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ट्रंप ने मंजूर किया 500% टैरिफ लगाने वाला बिल, भारत, चीन और ब्राजील पर अमेरिकी प्रतिबंध की तैयारी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी. इसके बाद भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, कुछ मामलों में यह 500 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह कदम यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को झकझोर देने वाला बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के निशाने पर भारत, चीन और ब्राजील आ गए हैं। ट्रंप ने एक ऐसे विवादित विधेयक को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध बना वजह यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका की सख्त रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने साफ कहा है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध नीति को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं। इसी को रोकने के लिए अमेरिका अब टैरिफ को हथियार बनाने की तैयारी में है। अगले हफ्ते वोटिंग हो सकती है रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के साथ बैठक अच्छी रही और इस बिल पर अगले हफ्ते संसद में वोटिंग हो सकती है. रूस से तेल खरीदने वालों पर कार्रवाई यह बिल लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है. इसके तहत ऐसे देशों पर सख्ती की जा सकेगी जो जानबूझकर रूस से तेल और यूरेनियम खरीद रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को जंग जारी रखने के लिए पैसा मिलता है. भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव सीनेटर ग्राहम के मुताबिक, इस बिल से राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने की ताकत मिलेगी, ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें. पिछले साल ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 25 फीसदी टैक्स लगाया था. इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स भी लगाया गया. इससे कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैक्स 50 फीसदी तक पहुंच गया और दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई. चीन के साथ भी बिगड़े रिश्ते अमेरिका और चीन के बीच भी टैक्स को लेकर तनाव बढ़ चुका है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी तक टैक्स लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर 125 फीसदी टैक्स लगा दिया था. हालांकि, बाद में अमेरिका और चीन ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि वे 90 दिनों के लिए अपने-अपने टैरिफ रोक देंगे और बातचीत जारी रखेंगे. समझौते के अनुसार, अमेरिका चीन से आने वाले सामान पर टैक्स 145 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करेगा. वहीं चीन अमेरिका से आने वाले सामान पर टैक्स 125 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर देगा. भारत को लेकर ट्रंप का बयान हाल के दिनों में ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि भारत पर नए टैक्स लगाए जा सकते हैं. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह खुश नहीं हैं. ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी अच्छे आदमी हैं, लेकिन मुझे खुश रखना जरूरी था. हम बहुत जल्दी टैक्स बढ़ा सकते हैं.' चावल पर भी टैक्स की चेतावनी पिछले महीने ट्रंप ने भारतीय चावल पर भी नया टैक्स लगाने की धमकी दी थी. यह बात तब सामने आई, जब व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों ने भारत, चीन और थाईलैंड पर सस्ता अनाज बेचने का आरोप लगाया. अटकी हुई है बातचीत  भारत और अमेरिका के बीच टैक्स को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल रुकी हुई है. अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी खेती से जुड़े सामान पर टैक्स कम करे. वहीं भारत सरकार साफ कह चुकी है कि वह अपने किसानों और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी. किन देशों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? भारत – फिलहाल भारत पर अमेरिका का करीब 50% तक टैरिफ लागू है, जिसे बढ़ाकर सीधे 500% करने का प्रस्ताव है। चीन – पहले से जारी अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बीच यह फैसला तनाव को और बढ़ा सकता है। ब्राजील – लैटिन अमेरिका की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण ब्राजील को भी भारी आर्थिक झटका लग सकता है। लिंडसे ग्राहम का बयान अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने उस विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं लंबे समय से काम कर रहा हूं। इसका मकसद रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दंडित करना है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।'  

अंबरनाथ में बदला खेल, कांग्रेस का सफाया, BJP का बिना गठबंधन के पलड़ा भारी

मुंबई  महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव के तहत अंबरनाथ में जो हुआ, वह किसी ने सोचा भी नहीं होगा. दो दुश्मन पार्टियां, बीजेपी और कांग्रेस ने यहां गठबंधन कर लिया था. इस फैसले पर कांग्रेस आलाकमान ने नाराजगी जताई और 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया. इसके बाद इन निलंबित पार्षदों के साथ मिलकर बीजेपी ने अंबरनाथ में खेला कर दिया.  अंबरनाथ में कांग्रेस के जिन पार्षदों ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और कांग्रेस ने उनपर कार्रवाई की थी, वे सभी बीजेपी में शामिल हो गए हैं. यानी अंबरनाथ अब पूर्ण रूप से कांग्रेस मुक्त हो गया है. यहां नुकसान कांग्रेस का ही हुआ है और फायदा बीजेपी का. साथ ही, शिंदे गुट भी महानगरपालिका से दूर हो गया है. देवेंद्र फडणवीस ने भी जताई थी नाराजगी अंबरनाथ में हुए बीजेपी-कांग्रेस गठबंधन के फैसले पर खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाराजगी जाहिर की थी. इसके बाद गठबंधन टूट गया था. इसके बाद कांग्रेस ने भी एक्शन लिया था. अब नया अपडेट यह है कि कांग्रेस के 12 पार्षद बीजेपी में आ गए हैं.  शिंदे गुट को हुआ भारी नुकसान दरअसल, बीजेपी ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अंबरनाथ से दूर करने के लिए ही कांग्रेस के साथ अलायंस किया था. यह फैसला पूरी तरह से बीजेपी के हित में ही जाते दिख रहा है क्योंकि शिवसेना तो सत्ता से दूर हो ही गई है, साथ ही कांग्रेस भी अंबरनाथ से गायब हो गई है.   निलंबित पार्षदों के BJP में शामिल होने पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया अंबरनाथ कांग्रेस अध्यक्ष का दावा है कि गठबंधन का पहला प्रस्ताव बीजेपी ने ही कांग्रेस को भेजा था. हालांकि, इस ऑफर को स्वीकार करने का फैसला लेते समय पार्टी के राज्य कार्यालय को अंधेरे में रखा गया. इसी वजह से आलाकमान ने पाटिल के खिलाफ एक्शन लिया है. अब तस्वीर यह है कि कांग्रेस के निलंबित पार्षदों के साथ होने से बीजेपी का काम आसान हो जाएगा.

बांगलादेश में BNP नेता अजीजुर रहमान की हत्या, लोगों के भड़के विरोध के बाद सेना ने संभाला इलाका

ढाका  बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा में और तेजी आ रही है. ढाका में BNP नेता अजीजुर रहमान मुसब्बिर की गोली मारकर हत्या कर दी गई. मुसब्बिर ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेबक दल के महासचिव रह चुके थे, जो बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्वयंसेवी इकाई है. करवान बाजार में स्टार कबाब के पास एक गली में बेहद करीब से गोली मारी गई, जिससे मुसब्बिर की मौके पर ही मौत हो गई. बेहद करीब से मारी गई गोली पुलिस के अनुसार, सुपर स्टार होटल के पास, बशुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के नजदीक हमलावरों ने बेहद करीब से गोलियां चलाईं. ये इलाका भीड़भाड़ वाला व्यावसायिक क्षेत्र है. मौके पर ही मुसब्बिर की हालत गंभीर हो गई. गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारियों के मुताबिक, घायल की हालत स्थिर है. ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के तेजगांव डिविजन के अतिरिक्त उपायुक्त फजलुल करीम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि करवान बाजार में स्टार कबाब के पास एक गली में दो लोगों को गोली लगी थी. मुसब्बिर को पहले निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई. उन्हें पेट में गोली लगी थी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घायलों को पहले बीआरबी अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद एक को आगे के इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया. जांचकर्ताओं ने बताया कि हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की और फिर फरार हो गए. बुधवार सुबह तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. मुसब्बिर पहले ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेबक दल के महासचिव रह चुके थे. स्वेच्छासेबक दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्वयंसेवी इकाई है. उन्हें रात करीब 8.30 बजे (स्थानीय समय) ढाका के करवान बाजार इलाके में निशाना बनाया गया. पुलिस के मुताबिक हमला सुपर स्टार होटल के पास हुआ, जो बशुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के नजदीक स्थित एक व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने बेहद करीब से गोलियां चलाईं, जिससे मुसब्बिर की मौके पर ही मौत हो गई. गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ, जिसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारियों ने बताया कि घायल व्यक्ति की हालत स्थिर है. मुसब्बिर के पेट में गोली लगी ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के तेजगांव डिवीजन के अतिरिक्त उपायुक्त फजलुल करीम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि करवान बाजार में स्टार कबाब के पास एक गली में दो लोगों को गोली मारी गई. करीम के अनुसार, मुसब्बिर को बाद में पंथपथ इलाके के एक निजी अस्पताल में मृत घोषित किया गया. उन्होंने बताया कि मुसब्बिर के पेट में गोली लगी थी. स्थानीय मीडिया के अनुसार, घायलों को पहले बीआरबी अस्पताल ले जाया गया था, जिसके बाद उनमें से एक को आगे के इलाज के लिए ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया. जांचकर्ताओं ने बताया कि हमलावर कई राउंड फायरिंग करने के बाद मौके से फरार हो गए. तलाशी अभियान शुरू सुरक्षा बलों ने हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. बुधवार सुबह तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी. यह हत्या ऐसे समय में हुई है, जब बांग्लादेश में हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं और 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले आदर्श आचार संहिता लागू है. कुछ ही दिन पहले एक अलग घटना में जुबो दल के एक नेता को गोली मारी गई थी. इससे पहले 12 दिसंबर को भारत-विरोधी रुख के लिए चर्चित नेता उस्मान हादी की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. सड़कों पर तैनात हुई सेना इस गोलीकांड के बाद करवान बाजार इलाके में तनाव फैल गया. मंगलवार देर रात लोगों के एक समूह ने सार्क फाउंटेन चौराहे को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया. करीब रात 10.30 बजे सेना के जवान मौके पर पहुंचे और सड़क खाली कराई, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया और यातायात बहाल कराया. हालांकि बाद में प्रदर्शनकारी फिर लौट आए, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और वाहनों को सावधानीपूर्वक गुजरने दिया. किसी भी तरह की आगे की अशांति को रोकने के लिए पुलिस और सेना की टुकड़ियां कई घंटों तक इलाके में तैनात रहीं. BNP नेता की मौत के बाद क्या है हाल? घटना के बाद करवान बाजार इलाके में तनाव फैल गया. देर रात कुछ लोगों ने सार्क फाउंटेन चौराहे पर सड़क जाम कर दी, जिससे यातायात ठप हो गया. रात करीब 10:30 बजे सेना के जवान मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को हटाकर रास्ता खुलवाया. हालांकि कुछ देर बाद प्रदर्शनकारी फिर लौट आए, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर दी और वाहनों को सावधानीपूर्वक गुजरने दिया. पुलिस और सेना की टुकड़ियां कई घंटों तक क्षेत्र में तैनात रहीं ताकि किसी भी नई अशांति को रोका जा सके. अधिकारियों ने कहा कि हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान जारी है. गौरतलब है कि बांग्लादेश में इसी साल चुनाव होने वाले हैं. हाल के दिनों में बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं. कुछ दिन पहले एक जूबो दल नेता को भी गोली मारी गई थी, जबकि 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी की भी हत्या हो चुकी है. चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

भारत से हारने के बाद पाकिस्तान में विमानों की बिक्री में उछाल, IMF से भी अकड़ा कंगाल पाकिस्तान

इस्लामाबाद एयरलाइन बेचने, पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हुआ पाकिस्तान अब कह रहा है कि उसे IMF के लोन की शायद आगे जरूरत न पड़े। इसके लिए पड़ोसी भारत के साथ युद्ध का हवाला दे रहा है। उसका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसके फाइटर जेट की डिमांड बढ़ गई है। खबरें हैं कि बांग्लादेश समेत कुछ देशों ने लड़ाकू विमान खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री आसिफ ख्वाजा कहना है कि भारत के साथ संघर्ष के बाद पाकिस्तान के रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इससे होने वाली कमाई के बाद पाकिस्तान की IMF पर निर्भरता खत्म हो सकती है। खास बात है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को भारत की कार्रवाई में भारी नुकसान उठाना पड़ा था। आसिफ का कहना है, 'हमारे एयरकार्फ्ट्स टेस्ट हो चुके हैं और हमें इतने ऑर्डर मिल रहे हैं कि हमें 6 महीनों में IMF की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।' उन्होंने कहा, 'मैं आपको यह पूरे भरोसे से कह रहा हूं।' उन्होंने कहा, 'अगर 6 महीनों के बाद ये ऑर्डर पूरे हो गए, तो हमें IMF की जरूरत नहीं।' हालांकि, जानकार पाकिस्तान के इन दावों को खारिज करते नजर आ रहे हैं। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब हाल ही में पाकिस्तान और बांग्लादेश ने एक बड़ी बैठक की थी। इस्लामाबाद में बांग्लादेश वायुसेना के एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान और पाकिस्तान वायुसेना के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने मीटिंग की थी। खबर है कि इस दौरान JF-17 Thunder एयरक्राफ्ट की संभावित बिक्री पर चर्चा हुई थी। ये देश दिखा रहे पाकिस्तान विमान खरीदने में दिलचस्पी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, JF-17 और J-10 जैसे लड़ाकू विमान खरीदने में कुछ देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इनमें अजरबैजान, लिबिया और बांग्लादेश का नाम शामिल है। बांग्लादेश ने पाकिस्तान से जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान खरीदने में रुचि दिखाई है। पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को यह दावा किया। जेएफ-17 लड़ाकू विमान एक बहु-भूमिका वाला विमान है और इसे चीन तथा पाकिस्तान ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। पाकिस्तान का दावा है कि इस लड़ाकू विमान ने मई 2025 में भारत के साथ चार-दिवसीय सैन्य संघर्ष के दौरान अपनी युद्ध क्षमताओं को साबित कर दिया है।

दुनिया को पैसे बांटने वाला चीन, असल में कितना कर्ज़ में डूबा है? जानिए रिपोर्ट में खुलासा

बीजिंग   चीनी अर्थव्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है। चीन की चमकती तस्वीर की सामने जो धुंध छाई हुई है, उसे ड्रैगन खुद भी नहीं नकार सकता। चीन एक तरफ जहां दुनिया को ये दिखाने को कोशिश करता है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वहीं इस देश में अपस्फीति एक असंतुलित अर्थव्यवस्था का संकेत है। चीन में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के कारण दैनिक जीवन की चीजों की कीमतों में लगातार कटौती हो रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 70 रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों से कहीं अधिक तेजी से गिरी हैं। खासकर उन वस्तुओं की कीमतों में भारी कटौती देखी गई है, जिन्हें आम उपभोक्ता खरीदते हैं। झूठ के जाल में फंसा रहा चीन चीन लगातार ही दुनिया से झूठ बोलता आ रहा है और अपनी सच्चाई कभी सामने नहीं आने देता। कोरोना काल के समय में भी चीन ने दुनिया से इस महामारी के बारे में छुपाया। वहीं दुनिया के सामने कोरोना की सच्चाई आने के बाद भी चीन ने अपने देश में कोरोना केस के सही आंकड़ों को छुपाया। चीन अब इसी तरह दुनिया से अपनी अर्थव्यवस्था का सच भी छिपा रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था पांच फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है, लेकिन एक सच ये भी है कि चीन कर्ज तले दबता जा रहा है। वहीं भारत के पड़ोसी मुल्क में रोजमर्रा की कीमतें सबसे निचले दाम पर पहुंच गई हैं। चीन में उत्पादकता इतनी ज्यादा हो गई है कि सामान को खरीदने वाले लोग कम पड़ गए हैं। चीन में लोग सामान को ज्यादा से ज्यादा खरीदें, इसके लिए दैनिक जीवन में इस्तेमाल करने वाली चीजों की कीमत काफी हद तक कम कर दी गई हैं। चीन पर बढ़ रहा घरेलू कर्ज स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज (SAFE) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत तक चीन पर सरकारी ऋण करीब 18.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान था। वहीं बाहरी ऋण लगभग 2.37 से 2.44 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर था। चीन पर घरेलू कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। ये कर्ज निजी सेक्टरों की वजह से विकराल रूप लेता जा रहा है। डलास की फेडरल रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक वित्तीय संकट (2007-09) के बाद चीन में ऋण वृद्धि का व्यापक दौर आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2016 में समाप्त हुए आठ वर्षों की अवधि में चीन के गैर-वित्तीय निजी क्षेत्र के ऋण का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अनुपात 106 प्रतिशत से बढ़कर 188 प्रतिशत हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में चीन पर घरेलू कर्ज 2015 की तुलना में करीब दोगुना बढ़ गया। आज के समय में यही घरेलू कर्ज चीन की GDP का 100 गुना हो गया है। चीन की GDP बढ़ने की वजह चीन पर कर्ज बढ़ने के बाद भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके पीछे की वजह है कि चीन अधिक मात्रा में निर्यात करता है। आईएमएफ और विश्व बैंक के अनुमानों और आंकड़ों के अनुरूप, चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारी वृद्धि हुई है, जो 2024-2025 में लगभग 13,300 डॉलर से 13,800 डॉलर अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। चीन की जीडीपी 1960 के दशक में 100 डॉलर से भी कम हुआ करती थी, लेकिन भारी निर्यात के चलते आज से 13,000 डॉलर के पार पहुंच गई है।  

सावधान किसान! PM-Kisan की ₹2000 किस्त अटकने का खतरा, जानें क्या करना है तुरंत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) का लाभ लेने वाले करोड़ों किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। अब अगली किस्त पाने के लिए केवल ई-केवाईसी (e-KYC) पर्याप्त नहीं होगी; सरकार ने 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) को अनिवार्य करने की तैयारी कर ली है। यदि आपके पास यह डिजिटल पहचान पत्र नहीं है, तो आपकी ₹2000 की अगली किस्त अटक सकती है। क्या है फार्मर आईडी और क्यों है जरूरी? फार्मर आईडी किसानों की एक डिजिटल पहचान है, जिसे 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) पहल के तहत तैयार किया जा रहा है। यह आईडी न केवल किसान की पहचान सुनिश्चित करेगी, बल्कि इसमें उनकी खेती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज होगी।     जमीन का विवरण: किसान के पास कितनी और कहां जमीन है।     फसल और खाद: कौन सी फसल उगाई गई है और किस खाद का उपयोग हुआ है।     अन्य विवरण: पशुपालन, सिंचाई के साधन और कृषि ऋण से जुड़ी जानकारी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और असली किसानों तक ही पहुंचे और बीच में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सके। योजना का मौजूदा स्वरूप पीएम किसान योजना के तहत किसानों को सालाना ₹6000 की आर्थिक मदद दी जाती है। यह राशि ₹2000 की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते (DBT) के जरिए भेजी जाती है। सामान्यतः प्रत्येक किस्त 4 महीने के अंतराल पर आती है, हालांकि प्रशासनिक कारणों से इस समय सीमा में थोड़ा बदलाव हो सकता है। कैसे बनवाएं अपनी फार्मर आईडी? किसान अपनी डिजिटल आईडी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बनवा सकते हैं: 1. ऑनलाइन प्रक्रिया:     सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल AgriStack पर जाएं।     पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करें और आधार कार्ड के जरिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी करें।     मांगी गई अपनी भूमि और फसल संबंधी जानकारी दर्ज करें।     आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर सबमिट करें। विभाग द्वारा सत्यापन (Verification) के बाद आपकी यूनिक फार्मर आईडी जेनरेट हो जाएगी। 2. ऑफलाइन प्रक्रिया: जो किसान तकनीक के जानकार नहीं हैं, उनके लिए सरकार देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष कैंप लगा रही है। किसान अपने नजदीकी कैंप या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर आवश्यक दस्तावेजों की मदद से अपनी आईडी बनवा सकते हैं।  

देसी F-35 की धमाकेदार एंट्री, दुश्‍मनों का आसमान में मुकाबला करने के लिए एयर डिफेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा दबाव

बेंगलुरु  देश के साथ ही दुनियाभर में सामरिक हालात लगातार बदल रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल का ईरान पर अटैक या फिर भारत का ऑपरेशन सिंदूर, इन सब घटनाओं से ग्‍लोबल लेवल पर अभूतपूर्व स्थिति पैदा हुई है. कुछ दिनों पहले ही अमेरिका ने एक हाइपर-सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम देते हुए वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया. वॉशिंगटन के इस कदम ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सबके दिल-दिमाग में एक ही सवाल चल रहा है- क्‍या अब जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली स्थिति पैदा हो गई है? क्‍या कमजोर देश की संप्रभुता की कोई अहमियत नहीं है? इन सबको देखते हुए दुनिया के तमाम देशों ने अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने की मुहिम शुरू कर दी है. मिसाइल, एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम, ड्रोन और कटिंग एज फाइटर जेट पर हजारों-लाखों करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. सुरक्षा के लिहाज से भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन जैसा देश स्थित है. पाकिस्‍तान आतंकवादियों को पालने-पोसने के लिए दुनियाभर में कुख्‍यात है. पाकिसतान की सरजमीं पर ही ओसामा बिन लादेन जैसा दुर्दांत आतंकवादी मिला था. दूसरी तरफ, चीन की आक्रामक विस्‍तारवादी नीतियों से हर कोई वाकिफ है. ऐसे में भारत के लिए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करना अनिवार्य हो गया है. विदेशी तकनीक पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता है. यही वजह है कि भारत ने मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम और फाइटर जेट डेवलप करने में आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. अग्नि-5, ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्‍टम आदि उसके परिणाम है. भारत अब 5th जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की दिशा में भी अहम कदम उठा चुका है. इसको ध्‍यान में रखते हुए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है, जिसके तहत पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ जेट्स डेवलप किया जाना है. आनेवाले तीन से चार साल इसके लिए काफी अहम होने वाले हैं. जानकारी के अनुसार, भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य विमानन कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने पुष्टि की है कि देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्‍ट पर पूरी तरह तय समय पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक रोलआउट किया जाएगा, जबकि इसकी पहली उड़ान (मेडन फ्लाइट) 2029 की शुरुआत में होने की योजना है. डॉ. कामत ने यह अहम जानकारी बेंगलुरु में आयोजित ‘तेजस-25’ नेशनल सेमिनार के दौरान साझा की. इस कार्यक्रम का आयोजन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा किया गया था, जो स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की पहली उड़ान के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ. हालांकि, यह आयोजन तेजस की उपलब्धियों को याद करने के लिए था, लेकिन चर्चा का केंद्र भारत के भविष्य के सैन्य विमानन रोडमैप और खास तौर पर AMCA प्रोग्राम रहा. इसके तहत फाइटर जेट डेवलप होने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन श्रेणी में आ जाएगा. बता दें कि मौजूदा समय में पांचवीं पीढ़ी के जेट्स में अमेरिकी F-35 और Su-57 टॉप पर हैं. AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट्स इस वजह से खास     स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी: इस विमान में खास तरह की बनावट और रडार से निकलने वाली किरणों को अब्‍जॉर्ब यानी अवशोषित करने वाली टेक्‍नोलॉजी को शामिल किया गया है. इससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे.     इंटरनल वेपन बे: पुराने लड़ाकू विमानों में मिसाइलें पंखों यानी विंग्‍स पर लगाई जाती हैं, जिससे रडार पर उनकी पकड़ बढ़ जाती है. इसके विपरीत AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट में हथियार विमान के अंदर रखे जाएंगे, ताकि उसकी स्टील्थ क्षमता बनी रहे.     मॉडर्न सेंसर: इसमें आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर फ्यूज़न तकनीक होगी, जिससे पायलट दुश्मन के खतरों को बहुत पहले देख और ट्रैक कर सकेगा, उससे पहले कि दुश्मन उसे पहचान पाए.     पावरफुल इंजन: शुरुआती स्क्वाड्रन (AMCA Mk1) में अमेरिकी GE F414 इंजन लगाए जाने की उम्मीद है, जबकि भविष्य के संस्करण (Mk2) में इससे ज्यादा ताकतवर, संयुक्त रूप से विकसित इंजन इस्तेमाल किए जा सकते हैं. कहां तक पहुंचा AMCA प्रोजेक्‍ट? DRDO प्रमुख के अनुसार, AMCA प्रोग्राम अब केवल डिजाइन और कॉन्‍सेप्‍ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक विकास के चरण में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारतीय वायुसेना (IAF) की जरूरतों के अनुसार एक सख्त और समयबद्ध योजना के तहत आगे बढ़ रही है. साल 2028 में प्रोटोटाइप और 2029 में पहली उड़ान के बीच का कम अंतर यह दर्शाता है कि इस परियोजना पर कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है. इसे पैरेलल डेवलपमेंट रणनीति कहा जाता है, जिसमें डिजाइन को अंतिम रूप देने के साथ-साथ प्रोडक्‍शन की तैयारी और विभिन्न सिस्टम्स की टेस्टिंग भी एक साथ की जाती है. इससे जटिल रक्षा परियोजनाओं में अक्सर होने वाली देरी से बचने में मदद मिलती है. AMCA को लेकर DRDO का भरोसा काफी हद तक तेजस कार्यक्रम से मिले अनुभव पर आधारित है. शुरुआती वर्षों में तेजस परियोजना को कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसी प्रक्रिया ने भारत को एक मजबूत घरेलू रक्षा औद्योगिक ढांचा तैयार करने में मदद की. तेजस के जरिए देश में आधुनिक फ्लाइट टेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की टीम तथा मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई. अब DRDO और ADA इन सभी अनुभवों और सीख को AMCA परियोजना में लागू कर रहे हैं. इसके अलावा, निजी उद्योगों को शुरुआती चरण से ही निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, ताकि जोखिम कम हों और समयसीमा बनी रहे. AMCA प्रोजेक्ट क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है. इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत करना और भविष्य की हवाई चुनौतियों का सामना करना है. AMCA प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति क्या है? डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के अनुसार AMCA प्रोग्राम … Read more

19 नए युद्धपोतों के साथ नौसेना मजबूत, चीन की चुनौती पर भारत का जवाब

नई दिल्ली भारतीय नौसेना अपने इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि की ओर अग्रसर है। इस वर्ष 2026 में नौसेना 19 युद्धपोतों को कमीशन करने जा रही है, जो एक वर्ष में सबसे बड़ी वृद्धि होगी। पिछले वर्ष 2025 में नौसेना ने 14 जहाजों को कमीशन किया था, जिसमें एक पनडुब्बी भी शामिल थी। सूत्रों के अनुसार, यह उत्पादन गति इतिहास में अभूतपूर्व है और यह स्वदेशी जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शाती है। ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि 2026 नौसेना के विस्तार का शिखर वर्ष रहेगा। इस दौरान नीलगिरी श्रेणी के मल्टी-रोल स्टेल्थ फ्रिगेट्स की संख्या में भी इजाफा होगा। इस श्रेणी का अग्रणी पोत जनवरी 2025 में सेवा में आया था, जिसके बाद अगस्त 2025 में आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि का कमीशनिंग हुआ। चालू वर्ष में इस श्रेणी के कम से कम दो और पोत नौसेना में शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा, सूची में इक्षाक श्रेणी का सर्वे पोत और निस्तार श्रेणी का डाइविंग सपोर्ट पोत भी शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर कमीशनिंग को संभव बनाने में ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ पद्धति की अहम भूमिका है। इस प्रक्रिया में जहाज के ढांचे, सुपर-स्ट्रक्चर और आंतरिक प्रणालियों को 250 टन के ब्लॉक्स में तैयार किया जाता है, जिन्हें बाद में जोड़ा जाता है। इन ब्लॉक्स को इस तरह सटीकता से बनाया जाता है कि वेल्डिंग के बाद केबल और पाइपिंग सहज रूप से फिट हो सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से निर्माण के लिए ‘सीक्वेंस’ तैयार किया जाता है- जिसमें सामग्री की सोर्सिंग से लेकर उत्पादन समय-सीमा तक शामिल होती है। नए डिजाइन सॉफ्टवेयर, AI और आधुनिक निर्माण तकनीकों के चलते अब भारतीय शिपयार्ड्स छह साल में जहाज तैयार कर रहे हैं, जबकि पहले यह अवधि 8-9 साल होती थी। सॉफ्टवेयर मशीनरी के लेआउट, उपकरणों और फ्लुइड डायनेमिक्स तक का पूर्वानुमान लगाता है। बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय ने 10-12 वर्ष पहले युद्धपोतों के लिए इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन को अपनाया था, जिसके अब ठोस नतीजे सामने आ रहे हैं। रणनीतिक स्तर पर, भारत के लक्ष्य चीनी नौसैनिक विस्तार का सामना करना, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर नैविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखना, क्वॉड और ASEAN के साझेदारों का समर्थन करना और इंडो-पैसिफिक में शक्ति-प्रक्षेपण को सुदृढ़ करना है। हालांकि, नौसेना का यह विस्तार अभी भी चीन से कम है। बीजिंग नए जहाजों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन अमेरिका के पूर्व आकलन के अनुसार, चीन की नौसेना के पास 2025 के अंत तक 395 जहाज और पनडुब्बियां हो सकती हैं- जो पिछले अनुमान 370 से लगभग 25 अधिक हैं। मई 2025 की एक अमेरिकी रिपोर्ट- चाइना नेवल मॉडर्नाइजेशन: इम्प्लिकेशंस फॉर यूएस नेवी कैपेबिलिटीज, बैकग्राउंड एंड इश्यूज फॉर यूएस कांग्रेस- में कहा गया है कि चीन की नौसेना की कुल बल शक्ति 2025 तक 395 जहाजों तक बढ़ेगी और 2030 तक 435 जहाजों तक पहुंच जाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड कमीशनिंग और तकनीकी उन्नति के साथ भारतीय नौसेना गुणात्मक बढ़त पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

एफआईआर दर्ज, JNU में विवादित नारे पर छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान

नई दिल्ली जेएनयू के सबरमती ढाबा वाली वो सड़क जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ गूंजे नारों ने लोकतंत्र की अभिव्यक्ति और मर्यादा के बीच की धुंधली लकीर को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि जिसे छात्र आजादी समझ रहे हैं वह कानून की नजर में नफरत की प्रयोगशाला है और अब इस प्रयोगशाला के किरदार कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जांच के आधार पर दोषी छात्रों को विश्वविद्यालय से तत्काल निलंबित होंगे. यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक एक्‍स हेंडल पर कहा, ‘किसी भी तरह की हिंसा, गैर-कानूनी हरकत या देश विरोधी गतिविधि को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस घटना में शामिल छात्रों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें तुरंत सस्पेंशन, निष्कासन और यूनिवर्सिटी से स्थायी रूप से बाहर निकालना शामिल है.’ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी. प्रशासन ने पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजकर इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है. प्रशासन के अनुसार 5 जनवरी 2020 की हिंसा की छठी बरसी मनाने के लिए करीब 30-35 छात्र सबरमती हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए थे. लेकिन कार्यक्रम का स्वरूप तब बदल गया जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसलों के बाद वहां उकसाने वाले नारे लगने शुरू हो गए. प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अनादर और जेएनयू की आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है. इन छात्रों पर गिर सकती है गाज विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी शिकायत में कुछ प्रमुख छात्रों की पहचान की है, जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है:    पहचाने गए छात्र: अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान और शुभम आदि.      गवाह: घटना के समय सुरक्षा निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और गार्ड जय कुमार मीणा व पूजा मौके पर मौजूद थे. ‘नफरत की प्रयोगशाला’ बनाम अभिव्यक्ति का अधिकार जेएनयू प्रशासन का यह बयान कि “विश्वविद्यालयों को घृणा की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा”, एक गहरे बदलाव की ओर इशारा करता है. यह कार्रवाई केवल नारों तक सीमित नहीं है: 1.      न्यायिक गरिमा का प्रश्न: प्रशासन ने इसे केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि कोर्ट के फैसलों के प्रति ‘अनादर’ माना है. यह छात्रों की सक्रियता को कानूनी कटघरे में खड़ा करता है. 2.      कैंपस की छवि और सुरक्षा: प्रशासन का मानना है कि इस तरह की नारेबाजी से परिसर की शांति, सौहार्द और सुरक्षा माहौल को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. 3.      अभिव्यक्ति की सीमाएं: प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रविरोधी हरकतों या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह घटना दर्शाती है कि जेएनयू में छात्र राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ प्रशासन और छात्रों के बीच का संवाद पूरी तरह कानूनी प्रक्रियाओं (FIR और निलंबन) में तब्दील हो चुका है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, और उन्हें किसी भी कीमत पर अराजकता का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा.

किसानों को राहत की उम्मीद: बजट 2026 में PM-KISAN की राशि बढ़ाने की तैयारी, अब मिल सकते हैं इतने हजार

नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026 अब ज्यादा दूर नहीं है और इसे लेकर देशभर के किसानों की नजर सरकार पर टिकी हुई है। खेती की बढ़ती लागत और महंगाई के बीच किसान उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बजट में उनके लिए कोई बड़ा एलान हो सकता है। खासतौर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 6,000 से बढ़कर 10,000 रुपये हो सकती है सालाना मदद फिलहाल पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को साल में 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। लेकिन मौजूदा हालात में किसानों का कहना है कि यह राशि अब जरूरतों के मुकाबले कम पड़ रही है। ऐसे में बजट 2026 में इस मदद को बढ़ाकर 10,000 रुपये सालाना करने की उम्मीद जताई जा रही है। क्यों जरूरी मानी जा रही है बढ़ोतरी पिछले कुछ वर्षों में खेती से जुड़ा खर्च तेजी से बढ़ा है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और कृषि उपकरणों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को मिलने वाली सीमित सहायता से खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। अगर सरकार पीएम किसान योजना की रकम बढ़ाती है, तो इससे किसानों को खेती में निवेश करने, फसल उत्पादन सुधारने और आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसानों के हाथ में ज्यादा पैसा आता है, तो उनकी खरीदारी की क्षमता बढ़ेगी। इससे गांवों में खर्च बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसका असर कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। कब शुरू हुई थी पीएम किसान योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत दिसंबर 2018 में की गई थी। इसका मकसद छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा देना है। योजना के तहत हर साल 6,000 रुपये की मदद सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए किसानों के खातों में भेजी जाती है। अब सभी की नजरें बजट 2026 पर टिकी हैं। अगर सरकार इस योजना की राशि बढ़ाने का ऐलान करती है, तो यह किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।