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विदेशी कामगारों के लिए जापान का नया फैसला: ट्रेनिंग सिस्टम को अलविदा, नई नीति होगी लागू

जापान  जापान अपनी विदेशी श्रमिक नीति में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। सरकार ने घोषणा की है कि वित्त वर्ष 2027 से शुरू होने वाले नए “एम्प्लॉयमेंट फॉर स्किल डेवलपमेंट” कार्यक्रम के तहत पहले दो वर्षों में अधिकतम 4,26,000 विदेशी कामगारों को ही अनुमति दी जाएगी। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब जापान को श्रम की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन देश में बढ़ते प्रवास को लेकर सार्वजनिक चिंता भी बढ़ रही है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची के निर्देश पर सरकार विदेशी कामगारों की नीतियों की समीक्षा कर रही है। इसमें वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद रुकने वालों पर सख्ती और निगरानी बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। जापान में लंबे समय से लागू टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम को समाप्त करने का फैसला लिया गया है। इस योजना पर सस्ते श्रम के शोषण और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। इसकी जगह अब नया स्किल-आधारित ढांचा लाया जाएगा, जिसमें विदेशी कामगारों को तीन साल बाद स्पेसिफाइड स्किल्ड वर्कर (SSW) दर्जे में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।   सरकारी मसौदे के मुताबिक, मार्च 2029 तक जापान लगभग 8.05 लाख विदेशी कामगारों को स्पेसिफाइड स्किल्ड वर्कर योजना के तहत स्वीकार करेगा। यह संख्या मार्च 2024 में तय 8.20 लाख के लक्ष्य से थोड़ी कम है। सरकार का कहना है कि डिजिटल तकनीक और उत्पादकता बढ़ाकर इस कमी की भरपाई की जा सकती है।नई व्यवस्था के तहत कृषि और निर्माण सहित 17 सेक्टरों को शामिल किया जाएगा। फिलहाल जापान में लगभग 3.33 लाख SSW-I वीज़ाधारी और 4.49 लाख तकनीकी प्रशिक्षु काम कर रहे हैं। कैबिनेट से इस योजना को जनवरी में अंतिम मंजूरी मिलने की संभावना है।

ड्राई स्टेट गुजरात में बड़ा फैसला: सरकार ने बदली शराब नीति, इस शहर में मिलेगी छूट

अहमदाबाद गुजरात सरकार ने गिफ्ट सिटी में शराब सेवन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किया है। अब गुजरात या भारत के बाहर से आने वाले गैर-निवासियों को शराब पीने के लिए किसी तरह की परमिट लेने की जरूरत नहीं होगी। इसका मतलब गुजरात या देश के बाहर से आने वाले लोग केवल फोटो आईडी दिखाकर चिन्हित होटल और रेस्टोरेंट में शराब पी सकेंगे। यह फैसला 20 दिसंबर को जारी राज्य गृह विभाग की अधिसूचना के जरिए लागू हो गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब “एक्सटर्नल पर्सन” यानी गुजरात के बाहर के व्यक्ति या विदेशी नागरिक, गिफ्ट सिटी में शराब सेवन कर सकेंगे। पहले ऐसे लोगों को अस्थायी परमिट लेना अनिवार्य था, जिसे अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नए नियमों के तहत केवल फोटो आईडी दिखाना पर्याप्त होगा। यह सुविधा सिर्फ गिफ्ट सिटी के निर्धारित परिसरों तक सीमित रहेगी। सामान्य गुजरात क्षेत्र में शराबबंदी के नियम यथावत रहेंगे। सरकार के इस फैसले को गिफ्ट सिटी की वैश्विक छवि मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विदेशी कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और बाहरी निवेशकों के लिए यह सुविधा व्यावसायिक सहूलियत बढ़ाएगी। इससे गिफ्ट सिटी को दुबई और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों के जैसी प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी। हालांकि नियमों का दायरा सीमित रखा गया है ताकि राज्य की शराबबंदी नीति पर कोई असर न पड़े। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल गिफ्ट सिटी तक ही लागू रहेगी। गुजरात में शराबबंदी बता दें कि गुजरात एक ड्राई स्टेट है, जहां शराब का निर्माण, बिक्री और सेवन प्रतिबंधित है। हालांकि साल 2023 में राज्य सरकार ने गिफ्ट सिटी को विशेष छूट दी थी। इस छूट के तहत सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में सीमित शर्तों के साथ शराब की बिक्री और सेवन की अनुमति दी गई थी। अब नए संशोधन के बाद नियमों को और सरल कर दिया गया है।

न्यूजीलैंड से कीवी की सस्ती आपूर्ति, भारत में 50 रुपये में मिलेगा अब स्वादिष्ट फल

 नई दिल्‍ली अमेर‍िका ने जबसे टैरिफ को लेकर भारत से ट्रेड डील पर पेंच फंसाया, तबसे भारत की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है. भारत एक के बाद एक देशों के साथ लगातार डील कर रहा है, वह भी फ्री ट्रेड डील (FTA). ताकि भारतीय प्रोडक्‍ट्स की डिमांड अमेरिका के अलावा अन्‍य देशों में भी बढ़े और अमेरिका के टैरिफ का भी खास असर न हो.  FTA  डील को लेकर सरकार का मकसद भारतीय एक्‍सपोर्ट को नई ऊंचाई पर ले जाना है. हाल ही में भारत ने यूके, ओमान और अब न्‍यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड डील की है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत आने वाले विदेशों से समान सस्‍ते होंगे और यहां से जाने वाले प्रोडक्ट के रेट कम होंगे, जिससे दोनों देशों को संतुलित व्‍यापार अवसर मिलेगा.  भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच डील से कीवी फल को लेकर खूब चर्चा हो रही है कि इसका आयात भारत में बढ़ सकता है, क्‍योंकि एफटीए डील के बाद इसके रेट कम हो सकते हैं. अभी भारत में एक कीवी का एवरेज प्राइस 50 रुपये या उससे ज्‍यादा है. इसके दाम पर कितना असर पड़ेगा? ये जानने से पहले कीवी के भारत में इम्‍पोर्ट और उसपर ड्यूटी के गणित को समझना जरूरी है.  न्‍यूजीलैंड से कितना कीवी भारत आता है?  न्यूजीलैंड कीवी का बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन भारत सिर्फ 5 फीसदी ही कीवी न्‍यूजलैंड से आयात करता है. 2023 में भारत ने कुल लगभग 55,000 टन कीवी आयात किया था. इसमें न्‍यूजीलैंड से करीब 2,700 टन कीवी न्यूजीलैंड से आया था. हालांकि अब न्‍यूजीलैंड से एफटीए होने के कारण इसपर लगने वाला टैक्‍स कम हो जाएगा. भारत भी बड़े मात्रा में न्‍यूजीलैंड से कीवी आयात कर सकता है, क्‍योंकि इम्‍पोर्ट टैक्‍स हटने से न्‍यूजीलैंड से कीवी अन्‍य देशों की तुलना में सस्‍ते दरों पर मिलेंगे.  न्‍यूजीलैंड की कीवी पर कितना टैक्‍स?  भारत न्‍यूजीलैंड से बहुत सी चीजें आयात करता है, जिसमें फल (कीवी), ऊन, लकड़ी, ड्राई फ्रूट और अन्य कृषि प्रोडक्‍ट्स शामिल हैं. अब एफटीए डील के बाद इन चीजों में से ज्‍यादातर प्रोडक्‍ट्स पर टैक्‍स घटकर 0 कर दिया जाएगा. कीवी पर अभी 33 फीसदी इम्‍पोर्ट टैक्‍स लगता है, लेकिन एफटीए डील के बाद यह 0% हो जाएगा.   कितने कम हो जाएंगे न्‍यूजीलैंड वाले कीवी?  FTA के तहत पहले 6,250 टन कीवी पर ड्यूटी फ्री रखा गया है. अगले कुछ सालों में यह कोटा बढ़ाकर 15,000 टन तक करना है, लेकिन अगर कोटा से भी बाहर आयात हुआ तो थोड़ा टैक्‍स ही लगेगा यानी पहले से कम टैक्‍स लगेगा.  इसका मतलब है कि इम्‍पोर्ट टैक्‍स कम होने कीवी की थोक कीमत घट जाएगी. जिस कारण रिटेल प्राइस में भी कमी आएगी.  कीमत में ठीक भाव लगाना मुश्किल है, लेकिन कीमत में कितनी कमी आएगी यह कई चीजों पर निर्भर करेगा. इसमें पहला तो यह देखना होगा कि न्‍यूजीलैंड से कितना कीवी आता है, फिर लॉजिस्टिक कॉस्‍ट और फ्रेट कॉस्‍ट कितनी पड़ती है. इसके बाद स्‍थानीय मंडी भाव और इम्‍पोर्ट डिमांड जैसी चीजें इसके दाम को तय करेंगे. लेकिन कुछ इकोनॉमिस्‍ट के हिसाब से टैक्‍स के बराबर कटौती आ सकती है यानी न्‍यूजीलैंड वाले कीवी पर रेट 20 से 30 फीसदी तक कम हो सकती है. 

बांग्लादेश में पुलिस की चुप्पी पर सवाल, अधिकारी बोले- हस्तक्षेप से हो सकती थी गोलीबारी

ढाका  बांग्लादेश में भीड़तंत्र काम कर रहा है जहां पुलिस स्थिति को संभालने में नाकाम दिख रही है. इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा से भारी नुकसान हुआ है. बीते गुरुवार को दंगाइयों ने बांग्लादेश के दो प्रमुख अखबारों के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया. पुलिस वहां खड़ी देखती रही लेकिन दंगाइयों को रोकने की कोशिश नहीं की. अब ढाका महानगर पुलिस (DMP) के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम एंड ऑपरेशन्स) एसएन एमडी नजरुल इस्लाम ने कहा है कि भीड़ हिंसा के खिलाफ पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई इसलिए नहीं की, क्योंकि पुलिसकर्मियों के निशाना बनने का डर था. उन्होंने बताया कि करवान बाजार में 'प्रथम आलो' और 'द डेली स्टार' के दफ्तरों पर हुए हमलों, तोड़फोड़ और आगजनी के दौरान अगर पुलिस हस्तक्षेप करती तो गोलीबारी हो सकती थी, जिससे दो से चार लोगों की मौत भी हो सकती थी. एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने क्या कहा? जब उनसे पूछा गया कि क्या DMP प्रथम आलो, द डेली स्टार और उदिची पर हुए हमलों को रोकने में सक्षम थी, तो नजरुल इस्लाम ने कहा, 'हम सक्षम हैं. यह नहीं कि हम हर घटना को रोक सकते हैं. पिछले अनुभवों के आधार पर, जब जनभावना भड़क जाती है तो राज्य अधिकतम संसाधनों का इस्तेमाल करता है. करवान बाजार की घटना वाले दिन अगर हम हस्तक्षेप करते, तो गोलीबारी हो सकती थी और संभवतः दो से चार लोगों की जान जा सकती थी, इसके बाद पुलिस पर भी हमले होते.' उन्होंने आगे कहा, 'उस दिन दो-चार पुलिसवाले मारे जाते… आप जानते हैं कि पुलिस बल एक साल पहले ही एक बड़े आघात से गुजरा है और हम फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव आने वाले हैं. अगर पुलिस बल में फिर कोई हताहत होता, तो मैं इस बल के साथ आगे नहीं बढ़ पाता. इसी कारण हम वहां कार्रवाई में नहीं जा सके. किसी भी मानव जीवन की हानि नहीं हुई. इतनी बड़ी घटना में भी जान-माल का नुकसान न होना, मैं इसे हमारी उपलब्धि मानता हूं.'   

हिंदुओं पर हमलों के विरोध में उबाल: दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के सामने गूंजे राम-कृष्ण के नारे

नई दिल्ली बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की कथित तौर पर भीड़ द्वारा हत्या किए जाने के बाद नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर शुक्रवार को भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों और धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कई जगह पुलिस से झड़प की खबरें भी सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने “भारत माता की जय”, “यूनुस सरकार होश में आओ” और “हिंदू हत्या बंद करो” जैसे नारे लगाए। आक्रोशित भीड़ ने सुरक्षा बैरिकेड्स को धक्का दिया, जिससे कम से कम दो परतों के बैरिकेड टूट गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस का पुतला भी फूंका। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “अगर आज हम आवाज़ नहीं उठाएंगे तो कल हर कोई दीपू बन जाएगा।” दरअसल, बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के बालुका इलाके में 18 दिसंबर को 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। आरोप है कि हत्या के बाद उसके शव को आग के हवाले कर दिया गया। बताया गया कि घटना कथित ईशनिंदा के आरोप से जुड़ी थी। इस घटना ने भारत समेत कई देशों में आक्रोश पैदा किया है। बांग्लादेश पुलिस ने इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों को पहले से ही हाई अलर्ट पर रखा गया था। हाई कमीशन के बाहर तीन स्तरों की बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया और बाद में दोबारा बैरिकेडिंग बहाल की। प्रोटेस्ट के दौरान एक शख्स बिलखते हुए कहता है- ये देश राम का है। ये देश कृष्ण का है। हम किसी को नहीं मारते, लेकिन हमारी बहन बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। इधर, बांग्लादेश ने भारत में अपने राजनयिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। बांग्लादेश ने नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में हुई घटनाओं के बाद भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया। बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने कहा कि राजनयिक परिसरों के खिलाफ हिंसा और धमकी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन है। वहीं भारत ने सुरक्षा में चूक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नई दिल्ली में हुआ प्रदर्शन अल्पकालिक था और किसी तरह का खतरा नहीं था।  

शादी की खुशियाँ मातम में बदलीं: DJ बजाने से रोका गया, दूल्हे ने उठाया खौफनाक कदम

नूंह  दिल्ली के पास नूंह के एक गांव में रविवार को शादी वाले दिन सुबह दर्दनाक घटना हो गई। बारात रवाना होने से पहले दूल्हे ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। डीजे बजाने को लेकर हुई कहासुनी को घटना से जोड़ा जा रहा है। सरपंच परिवार के सदस्य फतेला ने बताया कि एक युवक की रविवार को शादी थी। शनिवार को वह शादी की तैयारी के तहत डीजे लेकर आया था, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इसे सामाजिक बुराई बताते हुए बजाने से मना कर दिया। काफी बातचीत के बाद ग्रामीणों ने एक घंटे के लिए डीजे बजाने की अनुमति दे दी थी। तय समय के अनुसार डीजे बजा और इसके बाद दूल्हे को मेहंदी भी लगाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि युवक डीजे अधिक देर तक बजवाना चाहता था, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद रात में किसी तरह का कोई विवाद सामने नहीं आया। बिजली के खंभे पर लटका मिला शव रविवार सुबह दूल्हा जल्दी घर से निकल गया। कुछ समय बाद गांव के बाहर बिजली के खंभे से लटकता उसका शव मिलने की सूचना मिली। बताया गया कि उसने बिजली की लाइन वाले खंभे पर फंदा लगाकर आत्महत्या की। परिवार को किसी पर संदेह नहीं सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। सरपंच परिवार के सदस्य फतेला ने बताया कि परिवार को किसी व्यक्ति पर कोई संदेह नहीं है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।  

दीपू चंद्र दास की हत्या पर उठा वैश्विक सवाल, UN तक गूंजा बांग्लादेश की हिंसा का मुद्दा

ढाका  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बांग्लादेश में एक हिंदू व्यक्ति की हत्या और हिंसा की अन्य घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है। महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सोमवार को दैनिक प्रेस वार्ता में कहा, 'हां, बांग्लादेश में हमने जो हिंसा देखी है उससे हम बहुत चिंतित हैं।' वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों, विशेष रूप से पिछले कुछ दिनों में हिंदुओं की पीट-पीट कर की गई हत्याओं की घटनाओं पर महासचिव की प्रतिक्रिया से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।   उन्होंने कहा, 'चाहे बांग्लादेश हो या कोई अन्य देश, इस बात की जरूरत है कि ऐसे लोग जो 'बहुसंख्यक' वर्ग से बाहर हैं वे सुरक्षित महसूस करें और सभी बांग्लादेशी सुरक्षित महसूस करें। हमें विश्वास है कि सरकार प्रत्येक बांग्लादेशी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।' पिछले सप्ताह बलुका में ईशनिंदा के आरोप में कपड़ा कारखाने में काम करने वाले श्रमिक दीपू चंद्र दास (25) की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी और उसके शव को आग लगा दी। दास की हत्या के सिलसिले में रविवार को दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। समाचारपत्र ‘डेली स्टार’ ने पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के सूत्रों के हवाले से बताया कि इन गिरफ्तारियों के साथ अब तक हत्या में कथित संलिप्तता के आरोप में 12 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि वह बांग्लादेश में पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों के नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या से बेहद चिंतित हैं। हादी को कुछ दिन पूर्व बदमाशों ने गोली मार दी थी जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और बाद में उनकी मौत हो गई थी। टर्क ने शांति बनाए रखने और सभी से हिंसा से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा, 'प्रतिशोध केवल विभाजन को गहरा करेंगे और सभी के अधिकारों को कमजोर करेंगे।' उन्होंने कहा, 'मैं अधिकारियों से आग्रह करता हूं कि वे हादी की मौत का कारण बने हमले की शीघ्र, निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी तरीके से जांच करें और घटना के जिम्मेदार लोगों के लिए उचित प्रक्रिया और जवाबदेही सुनिश्चित करें।' देश में फरवरी में संसदीय चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में टर्क ने कहा कि एक ऐसा वातावरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है जिसमें सभी व्यक्ति शांतिपूर्ण ढंग से भाग ले सकें और स्वतंत्र रूप से मतदान कर सकें। टर्क ने कहा, 'मैं अधिकारियों से आग्रह करता हूं कि वे इस नाजुक समय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और पत्रकारों की सुरक्षा के अधिकारों को बरकरार रखें और किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकें।'  

उदित राज का मोहन भागवत पर कटाक्ष: जुबान पर कुछ और, दिल में कुछ और

नई दिल्ली हिंदू राष्ट्र वाले बयान को लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है और भागवत में दम है, तो ऐसा करके दिखाएं। उन्होंने संघ प्रमुख के बयान को संविधान विरोधी बताया है। साथ ही पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को भारतीय जनता पार्टी की बी टीम होने का दावा किया है। बातचीत में उन्होंने कहा, 'कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है, गलत बात है। और मोहन भागवत की हिम्मत है तो कर दिखाएं। मालूम है कि इनके दिल में कुछ और है जुबान पर कुछ और है। अंत में जुबान पर बात ही गई। अभी तक अगल बगल से कहलवाते रहे…। अब खुद मोहन भागवत जी कह दिए हैं। यह बहुत आपत्तिजनक है, गलत बात है, संविधान विरोधी बात है, राष्ट्र विरोधी बात है।' हुमायूं कबीर पर भागवत की टिप्पणी को लेकर राज ने कहा, 'हुमायूं कबीर और बीजेपी मिली हुई है, मोहन भागवत जी मिले हुए हैं। इसलिए मिले हुए हैं क्योंकि दोनों की विन विन सिच्युएशन होगी। इनको पैसा मिल जाएगा, शोहरत मिल जाएगी और ये हिंदू मुसलमान कर चुनाव जीत जाएंगे। तमाम सारी बी टीम पैदा कर दी हैं। इनकी ही बी टीम है। क्या जरूरत है चर्चा करने की। हुमायूं कबीर क्या है पता ही नहीं लगेगा। हमारे देश की मीडिया क्यों इसे तरजीह दे रही है…।' भागवत का बयान रविवार को एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा था, 'सूर्य का पूर्व से उदय होता है। हम नहीं जानते कि ऐसा कब से हो रहा है। तो क्या हमें उसके लिए भी संविधान की मंजूरी लेनी पड़ेगी। हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। जो भी भारत को अपनी मां मानता है, वो भारतीय संस्कृति की तारीफ करता है, जब तक हिन्दुस्तान की धरती पर एक भी व्यक्ति जिंदा है जो पूर्वजों को गौरव को मानता है और उसका सम्मान करता है, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र है। यह संघ की विचारधारा है।' उन्होंने कहा, 'अगर संसद कभी संविधान संशोधन का फैसला करती है और शब्द को जोड़ती है। अगर ऐसा होता है या नहीं होता है, तो भी ठीक है। हम शब्द की चिंता नहीं करते, क्योंकि हम हिंदू हैं और हमारा देश हिंदू राष्ट्र है। यह सच है जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है।'

सर्दियों की छुट्टियों का शेड्यूल जारी, राज्यों के स्कूलों में छुट्टियों की लिस्ट देखें

नई दिल्ली कड़कती ठंड की शुरुआत के साथ ही बच्चों को स्कूल भेजना किसी बड़े टास्क से कम नहीं होता है. उत्तर भारत में तो सर्दी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू भी कर दिया है. तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है. दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. बढ़ते AQI से खतरा मंडरा रहा है और सर्द हवाएं भी घर से निकलना मुश्किल कर रही हैं. ऐसे में बच्चों समेत अभिभावक और शिक्षकों को स्कूल की छुट्टी का इंतजार है जो बस अब खत्म होने जा रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों में स्कूल की छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है. आइए लिस्ट के जरिए जानते हैं कि किस राज्य में कब से सर्दियों की छुट्टियां होंगी? सर्दियों की छुट्टी से सिर्फ छात्रों की मौज नहीं सर्दियों की छुट्टी का मतलब ये नहीं है कि सिर्फ स्कूल के बच्चों के लिए है बल्कि अभिभावक और शिक्षकों के लिए भी एक ब्रेक टाइम होता है. बच्चों के साथ समय बिताने के लिए माता-पिता को भी टाइम मिलता है और हॉलिडे ट्रिप प्लान कर सकते हैं. जबकि, शिक्षकों के लिए भी एक रेस्ट टाइम होता है जो सर्दियों की छुट्टी में अपना समय आराम के साथ गुजार सकते हैं. भारत में कब से है स्कूलों में सर्दियों की छुट्टी? आमतौर पर हर साल दिसंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर जनवरी के पहले या दूसरे सप्ताह तक सर्दियों की छुट्टी रहती है. लगभग 10 से 15 दिनों के लिए स्कूलों को बंद किया जाता है. सर्दियों से बच्चों की सुरक्षा के लिए उत्तरी भारत में स्कूलों की छुट्टी का लगभग सभी राज्यों द्वारा ऐलान कर दिया गया है. राज्यवार सर्दियों की छुट्टियों की तारीखों की लिस्ट उत्तर प्रदेश:– 20 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक पंजाब:- 22 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक मध्य प्रदेश:- 23 दिसंबर 2025 से छुट्टियों की आखिरी तारीख हर जिले में तारीख अलग-अलग हो सकती है. ओडिशा:- 23 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक हिमाचल प्रदेश:- 31 दिसंबर 2025 से छुट्टियों की आखिरी तारीख सभी जिलों में अलग-अलग हो सकती है. दिल्ली:– 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 तक हरियाणा:- 1 जनवरी से 15 जनवरी 2026 तक जम्मू-कश्मीर:- 22 दिसंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक देश के सभी केंद्रीय विद्यालयों में सर्दियों की छुट्टियां 23 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक रहेगी। स्कूलों में सर्दियों की लास्ट डेट के कंफर्मेशन के लिए स्कूल प्रशासन से भी संपर्क कर सकते हैं. 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग से कितना होगा वेतन बढ़ोतरी, जानें पूरी टाइमलाइन

नई दिल्ली साल 2025 खत्म होने वाला है और नए साल (New Year 2026) का आगाज होने जा रहा है. नए साल का इंतजार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेसब्री से है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने वाला है. इसके बाद कर्मचारियों को जबर्दस्त सैलरी हाइक (Salary Hike) मिलेगी, इसे लेकर तमाम एक्सपर्ट्स अपने अनुमान जाहिर कर रहे हैं. वहीं बढ़ा हुआ पैसे कर्मचारियों के बैंक अकाउंट (Bank Account) तक कब पहुंचेगा, इसके बारे में संकेत पहले लागू हुए वेतन आयोगों को देखकर लगाया जा सकता है.   8वां वेतन लागू होते ही मिलेगा बढ़ा हुआ पैसा?  8th Pay Commission ने वेतन वृद्धि के संकेत दे दिए हैं. सवाल उठता है कि बढ़ा हुआ वेतन और बकाया राशि क्या इसके लागू होने के तुरंत बाद खाते में पहुंच जाएगी. इसके जबाव के लिए इतिहास पर नजर डालें, तो संशोधित वेतन और बकाया राशि वास्तव में कर्मचारियों तक पहुंचने में समय लगता है. 7th Pay Commission 31 दिसंबर 2025 को औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा और इसके साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग का आगाज होगा.  हालांकि अगले वेतन संशोधन के बारे में तो तमाम अनुमान आ रहे हैं, लेकिन इसकी डेडलाइन और वास्तविक भुगतान पर स्पष्टता अभी बाकी है. पूर्व की परंपरा को देखें तो अगर 1 जनवरी 2026 को कागजों पर नया सैलरी स्ट्रक्चर प्रभावी हो सकता है, लेकिन एक्सपर्ट कह रहे हैं कि वास्तविक वेतन संशोधन और बकाया राशि मिलने में समय लग सकता है, पहले के वेतन आयोगों की तरह कर्मचारियों को प्रतीक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए. यानी यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि बढ़ी हुई सैलरी तुरंत उनके बैंक खातों में दिखाई देगी.  एक्सपर्ट ने साफ की तस्वीर  इस साल अक्टूबर 2025 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8th Pay Commission के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दी थी. इस आयोग को नवंबर 2025 से लगभग 18 महीने का समय दिया गया है, ताकि वह वेतन, भत्ते और पेंशन पर वो अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कर सके. कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशंस के एमडी प्रतीक वैद्य का कहना है कि आधिकारिक प्रभावी तिथि और वास्तविक भुगतान के बीच आमतौर पर अंतर होता है. वैद्य के मुताबिक,कागज़ पर 8th CPC को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी वेतन संशोधन का कार्य सौंपा गया है. लेकिन, पिछले अनुभव से पता चलता है कि प्रभावी तिथि और बैंक खातों में पहला बढ़ा हुआ वेतन आने के बीच आमतौर पर एक अंतराल होता है. उन्होंने 7वें वेतन आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि ये वेतन संशोधन जनवरी 2016 से लागू हो गया था, लेकिन कैबिनेट की मंजूरी उसी वर्ष जून में मिली थी और बकाया राशि का भुगतान बाद के महीनों में किया गया था. कितना हो सकता है Salary Hike?  अब बात करते हैं कि 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, अभी तक इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन इसे लेकर कई शुरुआती अनुमान जारी किए जा चुके हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पिछले वेतन आयोगों और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर ये सभी अनुमान लगाए जा रहे हैं. 6वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद औसत वेतन में करीब 40% की बढ़ोतरी हुई थी. वहीं सातवें वेतन आयोग ने 2.57 के फिटमेंट फैक्टर के आधार पर लगभग 23-25% की वृद्धि की थी. 8वें वेतन आयोग के लिए प्रारंभिक अनुमानों से पता चलता है कि वेतन में 20% से 35% तक का इजाफा देखने को मिल सकता है. सैलरी तय करने में अहम माना जाने वाले Fitment Factor 2.4 और 3.0 के बीच रहने की उम्मीद है. इससे खासतौर पर न्यूनतम और एंट्री लेवल पर सैलरी में अधिक वृद्धि हो सकती है. हालांकि, एक्सपर्ट इस बात पर जोर देते हैं कि ये सिर्फ अनुमान ही हैं, गारंटी नहीं. वैद्य ने कहा सैलरी में इजाफे का अंतिम आंकड़ा अगले 12-18 महीनों में महंगा, 16वें वित्त आयोग के बाद राजकोषीय गुंजाइश और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा.