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रेलवे का तोहफा: 8 राज्यों के लिए 2 सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेनें शुरू, जानें रूट, स्टॉपेज और टाइमिंग

वडोदरा रेल यात्रियों के लिए गुड न्यूज है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए दो जोड़ी सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इन ट्रेनों से एक दो नहीं बल्कि गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों के यात्रियों का सफर और आसान हो जाएगा। इनके लिए आज से बुकिंग भी शुरू हो गई है।   पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) विनीत अभिषेक ने बताया कि यात्रियों की सुविधा तथा उनकी बढ़ती यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से मुंबई सेंट्रल – नई दिल्ली और बांद्रा टर्मिनस – अमृतसर स्टेशनों के बीच विशेष किराये पर दो सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। सीपीआरओ द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रेन संख्या 04001/04002 मुंबई सेंट्रल – नई दिल्ली सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन 8 फेरे लगाएगी। ट्रेन संख्या 04001 मुंबई सेंट्रल – नई दिल्ली सुपरफास्ट विशेष मुंबई सेंट्रल से रात में 11.30 बजे प्रस्थान करेगी तथा अगले दिन रात 08.50 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। यह ट्रेन 21, 24, 27 और 30 दिसंबर को चलेगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 04002 नई दिल्ली – मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट स्पेशल नई दिल्ली से रात 10.40 बजे प्रस्थान करेगी तथा अगले दिन रात 09.00 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी। यह ट्रेन 20, 23, 26 और 29 दिसंबर को चलेगी। ट्रेन इन स्टेशनों पर रुकेगी यह ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरीवली, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी एवं मथुरा स्टेशनों पर ठहरेगी। इस ट्रेन में फर्स्ट एसी, एसी-2 टियर, एसी-3 टियर, एसी-3 टियर (इकोनॉमी), स्लीपर क्लास एवं जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे। ट्रेन संख्या 04695/04696 बांद्रा टर्मिनस – अमृतसर सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन 4 फेरे लगाएगी। ट्रेन संख्या 04695 बांद्रा टर्मिनस – अमृतसर सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से दोपहर 02.00 बजे चलेगी तथा अगले दिन रात 08.30 बजे अमृतसर पहुंचेगी। यह ट्रेन 24 और 28 दिसंबर को चलेगी। इसी प्रकार ट्रेन संख्या 04696 अमृतसर – बांद्रा टर्मिनस सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन अमृतसर से सुबह 04.20 बजे चलेगी तथा अगले दिन सुबह 11.00 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन 23 और 27 दिसंबर 2025 को चलेगी। इन स्टेशनों पर होंगे स्टॉप यह ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरीवली, वापी, वलसाड, सूरत, भरूच, वडोदरा, गोधरा, दाहोद, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, मथुरा, दिल्ली सफदरजंग, पानीपत, अंबाला कैंट, लुधियाना, जालंधर सिटी एवं ब्यास स्टेशनों पर ठहरेगी। इस ट्रेन में फर्स्ट एसी, एसी-2 टियर, एसी-3 टियर, स्लीपर क्लास एवं जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे। ट्रेन संख्या 04001और 04695 की बुकिंग 20 दिसंबर से सभी पीआरएस काउंटरों एवं आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर शुरू हो गई है।  

ईडी केस से मिली राहत, अगस्ता वेस्टलैंड मामले में क्रिश्चियन मिशेल होंगे रिहा

नई दिल्ली अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मनी लॉन्ड्रिंग केस में उसकी रिहाई का आदेश दे दिया है। हालांकि, राहत के बावजूद क्रिश्चियन मिशेल फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएगा, क्योंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जुड़े मामले में अभी उसकी रिहाई का कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में उसे जेल में ही रहना होगा। कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्रिश्चियन मिशेल के वकील ने दलील दी कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभी तक ट्रायल पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद आरोपी लगभग 7 साल से हिरासत में है, जो इस मामले में संभावित अधिकतम सजा के बराबर है। गौरतलब है कि इससे पहले क्रिश्चियन मिशेल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। वहीं, सीबीआई केस में उसे सुप्रीम कोर्ट से भी जमानत दी गई थी, लेकिन उसके पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो जाने और जमानत की शर्तों के तहत जरूरी श्योरिटी न मिल पाने के कारण वह अब तक जेल से बाहर नहीं निकल सका था। इससे पहले 8 अगस्त को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने क्रिश्चियन मिशेल को बड़ा झटका दिया था। उस समय कोर्ट ने उसकी उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने जेल से रिहाई के निर्देश देने की मांग की थी। अदालत ने कहा था कि आरोपी पर आईपीसी की धारा 467 के तहत गंभीर आरोप हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि उसने अधिकतम सजा की अवधि पहले ही पूरी कर ली है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि धारा 467 लागू होती है या नहीं, यह फैसला आरोप तय होने के दौरान किया जाएगा। तब तक आरोपी को रिहा नहीं किया जा सकता। क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को 5 दिसंबर 2018 को संयुक्त अरब अमीरात से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। भारत पहुंचते ही सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया और इसके कुछ दिन बाद ईडी ने भी उसे हिरासत में ले लिया। तब से वह जेल में बंद है।

कोर्ट सख्त: नियम तोड़ने वाले राजस्थान के 10 डेंटल कॉलेजों को ₹10-10 करोड़ भरने का आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बीडीएस (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) में दाखिले के नियमों का उल्लंघन करने पर राजस्थान के 10 निजी डेंटल कॉलेजों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इन सभी कॉलेजों पर 10-10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि इन कॉलेजों ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की, जिससे मेडिकल शिक्षा के मानकों को नुकसान पहुंचा। न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई और न्यायमूर्ति जेके महेश्वरी की पीठ ने कॉलेजों के साथ-साथ राज्य सरकार की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने बीडीएस दाखिले (शैक्षणिक सत्र 2016-17) में कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने पर राजस्थान सरकार को 10 लाख रुपये राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (आरएसएलएसए) में जमा करने का आदेश दिया। क्या था मामला? बीडीएस में दाखिले के लिए एनईईटी परीक्षा में न्यूनतम प्रतिशत तय है। राजस्थान सरकार ने बिना अधिकार के इस न्यूनतम प्रतिशत में पहले 10 प्रतिशत और फिर पांच प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दे दी। इस छूट के कारण कई ऐसे छात्रों को दाखिला मिल गया, जो तय पात्रता पूरी नहीं करते थे। इतना ही नहीं, कुछ कॉलेजों ने इस 10+5 प्रतिशत की छूट से भी आगे जाकर छात्रों को दाखिला दे दिया, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ था। छात्रों को राहत, कॉलेजों पर सख्ती सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर 2016-17 में दाखिला पाए छात्रों को राहत दी। अदालत ने अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उनकी बीडीएस डिग्री को वैध (रेग्युलराइज) कर दिया। हालांकि, जिन छात्रों को राहत मिली है, उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे राजस्थान हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंऔर राज्य में आपदा, महामारी या किसी आपात स्थिति में निःशुल्क सेवा देने के लिए तैयार रहें। जुर्माने की रकम कहां जाएगी? सभी कॉलेजों को जुर्माने की राशि आठ सप्ताह के भीतर आरएसएलएसए में जमा करनी होगी। यह पैसा वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, वृद्धाश्रम और बाल देखभाल संस्थानों जैसे सामाजिक कल्याण के कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।

यात्रियों को राहत: इंडिगो 26 दिसंबर से जारी करेगा ₹10,000 का ट्रैवल वाउचर, रद्द उड़ानों का मुआवजा

नई दिल्ली भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस महीने की शुरुआत में बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को अगले हफ्ते से 10,000 रुपए का ट्रैवल वाउचर जारी करना शुरू करेगा। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बजट एयरलाइन इंडिगो 26 दिसंबर से इस महीने की 3,4 और 5 तारीख को रद्द हुई उड़ानों से प्रभावित यात्रियों को 10,000 रुपए की वैल्यू का ट्रैवल वाउचर जारी करेगा। यह वाउचर प्रभावित यात्रियों को सरकारी नियमों के अनुसार दिए जाने वाले 5,000 रुपए से 10,000 रुपए तक के मुआवजे के अतिरिक्त होगा। सरकार ने इंडिगो को सख्ती के साथ कहा है कि वह इस बात को बिना पुख्ता करें कि सभी पात्र यात्रियों तक भुगतान बिना किसी देरी के पहुंचे। इंडिगो को ट्रैवल एजेंटों और ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों से यात्रियों का विवरण एकत्र करने और प्रभावित ग्राहकों को सीधे भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था। नागर विमानन महानिदेशालय को मुआवजे के सफल वितरण की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है और नागर विमानन मंत्रालय अपने वायु सेवा शिकायत पोर्टल के माध्यम से इस प्रक्रिया की निगरानी करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडिगो ने रद्द उड़ानों के लिए रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों (ओटीए) के जरिए बुकिंग कराने वाले कई यात्रियों को अभी तक भुगतान नहीं मिला है, जो एयरलाइंस और बुकिंग प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय की कमी को दर्शाता है। रिपोर्ट्स में कहा गया कि मेकमाईट्रिप ने डीसीजीए के निर्देश के बाद इंडिगो से भुगतान मिलने से पहले ही लगभग 10 करोड़ रुपए का रिफंड प्रोसेस कर दिया है। इससे पहले इंडिगो के चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता ने कहा था कि एयरलाइन का बोर्ड, प्रबंधन के साथ मिलकर काम करने और पिछले सप्ताह हुई व्यापक उड़ान रद्दीकरण के मूल कारणों की पहचान करने के लिए बाहरी तकनीकी विशेषज्ञों को नियुक्त करेगा। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ यह सुनिश्चित करने में मदद करेंगे कि इस तरह की व्यापक परिचालन विफलताएं दोबारा न हों। इस बीच, कंपनी ने बताया कि 8 दिसंबर से एयरलाइन के नेटवर्क के सभी गंतव्य पूरी तरह से जुड़े हुए हैं और 9 दिसंबर से परिचालन स्थिर हो गया है।

हवा में इमरजेंसी! PIA फ्लाइट में ऑक्सीजन मास्क गिरते ही मचा हड़कंप, सऊदी में करानी पड़ी लैंडिंग

जेद्दा  जेद्दा से लाहौर जा रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की एक फ्लाइट को शनिवार को उस समय आपात स्थिति में सऊदी अरब में उतरना पड़ा, जब उड़ान के दौरान विमान में तकनीकी खराबी का अलर्ट मिला। इस घटना से विमान में सवार यात्रियों में भारी दहशत फैल गई। PIA के प्रवक्ता के मुताबिक, फ्लाइट PK-860 तय कार्यक्रम के अनुसार रात 8 बजे लाहौर पहुंचने वाली थी, लेकिन तकनीकी समस्या सामने आने के बाद विमान को दमाम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। विमान में 381 यात्री सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या में उमराह जायरीन भी शामिल थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तकनीकी अलर्ट के बाद विमान में ऑक्सीजन मास्क अपने आप गिर गए, जिससे यात्रियों में घबराहट और अफरातफरी मच गई। हालांकि, पायलट और क्रू ने स्थिति को संभालते हुए सुरक्षित लैंडिंग कराई।  रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया कि पिछले महीने PIA की एक अन्य फ्लाइट PK-859 (लाहौर से जेद्दा) को भी उड़ान के दौरान डायवर्ट कर कराची एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा था, क्योंकि फर्स्ट ऑफिसर की विंडशील्ड में दरार आ गई थी। इतना ही नहीं, इस साल मार्च में PIA की एक घरेलू फ्लाइट PK-306 लाहौर में उस हालत में उतरी थी, जब उसके लैंडिंग गियर का एक पहिया गायब पाया गया। हैरानी की बात यह रही कि जांच के बावजूद उस पहिए का कोई सुराग नहीं मिला।   लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने PIA की तकनीकी देखरेख और यात्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों और विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय एयरलाइन को सुरक्षा मानकों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

पाकिस्तान में रेल नेटवर्क पर बड़ा हमला: बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस निशाने पर, धमाकों से ट्रेन सेवाएं ठप

पेशावर  पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर रेलवे को निशाना बनाया गया है। संदिग्ध विद्रोहियों ने शुक्रवार को जाफर एक्सप्रेस और बोलान मेल ट्रेन को उड़ाने की कोशिश में रेलवे ट्रैक पर बम धमाके किए, जिससे ट्रैक को नुकसान पहुंचा और रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। क्वेटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शाहिद नवाज़ ने बताया कि पहला धमाका मुश्काफ इलाके में हुआ, जिसमें करीब तीन फीट रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गया। दूसरा धमाका दश्त क्षेत्र में हुआ, जिससे ट्रैक को और नुकसान पहुंचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों ही मामलों में जाफर एक्सप्रेस और बोलान मेल यात्री ट्रेनें निशाने पर थीं। धमाकों के बाद मुख्य रेलवे लाइन क्षतिग्रस्त होने से क्वेटा से देश के अन्य हिस्सों के लिए ट्रेन सेवाएं बाधित हो गईं। SSP नवाज़ ने कहा कि “अब क्वेटा से चलने वाली किसी भी यात्री ट्रेन के समय की पुष्टि सुरक्षा एजेंसियों की मंजूरी के बाद ही की जाएगी।”उन्होंने जोर देकर कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सभी ट्रेनों के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए शनिवार को जाफर एक्सप्रेस की एक विशेष सेवा को पेशावर के लिए रवाना होने की अनुमति दी गई, ताकि यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य सेवाएं सुरक्षा क्लियरेंस का इंतजार कर रही हैं।   बार-बार निशाने पर जाफर एक्सप्रेस     यह पहली बार नहीं है जब जाफर एक्सप्रेस पर हमला हुआ हो।     पिछले दो महीनों में कम से कम तीन बार इस ट्रेन और बोलान मेल पर हमले हो चुके हैं।     हालांकि हालिया हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन ट्रैक को भारी नुकसान पहुंचा। इससे पहले 11 मार्च को जाफर एक्सप्रेस पर हुआ हमला बेहद भयावह था, जब आतंकियों ने ट्रेन पर गोलीबारी कर करीब 400 यात्रियों को बंधक बना लिया था। इस हमले में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि सुरक्षा बलों ने अभियान में 33 आतंकियों को मार गिराया था। लगातार हो रहे इन हमलों ने बलूचिस्तान में पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

टेक्नोलॉजी से नकल का खेल! अलवर में बिना माउस ऑपरेट हुए हल हो रहा था एग्जाम पेपर, 7 लाख की डील उजागर

अलवर  राजस्थान के अलवर जिले में दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान नकल का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संघ लोक सेवा आयोग (SSC) द्वारा आयोजित इस ऑनलाइन परीक्षा में 'हाई-टेक' तरीके से धोखाधड़ी करने की कोशिश की गई, जिसे सतर्क परीक्षकों और पुलिस ने नाकाम कर दिया। सात लाख में हुआ था 'पास' कराने का सौदा पुलिस जांच के अनुसार, गिरफ्तार अभ्यर्थी सुरेंद्र सैनी ने दिल्ली पुलिस में चालक पद की भर्ती के लिए एक बड़ी साजिश रची थी। उसने अपने ही गांव के एक युवक के साथ परीक्षा पास करवाने के लिए 7 लाख रुपये का सौदा किया था। योजना के तहत, सुरेंद्र को परीक्षा केंद्र के भीतर बैठकर कुछ नहीं करना था, बल्कि सारा काम बाहर बैठा उसका साथी करने वाला था।   कंप्यूटर हैकिंग से नकल का 'खेल' 17 दिसंबर को चिकानी स्थित MI TRC कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा शुरू हुई। आरोपियों ने तकनीकी सेंधमारी करते हुए सुरेंद्र को आवंटित कंप्यूटर को पहले ही हैक कर लिया था। परीक्षा के दौरान सुरेंद्र के कंप्यूटर की स्क्रीन पर सवालों के जवाब खुद-ब-खुद क्लिक हो रहे थे। यानी रिमोट एक्सेस के जरिए बाहर बैठा व्यक्ति पेपर हल कर रहा था। कैसे पकड़ा गया आरोपी? परीक्षा केंद्र पर मौजूद निरीक्षक (Invigilator) को तब शक हुआ जब उन्होंने देखा कि अभ्यर्थी बिना कीबोर्ड या माउस छुए शांति से बैठा है, लेकिन स्क्रीन पर उत्तर तेजी से टिक हो रहे हैं। कड़ाई से जांच करने पर धांधली का खुलासा हुआ, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। अलवर ग्रामीण की पुलिस उप अधीक्षक शिवानी शर्मा ने बताया कि आरोपी सुरेंद्र सैनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब उस मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है जिसने सिस्टम को हैक किया था। यह घटना ऑनलाइन परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘मास्टरस्ट्रोक’: व्लादिमीर पुतिन के सामने रूसी पत्रकार का प्रपोजल वीडियो वायरल

रूस  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस आमतौर पर गंभीर राजनीतिक चर्चाओं और तीखी विदेश नीति के लिए जानी जाती है, लेकिन हाल ही में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दुनिया को एक बेहद रोमांटिक और यादगार पल देखने को मिला। यहां 23 वर्षीय रूसी पत्रकार किरिल बाजानोव ने इस ग्लोबल प्लेटफॉर्म को अपनी लव स्टोरी के एक बड़े मोड़ में बदल दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, बाजानोव ने अचानक एक 'प्लेबोर्ड' निकाला, जिसे देखकर पहले तो लोगों को लगा कि वह कोई तीखा सवाल पूछेंगे। हालांकि, उन्होंने देश की बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुए अपने व्यक्तिगत जीवन को इससे जोड़ा और सीधे कैमरे की ओर देखते हुए अपनी गर्लफ्रेंड को प्रपोज कर दिया। उन्होंने कहा, "मेरी गर्लफ्रेंड यह देख रही है… क्या तुम मुझसे शादी करोगी? प्लीज मुझसे शादी कर लो।"   पुतिन और दर्शकों की प्रतिक्रिया इस अप्रत्याशित पल ने वहां मौजूद सैकड़ों पत्रकारों और खुद राष्ट्रपति पुतिन को हैरान कर दिया। पूरा हॉल तालियों की गूंज से भर गया। लगभग एक घंटे बाद, कार्यक्रम की होस्ट ने 'ब्रेकिंग न्यूज' देते हुए घोषणा की कि बाजानोव की गर्लफ्रेंड ने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। इस पर राष्ट्रपति पुतिन ने भी मुस्कुराते हुए तालियां बजाईं। पुतिन को दिया शादी का न्योता खुशी के इस माहौल में बाजानोव ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए राष्ट्रपति पुतिन को अपनी शादी का न्योता भी दे दिया। बाद में उन्होंने साझा किया कि वह और उनकी गर्लफ्रेंड पिछले 8 साल से साथ हैं। उन्होंने बताया कि होम लोन की भारी लागत और आर्थिक दबावों के कारण वे परिवार शुरू करने का फैसला नहीं ले पा रहे थे, लेकिन उन्होंने इस बड़े मंच का इस्तेमाल अपने भविष्य की शुरुआत के लिए किया। यह घटना अब सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रही है।

यात्रियों के लिए अलर्ट: रेलवे ने जारी किए नए एंट्री निर्देश

नई दिल्ली भारतीय रेल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अनारक्षित ट्रेन टिकट के लिए प्रिंटेड कॉपी साथ रखना अनिवार्य करने संबंधी कोई नया नियम जारी नहीं हुआ है। यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के जवाब में दी गई है, जिनमें नियमों में बदलाव का दावा किया गया था। रेलवे के अनुसार, मौजूदा नियम पहले की तरह ही लागू हैं। यात्रियों को ध्यान रखना होगा कि अगर उन्होंने अनारक्षित टिकट बुक किया है और उसका भौतिक प्रिंट प्राप्त किया है, तो यात्रा के दौरान इसे अपने पास रखना आवश्यक है। वहीं, डिजिटल माध्यम से टिकट बुक करने वाले यात्री मोबाइल डिवाइस पर डिजिटल टिकट दिखाकर सत्यापन करा सकते हैं। रेलवे ने दोहराया कि इस संबंध में कोई नया निर्देश जारी नहीं किया गया है और मीडिया में आई जानकारी भ्रामक है। वंदे भारत ट्रेनों में अब मिलेंगे स्थानीय व्यंजन यात्रियों के सफर को और सुखद बनाने के लिए रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन शामिल किए हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को स्थानीय स्वाद और भारत की सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराना है। मुख्य व्यंजन इस प्रकार हैं: महाराष्ट्र: कांदा पोहा, मसाला उपमा (22229 CSMT–MAO) आंध्र प्रदेश / दक्षिण भारत: डोंडकाया करम पोड़ी फ्राई, आंध्र कोड़ी कुरा गुजरात: मेथी थेपला (20901 MMCT–GNC), मसाला लौकी (26902 SBIB–VRL) ओडिशा: आलू फूलकोपी (22895 HWH–पुरी) केरल: सफेद चावल, पचकका चेरुपायर मेझुक्कु पेराटी, कडला करी, केरल पराठा, सादा दही, पलाडा पायसम, अप्पम (20633/34 कासरगोड–त्रिवेंद्रम, 20631/32 मंगलुरु–त्रिवेंद्रम) पश्चिम बंगाल: कोषा पनीर, आलू पोटोल भाजा, मुर्गिर झोल (20872 ROU–HWH, 22895 HWH–PURI, 22302 NJP–HWH) बिहार: चंपारण पनीर, चंपारण चिकन (22349 PNBE–RNC, 22348 PNBE–HWH) डोगरी व्यंजन: अंबल कद्दू, जम्मू चना मसाला (26401-02, 26403-04) कश्मीरी व्यंजन: टोमैटो चमन, केसर फिरनी (26401/02, 26403/04 SVDK–SINA)  

चीन की डिजिटल निगरानी में फंसा नेपाल, अमेरिकी सिस्टम से कसा शिकंजा; तिब्बतियों पर बढ़ा दमन

वाशिंगटन  काठमांडू की अव्यवस्थित गलियों और भीड़भाड़ के ऊपर, बौद्धनाथ स्तूप का सफेद गुंबद एक मूक प्रहरी की तरह खड़ा है। इसके शिखर पर सुनहरा कलश और चारों दिशाओं में बनी बुद्ध की शांत, चौकस आंखें- जो मानो नीचे घट रही हर हलचल को देख रही हों। दशकों तक ये आंखें तिब्बती शरणार्थियों के लिए सुरक्षा और आश्रय का प्रतीक रहीं जो अपनी मातृभूमि में चीनी दमन से भागकर आए थे। लेकिन आज, तिब्बती शरणार्थियों पर कहीं अधिक दुर्भावनापूर्ण आंखें नजर रख रही हैं: हजारों चीनी सीसीटीवी कैमरे यहां सड़कों के कोनों और छतों पर लगे हैं और नीचे हर हरकत पर नजर रखते हैं। इस गहन निगरानी ने एक समय विश्वव्यापी गूंज पैदा करने वाले 'फ्री तिब्बत' आंदोलन को दबा दिया है।   नेपाल अब उन कम से कम 150 देशों में शामिल है, जहां चीनी कंपनियां निगरानी तकनीक निर्यात कर रही हैं। वियतनाम में कैमरे, पाकिस्तान में सेंसरशिप फायरवॉल, केन्या में शहर-स्तरीय मॉनिटरिंग सिस्टम चीन का ही है। एल्गोरिदम और डेटा के सहारे यह तकनीक कम संसाधनों वाली सरकारों के लिए ‘किफायती पुलिसिंग’ बन गई है- लेकिन इसकी कीमत नागरिकों की आजादी से चुकानी पड़ रही है। अमेरिकी तकनीक, चीनी निगरानी इस डिजिटल अधिनायकवाद का सबसे बड़ा विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि चीन जिन निगरानी औजारों का निर्यात कर रहा है, उनमें से कई की जड़ें अमेरिका में विकसित तकनीक से जुड़ी हैं। दशकों तक सिलिकॉन वैली की कंपनियां चीन की शर्तों के आगे झुकती रहीं। चीन की शर्त थी- हमें अपनी तकनीक दो और हम तुम्हें अपने बाजार तक पहुंच देंगे। आज भी कड़वाहट के बावजूद ये रिश्ते पूरी तरह टूटे नहीं हैं। उदाहरण के लिए, अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) चीनी तकनीकी दिग्गजों जैसे हिकविजन और दाहुआ को क्लाउड सेवाएं प्रदान करता है, जो उनके विदेशी विस्तार में मदद करती हैं। दोनों कंपनियां राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकार चिंताओं के कारण अमेरिकी वाणिज्य विभाग की एंटिटी लिस्ट में हैं। इसका मतलब है कि उनके साथ लेनदेन अवैध नहीं लेकिन सख्त प्रतिबंधों के अधीन हैं। एडब्ल्यूएस ने एपी को बताया कि वह नैतिक आचार संहिता का पालन करता है, अमेरिकी कानूनों का अनुपालन करता है और खुद निगरानी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं प्रदान करता। दाहुआ ने कहा कि वे अपने उत्पादों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित जांच करते हैं। हिकविजन ने भी यही कहा और कंपनी के दमन में शामिल होने या सहयोग करने के किसी भी सुझाव को स्पष्ट रूप से खारिज किया। चीनी तकनीकी फर्में अब दूरसंचार, निगरानी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा सूट प्रदान करती हैं, जिसमें बेचने वाले या उपयोग पर कम प्रतिबंध हैं। चीन खुद को कम अपराध दरों वाला वैश्विक सुरक्षा मॉडल पेश करता है, जो अमेरिका के रिकॉर्ड से विपरीत है। नेपाल में सिमटता तिब्बती जीवन एपी की जांच हजारों नेपाली सरकारी खरीद दस्तावेजों, कॉर्पोरेट मार्केटिंग सामग्री, लीक हुए सरकारी और कॉर्पोरेट दस्तावेजों तथा 40 से अधिक लोगों के साक्षात्कारों पर आधारित है, जिनमें तिब्बती शरणार्थी और नेपाली, अमेरिकी तथा चीनी इंजीनियर, कार्यकारी, विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हैं। एक समय नेपाल में हर साल हजारों तिब्बती शरण लेते थे। आज यह संख्या सिंगल डिजिट में सिमट गई है। तिब्बती निर्वासित सरकार के अनुसार, सख्त सीमा नियंत्रण, चीन-नेपाल के बढ़ते संबंध और अभूतपूर्व निगरानी इसकी प्रमुख वजहें हैं। 2021 की एक आंतरिक नेपाली सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन ने नेपाल के भीतर और सीमा-बफर जोन में भी निगरानी प्रणालियां खड़ी कीं, जहां निर्माण प्रतिबंधित है। चीन ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताया। काठमांडू में लगभग सभी पुलिस कैमरों की फीड एक चार-मंजिला इमारत में जाती है। यह इमारत चीनी दूतावास से कुछ ही ब्लॉक दूर है। ठंडी हवा फेंकते पंखों के बीच नीली वर्दी में बैठे अधिकारी, रात-दिन स्क्रीन पर झिलमिलाते दृश्यों को खंगालते हैं। नीचे लगे एक बोर्ड पर अंग्रेजी और चीनी में लिखा है: चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय की ओर से शुभकामनाओं सहित। ‘वे हमें पहले ही पकड़ लेते हैं’ 49 वर्षीय सोनम ताशी कभी प्रदर्शनों में आगे रहते थे लेकिन आज बस अपने 10 साल के बेटे को सुरक्षित बाहर निकालना चाहते हैं। बच्चा नेपाल में जन्मा है, पर न शरणार्थी कार्ड है, न नागरिकता। ताशी बताते हैं कि 10 मार्च (1959 के तिब्बती विद्रोह की बरसी) या दलाई लामा के जन्मदिन जैसे दिनों से पहले संभावित प्रदर्शनकारियों को उठा लिया जाता है। 2018 में नेपाल ने ‘प्रिडिक्टिव पुलिसिंग’ की पुष्टि की थी जहां लोगों की गतिविधियों के पैटर्न से पहले ही गिरफ्तारी हो जाती है। कैमरे हर जगह हैं। यहां कोई भविष्य नहीं। ‘उन्होंने पैसे नहीं, पूरा हार्डवेयर दिया’ 2013 में नेपाल पुलिस को चीन से डिजिटल ट्रंकिंग रेडियो सिस्टम मिला- पूरी तरह उपहार था। लागत लगभग 5.5 मिलियन डॉलर। यह तकनीक सस्ती थी, उन्नत थी और सीमा क्षेत्रों तक कवरेज चाहती थी। नेपाल ने हामी भर दी। इसके बाद चीनी पुलिस दूत नियमित रूप से मुख्यालय आने लगे- ब्रोशर, प्रशिक्षण, उपकरण सब उनका था। नेपाल के सैकड़ों पुलिसकर्मी चीन में प्रशिक्षण लेने गए। ‘सेफ सिटी’ से सर्विलांस सिटी 2016 में काठमांडू की ‘सेफ सिटी’ परियोजना शुरू हुई- पहले सड़कें, फिर पर्यटन स्थल, धार्मिक परिसर, संसद और प्रधानमंत्री आवास। कैमरे केवल रिकॉर्ड नहीं करते- वे चेहरे पहचानते हैं, भीड़ में एक चेहरे को ट्रैक करते हैं, और पैटर्न सहेजते हैं। आज नेपाल में अधिकांश कैमरे चीनी कंपनियों के हैं- Hikvision, Dahua और Uniview। कई सिस्टम AI और फेसियल रिकग्निशन से लैस हैं। ऑपरेटर राजधानी में मोटरबाइक ट्रैक कर सकते हैं उनकी पहुंच विशाल है। ऑपरेटर राजधानी में मोटरबाइक ट्रैक कर सकते हैं, प्रदर्शन बनते देख सकते हैं या अलर्ट सीधे पेट्रोल रेडियो पर भेज सकते हैं। कई कैमरे नाइट विजन, फेशियल रिकग्निशन और एआई ट्रैकिंग से लैस हैं – त्योहार की भीड़ से एक चेहरा चुन सकते हैं या किसी व्यक्ति को घर के अंदर गायब होने तक फॉलो कर सकते हैं। सिस्टम न सिर्फ देखता है बल्कि याद करना सीख रहा है, गतिविधियों के पैटर्न स्टोर कर रहा है, निगरानी के नीचे जिए जा रहे जीवन का रिकॉर्ड बना रहा है। शहर के एक 34 वर्षीय तिब्बती कैफे मालिक ने शहर के बदलाव को खामोश डर से देखा। वे कहते हैं- अब आप सिर्फ निजी में तिब्बती हो सकते हैं। पब्लिक में नहीं। … Read more