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AI के सैन्य इस्तेमाल पर ट्रंप का बड़ा कदम, Anthropic कंपनी पर लगाया बैन

वाशिंगटन अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सैन्य उपयोग में इस्तेमाल किए जाने को लेकर सरकार और Anthropic कंपनी के बीच टकराव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि देश के सभी फ़ेंडरल एजेंसियां अब इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं करेगी. अमेरिका को इसकी ज़रूरत नहीं है. राष्ट्रपति ने इसके उपयोग पर तुरंत बंद करने के निर्देश दिए हैं.  राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सरकार को इस तकनीक की ज़रूरत नहीं है और फ्यूचर में इस कंपनी के साथ बिज़नेस नहीं करेगा. हालांकि, रक्षा विभाग से जुड़ी एजेंसियों को छह महीने का चरणबद्ध समय दिया गया है. ये समय इसलिए दिया गया है ताकि इसके अल्टरनेट ऑप्शन ढूंढ़े जा सकें. Anthropic के सीईओ डारियो अमोदेई ने साफ किया कि उनकी कंपनी अपने Claude AI सिस्टम से सुरक्षा उपाय हटाने का विचार नहीं रखती. उन्होंने कहा है कि कुछ उपयोग जैसे पूरी तरह ख़ुद से चलने वाली हथियार सिस्टम या बड़े पैमाने पर घरेलू निगरानी नैतिक और तकनीकी सीमाओं को पार करते हैं, इसलिए ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी. अमोदेई ने यह भी जोर दिया कि कंपनी एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को प्राथमिकता देती है. हालांकि, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक 'सप्लाई-चेन रिस्क' के रूप में घोषित कर दिया है. उन्होंने अपनी घोषणा में कहा कि अब कोई भी अमेरिकी सेना के साथ काम करने वाला ठेकेदार या साझेदार Anthropic के साथ व्यावसायिक गतिविधि नहीं कर सकेगा. यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिसके तहत सरकार ने Anthropic के साथ अपने सभी संबंधों को सीमित करने का कदम उठाया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा और कार्यकारी अधिकार के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि Anthropic के कामकाज से अमेरिकी सैनिकों और देश की सुरक्षा पर जोखिम उत्पन्न हो सकता है. हालांकि प्रशासन ने इस विवाद के पीछे के विस्तार से कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह साफ है कि यह कदम अमेरिकी सरकार और प्रमुख एआई डेवलपर के बीच बढ़ती तनातनी और बदलते रिश्तों का परिचायक है.

किम जोंग उन ने अधिकारियों को गिफ्ट की स्नाइपर राइफल, बेटी ने भी दिखाया निशाना लगाना

फियोंगयांग उत्तर कोरिया की सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष पद पर चुने जने के बाद किम जोंग उन ने अपने शीर्ष अधिकारियों और कमांडरों को नई स्निपर राइफल गिफ्ट की हैं। एक समारोह के दौरान किम जोंग उन ने लोगों को राइफल का तोहफा दिया। वहीं उनकी बेटी राइफल से निशाना लगाती नजर आई। चर्चा है कि किम जोंग उन बेटी को ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं। किम जोंग उन ने कहा कि राइफल गिफ्ट करना दिखाता है कि उनका अपने अधिकारियों पर पूर्ण विश्वास है। इसके अलावा वर्कर्स पार्टी के लिए वह पूरी तरह से ईमानदार हैं. हाल ही में किम की ब हन किम यो जोंग भी अमरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ काफी बयान दे रही थीं। ऐसे में उनको लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि एक बार फिर किम जोंग उन को ही वर्कर्स पार्टी का चीफ चुना गया। स्थानीय मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में दिखाया गया कि किम यो जोंग के हाथ में भी राइफल है। बेटी किम जू ए को लेकर क्या है प्लान किम जोंग की बेटी की उम्र अभी 13 साल है। वैसे तो किम जोंग उन अपने परिवार को सार्वजनिक रूप से कहीं ले नहीं जाते हैं। हालांकि हाल ही में एक मिसाइल टेस्ट के दौरान वह अपनी बेटी को लेकर गए थे। इसके अलावा उनकी बहन की भी कई तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। हाल ही में जब किम जोंग उन चीन की यात्रा पर गए थे तब भी वह बेटी को साथ लेकर गए थे। वर्कर्स पार्टी ने सात दिनों का एक वार्षिक समारोह किया जिसमें किम जोंग उन का जमकर गुणगान किया गया। अमेरिका को दे दी धमकी किम जोंग उन ने कहा है कि यदि अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीति छोड़कर उत्तर कोरिया के परमाणु संपन्न राष्ट्र के संवैधानिक दर्जे को स्वीकार करता है, तो उत्तरी कोरिया अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार होगा। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के अनुसार वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं कांग्रेस के अवसर पर आयोजित एक परमाणु सैन्य परेड में श्री किम ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा 'यदि अमेरिका उत्तर कोरिया के संविधान में परिभाषित परमाणु राष्ट्र की वर्तमान स्थिति का सम्मान करता है और उत्तर कोरिया के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति वापस लेता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम अमेरिका के साथ अच्छे संबंध स्थापित न कर सकें।' किम ने कहा कि अमेरिका और उत्तर कोरिया साथ चल सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब अमेरिका यह स्वीकार कर ले कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार स्थायी रूप से रहेंगे। उत्तरी कोरिया के सुप्रीम लीडर की टिप्पणियों को अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खोलने के रूप में देखा गया। श्री किम ने हालांकि दक्षिण कोरिया के साथ किसी भी राजनयिक सुधार की उम्मीदों को खारिज करते हुए उन्हें सबसे बड़ा शत्रु करार दिया।

ममता सरकार को SC की चेतावनी: ‘चुनाव आयोग नहीं तो ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी किसकी?’

मुंबई  सुप्रीम कोर्ट ने  पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को पूरा करने में देरी करने के उद्देश्य से बार-बार 'अस्पष्ट और अप्रासंगिक' कारणों के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाने पर राज्य सरकार के प्रति गहरी नाराजगी जताई। गौरतलब है कि इस मतदाता सूची की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा- कृपया अस्पष्ट कारणों के साथ अदालत में न आएं और प्रक्रिया में देरी करने की कोशिश न करें। हर दिन कोई न कोई बेमतलब का बहाना नहीं हो सकता। इसे अब खत्म होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा- हमने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर (संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए) उन न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का निर्देश दिया है, जो काम मूल रूप से चुनाव आयोग (EC) के अधिकार क्षेत्र का है। लेकिन आप (राज्य सरकार) बेवजह की शिकायतें कर रहे हैं। कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप  रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत की यह टिप्पणी तब आई जब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सीजेआई और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष गंभीर आरोप लगाए। सिब्बल ने कहा कि अजीब चीजें हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के अधिकारी उन न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं (जिन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा तैनात किया गया था) कि मतदाताओं के दावों के साथ जमा किए गए किन दस्तावेजों को स्वीकार किया जाना है। सिब्बल ने तर्क दिया कि यह सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया था कि इसके 'तौर-तरीके' कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा तय किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सिब्बल की दलील को किया खारिज पीठ ने बंगाल सरकार द्वारा आए दिन इस मुद्दे को उठाए जाने पर नाखुशी जताई। अदालत ने सिब्बल की दलीलों से असहमति जताते हुए स्पष्ट किया- जब हमने कहा था कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तौर-तरीके तय करेंगे, तो हमारा मतलब यह था कि वह यह तय करेंगे कि किस न्यायिक अधिकारी को कहां तैनात किया जाएगा और उन्हें क्या सुविधाएं दी जाएंगी। दावों का निपटान और मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता पर निर्णय केवल न्यायिक अधिकारी ही लेंगे। जस्टिस बागची का स्पष्टीकरण और मुख्य सचिव का मुद्दा जस्टिस बागची ने स्थिति साफ करते हुए कहा- अगर चुनाव आयोग के अधिकारी न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग नहीं देंगे, तो और कौन देगा? हमारा आदेश दिन के उजाले की तरह साफ है। हमने SIR की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए न्यायिक अधिकारियों को एक ऐसी जिम्मेदारी दी है जो उनके सामान्य कामकाज से अलग है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों को मिलकर उनके लिए काम करने का अनुकूल माहौल बनाना चाहिए। इस दौरान, खुद को बचाव की मुद्रा में पाते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य की मुख्य सचिव भी अदालत में मौजूद हैं क्योंकि दुर्भाग्य से चुनाव आयोग द्वारा उनके खुद के मतदान के अधिकारों पर सवाल उठाया जा रहा है। पीठ का अंतिम निर्देश इस पर पीठ ने निर्देश दिया- अपने मुख्य सचिव से कहें कि वह SIR को शीघ्र पूरा करने के लिए चुनाव आयोग और न्यायिक अधिकारियों के साथ मिलकर काम करें। अंत में सिब्बल ने अदालत से यह भी मांग की कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद, जैसे-जैसे न्यायिक अधिकारी मतदाताओं के नामों को शामिल करने का फैसला लें, चुनाव आयोग को 'पूरक मतदाता सूची' भी प्रकाशित करनी चाहिए। इसके जवाब में पीठ ने स्पष्ट किया कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह से अदालत के आदेशों के अनुसार ही की जाएगी, जिसमें यह पहले से ही निर्दिष्ट है कि दावों की जांच के लिए किन दस्तावेजों को स्वीकार किया जाना है।

ईरान में इजरायल और अमेरिका का बड़ा हमला, राष्ट्रपति भवन, खुफिया एजेंसी सहित 30 ठिकानों को बनाया निशाना

तेल अवीव/तेहरान इजरायली सेना ईरान पर हमला करने की घोषणा की है। इसके अलावा इजरायली सेना ने ईरान के पलटवार की आशंका के बीच लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा है। ईरान की राजधानी तेहरान में कम से कम तीन जगहों पर भीषण धमाकों की आवाज सुनी गई है। इजरायली सेना ने कहा कि ये अलर्ट लोगों को इजरायल की तरफ मिसाइल दागे जाने की संभावना के लिए तैयार करने के लिए हैं। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ये हमला किया है। इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर के निजी आवास को उड़ा दिया गया है। लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सुप्रील लीडर उस वक्त अपने आवास पर मौजूद नहीं थे। वहीं ईरान के एयरस्पेस को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। सिविल एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन के स्पोक्सपर्सन ने नए NOTAM जारी होने के बाद पूरे देश में बंद होने की पुष्टि की। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि ईरान में एक साथ 30 टारगेट पर हमले किए हैं। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ली अली खआमेनेई और ईरानी इंटेलिजेंस के हेडक्वार्टर शामिल हैं। शुरुआती धमाके राजधानी तेहरान में तीन जगहों पर करीब 09:30 बजे रिकॉर्ड किए गए, और आगे के हमलों में राजधानी के कम से कम दो और इलाकों को निशाना बनाया गया। तेहरान में लोकल टाइम के हिसाब से सुबह 10:00 बजे के बाद धमाकों की दूसरी लहर शुरू हुई। इजरायली सेना ईरान पर हमला करने की घोषणा की है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही इजरायल और US ईरान पर हमले कर रहे हैं, तेहरान के उत्तर और पूर्व में, साथ ही इस्फ़हान, करज और करमानशाह में भी धमाके सुनाई दे रहे हैं। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के जिन जगहों पर हमला किया है वो इस प्रकार हैं.    -रक्षा मंत्रालय  -खुफिया मुख्यालय -सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का ऑफिस -एटॉमिक एनर्जी ऑफ ईरान -परचीन ईरान के किन किन शहरों पर हमला हुआ है -तेहरान -कॉम -तबरेज -करमनशाह -कराज -इस्फहान युद्धपोत अब्राहम लिंकन से ईरान पर अमेरिका ने किया हमला इरान पर अमेरिका ने अपने युद्धपोत अब्राहम लिंकन से ईरान पर हमले कर रहा है. इस हमले में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना शामिल है.   इजरायली PM  ने कहा- ये शेर की दहाड़ इजरायल ने ईरान पर कई मिसाइलें दागी हैं. हमले के बाद राजधानी तेहरान में कई स्थानों इमारतों से धुएं का गुबार निकलता हुआ दिखाई दे रहा है. इजरायल ने इस ऑपरेशन का नाम शील्ड ऑफ जुडा यानी कि यहूदी की ढाल रखा है. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले को शेर की दहाड़ नाम दिया है.  तेहरान विस्फोट की आवाज ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार को एक विस्फोट हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह दावा किया। इस विस्फोट पर सरकार की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई। यह विस्फोट ऐसे समय हुआ जब तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। इजराइल के हमले के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद किया। इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके देश ने ईरान पर हमला किया है और उन्होंने आपातकाल की घोषणा की। इसके साथ ही इजराइल में सायरन बजने लगे। इजरायल ने जवाबी मिसाइल हमले की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है। एपी के मुताबिक, ईरान पर हमले के बाद इजराइल ने भी अपना हवाई क्षेत्र बंद किया। खामेनेई को सुरक्षित जगह पहुंचा गया एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं हैं और उन्हें एक सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया है। इजराइल ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ हमला किया है, जिसमें तेहरान में कई धमाके होने की खबर है। ईरान में मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त अलजजीरा की मुताबिक इजरायली हमले में ईरान के मोबाइल नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। एक इज़रायली सिक्योरिटी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इस ऑपरेशन की प्लानिंग महीनों पहले से थी और इसकी टाइमिंग कई हफ़्ते पहले तय हो गई थी। डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट के सूत्रों ने बताया कि 'शील्ड ऑफ़ जूडा' नाम के इन हमलों का एक मकसद "इज़राइली होम फ्रंट के लिए खतरों को दूर करना होगा, जिसमें मिसाइल लॉन्चर और अनमैन्ड एरियल व्हीकल बेस पर ज़ोर दिया जाएगा।" ईरान गरजा- जंग शुरू तुमने की, खत्म हम करेंगे इस बीच ईरानी संसद राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी के चेयरमैन ने इजरायल-अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि ये लड़ाई तुमने शुरू की है, लेकिन इसे खत्म हम करेंगे. इस बीच ईरान ने कहा है कि इस हमले का जवाब में इजरायल  को कुचल दिया जाएगा.  ईरान पर हमले के बाद इराक में भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है और उसने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया गया है.  हमले के बाज ट्रंप का पहला बयान इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर हमले के बाद पहला बयान आया है. उन्होंने कहा है कि ईरान कभी भी परमाणु बम नहीं बना सकता है. ईरान को निशाना बनाना चाहता था. उन्होंने कहा कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिससे अमेरिका को भी खतरा है. और दूसरे देशों को भी खतरा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान पर भीषण आक्रमण कर रही है.  ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने मिलकर किया हमला अमेरिका पहले ही मिडिल ईस्ट में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात कर चुका है। कई राउंड की डिप्लोमैटिक कोशिशों के बावजूद इजरायल और अमेरिका का कहना है कि ‘बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।’ ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर को एक अज्ञात जगह पर छिपा दिया गया है। इजरायली सेना ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी है और लोगों से शेल्टर के पास रहने को कहा है। इजरायली सेना ने कहा है कि "हम समझते हैं कि यह एक कैंपेन है जिसे इजरायल ने अपनी इस पॉलिसी के हिसाब से शुरू किया है कि ईरान इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा है।" इजरायल में स्कूलों को बंद कर दिया गया है, लोगों के एक जगह पर जमा होने से मना कर दिया गया है और जरूरी सेक्टर्स छोड़कर गैर-जरूरी जगहों को बंद कर … Read more

1 मार्च से बदलेंगे अहम नियम: ट्रेन टिकट, LPG, UPI से लेकर सिम तक की कीमतों में बदलाव

नई दिल्‍ली हर महीने आर्थिक बदलाव होते हैं, जो लोगों की मंथली खर्च को प्रभावित करते हैं. मार्च 2026 में भी कई महत्‍वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, जिसमें एलपीजी गैस से लेकर सिम और रेलवे टिकट संबंधी नियम शामिल हैं. ये बदलाव आपकी जेब को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं. आइए जानते हैं अगले महीने से कौन-कौन से नियम बदल रहे हैं.  एलपीजी गैस सिलेंडर  हर महीने की शुरुआत में एलपीजी के दाम में बदलाव आता है. पिछले कुछ समय से कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में ही बदलाव देखा गया है. रसोई गैस सिलेंडर के दाम अभी भी स्थिर हैं. पिछले महीने कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में लगभग ₹49 तक बढ़ोतरी की थी. इस महीने भी इसमें बदलाव की उम्‍मीद की जा रही है.   रेलवे टिकट  1 मार्च 2026 से जनरल और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने का नियम बदलने जा रहा है. अब भारतीय रेलवे का पुराना UTS ऐप 1 मार्च से बंद किया जा सकता है, जिसकी जगह पर अब नया RailOne ऐप पूरी तरह से एक्टिव हो जाएगा. इस नए एप पर जनरल टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और लोकल यात्रा से जुड़ी सभी चीजें उपलब्ध होंगी.   सिम बाइंडिंग का नियम सरकार डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए 1 मार्च से सिम बाइंडिंग का नया नियम लेकर आ रही है. इस नियम के तहत आपका WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप्‍स अब सीधे आपके सिम से लिंक रहेंगे. अगर आप अपने फोन से सिम निकालते हैं तो ये ऐप्‍स तुरंत काम करना बंद कर देंगे. आप वाई-फाई या किसी अन्‍य नेटवर्क के माध्‍यम से भी इन ऐप्‍स को बिना सिम के ऑपरेट नहीं कर पाएंगे.  UPI पेमेंट  1 मार्च से डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सुरक्षा को और मजबूत किया जाने वाला है. बड़ी रकम का ऑनलाइन ट्रांसफर अब सिर्फ UPI PIN से नहीं होगा, बल्कि बैंक हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए अतिरिक्त बायोमेट्रिक्स या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होने जा रहा है.  मिनिमम बैलेंस का नियम देश के बड़े सरकारी बैंक 1 मार्च 2026 से मिनिमम बैलेंस को लेकर बदलाव करने जा रहे हैं. पहले किसी एक दिन बैंक अकाउंट में बैलेंस कम होने पर पेनल्‍टी  लग जाती थी, लेकिन अब एवरेज मंथली बैलेंस के आधार पर पेनल्‍टी लगाई जाएगी.   CNG, PNG और ATF के रेट पेट्रोलियम डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को हवाई जहाज में इस्‍तेमाल होने वाले एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के साथ CNG (सीएनजी) और पीएनजी (PNG) के दामों में बदलाव करती हैं.  उम्‍मीद है कि 1 मार्च से भी इन  नियमों में बदलाव हो सकता है.

गर्मियों का आगाज: मार्च के पहले हफ्ते में गुजरात-महाराष्ट्र में बढ़ेगा तापमान, दिल्ली का मौसम जानें

 नई दिल्ली होली से पहले ही गर्मी बढ़ने लगी है. उत्तर भारत से लेकर पश्चिम तक के राज्यों में अधिकतर तापमान सामान्य से ज्यादा और 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है. इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में मार्च के पहले ही हफ्ते में काफी गर्मी पड़ने वाली है. अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है. IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले 7 दिनों में दिन का तापमान धीरे-धीरे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. इससे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल-उत्तराखंड के निचले इलाकों में गर्मी बढ़ेगी.बता दें कि कई जगहों पर तापमान पहले से ही सामान्य से 3-5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है. इन राज्यों में गर्मी और उमस की चेतावनी     गुजरात में 4 और 5 मार्च को कुछ इलाकों में बहुत गर्म और उमस भरी स्थिति बनी रह सकती है.     वीकेंड तक मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भी अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री ज्यादा रहने की संभावना है.     महाराष्ट्र में अगले 5 दिनों में तापमान 3-4 डिग्री बढ़ सकता है, जबकि गुजरात में अगले 5 दिनों में 3-5 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है. दक्षिण भारत में तेज गर्मी, उत्तर में बढ़ेगा पारा मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के मुताबिक, दक्षिण भारत के कई शहरों जैसे इरोड, सलेम, मदुरै, अनंतपुर और कर्नूल में तापमान पहले ही 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है. मध्य भारत में अकोला, अमरावती (विदर्भ) और राजकोट (सौराष्ट्र) में भी पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया है. जबकि उत्तर भारत में अभी गर्मी उतनी तेज नहीं हुई है और पंजाब-हरियाणा में तापमान 35 डिग्री के पार नहीं गया है. हालांकि, पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर और फलोदी जैसे सीमावर्ती इलाके में पारा 35 डिग्री के करीब पहुंच चुका है. मार्च के दूसरे पखवाड़े में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है. मार्च के पहले हफ्ते में कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम? मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में आसमान साफ और मौसम शुष्क रहेगा. मार्च के पहले हफ्ते में तापमान में इजाफा होगा. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मार्च के पहले हफ्ते में ही देश की राजधानी का अधिकतम तापमान बढ़कर 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. अगले एक हफ्ते में बादलों की आवाजाही या बारिश की संभावना नहीं है. हिमालय में राहत की बूंदों के आसार मौसम विभाग के मुताबिक, दो कमजोर पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbances) के असर से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 3-4 मार्च 2026 को हल्की बारिश या बर्फबारी होने की उम्मीद है. जम्मू-कश्मीर में भी हल्की बर्फबारी या बारिश की संभावना है.    

बंगाल में वोटर लिस्ट पर संकट, मुस्लिम बहुल जिलों में नाम कटने का खतरा

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। राज्य में शनिवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने वाली है, लेकिन करीब 60,06,675 मतदाताओं के नाम पर अभी भी असमंजस के बादल छाए हुए हैं। ये कुल मतदाताओं का लगभग 8.5% हिस्सा हैं, जिनकी पात्रता की समीक्षा अब निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के बजाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के वैधानिक अधिकारियों (EROs और AEROs) ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि उन्होंने पूरी सावधानी से दस्तावेजों की जांच कर लाखों नामों को मंजूरी दे दी थी। हालांकि आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर्स द्वारा विसंगतियां बताए जाने के बाद इन स्वीकृत नामों को सिस्टम से रिवर्स कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि सुनवाई की अंतिम तिथि 14 फरवरी तक यह संख्या अचानक कुछ लाख से बढ़कर 60 लाख के पार पहुंच गई। एक अधिकारी ने बताया कि 11 फरवरी के बाद से माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने उन मामलों को भी वापस भेजना शुरू कर दिया जिन्हें पहले हरी झंडी मिल चुकी थी। इसमें एक सेवारत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे ज्यादा मामले लंबित आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची से नाम कटने या समीक्षा के दायरे में आने का सबसे ज्यादा असर अल्पसंख्यक बहुल जिलों में दिख रहा है। मुर्शिदाबाद में 11 लाख, मालदा में 8.28 लाख, दक्षिण 24 परगना में 5.22 लाख, उत्तर 24 परगना में 5 लाख, झारग्राम में 6,682 और कालिम्पोंग में 6,790 मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के 530 न्यायिक अधिकारी इस सप्ताह से इन 60 लाख मतदाताओं के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। जब तक ये अधिकारी नामों को मंजूरी नहीं देते, ये मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे। अंतिम सूची में इनके नाम के आगे निर्णय के अधीन लिखा होगा, जिसे न्यायिक मंजूरी मिलने के बाद ही हटाया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में करीब 8,100 सूक्ष्म-प्रेक्षकों की नियुक्ति की थी, जो देश के किसी अन्य राज्य में नहीं किया गया। तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि इन प्रेक्षकों ने वैधानिक अधिकारियों (EROs) के अधिकारों का अतिक्रमण किया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग के अधिकारियों का तर्क है कि दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं पाई गईं। आरोप है कि कई मामलों में AI-जनरेटेड वोटर आईडी और अवैध दस्तावेज अपलोड किए गए थे। एक रोल ऑब्जर्वर ने बताया कि पुरुषों के आवासीय प्रमाण के रूप में ICDS प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दिए गए थे। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्थिति को अत्यंत अनिश्चित बताया है। उन्होंने कहा कि अदालती हस्तक्षेप और बार-बार की अपीलों के कारण न्यायिक अधिकारियों द्वारा संशोधन की यह अनूठी मिसाल बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की पात्रता पर सवाल उठना न केवल प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है, बल्कि यह चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। यदि इन 60 लाख लोगों में से एक बड़ा हिस्सा वोट देने से वंचित रह जाता है तो इसके चुनावी परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

गांव में दलितों के बाल काटने की प्रथा अब हुई खत्म, सरकार ने दिलाया बराबरी का हक

बेंगलुरु कर्नाटक के गडग जिले के शिंगातलूर गांव में दलित समुदाय को बाल कटवाने की सेवा से सालों तक वंचित किया गया. सामाजिक कल्याण विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस गांव में एक खास समय पर दलितों को टोंसुर या बाल कटवाने की सेवा नहीं दी जाती थी. इस अंधविश्वास के कारण दलितों को बाल कटवाने के लिए पड़ोसी गांवों का रुख करना पड़ता था, जिससे उन्हें अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ता था. प्रभावित ग्रामीणों की शिकायतों और ज्ञापनों के बाद प्रशासन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया. अब शिंगातलूर गांव में एक नया सैलून बनाया गया है, जो सोशल वेलन विभाग, तालुक प्रशासन, तालुक पंचायत, दलित संगठनों और शिवशरणा हडपदा अप्पन्ना समुदाय की संयुक्त पहल का परिणाम है. तिप्पापुर गांव के बसवराज हडपदा को इस सैलून का संचालन सौंपा गया है, ताकि सभी समुदाय के लोगों को समान और उचित नाई सेवा मिल सके. गांव में मान्यता थी कि महानवमी के दौरान वीरभद्रेश्वर स्वामी हडपदा समुदाय के घर आते हैं और उस समय दलितों के बाल कटवाने से दुर्भाग्य आता है. इस अंधविश्वास के चलते कुछ लोगों ने दलितों को बाल कटवाने की सेवा देना बंद कर दिया था, जिससे सामाजिक विभाजन और भेदभाव बढ़ा. सामाजिक कल्याण विभाग ने बताया कि यह पहल अस्पृश्यता उन्मूलन जागरूकता (छुआछूत) और सामंजस्यपूर्ण जीवन (वर्क लाइफ हार्मनी) कार्यक्रम के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव बढ़ाना और बुनियादी सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना है. सैलून का उदघाटन स्थानीय अधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में किया गया, जो सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

RSS का बड़ा बयान: ‘हम 5 साल नहीं, शताब्दियों तक की सोच रखते हैं’

नई दिल्ली  राइजिंग भारत समिट 2026 में ‘स्ट्रेंथ विदइन’ थीम के साथ देश की बदलती तस्वीर पर चर्चा हुई. इस दौरान आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेडकर ने युवाओं और संघ के तालमेल पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि आज का युवा एस्पिरेशनल है और संघ उसके लिए सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह काम करता है. रुबिका लियाकत के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने साफ किया कि ‘भारत माता की जय’ किसी पर थोपी नहीं जाती, बल्कि ये आज के युवाओं के दिल से आती है. इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज हस्तियां शामिल होंगी. पूरा मंच भारत की आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को दुनिया के सामने रखने के लिए तैयार है. यह आयोजन भारत के भविष्य के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहां देश की प्रगति का सटीक खाका तैयार किया जा रहा है. क्या आरएसएस युवाओं की पसंद बन गया है? सुनील आंबेडकर का मानना है कि संघ आज के एस्पिरेशनल भारत की असली आवाज है. उन्होंने कहा कि देश के हर कोने में मौजूद लोग आज संघ से इसलिए जुड़ रहे हैं, क्योंकि उनकी आकांक्षाएं राष्ट्र निर्माण से गहराई से जुड़ी हैं. आज का युवा खुद को और अपने देश को तेजी से आगे देखना चाहता है. उनके लिए वंदे मातरम का नारा गर्व का विषय है, न कि किसी विवाद का मुद्दा. क्या भारत माता का जयकारा जबरदस्ती है? जब रुबिका लियाकत ने सवाल किया कि क्या ये नारे थोपे जा रहे हैं, तो आंबेडकर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो संघ को 100 साल का लंबा सफर तय करने में बड़ी दिक्कत आती. संघ सालों और सदियों के हिसाब से काम करता है. यह निरंतर संवाद की एक ऑर्गेनिक प्रक्रिया है, जो जमीन पर लोगों के बीच से निकलकर सामने आती है.

100 रुपये घंटा, 10 मिनट में कामवाली: क्या टिक पाएगा यह नया बिजनेस मॉडल?

नई दिल्ली शनिवार की सुबह थी. नोएडा की हाई-राइज सोसायटी में रहने वाली 43 साल शिवानी माथुर दिन की तैयारी में लगी थीं, तभी उनका फोन व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन से बजा-दीदी, आज मैं नहीं आऊंगी. यह मैसेज उनके लिए नया नहीं था, लेकिन इस बार समस्या यह थी कि घर में मेहमान आने वाले थे. उन्होंने जल्दी से सोसायटी के ग्रुप पर मैसेज किया-किसी की हाउस हेल्प आज आ सकती है क्या? जवाब आया-अर्बन क्लैप (Urban Clap) का इंस्टाहेल्प (InstaHelp) ट्राय करो, 10–15 मिनट में कोई आ जाएगा. कुछ देर बाद बैंगनी यूनिफॉर्म में एक वर्कर उनके दरवाजे पर थी. उसने घर साफ किया, बर्तन धोए और किचन में मदद की-आटा गूंथा, सब्जियां काटीं और चटनी के लिए पुदीना–धनिया तैयार किया. दो घंटे में सारा काम पूरा हो गया और खर्च 200 रुपये से भी कम आया. तभी से यह उनकी फिक्स्ड बैकअप बन चुकी है. शहरों में नया ट्रेंड: इंस्टेंट हाउस हेल्प  शिवानी अकेली नहीं हैं. अब पूरे अर्बन इंडिया में लोग इस सुविधा को अपना रहे हैं. पहले पड़ोसियों और जान-पहचान में मदद ढूंढी जाती थी, अब बस ऐप खोलते ही 10 मिनट में मदद घर पर मिल जाती है. ओला–उबर ने जैसे ट्रैवल बदला, स्विगी–जोमैटो ने फूड डिलीवरी, ब्लिंकिट–बिगबास्केट ने ग्रॉसरी उसी तरह अब स्नैबिट, प्रोंटो, अर्बन क्लैप इंस्टाहेल्प और ब्रूमीज घर के कामों के लिए तैयार हैं. स्नैबिट ने अगस्त में 1 लाख ऑर्डर से अक्टूबर में 3 लाख और अब फरवरी में लगभग 8.5 लाख ऑर्डर पूरे कर लिए हैं. अर्बन कंपनी का इंस्टाहेल्प भी फरवरी 2026 में 50,000 डेली बुकिंग तक पहुंच गया है. 100 रुपये में एक घंटा! कैसे? अर्बन कंपनी  पर एक घंटे की सर्विस 100 रुपये की पड़ती है.स्नैबिट पर तीन एक-घंटे वाली विजिट का पैक 149 रुपये में मिलता है, यानी लगभग 50 रुपये प्रति घंटा.वर्कर्स के नेटवर्क पर यह मॉडल चलता है. बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग के बाद वे ऐप पर जॉब रिक्वेस्ट लेते हैं, बिल्कुल ओला/उबर की तरह है.  बेहतर सैलरी और सम्मान ज्यादातर महिला वर्कर्स के लिए यह बड़ा बदलाव है.नोएडा सेक्टर 121 में काम करने वाली सुनीता कहती हैं कि अर्बन कंपनी (Urban Company) से मुझे 30,000 रुपये मिलते हैं. 8 घंटे पूरे करना है, लेकिन एक साथ करना जरूरी नहीं. अब 6 बजे से भागमभाग नहीं करनी पड़ती. बच्चों को स्कूल भेजकर 8 बजे के स्लॉट के बाद काम शुरू कर लेती हूं. कम डिमांड वाले इलाकों में भी उनकी फिक्स्ड सैलरी सुरक्षित रहती है.2 घंटे वाले मॉडल में 10,000 रुपये फिक्स के साथ बोनस भी मिलता है.SOS फीचर, शिकायत का विकल्प और हेल्थ इंश्योरेंस भी दिया जाता है. कई महिलाएं कहती हैं कि यूनिफॉर्म पहनने से सम्मान महसूस होता है. इतनी सैलरी, इतनी सस्ती कीमत-चल कैसे रहा है यह मॉडल? असल में कंपनियां अभी स्केल पर फोकस कर रही हैं, मुनाफे पर नहीं.अर्बन कंपनी के इंस्टाहेल्प ने Q3 FY 2026 में 61 करोड़ रुपये का EBITDA लॉस दिखाया.स्नैबि और प्रोंटो  भारी वीसी फंडिंग पर चल रहे हैं.स्नैबिट को 56 मिलियन डॉलर और प्रोंटो (Pronto) को 13 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल वही रास्ता पकड़ेगा, जो कैब और फूड डिलीवरी में देखा गया.शुरुआत में ज्यादा इंसेंटिव, बाद में कटौती होगी.वर्कर्स की आज की कमाई धीरे-धीरे कम हो सकती है.कस्टमर्स के लिए दाम बढ़ना भी तय माना जा रहा है.अर्बन कंपनी अभी 60 फीसदी डिस्काउंट के बाद 99 रुपये में सर्विस दे रही है. आगे चलकर कीमतें बढ़ेंगी. क्या लोग फिर भी पैसे देंगे? यही बड़ा सवाल है. हो सकता है 'बहुत सस्ता, बहुत अच्छा' वाला फेज खत्म हो जाए, लेकिन एक बात साफ दिख रही है-कंज्यूमर बर्ताव बदल रहा है.लोग ऐप-आधारित सुविधाओं के इतने आदी हो चुके हैं कि शायद आगे चलकर ज्यादा पैसे देकर भी यह सुविधा नहीं छोड़ेंगे.भारत का इंस्टेंट हाउस-हेल्प सेक्टर इसी बदलाव की दहलीज़ पर खड़ा है.तेज, आसान और अब हर घर की जरूरत बनता हुआ.