samacharsecretary.com

पाकिस्तानी दावों की निकली हवा! राफेल के दम पर इंडियन एयरफोर्स को मिला ‘ही-मैन’ अवतार

बेंगलुरु   भारत ने मित्र देश फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया है. इसके साथ ही अब इस सौदे को लेकर तमाम तरह की अटकलबाजियों पर फिलहाल विराम लग गया है. भारत ने फ्रांस के साथ 3.25 लाख करोड़ की ऐतिहासिक डिफेंस डील की है. अब इसको लेकर भारत ने लेटर ऑफ रिक्‍वेस्‍ट (Letter of request-LOR) को अंतिम रूप दे दिया है. अब इसे फ्रांस को भेजा जाएगा. दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच जाएगी. इसके तहत भारत को 114 राफेल फाइटर जेट मिलना है. बताया जा रहा है कि इस सौदे के तहत भारत को राफेल का एडांस वर्जन F4 मिलेगा. यह पहले के विमानों के मुकाबले ज्‍यादा एडवांस है. राफेल F4 फाइटर जेट में पहले के मुकाबले पावरफुल सेंसर और रडार सिस्‍टम लगाया गया है. इसके साथ ही राफेल F4 में कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी से डेवलप ज्‍यादा घातक वेपन भी इंटीग्रेट किया जा सकेगा. पाकिस्‍तान भी चीन और तुर्की से फाइटर जेट खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक सिर्फ बतोलेबाजी ही चल रही है. किसी तरह का ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।  भारत ने भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया में बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस को भेजे जाने वाले लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) को अंतिम रूप दे दिया है. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह दस्तावेज अगले कुछ हफ्तों में फ्रांस को भेजा जा सकता है. इस सौदे के तहत करीब 90 राफेल विमान भारत में ही फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation और एक भारतीय साझेदार कंपनी के सहयोग से बनाए जाएंगे, जबकि बाकी विमान सीधे फ्रांस से तैयार अवस्था में भारत आएंगे. यह खरीद गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट समझौते यानी इंटरगवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) के तहत की जा रही है. रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, फ्रांस की ओर से LoR का जवाब मिलने के बाद भारत औपचारिक रूप से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा. इसके बाद कीमत, तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट को लेकर दोनों देशों के बीच विस्तृत बातचीत होगी. अंतिम मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति (CCS) से मिलने के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।  प्रस्‍ताव को 3 महीने पहले मिली थी मंजूरी इस प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने तीन महीने पहले मंजूरी दी थी. अब भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अगले महीने की शुरुआत में फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले हैं. यह दौरा प्रधानमंत्री Narendra Modi की संभावित फ्रांस यात्रा से पहले हो रहा है, जिससे रक्षा सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है. भारतीय वायुसेना पहले से 36 राफेल विमानों का ऑपरेशन कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना भी आने वाले वर्षों में 26 राफेल-M विमानों को अपने विमानवाहक पोतों (Aircraft Carrier) के लिए शामिल करने जा रही है. अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद से प्रशिक्षण, रखरखाव और लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी।  क्‍यों अहम है यह डील? इस परियोजना में लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल करने की योजना है. भारत विमान के इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) हासिल करने पर भी जोर दे रहा है, ताकि स्वदेशी हथियार प्रणालियों जैसे Astra Missile और BrahMos-NG को राफेल से जोड़ा जा सके. हालांकि, विमान के पूरे सोर्स कोड तक पहुंच मिलने की संभावना कम मानी जा रही है. सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक बातचीत पूरी कर सौदे पर हस्ताक्षर करना है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह सौदा भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा. फिलहाल वायुसेना के पास केवल 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्‍क्‍वाड्रन की है।  राफेल डील जरूरी क्‍यों? राफेल विमानों की नई खेप भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों जैसे LCA Mk1A, LCA Mk2 और Advanced Medium Combat Aircraft के पूरी तरह विकसित होने तक कमी के अंतर को भरने में मदद करेगी. AMCA के 2035 के बाद सेवा में आने की संभावना है. इस बीच भारत पांचवीं पीढ़ी के एक अन्य लड़ाकू विमान की खरीद पर भी विचार कर रहा है. रूस ने अपने Sukhoi Su-57 लड़ाकू विमान का प्रस्ताव भारत को दिया है, लेकिन इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। 

पर्यावरण पर बड़ा खतरा, नई स्टडी में खुलासा- हिमालयी क्षेत्र भी प्रदूषण की चपेट में

नई दिल्ली  एक स्टडी में पाया गया है कि केवल एक दशक में PM प्रदूषण 20 फीसदी ये ज्यादा बढ़ गया है। इसमें बिहार और पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इतना ही नहीं, मैदानों से निकलने वाला प्रदूषण अब हिमालय तक भी पहुंच रहा है। कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट ने यह स्टडी की है, जिसे 'एटमॉस्फेरिक एनवायरनमेंट' जर्नल में प्रकाशित करवाया गया है। स्टडी में यह भी सामने आया है कि अभी तक देश में बायोमास जलाने की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। अध्ययन से पता चला है कि थर्मल पावर प्लांट, बायोमास जलने और शहरी ठोस कचरा जलने से लगातार होने वाले उत्सर्जन से प्रदूषण की स्थिति गंभीर होते जा रही है। यह गंगा के मैदान, हिमालयी क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत के 25 सालों के डेटा पर आधारित एक सैटेलाइट स्टडी है। हिमालय तक कैसे पहुंच रहा प्रदूषण स्टडी में बताया गया है कि मैदानों में हो उत्सर्जन हो रहा है, वह सीधे हिमालय में एरोसोल की मात्रा को प्रभावित कर रहा है। एरोसोल वातावरण में धूल, कालिख और रासायनिक बूंदों जैसे सूक्ष्म ठोस या तरल कणों के सस्पेंशन को कहते हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली का प्रदूषण हिमालय की पश्चिमी और मध्य श्रेणियों तक पहुंच रहा है और बिहार और पश्चिम बंगाल का प्रदूषण पूर्वी हिमालय को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे पता चलता है कि पहाड़ों की हवा में भी अब वायु प्रदूषण घुल चुका है। चौंकाने वाले आंकड़े हालांकि अध्ययन में ये पाया गया कि भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के कारण बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में पार्टिकुलेट मैटर के स्तरों में मापने योग्य सुधार देखने को मिले। लेकिन ये राज्य अभी भी अभी भी कार्बनयुक्त एयरोसोल के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। स्टडी से पता चला कि जो कार्बन प्रदूषण 2000–2009 के दौरान बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तरी पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में केंद्रित था, वह 2020–2024 तक पूरे पश्चिम बंगाल, बिहार, बांग्लादेश और असम, मेघालय और त्रिपुरा तक फैल गया। अगर हिमालय न होता तो फिर क्या होता…  अगर हिमालय न होता तो भारत कैसा होता? जवाब सीधा है कि उत्तराखंड, हिमाचल, कश्मीर और पश्चिम उत्तर प्रदेश शीत रेगिस्तान होते। पंजाब और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति न होती और मध्य भारत में इतनी गर्मी होती कि वहां पर रहने लायक कुछ भी न होता।  यूरेशिया टेक्टॉनिक प्लेट खिसकने से विशाल समुद्र टेथिस से हिमालय की उत्पत्ति हुई और भारत का वो भूगोल बना जिसमें आज एक अरब 33 करोड़ लोग रहते हैं।  इस विशाल टेथिस समुद्र का प्रतिनिधित्व अब केवल लेह से 125 किलोमीटर दूरी पर स्थित पेंगोंग झील करती है। जो तीस प्रतिशत भारत क्षेत्र में है और बाकी का सत्तर फीसद चीन में। लाखों सालों की प्रक्रिया से जब हिमालय का निर्माण हुआ तो उससे तीन प्राकृतिक और भौगोलिक परिघटनायें हुई। जिससे भारत रहने योग्य बना। ये तीन परिघटनायें थीं- 1. मानसून बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न होता है और साउथ वेस्ट होते हुये हिमालय से टकराता है। बादल हिमालय से टकराकर लौटते हैं और जिससे उत्तरी भारत समेत राजस्थान तक जमकर बारिश होती है। इससे उत्तरी भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत को नई आक्सीजन मिलती है। जीवन खुशहाल रहता है।  इस बारिश से तमाम नदियां, जल धारायें, जंगल और भूजल रिचार्ज होते हैं। अगर हिमालय नहीं होता तो ये मानसून के बादल सीधे पश्चिमी चीन होते हुये मंगोलिया से रूस के साइबेरिया में दाखिल हो जाता। मतलब, भारत में जो जून 21 या 22 तारीख को मानसून आता है और सितंबर आखिरी तक रहता है। वो केवल भारत के ऊपर से गुजरते वक्त कुछ बारिश करता और आगे निकल जाता। जिससे मध्य भारत का भूजल रिचार्ज नहीं होता और हिमालय की नदियों में पानी कम रहता। मसलन, जिन इलाकों में नहरों के जरिये खरीफ की फसलें होती हैं। वहां कुछ नहीं होता।  2. हर साल जनवरी और फरवरी माह में उत्तरी ध्रुव से साइबेरिया होते हुये बर्फीली हवायें मंगोलिया पहुंचती हैं और वहां से चीन के शिंझियांग और तिब्बत होते हुये भारत में दाखिल होती। जिससे साइबेरिया, मंगोलिया और चीन के शिनझिंगया, गिनगाई, गानसू और तिब्बत की तरह हिमाचल, उत्तराखंड, कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शीत मरूस्थल होते। लेकिन हिमालय होते हुये ये चीन से लौट जाती है। जिस कारण चीन का गोबी मरूस्थल का निर्माण हुआ और आज वो पर्यावरण के हिसाब से शून्य है।  3. मानसून के अलावा पश्चमी, मध्य और उत्तर भारत में बारिश का एक मुख्य जरिया भू-मध्य सागर से उठने वाले पिश्चमी विक्षोभ का है। जो हर साल अपने साथ यूरोप के नीचे से भू-मध्य सागर से वाष्पीकरण कर बादल विकसित करता है और फिर ये बादल पाकिस्तान से होते हुये हिमालय से टकराते हैं। जिससे जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर को छोड़ (पोस्ट मानसून) भारत में बारिश होती है और हिमालय और इससे लगते कैचमेंट एरिया में बर्फबारी होती है। ग्लेशियर बनते हैं और फिर 12 महीने गंगा, यमुना, ब्रहमापुत्र सरीखी बड़ी नदियों में पानी रहता है। तापमान गर्मी से ठंडा हो जाता है।  कुल मिलाकर हिमालय का हमारे जीवन में बड़ा योगदान है। इसलिये इसे थर्ड पोल या तीसरा ध्रुव भी कहते हैं। एक प्रमाणिक तथ्य ये भी है कि हिमालय की अगर पूरी बर्फ भी पिघल जाये तो भी हिमालय से निकलने वाली कोई भी नदी नहीं सूखेगी। इसके पीछे मौसम विज्ञान केंद्र का शोध है। असल में, हिमालय के ग्लेशियर नदियों को 12 महीने  पानी नही देते। मसलन, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च में ग्लेश्यिर पूरी तरह से फ्रीज होते हैं। तापमान -20 डिग्री तक हो जाता है। तो ऐसे में फिर गंगा, यमुना, सिंधु, सतलुज, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों में पानी कहां से आता है? मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह बताते हैं कि ये पानी मानसून में विभिन्न जंगलों में स्टोर हुये पानी के जरिये नदियों तक पहुंचता है। उसी तरह से जैसे मध्य भारत में नर्मदा और गोदावरी में 12 महीने पानी रहता है और इन दोनों नदियों में  ग्लेशियर से पानी बिल्कुल भी नहीं आता। मैंने उनसे पूछा कि फिर अगर हिमालय की पूरी बर्फ पिघल जाये तो  क्या होगा? वो बताते हैं फिर होगा ये कि हिमालय क्षेत्र में जबरदस्त गर्मी पड़ेगी … Read more

Teesta Project में चीन की एंट्री तय? बांग्लादेश ने भारत का इंतजार छोड़ बीजिंग की ओर बढ़ाया कदम

ढाका  बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान जल्द ही अपने पहले विदेश दौरे पर चीन जा सकते हैं। यूं तो तारिक रहमान को शपथ लेने के बाद भारत और भूटान जैसे दूसरे पड़ोसी देशों से भी न्योता मिला था, लेकिन बांग्लादेश के पीएम चीन को अपनी पहली प्राथमिकता बना रहे हैं। लेकिन बांग्लादेश भारत से पहले चीन को रख कर आखिर हासिल क्या करना चाहता है? इस सवाल का जवाब ढूंढना इतना मुश्किल नहीं है। दरअसल बांग्लादेश तीस्ता नदी के पानी के लिए बेकरार है। वह तीस्ता प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए चीन से गुहार भी लगा चुका है। ऐसे में तारिक रहमान के दौरे का मुख्य एजेंडा भी यही होगा। गौरतलब है कि बांग्लादेश ने इस महीने की शुरुआत में ही तीस्ता नदी पुनरुद्धार योजना के लिए चीन की आधिकारिक तौर पर मदद मांगी थी। यही नहीं, इसके दो दिन पहले ही बांग्लादेश की तरफ से यह बयान आया था कि सालों से अटके तीस्ता समझौते को लेकर अब वह भारत का इंतजार नहीं करेगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा था कि तीस्ता समझौते के लिए बांग्लादेश जल्द ही चीन का रुख करेगा। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। फंड देने के लिए तैयार चीन अब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री खुद चीन जा रहे हैं। इस यात्रा का असल मकसद तीस्ता नदी परियोजना के लिए चीन से अरबों डॉलर का फंड हासिल करना है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने पुष्टि की है कि पीएम रहमान जल्द ही चीन का दौरा करेंगे और चीन का 'एक्सिम बैंक' तीस्ता नदी प्रबंधन और बहाली परियोजना को फंड देने के लिए तैयार है। ढाका में मौजूद चीनी राजदूत याओ वेन ने भी कहा है कि इस ऐतिहासिक यात्रा से दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे। तीस्ता नदी को लेकर क्या है विवाद? पिछले 15 सालों से भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का समझौता लटका हुआ है। दोनों देशों के बीच काफी समय से बात चल रही है, लेकिन अभी तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। बांग्लादेश चाहता है कि उसे नदी में बराबर का हिस्सा मिले, लेकिन पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार इसका विरोध करती रही। इससे पहले 1983 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36 फीसदी और भारत को 39 फीसदी पानी देने की बात थी। वहीं बाकी 25 फीसदी का हिसाब बाद में तय होना था। लेकिन यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश आपस में बीच 54 नदियां साझा करते हैं, लेकिन अब तक सिर्फ गंगा और कुशियारा पर ही समझौता हुआ है। अन्य नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर अब भी विवाद चल रहा है। भारत के लिए क्यों खतरे की घंटी है चीन की फंडिंग? इसके लिए थोड़ा भूगोल समझते हैं। तीस्ता नदी भारत में सिक्किम से निकलती है और पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में घुसती है। इसके बाद वह ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। बांग्लादेश इस नदी के पानी के रखरखाव और सूखे से निपटने के लिए एक मेगा-प्रोजेक्ट बनाना चाहता है, जिसमें चीन निवेश करने को बेताब है। इस प्रोजेक्ट में चीनी एंट्री से भारत को बड़ा खतरा है। दरअसल बांग्लादेश का तीस्ता प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में स्थित 'चिकन नेक' कॉरिडोर के बेहद करीब है। ऐसे में युद्ध या तनाव की स्थिति में चीन इस कॉरिडोर के पास बैठकर भारत की लाइफलाइन को काटने की कोशिश कर सकता है।

CM शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों को चेताया, बोले- ‘खिलाने पर पैसा क्यों बर्बाद करें’

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार अवैध बांग्लादेशियों को लेकर एक्शन मोड में आ गई हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को कड़ी चेतावनी दी है। शुभेंदु अधिकारी ने अवैध बांग्लादेशियों को चेताते हुए कहा कि जल्दी-जल्दी भागो. हम इन्हें जेल में रखकर इन्हें खिलाना नहीं चाहते हैं. हमें अपना पैसा इन्हें जेल में रखकर खिलाने में क्यों बर्बाद करना चाहिए? हमने पुलिस से इन्हें सीधे बांग्लादेश भेजने को कह दिया है।  इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर बहुत बड़ा कदम उठाया था. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के निर्देश जारी किए थे।  शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी की गई थी. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है।  क्या है बंगाल की 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति? बंगाल में बीजेपी सरकार की नई 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति के बीच स्टेट बॉर्डर के कई पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े समूह इकट्ठा होने लगे हैं. उत्तरी 24 परगना और मालदा से आ रही तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि राज्य का घुसपैठ रोधी अभियान अब सिर्फ सियासी बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्रवाई का रूप ले चुका है।  उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर मंगलवार सुबह 100 से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते थे. ये लोग कथित तौर पर बंगाल के अलग-अलग इलाकों में अवैध रूप से रह रहे थे. विदेशी नागरिकों को देश से निकालने और उनके लिए होल्डिंग सेंटर बनाने के संबंध में सरकार की हालिया घोषणाओं के बाद वे चेकपॉइंट पर पहुंचे।  बता दें कि बीजेपी ने इस साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है। 

गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत, Bharat Gas ने फिर शुरू की खास सुविधा

नई दिल्ली  वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत गैस ने अपने ग्राहकों को अच्छी खबर दी है। एक बार फिर से कई इलाकों में एलपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी शुरू हो गई है। भारत गैस ने युद्ध के शुरू होने के बाद गैस की किल्लत के बीच यह सुविधा कई स्थानों पर बंद कर दी थी। खासगावं ग्रामीण इलाकों में। बता दें, इससे पहले एचपी ने भी एलपीजी सिलेंडर की बंद पड़ी होम डिलीवरी की सुविधा को फिर से शुरू कर दिया था। क्यों बंद हो गई थी सुविधा? युद्ध शुरू होने के बाद एक समय पर अचानक गैस की डिमांड में इजाफा हो गया था। लोग पैनिक बुकिंग करने लगे थे। जिसके बाद डीलर्स ने होम डिलीवर की सुविधा को कई इलाकों में बंद कर दिया था। लेकिन अब नियमों में हुई सख्ती के बाद एक बार फिर से LPG सिलेंडर की उन इलाकों में होम डिलीवरी शुरू हो गई है। एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम  सरकार ने कालाबाजारी को रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। अब बिना ओटीपी के एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलेगा। नए नियमों के अनुसार आपको रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से पहले LPG सिलेंडर की बुकिंग करनी होगी। उसके बाद आपके मोबाइल नंबर ओटीपी आएगा। इसके बाद आप उस डीलर्स के पास जाकर या फिर सिलेंडर वाली गाड़ी को ओटीपी दिखाएंगे। वो ओटीपी को वेरीफाई करेगा। उसके बाद ही नया LPG सिलेंडर मिल पाएगा। ध्यान रहे कि आपका गैस पासबुक आपके पास होना चाहिए। नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो गांव में रहता है वो 45 दिनों के बाद ही नए सिलेंडर की बुकिंग कर पाएंगे। वहीं, शहरों में रहने वाले लोगों के लिए सरकार ने 25 दिन का कैप लगाया है। LPG सिलेंडर के दाम स्थिर पिछले कुछ हफ्तों से गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 60 रुपये बढ़ाया गया था। वहीं, कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 900 से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी। जिसके बाद दाम 3000 रुपये के पार पहुंच गया है। गैस की समस्या विकट?  भारत जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा एलपीजी विदेशों से आयात करता था उसके लिए मौजूदा परिस्थितियां काफी कठिन है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने की वजह से एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हुई है। देश के सामने एलपीजी संकट खड़ा हो गया है। बता दें, भारत सरकार ने एलपीजी उत्पादन को घरेलू स्तर पर बढ़ाने का निर्देश दिया है।

सियासी बदलाव लगभग तय! सिद्दरमैया को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी, डीके शिवकुमार की ताजपोशी संभव

 नई दिल्ली कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच शुरुआत में ढाई- ढाई साल की सत्ता की शर्त के साथ शुरू हुई कांग्रेस सरकार में आखिरकार तीन साल बाद बदलाव का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी से चर्चा के बाद आखिरकार सिद्दरमैया राज्य की सत्ता छोड़ राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि राज्य के मंत्रिमंडल और राज्यसभा में दूसरे सदस्यों के नामांकन में भी सिद्दरमैया की पसंद को माना जाएगा। कांग्रेस हाई कमान की बैठक में फैसला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों नेताओं के साथ पहले अलग-अलग और फिर एक साथ बैठक की। शुरुआत में सिद्दरमैया इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें मना लिया। ध्यान रहे कि नेतृत्व बदलाव को लेकर पार्टी में पहले भी बैठकें होती रही थीं, लेकिन सिद्दरमैया तब राजी नहीं हुए थे और उन्हें बिना सहमत किए कांग्रेस बदलाव का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। वैसे भी कर्नाटक विधानसभा में सिद्दरमैया के समर्थकों की संख्या ज्यादा है। सोमवार को कर्नाटक के दोनों ही नेता अपने समर्थक विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचे थे। केसी वेणुगोपाल ने बताया- राज्यसभा सीटों पर हुई चर्चा बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने हालांकि मीडिया से कहा कि आप लोग जो भी अंदाजा लगा रहे हैं, वह सिर्फ अंदाजा है, कोई सच्चाई नहीं है। आज हमने कर्नाटक की राज्यसभा सीटों और काउंसिल सीटों पर चर्चा की। उनके साथ सिद्दरमैया और शिवकुमार भी थे। वेणुगोपाल ने कहा कि कर्नाटक की राज्यसभा और काउंसिल सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी दूसरी सीटों के साथ की जाएगी। आज हमने यही तय किया है। किसी और बात पर चर्चा नहीं हुई। लेकिन, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सिद्दरमैया अगले कुछ दिनों में इस्तीफा देंगे। गौरतलब है कि एक जून को राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होगी और इसके साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिवकुमार का शपथग्रहण तब होगा जब सिद्दरमैया राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे।

बॉर्डर चेकपोस्टों पर सख्ती बढ़ी, अवैध प्रवासियों में खौफ का माहौल

कोलकाता पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का घुसपैठियों पर एक्शन शुरू हो गया है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति का जमीनी असर दिखने लगा है. राज्य सरकार की सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाने की घोषणा के बाद, बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों में भारी हड़कंप मच गया है. मंगलवार सुबह उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट और मालदा के सीमावर्ती इलाकों में सैकड़ों बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं वापस अपने देश लौटने के लिए सीमा पर जुटने लगे. दूसरी ओर, मालदा के इंग्लिश बाजार टाउन में राज्य का पहला होल्डिंग सेंटर पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जहां कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी के बीच संदिग्ध प्रवासियों को रखा जा रहा है।  बांग्लादेशी घुसपैठिया बॉर्डर पर जुटने लगे. नए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत पुलिस को बिना वारंट संदिग्धों को गिरफ्तार करने की खुली छूट दी गई है. हालांकि, सीएए के दायरे में आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को इस कार्रवाई से पूरी तरह बाहर रखा गया है, लेकिन अवैध रूप से रह रहे अन्य प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान अब राजनीतिक बयानों से निकलकर कड़े प्रशासनिक एक्शन में बदल चुका है।  दरअसल, यह नजारा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का हालिया आदेश के बाद सामने आया है। 21 मई 2026 को सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को आदेश दिया कि कहीं भी कोई बांग्लादेशी घुसपैठी पकड़ा जाए, तो सीधा सीमा सुरक्षा दल (BSF) को सौंप दो। उन्होंने कहा कि अब इन्हें अदालत नहीं ले जाया जाएगा बल्कि सीधे वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने यह आदेश पिछले साल अप्रैल में संसद में पारित आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 के तहत दिया। इस कानून के तहत विदेशियों के भारत में प्रवेश, प्रवास और निकास को नियंत्रित किया जा सकता है। इस आदेश के बाद बंगाल सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए ‘होल्डिंग सेंटर‘ बना रही है, जिसमें ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ के तहत देश से निकाला जाएगा।  इस फ्रेमवर्क के तहत, जिन लोगों पर अवैध रूप से देश में घुसने का शक है, उन्हें 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. इस दौरान, जिला मजिस्ट्रेट और तय अधिकारी उनकी पहचान की जांच करते हैं, बायोमेट्रिक जानकारी इकट्ठा करते हैं, और उन्हें वापस भेजने से पहले उनका रिकॉर्ड सेंट्रल डेटाबेस में अपलोड करते हैं।  मालदा के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया, “हिरासत केंद्र ने काम करना शुरू कर दिया है. अभी वहां नौ बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है. जरूरी जांच और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. हिरासत में लिए गए लोगों के साथ तय कानूनी नियमों के मुताबिक ही बर्ताव किया जा रहा है।  इस नए कदम को 'इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट, 2025' से भी जोड़ा जा रहा है. इस एक्ट ने इमिग्रेशन और विदेशी नागरिकों से जुड़े कई पुराने कानूनों की जगह ले ली है।  इस कानून ने निगरानी, ​​​​हिरासत और देश-निकले के लिए एक टेक्नोलॉजी-बेस्ड ढांचा पेश किया. इसके साथ ही, हेड कांस्टेबल या उससे ऊपर के रैंक वाले पुलिस अधिकारियों को संदिग्ध उल्लंघन पट्टियों को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार भी दिया।  डिपोर्टेशन पर पॉलिटिक्स सियासी स्तर पर इन डेवलपमेंट्स ने बंगाल में घुसपैठ और सिटिजनशिप पर लंबे वक्त से चल रही बहस को और तेज कर दिया है. बीजेपी नेताओं ने इस ड्राइव का स्वागत किया है और दावा किया है कि राज्य गैर-कानूनी माइग्रेशन और एक्सट्रीमिस्ट नेटवर्क के लिए कमजोर हो गया है।  नॉर्थ मालदा से बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू ने कहा, "हमारे देश और हमारे राज्य को सुरक्षा की जरूरत है. बंगाल रोहिंग्या, आतंकवादियों और 'जिहादी' एलिमेंट्स के लिए एक कॉरिडोर बन गया था। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि सिटिजनशिप (अमेंडमेंट) एक्ट के तहत सुरक्षित कम्युनिटीज इस कार्रवाई के दायरे से बाहर रहेंगी।  केंद्र सरकार के बाद के एक छूट आदेश के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दी गई है, जो 31 दिसंबर, 2024 से पहले भारत में दाखिल हुए थे।  जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है और होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचता दिख रहा है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रियाएं शुरू होने की संभावना है।  सीएए के दायरे से बाहर के लोग सीधे होंगे गिरफ्तार बंगाल में अवैध प्रवासियों को पकड़ने के लिए जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर स्थापित करने की घोषणा के बाद शुरू हुई है. सीमा पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े जाने और जेल जाने के डर से ये प्रवासी अब खुद ही अपनी पहचान उजागर कर वापस लौटने की गुहार लगा रहे हैं. इस पूरी कार्रवाई की नींव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में रखी गई थी. मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम यानी सीएए (CAA) के दायरे से बाहर के सभी लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा।  24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए राज्य के गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग की फॉरेनर्स ब्रांच ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इस कड़ी में मालदा जिला पूरे राज्य में पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जहां होल्डिंग सेंटर ने बकायदा काम करना शुरू कर दिया है. मालदा के इंग्लिश बाजार टाउन के चंदन पार्क में बनाए गए इस सेंटर में 24 घंटे की सीसीटीवी निगरानी रखी जा रही है. इसकी सुरक्षा में 12 सशस्त्र पुलिसकर्मियों सहित नागरिक सुरक्षा स्टाफ और सिविक वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है।  क्या है इमिग्रेशन एक्ट 2025 इस पूरे अभियान को कानूनी तौर पर बेहद मजबूत और प्रभावी बनाने का काम नए ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025’ ने किया है. इस नए कानून ने पुराने और जटिल … Read more

होर्मुज को लेकर भारत के लिए बड़ी खबर, 1 जून से नए रूट की संभावनाएं तेज

नई दिल्‍ली  भारत पिछले कुछ दशक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट से गुजर रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी लंबे युद्ध ने तेल और गैस सहित तमाम सेक्‍टर पर जबरदस्‍त असर डाला है. चौतरफा मुश्किलों से घिरे भारत के लिए अगले महीने की शुरुआत से एक राहत भरी खबर आ रही है. भारत और खाड़ी देश ओमान के बीच मुक्‍त व्‍यापार समझौता 1 जून, 2026 से लागू हो जाएगा. इस समझौते की सबसे खास बात ये है कि ओमान होर्मुज के दायरे से बाहर है तो इस समझौते से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को क्‍या फायदा मिलने वाला है।  भारत और ओमान के बीच 18 दिसंबर, 2025 को कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) हुआ था, जो 1 जून से प्रभावी हो जाएगा. भारत ने पिछले कुछ समय से ओमान के अलावा कई देशों के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता किया है. जाहिर है कि इस समझौते से दोनों ही देशों को एक-दूसरे के बाजार में बिना टैरिफ चुकाए अपने सामान बेचने का मौका मिलेगा, लेकिन ओमान इस मामले में कुछ खास है. इसकी सबसे बड़ी वजह उसका होर्मुज के दायरे से बाहर होना. इसका मतलब है कि दोनों देशों के बीच बिना होर्मुज की बाधा के ही कारोबार किया जा सकता है।  एफटीए से क्‍या होगा फायदा इस मुक्‍त व्‍यापार समझौते में ओमान ने भारत के 98.08 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्‍म कर दिया है. इससे भारत का ओमान को किया जाने वाला 99.38 फीसदी एक्‍सपोर्ट पूरी तरह टैरिफ फ्री हो जाएगा. इसका मतलब है कि भारत का लगभग पूरा ही निर्यात टैरिफ फ्री हो जाएगा. भारत ने भी ओमान से आने वाले 77.79 फीसदी सामानों पर टैरिफ खत्‍म कर दी है, जो कुल आयात का 94.81 फीसदी होता है. भारत ने कुछ संवेदनशील सेक्‍टर जैसे डेयरी प्रोडक्‍ट, चॉकलेट और ज्‍वैलरी सेक्‍टर को इस एफटीए से बाहर रखा है।  भारत के किस सेक्‍टर को होगा फायदा     टेक्सटाइल, गारमेंट्स, लेदर, फुटवेयर     जेम्स एंड ज्वेलरी     इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल्स, प्लास्टिक, फर्नीचर     फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज     एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स (चावल, अनाज आदि)     भारतीय प्रोफेशनल्स की मोबिलिटी आसान होगी और IT, हेल्थकेयर, एजुकेशन, लॉजिस्टिक्स आदि में बेहतर एक्सेस मिलेगा.     ओमान में 100% FDI की सुविधा कई सेक्टरों में मिलेगी.     दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार अभी करीब 10.6 अरब डॉलर है, जबकि इस समझौते से यह बढ़कर 12.5 अरब डॉलर पहुंच सकता है. होर्मुज संकट में कैसे मददगार होर्मुज से आवाजाही पर असर की वजह से भारत का आयात काफी प्रभावित हो रहा है. अभी शिपिंग रूट बदलने पड़ रहे, जिससे इंश्‍योरेंस की कॉस्‍ट बढ़ रही है और आयात महंगा हो रहा है. ओमान के साथ समझौता होने से वहां के पोर्ट खासकर सलालाह और दुक्‍म को भारत अपने हब के रूप में इस्‍तेमाल कर सकता है. यह दोनों पोर्ट होर्मुज स्‍ट्रेट से बाहर हैं और हिंद महासागर के रास्‍ते सीधे जुड़े हुए हैं. भारत इन पोर्ट के जरिये खाड़ी देश, अफ्रीका और यूरोप को अपना सामान भेज भी सकता है और वहां से मंगवा भी सकता है।  कम हो जाएगी होर्मुज पर निर्भरता ट्रेड मार्केट एक्‍सपर्ट तो इस समझौते को ओमान ट्रेड कॉरिडोर भी कहने लगे हैं. उनका कहना है कि पेट्रोकेमिकल्‍स सहित तमाम सामान को ओमान के रास्‍ते डायवर्ट करके निर्यात अथवा आयात किया जा सकता है. इससे होर्मुज पर निर्भरता कम हो जाएगी और भारत को व्‍यापार का नया रास्‍ता मिलेगा. ओमान हमेशा से न्‍यूट्रल और मीडिएटर की भूमिका निभाता है. इस समझौते से उसका भारत के साथ संबंध तो बेहतर होगा ही, सामान के साथ व्‍यापार के नए कॉरिडोर को खोलने में भी मदद मिलेगी। 

उड़ान से पहले IndiGo प्लेन में धुआं फैलने से हड़कंप, एयरपोर्ट स्टाफ ने संभाला मोर्चा

नई दिल्ली बेंगलुरु हवाई अड्डे पर IndiGo की एक फ्लाइट को आपातकालीन स्थिति में खाली कराया गया है, क्योंकि प्लेन से धुआं निकलता दिखाई दिया। इंडिगो की यह फ्लाइट 6E 6017, बेंगलुरु से चेन्नई जा रही थी और उड़ान भरने के लिए रनवे की ओर बढ़ रही थी। तभी प्लेन से अचानक धुआं निकलता दिखाई दिया। इस घटना के होते ही प्लेन से सभी यात्री और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन अभी इस घटना के पीछे की वजह पता नहीं चली है। सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया बाहर IndiGo ने एक बयान में कहा, 'सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, तुरंत लोगों को बाहर निकाला गया और सभी संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई।' इंडिगो ने बताया, 'सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं और उन्हें टर्मिनल पर ले जाया गया है, जहां हमारी टीमें उनकी देखभाल कर रही हैं ताकि उनकी भलाई सुनिश्चित की जा सके।' एयरलाइन ने बताया कि इस फ्लाइट को ऑपरेट करने के लिए दूसरा विमान उपलब्ध कराया गया है। इंतजार के दौरान यात्रियों को जलपान कराया जा रहा है।

गरीबों के लिए नई योजना, ₹5 में फिश-राइस देने का CM शुभेंदु अधिकारी ने किया ऐलान

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य की 400 कैंटीनों में 5 रुपये में माछ भात (मछली और चावल) मिलेगा. वहीं अवैध बांग्लादेशियों को लेकर उन्होंने सख्त बयान दिया और कहा कि उन्हें सीधे बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. जेल में रखकर  उन पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया जाएगा।   अब शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने माछ-भात को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार 5 रुपये में माछ-भात मुहैया कराएगी. उन्होंने बताया कि इसके लिए राज्यभर में 400 कैंटीन खोली जाएंगी, जहां सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  शुभेंदु सरकार का ये फैसला राजनीतिक लिहाज से भी काफी मायने रखता है, क्योंकि बंगाल की संस्कृति में मछली का एक अपना महत्व है. बंगाल में 'माछे-भात बंगाली' कहावत भी चलती है. बंगाल में माछ-भात को सांस्कृतिक पहचान माना जाता है।  अब सरकार ने सिर्फ 5 रुपये में माछ-भात देने का ऐलान किया है. कल्याणी में एक बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सब्सिडाइज्ड फूड की सुविधा पूरे बंगाल में बनी डेडिकेटेड कैंटीनों में शुरू की जाएगी, जहां 5 रुपये में माछ-भात मिलेगा।  पश्चिम बंगाल सरकार कल (27 मई) से 'अन्नपूर्णा योजना' के लिए फॉर्म जारी करेगी, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये दिए जाएंगे। फॉर्म भरते ही 3,000 रुपये ट्रांसफर होने शुरू हो जाएंगे। सीएम ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पूरे बंगाल में 400 विशेष कैंटीनों में 5 रुपये में मछली-चावल का भोजन मिलेगा। लक्ष्मी भंडार योजना की भी शुरुआत होगी। इसकी कल विस्तृत जानकारी मिलेगी। आपको कल ही फॉर्म की एक प्रति भी मिलेगी। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों व्यवस्थाएं रहेंगी। क्या है सरकार का प्लान? बताया जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद ही शुभेंदु अधिकारी ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया था. ममता सरकार में 5 रुपये में अंडा-भात मिलता था, लेकिन अब यहां इतने ही रुपये में मछली को शामिल किया जाएगा।  बंगाल में ममता सरकार के दौर में सरकारी कैंटीन बनाई गई थीं, जहां दिहाड़ी मजदूर, मजदूर, ऑटो-रिक्शा चलाने वाले और गरीब लोग 5 रुपये में अंडा-भात खा सकते थे. अब राज्य की 400 कैंटीनों में माछ-भात दिया जाएगा।  ममता बनर्जी ने फैलाया था डर बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान मछली बड़ा मुद्दा बनी थी. तब टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने मांस-मछली खाने को लेकर डर फैलाया था।  ममता बनर्जी ने कई चुनावी रैलियों में आरोप लगाया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आ गई तो मांस, मछली और अंडा खाने पर बैन लगा देगी. उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी वाला अपनी मर्जी का खाना दूसरों पर थोपते हैं।  इसके बाद बीजेपी के तमाम नेताओं ने भरोसा दिलाया था कि ऐसा कुछ नहीं होगा. बीजेपी सांसद रवि किशन ने तो यहां तक कह दिया था कि बंगाल के लोग 4 मई के बाद 4 गुना मछली खाएंगे. उन्होंने कहा था कि जहां-जहां एनडीए सरकार है, वहां से मछली लाकर बंगाल के कुएं-तालाबों में डालेंगे।