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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सियान गुड़ी का किया शुभारंभ, बुजुर्गों के साथ कैरम खेलकर बढ़ाया हौंसला

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सियान गुड़ी का किया शुभारंभ : बुजुर्गों के साथ कैरम खेलकर वरिष्ठजनों का बढ़ाया हौंसला वरिष्ठ नागरिकों के लिए डे-केयर सुविधा से सुसज्जित केंद्र : योग, स्वास्थ्य, मनोरंजन और कौशल विकास की मिलेगी एक ही छत के नीचे सुविधा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विकसित अत्याधुनिक डे-केयर केंद्र ‘सियान गुड़ी’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने बुजुर्गों के साथ कैरम खेलकर उनका उत्साह बढ़ाया और आत्मीय संवाद स्थापित किया। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर वरिष्ठजन अत्यंत प्रसन्न नजर आए तथा उन्होंने राज्य सरकार द्वारा विकसित ‘सियान गुड़ी’ के लिए आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर बुजुर्गों को फूड बास्केट वितरित किए तथा धार्मिक पुस्तक, शॉल एवं श्रीफल भेंटकर उनका सम्मान किया। उन्होंने समाज में वरिष्ठजनों के सम्मान और उनकी देखभाल के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों के लिए जाना जाता है, लेकिन वर्तमान में समाज तेजी से बदल रहा है। एकल परिवार की बढ़ती प्रवृत्ति, रोजगार के लिए युवाओं का पलायन और व्यस्त जीवनशैली के कारण अनेक बुजुर्ग दिन के समय अकेलेपन और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अकेलापन केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन्हीं चुनौतियों के समाधान के लिए ‘डे-केयर सेंटर – सियान गुड़ी’ की परिकल्पना की गई है। यह भवन वरिष्ठ नागरिकों के लिए सम्मान, आत्मीयता और सक्रियता का एक सशक्त केंद्र बनेगा, जहां वे सुरक्षित वातावरण में दिन व्यतीत कर नई ऊर्जा और उत्साह प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने केंद्र का निरीक्षण करते हुए यहां उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की और इसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आदर्श पहल बताया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सियान गुड़ी’ के माध्यम से राज्य सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को अधिक सम्मानजनक, सक्रिय और खुशहाल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करते हुए पारिवारिक मूल्यों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि जशपुर में रणजीता स्टेडियम के पीछे भागलपुर रोड स्थित यह ‘सियान गुड़ी’ केंद्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक समग्र डे-केयर यूनिट के रूप में विकसित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन्हें एक ही स्थान पर बहुआयामी सेवाएं उपलब्ध कराना है। यहां योग, प्राणायाम, मनोरंजन, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक गतिविधियां, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता तथा कौशल विकास प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, बेसिक दवाओं की उपलब्धता, टेली कंसल्टेशन, स्वास्थ्य जागरूकता सत्र, फिजियोथैरेपी और व्यायाम की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त केंद्र में वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी एवं पारिवारिक परामर्श भी प्रदान किया जाएगा। उपेक्षा या दुर्व्यवहार की स्थिति में नेशनल हेल्पलाइन नंबर 14567 तथा राज्य स्तरीय सियान हेल्पलाइन नंबर 155326 के माध्यम से त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सुविधाओं की दृष्टि से ‘सियान गुड़ी’ को अत्याधुनिक रूप दिया गया है, जहां बाधारहित वातावरण, व्हील चेयर सुविधा, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, जेंडर पृथक एवं दिव्यांग अनुकूल शौचालय, सामूहिक गतिविधियों के लिए विशाल हॉल, पुस्तकालय एवं शांत रीडिंग कॉर्नर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही टीवी, रेडियो, सीसीटीवी, बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली, प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण डेस्क, मासिक चिकित्सकीय परामर्श, फिजियोथैरेपी कॉर्नर तथा टेलीमेडिसिन सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इस केंद्र में प्रतिदिन 6 से 8 घंटे तक वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग, व्यायाम, चाय-नाश्ता, भोजन, मनोरंजन, जीवन कौशल एवं पुनः कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, समूह चर्चा तथा कानूनी एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े विविध कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।  इस अवसर पर अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, विधायक पत्थलगांव श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेंद सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठजन उपस्थित थे।

पंजाब में RTE के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन शुरू, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने लिंक किया लाइव पोर्टल

चंडीगढ़  पंजाब में राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स के एडमिशन का प्रोसेस शुरू हो गया। एजुकेशन डिपार्टमेंट में एडमिशन के लिए पोर्टल लाइव कर दिया है। गरीब व डिसएडवांटेज्ड स्टूडेंट्स पोर्टल पर अप्लाई करके किसी भी प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले सकेंगे। स्टूडेंट्स सिर्फ एंट्री क्लास में ही फ्री एडमिशन ले सकेंगे। डिपार्टमेंट ने राज्यभर के स्कूलों को एंट्री क्लास में 25 फीसदी सीटें रिजर्व रखने के आदेश भी दिए हैं। जो भी इलिजिबल स्टूडेंट प्राइवेट स्कूल्स में एडमिशन लेना चाहता है उसे इस पोर्टल पर ऑनलाइन अप्लाई करते हुए आवश्यक दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। दस्तावेज अपलोड न होने पर वह फ्री सीट का हकदार नहीं होगा। प्राइवेट स्कूल्स में फ्री एडमिशन के लिए क्या क्राइटीरिया होगा, जानिए…     आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन व स्टडी के लिए आर्थिक तौर पर कमजोर स्टूडेंट्स इलिजिबल होंगे। EWS स्टूडेंट्स के लिए 25 प्रतिशत में से 12.5% सीटें रिजर्व रहेंगी। दाखिले के वक्त पेरेंट्स को इनकम और प्रॉपर्टी सर्टिफिकेट देना होगा। बिना इनकम सर्टिफिकेट के इस कैटागिरी में बच्चे का एडमिशन नहीं होगा।     डिसएडवांटेज्ड ग्रुप्स: प्राइवेट स्कूलों में ईडब्न्ल्यूएस के अलावा डिसएडवांटेज्ड ग्रुप के स्टूडेंट्स भी फ्री एडमिशन के लिए इलिजिबल होंगे।  उनके लिए भी 25 प्रतिशत में से 12.5 प्रतिशत सीटें रिजर्व रहेंगी। इसमें अनुसूचित जाति (SC), ओबीसी, वार विडो के बच्चे, दिव्यांग, स्पेशल चाइल्ड, अनाथ बच्चे शामिल होंगे।     नाइवरहुड स्कूल: स्टूडेंट को एडमिशन के लिए कम से कम दो स्कूलों के नाम भरने होंगे। पहला ऑप्शन 0 से 3 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए जबिक दूसरा ऑप्शन 3-6 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए।     बस का खर्च पेरेंट्स खुद उठाएंगे: एडमिशन पोर्टल पर ही डिपार्टमेंट ने स्पष्ट कर दिया है कि एडमिशन के लिए पेरेंट्स को नजदीकी स्कूल सलेक्ट करना होगा। अगर वो स्कूल दूर सलेक्ट करते हैं तो स्कूल बस का खर्च उन्हें अपने स्तर पर उठाना होगा।     ऐज क्राइटीरिया: डिपार्टमेंट ने एंट्री क्लास में एडमिशन के लिए मिनिमम ऐज क्राइटीरिया फिक्स किया है। नर्सरी में एडमिशन के लिए 3 साल, केजी में 4 साल, यूकेजी में 5 साल और फर्स्ट में 6 साल होने जरूरी हैं। स्टूडेंट्स की यह उम्र 1 अप्रैल 2026 को पूरी होनी चाहिए। एडमिशन प्रक्रिया को स्टेपवाइज जानिए…     ऑनलाइन करना होगा आवेदन: प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया से ही होगा। स्कूल सीधे अपने स्तर पर एडमिशन नहीं देंगे। rte.epunjabschool.gov.in पोर्टल पर एडमिशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा।     रजिस्ट्रस्टेशन करना जरूरी: पेरेंट्स को एडमिशन के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद ऑनलाइन ही फार्म भरना होगा। आखिर में उसमें डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे। पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद फाइनल सब्मिशन होगा।     ये सर्टिफिकेट जरूरी: ऑन लाइन फार्म भरते वक्त पेरेंट्स को बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट या अस्पताल का रिकार्ड, आंगनबाड़ी रिकार्ड अपलोड करना होगा। अगर कुछ भी उपलब्ध नहीं है तो पेरेंट्स को मजिस्ट्रेट से अटेस्टेड एफिडेविट देना होगा। रेजिडेंस सर्टिफिकेट के तौर पर आधार, वोटर आईडी, बिजली बिल पानी का बिल या राशन कार्ड अपलोड करना होगा। वहीं इलिजिबिलिटी के लिए कास्ट सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, दिव्यांग सर्टिफिकेट, वार विडो या अनाथ का सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा।     गलत जानकारी दी तो कानूनी कार्रवाई: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व फार्म भरते समय गलत जानकारियां दी गई या फिर कोई फर्जी डॉक्यूमेंट लगाए गए तो बच्चे का एडमिशन रद्द कर दिया जाएगा और अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डिपार्टमेंट किसी भी लेवल पर दस्तावेजों की वेरिफिकेशन कर सकता है। स्कूलों के लिए गाइड लाइन – कोई स्क्रीनिंग टेस्ट या कैपिटेशन फीस नहीं – RTE बच्चों के साथ कोई भेदभाव नहीं – उन्हें अलग कक्षा या अलग समय पर नहीं पढ़ाया जाएगा – लाइब्रेरी, कंप्यूटर, खेलकूद और अन्य सुविधाओं में बराबर अधिकार – कक्षाएं समावेशी और सुरक्षित रखनी होंगी – स्कूलों को पोर्टल पर नामांकन और उपस्थिति नियमित अपडेट करनी होगी। स्कूलों को फीस ऐसे मिलेगी -सरकार स्कूल को प्रति बच्चा व्यय या वास्तविक फीस जो भी कम होगा उसे देगी। -स्कूल को इसके लिए अलग बैंक खाता खोलना होगा, जिसमें केवल RTE राशि आएगी। -सरकार से सब्सिडी ले चुके स्कूलों को सरकार कोई राशि नहीं देगी। ऐसे कर सकेंगे शिकायत आरटीई से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी शिकायत निवारण अधिकारी होंगे। अगर कोई आवेदन रद्द होता है तो एक सप्ताह के अंदर पेरेंट्स को लिखित शिकायत देनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारी को 15 दिन में शिकायत का निपटारा करना होगा। जिला शिक्षा अधिकारी के फैसले के खिलाफ पंजाब स्टेट कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट के पास अपील कर सकेंगे। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी को समय समय पर स्कूलों की जांच करनी होगी। अभिभावकों और स्कूलों के लिए अहम बातें यह SOP सिर्फ 2026-27 सत्र के लिए है, लेकिन विभाग समय-समय पर इनमें संशोधन कर सकता है। पंजाब में 1500 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर रजिस्टर हो चुके हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपील की है कि पेरेंट्स तय समय पर सही दस्तावेज अपलोड करके बच्चों का रजिस्ट्रेशन करवाएं। स्कूल प्रबंधन बच्चों के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें। भेदभाव करने की स्थिति में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने फटकार लगाई तो शुरू किया पोर्टल पंजाब के प्राइवेट स्कूल्स में आरटीई के तहत एडमिशन न होने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर पिछले साल सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूल प्रिंसिपल्स को 25 प्रतिशत सीटें खाली रखने के आदेश दिए लेकिन उन सीटों पर एडमिशन ही नहीं करवाए। कोर्ट ने फटकार लगाई तो एजुकेशन डिपार्टमेंट ने आरटीई पोर्टल पर स्कूलों की रजिस्ट्रेशन करवाई और अब एडमिशन का लिंक लाइव कर दिया।

कटाई के बाद खलिहान में रखी फसल जली, किसान विजय कुमार मेहता को भारी नुकसान

 चतरा  झारखंड राज्य के चतरा जिले सोकी गांव में एक किसान की मेहनत पर अचानक लगी आग ने पानी फेर दिया. खेत-खलिहान में मड़ाई के लिए रखे करीब 500 से अधिक गेहूं के बोझे जलकर राख हो गए, जिससे किसान विजय कुमार मेहता को भारी आर्थिक नुकसान हुआ. किसान ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है. खलिहान में रखे गेहूं में अचानक लगी आग किसान विजय कुमार मेहता ने बताया कि गेहूं की कटाई के बाद थ्रेसर से मड़ाई के लिए फसल को खेत के खलिहान में रखा गया था. इसी दौरान अचानक आग लग गई, जिससे देखते ही देखते सैकड़ों बोझा गेहूं जलकर राख हो गया और उन्हें हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. ग्रामीणों ने आग बुझाने का किया प्रयास आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उपलब्ध साधनों से आग बुझाने का प्रयास किया. हालांकि तब तक अधिकतर गेहूं जल चुका था, जिससे नुकसान को रोका नहीं जा सका. अंचल कार्यालय व थाना में मुआवजे की मांग घटना के बाद पीड़ित किसान ने अंचल कार्यालय और संबंधित थाना में आवेदन देकर मुआवजे की मांग की है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है, जिससे ग्रामीणों में भी चिंता का माहौल बना हुआ है.

रांची में धुंध और हल्की बारिश, कई जिलों में वज्रपात की चेतावनी

रांची  झारखंड में मौसम ने फिर से करवट ली है. राजधानी रांची समेत झारखंड के कई जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है. एक ओर तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान किया, वहीं दूसरी ओर दोपहर बाद हो रही हल्की बारिश कुछ राहत भी दे रही है. दोपहर बाद बारिश से मिली राहत गुरुवार को रांची के अलग-अलग हिस्सों में दोपहर बाद बारिश हुई. इससे सुबह से बढ़ा तापमान कुछ थम गया. रांची में 0.5 मिमी बारिश दर्ज की गई. जबकि सरायकेला में 4 मिमी बारिश हुई. मौसम में बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिली. रांची में आज सुबह धूंध राजधानी रांची में आज सुबह धुंध की चादर में लिपटी रही. सुबह 7 बजे तक भी सूरज के दर्शन नहीं हो सके. एक दिन पहले तक इसी समय तेज धूप और गर्मी से लोग परेशान थे. तेज हवा और वज्रपात की संभावना मौसम विभाग के अनुसार 17 अप्रैल को राज्य के उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व हिस्सों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात के साथ हल्की बारिश की संभावना है. आने वाले दिनों में लू चलने के आसार 18 अप्रैल को मौसम शुष्क रहने का अनुमान है. इधर, 19 और 20 अप्रैल को राज्य के कई जिलों में लू चलने की चेतावनी दी गई है. 19 अप्रैल को पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में लू की स्थिति रहेगी, जबकि 20 अप्रैल को इन जिलों के साथ सरायकेला-खरसांवा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिम सिंहभूम भी इसकी चपेट में रहेंगे. राज्य में सबसे अधिक तापमान मेदिनीनगर का रहा राज्य में सबसे अधिक तापमान मेदिनीनगर में 41.8 डिग्री सेल्सियस रहा. वहीं, रांची का अधिकतम तापमान 37.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसमें मामूली गिरावट देखी गई.

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम, हर कॉलेज में काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य

वि‌द्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम, हर कॉलेज में काउंसलर जरूरी मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश स्टॉफ प्रशिक्षण, अभिभावक जागरुकता और मेंटर प्रणाली भी होगी लागू भोपाल वि‌द्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में जारी इन निर्देशों के अंतर्गत अब सभी शैक्षणिक संस्थानों में काउंसलर की नियुक्ति के साथ कई अन्य व्यवस्थाएं भी अनिवार्य कर दी गई हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, जिन संस्थानों में 100 या उससे अधिक वि‌द्यार्थी अध्ययनरत हैं, वहां कम से कम एक प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा। कम छात्र संख्या वाले संस्थानों को बाहरी विशेषज्ञों से जुडकर काउंसलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। काउंसलर के रूप में मनोविज्ञान में स्नातकोतर, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्य विशेषज्ञ या संबंधित क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति नियुक्त किए जा सकेंगे। संस्थान में केवल काउंसलर नियुक्ति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे संस्थान को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है। इसी उ‌द्देश्य से सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों, प्रशासनिक स्टॉफ और सुरक्षा कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षणों में मानसिक स्वास्थ्य, प्राथमिक सहायता, वि‌द्यार्थी के व्यवहार में आए परिवर्तनों की पहचान तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही वि‌द्यार्थियों के अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया है। संस्थानों को निर्देश दिए गए है कि वे अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे वे अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों को समझ सके और समय रहते उचित सहयोग प्रदान कर सकें। विद्यार्थियों की व्यक्तिगत निगरानी और मार्गदर्शन के लिए 25 से 40 छात्रों पर एक मैंटर नियुक्त किया जाएगा। यह मेंटर वि‌द्यार्थियों की उपस्थिति, शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यवहार और मानसिक स्थिति पर नजर रखेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। साथ ही अभिआवकों से संपर्क बनाए रखते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहयोग करेगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संस्थानों को निर्देशित किया है कि इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू करते हुए निर्धारित प्रारूप में जानकारी विभाग को शीघ्र प्रेषित करें। मॅटोर-मॅटी (गार्जियन ट्यूटर) व्यवस्था प्रत्येक संस्थान द्वारा 25-40 वि‌द्यार्थियों पर एक मेंटर की नियुक्ती की जाएगी। यह दायित्व किसी प्राध्यापक को दिया जाएगा, जिसे सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वाह करना होगा। मेंटर वि‌द्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और व्यवहार की निगरानी और कमजोर वि‌द्यार्थियों की पहचान कर उनका मार्गदर्शन करेंगे। मानसिक तनाव व व्यक्तिगत समस्याओं में सहयोग करना। अभिभावकों से नियमित संपर्क बनाए रखना। कैरियर मार्गदर्शन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये प्रेरित करना। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में वि‌द्यार्थिों की सहभागिता बढ़ाना। विद्यार्थियों के रिकॉर्ड व काउंसलिंग रजिस्टर का संधारण करना होगा। संस्थाओं में प्रदर्शित से होंगे हेल्पलाइन नंबर परिसर में प्रमुख स्थानों पर वॉल पेटिंग से हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे। Dial-112 Tele-MANAS-14416 उमंग हेल्पलाइन 14425 उच्च शिक्षा विभाग की विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सुश्री ऊषा नायर ने कहा, विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। काउंसलर नियुक्ति के साथ स्टॉफ प्रशिक्षण, अभिभावक सहभागिता और मेंटर प्रणाली को लागू कर हम एक सुरक्षित और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन निर्देशों के क्रियान्वयन की सतत निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संस्थानों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। यह पहल विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन और समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

चुटिया इलाके में प्रशासन की कार्रवाई से हड़कंप, गैस स्टॉक का भंडाफोड़

 रांची झारखंड के रांची के चुटिया इलाके में गुरुवार रात जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रखे गए गैस सिलेंडरों को जब्त किया. यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें साईं कॉलोनी और पावर हाउस सारा कॉलोनी सहित कई जगहों पर छापेमारी की गई. प्रशासन की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया और अवैध गैस कारोबार पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है. जिला प्रशासन और पुलिस का संयुक्त अभियान जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन की टीम ने चुटिया पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया. इस दौरान कुल 200 से अधिक सिलेंडर बरामद किए गए. जब्त सिलेंडरों में कॉमर्शियल सिलेंडर के अलावा उज्ज्वला योजना, इंडेन और भारत गैस कंपनी के घरेलू सिलेंडर भी शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार, इन सिलेंडरों का उपयोग नियमों के खिलाफ किया जा रहा था. मौके पर मौजूद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट मो जफर हसनात ने बताया कि प्रशासन को अवैध भंडारण और गैस के काले कारोबार की गुप्त सूचना मिली थी. इसी सूचना के आधार पर पूरी योजना बनाकर छापेमारी की गई. उन्होंने बताया कि कार्रवाई देर रात तक जारी रही और हर संदिग्ध जगह की बारीकी से जांच की गई. 200 से अधिक सिलेंडर जब्त छापेमारी के दौरान पावर हाउस सारा कॉलोनी स्थित एक परिसर से करीब 125 सिलेंडर बरामद किये गए. वहीं साईं कॉलोनी स्थित आवसीय परिसर से 75 से 80 सिलेंडर मिले. इसके अलावा साईं कॉलोनी स्थित आवसीय परिसर में खड़े एक छोटे हाथी वाहन से भी 20 से 22 सिलेंडर जब्त किए गए. इतना ही नहीं, एक आवासीय परिसर में छापेमारी के दौरान 50 से 60 कॉमर्शियल सिलेंडर भी पाए गए, जिन्हें नियमों के खिलाफ रखा गया था. एसडीओ के नेतृत्व में चला अभियान इस पूरे अभियान का नेतृत्व एसडीओ के निर्देशन में किया गया. सिटी डीएसपी रमन के अलावा चुटिया थाना प्रभारी पूनम कुजूर भी अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहीं और कार्रवाई को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने हर स्थान पर जांच कर अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए. आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई प्रशासन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और अवैध गैस कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी.

इंदौर में जलसंकट बढ़ा, गर्मी के चलते निर्माण कार्य और सर्विस स्टेशनों में बोरिंग और नर्मदा जल का उपयोग

इंदौर  इंदौर में जैसे-जैसे गर्मी के तेवर तेज हो रहे हैं, शहर में जलसंकट भी गहराता जा रहा है। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने 100 से अधिक टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की है। इसके साथ ही शुक्रवार से निर्माण कार्यों और सर्विस स्टेशनों पर बोरिंग व नर्मदा जल के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। इन कार्यों के लिए अब संचालकों को केवल ट्रीटेड पानी का उपयोग करना होगा। नगर निगम ने मध्य प्रदेश नगर पालिक अधिनियम की उपविधियों का हवाला देते हुए यह प्रतिबंध 30 जून तक लागू किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो संबंधित बोरिंगों का अधिग्रहण करने के साथ ऑटोमोबाइल सेंटरों को सील भी किया जाएगा।नगर निगम के अनुसार, शहर के 35 स्थानों पर ट्रीटेड वॉटर के हाइड्रेंट स्थापित किए गए हैं, जहां से पानी लेकर निर्माण कार्यों में तराई के लिए उपयोग किया जा सकता है।  शहर में निजी और सार्वजनिक बोरिंगों की संख्या एक लाख से अधिक है। हर साल गर्मी बढ़ते ही कई बोरिंग सूख जाते हैं या उनकी जल क्षमता घट जाती है। इसके चलते कई रहवासियों को निजी टैंकरों से पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वाटर रिचार्जिंग अनिवार्य जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने रहवासी, बाजार और औद्योगिक क्षेत्रों में वाटर रिचार्जिंग को अनिवार्य कर दिया है। भवन निर्माताओं को जून तक रिचार्जिंग व्यवस्था करने का समय दिया गया है। इसके बाद निगम अभियान चलाकर स्थिति की समीक्षा करेगा। नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया जाएगा।   जलूद से रोजाना 500 एमएलडी पानी की आपूर्ति इंदौर को जलूद से प्रतिदिन 500 एमएलडी पानी मिलता है, जिससे शहर की 40 से अधिक टंकियां भरी जाती हैं। इसके अलावा 35 एमएलडी पानी यशवंत सागर से प्राप्त होता है। वहीं बोरिंगों से करीब 30 एमएलडी पानी का उपयोग किया जाता है हालांकि, गर्मी के दौरान बोरिंगों और यशवंत सागर से पानी की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है।

डॉ. बलजीत कौर ने जारी की 352 करोड़ की राशि, बुजुर्ग पेंशन के लिए बड़ा कदम

चंडीगढ़   सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री पंजाब डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के तहत बुजुर्ग पेंशन योजना के अंतर्गत 352 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार बुजुर्गों की भलाई और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।मंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा हर महीने 23,51,338 से अधिक उम्रदराज लाभार्थियों को वक्त रहते पेंशन के रूप में आर्थिक सहायता मिलती रहे, इस मंतव्य को ध्यान में रखते हुए 4000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि कई बुजुर्गों के लिए यह पेंशन जीवन का महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रही है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतें पूरी कर आत्मनिर्भर जीवन जी पा रहे हैं। यह योजना सरकार द्वारा बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा देने के उद्देश्य को दर्शाती है। मंत्री के अनुसार, 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुष और 58 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाएं, जिनकी वार्षिक आय 60,000 रुपये से अधिक नहीं है, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिन आवेदकों के पास 2.5 एकड़ तक सिंचित जमीन, या 5 एकड़ तक असिंचित (बारानी) जमीन, या पानी वाले क्षेत्र में 5 एकड़ तक जमीन (पति-पत्नी की संयुक्त जमीन सहित) है, वे भी इस योजना के लिए पात्र हैं। कैबिनेट मंत्री ने जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेंशन का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए और लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा किया जाए। उन्होंने नियमित निगरानी और फील्ड स्तर पर जांच करने के भी निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र बुजुर्ग लाभ से वंचित न रहे और पारदर्शी तरीके से राशि लाभार्थियों तक पहुंचे। डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर बुजुर्ग सम्मान, आत्मनिर्भरता और सुरक्षा के साथ जीवन व्यतीत कर सके।

केंद्र ने पंजाब-चंडीगढ़ के किसानों को गेहूं खरीद के लिए दी विशेष छूट, राहत की खबर

चंडीगढ़  बेमौसम बारिश से जूझ रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए बड़ा फैसला लेते हुए पंजाब और चंडीगढ़ में गेहूं की खरीद के लिए विशेष छूट को मंजूरी दे दी है, जिससे किसानों को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी दी है। उन्होंने लिखा," अनियमित वर्षा के चलते गेहूं खरीद में छूट देने का अनुरोध 9 अप्रैल 2026 को प्राप्त हुआ था। इसके तुरंत बाद 10 अप्रैल को सभी जिलों में हालात का जायजा लेने के लिए टीमों को तैनात किया गया। प्रभावित किसानों को मिलेगी तुरंत राहत मैदानी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र (RMS) 2026–27 के तहत यह अहम फैसला लिया है। मंत्री ने बताया कि इस कदम से किसानों को मजबूरी में फसल बेचने (डिस्ट्रेस सेल) से बचाया जा सकेगा और उन्हें उचित मूल्य मिल सकेगा। सरकार का कहना है कि ये छूटें RMS 2026–27 की शुरुआत से ही लागू होंगी, जिससे प्रभावित किसानों को तुरंत राहत मिलेगी। किसानों ने चक्का जाम का फैसला टाला केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में पत्र राज्य सरकार को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश आज से ही लागू हो जाएंगे। किसानों ने रेल का चक्का जाम करने की घोषणा की थी हालांकि बाद में उसे टाल दिया था। केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू ने भी सुबह ही इस संबंध में जानकारी दे दी थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने एफसीआई के जरिए राज्य सरकार को गेहूं खरीद के मानकों में बदलाव की जानकारी दे दी थी। केंद्र सरकार के पत्र के अनुसार गेहूं खरीद के मानकों में दी गई छूट 1. कलर लॉस (चमक में कमी) वाले गेहूं की सीमा पूरे पंजाब और चंडीगढ़ (यू.टी.) में 70% तक बढ़ा दी गई है। 2. सिकुड़े हुए एवं टूटे हुए दानों की सीमा, जो पहले 6% थी, उसे बढ़ाकर 15% तक कर दिया गया है। 3. क्षतिग्रस्त एवं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों का कुल प्रतिशत 6% से अधिक नहीं होगा। 4. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से रखा जाएगा और उसका अलग हिसाब रखा जाएगा। 5. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के भंडारण के दौरान गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की गिरावट के लिए पंजाब सरकार और चंडीगढ़ (यू.टी.) स्वयं जिम्मेदार होंगे। 6. नए मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के स्टॉक का निपटान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। 7. इस छूट के कारण उत्पन्न किसी भी वित्तीय या परिचालन संबंधी प्रभाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

पंथक मुद्दों पर सीएम मान की घेराबंदी, शिअद और सुखबीर बादल बने निशाने पर

अमृतसर  पंजाब की सियासत में इन दिनों एक पंथक मुद्दे पर खूब सियासत गरमाई हुई है। इस बार निशाने पर है शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष एवं पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल।  सुखबीर के एक बयान से शुरू हुए इस विवाद पर पंथक नेताओं के साथ-साथ अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी आक्रामक दिख रहे हैं जबकि सुखबीर बादल इसे अपने और अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बता रहे हैं। बादल का दावा है कि शिअद पंथ और गुरुघर की सेवा करने वाली पार्टी है। दरअसल, यह सियासत 2 दिसंबर 2024 के उस हुक्मनामे से जुड़ी है जिसे श्री अकाल तख्त ने सुखबीर बादल के खिलाफ जारी किया था। बेअदबी के एक मामले में बादल और शिअद की समूची लीडरशिप श्री अकाल तख्त के समक्ष पेश हुई थी और तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने बादल को तनखाहिया घोषित उन्हें धार्मिक सजा दी थी। 13 अप्रैल को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भी सीएम ने इस मसले का जिक्र किया। विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे ज्ञानी रघुबीर सिंह ने भी बादल के इस बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। सीएम अब रैलियों के दौरान इस मुद्दे को खूब उछाल रहे हैं। सुखबीर बादल का दावा, उन्हें खत्म करने की साजिश सुखबीर बादल ने दावा किया था कि जिस दिन बहिबलकलां और बरगाड़ी की घटनाएं हुई थीं वे पंजाब से बाहर थे मगर यह विवाद खत्म करने के लिए उन्होंने सब कुछ अपनी झोली में पड़वा लिया था। बादल ने कहा था कि उन पर कई सियासी हमले हुए। कुछ लोग जो खुद को धार्मिक नेता कहते थे, वे उनकी सियासत को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने यहां तक साजिश कर दी थी कि सजा के दौरान उन्हें श्री हरिमंदिर साहिब के बाहर बिना सुरक्षा बैठने का हुक्म दिया गया। उन पर जानलेवा हमला हुआ मगर परमात्मा का हाथ उनके सिर पर था। फैसला साजिश थी, साबित करें बादल : ज्ञानी रघुबीर बादल के बयान पर श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि बादल का यह बयान श्री तख्त साहिब की पवित्रता का अपमान है। सजा किसी साजिश के तहत नहीं बल्कि बयानों पर आधारित थी। अकाली लीडरशिप ने अपने कामों को माना था। अपने कामों का इकबाल किया था और उन्हें रिवायती धार्मिक सेवा करने का मौका दिया गया था। सेवा करने के बावजूद सुखबीर बादल ने अपने कामों से इन्कार कर दिया है। बादल यदि श्री अकाल तख्त साहिब आकर यह साबित कर दें कि उस वक्त दिया फैसला एक साजिश का हिस्सा था तो वे सिख परंपराओं के अनुसार किसी भी धार्मिक सजा को स्वीकार करने को तैयार हैं। 2 दिसंबर 2024 का फैसला पंथक रिवायतों और कबूल किए हुए गुनाहों के मुताबिक था। अकाली दल बेअदबी के लिए दोषी है : मान इसी विवाद पर सीएम मान हमलावर हैं। उन्होंने कहा कि शिअद श्री गुरु साहिब जी की बेअदबी के लिए दोषी है। इन नेताओं के पाप माफ नहीं किए जा सकते। ये अवसरवादी नेता हैं जो अपनी सुविधा और निजी सियासी हितों के अनुसार गिरगिट की तरह अपने रंग और रुख बदलते रहते हैं। जो लोग बेअदबी के लिए जिम्मेदार हैं वे श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए और पूरी जनता के सामने अपना अपराध कबूल किया। हालांकि यह उनकी राजनीतिक इच्छाओं के अनुसार नहीं था इसलिए उन्होंने कुछ समय बाद यू-टर्न ले लिया और कहने लगे कि कुछ लोग केंद्रीय एजेंसियों के हाथों की कठपुतली बनकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे। अब पूरे प्रदेशवासी इन नेताओं का असली चेहरा जान गए हैं।