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8वां वेतन आयोग: OPS-NPS पर क्या होगा फैसला? कर्मचारियों ने रखी मांग

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 8वां वेतन आयोग इस समय वेतन, पेंशन और भत्तों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार कर रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है और करीब 10 महीने बीत भी चुके हैं। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग कर्मचारी संगठनों, पेंशनर संगठनों और अन्य एसोसिएशनों से उनकी मांगों और सुझावों पर चर्चा कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में देश के अलग-अलग शहरों में आयोग की बैठकें हो चुकी हैं। सितंबर में आयोग ने 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16 से 18 सितंबर के बीच चंडीगढ़ में बैठकें कीं। अक्टूबर में बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित है। फिटमेंट फैक्टर से लेकर पेंशन तक पर चर्चा आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, वेतन संशोधन, पेंशन में सुधार और विभिन्न भत्तों में बदलाव समेत कई मांगें रखी गई हैं। हालांकि, इनमें पुरानी पेंशन योजना (OPS) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) का मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। 2004 के बाद भर्ती हुए केंद्रीय कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। OPS की बहाली की मांग कई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा अंशदायी पेंशन व्यवस्था से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए निश्चित पेंशन व्यवस्था जरूरी है। सर्वे ऑफ इंडिया की MSA ने OPS बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अंतिम वेतन के 50 फीसदी के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग भी रखी है। वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल आर्गेनाइजेशन ने NPS और UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी परिभाषित लाभ वाली पेंशन व्यवस्था में लाने की मांग की है। रेलवे सीनियर सिटिजनंस सोसाइटी ने भी न्यूनतम गारंटीड पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद अधिक वित्तीय सुरक्षा की मांग उठाई है। 8वें वेतन आयोग में आगे क्या होगा? इन संगठनों की मांगें उनके संबंधित ज्ञापनों के माध्यम से 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई हैं। दूसरे कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने भी फिटमेंट फैक्टर, पेंशन समानता और न्यूनतम पेंशन बढ़ाने समेत कई सुझाव दिए हैं। अब आयोग इन मांगों और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों का अध्ययन करेगा। इसके बाद आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। उपलब्ध समयसीमा के अनुसार अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 के आसपास आने की संभावना बताई जा रही है।

भारत पर टैरिफ लगाने से पहले संभल जाए अमेरिका, रूसी तेल खरीद पर जेमी डिमॉन ने चेताया

नई दिल्ली जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कोई सख्त कार्रवाई करने से पहले उसके असर को समझना चाहिए। यूएस को भारत और पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना होगा। डिमॉन ने यह बात मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, 'वॉशिंगटन को पहले समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनर रूस से मिलने वाले तेल का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।' जेमी डिमॉन ने कहा, 'उम्मीद है कि अमेरिका इन सभी मुद्दों को समझेगा और ऐसा नहीं करेगा कि रूस के खिलाफ जरूरी कदम उठाते हुए भारत और दुनिया के तेल बाजार को नुकसान पहुंचा दे।' उन्होंने भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल होने वाले रूसी तेल को लेकर भी बात रखी। डिमॉन के मुताबिक, रूस से आने वाले तेल का कुछ हिस्सा भारत में रिफाइन होकर इस्तेमाल होता है और कुछ तेल रिफाइनरियों की खास जरूरत के मुताबिक खरीदा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत यह तेल रूस से नहीं खरीदेगा तो उसे किसी दूसरे देश से लेना होगा और हो सकता है कि वहां से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए सही न हो। रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ डिमॉन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पास किया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को रूस पर दबाव बनाने के उपायों के साथ-साथ यह भी देखना चाहिए कि ऐसे कदमों का तेल बाजार पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका को यूक्रेन के समर्थन के लिए और कदम उठाने चाहिए। भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ का दबाव रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से दबाव बढ़ा हुआ है। भारत लगातार रूसी तेल खरीद को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करता रहा है। नई दिल्ली ने अपनी ऊर्जा खरीद को निशाना बनाने को अनुचित और गैरवाजिब बताया है। रूस पर प्रतिबंध वाले अमेरिकी कानून पर भी भारत ने कहा कि इससे दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूसी तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है।

वंदे मातरम् को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाता है या फिर सारे आंतरे नहीं गाता है तो उसपर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं सुप्रीम कोर्ट नेइस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब भी मांगा है। गायक टीएम कृष्णा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई की वंदे मातरम् से जुड़े कानून की व्याख्या करते वक्त 1986 के 'बिजो एमैनुअल' के तय सिद्धातों को लागू किया जाएगा। आपको बता दें कि जुलाई में संसद के मॉनसून सत्र में एक संशोधन विधेयक लाकर वंदे मातरम को इसके अंतरगत लाया गया था। 29 जुलाई को राज्यसभा में और फिर 30 जुलाई को लेकसभा में विधेयक को पास करके कानून बनाया दिया गया और वंदेमातरम गाना अनिवार्य किया गया था। इसे राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के दायरे में ले आया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय गीत को दो अंतरे तक ही सीमित रखने पर विचार करने से इनकार कर दिया है। हालांकि इस बात पर विचार करने को तैयार है कि इसे ना गाने को दंडनीय अपराध ना बनाया जाए। राष्ट्रगान ना गाने पर नहीं हो सकती सजा सीजेआई सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बिजो इमैनुएल मामले में सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तय किया गया था कि राष्ट्रगान ना गाने पर किसी को सजा नहीं दी जाएगी और यह अब भी लागू होता है। बिजो इमैनुअल केस: 3 छात्रों ने राष्ट्रगान गाने से मना कर दिया कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वंदे मातरम से जुड़े कानून की व्याख्या करते समय 1986 के ‘बिजो इमैनुअल’ फैसले में तय सिद्धांतों को लागू किया जाएगा। दरअसल, 1986 के बिजो इमैनुअल बनाम केरल सरकार मामले में तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था। हालांकि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता। ‘नक्सली’ शब्द पर सॉलिसिटर जनरल और मुरलीधर में बहस सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कृष्णा के वकील सीनियर एडवोकेट डॉ एस मुरलीधर के बीच तीखी बहस भी हुई। संविधान के तहत निर्णय लेने की प्रक्रिया पर मुरलीधर की दलील के जवाब में मेहता ने ‘नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया।     मुरलीधर: अभी आपने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, उसे वापस लें। यह कार्यवाही लाइव चल रही है। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं।     मेहता: मैंने कहा कि यही संवैधानिक तरीका है, न कि वह तरीका जो नक्सली चाहता है। और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है।     मुरलीधर: “किसी बात पर विचार करना नक्सली होना नहीं है। इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी होने का आरोप हो, तब भी संविधान के तहत उसके अधिकार बने रहते हैं। 2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' बनाया। इस कानून के तहत 'वंदे मातरम' के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' के पूरे 6 छंद गाए गए। केंद्र से मांगा जवाब सुप्रीम कोर्ट ने इस पीआईएल पर सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारियों के संबंध में कानून में दंड के प्रावधानों की समीक्षा होनी चाहिए। आपको बता दें कि कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध गायक टी एम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका फाइल की थी और कहा था कि वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि आखिरी के चार अंतरे में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी देवताओं की आर्चना का भाव है और एक धर्मनिरपेक्ष देश में इसे अनिवार्य कर देना संविधान का उल्लंघन है। केंद्र सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कुछ लोग संविधान और कानून के राज में विश्वास नहीं करते और उनकी सोच नक्सलवादी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय गीत की अहम भूमिका थी और इसे भुलाना नहीं चाहिए। तुषार मेहता ने क्या दलील दी? सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से नोटिस नहीं जारी करने की मांग की. इस पर उन्होंने दलील दी कि यह सनसेशन को बढ़ावा देने वाला होगा. इसके बाद सुनवाई के दौरान ही जस्टिस बागची ने कहा कि  इसमें कोई संदेह नहीं कि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है।  याचिकाकर्ता की बात से सहमत दिखा सुप्रीम कोर्ट इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि दो पद गाए जाएं या छह पद गाए जाएं… यह सरकार से इतर कौन तय करेगा, कोई और तो नहीं कर सकता. इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने दखल दी. उन्होंने कहा कि लोगों की राय ली जानी चाहिए थी. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह सही बात है।  2 सप्ताह में देना है जवाब इसके बाद वंदे मातरम के छह पद गाने की अनिवार्यता के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब तलब किया. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दो सप्ताह के अंदर केंद्र को इस मामले में देना होगा जवाब. याचिकाकर्ता के वकील ने एसजी की ओर से दलील में नक्सलाइट शब्द का उपयोग करने पर भी गंभीर आपत्ति जताई। 

तेजस Mk1A को लेकर बड़ा अपडेट, इंजन की कमी दूर; जल्द IAF में शामिल होने की उम्मीद

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना के वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने स्वदेशी लड़ाकू जेट LCA तेजस मार्क 1ए की मौजूदा स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने इसकी पुष्टि कर दी है कि शुरुआत में देरी का मुख्य कारण अमेरिका से आने वाला इंजन था।  इंजनों की कमी के कारण कार्यक्रम में देरी हुई. अब इंजन मिल चुके हैं. जेटों पर लगा दिए गए हैं. जेट को वायु सेना में शामिल करने से पहले उचित और गहन परीक्षण किए जा रहे हैं. एयर मार्शल दीक्षित के अनुसार अभी दो या तीन बिंदु बाकी हैं जिन्हें पूरा करना बाकी है।  उनका मानना है कि एक या दो महीने के अंदर इन मुद्दों को दूर कर लिया जाएगा. उसके बाद जेट को शामिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा. भारत LCA तेजस मार्क 1ए के शामिल होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. यह बयान वायु सेना की तैयारियों और स्वदेशी कार्यक्रमों की प्रगति को रेखांकित करता है।  इंजन की कमी और वर्तमान प्रगति LCA तेजस मार्क 1ए भारतीय वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है. यह तेजस परिवार का एडवांस वर्जन है जिसमें कई सुधार किए गए हैं. पहले चरण में इंजनों की आपूर्ति में देरी हुई थी जिससे उत्पादन और परीक्षण प्रभावित हुए. अब यह समस्या हल हो चुकी है. इंजन लगने के बाद जेटों पर परीक्षण चल रहे हैं।  इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेट सभी परिचालन जरूरतों को पूरा करे. सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी जा रही है. वायु सेना उप प्रमुख का बयान बताता है कि तकनीकी चुनौतियां अब अंतिम चरण में हैं. बाकी बचे मुद्दों को जल्द सुलझा लिया जाएगा।  एक बार ये बिंदु पूरे हो जाएं तो जेट को स्क्वॉड्रन में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यह विकास स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है. LCA तेजस मार्क 1ए के शामिल होने से भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता में इजाफा होगा।  यह जेट आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर रडार और हथियार प्रणालियों से लैस है. स्वदेशी जेट होने के कारण रखरखाव और अपग्रेड आसान होगा. विदेशी निर्भरता कम होने से लंबी अवधि में लागत भी नियंत्रित रहेगी. वायु सेना लंबे समय से इस जेट का इंतजार कर रही है क्योंकि पुराने जेटों को बदलने की जरूरत है।  परीक्षण प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक पूरा करना जरूरी है. किसी भी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा. एचएएल और वायु सेना दोनों मिलकर काम कर रहे हैं ताकि जेट पूरी तरह तैयार अवस्था में शामिल हो. एक-दो महीने का समय बाकी मुद्दों को दूर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. उसके बाद उत्पादन और डिलीवरी की गति बढ़ सकती है।  यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है. स्वदेशी लड़ाकू जेट का सफल शामिल होना रक्षा क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ाएगा. वायु सेना उप प्रमुख के बयान से साफ है कि देरी के कारणों को समझा गया है और अब समाधान की दिशा में काम हो रहा है. परीक्षण पूरा होने के बाद जेट को जल्द सेवा में लेने की उम्मीद है. भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर लक्ष्य हासिल करने की कोशिश में जुटी हैं। 

E20 के बाद 100% इथेनॉल की कार! गडकरी ने बताया सरकार का अगला प्लान

 नई दिल्ली बीते दिनों इथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल को लेकर काफी हो हल्ला मचा था. सड़क से लेकर संसद तक इस फ्यूल की चर्चा हो रही थी. सोशल मीडिया पर तो जैसे E20 पेट्रोल से इफेक्टेड वाहनों के वीडियो की बाढ़ सी आ गई थी. फिलहाल मामला शांत है. और इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर से इथेनॉल की वकालत की है।  दिल्ली में आयोजिक एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि, "दुनिया के 19 देशों में इथेनाल इस्तेमाल किया जा रहा है और भारत के किसी गाड़ी में आज शिकायत नहीं आ रही है. अक्टूबर में टोयोटा कंपनी की इनोवा 100% फ्लेक्स फ्यूल कार पर चलने वाली कार लांच करने का न्यौता मिला है. ये गाड़ी 100% इथेनाल से चलेगी और चलते चलते 60% बिजली पैदा करती है. अगर पेट्रोल के भाव से तुलना करें तो इसके इस्तेमाल में पेट्रोल पच्चीस रुपए प्रति लीटर होगा और प्रदूषण भी नहीं करेगी।  उन्होंने कहा कि, "मक्के से इथेनाल बनाने के फ़ैसले से यूपी बिहार के किसानों को 45 हज़ार करोड़ मिला है. सरकार के पास नीतियाँ हैं. आप को उन नीतियों को सपोर्ट करना होगा. 22 लाख करोड़ का धंधा जिनका है वो जाएगा तो नितिन गडकरी को गालियाँ देंगे. मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ेगा लेकिन हमें किसान का भला करना है। बाइक टैक्सी को प्रमोट करें देश भर में बाइक टैक्सी सर्विस तेजी से बढ़ रहा है. छोटी दूरी की यात्राओं के लिए ये सर्विस बहुत ही किफायती है और लोग तेजी से इसका उपयोग कर रहे हैं. नितिन गडकरी ने कहा कि, "मैं सभी राज्यों के परिवहन मंत्रियों को कह रहा हूँ की गाँव के ग़रीब लड़कों को और उनके दो पहिया से चलने वाले लोगों को आप प्लेटफार्म दीजिए।  गडकरी ने कहा कि, "यह प्लेटफार्म कमाई का बढ़िया जरिया है. ये प्लेटफॉर्म पच्चीस रुपए महीने लेते हैं और जब भी किसी को टैक्सी की सुविधा हो तो लोगों को रोज़गार और कमाई होती है. इसी तरह बिना किसी निवेश के हिंदुस्तान में 10 करोड़ लोगों को रोज़गार मिल सकता है. गडकरी ने कहा कि, मैंने फ़ाइल पर लिखा है कि, किसी के बाद अपना दोपहिया चारपहिया हो तो वो अभी टैक्सी चला सकते हैं. मेरे एक हस्ताक्षर के बाद बैंगलोर की रैपिडो कंपनी ने 3.5 करोड़ लोगों को रोजगार दिया।   

ली जे-म्युंग का बड़ा बयान: न्यूक्लियर फ्रीज के बदले उत्तर कोरिया को मिल सकती है प्रतिबंधों में राहत

 सोल  साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि वे इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए एक चरणबद्ध और व्यावहारिक तरीका अपनाने की बात रखेंगे. उन्होंने कहा कि साउथ कोरिया और अमेरिका दोनों ही उत्तर कोरिया के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के लिए तैयार हैं।   यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियारों का परीक्षण बढ़ा रहा है, भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ कोरिया के साथ होने वाले बड़े सैन्य अभ्यास को कम करके उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया हो।  न्यूयॉर्क जाने से पहले सोमवार को एक समाचार चैनल को दिए लिखित जवाब में ली ने कहा कि किसी चलती हुई गाड़ी की दिशा बदलने के लिए पहले उसे रोकना जरूरी होता है. उनका मतलब था कि उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे को हल करने के लिए रुकना, कम करना और फिर पूरी तरह खत्म करना, यह तरीका सबसे व्यावहारिक है।  उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसे एक ही बार में पूरी तरह खत्म किया जा सकता है. ट्रंप ने पिछले महीने दावा किया था कि उत्तर कोरिया के पास 57 परमाणु हथियार हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या 100 से भी ज्यादा हो सकती है. ली ने कहा कि उत्तर कोरिया की क्षमताएं जितनी बढ़ चुकी हैं, उसे देखते हुए पूरी तरह खत्म होने का इंतजार करना सही रास्ता नहीं है, क्योंकि इस बीच खतरा और बढ़ता जाएगा।  ली ने कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने के लिए बातचीत का प्रस्ताव भी दोहराया. उन्होंने चिंता जताई कि चरणबद्ध तरीके से उत्तर कोरिया कुछ फायदे लेकर पूरी तरह हथियार छोड़ने से मना कर सकता है, इसलिए एक मजबूत बातचीत का ढांचा जरूरी है जिससे तीनों पक्षों का भला हो।  ट्रंप ने पिछले महीने साउथ कोरिया के साथ अभ्यास को कम करने का ऐलान पहले से बातचीत किए बिना ही किया था, जिससे दोनों देशों के गठबंधन को लेकर चिंता बढ़ी. ली ने माना कि यह फैसला कुछ अचानक आया, लेकिन उन्होंने इसे अमेरिका की तरफ से दुश्मनी न होने के संकेत के तौर पर देखा. उन्होंने बताया कि जहाज निर्माण क्षेत्र में साझेदारी से दोनों देशों को फायदा होगा।  ली ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ईरान और अमेरिका के टकराव में शामिल नहीं होगी, बल्कि खाड़ी में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना की मौजूदगी बढ़ाने पर विचार कर रही है. साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत बताई और एआई के फायदे सभी देशों तक पहुंचाने की बात कही. किम जोंग उन की बेटी को लेकर पूछे सवाल पर ली ने कहा कि अभी इस बारे में कोई पक्का बयान देना जल्दबाजी होगी। 

मोबाइल यूजर्स को राहत! बिना डेटा वाले प्लान लाएंगी Jio-Airtel-Vi, 28 दिन की वैलिडिटी से छुटकारा

नई दिल्ली प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज कराने वाले करोड़ों लोगों के हित में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने बड़ा फैसला लिया है। ट्राई ने ‘टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन (तेरहवां संशोधन) रेगुलेशन, 2026’ के नियमों को जारी कर दिया है। इसके बाद अब Jio-Airtel-Vi-BSNL को ग्राहकों के लिए सिर्फ कॉल और एसएमएस वाले नए व सस्ते मोबाइल रिचार्ज लेकर आने होंगे। इससे लोगों को मजबूरन डेटा वाले प्लान नहीं लेने होंगे और उन्हें सस्ते रिचार्ज मिल पाएंगे। ट्राई ने इस संबंध में एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। क्या हैं ट्राई के नए नियम आसान भाषा में समझाएं तो ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों को स्पष्ट बता दिया है कि उन्हें ग्राहकों के लिए सस्ते मोबाइल रिचार्ज लेकर आने होंगे। ऐसे लोग जिन्हें मोबाइल रिचार्ज कराते समय डेटा की जरूरत नहीं होती, उन्हें ज्यादा और सस्ते विकल्प मिल पाएंगे। नए नियमों के तहत     टेलीकॉम कंपनियों को Voice & SMS Only STV देने होंगे।     30 दिन और उससे कम वैलिडिटी के लिए ऐसे प्लान जरूरी कर दिए गए हैं।     हर महीने एक ही तारीख को रिन्यू होने वाला विकल्प भी ग्राहकों को देना होगा।     30 दिन से अधिक वैलिडिटी वाला कम-से-कम 1 Voice-SMS प्लान भी जरूरी हो गया है। (REF.) ट्राई के फैसले से लोगों को क्या फायदा?     पैसे की बचत: डेटा इस्तेमाल नहीं करने वाले ग्राहकों को बेवजह डेटा के पैसे नहीं देने पड़ेंगे।     ज्यादा विकल्प: ग्राहक अपनी जरूरत और खर्च के हिसाब से छोटे-बड़े रिचार्ज चुन सकेंगे। टेलीकॉम कंपनियां नहीं दे रही थीं ऑप्शन ट्राई ने कहा है कि टेलीकॉम कंपनियां 'वॉइस और SMS' ओनली वाले STV (स्पेशल टैरिफ वाउचर) बहुत कम और सिर्फ लंबी वैलिडिटी पर ही दे रही थीं। इससे कम आय वाले उपभोक्ताओं को सस्ते और कम वैलिडिटी के रिचार्ज नहीं मिल पा रहे थे। ट्राई ने कुछ महीने पहले इस मामले पर सुझाव मांगे थे। ट्राई को 1132 प्रतिक्रियाएं/सुझाव मिले थे। लॉन्च करना होगा सस्ता टैरिफ वाउचर TRAI ने TCPR 2026 के 13वें संसोधन को मंजूरी दे दी है, जिसमें टेलीकॉम ऑपरेटर्स को बिना डेटा वाले वॉइस और SMS ओनली वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर (STV) लाने का निर्देश दिया गया है। इस नए नियम का ड्राफ्ट दूरसंचार नियामक ने 7 अप्रैल 2026 को अपनी वेबसाइट पर पब्लिश की थी। इस प्लान को खास तौर पर उन यूजर्स के लिए लाया जाएगा, जिनकी आय बहुत कम है। टेलीकॉम सर्विस लोगों के लिए एक जरूरी माध्यम बन गया है, जिसकी वजह से दूरसंचार नियामक ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स को सस्ते मंथली प्लान लाने का आदेश दिया है। क्या है नया नियम? दूरसंचार नियामक ने अपने नए नियम में टेलीकॉम ऑपरेटर्स को आदेश दिया है कि हर टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 30 दिन या इससे कम वैलिडिटी के स्पेशल टैरिफ वाउचर लॉन्च करने होंगे, जिनमें केवल वॉइस और SMS ऑफर किया जाएगा।  इसके अलावा दूरसंचार कंपनियों को यह भी आदेश दिया है कि उन्हें रिचार्ज कराने वाले ग्राहकों के सामने एक ऐसा विकल्प भी रखना होगा, जिसमें ग्राहक हर महीने एक तय तारीख पर अपना रिचार्ज रिन्यू कर सके। इससे ग्राहकों को अलग-अलग तारीखों पर रिचार्ज कराने की झंझट नहीं रहेगी। साथ ही, 30 दिन से ज्यादा वैलिडिटी वाला कम से कम एक वॉइस और SMS ओनली प्लान भी ग्राहकों को देना होगा। इसका मतलब साफ है कि अब ग्राहकों के पास लंबी वैलिडिटी वाला भी वॉइस और SMS ओनली प्लान से रिचार्ज कराने का विकल्प रहेगा। दूरसंचार नियामक ने यह भी कहा है कि इन प्लान की कीमतों में उचित कटौती की जाए ताकि ये प्लान डेटा वाले प्लान के मुकाबले सस्ते हो। इसके अलावा TRAI ने फर्जी कमर्शियल कॉल्स के नियमों को और सख्त कर दिया है। नए नियम के तहत संदिग्ध स्पैम की पहचान के लिए एआई बेस्ड तरीकों को शामिल किया गया है। साथ ही, ऑटोमैटेड कॉल्स के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। संशोधित नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम ऑपरेटर्स को संदिग्ध स्पैम एक्टिविटी से जुड़े नंबरों की जानकारी शेयर करनी होगी। यही नहीं, एक्टिविटी से जुड़े कई नंबरों पर संदेह होने पर आगे की जांच की अनुमति दी गई है। कब तक आ जाएंगे नए रिचार्ज? ट्राई ने अपने नोटिफिकेशन में किसी तारीख का जिक्र नहीं किया है। ऐसे में माना जाना चाहिए कि अब टेलीकॉम कंपनियों को कदम उठाना है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में ऐसे नए प्रीपेड प्लान्स आ सकते हैं जो कम वैलिडिटी के साथ सिर्फ कॉल और एसएमएस की सुविधा पेश करेंगे। यानी आने वाले दिनों में अगर किसी को 30 दिन की वैलिडिटी वाला रिचार्ज चाहिए और डेटा की जरूरत नहीं है तो उसे ओनली वॉयस और एसएमएस वाला रिचार्ज जरूर मिलेगा।  

खैबर पख्तूनख्वा में मंत्री फजल शकूर खान का कथित अपहरण, टायरों पर बरसाईं गोलियां

खैबर पख्तूनख्वा  पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में दिनदहाड़े एक मंत्री के अपहरण से हड़कंप मच गया. पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग मंत्री फजल शकूर खान को सोमवार दोपहर हथियारबंद नकाबपोशों ने कथित तौर पर अगवा कर लिया. बताया जा रहा है कि हमलावरों ने मोटरवे पर उनकी गाड़ी को रोका और पहले उसके टायरों पर गोली चलाई. इसके बाद बंदूकधारी मंत्री को अपने साथ लेकर चले गए।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों के पास हथियार थे और उन्होंने नकाब पहन रखा था. सोशल मीडिया पर सामने आए कथित वीडियो में कुछ नकाबपोश लोग मुख्य सड़क पर रास्ता रोकते नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि मंत्री की गाड़ी को रोकने के लिए सीधे टायरों पर गोलियां चलाई गईं. अभी तक यह साफ नहीं है कि फजल शकूर खान को किस संगठन या ग्रुप के लोगों ने अगवा किया और इसके पीछे उनकी क्या मांग या वजह है।  PTI नेता ने भी लगाया अपहरण की कोशिश का आरोप मंत्री फजल शकूर खान के अपहरण के अलावा पीटीआई के नेता और प्रांतीय विधायक शकील अहमद को भी अगवा करने की कोशिश की खबर सामने आई है. बताया गया कि मलाकंद में शकील अहमद को निशाना बनाने की कथित कोशिश के बाद पीटीआई कार्यकर्ताओं में गुस्सा फैल गया।  मलाकंद में बड़ी संख्या में पीटीआई कार्यकर्ताओं ने बट खैला बाईपास को जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और नारेबाजी की. पीटीआई ने आरोप लगाया कि खैबर पख्तूनख्वा में उसके प्रांतीय नेतृत्व को निशाना बनाया जा रहा है और नेताओं को बंदूक की नोक पर अगवा करने की कोशिश की जा रही है।  पीटीआई ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप खैबर पख्तूनख्वा के सूचना मंत्री शफी जान ने इन घटनाओं को संविधान, कानून और जनता के जनादेश पर सीधा हमला बताया. पीटीआई के वरिष्ठ नेताओं ने भी मंत्री और पार्टी नेताओं को निशाना बनाए जाने पर जवाबदेही की मांग की है।  पार्टी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर उसके मंत्रियों और नेताओं के खिलाफ कथित कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रुकी, तो पूरे प्रांत में विरोध प्रदर्शन और तेज किए जाएंगे. फिलहाल फजल शकूर खान के अपहरण के पीछे किसका हाथ है और उनका क्या हुआ, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर स्थिति साफ नहीं हुई है। 

Festival Special Trains: दिवाली-छठ पर रेलवे की बड़ी तैयारी, चलेंगी 1000+ ट्रेनें

नई दिल्ली दिवाली और छठ पूजा पर घर जाने की तैयारी कर रहे लोगों को उस वक्त निराशा हाथ लगी, जब त्योहारों के लिए ट्रेनों में टिकट बुकिंग खुलते ही सीटें तेजी से भर गईं. अब देश के विभिन्न शहरों से उत्तर प्रदेश और बिहार आने वाली नियमित ट्रेनों में टिकट स्टेटस 'रिग्रेट' दिखा रहा है, जबकि कुछ ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि कंफर्म होने की उम्मीद न के बराबर समझिए. ऐसे में यात्रियों के लिए रेलवे की स्पेशल ट्रेनें एक विकल्प बन सकती हैं।  इस बार दिवाली 8 नवंबर को है. छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक है. त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए रेलवे ने फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की 1000 से अधिक ट्रिप्स की घोषणा की है. ये सेवाएं 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 के बीच 61 दिनों के दौरान अलग-अलग रेलवे जोन द्वारा उन रूट्स पर चलाई जाएंगी, जिन पर यात्रियों का दबाव ज्यादा रहेगा. रेलवे का मकसद उन यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प देना है, जिन्हें त्योहारों में घर जाने के लिए नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है।  13 रेलवे जोन में चलेंगी स्पेशल ट्रेनें रेलवे के मुताबिक, 43 जोड़ी ट्रेनें और 1,053 ट्रिप्स की योजना है. ये सेवाएं अलग-अलग रेलवे जोन के जरिए संचालित होंगी. कुछ ट्रेनें पूरे अवधि में सीमित संख्या में चलेंगी, जबकि कुछ ट्रेनें सप्ताह में एक या दो दिन चलेंगी. इन स्पेशल ट्रेनों से कोलकाता, प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, नई दिल्ली और पलवल जैसे प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी मिलेगी. इसके अलावा आनंद विहार टर्मिनल, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, ग्वालियर और दादरी जैसे रेलवे स्टेशनों से भी कई ट्रेनें इस नेटवर्क में शामिल हैं. यात्रियों के लिए पुणे, हडपसर, खजुराहो, तिरुचनूर और आगरा कैंटोनमेंट जैसे रूट भी रेलवे की लिस्ट में हैं।  इन रूट पर सबसे ज्यादा स्पेशल ट्रेनें वेस्टर्न रेलवे 13 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें और नॉर्दर्न रेलवे के 10 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाएंगे. नॉर्दर्न रेलवे की बात करें तो प्रयागराज जंक्शन से दिल्ली के शकूरबस्ती रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रेन नंबर 02417, 1 से 14 अक्टूबर तक रोज चलेगी. इसके बाद 15 अक्टूबर से 14 दिसंबर तक यह सोमवार, रविवार, गुरुवार और शुक्रवार को चलेगी. इसकी वापसी ट्रेन 02418 भी अलग-अलग तारीखों में इसी अवधि के दौरान चलाई जाएगी. कानपुर सेंट्रल से नई दिल्ली के बीच 02455 और वापसी में 02456 ट्रेन 2 अक्टूबर से 30 नवंबर तक सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को चलेगी. वहीं आगरा कैंट से पलवल के बीच 01941 और वापसी में 01942 ट्रेन 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक रोज चलेगी।  ईस्टर्न रेलवे में इन रूट पर विकल्प ईस्टर्न रेलवे की सूची में आगरा कैंट से कोलकाता के बीच 01911 और वापसी में 01912 शामिल हैं. 01911 के 9 फेरे और 01912 के 9 फेरे निर्धारित हैं. कानपुर सेंट्रल से कोलकाता के बीच 04157 और वापसी में 04158 ट्रेन दी गई है. दोनों दिशाओं में 8-8 फेरे निर्धारित हैं. वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी से आसनसोल के बीच 04185 और वापसी में 04186 सप्ताह में दो दिन चलेंगी. दोनों दिशाओं में 16-16 फेरे दिए गए हैं।  दूसरे रेलवे जोन में भी कई विकल्प सदर्न रेलवे की सूची में कानपुर सेंट्रल से मदुरै के बीच 01925 के 8 फेरे और प्रयागराज जंक्शन से कन्याकुमारी के बीच 04171 के 2 फेरे शामिल हैं. साउथ वेस्टर्न रेलवे में प्रयागराज जंक्शन से हुबली, कानपुर सेंट्रल से सर एम. विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु, सूबेदारगंज से यशवंतपुर और प्रयागराज जंक्शन से यशवंतपुर के बीच स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं. नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में कानपुर सेंट्रल से गुवाहाटी के बीच 04127 और वापसी में 04128 ट्रेन के 9-9 फेरे निर्धारित किए गए हैं।  भीड़ को देखते हुए बढ़ सकती हैं ट्रेनें रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की मांग और वेटिंग लिस्ट पर लगातार नजर रखी जा रही है. टिकट बुकिंग और अलग-अलग प्लेटफॉर्म से मिलने वाले डिमांड डेटा के आधार पर जरूरत पड़ने पर और स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा सकती है. स्टेशनों पर भीड़ को संभालने के लिए अतिरिक्त कमर्शियल और RPF स्टाफ तैनात किया जा रहा है. सफाई व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  टिकट नहीं मिला तो देखें ये विकल्प अगर आप दिवाली या छठ पूजा पर घर जाने की तैयारी कर रहे हैं और नियमित ट्रेन में टिकट नहीं मिल रहा, तो सिर्फ वेटिंग लिस्ट पर निर्भर रहने के बजाय इन स्पेशल ट्रेनों में सीट तलाशना एक विकल्प हो सकता है. खासकर जिन यात्रियों के रूट पर नियमित ट्रेनों में 'रिग्रेट' या बहुत लंबी वेटिंग दिख रही है, उन्हें अपने स्टेशन से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों की सूची जरूर देखनी चाहिए. यात्रियों को हमारा सुझाव है कि वे टिकट बुक करने से पहले संबंधित रेलवे जोन की अपडेटेड लिस्ट और ट्रेन का रनिंग शेड्यूल जरूर चेक करें…     अलग-अलग रेलवे जोन से चलने वाली स्पेशल ट्रेनें नॉर्दर्न रेलवे (Northern Railway)   क्र. ट्रेन नंबर रूट दिन संचालन अवधि कुल फेरे 1 02417 प्रयागराज जंक्शन → शकूरबस्ती रोजाना 1 अक्टूबर–14 अक्टूबर 2026 14   02417 प्रयागराज जंक्शन → शकूरबस्ती सोमवार, रविवार, गुरुवार, शुक्रवार 15 अक्टूबर–14 दिसंबर 2026 28   02418 शकूरबस्ती → प्रयागराज जंक्शन रोजाना 1 अक्टूबर–15 अक्टूबर 2026 15   02418 शकूरबस्ती → प्रयागराज जंक्शन बुधवार, गुरुवार, शनिवार, रविवार 17 अक्टूबर–17 दिसंबर 2026 26 2 04163 नारायणपुर बाजार → शकूरबस्ती मंगलवार, बुधवार, शनिवार 17 अक्टूबर–16 दिसंबर 2026 19   04164 शकूरबस्ती → नारायणपुर बाजार सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार 16 अक्टूबर–15 दिसंबर 2026 20 3 02455 कानपुर सेंट्रल → नई दिल्ली सोमवार, बुधवार, शुक्रवार, शनिवार 2 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 35   02456 नई दिल्ली → कानपुर सेंट्रल सोमवार, बुधवार, शुक्रवार, शनिवार 2 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 35 4 02457 कानपुर सेंट्रल → आनंद विहार टर्मिनल मंगलवार, गुरुवार, रविवार 1 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 26   02458 आनंद विहार टर्मिनल → कानपुर सेंट्रल मंगलवार, गुरुवार, रविवार 1 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 26 5 04123 प्रयागराज जंक्शन → हजरत निजामुद्दीन बुधवार, रविवार 4 अक्टूबर–29 नवंबर 2026 17   04124 हजरत निजामुद्दीन → प्रयागराज जंक्शन सोमवार, गुरुवार 1 अक्टूबर–30 नवंबर 2026 17 6 04183 प्रयागराज जंक्शन → हजरत निजामुद्दीन मंगलवार 20 अक्टूबर–1 दिसंबर 2026 7   04184 हजरत निजामुद्दीन → प्रयागराज जंक्शन बुधवार 21 अक्टूबर–2 दिसंबर 2026 7 … Read more

23 सितंबर को बैंक क्यों रहेंगे बंद? RBI की छुट्टी लिस्ट में क्या है वजह

नई दिल्ली  कल बुधवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आप कल 23 सितंबर को बैंक ब्रांच जाकर अपना काम निपटाने का प्लान कर रहे हैं तो पहले जान लीजिए कि आपके राज्य में बैंक खुले हैं या नहीं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कैलेंडर के मुताबिक कल बुधवार को बैंक कुछ राज्यों में बंद रहने वाले हैं। यहां जानिये कल किस राज्य में और क्यों बैंक बंद रहने वाले हैं। कल बुधवार 23 सितंबर को क्यों बंद रहेंगे बैंक? कल बुधवार 23 सितंबर को बैंक महाराजा हरि के जन्मदिवस के कारण बंद रहेंगे। कल बैंक इसके कारण जम्मू-कश्मीर में नहीं खुलेंगे। यहां सभी सरकारी और प्राइवेट सेक्टर बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा, एक्सिस, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसे तमाम बैंक बंद रहेंगे। जम्मू-कश्मीर के अलावा बैंक देश के बाकी सभी राज्यों में खुले रहेंगे। जम्मू-कश्मीर रियासत के अंतिम डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह जी का जन्म 23 सितंबर 1895 को जम्मू में हुआ था। उन्हें एक दूरदर्शी और समाज सुधारक राजा के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपने शासनकाल के दौरान शिक्षा, बाल विवाह उन्मूलन, अस्पृश्यता विरोधी कानूनों और न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव किए। 26 अक्टूबर 1947 को उन्होंने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर इस राज्य को भारत का हिस्सा बनाया। देश के बाकी राज्यों में कल खुली रहेंगी बैंक ब्रांच? कल जम्मू-कश्मीर के अलावा देश के बाकि सभी राज्यों दिल्ली, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र,कर्नाटक,ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, झारखंड, मध्यप्रदेश, तेलांगना आदि में बैंक खुले रहेंगे। आज 22 सितंबर को यहां बंद हैं बैंक आज मंगलवार 22 सितंबर को झारखंड में करमा पूजा की वजह से बैंक बंद है। झारखंड में करमा पूजा प्रकृति और कृषि से जुड़ा लोकल त्योहार है। इस दिन करम वृक्ष की डाली की पूजा की जाती है। मान्यता है कि करम देवता परिवार को सुख-समृद्धि, खुशहाली और रक्षा करते हैं। सितंबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक? 22 सितंबर – करमा पूजा के कारण रांची में बैंक बंद रहने वाले हैं। 23 सितंबर – महाराजा हरि सिंह जी के जन्मदिन के कारण जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 25 सितंबर – इंद्रजात्रा के कारण गंगटोक में बैंक बंद रहने वाले हैं। 26 सितंबर – चौथे शनिवार के कारण बैंक बंद रहेंगे। 27 सितंबर – रविवार