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प्राइवेट स्कूलों को पछाड़ सरकारी स्कूल आगे, CBSE 12वीं में भोपाल रीजन देशभर में 19वें स्थान पर

भोपाल  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं परीक्षा 2026 के नतीजों ने मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है। जहां सरकारी मॉडल पर संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार परिणाम देकर बेहतर शैक्षणिक योग्यता दिखाई।  खास बात यह है कि इन निजी स्कूलों की फीस आमतौर पर JNV और KV की तुलना में कहीं अधिक होती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन का असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा है। इसी कारण मध्य प्रदेश का भोपाल रीजन देश के 22 सीबीएसई रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया और भोपाल रीजन में लड़कियां करीब पांच प्रतिशत अंकों से आगे रहीं। नवोदय विद्यालय सबसे आगे सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालयों का रहा। JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.81% और लड़कियों का 98.73% रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, नवोदय विद्यालयों की रेजिडेंशियल व्यवस्था, अनुशासित माहौल और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग इसकी बड़ी वजह है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाला यह मॉडल लगातार सफल साबित हो रहा है। केंद्रीय विद्यालयों ने भी कायम रखी बढ़त केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। इनका कुल पास प्रतिशत 97.90% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.66% और लड़कियों का 98.11% रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक, राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम और नियमित मूल्यांकन केंद्रीय विद्यालयों की सफलता का आधार हैं। यही वजह है कि इनके परिणाम लगातार राष्ट्रीय औसत से बेहतर बने रहते हैं। आदिवासी छात्रों के स्कूलों ने भी किया बेहतर प्रदर्शन एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) का कुल पास प्रतिशत 85.47% रहा। लड़कों का परिणाम 83.46% और लड़कियों का 86.89% दर्ज किया गया। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर परिणाम देकर बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का संकेत दिया। सरकारी स्कूलों के सामने संसाधनों की चुनौती सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा। लड़कों का रिजल्ट 79.86% और लड़कियों का 80.88% दर्ज किया गया। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन संतोषजनक है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संसाधनों में सुधार से परिणाम बेहतर हो सकते हैं। सबसे ज्यादा छात्र, फिर भी सबसे कमजोर निजी स्कूल सबसे चिंताजनक तस्वीर निजी स्कूलों की रही। सीबीएसई से संबद्ध इंडिपेंडेंट स्कूलों में सबसे अधिक 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 61,242 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। लड़कों का परिणाम 74.12% और लड़कियों का 80.02% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक दबाव, बोर्ड परीक्षा की अपर्याप्त तैयारी और छात्रों पर बढ़ता मानसिक तनाव निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन के कारण हो सकते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। लड़कों का पास प्रतिशत 76.87, लड़कियों का 82.19 पूरे परिणाम में एक समान ट्रेंड देखने को मिला हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों को पीछे छोड़ा। भोपाल रीजन में लड़कों का पास प्रतिशत 76.87% रहा, जबकि लड़कियों का परिणाम 82.19% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित अध्ययन, परीक्षा के प्रति गंभीरता और करियर को लेकर बढ़ती जागरूकता छात्राओं की सफलता के प्रमुख कारण हैं। 12% से ज्यादा छात्र सभी विषयों में फेल भोपाल रीजन के नतीजों में एक गंभीर तथ्य भी सामने आया। कुल परीक्षार्थियों में 12.14% छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में असफल हो गए। शिक्षा विशेषज्ञ इसे केवल छात्रों की तैयारी का नहीं, बल्कि स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। कोविड के बाद सीखने के स्तर में आई गिरावट, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और नियमित पढ़ाई में कमी को भी इसकी वजह माना जा रहा है। देश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीएसई रीजन भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े सीबीएसई रीजन में शामिल है। यहां सीबीएसई से संबद्ध 1291 स्कूल संचालित हैं। स्कूलों की संख्या के लिहाज से यह 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा संचालन और परिणाम प्रबंधन को बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जाता है।

UP में सरकारी योजना पर सख्ती, बिजनेस शुरू नहीं करने वालों से होगी रकम की रिकवरी

 लखनऊ  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना के तहत ऋण लेने वाले युवाओं का सत्यापन का कार्य शुरू किया है। विभाग ने इसके लिए मोबाइल एप्लीकेशन (एप) तैयार किया है। इस एप के जरिए योजना के तहत ऋण लेने वाले युवाओं का स्थलीय सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन की जिम्मेदारी एमएसएमई विभाग ने सीएम फेलो को दी है। सीएम फेलो अपने-अपने क्षेत्रों में ऋण लेने वाले युवा की जानकारी देंगे कि संबंधित युवा ने ऋण लेने के बाद काम शुरू किया या नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर 24 जनवरी 2025 को योजना का शुभारंभ किया था। योजना के तहत राज्य के युवाओं को बिना गारंटी व ब्याज के अपना उद्यम शुरू करने के लिए पांच लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जा रहा है। ऋण लेने के बाद शुरू नहीं किया कारोबार अभी तक 1,69,271 युवाओं को 6955 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। एमएसएमई विभाग की जानकारी इस प्रकार के कई मामले आए हैं जिनमें युवाओं ने ऋण लेने के बाद कारोबार शुरू नहीं किया है। नतीजतन अब विभाग ने ऋण लेने वाले सभी युवाओं का सत्यापन शुरू कराया है। सत्यापन के कार्य में जुटे कर्मी युवाओं की उनके उद्यम के साथ फोटो और वीडियो के साथ गूगल के जरिए मोबाइल एप पर लोकेशन भी अपडेट कर रहे हैं। सत्यापन के समय इस बात की भी जानकारी एकत्र की जा रही है कि संबंधित युवा ने अपना कारोबार शुरू करने के बाद कितने लोगों को रोजगार दिया है। किस प्रकार का कारोबार शुरू किया है, ऋण लेते समय जिस उद्यम को स्थापित किए जाने की सहमति संबंधित युवा ने दी थी उसने वही उद्यम स्थापित किया है या नहीं। माह में कितनी कमाई हो रही है, जैसी जानकारियां भी एप पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अगर किसी युवा ने ऋण ले लिया और कारोबार शुरू नहीं किया है तो उससे ऋण की राशि की वसूली की जाएगी।  

मध्यप्रदेश में हीट वेव का कहर: मंदसौर में ट्रांसफॉर्मर ठंडा रखने के लिए लगाए गए कूलर

भोपाल  देश के अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। प्रदेश के कुछ इलाकों में पारा 45 पार तक जा रहा है। मालवा में दो दिन पहले जहां पारा 46 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया था, वहीं अब बुंदेलखंड में सबसे अधिक पारा दर्ज किया गया है। बता दें कि लगभग पूरा प्रदेश गर्मी की चपेट में है और अधिकांश इलाकों में भीषण लू झुलसा रही है। मौसम विभाग के अनुसार यह दौरान मई से जून तक चलेगा। फिलहाल 4 दिन प्रदेश में पारा और चढ़ने व रात में भी गर्म हवाओं का दौर चलेगा। कूलर-एसी भी राहत नहीं दे पाएंगे। इंदौर, उज्जैन-धार में वॉर्म नाइट की चेतावनी है। इस दौरान गर्म हवाएं चलेंगी। झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, देवास, सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में भी लू चलेगी। मंदसौर में तेज गर्मी और बढ़ते बिजली लोड के कारण ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि बिजली सप्लाई सुचारू रखने के लिए बड़े ट्रांसफॉर्मरों को कूलर लगाकर ठंडा रखना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में 15 मई से 18 मई तक प्रदेश के कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। सूरज की सीधी किरणों और पड़ोसी राज्यों से सीधी रेगिस्तानी गर्म हवाएं एमपी में आने के कारण यहां भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। आगामी दिनों में तापमान और ऊपर जाने की संभावना है। आईएमडी बुलेटिन के अनुसार अगले 4 दिन प्रदेश में मौसम इस तरह रहेगा। प्रदेश में कहां कितना तापमान     खजुराहो – 45.4°C     रतलाम – 45.2°C     धार – 45.0°C     नौगांव – 44.9°C     विदिशा – 44.8°C सबसे कम न्यूनतम तापमान     पचमढ़ी – 19.4°C     अमरकंटक – 20.7°C     मंडला – 23.2°C 15 मई को भोपाल, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास में तीव्र लू का अलर्ट है। इसी प्रकार विदिशा, राजगढ़, रीवा, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, नर्मदापुरम, हरदा, बुरहानपुर खंडवा, शिपुरी, अशोकनगर, गुना, नीमच, मंदसौर, आगर, शाजापुर, झाबुआ, श्योपुरकला, सिंगरौली, सीधी, रीवा, गवालियर, दतिया, भिंड, मुरैना सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में हीट वेव का यलो अलर्ट है।     16 से 18 मई तक कैसे रहेंगे हाल ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और मालवा क्षेत्र में तेज गर्म हवाओं का असर कई जिलों में तापमान 44 से 46 डिग्री तक पहुंचने की संभावना। इसमें सबसे ज्यादा गर्म क्षेत्रों में धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन सहित आसपास के इलाके में भीषण लू का अलर्ट रहेगा। वहीं पूरे प्रदेश में गर्म हवाएं और हीटवेव का असर दिखेगा।     बारिश की संभावना नहीं, तापमान बढ़ेगा मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी और उत्तरी हवाओं के प्रभाव से प्रदेश में शुष्क और गर्म मौसम बना हुआ है। फिलहाल बारिश की संभावना बेहद कम है, जबकि अगले कुछ दिनों तक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।     वार्म नाइट का इन जिलों में अलर्ट है आईएमडी बुलेटिन के अनुसार प्रदेश के धार, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और गुना में रात में भी गर्म हवाओं का प्रकोप रहेगा। यहां वार्म नाइट का अलर्ट भी दिया गया है।

ट्रैफिक और ईंधन बचाने की नई पहल, सरकार ने लागू किया ऑनलाइन क्लास और वर्क फ्रॉम होम मॉडल

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील को लागू करने का फैसला किया है. इसमें रेखा सरकार के आदेश के अनुसार, स्कूल-कॉलेज को ऑनलाइन जारी करने का आदेश दिया गया है. दरअसल, रेखा गुप्ता सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर पेट्रोल-डीजल की बेतहाशा खपत और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ नाम के एक अभियान का घोषणा किया है. इस अभियान में कई बड़े और चौंकाने वाले प्रशासनिक बदलावों की घोषणा की गई है. इन फैसलों का सीधा असर दिल्ली की सरकारी कार्यप्रणाली, यातायात और आम जनता के रूटीन पर पड़ेगा। सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों की टाइमिंग में बदलाव और साथ ही हफ्ते में कुछ दिन वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी गई है. उन्होंने कॉलेज स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने की अपील की है. साथ ही कोर्ट से भी ऑनलाइन सुनवाई के लिए निवेदन किया है. सरकार का मुख्य फोकस ईंधन की बचत और बिजली की खपत को कम करने पर है।  आइए जानते हैं सरकार द्वारा लिए गए अहम फैसले क्या हैं: दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सरकार ने दफ्तरों के समय में बड़ा बदलाव किया है- नया समय: दिल्ली सरकार के दफ्तर अब सुबह 10:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक खुलेंगे. वहीं, MCD के दफ्तरों का समय सुबह 7:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहेगा. वर्क फ्रॉम होम: दिल्ली सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) अनिवार्य कर दिया गया है. प्राइवेट कंपनियों को भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करने के लिए सरकार की तरफ से समान एडवाइजरी (Advisory) जारी की जाएगी।  ऑनलाइन ही होगी मीटिंग: सरकार की 50 प्रतिशत आधिकारिक बैठकें अब सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी।  ‘मेट्रो मंडे’ और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा: पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक नई पहल शुरू की है. सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को ‘मेट्रो मंडे’ (Metro Monday) घोषित किया गया है, जहां लोगों से मेट्रो का इस्तेमाल करने की अपील की गई है. जो सरकारी कर्मचारी ऑफिस आने-जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करेंगे, उनके ‘ट्रांसपोर्ट अलाउंस’ में 10% की बढ़ोतरी की जाएगी. सरकारी कॉलोनियों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 29 कॉलोनियों में 58 फीडर बसें (Feeder Buses) चलाई जाएंगी।  नो व्हीकल डे: जनता से अपील की गई है कि वे हफ्ते में कम से कम एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाएं और माल ढुलाई के लिए ट्रकों की जगह ट्रेनों का इस्तेमाल करें।  सरकारी खर्चे और VVIP कल्चर पर लगाम विदेश यात्राओं पर बैन: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सख्त निर्देश दिया है कि अगले एक साल तक दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या अधिकारी किसी भी आधिकारिक (Official) विदेश यात्रा पर नहीं जाएगा. आम जनता से भी विदेशी यात्राएं कम करने की अपील की गई है।      अगले 3 महीनों तक सरकार द्वारा आयोजित होने वाले सभी बड़े इवेंट्स कैंसिल कर दिए गए हैं.     अधिकारियों के पेट्रोल कोटे (लिमिट) में 20 प्रतिशत और डोमेस्टिक अलाउंस (घरेलू भत्ते) में भी 20% की कटौती की गई है.     अगले 6 महीनों तक सरकार के किसी भी विभाग में कोई नया वाहन नहीं खरीदा जाएगा. वाहनों का इस्तेमाल ‘न्यूनतम जरूरत’ के हिसाब से ही होगा. ऊर्जा बचत और EV पॉलिसी बिजली की खपत को नियंत्रित करने के लिए सरकारी दफ्तरों में AC का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखना अनिवार्य कर दिया गया है. बिजली की बर्बादी रोकने के लिए हर कॉरिडोर में एक ‘मास्टर स्विच’ लगाया जाएगा. इसके अलावा, सीएम ने जानकारी दी है कि अदालतों से भी निवेदन किया गया है कि वे ज्यादा से ज्यादा ‘ऑनलाइन हियरिंग’ (Online Hearing) करें। 

वोटर लिस्ट जांच को लेकर बड़ा अभियान, पंजाब-चंडीगढ़ में BLO करेंगे डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन

चंडीगढ़  पंजाब और चंडीगढ़ में चुनाव आयोग ने 15 जून से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू करने का ऐलान किया है। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और राज्य में करीब 2.14 करोड़ मतदाता हैं। SIR के तीसरी चरण के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस दौरान नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे, जबकि गलत, फर्जी या दोहराए गए नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। इस मुद्दे पर नेता विपक्ष और कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह ने कहा कि SIR के दौरान लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा- गांव उसी का बचता है, जिसका चौकीदार जागता है। ऐसा न हो कि बाद में पछताना पड़े। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी आखिरी दम तक अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी रहेगी और SIR प्रक्रिया पर पूरी नजर रखेगी। पार्टी अपने वोटरों का ध्यान रखेगी और जिन लोगों की नई वोट बननी है, उनकी वोट भी बनवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हर बूथ पर अपने बीएलए तैनात कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी की वोट गलत तरीके से न काटी जा सके। SIR की प्रोसेस को 6 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य?     पेंशनर पहचान पत्र     किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र     जन्म प्रमाणपत्र     पासपोर्ट     10वीं की मार्कशीट     स्थायी निवास प्रमाणपत्र     वन अधिकार प्रमाणपत्र     जाति प्रमाणपत्र     राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम     परिवार रजिस्टर में नाम     जमीन या मकान आवंटन पत्र     आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने BJP को घेरा, अपराध के मुद्दे पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने अपराध के मुद्दे पर भाजपा शासित राज्यों को घेरते हुए बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि जिन राज्यों में लंबे समय से भाजपा की सरकार है, वहां अपराध तेजी से बढ़े हैं। चीमा कहा कि पंजाब में सख्त कार्रवाई और विशेष बलों के गठन के कारण अपराध की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में काफी नियंत्रित है। अपराध के आंकड़ों में दिल्ली सबसे ऊपर है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में अपराध दर 1602 अंक तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और चंडीगढ़ का भी उन्होंने जिक्र किया। चीमा ने कहा कि पंजाब में अपराध दर 227.1 अंक बताई गई है, जो अन्य कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए अलग-अलग विशेष बल तैयार किए हैं और अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पंजाब में लोगों को सुरक्षित माहौल देना है। चंडीगढ़ मेें बढ़ने लगा अपराध हरपाल चीमा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि जहां भी भाजपा जाती है, वहां कानून व्यवस्था खराब होने लगती है। उन्होंने चंडीगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले लोग यहां केवल यातायात नियमों को लेकर सतर्क रहते थे, लेकिन अब यहां हत्या जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने गायक दिलजीत दोसांझ से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। चीमा ने आरोप लगाया कि पहले भाजपा की ओर से उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की गई और अब उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिलजीत दोसांझ के प्रबंधक के घर पर हमला कर डराने की कोशिश की गई। चीमा ने इसे पंजाब विरोधी सोच बताया। लॉरेंस के मुद्दे पर भाजपा को घेरा वित्त मंत्री ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि लॉरेंस गुजरात की जेल में बंद है, लेकिन अलग-अलग राज्यों को जांच के लिए उसकी जरूरत होने के बावजूद उसे सुरक्षित रखा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके नाम का इस्तेमाल कर विभिन्न राज्यों में लोगों को डराने का माहौल बनाया जा रहा है। ईवीएम के बजाय मतपत्र से चुनाव कराने की मांग पर पूछे गए सवाल के जवाब में हरपाल चीमा ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास उम्मीदवार नहीं हैं, इसलिए वे इस तरह के आरोप लगाकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 

उप मुख्यमंत्री अरुण साव से फेडरेशन कप मिक्स्ड नेटबॉल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों ने की मुलाकात

बिलासपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव से आज 6वीं फेडरेशन कप मिक्स्ड नेटबॉल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करने वाली सफलता पर टीम के सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। हैदराबाद में आयोजित 6वीं फेडरेशन कप मिक्स्ड नेटबॉल चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया।  साव से मुलाकात के दौरान टीम की मैनेजर एवं नेटबॉल संघ के पदाधिकारी भी मौजूद थे।

मुख्य सचिव ने की अहम योजनाओं की समीक्षा, डेटा आधारित मॉनिटरिंग पर दिया जोर

मुख्य सचिव ने की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी पर जोर अंतिम छोर के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचाने के निर्देश आंगनबाड़ी और स्कूल भवनों के बुनियादी ढांचे में सुधार की प्राथमिकता रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में विभिन्न विभागों की जनोन्मुखी और महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने पांचवें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन की अनुशंसाओं पर हुई कार्रवाई की जानकारी ली और अधिकारियों को विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। डेटा आधारित निगरानी और सुशासन        मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने डेटा आधारित निगरानी प्रणाली (Data-driven Monitoring System) को और मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में सुशासन और प्रौद्योगिकी के माध्यम से क्षमता विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रस्तुतिकरण भी दिया गया। शिक्षा और आंगनबाड़ी बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण       शिक्षा और बच्चों के पोषण को प्राथमिकता देते हुए मुख्य सचिव ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवनों की समस्या है, वहां प्राथमिक शालाओं के अतिरिक्त कक्षों में आंगनबाड़ी संचालित करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कलेक्टरों के साथ समन्वय करने को कहा। समग्र शिक्षा के तहत जिन स्कूलों में कमरों की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। विभागीय प्रगति की विस्तृत समीक्षा           बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, खेल एवं युवा कल्याण, तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, आदिम जाति विकास, पर्यटन, ऊर्जा और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों की परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया। उच्च स्तरीय बैठक में गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, विधि विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, आदिम जाति विकास के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार सहित स्कूल शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन, और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा: छत्तीसगढ़ में मियावाकी तकनीक से तेजी से विकसित हो रहे वन

मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा  रायपुर              वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।          छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है। राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण        छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया। वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी           वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ          विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है।  बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल           छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल         कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है। वैज्ञानिक तरीके से किया गया पौधारोपण          डंप क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग किया गया। जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए तथा 3 से 4 फीट ऊंचाई वाले स्वस्थ पौधों का रोपण किया गया। इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भी उपयुक्त आवास बन सकेगा। निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता         शुरुआती 2-3 वर्षों की देखभाल के बाद, यह वन पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाता है और इसे किसी उर्वरक या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। रोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, निंदाई-गुड़ाई, घास कटाई और सुरक्षा का कार्य लगातार किया जा रहा है। मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से 2029 तक पांच वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड गेवरा को सौंपा जाएगा। हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल        कम जगह में घने जंगल बनाकर शहरों में प्रदूषण (धूल और ध्वनि) को कम करने में सहायक होते हैं। ये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। गेवरा की यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर प्रयासों से बंजर और पत्थरीली भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सघन हरित वन और जैव विविधता से भरपूर मानव निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।    धनंजय राठौर                             संयुक्त संचालक                         अशोक कुमार चंद्रवंशी                       सहायक जनसंपर्क … Read more

फेडरेशन कप नेटबॉल चैंपियनशिप के रजत पदक विजेताओं ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव से की मुलाकात

उप मुख्यमंत्री अरुण साव से फेडरेशन कप मिक्स्ड नेटबॉल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों ने की मुलाकात बिलासपुर. उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव से आज 6वीं फेडरेशन कप मिक्स्ड नेटबॉल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित करने वाली सफलता पर टीम के सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। हैदराबाद में आयोजित 6वीं फेडरेशन कप मिक्स्ड नेटबॉल चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। साव से मुलाकात के दौरान टीम की मैनेजर एवं नेटबॉल संघ के पदाधिकारी भी मौजूद थे।