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त्रिशूर में भीषण सड़क हादसे में 8 छात्रों की मौत, खड़े ट्रक से टकराकर कार के उड़े परखच्चे

त्रिशूर  केरल के त्रिशूर जिले में शुक्रवार देर रात भीषण सड़क हादसा हो गया. इस सड़क दुर्घटना में तमिलनाडु के आठ इंजनीयरिंग छात्रों की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, छात्रों की कार कैपामंगलम में बन रहे नेशनल हाईवे 66 पर खड़ी एक मालवाहक ट्रक से टकरा गई।  यह दुखद हादसा पनम्बिक्कुन्नू सेंटर में हुआ, जिसमें डिंडीगुल के पीएसएनए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों की जान चली गई. यह घटना शुक्रवार रात 11.42 बजे हुई जब तमिलनाडु नंबर वाली कार का नियंत्रण खो गया और वह तेज रफ्तार में लॉरी से टकरा गई. खबर के मुताबिक, ट्रक नेशनल हाईवे पर एक मोड़ के पास खड़ी थी।  टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए. कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से लॉरी के नीचे फंस गया. जोरदार टक्कर की आवाज़ सुनकर, आस-पास के लोग, पुलिस और फायर फोर्स के लोग मौके पर पहुंचे और बचाव का काम शुरू किया।  इस भीषण दुर्घटना का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है, क्योंकि, कार के अंदर आगे की सीटों में फंसे शवों को बाहर निकालने के लिए कार को काटना पड़ा. कार में सवार सभी आठ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. मरने वाले सभी लोग तमिलनाडु के 20 साल के लड़के थे।  मरने वालों में से पांच की पहचान सलेम के विश्वा, डिंडीगुल के सूर्या और युवा संजीत, और मदुरै के संतोष और प्रसन्ना के तौर पर हुई है. बाकी तीन यात्रियों की पहचान करने की कोशिशें चल रही हैं. पुलिस ने पहचाने गए पीड़ितों के परिवारों को जानकारी दे दी है।  शुरुआती जांच से पता चलता है कि लड़के केरल में छुट्टियां मनाने गए थे. छात्रों की अचानक मौत से इलाके में मातम छा गया है, जिससे कॉलेज के अधिकारी और सहपाठी गहरे सदमे में हैं।  खबर के मुताबिक, कैपामंगलम पुलिस ने जांच पूरी कर ली है और शवों को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मॉर्चरी में शिफ्ट कर दिया है. पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को रिश्तेदारों को सौंप दी जाएंगी. इस बीच, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि स्ट्रीट लाइट ठीक से न होने और हाईवे पर वॉर्निंग बोर्ड न होने की वजह से यह हादसा हुआ. उन्होंने बताया कि रात के समय इलाके में आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं. हालांकि, चल रहे सड़क निर्माण कार्य की वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है, लेकिन सही साइनबोर्ड न होने की वजह से दूर-दराज से आने वाले ड्राइवर को यहां कुछ समझ में नहीं आता है।  पुलिस और जानकारी इकट्ठा कर रही है. पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि दुर्घटना की वजह तेज रफ्तार तो नहीं थी. वहीं, मोटर वाहन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर दुर्घटना की जांच करेंगे।   

भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार, 10-11 सितंबर को दिल्ली पहुंचेगा बिजनेस डेलिगेशन

नई दिल्ली  भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दक्षिण अफ्रीका का एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आ रहा है. यह प्रतिनिधिमंडल 10 और 11 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल (BRICS Business Council) और बिजनेस फोरम की बैठकों में हिस्सा लेगा. यह महत्वपूर्ण दौरा आगामी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करना और नए निवेश अवसरों की तलाश करना है।  व्यापार असंतुलन को पाटने पर मुख्य ध्यान इस दौरे का नेतृत्व 'साउथ अफ्रीकन ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल' (SABBC) की चेयरपर्सन बुसी माबुजा कर रही हैं. वर्तमान में दोनों देशों के बीच बड़ा व्यापार अंतर है. साल 2025 में दक्षिण अफ्रीका को भारत के साथ व्यापार में लगभग 3.18 अरब डॉलर (USD 3.18 billion) का व्यापार घाटा उठाना पड़ा था।  फिलहाल, दक्षिण अफ्रीका से भारत को मुख्य रूप से कोयला, मैंगनीज और केमिकल वुड पल्प जैसी कच्ची रॉ मैटेरियल का निर्यात किया जाता है. वहीं, भारत से दक्षिण अफ्रीका को पेट्रोलियम उत्पाद, गाड़ियां, दवाइयां और मशीनरी भेजी जाती है. दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल इस बार पारंपरिक 'क्रेता-विक्रेता' मॉडल को बदलकर सह-निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर देगा, ताकि वे भारत को ऊंचे मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों का निर्यात कर सकें।  इन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस दोनों देशों के बीच होने वाली बैठकों में कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर चर्चा की जाएगी     ऑटोमोटिव हब: भारतीय तकनीक और पूंजी का उपयोग करके दक्षिण अफ्रीका को एक क्षेत्रीय ऑटोमोटिव उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करना।      फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य: दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में साझेदारी करना, ताकि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ सके।      अत्याधुनिक तकनीक और कौशल विकास: सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में स्किल-एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करना।      हरित ऊर्जा: रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम स्थापित करना।      कृषि और पैकेजिंग: भारतीय बाजार में दक्षिण अफ्रीकी कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना और भारत की आधुनिक फूड प्रोसेसिंग व पैकेजिंग तकनीक को अपनाना।  'अफ्रीकी मुक्त व्यापार' और ब्रिक्स बैंक की भूमिका SABBC की चेयरपर्सन बुसी माबुजा के अनुसार, अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (AfCFTA) भारतीय कंपनियों के लिए पूरे अफ्रीका के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं में निवेश करने का एक शानदार अवसर है. इसके अलावा, ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने दक्षिण अफ्रीका में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए 6.41 अरब रैंड से अधिक की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है, जिससे व्यापारिक साझेदारी को मजबूत आधार मिलेगा। 

शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी पर बड़ा सवाल, खुद लौटेंगी या भारत करेगा प्रत्यर्पण? जानें पूरा मामला

नई दिल्ली भारत में शरण पाईं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। उन्होंने ही दिसंबर में अपने मुल्क लौटने की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि उन्होंने ये ऐलान ऐसे समय पर किया है, जब ढाका ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। शेख हसीना के आरोप हैं कि ये सजा राजनीति से प्रेरित है और उन्हें अपने बचाव का मौका नहीं मिला। शेख हसीना ने यह भी साफ किया है कि वह बांग्लादेश लौटने का फैसला उन्होंने खुद किया है। न्यूज18 से बातचीत में जब पूछा गया कि आपको वापस लौटने पर फांसी दी जा सकती, क्या आप इसे लेकर चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अपनी जिंदगी की कोई चिंता नहीं है। मैंने कई बार मौत का सामना किया है। मुझे चिंता न्याय के खत्म होने की है। मुझे चिंता इस बात की है कि अदालतों, कानूनों और संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना के लिए किया जा रहा है।' फांसी की सजा मानने से इनकार उन्होंने कहा, 'राजनीति से प्रेरित प्रक्रिया के जरिए सुनाई गई मौत की सजा को आखिरी बात नहीं माना जा सकता। मुझे अपना बचाव करने का सही मौका नहीं दिया गया। आरोपी के शामिल हुए बगैर, उचित बचाव के बिना और राजनीतिक दबाव में सुनाया गया फैसला न्याय नहीं है।' उन्होंने कहा, 'जिस कानून का इस्तेमाल अब मेरे खिलाफ किया जा रहा है, उसे मेरे कार्यकाल के दौरान 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया था। अगर अधिकारी सच में न्याय में यकीन रखते हैं, तो उन्हें एक स्वतंत्र प्रक्रिया की अनुमति देनी चाहिए। मुझे अदालत के सामने पेश होने दें। मुझे सबूत पेश करने दें। मेरे वकीलों को मेरा बचाव करने दें। गवाहों के बयान होने दें। सबूतों को सामने आने दें।' न्याय का मतलब सजा नहीं उन्होंने कहा, 'मैं बस वही उम्मीद करती हूं जिसकी गारंटी संविधान और कानून हर नागरिक को देते हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा, वकीलों तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, निष्पक्ष अदालत, कार्यवाही और सुनवाई।' उन्होंने कहा के ये राजनीतिक शर्तें नहीं हैं, बल्कि कानून की बुनियादी जरूरते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार कहती है कि आओ और न्याय का सामना करो, तो मैं कहूंगी कि मैं आने के लिए तैयार हूं। लेकिन न्याय का मतलब न्याय होना चाहिए, पहले से तय सजा नहीं।' क्या भारत भेज रहा है वापस जब पूछा गया कि क्या उन्होंने वापसी के बारे में भारत से बात की है। उन्होंने वेबसाइट को बताया, 'भारत संप्रभु है और मैं उसकी सरकार की ओर से कोई बात नहीं करूंगी। मेरी समझ यह है कि भारत एक कानूनी मामले की तरह प्रत्यर्पण पर काम कर रहा है। यह भारत का मामला है।' उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा बांग्लादेश के साथ भारत की दोस्ती को अहमियत दी है, लेकिन वापस बांग्लादेश लौटने का फैसला मेरा अपना है। भारत दोस्त है, लेकिन बांग्लादेश मेरा घर है। मैं अनिश्चितकाल तक अपने देश से बाहर नहीं रह सकती।' अगस्त में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का फैसला कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था, 'मुझे पता है, वे मुझे जेल में डाल सकते हैं या मेरी जान ले सकते हैं। मैं अपने लोगों के साथ रहने के लिए घर वापस जाऊंगी।'

गंदे टॉयलेट की फोटो भेजिए, FASTag में आएंगे ₹1000; NHAI ने बताया पूरा तरीका

नई दिल्ली हाईवे पर सफर करते हुए बहुत से लोगों की शिकायत टॉयलेट से जुड़ी हुई होती है. सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर कई पब्लिक टॉयलेट बनवाए हैं. लेकिन लोगों की शिकायत वहां सफाई को लेकर होती है. उचित साफ-सफाई ना होने की वजह से लोग हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बने इन टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।  लोगों को होने वाली इस असुविधा को लेकर एनएचएआई (NHAI) ने एक प्लान तैयार किया है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एक स्कीम का ऐलान किया है, जिसके तहत गंदे टॉयलेट की जानकारी देने पर लोगों को रिवॉर्ड मिलेगा. आइए जानते हैं क्या है नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की योजना।  कब शुरू हुई थी ये स्कीम? ये योजना सितंबर 2025 में लॉन्च हुए क्लिन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज का हिस्सा है. एनएचएआई ने इस योजना को 30 जून 2027 तक के लिए बढ़ा दिया है. कई लोगों ने इस योजना का फायदा उठाया है. उन्होंने एनएचएआई को गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर फास्टैग रिचार्ज कमाया है।  2026 में अब तक 429 कम्यूटर्स ने गंदे टॉयलेट की जानकारी देकर 1000 रुपये का फास्टैग रिचार्ज हासिल किया है. इस स्कीम का फायदा नेशनल हाईवे पर चलने वाले सभी कम्यूटर्स उठा सकते हैं. उन्हें इसमें हिस्सा लेने के लिए साफ तस्वीर अपलोड करनी होगी. राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप पर जियो-टैगिंग और टाइम-स्टैम्प के साथ फोटो को अपलोड करना होगा।  देनी होगी ये जानकारियां इसके अलावा यूजर्स को अपनी बेसिक जानकारी भी देनी होगी. इसके तहत उन्हें अपना नाम, लोकेशन, व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी फोटो सबमिट करते हुए देनी होगी. फोटो और डेटा को एनालाइज करने के बाद सभी वैध व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर से मिली ऐसी जानकारी के लिए उन्हें इंस्टैंट 1000 रुपये का रिवॉर्ड मिलेगा।  ये रिवॉर्ड फास्टैग रिचार्ज के रूप में मिलेगा, जो लिंक व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर वाले अकाउंट में क्रेडिट होगा. पूरे स्कीम के दौरान एक गाड़ी को सिर्फ एक बार ही रिवॉर्ड मिलेगा. ये रिवॉर्ड नॉन-ट्रांसफरेबल होगा और इसे कैश में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।   ऐसे मामले में जहां एक ही फैसिलिटी के लिए कई शिकायतें की गई हो. वहां पर जिसने सबसे पहले शिकायत की होगी, उसे इसका फायदा मिलेगा. ये स्कीम सिर्फ एनएचएआई के तहत आने वाले टॉयलेट फैसिलिटी पर लागू होती है. एनएचएआई ने  इसके बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी दी है। 

क्या पानी में समा जाएगी मुंबई? बढ़ते समुद्री स्तर पर UN की चेतावनी, 1.4 करोड़ लोग खतरे में

मुंबई क्या एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब मुंबई के कुछ हिस्सों का पता तो वही रहे, लेकिन जमीन समुद्र के नीचे चली जाए? यह सवाल किसी साइंस फिक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट का है.  UN महासचिव की रिपोर्ट में  मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए चेतावनी दी गई है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आने वाले दशकों में इन शहरों के निचले इलाकों को हमेशा के लिए पानी में डूबो (Permanent Inundation) सकता है. हालात अगर इसी दिशा में बढ़ते रहे तो लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग इस खतरे की जद में हैं।  आखिर यह रिपोर्ट है क्या और किसने जारी की? यह चेतावनी UN महासचिव की रिपोर्ट"Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address it" में दी गई है. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा के दस्तावेज़ A/81/74 के रूप में दर्ज है. रिपोर्ट में दुनिया भर में बढ़ते समुद्री जलस्तर और उससे पैदा होने वाले खतरों का आकलन किया गया है.रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यहां सबसे बड़ा खतरा आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि लोगों के घरों और बस्तियों पर पड़ सकता है।  क्या सचमुच डूब सकते हैं मुंबई और कोलकाता? यहां एक बात समझना जरूरी है. रिपोर्ट यह नहीं कहती कि पूरा मुंबई, पूरा कोलकाता या पूरा ढाका समुद्र में समा जाएगा. लेकिन रिपोर्ट साफ तौर पर चेतावनी देती है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर इन शहरों के निचले इलाकों में Permanent Inundation यानी ऐसा जलभराव पैदा कर सकता है जो अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बना रहे. इसी वजह से लाखों लोगों के घर प्रभावित होने की बात कही गई है.यानी कहानी केवल बाढ़ की नहीं है. चिंता इस बात की है कि अगर समुद्र लगातार आगे बढ़ता रहा तो कुछ इलाकों में लोगों के लिए रहना मुश्किल हो सकता है।  मुंबई के लिए खतरा दूसरों से ज्यादा क्यों माना जा रहा? रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र किनारे बसे लगभग सभी बड़े शहर खतरे में हैं, लेकिन UN रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के सामने कुछ अतिरिक्त चुनौतियां भी हैं.रिपोर्ट में जमीन धंसने (Land Subsidence), भूजल में खारे पानी के प्रवेश और समुद्री तूफानों से आने वाली ऊंची लहरों का जिक्र किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब ये सभी कारक समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ जुड़ते हैं, तब खतरा और बढ़ जाता है।  आसान भाषा में समझें तो अगर समुद्र का पानी लगातार आगे बढ़ता है, तो उसका असर सिर्फ समुद्र किनारे की जमीन तक सीमित नहीं रहेगा. खारा पानी पीने के पानी के स्रोतों तक पहुंच सकता है, कई इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है और समुद्री तूफानों के दौरान होने वाला नुकसान भी पहले से ज्यादा बढ़ सकता है।  UN रिपोर्ट यह भी कहती है कि मुंबई जैसे शहरों में बढ़ता समुद्री जलस्तर ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग और सैनिटेशन जैसे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट में मुंबई को सिर्फ एक तटीय शहर नहीं, बल्कि उन बड़े महानगरों में गिना गया है जिन्हें आने वाले दशकों में सबसे ज्यादा तैयारी करने की जरूरत पड़ सकती है.मुंबई को लेकर इससे पहले भी कई रिपोर्टें चिंता जता चुकी हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की क्लाइमेट एक्शन प्लान रिपोर्ट में भी समुद्र के बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन के असर का जिक्र किया गया था।  UN को अचानक इतनी चिंता क्यों हुई? दरअसल समुद्र अब पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्री जलस्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ रहा था. लेकिन 2024 में यह बढ़ोतरी 5.9 मिलीमीटर रही, जो रिकॉर्ड स्तर है.रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में 2100 तक कम से कम 0.5 मीटर समुद्री जलस्तर वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है. वहीं कुछ रिसर्च में यह बढ़ोतरी 2 मीटर तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।  सिर्फ मुंबई नहीं, दुनिया के सैकड़ों शहरों पर खतरा UN रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की करीब 77 करोड़ आबादी ऐसे तटीय इलाकों में रहती है जो ऊंचे ज्वार के स्तर से 5 मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं. रिपोर्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश की राजधानी ढाका का विशेष रूप से जिक्र किया गया है.इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी का असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहने वाला. दुनिया के कई बड़े तटीय शहरों और निचले इलाकों को भी आने वाले सालों में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. रिपोर्ट में न्यूयॉर्क, मियामी और चीन के ग्वांगझोउ जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वहां सबसे बड़ा खतरा अरबों डॉलर की संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान का है, जबकि दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी चिंता लोगों के घर और आबादी का पलायन है। 

गाड़ी चलाने वालों के लिए बड़ा बदलाव, हर ट्रैफिक उल्लंघन पर कटेंगे लाइसेंस के पॉइंट; अच्छे ड्राइवरों को मिलेगा इनाम

नई दिल्ली भारत में जल्द ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को लेकर नियम बदल सकता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय DL और RC के लिए एक ग्रेडेड पॉइंट्स सिस्टम लागू करने पर विचार कर रहा है. इससे बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित व्यवस्था में ड्राइवर को इनाम देने का भी प्रावधान होगा. ये इनाम उनको दिया जाएगा जो जिम्मेदारी से गाड़ी चलाते हैं और जिनका ड्राइविंग रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहता है।  क्या है प्रस्ताव? सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के 66वें सालाना सम्मेलन के दौरान नितिन गडकरी ने कहा मंत्रालय एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को सीधे ड्राइविंग लाइसेंस के रिकॉर्ड से जोड़ेगा।  उन्होंने आगे कहा, "मेरा मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है." इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स काटे जाएंगे. इसमें जैसे ही पेनाल्टी एक तय सीमा (थ्रेशोल्ड) तक पहुंचेगी, प्रशासन लाइसेंस धारक के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा. गडकरी ने कहा, "हर नियम उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स कटेंगे. इसके अलावा एक तय लिमिट के बाद लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल भी हो जाएगा।  जिम्मेदार ड्राइवर्स को मिलेंगे रिवॉर्ड्स प्रस्तावित व्यवस्था केवल सजा या पेनाल्टी तक ही सीमित नहीं है. गडकरी ने कहा कि अच्छे ड्राइविंग रिकॉर्ड वाले वाहन चालकों को फायदे दिए जा सकते हैं. जिसमें संभवतः इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव्स भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, इन संभावित इंसेंटिव्स के रूपरेखा को लेकर अभी जानकारी नहीं दी गई है।  पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम सिर्फ एक बार चालान भरने के मुकाबले ड्राइविंग के पूरे रिकॉर्ड पर लगातार नजर रखेगा. आसान भाषा में ऐसे समझें बार-बार ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप करना या खतरनाक ड्राइविंग जैसे मामलों को अलग-अलग घटना मानने के बजाय एक साथ जोड़कर देखा जाएगा. जिससे लाइसेंस को रिव्यू किया जा सकेगा।  ड्राइवर के बिहेवियर पर भी फोकस गडकरी ने कहा कि भारत में रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने के प्रयासों में चालकों का व्यवहार (ड्राइवर बिहेवियर) सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. उन्होंने कहा, "ड्राइवरों का बर्ताव एक बड़ी समस्या है. अब हम इसके लिए कई कदम उठा रहे हैं।  उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, उन्हें अपने गलत रवैये के नतीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "हम लगातार गलतियां करते हैं और फिर सीखते हैं, यह सही नहीं होगा. हमें ऐसे लोगों पर सख्ती करनी होगी जहां उनकी गलतियां ही हादसों और नतीजों के लिए जिम्मेदार होती हैं।  इस प्रस्ताव पर बड़े स्तर पर सड़क-सुरक्षा पहलों के साथ चर्चा की गई. इसमें Bharat NCAP 2.0 भी शामिल है, जिसे गडकरी ने अक्टूबर 2027 के लिए प्लान बताया है. व्हीकल-सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम के अगले फेज में केवल क्रैश परफॉर्मेंस ही नहीं, बल्कि सेफ्टी से जुड़ी पूरी चेन पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।  बाइक टैक्सी सर्विस पर भी जोर केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ये भी घोषणा की कि प्राइवेट मोटरसाइकिल मालिकों को बाइक टैक्सी सर्विस चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने राज्य सरकारों को इन सर्विसेज को कानूनी मान्यता देने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने बताया कि इस पहल से लगभग आठ करोड़ लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। 

भारत-बेल्जियम की बढ़ी डिफेंस पार्टनरशिप, अंडरवाटर रोबोट से Zorawar टैंक तक मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली सोचो अगर यूरोप की यह टॉप-नॉच मिलिट्री टेक्नोलॉजी भारत में आ गई, तो सीन क्या होगा? चीन-पाकिस्तान तो सोच में ही पड़ जाएंगे! बेल्जियम अपने साथ 15 रक्षा दिग्गजों की पूरी टोली लेकर आया है जो भारत को सुपर-एडवांस टेक ऑफर कर सकते हैं. अपने स्वदेशी जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला किलर 3105 टरेट हो या प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (जो Mach 2+ की सुपरसोनिक स्पीड से वार करते हैं), सब टेबल पर है. समंदर के नीचे माइन्स का सफाया करने वाले अंडरवाटर रोबोट्स से लेकर हर साल 10 करोड़ एम्युनिशन राउंड्स बनाने का मास्टरप्लान तक. बेल्जियम भारत को मेक इन इंडिया के तहत सब ऑफर करने को तैयार है. बॉस, यह टेक ट्रांसफर हुआ तो भारत डिफेंस वर्ल्ड में सिर्फ खरीदार नहीं, सीधा बॉस बनकर उभरेगा. चलिए हम आपको बेल्जियम के टॉप हथियारों के बारे में विस्‍तार में बताते हैं।  कौन से वेपन्स बेल्जियम भारत को देने जा रहा? 1. जोरावर टैंक का ‘हेड’ (John Cockerill 3105 Turret) सीन क्या है: जोरावर भारत का वो हल्का टैंक है जो चीन बॉर्डर पर लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में दुश्मनों की बजाएगा।  • पावर: बेल्जियम इस टैंक का मुख्य सिर (टरेट) बना रहा है. इसमें 105mm की तोप है जो 4 किमी दूर से ही टारगेट उड़ा देती है. भारी नहीं है, इसलिए पहाड़ों पर मक्खन की तरह चलेगा।  2. 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (Thales Rocket) • सीन क्या है: ये वो रॉकेट है जो अपने प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर्स में फिट होगा. • पावर: साउंड की स्पीड से भी 2 गुना तेज (Mach 2+) भागता है. 9 किमी तक की रेंज में सटीक लेजर निशाना लगाता है. 2027 तक ये पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ बनने लगेगा।  3. पानी के अंदर माइन ढूंढने वाला रोबोट (Exail Mine Sweeper) • सीन क्या है: इंडियन नेवी के लिए स्पेशल अंडरवाटर रोबोटिक टूलबॉक्स. • पावर: समंदर में 300 मीटर नीचे जाकर दुश्मनों की बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को खुद ही ढूंढेगा और डिफ्यूज कर देगा।  4. 10 करोड़ राउंड एम्युनिशन फैक्ट्री (New Lachaussée): • सीन क्या है: गोलियों की कोई कमी नहीं होने वाली. • पावर: बेल्जियम कंपनी भारत में एक ऐसा प्लांट लगा रही है जो हर साल 10 करोड़ धांसू गोलियां/गोला-बारूद बनाएगा।    वेपन / टेक पार्टनर कंपनी क्या है खास बात? असली काम कहाँ आएगा? 3105 टैंक टरेट John Cockerill 105mm तोप, 4 किमी रेंज, लाइटवेट जोरावर टैंक (चीन सीमा पर तैनाती) 70mm लेजर रॉकेट Thales Belgium स्पीड: Mach 2+, 9 किमी रेंज प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए अंडरवाटर रोबोट्स Exail Robotics 300m गहराई में माइन्स ढूंढेगा इंडियन नेवी के जहाजों हेतु एम्युनिशन फैक्ट्री New Lachaussée 10 करोड़ राउंड्स/साल आर्मी के लिए गोलियों का बैकअप बॉटम लाइन 1. नो मोर इंपोर्ट: भारत अब सिर्फ बाहर से हथियार खरीदेगा नहीं बल्कि बेल्जियम के साथ मिलकर खुद बनाएगा. 2. चीन-पाक हैरान: पहाड़ों पर जोरावर टैंक और हवा में प्रचंड हेलीकॉप्टर के नए रॉकेट दुश्मनों का गेम बजाने के लिए काफी हैं. 3. फ्यूचर एक्सपोर्ट: आने वाले टाइम में भारत इन हथियारों को दूसरे देशों को बेचकर खुद मोटा पैसा छापेगा. सवाल-जवाब 1. इस भारत-बेल्जियम बातचीत के सबसे बड़ा हाइलाइट क्या है? 10 MoUs जिससे भारत में ही रॉकेट, टैंक के टरेट, रोबोट्स और गोला-बारूद की डायरेक्ट मैन्युफैक्चरिंग होने की संभावना है. 2. जोरावर टैंक में बेल्जियम क्या अलग कर रहा है? बेल्जियम जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला हल्का और सुपर-अकाउंटेबल ‘टरेट’ (तोप वाला हिस्सा) दे रहा है जो पहाड़ों पर तबाही मचाएगा. 3. बेल्जियम वाले रॉकेट्स भारत में कब तक बन सकते हैं? अगर सबकुछ फाइनल हुआ था थैलेस बेल्जियम और कल्याणी ग्रुप मिलकर 2027 की शुरुआत तक भारत में 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट बना सकते है. 4. इंडियन नेवी को इस डील से क्या फायदे मिल सकते है? नेवी को पानी के अंदर काम करने वाले हाई-टेक अंडरवाटर रोबोट्स मिल सकते हैं, जो समंदर में छिपे माइन्स और खतरों को चुटकी में खत्म कर देंगे. 5. क्या भारत में गोलियों की नई फैक्ट्री भी लग सकती है? हाँ भाई! बेल्जियम की कंपनी भारत में सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद बनाने वाली एक विशाल फैक्ट्री सेटअप कर रही है.      

दक्षिण भारत में बुलेट ट्रेन का मेगा प्लान, बेंगलुरु-हैदराबाद-चेन्नई समेत 20+ शहर होंगे कनेक्ट

बेंगलुरु मुंबई, हैदराबाद की तरह बेंगलुरु भी बुलेट ट्रेन का बड़ा हब बनेगा. बेंगलुरु से निकलने वाले ये हाईस्पीड रेल कॉरिडोर साउथ इंडिया के तीन राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बड़े शहरों को हाई स्पीड रेल कनेक्टिविटी देंगे. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRCL) मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद अन्य रूट की डीपीआर, अलाइनमेंट की औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है. अभी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट पर काम चल रहा है. इसके अलावा दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन और दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन रूट पर भी मंथन चल रहा है।  चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु दक्षिण भारत का सबसे अहम बुलेट ट्रेन रूट है, जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को जोड़ता है. 463 किलोमीटर के कॉरिडोर में चेन्नई से बेंगलुरु 306 किमी और बेंगलुरु से मैसूरु 157 किमी का रूट है. इससे बेंगलुरु से चेन्नई का सफर 5–6 घंटे के बजाय सिर्फ सवा घंटे का रह जाएगा. बेंगलुरु से मैसूरु का सफर 2 घंटे से घटकर लगभग 30-45 मिनट रह जाएगी. ये कॉरिडोर बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे के समानांतर चलेगा. इसमें चेन्नई सेंट्रल, पूनमल्ली, चित्तूर (आंध्र प्रदेश), कोलार, कोडिहल्ली, व्हाइटफील्ड, बयप्पनहल्ली (बेंगलुरु), इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी, कैंगेरी, मांड्या और मैसूरु स्टेशन हो सकते हैं।  हैदराबाद-बेंगलुरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर यह भारत के दो सबसे बड़े आईटी हब बेंगलुरु और हैदराबाद को जोड़ेगा. 610 किमी के इस रूट पर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ेंगी. अभी ट्रेन से 10 से 12 घंटे का सफर घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा. ये रूट तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाके और उत्तरी कर्नाटक से होकर जाएगा. हैदराबाद (शमशाबाद एयरपोर्ट), महबूबनगर, करनूल, अनंतपुर, चिकबल्लापुर और बेंगलुरु का कैंपेगौड़ा एयरपोर्ट इसका स्टेशन प्रस्तावित है।  बेंगलुरु-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर  बेंगलुरु को सीधे पुणे और मुंबई से भी जोड़े जाने की तैयारी है. ये 850 से 900 किलोमीटर लंबा रूट होगा. अभी रेल से 18–20 घंटे का सफर लगता है तो 4 से 5 घंटे रह जाएगा. कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा सीमा से सटे इलाके इसके दायरे में आएंगे. बेंगलुरु, तुमकुरु, दावणगेरे, हुबली-धारवाड़, बेलगावी, कोल्हापुर, पुणे और मुंबई भी बुलेट ट्रेन के स्टेशन होंगे।  DPR और अलाइनमेंट पर काम ये हाईस्पीड कॉरिडोर जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी और स्टैंडर्ड गेज पर बनाए जाएंगे. NHSRCL इन बुलेट ट्रेन रूट के लिए  LiDAR सर्वे, अलाइनमेंट ड्राफ्टिंग और ट्रैफिक से जुड़े अध्ययन कर रहा है.घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों जैसे बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद शमशाबाद में सुरंगें और बाकी मैदानी भागों में एलिवेटेड वायडक्ट बनाए जाएंगे। 

तेल चोरी की कोशिश बनी जानलेवा, नाइजीरिया में जहरीली गैस की चपेट में आए 37 लोग

 लागोस  शुक्रवार को नाइजीरिया के एक पर्यावरण समूह ने दावा किया कि तेल पाइपलाइन से तेल चुराने की कोशिश के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से कम से कम 37 लोगों की जान चली गई। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। यूथ्स एंड एनवायरनमेंटल एडवोकेसी सेंटर के मुताबिक, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार आधी रात के आसपास रिवर्स राज्य के ओक्रिका इलाके में हुआ। बताया जा रहा है कि ओकारी जेटी पर एक बड़े जहाज में तेल भरा जा रहा था, तभी कुछ संदिग्ध चोर पाइपलाइन में तेज दबाव वाले पेट्रोलियम उत्पाद को अवैध तरीके से अपनी नावों में भरने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान वहां जहरीली गैस का रिसाव हो गया। समूह का कहना है कि कई लोग अब भी लापता हैं और नदी में कुछ शव तैरते हुए देखे गए हैं। पाइपलाइन से तेल चोरी का संकट पुलिस का कहना है कि पीड़ितों की मौत कच्चा तेल चुराने की कोशिश के दौरान हुई। यह घटना नाइजर डेल्टा में कच्चे तेल की चोरी और पाइपलाइन में तोड़फोड़ की गंभीर और लगातार बनी हुई समस्या है। अक्टूबर 2023 के बाद से यह इस तरह की सबसे बड़ी घटना है, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने का दावा किया गया है। इस क्षेत्र में अवैध रूप से तेल निकालने की घटनाओं के कारण अक्सर जानलेवा हादसे और भारी प्रदूषण होता है, जिससे नाइजीरिया के तेल उद्योग को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, रिवर्स पुलिस के प्रवक्ता एएसपी ब्लेसिंग काबोर्लो अगाबे ने कहा कि घटना से जुड़े हालात का पता लगाने और तथ्यों की पुष्टि के लिए गहन जांच चल रही है। घटना के कारणों और मरने वालों की सही संख्या की पुष्टि नहीं कर सकी है। वहीं, नाइजीरिया सुरक्षा और नागरिक रक्षा कोर ने स्पष्ट किया है कि हताहतों की बताई जा रही संख्या की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा, घटना में शामिल रासायनिक पदार्थ की तकनीकी जांच की भी आवश्यकता है। कोर ने कहा कि वह मरने वालों, घायलों और लापता लोगों की सही संख्या का पता लगाने के लिए अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके साथ ही, किसी भी संभावित लापरवाही, स्थानीय मिलीभगत या आपराधिक मदद की भी जांच की जा रही है।  

Wall Street Journal में मोहन भागवत का विज्ञापन छाया, हिंदू अमेरिकी नेताओं ने कहा- बढ़ा गौरव

वॉशिंगटन   हिंदू-अमेरिकी नेताओं ने  'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत वाले एक पूरे पेज के पेड विज्ञापन का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता के प्रति सम्मान का संदेश देने वाले इस विज्ञापन ने समुदाय को अपनी विरासत पर गर्व महसूस कराया। यह पेड विज्ञापन अखबार के 3 सितंबर के अंक के पेज ए5 पर छपा था। इसमें भागवत की एक तस्वीर और 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुए 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' में उनके भाषण का एक संदेश शामिल था। विज्ञापन में भागवत के हवाले से कहा गया, "हमें अपनी एकता और विविधता का जश्न मनाना चाहिए, उसका सम्मान करना चाहिए और उसे स्वीकार करना चाहिए। भारत की सभ्यतागत सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' पर आधारित है, यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। भारत इस विविधता का जीता-जागता उदाहरण है।" विज्ञापन में भागवत को भारत में 'दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन', राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख के तौर पर बताया गया है। इसमें बताया गया कि न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुए 'यूनिवर्सल वननेस' इवेंट में अमेरिका के 39 राज्यों के 853 शहरों से 250 संगठनों के 5,000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पेज पर छपी जानकारी के अनुसार, इस विज्ञापन का खर्च 'आरएसएस फ्रेंड्स' ने उठाया था। जाने-माने कम्युनिटी लीडर और बिजनेसमैन रमेश भूताडा ने कहा कि यह विज्ञापन हिंदू अमेरिकियों के लिए गर्व की बात है। भूताडा ने कहा, "वॉल स्ट्रीट जर्नल में पूरे पेज का विज्ञापन देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। यह हिंदू धर्म की असली भावना को दिखाता है और सभी हिंदू अमेरिकियों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस कराता है।" एएचईएडी फोरम के डायरेक्टर सुदेश अग्रवाल ने कहा, "अमेरिका में हिंदू समुदाय ने साफ तौर पर यह दिखाया है कि वे इंसानियत की सामूहिक तरक्की के लिए दूसरे सभी समुदायों के साथ बातचीत और सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बहुत जरूरी है कि हम इस प्रतिबद्धता को असल कामों में बदलें। हम पूरी लगन के साथ ऐसा करेंगे।" उन्होंने कहा, "हम 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने इस संदेश को जनता तक पहुंचाने के लिए इतना प्रतिष्ठित मंच दिया।" इस विज्ञापन में भागवत की बातों को 'सबकी एकता' (यूनिवर्सल वननेस) के व्यापक विचार से जोड़ा गया था। इसका मुख्य संदेश विविधता का सम्मान करना और भारतीय सभ्यता के 'वसुधैव कुटुंबकम्' के विचार पर ज़ोर देना था। संस्कृत के इस वाक्यांश का आम तौर पर अर्थ होता है, "पूरी दुनिया एक परिवार है।" भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक यानी प्रमुख हैं। यह एक हिंदू स्वयंसेवी संगठन है, जिसकी स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी। संगठन 2025 में अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है और भारत में इसकी स्थानीय शाखाओं और इससे जुड़े संगठनों का एक बड़ा नेटवर्क है। 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुए कार्यक्रम में पूरे अमेरिका से हिंदू-अमेरिकी और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह कार्यक्रम सबकी एकता, सामुदायिक सहयोग और अलग-अलग तरह के समाजों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने में भारतीय सभ्यता के मूल्यों की भूमिका पर केंद्रित था।