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डिफेंस सेक्टर के लिए सुनहरा अवसर: इजरायल से सहयोग, UAE को ब्रह्मोस से भारत को मिल सकती है बढ़त

 नई दिल्ली हाल के वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा नीति और निर्यात क्षमता में जबरदस्त बदलाव देखा है. UAE के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की संभावित डील और इजरायल के साथ गहरी हथियार उत्पादन साझेदारी इसका ताजा उदाहरण है. ईरान-इजरायल संघर्ष ने मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे कई देश नए और विश्वसनीय हथियार आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में हैं. भारत ठीक इसी जगह पर मजबूती से खड़ा हुआ है. पुराना आयातक देश अब निर्यातक के रूप में उभर रहा है।  ईरान संघर्ष का असर और अवसर ईरान-इजरायल तनाव और उससे जुड़े युद्ध ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति बदल दी. यूएई और अन्य गल्फ देशों ने महसूस किया कि अमेरिकी हथियारों पर अंधाधुंध निर्भरता पर्याप्त नहीं है. उन्हें तेज, सटीक और विश्वसनीय सिस्टम चाहिए जो क्षेत्रीय खतरों का सामना कर सकें. ब्रह्मोस मिसाइल और अकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम ठीक इन्हीं जरूरतों को पूरा करते हैं।  भारत इन वार्ताओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ब्रह्मोस मिसाइल मैक 3 की स्पीड से दुश्मन को चौंका देती है. 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में इसकी भूमिका ने कई देशों का ध्यान खींचा. यूएई अब नई नीति अपना रहा है. भारत को विश्वसनीय पार्टनर मान रहा है. यह डील सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है।  इजरायल के साथ गहराती साझेदारी इजरायल की रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय टीम भारत दौरे पर है. डायरेक्टर जनरल मेजर जनरल (रि.) अमीर बराम ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य अधिकारियों से मुलाकात की है. दोनों पक्षों ने संयुक्त उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, AI, साइबर सुरक्षा और सह-विकास पर चर्चा की. फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित MoU ने इस रास्ते को और मजबूत किया।  दोनों देश अब सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहते. वे संयुक्त हथियार बनाने, भारत में उत्पादन स्थापित करने और तीसरे देशों में निर्यात करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इजरायल की तकनीक और भारत की निर्माण क्षमता का यह कॉम्बिनेशन गेम चेंजर साबित हो सकता है. Barak-8 मिसाइल, Heron ड्रोन और अन्य सिस्टम पहले से ही भारतीय सेना में सफल हैं. अब आगे का फोकस को-प्रोडक्शन पर है।  भारत का रक्षा निर्यात कैसे बढ़ा? पिछले दशक में भारत के रक्षा निर्यात में भारी उछाल आया है. FY 2025-26 में यह आंकड़ा 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 62% ज्यादा है. सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50,000 करोड़ रुपये का है. आत्मनिर्भर भारत अभियान, नई डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी ने इस बदलाव को संभव बनाया।  ईरान संघर्ष ने दुनिया की सप्लाई लाइन को प्रभावित किया. कई देशों ने देखा कि भारत न केवल हथियार दे सकता है बल्कि समय पर और विश्वसनीय तरीके से सप्लाई भी कर सकता है. फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस ले चुका है. अब UAE, सऊदी अरब जैसे देश भी रुचि दिखा रहे हैं. भारत की तटस्थ विदेश नीति भी फायदेमंद साबित हो रही है. वह न तो पूर्ण रूप से किसी एक ब्लॉक का हिस्सा है और न ही दूसरे का।  रणनीतिक महत्व यह विकास भारत को ग्लोबल डिफेंस प्लेयर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. पहले भारत मुख्य रूप से रूस, इजरायल और कुछ पश्चिमी देशों से हथियार खरीदता था. अब वही भारत ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी मिसाइल निर्यात कर रहा है. MUM-T (Manned-Unmanned Teaming) और ऑटोनॉमस सिस्टम में भी प्रगति हो रही है।  UAE और इजरायल दोनों के साथ मजबूत संबंध भारत की मध्य पूर्व नीति को संतुलित बनाते हैं. एक तरफ इजरायल के साथ तकनीकी गहराई, दूसरी तरफ अरब देशों के साथ आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी. ईरान संघर्ष ने इन अवसरों को तेज किया है क्योंकि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से हर देश अपनी सुरक्षा मजबूत करना चाहता है।  हालांकि सफलता के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं. ब्रह्मोस में रूस का हिस्सा होने से कुछ डील्स में उसकी मंजूरी जरूरी है. भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को संभालना भी मुश्किल है. फिर भी, भारत की बढ़ती क्षमता और डिप्लोमेसी इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम दिख रही है।  UAE को ब्रह्मोस देने की बातचीत और इजरायल के साथ संयुक्त उत्पादन साझेदारी भारत के रक्षा क्षेत्र की नई कहानी लिख रही है. ईरान-इजरायल युद्ध ने दुनिया को अस्थिर किया, लेकिन भारत ने इसे अवसर में बदल लिया. आज भारत न सिर्फ अपनी सेना को मजबूत कर रहा है बल्कि दुनिया को विश्वसनीय हथियार और प्रौद्योगिकी भी दे रहा है. यह बदलाव भारत को 21वीं सदी का रक्षा निर्यातक बनाने की राह पर ले जा रहा है। 

कम बारिश और बढ़ती इथेनॉल मांग से संकट में चीनी उद्योग, निर्यात पर लंबा असर संभव

 नई दिल्ली भारत दुनिया के चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन आने वाले सालों में तस्वीर बदल सकती है. मौसम विशेषज्ञों ने इस साल अल-नीनो के असर से कम बारिश की आशंका जताई है. सरकार के इथेनॉल पर बढ़ते फोकस की वजह से गन्ने का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि कम से कम तीन साल तक भारत के पास इतनी ज्यादा चीनी नहीं बच सकती कि वह बड़े पैमाने पर देशों को बेच सके।  भारत में गन्ने की खेती काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर करती है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से कम रह सकती है. जून महीने में भी कई जगहों पर सामान्य से कम बारिश हुई है. इसी वजह से कुछ किसान गन्ने की जगह सोयाबीन, अरहर और दूसरी कम पानी वाली फसलें लगाने का फैसला कर रहें हैं. अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले सीजन में गन्ने की खेती और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है।  चीनी की जरूरत ज्यादा, उत्पादन कम उद्योग के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रह सकता है. वहीं देश में हर साल करीब 2.85 करोड़ टन चीनी की खपत होती है. यानी देश में जितनी चीनी बन रही है, उससे ज्यादा चीनी की जरूरत है. इसी वजह से मिलों में चीनी का स्टॉक घटकर करीब 35 लाख टन रह सकता है, जो कई दशक में सबसे कम लेवल में से एक होगा।  इथेनॉल की बढ़ती मांग भी बड़ी वजह सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर जोर दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. इसके लिए गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में बढ़ रहा है. फिलहाल देश में इथेनॉल की मांग करीब 12 से 13 अरब लीटर है. आने वाले सालों में यह बढ़कर 30 अरब लीटर तक पहुंच सकती है. ऐसे में गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो सकता है।  सरकार की नजर घरेलू सप्लाई पर  भारत पहले दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी का एक्सपोर्टर था. 2022-23 तक पांच सालों में देश हर साल आमतौर पर 68 लाख टन चीनी विदेशों में बेचता था, जो वैश्विक चीनी करोबार का करीब 10% हिस्सा था. अब हालात बदल चुके हैं. सरकार की प्राथमिकता देश के भीतर चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है. आने वाले सीजन में भी चीनी निर्यात को लेकर सख्त रुख देखने को मिल सकता है।  क्या भारत को भी चीनी खरीदनी पड़ सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल-नीनो का असर ज्यादा रहा और गन्ने की खेती में बड़ी गिरावट आई, तो आने वाले वर्षों में भारत को विदेशों से चीनी खरीदने की जरूरत भी पड़ सकती है. भारत ने आखिरी बार 2016-17 और 2017-18 में चीनी आयात की थी. उस समय सूखे और कम उत्पादन की वजह से ऐसी स्थिति बनी थी।  इससे पहले 2009 और 2010 में भारत की बड़ी खरीदारी ने दुनिया भर में चीनी की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया था. कम बारिश की आशंका, गन्ने की खेती पर बढ़ता दबाव और इथेनॉल की बढ़ती मांग भारत के चीनी सेक्टर के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं।  अगर मौसम के अनुमान सही साबित होते हैं, तो आने वाले कुछ सालों तक देश के पास विदेशों में बेचने के लिए अतिरिक्त चीनी कम बच सकती है. इतना ही नहीं, हालात ज्यादा बिगड़े तो भारत को भविष्य में चीनी आयात करने पर भी विचार करना पड़ सकता है।   

जेडी वेंस की पाकिस्तान टिप्पणी पर बवाल, अपनी ही पार्टी के सांसदों ने जमकर सुनाई खरी-खोटी

बर्न पाकिस्तान इन दिनों ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है. इस बीच, US सीनेटरों ने पाकिस्तान के आतंकवादियों को पनाह देने और बिन लादेन को छिपाने के इतिहास को उठाया. उन्होंने 'पाकिस्तान प्रेम' के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जमकर खरी-खोटी सुनाई है।  दरअसल वेंस ने स्विट्जरलैंड में वार्ता के दौरान कहा था, 'हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं.'  वेंस ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर उनके दो पसंदीदा लोगों में से एक बताया था. ऐसे में दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने वेंस के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना की।  बता दें कि वेंस ने कहा था, 'मैं कहूंगा कि जब से फील्ड मार्शल मुनीर ने इस्लामाबाद में प्राइम मिनिस्टर के साथ हमारा स्वागत किया है, मैंने मजाक में कहा है कि मेरी जिंदगी में दो बहुत, बहुत जरूरी लोग हैं- एक इंडियन और एक पाकिस्तानी. इंडियन मेरी पत्नी हैं और पाकिस्तानी फील्ड मार्शल मुनीर हैं।  ''कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह… सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अब तक सबको ये साफ हो जाना चाहिए कि हमारे असल में दोस्त कौन हैं.' स्कॉट ने कहा, 'कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है और अभी वो एक मतलब की शांति पाने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी कैंपेन को सपोर्ट करने में कहीं ज्यादा लगे हुए लग रहे हैं।  स्कॉट ने आगे दावा करते हुए कहा था कि अभी भी एक ऐसे एग्रीमेंट की गुंजाइश है जिससे सबको फायदा हो. लेकिन, सबको ये बात समझ लेनी चाहिए कि ईरान के न्यूक्लियर हथियार बनाने की शून्य संभावना है।  पाकिस्तान पर लादेन को छिपाने का आरोप मोंटाना से सीनेटर टिम शीही ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अल कायदा लीडर ओसामा बिन लादेन को पनाह देने में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाए. शीही ने कहा, 'पाकिस्तान, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान ने बिन लादेन को दस साल तक छुपाया. उन्होंने ISI इंश्योरेंस के जरिए अयातुल्ला को फंड दिया।  अमेरिका-ईरान के बीच स्थायी शांति की नींव पड़ी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ वार्ता को सफल समझौते की नींव रखने वाली कहा है। अमेरिका की ओर से मुख्य वार्ताकार जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरानी नेताओं के साथ बातचीत को स्थायी शांति की तरफ अच्छी शुरुआत कहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान पर अभी भी दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ है लेकिन वेंस ने उम्मीद जताई की चीजें बेहतरी की तरफ जाएंगी। ईरान और अमेरिका में स्विट्जरलैंड में रविवार और सोमवार को बातचीत हुई है। जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान परमाणु निरीक्षकों को अनुमति देने और विदेशों में अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को संभालने और युद्धविराम का प्रबंधन करने के लिए तंत्र स्थापित करने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा, हमने एक सफल अंतिम समझौते के लिए बहुत अच्छी नींव रखी है। थोड़ी धमकी थी, थोड़ी शिकायत थी, लेकिन दिन के अंत में बातचीत जारी रही और हमने काफी प्रगति की।' ईरान को निर्यात पर छूट ईरान की सीज संपत्तियों को रिलीज किए जाने पर वेंस ने कहा कि हम ऐसी प्रक्रिया बनाना चाहते हैं, जिससे इस राशि का फायदा आम ईरानियों को हो।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया है कि तेहरान ने तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट, विदेशों में अपनी कुछ फ्रीज की गई संपत्तियों की रिहाई और ईरान के लिए पुनर्निर्माण और विकास योजना शुरू करने की मंजूरी हासिल कर ली है। ईरान ने कहा है कि स्विट्जरलैंड में दो दिनों तक चली शांति वार्ता के दौरान एमओयू से जुड़े उन मुद्दों पर बात हुई, जिनके आधार पर अंतिम समझौते के लिए वार्ता शुरू होगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने कहा कि ये बिंदु लेबनान में युद्ध रोकने, ईरान की फ्रीज संपत्तियां रिलीज करने और ईरानी तेल के निर्यात से जुड़े हुए हैं। मध्यस्थ देश क्या बोले मध्यस्थ पाकिस्तान और कतर ने बताया है कि दोनों पक्षों ने पिछले हफ्ते हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाते हुए रिसॉर्ट बर्गेंस्टॉक में हुई बातचीत में 60 दिनों के भीतर एक स्थायी समझौते की दिशा में एक रोडमैप पर सहमति व्यक्त की है। लेबनान में लड़ाई रोकने और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक संचार लाइन खोलन पर सहमति बनी है। इस बातचीत के खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान के तेल उत्पादों पर लगा प्रतिबंध हटा लिया है। अमेरिकी वित्त विभाग ने यह प्रतिबंध दो महीने के लिए हटाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 60 दिनों के लिए एक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत ईरानी तेल के उत्पादन, आपूर्ति और बिक्री की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान और कतर बातचीत की मेज पर हैं, तो US को UAE, इजरायल और सऊदी अरब को भी बातचीत में शामिल करना चाहिए. शीही ने UAE, इजरायल और सऊदी अरब को मिडिल ईस्ट में US का असली साथी बताया।  पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल मोंटाना के सीनेटर ने ये भी दावा किया कि कतर दशकों से आतंकवादी संगठनों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग कर रहा है. शीही ने कहा, 'पाकिस्तानियों ने ISI के जरिए हमारे खिलाफ बगावत को फंड किया और बिन लादेन को छिपाया. इसलिए ये मानना ​​कि वो यहां सिर्फ बिचौलिए होंगे, मुझे नहीं लगता कि ये सही है।  शीही ने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि हमें ये पक्का करना होगा कि हम UAE के साथ खड़े हों और हम बिना किसी शक के इजरायल के साथ खड़े हों, क्योंकि चाहे कुछ भी हो जाए, वो इस इलाके में हमारे अगुआ रहेंगे। 

सीएम विजय का बड़ा बयान, बोले- पेरियार हमारे आदर्श हैं, लेकिन भगवान पर भी पूरा विश्वास है

चेन्नई  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय ने अपनी पार्टी टीवीके (TVK) की वैचारिक दिशा को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी द्रविड़ राजनीति के जनक माने जाने वाले पेरियार के सामाजिक सिद्धांतों को अपनाने है, लेकिन उनकी नास्तिकता और धार्मिक विश्वास को नकारने के उनके विचारों से वो सहमत नहीं हैं।  तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान घोषणा की कि उनकी पार्टी टीवीके (TVK) ने द्रविड़ राजनीति के जनक पेरियार ईवी रामासामी के व्यापक सामाजिक सिद्धांतों को तो अपनाया है।  'धार्मिक विश्वास नकारने वाले बातें स्वीकार नहीं' पेरियार की तर्कवादी सोच और अपनी पार्टी के रुख के बीच अंतर बताते हुए विजय ने कहा, 'हमने धार्मिक विश्वास को नकारने वाली पेरियार की बात को स्वीकार नहीं किया, लेकिन उनके व्यापक सिद्धांतों को पूरी तरह अपनाया. हमने पेरियार की शिक्षाओं को तो लिया, लेकिन ये भी स्पष्ट किया कि हम ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोग हैं. हमने हमेशा यह साफ किया है कि हम किसी की विचारधारा के विरोधी नहीं हैं।  'अंबेडकर और कामराज मॉडल…' मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि उनकी सरकार कई वैचारिक प्रभावों के मिश्रण से चलती है. सरकार ने डॉ. बीआर अंबेडकर के समान अवसर और सामाजिक न्याय के आदर्शों को पूरी तरह स्वीकार किया है. इसके साथ ही तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री के कामराज के ईमानदार प्रशासन के मॉडल को सरकार ने अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाया है।  'पहले जनता के पास गए फिर बनाई पार्टी' विजय ने उन आलोचकों को करारा जवाब दिया जो उनके संगठन को सिर्फ एक अभिनेता के नेतृत्व वाला दल बताते हैं. उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग पहले राजनीतिक दल शुरू करते हैं और फिर जनता के पास जाते हैं, लेकिन उन्होंने पहले जनता के बीच जाकर काम किया और उसके बाद अपनी पार्टी शुरू की. जो लोग इस जमीनी हकीकत को नहीं समझते, वो ही TVK को केवल एक अभिनेता की पार्टी कहकर खारिज करते हैं।  '1.72 करोड़ वोट मिले' वहीं, साल 2026 के विधानसभा चुनाव के ऐतिहासिक प्रदर्शन को याद करते हुए विजय ने कहा कि उनकी पार्टी बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनावी मैदान में उतरी थी. राज्य की जनता ने उनकी बात को स्पष्ट रूप से समझा, जिसके चलते उन्हें कुल 35 प्रतिशत वोट मिले. चुनाव में रिकॉर्ड 17.2 मिलियन (1.72 करोड़) वोट प्राप्त कर वो एक बड़ी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत के रूप में उभरे और आज सरकार में बैठे हैं।  करूर की घटना का जिक्र उन्होंने अपनी पार्टी को असंबंधित घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि करूर में 41 लोगों की जान चली गई, लेकिन उसका सारा दोष उनकी पार्टी पर मढ़ दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजनीति इसी तरह की जानी चाहिए? अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को आम जनता से जोड़ते हुए विजय ने इसकी तुलना पूर्व मुख्यमंत्री सीएन अन्नादुराई और एमजी रामचंद्रन (MGR) के शासन से की. उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्ना के समय सामान्य लोगों की सरकार थी और एमजीआर के समय बहुत ही सामान्य लोगों की सरकार थी, ठीक उसी तरह विजय के नेतृत्व वाली ये सरकार सबसे आम लोगों की सरकार है, जिसने 2026 के चुनाव में धर्म और जाति की सभी बाधाओं को तोड़ा है।  विजय ने अपने भाषण में पिछली सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के शासनकाल के दौरान 'पार्टी फंड' की आड़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया था. मुख्यमंत्री के इस तीखे प्रहार के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और विरोध स्वरूप द्रमुक (DMK) पार्टी के विधायकों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया।  वामपंथी दलों पर भी की टिप्पणी वामपंथी दलों के विरोध प्रदर्शन के बीच उनके बारे में की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए विजय ने स्पष्ट किया कि ये पार्टियां किसी की दया या मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से उनके गठबंधन में शामिल हुई हैं।  उन्होंने कहा कि वामपंथी दल खुद कहते हैं कि वो अपनी मर्जी से साथ आए हैं. हालांकि, इसके बाद उन्होंने ये भी जोड़ा कि वो नहीं समझ पा रहे हैं कि वामपंथी दल आखिर कहना क्या चाह रहे हैं।   

PAK की ‘राफेल कहानी’ फिर हुई फेल, एयरफोर्स टेंडर से सामने आई 36 विमानों की सच्चाई

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों को मार गिराने के पाकिस्तान के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है. भारतीय वायुसेना के मुख्यालय से जारी एक आधिकारिक दस्तावेज ने साफ कर दिया है कि भारत के पास फ्रांस से खरीदे गए सभी 36 राफेल विमान पूरी तरह ऑपरेशनल हैं. इस तरह भारत के राफेल पर गलतबयानी करने वाले पाकिस्तान को करारा तमाचा लगा है. पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई राफेल विमानों को गिराने का झूठ फैलाया था।  15 जून 2026 को एयर मुख्यालय के डायरेक्टरेट ऑफ इंजीनियरिंग (राफेल) ने फ्रांस की कंपनी सैफ्रान एयरक्राफ्ट इंजिन्स को एक "ब्रिज सपोर्ट" प्रस्ताव (RFP) भेजा है. ये एक तरह का सपोर्ट टेंडर है. इस दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भारतीय वायुसेना 2016 के भारत-फ्रांस सरकारी समझौते के तहत खरीदे गए सभी 36 राफेल विमानों का संचालन कर रही है और सितंबर 2026 के बाद भी इनके रखरखाव और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी. इसी काम के लिए भारतीय वायु सेना ने टेंडर जारी किया है।  36 राफेल के मेंटेनेंस के लिए एयरफोर्स ने जारी किया टेंडर दस्तावेज के अनुसार अगले पांच महीनों के लिए 36 राफेल विमानों के संचालन को ध्यान में रखते हुए पैकेज तैयार किया गया है।  यह घटनाक्रम 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान सेना और पाकिस्तान-समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स के उन बार-बार किए गए दावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि भारत के कई राफेल विमान मार गिराए गए थे।  पाकिस्तान के अलग-अलग मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और कमेंटेटर्स ने अलग-अलग आंकड़े पेश किए थे, जिनमें यह दावा भी शामिल था कि तीन राफेल विमान नष्ट हो गए हैं. हालांकि, IAF के हालिया दस्तावेज में बेड़े की संख्या में किसी भी कमी का जिक्र नहीं है; इसके बजाय, इसमें सभी 36 विमानों के लिए उड़ान की ज़रूरतों का हिसाब लगाया गया है।  टेंडर दस्तावेजों के अनुसार इस सपोर्ट पैकेज का मकसद 36 राफेल विमानों को चालू हालत में बनाए रखना है. इसके तहत हर विमान के लिए औसतन सालाना 150 घंटे की उड़ान तय की गई है, जिसका मतलब है कि पांच महीने की 'ब्रिज पीरियड' (अंतरिम अवधि) के दौरान कुल 2,250 घंटे की उड़ान का अनुमान है।  दस्तावेज में बताया गया है कि राफेल के मूल अनुबंध में 36 विमान, उनसे जुड़े उपकरण, इस्तेमाल होने वाली सामग्री, स्पेयर पार्ट्स और पांच साल तक विमानों के बेड़े के संचालन के लिए रखरखाव सहायता शामिल थी. प्रस्तावित 'ब्रिज सपोर्ट' का मकसद 18 सितंबर, 2026 के बाद भी विमानों के संचालन को बिना किसी रुकावट के जारी रखना है।  PAK की 'मनोहर कहानियां' फिर ध्वस्त रक्षा सूत्रों का कहना है कि मेंटेनेंस और सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट आम तौर पर ऑपरेटर के पास मौजूद असल इन्वेंट्री पर आधारित होते हैं. 36 विमानों के पूरे बेड़े का बार-बार ज़िक्र होने से राफेल के नुकसान के बारे में पाकिस्तान के दावों पर और सवाल उठते हैं. पाकिस्तान ने यह झूठा दावा भी किया था कि उसने भारत की एक महिला पायलट को पकड़ लिया है. IAF चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पहले ही पाकिस्तान के इन दावों को "मनोहर कहानियां" करार दिया था।  भारतीय वायु सेना के राफेल बेड़े के लिए ये सपोर्ट टेंडर का प्रस्ताव सैफ्रन एयरक्राफ्ट इंजन को भेजा गया है, जो राफेल के M88 इंजन बनाने वाली मूल कंपनी है. यह तरीका आमतौर पर तब अपनाया जाता है जब केवल मूल उपकरण निर्माता ही खास तकनीकी सहायता, स्पेयर पार्ट्स या सेवाएं दे सकता है।  भारत ने फ्रांस के साथ 2016 के समझौते के तहत अपने 36 राफेल लड़ाकू विमान शामिल किए थे; ये विमान अभी IAF के नंबर 17 स्क्वाड्रन "गोल्डन एरोज़" और नंबर 101 स्क्वाड्रन में तैनात हैं। 

शादी से पहले मंगेतर की हत्या! प्रेमी संग मिलकर 350 फीट खाई में धकेला, पुणे की सिया केस से सनसनी

 पुणे  महाराष्ट्र में जान गंवाने वाले रियल एस्टेट फर्म के निदेशक केतन विशाल अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुणे पुलिस ने मंगलवार को उनकी मंगेतर और उसके प्रेमी को गिरफ्तार किया है। उन पर केतन को पुणे के लोहागढ़ किले की गहरी खाई में धकेलने का आरोप है। पहले इसे एक दुर्घटना माना जा रहा था, लेकिन जांच में हत्या की साजिश सामने आई। मंगेतर सिया गोयल ने केतन की मौत के बाद क्या किया? यह घटना 18 जून को हुई थी। गहुंजे, पुणे जिले के निवासी 26 वर्षीय अग्रवाल का शव किले के पास एक खाई में मिला था। पुलिस ने पहले बताया था कि अग्रवाल अपनी मंगेतर और दोस्तों के साथ ट्रेकिंग पर थे। तस्वीरें लेते समय वह करीब 400 फीट गहरी खाई में गिर गए थे। मंगेतर सिया गोयल ने लोनावाला ग्रामीण पुलिस को जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि किले में सैर के दौरान अग्रवाल फिसलकर गिर गए थे। इसके बाद आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। अग्रवाल की शादी इसी साल गोयल से होनी थी। परिवारों ने उदयपुर, राजस्थान में एक महल बुक कर भव्य शादी की तैयारियां की थीं। संदेह और जांच के दायरे पर एसपी ने क्या बताया? पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि मौत के हालात संदिग्ध लग रहे थे। इसी कारण पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। हमारी टीमों ने वित्तीय विवादों और व्यक्तिगत संबंधों सहित कई पहलुओं की जांच की। जांच के दौरान पुलिस को एक अहम जानकारी मिली। गोयल का कोंढवा, पुणे निवासी 22 वर्षीय चेतन बाबूलाल चौधरी के साथ संबंध था। गोयल अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी। वह अग्रवाल को चौधरी के साथ अपने रिश्ते में बाधा मानती थी। कैसे हादसे की कहानी हत्या के शक तक पहुंची?     लोहागढ़ की पहाड़ियों पर हुई इस घटना के बाद शुरुआती जानकारी में कहा गया कि केतन फोटो लेते समय संतुलन खो बैठे और गहरी खाई में गिर गए. मौके पर मौजूद लोगों ने भी इसे दुर्घटना बताया. लेकिन जब पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के हालात की जांच शुरू की तो कई ऐसे संकेत मिले, जिन्होंने अधिकारियों को मामले की गहराई में जाने पर मजबूर कर दिया।      पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि घटना के समय वहां कौन-कौन मौजूद था और केतन आखिर किन परिस्थितियों में खाई में गिरे. इसी दौरान जांच अधिकारियों को कुछ ऐसी जानकारियां मिलीं, जिनसे यह संदेह पैदा हुआ कि मामला सिर्फ एक हादसा नहीं हो सकता. इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जाने लगा।  सीसीटीवी फुटेज में क्या मिला? पुलिस जांच के दौरान लोहागढ़ और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. पुलिस के मुताबिक फुटेज में एक संदिग्ध युवक दिखाई दिया. अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी में एक संदिग्ध युवक की गतिविधियां नजर आईं. युवक गर्मी के मौसम में हुडी पहने, कानों में हेडफोन लगाए और चेहरा छुपाने की कोशिश करते हुए इलाके में घूमता हुआ पाया गया. यही फुटेज जांच का अहम आधार बन गया. पुलिस ने उस युवक की पहचान और उसकी गतिविधियों की जांच शुरू की. इसके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया।   तकनीकी जांच से खुला नया एंगल सीसीटीवी के अलावा पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की. पुलिस सूत्रों के अनुसार इन तकनीकी तथ्यों ने घटना की दिशा बदल दी. जांच में कुछ ऐसे कनेक्शन सामने आए, जिनसे साजिश की आशंका और मजबूत हो गई. पुलिस का मानना है कि केतन की मौत के पीछे साजिश हो सकती है. इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है और संभावित आरोपियों की भूमिका को खंगाला जा रहा है।  होने वाली पत्नी पर क्यों गया शक?     पुलिस जांच के मुताबिक इस मामले में केतन की होने वाली पत्नी सिया गोयल और उसकी एक सहेली को आरोपी बनाया गया है. जांच एजेंसियों को संदेह है कि सिया ने अपने कुछ दोस्तों की मदद से केतन को लोहागढ़ की ऊंचाई से धक्का दिलवाया. हालांकि पुलिस अभी सभी पहलुओं की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।      फिलहाल लोनावला ग्रामीण पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और सभी संभावित साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है. शादी से कुछ दिन पहले हुई यह मौत अब महाराष्ट्र के सबसे चर्चित मामलों में शामिल होती जा रही है।  हत्या की साजिश कैसे रची गई? पुलिस के अनुसार, गोयल और चौधरी ने अग्रवाल को खत्म करने की साजिश रची। योजना के तहत, गोयल अग्रवाल को सैर के बहाने लोहागढ़ किले ले गई। चौधरी को बाद में उसी स्थान पर बुलाया गया। इसके बाद दोनों ने मिलकर अग्रवाल को किले से नीचे धकेल दिया। इससे उनकी मौत हो गई। संदेह के आधार पर स्थानीय अपराध शाखा ने चौधरी को हिरासत में लिया।  आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई कैसे होगी? पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि अग्रवाल, चौधरी और गोयल के रिश्ते में बाधा बन रहे थे। इसलिए दोनों ने मिलकर अग्रवाल को खत्म करने की योजना बनाई। चौधरी की पूछताछ के आधार पर गोयल को भी गिरफ्तार कर लिया गया। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने शिकायत दर्ज कराई। लोनावाला ग्रामीण पुलिस ने मंगलवार को हत्या और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया। आगे की जांच जारी है ताकि घटनाओं का सटीक क्रम स्थापित किया जा सके। फोरेंसिक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। जन्मदिन को खास बनाने की तैयारी परिजनों के अनुसार केतन अपनी मंगेतर के जन्मदिन को लेकर भी बेहद उत्साहित थे. 19 जून को जन्मदिन था. उससे पहले और बाद के लिए कई योजनाएं बनाई गई थीं. परिवार के एक सदस्य ने बताया कि महाबलेश्वर के एक लग्जरी रिसॉर्ट में जन्मदिन समारोह की तैयारी की गई थी. इसके लिए करीब 40 कमरे बुक किए … Read more

‘जिन्हें पेपर बनाना था, वही लीक कराने वालों से जा मिले’, NEET घोटाले पर शिक्षा मंत्री का तीखा हमला

  नई दिल्ली देशभर में 21 जून को परी-नीट परीक्षा कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित किया गया था जिसमें करीब 22 लाख से अधिक छात्रों ने पेपर दिया था. पेपर पूरा होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आजतक को इंटरव्यू देते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में कमियों को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर माफिया और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि केवल दोषियों को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेक्सस को तोड़ना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हो सकें।  अभिभावकों समेत सबको आभार आजतक से बात करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों, छात्रों समेत री-नीट को सही से आयोजित करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि ये केवल एजेंसी या सरकार की जिम्मेदारी से नहीं बल्कि हर किसी के छोटे-छोटे योगदान से हुआ है। भविष्य में न उठे कोई सवाल   शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे. इसी दिशा में तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में अधिक से अधिक परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाया जा सकता है. उनका मानना है कि इससे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा बेहतर होगी और परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।  नागपुर छात्र का भी किया जिक्र केंद्रीय मंत्री ने नागपुर छात्र का भी जिक्र किया जिसकी री-नीट परीक्षा केंद्र अबूधाबी हो गया था. इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि छात्र की ओर से ही एग्जाम सेंटर को अबूधाबी किया था लेकिन हमने खुद छात्र के पिता से संपर्क किया. इसे लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा था जिसपर शिक्षा मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को केवल राजनीति करनी है. उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं थी फिर भी वह इस मुद्दे में घुस गए।   CBSE के मुद्दे पर भी बोले  जब उनसे CBSE परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सुधारना हमारा दायित्व है जिसपर हम काम कर रहे हैं. नीट को लेकर भी हमने गलती सुधारी है।  राहुल गांधी पर भी साधा निशाना  धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी छात्रों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं. उनका कहना था कि छात्रों की चिंताओं का समाधान करना सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन इस विषय को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. नेता प्रतिपक्ष होने के नाते सवाल उठाना उनका फर्ज है लेकिन मेरा उनको सुझाव है कि वह सही सवाल उठाए. शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह बच्चों के मन में डर पैदा करने का काम कर रहे हैं।  प्रधानमंत्री की थी नजर  शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए थे. उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों और जांच प्रक्रिया की लगातार निगरानी की गई. सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल समाधान निकालना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था को तैयार करना है जिससे छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर बना रहे।  देर से पहुंचे छात्रों का भी किया जिक्र  इंटरव्यू के दौरान उन्होंने उन छात्रों का भी जिक्र किया जो परीक्षा केंद्रों पर देरी से पहुंचने के कारण परीक्षा में शामिल नहीं हो सके. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार इस विषय को भी गंभीरता से देख रही है. उन्होंने माना कि ऐसे मामलों में छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और भविष्य में यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि किसी भी कारणों से छात्र का नुकसान न हो. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत, सुरक्षित और छात्र के हित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुधार किए जा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि देश के करोड़ों छात्रों को निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, जिससे उनकी मेहनत और प्रतिभा का सही मूल्यांकन हो सकें।  रक्षक ही बन गए भक्षक  री-नीट के सफल आयोजन पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मल्टीलेयर सुरक्षा के बीच आयोजित हुई परीक्षा. परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा रखी गई थी. लेकिन 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा में हुई पेपर लीक को लेकर उन्होंने कहा कि रक्षक ही भक्षक हो गया. जिन लोगों पर हमने भरोसा किया था कि पारदर्शी तरीके से प्रश्न पत्र बनाएंगे, उन लोगों ने बदमाशों के साथ मिलकर जो अपनी फायदे के लिए परीक्षा को तोड़ना चाहते हैं उनके वजह से 3 मई की घटना हुई है।   

कतर में मौत का धमाका! LNG प्लांट हादसे में 12 भारतीयों सहित 13 की जान गई, 66 घायल

दोहा  कतर के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास ने भी इस घटना पर चिंता जताई है।  ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था।  कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है।  दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया।  ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी।  सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।   

RTI नियमों पर अन्ना हजारे का बड़ा ऐलान, कहा- जरूरत पड़ी तो करेंगे भूख हड़ताल

मुंबई  सोशल एक्टिविस्ट अन्ना हजारे एक बार फिर आंदोलन से क्रांति करने की तैयारी में हैं. वो महाराष्ट्र सरकार सूचना के अधिकार के नियमों में किए गए बदलावों का विरोध कर रहे हैं. हजारे ने इन बदलावों को 'गैर-कानूनी' करार देते हुए इन्हें तुरंत वापस लेने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि ऐसा नहीं होने पर वो 5 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे।  अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे एक लेटर में दावा किया कि महाराष्ट्र सूचना के अधिकार के नियम, 2026, RTI एक्ट की धार को कुंद कर देंगे और नागरिकों को जानकारी से दूर रखेंगे. उनके मुताबिक, 12 जून को किए गए बदलाव RTI एक्ट, 2005 की भावना का उल्लंघन करते हैं और ट्रांसपेरेंसी को कमजोर करते हैं। हजारे ने फीस बढ़ाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कोई सही वजह या फाइनेंशियल एनालिसिस नहीं दिया गया।  'RTI कोई रेवेन्यू कमाने वाला कानून नहीं' सीएम फडणवीस को लिखे लेटर में अन्ना हजारे ने कहा, 'RTI कोई रेवेन्यू कमाने वाला कानून नहीं है. अगर 20 साल बाद फीस बढ़ाई जाती है, तो जानकारी देने से मना करने वाले अधिकारियों पर पेनल्टी भी बढ़ाई जानी चाहिए।  उन्होंने ID प्रूफ को जरूरी बनाने का विरोध किया और तर्क दिया कि RTI एक्ट का सेक्शन 6(2) एप्लीकेंट को पर्सनल डिटेल्स या जानकारी मांगने के कारणों का खुलासा करने की जरूरत नहीं बताता है. उन्होंने कहा कि ऐसी हालत व्हिसलब्लोअर और एक्टिविस्ट के लिए खतरा है।  ट्रांसपेरेंसी पर खतरा! हजारे ने 'एक सब्जेक्ट, एक एप्लीकेशन' नियम की भी आलोचना की, इसे गैर-जरूरी और बोझिल बताया. उनके मुताबिक, बार-बार आने वाले एप्लीकेशन को तुरंत बंद करने के नियम से पूरी या अपडेटेड जानकारी तक पहुंच बंद हो जाएगी. अन्ना हजारे ने कहा, 'प्रोसेस को ज्यादा टेक्निकल, महंगा और एडमिनिस्ट्रेशन-सेंट्रिक बनाने से ट्रांसपेरेंसी कम होगी।  उन्होंने एप्लीकेंट से जानकारी मांगने का मकसद पूछना, अगर एप्लीकेंट गैरहाजिर रहता है तो अपील खारिज करना, एप्लीकेंट की मौत पर केस अपने आप बंद करना और इन्फॉर्मेशन कमीशन के सामने सुनवाई के दौरान कानूनी मदद पर रोक लगाने जैसे मामलों पर भी आपत्ति जताई।  5 जुलाई से भूख हड़ताल करेंगे अन्ना हजारे अन्ना हजारे ने मांग करते हुए लिखा, 'अगर 12 जून के बदलाव तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो मैं 5 जुलाई को यादव बाबा मंदिर, रालेगण सिद्धि में अपना अनशन शुरू करूंगा, भले ही इसमें मेरी जान चली जाए।   

जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा मंजूर, मोदी सरकार में मंत्री पद छोड़ने के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कोरियन का इस्तीफा हो गया है. भाजपा के सीनियर नेता और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपना इस्तीफा दिया. उनके इस्तीफे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर जॉर्ज कुरियन का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया. इस इस्तीफे के बाद अब मोदी सरकार में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है।  दरअसल, जॉर्ज कुरियन ने आज यानी मंगलवार को अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री (MoS) के पद से इस्तीफा दे दिया. उनका छह साल का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया था. भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला किया. 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री (MoS) के तौर पर काम कर रहे थे. वह भाजपा के कद्दावर नेता हैं और 1980 में पार्टी की शुरुआत से ही इसके सदस्य रहे हैं।  जॉर्ज कुरियन कौन हैं? 65 साल के कुरियन अगस्त 2024 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री (MoS) के तौर पर काम कर रहे थे। वह बीजेपी के एक सीनियर नेता हैं और 1980 में पार्टी के बनने के समय से ही इसके सदस्य रहे हैं। कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया था, जिसकी वजह से उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। कहा जाता है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, कुरियन का जन्म 20 सितंबर, 1960 को केरल के कोट्टायम जिले की एट्टुमानूर नगरपालिका के नाम्बियाकुलम में हुआ था। उन्होंने अपने गृहनगर में स्कूली शिक्षा पूरी की और उसके बाद लॉ (कानून) में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।  2024 में बने थे केंद्रीय मंत्री उन्होंने 9 जून, 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली और 11 जून, 2024 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का कार्यभार संभाला। इससे पहले, कुरियन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के तौर पर काम कर चुके थे। जॉर्ज कुरियन के बारे में और जानें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले की एट्टुमानूर नगर पालिका के नाम्बियाकुलम में हुआ था. उन्होंने अपने गृहनगर में स्कूली शिक्षा पूरी की और उसके बाद लॉ यानी कानून में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।  केरल में ईसाई वोटर्स को बीजेपी ने दिया संदेश मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में जब केरल के सीनियर नेता जॉर्ज कुरियन को शामिल किया गया तो देश के साथ-साथ केरल के लोग भी हैरान रह गए. दरअसल ऐसी कोई चर्चा नहीं थी कुरियन को केंद्र सरकार में शामिल किया जाएगा. जॉर्ज कुरियन को सरकार में शामिल करने को लेकर चर्चा हुई कि केरल में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने ये फैसला किया है।  केरल में करीब 17 फीसदी आबादी ईसाई है. माना जाता है कि ईसाई वोटों ने राज्य में बीजेपी का लोकसभा खाता खोलने में अहम भूमिका निभाई है, जिसमें सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट 74,000 से ज़्यादा वोटों से जीती. इसीलिए उन्हें मोदी सरकार में शामिल करके ईसाई वोटर्स को एक संदेश दिया गया था।  कैसा रहा जॉर्ज कुरियन का सफर? जॉर्ज कुरियन 1980 में बीजेपी के बनने के समय ही पार्टी में शामिल हो गए थे. बीजेपी में अपने लंबे सफर के दौरान कुरियन ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर भी काम किया है. जब वाजपेयी सरकार में राजगोपाल रेल राज्य मंत्री थे तब वे उनके ओएसडी भी रहे।  कब से थे इस पद पर उन्होंने 9 जून 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली और 11 जून 2024 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का कार्यभार संभाला. इससे पहले जॉर्ज कुरियन ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) के तौर पर काम किया था।  इस्तीफे की क्या वजह?     इस्तीफा देनेवाले मंत्री जार्ज कुरियन के राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा था.     उन्होंने केरल में विधानसभा चुनाव भी लड़ा था लेकिन वो हार गए.     सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय नेत्रित्व उन्हें अब प्रदेश राजनीति में भेजने की तैयारी कर रहा है.