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वेनेजुएला आपदा: ला गुआइरा में भारी तबाही, राहत कार्यों में लापरवाही के आरोप

कराकास  वेनेजुएला में बीते दिनों आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है। यहां मरने वालों और घायलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,430 हो गई है, जबकि 3,200 से अधिक लोग घायल हैं और करीब 50,000 लोग अभी भी लापता हैं। इस विनाशकारी भूकंप में सबसे अधिक ला गुआइरा राज्य प्रभावित हुआ है। यहां हर तरफ मलबे और सड़ते शवों की दुर्गंध फैली हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद पहले 72 घंटे जीवित लोगों को खोजने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। वह समय अब समाप्त हो चुका है। जीवित लोगों की खोज अब शवों की खोज में बदल गई है। सेल्फी लेते नजर आएं अधिकारी भूकंप के बीच सरकारी संवेदनहीनता की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां हजारों लोग मलबे के नीचे दबे हैं, लाशें सड़ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए सरकारी कर्मचारी और अधिकारी ध्वस्त इमारतों के सामने खड़े होकर 'सेल्फी' खींचते नजर आए। राहत कार्यों में सरकार द्वारा ढिलाई के बीच हद तो तब हो गई जब सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित ला गुआइरा क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया और मलबे से अपनों की जान बचाने के लिए जुटे स्थानीय स्वयंसेवकों के लिए भी 'सुरक्षित प्रवेश पास (परमिट)' लेना अनिवार्य कर दिया। जिसको लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा और कहा कि यहां अधिकारी मदद के लिए सेल्फी लेने के लिए आए थे। सड़ते शवों क दुर्गंध भीषण गर्मी में सड़ते शवों की दुर्गंध फैलने के कारण अधिकाधिक लोग मास्क पहने हुए हैं। जो लोग बच गए उनकी कहानियां एक मां को अपनी बेटी का शव कराकस के मुर्दाघर तक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। बुधवार को ला गुआइरा में उनके घर के मलबे के गिरने से उनकी बेटी और दामाद की मौत हो गई। उन्होंने एएफपी को बताया, "हमने उन्हें खुद बाहर निकाला। कोई मदद नहीं आई। शवों के तेजी से सड़ने के कारण दंपति का अंतिम संस्कार बिना किसी शोक सभा के किया जाएगा। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं? वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद जहां एक तरफ लोग अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन की सुस्ती ने इस दर्द को गुस्से में बदल दिया है। कैराबलेडा के समुद्रतटीय कस्बे में मलबे के बीच अपनों को तलाश रही माइलेडी रोमेरो ने कहा, "वहाँ कल रात से लाशों का ढेर लगा हुआ है। उन शवों में मासूम नवजात शिशु भी हैं। कल रात 8 बजे तक वहां मलबे के नीचे लोग ज़िंदा थे, चिल्ला रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बचाने की कोई जरूरत ही नहीं समझी। हमने अपने स्तर पर कई लाशें बाहर निकाली हैं, लेकिन उन्हें निकालने में भी अधिकारियों ने हमारी कोई मदद नहीं की। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं।" हालांकि, अमेरिकासहित 21 देश राहत दल खोज अभियान में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार इस आपदा से करीब 67 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

NCB की चेतावनी: म्यांमार से ड्रग तस्करी का नया रूट भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचा

नई दिल्ली  भारत का पड़ोसी देश म्यांमार अब गैर कानूनी अफीम के उत्पादन के मामले में अफगानिस्तान को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद आर्थिक संकट और गृहयुद्ध जैसी स्थिति के कारण म्यांमार में अफीम का उत्पादन पिछले 10 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। यह जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की शुक्रवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में दी गई। एनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार का शान राज्य अवैध अफीम की खेती का सबसे ब़ड़ा केंद्र बन गया है। NCB ने चेतावनी दी है कि 'म्यांमार से अफीम की तस्करी का नया रास्ता सीधे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से होकर गुजरता है, जिससे भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा होता है। यह रास्ता आतंकवाद को फंडिंग और हथियारों की तस्करी से भी जुड़ा है। खुली सीमा बनी समस्या     रिपोर्ट में कहा गया है कि खुली सीमा और 'फ्री मूवमेंट रिजीम' (आवाजाही की खुली व्यवस्था) तस्करी को आसान बनाते हैं, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर नशे की लत बढ़ती है, बल्कि विद्रोही समूहों को फंडिंग मिलती है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर सबसे बड़ा तस्करी मार्ग     NCB के मुताबिक, अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा अफीम तस्करी मार्ग बना हुआ है, लेकिन भारत को सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय तस्करी मार्गों से रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।     रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कोकीन की तस्करी वाले देशों में तस्करी से जुड़ी हिंसा में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि ड्रग मार्केट में प्रतिस्पर्धा कैसे सुरक्षा का एक बड़ा संकट पैदा कर सकती है। इसमें आगे कहा गया है कि भारत के समुद्री पड़ोस पर करीबी नज़र रखने की जरूरत है। दुनियाभर में बढ़ रही नशे का लत NCB ने पाया है कि डार्कनेट मार्केट, सिंथेटिक ड्रग्स और इंटरनेशनल पोस्टल सिस्टम के आपस में जुड़ने से दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया भर में ड्रग्स के इस्तेमाल पर रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 में दुनिया भर में लगभग 31.6 करोड़ लोगों (15 से 64 वर्ष आयु वर्ग) ने कम से कम एक बार किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया। वर्ष 2013 में यह संख्या 24.6 करोड़ थी। यानी पिछले एक दशक में वैश्विक ड्रग्स उपयोग में लगभग 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सिंथेटिक ड्रग्स सबसे बड़ा खतरा रिपोर्ट में निटाजेन्स नामक सिंथेटिक ओपिओइड को उभरता हुआ वैश्विक खतरा बताया गया है। यह ड्रग हेरोइन से लगभग 500 गुना अधिक शक्तिशाली है। इसके अलावा एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मौत और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका बढ़ गई है। एनसीबी ने कहा है कि इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। ड्रग्स से बढ़ रही हिंसा NCB ने चेतावनी दी है कि ड्रग्स तस्करी केवल नशे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इससे हिंसा और संगठित अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, इक्वाडोर में कोकीन तस्करी को लेकर गैंगवार के कारण वर्ष 2020 से 2023 के बीच हत्या की दर लगभग छह गुना बढ़ गई। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए हो रही ड्रग्स की सप्लाई NCB के अनुसार, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भारत समेत दुनिया भर में ड्रग्स की सप्लाई के लिए अहम माध्यम बनकर उभरे हैं। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई तकनीकी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।  

‘पैट्रियट पासपोर्ट’ पर ट्रंप की फोटो, अमेरिका में नई परंपरा की शुरुआत पर बहस

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब पासपोर्ट पर अपनी तस्वीर छपवाने का फैसला किया है। अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमेरिकी सरकार ने एक लिमिटेड एडिशन पासपोर्ट जारी करने का फैसला लिया है। इस पासपोर्ट के एक तरफ गंभीर मुद्रा में खड़े ट्रंप की तस्वीर होगी। दूसरी तरफ 1776 में अमेरिका की आजादी के समय साइन किए गए घोषणा पत्र और उस समय की एक प्रतीकात्मक तस्वीर होगी। ट्रंप ने पासपोर्ट की डिजाइन को अपने सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नए अमेरिकी पासपोर्ट की डिजाइन को शेयर किया। इसके कैप्शन में ट्रंप ने लिखा, "अमेरिका का नया पासपोर्ट, जिस पर लिखा है, आपका स्वागत है, लेकिन अच्छे से रहिए।" ट्रंप द्वारा शेयर किए गए इस डिजाइन में उनकी तस्वीर लगी हुई है, जिसमें वह गंभीर मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा दूसरी तरफ 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका 250' लिखा हुआ है। ट्रंप के अलावा वाइट हाउस ने भी इसी पासपोर्ट डिजाइन को साझा किया है, जिस पर पैट्रियट पासपोर्ट लिखा हुआ है। बता दें, अमेरिकी विदेश विभाग पहले यह घोषणा कर चुका है कि 6 जुलाई के बाद नए कस्टम डिजाइन वाले पासपोर्ट ऑर्डर किए जा सकेंगे। ट्रंप की तस्वीर वाले पासपोर्ट को लेकर कहा गया था कि यह पासपोर्ट केवल वाशिंगटन में व्यक्तिगत मांग के दौरान दिए जाएंगे। इसके अलावा सरकार इन्हें सीमित मात्रा में ही उपलब्ध करवाएगी। ऐसे में एक बार यह खत्म हुए, उसके बाद इनको जारी नहीं किया जाएगा। अमेरिका में अपनी नई लेगेसी बना रहे ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाइट हाउस में आने से पहले से ही अपनी लग्जरी लाइफ और हर तरीके से एक छाप छोड़ने के लिए जाने जाते हैं। पहले कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने काफी बदलाव करने की कोशिश की थी, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली थी। दूसरे कार्यकाल में आए ट्रंप ने शुरुआत से ही अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी। उन्होंने अमेरिका की सरकारी इमारतों के बाहर बड़े-बड़े बैनर लगवाए। इसके अलावा जॉन एफ. कैनेजी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स के साथ भी अपना नाम जोड़ दिया। हालांकि, बाद में कोर्ट ने इसे हटवा दिया। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि जल्दी ही एक डॉलर के नोट पर ट्रंप के हस्ताक्षर दिखाई देंगे। इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिकी की पुरानी मुनरो डॉक्टरीन को भी अपने नाम पर डॉनरो डॉक्ट्रीन करने की बात कही थी। बता दें, अगर ट्रंप की तस्वीर वाले यह पासपोर्ट जारी होते हैं। तो ट्रंप वाइट हाउस में बैठे ऐसे पहले अमेरिकी नागरिक होंगे, जिनकी तस्वीर पासपोर्ट पर होगी।

कराची मुठभेड़: ग्रेनेड और गोलीबारी से 90 मिनट तक चला ऑपरेशन, एक आतंकी जिंदा पकड़ा गया

नई दिल्ली पाकिस्तान के शहर कराची में शनिवार देर रात सुरक्षाबलों के कैंप पर हमला हुआ है। इस हमले में चार पाकिस्तानी रेंजर्स की मौत हुई है, जबकि 6 आतंकी भी मारे गए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ लिया है। शनिवार देर शाम हुए इस हमले में सबसे पहले एक धमाका हुआ इसके बाद गोलियां चलने की आवाज आने लगी। तुरंत ही पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया इसके बाद मुठभेड शुरू हो गई। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान से जुड़े एक संगठन जमात-उल-अहरार ने ली है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार देर रात कराची के मौसमियात चौरंगी इलाके में सिंध रेंजर्स के कैंप पर हमला हुआ था। इसी इलाके में कई कॉलेज और पाकिस्तानी मौसम विभाग का केंद्र भी है। हमले के तुरंत बाद रेंजर्स ने पूरे घटनास्थल को घेर लिया। फिर गोलीबारी शुरु हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह हमला करीब 8.30 बजे शुरु हुआ था। आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों के ठिकानों को निशाना बनाया और फिर गोलीबारी शुरू कर दी। करीब 90 मिनट तक चली इस गोलीबारी में 6 आतंकवागी मारे गए, जबकि एक हमलावर को जिंदा पकड़ लिया गया है ग्रेनेड से हुआ था हमला इससे पहले रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि उसे सबसे पहले गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-5 के पास हमले की जानकारी मिली थी। इसके बाद तुरंत ही सेंट्र्ल कमांड को सूचित किया गया और पाकिस्तानी सेना का आतंकरोधी दस्ता वहां पहुंच गया। पाकिस्तानी पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच के मुताबिक, हमलावर कार से आए थे। उन्होंने सीधे जाकर रेंजर्स के कैंप से अपनी कार को टकरा दिया और सीधा अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने अंदर ग्रेनेड से हमला किया। इसके बाद उनके और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो कि करीब 90 मिनट तक चली। TTP के सहयोगी ने ली हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी सेना की नाक में दम करने वाले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के सहयोगी आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। बता दें, टीटीपी मुख्य रूप से पाकिस्तान में अफगानिस्तान की तरह ही तालिबान शासन स्थापित करना चाहता है। इसके लिए वह खैबर पख्तूनख्वा से अपना अभियान चलाता है। आमतौर पर वह पाकिस्तानी सेना और उसके सैनिकों को निशाना बनाता है। पिछले कई वर्षों से यह संगठन पाकिस्तान सैन्य जनरलों, सैनिकों और पुलिस को निशाना बनाता आ रहा है। पाकिस्तानी सेना का आरोप है कि हमला करके यह लड़ाके अफगानिस्तान भाग जाते हैं। इन्हीं तालिबान लड़ाकों को खत्म करने के लिए पाकिस्तान आए दिन अफगानिस्तान में हमला करता रहता है।

पुणे हत्या मामला: कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या में ‘प्लान A, B और C’ की साजिश सामने आई

मुंबई महाराष्ट्र के मशहूर लोहगढ़ किले में कारोबारी केतन अग्रवाल की पहाड़ी से धकेलकर हत्या करने के मामले में हर दिन रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले बाकायदा गूगल पर हत्या करने के तरीके सर्च किए थे। इतना ही नहीं दोनों ने हत्या की जगह का चुनाव करने और पकड़े जाने पर पुलिस को क्या जवाब देना है, इसकी बाकायदा रिहर्सल भी की थी। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस रविवार को दोनों आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच लोहगढ़ किले लेकर पहुंची, जहां पूरे क्राइम सीन को री-क्रिएट किया गया। पुलिस को गुमराह करने के लिए बनाया था प्लान B जांच अधिकारियों के मुताबिक, सिया और चेतन ने इस खौफनाक हत्याकांड को किसी मंझे हुए अपराधियों की तरह अंजाम दिया था। वारदात से पहले दोनों अकेले लोहगढ़ किले गए थे ताकि उस सटीक जगह की पहचान कर सकें जहां से केतन को नीचे धकेला जा सके। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए उन्होंने भेष बदलने की भी योजना बनाई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सिर्फ एक ही योजना नहीं बनाई थी, बल्कि अगर मुख्य प्लान फेल हो जाता तो उनके पास 'प्लान सी' भी तैयार था। पकड़े जाने की सूरत में पुलिस के सामने क्या कहानी सुनानी है इसकी स्क्रिप्ट उन्होंने पहले ही रट ली थी। सबूत मिटाने के लिए दोनों ने मोबाइल की पूरी चैट हिस्ट्री और रीसायकल बिन को भी साफ कर दिया था, जिसे रिकवर करने के लिए फोन फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। पहली बार झाड़ियों ने बचाई जान, सांप का बहाना बनाया पुलिस फाइलों से पता चला है कि 18 जून को केतन की हत्या करने से पहले भी सिया ने उसे मारने की कोशिश की थी। बीती 14 जून को सिया केतन को लेकर इसी किले पर आई थी और उसने केतन को धक्का दे दिया था। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि केतन ने पहाड़ी के किनारे उगी एक झाड़ी को पकड़ लिया और उसकी जान बच गई। उस समय अपनी साजिश पर पर्दा डालने के लिए सिया ने तुरंत नाटक रचा। वह 'सांप-सांप' चिल्लाने लगी और केतन को गले लगा लिया, जिससे केतन को लगा कि सिया सचमुच डर गई थी और सांप से बचाने के चक्कर में उसका संतुलन बिगड़ा था। जन्मदिन के बहाने दोबारा बुलाया 14 जून को नाकाम होने के बाद सिया ने हार नहीं मानी। 18 जून को अपने जन्मदिन का बहाना बनाकर वह केतन को दोबारा ट्रेकिंग के लिए लोहगढ़ किला ले आई। इस बार उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी को भी वहां बुला लिया था। पुलिस के मुताबिक, योजना के तहत जैसे ही सिया पहाड़ी के किनारे एक तय जगह पर बैठी वैसे ही पीछे से छिपकर आ रहे चेतन चौधरी ने केतन को जोरदार धक्का दे दिया। केतन संभल पाता उससे पहले ही वह 300 फीट गहरी खाई में जा गिरा और उसकी मौत हो गई। 17 करोड़ का महल, 2 प्राइवेट प्लेन केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी और आगामी नवंबर में दोनों की बेहद भव्य शादी होने वाली थी। केतन के परिवार ने राजस्थान के जयपुर में एक आलीशान महल को 17 करोड़ रुपये में बुक किया था। यही नहीं बारात और मेहमानों को ले जाने के लिए दो प्राइवेट विमानों की व्यवस्था भी की जा चुकी थी। लेकिन सिया अपने परिवार के सामने चेतन से प्यार की बात स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। पुलिस हिरासत में उसने बेहद चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि परिवार से बगावत करने और सगाई तोड़ने से ज्यादा आसान केतन को रास्ते से हटाना था। बिलखते पिता की भावुक अपील इस बीच शनिवार रात केतन अग्रवाल के गहुंजे स्थित निवास की हाउसिंग सोसाइटी में समाज के लोगों ने एक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल बेहद भावुक हो गए। उन्होंने 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद रहे पर्यटकों से सामने आने की अपील की। विशाल अग्रवाल ने कहा, "कुछ लोग हमें सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर कह रहे हैं कि वे उस दिन किले पर मौजूद थे और उन्होंने कुछ संदिग्ध देखा था, लेकिन वे पुलिस के पास जाने से कतरा रहे हैं। मैं उन सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि कृपया आगे आएं और मेरे बेटे को न्याय दिलाने में पुलिस की मदद करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपको किसी कानूनी पचड़े या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।" फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले हर उस रास्ते और लोकेशन की वीडियोग्राफी कर रही है, जिसका इस्तेमाल इस वीभत्स हत्याकांड में किया गया था।

तिरुपति बालाजी दर्शन: अनंत अंबानी ने मुंडन कर भगवान के चरणों में अर्पित किए बाल

तिरुमाला दुनिया के सबसे अमीर और प्रतिष्ठित परिवारों में से एक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी ने आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा का परिचय देते हुए भगवान के चरणों में अपने बाल समर्पित किए (मुंडन संस्कार करवाया)। सोशल मीडिया पर अनंत अंबानी की इस सादगी और धार्मिक निष्ठा की जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे अध्यात्म की पराकाष्ठा मान रहे हैं, जहाँ दुनिया की तमाम दौलत, शोहरत और नाम पीछे छूट जाते हैं और केवल ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही मायने रखता है। आस्था से बड़ा कोई आभूषण नही अक्सर कहा जाता है कि भगवान के दरबार में अमीर हो या गरीब, हर कोई एक समान है। अनंत अंबानी के इस कदम ने इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया है। भौतिक सुख-सुविधाओं और वैश्विक स्तर पर पहचान होने के बावजूद, उन्होंने सनातन परंपराओं का पालन करते हुए तिरुपति बालाजी के चरणों में अपना शीश नवाया। एक संदेश जो दिल को छू गया: "सब कुछ पाकर भी जो भगवान को चुनता है, वही सबसे धनवान है। जहाँ नाम, दौलत और शोहरत पीछे रह जाते हैं… वहाँ सिर्फ़ आस्था साथ चलती है। दुनिया की सबसे बड़ी दौलत भी, भगवान के दरबार में सिर्फ़ श्रद्धा बन जाती है।" तिरुपति में मुंडन परंपरा का महत्व सनातन धर्म में तिरुपति बालाजी मंदिर में मुंडन कराने (बालों का दान करने) की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे अहंकार के त्याग और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अनंत अंबानी का यह रूप दिखाता है कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत है। सादगी की मिसाल: अनंत अंबानी ने तिरुपति देवस्थानम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दर्शन किए। परंपरा का सम्मान: आधुनिक जीवनशैली के बीच सनातन संस्कृति और मुंडन की परंपरा का निर्वहन किया। सोशल मीडिया पर चर्चा: नेटिजन्स अनंत अंबानी के इस धार्मिक झुकाव और अहंकार-रहित व्यक्तित्व की सराहना कर रहे हैं।

वेनेजुएला भूकंप: 1000 से अधिक इमारतें ढहीं, राहत-बचाव कार्य जारी

नई दिल्ली दक्षिण अमेरिका के वेनेजुएला में 25 जून को भूकंप के दो झटके हजारों लोगों की जिंदगियां निगल गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस भूकंप में 1430 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने आज सुबह कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब भी मलबे से लाशों पर लाशें निकल रही हैं। वहीं देश के उत्तरी तट के बाद अब भी लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी कराकास और माराके में भी 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे। भूकंप में 3360 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 250 के करीब लोगों को जिंदा निकाला गया है। खुद ही परिजनों को तलाश रहे लोग वेनेजुएला में राहत टीमों की कमी की वजह से लोगों को खुद ही मलबा हटाकर परिजनों की तलाश करनी पड़ रही है। वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि लोग ला गुआइरा राज्य की यात्रा से बचें। उन्होंने कहा कि यह समय बेहद संवेदनशील है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना है। उन्होंने कहा कि तेजी से पुलिस, सिविल प्रोटेक्शन, दमकल की टीमें भेजने के लिए रास्ते खाली रखना जरूरी है। जमींदोज हो गईं 1000 इमारतें बीबीसी रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला के उत्तरी तटीय क्षेत्र और राजधानी काराकास में भूकंप के कारण सैकड़ों इमारतें, कई अस्पताल और शॉपिंग सेंटर पूरी तरह जमींदोज हो गये हैं। इसके अलावा करीब 1,000 अन्य बुनियादी ढांचागत स्थलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा तबाही काराकास के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र में हुई है, जहां देश का मुख्य बंदरगाह और सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है। ला गुएरा में अब तक मलबे से 243 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस आपदा के बाद वेनेजुएला में अंतरराष्ट्रीय राहत और बचाव दल पहुंचना शुरू हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर वैश्विक सहायता अभियान चलाने की घोषणा की है। ब्रिटेन, अमेरिका, नीदरलैंड, मैक्सिको और स्विट्जरलैंड ने अपनी खोजी और बचाव टीमें, प्रशिक्षित श्वान दल और ड्रोन भेजे हैं। अमेरिका ने इसके साथ ही युद्धपोत, परिवहन विमान और 15 करोड़ डॉलर (लगभग 1,415 करोड़ 40 लाख रुपये) की वित्तीय सहायता देने का भी एलान किया है। आंतरिक मामलों के मंत्री डियोसडाडो काबेलो के अनुसार, भूकंप का सबसे ज्यादा असर काराकास के लॉस पालोस ग्रांडेस और अल्तामिरा इलाकों के अलावा ला गुएरा, अरागुआ, काराबोबो और फाल्कन जैसे उत्तरी तटीय राज्यों पर पड़ा है।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर रुबियो का बड़ा बयान, व्यापार समझौता अंतिम चरण में

नई दिल्ली अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना की है। साथ ही, उन्होंने भारत को तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति बताया है। व्हाइट हाउस में समाचार एजेंसी IANS को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को अपना करीबी साझेदार और सहयोगी मानता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है और अब वैश्विक स्तर पर लिए जाने वाले अहम फैसलों में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। रुबियो ने कहा, "हम प्रधानमंत्री मोदी और उनके काम के बड़े प्रशंसक हैं।" मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को पहले से कहीं अधिक मजबूत बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहद घनिष्ठ संबंध हैं, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात बेहद सकारात्मक रही। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। उनके अनुसार, यह समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इसकी घोषणा हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप कब करेंगे भारत की यात्रा अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले वर्ष की शुरुआत में भारत की यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस यात्रा की तैयारियां जारी हैं और इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका रक्षा, ऊर्जा, खनिज, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री सुरक्षा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी बड़ी भूमिका निभाना चाहता है और दोनों देशों के बीच क्वाड सहयोग भी आगे बढ़ेगा। मार्को रुबियो ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भी सराहना करते हुए कहा कि इस समुदाय ने अमेरिका के विकास में अहम योगदान दिया है और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में सेतु का काम किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत और सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका के बीच कई साझा मूल्य और हित हैं, जिनके आधार पर भविष्य में और व्यापक सहयोग संभव है। रुबियो के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब भारत-अमेरिका व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और रणनीतिक सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं।

पीएम मोदी बोले- सोना न खरीदने और कार पूलिंग अपनाने की अपील का देशभर में दिखा असर

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम के 135वें एपिसोड के जरिए देश की जनता को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते आत्मनिर्भरता के कदमों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा देश अब समुद्र से लेकर आकाश तक सुरक्षित और आत्म निर्भर है। पीएम मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देश-विदेश में हुए कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा प्रस्तावित योग दिवस के मौके पर दुनिया भर के करोड़ों लोगों ने योग किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों की दी गई सलाहों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने न सिर्फ इन सलाहों को माना, बल्कि उस पर अमल भी किया। पीएम मोदी ने कहा कि देश के कई परिवारों ने फैसला किया है कि वह शादी विवाह में सोना नहीं खरीदेंगे। अगर जरूरत पड़ी भी तो वह पुराने सोने को गलाकर नए जेवर बना लेंगे। इसके अलावा पीएम ने बताया कि कई लोगों ने अपनी विदेश यात्राएं रद्द कर दी, तो कई लोगों ने साथ मिलकर कार पूलिंग को भी अपनाने का काम किया है। इसके अलावा लोगों ने पेट्रोल और डीजल के उपयोग को भी कम करने का जबरदस्त प्रयास किया है। बता दें, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट से निपटने के लिए लोगों को सोने को न खरीदकर विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। इसके अलावा उन्होंने लोगों से सोना न खरीदने और कार पुलिंग करने की सलाह दी थी। हरगिला की यात्रा, अविश्वास से विश्वास तक की यात्रा पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में असम के हरगिला पक्षी के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कैसे असम में विलुप्ती की कगार पर आए हरगीला पक्षी को लोग अंधविश्वास की वजह से मार रहे थे। पीएम ने बताया कि हरगिला पक्षी हमारे पर्यावरण को साफ करने में मदद करता है। लेकिन असम में लोग अंधविश्वास की वजह से इसे मिटाने पर तुले हुए थे। आलम यह था कि जिस पेड़ पर हरगिला के घोंसले होते थे, वह उस पेड़ को ही काट देते थे। इसके बाद एक जीव विज्ञानी ने इस पर ध्यान दिया और लोगों को इससे जोड़ा। इसके बाद आज लोग हरगिला को लेकर अपने विचार बदल रहे हैं। हरगिला को बचाने वाली इस टीम को हरगीला आर्मी कहते हैं।

India-US Trade Deal पर बड़ी अपडेट, सर्जियो गोर ने कहा- जल्द हो सकता है समझौता

वाशिंगटन   भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसमें बस कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और पक्षों इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर ध्यान दे रहे हैं। व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में, अमेरिकी राजदूत गोर ने भरोसा जताया कि यह एग्रीमेंट आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कई दूसरे बड़े व्यापार समझौतों के मुकाबले बातचीत पहले ही बहुत तेजी से आगे बढ़ चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते की शेष कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा, "समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) की भाषाई रूपरेखा पर अभी काम होना बाकी है। करीब 48 घंटे पहले दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ मैं उन बैठकों में शामिल था, जहां हमने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। वे मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। यह वार्ता बेहद सार्थक रही। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। अब बहुत कुछ उस अंतिम मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।" गोर ने कहा कि बातचीत को सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौते पर सिर्फ लगभग 18 महीने से चर्चा चल रही थी। उन्होंने कहा, "देखिए, इसे सही नजरिए से देखें तो, हम इस समझौते पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं।  यूरोपीय संघ समझौता, जो अभी भी पूरी नहीं हुई है, उसे 20 साल हो गए हैं। हर कोई कहता है, 'इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?' हम इसे पूरा करने की दिशा में एक शानदार रास्ते पर हैं।"प्रस्तावित समझौते के कंटेंट को लेकर बात करने से इनकार करते हुए, अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि दोनों सरकारें ऐसे नतीजे की ओर काम कर रही हैं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो। उन्होंने कहा, "मैं ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता। आपको इंतजार करना होगा और देखना होगा। यह उन चीजों में से एक है जब आपको कॉमन ग्राउंड मिलता है और हम उन चीजों की पहचान कर पाते हैं जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी हैं, तभी डील होती है।" अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया मीटिंग के बाद भी भारत आने के लिए उत्सुक हैं। गोर ने कहा, "मेरे पास अभी पक्की तारीखें नहीं हैं। मैं अभी राष्ट्रपति से मिला हूं। मैं उनके साथ ओवल ऑफिस में कई घंटे रहा। राष्ट्रपति ने जो बातें पूछी, उनमें से एक यह थी, 'तो मैं कब आ रहा हूं?' वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बुलाया है। मुझे लगता है कि यह किसी समय होगा।"हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव शेड्यूल के कारण टाइमलाइन बताने से मना कर दिया, लेकिन गोर ने कहा कि भारत अभी भी उनकी प्राथमिकता वाली जगह बना हुआ है। अमेरिकी राजदूत ने कहा, "अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें वे अन्य देश में घूमने पर फोकस करेंगे। लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की लिस्ट में सबसे ऊपर है जहां वे जल्द ही जाएंगे।" गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की अटकलों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बने हुए हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छी जगह पर हैं। उस संबंधों की एक बड़ी वजह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच का रिश्ता है जो हमेशा मजबूत रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं और यह बात सालों पुरानी है और यह बात आगे भी जारी रहेगी।" भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना, टैरिफ की रुकावटें कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। दोनों सरकारों ने बार-बार इस समझौते को अपनी प्राथमिकता बताया है और एक बड़े ट्रेड फ्रेमवर्क पर जाने से पहले एक शुरुआती समझौते को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। व्यापार, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सबसे तेजी से बढ़ते स्तंभ में से एक बनकर उभरा है, जिसमें रक्षा, तकनीक, जरूरी और नई तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध भी शामिल हैं। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में अपने बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आर्थिक इंटीग्रेशन को भी गहरा करने की कोशिश की है।