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दिल्ली के जंतर-मंतर में उन्नाव रेप पीड़िता का धरना, नारेबाज़ी के दौरान बिगड़ी मां की तबीयत

नई दिल्ली  उन्नाव रेप केस में हाई कोर्ट के फैसले के बाद से फिर एक बार राजनीति गरमा गई है। आज दिल्ली के जंतर-मंतर में रेप पीड़िता प्रदर्शन करने पहुंची हैं। उनके साथ उनकी मां भी हैं। हालांकि इस दौरान एक भीड़ के बीच एक व्यक्ति भाजपा जिंदाबाद के नारे लगा रहा था। इसे लेकर पीड़िता की मां ने विरोध किया। इसके बाद उनकी मां बेहोश हो गईं। उन्नाव रेप पीड़िता की मां ने इस दौरान आरोपी कुलदीप सेंगर के लिए फांसी की भी मांग की थी। भीड़ में कुलदीप सेंगर के समर्थन वाले भी पहुंचे दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन उग्र होते देख पीड़िता की मां को प्रदर्शन स्थल से इधर उधर भी भेजा गया। इस दौरान कुछ लोग हाथों में तख्तियां लिए कुलदीप सेंगर के समर्थन में पहुंचे हैं। भीड़ से एक शख्स को भाजपा जिंदाबाद के नारे लगाते भी देखा गया है। प्रदर्शन स्थल पर पुलिस और मीडिया का जमावड़ा भी देखा जा रहा है। अगर सीबीआई ने पहले… पीड़िता के ये आरोप सीबीआई (CBI) की ओर से कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने पर, पीड़िता ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि मुझे सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि वह मुझे न्याय देगा। मैं हर महिला की आवाज उठा रही हूं। उसने कहा, "अगर सीबीआई ने यह कदम पहले उठाया होता, तो मुझे न्याय मिल गया होता। कुलदीप सेंगर की जमानत खारिज हो जाती क्योंकि उसने मेरे साथ बलात्कार किया था।" पीड़िता ने भावुक होकर बताया, "मेरे पिता की हत्या कर दी गई। मेरे परिवार के सदस्यों को मार दिया गया।" उसने आरोप लगाया कि उसके परिवार के सदस्यों और गवाहों की सुरक्षा हटा दी गई है। पीड़िता ने आगे बताया, “मेरे पति को उनकी नौकरी से निकाल दिया गया। मेरे बच्चे घर पर भी सुरक्षित नहीं हैं।”

सीमा पार कर मेघालय से भारत पहुंचे हादी के कातिल, बांग्लादेश पुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा

ढाका  ढाका महानगर पुलिस ने दावा किया है कि बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मुख्य संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारत के मेघालय राज्य में प्रवेश कर चुके हैं। पुलिस का कहना है कि हमलावर मयमनसिंह शहर की हलुआघाट सीमा के जरिए अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए और अब वे मेघालय के तुरा शहर में छिपे हो सकते हैं।   ढाका पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त एसएन नजमुल इस्लाम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य संदिग्ध फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख के बारे में यह दावा किया है। उनका कहना है कि बताया कि ने स्थानीय साथियों की मदद से दोनों ने सीमा पार की। पुलिस के अनुसार, दोनों संदिग्धों को सीमा पार करने के बाद पुर्ती नाम के एक व्यक्ति ने रिसीव किया। इसके बाद 'समी' नाम के एक टैक्सी ड्राइवर ने उन्हें मेघालय के तुरा शहर तक पहुंचाया। बांग्लादेशी अधिकारियों का दावा है कि इन संदिग्धों की मदद करने वाले दोनों व्यक्तियों को भारतीय अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। फिलहाल, बांग्लादेश सरकार औपचारिक और अनौपचारिक माध्यमों से भारत के संपर्क में है ताकि आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण सुनिश्चित किया जा सके। कौन थे शरीफ उस्मान हादी? 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता और एक प्रमुख छात्र नेता थे। वह शेख हसीना सरकार के खिलाफ पिछले साल हुए 'जुलाई विद्रोह' के मुख्य चेहरों में से एक थे। हादी आगामी फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनावों में ढाका-8 निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। वह भारत की क्षेत्रीय नीतियों और शेख हसीना सरकार के साथ भारत के संबंधों के मुखर आलोचक माने जाते थे। उस्मान हादी पर 12 दिसंबर को मध्य ढाका के बिजयनगर इलाके में उस समय हमला हुआ, जब वे चुनाव प्रचार कर रहे थे। मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उनके सिर में गोली मारी थी। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां 18 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। हादी की मौत की खबर फैलते ही पूरे बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने 'प्रोथोम आलो' और 'द डेली स्टार' जैसे प्रमुख समाचार पत्रों के दफ्तरों को निशाना बनाया और आगजनी की। ढाका के छायानाट भवन और उदीची शिल्पी गोष्ठी जैसे सांस्कृतिक संगठनों में भी तोड़फोड़ की गई। हादी के समर्थकों ने इस हत्या के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने का आरोप लगाते हुए भारतीय उच्चायोग को बंद करने तक की मांग की। फिलहाल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर इन हत्यारों को पकड़ने का भारी दबाव है। इंकलाब मंच ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे पूरे देश में और बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।  

Labour Code Update: इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा असर? नए लेबर कानून को लेकर क्या बदलेगा आपके लिए

नई दिल्ली साल 2026 से निजी और सरकारी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए सैलरी का कैलकुलेशन बदलने वाला है। सरकार ने 28 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। इसमें सबसे चर्चित है '50% वेतन नियम' (50% Wage Rule)। आइए समझते हैं कि इसका आपकी जेब और भविष्य पर क्या असर पड़ेगा? क्या है 50% सैलरी का फॉर्मूला? नए नियमों के मुताबिक आपकी कुल सैलरी (CTC) में 'मूल वेतन' (Basic Pay) और 'महंगाई भत्ता' (DA) का हिस्सा कम से कम 50% होना चाहिए। बाकी के 50% में HRA, बोनस और अन्य भत्ते आएंगे। उदाहरण के तौर पर अगर किसी की सैलरी 50,000 रुपये है और उसकी बेसिक सैलरी अभी सिर्फ 15,000 रुपये है, तो कंपनी को इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये (कुल सैलरी का 50%) करना होगा। PF और ग्रेच्युटी में होगा बड़ा फायदा PF और ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ योगदान भी बढ़ जाएगा। इससे आपको रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड (PF और ग्रेच्युटी) काफी बड़ा हो जाएगा। इसके अलावा पेंशन और अन्य लाभों का दायरा भी बढ़ेगा। इन-हैंड सैलरी और टैक्स पर क्या होगा असर? जहाँ एक तरफ भविष्य सुरक्षित होगा, वहीं महीने के अंत में घर ले जाने वाली सैलरी  में थोड़ी कमी आ सकती है क्योंकि पीएफ की कटौती ज्यादा होगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार बेसिक सैलरी बढ़ने से टैक्स छूट वाले भत्तों का हिस्सा कम हो सकता है, जिससे कुछ कर्मचारियों की टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी चाहें तो 15,000 रुपये की वैधानिक सीमा पर ही पीएफ कटवाना जारी रख सकते हैं, जिससे इन-हैंड सैलरी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

आंदोलन के अल्टिमेटम से जम्मू-कश्मीर में सियासी हलचल तेज, महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं पर नजरबंदी

जम्मू कश्मीर  जम्मू कश्मीर में मौजूदा आरक्षण नीति के खिलाफ छात्रों के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए रविवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी सहित कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि महबूबा मुफ्ती, उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती, श्रीनगर से लोकसभा सदस्य रुहुल्लाह मेहदी, पीडीपी नेता वहीद पारा और श्रीनगर के पूर्व महापौर जुनैद मट्टू को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है। प्रशासन ने कदम इन नेताओं द्वारा उन छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त प्रकट किए जाने के बाद उठाया, जिन्होंने रविवार को गुपकर रोड पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। इन नेताओं ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा इस मुद्दे के समाधान के लिए एक समिति गठित किए जाने के एक साल पूरे होने के बावजूद कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकलने पर छात्रों की ओर से आयोजित मार्च में शामिल होने की मंशा जताई थी। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पारा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया गया है ताकि वे विरोध कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता न प्रकट कर सकें। मेहदी ने शनिवार रात सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि उनके आवास के बाहर सशस्त्र पुलिस तैनात की गई है। उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या यह छात्रों के समर्थन में हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाने के लिए की गई एक पूर्व-नियोजित कार्रवाई है?’’ पारा ने इसी के साथ जम्मू कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार पर आरक्षण मुद्दे को हल करने की कोई मंशा नहीं दिखाने का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा आरक्षण नीति अस्तित्व का मामला बन गई है।  

दिल्ली में घना कोहरा बना परेशानी, IGI एयरपोर्ट अथॉरिटी ने यात्रियों को किया अलर्ट

नई दिल्ली उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने एक बार फिर से  हवाई सफर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दी है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर विजिबिलिटी कम होने की वजह से शनिवार और रविवार (28 दिसंबर) को सैकड़ों उड़ानों में देरी हुई है, जबकि कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा है। इसके चलते IGI एयरपोर्ट अथॉरिटी (DIAL) यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए संपर्क में रहने की सलाह दी है। एडवाइजरी में क्या कहा गया? अथॉरिटी  ने कहा कि यात्री एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइंस (IndiGo, Air India, SpiceJet आदि) से संपर्क करें और फ्लाइट का 'रियल-टाइम स्टेटस' जरूर चेक करें। बता दें कि CAT-III सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है जो एयरपोर्ट पर कम दृश्यता के दौरान विमानों की लैंडिंग के लिए आधुनिक 'CAT-III' तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा कारणों से उड़ानों के समय में बदलाव किया जा रहा है। यात्रियों को हो रही है परेशानी 23 दिसंबर से अब तक लगभग 270 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 10 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। एयरपोर्ट पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में 'घने से बहुत घना कोहरा' रहने का अनुमान है, जिससे यह समस्या और बढ़ सकती है।  

मन की बात में पीएम मोदी बोले– एंटीबायोटिक दवाइयों का बेवजह इस्तेमाल बन रहा है बड़ी चुनौती

नई दिल्ली वर्ष 2025 के आखिरी 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल भारत की उपलब्धियों पर चर्चा की। इसके अलावा पीएम मोदी ने कई मुद्दों पर अपनी राय भी रखी। पीएम ने सबसे बड़ी चिंता एंटी बायोटिक के उपयोग पर जताई। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक बीमारियों के खिलाफ इसकी उपयोगिता कम हो रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम भारतीयों के अंदर एंटी बायोटिक के उपयोग को लेकर उदासीनता है। हम बिना डॉक्टर की सलाह के भी यह दवाईयां खाने लगे हैं। पीएम ने आग्रह किया कि किसी भी तरह की दवाई डॉक्टर की सलाह के बिना न खाएं। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि कुछ ही दिनों में 2026 दस्तक देने वाला है। मन में इस साल की कई यादें घूम रही हैं। कई उपलब्धियां ऐसी हैं, जिन्होंने पूरे देश को एक साथ जोड़ दिया और गर्व करने का मौका दिया। पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा, "इस साल ऑपरेशन सिंदूर ने हर भारतीय को गर्व करवाया। पूरी दुनिया ने देखा कि आज का भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया के हर कोने में भारत माता के प्रति प्यार और भक्ति की तस्वीरें सामने आईं।" 2025 में खेलों में भारत की उपलब्धि की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "इस साल पुरुष क्रिकेट टीम ने आईसीसी चैंम्पियंस ट्रॉपी जीती, महिला टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप अपने नाम किया। भारत की बेटियों ने विमेंट ब्लाइंड वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया। एशिया कप में भी भारतीय टीम ने अपना परचम लहराया।" इसके बाद पीएम मोदी ने 2025 में विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंन कहा, "भारत ने साइंस और स्पेस के क्षेत्र में भी इस वर्ष बड़ी छलांग लगाई है। शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। पर्यावरण सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी कई पहल भी इस साल शुरू हुईं। इसके अलावा अब भारत में चीतों की संख्या भी 30 से ज्यादा हो गई है। इस साल में आयोजित कुंभ मेले का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस भव्य आयोजन ने दुनिया को हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, "2025 में आस्था, संस्कृति और भारत की अनोखी विरासत सब एक साथ देखने को मिली। इस आयोजन ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। साल के आखिर में राम मंदिर में झंडा फहराने की सेरेमनी ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। पीएम मोदी ने काशी तमिल संगमम का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, "इस साल वाराणसी में काशी तमिल संगमम के दौरान बच्चों ने तमिल सीखने पर खासा जोर दिया। तमिल भाषा दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है। मुझे खुशी है कि आज देश के दूसरे हिस्सों में भी युवाओं और बच्चों में तमिल भाषा के प्रति एक नया आकर्षण दिख रहा है। यही भाषा की ताकत है और भारत की एकता है।

आंखोंदेखी बयान: दीपू दास के साथी ने खोले हिंसा और दहशत के खौफनाक राज

ढाका  बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की दरिंदगी का शिकार हुए दीपू चंद्र दास के साथ ही काम करने वाले एक शख्स ने उनकी हत्या को लेकर रोंगटे खड़े देने वाली बातें बताई हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक दीपू चंद्र दास के साथ काम करने वाले शख्स ने बताया कि बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दीपू चंद्र दास की एक बेटी है। कार्यस्थल पर दीपू अकसर उपेक्षा के शिकार होते थे। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग थे जिन्हें कंपनी में नौकरी नहीं मिली थी और उन लोगों ने ही उनपर ईशनिंदा के झूठे आरोप लगा दिए।   घठना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सबसे पहले एचआर ने दीपू दास को बुलाया था। एचआर ने दीपू पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया। बाद में दीपू दास को फैक्ट्री के कर्मचारियों के हवाले कर दिया गया। भीड़ में बहुत सारे बाहरी लोग भी शामिल थे। भीड़ दीपू को उठाकर फैक्ट्री के गेट पर ले गई और फिर उनपर बेरहमी से मार पड़ने लगी। उन्होंने बताया, फैक्ट्री के बाहर खड़ी भीड़ ने दीपू चंद्र दास को अधमार कर दिया। लोग लातों से उनके मुंह और सीने पर मार रहे थे। बहुत सारे लोग डंडों से पीट रहे थे। दीपू दास खून से लथपथ थे। फैक्ट्री के गेट पर ही यह दरिंदगी हो रही थी। दीपू को इतने में भी नहीं छोड़ा गया। दीपू की मौत के बाद उनके शव को एक किलोमीटर घसीटा गया और फिर पेड़ से लटका दिया गया। कुछ लोगों ने पेट्रोल डालकर श को आग लगा दी। अधजला शव ही जमीन पर गिर गया। शख्स ने बताया कि मुस्लिमों की पूरी भीड़ थी और यह सब देखते हुए भी वे कुछ नहीं बोल सके। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जो दीपू का साथ देना भी चाहते थे, वे भी डर के मारे चुप थे। लोगों को डर था कि अगर उन्होंने दीपू का साथ दिया तो उनका भी वही हाल होगा। उन्होंने कहा, मुस्लिमों की भीड़ एकदम दानव बन गई थी। बांग्लादेश सरकार की तरफ से बाद में कहा गया था कि दीपू दास के खिलाफ ईशनिंदा का कोई सबूत नहीं मिला था  

भूकंपों की डरावनी श्रृंखला: 30 घंटे में 24 बार कांपी धरती, क्या बड़े झटके का संकेत?

   अहमदाबाद गुजरात के कच्छ में शुक्रवार सुबह 4.6 की तीव्रता से आए भूकंप ने कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाया, लेकिन इसने 24 साल पहले की उस तबाही के जख्म जरूर हरे कर दिए हैं जिसमें हजारों लोग की जिंदगी बर्बाद हो गई थी। इस ताजा भूकंप के बाद करीब दो दर्जन हल्के झटकों और जमीन के नीचे हलचल ने भी वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भूवैज्ञानिकों को इन झटकों के बाद क्षेत्र में तीन फॉल्ट लाइंस का पता चला है जो अब ऐक्टिव हो गए हैं। इनकी वजह से पहले से ही भूकंप के लिए संवेदनशील कच्छ को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य झटके के बाद 30 घंटे के अंदर 23 आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद हल्के झटके) भी लगे। शुक्रवार को तड़के 4.30 बजे से शनिवार सुबह 9.45 बजे के बीच ये कंपन नॉर्थ वागड फॉल्ट से उत्पन्न हुए। इसे इस क्षेत्र में सबसे सक्रिय माना जाता है। भूकंप के हालिया डेटा से पता चला है कि कथरोल हिल, गोरा डोंगर और नॉर्थ वागड़ फॉल्ट लाइनें एक साथ ऐक्टिव हो गईं हैं। इसकी वजह से भारत के सबसे प्रमुख भूकंप संभावित क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ गई है। कच्छ पहले से ही 10 से अधिक फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जिनमें कच्छ मेनलैंड फॉल्ट और साउथ वागड़ फॉल्ट शामिल हैं, जो 2001 के विनाशकारी भूकंप (रिक्टर स्केल पर 7.7) के दौरान टूट गए थे। हाल तक अधिकांश भूकंपीय गतिविधियां इन्हीं ज्ञात क्षेत्रों के आसपास केंद्रित थीं। हालांकि, 2025 में दर्ज किए गए हालिया झटकों से संकेत मिलता है कि तनाव नए फॉल्ट सिस्टमों में स्थानांतरित होकर फैल रहा है। तीन फॉल्ट लाइनें एक साथ ऐक्टिव भुज स्थित कच्छ यूनिवर्सिटी में जियोसाइंसेज डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर गौरव चौहान ने टीओआई को बताया, ‘ नागर पार्कर और अल्लाह बंड जैसी पारंपरिक रूप से सक्रिय फॉल्ट लाइनों ने वर्षों से भूकंप उत्पन्न किए हैं। लेकिन अब चिंता की बात यह है कि हालिया झटकों ने नॉर्थ वागड़ फॉल्ट पर गतिविधि की पुष्टि की है, जबकि पिछले कुछ महीनों में काठरोल हिल और गोरा डोंगर फॉल्ट लाइनों पर दर्ज भूकंप यह संकेत देते हैं कि 2025 की शुरुआत से ही तीनों फॉल्ट लाइनें फिलहाल सक्रिय हो चुकी हैं।’ एक साथ कई फॉल्ट लाइन ऐक्टिव होने से खतरा चौहान के मुताबिक 1 से 3 तीव्रता के आफ्टरशॉक्स ने एकत्रित ऊर्जा को निकलने में मदद की है जिससे तुरंत किसी बड़े भूकंप की आशंका कम होती है। उन्होंने कहा, 'आफ्टरशॉक्स दबाव घटाते हैं, लेकिन कई फॉल्ट लाइंस का ऐक्टिव होना भी चेतावनी है। ये फॉल्ट बड़े भूकंप को उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं और इसलिए तैयारी बहुत अहम है।' हालांकि शुक्रवार का भूकंप तीव्रता में मध्यम दर्जे का था, लेकिन इसके झटके पूरे कच्छ में महसूस किए गए। झटके इतने तेज थे कि लोग डरकर घर से बाहर भागे। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज झटकों का कारण भूकंप के केंद्र की कम गहराई थी। तैयारी रखने की सलाह भूकंप वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कच्छ में आने वाला कोई शक्तिशाली भूकंप केवल इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र की भू-आकृतिक संरचना को देखते हुए, तेज झटके पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सतर्कता की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। चौहान ने अधिकारियों से हालिया भूकंपीय गतिविधि को एक चेतावनी के रूप में लेने का आग्रह किया और नियमित भूकंप मॉक ड्रिल, भवन निर्माण मानकों के सख्त पालन और स्कूल शिक्षा में आपदा तैयारी को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।

‘आवास से संसद तक होगा कब्जा’, इंकलाब मंच के तख्तापलट वाले बयान से मचा सियासी हड़कंप

ढाका बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा की आग शांत होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। इंकलाब मंच ने आज यानी रविवार से ढाका और राजधानी से बाहर भी प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। इंकलाब मंच ने आ देशव्यापी बंद का आह्वान किया है। सुबह 11 बजे से ही बंद शुरू हो गया है। वहीं इंकलाब मंच के सदस्यों ने यूनुस सरकार को ‘तख्तापलट’ तक की चेतावनी दे डाली है। इंकलाब मंच मे फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि ढाका में शाहबाग इलाके में जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। शुक्रवार से ही यहां बहुत सारे कार्यकर्ता धरने पर बैठे हैं। शनिवार को भी ढाका में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन के चलते जाम लग गया। इंकलाब मंच ने ढाका, सिलहेट, चट्टोग्राम और कुश्तिया में प्रदर्शन किए। शाहबाग में इंकलाब मंच के सदस्य अब्दुल्ला ने कहा कि आज तो हम शाहबाग में हैं लेकिन कल तक जमुना तक कब्जा हो जाएगा। बता दें कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आवास का नाम जमुना है। अल जबर ने कहा कि शुक्रवार से ही इतने सारे लोग धरने पर बैठे हैं लेकिन यूनुस के कान में आवाज नहीं पहुंच रही है। लोग इतनी ठंड में भी घरों को छोड़कर सड़कों पर बैठे हैं। ऐसे में लोगों का विश्वास सरकार से उठ रहा है। तख्तापलट की धमकी द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक जबर ने कहा, अगर आपको लगता है कि सचिवालय और कैंट के अंदर आपका नियंत्रण है तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर को हादी की नमाज-ए-जनाजा के दौरान अगर हम चाहते तो सरकार बदल देते। तुम्हारा जमुना और कैंट भी तुम्हें बचा नहीं सकता था।  

लंदन की सड़कों पर टकराव: हिंदू प्रदर्शन के दौरान खालिस्तानियों ने बांग्लादेश का खुलकर किया समर्थन

लंदन बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की नृशंस हत्या की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। हाल ही में लंदन स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर इस हत्याकांड के विरोध में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। हालांकि, इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव पैदा हो गया जब खालिस्तानी अलगाववादी समूह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बचाव में उतर आए। लंदन में रहने वाले बांग्लादेशी हिंदुओं ने दीपु दास की हत्या और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन आयोजित किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दोषियों को कड़ी सजा मिले और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हैरानी की बात यह रही कि इस प्रदर्शन का विरोध करने के लिए वहां खालिस्तानी समर्थक पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खालिस्तानी प्रदर्शनकारी मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार की ढाल बनकर खड़े हो गए। उन्होंने न केवल हत्या का विरोध कर रहे हिंदुओं को डराने की कोशिश की, बल्कि उनके खिलाफ उकसाने वाले नारे भी लगाए। स्थिति को बिगड़ता देख लंदन पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों के बीच दीवार बनकर शांति बनाए रखने की कोशिश की। भारत विरोध के लिए खालिस्तानी-कट्टरपंथी गठबंधन यह घटना भारत विरोधी ताकतों के बीच बढ़ते गठजोड़ की ओर इशारा करती है। खालिस्तानी आतंकी संगठन 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) का नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू लगातार भारत विरोधी बयानबाजी कर रहा है। हाल ही में पन्नू ने अमेरिका से एक वीडियो जारी कर बांग्लादेश के कट्टरपंथियों का समर्थन किया था। पन्नू ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को तोड़ने की एक नई साजिश रची है। उसने एक विवादास्पद मानचित्र जारी किया है, जिसमें असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और नागालैंड को मिलाकर एक अलग देश बनाने का दावा किया गया है। पन्नू ने इस काल्पनिक देश का नाम 'ट्रम्पलैंड' रखा है। साथ ही, उसने अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा दिखाने की हिमाकत भी की है। आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब किसी ने पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात कही हो इससे पहले कुछ बांग्लादेशी कट्टरपंथी नेता भी इसी तरह के दावे कर चुके हैं। गुरपतवंत सिंह पन्नू भारत के खिलाफ जहर उगलने का कोई मौका नहीं छोड़ता। वह अक्सर पाकिस्तानी चैनलों पर बैठकर भारत विरोधी एजेंडा चलाता है। 2023 के क्रिकेट विश्व कप के दौरान पन्नू ने स्टेडियम और विमानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी। पन्नू ने 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तिरंगा फहराने से रोकने वाले के लिए इनाम की घोषणा भी की थी।