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गोवा में कमीशन हुआ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS अक्षय

नई दिल्ली  भारतीय तटरक्षक बल ने अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए नई पीढ़ी के फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ICGS अक्षय (यार्ड 1273) को आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल कर लिया। वास्को (गोवा) में आयोजित समारोह के दौरान इस स्वदेशी पोत को कमीशन किया गया। यह जहाज समुद्री सीमाओं की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और तटीय सुरक्षा को नई मजबूती देगा। ICGS अक्षय का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके भारतीय तटरक्षक बेड़े में शामिल होने से देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। 'समुद्र सिर्फ व्यापार नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का भी आधार' पश्चिमी क्षेत्र के तटरक्षक कमांडर इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा (PTM, TM) ने कहा कि समुद्र केवल आवागमन और व्यापार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा भारत के राष्ट्रीय उद्देश्यों का अहम हिस्सा है और इसे हर हाल में मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की तैयारी केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह तैयारी प्लेटफॉर्म, वर्दीधारी जवानों के प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) और सबसे बढ़कर उनकी सोच और क्षमता में दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि हर नया प्लेटफॉर्म तटरक्षक बल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि ICGS अक्षय भारतीय तटरक्षक बल की समुद्र में मौजूदगी को और मजबूत करेगा। इसके जरिए आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया की गति बेहतर होगी और तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी। यह पोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।

भायखला में सनसनी: जिंक फॉस्फाइड वाले कैप्सूल बांटने के आरोप में फैयाज प्रेमजी पकड़ा गया

मुंबई मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस के दौरान जहरीले कैप्सूल बांटने की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. पुलिस ने इस मामले में फैयाज प्रेमजी नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी बिना अनुमति के 'दर्द से राहत' के नाम पर लोगों को कैप्सूल बांट और बेच रहा था. मुंबई पुलिस के मुताबिक जेजे और भायखला इलाके से मोहर्रम का जुलूस गुजर रहा था, जहां आरोपी कथित तौर पर लोगों को कैप्सूल बांट रहा था. पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने फैयाज को कैप्सूल वितरित करते हुए देखा. शक होने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की और उसके पास मौजूद कैप्सूल जब्त कर लिए. डीसीपी सेंट्रल रीजन जोन-1 जयंत मीणा ने बताया, 'बीती रात भायखला पुलिस स्टेशन की सीमा में मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था. जुलूस के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति लोगों को कैप्सूल बांटता और बेचता हुआ दिखाई दिया. संदेह होने पर मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने उससे पूछताछ की और उसके पास से कैप्सूल का स्टॉक बरामद किया.' पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने खासतौर पर मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाया और इसमें शामिल होने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखता था. फैयाज ने 50 KG जिंक फॉस्फाइड मंगाया था डीसीपी जयंत मीणा ने कहा, 'पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने कुल 30 हजार खाली कैप्सूल और 50 किलो जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने वाला जहरीला केमिकल) मंगवाया था, जो बेहद जहरीला पदार्थ है.' पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान पुणे निवासी फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पेंट का कारोबार करता है और बीबीए ग्रेजुएट है. पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कई दिनों तक अपने ठिकाने पर कैप्सूलों में जहर भरने का काम किया. पुलिस का कहना है कि कैप्सूल का सेवन करने वाले सलमान सैयद नाम के व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई थी. उसे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज भायखला पुलिस ने आरोपी के पास से 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद किए हैं. प्रत्येक कैप्सूल में करीब एक ग्राम जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी साल 2025 में ईरान और इराक गया था. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है. इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 110 और 123 के तहत जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि फैयाज प्रेमजी शिया खोजा मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है. आरोपी एक साल में 19 बार ईरान-इराक गया फैयाज की बहन ईरान में फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम करती है, जबकि उसकी मां भी ईरान में रहती हैं. उसकी पत्नी से उसका तलाक हो चुका है. जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच फैयाज कई बार ईरान और इराक की यात्रा कर चुका है. पुलिस के मुताबिक पिछले एक साल में ही वह 19 बार ईरान और इराक गया था. फैयाज प्रेमजी पुणे के विमान नगर इलाके में रहता है, जहां उसका पेंट का कारोबार है. मुंबई आने के दौरान वह डोंगरी इलाके के एक गेस्ट हाउस और डॉरमेट्री में ठहरा था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी उन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और क्या आरोपी किसी के प्रभाव में था या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. हालांकि, फिलहाल किसी आतंकी संगठन से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है. फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की गहन जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति या संगठन शामिल था या नहीं.

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से पहले बड़ा फैसला संभव, जानें ताजा अपडेट

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है।  जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।  क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद?  दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है।  अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा।  नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है?  आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है।  फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई।  कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है।  अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है?  केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।   अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा?  जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

केरल में मानसून की रफ्तार धीमी, अल-नीनो के असर से 33 फीसदी कम बारिश; खेती पर संकट के आसार

नई दिल्ली केरल में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, राज्य में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश में अब तक 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश की सबसे ज्यादा कमी वायनाड जिले में देखने को मिली है, जहां सामान्य से 64 प्रतिशत कम बारिश हुई है. कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है और खेती-किसानी पर इसका असर दिखाई देने लगा है।  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की डायरेक्टर वीके. मिनी ने जानकारी दी कि राज्य के सिर्फ चार जिले तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा और त्रिशूर में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो ये जिले भी कम बारिश वाले जिलों की कैटेगरी में आ सकते हैं।  IMD के मानकों के अनुसार, जब किसी जिले में बारिश की कमी 19 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो उसे 'बारिश की कमी' (Rainfall Deficient) की श्रेणी में रखा जाता है. वर्तमान स्थिति में राज्य के अधिकांश जिलों में यह स्थिति बन चुकी है।  खेती पर कम बारिश का असर बारिश की इस कमी ने कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे आईएमडी की सामान्य से कम (Below Normal) बारिश की भविष्यवाणी को देखते हुए खास उपाय अपनाएं. अल नीनो के असर से इस साल कम बारिश होने की आशंका है. वीके. मिनी ने बताया कि बारिश पर आधारित कृषि क्षेत्रों (Rain-fed Areas) पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. सामान्य से कम बारिश से मिट्टी की नमी घट रही है और खरीफ फसलों की बुआई में भी देरी हो रही है।  मौसम पर अल-नीनो का कैसा असर? सामान्य रूप से जून के महीने में बंगाल की खाड़ी के ऊपर दो डिप्रेशन और पांच तक निम्न दबाव प्रणालियां बनती हैं, जो मॉनसून की हवाओं को मजबूत करती हैं. इसी के साथ देश के बड़े हिस्सों में अच्छी बारिश होती है लेकिन इस साल जून में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक भी डिप्रेशन नहीं बना. केरल में सामान्यतः जून और जुलाई-अगस्त में दो-दो तथा सितंबर में एक डिप्रेशन बनता है, लेकिन अल नीनो की स्थिति के कारण इन प्रणालियों के बनने में कमी आ सकती है।  पारंपरिक कृषि कैलेंडर प्रभावित केरल में 21 जून से 4-5 जुलाई तक का समय खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे पारंपरिक रूप 'तिरुवाथिरा नजट्टुवेला' कहा जाता है. यह धान की रोपाई और बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपने चरम पर होता है. लेकिन इस साल अल नीनो के असर से  कृषि कैलेंडर प्रभावित हुआ है।  IMD ने चेतावनी दी कि अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रही तो भूजल स्तर घट सकता है. पेयजल संकट पैदा हो सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो न केवल धान बल्कि अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 

वैवाहिक प्रताड़ना का सनसनीखेज मामला, महिला बोली- पति पोर्न दिखाने के बाद करता था जबरदस्ती

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में एक महिला को ससुराल में ऐसी यातनाएं मिलीं, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं. महिला ने पति पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, उसका कहना है कि पति उसे पोर्न दिखाता था. मारपीट करता था और अप्राकृतिक कृत्य करता था. पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में पति, सास और देवर के खिलाफ शिकायत की है।  ये पूरी कहानी शहर के शाहीबाग इलाके की है. पीड़ित महिला ने शिकायत में कहा है कि उसका पति उसे जबरन पोर्न फिल्में दिखाता था. विकृत तरीके से जबरन संबंध बनाता था. साथ ही, प्रेग्नेंसी के दौरान लात मारकर अबॉर्शन कराने का दबाव भी डालता था।  ससुराल वालों द्वारा लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ना किया गया. जान से मारने की धमकी दी गई. इससे तंग आकर महिला अहमदाबाद महिला पुलिस स्टेशन में पहुंची और आपबीती सुनाई. महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  शिकायत के अनुसार, महिला की शादी साल 2011 में हुई थी, लेकिन शादी के 15 दिन बाद ही उसकी ससुराल में उसके साथ गलत व्यवहार शुरू हो गया. शादी के समय ससुराल वालों ने महिला से यह बात छिपाई थी कि पति की पहले भी शादी हो चुकी थी और उसका एक बच्चा भी है।  शादी के तुरंत बाद सास और देवर ने दहेज को लेकर ताने मारने शुरू कर दिए थे. महिला के प्रेग्नेंट होने के बावजूद उसे पर्याप्त आराम नहीं करने दिया गया. घर के भारी-भरकम काम कराए जाते थे. बेटी के जन्म के बाद भी पति का दुर्व्यवहार कम नहीं हुआ. पति अक्सर देर रात घर आता, पार्टियों में जाता और पत्नी की इच्छा के बिना उससे जबरन संबंध बनाता था।  अगर पत्नी बीमार होती, तो भी उसे उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाएं देकर संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता और मना करने पर बुरी तरह पीटा जाता था. कुछ समय बाद जब पत्नी दोबारा प्रेग्नेंट हुई, तो पति ने अबॉर्शन कराने का दबाव डाला और धमकी दी कि अगर उसने बात नहीं मानी तो वह तलाक दे देगा।  इन सब बातों से तंग आकर पत्नी मायके चली गई, लेकिन पति वहां पहुंच गया और उसे जबरदस्ती ससुराल ले आया. सास और देवर भी लगातार ताने मारते थे कि तुम हमारे बेटे को पसंद नहीं हो, तुम्हें तो बस समाज की वजह से रखना पड़ रहा है. तुमने हमारा घर बर्बाद कर दिया. तुम तलाक लेकर अलग हो जाओ।  'रात में दूसरे देशों की युवतियों को कर रहा था वीडियो कॉल' पत्नी ने आधी रात को अपने पति को दूसरे देशों की युवतियों के साथ वीडियो कॉल पर बात करते हुए पकड़ा था. पति उसे उन युवतियों के साथ के आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर उसी तरह संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था. तीसरी बेटी को जन्म देने के बाद भी ससुराल वालों का रवैया नहीं बदला. जब पत्नी ने पति के अफेयर की बात सास को बताई, तो सास भड़क गईं और झगड़ा करके पत्नी को घर से निकाल दिया।  पांच महीने मायके में रहने के बाद जब वह वापस आई, तब भी पति ने अश्लील वीडियो दिखाकर अप्राकृतिक संबंध बनाने का दबाव डाला. फिर महिला और उसकी तीनों बेटियों को दूसरे घर पर भेज दिया और पति अलग रहने लगा. पति ने पत्नी को गंभीर धमकियां दीं. उसने कहा कि अगर तुमने हमारे खिलाफ कोई अर्जी या शिकायत की तो जान से मार देंगे. फिलहाल पीड़िता ने महिला पुलिस स्टेशन में शिकायत की है. पुलिस ने पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। 

भारत में रिकॉर्ड गर्मी का खुलासा, 365 में 360 दिन रहा तापमान का असर; क्लाइमेट चेंज या अल-नीनो जिम्मेदार?

 नई दिल्ली साल 2025 भारत के लिए मौसम के लिहाज से बेहद मुश्किल था. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट – CSE की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे साल में 365 में से 360 दिन देश के किसी न किसी हिस्से में मौसम की भयानक घटनाएं हुईं. इन घटनाओं में 4421 लोगों की मौत हुई. करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई. बढ़ता क्लाइमेट चेंज और अल-नीनो जैसे मौसमीय पैटर्न भारत में मौसम को पहले से ज्यादा अनिश्चित बना रहे हैं।  2025 में मौसम ने तोड़े कई रिकॉर्ड 2025 में देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में किसी न किसी तरह का बिगड़ा हुआ मौसम दर्ज किया गया. यानी पूरे साल ऐसा कोई इलाका नहीं बचा, जहां मौसम का असर न दिखा हो. 2025 में देश के करीब 99% दिनों में कहीं न कहीं लू, भारी बारिश, बाढ़, बिजली गिरने, ओला पड़ने या तूफान जैसी घटनाएं हुईं. यह पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. 2024 में ऐसे मौसम की घटनाएं साल के 88 फीसदी दिनों में दर्ज हुई थीं।  मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है. 2024 में 3393 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025 में यह बढ़कर 4421 हो गई. खेती को हुआ नुकसान भी कई गुना बढ़ गया. 2024 में करीब 36 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी, लेकिन 2025 में यह बढ़कर 1.74 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच गई।  सबसे ज्यादा फसल का नुकसान महाराष्ट्र में हुआ, जहां करीब 84 लाख हेक्टेयर खेती प्रभावित हुई. इसके बाद कर्नाटक और मध्य प्रदेश का नंबर रहा. वहीं हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा 267 दिन भयानक मौसम दर्ज किया गया. केरल में 173 दिन और मध्य प्रदेश में 162 दिन ऐसे हालात बने रहे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में 1.81 लाख से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा।  अब सिर्फ मानसून नहीं, पूरे साल बदल रहा है मौसम रिपोर्ट बताती है कि अब चरम मौसम सिर्फ मानसून तक सीमित नहीं है. मार्च, अप्रैल और मई जैसे महीनों में भी तेज गर्मी, अचानक बारिश, आंधी और ओले पड़ने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं. कई जगहों पर कुछ ही दिनों के अंदर मौसम पूरी तरह बदल जाता है. इसका सीधा असर खेती, पानी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।  अल-नीनो से क्यों बढ़ सकती है परेशानी? वैज्ञानिकों का कहना है कि हर खतरनाक मौसम की घटना की वजह अल-नीनो नहीं होता. लेकिन जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो भारत के मौसम का पैटर्न बदल सकता है. कई इलाकों में बारिश कम हो सकती है और गर्मी बढ़ सकती है. वहीं कुछ जगहों पर कम समय में बहुत ज्यादा बारिश भी हो सकती है।  अगर अल-नीनो का असर और क्लाइमेट चेंज साथ-साथ हों, तो मौसम और ज्यादा असामान्य हो सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लगातार ऐसे मौसम पर नजर रखने की बात कहते हैं।  2025 के आंकड़े साफ बताते हैं कि बेहद खराब मौसम अब भारत में पहले से ज्यादा आम होता जा रहा है. इसका असर सिर्फ लोगों की जान पर नहीं, बल्कि खेती, घरों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर क्लाइमेट चेंज की रफ्तार नहीं थमी और अल-नीनो जैसे मौसमी पैटर्न असर दिखाते रहे, तो आने वाले वर्षों में ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। 

Irani Oil Offer: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलते ही भारत को मिले सस्ते तेल के ऑफर, फिर क्यों बना हुआ है इंतजार?

 नई दिल्‍ली अमेरिका और ईरान के बीच जंग थमी हुई है और शांति वार्ता चल रही है. इस समझौते के दौरान अमेरिका ने ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटा दिया है और 60 दिनों की छूट दी है, जिसके बाद ईरानी तेल मार्केट में आ चुका है. वहीं स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज भी खुल चुका है, जिसके बाद टैंकर पहले से ज्‍यादा स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजर रहे हैं।  इस बीच, रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका की छूट के बाद कई बिचौलियों ने ईरानी तेल को भारत को बेचने के लिए ऑफर दे रहे हैं. इन्‍होंने भारतीय रिफाइनरों को ईरानी तेल कम दाम पर बेचने का ऑफर दिया है. सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क सीधे नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) की ओर से और बिचौलियों के माध्यम से किया गया है, जिसमें कहा गया है कि उन्हें ईरानी राज्य उत्पादक द्वारा तेल आवंटित किया गया है।  कितना सस्‍ता होगा ईरानी तेल?  रॉयटर्स ने कहा कि ऑयल रिफाइनर्स से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि एनआईओसी के अलावा, कई व्‍यापारी ईरानी तेल को बेचने के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन हमारी प्राथमिता एनआईओसी को मौका देना है. उन्होंने बताया कि एनआईओसी भारतीय खरीदारों को बता रहा है कि ईरानी कच्चा तेल क्षेत्रीय स्तर पर समान गुणवत्ता वाले कच्चे तेल की तुलना में प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर सस्ता होगा।  रिपोर्ट में कहा गया है कि रिफाइनर से संपर्क करने वाले व्यापारी मुख्य रूप से सिंगापुर और दुबई स्थित छोटी और मध्यम आकार की व्यापारिक कंपनियों से हैं. इस सप्ताह ईरानी पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत को कच्चे तेल और LPG की संभावित आपूर्ति पर भी चर्चा हुई।  भारत बढ़ा सकता है आयात हालांकि, भारतीय रिफाइनर के पास फ्यूचर में ईरानी कच्चे तेल को रखने की सीमित गुंजाइश है, क्योंकि अधिकांश ने अगस्त तक आपूर्ति सुरक्षित कर ली है और मिडिल ईस्‍ट आपूर्तिकर्ता खरीदारों पर प्राथमिकता को लेकर दबाव बना रहे हैं. भारत पहले से ही व्यापारियों के माध्यम से ईरान से एलपीजी आयात कर रहा था और प्रतिबंधों में छूट मिलने के बाद यह आयात और बढ़ सकता है।  भारत क्‍यों नहीं खरीद सकता ज्‍यादा कच्‍चा तेल?  केप्‍लर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने अपने तेल की आपूर्ति के लिए कई देशों से कॉन्‍ट्रैक्‍ट कर लिया है. वहीं कई जगहों से तेल मंगा रहा है और बहुत से तेल को रिजर्व करके भी रख लिया है. इस कारण, उसे सस्‍ते पर तेल मिलने के बाद भी ज्‍यादा खरीदारी नहीं कर सकता है।  एक महीने की छूट पर भी भारत ने खरीदा था तेल  गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं, जिसके बाद तेल के दाम को नीचे लाने के लिए अमेरिका ने ईरानी तेल पर छूट दी थी. अमेरिका की ओर से 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दिए जाने के बाद भारत को अप्रैल में ईरानी तेल की दो खेपें मिली थीं, जिनका भुगतान चीनी युआन में किया गया था। 

शुभेंदु सरकार लाने जा रही सख्त कानून, बिना सुनवाई एक साल की हिरासत के प्रस्ताव पर विवाद तेज

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है। अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है। विधेयकों पर होने लगा बवाल टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है। सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी। विधेयक में क्या प्रावधान है इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में 'गुंडा' ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा। इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।  

‘बिना आंख’ वाला F-35! पेंटागन ने रडार के बिना सौंपे 6 स्टील्थ फाइटर जेट, जानें पूरी कहानी

वाशिंगटन अमेरिका की सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट F35 की कहानी अब एक बड़े घोटाले और देरी की मिसाल बन गई है. पेंटागन ने हाल ही में मरीन कॉर्प्स को छह F35 फाइटर जेट बिना रडार के डिलीवर कर दिए हैं. नया एएन/एपीजी-85 रडार सिस्टम अप्रैल 2028 तक प्रोडक्शन शुरू नहीं होगा।  F35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी मासिएलो ने सीनेट की सुनवाई में साफ कहा कि बिना रडार वाले ये जेट्स पूरी तरह मिशन कैपेबल नहीं माने जा सकते. यह बात इतनी सच्ची है कि इसे कोई छिपा नहीं सकता. दुनिया का सबसे महंगा फाइटर प्रोग्राम, जो अब तक 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है, अब बिना आंखों वाले विमानों को डिलीवर कर रहा है।  ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को बुलाकर मिसाइल स्टॉक की कमी पर सवाल किए. उसी समय पेंटागन F35 जैसे जेट्स बिना मुख्य हिस्से के दे रहा है. भारत के संदर्भ में यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने भारत की यात्रा के दौरान और पहले कई बार भारतीय वायुसेना (IAF) को F35 ऑफर किया था।  प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के समय ट्रंप ने कहा था कि वे भारत को F35 स्टेल्थ फाइटर उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार कर रहे हैं. यह ऑफर भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को ऊंचाई देने वाला था लेकिन अब इस प्रोग्राम की समस्याएं भारत के लिए सोचने वाली बात हैं।  F35 प्रोग्राम की महंगाई और समस्याएं  F35 लाइटनिंग II को दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टेल्थ फाइटर माना जाता है. इसमें एक से ज्यादा रोल हैं – जमीन पर हमला, हवा में लड़ाई और टोही. लेकिन इसका कुल खर्च अब 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जो इसे इतिहास का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम बनाता है. एक जेट की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है, लेकिन रखरखाव, अपग्रेड और लाइफ साइकिल कॉस्ट इसे और महंगा बनाती है।  अब नया AN/APG-85 रडार पुराने APG-81 की जगह लेने वाला था. यह ज्यादा पावरफुल AESA रडार है, जो बेहतर टारगेट डिटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता देता है. लेकिन नाक के अंदर माउंटिंग सिस्टम में बदलाव की वजह से पुराना रडार फिट नहीं हो पा रहा।  इसलिए लॉकहीड मार्टिन ने कुछ जेट्स नाक में बैलास्ट लगाकर डिलीवर किए. मरीन कॉर्प्स ने इंतजार किया, लेकिन अब छह जेट्स बिना रडार के उनके पास हैं. जनरल मासिएलो ने माना कि ये जेट्स ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, लेकिन असली लड़ाई में पूरी क्षमता नहीं दिखा सकते।  यह समस्या सिर्फ रडार तक सीमित नहीं. F35 प्रोग्राम लंबे समय से देरी, कॉस्ट ओवररन और कम तैयार दरों से जूझ रहा है. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि तैयार जेट्स का छोटा प्रतिशत ही पूरी तरह मिशन तैयार रहता है. ट्रंप ने कॉन्ट्रैक्टर्स से मिसाइल स्टॉक की कमी पर जवाब मांगा, जो दिखाता है कि अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री सप्लाई चेन की दिक्कतों से गुजर रही है।  ट्रंप का भारत दौरा और F35 ऑफर  ट्रंप ने भारत यात्रा के दौरान और इससे पहले मोदी के व्हाइट हाउस दौरे पर F35 का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचेगा और F35 का रास्ता भी खोलेगा. यह ऑफर भारत को क्वाड और इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ मजबूत बनाने का संकेत था. भारत के पास अभी राफेल, Su-30MKI जैसे जेट्स हैं, लेकिन पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर IAF को नई ताकत दे सकता था।  भारत ने हालांकि इस ऑफर को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रेड टेंशन और टैरिफ की वजह से भारत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. भारत Make in India पर जोर देता है. रूस, फ्रांस के साथ लंबे संबंध रखता है. F35 खरीदने पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रखरखाव और इस्तेमाल पर सख्त शर्तें लगती हैं, जो भारत को पसंद नहीं आतीं. ट्रंप का ऑफर दिखाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक पार्टनर मानता है।  भारत अगर F35 खरीदता तो क्या होता?  एक तरफ यह IAF को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर सेंसर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर देता. पाकिस्तान और चीन के एयर डिफेंस को चीरने में मदद करता. लेकिन दूसरी तरफ, बिना रडार वाले जेट्स की डिलीवरी, देरी और भारी खर्च भारत के बजट पर बोझ बन सकता था. भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA जैसे अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. F35 जैसी विदेशी टेक्नोलॉजी खरीदने से पहले इन समस्याओं को समझना जरूरी है।  F35 प्रोग्राम की समस्याएं अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की कमजोरियों को उजागर करती हैं. सप्लाई चेन, प्रोडक्शन डिले और कॉस्ट कंट्रोल में दिक्कतें हैं. ट्रंप इन मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन समाधान आसान नहीं. भारत के लिए यह सबक है कि कोई भी हथियार परफेक्ट नहीं होता. रडार, सॉफ्टवेयर, इंजन और रखरखाव सब पर निर्भर रहना पड़ता है।  F35 2028 तक नया रडार मिलने के बाद बेहतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह प्रोग्राम चुनौतियों से भरा है. भारत को ट्रंप के ऑफर पर फिर से सोचना चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर. संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत प्रभावी डील जरूरी है।  यह मामला सिर्फ एक जेट का नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध और रक्षा खरीद की जटिलताओं का है. भारत जैसे देश को मजबूत एयर फोर्स चाहिए, लेकिन बिना आंखों वाला विमान नहीं. ट्रंप की यात्रा और ऑफर ने नए द्वार खोले, लेकिन फैसला सावधानी से लेना होगा. F35 की कहानी जारी है – महंगा, शक्तिशाली लेकिन अभी सही नहीं।   

महाराष्ट्र TET एग्जाम टला, पेपर लीक की आशंका; वायरल प्रश्नों से हूबहू मैच होने पर बड़ा फैसला

मुंबई  सरकारी नौकरी और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं पर से पेपर लीक का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है. अब बेहद चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र से आया है. 28 जून 2026 को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा को अचानक स्थगित कर दिया गया है. महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने भिवंडी में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया है. इस फैसले से राज्य के लाखों उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया है, जो इस रविवार को परीक्षा देने की पूरी तैयारी कर चुके थे।  महाराष्ट्र टीईटी (Maha TET 2026) को लेकर छात्रों का गुस्सा और निराशा साफ देखी जा सकती है. भिवंडी में कुछ संदिग्धों के पास से प्रश्नपत्र से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी बरामद हुई थी, जिसके बाद प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा. महाराष्ट्री टीईटी परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इस खुलासे ने परीक्षा कराने वाली सुरक्षा व्यवस्था और एजेंसियों की पोल खोल दी है. .भिवंडी पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को हिरासत में लिया है. परिषद का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इसे टालना बेहद जरूरी था।  भिवंडी में पुलिस की छापेमारी से हुआ खुलासा भिवंडी पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों और प्रश्नपत्र से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने की गुप्त सूचना मिली थी. पुलिस ने बिना वक्त गंवाए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की और वहां से कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद की. भिवंडी पुलिस के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लग गए, जिसने महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा कराने वाली परिषद के होश उड़ा दिए. इसके तुरंत बाद भिवंडी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।  बरामद दस्तावेज और असली पेपर में निकली समानता शुरुआती जांच में जब पुलिस की तरफ से बरामद की गई सामग्री का मिलान 28 जून को होने वाली असली TET 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र से किया गया तो अधिकारी हैरान रह गए. बरामद सामग्री और परीक्षा के कुछ प्रश्नों में गजब की समानता पाई गई. इसका साफ मतलब था कि पेपर लीक की पूरी तैयारी हो चुकी थी और कुछ चुनिंदा लोगों तक सवाल पहुंच चुके थे. इस गंभीर गड़बड़ी के सामने आते ही परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।  पारदर्शिता के लिए टाली परीक्षा महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस रिलीज जारी की. परिषद ने साफ किया कि उनके लिए परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे ऊपर है. अगर इस स्थिति में परीक्षा कराई जाती तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता. इसलिए 28 जून को प्रस्तावित महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा 2026 को फिलहाल रोकने का सख्त फैसला लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को दागदार होने से बचाया जा सके।  उम्मीदवारों के भविष्य पर सस्पेंस, कब होगी परीक्षा? इस अचानक आए फैसले से उन लाखों उम्मीदवारों को गहरा झटका लगा है जो महीनों से दिन-रात एक करके इस शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. सोशल मीडिया पर छात्र अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. परीक्षा परिषद ने उम्मीदवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा है कि इस रैकेट की गहराई से जांच की जा रही है. परीक्षा की नई तारीखों और आगे के शेड्यूल को लेकर जल्द ही परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर नया नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।  दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई परीक्षा परिषद की डिप्टी कमिश्नर प्रिया शिंदे ने बताया कि पुणे परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित यह परीक्षा राज्य के 37 शहरों के 1728 केंद्रों पर होने वाली थी. इसमें करीब 6 लाख 12 हजार 500 उम्मीदवारों को शामिल होना था. लेकिन ठाणे और भिवंडी में पेपर लीक होने के बाद इसे स्थगित करना पड़ा. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में उम्मीदवारों की कोई गलती नहीं है. इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा के लिए न तो रजिस्ट्रेशन कराना होगा और न ही कोई फीस देनी होगी. डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि एक परीक्षा आयोजित करने में करीब 3 हफ्ते लगते हैं. दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।