samacharsecretary.com

मचाडो ने व्हाइट हाउस में ट्रंप को सौंपा अपना नोबेल पुरस्कार, वेनेजुएला संकट पर हुई चर्चा

वाशिंगटन वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल प्राइज विजेता मारिया कोरीना मचाडो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात आखिरकार हो गई. वेनेजुएला में हुए एक्शन के बाद इस मीटिंग पर सबकी नजर थी. मीटिंग के बाद मचाडो ने बड़ा दावा किया. वह बोलीं कि उन्होंने मीटिंग के दौरान ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या उन्होंने वास्तव में इसे स्वीकार किया. मचाडो लंच मीटिंग के लिए गुरुवार को व्हाइट हाउस पहुंचीं थीं.  यह बैठक वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही तीव्र बहस के बीच हुई, जो इस महीने की शुरुआत में अमेरिका के नेतृत्व में पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद हुई है. एक घंटे से अधिक चली चर्चा के बाद जब मचाडो व्हाइट हाउस से निकलीं, तो उनका जोरदार स्वागत समर्थकों ने किया. उन्होंने समर्थकों से कहा, 'हम राष्ट्रपति ट्रंप पर भरोसा कर सकते हैं,' जिसके बाद कुछ लोगों ने 'धन्यवाद, ट्रंप' के नारे लगाए और फिर वाशिंगटन में अन्य बैठकों के लिए रवाना हो गईं. यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप ने उनके द्वारा दिया गया पदक स्वीकार कर लिया है, मचाडो ने जवाब देने से इनकार कर दिया. यह कदम कई हफ्तों से चल रही अटकलों और ट्रंप को पुरस्कार देने की उनकी पिछली सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद आया है. हालांकि, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है. ट्रंप ने मचाडो को दिया गिफ्ट वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो व्हाइट हाउस से एक गिफ्ट बैग लेकर बाहर निकलीं, जिस पर प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिखा था. बैग को मचाडो ने अपने पर्स के साथ हाथ में पकड़ा हुआ था. इस लाल रंग के बैग पर प्रेसिडेंट के सिग्नेचर हो रखे हैं. बैग में आखिर क्या है, ये अभी साफ नहीं है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने मचाडो को वेनेजुएला के कई लोगों की एक उल्लेखनीय और साहसी आवाज बताया, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि उनके नेतृत्व की संभावनाओं के बारे में ट्रंप का आकलन बदला नहीं है. ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि नेतृत्व करने के लिए उन्हें घरेलू समर्थन प्राप्त नहीं है. मचाडो को US से मिला-जुला सपोर्ट नोबेल पुरस्कार विजेता होने और लोकतंत्र की मुखर वकालत करने के बावजूद, मचाडो को अमेरिकी अधिकारियों से मिला-जुला समर्थन मिला है. ट्रंप ने तेल और अन्य मुद्दों पर सहयोग के लिए रोड्रिगेज की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है, जबकि कुछ अमेरिकी सांसदों ने मचाडो पर भरोसा जताया है. गुरुवार की बैठक माचाडो की महीनों बाद वॉशिंगटन में पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी. सुरक्षा को खतरे के चलते उन्हें वेनेजुएला छोड़ना पड़ा था. मादुरो समर्थक सर्वोच्च न्यायालय ने माचाडो को वेनेजुएला के 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया था. स्वतंत्र पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्ष समर्थित एडमंडो गोंजालेज ने निर्णायक जीत हासिल की, हालांकि मादुरो ने जीत की घोषणा कर सत्ता पर अपना कब्जा बनाए रखा. डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी, जिन्होंने मचाडो से मुलाकात की, ने बताया कि मचाडो ने सांसदों को बताया कि वेनेजुएला में दमनकारी व्यवस्था मादुरो काल से बनी हुई है. उन्होंने अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को एक 'कुशल नेता' बताया, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन से और अधिक मजबूत होती जा रही हैं. ट्रंप ने पहले कहा था कि उनकी प्राथमिकता वेनेजुएला के तेल तक अमेरिकी पहुंच सुनिश्चित करना और देश की अर्थव्यवस्था को संभालना है. मादुरो के बाद सरकार संभाल रहीं रोड्रिगेज की उन्होंने बार-बार तारीफ की है.

बेंगलुरु के ‘बार कैपिटल’ में छाया नया ट्रेंड, दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पीछे छोड़ा

बेंगलुरु  शाम ढलते ही जब शहर की बत्तियां जगमगाती हैं, तो अक्सर मन में दिल्ली की चकाचौंध या मुंबई की नाइटलाइफ़ का ख्याल आता है. लेकिन अगर आप अब भी यही सोच रहे हैं कि देश का सबसे बेहतरीन कॉकटेल या बार इन्हीं दो बड़े शहरों में मिलेगा, तो अब अपनी ट्रैवल लिस्ट अपडेट करने का समय आ गया है. भारत की बार संस्कृति ने एक ऐसी करवट ली है जिसने बरसों पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ दिया है. गोवा में सजे एक शानदार अवॉर्ड समारोह ने यह साफ कर दिया कि अब दिल्ली के रुतबे और मुंबई की रफ्तार को पछाड़कर बेंगलुरु ने बाजी मार ली है. तो चलिए जानते हैं, देश के उस नए 'बार कैपिटल' के बारे में जहां के दो बार्स ने दिल्ली-मुंबई को पछाड़ते हुए शीर्ष दो स्थानों पर कब्जा कर लिया है. बेंगलुरु का जलवा और दिल्ली-मुंबई की विदाई  '30 बेस्ट बार्स इंडिया' के ताजा नतीजों ने इस बार सबको हैरान कर दिया. यह इन पुरस्कारों के छह साल के इतिहास में पहली बार हुआ है जब टॉप-4 की लिस्ट से दिल्ली और मुंबई पूरी तरह गायब हैं. इस बार की पूरी महफिल बेंगलुरु के नाम रही, जहां के 'स्पिरिट फॉरवर्ड' (Spirit Forward) ने नंबर-1 और 'सोका' (Soka) ने नंबर-2 स्थान हासिल कर पूरे देश में अपनी धाक जमा दी. बेंगलुरु अब सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर का शहर नहीं रहा, बल्कि यह भारत का नया अड्डा बनकर उभरा है. टॉप-30 की लिस्ट में इस शहर के 6 बार शामिल हैं, जिनमें से 4 तो सीधे टॉप-10 में अपनी जगह बनाए हुए हैं. गोवा का स्टाइल और नए शहरों की एंट्री घूमने-फिरने वालों के लिए गोवा हमेशा से पहली पसंद रहा है और इस बार गोवा ने भी अपनी ताकत दिखाई है. 'आउट्रिगर' और 'बॉइलरमेकर' जैसे बार्स ने तीसरा और चौथा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि गोवा सिर्फ समंदर किनारे मस्ती के लिए नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन ड्रिंक्स के लिए भी जाना जाता है. इस रेस में दिल्ली का 'लेयर' पांचवें स्थान पर रहकर किसी तरह टॉप-5 में अपनी जगह बचाने में कामयाब रहा. सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि अब इस रेस में कोलकाता जैसे शहर भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. दो साल पहले तक जहां बार कल्चर की इतनी चर्चा नहीं थी, आज वो शहर बड़े-बड़े केंद्रों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. आजकल के मुसाफिर सिर्फ एक गिलास जाम नहीं चाहते, उन्हें चाहिए एक अच्छा माहौल और नया अनुभव. यही वजह है कि अब बार्स में पुराने घिसे-पिटे मेनू की जगह देश की अपनी चीजों और स्थानीय मसालों का इस्तेमाल बढ़ गया है. छिपे हुए छोटे कॉकटेल बार से लेकर छतों पर बने शानदार रूफटॉप बार तक, हर जगह अब मेहमानों को कुछ नया देने की कोशिश की जा रही है. इस साल 1,200 से ज्यादा नामांकन यह बताते हैं कि भारतीय बार मालिक अब दुनिया भर के बार्स के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. इस तरक्की की गूंज अब विदेशों में भी सुनाई दे रही है. पिछले साल एशिया के 50 सबसे अच्छे बारों में पांच भारतीय नाम शामिल थे. दिल्ली के 'लेयर' ने तो दुनिया के 100 बेहतरीन बारों में अपनी जगह बनाकर भारत का मान बढ़ाया है. तो अगली बार जब आप घूमने का प्लान बनाएं, तो इन शहरों की उन गलियों का भी रुख करें जहां कुछ नया और खास पक रहा है.  

मोदी सरकार ने शुरू किया AI चैलेंज, वित्तीय रिपोर्टिंग को AI द्वारा परखने का ऐलान

नई दिल्ली. भारत सरकार और National Financial Reporting Authority (NFRA) ने वित्तीय रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है, जिसका नाम IndiaAI Financial Reporting Compliance Challenge रखा गया है। यह चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-संचालित समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार की गई है, ताकि वित्तीय दस्तावेजों की गुणवत्ता, डेटा सत्यापन और जोखिम संकेतकों के ऑटोमेटेड विश्लेषण में सुधार किया जा सके। विजेता टीम को मेलगा ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार इस पहल के तहत सरकार ने कुल ₹1.5 करोड़ का पुरस्कार पूल रखा है; प्रारंभिक वर्चुअल परिष्करण चरण में 10 टीमों को ₹5 लाख तक का समर्थन मिलेगा, और विजेता टीम के लिए दो साल की NFRA के साथ अनुबंध का अवसर हो सकता है, जिसकी मूल्य लगभग ₹1 करोड़ तक हो सकती है। इस अनुबंध के माध्यम से जीतने वाली टीम राष्ट्रीय स्तर पर AI समाधान लागू करने का मौका पाएगी। चैलेंज में भाग लेने के लिए भारतीय कंपनियों और DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स को आमंत्रित किया गया है। इन प्रतिभागियों से अपेक्षा है कि वे ऐसे एडवांस्ड AI इंजन विकसित करें जो बहु-फॉर्मेट दस्तावेजों से डेटा निकाल सके, उसे निर्धारित मानकों और नियामक ढांचे के खिलाफ स्वचालित रूप से मान्य कर सके तथा जोखिम विश्लेषण और अनुपालन सत्यापन जैसे कार्य कर सके। प्रशासनिक ढांचे को मिलेगी मजबूती आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस पहल का लक्ष्य न केवल वित्तीय रिपोर्टों की मानकीकरण प्रक्रिया को बेहतर बनाना है, बल्कि निवेशकों के भरोसे, सार्वजनिक विश्वास और कॉर्पोरेट प्रशासनिक ढांचे की मजबूती को भी बढ़ावा देना है। AI आधारित प्रणाली रिपोर्टों में टेक्स्ट, तालिकाएँ, हाइपरलिंक और एम्बेडेड डेटा को अलग-अलग पहचान सकती है, दस्तावेज़ को तार्किक भागों में विभाजित कर पूर्णता, अखंडता और अनुपालन का मूल्यांकन कर सकती है। प्रतियोगिता में चुने गए कुछ प्रतिभागी AIKosh प्लेटफॉर्म पर दिए गए सैंपल डाटा सेट का उपयोग कर समाधान को विकसित और परिष्कृत करेंगे। चुनौतियों के अगले चरण में करीब तीन टीमों को पांच दिन के ऑन-प्रिमाइज़ डेवेलपमेंट राउंड के लिए चयनित किया जाएगा, जहां वे अपने सिस्टम को और उन्नत कर सकेंगे। वित्तीय पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र में AI के इस तरह के प्रयोग से डेटा सत्यापन की गति, सटीकता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार संभव है, जिससे समय-समय पर वित्तीय अनियमितताओं की पहचान और जोखिम प्रबंधन में तेजी आएगी। इस तरह की पहल से भारत AI-आधारित नियामक तकनीकी ढांचे को मजबूत करते हुए वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इस चुनौती में आवेदन की अंतिम तिथि 22 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है, और इच्छुक भागीदार AIKosh पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण कर सकते हैं।

2026 विधानसभा चुनाव: इन 5 राज्यों की सत्ता में कौन है, जानें हर राज्य की मौजूदा सरकार

नईदिल्ली  भारतीय राजनीति के लिए 2026 का साल बेहद अहम रहने वाला है। अगले कुछ ही महीनों में देश के 5 राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ये चुनाव भले ही विधानसभा के लिए हो रहे हों, पर राष्ट्रीय राजनीति को भी बहुत मजबूती से प्रभावित करेंगे। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता को कई नए राज्यों में स्थापित करने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ विपक्ष, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दल, देश की सबसे बड़ी पार्टी को कोई मौका नहीं देना चाहते हैं। ये विधानसभा चुनाव काफी हद तक ये भी बताने में कामयाब होंगे कि मोदी सरकार की नीतियां कितनी असरदार हैं और विपक्ष कितना एकजुट है। आइए, एक-एक करके इन राज्यों की मौजूदा सरकार, सियासी हालात और चुनावों की अहमियत पर नजर डालते हैं। 1: पश्चिम बंगाल में ममता के सामने बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, जिसने 2021 के विधानसभा चुनावों में 213 सीटें जीतीं और 48% वोट शेयर हासिल किया। ममता की लोकप्रियता और कल्याण योजनाएं उनकी ताकत हैं, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और गवर्नेंस के विवाद उनकी सरकार पर भारी पड़ सकते हैं। बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंची थी और अब बिहार में बड़ी जीत के बाद काफी आक्रामक है। कांग्रेस यहां कमजोर हो चुकी है और नेतृत्व के अभाव से जूझ रही है। अगर बीजेपी बंगाल में कुछ अच्छा कर जाती है तो यह उसकी राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है। वहीं, TMC की हार उसे उन क्षेत्रीय पार्टियों की लिस्ट में डाल सकती है जो एक समय किसी राज्य में बहुत ताकतवर थीं लेकिन धीरे-धीरे कमजोर होती चली गईं। 2: असम में बीजेपी ने बनाई है मजबूत पकड़ असम में फिलहाल हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है। 2021 के चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने 75 सीटें जीतीं और अब लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की तैयारी कर रहा है। शर्मा ने पिछले कुछ सालों में बीजेपी के फायरब्रांड नेता के साथ-साथ एक ऐसे लीडर की छवि बनाई है जो विकास, सुरक्षा और पहचान की राजनीति पर जोर देता है। वहीं, विपक्ष में कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। मुस्लिम वोटों के दम पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने वाली AIUDF जैसी पार्टियां भी आने वाले विधानसभा चुनावों में काफी कुछ तय करेंगी। ये चुनाव बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, तो वहीं अगर कांग्रेस यहां अच्छा करती है तो विपक्ष के लिए बड़ा बूस्ट होगा। 3: तमिलनाडु में नए चेहरों से होगी DMK की जंग तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी कि DMK सरकार है, जिसने 2021 में 234 में से 133 सीटें जीतीं थीं। इस सूबे में चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं से 1.86 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं और पार्टी करीब 2.5 करोड़ वोटों का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि बेरोजगारी जैसे मुद्दे पार्टी पर भारी पड़ सकते हैं और एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर तो है ही। वहीं, दूसरी तरफ AIADMK-बीजेपी गठबंधन भी अपना पूरा दम लगाए हुए है, जबकि विजय की TVK नई पार्टी के रूप में युवाओं को आकर्षित कर रही है। तमिलनाडु में जीत बीजेपी के लिए ऑर्गेनिक ग्रोथ का बड़ा मौका हो सकती है, जहां हिंदुत्व की सीमाएं हैं। वहीं, विपक्ष के लिए DMK की हार INDIA ब्लॉक को कमजोर करेगी। 4: केरल में फिर से जाग गई है कांग्रेस की उम्मीद केरला में पिनाराई विजयन की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी कि LDF की सरकार है, जिसने 2021 में 99 सीटें जीतीं। यह गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी चाहता है लेकिन पिछले कुछ महीने इसके लिए अच्छे नहीं रहे हैं। विजयन सरकार का सामाजिक कल्याण और विकास पर जोर है, लेकिन आर्थिक चुनौतियां और मुख्यमंत्री की ऑटोक्रेटिक स्टाइल एक बड़ा माइनस पॉइंट है। 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस-UDF ने अच्छा प्रदर्शन किया, जो LDF के लिए चिंता की बात है। वहीं, बीजेपी ने भी इन चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है और वह अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश में है। कुल मिलाकर इन चुनावों में लेफ्ट, कांग्रेस और बीजेपी, तीनों का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। 5: NDA के लिए आसान नहीं होगी पुडुचेरी में वापसी पुडुचेरी में एन. रंगासामी के नेतृत्व में ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस यानी कि AINRC और बीजेपी का गठबंधन सत्ता में है। 2021 में 30 सीटों वाली विधानसभा में AINRC ने 10 और बीजेपी ने 6 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल गठबंधन में सब कुछ अच्छा होता नहीं दिख रहा। विपक्ष में DMK और कांग्रेस जैसी पार्टियां इस छोटे लेकिन महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश की सत्ता पर अपना दावा मजबूती से पेश करती दिख रही हैं। लोकल गवर्नेंस और विकास के मुद्दे प्रमुख हैं, ऐसे में ये चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण में गठबंधन बचाने का टेस्ट है, जहां एंटी-इनकंबेंसी है। वहीं, अगर कांग्रेस और DMK की फिर से हार होती है तो उनके लिए पुडुचेरी में अपना संगठन बचाना मुश्किल हो सकता है। बीजेपी के लिए सुनहरा मौका हैं ये विधानसभा चुनाव कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इन 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए दक्षिण और पूर्व में विस्तार का सुनहरा मौका हैं, जहां वह हिंदुत्व और मोदी ब्रांड पर दांव लगा रही है। 2025 में दिल्ली और बिहार में जीत से उसका मनोबल ऊंचा है। विपक्ष के लिए ये बाउंस बैक का टेस्ट हैं, और लेफ्ट की हार से INDIA ब्लॉक कमजोर हो सकता है, जबकि कांग्रेस की जीत उसे नई ऊर्जा देगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2026 के नतीजे 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

चुनौतियाँ तो बहुत, लेकिन भारत में है ताकत: वर्ल्ड बैंक और अब इस एजेंसी की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली इंडियन इकोनॉमी लगातार दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं (India Fastest Growing Economy) में बना हुआ है. देश की ही नहीं, बल्कि तमाम ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की तेज रफ्तार का लोहा माना है. एक ही दिन में मोदी सरकार के लिए विदेश से दो गुड न्यूज आईं. पहले वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ (India GDP Growth) के अनुमान में तगड़ा इजाफा किया, तो उसे तुरंत बाद विदेश से एक और खुश करने वाली खबर डेलॉयट ने दी और कहा कि Indian Economy रुकने वाली नहीं है, तमाम चुनौतियों के बाद भी इसकी रफ्तार तेज रहेगी.  इस रफ्तार से दौड़ेगी भारत की इकोनॉमी Deloitte ने वित्त वर्ष 2026 में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 7.5% से 7.8% रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी ने कहा है कि मजबूत घरेलू डिमांज और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में मजबूती के चलते देश की रफ्तार तेज रहेगी.  डेलॉयट इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड टेंशन और ट्रंप टैरिफ की वजह से व्यापार में व्यवधान, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत बदलाव और अस्थिर कैश फ्लो समेत कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद FY26 की पहली छमाही में भारत नॉमिलन जीडीपी में 8% की ग्रोथ के साथ आर्थिक प्रदर्शन की दृष्टि से बेहतर बना हुआ है.  भारत पर भरोसा जताते हुए एजेंसी ने आगे कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब भारत को रिकॉर्ड विदेशी निवेशकों की बिकवाली और करेंसी में गिरावट समेत तमाम महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन घरेलू सुधारों और त्योहारी डिमांड ने पॉजिटिव आउटलुक को बल दिया है.  भारत की दनादन डील से राहत रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने नई फ्री ट्रेड डील्स (Free Trade Deals) के जरिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाई है. देश ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौते किए हैं, जबकि इजराइल संग बातचीत शुरू ट्रेड और इन्वेस्टमेंट संबंधों का विस्तार किया है. डेलॉयट ने कहा कि बाहरी जोखिम अभी भी हाई हैं, लेकिन 2025-26 में इनका पूरा प्रभाव नहीं दिखेगा, हालांकि FY2026-27 में वैश्विक अनिश्चितताओं से ग्रोथ रेट में थोड़ी कमी आ सकती है और ये 6.6-6.9% रह सकती है.  World Bank ने भी दी खुशखबरी  डेलॉयट से पहले वर्ल्ड बैंक ने भी भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाते हुए (World Bank Rise India's GDP Growth Forecast) 7.2% कर दिया, इससे पहले जून 2025 में जताया गया अनुमान 6.3% था, जिससे ये 0.9 फीसदी ज्यादा है. विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव बेहद सीमित रहेगा.  विश्व बैंक ने अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि (US Tariff Hike) के बावजूद मजबूत घरेलू डिमांड का हवाला देते हुए FY2026 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाया है. रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू मांग में उम्मीद से अधिक मजबूती और उपभोग के बेहतर रुझानों के चलते भारत पर अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी का असर कम रहेगा. सरकार द्वारा की गई टैक्स कटौती (Govt Tax Cut) और ग्रामीण आय में वृद्धि से घरेलू खपत में मजबूती आई है, जिसके चलते भारत का आउटलुक बेहतर नजर आ रहा है.   

तेजस मार्क-2 की उड़ान जून में, क्या भारत को अब राफेल की आवश्यकता नहीं रहेगी?

नई दिल्ली पिछले दिनों डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने एक बड़ी घोषणा की. कामत ने कहा कि देसी एडवांस फाइटर जेट तेजस मार्क-2 की पहली उड़ान इस साल जून-जुलाई में की जाएगी. यह स्वदेसी फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है. रिपोर्ट के मुताबिक इसी मार्च तक इस फाइटर जेट का प्रोटोटाइप तैयार हो जाएगा. इसके बाद उड़ान से पहले के तमाम ट्रायल किए जाएंगे. अगर सब कुछ निर्धारित योजना के मुताबिक चलता रहा तो 2029 से इस फाइटर जेट का मास प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. 2030 तक एयरफोर्स को इसकी डिलिवरी शुरू कर दी जाएगी. यानी 2030 तक भारत के पास अपना 4.5 जेन फाइटर जेट होगा. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भारत देसी फाइटर जेट के इतना करीब है तो फिर वह फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद क्यों करना चाहता है? जबकि ये दोनों विमान 4.5 पीढ़ी के बताए जा रहे हैं. राफेल खरीद की योजना अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय में फ्रांस से 114 राफेल खरीदने के प्रस्ताव पर अंतिम चरम का विचार-विमर्श चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ही दिनों के भीतर रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है. इसी बैठक में इस मेगा डील पर चर्चा होगी. इस डील की संभावित लागत 3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है. भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की मुहर लगने के बाद यह मामला कैबिनेट के समक्ष जाएगा. फिर वहां से अंतिम मंजूरी मिलेगी. डील में क्या-क्या होने की संभावना संभावित डील के बारे में कहा जा रहा है कि 12 से 18 विमान सीधे फ्रांस के फ्लाइ-वे कंडीशन में आएंगे. बाकी के विमानों की निर्माण भारत में किया जाएगा. इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन और भारतीय कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम के बीच संयुक्त उपक्रम बनने की संभावना है. अगर यह डील हो जाती है तो भारत के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमान हो जाएंगे. भारत पहले ही राफेल के दो स्क्वाड्रन खरीद चुका है. नौसेना ने भी 26 मरीन राफेल खरीदने का सौदा किया है. अगर यह डील अगले कुछ महीनों के दौरान हो जाती है तो इसकी भी डिलिवरी 2029 तक शुरू हो जाएगी.     तेजस मार्क-2 तैयार तो राफेल डील क्यों?     अब आते हैं इसी सवाल पर. भारतीय वायु सेना लड़ाकू विमानों की भारी कमी से जूझ रही है. उसके पास कम से कम 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए लेकिन अभी वह करीब 30 स्क्वाड्रन से काम चला रही है. एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं. आने वाले समय में एयरफोर्स के कुछ और स्क्वाड्रन रिटायर होंगे. ऐसे में देश को भारी संख्या में लड़ाकू विमानों की जरूरत है. ऐसे में भारत को लड़ाकू विमान तो खरीदने ही होंगे. सब यह है कि उसे कौन से लड़ाकू विमान खरीदने चाहिए. दरअसल, देश को अलग-अलग मोर्चे और अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से तरह-तरह के लड़ाकू विमान चाहिए. तेजस मार्क-2 निश्चित तौर पर 4.5 पीढ़ी का फाइटर जेट है. राफेल भी 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन दोनों की क्षमताओं में जमीन आसमान का अंतर है. तेजस मार्क-2 एक हल्का जेट है जबकि राफेल की गिनती दुनिया के सबसे एडवांस जेट में होती है. वह कई मायने में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को टक्कर देता है. राफेल Vs तेजस मार्क-2 राफेल और तेजस मार्क-2 दोनों 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन इनकी क्षमता, भूमिका और तकनीक में काफी अंतर है. इन पांच प्वाइंट्स से आप पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे कि भारत क्यों राफेल खरीद रहा है. आखिर क्यों तेजस मार्क-2, राफेल की जगह नहीं ले सकता.     क्लास और वेट: राफेल एक मीडियम श्रेणी का मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. इसमें दो इंजन लगे हैं, जो इसे लंबी दूरी के मिशन और भारी हथियार ले जाने में समक्ष बनाते हैं. तेजस मार्क-2 एक मीडियम वेट फाइटर जेट है. लेकिन इसमें केवल एक इंजन है. यह तेजस मार्क-1ए से बड़ा है. इसको मिराज-2000 की जगह लेने के लिए डिजाइन किया गया है. यह राफेल से बहुत कम हथियार ले जा सकता है.     इंजन और ताकत: राफेल में दो स्नेकमा एम88 इंजन हैं. इनका कुल थ्रस्ट लगभग 150kN है. जबकि तेजस मार्क-2 में एक इंजन है और उसका थ्रस्ट 98kN है. राफेल में दो इंजन होने से उसकी सर्वाइवेलिटी भी तेजस मार्क-2 की तुलना में काफी अधिक है.     हथियार क्षमता: राफेल लगभग 9500 किलो का हथियार ले जा सकता है. इसमें बेहद एडवांस मिटिओर बीवीआर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. तेजस मार्क-2 में हथियार ले जाने की क्षमता 6500 किलो है. इसमें देसी अस्त्र मिसाइलें, ब्रह्मोस एनजी और तरह-तरह के स्मार्ट बम लगाए जाएंगे.     रडार और तकनीक: राफेल में दुश्मन की रडार से बचाने वाले RBE2 AESA रडार और स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगा है. जबकि तेजस मार्क-2 में उत्तम एईएसए रडार है. इसमें स्वदेसी वारफेयर सूट और आईआरएसटी सेंसर है.     कीमत: राफेल एक बहुत ही महंगा फाइटर जेट है. एक राफेल की अनुमानित कीमत 1600 से 2000 करोड़ रुपये के बीच है. जबकि तेजस मार्क-2 की कीमत 500 से 600 करोड़ रुपये है.  

जम्मू-कश्मीर: पुंछ पुलिस का आतंक पर प्रहार, पाक स्थित हैंडलर की संपत्ति जब्त

जम्मू जम्मू-कश्मीर की पुंछ पुलिस ने सीमा पार से सक्रिय आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस ने न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना की अचल संपत्ति जब्त कर ली है। पुलिस जानकारी के अनुसार यह कुर्की मंडी पुलिस स्टेशन में ई एंड आईएमसीओ अधिनियम की धारा 2/3 के तहत दर्ज एफआईआर के संबंध में की गई है। जब्त की गई संपत्ति में खसरा संख्या 491 के अंतर्गत आने वाली 10 कनाल 14 मरला भूमि शामिल है। यह भूमि पुंछ की तहसील मंडी में स्थित है। जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 22.05 लाख रुपए है। पुलिस के अनुसार जब्त की गई संपत्ति पुंछ के मंडी निवासी अब्दुल अजीज की है, जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना के रूप में सक्रिय है। आरोपी पहले पाकिस्तान/पीओके भाग गया था और तब से देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए हानिकारक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। कानूनी प्रक्रिया से लगातार बचने के कारण न्यायालय ने आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया। पुंछ पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी के लिए किए गए निरंतर प्रयासों के बावजूद, वह कानून की गिरफ्त से बाहर रहा। इसके कारण न्यायालय को उसकी अचल संपत्ति को कुर्क करने का आदेश देना पड़ा। इन निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए पुंछ पुलिस ने राजस्व विभाग के साथ घनिष्ठ समन्वय से सभी कानूनी प्रक्रियाओं, सत्यापन और दस्तावेजीकरण का पालन करते हुए कुर्की को क्रियान्वित किया। पुलिस के बयान में बताया गया कि यह कार्रवाई आतंकी नेटवर्क के वित्तीय और रसद संबंधी सहायता ढांचों को ध्वस्त करने और आतंकवाद और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को उनके संसाधनों से वंचित करने की व्यापक और सतत रणनीति का हिस्सा है। जिला पुलिस पुंछ पाकिस्तान स्थित आतंकी संचालकों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल सभी तत्वों के खिलाफ दृढ़तापूर्वक और कानूनी रूप से कार्रवाई करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराती है और जनता को आश्वस्त करती है कि शांति, जन सुरक्षा और राष्ट्र की संप्रभुता के हित में ऐसे उपाय जारी रहेंगे।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले— ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने स्थापित किया नया सुरक्षा न्यू नॉर्मल

जयपुर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने एक न्यू नॉर्मल स्थापित किया है। इस ऑपरेशन ने भारतीय सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को दर्शाया। यह एक परिपक्व, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बल की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। सेना प्रमुख ने सेना दिवस के अवसर पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में एक स्पष्ट बदलाव आया है। हम केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रहे हैं। इसी दिशा में नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार लैस और ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के अंतर्गत भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून, शक्तिबान रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक चुस्त, तत्पर एवं मिशन-केंद्रित सेना के निर्माण को दर्शाती हैं।'' सेना प्रमुख ने कहा, "हमारे इस परिवर्तन की आधारशिला आत्मनिर्भरता है। इसकी झलक आपको परेड के दौरान 'मेड इन इंडिया' उपकरणों द्वारा देखने को मिली होगी। भारतीय सेना को भविष्य में भी ऐसे हथियार प्रणालियों और उपकरण चाहिए, जो भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए हों। स्वदेशी अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। हम द्वि-उपयोगी संसाधनों पर भी विशेष जोर दे रहे हैं, ऐसे संसाधन जो सेना और सिविलियन दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों। जो इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेना के लिए विकसित हो, वह देश के समग्र विकास में भी योगदान दे।" सेना प्रमुख ने कहा कि वह सेना दिवस पर भारतीय सेना के सभी सैनिकों, हमारे सिविलियन कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। इस पावन अवसर पर उन वीर सैनिकों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं जिन्होंने देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने राजस्थान सरकार और जयपुर के नागरिकों का दिल से धन्यवाद किया। सेना प्रमुख के मुताबिक, जयपुर में सेना दिवस का आयोजन सेना को नागरिकों के और करीब लाने का प्रयास है। सेनाध्यक्ष का कहना है कि भारतीय सेना एक फ्यूचर-रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां बेहतरीन प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक सिस्टम और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मौजूद है। टेक्नोलॉजी का उपयोग जवानों को रिप्लेस करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। अब तक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए, अगले दो वर्षों को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता के वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को एक डेटा-आधारित, नेटवर्क-सक्षम और सभी हितधारकों के साथ पूर्णत: एकीकृत बल में रूपांतरित करना है। जयपुर में हुई सेना दिवस की परेड में परंपरा और ट्रांसफॉर्मेशन का सुंदर संगम देखने को मिला। नेपाल आर्मी बैंड ने हमारे पुराने और मजबूत संबंधों को दर्शाया, जबकि नई इकाइयों की भागीदारी ने सेना की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित किया।

थाईलैंड में भीषण रेल दुर्घटना, मृतकों की संख्या 32 हुई, भारत ने व्यक्त की संवेदना

नई दिल्ली भारत ने थाईलैंड में बुधवार को हुए ट्रेन हादसे में लोगों की मौत पर अपनी हजारी संवेदना व्यक्त की। ट्रेन कोच पर क्रेन गिरने से करीब 32 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 70 लोग घायल हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "14 जनवरी, 2026 को थाईलैंड के नाखोन रत्चासिमा में हुए ट्रेन एक्सीडेंट से हम बहुत दुखी हैं। इस दुख की घड़ी में थाईलैंड के लोगों और सरकार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं। हम प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति व्यक्त करते हैं और सभी घायलों के जल्दी ठीक होने की कामना करते हैं।" स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, नाखोन रत्चासिमा प्रांत में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरने से कई कोच पटरी से उतर गए। यह घटना सुबह करीब 9:05 बजे सिखियो जिले में हुई। जिस जगह पर यह घटना घटी, वह थाई राजधानी से करीब 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। जब यह हादसा हुआ, तब ट्रेन उबोन रत्वथानी प्रांत जा रही थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार क्रेन का इस्तेमाल मौजूदा रेल लाइन के पैरेलल चल रहे एक हाई-स्पीड रेलवे प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन साइट पर किया जा रहा था। जब ट्रेन उस इलाके से गुजर रही थी, तो क्रेन का बैलेंस बिगड़ गया और वह गिरकर एक चलती हुई ट्रेन की बोगी से टकरा गई। क्रेन के टकराने के बाद ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। इसके अलावा ट्रेन के कुछ हिस्सों में आग लग गई। इससे मौके पर और अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर हादसे के कई वीडियो सामने आए हैं। रेस्क्यू टीम के लोग पटरी से उतरे डिब्बों के अंदर फंसे यात्रियों तक पहुंचने के लिए मुड़े हुए मेटल को काट रहे थे। बचाव और राहत काम करने के लिए फायरफाइटर्स, मेडिकल टीमों और डिजास्टर रिस्पॉन्स यूनिट्स सहित इमरजेंसी रेस्पॉन्डर्स को मौके पर भेजा गया। थाई सरकार के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के तुरंत बाद कई बचाव टीमों को तैनात किया गया था। हादसे के समय कई यात्री डिब्बों के अंदर फंसे हुए थे।

अमेरिका का सख्त संदेश: हमास ने हथियार नहीं डाले तो होंगे गंभीर परिणाम, बंधकों को लेकर बढ़ा दबाव

वॉशिंगटन अमेरिका ने गाजा संघर्ष को जड़ से खत्म करने के लिए पीस प्लान का दूसरा चरण लॉन्च कर दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति को इस बात पर अब भी यह संदेह है कि पीस प्लान के तहत हमास हथियार डालने के लिए तैयार भी होगा या नहीं। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर हमास आखिरी मरे हुए बंधक के अवशेष वापस नहीं करता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दो सीनियर प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शांति योजना के दूसरे चरण में एक ट्रांजिशनल टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी संस्था, नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (एनसीएजी) का गठन किया जाएगा। इसका मकसद सीजफायर के प्रबंधन से आगे बढ़ते हुए गाजा में विसैन्यीकरण, टेक्नोक्रेटिक शासन और पुनर्निर्माण की दिशा में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करना है। ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि हमास समझौते के तहत अपनी बाकी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा। इसमें आखिरी मरे हुए होस्टेज की वापसी भी शामिल है। उन्होंने चेतावनी भी दी है कि ऐसा न करने पर गंभीर नतीजे होंगे। सीनियर अधिकारियों ने इस बात पर संदेह भी जताया है कि हमास पूरी तरह से हथियार छोड़ेगा या नहीं। समूह ने मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में सालों लगाए हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गाजा के भविष्य के लिए टेरर क्षमता को हटाना जरूरी है। अगर एक और लड़ाई की संभावना बनी रहती है तो पुनर्निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता। अधिकारियों ने बताया कि एनसीएजी को क्षेत्रीय मीडिएटर्स और फिलिस्तीनी समूह के साथ कंसल्टेशन के जरिए सावधानी से चुना गया था और इसका मकसद एक नॉन-पॉलिटिकल, सर्विस-ओरिएंटेड एडमिनिस्ट्रेशन के तौर पर काम करना है। इसके तहत गाजा को फिर से बनाने और वहां रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने पर फोकस किया करेगा। उन्होंने कहा कि सालों में पहली बार गाजा पर हमास या फिलिस्तीनी अथॉरिटी का राज नहीं होगा। अधिकारियों ने कहा कि दूसरे फेज में जाने का फैसला तब लिया गया, जब होस्टेज के अनसुलझे मामलों पर काम जारी था। सभी जिंदा बंधक वापस आ गए हैं और 28 मरे हुए होस्टेज में से 27 के अवशेष भी मिल गए हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि सीजफायर जारी रखते हुए आखिरी अवशेष को ढूंढने की कोशिशें जारी हैं। अधिकारियों ने कहा कि टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करना और भारी हथियार हटाना मुख्य लक्ष्य हैं। गाजा को युद्ध के चक्र में वापस जाने से रोकने के लिए ये कदम जरूरी हैं। इसका मकसद ऐसे हालात बनाना है जहां रिकंस्ट्रक्शन की कोशिशें लंबे समय तक चल सकें और रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर हो सके। अधिकारियों ने पहले चरण के दौरान हुई बड़ी मानवीय उपलब्धियों की ओर इशारा किया और कहा कि सीजफायर के बाद मदद के 53,000 से ज्यादा ट्रक गाजा में दाखिल हुए। 20 लाख से ज्यादा पैलेट सामान पहुंचाया गया। हजारों बच्चों तक वैक्सीनेशन ड्राइव पहुंची और मलबे के बड़े हिस्से साफ किए गए। विटकॉफ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में क्षेत्रीय बिचौलियों की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि अमेरिका मिस्र, तुर्किए और कतर का उनके जरूरी बिचौलिए प्रयासों के लिए बहुत आभारी है, जिनकी वजह से अब तक डेवलपमेंट मुमकिन हुई है। जैसे-जैसे प्लान आगे बढ़ेगा, ये देश अहम भूमिका निभाते रहेंगे।