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पाक उछला, लेकिन भारत ने UAE के साथ कर लिया मास्टरस्ट्रोक समझौता, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली भारत और यूएई के बीच हाल ही में हुए समझौते पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ा सकते हैं। इस सप्ताह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भारत पहुंचे थे जहां दोनों देशों के बीच कई अहम साझेदारियां हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान ने दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की योजना भी पेश की है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है।   दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए गए पांच दस्तावेजों में सबसे अहम दस्तावेज रणनीतिक रक्षा साझेदारी स्थापित करने की प्रतिबद्धता रही। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब महज 4 महीने पहले पाकिस्तान और सऊदी अरब ने अपने रक्षा समझौतों को मजबूत करने की योजना बनाई है। दोनों देशों के बीच एक ऐसा समझौता भी हुआ है जिसके तहत एक देश पर हमले को दूसरे के विरुद्ध भी हमला माना जाएगा। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच यमन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। यह वही मुद्दा है, जिस पर सऊदी अरब और यूएई के रिश्तों में हाल के समय में खटास आई है। इसके अलावा गाजा की स्थिति और ईरान की स्थिति को लेकर भी बातचीत हुई। रक्षा समझौते में क्या? रक्षा साझेदारी के तहत भारत और यूएई रक्षा औद्योगिक सहयोग और उन्नत प्रौद्योगिकियों, साइबरस्पेस प्रशिक्षण, विशेष अभियानों, अपनी सेनाओं के संचालन और आतंकवाद रोधी गतिविधियों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेंगे। दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने का भी फैसला किया है, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का विकास तथा उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालन और रखरखाव एवं परमाणु सुरक्षा में सहयोग शामिल है। इस दौरान एक और समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिसके तहत हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) 2028 से शुरू होने वाले 10 वर्षों में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस से 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) खरीदेगी। इस डील के बाद भारत, अबू धाबी का सबसे बड़ा LNG ग्राहक बन गया है। बदलते क्षेत्रीय समीकरण भारत-यूएई समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब तुर्की सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। इससे मध्य पूर्व में एक नया सैन्य गुट बनने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच पाकिस्तान, नाटो की तर्ज पर इस्लामिक नाटो के सपने भी देख रहा है। वहीं सऊदी अरब और यूएई, जो लंबे समय तक करीबी सहयोगी रहे हैं, अब क्षेत्रीय नीतियों को लेकर अलग रास्तों पर नजर आ रहे हैं। दोनों देश यमन और सूडान में अलग-अलग पक्षों का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में यूएई संग भारत का समझौता पाक के लिए झटका हो सकता है।

अरावली मुद्दे पर SC का फैसला: 100 मीटर नियम पर रोक और अवैध खनन के खिलाफ कड़ा कदम

  नई दिल्ली    अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई करते हुए साफ कहा कि अवैध खनन एक गंभीर अपराध है और इसके पर्यावरणीय असर भयानक और अपूरणीय हो सकते हैं. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है और तब तक केंद्र व संबंधित राज्यों को अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. शुरुआती चिंता के बिंदु सामने आए: CJI सुनवाई की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) से कहा कि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कुछ गंभीर चिंता के क्षेत्र चिन्हित किए हैं और इन पर केंद्र सरकार की सहायता की आवश्यकता है. CJI ने स्पष्ट किया कि यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है, बल्कि उद्देश्य समस्या की जड़ तक पहुंचना है. इसी क्रम में कोर्ट ने एमिकस क्यूरी को एक विस्तृत नोट दाखिल करने को कहा और स्पष्ट किया कि तब तक पहले से लागू व्यवस्थाएं जारी रहेंगी. राजस्थान में अब भी कट रहे पेड़, दिए जा रहे खनन पट्टे राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस ओका की 2024 की पीठ के आदेशों के बावजूद राज्य में खनन पट्टे दिए जा रहे हैं और पेड़ों की कटाई जारी है. इस पर CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारे आदेश बिल्कुल साफ हैं. दुर्भाग्य से अवैध खनन और भ्रष्टाचार मौजूद है. राज्य को अपनी मशीनरी हरकत में लानी होगी. अवैध खनन हर हाल में रोका जाना चाहिए, यह एक अपराध है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि यदि कहीं अवैध खनन की जानकारी है तो उसकी प्रतिनिधि शिकायत ASG कार्यालय में दी जाए. साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि जब मामला पहले ही सुओ मोटो लिया जा चुका है, तो नई रिट याचिकाओं से बचा जाए ताकि सुनवाई भटके नहीं. स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की जरूरत ASG ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), एमिकस क्यूरी की सहायता करेगी. इस पर CJI ने कहा कि अब जरूरत है कि वन, खनन, पर्यावरण और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक साथ काम करें. कोर्ट ने संकेत दिया कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी, जो इस पूरे मसले पर कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी, ताकि सभी पहलुओं पर समग्र दृष्टि से विचार हो सके. 100 मीटर नियम पर रोक जारी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अरावली को लेकर पहले दिए गए उस आदेश पर लगी रोक जारी रहेगी, जिसमें 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की बात कही गई थी. कोर्ट ने दोहराया कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों पर सीधा असर डालती है. अरावली की परिभाषा पर उठे कानूनी सवाल सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अरावली पर्वतमाला को सख्ती से परिभाषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि भूगर्भीय रूप से इसमें उप-टेक्टॉनिक संरचनाएं भी शामिल हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर प्रारंभिक सुनवाई की मांग की. इस पर CJI ने कहा कि यदि एमिकस या केंद्र से कोई अहम पहलू छूट गया है, तो उस पर सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश सभी पक्ष विस्तृत नोट दाखिल करें एमिकस और सरकार पर्यावरण, वन और खनन विशेषज्ञों के नाम सुझाएं प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी राजस्थान सरकार यह सुनिश्चित करे कि अवैध खनन तुरंत रोका जाए दिसंबर में दिया गया पिछला आदेश अगले निर्देश तक लागू रहेगा कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखा जाएगा. जहां ‘वन’ की परिभाषा व्यापक होगी, वहीं ‘अरावली’ को संकीर्ण दायरे में देखा जाएगा.  एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को चार हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी. सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि अवैध खनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके पर्यावरणीय प्रभाव को पलटना लगभग असंभव होता है.

मैक्रों का ब्लू सनग्लास अंदाज, दावोस में ट्रंप को बर्दाश्त की हद बताने वाला बयान

दावोस फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्विटजरलैंड के दावोस में दिए गए अपने भाषण से अतंरराष्ट्रीय हलकों में सनसनी मचा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जुबानी हमलों का लगातार सामना कर रहे मैक्रों ने बिगड़ते वर्ल्ड ऑर्डर पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने अपने भाषण में "बुलीज़" (bullies) जैसे शब्दों का प्रयोग किया और कहा कि जोर-जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात की.  इमैनुएल मैक्रों ने बिना नाम लिए लेकिन स्पष्ट रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ओर इशारा करते हुए कहा कि दुनिया "एक नियम-रहित विश्व" (world without rules) की ओर बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून को पैरों तले कुचला जा रहा है और सिर्फ "ताकतवर का कानून" (law of the strongest) चल रहा है.  मैक्रों ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जुटे विश्व भर के नेताओं को आसामनी रंग सनग्लासेज पहने मैक्रों ने संबोधित करते हुए कहा, "देखिए हम किस स्थिति में हैं. मेरा मतलब है, डेमोक्रेसी के खिलाफ, तानाशाही की तरफ बदलाव. ज़्यादा हिंसा, 2024 में 60 से ज़्यादा युद्ध – यह एक बिल्कुल रिकॉर्ड है, भले ही मुझे पता चला कि उनमें से कुछ फिक्स थे. और टकराव नॉर्मल हो गया है, हाइब्रिड हो गया है, नई मांगों, जगह, डिजिटल जानकारी, साइबर, व्यापार वगैरह में फैल रहा है." अंतर्राष्ट्रीय कानून को पैरों तले रौंदा जाता है  मैक्रों ने अमेरिकी दादागीरी की चर्चा करते हुए कहा कि, "यह एक ऐसी दुनिया की ओर भी बदलाव है जहां कोई नियम नहीं हैं जहां अंतर्राष्ट्रीय कानून को पैरों तले रौंदा जाता है और जहां ऐसा लगता है कि सिर्फ़ सबसे ताकतवर का कानून ही मायने रखता है." ट्रंप से 200 फीसदी टैरिफ की धमकी झेल चुके फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएं फिर से उभर रही हैं. जाहिर है रूस का युद्ध, यूक्रेन के खिलाफ़ रूस का आक्रामक युद्ध, जो अगले महीने अपने चौथे साल में प्रवेश करेगा और मध्य पूर्व और पूरे अफ्रीका में संघर्ष जारी हैं. बहुपक्षवाद कमजोर किया जा रहा है यह एक ऐसी दुनिया की ओर भी बदलाव है जहां प्रभावी सामूहिक शासन नहीं है और जहां बहुपक्षवाद उन शक्तियों द्वारा कमज़ोर किया जा रहा है जो इसमें बाधा डालती हैं या इससे मंह मोड़ लेती हैं, और नियम कमज़ोर हो रहे हैं.  ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को ठेंगा दिखाने की घटनाओं की ओर इशारा करते हुए मैक्रों ने कहा कि, "मैं ऐसे इंटरनेशनल संगठनों के कई उदाहरण दे सकता हूं जिन्हें बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने कमज़ोर कर दिया है या छोड़ दिया है। और जब हम स्थिति को देखते हैं, तो यह साफ़ तौर पर बहुत चिंताजनक समय है, क्योंकि हम उस स्ट्रक्चर को खत्म कर रहे हैं जहां हम स्थिति को ठीक कर सकते हैं और हमारे सामने आने वाली आम चुनौतियों का सामना कर सकते हैं. टैरिफ का इस्तेमाल संप्रभुता पर प्रेशर बनाने के लिए मैक्रों ने कहा कि अब सामूहिक शासन की बजाय टकराव का रास्ता अपनाया जा रहा है. अमेरिकी टैरिफ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका से ट्रेड एग्रीमेंट के ज़रिए मुकाबला जो हमारे एक्सपोर्ट हितों को कमज़ोर करता है, ज़्यादा से ज़्यादा रियायतें मांगता है और खुले तौर पर यूरोप को कमज़ोर करने और अपने अधीन करने का लक्ष्य रखता है, साथ ही नए टैरिफ का अंतहीन जमावड़ा जो मूल रूप से अस्वीकार्य है, खासकर जब उनका इस्तेमाल क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ दबाव बनाने के लिए किया जाता है. फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि इस समस्या को ठीक करने के लिए इसका जवाब है ज़्यादा सहयोग. और नए तरीके अपनाना. उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर ज़्यादा आर्थिक संप्रभुता और रणनीतिक अर्थव्यवस्था बनाना है, खासकर यूरोपियनों के लिए.  आसमानी रंग का गोगल्स चमकाकर मैक्रां ने महफिल लूट ली इस संबोधन में राष्ट्रपति मैक्रों के भाषण के अलावा उनका आसमानी सनग्लास भी चर्चा में रहा. अमूमन बिना चश्मा के दिखने वाले मैंक्रों इस बार आसमानी सनग्लास में थे. उनका ये लुक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हालांकि इस चश्मे की वजह मेडिकल है. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि, 'उनकी आंखों में समस्या है. मीटिंग की शुरुआत में ही उन्होंने विनम्रता से कहा, "सनग्लासेस के लिए माफी चाहता हूं, मेरी आंखों में हल्की दिक्कत है. फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार, इसका कारण एक फटी हुई खून की नस थी, जिससे मैक्रों की आंखों में सूजन आ गई थी. बता दें कि 15 जनवरी को फ्रांसीसी राष्ट्रपति को साफ तौर पर लाल और सूजी हुई आंख के साथ देखा गया था. 

सांसदों को चेतावनी: समय पर न पहुंचे तो हाजिरी कटेगी, सैलरी भी प्रभावित होगी

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र में लोकसभा सचिवालय सांसदों की हाजिरी को लेकर एक नई शुरुआत करने जा रहा है। अब सांसदों की हाजिरी सदन के भीतर सीट पर बैठकर ही डिजिटल तरीके से लग पाएगी। यदि कोई सांसद देरी से सदन में पहुंचता है और तब तक हंगामे या किसी और वजह से सदन दिनभर के लिए स्थगित हो जाता है तो फिर माननीय की उस दिन की हाजिरी नहीं लग पाएगी। उन्हें एक दिन के वेतन-भत्ते से हाथ धोना पड़ेगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम यह प्रावधान करने जा रहे हैं कि सदन में पहुंचकर ही हाजिरी लगाई जा सकेगी। अभी तक सदन के बाहर हाजिरी के लिए जो रजिस्टर होता था, अब उसे हटा देंगे। ऐसे सांसद जो रजिस्टर में हाजिरी लगाकर चले जाते थे, या सदन स्थगित होने के बाद पहुंचते थे, उनके लिए मुश्किल होगी। उन्हें सदन में जाना ही होगा। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही डिजिटल हो चुकी है। अब उसमें एआई का इस्तेमाल परीक्षण के तौर पर चल रहा है। इसमें काफी निगरानी और सावधानी की जरूरत है। अभी परीक्षण के तौर पर वक्ताओं के भाषणों के अनुवाद में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। बाद में लोग उसे चेक करते हैं। यह 80 फीसदी तक सटीक है। ओम बिरला ने यह जानकारी 86वें ऑल इंडिया प्रिज़ाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत में दी. उन्होंने बताया कि संसद परिसर में सदन के बाहर से हाजिरी लगाने की पुरानी व्यवस्था अब समाप्त कर दी जाएगी. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अब केवल सदन के अंदर सीट पर बैठने पर ही उपस्थिति दर्ज होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश सदन स्थगित हो जाता है, तो उसके बाद कोई भी सदस्य हाजिरी दर्ज नहीं कर सकेगा. इस कदम से सांसदों को रोज़ाना कार्यवाही की शुरुआत से ही सदन में उपस्थित रहने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. ओम बिरला ने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि उपस्थिति वास्तविक भागीदारी को दर्शाए, न कि केवल संसद परिसर में मौजूद रहने को. उन्होंने बताया कि लोकसभा कक्ष में हर सीट पर निर्धारित कंसोल पहले से ही लगाए जा चुके हैं. यह सुधार संसदीय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और सत्रों की उत्पादकता बढ़ाने की व्यापक पहल का हिस्सा है. लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसद में एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर परीक्षण किया जा रहा है और संभावित त्रुटियों से निपटने के लिए मैनुअल सत्यापन की व्यवस्था भी की गई है. चुनिंदा बैठकों में रियल-टाइम ट्रांसलेशन का प्रयोग हो रहा है, जो आने वाले महीनों में पूरी तरह लागू किया जाएगा. इसके अलावा सांसदों को 24×7 शोध सहायता सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं. ओम बिरला ने विधानसभा सत्रों की घटती संख्या पर भी चिंता जताई और कहा कि विधायी संस्थाओं की प्रभावशीलता, जवाबदेही और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सदन के संचालन की जिम्मेदारी भले ही अध्यक्ष की हो, लेकिन सुचारू कार्यवाही सरकार और सदस्यों के सहयोग पर निर्भर करती है. सांसदों की उपस्थिति से जुड़ा यह कदम संसद की गरिमा को मजबूत करने वाला बताया जा रहा है और कई सदस्यों ने इसका स्वागत किया है. उल्लेखनीय है कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा और केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा. आईटी कंपनी की मदद से इसे 100 फीसदी सटीक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि मानसून सत्र से अनुवाद को पूरी तरह से एआई संचालित कर देंगे। इससे फायदा यह होगा कि अभी अनुवाद के कारण चार घंटे में कार्यवाही का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड होता है। एआई के इस्तेमाल से यह आधे घंटे में हो जाएगा। अनुसंधान में भी एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए जेल जाने पर मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान से जुड़े विधेयक पर संसदीय समिति में विपक्ष शामिल नहीं हुआ लेकिन अब विपक्ष की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि वह अपने विचार रखना चाहता है। इस बारे में पूछे जाने पर बिरला ने कहा कि यदि वे आते हैं तो उनके विचारों को समाहित करने का प्रयास किया जाएगा। बजट सत्र पर विपक्ष के संभावित रुख पर बिरला ने कहा कि वे चाहते हैं सदन चले। विपक्ष को अपनी बात चर्चा में रखनी चाहिए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में वह हर बात रख सकता है। विधानसभाएं न्यूनतम 30 दिन चले ओम बिरला ने कहा कि लखनऊ में चल रहे पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में कहा, ज्यादातर विधानसभाएं साल में 30 दिन भी नहीं चल पा रही हैं। सम्मेलन में संकल्प पारित करेंगे कि विधानसभाएं न्यूनतम 30 दिन चले। कुछ का रिकॉर्ड अच्छा है। असीमित न हो अधिकार एक प्रश्न के उत्तर में बिरला ने कहा कि स्पीकरों के अधिकारों पर भी कई बैठकों में चर्चा हुई है। वे चाहते हैं कि स्पीकर के अधिकार असीमित नहीं होने चाहिए। पेपरलेस सदन बिरला ने कहा,संसद के अलावा सभी विधानसभाओं को पेपरलेस बनाया जा चुका है। अनेक विधानसभाओं की कार्यवाही यूट्यूब पर लाइव भी हो रही है। इसी साल सभी विधानसभाओं का पूरी तरह से डिजिटलीकरण हो जाएगा। महाभियोग पर रिपोर्ट का इंतजार जस्टिस वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को लेकर ओम बिरला ने कहा कि समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी उस पर आगे बढ़ा जाएगा। बजट सत्र में महाभियोग पर अभी कह नहीं सकते।

ट्रंप की टैरिफ रणनीति के बीच भारत का मास्टरस्ट्रोक, मेगा डील होने के संकेत

 नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) ने अमेरिका की ओर से लगाए गए हाई टैरिफ के बावजूद अपना दमखम दिखाया है और आईएमएफ से लेकर वर्ल्ड बैंक तक दुनियाभर ने इसका लोहा माना है. देश दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. भले ही डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ गेम (Trump Tariff Game) में उलझे हुए हैं और ताबड़तोड़ धमकियां दे रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर भारत लगातार खेल करता जा रहा है.  बीते कुछ दिनों में ओमान से लेकर न्यूजीलैंड समेत अन्य कई ट्रेड डील करने के बाद अब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एफटीए (India-EU FTA) होने वाला है, जिसके सिग्नल खुद EU Chairman उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिए हैं और इसे सबसे बड़ी डील करार दिया है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा है कि दावोस के बाद वे भारत का दौरा कर सकती हैं. 'ग्लोबल GDP का एक चौथाई हिस्सा कवर' दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर बोलते हुए यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने संकेत दिया कि EU-India लंबे समय से रुके हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच रहे हैं. उर्सुला वॉन डेर ने इसे लेकर पॉजिटिव संकेत दिया कि ये डील दुनिया के दो सबसे बड़े बाजारों के बीच आर्थिक संबंधों को नया आकार दे सकती है. वॉन डेर लेयेन ने कहा, 'अभी बहुत काम करना बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं, कुछ लोग इसे अब तक की सबसे बड़ी Trade Deal कहते हैं. यह एक ऐसा समझौता होगा जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो वैश्विक जीडीपी (Global GDP) का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा.' उन्होंने इसे यूरोपीय संघ के व्यापार संबंधों में विविधता लाने और जोखिम कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया है.  भारत को मिलेगा 27 देशों का बाजार भारत के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ ये व्यापार समझौता इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसका संभावित दायरा बहुत व्यापक है. ब्रसेल्स के लिए, भारत उसकी चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक रूप से सहयोगी माने जाने वाले देशों के साथ संबंध मजबूत करने में एक बड़े पार्टनर के रूप में उभरा है. इस डील से भारत के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों वाले बाजार तक अधिक पहुंच बनेगा और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. 2007 में शुरू हुई बातचीत अंतिम पड़ाव पर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत साल 2007 से चल रही थी और ये लगातार एक दशक तक ठप पड़ी रही. हालांकि, तमाम राजनीतिक गतिविधियों में नए सिरे से सक्रियता आने के बाद 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया था. तब से, India-EU Trade Deal को लेकर बात लगातार आगे बढ़ी है. जो महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, डिजिटल शासन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में सहयोग पर केंद्रित है. ट्रंप टैरिफ से दुनिया को डराने में लगे गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते साल 2025 की तरह से ही इस साल भी लगातार दुनिया को अपने टैरिफ से डराने में लगे हैं. उनके हालिया Tariff Attacks की बात करें, तो पहले उन्होंने ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते रखने वाले देशों पर 25% Tariff लगाने की धमकी दी, फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के अपने प्लान में रोड़ा बन रहे 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ की वॉर्निंग दे डाली, जो 1 फरवरी से लागू होने वाला है और इसे 1 जून से बढ़ाकर 25% किए जाने की बात भी कही है.  वहीं डोनाल्ड ट्रंप की सबसे ताजा धमकी की बात करें, तो उन्होंने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ (Trump 200% Tariff Warning) लगाने की नई धमकी दे डाली है. इसके बाद से दुनियाभर के शेयर बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है. जापान से लेकर कोरिया तक के शेयर मार्केट क्रैश (Stock Market Crash) नजर आ रहे हैं. 

उदयनिधि के सनातन धर्म पर बयान से HC नाराज, DMK पर हेट स्पीच का आरोप

चेन्नई  तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को मद्रास हाईकोर्ट से झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने सनातन धर्म को लेकर दिए बयान को 'हेट स्पीच' बताया है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। साल 2023 में उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना कोरोनावायरस और मलेरिया जैसी बीमारी से की थी। साथ ही कहा था कि इसे उखाड़ फेंकना जरूरी है। उदयनिधि तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उच्च न्यायालय ने कहा कि डीएमके की तरफ से 100 सालों से ज्यादा समय से 'हिंदू धर्म पर हमला' किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि कई बार जो लोग हेट स्पीच की शुरुआत करते हैं, वो बगैर सजा के ही बचकर निकल जाते हैं। हाईकोर्ट ने कहा, 'यह साफ है कि पिछले 100 साल में द्रविड़ कझगम और उसके बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने हिंदू धर्म पर हमला किया है। मंत्री इस पार्टी से ही हैं। हालात पर विचार करते हुए, यह देखा गया है कि याचिकाकर्ता ने मंत्री के भाषण में छिपे हुए मतलब पर सवाल किया था।' कोर्ट ने कहा, 'यह अदालत बड़े दुख के साथ मौजूदा स्थिति को रिकॉर्ड कर रहा है कि हेट स्पीच करने वाले आजाद घूमते हैं। जबकि, जो उस हेट स्पीच पर सवाल उठाते हैं, उन्हें कानून का सामना करना पड़ता है। अदालतें प्रतिक्रिया देने वालों से सवाल कर रही हैं, लेकिन हेट स्पीच की शुरुआत करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं कर रही हैं।' कोर्ट ने कहा कि मंत्री के खिलाफ राज्य में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ, लेकिन कुछ अन्य राज्यों में हुआ है।

भाजपा की फंडिंग का खुलासा, चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट में बताया गया 6,125 करोड़ रुपये का चंदा

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी ने ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग को धनराशि का ब्योरा दिया है। पार्टी की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा को 6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है। खास बात है कि मंगलवार को भाजपा के नए अध्यक्ष चुने गए नितिन नवीन को अब इस धनराशि के इस्तेमाल का अधिकार मिलेगा। हाल ही में निर्वाचन आयोग को सौंपी गई भाजपा की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के पास लगभग 10,000 करोड़ रुपये की नकदी और जमा राशि हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भाजपा के खातों में 2024-25 में 2,882.32 करोड़ रुपये की शुद्ध वृद्धि हुई। 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में पार्टी के ‘जनरल फंड’ में मौजूद धनराशि 12,164 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल 9,169 करोड़ रुपये थी। साल 2024-25 में, दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) और ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) को सत्ता से हटाने के बाद पार्टी के चुनाव प्रचार खर्च में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई। यह खर्च पिछले साल 1,754.06 करोड़ रुपये था जो बढ़कर 3,335.36 करोड़ रुपये हो गया। चंदे में कितना धन मिला साल 2024-25 में, भाजपा को चंदे के रूप में 6,125 करोड़ रुपये मिले, जबकि पिछले साल 3,967 करोड़ रुपये मिले थे। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के पास 9,390 करोड़ रुपये की सावधि जमा है, और 2024-25 में उसे बैंकों से 634 करोड़ रुपये का ब्याज मिला। भाजपा ने 2024-25 में 65.92 करोड़ रुपये का आयकर रिफंड दाखिल किया और इस पर 4.40 करोड़ रुपये का ब्याज प्राप्त किया। चुनाव प्रचार पर कितना खर्च हुआ पार्टी का चुनाव खर्च 2024-25 में कुल खर्च का 88.36 प्रतिशत था। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में चुनाव पर खर्च की कुल राशि 3,335.36 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 312.9 करोड़ रुपये उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने पर खर्च किए गए, 583 करोड़ रुपये हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर यात्राओं पर खर्च हुए। चुनाव प्रचार के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 1,125 करोड़ रुपये, कटआउट, होर्डिंग्स और बैनरों पर 107 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा, विज्ञापन पर 897 करोड़ रुपये, रैलियों और अभियानों पर 90.93 करोड़ रुपये, तथा बैठकों पर 51.72 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, ट्रंप को ईरान से मिली सीधी धमकी

तेहरान  ईरान के सशस्त्र बलों के एक प्रवक्ता ने  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी प्रकार की कोई भी कार्रवाई नहीं करने की चेतावनी दी। ट्रंप ने खामेनेई के लगभग 40 वर्षों के शासन को समाप्त करने का आह्वान किया था, जिसके कुछ दिनों बाद यह चेतावनी आई है। जनरल अबुलफजल शेखरची ने कहा, 'ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर कोई भी हाथ बढ़ाया गया, तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया को भी आग लगा देंगे।' ट्रंप ने  ‘पॉलिटिको’ को दिए एक साक्षात्कार में खामेनेई को ‘एक बीमार व्यक्ति’ बताया था और कहा था कि ‘उन्हें अपने देश को ठीक से चलाना चाहिए और लोगों की हत्या करना बंद करना चाहिए’। ट्रंप ने कहा था कि ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है। ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद जनरल अबुलफजल शेखरची ने यह चेतावनी दी। ईरान की खराब अर्थव्यवस्था को लेकर 28 दिसंबर को शुरू हुए प्रदर्शनों पर अधिकारियों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति ने भी दी थी चेतावनी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में कहा था, 'अगर ईरान के लोगों को अपने जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, तो इसकी वजह अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगियों की तरफ से लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और अमानवीय प्रतिबंध हैं। हमारे देश के सुप्रीम लीडर के खिलाफ कोई भी हमाल ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध के बराबर होगा।' प्रदर्शन में 4 हजार से ज्यादा लोग मारे गए ईरान में देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों में शामिल प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई में कम से कम 4,029 लोगों की मौत हो गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने यह आंकड़े जारी करते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान 26,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक मृतकों में 3,786 प्रदर्शनकारी, 180 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं वहीं इन कार्रवाई में 28 बच्चे और 35 ऐसे लोग भी मारे गए जो किसी भी प्रदर्शन में भाग नहीं ले रहे थे।

NASA से रिटायर हुईं सुनीता विलियम्स, अंतरिक्ष की यात्रा के बाद अब भारत में मौजूद

नई दिल्ली भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने NASA को अलविदा कह दिया है। उन्होंने 27 बाद अमेरिकी स्पेस एजेंसी से रिटायरमेंट ले लिया है। NASA ने ऐलान किया कि विलियम्स का रिटायरमेंट बीते साल 27 दिसंबर से ही प्रभावी हो गया है। 8 दिन की आखिरी यात्रा पर अंतरिक्ष में गईं विलियम्स करीब 9 महीने के बाद लौट सकी थीं। फिलहाल, वह भारत में हैं। अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन विलियम्स का जन्म 19 सितंबर, 1965 को अमेरिका के ओहियो के यूक्लिड में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या गुजराती थे और मेहसाणा जिले के झुलासन के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनिया की थीं। नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमैन ने कहा, 'सुनी विलियम्स मानव अंतरिक्ष यान में एक पायनियर रही हैं। उन्होंने स्पेस स्टेशन पर अपने नेतृत्व के जरिए एक्सप्लोरेशन के भविष्य को नया आकार दिया है और लो अर्थ ऑर्बिट के लिए मिशनों के लिए रास्ता तैयार किया है।' उन्होंने कहा कि विलियम्स की उपलब्धियां पीढ़ियों को बड़ा सपना देखने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने कहा, '…आपके रिटायरमेंट पर शुभकामनाएं और नासा और देश के प्रति आपकी सेवा के लिए धन्यावाद।' बोइंग की कैप्सूल परीक्षण उड़ान के दौरान विलियम्स के साथ अंतरिक्ष में फंसे रहे बुच विलमोर ने पिछले साल गर्मियों में नासा छोड़ दिया था। विलियम्स और विलमोर को 2024 में अंतरिक्ष स्टेशन भेजा गया था और वे बोइंग के नए ‘स्टारलाइनर’ कैप्सूल से उड़ान भरने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री थे। उनका मिशन केवल एक सप्ताह का था लेकिन स्टारलाइनर में आई दिक्कतों के कारण यह नौ महीने से भी लंबा खिंच गया। वे पिछले साल मार्च में पृथ्वी पर लौटे। सुनीता विलियम्स का नासा सफर विलियम्स साल 1998 में नासा के लिए चुनी गईं थीं। उन्होंने तीन मिशनों के तहत कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। उन्होंने 9 बार कुल 62 घंटे 6 मिनट अंतरिक्ष में चहलकदमी की। खास बात है कि यह किसी भी महिला एस्ट्रोनॉट के लिहाज से सबसे ज्यादा और NASA के इतिहास में चौथा बड़ा रिकॉर्ड है। वह स्पेस में मैराथन में भाग लेने वाली भी पहली यात्री हैं। भारत में हैं अभी भारत पहुंची सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मां संयोगिता चावला और बहन दीपा से दिल्ली में मुलाकात की। कार्यक्रम से निकलते वक्त विलियम्स ने परिवार से कहा कि वे नियमित उनसे संपर्क में रहेंगी। कल्पना चावला का फरवरी 2003 में अंतरिक्ष से लौटते वक्त निधन हो गया था। चावला पहली भारतीय महिला थीं जो अंतरिक्ष में गई थीं।  यहां ‘अमेरिकन सेंटर’ में आयोजित लगभग एक घंटे के संवाद सत्र में शामिल होने से पहले, विलियम्स ने अपने संक्षिप्त प्रारंभिक संबोधन में यह भी कहा कि भारत वापस आना घर वापसी जैसा महसूस हुआ, क्योंकि यह वह देश है जहां उनके पिता का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में उन्होंने सबसे पहले भारत और स्लोवेनिया को खोजा था। विलियम्स ने कहा, 'आईएसएस पर रूस, जापान, यूरोप, कनाडा…और कई अन्य देशों के साथी थे। (ग्रुप) कैप्टन (शुभांशु) शुक्ला मेरे कुछ समय बाद आए थे। मुझे बहुत अफसोस है कि मैं वहां रहते हुए उनसे नहीं मिल पाई; हम कुछ कहानियां साझा कर सकते थे।' इस बातचीत के दौरान, उनसे मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के तरीकों से लेकर अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और अंतरिक्ष क्षेत्र के व्यावसायीकरण से लेकर अंतरिक्ष मिशन में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के सहयोग तक, कई तरह के सवाल पूछे गए।

शादी के सिर्फ 2 महीने और 13 साल की लड़ाई, पति-पत्नी के 40 मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचे

नई दिल्ली शादी करके महज 65 दिन साथ रहने के बाद 13 साल तक कानूनी लड़ाई और फिर पति-पत्नी की तरफ से एक-दूसरे के खिलाफ 40 से ज्यादा मुकदमे… इस असाधारण और थकाने वाले वैवाहिक विवाद पर आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. शीर्ष अदालत ने न सिर्फ पति-पत्नी के तलाक को मंजूरी दे दी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने को लेकर दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ कोई भी केस दाखिल करने पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अदालतों को ‘लड़ाई का मैदान’ बनाना स्वीकार्य नहीं है और इस तरह के मुकदमों से न्याय व्यवस्था का गला घुटता है. 65 दिन शादी, मुकदमे 13 साल यह मामला एक ऐसे दंपती का है, जिनकी शादी जनवरी 2012 में हुई थी. शादी के महज 65 दिन बाद पत्नी ने पति और उसके परिवार पर क्रूरता के आरोप लगाते हुए मायके लौटने का फैसला किया. इसके बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे और उनका झगड़ा अदालतों तक पहुंच गया. अगले 13 वर्षों में पति-पत्नी ने एक-दूसरे के खिलाफ परिवार अदालतों, हाई कोर्ट और अन्य न्यायिक मंचों पर 40 से अधिक मामले दायर किए. ये मुकदमे दिल्ली और उत्तर प्रदेश की विभिन्न अदालतों में चलते रहे. सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह साफ तौर पर आपसी हिसाब चुकता करने के लिए मुकदमेबाजी का मामला है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘दोनों पक्ष केवल 65 दिन साथ रहे, लेकिन एक दशक से अधिक समय तक मुकदमेबाजी में शामिल हैं. उन्होंने अदालतों को अपना युद्धक्षेत्र बना लिया. ऐसे मामलों में दंड लगाया जाना जरूरी है.’ इसी आधार पर अदालत ने दोनों पर 10,000 रुपये का प्रतीकात्मक जुर्माना लगाया, जिसे सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन में जमा कराने का निर्देश दिया गया. चेतावनी के साथ तलाक मंजूर सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पति-पत्नी को तलाक दे दिया. कोर्ट ने माना कि शादी पूरी तरह टूट चुकी है और इसके पुनर्जीवित होने की कोई संभावना नहीं बची है. हालांकि, अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि दोनों भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ कोई नया मामला दाखिल नहीं करेंगे, ताकि न्यायिक प्रक्रिया का और दुरुपयोग न हो. अदालतों पर बढ़ता बोझ, कोर्ट की चिंता सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को एक उदाहरण बताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में वैवाहिक विवादों से जुड़े मुकदमों की संख्या कई गुना बढ़ गई है. सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा, ‘यह अदालत भी बड़ी संख्या में ट्रांसफर याचिकाओं से भरी हुई है, जिनमें अधिकतर पत्नियां अपने पतियों की तरफ से दायर मामलों के स्थानांतरण की मांग करती हैं. कभी शुरुआती तौर पर, तो कभी जवाबी कार्रवाई के रूप में.’ अदालत ने माना कि एक बार जब आपराधिक मुकदमे दर्ज होने लगते हैं, तो पुनर्मिलन की संभावना बेहद कम हो जाती है, हालांकि उसे पूरी तरह नकारा भी नहीं जा सकता. कोर्ट ने बताया समाधान का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसे मामलों में मध्यस्थता (Mediation) को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा, ‘यदि दंपती में अनुकूलता नहीं है, तो विवादों के शुरुआती समाधान के लिए मध्यस्थता जैसे रास्ते मौजूद हैं. परिवार के सदस्यों की यह जिम्मेदारी है कि वे अदालतों तक बात पहुंचने से पहले समाधान निकालने की कोशिश करें.’ यह मामला सिर्फ एक पति-पत्नी के विवाद का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रणाली के दुरुपयोग की गंभीर चेतावनी है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ संदेश देता है कि व्यक्तिगत बदले की भावना से अदालतों को बंधक नहीं बनाया जा सकता. 65 दिन की शादी और 13 साल की लड़ाई ने न सिर्फ दो जिंदगियों को उलझाए रखा, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी अनावश्यक बोझ डाला और यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट को आखिरकार सख्ती दिखानी पड़ी.