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आंखोंदेखी बयान: दीपू दास के साथी ने खोले हिंसा और दहशत के खौफनाक राज

ढाका  बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की दरिंदगी का शिकार हुए दीपू चंद्र दास के साथ ही काम करने वाले एक शख्स ने उनकी हत्या को लेकर रोंगटे खड़े देने वाली बातें बताई हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक दीपू चंद्र दास के साथ काम करने वाले शख्स ने बताया कि बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दीपू चंद्र दास की एक बेटी है। कार्यस्थल पर दीपू अकसर उपेक्षा के शिकार होते थे। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग थे जिन्हें कंपनी में नौकरी नहीं मिली थी और उन लोगों ने ही उनपर ईशनिंदा के झूठे आरोप लगा दिए।   घठना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पहले एचआर ने दीपू दास को बुलाया था। एचआर ने दीपू पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया। बाद में दीपू दास को फैक्ट्री के कर्मचारियों के हवाले कर दिया गया। भीड़ में बहुत सारे बाहरी लोग भी शामिल थे। भीड़ दीपू को उठाकर फैक्ट्री के गेट पर ले गई और फिर उनपर बेरहमी से मार पड़ने लगी। उन्होंने बताया, फैक्ट्री के बाहर खड़ी भीड़ ने दीपू चंद्र दास को अधमार कर दिया। लोग लातों से उनके मुंह और सीने पर मार रहे थे। बहुत सारे लोग डंडों से पीट रहे थे। दीपू दास खून से लथपथ थे। फैक्ट्री के गेट पर ही यह दरिंदगी हो रही थी। दीपू को इतने में भी नहीं छोड़ा गया। दीपू की मौत के बाद उनके शव को एक किलोमीटर घसीटा गया और फिर पेड़ से लटका दिया गया। कुछ लोगों ने पेट्रोल डालकर श को आग लगा दी। अधजला शव ही जमीन पर गिर गया। शख्स ने बताया कि मुस्लिमों की पूरी भीड़ थी और यह सब देखते हुए भी वे कुछ नहीं बोल सके। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जो दीपू का साथ देना भी चाहते थे, वे भी डर के मारे चुप थे। लोगों को डर था कि अगर उन्होंने दीपू का साथ दिया तो उनका भी वही हाल होगा। उन्होंने कहा, मुस्लिमों की भीड़ एकदम दानव बन गई थी। बांग्लादेश सरकार की तरफ से बाद में कहा गया था कि दीपू दास के खिलाफ ईशनिंदा का कोई सबूत नहीं मिला था  

भूकंपों की डरावनी श्रृंखला: 30 घंटे में 24 बार कांपी धरती, क्या बड़े झटके का संकेत?

   अहमदाबाद गुजरात के कच्छ में शुक्रवार सुबह 4.6 की तीव्रता से आए भूकंप ने कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाया, लेकिन इसने 24 साल पहले की उस तबाही के जख्म जरूर हरे कर दिए हैं जिसमें हजारों लोग की जिंदगी बर्बाद हो गई थी। इस ताजा भूकंप के बाद करीब दो दर्जन हल्के झटकों और जमीन के नीचे हलचल ने भी वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भूवैज्ञानिकों को इन झटकों के बाद क्षेत्र में तीन फॉल्ट लाइंस का पता चला है जो अब ऐक्टिव हो गए हैं। इनकी वजह से पहले से ही भूकंप के लिए संवेदनशील कच्छ को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य झटके के बाद 30 घंटे के अंदर 23 आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद हल्के झटके) भी लगे। शुक्रवार को तड़के 4.30 बजे से शनिवार सुबह 9.45 बजे के बीच ये कंपन नॉर्थ वागड फॉल्ट से उत्पन्न हुए। इसे इस क्षेत्र में सबसे सक्रिय माना जाता है। भूकंप के हालिया डेटा से पता चला है कि कथरोल हिल, गोरा डोंगर और नॉर्थ वागड़ फॉल्ट लाइनें एक साथ ऐक्टिव हो गईं हैं। इसकी वजह से भारत के सबसे प्रमुख भूकंप संभावित क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ गई है। कच्छ पहले से ही 10 से अधिक फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिनमें कच्छ मेनलैंड फॉल्ट और साउथ वागड़ फॉल्ट शामिल हैं, जो 2001 के विनाशकारी भूकंप (रिक्टर स्केल पर 7.7) के दौरान टूट गए थे। हाल तक अधिकांश भूकंपीय गतिविधियां इन्हीं ज्ञात क्षेत्रों के आसपास केंद्रित थीं। हालांकि, 2025 में दर्ज किए गए हालिया झटकों से संकेत मिलता है कि तनाव नए फॉल्ट सिस्टमों में स्थानांतरित होकर फैल रहा है। तीन फॉल्ट लाइनें एक साथ ऐक्टिव भुज स्थित कच्छ यूनिवर्सिटी में जियोसाइंसेज डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर गौरव चौहान ने टीओआई को बताया, ‘ नागर पार्कर और अल्लाह बंड जैसी पारंपरिक रूप से सक्रिय फॉल्ट लाइनों ने वर्षों से भूकंप उत्पन्न किए हैं। लेकिन अब चिंता की बात यह है कि हालिया झटकों ने नॉर्थ वागड़ फॉल्ट पर गतिविधि की पुष्टि की है, जबकि पिछले कुछ महीनों में काठरोल हिल और गोरा डोंगर फॉल्ट लाइनों पर दर्ज भूकंप यह संकेत देते हैं कि 2025 की शुरुआत से ही तीनों फॉल्ट लाइनें फिलहाल सक्रिय हो चुकी हैं।’ एक साथ कई फॉल्ट लाइन ऐक्टिव होने से खतरा चौहान के मुताबिक 1 से 3 तीव्रता के आफ्टरशॉक्स ने एकत्रित ऊर्जा को निकलने में मदद की है जिससे तुरंत किसी बड़े भूकंप की आशंका कम होती है। उन्होंने कहा, 'आफ्टरशॉक्स दबाव घटाते हैं, लेकिन कई फॉल्ट लाइंस का ऐक्टिव होना भी चेतावनी है। ये फॉल्ट बड़े भूकंप को उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं और इसलिए तैयारी बहुत अहम है।' हालांकि शुक्रवार का भूकंप तीव्रता में मध्यम दर्जे का था, लेकिन इसके झटके पूरे कच्छ में महसूस किए गए। झटके इतने तेज थे कि लोग डरकर घर से बाहर भागे। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज झटकों का कारण भूकंप के केंद्र की कम गहराई थी। तैयारी रखने की सलाह भूकंप वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कच्छ में आने वाला कोई शक्तिशाली भूकंप केवल इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र की भू-आकृतिक संरचना को देखते हुए, तेज झटके पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सतर्कता की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। चौहान ने अधिकारियों से हालिया भूकंपीय गतिविधि को एक चेतावनी के रूप में लेने का आग्रह किया और नियमित भूकंप मॉक ड्रिल, भवन निर्माण मानकों के सख्त पालन और स्कूल शिक्षा में आपदा तैयारी को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।

‘आवास से संसद तक होगा कब्जा’, इंकलाब मंच के तख्तापलट वाले बयान से मचा सियासी हड़कंप

ढाका बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा की आग शांत होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। इंकलाब मंच ने आज यानी रविवार से ढाका और राजधानी से बाहर भी प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। इंकलाब मंच ने आ देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। सुबह 11 बजे से ही बंद शुरू हो गया है। वहीं इंकलाब मंच के सदस्यों ने यूनुस सरकार को ‘तख्तापलट’ तक की चेतावनी दे डाली है। इंकलाब मंच मे फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि ढाका में शाहबाग इलाके में जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। शुक्रवार से ही यहां बहुत सारे कार्यकर्ता धरने पर बैठे हैं। शनिवार को भी ढाका में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन के चलते जाम लग गया। इंकलाब मंच ने ढाका, सिलहेट, चट्टोग्राम और कुश्तिया में प्रदर्शन किए। शाहबाग में इंकलाब मंच के सदस्य अब्दुल्ला ने कहा कि आज तो हम शाहबाग में हैं लेकिन कल तक जमुना तक कब्जा हो जाएगा। बता दें कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आवास का नाम जमुना है। अल जबर ने कहा कि शुक्रवार से ही इतने सारे लोग धरने पर बैठे हैं लेकिन यूनुस के कान में आवाज नहीं पहुंच रही है। लोग इतनी ठंड में भी घरों को छोड़कर सड़कों पर बैठे हैं। ऐसे में लोगों का विश्वास सरकार से उठ रहा है। तख्तापलट की धमकी द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक जबर ने कहा, अगर आपको लगता है कि सचिवालय और कैंट के अंदर आपका नियंत्रण है तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर को हादी की नमाज-ए-जनाजा के दौरान अगर हम चाहते तो सरकार बदल देते। तुम्हारा जमुना और कैंट भी तुम्हें बचा नहीं सकता था।  

लंदन की सड़कों पर टकराव: हिंदू प्रदर्शन के दौरान खालिस्तानियों ने बांग्लादेश का खुलकर किया समर्थन

लंदन बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की नृशंस हत्या की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। हाल ही में लंदन स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर इस हत्याकांड के विरोध में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। हालांकि, इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव पैदा हो गया जब खालिस्तानी अलगाववादी समूह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बचाव में उतर आए। लंदन में रहने वाले बांग्लादेशी हिंदुओं ने दीपु दास की हत्या और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन आयोजित किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दोषियों को कड़ी सजा मिले और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हैरानी की बात यह रही कि इस प्रदर्शन का विरोध करने के लिए वहां खालिस्तानी समर्थक पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खालिस्तानी प्रदर्शनकारी मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार की ढाल बनकर खड़े हो गए। उन्होंने न केवल हत्या का विरोध कर रहे हिंदुओं को डराने की कोशिश की, बल्कि उनके खिलाफ उकसाने वाले नारे भी लगाए। स्थिति को बिगड़ता देख लंदन पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों के बीच दीवार बनकर शांति बनाए रखने की कोशिश की। भारत विरोध के लिए खालिस्तानी-कट्टरपंथी गठबंधन यह घटना भारत विरोधी ताकतों के बीच बढ़ते गठजोड़ की ओर इशारा करती है। खालिस्तानी आतंकी संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) का नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू लगातार भारत विरोधी बयानबाजी कर रहा है। हाल ही में पन्नू ने अमेरिका से एक वीडियो जारी कर बांग्लादेश के कट्टरपंथियों का समर्थन किया था। पन्नू ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को तोड़ने की एक नई साजिश रची है। उसने एक विवादास्पद मानचित्र जारी किया है, जिसमें असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और नागालैंड को मिलाकर एक अलग देश बनाने का दावा किया गया है। पन्नू ने इस काल्पनिक देश का नाम 'ट्रम्पलैंड' रखा है। साथ ही, उसने अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा दिखाने की हिमाकत भी की है। आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब किसी ने पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात कही हो इससे पहले कुछ बांग्लादेशी कट्टरपंथी नेता भी इसी तरह के दावे कर चुके हैं। गुरपतवंत सिंह पन्नू भारत के खिलाफ जहर उगलने का कोई मौका नहीं छोड़ता। वह अक्सर पाकिस्तानी चैनलों पर बैठकर भारत विरोधी एजेंडा चलाता है। 2023 के क्रिकेट विश्व कप के दौरान पन्नू ने स्टेडियम और विमानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। पन्नू ने 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तिरंगा फहराने से रोकने वाले के लिए इनाम की घोषणा भी की थी।  

Overview 2025: कूटनीति की ऐतिहासिक सफलता, 28 देशों ने पीएम मोदी को किया सम्मानित

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के ऐसे नेता हैं, जिन्हें सबसे ज्यादा देशों से सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में विश्व पटल पर भारत की छवि निखरी है। भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ी है। वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका अहम हो गई है। पीएम मोदी दो दिवसीय इथियोपिया के दौरे पर थे, जहां उन्हें सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया। हालांकि, इथियोपिया पहला देश नहीं है, जिसने पीएम मोदी को इस तरह के सम्मान से नवाजा है। आइए जानते हैं कि पीएम मोदी को दुनिया के किन-किन देशों ने कब-कब सम्मानित किया है। पीएम मोदी को 11 साल के कार्यकाल में 28 देशों में सम्मानित किया जा चुका है। पीएम मोदी को सम्मानित करने का सिलसिला 2016 में सऊदी अरब से शुरू हुआ। इस साल पीएम मोदी अब तक 8 अवॉर्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं। इससे पहले 2023 से 2024 के बीच उन्हें 6 देशों में सम्मानित किया गया। 2016 में पीएम मोदी को सऊदी अरब में 'ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज' और अफगानिस्तान में 'ऑर्डर ऑफ अमानुल्लाह खान अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2018 में भारत के प्रधानमंत्री को फिलिस्तीन में ऑर्डर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन से सम्मानित किया गया। 2019 में पीएम मोदी को मालदीव ने ऑर्डर ऑफ द डिस्टिंग्विश्ड रूल ऑफ इज्जुद्दीन से नवाजा गया। फिर 2019 में उन्हें बहरीन में किंग ऑफ हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां सम्मान मिला। 2019 में पीएम मोदी को संयुक्त अरब अमीरात के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ जायद से सम्मानित किया गया। 21 दिसंबर 2020 को पीएम मोदी को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सर्वोच्च सम्मान लीजन ऑफ मेरिट, डिग्री चीफ कमांडर से सम्मानित किया। भारत के प्रधानमंत्री को दिसंबर, 2021 में भूटान के राजा ने सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो से सम्मानित करने का ऐलान किया था, और 2024 में उन्हें इससे सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड पाने वाले पहले विदेशी नेता हैं। 2023 में पीएम मोदी को ग्रीस, फ्रांस, मिस्र, पापुआ न्यू गिनी और फिजी में सम्मानित किया गया। ग्रीस की राष्ट्रपति कैटरीना एन सकेलारोपोउलू ने 2023 में पीएम मोदी को सर्वोच्च सम्मान ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर से सम्मानित किया था। इसके अलावा, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 2023 में ही ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन डी’होनूर ऑफ ऑनर से सम्मानित किया। मिस्र में जून 2023 को पीएम मोदी को राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने सर्वोच्च सम्मान ऑर्डर ऑफ द नाइल से सम्मानित किया। 2023 में ही पापुआ न्यू गिनी में उन्हें ग्रैंड कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू से सम्मानित किया गया। फिजी में भारत के पीएम मोदी को मई 2023 में सर्वोच्च सम्मान कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी (सीएफ) से सम्मानित किया गया था। 2023 में पलाऊ में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एबाकल अवार्ड नेशनल/ट्रेडिशनल ऑनर फॉर लीडरशिप एंड विजडम से नवाजा गया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी को जुलाई 2024 में सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार 'द ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल' से सम्मानित किया। दिसंबर 2024 में कुवैत के अमीर महामहिम शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार 'द ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर' से सम्मानित किया। 20 नवंबर 2024 को प्रधानमंत्री को गुयाना के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी गुयाना के ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस सम्मान से सम्मानित होने वाले चौथे विदेशी नेता हैं। बारबाडोस के प्रधानमंत्री महामहिम मिया अमोर मोटली ने 20 नवंबर 2024 को पीएम मोदी को 'ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस' सम्मान देने का ऐलान किया, जिसे मार्च 2025 में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने प्राप्त किया। पीएम मोदी को 2024 में नाइजीरिया के सर्वोच्च सम्मान ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर (जीसीओएन) से नवाजा गया। डोमिनिका की राष्ट्रपति सिल्वेनी बर्टन ने प्रधानमंत्री मोदी को नवंबर 2024 में 'डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया। नामीबिया की राष्ट्रपति डॉ. नेटुम्बो नंदी-नदैतवा ने जुलाई 2025 में नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्विचिया मिराबिलिस' से पीएम मोदी को सम्मानित किया। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस' से 7 जुलाई 2025 को भारत के प्रधानमंत्री को सम्मानित किया। 4 जुलाई 2025 को पीएम मोदी को त्रिनिदाद और टोबैगो गणराज्य की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू ओआरटीटी ने सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार, 'द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो' से सम्मानित किया। इसके अलावा 2 जुलाई 2025 को पीएम मोदी को घाना के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना' से नवाजा गया। साइप्रस के राष्ट्रपति महामहिम निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने 16 जून 2025 को भारत के पीएम मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III' से सम्मानित किया। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका ने 5 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रीलंका मित्र विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। यह विदेशी नेताओं को दिया जाने वाला देश का सर्वोच्च सम्मान है। पहली बार किसी भारतीय नेता को यह पुरस्कार प्राप्त हुआ। 

100 साल पूरे होने पर RSS में बदलाव, जल्द ही क्षेत्र प्रचारकों का पुनर्गठन

नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने की तैयारी में है. संघ समय-समय पर खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालता रहा है. कुछ वर्ष पहले जब संघ ने अपनी पारंपरिक ड्रेस में बदलाव किया था, तब भी यह चर्चा का विषय बना था. अब शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ की आंतरिक संरचना में व्यापक परिवर्तन प्रस्तावित है, जिसे संगठन के भविष्य के विस्तार और कार्यकुशलता से जोड़कर देखा जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर प्रांत प्रचारक की व्यवस्था पर पड़ेगा. नई रचना के तहत अब प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे. संभाग प्रचारकों का कार्यक्षेत्र प्रांत प्रचारकों की तुलना में छोटा होगा, जिससे संगठनात्मक कामकाज अधिक प्रभावी और ज़मीनी स्तर पर सशक्त हो सकेगा. इसके साथ ही हर राज्य में एक राज्य प्रचारक की व्यवस्था की जाएगी, जो पूरे राज्य में संघ के काम का समन्वय करेंगे. संघ की नई संरचना में लगभग दो सरकारी मंडलों (कमिश्नरी) को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा. उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश को देखा जाए तो वर्तमान में संघ ने राज्य को छह प्रांतों (ब्रज, अवध, मेरठ, कानपुर, काशी और गोरक्ष) में विभाजित किया हुआ है. वहीं, प्रशासनिक रूप से उत्तर प्रदेश में 18 मंडल हैं. नई व्यवस्था के अनुसार इन 18 मंडलों को मिलाकर 9 संभाग बनाए जाएंगे. यानी उत्तर प्रदेश में अब नौ संभाग प्रचारक होंगे और पूरे राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक कार्य करेगा. फिलहाल प्रदेश में छह प्रांत प्रचारक जिम्मेदारी निभा रहे हैं. कई बदलाव की हो चुकी तैयारी मौजूदा व्यवस्था में उत्तर क्षेत्र में हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर राज्य आते हैं. अब आगे इसमें राजस्थान को भी जोड़ने की तैयारी है. प्रांत प्रचारक के जगह राज्य प्रचारक बनाए जाएंगे. संघ में प्रांत व्यवस्था को खत्म किया जा सकता है. संघ ढांचा में अब तक महत्वपूर्ण माने जा रहे प्रांत प्रचारक व्यवस्था अब आगे नहीं रहेगा. हर राज्य में होगा एक राज्य प्रचारक अब देश के हरेक राज्य के एक एक प्रचारक होंगे जिन्हें राज्य प्रचारक कहा जाएगा. मसलन उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सात प्रांत प्रचारक के जगह अब एक राज्य प्रचारक होंगे. संभागीय प्रचारक: कमिश्नरी लेवल पर संभागीय प्रचारक की नई व्यवस्था शुरू होगी. राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश में 75 से ज्यादा संभागीय प्रचारक की नई व्यवस्था होगी. सुझावों के आधार पर तय किए गए बदलाव संभागीय प्रचारक के नीचे के व्यवस्था पहले के तरह ही जारी रहेगा. संभाग प्रचारक के नीचे विभाग प्रचारक और जिला प्रचारक व्यवस्था पूर्ववत चलता रहेगा. 100 साल पूरे होने पर संघ ने आंतरिक व्यवस्था और संगठन पदानुक्रम के पुनर्गठन पर सुझाव देने के लिए एक टीम बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट और सुझाव सौंप दिया है. संघ की जिस टोली को दिए गए थे उन्होंने अपने तरफ ये सुझाव दिए हैं. सांगठनिक बदलावों को लेकर मिले सुझाव पर लगभग सहमति बन गई है. ये व्यवस्था आने वाले समय में शताब्दी वर्ष समारोह खत्म होने के बाद देखने को मिल सकता है. संगठन के स्‍तर पर क्‍या होगा असर? इस बदलाव का असर क्षेत्र प्रचारकों की संख्या पर भी पड़ेगा. वर्तमान में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए एक क्षेत्र प्रचारक है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए एक अलग क्षेत्र प्रचारक कार्यरत है. नई व्यवस्था में इन दोनों की जगह केवल एक क्षेत्र प्रचारक होगा, जो पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का कार्य देखेगा, हालांकि दोनों राज्यों के राज्य प्रचारक अलग-अलग होंगे. इसी तरह राजस्थान को अब संघ दृष्टि से उत्तर क्षेत्र (जिसमें दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब शामिल हैं) के साथ जोड़ा जाएगा. इस पूरे क्षेत्र के लिए एक ही क्षेत्र प्रचारक होगा. फिलहाल देशभर में संघ के 11 क्षेत्र प्रचारक हैं, जो नई संरचना लागू होने के बाद घटकर 9 रह जाएंगे. वहीं, पूरे देश में लगभग 75 संभाग प्रचारक होंगे. यह बदलाव संघ की बढ़ती गतिविधियों और कार्य विस्तार को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है. संघ की बैठकों में क्‍या बदलाव? इसके अलावा संघ की बैठकों की संरचना में भी बदलाव प्रस्तावित है. मार्च में होने वाली संघ की सबसे बड़ी बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा अब हर साल नहीं होगी. नए निर्णय के अनुसार यह बैठक हर तीन साल में नागपुर में आयोजित की जाएगी. हालांकि दीपावली के आसपास होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक हर वर्ष की तरह जारी रहेगी. सूत्र बताते हैं कि संघ की इस नई रचना पर पिछले 5–6 वर्षों से मंथन चल रहा था. लंबे विचार-विमर्श के बाद अब इन बदलावों पर सहमति बनती दिख रही है. माना जा रहा है कि मार्च 2026 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लग सकती है और वर्ष 2027 से संघ में ये बदलाव ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगेंगे.

अमेरिका को पीछे छोड़ा, इस मुस्लिम देश ने 2025 में निकाले सबसे ज्यादा भारतीय

नई दिल्ली साल 2025 में भारतीयों को निकाले जाने के मामलों में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका से सबसे ज्यादा भारतीयों को वापस भेजा जाता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। विदेश मंत्रालय के ताजा डेटा के अनुसार, 2025 में सबसे ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट करने वाला देश मुस्लिम राष्ट्र सऊदी अरब रहा। 11,000 भारतीयों को डिपोर्ट किया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने इस साल करीब 11,000 भारतीयों को डिपोर्ट किया, जो किसी भी अन्य देश से कहीं ज्यादा है। इनमें ज्यादातर मजदूर और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग शामिल थे, जिन्हें वीजा उल्लंघन, अवैध प्रवास या स्थानीय कानूनों के उल्लंघन के आरोप में वापस भेजा गया। वहीं, अमेरिका ने 2025 में केवल 3,800 भारतीयों को डिपोर्ट किया, जो पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा तो है, लेकिन सऊदी अरब के आंकड़ों से काफी कम। अमेरिका से डिपोर्ट होने वालों में भी ज्यादातर प्राइवेट कर्मचारी थे।  रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, 2025 में 81 देशों से 24,600 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया गया। सऊदी अरब में भारतीयों की बड़ी संख्या (लगभग 19-27 लाख) होने के कारण ऐसे मामले ज्यादा सामने आते हैं, क्योंकि वहां निर्माण, स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों में लाखों भारतीय काम करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंटों की धोखाधड़ी, स्थानीय कानूनों की अनभिज्ञता और वीजा नियमों का सख्ती से पालन न करना ऐसे मामलों की मुख्य वजहें हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा राज्यसभा में पेश ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 12 महीनों में अमेरिका से 3,800 भारतीयों को निर्वासित किया गया। अधिकांश कार्रवाई वाशिंगटन डीसी (3,414) और ह्यूस्टन (234) से की गई। विशेषज्ञ इस बढ़ोतरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार में शुरू हुई सख्ती और दस्तावेजों की कड़ी जांच- जैसे वीजा स्टेटस, वर्क ऑथराइजेशन और ओवरस्टे से जोड़ रहे हैं। खाड़ी देशों से लगातार ऊंचे आंकड़े MEA के अनुसार खाड़ी देशों में वीजा और श्रम नियमों के उल्लंघन के कारण बड़ी संख्या में निर्वासन हुए। जिन देशों से उल्लेखनीय संख्या सामने आई, उनमें संयुक्त अरब अमीरात (1,469), बहरीन (764) और सऊदी अरब शामिल हैं। सामान्य कारणों में वीजा/रेजिडेंसी ओवरस्टे, बिना वैध परमिट काम करना, श्रम कानूनों का उल्लंघन, नियोक्ता से फरार होना और सिविल या आपराधिक मामलों में फंसना शामिल है। दक्षिण–पूर्व एशिया और म्यांमार-कंबोडिया का अलग पैटर्न दक्षिण–पूर्व एशियाई देशों से भी बड़ी संख्या में भारतीयों का निर्वासन दर्ज किया गया- म्यांमार (1,591), मलेशिया (1,485), थाइलैंड (481) और कंबोडिया (305)। तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष भीमा रेड्डी ने बताया कि म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में निर्वासन का पैटर्न अलग है। उनके मुताबिक, यह अक्सर साइबर स्लेवरी से जुड़ा होता है- जहां भारतीयों को ऊंची तनख्वाह का झांसा देकर बुलाया जाता है, बाद में अवैध साइबर गतिविधियों में जबरन काम कराया जाता है और अंततः हिरासत व निर्वासन होता है। छात्रों का निर्वासन: यूके सबसे आगे, रूस भी शामिल MEA के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारतीय छात्रों का निर्वासन सबसे ज्यादा यूनाइटेड किंगडम से हुआ, जहां 170 छात्रों को वापस भेजा गया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया (114), रूस (82) और संयुक्त राज्य अमेरिका (45) का स्थान रहा। एजेंटों की ठगी और कानूनों की अनभिज्ञता बनी बड़ी वजह भीमा रेड्डी का कहना है कि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक निर्माण क्षेत्र, केयरगिविंग और घरेलू काम में जाते हैं। इनमें से कई कम कौशल वाले कामगार एजेंटों के जरिए जाते हैं और अतिरिक्त कमाई की कोशिश में मामूली अपराधों या नियम उल्लंघन में फंस जाते हैं। कई मामलों में एजेंटों की ठगी और स्थानीय कानूनों की जानकारी का अभाव भारी पड़ता है।

नई साल में बदलाव की शुरुआत, 1 जनवरी से लागू होंगे LPG, बैंकिंग और पेंशन से जुड़े नए नियम

 नई दिल्‍ली साल 2025 अब धीरे-धीरे समााप्‍त‍ि की ओर बढ़ रहा है, 1 जनवरी आते ही साल 2026 की शुरुआत हो जाएगी. नए साल की शुरुआत के साथ ही कई बड़े आर्थिक नियम भी बदल रहे हैं, जो सीधे आपकी जेब को प्रभावित कर सकते हैं. 1 जनवरी से LPG गैस के दाम से लेकर पैन, आधार, नया पे कमीशन तक… ढेर सारे नियम बदल रहे हैं. आइए विस्‍तार से जानते हैं इन नियमों के बारे में और इसका आपके जीवन में क्‍या प्रभाव होने वाला है?  पहला बदलाव- PAN-Aadhaar लिंक आधार कार्ड और पैन को लिंक करने की डेट दिसंबर में ही समाप्‍त हो रही है. अगर इन्‍हें लिंक नहीं किया जाता है तो यह 1 जनवरी से निष्क्रिय हो जाएंगे, फिर आप आईटीआर रिफंड, रिसिप्‍ट और बैंकिंग लाभ नहीं ले पाओगे. साथ ही पैन निष्क्रिय होने से आप कई सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो सकते हो.  दूसरा बदलाव- सख्‍त होंगे यूपीआई, सिम और मैसेजिंग नियम बैंक UPI और डिजिटल पेमेंट के नियमों को सख्त किया जा रहा है. फ्रॉड को रोकने के लिए SIM वेरिफिकेशन के नियमों को भी कड़ा किया जा रहा है. ताकि फ्रॉडर्स WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप्स से फ्रॉड को कम किया जा सके.  तीसरा बदलाव- एफडी योजना और लोन  स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और HDFC बैंक जैसे बैंकों ने लोन की दरें कम कर दी हैं, जो 1 जनवरी से प्रभावी होने वाले हैं. इसी तरह, जनवरी से नई फिक्स्ड डिपॉजिट ब्याज दरें भी लागू होंगी. यह आपके निवेश को प्रभावित कर सकता है.  चौथा बदलाव- एलपीजी सिलेंडर के दाम  हर महीने एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में बदलाव होता है. 1 जनवरी से भी एलपीजी के दाम में गिरावट या उछाल हो सकती है, जिसका असर आपकी जेब पर पड़ सकता है. 1 दिसंबर को कमर्शिलय गैस सिलेंडर के रेट में 10 रुपये की कटौती हुई थी, दिल्ली में यह रेट 1,580.50 रुपये है.  पांचवा बदलाव- CNG-PNG और एएफटी  ऑयल कंपनियां हर महीने एलपीजी के साथ ही सीएनजी-पीएनजी और ATF के दाम बदलती हैं. 1 जनवरी से एलपीजी के साथ सीएनजी, पीएनजी और जेट फ्यूल (AFT) के दाम में बदलाव किए जा सकते हैं. ATF को जेट फ्यूल भी कहा जाता है, जो एक तेज ईंधन होता है. इसके दाम घरेलू और इंटरनेशनल दोनों के लिए अलग-अलग तय होते हैं.  छठवां बदलाव- नया टैक्‍स कानून  नया इनकम टैक्‍स एक्‍ट 2025 1 जनवरी 2026 से पूरी तरह से लागू नहीं किया जाएगा, लेकिन सरकार जनवरी तक नए ITR (टैक्स रिटर्न) फॉर्म और नियमों को नोटिफाई करेगी, जो 1 अप्रैल 2026 यानी वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होगा. यह पुराने टैक्‍स कानून Income-tax Act, 1961 जगह लेगा. नए कानून के तहत प्रोसेस और टैक्स ईयर की परिभाषा में बदलाव किया गया है, आईटीआर फॉर्म को सरल बनाया जाएगा और  सिस्‍टम को सरल बनाया जााएगा.  7वां बदलाव- 8वां वेतन आयोग  उम्‍मीद की जा रही है कि सरकार 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी होगा, चाहे भले ही इसे लागू करने में ज्‍यादा समय लग जाए.  इसका मतलब है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद कर्मचारियों को सैलरी और पेंशन 1 जनवरी 2026 से जोड़कर दी जाएगी. बता दें 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर 2025 को समाप्‍त हो जाएगा.  8वां बदलाव- किसानों के लिए नियम  यूपी जैसे राज्यों में किसानों को PM-किसान योजना का फायदा पाने के लिए यूनिक किसान ID की आवश्‍यकता होगी. PM किसान फसल बीमा योजना के तहत, अगर जंगली जानवरों से फसल को हुए नुकसान की रिपोर्ट 72 घंटे के अंदर की जाती है, तो अब उसे भी कवर किया जा सकता है.  9वां बदलाव- वाहनों की कीमत में बढ़ोतरी  1 जनवरी 2026 से भारत में कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी करने जा रही हैं. निसान, BMW, JSW एमजी मोटर, Renault और एथर एनर्जी ने वाहनों के दाम में 3000 रुपये से लेकर 3 फीसदी तक बढ़ोतरी करने को कहा है. टाटा मोटर्स और होंडा जैसी कंपनियों ने भी बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं. 

सरकार दे रही है बेटियों को 50 हजार रुपये: योजना की पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया

नई दिल्‍ली बेटियों के पढ़ाई का खर्च उठाने और उनकी आर्थिक सहायता करने के लिए केंद्र और राज्‍य सरकारों की ओर से कई योजनाएं चलाई जाती हैं. यह योजनाएं पढ़ाई से लेकर शादी तक का खर्च उठाने की क्षमता रखती हैं. सरकार इन योजनाओं के तहत हर साल करोड़ों रुपये बांटती है. आज हम ऐसी ही एक योजना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका लाभ आप उठा सकते हैं.  यह योजना राजस्‍थान सरकार की ओर से चलाई जा रही है, जिसका नाम मुख्यमंत्री राजश्री योजना (Mukhyamantri Rajshree Yojana) है. यह योजना जन्‍म से लेकर शिक्षा पूरी करते तक की आर्थिक मदद देती है. इस योजना का उद्देश्‍य राज्‍य में भ्रूण हत्‍या को रोकना और लिंगानुपात समानता को बढ़ाना. साथ ही बेटियों की शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाना है.  क्‍या है मुख्‍यमंत्री राजश्री योजना?  राजस्‍थान सरकार ने इस योजना को साल 2016 में शुरू की थी, तबसे लेकर यह योजना बेटियों के अकाउंट में जन्‍म से लेकर 12वीं क्‍लास पास करने तक 50 हजार रुपये अकाउंट में भेजती है. यह राशि सीधे बेटियों के अकाउंट में भेजी जाती है, जो 6 अलग-अलग किस्‍त में जारी होती है.  कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ?  इस योजना का लाभ केवल राजस्थान के स्थायी निवासियों को ही दिया जाएगा. बच्‍ची का जन्‍म 1 जून 2016 के बाद हुआ होना चाहिए और जन्‍म किसी रस्टि हॉस्पिटल या स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में होना जरूरी है. अगर इस कैटेगरी में आप आते हैं तो इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.  कौन-कौन से दस्‍तावेज जरूरी?      बच्ची का जन्म प्रमाण पत्र     आधार कार्ड या भामाशाह कार्ड     मातृ और शिशु स्वास्थ्य कार्ड     स्कूल में प्रवेश का प्रमाण पत्र अगर आप इस योजना के तहत अप्‍लाई कराना चाहते हैं तो ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. साल ही आप महिला और बाल विकास कार्यालय में जाकर भी अप्‍लाई कर सकते हैं.  किस्‍त में कैसे मिलेगी ये राशि?  जन्म के समय पहली किस्त में 2,500 रुपये दिया जाएगा. फिर 1 साल की उम्र होने और टीकाकरण पूरा होने के कारण दूसरी किस्‍त में 2500 रुपये, स्‍कूल में एडमिशन पर तीसरी किस्त 4000 रुपये, क्‍लास 6 में जाने के बाद चौथी किस्त 5000 रुपये की दी जाएगी. अगर बेटी का दाखिला क्‍लास 10th में होता है तो पांचवीं किस्त भेजी जाएगी, जो 11000 रुपये की होगी. इसके बाद 12वीं क्‍लास पास होने पर आखिरी किस्‍त दी जाएगी, जो 25000 रुपये की होगी. 

बंगाली मजदूरों पर कथित उत्पीड़न को लेकर ममता बनर्जी का केंद्र और भाजपा शासित राज्यों पर तीखा हमला

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के साथ हो रहे कथित अत्याचारों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाली बोलने वाले प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों पर हो रहे हमलों और परेशानियों की वह निंदा करती हैं। साथ ही, ममता सरकार दबे-कुचले, डरे-सहमे और परेशान बंगाली भाषी प्रवासी परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सीएम ममता बनर्जी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "हम भाजपा शासित हर राज्य में बंगाली बोलने वाले लोगों पर हुए क्रूर अत्याचार और परेशानी की कड़ी निंदा करते हैं। हम दबे-कुचले, डरे-सहमे और परेशान बंगाली बोलने वाले प्रवासी परिवारों के साथ खड़े हैं, हम उन परिवारों को हर मुमकिन मदद देंगे।  इंसान की जान की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन अगर मौत होती है, तो हमने पैसे का मुआवजा देने का वादा किया है।" ओडिशा में हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में भाजपा शासित राज्य ओडिशा में जंगीपुर इलाके के कुछ प्रवासी मजदूरों पर कई तरह के अत्याचार हुए हैं। यह बहुत दुख की बात है कि 24 दिसंबर को जंगीपुर के सुती इलाके के एक युवा प्रवासी मजदूर की संबलपुर में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मुर्शिदाबाद में प्रवासी मजदूर डर के मारे ओडिशा से घर लौट रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना में, हम पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं, और मृतक के परिवार को हमारी तरफ से आर्थिक मदद भी उन तक पहुंचेगी। सीएम ममता ने एक्स पोस्ट में आगे लिखा, "भाजपा शासित राज्यों में हुई इन सभी घटनाओं में हम दोषियों की निंदा करते हैं और पीड़ितों को हर मुमकिन मदद का वादा करते हैं। बंगाली बोलना कोई जुर्म नहीं हो सकता।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने ज्वेल राणा की मौत के मामले में सुती पुलिस स्टेशन में पहले ही जीरो FIR दर्ज कर ली है और 6 लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। मेरी राज्य पुलिस टीम जांच के लिए ओडिशा गई है।