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नेपाल में SIR पर सख्ती के बाद संकट गहरा, रोहिंग्याओं के घुसपैठ का खतरा; भारत से सहायता की अपील

 पिथौरागढ़ उत्तराखंड में निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद शुरू होने के साथ ही नेपाल ने रोहिंग्याओं की घुसपैठ की आशंका जताई है। इसे लेकर नेपाल ने सीमा चौकियों के लिए अलर्ट जारी किया है। साथ ही सुरक्षा बलों ने चौकसी भी बढ़ा दी है। नेपाल प्रशासन ने भारत से मदद की गुहार लगाई है। उत्तराखंड में एसआईआर को लेकर मेपिंग का कार्य चल रहा है। साथ ही पुलिस का सत्यापन अभियान भी जारी है। नेपाली प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि भारत में सख्ती के बाद रोहिंग्या शरणार्थियों की नेपाल में घुसने की आशंका है। नेपाल त्रिनगर सीमा सुरक्षा बल के प्रमुख और सशस्त्र पुलिस उपाधीक्षक धीरेंद्र शाह का कहना है कि रोहिंग्या शरणार्थियों के भारतीय आधार कार्ड का इस्तेमाल करके मजदूर के रूप में नेपाल में प्रवेश करने की सूचना मिली है। इसके बाद निगरानी कड़ी कर दी है। सुरक्षा बलों के साथ ही डॉग स्क्वायड भी सीमा पर मुस्तैद है। भारत से नेपाल में प्रवेश करने वालों के आधार कार्ड के साथ दूसरे दस्तावेजों की भी जांच के आदेश दिए हैं। संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी भी ली जा रही है। सहायक मुख्य जिला अधिकारी किरण जोशी ने बताया कि कैलाली में खुले सीमा क्षेत्र में गश्त बढ़ाई गई है। मुख्य जिला अधिकारी लक्ष्मण ढकाल ने बताया कि चंपावत जनपद के बनबसा क्षेत्र से लगी कंचनपुर के गड्डाचौकी चौकी पर भी कड़ी निगरानी की गई है। पिथौरागढ़ के दार्चुला और बैतड़ी में भी चौकियों पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री ने चौकियों का किया निरीक्षण नेपाल के गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल ने भी सीमावर्ती चौकियों का निरीक्षण किया। बीते दिनों गृह मंत्री धनगढ़ी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा संगोष्ठी में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने त्रिनगर सीमा चौकी का निरीक्षण किया। भारत से सहयोग की अपील नेपाल प्रशासन ने रोहिंग्याओं को लेकर अलर्ट को देखते हुए भारत से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने नेपाल सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा एजेंसी एसएसबी से किसी भी तरह की सूचना सामने आने पर साझा करने का अनुरोध किया है। कैलाली नेपाल के सहायक मुख्य जिला अधिकारी किरण जोशी ने बताया कि नेपाल में रोहिंग्याओं के प्रवेश की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। भारत से अवैध तरीके से कोई भी रोहिंग्या नेपाल में प्रवेश न कर सके, इसके लिए सीमावर्ती चौकियों में निगरानी बढ़ाई गई है।

BLO की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, SIR में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि BLOs को धमकाने या उनके काम में बाधा डालने के किसी भी उदाहरण को वह गंभीरता से लेगा। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी गैर-सरकारी संगठन (NGO) सनातनी संसद की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरी के उस आरोप के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता गणना के काम के दौरान BLOs को धमकाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस मुद्दे को अखिल भारतीय आयाम देते हुए कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। पीठ ने कहा, "यह केवल पश्चिम बंगाल के बारे में नहीं है, बल्कि सभी राज्यों के लिए है। चुनाव आयोग (EC) के काम में असहयोग एक गंभीर मुद्दा है। BLOs को पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए।" कोर्ट ने कहा, "अगर चुनाव आयोग को BLOs की सुरक्षा और संरक्षा के संबंध में राज्य के अधिकारियों या पुलिस से असहयोग की कोई शिकायत है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट से संपर्क करना चाहिए। हम उचित आदेश पारित करेंगे।" CJI की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, "हम BLOs की रक्षा के लिए कड़ी कार्रवाई करेंगे। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, अन्यथा अराजकता होगी।" कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगते हुए चुनाव आयोग को सभी राज्यों में स्थिति का आकलन करने और जरूरत पड़ने पर उचित निर्देश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने को कहा। अदालत में BLOs पर काम के बोझ और तनाव पर भी चर्चा हुई, जिसका संदर्भ कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के उस बयान से मिलता है जिसमें उन्होंने BLOs की मौत का आरोप लगाते हुए SIR को बंद करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर के अपने आदेश का उल्लेख किया, जिसमें राज्यों को निर्देश दिया गया था कि जो BLOs तनावग्रस्त हैं या स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें SIR कार्य से हटने की अनुमति दी जाए और पर्याप्त प्रतिस्थापन प्रदान किया जाए। चुनाव आयोग ने कहा कि एक BLO को 37 दिनों में अधिकतम 1,200 मतदाताओं की गणना करनी होती है, यानी लगभग 35 मतदाता प्रति दिन। आयोग ने सवाल किया, "क्या यह बहुत अधिक काम है?" जस्टिस बागची ने कहा, "यह डेस्क जॉब नहीं है जहां 35 का कोटा आसानी से पूरा हो जाता है। एक BLO को घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का सत्यापन करना होता है और फिर उसे अपलोड करना होता है। इसमें तनाव और शारीरिक थकान हो सकती है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जमीनी स्तर पर SIR बिना किसी रुकावट के हो।" जस्टिस बागची ने पश्चिम बंगाल में BLOs के खिलाफ धमकी के आरोपों को साबित करने के लिए सनातनी संसद द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर भी सवाल उठाया। जस्टिस बागची ने पूछा, "एकमात्र FIR के अलावा, आरोपों की पुष्टि के लिए कोई अन्य विश्वसनीय सबूत नहीं है। क्या एक अकेली घटना के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यह केवल पश्चिम बंगाल में हो रहा है, अन्य राज्यों में नहीं? क्या यह एक तरफा बयानबाजी नहीं है? क्या सभी राज्यों की पुलिस को चुनाव आयोग के अधीन कर दिया जाना चाहिए?" राज्य सरकारों का विरोध: EC के वकील ने कहा कि पश्चिम बंगाल के साथ-साथ तमिलनाडु और केरल में भी समस्याएँ आ रही हैं, क्योंकि वहाँ की राज्य सरकारों ने SIR के प्रति अपना विरोध सार्वजनिक कर दिया है। यह मामला दिखाता है कि कैसे मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य न केवल तकनीकी और प्रशासनिक है, बल्कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक गंभीर राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बन गया है।

अमेरिका के फ्लोरिडा में हाइवे पर विमान की क्रैश लैंडिंग, कार से टकराने से हुआ हादसा

फ्लोरिडा अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में  शाम एक बड़ा हादसा उस समय हुआ जब एक छोटे विमान ने मेरिट आईलैंड के पास व्यस्त I-95 हाईवे पर इमरजेंसी लैंडिंग करते हुए एक कार को टक्कर मार दी. विमान में तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट को मजबूरन हाईवे पर उतरना पड़ा, लेकिन ट्रैफिक के बीच उतरते समय विमान एक 2023 मॉडल Toyota कार से टकरा गया. यह विमान Beechcraft 55 मॉडल का था, जिसमें 27 वर्षीय पायलट और उसका हमउम्र साथी मौजूद थे. दोनों को कोई चोट नहीं आई. फ्लोरिडा हाइवे पेट्रोल (FHP) के मुताबिक, विमान के दोनों इंजनों में अचानक पावर लॉस हो गया था, जिसके बाद पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया. टॉयोटा कैमरी चला रही 57 वर्षीय महिला को मामूली चोटें आईं और उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. हादसा सोमवार शाम 5:45 बजे हुआ, जब हाईवे पर भारी ट्रैफिक मौजूद था. टक्कर के बाद विमान हाईवे पर ही रुक गया और पूरे इलाके में भगदड़ जैसे हालात बन गए. हादसे के बाद बंद किया गया था हाइवे हादसे के बाद I-95 के दक्षिणी लेन को 201 माइल मार्कर के पास पूरी तरह बंद करना पड़ा. राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू की. हाईवे कई घंटों तक बंद रहा और सुबह करीब 9 बजे जाकर दोबारा खोला गया. फ्लोरिडा में उसी दिन दूसरा विमान हादसा दिलचस्प बात यह है कि फ्लोरिडा में इसी दिन एक दूसरा विमान हादसा भी हुआ. ऑरलैंडो से 46 मील दूर DeLand इलाके में एक Cessna 172 विमान ने इमरजेंसी लैंडिंग की. इस विमान में सवार दो लोग घायल हुए, लेकिन दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है.  

डिजिटल मिशन को रफ्तार: SIR के दूसरे चरण में 99.18% फॉर्म प्रोसेस

नई दिल्ली  भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को दोपहर 3 बजे तक का एसआईआर के दूसरे चरण का विस्तृत बुलेटिन जारी किया। 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 4 नवंबर से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया 11 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) द्वारा मतदाताओं से जुड़ी जानकारी इकट्ठा कर डिजिटल रूप से दर्ज की जा रही है। चुनाव आयोग ने बताया कि 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 50.99 करोड़ से अधिक मतदाता सूची में शामिल हैं और अब तक 99.97 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म का वितरण और 99.18 प्रतिशत का डिजिटाइजेशन पूरा कर लिया गया है। लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों ने 100 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म वितरण कर दिया है। वहीं, इन राज्यों में फॉर्म डिजिटाइजेशन की बात करें तो लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 100 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 99.96 प्रतिशत और गुजरात में 99.94 प्रतिशत डिजिटाइजेशन का काम पूरा कर लिया गया है। वोटर संख्या सबसे अधिक होने के बावजूद बड़े राज्यों ने भी उल्लेखनीय गति से अपडेट पूरा किया है। उत्तर प्रदेश में 15.44 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 99.97 प्रतिशत फॉर्म वितरण और 98.14 प्रतिशत डिजिटाइजेशन हो चुका है। तमिलनाडु में 99.95 प्रतिशत फॉर्म वितरण और 99.55 प्रतिशत डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो चुका है। पश्चिम बंगाल में 99.99 प्रतिशत वितरण और 99.75 प्रतिशत डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। आयोग ने बताया कि एसआईआर के कार्य के लिए 5,33,096 बीएलओ तैनात किए गए हैं। 12,43,716 बीएलए की नियुक्ति की गई है। 50,95,77,592 फॉर्म वितरित किए गए हैं और 50,58,01,033 फॉर्म डिजिटाइज्ड किए जा चुके हैं। 11 दिसंबर को एसआईआर प्रक्रिया का दूसरा चरण समाप्त होगा, जिसके बाद डेटा सत्यापन और अंतिम सूची तैयारी की प्रक्रिया शुरू होगी। देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में यह तेज रफ्तार एसआईआर प्रक्रिया एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Vingroup ने साइन किया MoU, तेलंगाना में 3 बिलियन डॉलर का निवेश और मल्टी-सेक्टर इकोसिस्टम का निर्माण

नई दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी Vingroup ने तेलंगाना सरकार के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है, जो राज्य के सबसे बड़े प्रपोज़्ड विदेशी इन्वेस्टमेंट में से एक है, जिसका मकसद एक बड़ा मल्टी-सेक्टर इकोसिस्टम बनाना है. हैदराबाद में तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट में अनाउंस किया गया, 3 बिलियन डॉलर का यह प्रपोज़ल फेज़ में लागू किया जाएगा. इसमें स्मार्ट अर्बन डेवलपमेंट, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, 2,500 हेक्टेयर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म, रिन्यूएबल एनर्जी और बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट शामिल होंगे. यह एग्रीमेंट Vingroup की इंडिया स्ट्रैटेजी में भी एक बड़ा कदम है, जो वियतनाम के सबसे बड़े प्राइवेट ग्रुप के ग्लोबल एम्बिशन को दिखाता है. VinFast और GSM के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा MoU की खास बातों में से एक यह है कि तेलंगाना में भारत की पहली बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टैक्सी फ्लीट लाने का VinGroup का प्रपोज़्ड इंट्रोडक्शन. कंपनी अपनी मोबिलिटी ब्रांच, GSM, और VinFast गाड़ियों का इस्तेमाल करके राज्य में एक फुल मोबिलिटी-एज़-ए-सर्विस प्लेटफॉर्म बनाने का प्लान बना रही है. VinHomes द्वारा संचालित स्मार्ट शहरी विकास MoU में आगे VinHomes Smart City प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसे 1,080 हेक्टेयर में प्लान किया गया है और इसे लगभग 2 लाख लोगों के रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इस बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से लगभग 10,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है और इसमें कम ऊंचाई वाली और ऊंची इमारतों वाले क्लस्टर, मॉडर्न सुविधाएं, सीमित जगह और सस्टेनेबल प्लानिंग के सिद्धांत शामिल होंगे. शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर MoU के ज़रिए, Vingroup का मकसद 70 हेक्टेयर प्लान्ड ज़मीन पर ज़रूरी सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है, जिसमें उसका VinSchool K-12 एजुकेशन नेटवर्क, VinMec मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल और V-Green EV चार्जिंग इकोसिस्टम शामिल हैं. इन कोशिशों का मकसद बड़े पैमाने पर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट को सपोर्ट करना और तेलंगाना की हेल्थकेयर और एजुकेशन कैपेसिटी में योगदान देना है. पर्यटन, मनोरंजन और रीन्यूवेबल एनर्जी विस्तार MoU में VinWonders के तहत 350 हेक्टेयर के टूरिज्म और एंटरटेनमेंट हब के प्लान की भी जानकारी दी गई है, जिसमें एक थीम पार्क, ज़ू और सफारी शामिल हैं. रिन्यूएबल एनर्जी के मामले में, VinGroup के VinEnergo डिवीज़न ने भविष्य के शहरी इलाकों और बड़े मोबिलिटी इकोसिस्टम को साफ बिजली से पावर देने के लिए 500 हेक्टेयर में 500 MW का सोलर फार्म बनाने का भी प्रस्ताव दिया है. ज़मीन, प्लानिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग MoU के हिस्से के तौर पर, तेलंगाना सरकार ने ज़मीन की पहचान और बंटवारे में मदद करने, मास्टर प्लानिंग में तालमेल बिठाने, एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस में मदद करने और ज़रूरी कनेक्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का वादा किया है. प्रोजेक्ट की टाइमलाइन में तेज़ी लाने के लिए मौजूदा राज्य पॉलिसी के तहत इंसेंटिव पर भी विचार किया जाएगा. एग्रीमेंट पर बात करते हुए, तेलंगाना सरकार के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि, "Vingroup का USD 3 बिलियन का इन्वेस्टमेंट 'तेलंगाना राइजिंग' विज़न में एक बहुत बड़ा भरोसा है, खासकर सस्टेनेबल शहरी विकास और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारा फोकस. यह कैपिटल से कहीं ज़्यादा है." उन्होंने आगे कहा कि, "यह एक फ्यूचरिस्टिक, नेट-ज़ीरो शहर बनाने और भारत का पहला बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक टैक्सी फ्लीट लाने के लिए एक पार्टनरशिप है, जो सीधे हमारे नागरिकों के जीवन की क्वालिटी में सुधार करेगी. हमारी सरकार इस ग्लोबल विज़न को लोकल हकीकत बनाने के लिए तेज़ी से काम करने की गारंटी देती है." Vingroup Asia और VinFast Asia के CEO फाम सान्ह चाउ ने कहा कि, "Vingroup तेलंगाना में बहुत ज़्यादा पोटेंशियल देखता है और हम राज्य सरकार के साथ लंबे समय की पार्टनरशिप बनाना चाहते हैं. मेगा अर्बन डेवलपमेंट, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और एक कॉम्प्रिहेंसिव इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम देने में हमारे प्रूवन ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, हमें विश्वास है कि तेलंगाना के साथ हमारा कोलेबोरेशन टैंजिबल वैल्यू जेनरेट करेगा, सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगा और स्थानीय निवासियों के लिए जीवन की क्वालिटी को बेहतर करेगा."

ओमान ने PAK के टुकड़े करने में भारत का साथ दिया था, अब पीएम मोदी का वहां दौरा, क्या होगा अगला कदम?

नई दिल्ली इतिहास के पन्ने पलटें तो साल था 1971. भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी थी. पाकिस्तान के दो टुकड़े होने वाले थे और एक नया देश बांग्लादेश नक्शे पर उभर रहा था. उस वक्त दुनिया का कूटनीतिक माहौल भारत के खिलाफ था. अमेरिका अपना सातवां बेड़ा भेज रहा था और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के लगभग सभी ताकतवर देश सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन मजहब के नाम पर पाकिस्तान के साथ खड़े थे. लेकिन उस घने अंधेरे में एक चिराग था जो भारत के लिए जल रहा था. वह देश था ओमान. ओमान वह मुस्लिम देश था, जिसने अरब और इस्लामिक जगत के भारी दबाव को दरकिनार करते हुए, यूएन से लेकर हर वैश्विक मंच पर भारत का खुलकर समर्थन किया था. जब सब पाकिस्तान को बचाने में लगे थे, ओमान भारत की सच्चाई के साथ खड़ा था. अगले हफ्ते, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी ओमान की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं. 17-18 दिसंबर का यह दौरा सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करने का नहीं, बल्कि 54 साल पुरानी उस वफादारी को नमन करने का है. 1971 की वो कहानी, जो अक्सर नहीं सुनाई जाती 1971 की जंग के दौरान पाकिस्तान ने खुद को ‘इस्लाम के किले’ के रूप में पेश किया था. अरब देशों पर भारी दबाव था कि वे भारत का बायकॉट करें. उस वक्त ओमान के सुल्तान कबूस बिन सईद ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने साफ कर दिया कि ओमान, भारत के रणनीतिक हितों के खिलाफ नहीं जाएगा. सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे देश सुल्तान कबूस से बेहद खफा हो गए थे. लेकिन सुल्तान अड़े रहे. उन्होंने न सिर्फ भारत का कूटनीतिक समर्थन किया, बल्कि अपनी बंदरगाहों और सुविधाओं के दरवाजे भी भारत के लिए खुले रखे. अब जब पीएम मोदी ओमान जा रहे हैं, तो वह एक तरह से उस दोस्ती का कर्ज चुकाने जा रहे हैं. ओमान भारत के लिए सिर्फ एक ‘ट्रेडिंग पार्टनर’ नहीं, बल्कि ‘ऑल वेदर फ्रेंड’ यानी हर मौसम का साथी है. ‘दिल’ के बाद अब ‘डील’ की बारी 1971 में ओमान ने दिल से साथ दिया था, 2025 में वह भारत की इकॉनमी को रफ्तार देने जा रहा है. पीएम मोदी के इस दौरे पर भारत-ओमान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होना लगभग तय है. इस समझौते के बाद भारतीय सामान जैसे कपड़ा, जेम्स, ज्वेलरी, मशीनरी बिना किसी टैक्स के ओमान के बाजारों में बिक सकेगा. इससे चीन को झटका लगना तय है. ओमान रणनीतिक रूप से बहुत अहम जगह यानी अरब सागर और फारस की खाड़ी के मुहाने पर है. भारत वहां दुकम (Duqm) पोर्ट पर पहले से ही मौजूदगी दर्ज करा चुका है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए भारत वहां चीन के प्रभाव को कम करेगा और अपनी जड़ें जमाएगा. ‘पुणे’ वाला कनेक्शन और सुल्तान से याराना     कूटनीति में निजी रिश्तों का बहुत मोल होता है. ओमान के मौजूदा सुल्तान हैथम बिन तारिक के रगों में भारत से जुड़ी यादें हैं. सुल्तान हैथम के पिता ने भारत के पुणे शहर में पढ़ाई की थी. ओमान का शाही परिवार भारत को अपना दूसरा घर मानता है.     पीएम मोदी और सुल्तान हैथम के बीच गजब का तालमेल है. पिछले साल जब सुल्तान भारत आए थे, तो यह उनकी पहली राजकीय यात्रा थी. अब पीएम मोदी का वहां जाना उस दोस्ती को और गहरा करेगा.     ओमान में करीब 8 लाख भारतीय रहते हैं. पीएम मोदी जब उनसे मिलेंगे, तो यह संदेश जाएगा कि भारत अपने नागरिकों और अपने पुराने दोस्तों, दोनों का ख्याल रखता है. जॉर्डन और इथियोपिया भी जाएंगे पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ ओमान तक सीमित नहीं है. वे जॉर्डन और इथियोपिया भी जा रहे हैं. यह तीनों देश मुस्लिम आबादी के लिहाज से भारत के लिए बहुत मायने रखते हैं. जॉर्डन (97% मुस्लिम): तब और अब: 1971 में जॉर्डन पाकिस्तान के साथ था, लेकिन आज 2025 में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला पीएम मोदी के करीबी दोस्त हैं. किंग अब्दुल्ला, जो पैगंबर साहब के वंशज माने जाते हैं, उनका पीएम मोदी का स्वागत करना इस्लामिक दुनिया में भारत की बदलती छवि का सबूत है. यह दौरा फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के संतुलन को दिखाएगा. इथियोपिया (34% मुस्लिम): पहला दौरा: यह किसी भारतीय पीएम का पहला इथियोपिया दौरा होगा. वहां 4 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी है. भारत वहां अफ्रीका में अपनी पैठ बढ़ाने जा रहा है. 1971 की नींव पर 2025 का महल पीएम मोदी का यह दौरा बताता है कि विदेश नीति में ‘मेमोरी’ कितनी अहम होती है. भारत ने नहीं भुलाया कि जब दुनिया खिलाफ थी, तब ओमान साथ था. ज जब ओमान के साथ ऐतिहासिक FTA होने जा रहा है, तो यह 1971 के उस बीज का फल है जिसे सुल्तान कबूस ने बोया था. ओमान में ‘इकॉनमी’ की बात होगी (FTA के जरिए), लेकिन उसकी बुनियाद में ‘दिल’ की वो बात होगी जो 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े होते वक्त ओमान ने भारत के कान में कही थी- हम तुम्हारे साथ हैं. यह दौरा उसी भरोसे को रीन्यू करने का है.

8वें वेतन आयोग पर सरकार का महत्वपूर्ण बयान, पेंशनर्स और कर्मचारियों को कब से मिलेगा लाभ

नई दिल्‍ली.  8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने में अब सिर्फ 17 महीने का समय बचा है. इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को एक बार फिर आयोग की शर्तों को लेकर जारी कयासों पर विराम लगाते हुए स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. वित्‍त राज्‍यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में 8वें वेतन आयोग को लेकर स्‍पष्‍ट जानकारी दी है. उन्‍होंने आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए फंड के इंतजाम को लेकर भी जवाब दिए. संसद में चर्चा के दौरान वित्‍त राज्‍यमंत्री ने बताया कि अभी केंद्रीय कर्मचारियों की संख्‍या करीब 50.14 लाख है, जबकि 69 लाख के आसपास पेंशनर्स भी हैं. 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद इन सभी को फायदा दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने लिखित जवाब में 8वें वेतन आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस और इसके लागू होने की तारीख जैसे सवालों के भी जवाब दिए हैं. उनसे पूछा गया कि 8वें वेतन आयोग के लिए वित्‍तवर्ष 2026-27 के बजट में फंड आवंटन को लेकर क्‍या योजना है. क्‍या सरकार पेंशनधारकों और कर्मचारियों की शिकायतों का निवारण करेगी. कबसे लागू होगा 8वां वेतन आयोग जबसे 8वें वेतन आयोग की घोषणा हुई है, सभी कर्मचारियों और पेंशनधारकों का सबसे बड़ा सवाल यही था कि इसे लागू कब से किया जाएगा. संसद में केंद्रीय मंत्री ने इस सवाल का जवाब दिया है. उन्‍होंने कहा कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने की तिथि के बारे में घोषणा बाद में की जाएगी. फिलहाल आयोग को अपने गठन के 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशों हर हाल में पेश करनी होगी. 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर, 2025 को समात्‍प हो जाएगा, लेकिन अभी तक 8वें के लागू करने की तिथि का खुलासा नहीं हुआ है. आयोग बनने के बाद अब तक क्‍या हुआ केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी फंड पर समय के साथ फैसला किया जाएगा. इसके लिए पहले से तय प्रक्रिया का भी पालन किया जाएगा. 41 दिन पहले 8वें वेतन आयोग को बनाने के बाद से अब तक कई कदम उठाए जा चुके हैं. केंद्र सरकार ने इसके टर्म ऑफ रेफरेंस को मंजूरी दे दी है, जिसका गजट नोटिफिकेशन भी 3 नवंबर, 2025 को जारी किया जा चुका है. किस आधार पर सैलरी तय करेगा आयोग पे कमीशन मूल वेतन के स्‍ट्रक्‍चर, पेंशन, अलाउंस और अन्‍य सुविधाओं को ध्‍यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. उसका मकसद कर्मचारियों और पेंशनर्स को उचित भुगतान दिलाना है. आयोग के सामने फिटमेंट फैक्‍टर में बदलाव करने की भी चुनौती है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के वेतन में भी बदलाव आएगा. सरकार ने आयोग के गठन के बाद से अब तक कई कदम उठाए हैं, जो कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन पर सीधे तौर पर असर डालने वाला है.  

पश्चिम बंगाल बनाम केंद्र: मनरेगा शर्तों पर ममता बनर्जी ने जताया कड़ा विरोध

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत 100 दिन की नौकरी योजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नए पात्रता मानदंड का विरोध किया। उन्होंने कूचबिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विरोधी रैली को संबोधित करते हुए इस मामले में केंद्र की नई शर्तों का विरोध करते हुए उनकी मसौदा प्रति भी फाड़ दी। मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि कुछ दिन पहले हमें नए श्रम संहिता पर एक नोटिस मिला। केंद्र सरकार ने 100 दिन की रोजगार योजना की पात्रता के लिए नई शर्तें लगाई थीं। मैं ऐसी शर्तों से सहमत नहीं हूं। ये शर्तें अपमानजनक प्रकृति की हैं, इसलिए मैं नोटिस की एक प्रति फाड़ रही हूं। यह मेरे लिए कोई केंद्रीय नोटिस नहीं है, बल्कि यह मेरे लिए बस एक कोरा कागज है। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल सरकार को 100 दिन की नौकरी योजना के लिए केंद्र सरकार से अभी तक 51,617 करोड़ रुपए की धनराशि नहीं मिली है। उन्‍होंने कहा कि मुझे केंद्रीय कोष की परवाह नहीं है। अगर अगले साल विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापस आती है तो हम राज्य की अपनी 100 दिन की नौकरी योजना शुरू करेंगे। साथ ही उन्होंने कूचबिहार में जिला तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को अंदरुनी कलह और गुटबाजी से दूर रहने की चेतावनी दी। सीएम ने कहा कि युद्ध के समय सबसे महत्वपूर्ण बात एकजुट रहना है। आप सभी को आम लोगों की सेवा के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया में मतदाता सूची में अपना नाम बरकरार रखने में आम लोगों को होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए पूरे राज्य में 'क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूं' शिविर चलाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे बूथ हर ग्राम पंचायत में स्थापित किए जाएंगे। शिविरों का एकमात्र उद्देश्य लोगों की सहायता करना होगा।

राहुल गांधी का आरोप: संघ देश की हर संस्था पर नियंत्रण चाहता है

नई दिल्ली  संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधार पर चर्चा हो रही है। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लोकसभा में चर्चा के दौरान आरएसएस पर देश की सभी संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "क्या आपने कभी सोचा है कि महात्मा गांधी ने खादी पर इतना जोर क्यों दिया? उन्होंने आजादी की लड़ाई खादी के कॉन्सेप्ट के इर्द-गिर्द क्यों लड़ी? उन्होंने सिर्फ खादी ही क्यों पहनी? यह सिर्फ एक कपड़ा नहीं है, यह भारत के लोगों की भावना है।" असमिया गमछे से लेकर कांचीपुरम साड़ी तक की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा देश भी एक फैब्रिक की तरह है। देश के सारे धागे एक जैसे हैं। हमारा देश 150 करोड़ लोगों से बना है और सारे धागे एक जैसे हैं। आरएसएस सभी संस्थाओं पर कब्जा करना चाहता है। 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की छाती में तीन गोलियां लगीं। नाथूराम गोड्से ने हमारे राष्ट्रपिता की हत्या कर दी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह असहज करने वाला सच है, लेकिन इसे कहना होगा। सभी लोग जानते हैं कि कैसे भारत के विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलरों की नियुक्ति हो रही है। इससे कोई मतलब नहीं है कि व्यक्ति की योग्यता क्या है, बस उसकी एक योग्यता है कि वह संघ से जुड़ा हो। राहुल गांधी द्वारा आरएसएस पर निशाना साधे जाने के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि आप चुनाव सुधार पर बोलिए, किसी संगठन का नाम मत लीजिए। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हम लोग नेता प्रतिपक्ष को सुनने के लिए बैठे हैं, लेकिन अगर वह विषय पर ही नहीं बोलेंगे, तो सबका समय खराब होगा। सत्ता पक्ष की ओर से विरोध जताने पर राहुल गांधी ने कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा है। शैक्षणिक संस्थाओं पर कब्जा किया जा रहा है। कुलपति की नियुक्ति एक संगठन से जुड़ाव के आधार पर की गई है। संस्था के लोगों ने सीबीआई-ईडी पर कब्जा किया है। चुनाव आयोग पर भी एक संस्था का कब्जा है, जो चुनाव को नियंत्रित करती है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैं जो कुछ भी कह रहा हूं, उसके मेरे पास सबूत हैं। भाजपा लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है। सीजेआई को सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया से हटाया गया। 2023 में नियम बदलकर यह प्रावधान किया गया कि किसी भी चुनाव आयुक्त को दंडित नहीं किया जा सकता। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ऐसा किया गया। सीसीटीवी और डेटा को लेकर भी नियम बदले गए।

परीक्षा पे चर्चा 2026: छात्रों के लिए गोल्डन चांस, रजिस्ट्रेशन ओपन—जानें पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली  भारत सरकार द्वारा परीक्षा पे चर्चा (Pariksha PE Charcha 2026) के 9वें एडिशन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 1 दिसंबर से प्रारंभ कर दी गई है। छात्र, अभिभावक और शिक्षक सभी इस कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन माध्यम से innovateindia1.mygov.in की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण (PPC 2026 Registration) कर सकते हैं। इसके अलावा, पेज पर उपलब्ध डायरेक्ट लिंक की मदद से भी आसानी से आवेदन किया जा सकता है। PPC 2026 के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 तय की गई है। मोबाइल नंबर या ईमेल आवश्यक परीक्षा पे चर्चा 2026 में भाग लेने के लिए पंजीकरण करते समय छात्रों को मोबाइल नंबर या ईमेल ID में से किसी एक की आवश्यकता होगी। इस वर्ष पहली बार Digilocker लॉगिन के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे प्रक्रिया और सरल हो गई है।       सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट innovateindia1.mygov.in पर जाएं।     होम पेज पर Participate Now विकल्प चुनें।     अपनी श्रेणी Student (Self Participation), Student (Participation through Teacher Login), Teacher या Parent में से किसी एक का चयन करें और दिए गए विकल्प Click to Participate पर क्लिक करें।     अब अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी दर्ज कर पंजीकरण करें।     आगे की आवश्यक जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा कर लें। पिछले वर्ष बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड परीक्षा पे चर्चा देशभर में अत्यंत लोकप्रिय कार्यक्रम है। वर्ष 2025 में 3.53 करोड़ प्रतिभागियों ने PPC में रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता दी गई। इस बार PPC 2026 फिर से लौट आया है ताकि विद्यार्थियों में आनंददायक शिक्षा और तनाव-मुक्त परीक्षाओं को प्रोत्साहित किया जा सके। छात्रों को मिलेगा PM से सवाल पूछने का अवसर वर्ष 2025 में तीन करोड़ से अधिक लोगों ने परीक्षा पे चर्चा में भाग लिया था। इस बार भी निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछने का अवसर मिलेगा। साथ ही, छात्र, शिक्षक और अभिभावक पीएम के साथ सीधे संवाद कर सकेंगे। इसके अलावा दस शीर्ष “एग्जाम वॉरियर्स” को पीएम आवास में प्रधानमंत्री से मुलाकात का विशेष मौका भी मिलेगा। वर्ष 2018 से शुरू हुई यह पहल अब अपने नौवें संस्करण तक पहुंच चुकी है।