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कंबोडिया बॉर्डर पर बमबारी, ट्रंप के सीजफायर दावे के विपरीत, थाईलैंड ने दिया कड़ा बयान

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीजफायर कराने के दावे के बावजूद दोनों देशों के बीच सीमा पर लड़ाई थमती नहीं दिख रही है. कंबोडिया ने दावा किया है कि शनिवार सुबह भी थाई सेनाएं विवादित सीमा पर हमले कर रही हैं, जबकि थाईलैंड ने उलटे कंबोडिया पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. फिलहाल, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवादित सीमा पर सैन्य टकराव नहीं रुक रहा. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई है. कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि थाई सैन्य बलों ने सीमा पार हमले बंद नहीं किए हैं. मंत्रालय के मुताबिक, थाई सेनाएं अब भी बमबारी कर रही हैं और इन हमलों में फाइटर जेट्स का भी इस्तेमाल किया गया है. कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने बयान में कहा, थाई सेनाओं ने अब तक बमबारी बंद नहीं की है और हमले लगातार जारी हैं. थाईलैंड का पलटवार, कंबोडिया पर गंभीर आरोप वहीं, थाईलैंड की सेना ने कंबोडिया के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है. थाई सेना का कहना है कि कंबोडिया बार-बार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है. थाईलैंड के मुताबिक कंबोडियाई बलों ने नागरिक इलाकों को निशाना बनाया है और सीमा क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं. थाईलैंड का आया बयान… बॉर्डर पर बमबारी के बीच थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल का बयान आया. उन्होंने कहा, यह बिल्कुल भी कोई रोड एक्सीडेंट नहीं है. थाईलैंड तब तक सैन्य कार्रवाई करता रहेगा, जब तक हमारी जमीन और हमारे लोगों के लिए कोई और नुकसान या खतरा खत्म नहीं हो जाता. मैं यह बात पूरी तरह स्पष्ट करना चाहता हूं. आज सुबह हमारी कार्रवाइयों ने खुद सब कुछ बता दिया है. ट्रंप का दावा… लेकिन दोनों देशों की चुप्पी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत से फोन पर बातचीत के बाद कहा था कि दोनों देश शुक्रवार से ही सभी तरह की गोलीबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं. हालांकि ट्रंप के इस दावे के बाद दोनों देशों के नेताओं के बयानों में किसी औपचारिक सीजफायर समझौते का जिक्र नहीं किया गया. थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने साफ कहा कि कोई सीजफायर नहीं हुआ है. जब ट्रंप के दावे पर सवाल किया गया तो थाई विदेश मंत्रालय ने पत्रकारों को प्रधानमंत्री के बयान का हवाला दिया. कंबोडिया ने दोहराई शांतिपूर्ण समाधान की बात कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने शनिवार को फेसबुक पर जारी एक बयान में ट्रंप के साथ हुई बातचीत और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ पहले हुई चर्चा का जिक्र किया. मानेत ने कहा कि कंबोडिया अब भी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है. उन्होंने कहा कि कंबोडिया अक्टूबर में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुए पहले के समझौते के तहत ही विवाद सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है. ट्रंप ने सीजफायर पर क्या कहा था? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि थाईलैंड और कंबोडिया शुक्रवार शाम से अपने जॉइंट बॉर्डर पर सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत से अलग-अलग बातचीत की. उन्होंने इन चर्चाओं को बेहद सकारात्मक बताया और कहा कि इनका मकसद दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद में हालिया तनाव को खत्म करना था. ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर जारी संदेश के मुताबिक, दोनों नेताओं ने तुरंत सभी तरह की गोलीबारी रोकने और उस शांति ढांचे पर वापस लौटने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसे पहले अमेरिका की भूमिका और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से तय किया गया था. ट्रंप ने कहा, वे इस शाम से सभी तरह की फायरिंग रोकने पर सहमत हो गए हैं और मेरे साथ तथा उनके साथ मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मदद से किए गए मूल शांति समझौते पर वापस लौटेंगे. यह नए सीजफायर का ऐलान ऐसे समय किया गया था, जब बीते कुछ दिनों में हुए घातक संघर्षों के चलते हजारों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े थे और इस साल की शुरुआत में मलेशिया की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया था. ट्रंप ने अक्टूबर में मलेशिया में हुई फॉलो-अप बैठकों में भी हिस्सा लिया था. वे इस संघर्ष को उन कई विवादों में से एक बताते हैं, जिन्हें उनके मुताबिक उन्होंने सुलझाया है.

संसद हमले में जान गंवाने वाले सुरक्षाकर्मियों को PM मोदी समेत नेताओं ने याद किया, दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे नेता शनिवार को 2001 के पार्लियामेंट हमले की बरसी पर उस हमले में जान देने वाले सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित किए.इसके साथ ही देशभर में अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले सुरक्षाकर्मियों की याद में श्रद्धांजलि सभाएं की गईं और उनको याद किया गया.इससे पहले दिन में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसद हमले में अपनी जान देने वाले सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका बलिदान देश हमेशा याद रखेगा. एक पोस्ट में, CM योगी आदित्यनाथ ने कहा, "'लोकतंत्र का मंदिर', भारतीय संसद भवन, साल 2001 में आज ही के दिन एक कायरतापूर्ण आतंकवादी हमला देखा था, जो देश की संप्रभुता, गरिमा और लोगों की शक्ति पर एक क्रूर हमला था. संसद और देश की गरिमा की रक्षा के लिए इस दिल दहला देने वाली घटना में अपनी जान देने वाले अमर वीरों को विनम्र श्रद्धांजलि. देश हमेशा उनका आभारी रहेगा. जय हिंद!" केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस भयानक आतंकवादी हमले के दौरान भारतीय संसद की रक्षा करते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया.     गडकरी ने कहा, "13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर आतंकवादी हमले के दौरान लोकतंत्र के मंदिर की रक्षा के लिए अपनी जान देने वाले बहादुरों को सलाम. देश की रक्षा के लिए उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा."  सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स ने भी 2001 के पार्लियामेंट टेरर अटैक की बरसी पर 88 बटालियन की कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी को श्रद्धांजलि दी और उनके साहस और बलिदान को याद किया.     CRPF के X पोस्ट में लिखा था, "बहादुरों को श्रद्धांजलि… 13 दिसंबर 2001 को, दिल्ली में पार्लियामेंट पर हुए टेररिस्ट अटैक के दौरान, 88 बटालियन, #CRPF की कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी ने भारी फायरिंग के बीच टेररिस्ट का पीछा करके और अपने साथी जवानों को उनकी एक्टिविटीज के बारे में लगातार जानकारी देकर अदम्य साहस और बेमिसाल बहादुरी का परिचय दिया." पोस्ट में कहा गया, "उनके हिम्मत वाले कामों की वजह से, सभी 5 आतंकवादी मारे गए. इस घटना के दौरान, उन्हें गंभीर चोटें आईं और आखिरकार उन्होंने ड्यूटी की वेदी पर अपनी जान दे दी. उनके अदम्य साहस और असाधारण बहादुरी के लिए, उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. बहादुर 'बलिदानी' को #CRPF का हमेशा सलाम." 13 दिसंबर, 2001 को, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के पांच भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने नई दिल्ली में संसद परिसर में धावा बोल दिया और अंधाधुंध गोलियां चलाईं.     इस हमले में सुरक्षाकर्मियों और एक आम नागरिक समेत करीब 14 लोग मारे गए थे. यह आतंकी हमला संसद की कार्यवाही स्थगित होने के करीब 40 मिनट बाद हुआ था, और इमारत में करीब 100 सदस्य मौजूद थे. शुक्रवार को लोकसभा ने पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस, दिल्ली पुलिस और CRPF के उन बहादुर जवानों को दिल से श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 13 दिसंबर, 2001 को हुए आतंकवादी हमले के दौरान पार्लियामेंट की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था. स्पीकर ओम बिरला ने श्रद्धांजलि देने में सदन का नेतृत्व किया. सदन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में डटे रहकर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के अपने पक्के इरादे को दोहराया.

ईरान में मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी की फिर गिरफ्तारी, शोक सभा में जाने पर खामेनेई शासन हुआ चिढ़

तेहरान  ईरान में मानवाधिकारों को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती दिख रही है. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शुक्रवार को ईरानी सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर हिंसक तरीके से हिरासत में ले लिया. यह घटना उस समय हुई, जब वह दिवंगत मानवाधिकार वकील खोसरो अलीकोर्दी की स्मृति सभा में शामिल होने के लिए मशहद पहुंची थीं. 53 वर्षीय नरगिस मोहम्मदी हाल ही में मेडिकल ग्राउंड पर जेल से बाहर थीं और माना जा रहा था कि उन्हें दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा. उनकी फाउंडेशन के अनुसार, स्मृति सभा के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें जबरन पकड़ लिया. इस दौरान कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मोहम्मदी बिना हिजाब के भीड़ को संबोधित करती और नारे लगवाती दिखीं, जिसके बाद मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए. मशहद के गवर्नर हसन होसैनी ने पुष्टि की कि कुछ लोगों को "निवारक कार्रवाई" के तहत हिरासत में लिया गया, हालांकि उन्होंने बल प्रयोग के आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की. मानवाधिकार संगठन 'सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान' के प्रमुख हादी घाएमी ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया. मानवाधिकार संगठन कर सकते हैं विरोध यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब ईरान आर्थिक दबाव, प्रतिबंधों और संभावित क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं के बीच अपने भीतर असहमति की आवाजों पर सख्ती बढ़ा रहा है. मोहम्मदी की हिरासत से पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों की नाराजगी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर तब जब ईरान अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता बहाल करने के संकेत दे रहा है. गौरतलब है कि नरगिस मोहम्मदी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं. उन्हें पहले दिल का दौरा पड़ चुका है और हाल ही में बड़ी सर्जरी भी हुई थी. डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि जेल वापसी उनके जीवन के लिए खतरा बन सकती है. इसके बावजूद, उन्होंने जेल से बाहर रहते हुए भी विरोध प्रदर्शनों और मानवाधिकार अभियानों में सक्रिय भागीदारी जारी रखी. स्मृति सभा में शामिल होने की वजह से पहले भी हुईं अरेस्ट पिछले तीन दशकों में नरगिस मोहम्मदी कई बार जेल जा चुकी हैं और उन पर राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप लगाए गए हैं. दिलचस्प बात यह है कि उनकी पिछली गिरफ्तारी भी एक स्मृति सभा में शामिल होने के बाद हुई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान में शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि तक अब सत्ता को चुनौती के रूप में देखी जा रही है.

NIA ने तमिलनाडु ISIS रेडिकलाइजेशन केस में 7 आरोपियों और KAEA सोसायटी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

चेन्नई   राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने तमिलनाडु ISIS रेडिकलाइजेशन और भर्ती मामले में शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों और एक रजिस्टर्ड सोसायटी के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. यह मामला 2023 से चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें कई युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए भड़काने और उकसाने के आरोप सामने आए हैं. चार्जशीट में शामिल सोसायटी का नाम कोवई अरेबिक एजुकेशनल एसोसिएशन (KAEA) है. NIA ने IPC और UAPA की कई धाराओं के तहत कार्रवाई की है. KAEA सोसायटी पर NIA की नजर NIA ने इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में KAEA सोसायटी को भी आरोपी बनाया है, जिसे एक कानूनी इकाई के तौर पर चार्ज किया गया है. यह वही संस्था है जिसके तहत कोवई अरेबिक कॉलेज संचालित होता है. जांच एजेंसी के अनुसार, इसी संस्था के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया और युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मोड़ा गया. सोसायटी की भूमिका की जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं. पहले भी दायर हो चुकी है चार्जशीट इससे पहले NIA ने इस केस में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. जिनमें मद्रास अरेबिक कॉलेज के प्रिंसिपल जमील बाशा भी शामिल थे. यह केस NIA की फाइल RC-01/2023/NIA/CHE का हिस्सा है. यह पूरा मामला अक्टूबर 2022 में हुई कोयंबटूर कार-बम ब्लास्ट की जांच से जुड़ा है, जिसमें शामिल 18 आरोपियों में से 14 आरोपी इसी कॉलेज के छात्र पाए गए थे. सातों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र NIA ने जिन सात आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है, वे सभी जमील बाशा के छात्र बताए जाते हैं. जिनके नाम मोहम्मद हुसैन, इर्शाथ, अहमद अली, अबू हनीफा, जवाहर सादिक, शैख दाऊद और राजा मोहम्मद हैं. इनमें से मोहम्मद हुसैन और इर्शाथ पहले दायर मूल चार्जशीट में भी आरोपी थे और अब उनके खिलाफ अतिरिक्त धाराओं में कार्रवाई की गई है. छात्रों के ISIS कनेक्शन की जांच जांच में सामने आया कि जिन छात्रों का नाम इस केस में सामने आया है, उनमें से कई का कनेक्शन पहले से ही कोयंबटूर कार-ब्लास्ट केस से जुड़ा है. इस घटना ने पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया था. अब इन छात्रों पर ISIS से प्रेरित मॉड्यूल में सक्रिय भूमिका निभाने, भड़काऊ कंटेंट फैलाने और युवाओं को गुमराह करने के आरोप हैं. अगस्त 2023 में शुरू हुआ था केस यह केस अगस्त 2023 में NIA की चेन्नई शाखा ने खुद संज्ञान लेते हुए दर्ज किया था. जांच के दौरान पता चला कि ISIS से प्रेरित एक कट्टरपंथी समूह, फ्री अरेबिक लैंग्वेज क्लासेस के नाम पर संवेदनशील और कमजोर युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों की ओर धकेल रहा था. यह पूरा नेटवर्क तमिलनाडु में तेज़ी से फैल रहा था. ऑनलाइन माध्यम बना हथियार NIA की जांच में सामने आया कि कट्टरपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया. Zoom, WhatsApp और Telegram जैसे ऐप्स पर अरबी भाषा की ऑनलाइन क्लासेस चलती थीं, जिनमें भड़काऊ और ISIS-प्रेरित प्रवचन सुनाए जाते थे. इन क्लासेस को युवाओं को प्रभावित करने के लिए एक साधन की तरह इस्तेमाल किया गया. रिकॉर्डेड लेक्चर्स से फैलाते थे जहर एजेंसी के अनुसार, इन ऑनलाइन सेशंस के अलावा, नियमित क्लासरूम में भी जमील बाशा के लाइव और प्री-रिकॉर्डेड लेक्चर दिखाए जाते थे. इन्हीं लेक्चर के जरिए छात्रों के मन में कट्टरपंथी विचारधारा भरी जा रही थी. धीरे-धीरे इन युवाओं को उकसाकर उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा था. अभी भी जारी है NIA की जांच NIA ने कहा है कि इस मामले में जांच अभी जारी है और एजेंसी का मकसद पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है. एजेंसी इस मॉड्यूल से जुड़े सभी कड़ियों को जोड़कर देश में फैल रहे आतंकवादी कट्टरपंथी नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

8वें वेतन आयोग में देरी, कर्मचारियों को एरियर मिलने की संभावना 2026 से, रिपोर्ट 2027 तक हो सकती है

नई दिल्ली  31 दिसंबर 2025 को 7वां वेतन आयोग का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, ऐसे में 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू किया जाना है, जिसकी संभावना कम है, क्योंकि केन्द्र की मोदी सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफ्रेंस को रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है, ऐसे में आयोग अप्रैल 2027 तक केन्द्र सरकार को सिफारिशें सौंपेगा और फिर सारे पहलुओं पर विचार करते हुए इसे अक्टूबर नवंबर 2027 तक लागू किया जा सकेगा, ऐसे में जनवरी 2026 से एरियर मिलेगा या नहीं, यह सवाल चर्चाओं में बना हुआ है। इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है ले्किन संकेत जरूर मिले है कि एरियर मिल सकता है।आईए जानते है विस्तार से… 1 जनवरी 2026 से मिलेगा कर्मचारियों को एरियर?     वर्तमान में केंद्र सरकार 50 लाख कर्मचारी और 68.72 लाख पेंशनर्स है, जिन्हें 8वें वेतन आयोग का लाभ मिलना है लेकिन 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। कर्मचारी संगठनों और सांसदों द्वारा इस बारे में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में चार सांसदों ने वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की तारीख के बारे में पूछा।     राज्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि इसे लागू करने की तारीख सरकार तय करेगी।आयोग की स्वीकृत सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार उचित धन का प्रावधान करेगी।बता दे कि 7वां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना और नवंबर 2015 में रिपोर्ट दी गई। इसके बाद करीब 2.5 साल बाद जून 2016 में इसे लागू किया गया लेकिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2016 से एरियर दिया गया।कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग में भी एरियर दिया जा सकता है, हालांकि सरकार की तरफ से अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। नए वेतन आयोग में डीए होगा शून्य? फिटमेंट फैक्टर पर पड़ेगा असर?     आमतौर पर वेतन आयोगों की अनुशंसाएं प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर लागू की जाती हैं। फरवरी 2014 में 7वें वेतन आयोग का गठन हुआ था और 1 जनवरी 2016 से उसकी सिफारिशें लागू की गई थीं।इसके लागू होते ही 2.57 फिटमेंट फैक्टर होने पर कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 7000 हजार रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये (14.3%) हो गई थी।अगर 7वें वेतन आयोग के फॉर्मूले पर 8वां वेतन आयोग लागू किया जाता है तो कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे 34560 या 51,480 रुपये हो सकती है। हालांकि कितनी सैलरी बढ़ेगी यह फिटमेंट फैक्‍टर और DA पर निर्भर करेगा।     7वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्‍टर 2.57 था, जो 8वें वेतन आयोग के तहत बढ़कर 2.28, 1.92 या फिर 2.86 तय हो सकता है और डीए शून्य हो जाएगा क्योंकि हर वेतन आयोग के लागू होने पर डीए ‘0’ हो जाता है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत है जो जुलाई से दिसंबर 2025 तक लागू रहेगा। जनवरी 2026 में इसके 60% तक जाने की उम्मीद है।विशेषज्ञों की मानें तो जब तक नया वेतन आयोग लागू नहीं होता तब तक DA बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में ही बढ़ेगा और आयोग के लागू होने के बाद मौजूदा DA बेसिक पे में मर्ज हो जाएगा, जिससे वेतन संरचना में बदलाव आएगा । 8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी?     7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर के कारण वेतन और पेंशन में वृद्धि के बाद केंद्रीय कर्माचारियों की न्यूनतम सैलरी 7,000 से बढ़कर 18,000 रूपये हो गई थी। 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.28, 1.92 या फिर 2.86 तय हो सकता है, जिससे वेतन में 30-50 फीसदी की वृद्धि हो सकती है।अगर 1.92 फिटमेंट फैक्टर होता है तो वेतन में 92% की वृद्धि यानि 18,000 रुपये से बढ़कर 34,560 रुपये हो जाएगा।     2.47 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया, तो 18,000 रुपये का बेसिक वेतन बढ़कर लगभग 44,460 रुपये हो सकता है।1.83 फिटमेंट फैक्टर होने पर बेसिक वेतन करीब 32,940 रुपये और 1.86 होने पर लगभग 33,480 रुपये तक हो सकता है। 2.86 फिटमेंट होने पर कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे 51,480 रुपये हो सकती है।     महंगाई राहत पेंशन पर एक निश्चित फीसदी के रूप में दी जाती है।जब पेंशन बढ़ती है, तो DR की वैल्यू खुद बढ़ जाती है।पुरानी पेंशन 20,000 रुपए है और DR 20% पर 4,000 रुपए और नई पेंशन 30,000 रुपए है और DR 20% तो 6,000 रुपए मिलेगी।इससे साफ है कि जितनी ज्यादा पेंशन बढ़ेगी, उतनी ज्यादा ही महंगाई राहत बढ़ेगी। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.86 तक जाता है, तो 25,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर 71,500 हो सकती है और कुल सैलरी (DA और HRA समेत) 90,000 से ज्यादा पहुंच सकती है। आठवें वेतन आयोग से किसे लाभ होगा?     केंद्र सरकार के कर्मचारी     रक्षा कर्मी     केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के कर्मचारी     रेलवे कर्मचारी     केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CPC) को अपनाने वाले स्वायत्त और वैधानिक निकाय     केंद्र सरकार के पेंशनभोगी  

आसमानी ब्रह्मास्त्र: 7400 KMPH की गति, ब्रह्मोस से भी ज्यादा खतरनाक, दुश्मन को पलक झपकते ढेर कर दे

नई दिल्ली भारत ग्‍लोबल लेवल पर सामरिक और रणनीतिक तौर पर एक बड़ा प्‍लेयर है. डिफेंस में भी अपनी अलग पहचान रखता है. पहलगाम की बैसरन घाटी में भारत की इसी पहचान को चुनौती देने की नापाक कोशिश की गई थी. भारत ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च कर इसका माकूल और मुंहतोड़ जवाब दिया था. पाकिस्‍तान के साथ टकराव के दौरान चीन और तुर्की जैसे देशों ने खुलकर आतंकियों को पनाह देने वाले देश का सपोर्ट किया था. पश्चिम से लेकर उत्‍तर और पूरब तक दुश्‍मनों के फैलाव को देखते हुए भारत अब एक साथ दो मोर्चों पर सैन्‍य टकराव जैसे हालात से निपटने की तैयारी कर रहा है. इस सल‍िसिले में अल्‍ट्रा मॉडर्न फाइटर जेट, एयर डिफेंस सिस्‍टम के साथ ही कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी से लैस बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल डेवलप करने में भी जुटा है. डिफेंस इक्विपमेंट की खरीद पर भी हजारों-लाखों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसी रणनीति के तहत भारत ने ब्रह्मोस से भी खतरनाक एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने की कोशिश में लगा है. इसी क्रम में भारत-रूस के बीच अत्‍याधुनिक मिसाइल खरीद को लेकर जल्‍द ही एक डील पक्‍की होने वाली है. बताया जा रहा है कि इससे भारत के एयर पावर में काफी वृद्धि होगी. Su-30MKI फाइटर जेट की ताकत भी कई गुना तक बढ़ जाएगी. दरअसल, भारत मित्र देश रूस से लॉन्‍ग रेंज की एयर-टू-एयर R-37M मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया में है. ऐसी 300 मिसाइलें इंपोर्ट करने की योजना है. डील पर जल्‍द ही मुहर लगने की उम्‍मीद है. डील डन होने के बाद 12 से 18 महीनों में इसकी डिलीवरी शुरू हो जाएगी. भारत अपनी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. भारतीय वायु सेना (IAF) और रूस के बीच लगभग 300 R-37M (नाटो नाम: AA-13 Axehead) बहुत लंबी दूरी तक मार करने वाली एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद पर समझौता लगभग तय हो चुका है. इस सौदे से जुड़े कई सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. उम्मीद है कि समझौते के औपचारिक होते ही इन मिसाइलों की डिलीवरी 12 से 18 महीनों के भीतर शुरू हो जाएगी. R-37M मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल मैक 6 यानी 7400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार. यह एक क्रूज मिसाइल है, जो बेहद खतरनाक है. एयर-टू-एयर बैलिस्टिक मिसाइल में बेहद खतरनाक. इसकी रफ्तार मैक 2.8 या 3 यानी 3700 KMPH है. रूस-यूक्रेन जंग में इसने अपनी उपयोगिता साबित की है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने अपनी ताकत दिखाई. चीन के PL-15 का मुकम्‍मल जवाब है यह मिसाइल. जल, थल और नभ से अटैक करने में पूरी तरह से सक्षम Su-30MKI में आसानी से इंटीग्रेट किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई देशों ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई. क्‍यों खास है R-37M मिसाइल? R-37M को दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली एक्टिव एयर-टू-एयर मिसाइल माना जाता है. यह 300 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक लक्ष्य को भेद सकती है. उड़ान की ऊंचाई और लक्ष्य की दिशा के आधार पर इसकी आधिकारिक रेंज 150 से 200+ किमी बताई जाती है, लेकिन इसका वास्तविक मारक दायरा इससे काफी अधिक माना जाता है. यह मिसाइल ऊंचाई पर तेज गति से उड़ रहे भारतीय Su-30MKI लड़ाकू विमानों से दागी जाएगी और दुश्मन के AWACS, एयर-टैंकर, स्टैंड-ऑफ जैमर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों को भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही खत्म करने में सक्षम होगी. IAF के लिए यह मिसाइल जोड़ना भी अपेक्षाकृत आसान होगा, क्योंकि R-37M पहले से ही रूस के Su-30SM और Su-35S विमानों पर ऑपरेशनल है. चूंकि Su-30SM का डिज़ाइन भारत के Su-30MKI से काफी मिलता-जुलता है, इसलिए मिसाइल को जोड़ने के लिए केवल कुछ सॉफ्टवेयर अपडेट की जरूरत पड़ेगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, N011M Bars रडार और मिशन कंप्यूटर में छोटे बदलाव करके Su-30MKI पूरी तरह इस मिसाइल का इस्तेमाल कर सकेंगे. क्‍या चीन की PL-15 का जवाब है R-37M? इस सौदे की तेजी का एक बड़ा कारण हालिया अनुभव है. मई 2025 में हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान IAF के Su-30MKI कई बार पाकिस्तानी वायु सेना (PAF) के J-10CE विमानों से रेंज में पीछे रह गए थे. J-10CE विमानों पर चीन की PL-15 मिसाइल लगी है, जिसकी रेंज 180–200 किमी तक मानी जाती है. भारतीय लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी की मिसाइल न होने के कारण कई बार पीछे हटना पड़ा. R-37M आने के बाद यह स्थिति पलट जाएगी. भारतीय Su-30MKI दुश्मन पर पहले नजर, पहले हमला और पहले लक्ष्य भेदने की क्षमता हासिल कर लेंगे. यानी उन्हें स्टैंड-ऑफ दूरी से ही दुश्मन के अहम एयरबोर्न सिस्टम को गिराने में बड़ी बढ़त मिल जाएगी. एक वरिष्ठ IAF अधिकारी ने बताया कि Astra Mk-2 अभी दो साल दूर है और Rafale पर Meteor मिसाइल इंटीग्रेशन में देरी हो रही है. ऐसे में R-37M ही एकमात्र ऐसा हथियार है जो 250–300 किमी दूर महत्वपूर्ण दुश्मन लक्ष्यों को तुरंत मार गिरा सकता है. सिर्फ एक Su-30MKI में दो R-37M लग जाएं, तो वह पूरे सेक्टर में दुश्मन के AWACS और टैंकरों को आगे आने से रोक सकता है. Astra Mk-3 आने तक यह बनेगी अंतरिम ताकत भारत भविष्य में अपनी स्वदेशी SFDR तकनीक वाली Astra Mk-3 मिसाइल (300+ किमी रेंज) पर निर्भर होना चाहता है. लेकिन यह मिसाइल 2030–32 के आसपास उत्पादन में आएगी. तब तक R-37M एक महत्वपूर्ण गैप भरने का काम करेगी. Su-30MKI पर इसे फ्यूज़लेज के नीचे सेमी-रिसेस्‍ड (semi-recessed) तरीके से लगाया जाएगा. प्रत्येक विमान पर दो मिसाइलें लग सकेंगी. इससे विमानों के पंखों पर छोटी रेंज की R-77-1 और Astra Mk-1/2 मिसाइलों को जगह मिल जाएगी. इस सौदे के बाद IAF की लंबी दूरी की हवाई लड़ाई की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. दुश्मन के निगरानी विमान, टैंकर और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को पीछे धकेलने से भारत को पूरे हवाई क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारतीय वायु सेना को एशिया की सबसे घातक लंबी-रेंज एयर कॉम्बैट क्षमता प्रदान करेगी.

रूस करेगा S-400 का अपग्रेड, नई तकनीक से भारत का रक्षा कवच होगा और भी ताकतवर

नई दिल्ली रूस दुनिया का सबसे ताकतवर एयर डिफेंस सिस्टम S-400 ट्रायम्फ को और मजबूत बनाने की योजना बना रहा है. यूक्रेन युद्ध में इस सिस्टम के इस्तेमाल से मिली सीखों को अपनाकर रूस इसे नई चुनौतियों के खिलाफ और प्रभावी बनाने पर काम कर रहा है.  यह अपग्रेड न सिर्फ रूस की सेना के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि भारत जैसे खरीदार देशों के लिए भी खुशखबरी है. भारत ने 2018 में 5.43 अरब डॉलर के सौदे में पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदे हैं, जिनमें से तीन पहले ही तैनात हैं. बाकी दो 2026 तक मिलने की उम्मीद है. S-400 क्या है और क्यों खास? S-400 एक मोबाइल सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम है, जो दुश्मन के विमान, मिसाइल, ड्रोन और यहां तक कि हाइपरसोनिक हथियारों को 400 किलोमीटर दूर से नष्ट कर सकता है. यह 600 किलोमीटर तक टारगेट को डिटेक्ट कर सकता है. इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ 80 टारगेट ट्रैक कर सकता है. 36 को एक साथ मार गिरा सकता है. भारत में इसे 'सुदर्शन चक्र' नाम दिया गया है. यह सिस्टम अमेरिकी पैट्रियट या इजरायली आयरन डोम से भी ज्यादा एडवांस्ड माना जाता है. रूस का दावा है कि कोई विदेशी सिस्टम अभी तक इसके मुकाबले नहीं टिक पाया. यूक्रेन युद्ध ने कैसे बदला S-400 का खेल? यूक्रेन युद्ध (जिसे रूस 'स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन' कहता है) में S-400 ने कमाल कर दिखाया. रूसी सेना ने इसे अमेरिकी ATACMS मिसाइलों और यूक्रेनी ड्रोन हमलों को रोकने के लिए इस्तेमाल किया. अगस्त 2025 से इसकी प्रभावशीलता में इजाफा हुआ है. नवंबर 2025 में रूसी सीमा पर ATACMS हमलों को सफलतापूर्वक रोका गया. युद्ध ने कमजोरियां भी उजागर कीं. यूक्रेन ने ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से कई S-400 रडार और लॉन्चर नष्ट किए, जैसे सितंबर 2025 में क्रीमिया में. इससे रूस को एहसास हुआ कि सिस्टम को जैमिंग और लो-फ्लाइंग थ्रेट्स के खिलाफ मजबूत बनाना जरूरी है. युद्ध से मिली सीखों से S-400 को नई क्षमताएं दी जा रही हैं, जो एयर डिफेंस सिस्टम में आमतौर पर नहीं होतीं. अपग्रेड की क्या डिटेल्स हैं? अल्माज-एंटे ग्रुप के सीईओ यान नोविकोव ने हाल ही में कहा कि तकनीकी क्रांति की रफ्तार से हम नई चुनौतियों का तुरंत जवाब दे सकते हैं. S-400 का अपग्रेड पोटेंशियल इतना बड़ा है कि हम युद्ध के दौरान ही उभरती धमकियों को खत्म कर सकते हैं.   विशेषज्ञों का अनुमान है कि अपग्रेड में ये बदलाव हो सकते हैं…     बेहतर रडार: एंटी-जैमिंग तकनीक मजबूत, ड्रोन और लो-लेवल मिसाइलों को बेहतर डिटेक्ट करने की क्षमता.     नई मिसाइलें: लंबी रेंज वाली 40N6 मिसाइलें, जो 400 किमी से ज्यादा दूर टारगेट मार सकें.     नेटवर्किंग: AWACS (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) से बेहतर कनेक्शन, ताकि ज्यादा दुश्मन टारगेट एक साथ हैंडल हो सकें.     मोबिलिटी: सिस्टम को जल्दी मूव करने और छिपाने की सुविधा, ताकि दुश्मन इसे आसानी से निशाना न बना सके. ये बदलाव S-400 को और अजेय बना देंगे. रूस का कहना है कि यह अपग्रेड एक्सपोर्ट के लिए भी फायदेमंद होगा. भारत के लिए क्या मतलब? Operation Sindoor में दिखाया कमाल भारत के लिए यह अपग्रेड किसी तोहफे से कम नहीं. 2018 के सौदे के तहत भारत को पांच स्क्वाड्रन मिलने हैं. तीन आ चुके हैं जो पंजाब, राजस्थान और पूर्वोत्तर सीमाओं पर तैनात हैं. लेकिन मई 2025 में हुए Operation Sindoor ने S-400 की ताकत साबित कर दी.  22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकी कैंपों पर मिसाइल हमले किए. चार दिनों (7-10 मई) की इस जंग में S-400 ने चमत्कार किया…     300 किमी दूर पाकिस्तानी JF-17 फाइटर जेट, F-16 और एक AWACS (SAAB-2000 एरेये) विमान को मार गिराया.     पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को 15 भारतीय शहरों पर हमलों से रोका.     लाहौर में चीनी LY-80 सिस्टम और कराची में HQ-9 को नष्ट किया. भारतीय वायुसेना के चीफ एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा सरफेस-टू-एयर किल रिकॉर्ड है. Operation Sindoor के बाद भारत ने और S-400 खरीदने का फैसला किया. दिसंबर 2025 में PM मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात में पांच और स्क्वाड्रन और 10,000 करोड़ रुपये के मिसाइल डील पर बात होगी.  साथ ही, S-500 (S-400 का अपग्रेड वर्जन) खरीदने की चर्चा भी है. रूस ने आश्वासन दिया है कि यूक्रेन युद्ध के बावजूद बाकी डिलीवरी 2026 तक हो जाएगी. भारत S-400 को Akash, Spyder और MRSAM से जोड़कर लेयर्ड डिफेंस बना रहा है. चुनौतियां और भविष्य S-400 की कीमत और रखरखाव महंगा है. अमेरिका ने CAATSA सैंक्शंस की धमकी दी थी, लेकिन भारत ने इसे नजरअंदाज किया है. यूक्रेन युद्ध ने दिखाया कि कोई सिस्टम परफेक्ट नहीं – यूक्रेन ने कई S-400 नष्ट किए. लेकिन अपग्रेड से यह कमजोरी दूर हो सकती है. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अपग्रेड भारत-पाक और भारत-चीन बॉर्डर पर गेम-चेंजर बनेगा. रूस का दावा है कि S-400 अब असामान्य क्षमताओं वाला हो गया है. अगर भारत को अपग्रेड वर्जन मिला, तो हमारी एयर डिफेंस दुनिया की सबसे मजबूत हो जाएगी.

EPFO खाताधारकों को मिलेगा तोहफा, 2024-25 के लिए बढ़ सकती है पीएफ ब्याज दर, जानें ताजा अपडेट

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के कर्मचारियों और पीएफ खाताधारकों के लिए एक अच्छी खबर है। नए साल में केन्द्र सरकार कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दे सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो EPFO वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर बढ़ सकती है। इसका फैसला नए साल 2026 में लिया जा सकता है ।हालांकि अभी अधिकारिक तौर पर पुष्टि होना बाकी है।अंतिम फैसला केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा और फिर वित्त मंत्रालय मंजूरी देगा।वर्तमान में 8.25% ब्याज दर है। नए साल में बढ़ सकती है पीएफ ब्याज दर दरअसल, मई में वित्त मंत्रालय भारत सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25 फीसदी तय की थी जिसका ब्याज कर्मचारियों के खातों में क्रेडिट कर दिया गया है।अब नए वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर तय होना है, जिसका इंतजार है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ पर ब्याज दर बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।सरकार इसे बढ़ाकर लगभग 8.75 प्रतिशत तक करने पर विचार कर रही है। यदि ब्याज दर 8.75 प्रतिशत तक बढ़ती है तो इसका असर पीएफ बैलेंस पर दिखाई देगा।अगर किसी कर्मचारी के खाते में लगभग 6 लाख रुपये जमा हैं, तो 8.75 प्रतिशत की दर से उसे तकरीबन 52,000 रुपये तक और 5 लाख रुपये की राशि जमा है, तो उसे 43,750 रुपये के आसपास ब्याज मिल सकता है। यह पूरी रकम सीधे रिटायरमेंट फंड में जोड़कर मिलेगी। यदि ब्याज दर बदलती नहीं है तो 6 लाख पर 49,500 रुपये और 5 लाख की रकम पर 41,250 रुपये तो मिलेंगे ही। EPFO : कब कब कितनी रही है ब्याज दर     वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO ) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ब्याज दर 8.25 फीसदी रखी है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ईपीएफओ ने भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत निर्धारित की थी, जो 2022-23 में 8.15 प्रतिशत से अधिक है।     इससे पहले 2021-22 में 8.10% 2020-21 EPF दर 8.5 फीसदी (PF Interest Rate), 2018-19 में 8.65 प्रतिशत और 2017-18 में 8.55 प्रतिशत थी। EPFO ने साल 2023-24 के लिए 1,07,000 करोड़ की इनकम पर 8.25% ब्याज दिया, जो लगभग 13 लाख करोड़ की मूल राशि के आधार पर इसका हाईएस्ट रिटर्न है, जबकि साल 2022-23 में 91,151.66 करोड़ की इनकम पर दिए गए 8.15% से बढ़ोतरी थी। EPFO : इन 4 तरीकों से चेक कर सकते है बैलेंस     Umang APP से: अपने फोन में UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) ऐप को इंस्टॉल करें। अब ऐप को ओपन करके उसमें लॉग-इन करें।इसके बाद ‘EPFO Option’ पर क्लिक करें और ‘Employee Centric Services’ पर जाएं। अब ‘view passbook’ पर क्लिक करें। इसके बाद आपको UAN नंबर दर्ज करना होगा, जिसके बाद आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी (OTP) आएगा। ओटीपी डालने के बाद पीएफ अकाउंट लॉग-इन हो जाएगा। अब आपको पीएफ पासबुक शो होगी।     SMS से : SMS से PF बैलेंस जानने के लिए EPFO के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर SMS करें।इसके लिए EPFO UAN LAN (भाषा) टाइप करना होगा। अगर आपको अंग्रेजी में जानकारी चाहिए तो LAN की जगह ENG लिखें। हिंदी में जानकारी के लिए LAN की जगह HIN लिखें।हिंदी में अकाउंट की जानकारी लेने के लिए EPFOHO UAN HIN लिखकर इसे 7738299899 नंबर भेज दें और मैसेज आपके मोबाइल पर आ जाएगा।     Missed Call से: इन तरीकों के अलावा आपके पास मिस्ड कॉल का भी ऑप्शन है। इसके लिए आपको अपने UAN रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर मिस्ड कॉल करना है। यहा आपको अपने नए योगदान और बैलेंस के विवरण के साथ एक SMS मिल जाएगा।     EPFO से : सबसे वेबसाइट पर लॉग इन कर ई-पासबुक पर क्लिक करें। ई-पासबुक पर क्लिक करने पर एक नए पेज पर आ जाएंगे। जहां आपको अपना यूजर नाम (UAN नंबर), पासवर्ड और कैप्चा भरना होगा और फिर नया पेज खुलेगा । यहां मेंबर आईडी का चुनाव करना होगा।यहां ई-पासबुक पर अपना ईपीएफ बैलेंस मिल जाएगा।  

सड़कों पर उमड़ा आक्रोश, सरकार बैकफुट पर: बुल्गारिया के प्रधानमंत्री ने पद छोड़ा

बुल्गारिया बुल्गारिया में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर गए हैं। बुल्गारिया की सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर लोगों का गुस्सा फूटा है। बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए और प्रधानमंत्री रोसेन जेलियाजकोव के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। वहीं, जनता के गुस्से के आगे पीएम जेलियाजकोव को इस्तीफा देना पड़ा। बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रोसेन जेलियाजकोव ने गुरुवार को इस्तीफ़ा दे दिया। नेशनल असेंबली में अपनी कैबिनेट के इस्तीफे की घोषणा करते हुए जेलियाजकोव ने कहा, "हम नागरिकों की आवाज सुनते हैं; हमें उनकी मांगों के लिए आवाज उठानी चाहिए। युवा और बुजर्ग दोनों ने इस्तीफे के पक्ष में अपनी आवाज उठाई। इस नागरिक भावना को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा, "लेकिन, आगे एक चुनौती है। प्रदर्शनकारियों को यह बताना होगा कि वे सरकार की कैसी रूपरेखा देखना चाहते हैं। देश के नागरिकों को विरोध करने वाले नेताओं से यह मांग करनी चाहिए। यह एक ऐसी सरकार की मांग है जो पिछली सरकारों की उपलब्धियों पर आगे बढ़े, लेकिन एक अच्छे बदलाव के जरिए।" बुधवार को सोफिया में, प्रदर्शनकारी संसद, सरकारी और राष्ट्रपति भवन के पास एक सेंट्रल चौक पर इकट्ठा हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोटेस्ट करने वालों ने संसद भवन पर "इस्तीफा, माफिया जाओ और निष्पक्ष चुनाव" जैसे शब्द प्रोजेक्ट करने के लिए लेजर का इस्तेमाल किया। मीडिया ने ड्रोन फुटेज के आधार पर अनुमान लगाया है कि विरोध करने वालों की संख्या 100,000 से ज्यादा थी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि बुल्गारिया की राजधानी में 150,000 तक लोग जमा हुए थे। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सोफिया के विश्वविद्यालयों के स्टूडेंट्स भी शामिल हुए। विरोध-प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया कि पिछले हफ्ते भी ऐसे विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था, जिसमें 50,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। इस प्रदर्शन में ये संख्या उससे ज्यादा थी। बुल्गारिया के 25 से ज्यादा बड़े शहरों में अलग-अलग जगहों पर इस तरह के विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें प्लोवदिव, वर्ना, वेलिको टार्नोवो और रजग्राद शामिल हैं। प्लोवदिव में, सैडिनेनी स्क्वायर पर हजारों की संख्या में लोग जमा हुए। बर्गास में भी एक विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां लगभग 10,000 लोग इकट्ठा हुए और एक वीडियो वॉल पर स्केच और वीडियो प्रोजेक्ट करके अपनी मांगें रखीं। रोसेन जेलियाजकोव पांच साल में इस पद पर आने वाले छठे व्यक्ति थे। बता दें कि लोगों का विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ, जब सरकार ने आने वाले साल के लिए एक विवादित ड्राफ्ट बजट पेश किया। इस बजट में इनकम टैक्स और सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन दोनों बढ़ाने का जिक्र था। सरकार लोगों का खर्च बढ़ाने के एक बड़े प्लान को फंड करने के लिए ये करना चाहती थी। ऐसे में विपक्षी दलों और आम नागरिकों ने इस ड्राफ्ट का विरोध शुरू कर दिया।

राहत की खबर: भारत की खुदरा महंगाई नवंबर में घटकर 0.71%

नई दिल्ली  भारत में खुदरा महंगाई दर नवंबर में 0.71 प्रतिशत रही है, जो कि अक्टूबर की महंगाई दर 0.25 प्रतिशत से 46 आधार अंक अधिक है। यह जानकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई। मंत्रालय ने बताया कि नवंबर में शहरी क्षेत्रों में महंगाई दर 1.40 प्रतिशत रही है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 0.10 प्रतिशत रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में खाद्य महंगाई दर -3.91 प्रतिशत रही है। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर -4.05 प्रतिशत है, जबकि शहरी इलाकों में खाद्य महंगाई दर -3.60 प्रतिशत रही है। नवंबर में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले अनाज की कीमत में 0.10 प्रतिशत, मांस और मछली की कीमत में 2.50 प्रतिशत, अंडों की कीमत में 3.77 प्रतिशत, दूध और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में 2.45 प्रतिशत, ऑयल और फैट की कीमतों में 7.87 प्रतिशत, फलों की कीमतों में 6.87 प्रतिशत, चीनी और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में 4.02 प्रतिशत और गैर अल्कोहल पेय पदार्थों की कीमतों में 2.92 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। दूसरी तरफ सब्जियों की कीमतों में 22.20 प्रतिशत, दालों और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में 15.86 प्रतिशत और मसालों की कीमतों में 2.89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों में बताया गया कि परिवहन और संचार में महंगाई दर नवंबर में 0.88 प्रतिशत रही है, जो कि अक्टूबर में 0.94 प्रतिशत पर थी। ईंधन और ऊर्जा में नवंबर में महंगाई दर 2.32 प्रतिशत रही है, जो कि अक्टूबर में 1.98 प्रतिशत थी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने शुक्रवार को जीएसटी रेट कटौती और खाद्य कीमतों में तेज गिरावट के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए देश के मुद्रास्फीति दर के अनुमान को पहले के 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "हेडलाइन मुद्रास्फीति में महत्वपूर्ण गिरावट आई है और इसके पिछले अनुमानों से भी नरम रहने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों का सौम्य रहना है। इन अनुकूल परिस्थितियों के कारण 2025-26 और 2026-27 की पहली तिमाही में औसत मुद्रास्फीति के अनुमानों को कम कर दिया गया है।"