्भरता बढ़ रही है. वहीं, दुकानदारों को अगले 2 महीनों तक राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच बढ़ाने के लिए विमान सेवाओं का विस्तार

सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच के लिए प्रदेश में किया जाएगा विमान सेवाओं का विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच बढ़ाने के लिए विमान सेवाओं का विस्तार मुख्यमंत्री ने किया विमान सेवाओं के विस्तार का ऐलान, सुदूर अंचलों तक पहुंचेगी हवाई सुविधा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुदूर अंचलों तक हवाई पहुंच संभव करने के लिए सरकार द्वारा विमान सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है, प्रदेश में हर 150 किलोमीटर पर एक हवाई अड्डा और हर 75 किलोमीटर पर एक हवाई पट्टी उपलब्ध हो। इससे न केवल शहरी क्षेत्र बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाके भी हवाई नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की कड़ी में रीवा, सतना और दतिया में नए हवाई अड्डों का शुभारंभ किया गया है। प्रदेश में हवाई अड्डों की संख्या बीते एक वर्ष में 5 से बढ़कर 8 हो गई है। शिवपुरी में नए हवाई अड्डे के लिए अनुबंध भी हो चुका है। मध्यप्रदेश हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से पर्यटन, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं को बढ़ावा देना है। नए हवाई अड्डों और हवाई पट्टियों के निर्माण से कनेक्टिविटी में सुधार होगा। साथ ही ­स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।  

हाईकोर्ट का तलाक पर अहम आदेश: पत्नी का व्यवहार बदला, बेरोजगार पति को ताने देना क्रूरता मानी

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने तलाक केस में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि, बेरोजगार पति को ताना मारना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए पत्नी फटकारा।  दरअसल, भिलाई निवासी अनिल कुमार सोनमणि उर्फ अनिल स्वामी पेशे से वकील है। उनकी शादी 26 दिसंबर 1996 को हिंदू रीति रिवाज से हुई थी। शादी के बाद सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन समय के साथ पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा। इस दौरान उनके दो बच्चे भी हो गए। अब उनकी बेटी 19 साल और बेटा 16 साल का है। इसी दौरान पति ने अपनी पत्नी को पीएचडी कराया। जिसके बाद वो प्रिंसिपल की नौकरी जॉइन की। वकील पति का आरोप है कि, प्रिंसिपल बनने के बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया। वो अक्सर छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने लगी। कोरोना काल में बेरोजगार हो गया पति कोरोना काल में जब कोर्ट बंद हो गए थे। तब पति की वकालत से आय भी बंद हो गई। ऐसे में प्रिंसिपल पत्नी ने बेरोजगार पति को ताने मारना शुरू कर दिया। बात-बात पर झगड़ा कर पति को अपमानित भी करने लगी। जिससे पति मानसिक तनाव में आ गया। पत्र लिखकर पति-बेटे से तोड़ दी रिश्ता पति का आरोप है कि, अगस्त 2020 में विवाद के बाद वो बेटी को लेकर अपनी बहन के पास चली गई। कुछ दिनों बाद लौटी, लेकिन 16 सितंबर 2020 को फिर से चली गई। उसने एक पत्र भी छोड़ा, जिसमें लिखा था कि वो अपनी मर्जी से पति और बेटे से सारे रिश्ते तोड़ रही है। पति बोला- रिश्ता जोड़ने की कोशिश हुआ नाकाम पति ने कोर्ट को बताया कि, पत्नी को वापस लाने कई प्रयास किए, लेकिन वो नहीं लौटी। उन्होंने रिश्ता जोड़ने की कोशिश भी की। लेकिन, सफलता नहीं मिली, जिससे परेशान होकर पति ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में तलाक का मामला पेश किया। इसमें तर्क दिया कि पत्नी ने जानबूझकर और बिना कारण वैवाहिक घर छोड़ा। कई बार मनाने के प्रयास के बावजूद वह नहीं लौटी। बेटे को उसके पास छोड़ दिया और बेटी को अपने साथ ले गई। घर में रहते हुए पत्नी ने गाली-गलौज, ताने और अपमानजनक शब्द कहकर मानसिक क्रूरता की। लेकिन फैमिली कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया। फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। इस मामले की सुनवाई के दौरान नोटिस और अखबार में प्रकाशन के बावजूद पत्नी हाईकोर्ट में पेश नहीं हुई। हाईकोर्ट ने पति और गवाहों के बयान, पत्नी का छोड़ा हुआ पत्र और दस्तावेजों के आधार पर फैमिली कोर्ट का फैसला निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि, पत्नी ने बिना किसी वैध कारण के पति को छोड़ा है। उसके व्यवहार से मानसिक क्रूरता साबित होती है। इसके अलावा अब दोनों के बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं है। इसलिए पति की तलाक की अर्जी मंजूर की जाती है।

एशियन डेवलपमेंट बैंक सहयोग से नेमावर में पेयजल परियोजना, जल्द लाभान्वित होंगे हजारों लोग

भोपाल  मध्यप्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधीनस्थ उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा देवास जिले के नेमावर नगर परिषद् में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ए.डी.बी.) के सहयोग से एक महत्वाकांक्षी जल प्रदाय परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। यह परियोजना 10 वर्षों के संचालन एवं संधारण के साथ लगभग 21 करोड़ रूपये की लागत से क्रियान्वित की जा रही है। इसके अंतर्गत 1640 घरों को घरेलू नल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे 6,498 की आबादी को प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। परियोजना के तहत् मध्यप्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी से पानी लाकर उसे 2.41 एमएलडी क्षमता वाले जल शोधन संयंत्र में शोधित किया जाएगा। शोधित जल को लगभग 36 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन के माध्यम से पूरे नगर में पहुँचाया जाएगा। शहर में जल भंडारण के लिए 2 ओवरहैड टैंक का निर्माण भी पूर्णता की ओर है। इससे जल आपूर्ति व्यवस्था को स्थायित्व और नियमितता प्राप्त होगी। यह परियोजना नेमावर नगर में नागरिकों की मूलभूत आवश्यकता – शुद्ध पेयजल – की सुनिश्चित आपूर्ति के लिये एक बड़ा कदम है। परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के सामाजिक एवं स्वास्थ्य स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आयेगा।  

ऊर्जा मंत्री तोमर का निर्देश: झांकी-पंडाल सजाने के लिए अस्थाई कनेक्शन का ही उपयोग करें

भोपाल गणेशोत्सव त्यौहार तथा अन्य त्यौहारों में पंडालों को अस्थायी कनेक्शन देने के लिए विद्युत वितरण कंपनियों ने माकूल प्रबंध किए हैं। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने धार्मिक उत्सव समितियों और बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे गणेशोत्सव के दौरान धार्मिक पण्डालों एवं झॉंकियों में बिजली साज-सज्जा,नियमानुसार ऑनलाइन अस्थाई कनेक्शन लेकर ही करें। अस्थाई कनेक्शन लेने के लिये क्या करें बिजली कंपनी के पोर्टल http://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home पर जाकर निर्धारित प्रपत्र में सही, संयोजित विद्युत भार को दर्शाते हुए अस्थायी कनेक्शन के लिये ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करें। लायसेंसी विद्युत ठेकेदार की टेस्ट रिपोर्ट आवेदन में संलग्न करें एवं वायरिंग इत्यादि लायसेंसधारी विद्युत ठेकेदार से ही करवाएं। आवेदन में दर्शाए अनुसार विद्युत भार के अनुरूप सुरक्षा निधि एवं अनुमानित विद्युत उपभोग की राशि अग्रिम जमा कराकर बिजली कंपनी से अस्थाई कनेक्शन की रसीद अवश्य लें। रसीद की लेमीनेटेड प्रति अनिवार्य रूप से पंडाल/झॉंकी के सामने लगाएं। आवेदित विद्युत भार से अधिक भार का उपयोग विद्युत साज-सज्जा के लिए न करें। विद्युत कनेक्शन मीटरीकृत होगा एवं विद्युत देयक की बिलिंग नियमानुसार अस्थायी कनेक्शन के लिये लागू घरेलू दर पर की जाएगी। झांकियों के निर्माण एवं विद्युत साज-सज्जा में सुरक्षा नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करें। अनधिकृत तरीके से विद्युत का उपयोग न करें। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी कॉल कर सकते हैं। अस्थाई कनेक्शन न लेने से होने वाले नुकसान अधिक भार से ट्रांसफार्मर के जलने की संभावना तथा दुर्घटना की आशंका। पारेषण एव वितरण प्रणाली पर विपरीत असर होने से अंधेरे की संभावना। अनधिकृत विद्युत उपयोग करने पर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत उपयोगकर्ता एवं जिस विद्युत ठेकेदार से कार्य कराया गया है, उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही। अनधिकृत विद्युत उपयोग की दशा में संबंधित विद्युत ठेकेदार के लायसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही।  

रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार MP में, चीन से आज़ादी की राह आसान: मुख्यमंत्री यादव

मध्यप्रदेश अब बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स हब: मुख्यमंत्री डॉ. यादव रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार MP में, चीन से आज़ादी की राह आसान: मुख्यमंत्री यादव मध्यप्रदेश में मिला रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार, चीन पर निर्भरता होगी समाप्त: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब क्रिटिकल मिनरल्स हब बनेगा। मध्यप्रदेश ऊर्जा राजधानी के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की राजधानी भी कहलाएगा। इसके साथ ही भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी देश बनेगा। सिंगरौली जिले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) का अकूत भंडार मिलने से अब भारत की चीन जैसे देशों पर निर्भरता नहीं रहेगी। केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संसद में जानकारी दी थी कि भारत में पहली बार इतनी विशाल मात्रा में इन दुर्लभ तत्वों का पता चला है। यह उपलब्धि भारत को ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। भारत को आत्मनिर्भर बनाने की ओर बड़ा कदम रेयर अर्थ एलिमेंट्स को आधुनिक तकनीक का आधार कहा जाता है। अब तक भारत इन खनिजों के लिए चीन और अन्य देशों पर निर्भर रहा है। प्रदेश के सिंगरौली की यह खोज भारत को आयात-निर्भरता से मुक्त कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएगी। आने वाले समय में यह खोज आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने के साथ ही औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देगी। सिंगरौली : भविष्य का क्रिटिकल मिनरल हब कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा किए गए शोध में सिंगरौली की कोयला खदानों और चट्टानों में REEs (जैसे स्कैंडियम, यिट्रियम आदि) की आशाजनक सांद्रता पाई गई है। कोयले में इनकी औसत मात्रा 250 पीपीएम और गैर-कोयला स्तर पर लगभग 400 पीपीएम आंकी गई है। जुलाई 2025 में इस खोज की आधिकारिक घोषणा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कोयले की राख और ओवरबर्डन भी क्रिटिकल मिनरल्स का सैकण्डरी स्रोत बन सकते हैं। आईआरईएल के साथ सहयोग रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज को देखते हुए राज्य सरकार अब इनके प्रसंस्करण और शोध-अन्वेषण के लिए बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में जुटी है। हाल ही में खनिज संसाधन विभाग के प्रतिनिधिमंडल ने इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड (आईआरईएल) की भोपाल इकाई का दौरा किया और संभावित सहयोग पर चर्चा की। विभाग रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की संभावनाएं तलाश रहा है, जो अनुसंधान, प्रशिक्षण और उद्योग को विश्वस्तरीय आधार प्रदान करेगा। वैश्विक नेतृत्व की ओर भारत सिंगरौली जिले में मिले इस खजाने से भारत ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों और उच्च तकनीकी उद्योगों में आत्मनिर्भर बनेगा। आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश केवल ऊर्जा राजधानी ही नहीं बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स की राजधानी भी कहलाएगा। चीन पर निर्भरता समाप्त होगी और भारत वैश्विक मंच पर शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित होगा। प्रमुख स्रोत और भूगर्भीय संरचनाएँ रेयर अर्थ एलिमेंट्स प्राकृतिक रूप से कई खनिज संरचनाओं में पाए जाते हैं। इनमें बास्टनेसाइट, जेनोटाइम, लोपेराइट और मोनाजाइट प्रमुख हैं। भारत के तटीय क्षेत्रों की रेत और अपक्षयित ग्रेनाइट मिट्टी भी इन तत्वों से समृद्ध मानी जाती है। रेयर अर्थ एलिमेंट्स के उपयोग रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उपयोग अनेक आधुनिक उद्योगों में किया जाता है, इसमें प्रमुख हैं:-     रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक : सैमरियम-कोबाल्ट और नियोडिमियम चुम्बक उच्च-प्रदर्शन वाले हथियारों, उपग्रह संचार और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में अनिवार्य हैं।     पेट्रोलियम उद्योग : लैंथेनम और सेरियम का उपयोग ऑटोमोटिव कैटेलिटिक कन्वर्टर्स और रिफाइनिंग में उत्सर्जन कम करने में होता है।     स्थायी चुम्बक : नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन तथा सैमरियम-कोबाल्ट चुम्बक इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिए आवश्यक हैं।     डिस्प्ले और प्रकाश उपकरण : यूरोपियम, टर्बियम और यिट्रियम एलईडी, एलसीडी और फ्लैट पैनल डिस्प्ले में उपयोग में आते हैं। कैमरा और स्मार्टफोन लेंस 50% तक लैथेनम से निर्मित होता है।     ऑटोमोबाइल सेक्टर : हाइब्रिड वाहनों की बैटरियों में लैथेनम आधारित मिश्र धातुओं का प्रयोग होता है।     इस्पात और मिश्रधातु : मिशमेटल (सेरियम, लैथेनम, नियोडिमियम और प्रेजोडायमियम का मिश्रण) इस्पात की गुणवत्ता सुधारने में उपयोगी है।     स्वास्थ्य क्षेत्र : गैडोलीनियम MRI स्कैन में कंट्रास्ट एजेंट के रूप में प्रयोग होता है, जबकि ल्यूटेटियम और यिट्रियम समस्थानिक कैंसर उपचार और PET इमेजिंग में सहायक हैं।  

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: अवैध निर्माण पर कार्रवाई जरूरी, उगाही के लिए कोर्ट का इस्तेमाल नहीं

नई दिल्ली अनधिकृत निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि दिल्ली में अनधिकृत निर्माण करने वालों से धन उगाही के लिए अदालत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा कि अनधिकृत निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन इस न्यायालय का इस्तेमाल ऐसे निर्माण करने वालों से धन उगाही के लिए नहीं किया जा सकता। यह स्पष्ट रूप से न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।   तीन लोगों ने डाली थी याचिका अदालत ने उक्त टिप्पणी जामिया नगर इलाके में एक संपत्ति पर तीन व्यक्तियों द्वारा किए जा रहे अवैध और अनधिकृत निर्माण को रोकने और उसे ध्वस्त करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग से जुड़ी तीन व्यक्तियों की याचिका पर की। पीठ ने नोट किया कि याचिकाकर्ता दिल्ली के बजाय अमरोहा का निवासी है और उसका संबंधित निर्माण और इलाके से कोई सरोकार है। अदालत ने यह भी पाया कि एक ही संपत्ति के लिए तीन अलग-अलग लोगों द्वारा याचिकाएं दायर की गई हैं। ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया सुनवाई के दौरान दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने तर्क दिया कि एक कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 10 जुलाई को आंशिक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है और आगे की कार्रवाई चार सितंबर के लिए निर्धारित की गई थी। वहीं, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की तरफ से तर्क दिया गया कि हाई कोर्ट के समक्ष ऐसे कई मामले हैं, जिनमें ऐसे लोगों द्वारा याचिकाएं दायर की गई थीं जो न तो उस इलाके में रहते हैं और न ही उस संपत्ति से उनका कोई संबंध है। कैसे दायर हो रहीं अलग-अलग याचिकाएं अदालत ने नोट किया कि मामले की सुनवाई शुरू होने पर याचिकाकर्ता की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ, जबकि आदेश पारित होने से पहले मामले की कुछ समय तक सुनवाई हो चुकी थी। तथ्यों को रिकार्ड पर लेते हुए पीठ ने कहा कि एमसीडी पहले ही संबंधित संपत्ति में मौजूद अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, लेकिन अनधिकृत निर्माण होने के संबंध में लोगों को ब्लैकमेल करके उनसे जबरन वसूली करने के उद्देश्य से दायर की जाने वाली ऐसी याचिकाओं को उचित नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, अदालत ने संबंधित डीसीपी को यह जांच करने का निर्देश दिया कि एक ही संपत्ति के संबंध में अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा अलग-अलग याचिकाएं कैसे दायर की जा रही हैं।

राहुल गांधी के आने से दिलचस्प हुआ चुनावी मुकाबला, भाजपा के मजबूत किले पर कांग्रेस ने की दस्तक

गयाजी आरोप-प्रत्यारोप के बीच 'वोटर अधिकार यात्रा' के दूसरे दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने महागठबंधन के सहयोगियों के साथ भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत दरवाजे (गयाजी) पर दस्तक दे दी। कई जगह छोटी-छोटी जनसभा के बीच उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सीधे निशाना बनाया और चुनाव आयोग को भी आड़े हाथ लिया, लेकिन राहुल के इन भाषणों का गयाजी की जनता पर उतना प्रभाव देखने को नहीं मिला, जितना यह देखा जा रहा था कि यात्रा की भीड़ में टिकटार्थी और समर्थक के लोग कितने हौसले बुलंद कर जयकारा लगा रहे थे। कांग्रेस-राजद के झंडे और बैनर से पूरा यात्रा मार्ग पटा हुआ था। एक से एक होर्डिंग चुनावी दुदुंभी बजा रहे थे, जबकि महागठबंधन के सभी नेता इस बात से वाकिफ थे कि गयाजी भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ है। गया का सियासी समीकरण 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जय कुमार पालित विधायक बने। उसके बाद से कांग्रेस ने फिर कभी गया शहरी सीट पर अपना वर्चस्व नहीं कायम किया। जबकि 1985 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी पूर्णानंद तरवे 9,213 वोट लाकर तीसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस के पालित को 34,450 वोट और कम्युनिष्ट पार्टी के शकील अहमद खां को 26,180 मत मिले थे। तीसरे नंबर पर रहने वाली भाजपा ने 1990 के चुनाव में छलांग लगाई और 27,186 वोट लाकर डा. प्रेम कुमार ने विजय पताका फहराया। तब से अब तक भाजपा का विधानसभा में चुनावी रथ लगातार भाग रहा है। कुछ चुनाव में वोटों के प्रतिशत में उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन जीत जारी है। वैसे क्षेत्र में महागठबंधन के कांग्रेस-राजद के बड़े नेता का दस्तक देना एक बड़ी बात है। इस लहजे से कि डबल इंजन की सरकार की कमियों को मतदाताओं के बीच लाकर उनके लाभ की बात करना है। वैसे में महागठबंधन कितना सफल होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल, महागठबंधन का एक बड़ा चुनावी प्रचार गयाजी की धरती से विदा हो गया। तो गयाजी वासी अब 22 अगस्त को भाजपा के शीर्ष नेता व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन की प्रतीक्षा में हैं।

सलोनी हार्ट सेंटर से जीवन में आई नई उम्मीद, सीएम योगी ने सराहा प्रयास

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ में एसबीआई फाउंडेशन आईसीयू प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया। यह प्रोजेक्ट सलोनी हार्ट सेंटर में संचालित होगा, जो बच्चों की जन्मजात हृदय बीमारियों के उपचार के लिए समर्पित है। इस अवसर पर एसबीआई फाउंडेशन ने लगभग 10 करोड़ रुपए का सहयोग प्रदान किया। इस राशि से सेंटर को आधुनिक उपकरणों और आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बच्चों के हृदय रोगों के लिए उच्च स्तरीय उपचार सुविधा की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। ऐसे में सलोनी हार्ट सेंटर प्रदेश की एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि डेढ़ वर्ष पूर्व शुभारंभ किए गए इस सेंटर में अब तक 300 से अधिक बच्चों की हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक हो चुकी है। हार्ट सेंटर का पहला चरण पूर्णतः क्रियाशील है, जबकि दूसरे चरण का कार्य तेजी से प्रगति पर है। सीएम योगी ने सलोनी हार्ट फाउंडेशन की संचालक दंपति मिली सेठ एवं हिमांशु सेठ के प्रयासों की सराहना की, साथ ही एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सलोनी हार्ट सेंटर प्रदेश के हजारों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद का संचार कर रहा है। यह पहल 2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का प्रत्यक्ष सुफल है और बच्चों के जीवन की रक्षा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश ने पूर्व में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है और अब बच्चों के हृदय रोगों के उपचार में भी ठोस प्रगति हो रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एसबीआई फाउंडेशन का यह सहयोग सलोनी हार्ट सेंटर को और अधिक क्षमता सम्पन्न बनाएगा और आने वाले समय में बच्चों के जीवन की रक्षा में मील का पत्थर सिद्ध होगा। इस अवसर पर एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके. धीमान ने मुख्यमंत्री को हार्ट सेंटर की स्थापना से लेकर अब तक की गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी भी दी।