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महिला आरक्षण कानून 2023 की आधी रात को संसद में महा-बहस के बाद हुई घोषणा, नोटिफिकेशन जारी

नई दिल्ली सरकार ने गुरुवार से 2023 का नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम देशभर में लागू कर दिया।  सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब इस पर संसद में बहस जारी है इस अधिनियम में बदलाव के लिए कल यानी गुरुवार को ही लोकसभा में बिल आया और देर रात करीब 1.20 बजे तक चर्चा चली। आज भी इस पर दिनभर चर्चा होगी और शाम में करीब 4 बजे इस पर वोटिंग होगी। वहीं कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 16 अप्रैल को पेश किए गए प्रस्ताव पर आगे विचार करते हुए, निम्नलिखित विधेयक लोकसभा में पारित करने के लिए पेश किए जाएंगे।     संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक      2026 और परिसीमन विधेयक, 2026। गुरुवार की देर रात तक बहस चली महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गुरुवार की देर रात तक संसद में बहस चली। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में बहस जारी है और इस बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल बृहस्पतिवार से लागू कर दिया है।   केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन यानी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया है?  मौजूदा लोकसभा में नहीं होगा लागू एक सरकारी अधिकारी ने इसे ‘तकनीकी कारणों' से जुड़ा मामला बताया, लेकिन इस पर विस्तृत जानकारी नहीं दी. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि कानून के लागू हो जाने के बावजूद मौजूदा लोकसभा में महिला आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता. अधिकारी के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षण केवल जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकेगा।  'सरकार श्रेय लेना नहीं चाहती' इससे पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पर शुक्रवार शाम 4 बजे सदन में वोटिंग होगी. संसद में महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर चल रही चर्चा को लेकर रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सभी से इसका समर्थन करने की अपील की है. इसके बाद किसी तरह के भ्रम की गुंजाइश नहीं है।  गृह मंत्री अमित शाह ने भी दक्षिण भारत में फैल रही आशंकाओं को आंकड़ों के जरिए दूर किया है. इसके बावजूद अगर कोई विरोध करता है तो वह इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है. संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है और सरकार इसका श्रेय लेना नहीं चाहती।  विपक्ष के दावों पर सवाल उठाते हुए रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी दलों के नेताओं से बातचीत की है. कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को तीन बार पत्र लिखे गए, जबकि टीएमसी, डीएमके और सपा के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर समर्थन की अपील की गई।  महिला आरक्षण पर ये बोले पीएम मोदी  संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर जोरदार बहस हुई थी. पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में विपक्ष को आइना दिखाते हुए कहा, 'चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया, उसका हाल बुरा हुआ है. मैं अपील करने आया हूं कि इसको राजनीतिक तराजू से मत तौलिए. आज का यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है. पूरा देश विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय तो देखेगी, लेकिन उससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी, इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।  प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा, महिला आरक्षण पर मैंने इसका प्रारूप पढ़ा है. सबसे पहले इसमें लिखा है कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू हो, हम सहमत हैं. दूसरा है कि सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाई जाएगी. इसके लिए परिसीमन आयोग बनाया जाएगा जो 2011 की जनगणना को आधार बनाएगा. इसकी गहराई में जाएं तो इसमें राजनीति की बू आती है. 2023 के बिल में दो चीजें थी जो इसमें नहीं है. उसमें लिखा था कि नई जनगणना कराई जाएगी।  प्रियंका ने कहा कि वे कह रहे हैं कि उन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए. बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं पहचान लेती हैं. सावधान हो जाइए नहीं तो पकड़े जाएंगे. 2023 में मोदी सरकार ने जब यह बिल पास किया तो हमने उसका समर्थन किया. आज भी उसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस इसका समर्थन नहीं करेगी. हम डटकर खड़े हैं।  क्या कहता है सरकार का नोटिफिकेशन कानून मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है, 'संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार 16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि नियुक्त करती है, जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।  गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया था, जिसे महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है. यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान करता है।  हालांकि, 2023 के कानून के अनुसार यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा होने के कारण 2034 से पहले लागू नहीं हो सकता था. लोकसभा में वर्तमान में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा हो रही है, उन्हें सरकार ने इसी उद्देश्य से पेश किया है कि महिला आरक्षण को 2029 से लागू किया जा सके।  क्या है महिला आरक्षण कानून अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार  16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि घोषित करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 2023 के कानून के तहत आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि … Read more

केदारनाथ धाम में बर्फीली चादर के बीच स्नो कॉरिडोर से खुलेंगे कपाट, अब तक 5.96 लाख रजिस्ट्रेशन

भोपाल 22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है । केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले धाम के चारों ओर भारी बर्फबारी के कारण लगभग 4-10 फीट (कुछ स्थानों पर 18 फीट तक) बर्फ की मोटी चादर जम गई है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और मजदूर मिलकर युद्धस्तर पर बर्फ काटकर मंदिर परिसर और पैदल मार्ग को तैयार करने में लगे हुये हैं। बर्फ की चादर में व्यवस्थाओं का खास ध्यान रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा ने बातचीत में बताया कि 100 से ज्यादा श्रमिक दिन-रात काम कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार किया जा सके। बर्फ की मोटी परतें अभी भी चुनौती प्रस्तुत कर रही हैं। मंदिर परिसर और आसपास 2 से 3 फीट बर्फ जमी हुई है। पहले ये 4 से 5 फीट थी, लेकिन अब धीरे-धीरे कम हो रही है। ग्लेशियरों की चुनौती, लेकिन तैयारी पूरी गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर कई जगह ग्लेशियर टूटकर गिर गए हैं। इन क्षेत्रों में 3 से 4 प्रमुख ग्लेशियर पॉइंट चिन्हित किए गए हैं। थारू और चोराबारी ग्लेशियरों का टूटना मुश्किलें ला रहा है, लेकिन मजदूरों ने इन 8 से 10 फीट ऊंची बर्फ की दीवारों को काटकर सुरक्षित रास्ता तैयार किया है। श्रद्धालुओं को इस अद्भुत अनुभव का गवाह बनने का मौका मिलेगा। दर्शनों में कोई पाबंदी नहीं कई बार बर्फबारी के बाद यात्रियों की संख्या पर पाबंदी लगने की अफवाहें उठती हैं, लेकिन प्रशासन ने इस पर स्पष्ट कर दिया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं है। बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा हो चुका है, और धाम में इनकी आपूर्ति शुरू हो गई है। हेलीकॉप्टर सेवा में बाधा नहीं हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ कर दी गई है, जिससे हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को कोई समस्या नहीं होगी। इस बार की यात्रा पिछले साल की अपेक्षा पहले शुरू हो रही है, जिससे श्रद्धालु 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। धार्मिक परंपराओं का रहेगा पालन मंदिर की सफाई से लेकर कपाट खुलने की तारीख में कोई बदलाव नहीं होगा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाएगा। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे खोले जाएंगे। इस वर्ष की यात्रा का समय पिछले साल की तुलना में पहले होगा। बर्फबारी का अद्भुत नजारा विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल के अंत तक बर्फ का पिघलना सामान्य है, लेकिन इस बार मौसम भिन्न है। 2023 के बाद ऐसा भारी बर्फबारी का दृश्य श्रद्धालुओं को देखने को मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं, जो पिछले साल के आंकड़ों के करीब है। थारू-चोराबारी ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाया गया विभागीय अधिकारियों के अनुसार, थारू और चोराबारी जैसे ग्लेशियरों के टूटकर रास्ते में आने से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। यहां बर्फ की ऊंचाई 8 से 10 फीट तक पहुंच गई थी। मजदूरों ने इंसानी कद से भी ऊंची इन बर्फ की दीवारों को काटकर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया है। जब श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके दोनों तरफ 8-9 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें होंगी, जो एक अद्भुत अनुभव होगा। कपाट खुलने से पहले पूरी होंगी तैयारियां डीएम ने बताया कि यात्रा की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू (लाइन को व्यवस्थित तरीके से संभालना) मैनेजमेंट के साथ ही सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ का मुख्य पहुंच मार्ग अब पूरी तरह से साफ करा दिया गया है। इस भारी बर्फ को हटाने और मार्ग को सुचारू करने के लिए 100 से अधिक अनुभवी मजदूरों को लगाया गया है। अब सिर्फ मंदिर परिसर के पास जमी बर्फ को हटाने का काम अंतिम चरण में है। बाबा केदार की पंचमुखी डोली के धाम पहुंचने से पहले मंदिर, परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह बर्फ से साफ हो जाएगा। श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं अक्सर भारी बर्फबारी के बाद यह अफवाहें उड़ने लगती हैं कि शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या सीमित की जाएगी, लेकिन प्रशासन ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रशासन की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा तय नहीं की गई है। बर्फबारी के कारण क्षतिग्रस्त हुई बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। धाम में बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू हो गई है। हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अच्छी खबर है। केदारनाथ स्थित हवाई पट्टी (हेलीपैड) से पूरी बर्फ साफ कर दी गई है। अब हेलीकॉप्टर की लैंडिंग में कोई बाधा नहीं है। धार्मिक परंपराओं और शेड्यूल में बदलाव नहीं भारी बर्फबारी के बावजूद मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर के सफाई अभियान से लेकर कपाट खुलने के तय मुहूर्त और शेड्यूल में कोई परिवर्तन नहीं होगा। पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही यात्रा केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। 2023 के बाद फिर दिखेगा ऐसा अद्भुत नजारा विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, आमतौर पर अप्रैल के अंत तक केदारनाथ में बर्फ काफी हद तक पिघल जाती है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज अलग है। कपाट खुलने के समय इतनी भारी बर्फबारी का नजारा 2023 के बाद फिर देखने को मिल रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को बर्फ से ढके हिमालय के बीच बाबा केदार के दर्शन का खास अनुभव मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 … Read more

IMF ने कहा: भारत दोगुनी गति से बढ़ रहा है, पाकिस्तान को कर्ज देने वाले देश का हाल

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के बाद भी भारत की ग्रोथ का IMF यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अनुमान लगा चुका है। अब इसकी प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने भारत की नीतियों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि भारत दोगुनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। खास बात है कि पाकिस्तान लगातार IMF से कर्ज ले रहा है। IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर जॉर्जीवा ने कहा, 'आज के भारत को देखिए। भारत की विकास दर दुनिया की औसत विकास दर से दो गुनी से भी अधिक है।' उन्होंने कहा, 'ऐसा इसलिए हो सका, क्योंकि फंडामेंटल्स या बुनियाद मजबूत है।' भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने का अनुमान पीटीआई भाषा के अनुसार, IMF ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। 'वैश्विक आर्थिक परिदृश्य' रिपोर्ट में यह अनुमान जताते हुए कहा कि इस साल 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मुद्राकोष ने भारत के संदर्भ में कहा, 'वर्ष 2026 के लिए वृद्धि अनुमान में 0.3 प्रतिशत अंक की हल्की बढ़ोतरी की गई है। इसके पीछे 2025 के मजबूत प्रदर्शन का असर और भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने जैसे कारक हैं। इन कारकों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।' इसके साथ ही मुद्राकोष ने वर्ष 2027 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान जताया। साथ ही आईएमएफ ने 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025 के अनुमानित 3.4 प्रतिशत से कम है। पाकिस्तान को मिली सऊदी अरब से मदद सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। इसी के साथ मौजूदा पांच अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज के पुनर्भुगतान की मियाद भी और तीन साल के लिए बढ़ा दी है। पाकिस्तान को यह मदद ऐसे समय में मिली है जब वह इस महीने UAE को 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर चुकाने की तैयारी कर रहा है, जिसकी वजह से उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया है। IMF ने शर्त लगाई है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं (सऊदी अरब, चीन और यूएई) को मौजूदा तीन साल के कार्यक्रम के पूरा होने तक देश के साथ अपनी नकद जमा राशि बनाए रखनी होगी।

चीन बना भारत का टॉप ट्रेड पार्टनर, 151 अरब डॉलर का कारोबार, ट्रंप के बाद जिनपिंग की बड़ी जीत

नई दिल्ली भारत के ग्लोबल ट्रेड में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. अमेरिका का दबदबा अब कमजोर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि चीन ने 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बनने की बाजी मार ली है. भारत और चीन के बीच कुल ट्रेड 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. दिलचस्प बात यह है कि जहां ट्रेड बढ़ा है, वहीं भारत का चीन के साथ ट्रेड डिफिसिट भी बढ़ गया है।  अमेरिका दूसरे नंबर पर खिसका पिछले चार सालों (2021-22 से 2024-25) तक अमेरिका इस लिस्ट में टॉप पर बना हुआ था, लेकिन अब चीन ने उसे पीछे छोड़ दिया है. हालांकि, इस ट्रेड के साथ एक चिंताजनक बात भी सामने आई है. भारत का चीन के साथ ट्रेड डिफिसिट बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।  क्या कहते हैं आंकड़े?     चीन के साथ ट्रेड- पिछले वित्त वर्ष में भारत ने चीन को 19.47 अरब डॉलर का सामान बेचा (निर्यात किया), जबकि वहां से 131.63 अरब डॉलर का सामान खरीदा (आयात किया). इसके चलते ट्रेड डिफिसिट बढ़कर 112.6 अरब डॉलर हो गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।      अमेरिका के साथ ट्रेड- अमेरिका को होने वाले निर्यात में मामूली बढ़त हुई है, लेकिन वहां से आयात बढ़ने की वजह से भारत का ट्रेड सरप्लस (मुनाफा) 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है।      दूसरे देशों का हाल– रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ब्रिटेन, नीदरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों के साथ निर्यात घटा है. वहीं, यूएई, जर्मनी और इटली जैसे देशों के साथ ट्रेड में पॉजिटिव बढ़त देखी गई है. रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से होने वाले आयात में भी कमी आई है।  भारत का ट्रेड डिफिसिट कम होकर 20.67 अरब डॉलर हुआ भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डिफिसिट मार्च में कम होकर 20.67 अरब डॉलर हो गया है. वहीं, देश का निर्यात फरवरी के 36.61 अरब डॉलर से 6.3 फीसदी बढ़कर 38.92 अरब डॉलर हो गया है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि 2025-26 के लिए भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है, जो 2024-25 के इसी अवधि के आंकड़े 825.26 अरब डॉलर की तुलना में 4.22 फीसदी की ग्रोथ दर्शाता है. इस दौरान भारत का आयात 5.98 फीसदी घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया, जिससे फिस्कल डेफिसिट में भी कमी आई है। 

ईरान के 56 हजार करोड़ रुपये भारत में फंसे, जानिए क्यों नहीं कर सकता वापस?

  नई दिल्ली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बीच एक मुद्दा जो बार-बार सामने आ रहा है, वो है ईरान के फ्रीज एसेट्स का. ईरान का मोटा पैसा दुनिया के अलग-अलग देशों में जब्त हैं. इसी कड़ी में भारत का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है, जहां ईरान के करीब 7 अरब डॉलर यानी लगभग 560 अरब रुपये या करीब 56 हजार करोड़ रुपये अटके हुए हैं. यह रकम कोई छोटी नहीं है, और यही वजह है कि तेहरान इसे वापस पाने के लिए लगातार अमेरिका पर दबाव बना रहा है।  इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति से. इसके बाद से ही ईरान और अमेरिका के रिश्ते बिगड़ते गए. अमेरिकी दूतावास में बंधक संकट से लेकर परमाणु कार्यक्रम तक, कई वजहों से वॉशिंगटन ने तेहरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध (सैंक्शन) लगाए. समय के साथ ये सैंक्शन और सख्त होते गए, खासकर ईरान के न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर अमेरिका-इजरायल ने और सख्ती दिखाई।  इन प्रतिबंधों का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि ईरान अपने ही कमाए हुए पैसे का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है. जब कोई देश दूसरे देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाता है, तो उसके बैंकिंग सिस्टम और इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर रोक लग जाती है. यही वजह है कि ईरान का तेल बेचकर कमाया गया पैसा कई देशों के बैंकों में जमा तो है, लेकिन फ्रीज है. यानी ईरान उसका इस्तेमाल नहीं कर सकता।  भारत में क्यों फंसा है ईरान का पैसा? भारत का मामला भी कुछ ऐसा ही है. भारत पहले ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था. उस तेल के बदले जो भुगतान किया गया, वह भारतीय बैंकों में जमा हो गया. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते यह पैसा सीधे ईरान को ट्रांसफर नहीं किया जा सका. इसलिए यह रकम भारत में ही "फ्रीज" हो गई।  ईरानी सरकारी प्रेस टीवी के दावे के मुताबिक सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कई और देशों में भी ईरान का पैसा फंसा हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के पास करीब 20 अरब डॉलर, इराक में लगभग 6 अरब डॉलर, जापान में 1.5 अरब डॉलर और कतर में करीब 6 अरब डॉलर फंसे हुए हैं. यूरोप के कुछ देशों और खुद अमेरिका में भी ईरान का दो अरब डॉलर फंसा है. रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान के 100 अरब डॉलर से ज्यादा के एसेट्स दुनियाभर में फ्रीज बताए जाते हैं।  ईरान के पैसे पर क्यों लगी पाबंदी? अब सवाल उठता है कि "फ्रोजन एसेट्स" आखिर होते क्या हैं? आसान भाषा में समझें तो जब किसी देश की संपत्ति चाहे वह पैसा हो, प्रॉपर्टी हो या निवेश किसी दूसरे देश या अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा रोक दी जाती है, तो उसे फ्रीज्ड एसेट कहा जाता है. ऐसा आमतौर पर सैंक्शन, कानूनी विवाद या अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन के आरोप में किया जाता है।  ईरान के लिए यह पैसा बेहद अहम है. दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रही उसकी अर्थव्यवस्था पहले ही दबाव में है. ऐसे में अगर यह फंसा हुआ पैसा वापस मिल जाए, तो उसकी आर्थिक स्थिति को बड़ी राहत मिल सकती है. यही कारण है कि हाल की बातचीत में ईरान ने कम से कम 6 अरब डॉलर की रकम रिलीज करने की मांग को "कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर" यानी भरोसा कायम करने के तौर पर रखा है।  ईरान का पैसा क्यों रिलीज नहीं कर रहा अमेरिका? लेकिन यह इतना आसान नहीं है. अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस बात को लेकर सख्त हैं कि अगर पैसा रिलीज भी किया जाए, तो उसका इस्तेमाल किस तरह होगा. उन्हें डर है कि यह रकम कहीं ईरान के सैन्य या परमाणु कार्यक्रम में न लग जाए. इसी वजह से हर बार बातचीत अटक जाती है. हालांकि, ईरान की तरफ से कहा जाता है कि ये पैसा उनका है और इसका इस्तेमाल कैसे होगा वो खुद ये तय करेगा।  एक और दिलचस्प पहलू यह है कि भले ही सैंक्शन हट जाएं, तब भी ईरान को अपनी पूरी रकम तुरंत नहीं मिल सकती. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पैसे का बड़ा हिस्सा पहले से ही पुराने कर्ज चुकाने या निवेश के लिए बंधा हुआ है. ऐसे में तेहरान को सिर्फ आंशिक राहत ही मिल पाएगी।  मसलन, भारत में फंसा ईरान का 652 अरब रुपये सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा हिस्सा है. जब तक अमेरिका-ईरान के रिश्तों में सुधार नहीं होता और प्रतिबंधों में ढील नहीं मिलती, तब तक यह पैसा यूं ही बैंकों में फ्रीज रहेगा. आने वाले दिनों में अगर कोई बड़ा समझौता होता है, तभी उम्मीद की जा सकती है कि ईरान अपने पैसे का इस्तेमाल कर पाएगा। 

8वें वेतन आयोग का प्रस्ताव: ₹69,000 सैलरी, छुट्टी के बदले पैसा, 3x DA और क्या-क्या लाभ होंगे?

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों के बीच बड़ी हलचल है और अब इस दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (National Council– Joint Consultative Machinery (NC-JCM) ने अपना विस्तृत मेमोरेंडम सरकार और वेतन आयोग को सौंप दिया है, जिसमें सैलरी, भत्तों, छुट्टियों और पे स्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े बदलावों की मांग की गई है। अगर ये मांगें लागू होती हैं, तो कर्मचारियों की आय और सुविधाओं में बड़ा इजाफा हो सकता है। न्यूनतम वेतन ₹69,000 और ग्रेच्युटी में ढील सबसे बड़ी और चर्चा में रहने वाली डिमांड है, न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने की। इसके साथ ही हर साल 6% की वृद्धि और प्रमोशन के समय कम से कम ₹10,000 की बढ़ोतरी की मांग भी शामिल है। संगठन ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों को 30 दिन का न्यूनतम बोनस गारंटी के साथ दिया जाए और ग्रेच्युटी के नियमों में भी ढील दी जाए। छुट्टियों को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव रखा गया है। मैटरनिटी लीव को 240 दिन करने, पैटरनिटी लीव 45 दिन करने औरअर्न्ड लीव (EL) को बिना सीमा के जमा करने की मांग की गई है। इतना ही नहीं, 600 दिन तक लीव इनकैशमेंट और 20 साल की सेवा के बाद 50% इनकैशमेंट की सुविधा देने की बात भी कही गई है। महिलाओं के लिए विशेष मेडिकल लीव और 60 दिन का पैरेंट केयर लीव भी प्रस्ताव में शामिल है। बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस (CEA) को ₹10,000 प्रति माह प्रति बच्चे करने और इसे पोस्ट ग्रेजुएशन तक लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा हॉस्टल सब्सिडी को ₹35,000 प्रति माह तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, जिससे कर्मचारियों पर शिक्षा का खर्च कम हो सके। भत्तों (Allowances) में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। NC-JCM चाहता है कि सभी भत्तों को तीन गुना किया जाए और उन्हें महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ा जाए। इसके अलावा रिस्क अलाउंस ₹10,000 प्रति माह, नाइट ड्यूटी अलाउंस बेसिक सैलरी के आधार पर और सभी कर्मचारियों के लिए ड्रेस अलाउंस की मांग भी की गई है। फिटमेंट फैक्टर को 3.83 करने की डिमांड भी अहम है, क्योंकि इसी के आधार पर नई सैलरी तय होती है। साथ ही पे लेवल्स को मर्ज और अपग्रेड करने का सुझाव दिया गया है, जिससे सैलरी स्ट्रक्चर को आसान और संतुलित बनाया जा सके। ये मेमोरेंडम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। अब सबकी नजर सरकार और 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि कर्मचारियों की सैलरी और सुविधाओं में कितना बदलाव आता है।

गर्मी और लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी, हीटस्ट्रोक से कैसे करें बचाव जानें

 नई दिल्ली देश के कई हिस्सों में तेज गर्मी और लू का प्रकोप बढ़ रहा है. भारत मौसम विभाग (IMD) ने मध्य और पूर्वी भारत में लू (हीटवेव) की चेतावनी जारी की है. अप्रैल के मध्य से ही कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में 18 अप्रैल तक लू चलने की संभावना है. वहीं, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक (उत्तर आंतरिक) और गुजरात (सौराष्ट्र-कच्छ) में बढ़ते तापमान के बीच हीटवेव का अलर्ट है।  इसके अलावा राजस्थान, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा. IMD के मुताबिक, अप्रैल-जून के बीच इन इलाकों में लू के दिन सामान्य से ज्यादा हो सकते हैं. बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग के कारण देशभर में हीट वेव (लू) की अवधि लंबी हो रही है. जिसे देखते हुए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हीटस्ट्रोक से बचने के लिए एडवाइजरी जारी की है।  हीटस्ट्रोक क्या है और क्यों खतरनाक है? हीटस्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या 104°F से ज्यादा हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता. यह स्थिति बहुत गंभीर होती है. हीटस्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है। कब और कैसे हो सकता है हीटस्ट्रोक? स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, गर्मी के मौसम में अगर पर्याप्त पानी न पिया जाए तो शरीर की ठंडक बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है. इससे तापमान बहुत बढ़ जाता है और हीटस्ट्रोक हो सकता है. हीटस्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाता है।  हीटस्ट्रोक से कैसे बचें? स्वास्थ्य मंत्रालय ने हीटस्ट्रोक से बचने के लिए कुछ आसान उपाय बताए हैं:-     गर्मी में शरीर से पानी की कमी बहुत तेजी से होती है. इसलिए दिन में बार-बार पानी पीते रहें. प्यान नहीं लगने पर भी खूब पानी पिएं.      दोपहर में 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर ना निकलें और ज्यादा मेहनत का काम ना करें.     ज्यादा कैफीन (जैसे चाय-कॉफी) से बचें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी कर सकते हैं.     हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें.     अगर बाहर काम करना जरूरी है तो थोड़ी-थोड़ी देर में छांव में बैठकर आराम करें. हीटस्ट्रोक होने पर तुरंत क्या करें?     अगर किसी व्यक्ति को हीटस्ट्रोक के लक्षण दिखें (जैसे तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, बेहोशी, ज्यादा पसीना या पसीना बंद हो जाना) तो तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं और लिटा दें.     ठंडे पानी के कपड़े से शरीर को पोछें या ठंडी सिकाई करें.     होश में हो तो छोटे-छोटे घूंट में ठंडा पानी पिलाएं.     जब व्यक्ति बेहतर महसूस करने लगे तो खीरा, नारियल पानी जैसी नमी से भरपूर चीजें दें. स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्मी में सावधानी बरतने की अपील की है. बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर हीटस्ट्रोक के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं. ऐसे में इनपर खास नजर रखने की जरूरत है. गर्मी के मौसम में बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ जरूर रखें।   

IMF की चेतावनी: 2029 में द्वितीय विश्वयुद्ध जैसा माहौल, भारत की स्थिति क्या होगी?

 नई दिल्ली ग्लोबल टेंशन के बीच एक और टेंशन बढ़ाने वाली खबर आई है. ये खबर दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर को एक बड़ी चेतावनी भी है. दरअसल, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने एक रिपोर्ट जारी की है।  आईएमएफ की 'फिस्कल मॉनिटर' रिपोर्ट के अनुसार दुनिया पर कर्ज का बोझ इतना बढ़ता जा रहा है कि साल 2029 तक यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 100 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह एक ऐसी स्थिति है जो सामान्य समय में नहीं देखी जाती है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर दुनियाभर में संकट का माहौल जारी रहा, तो साल 2029 तक वैश्विक सरकारी कर्ज (Global Debt) दुनिया की कुल GDP के 100% तक पहुंच सकता है. चिंता की बात ये है कि इस तरह का डेटा आखिरी बार दूसरे विश्व युद्ध के बाद देखने को मिला था।  द्वितीय विश्वयुद्ध जैसी स्थिति की आहट IMF की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल 2025 में वैश्विक कर्ज करीब 94% GDP तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसमें लगातार बढ़ोतरी की आशंका है. इसका सीधा मतलब है कि दुनिया जितना एक साल में कमाती है, उतना ही पैसा कर्ज के रूप में बकाया हो सकता है।  रिपोर्ट की मानें तो दुनिया आखिरी बार कर्ज के इस स्तर पर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहुंची थी. उस समय युद्ध की विभीषिका और युद्ध के बाद इंफ्रा पर बेतहाशा खर्चों ने देशों को कर्ज के जाल में धकेल दिया था. करीब 80 साल के बाद दुनिया फिर से उसी मोड़ पर खड़ी दिख रही है. एक तरह के उस समय के मुकाबले अभी स्थिति ज्यादा गंभीर है. क्योंकि उस समय केवल युद्ध की वजह से ऐसी स्थिति आई थी, जबकि मौजूदा समय में केवल युद्ध नहीं, बल्कि लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे, ऊंची ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव भी हैं।  IMF की इस रिपोर्ट कर्ज बढ़ने के कई बड़े कारण बताए गए हैं.  1. ग्लोबल तनाव बड़ी वजह सबसे प्रमुख वजह है दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव. खासकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है, जिससे सरकारों का खर्च बढ़ गया है. कई देशों में जनता पर बोझ न पड़े इसके लिए अतिरिक्त सब्सिडी की दी जा रही है, इसके लिए सरकारों को कर्ज लेना पड़ रहा है।  2. महंगाई बढ़ने का खतरा इसके अलावा महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी बड़ी वजह है. जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सरकारों के लिए पुराने कर्ज को चुकाना और नया कर्ज लेना दोनों महंगा हो जाता है. इससे कुल कर्ज का बोझ और तेजी से बढ़ता है. पिछले कुछ वर्षों में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाई हैं. इस कारण सरकारों के लिए पुराना कर्ज चुकाना और नया कर्ज लेना, दोनों ही महंगा हो गया है. वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ब्याज भुगतान का हिस्सा 2% से बढ़कर 3% हो गया है।  3. आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया  IMF ने यह भी कहा है कि कई देश लगातार बजट घाटे (Fiscal Deficit) में चल रहे हैं, यानी उनकी आमदनी कम और खर्च ज्यादा है. इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकारें उधार ले रही हैं, जिससे कर्ज का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है.  यही नहीं, सबसे ज्यादा चोट विकासशील और गरीब देशों पर पड़ने वाला है. खासकर जिन देशों की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है या जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. ऐसे देशों में कर्ज चुकाने की क्षमता सीमित होती है, जिससे आर्थिक संकट का खतरा बढ़ जाता है।  इस चुनौती से निपटने के लिए IMF ने देशों को सलाह दी है कि वे अपने खर्च पर काबू रखें, सिर्फ जरूरतमंद लोगों को ही वित्तीय सहायता दें और लंबी अवधि में कर्ज कम करने की ठोस योजना बनाएं।  भारत के लिए क्या है संकेत? दुनिया भर की खराब स्थिति के बीच आईएमएफ ने भारत को एक 'ब्राइट स्पॉट' बताया है. रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने प्राथमिक खर्चों पर नियंत्रण रखकर अपनी राजकोषीय स्थिति में सुधार किया है. भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ के कारण आने वाले समय में इसके कर्ज के अनुपात में स्थिरता या कमी आने की उम्मीद है. फिलहाल भारत का कर्ज-जीडीपी अनुपात 84% के करीब है. जबकि अमेरिका का कर्ज 2031 तक उसकी जीडीपी का 142% होने का अनुमान है, जबकि चीन का कर्ज 127% तक पहुंच सकता है। 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अबू सलेम की रिहाई की अर्जी खारिज की, कहा- ‘2030 से पहले रिहाई संभव नहीं’

 मुंबई 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट और अन्य मामलों में सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उसकी समय से पहले रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वह 2030 से पहले जेल से बाहर नहीं आ सकता।  जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सलेम की याचिका समय से पहले और आधारहीन है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 25 साल की सजा पूरी होने से पहले किसी तरह की रियायत या रिमिशन (छूट) पर विचार नहीं किया जा सकता।  हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह सजा पूरी होने से एक महीने पहले ही रिमिशन पर विचार करे. यानी सलेम के मामले में यह प्रक्रिया नवंबर 2030 के आसपास ही शुरू हो सकती है।  कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने सजा को 25 साल तक सीमित करते हुए किसी भी अतिरिक्त छूट का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है. इसलिए इससे पहले किसी तरह की राहत देना संभव नहीं है।  अबू सलेम की दलील क्या थी? अबू सलेम ने अपनी याचिका में कहा था कि वह 25 साल की सजा लगभग पूरी कर चुका है. उसने अपने अंडरट्रायल अवधि, सजा के बाद की जेल अवधि और जेल में मिली छूट (रिमिशन) को जोड़कर यह दावा किया था कि अब उसे रिहा किया जाना चाहिए. उसकी ओर से वकील फरहाना शाह ने कोर्ट में दलील दी।  केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने इस दलील का विरोध किया. उन्होंने कहा कि सलेम की याचिका समय से पहले दायर की गई है और इसमें कोई दम नहीं है. सरकार का तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 25 साल की सजा का मतलब वास्तविक जेल में बिताया गया समय है, न कि वह अवधि जिसमें रिमिशन जोड़कर सजा कम की जाए।  सीबीआई और जेल प्रशासन की ओर से भी इस याचिका का विरोध किया गया और कहा गया कि सलेम को कम से कम 25 साल जेल में रहना ही होगा. हाईकोर्ट ने सरकार और सीबीआई के तर्कों से सहमति जताई और कहा कि सलेम की याचिका पूरी तरह गलत आधार पर दायर की गई है. अदालत ने कहा कि रिमिशन को जोड़कर सजा की गणना करना इस मामले में लागू नहीं होता, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सजा को 25 साल की निश्चित अवधि में सीमित कर दिया है।  कब तक जेल में रहेगा अबू सलेम? अबू सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पण (Extradition) के जरिए नवंबर 2005 में भारत लाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण समझौते के तहत उसकी उम्रकैद की सजा को 25 साल तक सीमित किया था. इस आधार पर देखा जाए तो सलेम की 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी. इसके बाद ही उसकी रिहाई या किसी तरह की राहत पर विचार किया जा सकता है. अबू सलेम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस में दोषी है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. इसके अलावा वह एक व्यवसायी प्रदीप जैन की हत्या के मामले में भी सजा काट रहा है। 

PM मोदी का संदेश: ‘समस्या का समाधान सैन्य टकराव से नहीं

नई दिल्ली  दुनिया इस वक्त जिस तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है, उसमें ताकत और टकराव की राजनीति फिर से केंद्र में नजर आ रही है. ऐसे माहौल में भारत की ओर से शांति और संवाद का संदेश देना अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है. दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान इसी सोच को सामने लाता है, जहां उन्होंने साफ कहा कि किसी भी समस्या का हल सैन्य टकराव से नहीं निकल सकता. यह बयान सिर्फ एक कूटनीतिक लाइन नहीं बल्कि भारत की उस नीति को दर्शाता है जो लंबे समय से बातचीत और संतुलन पर आधारित रही है. खास बात यह है कि यह संदेश ऐसे समय आया है जब यूक्रेन से लेकर वेस्ट एशिया तक हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।  प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारत न सिर्फ शांति की बात करता है, बल्कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर सख्त रुख भी रखता है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है. यानी एक तरफ जहां भारत संवाद का समर्थन करता है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा और सख्ती के बीच संतुलन बनाए रखने की नीति भी अपनाता है।  क्या बोले पीएम मोदी, क्यों अहम है बयान?     नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक हालात पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व एक गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है, इसका असर सभी देशों पर पड़ रहा है. ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रिया दोनों स्थायी और टिकाऊ शांति के पक्ष में खड़े हैं।      पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हर जगह भारत स्थिर और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करता है. उन्होंने यह भी दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई समझौता नहीं किया जा सकता और इसे खत्म करना सभी देशों की साझा प्रतिबद्धता होनी चाहिए।      इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग को लेकर भी अहम बातें सामने आईं. पीएम मोदी ने ऑस्ट्रिया के साथ रिश्तों को नए दौर में ले जाने की बात कही. इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया. साथ ही आईआईटी दिल्ली और मॉन्टान यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू को ज्ञान साझेदारी का बड़ा उदाहरण बताया गया।  भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों में नया अध्याय पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हालिया समझौतों के बाद रिश्तों में नया अध्याय शुरू हुआ है. भारत का टैलेंट और ऑस्ट्रिया की इनोवेशन क्षमता मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है।  ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने क्या कहा? ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने अपनी भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए मील का पत्थर बताया. उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और यह करीब 3 बिलियन यूरो तक पहुंच चुका है. स्टॉकर ने यह भी बताया कि लगभग 160 ऑस्ट्रियाई कंपनियां भारत में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को और मजबूत बना रही हैं।