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पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में पर्यटकों की रौनक लौटी, पर्यटन क्षेत्र में आई नई उम्मीद

श्रीनगर  22 अप्रैल 2025 का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं था. यहां पहलगाम स्थित बैसरन घाटी (Baisaran Valley) में हुए घातक आतंकी हमले ने पूरे कश्मीर घाटी को झकझोर दिया था. ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहलाने वाली इस खूबसूरत घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर उन्हें गोलियों से भून डाला था. इस नृशंस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे. इस हमले ने न सिर्फ मानवीय क्षति पहुंचाई, बल्कि पहलगाम के पर्यटन उद्योग को बुरी तरह चोट पहुंचाई. पर्यटन उद्योग ठप पड़ गया था, दुकानें बंद हो गई थीं और स्थानीय कारीगरों-दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था. लेकिन ठीक एक साल बाद पहलगाम के घाव भरने लगे हैं. इस वसंत में पर्यटकों की रौनक लौट आई है. हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट की दुकानों पर फिर भीड़ उमड़ रही है. पर्यटक कश्मीरी शॉल, कालीन, पशमीना, कढ़ाई वाले सूट, काठ की नक्काशीदार वस्तुएं और सेब की लकड़ी से बने सामान खरीद रहे हैं. स्थानीय दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और कमाई भी पहले जैसी होने लगी है।  पहलगाम के मुख्य बाजार लिद्दर बाजार, मलिक बाजार और चंदनवाड़ी रोड पर इन दिनों सुबह से शाम तक चहल-पहल है. दुकानों पर फिर से भीड़ दिखने लगी है. पर्यटक बसों और प्राइवेट गाड़ियों से उतरते ही दुकानों की ओर बढ़ रहे हैं. कई दुकानें सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खुली रह रही हैं।  हम साथ देने आए हैं… इंदौर के रहने वाले फखरुद्दीन अपने परिवार के साथ पहली बार पहलगाम घूमने आए है. वह यहां की सुंदरता और लोगों की मेहमाननवाजी को देखकर कहते हैं, ‘हमने जम्मू-कश्मीर के बारे में बहुत नकारात्मक बातें सुनी थीं, लेकिन यहां आकर हमारा अनुभव बिल्कुल उल्टा है. लोग बेहद मिलनसार हैं और यहां के हस्तशिल्प अद्भुत हैं. हम कश्मीरी शॉल, पशमीना और हाथों से बने सामान खरीद रहे हैं ताकि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट मिल सके।  फखरुद्दीन ने बताया कि उनकी पत्नी और बेटी ने कई पशमीना शॉल, सूट पीस और कालीन खरीदे. वह कहते हैं, ‘हमने सोचा था कि सुरक्षा की वजह से यहां घूमना मुश्किल होगा, लेकिन हर जगह सुरक्षा बल तैनात हैं और वातावरण पूरी तरह शांतिपूर्ण है।  बैसरन घाटी का वह काला दिन पिछले साल 22 अप्रैल को दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच बैसरन घाटी में हथियारबंद आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला बोल दिया. घनी देवदार के जंगलों से घिरी इस घाटी में पर्यटक घोड़े की सवारी या पैदल घूम रहे थे. आतंकियों ने M4 कार्बाइन और AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग की. उन्होंने पुरुषों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया. इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़ा चालक शहीद हुए।  हमले के बाद पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. कई पर्यटन स्थल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए. पहलगाम की हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट दुकानों पर ताला लग गया. कारीगर परिवार महीनों बिना कमाई के गुजारा करते रहे. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अप्रैल-मई में पर्यटकों की संख्या में 80 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई।  कश्मीर में लौट रही रौनक 2026 के वसंत में हालात अब बदल रहे हैं. मार्च के अंत से अप्रैल के पहले दो सप्ताह में पहलगाम में रोजाना 800 से 1200 पर्यटक पहुंच रहे हैं. बैसरन घाटी सहित आसपास के कई पर्यटन स्थल फिर से खुल रहे हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘Kashmir Travel Mart 2026’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें हस्तशिल्प को विशेष जगह दी गई है।  जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. पहलगाम में अतिरिक्त सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है. पर्यटक बसों और वाहनों की सुरक्षा के लिए स्पेशल एस्कॉर्ट व्यवस्था की गई है. साथ ही ‘एक्सपीरियंस कश्मीर’ अभियान के तहत सोशल मीडिया पर सकारात्मक रुख बढ़ाया जा रहा है।  पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल 2026 में अब तक पिछले साल की तुलना में 65 प्रतिशत ज्यादा पर्यटक कश्मीर घाटी आए हैं. पहलगाम के अलावा गुलमर्ग, सोनमर्ग, गांदेरबल और डल झील क्षेत्र भी पर्यटकों से गुलजार हैं।  पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जख्म अब भर रहा है. आतंकी हमले की यादें अभी भी ताजा हैं, लेकिन पर्यटकों की वापसी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान दी है. फखरुद्दीन जैसे परिवार दिखाते हैं कि पर्यटक अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट करने भी आ रहे हैं। 

क्या है अमरावती कांड में मोबाइल से डाउनलोड किए गए वीडियो का सच?

अमरावती   महाराष्ट्र के अमरावती में एक ऐसे युवक को गिरफ़्तार किया गया है, जिस पर कम से कम 180 नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने और 350 से ज़्यादा अश्लील वीडियो बनाने का आरोप है। पुलिस ने एक BJP सांसद की शिकायत के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए यह गिरफ़्तारी की। युवक की उम्र महज 19 साल है। उसका नाम मोहम्मद अयान अहमद उर्फ तनवीर अहमद है। उसे 21 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि परतवाड़ा शहर के रहने वाले मोहम्मद अयाज़, उर्फ़ तनवीर पर आरोप है कि उसने लड़कियों को लव ट्रैप में फंसाया। लड़कियों को मुंबई और पुणे ले गया और उनके अश्लील वीडियो बनाए। जबरदस्ती यौन शोषण, फिर ब्लैकमेलिंग नागपुर से 180 किलोमीटर दूर, पास के शहर परतवाड़ा और अचलपुर इस स्कैंडल से हिल गए। जो 180 वीडियो बरामद हुए हैं उनमें वह नाबालिग लड़कियों से ज़बरदस्ती करते हुए दिखाई दे रहा है। आरोप है कि अयान अहमद इन वीडियो का इस्तेमाल लड़कियों को ब्लैकमेल करने और उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेलने के लिए किया गया। इनमें से कुछ वीडियो ऑनलाइन भी बड़े पैमाने पर शेयर किए गए। अयान के साथ कोई और भी शामिल? आरोपी अयान अहमद तनवीर अहमद पर आरोप है कि उसने लड़कियों को रिश्तों में फंसाया, फिर उनकी मर्ज़ी के बिना वीडियो बनाते हुए उनके साथ शारीरिक और यौन शोषण किया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि कुछ वीडियो में आरोपी खुद भी दिखाई दे रहा है। वीडियो को देखकर शक है कि किसी दूसरे साथी ने भी इस यौन शोषण का वीडियो बनाने में उसकी मदद की होगी। राज्यसभा सांसद ने किया हंगामा सोमवार को तब हंगामा मच गया जब राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे और BJP के प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी ने अमरावती ग्रामीण SP विशाल आनंद से शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी ने सोशल मीडिया के ज़रिए कई लड़कियों को फंसाया और उनके साथ यौन शोषण किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो वे ज़ोरदार आंदोलन करेंगे। आंदोलन की धमकी राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे ने पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विशाल आनंद को एक ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि नाबालिगों को WhatsApp और Snapchat ग्रुप्स के ज़रिए सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया। अगर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन नहीं किया गया, तो वे बुधवार सुबह वह अपने समर्थकों के साथ SP के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे। आरोपी अब पुलिस हिरासत में है, और उससे ज़्यादा जानकारी हासिल करने के लिए उसके फ़ोन की जांच की जा रही है। साथ ही, साइबर सेल ने सोशल मीडिया से वीडियो हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पुलिस उन लोगों की पोस्ट पर नजर रख रही है जिन्होंने ये वीडियो डाउनलोड किए हैं और उन्हें दोबारा शेयर कर रहे हैं। इधर सामाजिक बदनामी के डर से अब तक किसी भी पीड़ित या उसके परिवार के सदस्य ने कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। मैं पीड़ितों के परिवारों से आगे आने की अपील करता हूं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी। इसके अलावा, राज्य सरकार उनकी कानूनी और काउंसलिंग सेवाओं का भी ध्यान रखेगी। सीएम देवेंद्र फडणवीस की नजर में मामला अमरावती के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। बावनकुले ने कहा कि मैंने DGP से बात की है, क्योंकि यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है। इस मामले के कई पहलू हैं, जिनका ज़िक्र अभी मीडिया में नहीं किया जा सकता। हम जांच करेंगे और आरोपी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेंगे। मोहम्मद अयाज़ कथित तौर पर पहले AIMIM में एक पदाधिकारी के तौर पर काम कर चुका है। उसके सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो और तस्वीरों में, वह MIM के अमरावती अध्यक्ष, हाजी इरफान खान से एक पत्र लेते हुए और पार्टी की रैलियों में सोशल मीडिया 'रील्स' बनाते हुए दिखाई देता है। हालांकि, मामला सामने आने के बाद उसके इंस्टाग्राम अकाउंट से ऐसे कई वीडियो हटा दिए गए हैं।

RBI की नई तैयारी, UPI पेमेंट्स में 1 घंटे की देरी, जानें क्यों बदल रहे हैं ये नियम

 नई दिल्ली  भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डिजिटल पेमेंट्स की पॉपुलैरिटी किसी से छिपी नहीं है. इंस्टैंट पेमेंट्स की वजह से UPI को मनी ट्रांसफर और किराने की दुकान तक पर यूज किया जा रहा है. अब इसी खूबी को कुछ समय के लिए बदला जा सकता है।  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसको लेकर चर्चा पत्र जारी किया है, जिसमें डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए ट्रांजैक्शन पर कुछ घंटे की देरी का नियम लाने का प्रस्ताव दिया है. पेमेंट्स में करीब 1 घंटे तक की देरी होगी।  RBI का यह प्रपोजल कुछ पेमेंट्स के प्रोसेस के तरीकों को बदलने के लिए है. अगर ये नियम लागू होता है तो 10 हजार रुपये से अधिक रुपये वाली पेमेंट्स तुरंत कंप्लीट नहीं होगी. इस पेमेंट्स को कंप्लीट होने में कुछ समय लगेगा।  रुपये भेजने वाले के बैंक खाते से रकम तुरंत कट जाएंगी लेकिन जिसके बैंक खाते में रुपये पहुंचने हैं, उसको 1 घंटे के बाद रिसीव होंगे. यह बदलाव सुरक्षा के मद्देनजर लाया जा रहा है. इस दौरान सेंडर्स चाहें तो पेमेंट्स को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकते हैं।  इस कड़े कदम के पीछे की सबसे बड़ी वजह ऑनलाइन धोखाधड़ी से होने वाला भारी नुकसान है। साल 2025 में ही भारत में डिजिटल फ्रॉड के कारण लोगों ने 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा दिए हैं। आंकड़े बताते हैं कि भले ही 10,000 रुपये से बड़े ट्रांजेक्शन संख्या में कम हों, लेकिन फ्रॉड की कुल वैल्यू का करीब 98.5% हिस्सा इसी कैटेगरी से आता है। अक्सर ठग 'सोशल इंजीनियरिंग' यानी लोगों को डराकर या लालच देकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। 1 घंटे की इस देरी (Holding Period) का मकसद पीड़ित व्यक्ति को सोचने और समझने का समय देना है। अगर किसी को पता चलता है कि उसके साथ धोखा हुआ है, तो वह उस एक घंटे के भीतर अपना ट्रांजेक्शन कैंसिल कर सकेगा और अपनी मेहनत की कमाई को डूबने से बचा पाएगा। सिर्फ 1 घंटे का ब्रेक ही नहीं, RBI सुरक्षा के लिए कुछ और भी बड़े बदलाव करने जा रहा है। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए नियम बनाया जा रहा है कि 70 साल से अधिक उम्र के लोग अगर 50,000 रुपये से ज्यादा ट्रांसफर करते हैं, तो उनके किसी भरोसेमंद व्यक्ति (Trusted Person) की अनुमति जरूरी होगी। साथ ही, बैंकों को निर्देश दिया जा सकता है कि अगर किसी व्यक्तिगत या छोटे बिजनेस खाते में अचानक 25 लाख रुपये से ज्यादा जमा होते हैं, तो बैंक पूरी पुष्टि के बाद ही उसे क्रेडिट करे। इसके अलावा, एक 'किल स्विच' (Kill Switch) का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे कोई भी ग्राहक फ्रॉड का शक होने पर एक ही बटन दबाकर अपनी UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड जैसी सभी डिजिटल सेवाओं को तुरंत बंद कर सकेगा। हालांकि इससे कुछ लोगों को तात्कालिक असुविधा हो सकती है, लेकिन आपकी जमापूंजी को सुरक्षित रखने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। 1 घंटे देरी का नियम P2P ट्रांसफर पर लागू होगा  ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नियम सिर्फ पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर लागू होगा. दुकान पर QR कोड के जरिए होने वाले पेमेंट्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।  साइबर ठगी पर नकेल कसने की तैयारी   RBI इस लिए ये बदलाव लाना चाहता है ताकि का साइबर ठगी पर नकेल कसी जा सके. साइबर ठगी के केस में रुपये कुछ मिनट के अंदर ना जाने कितने सारे अकाउंट से होकर गुजर जाते हैं और कैश के रूप में निकाल लिए जाते हैं. इसके बाद रिकवरी में परेशानी आती है।  1 घंटे की देरी का फॉर्मुला कैसे आएगा काम?    RBI की सलाह है कि 1 घंटे की देरी मददगार साबित होगी. रिजर्व बैंक इस देरी को गोल्डन आवर के रूप में मानता है, जहां यूजर्स को खुद सोचने का समय मिलेगा और इससे ठगी से बाहर निकलने का मौका मिलेगा. खाता धारक चाहे तो ट्रांजैक्शन को 1 घंटे के अंदर कैंसिल भी कर सकेंगे।  यहां गौर करने वाली बात यह है कि डेली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऑटो डेबिट और सब्सक्रिप्शन वाली पेमेंट्स पर कोई असर नहीं दिखाई देगा. अगर शख्स किसी अनजान व्यक्ति को रुपये ट्रांसफर करते हैं, तो उसको ज्यादा सेफ्टी मिलेगी। 

दुबई में मंदी, भारत में प्रॉपर्टी निवेश का सुनहरा मौका, गुरुग्राम और मुंबई हॉटस्पॉट बने

 गुरुग्राम / मुंबई ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण दुबई के प्रॉपर्टी बाजार की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, जिससे अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इसका फायदा भारतीय लग्जरी रियल एस्टेट को मिल सकता है. दुबई लैंड डिपार्टमेंट के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत से संपत्ति की बिक्री में साल-दर-साल 44 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है. यह मंदी घरों, विला, ऑफिस और कमर्शियल मार्केट, सभी क्षेत्रों में देखी जा रही है।  बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक आमतौर पर घरेलू बाजारों को प्राथमिकता देते हैं, जो तुलनात्मक रूप से स्थिर होते हैं. भारत का आवासीय क्षेत्र, जिसे मजबूत मांग और आर्थिक विकास का समर्थन प्राप्त है, उन निवेशकों से लाभ उठा सकता है जो फिलहाल विदेशी निवेश को टाल रहे हैं या उस पर पुनर्विचार कर रहे हैं।  28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों (यूएई सहित) पर जवाबी हमले किए. इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहरा गया है।  दुबई में आई इस सुस्ती से भारत के लिए अल्पकालिक अवसर पैदा हो सकते हैं. विशेष रूप से गुरुग्राम, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के लग्जरी हाउसिंग मार्केट में तेजी देखने को मिल सकती है. जब विदेशी बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर भारत जैसे स्थिर और मजबूत आर्थिक विकास वाले घरेलू बाजारों का रुख करते हैं. ऐसे में जो निवेश दुबई जाने वाला था, उसके अब भारत की ओर मुड़ने की संभावना बढ़ गई है।  बाजार पर्यवेक्षकों का कहना है कि शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि दुबई, जो वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी वाला दूसरा सबसे बड़ा रियल एस्टेट मार्केट है, वहां लेन-देन पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. मौजूदा अनिश्चितता निवेशकों के भरोसे पर भारी पड़ रही है. बाजार में सावधानी का आलम यह है कि कुछ खरीदार अपनी खरीदारी को टाल रहे हैं और सौदों को पूरा होने में पहले से कहीं ज्यादा समय लग रहा है।  मौजूदा अनिश्चितता निवेशकों के मनोबल को प्रभावित कर रही है. स्थिति यह है कि कई खरीदार फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं और जो सौदे अंतिम चरण में थे, उन्हें पूरा होने में भी अब काफी समय लग रहा है. यह निवेशकों के बेहद सतर्क रुख को दर्शाता है। 

वैश्विक संकट के बीच चमका भारत! IMF ने बढ़ाया ग्रोथ अनुमान, मार्केट में पॉजिटिव संकेत

नई दिल्ली. वैश्विक तनाव और ईरान-अमेरिका युद्ध जैसे हालात के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था IMF (International Monetary Fund) ने भारत की ग्रोथ को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है, जो यह संकेत देता है कि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। खास बात यह है कि जहां एक तरफ वेस्ट एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव है, वहीं भारत इस माहौल में भी बेहतर प्रदर्शन करता नजर आ रहा है। आइए इस रिपोर्ट को जरा विस्तार से समझते हैं। IMF (International Monetary Fund) के अनुसार, भारत की GDP ग्रोथ FY26 में 7.6% रहने का अनुमान है, जो पहले के अनुमान से 1% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। वहीं IMF (International Monetary Fund) ने FY27 और FY28 के लिए ग्रोथ अनुमान 6.5% रखा है, जो स्थिर और संतुलित विकास की ओर इशारा करता है। इस सुधार के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भारत की मजबूत घरेलू मांग और पिछले साल का बेहतर आर्थिक प्रदर्शन है, जिसका असर आगे भी दिख रहा है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर टैरिफ में कटौती से भी निर्यात को राहत मिली है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट मिला है। महंगाई यानी (Inflation) के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। IMF (International Monetary Fund) का अनुमान है कि FY27 में महंगाई 4.7% और FY28 में 4% तक आ सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आम लोगों पर महंगाई का दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर स्थिति इतनी मजबूत नहीं दिख रही है। IMF (International Monetary Fund) ने दुनिया की कुल ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। वैश्विक ग्रोथ 2026 में 3.1% और 2027 में 3.2% रहने का अनुमान है, जो पिछले औसत से कम है। इसका मुख्य कारण बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, महंगे कमोडिटी दाम और वैश्विक व्यापार में गिरावट है। IMF ने चेतावनी भी दी है कि अगर मध्य-पूर्व का संकट और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक ग्रोथ पर दबाव आ सकता है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। IMF का यह अपडेट न सिर्फ निवेशकों बल्कि आम लोगों के लिए भी भरोसा बढ़ाने वाला है कि आने वाले समय में भारत आर्थिक मोर्चे पर मजबूत बना रह सकता है।

पाकिस्तान वार्ता विफल, अब सीधे ट्रंप से बोले PM मोदी — 40 मिनट की अहम चर्चा

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बात हुई है। यह बातचीत करीब 40 मिनट तक हुई है। पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद इस बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी। इस साल तीसरी बार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर बात की है। वहीं, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से दूसरी बार दोनों के बीच बात हुई है। पीएम मोदी ने क्या हुआ अमेरिकी राजदूत ने कहाकि ट्रंप ने पश्चिम एशिया की स्थिति, जिसमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी भी शामिल है, पर प्रधानमंत्री को जानकारी दी। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच कुछ बड़े सौदे अपेक्षित हैं, जिनमें ऊर्जा क्षेत्र भी शामिल है। सर्जियो गोर के मुताबिक इस दौरान पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा, ‘मैं सिर्फ यही चाहता हूं कि आप जान लीजिए कि हम सभी आपसे प्यार करते हैं।’ अमेरिकी राजदूत ने कहाकि राष्ट्रपति ट्रंप, पीएम मोदी को लगातार अपडेट करते रहते हैं। अब तक तीन बार बातचीत पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल पहली बार दो फरवरी को बात की थी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ट्रेड डील पर बातचीत हुई थी। इसके बाद 24 मार्च को दोनों ने पश्चिम एशिया के हालात को लेकर चर्चा की थी। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने बाद पहली फोन कॉल में, पीएम मोदी ने जल्द से जल्द पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने का समर्थन किया था। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि होर्मुज खुला और सुरक्षित रहेगा। अपनी बातचीत के बारे में पोस्ट करते हुए, पीएम मोदी ने कहा था कि ट्रंप से उनकी बात हुई थी। इस दौरान दोनों के बीच पश्चिम एशिया के हालात पर उपयोगी बातचीत हुई थी। विफल हो चुकी है ईरान-अमेरिका वार्ता गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल संघर्ष विराम है। इस बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों के बीच शांति वार्ता हुई थी। हालांकि करीब 21 घंटे तक चर्चा के बावजूद इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का मूड भी उखड़ा हुआ है। वह लगातार ईरान को तबाह करने वाली धमकियां दे रहे हैं। इस बीच ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता भी बहुत जल्द हो सकती है।

ईरान-अमेरिका टकराव के बीच फ्रांस की एंट्री, क्या मैक्रों दिला पाएंगे शांति का रास्ता?

पेरिस. मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राजनयिक मध्यस्थ की भूमिका तेज कर दी है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से अलग-अलग वार्ता की और रुकी हुई शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का प्रयास किया है। यह प्रयास होर्मुज स्ट्रेट में उत्पन्न खतरनाक स्थिति के बीच सामने आया है, जहां अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी लगा रखी है। अरब न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने मंगलवार को तेहरान की ओर से बातचीत की मेज पर लौटने की इच्छा जताई, लेकिन शर्त रखी कि चर्चा अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में होनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पूर्ण युद्धविराम के लिए स्पष्ट शर्तें रखी हैं, जिसमें लेबनान में शत्रुता की समाप्ति को शामिल करना अनिवार्य बताया गया है। पेजेश्कियन ने कहा कि यूरोप, खासकर फ्रांस, वाशिंगटन के साथ मतभेदों को दूर करने में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। इस्लामाबाद में हालिया वार्ता विफल रहने के बावजूद तेहरान ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प और गंभीरता दिखाई है, हालांकि अंतिम नतीजा वाशिंगटन की समझौता करने की इच्छा पर निर्भर करेगा। अब एक्टिव हुए फ्रांस के राष्ट्रपति वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दोनों नेताओं से वार्ता के बाद युद्धविराम लागू करने और होर्मुज को तुरंत फिर से खोलने के लिए दबाव बनाया है। उन्होंने बिना किसी नियंत्रण, शुल्क या शर्त के होर्मुज स्ट्रेट को बिना शर्त खोलने की मांग की। फ्रांस और ब्रिटेन शुक्रवार को पेरिस में एक वीडियो सम्मेलन की मेजबानी करेंगे, जिसमें नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए बहुपक्षीय मिशन पर चर्चा होगी। दोनों नेताओं से बातचीत के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मैंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की। मैंने इस्लामाबाद में बाधित हुई वार्ता को तुरंत फिर से शुरू करने, गलतफहमियों को दूर करने और तनाव के नए चरणों से बचने का आह्वान किया है। मैक्रों के प्रस्ताव के तीन प्रमुख बात है। पहला क्षेत्रीय स्थिरता के लिए लेबनान को शामिल करते हुए वर्तमान युद्धविराम का विस्तार। दूसरा होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी नियंत्रण, शुल्क या शर्त के तुरंत फिर से खोलना और अंत में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए फ्रांस व ब्रिटेन के नेतृत्व में शुक्रवार को पेरिस में वीडियो सम्मेलन के माध्यम से एक पूर्णत रक्षात्मक बहुपक्षीय मिशन स्थापित करना। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह विशेष रूप से जरूरी है कि सभी देश युद्धविराम का सख्ती से पालन करें, जिसमें लेबनान भी शामिल हो। इतना ही महत्वपूर्ण है कि होर्मुज को बिना किसी शर्त, नियंत्रण या शुल्क के जल्द से जल्द फिर से खोला जाए। इन परिस्थितियों में मुख्य हितधारकों के समर्थन से बातचीत शीघ्र शुरू हो सकेगी। सोमवार को ट्रंप ने कहा था- फोन आया है गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उनके प्रशासन को ईरान की ओर से 'दूसरी तरफ' से फोन आया है और तेहरान अब बातचीत के लिए उत्सुक है। वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि वे किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहते हैं। ट्रंप की ये टिप्पणियां ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी लगाए जाने के कुछ घंटों बाद आईं। इस सप्ताहांत पाकिस्तान में हुई लंबी वार्ता किसी समझौते पर पहुंचने में नाकाम रही। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि वार्ता में मुख्य अड़चन ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं हैं और उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।

पीएम मोदी ने 2029 के चुनावों में बेटियों को हक देने का किया वादा, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन

देहरादून  पीएम मोदी ने मंगलवार को देहरादून में कहा, ‘4 दशकों से महिला-बेटियां अपने हक का इंतजार कर रही है। अब वह समय आ गया है। हम अपने देश की बेटियों को 2029 के चुनावों में उनका हक देकर रहेंगे। इसके लिए हम संसद में महिला आरक्षण बिल ला रहे हैं। पीएम ने कहा, 'कभी उत्तराखंड के गांव में सड़क के इंतजार में पीढ़ियां बदल जाती थीं। आज डबल इंजन सरकार के प्रयास से सड़क गांव तक पहुंच रही है। जो गांव वीरान थे आज फिर बस रहे हैं।' इससे पहले उन्होंने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कॉरिडोर का उद्घाटन किया। वे एशिया के सबसे लंबे 12 किमी एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का निरीक्षण करने सहारनपुर पहुंचे। यहां रोड शो भी किया। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे कॉरिडोर 213 किमी लंबा, 6 लेन और एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर 12,000 करोड़ रुपए की लागत से बना है। यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ता है और इसके शुरू होने से दिल्ली-देहरादून के बीच की दूरी 6 घंटे से घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगी। पीएम मोदी ने लोगों से क्यों मांगी माफी? पीएम मोदी ने कहा, 'सबसे पहले तो मैं आप सबसे मांफी मांगता हूं. उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कार्यकम में जुड़े हुए लोगों से भी क्षमा मांगता हूं. मुझे यहां पहुंचने में एक घंटे से भी ज्यादा देर हो गई. आप लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा. मैं निकला तो समय पर ही था, लेकिन करीब-करीब 12 किलोमीटर के रोड शो दौरान इतना उत्साह था कि तेज गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया. धीरे-धीरे बढ़ते हुए लोगों का आशीर्वाद लेते हुए यहां पहुंचने में मुझे 1 घंटे से भी ज्यादा देर हो गई।  दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बड़ी उपलब्धि: पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा, 'उत्तराखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर 26वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. आज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ इस प्रगति में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है. बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से अनायास निकला था कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा. मुझे बहुत खुशी है कि डबल इंजन सरकार की नीतियों और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से यह युवा राज्य विकास के नए आयाम जोड़ रहा है. यह प्रोजेक्ट भी प्रदेश की प्रगति को नई गति देगा। पूरे क्षेत्र का हो जाएगा कायाकल्प: पीएम मोदी उन्होंने कहा, 'यह इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रगति के नए द्वार हैं, गेटवे हैं, डोर हैं. इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है. यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सड़क के अलावा नए-नए व्यापार और कारोबार का मार्ग बनाते हैं, गोदामों और फैक्ट्रियों के लिए आधार तैयार करते हैं. दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है।  पीएम मोदी की स्पीच 5 पॉइंट्स में     महिला आरक्षण पर: 4 दशक बाद संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ। 33% आरक्षण लागू करने वाले इस कानून को बनाने के लिए सभी दलों ने समर्थन दिया। अब इसे लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए। 2029 से ही यह लागू हो जाना चाहिए। यह देश की भावना है हर बहन बेटी की इच्छा है।मातृशक्ति की इसी इच्छा को नमन करते हुए 16 अप्रैल से संसद में चर्चा होनी है। इसे सभी दल सर्व सम्मति से आगे बढ़ाएं। इसलिए मैंने आज देश की नारी शक्ति के नाम आज सभी बहनों के लिए एक पत्र लिखा है। हम अपने देश की बेटियों को 2029 के चुनावों में उनका हक देकर रहेंगे।     देश की ताकत बन रही बेटियां: पीएम ने कहा कि देश की बेटियां भारत निर्माण में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। सरकार उनकी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर मुश्किल समय में महिलाओं को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए प्रयास जारी हैं।     टूरिज्म बना कमाई का सबसे बड़ा जरिया: पीएम ने कहा कि टूरिज्म बढ़ने से हर वर्ग को कमाई का मौका मिलता है। होटल, टैक्सी, दुकानदार सभी को लाभ होता है। उत्तराखंड अब विंटर टूरिज्म और स्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन रहा है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।     नए कॉरिडोर खोलेंगे तरक्की के रास्ते: पीएम ने कहा कि एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर विकास के गेटवे हैं। इससे समय और खर्च दोनों कम होंगे। रोजगार बढ़ेगा और किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंचेगी, जिससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।     देवभूमि को गंदगी से बचाना जरूरी: पीएम ने देवभूमि को साफ रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक और कचरे से बचना जरूरी है। कुंभ और नंदा देवी राजजात यात्रा को देखते हुए सभी को मिलकर इन जगहों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना होगा।     आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ी तैयारी: पीएम ने कहा कि सड़क, रेल और एयरवे देश की भाग्य रेखाएं हैं। यह सिर्फ आज की सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए निवेश है। सरकार लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है ताकि देश की प्रगति जारी रहे।

ट्रंप की धमकी: होर्मुज में तूफान का खतरा, ईरान पर नहीं पड़ी असर, रूस ने युद्ध में लिया कदम

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई, जबकि पहले युद्धविराम की घोषणा की गई थी. इस असफल बातचीत के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. वार्ता फेल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी लागू कर दी. ट्रंप ने साफ कहा कि हम किसी देश को दुनिया को ब्लैकमेल या डराने नहीं देंगे.उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान की कोई तेज हमला करने वाली नौकाएं अमेरिकी सेना के करीब आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।  हिज्बुल्ला का ऐलान हालांकि ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत विफल होने के बाद ईरान के प्रतिनिधियों ने फिर से संपर्क किया है और अब तेहरान शांति समझौते के लिए बातचीत में लौटना चाहता है. इस बीच क्षेत्र में एक और तनावपूर्ण बयान सामने आया है. लेबनान के संगठन हिज्बुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने लेबनान सरकार से अपील की है कि वह अमेरिका में इजरायल के साथ होने वाली प्रस्तावित वार्ता को रद्द कर दे. हिज्बुल्ला ने कहा कि इजरायल जैसे दुश्मन देश के साथ किसी भी तरह की बातचीत को पूरी तरह खारिज करते हैं. उन्होंने इसे रद्द करने के लिए सरकार से ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लेने की मांग की. गौरतलब है कि हिजबुल्लाह ईरान समर्थित संगठन है और 2 मार्च से इजरायल के साथ संघर्ष में शामिल है।  रूस बनना चाहता है मध्यस्थ ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध में अब रूस शांतिदूत की भूमिका निभाना चाहता है. पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संबंध में ऑफर दिया था और अब विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की. रूस की ओर से कहा गया कि सशस्त्र संघर्ष दोबारा न हो, यह बहुत जरूरी है. साथ ही रूस ने एक बार फिर साफ किया कि वह इस संकट को सुलझाने में हर संभव मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है।  अमेरिका बोला- फैसला ईरान को लेना है अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा कि ईरान को परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने के लिए खुद कदम उठाने होंगे. उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान में 21 घंटे चली बातचीत के बाद अमेरिका अब वहां से वापस आ रहा है और ईरान की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही. वेंस के मुताबिक आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान कितनी गंभीरता से बातचीत में शामिल होता है. उन्होंने कहा कि अब प्रगति की जिम्मेदारी ईरान पर है और उसे यह दिखाना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाने के लिए तैयार है।  पाकिस्तान का दावा- ईरान चाहता है इस्लामाबाद में हो वार्ता इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद मध्यस्थता की कोशिश करने वाले देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच मैसेज का आदान-प्रदान जारी रखा है. उनका लक्ष्य है कि दोनों देश कम से कम 45 दिन के लिए सीजफायर बढ़ाने पर राजी हो जाएं. दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने पर तो सहमत हैं, लेकिन अगली मीटिंग के एजेंडा, उद्देश्य, फॉर्मेट और जगह को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं. ईरान चाहता है कि अगली बातचीत इस्लामाबाद में हो क्योंकि वहां उसे सुविधा और पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा है. वहीं अमेरिका दूसरी जगहों पर विचार कर रहा है, जहां उसे सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स बेहतर लगते हैं. हालांकि अगर बड़े मुद्दों पर सहमति बनती है, तो बातचीत की जगह कोई बड़ी रुकावट नहीं बनेगी।   2 दिन बाद फिर शुरू होगी ईरान-अमेरिका वार्ता ईरान-अमेरिका युद्ध: एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच एक नई दौर की बातचीत जल्द ही गुरुवार तक हो सकती है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में इस्लामाबाद में हुई उच्चस्तरीय वार्ता भले ही किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची, लेकिन बातचीत के दरवाजे खुले रहे. इसका मतलब है कि दोनों देश अब भी कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. आने वाली बातचीत में पिछले मुद्दों पर फिर चर्चा हो सकती है और समझौते की संभावना बनी हुई है।   होर्मुज नाकेबंदी हटाना चाहता है सऊदी, ट्रंप से की बात अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक सऊदी अरब, अमेरिका पर दबाव डाल रहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी तुरंत हटा ले और दोबारा बातचीत की मेज पर लौट आए. सऊदी और अन्य खाड़ी देशों को डर है कि अगर अमेरिका ने घेराबंदी जारी रखी तो ईरान बदला लेने के लिए उनके वैकल्पिक रास्ते भी बंद कर सकता है. ऐसी स्थिति उनकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगी. होर्मुज के हाहाकार के बाद भी उनका तेल अब तक दूसरे रास्तों से निकल रहा था लेकिन ट्रंप के इस कदम से वो भी खतरे में आ जाएंगे।  होर्मुज पर चीन ने अमेरिका को हड़काया – हमारे मामले से दूर रहो  होर्मुज ब्लॉकेड पर अब चीन भी भड़क उठा है. चीन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी लगाने के ट्रंप के फैसले को लेकर अमेरिका को चेताया है. चीन ने अमेरिका को आगाह किया कि वह ईरान के साथ चीन के संबंधों में दखल न दे. होर्मुज ब्लॉकेड पर चीन की अमेरिका को सीधी-सीधी पहली प्रतिक्रिया है. चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा कि बीजिंग तेहरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा संबंधी वादों को पूरा करेगा. उन्होंने कहा कि चीनी जहाज इस इलाके में अपना काम जारी रखेंगे और बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं करेंगे।  लेबनान-इजरायल के बीच वार्ता की शुरुआत इजरायल-लेबनान वार्ता: अमेरिका में आज इजराइल और लेबनान के बीच बातचीत की शुरुआत होगी. अमेरिकी राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोआवद की आज शांति के लिए बातचीत होगी. पिछले हफ्ते पहली बार दोनों देशों के राजदूतों के बीच फोन पर दशकों बाद बातचीत हुई थी. 1983 में अंतिम बार दोनों देशों के बीच आखिरी और सीधी बातचीत हुई थी, हालांकि अप्रत्यक्ष समझौते और अप्रत्यक्ष वार्ता होती रही है. आज अमेरिका की मध्यस्थता में यह बातचीत होनी है. ये बात दिलचस्प है क्योंकि इजरायल-लेबनान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध तक नहीं हैं।  होर्मुज की नाकेबंदी कर रहा अमेरिका, ईरान को दी धमकी … Read more

3.40% पर पहुंची महंगाई: जेब पर असर, लोन की EMI बढ़ने के संकेत

नई दिल्ली. भारत में महंगाई एक बार फिर हल्की बढ़त के साथ चर्चा में है, क्योंकि मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.21% से बढ़कर 3.40% पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों और ऊर्जा कीमतों में उछाल की वजह से हुई है, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का बड़ा असर माना जा रहा है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) के 4% के लक्ष्य से नीचे है, लेकिन बढ़ती कीमतों का दबाव धीरे-धीरे साफ दिखने लगा है। खासकर फूड इंफ्लेशन 3.87% तक पहुंच गया है, जो आम लोगों के बजट पर सीधा असर डाल सकता है। सब्जियां, तेल और रोजमर्रा के खर्च महंगे हो रहे हैं। ऊर्जा की बात करें तो कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्ट, गैस और यहां तक कि रेस्टोरेंट के खर्च तक को प्रभावित किया है, जिससे महंगाई का असर और बढ़ गया है। यही वजह है कि RBI (Reserve Bank of India) ने हाल ही में ब्याज दरों को 5.25% पर स्थिर रखा है, ताकि हालात पर नजर रखते हुए जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लिया जाए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो अप्रैल में महंगाई 4% के आसपास या उससे ऊपर भी जा सकती है। भले ही अभी स्थिति नियंत्रण में दिख रही हो, लेकिन ग्लोबल तनाव और तेल कीमतों के कारण आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। इसका असर आम आदमी की जेब से लेकर देश की आर्थिक ग्रोथ तक पर पड़ सकता है, इसलिए आने वाला समय काफी अहम रहने वाला है। भारत में बढ़ती महंगाई का सीधा असर आम लोगों की डेली की जिंदगी पर पड़ता है। जब खुदरा महंगाई बढ़कर 3.40% होती है, तो सबसे पहले खाने-पीने की चीजें (सब्जी, तेल, दूध और राशन) महंगी हो जाती हैं। इससे मिडिल क्लास और लोअर इनकम परिवारों का मासिक बजट बिगड़ता है और बचत कम हो जाती है। दूसरा बड़ा असर ईंधन और ट्रांसपोर्ट पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर महंगे हो सकते हैं, जिससे यात्रा खर्च और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें और बढ़ जाती हैं। इसका असर स्कूल फीस, किराया, और यहां तक कि बाहर खाने-पीने तक पर दिखाई देता है। तीसरा असर लोगों की खरीदारी क्षमता (Purchasing Power) पर पड़ता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो सैलरी उतनी तेजी से नहीं बढ़ती, जिससे लोग गैर-जरूरी खर्च कम करने लगते हैं। जैसे नई कार, मोबाइल या लग्जरी चीजें खरीदने से बचते हैं। इसके अलावा अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही तो RBI (Reserve Bank of India) ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिससे लोन (होम लोन, कार लोन) महंगे हो जाएंगे और EMI का बोझ बढ़ेगा। महंगाई का असर हर व्यक्ति की जेब पर पड़ता है।