samacharsecretary.com

अबू धाबी में विदेश मंत्री की कूटनीतिक सक्रियता, भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर फोकस

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट संकट (Midlle East Crisis) के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे पर हैं. जहां अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की. इस मुलाकात को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बेहद ही सार्थक और उपयोगी बताया. साथ ही विदेश मंत्री ने बताया कि बातचीत के दौरान क्षेत्रीय हालात में हो रहे बदलावों और उसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा हुई. विदेश मंत्री ने यूएई सरकार का जताया आभार एस जयशंकर ने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित किए जाने के लिए यूएई सरकार के प्रति गहरा आभार जताया. उन्होंने विश्वास जताया कि भारत‑यूएई के बीच समग्र रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होती जाएगी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अपनी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत से की. ऊर्जा संबंधों को किया जा रहा और मजबूत विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को कहा कि जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का खाड़ी देशों का दौरा, पश्चिम एशिया में बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है. पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान बोलते हुए, MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ये दौरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर किए जा रहे हैं, ताकि भारत की ऊर्जा साझेदारियों को बढ़ावा दिया जा सके और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. मारीशस के बाद यूएई में जयशंकर एस जयशंंकर दो-दिवसीय दौरे पर यूएई पहुंचे है. विदेश मंत्री मॉरीशस की अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद शनिवार को संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे. मॉरीशस में उन्होंने नौवें हिंद महासागर सम्मेलन में भाग लिया था. जयशंकर ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था कि मैंने संयुक्त अरब अमीरात की अपनी यात्रा की शुरुआत भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत से की. मैंने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच उनकी भलाई और सुरक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में बात की. इस कठिन समय में स्थानीय समाज के प्रति उनके योगदान की सराहना की जाती है.  

ईरान का तीखा रुख: अमेरिका को सुनाई खरी-खरी, वार्ता में क्यों आई रुकावट

तेहरान.  अमेरिका और ईरान की बातचीत विफल हो चुकी है। इसके बाद तमाम बयान आ रहे हैं। इसी कड़ी में ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ का भी बयान आया है। ईरानी डेलीगेशन का हिस्सा रहे, गालिबाफ ने स्पष्ट कहाकि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उन्होंने रविवार को इस बारे में बयान जारी करते हुए कहाकि ईरानी डेलीगेशन में शामिल मेरे साथियों ने बेहद सकारात्मक पहल की। गालिबाफ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि लेकिन दूसरी तरफ से बातचीत में विश्वास ही नहीं दिखाया गया। वहीं, ईरान के पूर्व वित्तमंत्री जरीफ ने वार्ता खत्म होने का दोष अमेरिका पर डाला है। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहाकि अमेरिका ने अपनी शर्तें थोपने की कोशिश की। इसी वजह से यह वार्ता विफल रही। जरीफ ने 2015 की परमाणु वार्ता में अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। जरीफ ने कहाकि कोई भी वार्ता, कम से कम ईरान के साथ, केवल आपकी शर्तों के आधार पर सफल नहीं होगी। उन्होंने आगे कहाकि अमेरिका को यह सीखना होगा कि आप ईरान पर शर्तें थोप नहीं सकते। सीखने में अभी भी बहुत देर नहीं हुई है। कूटनीति कभी खत्म नहीं होती इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहाकि कूटनीति कभी खत्म नहीं होती। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का एक जरिया है। उन्होंने कहाकि किसी भी हालात में, कूटनीतिक तंत्र को ईरानी राष्ट्र के अधिकारों और हितों को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहाकि कूटनीति उन लोगों के साथ खड़ी है जो अपनी मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं और हर तरह के बलिदान के लिए तैयार हैं। बाकाई ने कहाकि ये बातचीत ईरान पर थोपे गए 40-दिनों के युद्ध के बाद अविश्वास और शक के माहौल में हुई थी। उन्होंने कहाकि इसलिए, यह उम्मीद नहीं थी कि बातचीत किसी आम सहमति तक पहुंचेगी। दोनों पक्ष लौटे अपने घर अमेरिकी पक्ष ने वार्ता असफल रहने का कारण बताते हुए कहाकि उसने ईरान के सामने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव रखा। अमेरिका का प्रतिनिधित्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर कर रहे थे। ईरान के प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ एवं विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कुल 71 लोग शामिल थे। वार्ता समाप्त होने के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने देश लौट चुके हैं। 21 घंटे तक चली बात वेंस ने वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहाकि हम पिछले 21 घंटे से बात कर रहे हैं। हमने कई अहम मुद्दों पर बात की। बुरी खबर यह है कि हमारे बीच समझौता नहीं हो सका। मुझे लगता है कि यह हमसे ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे कहा था कि आपको यहां नेक नीयत से आना होगा और किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना होगा। हमने वैसा ही किया, लेकिन दुर्भाग्य से, हम कोई भी प्रगति नहीं कर पाए। उन्होंने कहाकि 21 घंटे चली बातचीत के बाद भी ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता नहीं जताई। अब होर्मुज पर भी सवाल ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्रीय योजना पेश की थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण शामिल था। दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की बातचीत के बावजूद समझौता न हो पाने से दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम की प्रभावशीलता और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज को फिर से खोलने की संभावना पर सवाल खड़े हो गए हैं।

तनाव के बीच ईरान की खुली चेतावनी, विशेषज्ञों ने दिए बड़े संकेत

वॉशिंगटन. सीजफायर बातचीत में आई रुकावट को देखते हुए, विदेश मामलों के जानकार वाएल अव्वाद ने कहा कि ईरान ने अमेरिका को यह संदेश दिया है कि किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की गरिमा और संप्रभुता का सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का 'या तो इसे मानो या छोड़ दो' वाला रवैया अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काम नहीं करता, और हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए, ईरान अब मजबूत स्थिति से बातचीत कर रहा है। रविवार को न्यूज एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ये वही गारंटियां हैं जो ईरान अमेरिका से किसी भी तरह की डील करने से पहले चाहता था, क्योंकि उनका अमेरिकियों पर से भरोसा उठ गया है। अमेरिकियों ने उन पर दो बार हमला किया, जबकि उन दिनों बातचीत चल रही थी और बातचीत में कुछ प्रगति भी हुई थी।" अव्वाद ने आगे कहा कि आजकल अमेरिकी रवैया 'या तो इसे मान लो या छोड़ दो' वाला है, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काम नहीं करता, खासकर तब जब ईरान जैसा कोई देश यह महसूस करता हो कि उसने यह दौर जीत लिया है और वह कमजोरी के बजाय मजबूती की स्थिति से बात कर रहा है। उन्होंने जिक्र किया कि जहां एक तरफ ट्रंप दुनिया को यह बताते रहते हैं कि अमेरिका जीत रहा है, बातचीत के नतीजों से बेपरवाह, वहीं दूसरी तरफ ईरान उन्हें साफ संदेश दे रहा है कि उसकी गरिमा और संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि ईरान उन्हें साफ संदेश दे रहा है कि अगर आप किसी समझौते पर पहुंचना चाहते हैं, तो आपको ईरान की गरिमा और संप्रभुता का सम्मान करना होगा, और आपको इजरायल के साथ मिलकर उन पर हमले करना बंद करना होगा।" उन्होंने यह भी बताया कि वॉशिंगटन और ईरान के बीच तालमेल कम है, क्योंकि तीन अहम मुद्दे अभी भी बातचीत के लिए बाकी हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह अमेरिका के लिए है, क्योंकि उसने यह नहीं कहा कि यह एक नाकामी है। यही सबसे अहम बात है। उसने कहा कि कोई समझौता नहीं हो पाया, क्योंकि अमेरिका ने ईरानियों के मानने के लिए अपनी शर्तें रखीं, जबकि ईरानियों ने भी अपनी तरफ से अपनी शर्तें रखीं, और उन्होंने अमेरिकियों को अपनी 10 मांगों पर गौर करने का मौका भी दिया। इसलिए मुझे लगता है कि दोनों पक्षों के बीच तालमेल कम था, हालांकि ईरानियों का कहना है कि अभी भी तीन बड़े मुद्दे बाकी हैं, और मेरा मानना ​​है कि ये मुद्दे हैं, परमाणु मुद्दा, होर्मुज और ईरान पर हमला न करने का फैसला।

हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली ध्रुवास्त्र मिसाइल से भारतीय सेना को मिलेगा नया दम

नई दिल्ली डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित ध्रुवास्त्र मिसाइल भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली नाग एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) का आधुनिक संस्करण है, जिसे पहले हेलिना (HELINA) के नाम से जाना जाता था। यह मिसाइल न केवल भारत की आत्मनिर्भर भारत मुहिम को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि युद्ध के मैदान में खासकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भारतीय वायुसेना और थल सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। रुवास्त्र की क्या-क्या खूबियां? ध्रुवास्त्र भारत के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का हिस्सा है। इसकी परिकल्पना 1980 के दशक में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में की गई थी। नाग मिसाइल परिवार के तहत अब तक जमीन से दागी जाने वाली नाग, कैरियर (NAMICA) और मैन-पोर्टेबल (MPATGM) जैसे कई संस्करण तैयार किए जा चुके हैं। ध्रुवास्त्र इसी कड़ी का हवाई संस्करण है। ध्रुवास्त्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी थर्ड-जनरेशन फायर एंड फॉरगेट प्रणाली है। एक बार लक्ष्य पर लॉक होने के बाद, मिसाइल ऑटोमैटिक रूप से उसे ट्रैक कर नष्ट कर देती है। यह मिसाइल खराब मौसम और रात के अंधेरे में भी दुश्मन के टैंकों की गर्मी को पहचान कर उन्हें सटीक निशाना बना सकती है। आधुनिक टैंकों का ऊपरी हिस्सा सबसे कमजोर होता है। ध्रुवास्त्र पहले ऊंचाई पर जाती है और फिर सीधे ऊपर से हमला करती है, जिससे भारी से भारी बख्तरबंद वाहन भी नष्ट हो जाते हैं। इसकी मारक दूरी 7 किलोमीटर तक है। 43 किलोग्राम वजनी यह मिसाइल 800 मिलीमीटर मोटी स्टील प्लेट को भेदने की क्षमता रखती है। स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की ताकत ध्रुवास्त्र को विशेष रूप से लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित रुद्र और प्रचंड जैसे अटैक हेलीकॉप्टरों से दागा जा सकता है। हाल ही में सरकार ने 156 प्रचंड हेलीकॉप्टरों के ऑर्डर दिए हैं। इन हेलीकॉप्टरों पर ध्रुवास्त्र की तैनाती से भारतीय सेना को सीमा पर दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के खिलाफ एक निर्णायक बढ़त मिलेगी। सरकार ने सितंबर 2023 में लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से 200 से अधिक ध्रुवास्त्र मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दी थी। एक मिसाइल की लागत 1 करोड़ रुपये से भी कम रहने का अनुमान है। इसकी तैनाती के बाद भारत को रूस या यूरोप से कोंकुर्स और मिलान जैसी पुरानी मिसाइलें आयात करने की जरूरत कम हो जाएगी। ध्रुवास्त्र की सफलता के बाद DRDO अब SANT पर काम कर रहा है। इसकी रेंज और भी अधिक होगी और इसमें मिलीमीटर-वेव रडार जैसे और भी आधुनिक सेंसर लगे होंगे।

एक अरब डॉलर दो, वरना… युगांडा सेना प्रमुख की चेतावनी से तुर्की में हलचल

कंपाला. युगांडा के रक्षा बलों के प्रमुख जनरल मुहूजी कैनेरुगाबा ने तुर्की को एक विवादास्पद अल्टीमेटम जारी किया है। राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी के पुत्र जनरल कैनेरुगाबा ने तुर्की से 1 अरब डॉलर का 'सुरक्षा लाभांश' और उस देश की 'सबसे खूबसूरत महिला' से शादी की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर 30 दिनों के अंदर इन शर्तों को पूरा नहीं किया गया तो युगांडा तुर्की के साथ सभी राजनयिक संबंध समाप्त कर देगा। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अब हटा दिए गए पोस्ट्स में जनरल कैनेरुगाबा ने तुर्की पर सोमालिया में बुनियादी ढांचा और बंदरगाह संबंधी सौदों से फायदा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युगांडा के सैनिकों ने अल-शबाब आतंकवादियों के खिलाफ लड़ते हुए लगभग दो दशक बिताए हैं, जबकि तुर्की बाद में आकर आर्थिक लाभ उठा रहा है। जनरल ने मांग की कि सैन्य हस्तक्षेप के मुआवजे के रूप में युगांडा को तुर्की से 1 अरब डॉलर मिलना चाहिए। खूबसूरत महिला को बनाना चाहता हूं पत्नी एक पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि तुर्की से 1 अरब डॉलर के अलावा, मैं उस देश की सबसे खूबसूरत महिला को अपनी पत्नी बनाना चाहता हूं। जनरल कैनेरुगाबा ने कहा कि मैं तुर्की के साथ संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन हमारे सामने उनका कोई अस्तित्व नहीं बचेगा। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगे पूरी न हुईं तो कंपाला में तुर्की दूतावास बंद करने और संबंध सीमित करने जैसी राजनयिक कार्रवाई की जाएगी। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि असली समस्या तुर्की है! हमने उनके सुधार की प्रतीक्षा की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अगर वे हमारी समस्याओं का समाधान नहीं करते, तो अगले 30 दिनों में हम तुर्की के साथ सभी राजनयिक संबंध समाप्त कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तुर्की के लिए यह 'बहुत सरल सौदा' है, या तो भुगतान करें या दूतावास बंद कर दिया जाएगा। जनरल ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन का जिक्र करते हुए कहा कि वे इस्तांबुल में उनसे मिलने की उम्मीद रखते हैं और एक साल में वहां 'नायक की तरह' स्वागत होगा। उन्होंने लिखा कि मैं अपने अंकल राष्ट्रपति एर्दोगन का अभिवादन करूंगा। विवादास्पद पोस्ट के लिए चर्चा में रहे हैं बता दें कि जनरल मुहूजी कैनेरुगाबा पहले भी विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए चर्चा में रहे हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने युगांडा द्वारा केन्या पर आक्रमण कर दो सप्ताह में नैरोबी पर कब्जा करने का सुझाव दिया था, जिसके बाद उनकी सरकार को सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी और उन्हें अस्थायी रूप से पद से हटाया गया था। इसके अलावा, उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को पशुधन के बदले शादी का प्रस्ताव देने जैसी असामान्य टिप्पणियां भी की हैं।  

एक जैसा अंत: Lata Mangeshkar की तरह ही उसी उम्र, दिन और अस्पताल में Asha Bhosle का निधन

नई दिल्ली. भारतीय संगीत के आकाश से आज एक ऐसी धवल और सुरीली किरण ओझल हो गई, जिसकी चमक ने सात दशकों तक सात सुरों को रोशन किया था। स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले (Asha Bhosle) अब हमारे बीच नहीं रहीं। 12 अप्रैल 2026 की उस मनहूस दोपहर ने संगीत प्रेमियों के कानों में एक ऐसा सन्नाटा भर दिया है, जिसे भरने के लिए अब कोई दूसरी आवाज नहीं होगी। 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। आशा ताई का जाना केवल एक गायिका का जाना नहीं है, बल्कि उस चंचल, बहुमुखी और जादुई आवाज के अध्याय का अंत है, जिसने शास्त्रीय संगीत से लेकर क्लब डांस नंबर्स तक को अपनी रूह से सींचा था। दिन रविवार, उम्र 92 साल और ब्रीच कैंडी अस्पताल कुदरत के खेल भी बड़े निराले और अक्सर हैरान कर देने वाले होते हैं। आशा भोसले के निधन की खबर के साथ ही एक ऐसा गजब का संयोग उभरकर सामने आया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। इसे नियति का संकेत कहें या दो बहनों के बीच का अटूट आत्मिक बंधन आशा ताई और उनकी बड़ी बहन भारत रत्न लता मंगेशकर के प्रस्थान में एक अद्भुत समानता दिखी है। गजब का संयोग अस्पताल: दोनों बहनों ने मुंबई के 'ब्रीच कैंडी अस्पताल' में ही अपनी अंतिम सांसें लीं। आयु: लता दीदी का निधन भी 92 वर्ष की आयु में हुआ था और आशा ताई ने भी इसी पड़ाव पर दुनिया को अलविदा कहा। दिन: दोनों ही महान हस्तियों के निधन का दिन 'रविवार' रहा। ऐसा लगता है मानो सुरों की ये दो देवियां, जिन्होंने मंगेशकर परिवार का नाम दुनिया के कोने-कोने में गुंजायमान किया, उन्होंने स्वर्ग की यात्रा के लिए भी एक ही मार्ग और एक ही मुहूर्त चुना। वह आवाज जो कभी बूढ़ी नहीं हुई आशा भोसले की सबसे बड़ी खूबी उनकी आवाज़ की अमर जवानी थी। जहाँ लता मंगेशकर की आवाज़ में गंगा की पवित्रता और ठहराव था, वहीं आशा ताई की आवाज़ में किसी पहाड़ी झरने सी चंचलता और समंदर सी गहराई थी। उन्होंने महलों की बंदिशों को भी गाया और गलियों की शोखी को भी। 'दम मारो दम' की मादकता हो या 'इन आंखों की मस्ती' का ठहराव, उन्होंने हर सुर को अपना बना लिया। संगीत जगत के जानकारों का कहना है कि आशा ताई ने संघर्ष को अपना आभूषण बनाया। अपनी बड़ी बहन की विशाल छाया के बावजूद उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने सिखाया कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, वह अपना रास्ता खुद बना लेती है। संगीत के एक युग का सूर्यास्त आशा ताई के जाने से भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की अंतिम कड़ी टूट गई है। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाकर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज कराया। उनके निधन से न केवल बॉलीवुड बल्कि विश्व संगीत जगत शोक में डूबा है। आज ब्रीच कैंडी अस्पताल के बाहर जो भीड़ जुटी है, वह केवल प्रशंसकों की नहीं है, बल्कि उन लोगों की है जिन्होंने आशा ताई के गीतों में अपनी मोहब्बत तलाशी, अपनी तन्हाइयां साझा कीं और अपनी खुशियां मनाईं। ब्रीच कैंडी अस्पताल के उसी गलियारे ने आज फिर एक इतिहास को विदा किया है। 92 साल का वह सुरीला सफर, जो रविवार के सूरज के साथ ओझल हो गया, अब सिर्फ हमारी स्मृतियों और ग्रामोफोन के रिकॉर्ड्स में ज़िंदा रहेगा। आशा ताई, आपकी आवाज़ की खनक और वह चंचल मुस्कान हमेशा यह याद दिलाती रहेगी कि- 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नज़र नहीं चुराना…' क्योंकि आपकी यादों से नजरें चुराना अब मुमकिन नहीं।

पश्चिम एशिया तनाव के बीच अमेरिका का बड़ा कदम, समुद्री सुरक्षा बढ़ाई गई

 नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सेना ने इस अहम समुद्री रास्ते में बिछी संभावित बारूदी सुरंगों को हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्नत युद्धपोत, ड्रोन और हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के तहत दो गाइडेड मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत इस ऑपरेशन में शामिल हैं। इनका मुख्य काम समुद्र में छिपी बारूदी सुरंगों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना है, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह अभियान खास तौर पर उन सुरंगों को हटाने के लिए है जिन्हें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जोड़ा जा रहा है। ये सुरंगें बड़े जहाजों और तेल टैंकरों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ड्रोन से होगी समुद्र की जांच अमेरिका इस काम के लिए सीधे जहाजों को खतरे में नहीं डाल रहा है। इसके बजाय पानी के अंदर चलने वाले रोबोटिक ड्रोन यानी यूयूवी (अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल) का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये ड्रोन टॉरपीडो के आकार के होते हैं और अपने आप समुद्र में घूमकर हाईटेक सोनार तकनीक से समुद्र की सतह का नक्शा बनाते हैं। इससे छिपी हुई बारूदी सुरंगों का पता लगाया जाता है। हेलिकॉप्टर भी निभा रहे अहम भूमिका इसके अलावा अमेरिका ने एमएच-60एस जैसे हेलिकॉप्टर भी तैनात किए हैं। ये हेलिकॉप्टर खास लेजर सिस्टम (एएलएमडीएस) की मदद से समुद्र की सतह या उसके ठीक नीचे मौजूद सुरंगों को पहचान सकते हैं। जब किसी सुरंग का पता चलता है, तो उसे नष्ट करने के लिए एक और रिमोट कंट्रोल सिस्टम (एएमएनएस) का इस्तेमाल किया जाता है। यह छोटा रोबोट सुरंग के पास जाकर उसे विस्फोट से खत्म कर देता है। सुरक्षा के साथ-साथ रक्षा भी ये युद्धपोत सिर्फ सुरंग हटाने में मदद नहीं कर रहे, बल्कि सुरक्षा भी दे रहे हैं। इनमें आधुनिक एजिस कॉम्बैट सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलें लगी हैं, जो हवाई या समुद्री हमलों को रोक सकती हैं। अमेरिकी एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि नया सुरक्षित समुद्री रास्ता तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही जहाजों के लिए खोला जाएगा ताकि व्यापार सामान्य हो सके। क्यों अहम है यह ऑपरेशन? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बेहद अहम तेल मार्ग है, जहां से करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है। हाल के संघर्ष के चलते यहां करीब 800 जहाज फंसे हुए हैं। ईरान द्वारा रास्ता बाधित किए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में इस रास्ते को सुरक्षित बनाना पूरी दुनिया के लिए जरूरी हो गया है।  

संगीत जगत में शोक की लहर, आशा भोसले को नेताओं और हस्तियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली: बॉलीवुड की दिग्गज सिंगर और आवाज की जादूगर आशा भोसले अब इस दुनिया में नहीं रहीं. 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. आशा ताई के निधन पर आज देश की नामी हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि दे रही हैं. राजनीति के दिग्गजों ने भी  आशा भोसले को याद किया. पीएम मोदी,अमित शाह से लेकर कई राजनेताओं ने आशा भोसले के निधन पर अपने-अपने तरीके से याद किया. एक स्वर्णिम युग का अंत-पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने आशा भोसले के निधन पर लिखा कि  यह जानकर बेहद दुख हुआ. आशा भोसले जी का जाना भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत है. उनकी आवाज ने न केवल दशकों तक करोड़ों लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि वह भारतीय संस्कृति की एक ऐसी पहचान थीं, जिसकी जगह शायद कभी नहीं भरी जा सकेगी.उनकी आवाज की बहुमुखी प्रतिभा (versatility) ऐसी थी कि उन्होंने हर भाव और हर पीढ़ी के लिए यादगार गीत दिए,उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक प्रेरणा बनी रहेगी.उनके परिवार और दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों के प्रति मेरी भी गहरी संवेदनाएं. उनके गीतों की गूंज हमेशा हमारे दिलों में बनी रहेगी.     उपराष्ट्रपति ने ऐसे किया याद महान गायिका आशा भोसले जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ. उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना. आशा जी की बहुमुखी आवाज ने उन्हें सहजता से विभिन्न शैलियों में बदलाव करने, भावपूर्ण गजलों और पारंपरिक भजनों में महारत हासिल करने की अनुमति दी, जिससे भारतीय संगीत पर एक अमिट छाप छोड़ी गई. उनकी सदाबहार आवाज और संगीतमय विरासत लाखों लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.      मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुःखद दिन- अमित शाह आशा ताई के निधन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज हर भारतीय और विशेषकर मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुःखद दिन है, जब हम सबकी प्रिय आशा भोसले जी हमारे बीच नहीं रहीं.आशा ताई ने न सिर्फ अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने सुरों से भारतीय संगीत को भी और अधिक समृद्ध किया. हर तरह के संगीत में ढल जाने की उनकी अनोखी प्रतिभा हर व्यक्ति का दिल जीत लेती थी. अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छूने वालीं आशा जी ने हिंदी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती सहित अनेक भाषाओं के साथ-साथ लोकगीतों में भी अमिट छाप छोड़ी. आशा ताई की आवाज में जितनी कोमलता थी, उनके व्यवहार में भी उतनी ही सादगी और आत्मीयता थी. उनसे जब भी मुलाकात होती थी, संगीत और कला जैसे अनेक विषयों पर लंबी बातें होती थीं. आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर अपनी आवाज से वे सदैव हमारे दिलों में रहेंगी.ईश्वर आशा जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके परिजनों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. ॐ शांति शांति शांति…  भारत के संगीत क्षेत्र की अपरिमित क्षति- नितिन गडकरी भारतीय संगीत जगत की मशहूर और दिग्गज हस्ती गायिका पद्म विभूषण आशा भोसले जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्हें मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि.उनके साथ मेरे पारिवारिक संबंध रहें है. उनका जाना भारत के संगीत क्षेत्र की अपरिमित क्षति है. अपनी विलक्षण प्रतिभा से आशा जी ने संगीत के क्षितिज पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. नया दौर, तीसरी मंज़िल, हरे रामा हरे कृष्णा, उमराव जान के साथ साथ इजाजत और रंगीला जैसे वक़्त और पीढ़ियों के साथ बदलती कई मशहूर फिल्में और गीत आशा जी ने अपने स्वर से अजरामर किए है. प्लेबैक सिंगर के रूप में भी उन्होंने कई यादगार गाने दिए.संगीत के क्षेत्र में उनका 'स्वर' और उनका महत्वपूर्ण योगदान पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा.ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को संबल दे. ॐ शांति       दुनिया ने एक महान शख़्सियत को खो दिया-केजरीवाल दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने आशा भोसले के निधन पर कहा कि पद्म विभूषण आशा भोसले जी के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ.आज संगीत की दुनिया ने एक महान शख़्सियत को खो दिया। उनका जाना देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति है.वो अपने अनगिनत मधुर गीतों के माध्यम से हमेशा अमर रहेंगी.विनम्र श्रद्धांजलि…      उनके मधुर स्वर सदैव देशवासियों के मन में गूंजते रहेंगे- सीएम योगी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आशा भोसले के निधन पर कहा कि भारतीय संगीत जगत की स्वर-सम्राज्ञी, महान सुर-साधिका, 'पद्म विभूषण' आशा भोसले जी का निधन अत्यंत दुःखद एवं कला जगत की अपूरणीय क्षति है.उनकी अद्वितीय गायकी ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं.उनके मधुर स्वर सदैव देशवासियों के मन में गूंजते रहेंगे. प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति और शोकाकुल परिजनों एवं प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें. ॐ शांति!     आज साज खामोश हैं और सुर अधूरे से लग रहे हैं- शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अपनी खनकती आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली आदरणीय आशा भोंसले जी हमारे बीच नहीं रहीं.उनके जाने से संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया.आज साज खामोश हैं और सुर अधूरे से लग रहे हैं, सुरों की देवी आशा ताई भले ही देह रूप में विदा हो गई हों, लेकिन उनकी आवाज हमारी स्मृतियों में गूंजती रहेगी। विनम्र श्रद्धांजलि!    

इस्लामाबाद में 21 घंटे चली मैराथन बातचीत, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं

नई दिल्ली    अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई हाई लेवल वार्ता भले ही किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सकी, लेकिन इस शांति वार्ता ने एक मैसेज जरूर दिया है। इस शांति वार्ता ने अमेरिका के सियासी गलियारों की हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान से इसके संकेत मिले हैं। वेंस ने इस बात का खुलासा किया कि 21 घंटे तक चली इस मैराथन वार्ता के दौरान वे लगातार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हॉट लाइन पर संपर्क में थे। वेंस के अनुसार, वाशिंगटन से राष्ट्रपति ट्रंप केवल निर्देश ही नहीं दे रहे थे, बल्कि वे वार्ता की हर बारीक अपडेट पर नजर रख रहे थे। पत्रकारों के साथ बातचीत में जेडी वेंस ने बताया कि बातचीत के दौरान राष्ट्रपति के साथ उनका संवाद निरंतर बना रहा। उन्होंने कहा, "मैं सटीक संख्या तो नहीं बता सकता, लेकिन पिछले 21 घंटों में हमारी राष्ट्रपति से शायद आधा दर्जन या दर्जन भर बार बात हुई।" यह वार्ता केवल उपराष्ट्रपति तक सीमित नहीं थी। वेंस ने पुष्टि की कि अमेरिका की पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम इस कूटनीतिक दबाव का हिस्सा थी। उन्होंने बातचीत के दौरान निम्नलिखित शीर्ष अधिकारियों के साथ निरंतर परामर्श किया। उनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एडमिरल कूपर जैसे नाम शामिल हैं। वेंस ने जोर देकर कहा कि इतनी बड़ी टीम का एक साथ सक्रिय होना इस बात का प्रमाण है कि अमेरिका नेक नीयत के साथ बातचीत की मेज पर बैठा था। उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर दोहराया कि अमेरिका ने अपना सर्वश्रेष्ठ और अंतिम प्रस्ताव ईरान के सामने रख दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह तेहरान को तय करना है कि वह इन शर्तों को स्वीकार कर शांति का रास्ता चुनता है या नहीं। आक्रामक ट्रंप प्रशासन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस बार काफी आक्रामक और संगठित कूटनीति अपना रहा है। वार्ता में वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री की सक्रियता का मतलब है कि प्रस्ताव में आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और सुरक्षा गारंटी जैसे पेचीदा मुद्दे शामिल हैं, जिन पर राष्ट्रपति ट्रंप खुद अंतिम फैसला ले रहे हैं। क्या होगा अगला कदम? फिलहाल अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लाबाद से रवाना हो रहा है, लेकिन उन्होंने तेहरान को सोचने के लिए समय दिया है। वेंस के बयानों से स्पष्ट है कि यदि ईरान ने इस प्रस्ताव को ठुकराया तो इसका मतलब केवल वार्ता की विफलता नहीं होगी, बल्कि अमेरिका की पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के सामूहिक प्रयास को चुनौती देना होगा। अब पूरी दुनिया की नजरें तेहरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि क्या वह ट्रंप प्रशासन की इन सख्त और समन्वित शर्तों के आगे झुकेगा या क्षेत्र में तनाव का एक नया दौर शुरू होगा?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2029 चुनाव से लागू करने की तैयारी, संसद में विशेष सत्र

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सभी संसदीय दलों के नेताओं को पत्र लिखकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) के संशोधन पर पूर्ण समर्थन की अपील की है. इस पत्र में पीएम मोदी ने 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में इस ऐतिहासिक संशोधन को सर्वसम्मति से पारित करने की बात कही है. साथ ही बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम अपनी पूरी भावना के साथ देश में लागू हो. यह उचित होगा कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले सभी विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह लागू किया जाए. पीएम मोदी ने अपने पत्र में लिखा, '16 अप्रैल से देश की संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ी एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है. ये विशेष बैठक हमारे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने का अवसर है. ये सबको साथ लेकर चलने की हम सभी की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है. इसी भावना और उद्देश्य से मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं.' विकसित भारत के लिए नारी शक्ति आवश्यक प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में जोर दिया कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ता है, जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व का अवसर मिले. देश ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसकी सिद्धि के लिए आवश्यक है कि इस यात्रा में नारी शक्ति अपनी पूरी क्षमता और पूरी भागीदारी के साथ जुड़े. हम सभी साक्षी हैं कि सार्वजनिक जीवन में हमारी बहनों-बेटियों की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है. भारत की बेटियां स्पेस से लेकर स्पोर्ट्स और सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्ट-अप्स तक, हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं. अपनी बड़ी सोच और पूरे जज्बे के साथ वे कड़ी मेहनत करती हैं और खुद को साबित कर रही हैं. पीएम ने याद दिलाया कि देश की संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण की चर्चा दशकों से होती आ रही है. साल 2023 में संसद में सभी दलों के सांसदों ने एक साथ आकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था. ये हमारी एकजुटता को दिखाने वाला एक अविस्मरणीय अवसर था. नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा में संसद के सभी सदस्यों का योगदान रहा था. और जब ये चर्चा चल रही थी, तब उस समय इसे लागू करने के समय पर भी विचार हुआ था. तब सबने सहमति से ये विचार रखा था कि नए कानून के प्रावधान जल्द से जल्द लागू हो जाने चाहिए. सभी दलों के नेताओं ने मुखर होकर इस विचार का समर्थन किया था. पिछले कुछ समय में हमने इस विषय पर जानकारों से विमर्श किया. संविधान की बारीकियों को समझने वाले विशेषज्ञों से हमें सुझाव और मार्गदर्शन मिले. हमने राजनीतिक दलों से भी इस बारे में संवाद किया है. ऐतिहासिक बदलाव का लक्ष्य गहन मंथन के बाद सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही होना चाहिए. इससे जन-विश्वास गहरा होगा और प्रतिनिधित्व की आकांक्षा पूरी होगी. प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपील की है कि यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है. यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है. सांसदों का योगदान आने वाले समय में गौरव के साथ याद किया जाएगा. पीएम ने कहा कि मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूं, ताकि हम सभी एक स्वर में इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट हों. ज्यादा से ज्यादा सांसद इस विषय पर अपने विचार संसद में रखें. यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है. यह नारी शक्ति और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी भी है. हम सभी दल काफी समय से चाहते रहे हैं कि राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़े. इस आकांक्षा को वास्तविकता में बदलने का यही सही समय है. एकजुट होकर इतिहास रचने की अपील पत्र के अंत में पीएम मोदी ने अटूट विश्वास जताया कि सभी दल एकजुट होकर संसद में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करेंगे. उन्होंने इसे 140 करोड़ देशवासियों की सिद्धि का विषय बताया है. यह संशोधन देश की माताओं, बहनों और बेटियों के प्रति असीम दायित्वों का निर्वहन होगा.  प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र की महान परंपराओं को और जीवंत बनाने के लिए इस ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में कदम उठाने का आह्वान किया है. खड़गे ने उठाए सवाल वहीं, प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पीएम मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि साल 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने से अब तक 30 महीने बीत चुके हैं और अब हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष सत्र बुलाया गया है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई भी जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है. आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई भी सार्थक चर्चा करना असंभव होगा. खड़गे ने ये भी कहा कि आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की है. हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद है कि यह बात सच के विपरीत है, क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा चुनाव खत्म होने के बाद संविधान संशोधनों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. उन्होंने संशोधन के लिए बुलाए गए विशेष सत्र की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'राज्य में चल रहे चुनावों के दौरान विशेष सत्र बुलाना हमारे इस विश्वास को और मजबूत करता है कि आपकी सरकार महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए विधेयक के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है.' पिछले रिकॉर्ड का किया जिक्र पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि मुझे यह लिखते हुए दुख हो रहा है कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड, चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी हो, जनगणना हो या वित्त आयोग की सिफारिशों … Read more