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ईरान में युवा विद्रोह तेज, अमेरिका विवाद के बीच Gen Z ने खोला मोर्चा

ईरान ईरान में हुए बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को क्रूर दमन के बाद कुचल दिया गया था, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई। अब 40वें दिन (चेहलम) पर शनिवार को छात्रों ( Gen Z) ने फिर से सड़कों और विश्वविद्यालयों में उतरकर मौलवी शासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अमीर कबीर और बेहेश्ती जैसे प्रमुख कैंपसों में सैकड़ों छात्रों ने 'तानाशाह मुर्दाबाद', 'खामेनेई मुर्दाबाद', 'हत्यारा नेता' और 'बी शराफ' (शर्मनाक) जैसे नारे लगाए। ये प्रदर्शन दिसंबर 2025 से शुरू हुए आर्थिक संकट, महंगाई और असंतोष से उपजे बड़े आंदोलन की निरंतरता हैं, जो जनवरी 2026 में चरम पर पहुंचे थे। सुरक्षा बलों और बसिज मिलिशिया ने इन नए प्रदर्शनों को भी बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, जिससे झड़पें हुईं और घायलों की खबरें आईं। वायरल हो रहे वीडियो सोशल मीडिया पर हो रहे वीडियो में तेहरान के प्रमुख इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में भारी भीड़ को एक भरे हुए इलाके में आपस में भिड़ते हुए देखा जा सकता है। कथित तौर पर लोगों को फारसी में बी शराफ यानी शर्मनाक चिल्लाते हुए सुना गया। ईरान इंटरनेशनल द्वारा साझा किए गए फुटेज में तेहरान के शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए बड़ी भीड़ दिखाई दी। समाचार एजेंसी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी अर्धसैनिक इकाइयों को भेजा गया, जिसके कारण विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक कुचल दिया गया। बाद में फार्स समाचार एजेंसी ने विश्वविद्यालय में हुई झड़पों में घायलों की सूचना दी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक वीडियो में कथित तौर पर शरीफ विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों की कतारें दिखाई दे रही हैं, जो सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को 'हत्यारा नेता' बताकर उनकी निंदा कर रहे हैं और ईरान के अपदस्थ शाह के निर्वासित पुत्र रजा पहलवी से नया सम्राट बनने का आग्रह कर रहे हैं। मानवाधिकार समूह HAALVSH द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, तेहरान में बेहेश्ती और अमीर कबीर विश्वविद्यालयों तथा पूर्वोत्तर में मशहद विश्वविद्यालय में भी प्रदर्शनों की खबरें आईं। देश के पश्चिमी शहर अब्दानन में, जो विरोध प्रदर्शनों का गढ़ माना जाता है, मानवाधिकार समूह हेंगाव और सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, एक कार्यकर्ता शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शनकारियों ने 'खामेनेई मुर्दाबाद' और 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए। ईरान में विरोध प्रदर्शन और अमेरिका के साथ तनाव आर्थिक दबाव के लंबे दौर के कारण दिसंबर में अशांति शुरू हुई, लेकिन यह बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गई, जिसे सुरक्षा बलों ने हिंसक कार्रवाई से दबा दिया। धार्मिक नेतृत्व का कहना है कि 3000 से अधिक लोग मारे गए, लेकिन उनका दावा है कि हिंसा ईरान के दुश्मनों द्वारा किए गए 'आतंकवादी कृत्यों' का परिणाम थी। हालांकि, अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) ने इस दमनकारी कार्रवाई में 7000 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जिनमें से अधिकांश प्रदर्शनकारी थे, हालांकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। वहीं, ईरानी अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनकारियों की आर्थिक चिंताओं की वैधता को स्वीकार किया, लेकिन जैसे ही प्रदर्शन खुले तौर पर सरकार के खिलाफ हो गए, उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल पर 'दंगों' को भड़काने का आरोप लगाया। इस कार्रवाई के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की धमकी दी, हालांकि बाद में उनका ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित हो गया, जिससे पश्चिमी सरकारों को डर है कि इसका उद्देश्य बम बनाना है। अमेरिका और ईरान ने हाल ही में ओमान की मध्यस्थता में संभावित समझौते पर बातचीत फिर से शुरू की है, लेकिन वाशिंगटन ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति भी बढ़ा दी है, और दो विमानवाहक पोत, जेट और हथियार भेजे हैं।

‘नक्सलवाद का अंत करीब’, शाहनवाज हुसैन का बड़ा दावा

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलवाद के खात्‍मे संबंधी बयान का समर्थन करते हुए भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि देश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में है और केंद्र सरकार की सख्त नीति के चलते यह जल्द पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि घुसपैठियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें भारत की धरती पर रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शाहनवाज हुसैन ने कहा कि घुसपैठियों को अपने देश वापस लौट जाना चाहिए, क्योंकि भारत की सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि असम में भाजपा सरकार बनने के बाद नक्सलवाद को पांच साल के एजेंडे में शामिल कर निर्णायक रूप से समाप्त करने की दिशा में काम किया जाएगा। इंडिया एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि दिल्ली में आयोजित एआई समिट अत्यंत सफल रहा और ‘एआई फॉर ऑल’ के नारे के साथ संपन्न हुआ। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम में दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ और विभिन्न देशों के प्रमुखों ने भाग लिया, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को विफल करने की कोशिश की। पहले राहुल गांधी विदेशों में जाकर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते थे और अब देश के भीतर भी ऐसा ही कर रहे हैं। शाहनवाज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और यहां तक कि एनएसए लगाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। विपक्ष के नेता का अर्थ देश का विरोध करना नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के इस रवैये की समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे विपक्षी दलों के नेताओं ने भी निंदा की है और कांग्रेस को इस मामले में देश से माफी मांगनी चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया पर बोलते हुए भाजपा नेता ने कहा कि यह एक आवश्यक और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले कई ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में बने रहते थे जिनका निधन हो चुका था, जिससे फर्जी मतदान की आशंका रहती थी। एसआईआर के जरिए ऐसी गड़बड़ियों को दूर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया गया है और इसका उद्देश्य केवल चुनावी प्रणाली को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।

जंग के आसार और भारत की भूमिका: क्या होगा अगला कदम?

इस्लामाबाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की वायुसेना ने सीमा पार अफगानिस्तान के अंदर कई आतंकी ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने इसे खुफिया जानकारी पर आधारित सटीक ऑपरेशन बताया है, वहीं अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का दावा है कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों निर्दोष नागरिक मारे गए हैं। इस सबके बीच सबकी निगाहें भारत पर भी टिकी हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने रविवार तड़के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पाकिस्तानी सेना ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उसके सहयोगी संगठनों के सात कैंपों पर टारगेट हमले किए हैं। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय इस्लामिक स्टेट (IS) के गुर्गों को भी निशाना बनाया गया है। दूसरी ओर, काबुल में अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इन हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी विमानों ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में नागरिक बस्तियों को निशाना बनाया। मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा की विफलता और कमजोरी को छिपाने के लिए अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है। बाजौर हमला: हाल ही में उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर में एक आत्मघाती हमलावर ने बारूद से लदे वाहन को सुरक्षा चौकी से टकरा दिया था, जिसमें 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हो गई थी। हमलावर अफगान नागरिक बताया गया। बन्नू और इस्लामाबाद: शनिवार को ही बन्नू में एक सैन्य काफिले पर हमला हुआ जिसमें दो जवान शहीद हुए। इससे पहले इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में हुए धमाके में 31 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले के लिए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने भारत को भी जिम्मेदार ठहराया था। पाकिस्तान का दावा है कि इन सभी हमलों के तार अफगानिस्तान में बैठे टीटीपी कमांडरों से जुड़े हैं और उनके पास इसके ठोस सबूत हैं। पाकिस्तान की सेना ने चेतावनी दी है कि वह अब किसी भी प्रकार का संयम नहीं बरतेगी। सेना के बयान के अनुसार, पाकिस्तान के नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और वह आतंकियों का पीछा उनके ठिकानों तक करेगा, चाहे वे कहीं भी हों। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वे तालिबान सरकार पर दबाव डालें ताकि अफगान धरती का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ न हो। अक्टूबर 2025 में भी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर इसी तरह के हमले किए थे। हालांकि कतर और तुर्की की मध्यस्थता में शांति वार्ता की कोशिशें की गईं, लेकिन वे विफल रहीं। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि सीमा पर शांति रहेगी, लेकिन इसके विपरीत टीटीपी के हमलों में भारी वृद्धि हुई है। भारत का क्या रहेगा स्टैंड? दक्षिण एशिया में बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि पाकिस्तान के साथ भारत की एकमात्र और सबसे बड़ी समस्या 'सीमा पार आतंकवाद' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक इस जड़ को नहीं काटा जाता, तब तक संबंधों में सुधार की गुंजाइश सीमित है। रणधीर जायसवाल का यह बयान पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस धमकी के संदर्भ में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर काबुल अपनी जमीन पर पनप रहे आतंकवाद को नहीं रोकता तो इस्लामाबाद अफगानिस्तान के अंदर हवाई हमले करने से पीछे नहीं हटेगा। जब जायसवाल से इस संबंध में भारत की स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सधे हुए शब्दों में कहा, "आप जानते हैं कि अफगानिस्तान के साथ हमारे संबंध किस स्तर पर हैं और पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्तों की क्या स्थिति है। मैं इसे यहीं छोड़ूंगा। जहां तक पाकिस्तान का सवाल है, हमारे बीच असली समस्या सीमा पार आतंकवाद है, जिसे संबोधित किया जाना अनिवार्य है।" विशेषज्ञों का मानना है कि रणधीर जायसवाल का बयान यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र में हो रही सैन्य हलचलों पर पैनी नजर रखे हुए है। भारत ने हमेशा इस बात की वकालत की है कि आतंकवाद किसी भी रूप में हो, वह क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। हालांकि, भारत ने अफगानिस्तान में तालिबान शासन के साथ अपने संबंधों को मानवीय और रणनीतिक स्तर पर संतुलित रखा है, जो पाकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक स्थिर नजर आते हैं।  

एआई फॉर संस्कृति इंटरनेशनल समिट: देसंविवि का जिनेवा स्थित ग्लोबलेथिक्स व इरोज इंटरनेशलन के साथ हुआ एमओयू

हरिद्वार देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित ‘एआई फॉर संस्कृति इंटरनेशनल समिट’ ने तकनीक और मानवीय मूल्यों के समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की। इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण क्षण देसंविवि और जिनेवा स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्लोबेथिक्स के बीच हुए समझौता ज्ञापन पर औपचारिक हस्ताक्षर रहा। इस अवसर पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं ग्लोबलेथिक्स के कार्यकारी निदेशक डॉ फादी दाऊ ने एमओयू पर हस्ताक्षर किया। यह साझेदारी वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) परिदृश्य में नैतिकता, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के संस्थागत समावेश की दिशा में एक युगांतरकारी कदम मानी जा रही है। समझौते का उद्देश्य केवल शैक्षणिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उच्च-स्तरीय अनुसंधान, नीतिगत विमर्श और मूल्य-आधारित तकनीकी ढांचे के विकास पर केंद्रित है—ऐसा ढांचा जो मशीनी बुद्धिमत्ता को मानवीय संवेदनाओं से जोड़े। वहीं समिट के दौरान वैश्विक पहल को और विस्तार देते हुए इरोज इंटरनेशनल के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। इसके अंतर्गत संस्कृति जीपीटी और धर्म जीपीटी जैसे अभिनव, मूल्य-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने पर सहमति बनी। इस समझौते पर देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या एवं इरोज इंटरनेशनल की सीईओ डॉ शिल्पा देसाई ने हस्ताक्षर किया। उल्लेखनीय है कि इरोज इंटरनेशनल को 12000 से अधिक छोटी बडी फिल्मों को निर्माण का श्रेय जाता है। इन प्रस्तावित समझौते का लक्ष्य भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक विमर्श और नैतिक दृष्टिकोण को एआई तकनीक के माध्यम से वैश्विक मंच तक पहुँचाना है। यह पहल इस विचार को पुष्ट करती है कि आधुनिक तकनीक केवल गणनात्मक उपकरण नहीं, बल्कि सभ्यताओं के मध्य संवाद, वैश्विक सद्भाव और लोक-कल्याण का सशक्त माध्यम बन सकती है। हरिद्वार की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से प्रारंभ हुआ यह अंतरराष्ट्रीय अभियान डिजिटल क्रांति को ‘संस्कार’ और ‘संस्कृति’ की गरिमा से मंडित करने का प्रयास है। यह समझौता एक प्रतीक है—कि भविष्य की एआई नीतियाँ केवल एल्गोरिदम और डेटा पर नहीं, बल्कि नैतिक चेतना और मानवीय संवेदनशीलता पर भी आधारित होंगी। हरिद्वार से जिनेवा तक जुड़ा यह नैतिकता का सूत्र वैश्विक एआई विमर्श को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है—जहाँ तकनीक और मानवता परस्पर पूरक बनकर विश्व-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।

सीएम धामी ने स्कूल के बच्चों के साथ सुनी पीएम मोदी के मन की बात

देहरादून सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस एपिसोड में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर वैश्विक शिखर सम्मेलन, अंगदान की प्रेरणादायक कहानियां तथा डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से सावधानी बरतने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में जन प्रतिनिधियों और संस्कृति स्कूल के बच्चों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 131वें एपिसोड को सुना। मुख्यमंत्री  ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम जन-जन को प्रेरित करने वाला माध्यम है, जो नवाचारों, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रोत्साहित करता है।  

जम्मू-कश्मीर: किश्तवाड़ एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों का अंत

किश्तवाड़ जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) और अपने इंटेलिजेंस सोर्स से मिली भरोसेमंद इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर, किश्तवाड़ इलाके में ऑपरेशन त्राशी-I के तहत एक सोचा-समझा जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया गया ताकि इलाके में एक्टिव आतंकवादियों को ट्रैक और न्यूट्रलाइज किया जा सके। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के एक दूर-दराज के इलाके में रविवार को सुरक्षाबलों के साथ एनकाउंटर में पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े दो आतंकवादी मारे गए। सेना ने कहा कि आतंकवादी चटरू बेल्ट के पासेरकुट इलाके में 'त्राशी-I' ऑपरेशन के दौरान मारे गए और उनके पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया, जिसमें दो एके-47 राइफलें भी शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) और अपने इंटेलिजेंस सोर्स से मिली भरोसेमंद इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर, किश्तवाड़ इलाके में ऑपरेशन त्राशी-I के तहत एक सोचा-समझा जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया गया ताकि इलाके में एक्टिव आतंकवादियों को ट्रैक और न्यूट्रलाइज किया जा सके। सेना की व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "पहले हुए सफल कॉन्टैक्ट के बाद, CIF (काउंटर-इंटेलिजेंस फोर्स) डेल्टा की टुकड़ियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के साथ मिलकर आज सुबह लगभग 11 बजे मुश्किल इलाके में आतंकवादियों से फिर से भिड़ंत हुई।" सेना ने कहा कि टैक्टिकल सटीकता, बिना रुकावट तालमेल और पक्के इरादे का परिचय देते हुए, टुकड़ियों ने एनकाउंटर साइट पर कब्ज़ा कर लिया, जहाँ दो आतंकवादियों को सफलतापूर्वक न्यूट्रलाइज़ कर दिया गया है। इसमें कहा गया, "शिकार जारी है – जो लोग शांति भंग करना चाहते हैं, उन्हें कोई पनाह नहीं मिलेगी।" शुरुआती जानकारी का हवाला देते हुए, अधिकारियों ने कहा कि मारे गए दोनों आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक हैं और प्रतिबंधित जैश के सदस्य हैं। आतंकवादी पहाड़ियों की तलहटी में एक मिट्टी के घर के अंदर छिपे हुए पाए गए। उन्होंने बताया कि एक पहाड़ी पर हमला किया और पास आ रही सर्च पार्टी पर गोलियां चला दीं, जिससे जोरदार गोलीबारी हुई। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। पिछले महीने चटरू जंगल इलाके में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच करीब आधा दर्जन बार गोलीबारी हुई, जिसमें एक सैनिक और एक आतंकवादी मारा गया। रविवार को दो आतंकवादियों के मारे जाने के साथ, इस साल जम्मू इलाके में अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने कुल छह JeM आतंकवादियों को मार गिराया है। इससे पहले, उधमपुर में दो और कठुआ जिले में एक आतंकवादी मारा गया था।  

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का असर: नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ मतदाताओं की कमी

 नई दिल्ली भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है। कितने घटे मतदाता? मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए। गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई। राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई। किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम? चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा। विवाद और कानूनी चुनौती,  असम में अलग प्रक्रिया इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है। देशभर में चल रहा है अभियान चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भीषण मुठभेड़, जैश का बड़ा आतंकी ढेर

किश्तवाड़ जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छात्रू क्षेत्र में आज सुरक्षाबलों और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। जिसमें संगठन का शीर्ष कमांडर मारा गया। अधिकारियों के अनुसार यह एनकाउंटर तब शुरू हुआ जब सेना ने छात्रू के जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया। उन्हें दो संदिग्ध आतंकवादियों के इलाके में होने की सूचना मिली थी। इस ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद का एक शीर्ष कमांडर मारा गया। यह संयुक्त कार्रवाई जम्मू और कश्मीर पुलिस, 2 पैराशूट बटालियन विशेष बल और भारतीय सेना ने की। हालांकि, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जारी ऑपरेशन के कारण आतंकवादी का शव अभी तक बरामद नहीं किया जा सका। सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और अन्य आतंकवादियों की मौजूदगी को खत्म करने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।  

ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी 15% बढ़ा दिया टैरिफ

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर एक बार फिर से बड़ा ऐलान किया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि अब से तुरंत प्रभाव से दुनिया के सभी देशों पर लगने वाला 10% टैरिफ बढ़ाकर 15% कर दिया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि कई देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते आए हैं, लेकिन अब उनकी सरकार इसे रोक रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में वे और नए-नए टैक्स तय करेंगे, जो कानूनी होंगे। उनका मकसद अमेरिका को और भी मजबूत और महान बनाना है – पहले से कहीं ज्यादा! डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को 6-3 के फैसले में बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने माना कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग किया, जो राष्ट्रीय आपातकाल के लिए आरक्षित है और इस कानून के तहत वैश्विक टैरिफ लगाना असंवैधानिक है। इस फैसले से ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को गहरा धक्का लगा, क्योंकि ये टैरिफ लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक भागीदारों पर लागू थे। हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्र-विशेष टैरिफ प्रभावित नहीं हुए, जो सेक्शन 232 जैसे अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे। इस निर्णय से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ गई है और व्यवसायों को अरबों डॉलर के टैरिफ रिफंड की उम्मीद है। कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने फैसले में लिखा कि कांग्रेस ही टैरिफ लगाने का अधिकार रखती है, राष्ट्रपति नहीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के ट्रंप ट्रंप ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी, इसे भयानक और शर्मनाक बताते हुए न्यायाधीशों को मूर्ख कहा। उन्होंने इसे गहरा निराशाजनक करार दिया और कहा कि विदेशी देश खुश हैं, लेकिन ज्यादा देर नहीं टिकेगा। फैसले के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने नया 10% वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया, जिसमें कनाडा और मैक्सिको को छूट दी गई है, क्योंकि वे उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते के तहत संरक्षित हैं। ट्रंप ने कहा कि उनके पास बैकअप प्लान है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ न्यायाधीशों पर शर्म आने की बात कही। उनकी यह प्रतिक्रिया उनके आक्रामक व्यापार नीति को दर्शाती है, जो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रही है। ट्रंप के पास अब क्या है रास्ता डोनाल्ड ट्रंप के पास अब भी कई विकल्प बचे हैं, जैसे सेक्शन 232 और 301 जांचों के तहत क्षेत्र-विशेष टैरिफ लगाना, जो स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो जैसे उत्पादों पर पहले से लागू हैं। ये टैरिफ अगले दशक में 635 अरब डॉलर की कमाई कर सकते हैं। ट्रंप अन्य कानूनों का सहारा ले सकते हैं, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित टैरिफ, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित नहीं हैं। वे नए कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं या कांग्रेस से नए कानून की मांग कर सकते हैं, हालांकि राजनीतिक विभाजन के कारण यह मुश्किल है। कुल मिलाकर ट्रंप की व्यापार युद्ध जारी रह सकता है, लेकिन अब अधिक कानूनी जांच के साथ।

एयरस्ट्राइक में हुई मासूमों की मौत का पाक से बदला जरूर लेंगे: अफगानिस्तान

नई दिल्ली. अफगानिस्तान ने सीमाई इलाकों में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस हमले में दर्जनों आम नागरिकों की जान गई है। तालिबान के प्रवक्ता जुबिउल्लाह मुजाहित ने कहा, बीती रात नांगरहार और पाकटिका प्रांतों में पाकिस्तान ने अचानक हवाई हमला कर दिया। इसमें दर्जनों लोगों की मौत हुई है जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने नांगरहार में एक रिहाइशी इमारत पर हमला कर दिया जिसमें एक परिवार के करीब 23 लोग रहते थे। मलबे में परिवार दब गया है। अब तक इसमें से केवल चार लोगों को निकाला जा सका है। तालिबान ने बताया है कि पाकिस्तान ने बेरमाल और आरगुन जिलों में हवाई हमले किए हैं। इस्लामाबाद की तरफ से कहा गया था कि पाकिस्तान में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए सीमावर्ती इलाकों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बेकसूर लोगों को मारने का आरोप जबीउल्लाह मुजाबित ने कहा कि पाकिस्तान ने नापाक हरकत करके मासूमों की जान ली है। उन्होंने कहा, पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के जनरल इसी तरह की हरकतें करके अपनी छवि सुधारने देश में सुधारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र में दखल दिया है। ऐसे में अफगानिस्तान के पास भी जवाब देने का अधिकार है। सही समय आने पर हमला किया जाएगा। पाकिस्तान का कहना है कि खैबर-पख्तूनख्वा के बन्नू इलाके में शनिवार को एक आत्मघाती हमले में सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सैनिक की मौत हो गई थी और उसी का बदला लेने के लिए यह एयर स्ट्राइक की गई है। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, पाकिस्तान के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस्लामाबाद की शिया मस्जिद पर हमला और शनिवार को बन्नू में हुई घटना समेत आतंकवाद की ये घटनाएं कथित तौर पर ख्वारिज ने अफगानिस्तान स्थित अपने आकाओं और संचालकों के इशारे पर कीं। मंत्रालय ने कहा, ''इन हमलों की जिम्मेदारी फितना अल ख्वारिज (एफएके) से संबंधित अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी तालिबान और उनके सहयोगियों तथा इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरसान प्रांत (आईएसपीके) ने ली है।'' उसने कहा कि अफगान तालिबान शासन से बार-बार आग्रह किया गया कि वह आतंकवादी समूहों और विदेशी एजेंटों को पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अफगान क्षेत्र का उपयोग करने से रोके लेकिन इसके बावजूद वह उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने में ''विफल'' रहा। उसने कहा, ''इस पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान-अफगान सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी तालिबान, एफएके और उसके सहयोगियों तथा आईएसकेपी से संबंधित सात आतंकवादी शिविरों और ठिकानों को खुफिया जानकारी के आधार पर सटीक और कुशलता से निशाना बनाया है।'' मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान अंतरिम अफगान सरकार से अपने दायित्वों को पूरा करने की अपेक्षा को दोहराता है। उसने कहा कि पाकिस्तान को यह भी उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभाते हुए तालिबान शासन से दोहा समझौते के तहत अपनी इन प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह करेगा कि वह अन्य देशों के खिलाफ अपनी भूमि का उपयोग होने से रोके तथा यह कार्य क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया है, लेकिन ''हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह आतंकवादियों को हमलों के लिए अपनी धरती का इस्तेमाल करने से रोकने में नाकाम रहा है। इसके कारण पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच संबंध बिगड़ गए हैं। पिछले साल अक्टूबर में, दोनों पक्षों के बीच संक्षिप्त रूप से सशस्त्र संघर्ष हुआ था। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, इसमें 23 पाकिस्तानी सैनिक और 200 से अधिक अफगान तालिबान सैनिक मारे गए थे।