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होली के दौरान हमले की साजिश, भीड़भाड़ वाली जगहों की रेकी; लश्कर आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी जांच

नई दिल्ली दिल्ली में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों का नेटवर्क तैयार किया गया। इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा लश्कर का एक कमांडर कर रहा था, जिसने वहीं बैठक कर हमलों की पूरी रूपरेखा बनाई। जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के निशाने पर देश के बड़े मेट्रो शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई थे। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्थानों की रेकी भी कर ली गई थी और होली के मौके पर हमले की तैयारी थी। खुफिया इनपुट के बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज की और मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया। हाफिज सईद और लखवी से सीधा संपर्क जांच से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बांग्लादेशी हैंडलर शब्बीर अहमद लोन सीधे लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और आतंकी सरगना जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था।पुलिस का कहना है कि आईएसआई भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के जरिए लोकल मॉड्यूल खड़ा कर रही थी। इसके लिए फंडिंग भी की जा रही थी, ताकि बड़े शहरों में समन्वित हमले किए जा सकें। शब्बीर इस नेटवर्क में आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के आतंकी सैदुल इस्लाम के बीच कड़ी का काम कर रहा था। सैदुल संदिग्धों को निर्देश देता था और उन्हें टारगेट तय करने में मदद करता था। 2007 में पकड़ा गया, 2018 में फिर सक्रिय स्पेशल सेल के अनुसार शब्बीर अहमद लोन 2007 में आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था। सजा पूरी करने के बाद 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा लश्कर से जुड़ गया। उसने अपना बेस बांग्लादेश में बनाया, जबकि कनेक्शन पाकिस्तान से बनाए रखे। अधिकारियों का कहना है कि जेल से रिहाई के बाद उसने पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय किया और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को जोड़ना शुरू किया। जांच एजेंसियों को उसके डिजिटल ट्रेल से कई अहम सुराग मिले हैं। सोशल मीडिया से जोड़ा गया मॉड्यूल पुलिस के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों को पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में लाया गया। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई। कोलकाता से पकड़े गए उमर फारूक को संवेदनशील स्थानों की रेकी का जिम्मा दिया गया था। संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने और सुरक्षित ठिकाने बनाने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में हथियार जुटाने की कोशिशों से जुड़े वीडियो और चैट सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है। ऑपरेशन जारी, कई राज्यों में छापे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी जारी है। कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका में कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि समय रहते साजिश नाकाम कर दी गई, लेकिन नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचना अभी बाकी है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और देश के बड़े शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मॉड्यूल लंबी योजना का हिस्सा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो होली के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था। विवादित पोस्टर से खुला मॉड्यूल का राज स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े आठ संदिग्धों में से चार दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए थे। जांच यहीं से आगे बढ़ी और नेटवर्क का सिरा हाथ लगा। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टरबाजी महज ट्रायल रन थी, असली मकसद बड़े हमले की तैयारी था। खुफिया एजेंसियों ने पहले अलर्ट जारी किया था कि आईएसआई समर्थित लश्कर लोकल मॉड्यूल तैयार कर रहा है। एक अन्य इनपुट में लाल किले के आसपास हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही इनपुट मिला था कि लश्कर होली के दौरान बड़ी वारदात की फिराक में है।

‘एल मेंचो’ ड्रग माफिया मिलिट्री ऑपरेशन में मारा गया, मेक्सिको में हिंसा के बीच भारत ने दी यात्रा एडवाइजरी

 जलिस्को मैक्सिकन डिफेंस मिनिस्ट्री ने ऐलान किया है कि दुनिया के सबसे वॉन्टेड ड्रग तस्करों में से एक और 'एल मेंचो' के नाम से कुख्यात नेमेसियो रुबन ओसेगुएरा सर्वेंटेस एक सैन्य अभियान में मारा गया है. ओसेगुएरा की मौत के बाद पूरे मैक्सिको में जगह-जगह से हिंसा की खबरें आ रही हैं. यह ऑपरेशन पश्चिमी राज्य जलिस्को में मैक्सिकन सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया था. मंत्रालय के मुताबिक, 59 वर्षीय भगोड़े ड्रग लॉर्ड की मौत मिलिट्री ऑपरेशन के बाद एयर ट्रांसफर (हवाई मार्ग से ले जाने) के दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण हुई. एल मेंचो का संगठन 'जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल' (CJNG) पिछले एक दशक में मेक्सिको का सबसे पावरफुल आपराधिक समूह बन चुका था और अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी का प्रमुख स्रोत था.  हालांकि, राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से परहेज किया है. उन्होंने कहा कि इस मामले पर पूरी जानकारी सुरक्षा कैबिनेट द्वारा दी जाएगी. पूरे मेक्सिको में अफ़रा-तफ़री… अधिकारियों ने बताया कि ओसेगुएरा की मौत की ख़बरों से CJNG के मज़बूत गढ़ वाले कई राज्यों में हिंसा फैल गई, जहां बंदूकधारियों ने मिलकर बदले की कार्रवाई में कई गाड़ियां जला दीं और मुख्य सड़कों को ब्लॉक कर दिया. लोकल मीडिया और अधिकारियों ने बताया कि जलिस्को, गुआनाजुआतो, नायरिट, मिचोआकन और तमाउलिपास में बसों, ट्रकों और कारों में आग लगा दी गई, जबकि ग्वाडलहारा में लोग बदले की कार्रवाई के डर से सड़कों और ट्रांसपोर्ट हब से भाग गए. पब्लिक के लिए सलाह जारी… गवर्नर पाब्लो लेमस नवारो ने कहा कि स्टेट में अभी भी 'कोड रेड' सिक्योरिटी अलर्ट है और उन्होंने लोगों से घर के अंदर रहने की अपील की. ​​इलाके के कुछ हिस्सों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद कर दिया गया और चल रही झड़पों की वजह से स्टेट हाईवे पर यात्रा करने से मना कर दिया गया. लेमस ने कहा, "हम कोड रेड में हैं. हम यह सलाह दोहराते हैं कि अपने घरों से बाहर न निकलें. कई फ़ेडरल जगहों पर झड़पें हो रही हैं." लोकल मीडिया ने बताया कि ओसेगुएरा ग्वाडलहारा से करीब 80 मील दक्षिण-पश्चिम में एक पहाड़ी शहर, तपालपा में या उसके पास एक फ़ेडरल ऑपरेशन के दौरान मारा गया. रीजनल मीडिया में चल रहे वीडियो में इलाके में भारी गोलीबारी और सुरक्षा तैनात दिखाई दे रही थी. CJNG की जड़ें लंबे वक्त से ग्रामीण जलिस्को में हैं, जहां ओसेगुएरा (पूर्व पुलिस अफ़सर) एक कार्टेल नेटवर्क को लीड करने के लिए उभरा, जो इलाके पर कब्ज़ा करने और तस्करी के रास्तों को कंट्रोल करने के लिए मिलिट्री-स्टाइल फ़ोर्स और बेरहमी से डराने-धमकाने पर निर्भर था. मेक्सिको में US एम्बेसी ने CJNG कार्टेल के लीडर के मारे जाने के बाद बदले की कार्रवाई से जुड़ा सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. यूएस एंबेसी ने कहा, 'चल रहे सिक्योरिटी ऑपरेशन और उससे जुड़ी सड़कों पर रुकावटों और क्रिमिनल एक्टिविटी की वजह से US नागरिकों को अगली सूचना तक सुरक्षित जगह पर रहना चाहिए.' भारत ने जारी की एडवाइजरी भारत ने भी मेक्सिको के हालात को देखते हुए अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है.

पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन, 71 वर्ष की उम्र में चले गए, ममता बनर्जी के साथ शुरू किया था TMC

कोलकाता पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और कभी तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद नंबर दो नेता माने जाने वाले मुकुल रॉय का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 71 वर्षीय रॉय को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां तड़के करीब 1.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'कल रात कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई. वह पिछले 600 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. यह मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है.'  मुकुल रॉय का जन्म उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा में 14 मई 1954 को हुआ था. वह राजनीति में आने से पहले वे ट्रेड यूनियन की गतिविधियों से जुड़े रहे. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से साइंस में बैचलर डिग्री प्राप्त की थी और साल 2006 में मदुरै के कामराज विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की डिग्री ली थी. जनवरी 1998 में अस्तित्व में आई तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे मुकुल रॉय, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी भी रहे. यूथ कांग्रेस से शुरू की राजनीतिक पारी ममता बनर्जी की तरह ही मुकुल रॉय ने भी बंगाल में यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद उन्होंने पार्टी में ममता बनर्जी के साथ मिलकर काम किया और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया. इसके बाद रॉय दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे. वह 2006 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता के रूप में उन्होंने जिम्मेदारी निभाई. TMC को मजबूत करने में अहम भूमिका यूपीए‑II सरकार में मुकुल रॉय ने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया. इसके बाद मार्च 2012 में उन्होंने पार्टी के सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली. वह बंगाल व दिल्ली दोनों जगह पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार रहे. 2011 के बाद, जब तृणमूल कांग्रेस ने 34 वर्षों के वाम शासन का अंत किया और ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं, तब पार्टी को मजबूत करने में मुकुल रॉय की अहम भूमिका रही. मुकुल रॉय 2015 तक तृणमूल कांग्रेस  के महासचिव रहे. उनके कार्यकाल में सीपीआई(एम) और कांग्रेस से कई बड़े नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा. मुकुल रॉय थोड़े समय के लिए BJP में रहे मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाते हुए नवंबर 2017 में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया. उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए राज्य में भाजपा का आधार मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने राज्य में 18 सीटें जीतीं. रॉय ने तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को भाजपा में शामिल कराने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से भाजपा विधायक चुने गए. कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द की थी विधायकी हालांकि जल्द ही भाजपा से भी उनकी दूरी बढ़ने लगी और अंततः जून 2021 में वह वापस तृणमूल कांग्रेस में लौट आए. लेकिन तृणमूल में वापसी के बाद वह पार्टी में न तो पहले जैसी राजनीतिक हैसियत में दिखे और न ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे. मुकुल रॉय डिमेंशिया समेत कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे. 13 नवंबर 2025 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2021 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित होने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के मामले में दलबदल कानून के तहत उनको विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था.

नेपाल: पोखरा-काठमांडू बस दुर्घटना, त्रिशूली नदी में गिरी, 17 की जान गई

काठमांडू नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई. पोखरा से काठमांडू आ रही एक यात्री बस त्रिशूली नदी में गिर गई. इस हादसे में मरने वालों की सूची में 6 महिलाएं और 11 पुरुषों की शामिल हैं. इस हादसे में कुल 27 लोगों को अस्पतालों में भेजा गया है. दुर्घटना में विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं. मृतकों और घायलों में एक न्यूजीलैंड का नागरिक भी बताया गया है. बस रात करीब 1 बजे पृथ्वी राजमार्ग के अंतर्गत पोखरा से काठमांडू की ओर आ रही थी. बस धादिंग के बेनिघाट रोरांग में त्रिशूली नदी किनारे जा गिरी. बस सड़क से लगभग 300 मीटर नीचे गिरकर क्षतिग्रस्त अवस्था में मिली. टॉर्च की रोशनी में घायलों का बचाव नाव की मदद से यात्रियों को करीब एक किलोमीटर नीचे तक लाया गया, वहां से उन्हें सड़क तक ऊपर चढ़ाकर एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया. रात का समय, दुर्गम स्थान और राहत सामग्री की कमी के कारण बचाव कार्य में मुश्किल हुई. प्रमुख जिला अधिकारी सुवेदी फोन पर बताया, टॉर्च की रोशनी में घायलों का बचाव किया गया. हमें राहत सामग्री की कमी महसूस हुई. 27 लोगों को पहुंचाया गया अस्पताल सुवेदी ने बताया कि घटनास्थल से 8 महिलाएं, 18 पुरुष और एक बालिका सहित कुल 27 लोगों को बचाकर विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया है. उन्होंने हादसे में 6 महिलाओं और 11 पुरुषों की मौत होने की जानकारी दी. दुर्घटनास्थल पर सेना, सशस्त्र प्रहरी बल और नेपाल पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया. सशस्त्र प्रहरी बल के विपद प्रबंधन बेस आदमघाट से डीएसपी सुनील गिरी के नेतृत्व में एक टीम तथा विपद प्रबंधन प्रशिक्षण शिक्षालय कुरिनटार से गोताखोरों की टीम भी राहत और बचाव कार्य में तैनात है.

कटरा में बढ़ी सुरक्षा: मां वैष्णो देवी भवन पर मंडराया आतंकी साया, सेना तैनात

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकी घटनाक्रमों के बाद अब जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी मां वैष्णो देवी के पावन भवन और आधार शिविर कटरा को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इस गंभीर सूचना के बाद माता के दरबार और पूरे कटरा शहर को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। आतंकी अलर्ट के बाद कटरा से लेकर भवन तक सुरक्षा व्यवस्था को मल्टी-लेयर कर दिया गया है। आधार शिविर कटरा और यात्रा मार्ग पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए यात्रा मार्ग पर विशेष QRT टीमों को तैनात किया गया है जो आधुनिक हथियारों से लैस हैं।जमीन के साथ-साथ आसमान से भी निगरानी रखी जा रही है। चप्पे-चप्पे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए कड़े नियम सुरक्षा को देखते हुए यात्रियों के लिए भी जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त कर दिया गया है। RFID कार्ड और वेरिफिकेशन: बिना वैध  RFID कार्ड के किसी भी यात्री को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। सघन चेकिंग: कटरा के प्रवेश द्वारों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर हर वाहन और यात्री की सघन तलाशी ली जा रही है। पहचान पत्र अनिवार्य: प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे हर समय अपना मूल पहचान पत्र साथ रखें और सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग करें। यात्रा पर कोई रोक नहीं, पर सतर्कता जरूरी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि माता वैष्णो देवी की यात्रा सुचारू रूप से चल रही है और इसे रोका नहीं गया है। हालांकि, श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति के दिखने पर तुरंत पुलिस या श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों को सूचित करें।  

यात्रियों को राहत! ट्रेन छूटने से ठीक पहले तक बदलें बोर्डिंग स्टेशन, रेलवे ने बदले नियम

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। अब ट्रेन छूटने के चंद मिनटों पहले तक आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए इस नए प्रस्ताव से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अंतिम समय में किसी कारणवश अपना स्टेशन बदलना चाहते हैं। अब दूसरे चार्ट तक बदलें अपना बोर्डिंग स्टेशन भारतीय रेलवे अपने सिस्टम को और अधिक 'पैसेंजर फ्रेंडली' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। रेलवे बोर्ड के एक नए प्रस्ताव के अनुसार, यात्री अब ट्रेन का दूसरा आरक्षण चार्ट (Second Reservation Chart) तैयार होने तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेन प्रस्थान करने के लगभग 30 मिनट पहले तक यात्रियों के पास अपना स्टेशन बदलने का विकल्प मौजूद रहेगा।   क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? वर्तमान नियमों के तहत, बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव केवल पहला चार्ट बनने तक ही किया जा सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों के मामले में, पहला चार्ट ट्रेन छूटने से 8 से 20 घंटे पहले ही बन जाता है। ऐसे में यदि किसी यात्री को अंतिम समय में शहर के किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी हो, तो उसके पास कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं बचता था। नए नियम से यात्रियों की यह 'लास्ट मिनट' की चिंता दूर हो जाएगी। तकनीकी जांच और क्रियान्वयन रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग-द्वितीय) संजय मनोचा ने 19 फरवरी को क्रिस (CRIS) को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव की तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) पर रिपोर्ट मांगी है।     सॉफ्टवेयर अपडेट: बोर्ड यह समझना चाहता है कि इस बदलाव से रेलवे के रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।     चरणबद्ध शुरुआत: रिपोर्ट सकारात्मक आने पर इस सुविधा को पहले कुछ चुनिंदा ट्रेनों में 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू किया जाएगा, जिसके बाद इसे सभी ट्रेनों के लिए लागू कर दिया जाएगा। क्या हुआ मुख्य बदलाव     पुराना नियम : केवल प्रथम चार्ट (आठ-20 घंटे पहले) तक बदलाव संभव।     नया प्रस्ताव : द्वितीय चार्ट (ट्रेन प्रस्थान से 30 मिनट पहले) तक बदलाव की सुविधा।     उद्देश्य : यात्रियों को अंतिम समय में स्टेशन बदलने का विकल्प देना। यात्रियों को क्या मिलेगा?     अचानक योजना बदलने पर भी सीट सुरक्षित रहेगी।     बिना बोर्डिंग पॉइंट बदले दूसरे स्टेशन से चढ़ने पर होने वाले जुर्माने का डर खत्म होगा।     यात्री IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से यह बदलाव कर पाएंगे।

दिल्ली के बाद कटरा में अलर्ट, मां वैष्णो देवी यात्रा पर सुरक्षा कड़ी, हर कदम पर निगरानी

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए आतंकी घटनाक्रमों के बाद अब जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी मां वैष्णो देवी के पावन भवन और आधार शिविर कटरा को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इस गंभीर सूचना के बाद माता के दरबार और पूरे कटरा शहर को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। आतंकी अलर्ट के बाद कटरा से लेकर भवन तक सुरक्षा व्यवस्था को मल्टी-लेयर कर दिया गया है। आधार शिविर कटरा और यात्रा मार्ग पर भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए यात्रा मार्ग पर विशेष QRT टीमों को तैनात किया गया है जो आधुनिक हथियारों से लैस हैं।जमीन के साथ-साथ आसमान से भी निगरानी रखी जा रही है। चप्पे-चप्पे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं के लिए कड़े नियम सुरक्षा को देखते हुए यात्रियों के लिए भी जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त कर दिया गया है। RFID कार्ड और वेरिफिकेशन: बिना वैध  RFID कार्ड के किसी भी यात्री को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है।   सघन चेकिंग: कटरा के प्रवेश द्वारों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर हर वाहन और यात्री की सघन तलाशी ली जा रही है। पहचान पत्र अनिवार्य: प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे हर समय अपना मूल पहचान पत्र साथ रखें और सुरक्षाकर्मियों के साथ सहयोग करें। यात्रा पर कोई रोक नहीं, पर सतर्कता जरूरी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि माता वैष्णो देवी की यात्रा सुचारू रूप से चल रही है और इसे रोका नहीं गया है। हालांकि, श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी लावारिस वस्तु को न छुएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति के दिखने पर तुरंत पुलिस या श्राइन बोर्ड के कर्मचारियों को सूचित करें।

BNP सरकार बनी ‘बिजनेस क्लास’ की कैबिनेट? 70% मंत्री बिजनेसमैन, सांसदों में करोड़पति-अरबपति हावी

ढाका तारिक रहमान (Tarique Rahman) के नेतृत्व में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने 13वें संसदीय चुनाव में निर्णायक जीत के बाद सरकार का गठन किया है। चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथपत्रों के अनुसार 50 सदस्यीय कैबिनेट (मंत्री और राज्य मंत्री) में से 35 यानी करीब 70% ने अपने पेशे के रूप में व्यवसाय दर्ज किया है। यह जानकारी Dhaka Tribune की रिपोर्ट में सामने आई। आंकड़ों के मुताबिक 19 कैबिनेट मंत्री और 16 राज्य मंत्री खुद को व्यवसायी बताते हैं। वकील दूसरी सबसे बड़ी पेशेवर श्रेणी हैं, जबकि कई सदस्यों ने एक से अधिक पेशे का उल्लेख किया है। उल्लेखनीय है कि केवल दो सदस्य प्रधानमंत्री तारिक रहमान और शिक्षा मंत्री एएनएम एहसानुल हक मिलन ने “राजनीति” को अपना मुख्य पेशा बताया। 17 फरवरी को नेशनल पार्लियामेंट के साउथ प्लाजा में 25 मंत्रियों, जिनमें दो टेक्नोक्रेट कोटे से थे, ने शपथ ली। भ्रष्टाचार-रोधी संस्था Transparency International Bangladesh (TIB) के कार्यकारी निदेशक इफ्तेखारुज्जमान ने चेतावनी दी कि कैबिनेट में व्यवसायियों की अधिकता से हितों के टकराव की आशंका बढ़ सकती है। उनके अनुसार मंत्रियों को उन फैसलों से दूर रहना चाहिए जिनसे उनके निजी या क्षेत्रीय कारोबारी हित प्रभावित हो सकते हैं।  रिपोर्टों के अनुसार 300 निर्वाचित सांसदों में से 174 (59%) ने व्यवसाय को अपना पेशा बताया है, जिनमें कम से कम 15 परिधान उद्योग से जुड़े हैं। BNP ने 209 सीटें जीतीं, जिनमें 145 विजेता उम्मीदवार व्यवसायी पृष्ठभूमि के हैं। वहीं Bangladesh Jamaat-e-Islami ने 68 सीटें हासिल कीं, जिनमें 20 सांसद व्यवसाय से जुड़े हैं। TIB के अध्ययन के अनुसार 236 सांसद (करीब 79.46%) करोड़पति हैं और 13 अरबपति हैं। BNP के 189 सांसद (90.87%) करोड़पति हैं, जबकि जमात के 38 सांसद (55.07%) इस श्रेणी में आते हैं।  

टैरिफ पॉलिसी पर ट्रंप घिरे, बहुमत अमेरिकियों ने जताई नाराजगी और क्षमता पर उठे सवाल

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति अपने कामों से अधिक अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। कब क्या कहेंगे, शायद ट्रंप खुद नहीं जानते। यही कारण है कि वे अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। इस बीच एक सर्वे रिपोर्ट सामने आया है। इस सर्वे के अनुसार, अधिकतर ट्रंप की नीतियों और देश चलाने के तरीके से खुश नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति अपने कामों से अधिक अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। कब क्या कहेंगे, शायद ट्रंप खुद नहीं जानते। यही कारण है कि वे अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। इस बीच एक सर्वे रिपोर्ट सामने आया है। इस सर्वे के अनुसार, अधिकतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और देश चलाने के तरीके से खुश नहीं है। फरवरी 2026 के सर्वेक्षण में ट्रंप की कुल अस्वीकृति दर (Disapproval Rating) लगभग 60% पहुंच गई है, जो उनके दूसरे कार्यकाल में अब तक की सबसे ऊंची दरों में से एक है और 2021 में पद छोड़ते समय वाली स्थिति के समान है। सर्वे के अनुसार, अधिकतर लोग महंगाई, टैरिफ, विदेश संबंध, आव्रजन और समग्र अर्थव्यवस्था जैसे रोजमर्रा के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ट्रंप के तरीके से असहमत हैं। यह सर्वेक्षण इप्सोस द्वारा इप्सोस के नॉलेजपैनल के जरिए किया गया था, और यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पहले के वैश्विक टैरिफ को रद्द करने से ठीक पहले हुआ था। सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग दो-तिहाई अमेरिकी (करीब 65%) ट्रंप द्वारा महंगाई से निपटने के तरीके से असहमत हैं। आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाने के उनके तरीके को 64% लोग नापसंद करते हैं, जबकि 62% लोग विदेशी संबंधों को संभालने के तरीके से असहमत हैं। 58% प्रतिभागियों ने आव्रजन (इमिग्रेशन) को संभालने के तरीके का विरोध किया, और 57% ने कहा कि समग्र अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है। इनमें से किसी भी मुद्दे पर ट्रंप को जनता से स्पष्ट समर्थन नहीं मिल रहा है। ट्रंप से नाखुश लेकिन डेमोक्रेट्स पर भरोसा नहीं सर्वे के अनुसार, अधिकतर लोग ट्रंप से नाखुश हैं, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स पर भी पूरा भरोसा नहीं है। दरअसल, जब लोगों से पूछा गया कि देश की सबसे बड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए वे किस पर ज्यादा भरोसा करते हैं, तो राय लगभग बराबर बंट गई। ट्रंप (33%), डेमोक्रेट्स (31%), या 'दोनों में से कोई नहीं' (31%)। सर्वे रिपोर्ट से साफ है कि कई अमेरिकी दोनों पक्षों से नाखुश हैं। सर्वे के अनुसार, ट्रंप को सबसे कम समर्थन डेमोक्रेट्स और निर्दलीय (इंडिपेंडेंट) मतदाताओं से मिला, जिन्होंने लगभग हर मुद्दे पर उनसे असहमति जताई। इतना ही नहीं, रिपब्लिकन पार्टी में भी मतभेद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) आंदोलन के मजबूत समर्थक ज्यादातर ट्रंप के फैसलों से सहमत थे, लेकिन MAGA से खुद को अलग मानने वाले रिपब्लिकन अधिक आलोचनात्मक थे, खासकर महंगाई और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर। कुल मिलाकर, ट्रंप की अस्वीकृति दर लगभग 60% है, जो उनके दूसरे कार्यकाल में अब तक की सबसे ऊंची दरों में से एक है और 2021 में पद छोड़ते समय वाली दर के बराबर है। ट्रंप के सत्ता संभालने के हालात और हुए खराब इस बीच, अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का नजरिया भी निराशाजनक है। लगभग आधे अमेरिकियों का कहना है कि ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद हालात और खराब हुए हैं। सिर्फ करीब 3% लोगों ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। सर्वेक्षण में शामिल केवल 22% लोगों ने ही आर्थिक रूप से खुद को बेहतर महसूस किया, जबकि अधिकांश ने कहा कि उनकी स्थिति पहले जैसी है या और खराब हो गई है। सर्वेक्षण में ट्रंप की राष्ट्रपति बनने की योग्यता पर भी सवाल उठे। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, आधे से ज्यादा अमेरिकियों ने कहा कि उनमें राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी मानसिक क्षमता नहीं है, और लगभग आधे ने कहा कि वे शारीरिक रूप से भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। रिपब्लिकन इस पर काफी हद तक असहमत थे, लेकिन डेमोक्रेट्स और निर्दलीय मतदाताओं ने इन चिंताओं को मजबूती से साझा किया। भरोसा भी एक बड़ी समस्या है। लगभग 70% अमेरिकियों (दस में से सात) ने कहा कि ट्रंप ईमानदार या भरोसेमंद नहीं हैं। कई लोगों का मानना है कि वे राष्ट्रपति पद का दुरुपयोग अपने निजी फायदे के लिए कर रहे हैं, और अधिकांश को लगता है कि उन्होंने अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया है। वहीं, खास कार्रवाइयों के बारे में ज्यादातर अमेरिकी बच्चों के लिए अनुशंसित टीकों में कटौती का विरोध करते हैं और अन्य देशों में बदलाव लाने के लिए अमेरिकी सेना के इस्तेमाल का समर्थन नहीं करते। कई लोगों का यह भी मानना है कि प्रशासन जेफरी एपस्टीन फाइलों जैसे संवेदनशील मामलों पर पारदर्शी नहीं रहा है। बता दें कि यह सर्वेक्षण अमेरिका भर में 2500 से ज्यादा वयस्कों पर किया गया है।  

CBSE फिजिक्स परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप, ‘संतुलन’ सवाल पर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

नई दिल्ली देशभर में बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है जिसने लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षक प्रशांत किराड ने सीबीएसई के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है। आरोप है कि परीक्षा के अलग अलग प्रश्नपत्रों की कठिनाई का स्तर समान नहीं रखा गया, जिससे छात्रों के साथ न्याय नहीं हुआ और उनके अंक उनकी मेहनत से ज्यादा किस्मत पर निर्भर हो गए। शिक्षक का कहना है कि कुछ विद्यार्थियों को अपेक्षाकृत आसान प्रश्नपत्र मिले, जबकि अन्य को ऐसे प्रश्न हल करने पड़े जिनका स्तर प्रतियोगी परीक्षाओं जैसा बताया जा रहा है। इससे छात्रों में असमानता की भावना पैदा हुई है और पूरे परीक्षा तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। क्या है पूरा मामला रिपोर्ट के मुताबिक, दायर की गई जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्षों से बोर्ड अलग अलग प्रश्नपत्र तैयार करता रहा है ताकि नकल जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सके। लेकिन इस बार प्रश्नपत्रों के बीच कठिनाई का अंतर असामान्य रूप से ज्यादा बताया जा रहा है। आरोप है कि कुछ प्रश्नपत्र सीधे और पाठ्यपुस्तक आधारित थे, जबकि अन्य में अवधारणात्मक और गहराई वाले प्रश्न अधिक थे, जिनके लिए अतिरिक्त तैयारी की जरूरत पड़ी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि बोर्ड इस विषय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे और यह बताए कि प्रश्नपत्रों के स्तर को संतुलित रखने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई थी। कई विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरे वर्ष नियमित पढ़ाई की, लेकिन परीक्षा कक्ष में उन्हें अपेक्षा से कहीं कठिन प्रश्न मिले। दूसरी ओर, कुछ छात्रों को सरल प्रश्न मिलने की बातें सामने आईं। इस स्थिति ने छात्रों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समान परीक्षा में भी सभी को समान अवसर मिला। अभिभावकों का भी कहना है कि यदि एक ही विषय की परीक्षा में कठिनाई का स्तर अलग अलग रहा, तो परिणाम वास्तविक योग्यता को नहीं दर्शा पाएंगे। इससे आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ सकता है। ग्रेस मार्क और नरम मूल्यांकन की मांग विवाद बढ़ने के साथ ही शिक्षक ने मांग की है कि कठिन प्रश्नपत्र हल करने वाले विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क दिए जाएं या उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अधिक उदारता से की जाए। कुछ लोग पुनर्परीक्षा की मांग भी उठा रहे हैं, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। परीक्षा ढांचे में हाल के बदलाव भी बने चर्चा का कारण हाल के वर्षों में वरिष्ठ कक्षाओं की परीक्षाओं में रटने के बजाय समझ और प्रयोग पर आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गई है। अब प्रश्नों का बड़ा हिस्सा ऐसा होता है जिसमें विद्यार्थियों को अवधारणाओं को वास्तविक जीवन की स्थितियों में लागू करना पड़ता है। इस बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों में तर्क शक्ति, विश्लेषण क्षमता और विषय की गहरी समझ विकसित करना बताया गया है। हालांकि कई शिक्षकों का कहना है कि बदलाव सही दिशा में है, लेकिन प्रश्नपत्र तैयार करते समय संतुलन बनाए रखना उतना ही जरूरी है, ताकि सभी छात्रों के लिए परीक्षा का अनुभव समान रहे। पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल बताया जा रहा है कि इससे पहले भी एक अन्य कक्षा की परीक्षा को लेकर इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं। उस समय भी कुछ प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान बताए गए थे, जबकि अन्य को ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना गया। उस घटना ने भी छात्रों के बीच बहस छेड़ दी थी, लेकिन इस बार मामला न्यायालय तक पहुंच गया है, जिससे इसकी गंभीरता बढ़ गई है। सामाजिक माध्यमों पर छात्रों की आवाज सामाजिक माध्यमों पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। कई छात्र लिख रहे हैं कि परीक्षा के बाद जब उन्होंने अन्य साथियों से प्रश्नों की तुलना की, तो उन्हें कठिनाई के स्तर में स्पष्ट अंतर महसूस हुआ। कुछ छात्रों ने इसे मानसिक दबाव बढ़ाने वाला बताया, क्योंकि परीक्षा के बाद भी उन्हें अपने प्रदर्शन का सही अंदाजा नहीं लग पाया। आगे क्या हो सकता है अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शिक्षा बोर्ड इस मामले में क्या जवाब देता है और क्या किसी तरह का सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा। यदि जांच में कठिनाई स्तर का अंतर साबित होता है, तो मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव, अनुग्रह अंक या अन्य उपायों पर विचार किया जा सकता है।