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मोदी सरकार के लेबर पॉलिसी ड्राफ्ट में विवाद, कांग्रेस बोली- RSS की मंशा के अनुरूप

नई दिल्ली अकसर राजनीतिक बहस का कारण बनने वाली मनुस्मृति एक बार फिर से चर्चा में है। इसकी वजह यह है कि केंद्र सरकार की ओर से तैयार की गई लेबर पॉलिसी, 2025 के ड्राफ्ट में इसका जिक्र किया गया है। इस ड्राफ्ट में बताया गया है कि मनुस्मृति में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि कैसे मजदूरी तय होनी चाहिए और कैसे श्रमिकों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। ड्राफ्ट में कई ग्रंथों का जिक्र किया गया है, लेकिन मनुस्मृति को लेकर जिस तरह का विवाद रहा है, उससे आशंका है कि इस पर चर्चा छिड़ सकती है। ड्राफ्ट में लिखा गया है कि श्रम के बारे में भारत की समझ इसके आर्थिक आयाम से कहीं आगे तक जाती है। यह एक पवित्र और नैतिक कर्तव्य का प्रतीक है जो सामाजिक सद्भाव, आर्थिक कल्याण और सामूहिक समृद्धि को बनाए रखता है। भारतीय विश्वदृष्टि में काम केवल आजीविका का साधन नहीं है बल्कि धार्मिक कर्तव्य के रूप में इसकी व्याख्या की गई है। इसके माध्यम से धर्म की व्यापक व्यवस्था में योगदान की बात भी कही गई है। यह दृष्टिकोण प्रत्येक श्रमिक को सामाजिक सृजन के चक्र में एक अनिवार्य भागीदार के रूप में मान्यता देता है। चाहे वह कारीगर हो, किसान हो, शिक्षक हो या औद्योगिक मजदूर हो, सभी को व्यवस्था के अंग के रूप में स्वीकार किया गया है। ड्राफ्ट पॉलिसी में किन-किन ग्रंथों का हुआ है जिक्र इसके आगे ग्रंथों का जिक्र करते हुए लिखा गया है, 'मनुस्मृति, याज्ञवल्क्यस्मृति, नारदस्मृति, शुक्रनीति और अर्थशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों ने राजधर्म की अवधारणा के माध्यम से श्रम की परिभाषा तय की है। इनमें न्याय, उचित मजदूरी और श्रमिकों को शोषण से बचाने के लिए कर्तव्यों पर जोर दिया गया है। इन प्रारंभिक सूत्रों ने आधुनिक श्रम कानून के उदय से सदियों पहले भारत के सभ्यतागत ताने-बाने में श्रम शासन के नैतिक आधार को अंतर्निहित कर दिया था। इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि हमारे ग्रंथों में शुल्क न्याय की बात थी। इसमें बताया गया था कि कैसे किसी मजदूर को समय पर उसका वेतन मिलना जरूरी है और यह एक न्याय है। ऐसा ना किया जाना अन्याय की श्रेणी में रखा गया था। कांग्रेस बोली- RSS को मनुस्मृति सबसे ज्यादा पसंद है इसके अलावा शुक्रनीति का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि किसी कर्मचारी को सुरक्षित और मानवीय माहौल प्रदान करना नियोक्ता का कर्तव्य है। वहीं इस मामले पर विपक्ष हमलावर हो गया है। कांग्रेस के कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई है और कहा कि जातिभेद करने वाली मनुस्मृति का जिक्र करना गलत है। इससे पता चलता है कि इनके मूल्य क्या हैं और ये कैसा समाज बनाना चाहते हैं। कांग्रेस के सीनियर लीडर जयराम रमेश ने हमला बोलते हुए कहा कि मनुस्मृति के सिद्धांतों की ओर यह वापसी आरएसएस की सबसे प्रिय परंपराओं के अनुरूप है। आख़िरकार, संविधान के अपनाए जाने के तुरंत बाद आरएसएस ने इस आधार पर संविधान पर हमला किया था कि भारतीय संविधान मनुस्मृति में निहित मनु के आदर्शों और मूल्यों से प्रेरणा नहीं लेता है।

Indian Railways Update: अब नहीं छूटेगी ट्रेन, मास्टर लिस्ट फीचर से मिलेगी तुरंत सीट

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे (Indian Railways) में ट्रेन का कंफर्म टिकट मिलना कई बार मुश्किल साबित होता है, खासकर त्योहारों या छुट्टियों के दौरान। लेकिन अब आईआरसीटीसी (IRCTC) ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक बेहद उपयोगी फीचर ‘मास्टर लिस्ट’ शुरू किया है। इसकी मदद से टिकट बुकिंग का समय कम होता है और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। क्या है IRCTC की मास्टर लिस्ट सुविधा? अक्सर ऑनलाइन टिकट बुक करते समय सबसे ज्यादा समय यात्रियों का नाम, उम्र, जेंडर और अन्य जानकारी भरने में चला जाता है। ऐसे में अगर आप पहले से मास्टर लिस्ट बना लेते हैं, तो ये सारी डिटेल्स सेव रहती हैं। टिकट बुकिंग के दौरान बस यात्री का नाम सिलेक्ट करना होता है, जिससे बुकिंग प्रक्रिया बेहद तेज हो जाती है।   मास्टर लिस्ट कैसे बनाएं? 1. सबसे पहले IRCTC की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जाएं। 2. Login पर क्लिक करके अपने अकाउंट में साइन इन करें। 3. My Account सेक्शन में जाकर My Profile चुनें। 4. यहां Add/Modify Master List का विकल्प मिलेगा। 5. यात्री का नाम, जन्मतिथि, जेंडर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर भरें। 6. आधार वेरिफिकेशन पूरा होते ही यात्री की जानकारी आपकी मास्टर लिस्ट में जुड़ जाएगी। क्या है इसका फायदा? अब हर बार टिकट बुकिंग के समय आपको यात्री की जानकारी दोबारा नहीं भरनी पड़ेगी। बस मास्टर लिस्ट से नाम चुनें और तुरंत बुकिंग पूरी करें।     बुकिंग प्रक्रिया तेज होगी     कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी     वेटिंग लिस्ट की झंझट से राहत मिलेगी आईआरसीटीसी के वरिष्ठ कार्यपालक नवीन कुमार का कहना है कि 'मास्टर लिस्ट फीचर से यात्रियों का समय बचेगा और तेज बुकिंग के कारण कंफर्म सीट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।' पेमेंट में भी बचाएं समय यदि आप IRCTC वॉलेट से भुगतान करते हैं या QR कोड स्कैन करके पेमेंट करते हैं, तो कार्ड डिटेल्स भरने का समय बच जाता है। चूंकि टिकट बुकिंग के दौरान कुछ ही सेकंड का अंतर तय करता है कि टिकट कंफर्म होगा या नहीं, इसलिए हर सेकंड कीमती है।

आवाज़ की रफ्तार से तेज, लेकिन जमीन पर बिल्कुल शांत – X-59 ने किया फ्लाईट

कैलिफोर्निया नासा का नया एक्सपेरिमेंटल जेट X-59 आखिरकार उड़ान भर चुका है. यह कोई आम जेट नहीं, बल्कि एक ऐसा जेट है जो आवाज की रफ़्तार तोड़ते हुए भी वो जोरदार “धमाका” यानी सॉनिक बूम नहीं करता, जो आमतौर पर सुपरसोनिक विमानों के साथ सुनाई देता है. कैलिफोर्निया के पामडेल रीजनल एयरपोर्ट से  सुबह 10:13 बजे X-59 ने उड़ान भरी. यह उड़ान नासा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. बिना शोर के टूटी ‘साउंड बैरियर’ आमतौर पर जब कोई विमान आवाज़ की रफ़्तार (Speed of Sound) से तेज़ उड़ता है, तो ज़मीन पर ज़बरदस्त धमाका सुनाई देता है. इसे ही सॉनिक बूम कहा जाता है, जो इमारतों के शीशे तक हिला सकता है. यही वजह है कि 1973 से अमेरिका में आबादी वाले इलाकों के ऊपर सुपरसोनिक उड़ानें प्रतिबंधित हैं. लेकिन X-59 को खास इसी समस्या को हल करने के लिए बनाया गया है. इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि ये तेज़ उड़ान के बावजूद हवा में पैदा होने वाले झटकों और शोर को कम कर दे. नासा का मानना है कि अगर ये प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में दुनिया के सबसे “शांत” सुपरसोनिक फ्लाइट्स का दौर शुरू हो सकता है. चुपचाप हुई पहली उड़ान दिलचस्प बात ये है कि नासा ने इस टेस्ट फ्लाइट की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की. न ही कोई प्रेस रिलीज़ जारी की गई. इसकी एक वजह अमेरिका में चल रहा सरकारी शटडाउन भी बताया जा रहा है. हालांकि विमान प्रेमियों और फोटोग्राफरों ने इस उड़ान के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर दीं. तस्वीरों में X-59 को आसमान की ओर ऊंची उड़ान भरते और मोजावे डेजर्ट के ऊपर से गुजरते देखा गया. फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट्स के मुताबिक, विमान करीब एक घंटे तक हवा में रहा और एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस के ऊपर गोल-गोल घूमता रहा. अब होगी लंबी टेस्टिंग पहली उड़ान के बाद X-59 को अब नासा के आर्मस्ट्रॉन्ग फ्लाइट रिसर्च सेंटर में ले जाया गया है. यहीं से आने वाले महीनों में इसकी लंबी टेस्टिंग की जाएगी. इस दौरान नासा की टीम इसे कई बार उड़ाएगी और ज़मीन पर लगे सैकड़ों माइक्रोफोन से इसकी आवाज़ और कंपन को मापा जाएगा. इसके अलावा, कुछ खास तरह के सेंसर लगे दूसरे विमानों को भी इसके साथ उड़ाया जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि ये जेट हवा में कैसा व्यवहार करता है. ‘स्कंक वर्क्स’ में हुआ डिजाइन इस जेट को नासा ने लॉकहीड मार्टिन के साथ मिलकर तैयार किया है. इसे कंपनी के मशहूर “स्कंक वर्क्स” यूनिट में डिज़ाइन किया गया है, जहां दुनिया के कई सबसे गुप्त और एडवांस्ड विमान बनाए गए हैं. X-59 का पूरा स्ट्रक्चर और आकार इस तरह तैयार किया गया है कि हवा में चलते वक्त झटके और शोर बेहद कम रहें. इसका आगे का हिस्सा काफी लंबा और पतला है, जिससे हवा के टकराने का असर कम हो जाता है. क्यों है X-59 इतना अहम? नासा का मकसद सिर्फ एक नया जेट बनाना नहीं, बल्कि दुनिया को यह साबित करना है कि सुपरसोनिक उड़ानें बिना शोर के भी संभव हैं. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो अमेरिका में लगभग 50 साल बाद फिर से सुपरसोनिक उड़ानों पर लगा प्रतिबंध हट सकता है. इससे न सिर्फ कमर्शियल फ्लाइट्स तेज़ होंगी, बल्कि डिज़ास्टर रिलीफ, मेडिकल ट्रांसपोर्ट और दूसरे ज़रूरी कामों के लिए भी तेज़ मदद पहुंचाई जा सकेगी.  

पाकिस्तान युद्ध की ओर? तालिबान से न बनने वाली वार्ता में भारत को दोषी ठहराया

इस्लामाबाद  अफगानिस्तान के साथ तनाव का ठीकरा पाकिस्तान अब भारत पर फोड़ता नजर आ रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के आरोप हैं कि अफगानिस्तान भारत के लिए काम कर रहा है। हालांकि, इसे लेकर भारत या अफगानिस्तान सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तुर्की में हुई शांति वार्ता बगैर किसी समाधान के खत्म हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आसिफ के आरोप हैं कि काबुल का नेतृत्व भारत की धुन पर नाच रहा है। उन्होंने कहा, 'काबुल में बैठे लोग जो कठपुतली का तमाशा कर रहे हैं, उनका नियंत्रण दिल्ली से किया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि भारत पश्चिमी सीमा पर अपनी हार की भरपाई के लिए अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है। आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान के चार या पांच बार पलटने के बाद तुर्की में हुई शांति वार्ता असफल हो गई। उन्होंने कहा, 'जब भी हम समझौते के करीब होते हैं और वार्ताकार काबुल को खबर करते हैं, तो बीच में कोई दखल होती है और समझौता वापस ले लिया जाता है।' उन्होंने कहा, 'भारत पाकिस्तान के साथ धीमा युद्ध लड़ना चाहता है। इसे पूरा करने के लिए वह अफगानिस्तान का इस्तेमाल कर रहे हैं।' अफगानिस्तान की तरफ से दी जा रही जवाबी कार्रवाई की धमकी पर आसिफ ने कहा, 'अगर अफगानिस्तान ने इस्लामाबाद की तरफ देखा, तो हम उनकी आंखें निकाल लेंगे।' उन्होंने कहा, 'इस बात में कोई शक नहीं है कि पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए काबुल जिम्मेदार है।' साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर बातचीत से बात नहीं बनती है, तो अफगानिस्तान के साथ युद्ध छिड़ सकता है। वार्ता बेनतीजा, बढ़ सकता है तनाव अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में चल रही वार्ता किसी नतीजे के खत्म हो गयी। दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की गहरी खाई और परस्पर शत्रुता के कारण यह वार्ता बेनतीजा रही। एजेंसी वार्ता ने पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया, क्षेत्रीय मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव गहराने और क्षेत्रीय अस्थिरता की चिंताएं और बढ़ी हैं। तुर्की और कतर ने दोनों पक्षों के नेताओं से संवाद बनाए रखने और तनाव को कम करने का आग्रह किया है ताकि पहले से अस्थिर क्षेत्र में हिंसा और न बढ़े। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थों ने स्वीकार किया है कि किसी भी पक्ष के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। दोनों देशों की प्राथमिकताएं और अपेक्षाएं एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत रहीं, जिससे वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई। अफगान तालिबान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह किसी गंभीर वार्ता के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। एजेंसी के अनुसार, इस सहयोग की कमी ने आगे संभावित तनाव बढ़ने की आशंका को जन्म दिया है। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) की गतिविधियों को रोकना और इस समूह के लड़ाकों को अफगानिस्तान में पनाह लेने से रोकना किसी भी समझौते की मुख्य शर्त है। पाकिस्तान टीटीपी विद्रोह को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। हाल में सीमा पर हुई झड़पों के बाद पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि यदि टीटीपी के हमले जारी रहे तो वह अफगान क्षेत्र में लक्षित सैन्य अभियान चलाना जारी रखेगा। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती नागरिकों और सैन्य चौकियों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई आवश्यक है। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने काबुल क्षेत्र में कोई हमला किया तो वह इस्लामाबाद के प्रमुख ठिकानों पर 'गंभीर जवाबी कार्रवाई' करेगा। अफगानिस्तान पक्ष ने यहां तक कहा कि उसकी सेना 'पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इलाकों तक वार करने की क्षमता रखती है।'

केंद्र ने दी 8वें वेतन आयोग को हरी झंडी, जानें कब शुरू होगा लाभ

नई दिल्ली 8th Pay Commission: केंद्र सरकार के 1.2 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्र सरकार ने आखिरकार 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है। लगभग 10 महीने बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रसाद देसाई (Justice Ranjana Prakash Desai) करेंगी। पैनल में दो अन्य सदस्य होंगे और इसे 18 महीनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपनी होगी, यानी आयोग अप्रैल 2027 तक अपनी सिफारिशें पेश कर सकता है। कर्मचारियों की उम्मीदें और हकीकत हालांकि सरकारी कर्मचारी वेतन वृद्धि की जल्दी उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू होने में 2028 तक का समय लग सकता है। पिछले दो वेतन आयोगों (6वें और 7वें) की प्रक्रिया को देखें तो उनके गठन से लेकर सिफारिशों के लागू होने तक 22 से 28 महीने का समय लगा था। 6वें वेतन आयोग की समयरेखा – गठन की घोषणा: जुलाई 2006 (UPA-1 सरकार) – ToR की मंजूरी: अक्टूबर 2006 – रिपोर्ट सौंपी: मार्च 2008 (18 महीने बाद) – कैबिनेट की मंजूरी: अगस्त 2008 – कुल अवधि: लगभग 22 महीने सिफारिशें 1 जनवरी 2006 से प्रभावी रूप से लागू की गईं। 7वें वेतन आयोग की समयरेखा – गठन की घोषणा: सितंबर 2013 (UPA-2) – ToR मंजूरी: फरवरी 2014 – रिपोर्ट सौंपी: नवंबर 2015 (18 महीने बाद) – मंजूरी: जून 2016 (NDA सरकार) – कुल अवधि: लगभग 28 महीने सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से प्रभावी की गईं। इन दोनों आयोगों के अनुभवों के अनुसार, ToR मंजूरी से लेकर वेतन संशोधन लागू होने तक लगभग 2 से 2.5 वर्ष का समय लगता है। 8वें वेतन आयोग की संभावित समयसीमा 8वें वेतन आयोग की घोषणा 16 जनवरी 2025 को की गई थी, लेकिन इसका ToR 28 अक्टूबर 2025 को ही मंजूर किया गया। अब आयोग को 18 महीनों में रिपोर्ट सौंपनी है, यानी यह अप्रैल 2027 तक पूरी हो सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा समीक्षा और कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया में समय लगेगा, जिससे वास्तविक वेतन संशोधन 2028 के प्रारंभिक महीनों में लागू हो सकता है। आयोग को मिले मुख्य दायित्व केंद्र सरकार द्वारा मंजूर ToR के अनुसार 8वां वेतन आयोग निम्न बिंदुओं पर अध्ययन और सिफारिश करेगा — 1. केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा और संशोधन। 2. पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों में बदलाव की सिफारिश। 3. वेतन समानता (Pay Parity) और वेतन संरचना के तर्कसंगतकरण के उपाय। 4. भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार। 5. कार्य परिस्थितियों की तुलना सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र से। 6. सिफारिशों का असर राजकोषीय स्थिति और आर्थिक संतुलन पर। 7. पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का मूल्यांकन, क्योंकि कई राज्य भी केंद्र के वेतन ढांचे को अपनाते हैं। किसे मिलेगा लाभ? 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सीधे तौर पर 1.2 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रभावित करेंगी। इसके अलावा, स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) और सांविधिक संगठनों के कर्मचारी, जो केंद्र के वेतनमान को अपनाते हैं, उन्हें भी लाभ मिलेगा। राज्य सरकारें भी बाद में अपने-अपने संशोधित संस्करण लागू करती हैं, जिससे लाखों अतिरिक्त कर्मचारियों को भी परोक्ष रूप से फायदा होगा। बता दें कि अब जब ToR को मंजूरी मिल चुकी है, तो आयोग औपचारिक रूप से काम शुरू करेगा। अगले 18 महीनों में यह विभिन्न मंत्रालयों, कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञ संस्थानों से परामर्श लेकर रिपोर्ट तैयार करेगा।

देशभर की अदालतों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा– अब बनेगा आरोप तय करने का एक समान नियम

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर की अदालतों में आपराधिक मामलों में आरोप तय करने में हो रही लंबी देरी पर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि यह देरी न्याय प्रणाली की दक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कई बार आरोपी सालों तक जेल में बंद रहते हैं, लेकिन मुकदमा शुरू ही नहीं हो पाता। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि देशभर में कई ऐसे केस हैं, जिनमें चार्जशीट दाखिल हुए 3-4 साल हो गए, लेकिन मुकदमा शुरू ही नहीं हुआ। अदालत ने साफ संकेत दिया कि वह अब इस समस्या पर पूरे देश के लिए समान दिशानिर्देश जारी करने पर विचार कर रही है, ताकि इस प्रणालीगत देरी को समाप्त किया जा सके। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा को अमाइकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) नियुक्त किया है। साथ ही भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अटॉर्नी जनरल से भी इस विषय पर न्यायालय की सहायता करने को कहा गया है। अदालत ने बिहार राज्य के वकील को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया है। पीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी करीब दो साल से जेल में था। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि चार्जशीट 2023 में दाखिल की गई थी, लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं। इस पर जस्टिस अरविंद कुमार ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "दीवानी मामलों में मुद्दे तय नहीं होते, आपराधिक मामलों में आरोप तय नहीं होते। आखिर कठिनाई क्या है? अगर यह स्थिति जारी रही, तो हम पूरे देश के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करेंगे।" सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 251(बी) में यह प्रावधान है कि सत्र न्यायालय के मामलों में पहली सुनवाई से 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाने चाहिए, लेकिन अदालतों में इसका पालन नहीं हो रहा।

गुरुपर्व से पहले खुशखबरी! पाकिस्तान उच्चायोग ने 2100+ सिख तीर्थयात्रियों को दी अनुमति

नई दिल्ली पाकिस्तान उच्चायोग ने गुरु नानक जयंती पर्व से पहले 2100 से अधिक सिख तीर्थयात्रियों के वीजा जारी किए हैं। ये जानकारी बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी गई। पाकिस्तानी हाई कमीशन ने एक्स पोस्ट में कहा,"नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन ने भारत से सिख तीर्थयात्रियों को बाबा गुरु नानक देव जी के जन्म उत्सव में शामिल होने के लिए 2100 से ज्यादा वीजा जारी किए हैं, जो 04-13 नवंबर 2025 तक पाकिस्तान में होंगे।" पिछले साल दोनों देशों ने डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर हुए समझौते को और पांच साल के लिए बढ़ाने पर सहमति जताई थी। यह समझौता 24 अक्टूबर 2019 को भारत से तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान के नरोवाल में गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर जाने में आसानी के लिए किया गया था, और यह पांच साल के लिए मान्य था। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, इससे भारतीय तीर्थयात्रियों के पाकिस्तान में पवित्र गुरुद्वारे में जाने के लिए कॉरिडोर का बिना किसी रुकावट के इस्तेमाल सुनिश्चित हुआ। भारत ने पाकिस्तान से यह भी आग्रह किया था कि वह तीर्थयात्रियों पर कोई फीस या चार्ज न लगाए। तीर्थयात्री लगातार पाकिस्तान द्वारा प्रति तीर्थयात्री (प्रति यात्रा) पर लगाए जाने वाले 20 अमेरिकी डॉलर सर्विस चार्ज को हटाने की मांग कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया था, जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 550 भारतीय तीर्थयात्रियों का पहला जत्था सीमा पार पवित्र स्थान पर गया था। 1947 में बंटवारे के बाद भारत की सीमा पार से आने वाले लोगों के लिए यह पवित्र स्थान बंद कर दिया गया था। 1999 में मरम्मत और जीर्णोद्धार के बाद गुरुद्वारा तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिया गया था, और तब से सिख जत्थे नियमित रूप से इस स्थान पर जाते रहे हैं। 22 अप्रैल को हुए भयानक पहलगाम आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा हालात को देखते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर की सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं। इस साल की शुरुआत में, गुरुद्वारा दरबार साहिब के गर्भगृह में बाढ़ का पानी घुसने के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों की भारी आलोचना भी हुई थी। इस बीच, कई रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने भारतीय सिख तीर्थयात्रियों, या "जत्थों" के देश में आने के दौरान भारत विरोधी बातें फैलाने की योजना बनाई है। 'खालसा वॉक्स' की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सोशल मीडिया पर चल रही बातों से पता चलता है कि 2 अगस्त को लाहौर के होटल गुलबर्ग में एक इंटर-एजेंसी मीटिंग हुई थी, जिसमें सिक्योरिटी एजेंसियों, इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) और पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने गुरुद्वारों में भारत विरोधी बैनर और नारे लगाने का आइडिया दिया था, लेकिन ईटीपीबी और पीएसजीपीसी दोनों ने इस प्रस्ताव का जबरदस्त विरोध किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईटीपीबी के एक अपर सचिव ने चेतावनी दी कि तीर्थयात्रा का राजनीतिकरण करने से भारत ऐसी यात्राओं को अनिश्चित काल के लिए सस्पेंड कर सकता है, जो पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे बोर्ड के लिए एक बड़ा झटका होगा। इसमें बताया गया है कि सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया कि 8 मई को करतारपुर कॉरिडोर बंद होने के बाद से ईटीपीबी को हर महीने लगभग 70 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का नुकसान हो रहा है, और दो बड़ी सालाना सिख तीर्थयात्राएं रद्द होने से यह नुकसान और भी बढ़ गया है।

‘शांतिदूत’ ट्रंप को साउथ कोरिया ने पहनाया ताज, दिया सर्वोच्च नागरिक सम्मान

ग्योंगजू  दक्षिण कोरिया ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत सोने के मुकुट की एक रेप्लिका के साथ किया और उन्हें देश का सबसे बड़ा सम्मान, 'ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुंगवा' से सम्मानित किया। राष्ट्रपति कार्यालय ने यह जानकारी दी। अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई लड़ाकू विमानों ने एयर फोर्स वन को एस्कॉर्ट किया, और रनवे पर साउथ कोरियाई मिलिट्री बैंड ने ट्रंप का स्वागत 'वाईएमसीए' गाना बजाकर किया और बंदूकों से सलामी दी गई। ली के कार्यालय ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप पर 'शांतिदूत' के रूप में ट्रंप की भूमिका को देखते हुए, उन्हें 'ग्रैंड ऑर्डर ऑफ मुगुंगवा' से सम्मानित किया गया, जिसका नाम साउथ कोरिया के राष्ट्रीय फूल, एक गुलाबी हिबिस्कस के नाम पर रखा गया है, जिसे अंग्रेजी में रोज ऑफ शेरोन भी कहा जाता है। ट्रंप ने चमचमाता हुआ अवॉर्ड मिलने पर कहा, "मैं इसे अभी पहनना चाहता हूं।" एक साउथ कोरियाई अधिकारी ने कहा कि वह यह सम्मान पाने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं। ताज की बात करें तो, यह प्राचीन सिल्ला राजवंश के चोनमाचोंग सोने के मुकुट की प्रतिकृति है, जो ग्योंगजू नेशनल म्यूजियम में प्रदर्शित है। इस वंश के कुल छह मुकुट हैं। एपीईसी शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण कोरिया ने पहली बार इन छह सोने के मुकुटों को एक साथ एक प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया है। ये शाही शानो शौकत को दर्शाते हैं। सोने का उपयोग राजा और कुलीन वर्ग की उच्च सामाजिक स्थिति को दर्शाता था। कथित तौर पर ये मुकुट सिल्ला साम्राज्य में लगभग 5वीं से 7वीं शताब्दी के बीच बनाए गए थे। इस बीच, बुधवार को राष्ट्रपति ली जे म्युंग और ट्रंप के बीच हुई बैठक में अटकी टैरिफ बातचीत एक समझौते पर पहुंच गई। यह उच्च स्तरीय बैठक ग्योंगजू, नॉर्थ ग्योंगसांग प्रांत में एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपीईसी) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। प्रेसिडेंशियल चीफ ऑफ स्टाफ फॉर पॉलिसी किम योंग-बीओम ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों देशों ने 30 जुलाई को हुए व्यापार समझौते की विस्तृत शर्तों पर सहमति जताई थी, जिससे अब द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में नई स्थिरता का रास्ता साफ हो गया है।

‘100 दिन की चुप्पी’ पर बवाल: कांग्रेस ने जगदीप धनखड़ को लेकर की बड़ी मांग

नई दिल्ली  कांग्रेस ने एक बार फिर से पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का मुद्दा उठाया और मांग की कि वे एक कम से कम फेयरवेल के हकदार हैं। कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि धनखड़ अपने इस्तीफे के 100 दिनों से पूरी तरह से चुप हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक ऐसी घटना को ठीक 100 दिन हो गए हैं, जो पहले कभी नहीं हुई। रमेश ने एक्स पर कहा, "अचानक और चौंकाने वाली बात यह है कि 21 जुलाई की देर रात, भारत के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। यह साफ था कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था – भले ही वह दिन-रात पीएम की तारीफ करते थे।" कांग्रेस नेता ने कहा कि 100 दिनों से, पूर्व वाइस प्रेसिडेंट जो रोजाना सुर्खियों में रहते थे, पूरी तरह चुप – अनदेखे और अनसुने हैं। रमेश ने आगे कहा कि पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, राज्यसभा के चेयरमैन के तौर पर, विपक्ष के अच्छे दोस्त नहीं थे। कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, "वह लगातार और गलत तरीके से विपक्ष की खिंचाई करते थे। फिर भी, डेमोक्रेटिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, विपक्ष कह रहा है कि वह कम से कम एक फेयरवेल फंक्शन के हकदार हैं, जैसा कि उनके पहले के सभी नेताओं के साथ हुआ था। ऐसा नहीं हुआ है।" धनखड़ के इस्तीफे के बाद, कांग्रेस ने दावा किया था कि उपराष्ट्रपति पद से उनके इस्तीफे के पीछे के कारण उनके द्वारा बताई गई हेल्थ प्रॉब्लम से कहीं ज्यादा गहरे है। विपक्षी पार्टी ने सरकार से धनखड़ के इस्तीफे पर सफाई देने के लिए भी कहा था। बता दें कि अचानक से बड़ा कदम उठाते हुए धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा और कहा कि वह तुरंत पद छोड़ रहे हैं। 74 साल के धनखड़ ने अगस्त 2022 में पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। वे राज्यसभा के चेयरमैन भी थे और उन्होंने संसद के मॉनसून सेशन के पहले दिन इस्तीफा दे दिया था। राज्यसभा चेयरमैन के तौर पर अपने अहम कार्यकाल में, धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ, जिसने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था। यह प्रस्ताव, जो आजाद भारत में किसी वाइस प्रेसिडेंट को हटाने का पहला प्रस्ताव था, बाद में राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने खारिज कर दिया था।  

मंदिर में घुसकर ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए, मूर्तियों पर जूते से वार करने पहुंचा युवक, श्रद्धालुओं ने किया काबू

बेंगलुरु  कर्नाटक के बेंगलुरु से बुधवार को हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शख्स ने स्थानीय मंदिर में घुसकर जमकर उत्पात मचाया है, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस के मुताबिक शख्स को मंदिर के गर्भगृह के बाहर रखी हुई मूर्ति को खंडित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। शख्स की पहचान 45 वर्षीय कबीर मंडल के रूप में हुई है जो कथित तौर पर बांग्लादेश का नागरिक है। पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी और मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार सुबह मराठाहल्ली के पास देवरबिसनहल्ली स्थित वेणुगोपाल मंदिर में हुई। मंदिर नष्ट करने की दी धमकी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी शराब के नशे में धुत होकर मंदिर में 'अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए घुस गया। जानकारी के मुताबिक उसने कथित तौर पर मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्थित मूर्तियों पर अपने जूतों से हमला करने की भी कोशिश की। एक स्थानीय निवासी ने एनडीटीवी को बताया, “वह 'अल्लाह हू अकबर' चिल्लाते हुए मंदिर में घुस गया और मूर्तियों पर अपने जूतों से हमला करने की कोशिश की। उसने मंदिर को नष्ट करने की भी धमकी दी।” मोची का काम करता है आरोपी अधिकारी ने बताया कि इसके बाद मंदिर के कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने उसे पकड़ लिया, मंदिर परिसर के बाहर एक खंभे से बांध दिया और पुलिस के हवाले करने से पहले उसकी जमकर पिटाई की। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी पिछले चार-पांच सालों से इलाके में मोची का काम कर रहा है। पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और तफ्तीश की जा रही है।