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अखिलेश यादव का हमला: महिला आरक्षण को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

नई दिल्ली समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयक के बहाने 'नारी को नारा बनाने' की कोशिश कर रही है। सपा प्रमुख ने महिला आरक्षण से संबंधित तीन विधेयकों पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए आरक्षण के समर्थन में है, लेकिन 'भाजपाई चालबाजी' के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया, 'भाजपा इस (महिला) आरक्षण को लेकर नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही। लेकिन जिन्होंने नारी को अपने संगठन में नहीं रखा, उनका मान-सम्मान कैसे रखेंगे। जिस मूल संगठन से आप निकले हैं, उसमें मान-सम्मान के लिए कितनी नारी हैं?' सपा सांसद ने कहा, हम महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन सवाल यह है कि भाजपा के अंदर जल्दबाजी क्यों है? सच तो यह है कि भाजपा जनगणना को टालनी चाहती है, वह जाति जनगणना को टालना चाहती है और ऐसा कर वह आरक्षण को टालना चाहती है। उन्होंने सरकार पर आधी आबादी में मुस्लिम महिलाओं को नहीं गिनने का आरोप लगाते हुए कहा, 'हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़े और मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाए।' उन्होंने दावा किया कि भाजपा का असली लक्ष्य वोट हासिल करना और सत्ता में बने रहना है, इसलिए ये विधेयक लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की यही राजनीतिक चाल है कि जब पुराने लोग समझ जाते हैं तो वे नये लोगों को लक्षित करते हैं, लेकिन वह इसमें सफल नहीं होगी। भाजपा की चंदा वसूली के कारण बढ़ी है महंगाई कन्नौज से सपा सांसद ने सत्तारूढ़ दल पर यह भी आरोप लगाया, 'भाजपा की कमीशन खोरी और चंदा वसूली की वजह से जो महंगाई बढ़ी है उससे उनकी (महिलाओं की) रसोई सूनी हो गई है। रही-सही कसर सिलेंडर की कमी और बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने पूरी कर दी है।' उन्होंने एनसीआर और अन्य स्थानों पर वेतन वृद्धि को लेकर पिछले कुछ दिनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं सहित कामगारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि यह विधेयक इतना ही सही है तो इसे मेरठ और नोएडा के कामगारों के बीच बैठकर घोषित किया जाए कि उनके लिए इसमें क्या-क्या किया जा रहा है। महिलाओं के बीच प्रतिस्पर्धा करा देगी भाजपा सपा प्रमुख ने कहा कि परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ कर यदि 600 हो रही है, तो कहीं उसमें कोई षडयंत्र तो नहीं है और यदि ऐसा है तो जैसे (भाजपा) अयोध्या में हारी, एक बार फिर उत्तर में हारेगी। उन्होंने महिलाओं के लिए लोकसभा या विधानसभा सीट सुरक्षित नहीं रखने का आग्रह करते हुए कहा कि ऐसा कर वह (भाजपा) महिलाओं के बीच ही प्रतिस्पर्धा करा देगी। उन्होंने पार्टी आधार पर महिला आरक्षण का प्रावधान करने की मांग की और भाजपा की एक पूर्व सांसद पर परोक्ष रूप से तंज कसते हुए कहा, 'सास-बहू वाली तो हार गई हैं आपकी। पार्टी को तो मौका मिलेगा।' सपा सांसद ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी चक्रीय आधार पर महिला आरक्षण के खिलाफ है क्योंकि ऐसा होने पर कोई भी अपने क्षेत्र में जनता से ज्यादा भावनात्मक लगाव नहीं रखेगा।

PAK में आतंकी हाफिज सईद के सहयोगी हमजा को मारी गोली, फिर अज्ञात गनमैन हुआ एक्टिव

 लाहौर पाकिस्तान में एक बार फिर अज्ञात हमलावरों ने अपनी मौजूदगी से दहशत फैला दी है. नजारा कुछ-कुछ वैसा ही है जैसा हमने धुरंधर फिल्म में देखा था, चुपचाप आना, सटीक निशाना लगाना और फिर गायब हो जाना. इस बार इन बंदूकधारियों की हिटलिस्ट में था भारत का एक पुराना और खूंखार दुश्मन अमीर हमजा. लाहौर की सड़कों पर एक न्यूज चैनल के दफ्तर के बाहर उसे घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई, जिसमें वह बुरी तरह जख्मी हो गया. फिलहाल, लश्कर का यह फाउंडर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है । हमलावरों ने जिस सफाई और सूझबूझ से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, उसने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. सरेआम हुई इस गोलीबारी ने एक बार फिर उन चर्चाओं को हवा दे दी है कि क्या पड़ोसी मुल्क में छिपे बैठे आतंकियों का सफाई अभियान अपने अगले चरण में पहुंच चुका है? हमजा को संभलने तक का मौका नहीं मिला और अब वह अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये अमीर हमजा आखिर है कौन? तो आपको बता दें कि ये सिर्फ एक मामूली आतंकी नहीं है. अमीर हमजा को लश्कर-ए-तोयबा का रणनीतिक दिमाग माना जाता है. ये उन शुरुआती लोगों में से एक था, जिन्होंने हाफिज सईद के साथ मिलकर लश्कर की नींव रखी थी. इसे संगठन का मुख्य विचारक कहा जाता है, यानी वो शख्स जो आतंकियों को तैयार करने के लिए उनका ब्रेनवॉश करता था. इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि अमेरिका ने इसे 'वैश्विक आतंकवादी' घोषित कर रखा है । अमीर हमजा का काम सिर्फ बंदूक उठाना नहीं था, बल्कि वो लश्कर के लिए पैसा जुटाना, नए लड़कों की भर्ती करना और पकड़े गए आतंकियों को छुड़ाने के लिए सौदेबाजी करने में माहिर था. उसने लश्कर की मैगजीन का संपादन किया और जिहाद को बढ़ावा देने वाली किताबें भी लिखीं. जब 2018 में पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और लश्कर पर कार्रवाई हुई, तो इसने 'जैश-ए-मनकाफा' नाम का एक नया मुखौटा तैयार कर लिया ताकि कश्मीर में दहशतगर्दी जारी रख सके। क्या हकीकत बन रही है धुरंधर की कहानी? अगर आप पिछला रिकॉर्ड देखें, तो ये किसी सस्पेंस फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लगता है. इसी साल 2026 की शुरुआत में लश्कर कमांडर बिलाल आरिफ सराफी को ठिकाने लगाया गया. 2025 में झेलम में फैसल नदीम और सिंध में अबू सैफुल्लाह खालिद का भी यही हश्र हुआ. यहां तक कि कंधार विमान अपहरण (IC-814) का गुनहगार जाहूर मिस्त्री भी कराची में सरेआम मार गिराया गया था. अमीर हमजा पर हुए इस हमले ने अब आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. अब सवाल ये नहीं है कि हमला किसने किया, सवाल ये है कि अगला नंबर किसका है? कौन है आमिर हमजा? आमिर हमजा केवल एक सदस्य नहीं, बल्कि आतंकी हाफिज सईद के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा की नींव रखने वाला मुख्य चेहरा है। उसे लश्कर के वैचारिक प्रचार-प्रसार और फंड जुटाने का विशेषज्ञ माना जाता है। वह अफगानिस्तान में मुजाहिदीन के तौर पर भी लड़ चुका है। हमजा अपनी कट्टरपंथी विचारधारा और भड़काऊ भाषणों के लिए जाना जाता है। वह लश्कर की आधिकारिक पत्रिकाओं का संपादक रह चुका है और 'काफिला दावत और शहादत' जैसी कई विवादित पुस्तकें लिख चुका है। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने लश्कर को आतंकी संगठन घोषित करते हुए हमजा पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। साल 2018 में जब पाकिस्तान में जमात-उद-दावा (JuD) जैसे संगठनों पर वित्तीय कार्रवाई हुई तो हमजा ने दिखावे के लिए लश्कर से किनारा कर लिया था। हालांकि उसने 'जैश-ए-मनकफा' नाम से एक अलग गुट बना लिया। भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह गुट पाकिस्तान में स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना है। हमजा अब भी लश्कर के शीर्ष नेतृत्व के साथ करीबी संपर्क में था और युवाओं की भर्ती व फंड जुटाने में अहम भूमिका निभा रहा था।  

लोकसभा में पीएम मोदी का बड़ा बयान: ‘परिसीमन में कोई राज्य वादा नहीं, ये मेरी गारंटी’

नई दिल्ली संसद का विशेष सत्र आज गुरुवार से शुरू हो गया. बिल पेश होते सदन में हंगामा मच गया. सुबह से दोपहर तक की कार्रवाई में विपक्ष के कई नेताओं ने परिसीमन बिल पर विरोध जताया. अखिलेश यादव ने कहा कि हम महिला आरक्षण पर साथ हैं, लेकिन भाजपाई साजिश के खिलाफ. वहीं इससे पहले उनकी मुस्लिम महिलाओं के लिए सवाल पर अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है।  दोपहर बाद पीएम मोदी ने भी परिसीमन बिल पर अपनी बात रखी, उन्होंने कहा कि, महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर कहा कि हमारे देश में जब जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है. उसका हाल बुरे से बुरा किया है. कभी माफी नहीं मिली. पीएम मोदी ने कहा कि मैं वादा और गारंटी देता हूं कि इस बिल में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा, अनुपात भी नहीं बदलेगा।  मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं- पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि- कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है. इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा, अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नुकसान नहीं होगा. हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं. सबकी फोटो छपवा देंगे. ले लो जी क्रेडिट. सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।   हम भ्रम में न रहें- पीएम मोदी हम भ्रम में न रहें, मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं. ये उनका हक है और हमने कई दशकों से उसको रोका है. आज उसका प्रायश्चित करके उस अपराध से मुक्ति पाने का अवसर है।  हम सब जानते हें कि कैसे चालाकी चतुराई की है. हम इसके पक्ष में ही हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई टेक्निकल पूंछ लगाकर रोक दिया गया. लेकिन अब देश की नारी को नहीं समझा पाओगे.सदन में नंबर का खेल तो बाद में सामने आएगा. 3 दशक तक इसको फंसाकर रखा, जो करना था कर लिया। अब छोड़ दो न भाई। यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है।  मेरी ओर से वादा भी-गारंटी भी- पीएम मोदी पीएम मोदी बोले- अगर आपको गारंटी चाहिए तो वो भी देता हूं. मैं कहना चाहूंगा कि यहां बैठकर हमें संविधान ने देश को टुकड़ों के रूप में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है. कश्मीर हो या कन्या कुमारी हम एक देश के रूप में ही इसे सोच सकते हैं. ये प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी. भूतकाल में जो सरकार रहीं, जो उस समय से अनुपात चला आ रहा है उसमें भी बदलाव नहीं होगा. पीएम मोदी ने कहा किअगर गांरटी शब्द चाहिए तो मैं वह शब्द भी उपयोग करता हूं, वादा की बात करते हो तो उसे भी इस्तेमाल करता हूं. तमिल में कोई शब्द हो तो मैं उसे भी कहता हूं, क्योंकि जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।  समय की मांग हम इसमें अब देर न करें- पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा- पिछले दिनों जब हम 2023 में चर्चा कर रहे थे तब हर कोई कह रहा था कि इसे जल्दी करो. तब हमारे पास समय नहीं था. अब हम इसे 2029 में करने वाले हैं. इसलिए समय की मांग है कि हम और ज्यादा विलंब न करें. इस दौरान संविधान के जानकार लोगों से चचा्र की, सारा मंथन करते करते. यह सामने आया कि कुछ रास्ता निकालना होगा तब हम माता बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।  निर्णय नहीं हमारी नीयत भी देखेगी नारी- पीएम मोदी पीएम मोदी बोले-  मैं अपील करने आया हूं कि इसको राजनीतिक तराजू से मत तौलिए. आज का यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है. मैंने पहले भी कहा कि आज पूरा देश विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय तो देखेगी लेकिन उससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी, इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।   जिनको राजनीति की बू आ रही वो… पीएम मोदी ने विपक्ष को चेताया पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में विपक्ष को आइना दिखाया. उन्होंने कहा- 'हमारे देश में जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया है उसका हाल बुरा हुआ है. 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि किसी ने विरोध नहीं किया. आज भी मैं कहता हूं कि हम साथ जाते हैं तो इतिहास गवाह है कि ये किसी एक के पक्ष में नहीं जाएगा, ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा. हम सब उसके हकदार रहेंगे. इसलिए जिन को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के परिणामों को देख लें. इसी में फायदा है जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाओगे. इसलिए इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।   महिलाएं अब निर्णय प्रक्रिया में जुड़ने को तैयार हैं- पीएम मोदी पीएम मोदी बोले- जब मैं संगठन का एक कार्यकर्ता था तब चर्चा होती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं, लेकिन क्योंकि उनमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है. हम सुरक्षित हैं इसलिए दे दो. इसलिए पंचायत में 50 प्रतिशत तक पहुंच गए।  मैं एक और बात कहता हूं कि जिसने 30 साल पहले जिसने विरोध किया वह राजनीतिक गलियारों से नीचे नहीं गया, लेकिन ग्रास रूट पर आज वहीं बहनें वोकल हैं. लाखों बहनें जो काम कर चुकी हैं वे मुखरित हैं. वे कहती हैं कि हमें निर्णय प्रकि्रया में जोड़ो. जो संसद में होती है।   पीएम मोदी बोले- आप सभी को मित्र के रूप में मेरी सलाह पीएम मोदी बोले- 'मैं यह मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब सड़के रेल या संरचना से जुड़े आंकड़े नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब नीति निर्धारण में देश की आधी आबादी हिस्सा बने यह भी है. हम … Read more

अमित शाह का जवाब: ‘सपा मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे, हमें कोई आपत्ति नहीं’, मुसलमानों को आरक्षण पर बयान

नई दिल्ली  संसद का विशेष सत्र आज यानी गुरुवार 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है. स्‍पेशल सेशन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर विधेयक पेश किया जाएगा. इसके साथ ही परिसीमन से जुड़ा विधेयक भी पेश किए जाने की संभावना है. इसको लेकर सत्‍ता पक्ष और विपक्ष में लामबंदी तेज हो गई है. लोकसभा में कुल मिलाकर तीन विधेयक पेश किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा को संबोधित कर सकते हैं. विपक्षी दल लाए जा रहे विधेयक का विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन इससे जुड़े परिसीमन का विरोध करते हैं. अब NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के पास लोकसभा में संशोधन विधेयक के लिए आंकड़ा फिलहाल नहीं है. ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लिए विपक्ष की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी तरफ, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है. इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।  अमित शाह ने अखिलेश यादव के बयान पर किया पलटवार अमित शाह ने कहा कि, मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता. अखिलेश यादव बोले कि आपने अनडेमोक्रेटिक बात कही है. धर्म की बात कही होगी. पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है।  कुछ बयान चिंता पैदा कर रहे हैं – अमित शाह सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं करा रहे. आप धोखा देकर ये बिल लाना चाहते हैं. इस पर अमित शाह ने कहा- अध्यक्ष जी सदन की कार्रवाई को पूरा देश देख रहा हैय कुछ बयान ऐसे किए गए जो जनता में चिंता पैदा कर रहे हैं. अखिलेश पूछ रहे हैं जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं देश को बताना चाहता हूं जनगणना जारी है. उन्होंने कहा कि हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार इसका भी निर्णय ले चुकी है। और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है।  सपा ने किया परिसीमन बिल का विरोध लोकसभा में परिसीन बिल पेश होते ही हंगामा शुरू हो गया है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के संविधान में हम संसद को पावर इस बात की दी गई है कि संविधान की रक्षा करें, सुरक्षा करें, लेकिन सभापति जी आज ऐसे बिल आए हैं कि जो हमारे संविधान को ही तोड़-मरोड़ रहे हैं और इसका हम समाजवादी पार्टी के लोग पुरजोर विरोध करते हैं.  सभापति जी जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से पृथक किया जा रहा है. ये मैं समझता हूं कि ये संविधान की भावनाओं के पूरी तरह से विरोध में हैं. समाजवादियों से बड़ा महिलाओं का हितैषी इस देश की कोई पार्टी नहीं है. आज भी आपसे ज्यादा सदस्य हमारे पास हैं. इसलिए सभापति जी आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस बिल को संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल को केंद्र आज संशोधन बिल को वापस लिया जाए।  महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर बयानबाजी भी बढ़ गई है. भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कमिटमेंट के लिए उनका शुक्रिया अदा करता हूं, ताकि भारतीय महिलाओं को उनके अधिकार मिल सकें. यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी लेकिन पूरी नहीं हुई. कांग्रेस, जिसने कई सालों तक और हाल ही में 2004 से 2014 तक राज किया, उसने सिर्फ वादे किए. सोनिया गांधी और राहुल गांधी उन्हें पूरा करने में फेल रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वादे पूरे किए हैं. यह भारतीय जनता पार्टी का महिला सशक्तीकरण के लिए कमिटमेंट है. NDA के सभी घटक पूरी ताकत से एक साथ खड़े रहे हैं. पिछली बार यह बिना किसी विरोध के पास हो गया था, लेकिन इस बार कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां इसका राजनीतिकरण कर रही हैं. वे एक बार फिर महिलाओं को उनके अधिकार मिलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।  विपक्ष पर क्‍या आरोप अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दल एक के बाद एक बहाने ढूंढ रहे हैं. सच तो यह है कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियां महिला सशक्तीकरण के पक्ष में नहीं लगतीं, लेकिन कुछ भी हो महिलाओं को उनके अधिकार मिलने चाहिए. प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने महिलाओं के लिए न्याय पक्का किया है. कांग्रेस ने हमेशा देश को बांटने की कोशिश की है, कभी जाति, धर्म और कभी इलाके के आधार पर. भाजपा सांसद ने आगे कहा कि आज भी कांग्रेस के कुछ साथी यह तर्क देते हैं कि दक्षिणी राज्यों में सीटें कम हो जाएंगी. हम बड़ी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहते हैं कि किसी का हक, किसी की सीटें कम नहीं हो रही हैं, बल्कि सबके साथ इंसाफ हो रहा है।   जातिगत जनगणना पर अमित शाह और अखिलेश यादव में बहस संसद विशेष सत्र लाइव: संसद में जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से जनगणना में देरी को लेकर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि आखिर जनगणना का इंतजार क्यों नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनकी पार्टी जाति आधारित जनगणना की मांग लगातार कर रही है. इस पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार ने जनगणना का काम शुरू कर दिया है और इसमें जाति आधारित आंकड़े भी शामिल किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि फिलहाल हाउसलिस्टिंग का कार्य चल रहा है और जब मुख्य जनगणना शुरू होगी, तब उसमें जाति का कॉलम भी जोड़ा जाएगा. अमित शाह ने आगे कहा कि सरकार का … Read more

यूरोप की आत्मनिर्भरता की ओर कदम: अमेरिका को किनारे करते हुए ‘यूरोपियन NATO’ की योजना

पेरिस मिडिल-ईस्ट में जारी जंग और वैश्विक तनाव के बीच यूरोप ने एक ऐसा साहसिक कदम उठाया है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। होर्मुज स्ट्रेट संकट और ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच, यूरोपीय देशों ने अब अमेरिका से अलग होकर अपनी स्वतंत्र सुरक्षा रणनीति बनाने का फैसला किया है। ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसे अनौपचारिक तौर पर 'यूरोपियन NATO' कहा जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट जैसे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शिपिंग रूट को फिर से बहाल करना और अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ​अमेरिका से किनारा: क्यों अलग राह पर चला यूरोप?  इस नई सुरक्षा योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें अमेरिका को जानबूझकर अलग रखा गया है। हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ईरान युद्ध और नौसैनिक नाकाबंदी जैसी रणनीतियों को लेकर गहरे मतभेद उभरे हैं। कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के आक्रामक सैन्य अभियानों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। यही वजह है कि अब यूरोप "आत्मनिर्भर सुरक्षा" की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जर्मनी जैसे देश, जो पहले कभी अलग सैन्य गुट बनाने के खिलाफ थे, अब इस 'यूरोपियन NATO' की पहल का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। ​होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और मिशन के 3 मुख्य लक्ष्य  ​पूरी यूरोपियन रणनीति मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित है, जहाँ से वैश्विक तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया युद्ध और समुद्री खतरों की वजह से यहाँ शिपिंग बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस नए गठबंधन के तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:     ​युद्ध के दौरान संकट में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना।     ​समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना।     ​भविष्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक स्थायी निगरानी और एस्कॉर्ट सिस्टम तैयार करना। यूरोप का मानना है कि युद्ध खत्म होने के बाद इस रूट को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होगा. इसी को ध्यान में रखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस इस पहल की अगुवाई कर रहे हैं. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस हफ्ते 40 से ज्यादा देशों की एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहे हैं, जिसमें इस नई सुरक्षा योजना पर चर्चा होगी।  इस प्रस्ताव के तहत एक बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाया जाएगा, जो समुद्री जहाजों की सुरक्षा, माइन हटाने और निगरानी का काम करेगा. खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था यूरोपीय कमांड के तहत चलेगी, न कि अमेरिका के नेतृत्व में. यही बदलाव इस योजना को सबसे अलग बनाता है।  दरअसल, यह कदम सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है. हाल के दिनों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद बढ़े हैं. कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के सैन्य अभियान या ब्लॉकेड जैसी रणनीतियों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।  यही वजह है कि अब यूरोप "आत्मनिर्भर सुरक्षा" की दिशा में आगे बढ़ रहा है. जर्मनी जैसे देश, जो पहले अलग सैन्य रास्ते के खिलाफ थे, अब इस पहल का समर्थन कर रहे हैं. अगर जर्मनी इसमें शामिल होता है, तो इसकी माइन-क्लीयरिंग क्षमता इस मिशन को और मजबूत बना सकती है।  इस योजना के तीन मुख्य लक्ष्य बताए जा रहे हैं. पहला, युद्ध के दौरान फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना. दूसरा, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना और तीसरा, भविष्य में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए निगरानी और एस्कॉर्ट सिस्टम तैयार करना।  यह पहल पहले भी कुछ हद तक देखी जा चुकी है. उदाहरण के लिए, यूरोप ने रेड सी में "ऑपरेशन एस्पाइड्स" के तहत अपने जहाजों को सुरक्षा दी थी, जो अमेरिका के अलग मिशन से स्वतंत्र था. अब उसी मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने की कोशिश की जा रही है।  हालांकि, इस योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या ईरान इस तरह के किसी मिशन को मंजूरी देगा. इसके अलावा, यूरोप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस मिशन के दौरान किसी तरह का नया टकराव न हो क्योंकि अमेरिका पहले से ही इस क्षेत्र में अपनी नौसेना के जरिए दबाव बना रहा है, जिसने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ब्लॉकेड लगा रखा है।  ​संसदीय और कूटनीतिक पहल: 40 देशों की महाबैठक  इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इसी हफ्ते 40 से ज्यादा देशों की एक बड़ी बैठक बुलाने जा रहे हैं। इस बैठक में नई सुरक्षा योजना और यूरोपीय कमांड के तहत बहुराष्ट्रीय रक्षा गठबंधन बनाने पर चर्चा होगी। खास बात यह है कि यह पूरी व्यवस्था यूरोपीय कमान के तहत चलेगी, न कि अमेरिका के नेतृत्व में। यह कदम न केवल सुरक्षा बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है कि यूरोप अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए वाशिंगटन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। ​चुनौतियां और भविष्य: क्या ईरान इसको मंजूरी देगा?​  हालांकि यह योजना सुनने में जितनी प्रभावी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या ईरान इस तरह के किसी यूरोपीय मिशन को अपने क्षेत्र में मंजूरी देगा? इसके अलावा, यूरोप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस मिशन के दौरान अमेरिका के साथ कोई नया टकराव न हो, क्योंकि अमेरिका पहले से ही अपनी नौसेना के जरिए इस क्षेत्र में दबाव बनाए हुए है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह 'यूरोपियन NATO' भविष्य में वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।  

अगले 36 घंटों में लू का कहर, इन इलाकों में बढ़ेगी गर्मी, दिल्ली-NCR का भी रहेगा असर

नईदिल्ली  अप्रैल माह की सर्द शुरुआत के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास में अब पारा तेजी से चढ़ने लगा है। सफदरजंग मौसम केंद्र में अधिकतम तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.1 डिग्री अधिक था, जबकि पालम में 37.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा, जो सामान्य से 0.8 डिग्री अधिक था। बुधवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री रहने के आसार हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जल्द ही पारा 40 डिग्री के पार हो सकता है। IMD के मुताबिक दिल्ली-NCR में इस सप्ताहांत पारा 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर प्रचंड गर्मी का अहसास करा सकता है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 48 घंटों में देश के कई हिस्सों में लू चलने की संभावना है। IMD द्वारा जारी पूर्वानुमानों के विस्तृत विश्लेषण से यह अनुमान लगाया गया है कि अगले 36  घंटों के अंदर मध्य और पूर्वी भारत में तापमान बढ़ने के साथ-साथ हालात सबसे ज़्यादा खराब होंगे। वहां लू के थपेड़े चलने की संभावना है। IMD ने कहा है कि अप्रैल 2026 के मध्य से मध्य और पूर्वी भारत के अलग-अलग इलाकों में लू चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने इसके लिए आधिकारिक चेतावनी भी जारी की है। कहां-कहां और कब से लू? IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली-NCR में इस मौसम में पहली बार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा पार कर सकता है, जबकि उससे सटे उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। मौसम विभाग ने कहा है कि महाराष्ट्र के विदर्भ और उससे सटे कुछ इलाकों में 15 से 18 अप्रैल तक, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 15 से 17 अप्रैल तक और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में 16 से 18 अप्रैल तक लू चलने की प्रबल संभावना है। ओडिशा- मध्यप्रदेश का क्या हाल? मौसम विभाग के मुताबिक, ओडिशा के अंदरूनी और कुछ तटीय इलाकों में भी 15 से 18 अप्रैल तक लू का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में 16 से 19 अप्रैल तक लू चलने का अनुमान है। इसी तरह महाराष्ट्र के नागपुर, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती और ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर जैसे शहरों में भी 16 अप्रैल तक तापमान बढ़कर 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। IMD ने कहा है कि कुछ इलाकों में पारा इससे भी ऊपर जा सकता है। यानी अप्रैल में ही जून का अहसास होने वाला है। और किन शहरों में प्रचंड गर्मी के आसार मौसम विभाग द्वारा संभावित तापमान का जो मानचित्र जारी किया गया है, उसके मुताबिक आने वाले दिनों में ओडिशा, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में पारा 40 से 42 डिग्री तक पहुंच सकता है। इनमें गया, पटना, रांची, राउरकेला, संभलपुर, भुवनेश्वर, कटक, पुरी, खड़गपुर, जमशेदपुर, धनबाद, आसनसोल, बोकारो, दुर्गापुर, कोलकाता, भागलपुर और सिल्लीगुड़ी भी शामिल है। इन शहरों में पारा @42 के पार इनके अलावा उज्जैन, इंदौर, भोपाल, सागर, जबलपुर, अकोला, अमरावती, नागपुर, चंद्रपुर, भिलाई, सतना, बिलासपुर, कोरबा में तापमान 42 डिग्री को पार सकता है। तेलंगाना के भी कई इलाकों में तापमान 43 डिग्री पार कर चुका है। इसके अलाला मौसम विभाग ने 17 और 18 अप्रैल को झारखंड और ओडिशा के कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। इनमें खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, पलामू, गढ़वा, चतरा और सरायकेला-खरसांवा जैसे जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर के समय तेज और गर्म हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। हालांकि 17 अप्रैल को राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में आंशिक बादल छाने और कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है, लेकिन इससे गर्मी में ज्यादा राहत मिलने के आसार नहीं हैं। 19 अप्रैल से पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहने और आसमान साफ रहने का अनुमान है, जिससे तापमान में और वृद्धि हो सकती है।

8th Pay Commission: 1.89x हो सकता है फिटमेंट फैक्टर, DA रीसेट होगा, कैलकुलेशन पर नजर डालें

नई दिल्ली DA का 60% पहुंचना सिर्फ एक डेटा पॉइंट नहीं है- यह 8वें वेतन आयोग की पूरी दिशा तय करने वाला संकेत है.अब तस्वीर साफ है न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 गुना होगा, लेकिन संभावनित वास्तविक स्तर 1.89 गुना हो सकता है. बाकी फैसला करेगा- समय, महंगाई और सरकार का संतुलन।  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th pay commission) की सबसे बड़ी पहेली- फिटमेंट फैक्टर कितना होगा? अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है।  महंगाई भत्ता (DA) जब 60% के स्तर पर पहुंच गया, तो यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं रहा, बल्कि नई सैलरी स्ट्रक्चर का बेस बन गया है।  यानी अब सवाल ये नहीं है कि सैलरी बढ़ेगी या नहीं… बल्कि ये है कि कितनी बढ़ेगी और किस फॉर्मूले से बढ़ेगी।  DA का 60% होना बना नया आधार महंगाई भत्ता (DA) जब 60% के स्तर पर पहुंचता है, तो यह केवल एक आंकड़ा नहीं होता, बल्कि अगले वेतन आयोग के लिए सैलरी स्ट्रक्चर का ‘बेस’ बन जाता है। पुराने नियमों के मुताबिक, जब भी नया वेतन आयोग आता है, तो पिछले DA को बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाता है। समझिए गणित:     चूंकि वर्तमान महंगाई दर के हिसाब से DA 60% तक पहुंच चुका है, इसलिए न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 होना तय है।     यदि फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम रखा गया, तो कर्मचारियों की सैलरी महंगाई की तुलना में कम हो जाएगी। क्या होगा नया फिटमेंट फैक्टर? (1.89x की संभावना) जानकारों का कहना है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने में यदि देरी होती है और DA 72% से 76% के करीब पहुंचता है, तो नया सैलरी इंडेक्स 1.72 से 1.76 के बीच होगा। ऐसे में सरकार संतुलन बनाने के लिए फिटमेंट फैक्टर को 1.89 गुना तक बढ़ा सकती है। हाइलाइट्स: क्या बदलेगा आपके लिए?     DA होगा जीरो: नया वेतन आयोग लागू होते ही महंगाई भत्ता (DA) फिर से 0 से शुरू होगा।     सैलरी इंडेक्स: न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 1.60 (फ्लोर) होगा, जबकि वास्तविक स्तर 1.89x तक जा सकता है।     पेंशनर्स को लाभ: कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनर्स की पेंशन भी इसी आधार पर संशोधित होगी।     नया फॉर्मूला: नई बेसिक सैलरी = (पुरानी बेसिक सैलरी × फिटमेंट फैक्टर)। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग? फिलहाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर कोई तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक इसकी सिफारिशें लागू हो सकती हैं। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उतना ही बड़ा उछाल आएगा। क्या संकेत मिल रहे हैं?     DA 60%= सैलरी इंडेक्स 1.60     1.60= न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (फ्लोर)     देरी के साथ DA 72-76% तक जा सकता है     संभावित फिटमेंट फैक्टर रेंज= 1.80 से 1.89x     DA एडजस्ट होकर फिर 0 से शुरू होगा DA 60% होते ही चर्चा क्यों तेज हुई? हर वेतन आयोग का बेसिक नियम है: पुराने DA को बेसिक सैलरी में जोड़कर नया वेतन तय होता है।  अब समझिए: अगर DA 60% है, तो इसका मतलब है कि आपकी मौजूदा सैलरी पहले ही 60% महंगाई का असर झेल चुकी है।  इसलिए नया फिटमेंट फैक्टर 1.60 से कम हुआ तो महंगाई की भरपाई ही नहीं होगी।  यही वजह है कि 1.60 अब न्यूनतम सीमा बन चुका है. Q1: DA 60% कैसे पहुंचा और इसका मतलब क्या है? CPI-IW (Industrial Workers Index) के आधार पर DA तय होता है.     दिसंबर 2025 इंडेक्स: 148.2     DA गणना: 60.35%     लागू स्तर: 60% इसका मतलब: अगर आपकी बेसिक सैलरी 100 थी, तो अब प्रभावी सैलरी 160 के बराबर है. Q2: फिटमेंट फैक्टर का असली गणित क्या कहता है? फॉर्मूला बहुत सीधा है: नई सैलरी= पुरानी बेसिक × फिटमेंट फैक्टर DA 60%- इंडेक्स= 1.60 लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती. अगर वेतन आयोग लागू होने में देरी होती है: DA और बढ़ेगा, 72%-76% तक पहुंच सकता है. इससे नया इंडेक्स बनता है: 1.72-1.76 अब इसमें जुड़ता है: स्ट्रक्चरल बफर (10-13%) Final अनुमान: 1.80 से 1.89 (सबसे यथार्थ रेंज) Q3: क्या 1.89 फाइनल हो सकता है? सीधा जवाब- संभावना मजबूत है, लेकिन गारंटी नहीं. क्यों? क्योंकि सरकार इन चीजों को भी देखती है:     आर्थिक स्थिति     वेतन बढ़ोतरी का बोझ     कर्मचारियों की मांग     महंगाई का भविष्य यानी यह सिर्फ गणित नहीं, पॉलिसी डिसीजन भी है

भारत और रूस की साझेदारी ने पलट दिया गेम, ट्रंप के रोकने के बावजूद 3 साल में ऐसा नहीं हुआ

नई दिल्ली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संकट और ग्लोबल सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के बीच भारत ने अपनी रणनीति साफ कर दी है. दुनिया जहां तेल की कमी से जूझ रही है, वहीं भारत ने बिना देरी किए रूसी कच्चे तेल की खरीद फिर से तेज कर दी है. भारत अपनी करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ऐसे में किसी भी ग्लोबल व्यवधान का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यही वजह है कि अब फोकस सस्ते तेल से ज्यादा लगातार सप्लाई पर है।  ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत ने रूस से करीब 1.98 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल खरीदा. यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर 1.57 मिलियन बैरल प्रति दिन पर आया है, लेकिन इसकी वजह मांग में कमी नहीं बल्कि तकनीकी कारण हैं. नायरा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस शटडाउन के चलते अस्थायी गिरावट आई है. बाजार को उम्मीद है कि अगले महीने से फिर तेजी देखने को मिलेगी।  अब सप्लाई सिक्योरिटी है फोकस वेस्ट एशिया से आने वाली सप्लाई में अनिश्चितता ने भारतीय रिफाइनरियों की प्राथमिकता बदल दी है. अब सवाल यह नहीं है कि तेल कितना सस्ता है, बल्कि यह है कि वह लगातार मिल पा रहा है या नहीं. ऊर्जा बाजार की विशेषज्ञ वंदना हरि (Vandana Hari) का कहना है कि “भारत जितना रूसी कच्चा तेल हासिल कर सकता है, उतना खरीद रहा है. जब तक पर्शियन गल्फ से सप्लाई बाधित रहेगी, तब तक भारत रूसी तेल की अधिकतम खरीद जारी रखेगा।  वहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा (Sujata Sharma) ने कहा, “हमारी प्राथमिकता घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराना है. यह फैसला तकनीकी और व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर लिया जाता है।  पुरानी रणनीति की वापसी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने डिस्काउंट के चलते रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई थी. उस समय भारत रूस का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था. हालांकि 2025 में अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के कारण खरीद में थोड़ी कमी आई, लेकिन मौजूदा संकट ने भारत को फिर उसी रणनीति की ओर लौटा दिया है।  घट रहा ग्लोबल स्टॉक, बढ़ रही टेंशन ग्लोबल मार्केट में एक और संकेत चिंता बढ़ाने वाला है. समुद्र में जमा रूसी तेल का स्टॉक तेजी से घट रहा है. पिछले साल के अंत में यह करीब 155 मिलियन बैरल था, जो अब घटकर करीब 100 मिलियन बैरल रह गया है. इसका मतलब है कि डिमांड बढ़ रही है और सप्लाई पर दबाव लगातार बना हुआ है। 

ईरान ने चीनी सैटेलाइट के जरिए अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, रिपोर्ट से बढ़ी चिंताएं

तेहरान  ईरान ने चीन के जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल करते हुए मिडल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की रेकी की थी। इसी के चलते उसे पूरी जानकारी मिल गई थी और फिर जंग में उसने चुन-चुनकर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। चीनी सैटेलाइनट का यह इस्तेमाल 2024 के आखिरी दिनों में किया गया था। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने TEE-01B सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया था। इन्हें चीन की कंपनी 'अर्थ आई' ने तैयार किया है। इनकी सेवाओं को ईरानी सेना की एयरोस्पेस फोर्स ने खरीदा था। चीन की ओर से इन सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के कुछ दिन बाद ही ईरान ने सेवाएं ली थीं। इस बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने ऐसी रिपोर्ट्स को खारिज किया है। उसका कहना है कि चीन पर टैरिफ लगाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। इन मनगढ़ंत आरोपों का इस्तेमाल हमारे ऊपर टैरिफ लगाने के बहाने के तौर पर किया जा सकता है। चीनी मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि यदि अमेरिका ने हमारे ऊपर टैरिफ बढ़ाया तो फिर हम भी उसका जवाब देंगे। फाइनेंशियल टाइम्स ने लिखा है कि उसने ईरानी सेना के लीक दस्तावेजों के अध्ययन के बाद यह जानकारी दी है। अखबार का कहना है कि ईरानी सेना के कमांडरों ने सैटेलाइट से कहा था कि वह अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों की मॉनिटरिंग करे। इसके बाद सैटेलाइट की मदद से तस्वीरें और अन्य जानकारियां हासिल की गईं। इन तस्वीरों को काफी पहले ही जुटाया गया था। इसके बाद जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए तो उसने भी जवाबी हमले किए। ईरान ने इराक, कतर, सऊदी अरब समेत कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। जानकारी यह भी है कि चीनी सैटेलाइट्स की रेंज में एशिया का ज्यादातर हिस्सा आता है। इसके अलावा लैटिन अमेरिका समेत कई और क्षेत्र उसकी जद में हैं। 'ट्रंप भी कह चुके मेरा इरादा चीन को टारगेट करना' बता दें कि चीन पर डोनाल्ड ट्रंप खुद ही आरोप लगा चुके हैं कि उसने ईरान को हथियारों के जरिए मदद की है। उनका कहना था कि मैंने कुछ देशों पर 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की जो बात कही है, वह मुख्य रूप से चीन के लिए ही है। गौरतलब है कि मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद चीन जाने वाले हैं। माना यह भी जा रहा है कि शायद अपने दौरे से पहले एक बेहतर डील के लिए चीन पर दबाव डालने की भी उनकी यह रणनीति हो सकती है।

अमेरिका ने ईरान से तेल आयात पर प्रतिबंध छूट को बढ़ाने से मना किया

वॉशिंगटन  बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसका ईरानी तेल पर लगे बैन में कुछ समय के लिए दी गई छूट को बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है. इसे युद्ध की वजह से सप्लाई में रुकावटों को कम करने के लिए लागू किया गया था।  यह कदम तेहरान पर दबाव बढ़ाने की अमेरिका की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. वित्त मंत्रालय का कहना है कि वह ईरान की आर्थिक और ऊर्जा को लेकर गतिविधि पर रोक लगाने के मकसद से 'इकोनॉमिक फ्यूरी' अप्रोच को आगे बढ़ा रहा है।  वित्त मंत्रालय इकोनॉमिक फ्यूरी के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है, ईरान पर ज़्यादा से ज़्यादा दबाव बनाए हुए है. फाइनेंशियल संस्थानों को पता होना चाहिए कि डिपार्टमेंट मौजूद सभी टूल्स और अथॉरिटी का इस्तेमाल कर रहा है और विदेशी कंपनियों के खिलाफ सेकेंडरी बैन लगाने के लिए तैयार है जो ईरान की एक्टिविटीज को सपोर्ट करना जारी रखते हैं।  अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा कि समुद्र में पहले से फंसे ईरानी तेल की बिक्री की इजाजत देने वाला शॉर्ट-टर्म ऑथराइज़ेशन कुछ दिनों में खत्म होने वाला है और इसे रिन्यू नहीं किया जाएगा. इससे पहले 21 मार्च को अमेरिका ने शुक्रवार (लोकल टाइम) को इस साल 19 अप्रैल तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर लगी पाबंदियों में कुछ समय के लिए ढील देने का ऐलान किया था. इसमें अमेरिका में ईरानी कच्चे और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की बिक्री की इजाजत देना भी शामिल था।  इस फैसले की जानकारी अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल के एक बयान से मिली. इसने 20 मार्च से जहाजों पर लोड किए गए ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की डिलीवरी और बिक्री को मंजूरी दी थी. बयान में 19 अप्रैल, 2026 को वह तारीख बताया गया, जब तक ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर छूट रहेगी।  इसमें कहा गया है कि कुछ अपवादों को छोड़कर, 'ऊपर बताई गई अथॉरिटीज द्वारा मना किए गए सभी ट्रांज़ैक्शन जो आम तौर पर किसी भी जहाज पर लोड किए गए ईरानी मूल के कच्चे तेल या पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की बिक्री, डिलीवरी या उतारने के लिए जरूरी है. इसमें ऊपर बताई गई अथॉरिटीज के तहत ब्लॉक किए गए जहाज भी शामिल हैं. 20 मार्च, 2026 को रात 12:01 बजे ईस्टर्न डेलाइट टाइम या उससे पहले, वे 19 अप्रैल, 2026 को रात 12:01 बजे ईस्टर्न डेलाइट टाइम तक मंजूर हैं।  बयान में कहा गया है कि लाइसेंस से मंजूर ट्रांज़ैक्शन में ईरान से आने वाले कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट का अमेरिका में इम्पोर्ट भी शामिल है. चूंकि ईरान के साथ लड़ाई अभी भी जारी है, इसलिए यह रणनीतिक जलमार्ग ज्यादातर समुद्री ट्रैफिक के लिए असल में बंद है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और राजनयिक रिश्तों पर दबाव बना हुआ है।