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होर्मुज स्ट्रेट पार करेंगे 8 LPG टैंकर, भारत ने सुनिश्चित की गैस आपूर्ति

मुंबई  ईरान जंग का असर भारत में भी दिख रहा है. एलपीजी सिलेंडर को लेकर जगह-जगह हाय-तौबा मची है. गैस की कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है. आम जनता परेशान है. लोगों को डर सता रहा है कि एलपीजी गैस की कमी से उन्हें खाने-पीने की दिक्कत हो जाएगी. मगर सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी गैस की दिक्कत नहीं है. होर्मुज के बंद होने से इंधन संकट की चिंताओं के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. बहुत जल्द आठ एलपीजी टैंकर होर्मुज को पार कर भारत की सरजमीं पर होंगे. जी हां, इसके लिए भारत सरकार ने ईरान से बातचीत तेज कर दी है।  दरअसल, एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत ईरान से बातचीत कर रहा है और उसे जल्द ही LPG की आपूर्ति मिलने की उम्मीद है. अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में हो रही बाधाओं के कारण ऊर्जा शिपमेंट पर लगातार असर पड़ रहा है. बता दें कि ईरान ने जंग के कारण होर्मुज को बंद कर दिया है. हालांकि, उसने भारत को इससे छूट दी है।  होर्मुज के पास 8 टैंकर इंतजार कर रहे हैं सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से ठीक पहले खड़े हैं. इन जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए सरकार ईरान के संपर्क में है. अधिकारियों ने बताया कि ईरानी अधिकारी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अपने उन नाविकों की भी चिंता है जो इस समय भारत में हैं. लगभग 250 ईरानी नाविक भारत में हैं, जो अपने घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं. भारतीय अधिकारियों ने उन्हें रहने की जगह दी है, जबकि उनके लौटने की व्यवस्था की जा रही है।  सरकार है एक्टिव एलपीजी गैस और तेल के संकट को टालने के लिए सरकार का क्राइसिसि मैनेजमेंट ग्रुप यानी संकट प्रबंधन समूह (Crisis Management Group) एक पूरी योजना पर काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत को किसी भी तरह की ईंधन किल्लत का सामना न करना पड़े. अधिकारी स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं और LPG कुकिंग गैस की सप्लाई को संभालने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।  LPG आयात पर भारत की निर्भरता भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इस आयात का एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों के सप्लायरों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है. इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट देश में LPG की उपलब्धता पर असर डाल सकती है।  भारतीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कूटनीतिक बातचीत भारत एलपीजी शिपमेंट के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए उच्च-स्तरीय बातचीत कर रहा है. इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई बार फ़ोन पर बातचीत शामिल है. इतना ही नहीं, अपने ईंधन वाले जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के लिए भारत नेवी के एस्कॉर्ट पर भी विचार कर रहा है। 

26 हफ्ते के भ्रूण पर गुजरात हाई कोर्ट का फैसला, नाबालिग को अब नहीं मिलेगा गर्भपात

अहमदाबाद  गुजरात हाई कोर्ट ने वडोदरा की एक रेप पीड़िता द्वारा अपने 26 हफ्ते के भ्रूण का गर्भपात कराने के लिए दिए गए आवेदन को मंजूर करने से इनकार कर दिया. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए, हाई कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की अनुमति नहीं दी। वडोदरा की एक नाबालिग ने गुजरात हाई कोर्ट में गर्भपात के लिए आवेदन किया था, क्योंकि वह इस प्रेग्नेंसी को जारी नहीं रखना चाहती थी, जबकि भ्रूण 26 हफ्ते का है. इस आवेदन की सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने वडोदरा के SSG अस्पताल के मेडिकल बोर्ड को नाबालिग की मेडिकल स्थिति का पता लगाने के लिए जांच करने का आदेश दिया. हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, 11 मार्च को नाबालिग की मेडिकल जांच की गई और उसके बाद मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, यह पाया गया कि इस चरण में नाबालिग के लिए गर्भपात कराना चिकित्सकीय रूप से ज्यादा खतरनाक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस चरण में गर्भपात कराने में बच्चे को जन्म देने की तुलना में अधिक जोखिम है। मेडिकल बोर्ड ने आगे कहा कि अगर बच्चा जीवित पैदा होता है, तो उसे सांस लेने में तकलीफ और रक्तस्राव जैसी गंभीर मेडिकल समस्याएं हो सकती हैं, और ऐसी स्थिति में, बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की जरूरत पड़ सकती है। नाबालिग के भविष्य के लिए दिए अहम आदेश मेडिकल बोर्ड की इस राय को ध्यान में रखते हुए, गुजरात हाई कोर्ट ने नाबालिग को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने नाबालिग के हितों और भविष्य को ध्यान में रखते हुए कुछ अहम आदेश भी दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि बच्चे को जन्म देने के लिए अस्पताल द्वारा नाबालिग को उचित मेडिकल देखभाल में मदद की जानी चाहिए. बच्चे के जन्म के बाद, नाबालिग की इच्छा जानने के बाद उसे किसी बच्चा गोद लेने वाली एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए. अगर नाबालिग अपने परिवार के साथ नहीं रहना चाहती है, तो उसे किसी महिला आश्रय गृह में रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि नाबालिग की डिलीवरी का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी. इसके अलावा, राज्य सरकार बच्चे के जन्म के बाद छह महीने तक नाबालिग और बच्चे की देखभाल और इलाज का खर्च भी उठाएगी. अदालत ने आदेश दिया है कि नाबालिग के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) उसकी आगे की शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में निर्णय ले। हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि DLSA के सचिव इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसका ठीक से पालन हो रहा है। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील भौमिक शाह ने बताया कि नाबालिग की स्थिति और उसकी इच्छाओं को अदालत के सामने रखा गया था. हालांकि, अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया, क्योंकि रिपोर्ट में गर्भपात से जुड़े चिकित्सीय जोखिमों की बात कही गई थी. उन्होंने आगे कहा कि अदालत ने नाबालिग के स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए, उसे जरूरी सहायता और सुरक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को विस्तृत निर्देश भी दिए हैं।

BKTC का फैसला: बदरीनाथ और केदारनाथ के मंदिरों में केवल हिंदुओं को अनुमति

देहरादून उत्तराखंड के चारधाम मंदिरों में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाले बदरीनाथ-केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश पर पाबंदी का फैसला लिया गया है। मंदिर समिति बीकेटीसी ने हाल ही में यह कड़ा कदम उठाया। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल उन लोगों पर लागू होगी जो सनातन धर्म में विश्वास नहीं रखते हैं और इसका मुख्य उद्देश्य चारधाम यात्रा और अन्य मंदिरों की पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखना है। इस मामले में अब सरकार का रिएक्शन आया है। बदरीनाथ धाम, केदारनाथ में गैर सनातियों के प्रवेश पर रोक के बीकेटीसी के फैसले का सरकार अध्ययन करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि बीकेटीसी का फैसला अभी सरकार के पास नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जब यह प्रस्ताव सरकार के पास आएगा, उसका एक्ट के अनुसार अध्ययन किया जाएगा। सभी पक्षों से चर्चा के करने के बाद ही अंतिम निर्णय किया जाएगा। प्रतिबंध गर्भगृह और मुख्य परिसर में लागू समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि यह प्रतिबंध मंदिर के गर्भगृह और मुख्य परिसर के भीतर लागू होगा। उन्होंने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि केवल उन लोगों को ही धामों के दर्शन करने चाहिए जो सनातन धर्म में सच्ची श्रद्धा और विश्वास रखते हैं। गौरतलब है कि इस साल जनवरी में ही समिति ने ऐसे प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए थे, जिस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है। चारधाम यात्रा के लिए 121 करोड़ बजट पास इसी बैठक में बीकेटीसी ने आगामी चारधाम यात्रा 2026-27 के लिए 121 करोड़ का बजट भी पास किया है। इस कुल राशि में से 57.5 करोड़ बदरीनाथ धाम और 63.6 करोड़ केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं के लिए आवंटित किए गए हैं। साथ ही, मंदिर के पुजारियों (तीर्थ पुरोहितों) की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए 'तीर्थ पुरोहित कल्याण कोष' बनाने के फैसले को भी बोर्ड ने हरी झंडी दे दी है। यह कोष पुजारियों को वित्तीय सहायता और अन्य कल्याणकारी लाभ प्रदान करेगा। 19 अप्रैल को खुल रहे कपाट 2026 की यात्रा के लिए कपाट खुलने की तारीखें भी तय हो चुकी हैं। केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे, जबकि बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को खुलेंगे। हर साल बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

ईरान का कड़ा संदेश: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज़ों को गुजरने के लिए नौसेना से बात करना आवश्यक

नई दिल्‍ली होर्मुज स्‍ट्रेट से जहाज लेकर जाने के लिए भारत लगातार ईरान से बातचीत कर रहा है. इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान सामने आया है, जिसका कहना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ तालमेल बिठाना होगा। नौसेना के साथ बातचीत करने के बाद ही आप तेल-गैस जहाजों से लेकर जा सकते हैं. इस बयान से साफ है कि ईरान की नौसेना 'होर्मुज स्‍ट्रेट' पर नजर बनाए हुए है और उसका पूरा कंट्रोल है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को मेहर समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक बयान में कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए जहाज़ों को ईरान की नौसेना के साथ बातचीत करनी होगी। ऐसे में ईरान का यह संकेत साफ है कि वह इजरायल और अमेरिका सर्पोटिव जहाजों को छोड़कर बाकी देशों की जहाजों को 'स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने की अनुमति दे सकता है, लेकिन हमला करने वाले देशों को अनुमति नहीं देगा. यही बात ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी स्‍पष्‍ट किया है। हमला करने वालों को अनुमति नहीं एएफपी के अनुसार, ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ देशों ने जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन के बारे में हमसे बातचीत की है और हमने उनके साथ सहयोग किया है. जहां तक ​​ईरान का सवाल है, हमारा मानना ​​है कि जिन देशों ने आक्रमण में साथ दिया, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन का लाभ नहीं मिलना चाहिए। होर्मुज स्‍ट्रेट को बंद रखेगा ईरान वहीं इस रिपोर्ट में आगे कहा गया कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पिता की हत्या के बाद पहली बार बयान दिया और अपने एक चुनौती भरे बयान में कहा कि ईरान अपनी लड़ाई जारी रखेगा और अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ एक दबाव के तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखेगा। खामेनेई का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका बार-बार यह दावा कर रहा है कि ईरान के पास अब कुछ भी नहीं बचा है. ट्रंप का दावा है कि वह जब चाहें, तब युद्ध को समाप्‍त कर सकते हैं. वहीं अमेरिका अभी भी जहाजों को उस रास्‍ते से ले जाने को लेकर कतरा रहा है। 100 डॉलर के पार कच्‍चा तेल  मिडिल ईस्‍ट से तेल की सप्‍लाई बाधित होने के बाद कच्‍चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. वहीं डब्‍ल्‍यूटीआई कच्‍चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. एलएनजी के दाम में भी तेजी देखी जा रही है. वहीं ईरान का कहना है कि कच्‍चे तेल की कीमतों को वह 200 डॉलर प्रति बैरल तक लेकर जाएगा और अभी युद्ध खत्‍म नहीं करेगा।

पाकिस्तान में दहशत का इशारा, तालिबान ने जारी किया ‘डेथ वारंट’

कंधार अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अब 'आर-पार' की जंग में तब्दील होता दिख रहा है. पाकिस्तान द्वारा की गई एयरस्ट्राइक के बाद अब तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान के प्रमुख शहरों पर हमले की धमकी दी है. यह चेतावनी कथित तौर पर अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद सामने आई है।  रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के बल्ख प्रांत के तालिबान गवर्नर के प्रवक्ता हाजी जाहिद ने कहा कि यदि पाकिस्तान की ओर से ऐसे हमले जारी रहते हैं तो पाकिस्तान के बड़े शहरों को निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने विशेष रूप से इस्लामाबाद, कराची और क्वेटा का उल्लेख किया।  यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में राजधानी काबुल और कंधार सहित कुछ अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं।  हाजी जाहिद,हाजी युसूफ के प्रवक्ता हैं. वफा को तालिबान के शीर्ष नेता हैबतुल्ला अखुंदजादा का करीबी माना जाता है और उत्तरी अफगानिस्तान में उनका प्रभाव काफी मजबूत बताया जाता है।  विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है. अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा लंबे समय से विवाद और सैन्य झड़पों का केंद्र रही है. समय-समय पर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और उग्रवादियों को समर्थन देने के आरोप लगाते रहे हैं।  ताजा बयान के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं. विश्लेषकों के मुताबिक यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और बयानबाजी इसी तरह जारी रही तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।  फिलहाल पाकिस्तान की ओर से तालिबान के इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जरूरी होगी। 

मोजतबा खामेनेई कोमा में और पैर कटने की अफवाह, वेस्टर्न मीडिया में सनसनी

तेहरान ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाला दावा है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं. उनका एक पैर भी काट दिया गया है और उनकी हालत बेहद संजीदा है. ये दावा ब्रिटिश अखबार 'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में किया है।  'द सन' की ये रिपोर्ट उस समय सामने आई, जब कुछ घंटों पहले ही मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में हमले जारी रखे जाएंगे और होर्मुज स्ट्रेट की भी नाकेबंदी रहेगी।   'द सन' ने ये रिपोर्ट अपने सूत्र के हवाले से चलाई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई की हालत बहुत खराब है और वह कोमा में है. वह अस्पताल में ईरान के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री मोहम्मद रजा जफरगंदी की निगरानी में हैं. जफरगंदी ईरान के टॉप सर्जन्स में से एक हैं।  रिपोर्ट में क्या दावा किया गया? 'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मोजतबा खामेनेई तेहरान की सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंटेसिव केयर में है. इस बिल्डिंग के एक हिस्से को भारी सिक्योरिटी के बीच सील कर दिया गया है।  रिपोर्ट में बताया गया कि मोजतबा का एक पैर कट गया है और उनके पेट और लिवर को भी गंभीर चोटें आई हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को उसी हमले में घायल हुए थे, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी के एंकर मोजतबा खामेनेई को 'रमजान का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताते हैं।  'द सन' को सूत्र ने बताया, 'उनका एक या दोनों पैर काट दिए गए हैं. उनका लिवर या पेट भी फट गया है. वह शायद कोमा में भी हैं.' रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान चुपके से मोजतबा खामेनेई से मिलने गए थे. सिना हॉस्पिटल की इंटेंसिव केयर यूनिट में सिर्फ कुछ ही ऑथराइज्ड लोगों को ही जाने की इजाजत है.  कितना मजबूत है ये दावा? 28 फरवरी से जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से मोजतबा खामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।  मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई की मौत के लगभग एक हफ्ते बाद. उसी दिन ईरानी मीडिया ने खबरें दी थीं कि मोजतबा खामेनेई देश को संबोधित करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  सुप्रीम लीडर चुने जाने के पांच दिन के बाद मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश दुनिया के सामने आया. लेकिन उनके संदेश को टीवी पर एक एंकर ने पढ़ा. वह कैमरे पर भी दिखाई नहीं दिए।  ईरान के सरकारी टीवी रिपोर्ट्स के एंकर्स ने मोजतबा खामेनेई को 'रमजान युद्ध का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताया. हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की कि मोजतबा 28 फरवरी को घायल हुए थे या नहीं।  इन्हीं सब बातों के कारण उनकी हेल्थ को लेकर अटकलें, अफवाहें और दावे और भी बढ़ गए हैं. हालांकि, अब तक मोजतबा खामेनेई को सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं, कुछ पुष्टि नहीं हुई है।   

सेंट्रल फोर्स की भर्ती संकट: 93 हजार पद खाली, CRPF में 27 हजार, इस्तीफों में 86% का उछाल

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने  संसद में बताया कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) और असम राइफल्स में कुल 93,139 पद खाली हैं। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री  नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में दी।सबसे ज्यादा पद CRPF में 27,124 खाली हैं, वहीं CISF में 28,342 पद खाली हैं। सबसे कम खाली पद असम राइफल्स में 3,749 हैं। सरकार ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से हर साल कांस्टेबल भर्ती, प्रमुख रैंकों के लिए नोडल बल की व्यवस्था और शारीरिक परीक्षण में रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक (RFID) का उपयोग शामिल है। 5 साल में CAPF में इस्तीफे 86% बढ़े CAPF में इस्तीफों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। 2021 में 1,255 कर्मियों ने इस्तीफा दिया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 2,333 हो गई, यानी करीब 86% की बढ़ोतरी।  भर्ती प्रक्रिया का नया रास्ता राज्य मंत्री राय ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। इनमें कर्मचारी चयन आयोग के जरिए हर साल कांस्टेबल भर्ती, प्रमुख रैंकों के लिए नोडल बल की व्यवस्था और शारीरिक परीक्षण में रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान तकनीक का इस्तेमाल शामिल है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से रिक्तियों को भरने में तेजी आएगी। इस्तीफों की alarming बढ़ोतरी सरकार के मुताबिक CAPF में इस्तीफों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। 2021 में 1,255 के मुकाबले 2025 में 2,333 कर्मियों ने इस्तीफा दिया, जो कि लगभग 86 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। हालांकि, सुसाइड, आपसी हत्या और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामलों में कमी आई है, जो एक सुकून भरी बात है। भारत टैक्सी का नया विस्तार इस बीच, भारत टैक्सी ने अपने राइड-हेलिंग सेवा का विस्तार करने का ऐलान किया है। सहकारी क्षेत्र की इस सेवा को अगले 2 से 3 वर्षों में सभी बड़े शहरों तक पहुँचाया जाएगा। सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल ने कहा कि यह सेवा वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में कार्यरत है। अब तक 4 लाख ड्राइवर इस सेवा से जुड़ चुके हैं। ग्रीन एक्सप्रेसवे का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट सरकार ने ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाने का एक बड़ा निर्णय लिया है। यह एक्सप्रेसवे सूरत से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर होते हुए कुरनूल तक जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इससे दिल्ली-चेन्नई की दूरी 320 किलोमीटर घट जाएगी। साथ ही, दिल्ली-मुंबई यात्रा भी लगभग 12 घंटे में संभव होगी। गडकरी बोले- सूरत से कुरनूल तक ग्रीन एक्सप्रेसवे बनेगा सरकार सूरत से नासिक, अहमदनगर और सोलापुर होते हुए कुरनूल तक ग्रीन एक्सप्रेसवे बनाएगी। इससे दिल्ली-चेन्नई दूरी 320 किमी घटेगी। गडकरी ने कहा, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पूरा होने पर दिल्ली-मुंबई यात्रा भी लगभग 12 घंटे में संभव होगी।     2025 में एक लाख से ज्यादा पेंशन शिकायतें दर्ज- सरकार ने लोकसभा में बताया कि पोर्टल पर 2025 में 1.07 लाख पेंशन शिकायतें मिलीं। औसत निपटान समय 19 दिन रहा।     पीएम सूर्य घर योजना से 31 लाख लोग लाभान्वित- सरकार ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 6 मार्च 2026 तक 31.12 लाख घरों में रूफटॉप सोलर लगे। लक्ष्य 2027 तक एक करोड़ घरों का है।     वरिष्ठ पदों पर SC/ST प्रतिनिधित्व का डेटा नहीं- संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के पदों पर एससी/एसटी प्रतिनिधित्व का अलग डेटा नहीं रखा जाता। पदोन्नति में ग्रुप-ए की शुरुआती श्रेणी तक 15% एससी और 7.5% एसटी आरक्षण है।     टीवी विज्ञापनों में चमत्कारी दावे नहीं कर सकते- सरकार ने कहा कि निजी टीवी चैनलों के सभी विज्ञापन केबल टीवी नेटवर्क एक्ट, 1995 के एडवरटाइजिंग कोड के तहत होंगे। चमत्कारी गुणों के दावे प्रतिबंधित हैं, उल्लंघन पर कार्रवाई होती है।    

Air Taxi की टेस्टिंग शुरू, अब मिनटों में पहुंचे ऑफिस और एयरपोर्ट

नई दिल्ली  आसमान में उड़ती टैक्सी. सुनने में अब भी थोड़ा साइंस-फिक्शन जैसा लगता है. लेकिन तकनीक की दुनिया इस सपने को धीरे-धीरे सच में बदल रही है. अमेरिकी कंपनी Joby Aviation ने अपनी पहली प्रोडक्शन इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी (Air Taxi) की उड़ान शुरू कर दी है. यानी एक ऐसी मशीन, जिसमें आने वाले समय में लोग बैठकर शहर के ऊपर से उड़ते हुए ऑफिस या एयरपोर्ट जा सकेंगे. कंपनी का दावा है कि अगर सब ठीक रहा तो जल्द ही यह एयर टैक्सी आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हो सकेगी। जॉबी एविएशन ने घोषणा की है कि, कंपनी ने अपनी पहली प्रोडक्शन एयर टैक्सी की टेस्टिंग शुरू कर दी है. कंपनी का कहना है कि यह कदम पैसेंजर सर्विस शुरू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो आने वाले समय में लोग शहरों के ऊपर से इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी में सफर करते नजर आ सकते हैं। कंपनी ने बताया कि शुरुआती उड़ानें उसके मरीना, कैलिफोर्निया स्थित प्लांट में की जा रही हैं. यहां कंपनी के पायलट एयरक्राफ्ट की टेस्टिंग कर रहे हैं. दरअसल, कंपनी ये टेस्टिंग इसलिए कर रही है ताकि एयरक्रॉफ्ट बिना किसी तकनीकी खामी के फेडरेशन के सामने पेश किया जा सके. अमेरिकी विमानन नियामक संस्था फेडरेशन एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) इसकी आधिकारिक जांच और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि इसी साल इसके लिए जरूरी टेस्ट पूरे कर लिए जाएंगे। कैसी है ये Air Taxi Joby Aviation कई साल से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. कंपनी पहले ही नियामकों (रेगुलेटर्स) के साथ मिलकर एयरक्राफ्ट के डिजाइन, उसके पार्ट्स और प्रोडक्शन प्लान को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया में काफी आगे बढ़ चुकी है. कंपनी के डेवलपमेंट मॉडल पहले की टेस्टिंग में 50,000 मील से ज्यादा उड़ान भी भर चुके हैं. यानी टेक्निकली अब तक इस फ्लाइंग प्रोसेस में कंपनी कोई ख़ास समस्या नहीं आई है। Joby की एयर टैक्सी का डिजाइन काफी खास है. यह हेलिकॉप्टर और हवाई जहाज दोनों का मिला-जुला रूप है. इसमें 6 रोटर लगे हैं जो इसे अपनी जगह से ही सीधा टेक-ऑफ और लैंडिंग करने में मदद करते हैं. इसके बाद यह सामान्य एयरक्रॉफ्ट की तरह आगे की ओर उड़ान भरती है. यह इलेक्ट्रिक एयरक्राफ्ट एक पायलट और 4 पैसेंजर को लेकर उड़ान भर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह हेलिकॉप्टर की तुलना में ज्यादा साइलेंट है। ये एक इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट जैसा होगा. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 200 मील प्रति घंटा (321 किमी/घंटा) होगी और एक बार चार्ज करने पर यह लगभग 100 मील (160 किमी) तक उड़ान भर सकेगी. शहर के भीतर यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इसमें कई अलग-अलग लेवल की सेफ्टी सिस्टम भी लगाए गए हैं। जल्द शुरू होगी पैसेंजर सर्विस कंपनी की योजना इस साल के अंत तक Dubai में अपनी पहली पैसेंजर सर्विस शुरू करने की है. इसके लिए शहर में 4 लैंडिंग साइट बनाने की योजना है, जिनमें से दो पर काम शुरू हो चुका है. इसके अलावा कंपनी अमेरिका में भी लिमिटेड लेवल पर ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है. यह एक फेडरल प्रोग्राम का हिस्सा होगा, जिसका मकसद इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी को नेशनल एयरस्पेस में शामिल करना है। UBER का ऐलान हाल ही में मशहूर राइड-हेलिंग ऐप Uber ने ऐलान किया था कि, कंपनी जॉबी एविएशन के साथ मिलकर एयर टैक्सी सर्विस शुरू करने जा रही है. एयर टैक्सी की बुकिंग प्रक्रिया बिल्कुल सामान्य राइड की तरह होगी. आप ऐप खोलेंगे, अपना डेस्टिनेशन डालेंगे और अगर उस रास्ते पर हवाई सफर संभव होगा तो एयर टैक्सी का विकल्प अपने आप दिख जाएगा. इस एक ही बुकिंग में आपको पहले टेक-ऑफ प्वाइंट तक वाया रोड ले जाया जाएगा, फिर हवा में उड़ान होगी और उतरने के बाद आखिरी मंजिल तक फिर सड़क मार्ग से ही सफर कराया जाएगा. यानी पूरा सफर एक ही टिकट और एक ही ऐप में। आने वाले वर्षों में कंपनी अपने प्रोडक्शन को भी तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है. इसके लिए कैलिफोर्निया के प्लांट के साथ-साथ डेटन, ओहियो स्थित फैक्ट्री में भी प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा. कंपनी का टार्गेट है कि साल 2027 तक हर महीने करीब 4 एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जाए. इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

किसानों को मिलेगी 22वीं किस्त 13 मार्च को, कुछ किसान रह जाएंगे वंचित, जानें पूरी जानकारी

नई दिल्ली  देशभर के करोड़ों किसान जिस किस्त का इंतजार कर रहे थे, उसका समय अब करीब आ गया है. सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों को मिलने वाली अगली राशि जल्द उनके खातों में पहुंचने वाली है. दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल आर्थिक मदद दी जाती है। जिससे खेती से जुड़े छोटे खर्चों में राहत मिल सके. कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि अगली किस्त कब जारी होगी. अब इस पर तस्वीर साफ हो गई है. सरकार के मुताबिक पात्र किसानों के बैंक खातों में 13 मार्च को 22वीं किस्त भेजी जाएगी. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कुछ किसान ऐसे होंगे जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंचेंगे। कब खाते में आएंगे 2 हजार रुपये? काफी समय से किसानों के बीच यह सवाल चल रहा था कि अगली किस्त कब जारी होगी. पहले माना जा रहा था कि फरवरी के आखिर तक पैसे आ सकते हैं. फिर यह चर्चा भी हुई कि होली से पहले किस्त जारी हो सकती है. अब सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि 13 मार्च को किसानों के खातों में 2000 रुपये भेजे जाएंगे. यह पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है, इसलिए किसानों को कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। किसान योजना में ऐसे मिलता है फायदा     हर साल किसानों को कुल 6000 रुपये की मदद मिलती है.     यह रकम तीन किस्तों में दी जाती है.     हर चार महीने में 2,000 रुपये खाते में भेजे जाते हैं.     अब तक किसानों को 21 किस्तें मिल चुकी हैं.     अब 22वीं किस्त जारी होने के बाद लाखों किसानों को एक बार फिर सीधी आर्थिक मदद मिलने वाली है. इन किसानों को नहीं मिलेंगे पैसे हालांकि सभी किसानों को इस बार किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. कुछ जरूरी नियम पूरे न होने पर किस्त अटक सकती है. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि योजना का लाभ लेने के लिए कुछ प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी है। अगर ये काम पूरे नहीं हैं तो पैसे रुक सकते हैं:     ई-केवाईसी पूरा नहीं किया है.     फार्मर आईडी नहीं बनवाई है.     बैंक खाते की जानकारी गलत है.     आधार और बैंक अकाउंट लिंक नहीं है. इन कारणों से कई किसानों की किस्त रुक जाती है. इसलिए जिन किसानों ने अभी तक ये काम पूरे नहीं किए हैं. उन्हें जल्द से जल्द अपडेट कर लेना चाहिए। आपके खाते में पैसे आएंगे या नहीं किसानों के लिए यह जानना भी आसान है कि उनके खाते में किस्त आएगी या नहीं. इसके लिए ऑनलाइन स्टेटस चेक किया जा सकता है.स्टेटस चेक करने के लिए ये आसान तरीका अपनाएं। ऐसे चेक करें स्टेटस     पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.     Farmers Corner में Know Your Status ऑप्शन पर क्लिक करें.     अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चा भरें.     इसके बाद स्क्रीन पर पूरी जानकारी दिखाई दे जाएगी. यहां से किसान यह भी देख सकते हैं कि उनका ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार बैंक सीडिंग पूरा है या नहीं. अगर पहले किसी वजह से किस्त रुक गई थी और अब सभी जरूरी काम पूरे कर दिए गए हैं. तो आगे आने वाली किस्त फिर से मिल सकती है।

ये तो बस शुरुआत है — LPG और तेल संकट पर राहुल गांधी का सरकार पर वार, संसद में तीखी बहस

नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से पैदा हुए तेल और एलपीजी संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह तो बस अभी शुरुआत है। इसका बहुत बुरा असर होगा। राहुल गांधी ने एपस्टीन का भी जिक्र किया, जिसके बाद हंगामा मच गया। राहुल गांधी ने कहा, ''मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ गई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान जंग में हैं। इस जंग के बहुत बड़े नतीजे होंगे। सेंट्रल रास्ता, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल बहता है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बंद हो गया है। इसका बहुत बुरा असर होगा, खासकर हम पर, क्योंकि हमारे तेल और नैचुरल गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से आता है। दर्द तो अभी शुरू हुआ है। रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं। एलपीजी को लेकर बहुत ज़्यादा पैनिक है…यह तो बस शुरुआत है।"