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GDP पर उठे सवाल तो World Bank ने दिया जवाब, बोले- कम FDI से भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ता बड़ा असर

 नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर बहस तेज हो गई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8% रही है. सरकार जहां इसे अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति का संकेत बता रही है, वहीं पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों और इसकी गणना के तरीके पर सवाल उठाए हैं. इस बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने GDP पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए तीखी टिप्पणी की है।  विवाद की बड़ी वजह GDP की नई सीरीज है. फरवरी 2026 में सरकार ने GDP की नई सीरीज जारी की थी, जिसमें बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया. इसके साथ आंकड़े जुटाने और उनकी गणना के तरीके में भी बदलाव किया गया. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि नई सीरीज में पिछली तिमाहियों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आया है।  उन्होंने खास तौर पर जून 2025 की तिमाही के मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी का मुद्दा उठाया है. सुभाष चंद्र गर्ग का तर्क है कि अगर पुराने आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो जून 2026 की ग्रोथ का आंकड़ा काफी अलग दिखाई देगा और यह 2.6% के आसपास ठहरेगा. उनका यह दावा सरकार के 7.8% ग्रोथ के दावे के एकदम विपरीत है।  कांग्रेस भी सरकार पर उठा रही सवाल कांग्रेस भी GDP के आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना साध रही है. पार्टी का आरोप है कि नई GDP सीरीज और आंकड़ों में बदलाव के जरिए अर्थव्यवस्था की तस्वीर को जरूरत से ज्यादा मजबूत दिखाया जा रहा है. कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ GDP ग्रोथ बढ़ने से आम लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं हो जाती. रोजगार, कमाई, खपत और लोगों की जेब में बचने वाली रकम जैसे मुद्दों को भी देखना जरूरी है।  नीलकंठ मिश्रा ने दावों को बताया 'अल्पज्ञान' इस पूरे विवाद के बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर GDP के आंकड़ों का बचाव किया. उन्होंने GDP की नई सीरीज पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 'अल्पज्ञानी और बेहद गलत दावों' को देखकर हैरानी होती है. उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कांग्रेस पार्टी की ओर माना जा रहा है।  नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि GDP के आंकड़ों में हुए बदलाव को समझे बिना पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना सही नहीं है. उनके मुताबिक, नई सीरीज में आंकड़े जुटाने और अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों को मापने का तरीका बेहतर किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि गलत जानकारी कई बार सही जानकारी से ज्यादा तेजी से फैलती है. इसलिए सही तथ्यों को बार-बार सामने रखना जरूरी है।  सिर्फ GDP नहीं, ये आंकड़े भी सकारात्मक नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति समझने के लिए सिर्फ GDP का आंकड़ा देखना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने अगस्त के कई आंकड़ों का हवाला दिया. उनके मुताबिक, कार और SUV की बिक्री में करीब 35% की बढ़ोतरी हुई है. दोपहिया वाहनों की बिक्री भी 20% से ज्यादा बढ़ी है. निर्यात में करीब 9% की बढ़ोतरी हुई है. कमर्शियल वाहनों की बिक्री में तो करीब 40% की तेजी देखने को मिली है. वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा के मुताबिक, यह कारोबार और निर्माण गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।  कर्ज और निवेश में भी दिख रहा सुधार नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि बैंक लेंडिंग की ग्रोथ भी उम्मीद से बेहतर रही है. उनके मुताबिक, पहले कर्ज की धीमी रफ्तार की एक बड़ी वजह बैंकों की तरफ से कर्ज देने में कमजोरी थी, लेकिन अब इसमें सुधार दिखाई दे रहा है. टैक्स कलेक्शन में सुधार और निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में निवेश की गतिविधियां भी जारी हैं. निर्माण क्षेत्र के सभी संकेतक बेहद मजबूत हैं. उनका मानना है कि अब उन लोगों की संख्या बेहद कम हो जानी चाहिए जो लगातार निजी क्षेत्र के निवेश के कमजोर होने का रोना रोते हैं, क्योंकि देश में निवेश के स्पष्ट और पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।  आम आदमी की कमाई अब भी चुनौती हालांकि, नीलकंठ मिश्रा ने यह भी माना कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ 'स्लैक' यानी कमियां मौजूद हैं. इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था अभी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही है. उन्होंने वास्तविक वेतन यानी महंगाई को हटाने के बाद बचने वाली कमाई में धीमी बढ़ोतरी को इसका एक संकेत बताया. उनके मुताबिक, इस स्थिति को पूरी तरह बदलने में कुछ तिमाहियां लग सकती हैं. उन्होंने कहा कि इन कमियों को पूरी तरह से दूर करने और लेबर मार्केट को मजबूत करने के लिए देश को लगातार कई तिमाहियों तक औसत से अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रखनी होगी, ताकि मार्केट पूरी तरह से चुस्त हो सके और भविष्य में महंगाई के दबावों को नियंत्रित रखा जा सके।  7.5% तक पहुंच सकती है भारत की ग्रोथ भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने काफी सकारात्मक रुख दिखाया है. उनका कहना है कि देश पर बजट का दबाव अब कम हो रहा है और मौद्रिक नीतियां भी अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल बन रही हैं. इसका असर GDP ग्रोथ पर भी दिख रहा है. उनके मुताबिक, आने वाले समय में भारत की औसत GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रह सकती है. यहां तक कि अगर सरकार की बजट और मौद्रिक नीतियां सामान्य यानी तटस्थ भी रहती हैं, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7.5% की ग्रोथ हासिल कर सकती है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव फिर बढ़ सकता है। 

अभिनंदन वर्धमान की नई पारी शुरू, IAF से रिटायरमेंट के बाद FLY91 से जुड़े

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने इंडियन एयरफोर्स छोड़ गोवा की एक प्राइवेट कंपनी जॉइन कर ली है. वह गोवा की प्राइवेट एयरलाइन में कमर्शियल पायलट बन गए हैं.  साल 2019 में पाकिस्तान के फाइटर जेट एफ-16 को मार गिराने वाले भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान अब क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 के साथ पायलट के रूप में जुड़ गए हैं. ये जानकारी बुधवार को सूत्रों के हवाले से सामने आई. ‘वीर चक्र' से सम्मानित वर्धमान अगस्त में गोवा स्थित एयरलाइन से बतौर पायलट जुड़े थे. अभिनंदन ने वायुसेना क्यों छोड़ी, इससे जुड़ी जानकारी अब तक सामने नहीं आई है।  पाकिस्तान के F-16 को मार गिराया अभिनंदन वर्धमान साल 2019 में पाकिस्तान के साथ हवाई मुठभेड़ के बाद सुर्खियों में आए थे. उन्होंने उस हवाई लड़ाई में एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को मार गिराया था और इसके बाद पाकिस्तान में तीन दिन तक हिरासत में भी रहे थे. हालांकि बाद में उनको भारत वापस भेज दिया गया था।  दरअसल, अभिनंदन वर्धमान साल 2019 में पाकिस्तानी वायुसेना के साथ हुए मुठभेड़ के बाद चर्चा में आए थे। फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला करना चाहा। 27 फरवरी को पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमान हमले के लिए भेजे। हालांकि, भारतीय वायुसेना ने उन्हें खदेड़ दिया। इस मुठभेड़ के दौरान अभिनंदन ने अपने मिग-21 लड़ाकू विमान से पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट को मार गिराया था। हालांकि, अभिनंदन का विमान भी क्रैश हो गया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अभिनंदन को हिरासत में ले लिया था। लेकिन भारत सरकार के दवाब के कारण 3 दिन बाद पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़ दिया। अभिनंदन को मिला था वीर चक्र साल 2021 में अभिनंदन को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। आपको बता दें कि वीर चक्र युद्धकाल में प्रदान किया जाने वाला देश का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। अभिनंदन को 'कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण' का प्रदर्शन करने के लिए ये सम्मान दिया गया था। एयरफोर्स से करीब एक लाख पेंशन मिलेगी ग्रुप कैप्टन अभिनंदन ने वायुसेना में 20 साल की सर्विस की है। पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के मुताबिक, ग्रुप कैप्टन का मूल वेतन ₹1.40–2.18 लाख और एमएसपी ₹15,500 होता है। भत्तों को मिलाएं तो यह ज्यादा भी हो सकता है। इस हिसाब से उन्हें करीब ₹88–98 हजार महीना पेंशन मिल सकती है। इसके अलावा महंगाई राहत भी मिलती है। अभिनंदन की वास्तविक पेंशन उनके अंतिम वेतन और सेवा रिकॉर्ड से तय होगी। फ्लाई-91 एयरलाइन में 10 लाख से ज्यादा सैलरी हो सकती है पायलट ट्रेनिंग कराने वाले एजुकेशन प्लेटफॉर्म पायलट शाला के मुताबिक, प्राइवेट कंपनी में पायलट को हर महीने ₹5 लाख से ₹8 लाख सैलरी मिलती है। सीनियर कैप्टन बनने पर यह ₹10 लाख+ तक हो सकती है। लेकिन अभिनंदन वायुसेना के पूर्व पायलट हैं इसलिए यह सैलरी और भी ज्यादा हो सकती है। वे ATR 72-600 विमान उड़ाएंगे। प्राइवेट सेक्टर में बेस सैलरी के अलावा प्रति घंटे उड़ान के हिसाब से मिलने वाला फ्लाइंग अलाउंस, लेओवर पे और इंटरनेशनल बोनस जैसे फायदे भी मिलते हैं। पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक की 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में CRPF के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें 40 जवान शहीद हुए थे। इसके जवाब में भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले दिन कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान LoC की ओर बढ़ा। उस समय अभिनंदन श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन पर MiG-21 बाइसन स्क्वाड्रन में तैनात थे। वह ऑपरेशनल रेडीनेस ड्यूटी पर थे। MiG-21 पर हमले के बाद पैराशूट से पाकिस्तान में उतरे अभिनंदन पाकिस्तानी विमानों का पता चलने के करीब पांच मिनट बाद अभिनंदन को उन्हें रोकने के लिए भेजा गया। आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र के मुताबिक, उन्होंने पीछे हट रहे एक दुश्मन विमान का पीछा किया और हवाई लड़ाई में उसे मार गिराया। हवाई लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी विमान ने कई बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलें दागीं। इनमें से एक मिसाइल अभिनंदन के विमान से टकराई। विमान को नुकसान पहुंचने के बाद अभिनंदन ने इजेक्ट किया। वह पैराशूट से पाकिस्तान के इलाके में उतरे, जहां उन्हें पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया। भारत के दबाव में पाकिस्तान ने 60 घंटे में छोड़ा अभिनंदन की गिरफ्तारी के बाद भारत ने राजनयिक स्तर पर तत्काल विरोध दर्ज कराया और उनकी सुरक्षित व जल्द वापसी की मांग की। घायल हालत में उनका वीडियो जारी करने पर भी भारत ने पाकिस्तान से आपत्ति जताई। इस बीच दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर था। 28 फरवरी को पाकिस्तान ने अभिनंदन को लौटाने का ऐलान किया और 1 मार्च को करीब 60 घंटे बाद वे वाघा-अटारी सीमा से भारत लौट आए। अभिनंदन को साल 2021 में ‘वीर चक्र' से सम्मानित किया गया था, जो युद्धकाल में दिया जाने वाला भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है. पुरस्कार के प्रशस्ति पत्र में हवाई मुठभेड़ के दौरान ‘कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण' प्रदर्शित करने के लिए उन्हें सम्मानित किए जाने का जिक्र किया गया था।  गोवा की एयरलाइन FLY91 से जुड़े अभिनंदन वर्धमान एफएलवाई91 के प्रवक्ता ने इस संबंध में टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी निजी मामला है. एयरलाइन में वर्धमान की भूमिका के बारे में अन्य जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है. बता दें कि गोवा स्थित एफएलवाई91 ने मार्च, 2024 में परिचालन शुरू किया था. इसके बेड़े में फिलहाल छह एटीआर 72-600 विमान हैं. इसके दो परिचालन केंद्र गोवा और हैदराबाद में हैं।  अभिनंदन को ट्रेनिंग लेनी होगी, 22 साल काम कर सकते हैं एयरफोर्स से रिटायर पायलट DGCA के नियमों के तहत जरूरी सिविल पायलट लाइसेंस, ट्रेनिंग और मेडिकल फिटनेस पूरी कर एयरलाइन में काम कर सकते हैं। हालांकि वे सीधे एयरबस या बोइंग नहीं उड़ा सकते, संबंधित विमान की टाइप रेटिंग और ट्रेनिंग जरूरी होती है। भारत में कमर्शियल एयर ट्रांसपोर्ट के पायलट की अधिकतम उम्र 65 साल है। 60-65 साल की उम्र में मल्टी-क्रू ऑपरेशन के तहत साथ उड़ने वाला दूसरा पायलट 60 साल से कम उम्र का होना चाहिए। इसके … Read more

CM विजय का बड़ा ऐलान, चेन्नई में बनेगा ओलंपिक शहर; F1 रेसिंग के लिए तैयार होगी मोटरस्पोर्ट्स सिटी

चेन्नई  तमिलनाडु ने 2036 के ओलंपिक गेम्स की तैयारी अभी से शुरू कर दी है. विजय सरकार का फोकस चेन्नई में एक ओलंपिक शहर बनाए जाने पर है. साथ ही फॉर्मूला 1 रेस की मेजबानी के लिए चेन्नई में एक मोटर स्पोर्ट्स सिटी भी सरकार बनाने जा रही है. सीएम विजय ने खुद इस बात का ऐलान किया है. उन्होंने विधानसभा में कहा कि मोटर स्पोर्ट्स में युवाओं की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें ट्रेनिंग और रेसिंग के मौके दिए जाएंगे, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियन बन सकें।  सीएम विजय ने कहा कि चेन्नई में विश्व-स्तरीय मोटर वाहन कार रेसिंग एरिना बनाने से टूरिज्म, विशेष वाहन निर्माण उद्योगों, रोज़गार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।  बता दें कि तमिलनाडु की विजय सरकार ने अगस्त 2026 में राज्य के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने के लिए कई ऐलान किए थे. जिससे राज्य को देश के अग्रणी खेल के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके. अब विजय सरकार का ध्यान  युवाओं को मोटर स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग देने पर है, ताकि वे एक चैंपियन के रूप में राज्य का नाम देश और विदेशी मंचों पर रोशन कर सकें।  ओलंपिक सिटी में कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी? मुख्यमंत्री विजय ने गुरुवार को विधानसभा में घोषणा की कि उनकी सरकार चेन्नई में विश्व स्तरीय तमिलनाडु ओलंपिक शहर की स्थापना करेगी। ओलंपिक सिटी का विकास तमिलनाडु खेल विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा और इसमें विश्व स्तरीय खेल मैदान, अत्याधुनिक खेल उपकरण, एक उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र और समर्पित खेल विज्ञान और खेल चिकित्सा केंद्र होंगे। इस सुविधा केंद्र में खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए आवास सहित आधुनिक बुनियादी ढांचा भी होगा। ओलंपिक सिटी का उद्देश्य ओलंपिक सिटी का उद्देश्य एक एकीकृत खेल केंद्र बनाना है ताकि एथलीटों को उन्नत प्रशिक्षण और सहायता सुविधाएं प्रदान की जा सकें, जिससे तमिलनाडु के खिलाड़ियों को ओलंपिक खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में अधिक पदक जीतने में मदद मिल सके। विजय ने कहा, "विश्व स्तरीय, ओलंपिक मानकों के अनुरूप अवसंरचना और आवासीय सुविधा सहित प्रशिक्षण संरचना का निर्माण किया जाएगा। इससे चेन्नई को अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने और ओलंपियन तैयार करने में मदद मिलेगी।" मोटरस्पोर्ट्स शहर की भी घोषणा मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि चेन्नई में फॉर्मूला 1-4 रेसों की मेजबानी के लिए एक समर्पित मोटरस्पोर्ट्स शहर स्थापित किया जाएगा। फॉर्मूला 1 रेस की मेजबानी के लिए चेन्नई में एक मोटर स्पोर्ट्स शहर भी स्थापित किया जाएगा। मोटर स्पोर्ट्स में युवाओं की प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियन तैयार करने के लिए प्रशिक्षण और रेसिंग के अवसर प्रदान किए जाएंगे। विश्व स्तरीय मोटर वाहन कार रेसिंग मैदानों की स्थापना से पर्यटन, विशेष वाहन निर्माण उद्योगों, रोजगार और आर्थिक विकास के अवसर मिलेंगे। खिलाड़ियों के लिए तैयार होगी अत्याधुनिक ओलंपिक सिटी तमिलनाडु सरकार के अनुसार, प्रस्तावित ओलंपिक सिटी का विकास तमिलनाडु स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा किया जाएगा। इस परिसर में खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अत्याधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। ओलंपिक सिटी में विश्वस्तरीय खेल मैदान और एरेना, आधुनिक खेल उपकरण, हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, स्पोर्ट्स साइंस सेंटर और स्पोर्ट्स मेडिसिन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा खिलाड़ियों और कोचों के ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाएं भी दिए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य इस परियोजना के जरिए एक ऐसा एकीकृत खेल केंद्र तैयार करना है, जहां खिलाड़ियों को प्रशिक्षण से लेकर फिटनेस, मेडिकल सपोर्ट और वैज्ञानिक तकनीकों तक सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होंगे खिलाड़ी तमिलनाडु सरकार का मानना है कि ओलंपिक सिटी से राज्य के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी में मदद मिलेगी। इसका लक्ष्य तमिलनाडु के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना और ओलंपिक खेलों समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य के लिए अधिक पदक हासिल करना है। स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन जैसी सुविधाओं के जरिए खिलाड़ियों की फिटनेस, चोट से उबरने और प्रदर्शन को वैज्ञानिक तरीके से बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। चेन्नई में बनेगी मोटरस्पोर्ट्स सिटी मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में एक समर्पित मोटरस्पोर्ट्स सिटी स्थापित करने की भी घोषणा की है। इसका उद्देश्य शहर को बड़े मोटर रेसिंग आयोजनों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। घोषणा के मुताबिक, प्रस्तावित मोटरस्पोर्ट्स सिटी में Formula 1 से लेकर Formula 4 तक की रेस आयोजित करने की क्षमता विकसित की जाएगी। इससे चेन्नई और तमिलनाडु में मोटरस्पोर्ट्स के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलने के साथ भारतीय रेसिंग प्रतिभाओं को भी बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। भारत में F1 की वापसी की कोशिश तेज भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी प्रयास किए जा रहे हैं। जून में युवा मामले और खेल मंत्रालय (MYAS) ने मोटरस्पोर्ट्स की निगरानी के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया था। इसका उद्देश्य देश में मोटरस्पोर्ट्स के विकास और भारत में फॉर्मूला 1 की संभावित वापसी की दिशा में काम करना है। मंत्रालय से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, सरकार की कोशिश 2028 के अंत तक भारत में F1 रेस वापस लाने की है। टास्क फोर्स देश में मोटरस्पोर्ट्स की स्थिति और संभावनाओं का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी। F1, MotoGP और WRC को भारत लाने पर भी चर्चा इस साल की शुरुआत में Federation of Motor Sports Clubs of India (FMSCI) के अध्यक्ष अरिंदम घोष ने नई दिल्ली में खेल मंत्रालय के साथ बैठक में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत में F1, MotoGP और World Rally Championship (WRC) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को लाने पर चर्चा हुई थी। घोष ने बताया था कि भारत में F1 को 2030 तक वापस लाने, जबकि MotoGP और WRC के राउंड को 2028 तक देश में आयोजित कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। FMSCI के मुताबिक, बैठक में भारतीय ड्राइवरों को विकसित करने और देश में मोटरस्पोर्ट्स के समग्र विकास पर भी जोर दिया गया। संघ ने मोटरस्पोर्ट्स के विकास को लेकर अपने सुझाव अधिकारियों और संभावित हितधारकों के सामने रखे। 17 मोटरस्पोर्ट्स चैंपियनशिप के विजेताओं को मिला सम्मान बेंगलुरु में आयोजित FMSCI अवॉर्ड्स नाइट में 2025 के मोटरस्पोर्ट्स नेशनल चैंपियनशिप के … Read more

Zomato डिलीवरी बॉय और Rapido ड्राइवर का खतरनाक खेल, घर में छापते थे नकली नोट; VIDEO आया सामने

हैदराबाद दिनभर कोई खाना पहुंचाता था, कोई बाइक से सवारी छोड़ता था तो कोई ऑटो चलाकर परिवार का खर्च निकालता था. बाहर से तीनों की जिंदगी आम लोगों जैसी ही नजर आती थी, लेकिन पुलिस के मुताबिक पर्दे के पीछे ये तीनों नकली नोट छापने और उन्हें बाजार में चलाने के खेल में शामिल थे. हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया।  शमशाबाद जोन की हैदराबाद कमिश्नर टास्क फोर्स और बालापुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली नोट बनाने और चलाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने इनके कब्जे से 2 लाख 91 हजार 100 रुपये कीमत के 1,124 नकली नोट बरामद किए हैं. बरामद नकली नोटों में 500, 200 और 100 रुपये के नोट शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने नकली नोट बनाने का तरीका किसी बड़े गिरोह से नहीं, बल्कि YouTube और Instagram पर वीडियो देखकर सीखा था. इसके बाद प्रिंटर, स्कैनर, कागज और दूसरे सामान जुटाकर नकली नोट तैयार किए जाने लगे. इस मामले में एक अन्य सहयोगी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।  कौन-कौन गिरफ्तार हुआ पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रामावत रामू उर्फ मोहम्मद (36), रामावत मोतीलाल (35) और रामावत गांधी (19) के रूप में की है. तीनों तेलंगाना के चिंतल थांडा, वड्डीपटला के रहने वाले बताए गए हैं. पुलिस के अनुसार रामू Zomato डिलीवरी वर्कर, मोतीलाल Rapido ड्राइवर और गांधी ऑटो रिक्शा चालक है. पुलिस जांच में सामने आया कि सामान्य कामकाज के साथ कथित तौर पर वे नकली नोट बनाने और उन्हें बाजार में खपाने की कोशिश कर रहे थे. मामले में सुधीर जॉन चेला उर्फ वामशी को भी कथित सहयोगी बताया गया है. वह फिलहाल फरार है।  आर्थिक परेशानी के बाद शुरू हुआ खेल पुलिस के मुताबिक रामू पारिवारिक जीवन में आई परेशानियों के बाद आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा था. इसी दौरान उसकी मुलाकात अपने रिश्तेदार मोतीलाल से हुई. जांचकर्ताओं का दावा है कि इसके बाद दोनों ने पैसे कमाने के लिए गलत रास्ता चुना. पुलिस के अनुसार दोनों ने इंटरनेट पर नकली नोट बनाने से जुड़े वीडियो खंगालने शुरू किए. इसी दौरान मोतीलाल को Instagram और YouTube पर नकली नोट तैयार करने से संबंधित जानकारी मिली. वीडियो में दिए गए एक मोबाइल नंबर के जरिए कथित तौर पर उसने एक व्यक्ति से संपर्क किया. इसके बाद मिले निर्देशों के आधार पर नकली नोट बनाने की तैयारी शुरू की गई. हालांकि पुलिस अभी इस बात की भी जांच कर रही है कि वीडियो में मिले संपर्क के पीछे कौन व्यक्ति था और क्या इस नेटवर्क में गिरफ्तार तीन आरोपियों के अलावा कोई और लोग भी शामिल हैं।  प्रिंटर और स्कैनर से शुरू हुआ काम पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने नकली नोट तैयार करने के लिए Epson का कलर प्रिंटर, कलर स्कैनर, बॉन्ड पेपर और दूसरी सामग्री खरीदी. इसके बाद असली नोटों को देखकर उनकी नकल तैयार करने की कोशिश की गई. जांच में पुलिस ने दावा किया कि आरोपी नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए उसके कुछ सुरक्षा फीचर्स की नकल करने का प्रयास कर रहे थे. इनमें वॉटरमार्क और महात्मा गांधी की तस्वीर जैसी चीजें शामिल थीं. नकली नोट तैयार करने के बाद उन्हें काटने, लैमिनेट करने और पैक करने के लिए भी सामान इस्तेमाल किया जा रहा था. पुलिस ने छापेमारी के दौरान प्रिंटर और स्कैनर के अलावा लैमिनेटर, पेपर कटर, रंगीन तरल पदार्थ, कागज के बंडल, गांधी की छपी तस्वीरें और वॉटरमार्क पेपर भी बरामद करने का दावा किया है।  रात में शराब की दुकानों और सब्जी बाजारों में खपाते थे नोट पुलिस के मुताबिक नकली नोट तैयार करना ही इस कथित गिरोह का अंतिम मकसद नहीं था. असली चुनौती इन नोटों को बाजार में चलाने की थी. जांच में सामने आया कि आरोपी छोटी-छोटी मात्रा में नकली नोट बाजार में चलाने की कोशिश करते थे. पुलिस के अनुसार शराब की दुकानों और सब्जी बाजारों को इसके लिए इस्तेमाल किया गया. खासतौर पर रात के समय इन नोटों को चलाने की कोशिश की जाती थी. पुलिस का मानना है कि रात के समय भीड़भाड़ और लेनदेन के बीच छोटे मूल्य के नोटों की पहचान से बच निकलने की संभावना आरोपियों को ज्यादा लगती थी. बताया गया है कि गांधी को भी बाजार में नकली नोटों को व्यापक स्तर पर चलाने के प्रयास में इस्तेमाल किया जा रहा था।  सिर्फ नोट नहीं, पूरा सेटअप मिला कार्रवाई के दौरान पुलिस को केवल तैयार नकली नोट ही नहीं मिले, बल्कि उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाला कथित सेटअप भी बरामद हुआ. पुलिस के अनुसार जब्त सामान में Epson L6460 कलर प्रिंटर, Epson कलर स्कैनर, लैमिनेटर, पेपर कटर, रंगीन तरल पदार्थ, कागज के बंडल, छपी हुई गांधी तस्वीरें, वॉटरमार्क पेपर और पैकिंग सामग्री शामिल हैं. इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है. बरामद सामान से पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि नकली नोट बनाने का काम कितने समय से चल रहा था और अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में पहुंचाई जा चुकी है। 

केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी, 15 सितंबर से हेली सेवा बहाल; 7 सितंबर से बुकिंग

रुद्रप्रयाग  चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर सेवा 15 सितंबर से फिर शुरू होने जा रही है. इस सेवा को दोबारा शुरू करने के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने तैयारियां तेज कर दी हैं. वहीं, हेलीकॉप्टर टिकटों की बुकिंग के लिए पहला स्लॉट 7 सितंबर को खोला जाएगा, ताकि श्रद्धालु पहले से अपनी यात्रा की योजना बना सकें. यूसीएडीए के सीईओ प्रतीक जैन ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद लिया गया है।  सुरक्षा पर दिया जाएगा जोर उन्होंने बताया कि मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के आधार पर 15 सितंबर तक मानसून के कमजोर पड़ने और पीछे हटने की संभावना है. ऐसे में मौसम की स्थिति हेलीकॉप्टर संचालन के लिए सुरक्षित रहने की उम्मीद है. आगे उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर सेवाओं को सुरक्षित तरीके से संचालित करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, AAI और DGCA के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा हैै. उन्होंने कहा कि सभी हेलीकॉप्टर कंपनियों को तय मेंटेनेंस स्टैंडर्ड का पालन करना होगा और हर हेलीकॉप्टर में आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होने सुनिश्चित किए जाएंगे।  Photo Credit: https://www.heliyatra.irctc.co.in/ आधिकारिक पोर्टल से करें बुक सभी श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि हेलिकॉप्टर सर्विस को बुक करने के लिए आधिकारिक पोर्टल heliyatra.irctc.co.in का ही इस्तेमाल करें. साथ ही किसी भी अनऑथराइज्ड पोर्टल से टिकट बुक न करें. ऐसे में स्कैम होने का खतरा बना रह सकता है।  यात्रा के लिए व्यवस्था रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने समाचार एजेंसी IANS को बताया 'श्री केदारनाथ धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि पिछले सालों की तरह बारिश का मौसम खत्म होने के बाद यात्रियों की संख्या में इजाफा होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्हें निर्देश दिए हैं कि अधिकारियों के ठहरने की व्यवस्थाा, सार्वजनिक शौचालय, पेयजल सुविधाएं और घोड़े-खच्चरों के प्रबंधन सहित सभी व्यवस्थाओं की दोबारा जांच की जाए. साथ ही जहां कहीं भी छोटी या बड़ी मरम्मत की जरूरत हो, उसे समय रहते पूरा किया जाए। 

नेपाल में बाढ़ का कहर, 600 विदेशी नागरिकों का अब तक नहीं मिला सुराग, 1,222 शव बरामद

काठमांडू  नेपाल में बाढ़ और आपदा के बाद राहत, बचाव और शवों की तलाश का अभियान लगातार जारी है. नेपाल पुलिस के ताजा अपडेट के मुताबिक, देशभर में अब तक 1,222 शव बरामद किए जा चुके हैं. वहीं 4,875 लोगों के लापता होने की जानकारी दर्ज की गई है. लापता लोगों में 601 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।  नेपाल पुलिस के मुताबिक, आपदा प्रभावित इलाकों में कुल 7,892 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. अभियान के दौरान 65 पुलिसकर्मी प्रभावित हुए हैं, जबकि 25 पुलिसकर्मी अभी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं।  पुलिस के अनुसार, बरामद 1,222 शवों में 406 पुरुष, 236 महिलाएं, 43 बालिकाएं और 34 बालक शामिल हैं. इसके अलावा 421 आंशिक मानव अंग और 82 ऐसे शव या अवशेष भी मिले हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है. अब तक 882 शवों का अंतिम प्रबंधन किया जा चुका है।  लापता लोगों में 2,924 नेपाली नागरिकों के बारे में उनके रिश्तेदारों ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दर्ज कराई है. वहीं 1,350 लोगों के लापता होने की सूचना सरकार के अलग-अलग निकायों को फोन के जरिए दी गई है. इसके अलावा 601 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दर्ज है।  6,006 लोगों का रेस्क्यू किया गया नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 6,006 लोगों को घायल अवस्था में बचाया या रेस्क्यू किया गया है. इनमें 4,666 पुरुष, 1,213 महिलाएं और 45 नाबालिग शामिल हैं. इसके अलावा 675 विदेशी नागरिकों को भी बचाया गया है. बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में फिलहाल 3,126 लोगों को रखा गया है।  1,022 मृतकों के DNA सैंपल से पहचान की कोशिश पहचान की प्रक्रिया भी जारी है. नेपाल पुलिस ने 553 ऐसे शवों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, जिनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है. अब तक 1,022 मृतकों के DNA सैंपल और 463 मृतकों के परिजनों के DNA सैंपल लिए गए हैं. DNA प्रक्रिया के तहत कुल 1,655 सैंपल दर्ज किए गए हैं. नेपाल पुलिस का कहना है कि प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव, शव बरामदगी, पहचान और राहत का काम लगातार जारी है। 

Thailand के Pattaya पहुंचे 5000 अमेरिकी सैनिक, मौज-मस्ती की पूरी छूट नहीं; इन गतिविधियों पर बैन

पटाया  मिडिल ईस्ट में लंबे और मुश्किल मिशन के बाद USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर बुधवार सुबह आखिरकार थाईलैंड पहुंच गया. पश्चिम एशिया के समंदर में 200 दिन गुजारने के बाद ये अमेरिकी सैनिकों के लिए राहत और रिलैक्स होने की बात है. इस जहाज से लगभग 5000 अमेरिकी सैनिक थाइलैंड पहुंचे हैं. इन सैनिकों का ठिकाना थाईलैंड का पटाया शहर है. ये सैनिक यहां रिलैक्स और रिफ्रेश तो हो सकते हैं, लेकिन यहां इन पर कई तरह की रोक रहेगी। थाइलैंड के अखबार बंकॉक पोस्ट के अनुसार हजारों सैनिकों के आने से पास के रिज़ॉर्ट शहर पटाया में आर्थिक तेज़ी की उम्मीदें जगी हैं. यह शहर लंबे समय से सेक्स टूरिज़्म डेस्टिनेशन के तौर पर भी जाना जाता है।  पटाया के मेयर पोरामासे न्गाम्पिचेस ने बताया कि लगभग 40 बसों का एक बेड़ा सैनिकों को पटाया और लैम चाबांग बंदरगाह के बीच ले जाएगा, जहां जहाज रुकेंगे।  द नेशन ने थाई अधिकारियों के अनुसार बताया है कि समुद्र में 200 से ज़्यादा दिन बिताने के बाद लगभग 5,000 नाविकों और मरीन को आराम करने और तरोताज़ा होने के लिए किनारे पर आने की छुट्टी (शोर लीव) दी जाएगी।  पटाया के मेयर पोरामासे नगाम्पिचेस का अनुमान है कि थाईलैंड में अमेरिकी सैनिकों की इस भीड़ से होटलों, रेस्तरां, बार, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, खुदरा विक्रेताओं और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को फ़ायदा होने की उम्मीद है।  टूरिज्म एसोसिएशन के अनुसार पटाया में रहने की जगह के बाज़ार में 3,00,000 से ज़्यादा कमरे उपलब्ध हैं।  पटाया में ये काम नहीं कर पाएंगे अमेरिकी सैनिक पटाया में ये सैनिक आराम और रिफ्रेश तो कर पाएंगे, लेकिन इन पर कुछ प्रतिबंध भी होंगे।  अमेरिकी सैनिकों को होटलों में रात बिताने या अपने जहाज़ों पर लौटने की इजाज़त होगी. लेकिन उन्हें कुछ टूरिस्ट गतिविधियों में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं होगी. जैसे ये सैनिक जेट स्की राइडिंग और पैरासेलिंग जैसे वॉटरस्पोर्ट्स में शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा ये सैनिक पटाया में गांजे का भी सेवन नहीं कर पाएंगे।  थाईलैंड में हाल की घटनाओं के बाद गांजे से जुड़ी नीति में बदलाव दिख रहा है. वहां का जन स्वास्थ्य मंत्रालय भांग के इस्तेमाल को सिर्फ़ मेडिकल मक़सद तक सीमित करने की दिशा में कदम उठा रहा है।  इधर अमेरिकी सैनिकों की आमद के बाद पटाया में टूरिस्ट पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है. सर्विलांस कैमरों की जांच की जा रही है और हॉटलाइन 1155 मदद के लिए तैयार है. मेयर ने कहा कि स्थानीय कारोबारियों को पर्यटकों से ज़्यादा पैसे न लेने के लिए कहा गया  है।  सोमवार को पटाया के मेयर के सेक्रेटरी बांचा कुल्लावानिच और असिस्टेंट मेयर कियातिसाक श्रीवोंगचाई ने अमेरिकी नौसेना के प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा उपायों पर चर्चा की।  बैठक में यह तय हुआ कि नाविक पटाया वॉकिंग स्ट्रीट जा सकते हैं, लेकिन उन्हें रात 2 बजे तक वह इलाका छोड़ना होगा।  अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि पटाया में वेश्यावृत्ति गैर-कानूनी है।  बता दें कि आमतौर पर अमेरिकी नौसैनिक तैनाती छह से नौ महीने के लिए होती है, लेकिन संघर्ष के समय इसे बढ़ाया जा सकता है. ईरान वॉर के समय ये सैनिक 200 दिनों से पश्चिम एशिया के समंदर में तैनात थे। 

Saudi Economy पर दबाव! मोहम्मद बिन सलमान ने मांगा ₹75,876 करोड़ का कर्ज, जानें क्यों पड़ी जरूरत

दुबई  सऊदी अरब का जिक्र होते ही रियाल, तेल, ऐश और रईसी ही सबके जेहन में आता है। गगनचुंबी इमारतें और रॉकेट की रफ्तार से चलती लग्जरी कारों के देश की पहचान धनकुबेर वाले देशों के रूप में की जाती है। दुनियाभर के कई लोगों का सपना होता है कि वे सऊदी अरब में जाकर काम करें और तगड़ा पैसा कमाकर वापस लौटें। इन सब के अलावा जब भी किसी देश को पैसे की जरूरत होती है तो ज्यादातर सऊदी अरब की तरफ रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ा उलट है। दुनिया के कई देशों को लोन की हेल्प करने वाले सऊदी को अब खुद लोन की जरूरत पड़ रही है। सऊदी को पड़ी 8 अरब डॉलर की जरूरत सऊदी अरब लंबे समय से दुनियाभर में तेल की सप्लाई करने और मध्य पूर्व का वित्तीय महाशक्ति रहा है। सॉवरेन वेल्थ फंड के जरिये सऊदी अरब दुनिया भर में पैसे निवेश करता रहा है और विकासशील देशों को मदद और लोन मुहैया कराता रहा है। लेकिन शेखों के देश में एक अलग मोड आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वक्त सऊदी अरब का नेशनल डेट मैनेजमेंट सेंटर (NDMC) लगभग 8 अरब डॉलर के नए सिंडिकेटेड लोन के लिए बैंकों से चर्चा कर रहा है। इसे भारतीय मुद्रा में बदलने पर ₹7.6 खरब होते हैं। सऊदी की सरकारी तेल कंपनी अरामको भी इसी तरह के फाइनेंसिंग विकल्पों पर बातचीत कर रही है। ईरान युद्ध से टूटी सऊदी के इकॉनमी की रफ्तार अब सवाल ये है कि मिडिल ईस्ट में धाक रखने वाले सऊदी को आखिर इतने पैसों की जरूरत क्यों पड़ रही है? दरअसल ईरान में चल रहे युद्ध ने सऊदी अरब की इकोनॉमी पर तगड़ा असर डाला है। इस वॉर ने तेल के इंपोर्ट, सप्लाई के प्रमुख रास्तों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है, इसकी वजह से सऊदी अरब के तेल निर्यात में कमी आई है। इसके अलावा तेहरान ने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है, जबकि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। एक तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से सऊदी तेल की ब्रिकी में कमी आई है तो वहीं दूसरी ओर हूती विद्रोहियों की वजह से बाब अल मंदेब भी बंद रहता है। इन हमलों की वजह से तेल सेक्टर में लगभग 25% की गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना महामारी के बाद से दूसरी तिमाही में सऊदी अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। सऊदी को क्यों चाहिए इतने पैसे? सऊदी अरब का जिक्र होते ही पैसे ही पैसे नजर आते हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद तस्वीर कुछ और ही बन गई है है। दरअसल सऊदी अरब को इतने मोटे पैसे की जरूरत की वजह उसका विजन 2030 है। बता दें कि साल 2016 में MBS द्वारा शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य तेल निर्भरता कम करके टूरिज्म, इंटरटेनमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर के माध्यम से अर्थव्यवस्था को कई क्षेत्रों में ले जाना है। क्राउन प्रिंस सलमान का मानना कि जब सऊदी का कच्चा तेल कम होगा या खत्म होने की कगार पर आएगा तो उसे अचानक आर्थिक समस्याओं का सामना ना करना पड़े। इसलिए अभी से ही देश की अर्थव्यवस्था को और क्षेत्रों के लिए खोलना चाहते हैं।  

Hormuz Crisis के बीच Xi Jinping का Egypt दौरा, Suez Canal पर चीन की बढ़ती नजर से बदलेगा समीकरण

वाशिंगटन एक तरफ होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका और ईरान की जंग एक बार फिर से तेज हो चुकी है, तो दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिस्र पहुंच गए हैं. यह दौरा देखने में सामान्य कूटनीतिक यात्रा लगता है, लेकिन इसका समय बहुत मायने रखता है. जिस वक्त होर्मुज का समुद्री रास्ता युद्ध की वजह से बुरी तरह प्रभावित है, ठीक उसी वक्त चीन मिस्र के साथ अपने रिश्ते और मजबूत कर रहा है, जिसके हाथ में दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक रास्तों में से एक, यानी स्वेज कैनाल है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज में जहाजों की आवाजाही तेजी से घटी है. मंगलवार को सिर्फ चार मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजरे, जबकि पिछले दस दिनों का औसत करीब तेरह जहाजों का था. सामान्य दिनों में दुनिया का लगभग बीस फीसदी तेल व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है. लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और टैंकरों पर हमलों ने इस रूट को बेहद असुरक्षित बना दिया है।  ठीक इसी समय शी जिनपिंग काहिरा में हैं. चीन के राष्ट्रपति करीब एक दशक बाद मिस्र पहुंचे हैं. यह सिर्फ पुरानी दोस्ती निभाने की यात्रा नहीं है. मिस्र लंबे समय से अमेरिका का करीबी रणनीतिक साथी रहा है, लेकिन बीते कुछ सालों में काहिरा ने बीजिंग, मॉस्को और दूसरी ताकतों के साथ भी अपने संबंध तेजी से बढ़ाए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक चीन और मिस्र के बीच व्यापार करीब इक्कीस अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, और स्वेज कैनाल आर्थिक क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में चीनी निवेश बढ़ रहा है।  यही इस दौरे की सबसे बड़ी कहानी है. अमेरिका जहां मिडिल ईस्ट में सैन्य ताकत के जरिए ईरान को रोकने में जुटा है, वहीं चीन उसी इलाके में निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, कूटनीति और साझेदारियों के जरिए अपना असर बढ़ा रहा है. मिस्र के पास स्वेज कैनाल है, जो एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ता है. होर्मुज में बाधा के बीच स्वेज ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम विकल्प बनकर उभरा है।  इसी बीच अगस्त में चीन और मिस्र ने पहली बार संयुक्त हवाई अभ्यास भी किया, जिसमें चीनी J-16 और मिस्री राफेल लड़ाकू विमानों ने साथ उड़ान भरी. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह दिखाता है कि अब चीन-मिस्र संबंध सिर्फ सड़कों और फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहे।  मिस्र अरब जगत का बड़ा केंद्र है, अफ्रीका का प्रवेश द्वार है और ब्रिक्स का सदस्य भी है. शी जिनपिंग मिस्र को मिडिल ईस्ट और अफ्रीका दोनों में अपना प्रभाव बढ़ाने के आधार के तौर पर देख रहे हैं. इससे पहले बीजिंग ईरान और सऊदी अरब के बीच बातचीत करवाकर भी मध्यस्थ की छवि बनाने की कोशिश कर चुका है।  रॉयटर्स के अनुसार, काहिरा अमेरिकी सैन्य मदद के साथ साथ चीन, रूस और यूरोप के साथ भी अपने विकल्प बढ़ा रहा है. इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका की जगह ले ली है, लेकिन तस्वीर बदल जरूर रही है।  भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है. होर्मुज भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, जबकि स्वेज भारत के यूरोप व्यापार के लिए जरूरी है. अगर ये समुद्री रास्ते लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, माल भाड़े और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिका के साथ रिश्ते बनाए रखते हुए चीन से मुकाबला और रूस के साथ संतुलन बनाना भारत के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। 

भारत में SIR से 11.83 करोड़ नाम हटे, ब्राजील में पड़े थे 11.18 करोड़ वोट; क्या कहते हैं आंकड़े?

नई दिल्ली भारत में मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान यानी विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर नया बहस खड़ा हो गया है। अब तक की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 11.83 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह संख्या कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतिशत में यह आंकड़ा 12.1 है। तुलनात्मक रूप से देखें तो 2022 के ब्राजील आम चुनाव में कुल 11.18 करोड़ वोट पड़े थे। वहीं दुनिया में भारत और चीन के अलावा केवल 14 देश ही ऐसे हैं जिनकी कुल आबादी ही 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े पैमाने पर हटाए गए नाम ने देश में राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया है। सरकार के आलोचकों का तर्क है कि इस प्रक्रिया के कारण लाखों वैध और वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं। दूसरी ओर सरकार के समर्थकों का दावा है कि केवल मृत, किसी दूसरे जगह पर चले गए और फर्जी मतदाताओं को ही सूची से बाहर किया गया है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि सच्चाई इन दोनों राजनीतिक दावों के बीच स्थित है। बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में संशोधन के बाद चुनाव हो चुके हैं। यहां एसआईआर के बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में 8.1% की गिरावट दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात जैसे 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यहां पूर्व सूची की तुलना में 10.7% नाम कम हुए हैं। 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जहां अभी केवल ड्राफ्ट रोल जारी हुआ है वहां यह दर 17% तक देखी गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शुरुआत में नाम हटने की दर बहुत अधिक होती है, लेकिन दावे और आपत्तियां दर्ज होने के बाद अंतिम सूची में कई नाम वापस जुड़ जाते हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? आपको बता दें कि 17 राज्यों में चुनाव एसआईआर का ड्राफ्ट चरण पूरा हो चुका है। यहां एसआईआर से पहले 36.09 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल के बाद 29.94 करोड़ बचे। यहां अभी फाइनल वोटर लिस्ट आना बाकी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 8 ऐसे राज्य हैं जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई चुनाव नहीं हुआ है। ऐसे राज्यों में 34.01 करोड़ वोटर थे। ड्राफ्ट रोल में 29.25 करोड़ रह गए। फाइनल लिस्ट आने के बाद 30.36 करोड़ मतदाता बचे। मताधिकार से वंचित हो रहे हैं लोग? इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बावजूद अब तक के आंकड़े एक दिलचस्प पैटर्न दिखाते हैं। जिन राज्यों में संशोधन के बाद चुनाव हुए हैं, वहां कुल मतदान में बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है। इसके विपरीत मतदाता सूची में कुल नाम कम होने के कारण मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि गलतियां नहीं हुई हैं। जमीनी स्तर पर और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वास्तविक मतदान संख्या घटी है। कई जगहों पर कागजी औपचारिकताओं के भारी बोझ के कारण नागरिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।