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मंत्री सहयोगी की पत्नी का सुसाइड, पति ने थाने में सरेंडर किया—8 माह का वैवाहिक संबंध

मुंबई  महाराष्ट्र की मंत्री पंकजा मुंडे के सहयोगी अनंत गर्जे के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। उनकी पत्नी मुंबई के वर्ली इलाके में मृत पाई गईं। पशुपालन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री और बीजेपी की नेता पंकजा मुंडे के सहयोगी अनंत गर्जे की पत्नी, डेंटिस्ट गौरी पाल्वे-गार्जे ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतका के पिता अशोक मारुति पावले ने अनंत गर्जे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उनकी बेटी को उसके पति द्वारा प्रताड़ित और परेशान किया जाता था।  शिकायत दर्ज होने के बाद गर्जे ने वर्ली पुलिस स्टेशन में सरेंडर कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, गौरी ने शनिवार को अपने घर पर फांसी लगाकर जान दे दी, जिसके बाद रविवार को अशोक मारुति पावले ने अनंत गर्जे और उनके भाई अजय गर्जे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस जोड़े ने कुछ महीने पहले फरवरी में ही शादी की थी। वर्ली पुलिस स्टेशन ने एक एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की है। मामले में और जानकारी का इंतजार है।

अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई: अहमदाबाद में 15 JCB लगीं, 918 मकान तोड़े जा रहे

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में प्रशासन ने झीलों से अवैध कब्जा हटाने की मुहिम तेज कर दी है। चंडोला झील पर कार्रवाई के बाद अब इसनपुर झील पर बने सैकड़ों पक्के मकानों को तोड़ने का अभियान शुरू किया गया है। सोमवार सुबह से ही इसनपुर झील क्षेत्र में 15 से अधिक जेसीबी मशीनें पहुंचीं और 918 अवैध मकानों को ध्वस्त करने का काम शुरू हो गया। जानकारी के मुताबिक, इसनपुर झील पर अवैध कब्जा पिछले 50 साल से अधिक समय से बना हुआ था। मकानों में कई परिवार पीढ़ियों से रह रहे थे। प्रशासन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद झील क्षेत्र को खाली कराने का निर्णय लिया है। कार्रवाई को देखते हुए किसी भी प्रकार के विरोध या अव्यवस्था की आशंका को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारी लगातार स्थल पर मौजूद रहकर बुलडोज़र कार्रवाई की निगरानी कर रहे हैं। अहमदाबाद नगर निगम द्वारा पिछले कुछ वर्षों से शहर की झीलों और जल निकायों को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। अवैध निर्माणों के कारण जलभराव, बाढ़ और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याओं को देखते हुए इस तरह की कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। इस बड़े पैमाने की कार्रवाई के बाद उम्मीद है कि इसनपुर झील को उसके मूल स्वरूप में लाया जा सकेगा और क्षेत्र में जल संरक्षण की स्थिति भी बेहतर होगी।

फ्लाईओवर से कार नीचे गिरी, सबरीमाला जा रहे 6 श्रद्धालुओं ने गंवाई जान

 कोलार कर्नाटक के कोलार जिले में रविवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में सबरीमाला जा रहे 6 तीर्थयात्रियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि 32 अन्य घायल हो गए। पुलिस के अनुसार कार की तेज रफ्तार इस दुर्घटना का मुख्य कारण बनी।  यह दुखद घटना मालुर तालुका के अब्बेनहल्ली गांव के पास देर रात लगभग सवा दो से ढाई बजे के बीच हुई। पुलिस के प्रारंभिक जांच के अनुसार वाहन चालक कथित रूप से अत्यधिक तेज गति से कार चला रहा था। तेज रफ्तार के कारण कार अनियंत्रित हो गई और एक फ्लाईओवर के साइड बैरियर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बैरियर तोड़कर लगभग 100 मीटर नीचे एक अंडरपास में जा गिरी। कार में सवार 6 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि चारों मृतक आपस में दोस्त थे और दुर्घटना के समय केरल के सबरीमाला मंदिर की तीर्थयात्रा पर जा रहे थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इस दुर्घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार ड्राइविंग से होने वाले खतरों को उजागर किया है।  

एलओसी पर अचानक हलचल, सेना सतर्क—पाकिस्तान सीमा पर हाई अलर्ट जारी

नई दिल्ली रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक ओर कहा, ‘सिंध भले ही आज भौगोलिक रूप से भारत का हिस्सा नहीं, लेकिन सभ्यता के नजर‍िये से सिंध हमेशा भारत का अभिन्न अंग रहेगा. जहां तक जमीन की बात है, सीमाएं बदल सकती हैं. कौन जानता है क‍ि कल सिंध फ‍िर भारत में वापस आ जाए.’ उनके बयान से पाक‍िस्‍तान में हलचल मची हुई है. दूसरी ओर खबर आ रही क‍ि पाक‍िस्‍तान से लगते इंटरनेशनल बॉर्डर और एलओसी पर हलचल तेज हो गई है. कहा तो यहां तक जा रहा क‍ि भारत ने इस इलाके में फौज की संख्‍या दोगुनी कर दी है. हालांकि, इसके पीछे वजह कुछ और बताई जा रही है. दरअसल, दिल्ली ब्लास्ट के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं. ब्लास्ट के तुरंत बाद से ही केंद्र और राज्य की खुफिया एजेंसियां लगातार इनपुट साझा कर रही हैं, जिन्हें देखते हुए इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) दोनों ही सेक्टरों में फोर्सेज की तैनाती को कई स्तर पर बढ़ा दिया गया है. सीमा पर हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जवानों की संख्या दोगुनी कर दी गई है और गश्त का दायरा भी रात-दिन लगातार बढ़ाया गया है.     दिल्ली ब्लास्ट के बाद आतंकियों की हलचल तेज     इनपुट्स के अनुसार फिलहाल जम्मू-कश्मीर में करीब 131 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से 117 पाकिस्तानी आतंकी बताए जा रहे हैं. इनके साथ 14 स्थानीय मददगार भी शामिल हैं, जो इन आतंकियों को हाइडआउट बदलने, मूवमेंट छिपाने और संसाधन उपलब्ध कराने में मदद करते हैं. वहीं, सीमा पार भी बड़ी संख्या में आतंकी घुसपैठ की फिराक में बैठे हुए हैं.     सर्दियों का मौसम जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के लिए एक अलग चुनौती लेकर आता है. पुंछ-राजौरी सेक्टर में बर्फबारी और गहरी धुंध के कारण एलओसी के रास्ते से घुसपैठ लगभग नामुमकिन हो जाती है. ऐसे में खुफिया एजेंसियों को यह इनपुट मिल रहा है कि आतंकी अब इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) को घुसपैठ का नया रास्ता बनाने की तैयारी में हैं. इंटरनेशनल बॉर्डर पर बढ़ी हलचल यही वजह है कि सेना और बीएसएफ ने इंटरनेशनल बॉर्डर पर सुरक्षा तैनाती को दोगुना कर दिया है. पेट्रोलिंग के दौरान महिला और पुरुष जवान दोनों शामिल किए गए हैं. खास बात यह है कि पेट्रोलिंग टीम में वही महिला अधिकारी भी तैनात हैं, जिन्होंने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कई पोस्ट को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई थी.  उस इंटरनेशनल बॉर्डर तक पहुंची, जहां से पाकिस्तानी पोस्ट महज कुछ मीटर की दूरी पर साफ दिखाई देती हैं. यह वही जोन है जहां दुश्मन हर समय नजर बनाए रखता है. हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं. सामने पाकिस्तान का पोस्ट, हर क्षण खतरा, और पहरेदारी में जरा भी ढिलाई की गुंजाइश नहीं. हथियार हर पल तैयार बीएसएफ और सेना के जवानों ने बताया कि उनके हथियार हर समय लोडेड और तैयार रहते हैं. पेट्रोलिंग के दौरान उनकी निगाहें लगातार पाकिस्तान की दिशा में रहती हैं. एक जवान ने कहा, पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता. वे कभी भी किसी भी हरकत की कोशिश कर सकते हैं. इसी लिए हर सेकेंड अलर्ट रहना पड़ता है. एक महिला अधिकारी ने कहा, खतरे कई हैं, लेकिन हमारे अंदर कोई डर नहीं है. हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं. बॉर्डर पर हम हैं, तो देश सुरक्षित है. ड्रोन खतरा बड़ा, अब स्पेशल ट्रेनिंग दे रही सेना जवानों ने यह भी खुलासा किया कि पहले सीमा पर मुकाबला केवल ‘रेंज फाइट’ तक सीमित था. यानी दूर से फायरिंग. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन का इस्तेमाल बेहद नजदीक से किया गया. इसके बाद से जवानों को ड्रोन डिटेक्शन और ड्रोन-न्यूट्रलाइजेशन की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है. फोर्सेज के अनुसार पाकिस्तान सीमा पर तैनात पोस्टों से ड्रोन भेजने की कई असफल कोशिशें पहले भी हुई हैं. यही वजह है कि अब हर पेट्रोलिंग टीम में ‘एंटी-ड्रोन गियर’ और प्रशिक्षित जवान शामिल किए गए हैं.  जवानों का स्पष्ट संदेश जवानों ने कैमरे पर सीधे पाकिस्तान को संदेश भेजते हुए कहा, सीमा पर कोई भी नापाक हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पाकिस्तान की किसी भी कोशिश को कामयाब नहीं होने देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि चाहे घुसपैठ की कोशिश हो, ड्रोन से हथियार भेजने की साजिश, या पाक रेंज से फायरिंग, हर तरह की प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने के लिए वे पूर्ण रूप से तैयार हैं.  

मोदी सरकार का बड़ा कदम: साउथ राज्यों की मांगों को ध्यान में रखते हुए परिसीमन पर बनाया जा रहा प्लान

 नई दिल्ली देश में लोकसभा और विधानसभा की सीटों के राष्ट्रव्यापी परिसीमन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इस परिसीमन के आधार पर लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा महिला आरक्षण भी इसी के आधार पर लागू होगा। परिसीमन के लिए भौगोलिक क्षेत्र के साथ ही आबादी को भी आधार माना जाता रहा है और उसके अनुसार ही सीटों का आवंटन होता रहा है। लेकिन बीते कुछ सालों से तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल समेत दक्षिण भारत के सभी राज्यों की ओर से चिंता जताई जाती रही है कि उनकी सीटों का अनुपात कम हो सकता है। इसकी बजाय यूपी, बिहार जैसे राज्यों की लोकसभा सीटों का अनुपात और बढ़ सकता है, जो पहले ही अधिक है। दक्षिण भारत के राज्यों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि यदि आबादी के अनुपात को आधार मानते हुए सीटों का आवंटन हुआ तो हमें नुकसान होगा। यही नहीं उत्तर भारत से तुलना करते हुए साउथ के कई नेता कहते रहे हैं कि हमने यदि फैमिली प्लानिंग को अच्छे से लागू किया और आबादी पर नियंत्रण पाया तो उसके लिए परिसीमन में सीटों का अनुपात घटाकर सजा नहीं मिलनी चाहिए। अब जानकारी मिल रही है कि केंद्र सरकार ने दक्षिण भारत के राज्यों की इन चिंताओं पर विचार किया है। खबर है कि सीटों की संख्या भले ही परिसीमन के बाद बढ़ेगी, लेकिन उसके अनुपात में बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ है कि साउथ के राज्यों की राजनीतिक शक्ति जस की तस रहेगी। परिसीमन को लेकर जिन प्रस्तावों पर विचार चल रहा है, उनमें से एक यह है कि विधानसभा की सीटों को जनगणना के आंकड़ों के अनुसार बढ़ा दिया जाए। लेकिन राज्यसभा के सदस्यों की संख्या अभी जैसी ही रखी जाए। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रस्ताव को लेकर सरकार का मानना है कि विधानसभा की सीटें बढ़ाना किसी राज्य का आंतरिक मामला है। इसके अलावा राज्यसभा की सीटें तो संसद में सभी राज्यों के प्रतिनिधित्व के लिए ही हैं। ऐसे में लोकसभा की सीटों का अनुपात सही रखना होगा ताकि किसी राज्य को बढ़त मिलती ना दिखे और कोई राज्य कमजोर भी ना नजर आए। अब तक हुए 4 परिसीमन, 23 साल में क्या-क्या बदल गया इस पर विचार करते हुए कुलदीप नैयर बनाम भारत सरकार वाले केस का भी जिक्र अधिकारियों ने किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यसभा का मुख्य काम लोकसभा द्वारा लिए गए फैसलों को चेक करना है। इसका एकमात्र अर्थ प्रतिनिधित्व से नहीं है। फिलहाल इस संबंध में एक ऐक्ट बनेगा और फिर परिसीमन होगा। इससे पहले देश में 1952, 1962, 1973 और 2002 में परिसीमन हो चुके हैं। तब से अब तक परिसीमन नहीं हुआ है और इस बीच देश की आबादी और उसके अनुपात में बड़ा बदलाव है। एक अहम चीज यह है कि बीते 23 सालों में शहरी आबादी कहीं ज्यादा हो गई है। इसे लेकर भी सरकार विचार कर रही है कि ग्रामीण इलाकों का प्रतिनिधित्व प्रभावित ना हो।

कनाडा ने पीएम मोदी की मीटिंग से पहले लिया शानदार फैसला, भारतीय नागरिक खुशहाल

नई दिल्ली भारत और कनाडा के रिश्ते फिर से नई दिशा में बढ़ रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में G20 लीडर्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के पीएम मार्क कार्नी की मुलाकात ने दोनों देशों के बीच जम चुके रिश्तों को लगभग खत्म कर दिया. इसी बैठक के बाद दोनों देशों ने पुराने और रुके हुए व्यापार समझौते CEPA पर दोबारा बातचीत शुरू करने का ऐलान किया, जिसे रिश्तो में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. लेकिन इस मुलाकात से पहले कनाडा ने भारतीय मूल के परिवारों को बड़ा तोहफा दिया है. कनाडा की सरकार ने नागरिकता नियमों में बड़े बदलाव का रास्ता साफ कर दिया है. ‘लॉस्ट कनेडियन्स’ कानून को अब रॉयल असेंट मिल गया है. यह बिल C-3 दरअसल कनाडा की सिटिजनशिप एक्ट 2025 में अहम बदलाव करता है और उन हजारो परिवारों को राहत देगा जो कई सालो से अपने बच्चों के लिए नागरिकता को लेकर परेशान थे. यह बिल इसी हफ्ते सीनेट से पास हुआ और रॉयल असेंट मिलने के बाद अब इसे लागू करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. कनाडा की इमिग्रेशन मिनिस्टर लीना डियाब ने कहा क यह कानून पुराने नियमो के कारण बाहर रह गए लोगों को न्याय देगा. उन्होंने बताया क नया कानून उन परिवारों की मुश्किलें खत्म करेगा जिनके बच्चे या जिन्हें खुद विदेश में पैदा होने की वजह से नागरिकता नहीं मिल सकी थी. क्या है यह बिल? इस बिल का मकसद उस पुराने नियम को खत्म करना है जिसे ‘सेकंड जेनरेशन कट-ऑफ’ कहा जाता था. 2009 में कनाडा ने कानून बदलकर यह तय कर दिया था कि जो कनाडाई नागरिक खुद विदेश में पैदा हुआ है, वह अपने बच्चे को नागरिकता सिर्फ तभी दे सकता है जब बच्चा कनाडा में पैदा हो. इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोग बन गए जिन्हें ‘लॉस्ट कनेडियन्स’ कहा जाने लगा. यानी ऐसे लोग जो खुद को कनाडा का नागरिक मानते थे लेकिन कानून उनकी राह में अटक जाता था. भारतीयों के लिए क्या है राहत? कई भारतीय मूल परिवार ऐसे थे जिनके बच्चे विदेश में पैदा होने या गोद लिए जाने के कारण सिटिजनशिप नहीं पा सके. नया कानून लागू होते ही ऐसे लोग सीधे तौर पर नागरिकता पा सकेंगे, बशर्ते उनका केस पुराने कानून से प्रभावित हुआ हो. साथ ही नया नियम कहता है क कोई भी कनाडाई नागरिक, जो खुद विदेश में पैदा या गोद लिया गया हो, वह अपने बच्चे को नागरिकता दे सकेगा. भारत-कनाडा में होगी बातचीत भारत और कनाडा ने 2010 में CEPA यानी कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट की बातचीत शुरू की थी. 2022 में इस पर काफी तेजी भी आई थी. खासकर दवाइयो, क्रिटिकल मिनरल्स, टूरिज्म, ग्रीन एनर्जी और माइनिंग जैसे क्षेत्रो में दोनों देशों ने मिलकर काम बढ़ाया था. लेकिन 2023 में कनाडा ने बातचीत रोक दी थी, जिससे रिश्तो में कड़वाहट और तनाव साफ दिखने लगा. भारत के विदेश मंत्रायल ने रविवार रात जारी बयान में साफ कहा है कि दोनों देश अब एक हाई-अम्बिशन व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं. लक्ष्य है कि 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाए. इससे न सिर्फ कारोबार बढ़ेगा बल्कि नौकरी, निवेश और तकनीक साझा करने जैसे कई नए दरवाजे खुल सकते हैं. इसके साथ ही दोनों देशों ने सिविल न्यूक्लियर सहियोग को और मजबूत करने पर भी बात की है. खासकर लम्बे समय के लिए यूरेनियम सप्लाई एग्रीमेंट पर फिर से चर्चा शुरू करने का इरादा दिखा है. यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जाता है.

पाकिस्तान में दहशत: पेशावर FC HQ पर दो आत्मघाती धमाके, हमलावरों की अंधाधुंध गोलीबारी

पेशावर पाकिस्तान के पेशावर में पैरामिलिट्री फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) मुख्यालय, पैरा मिलिट्री फोर्सेज का मुख्यालय है. पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों के इस मुख्यालय पर सोमवार की सुबह हमला हो गया. फ्रंटियर कोर के मुख्यालय से दो धमाकों की आवाज सुनी गई. पाकिस्तान के सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर ऑपरेशन शुरू कर दिया है. पाकिस्तान के पेशावर में सोमवार को FC के मुख्यालय पर आत्मघाती हमले में हमलावर समेत तीन लोग मारे गए हैं. मरने वालों में आत्मघाती हमलावर के साथ ही एक अन्य आतंकी भी शामिल बताया जा रहा है.इस हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों की भी जान गई है. एक धमाका मेन गेट, और दूसरा एफसी मुख्यालय परिसर के साइकिल स्टैंड के पास  हुआ. अधिकारियों ने इसकी पुष्टि कर दी है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के महानिरीक्षक (आईजी) जुल्फिकार हमीद ने पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए कहा है कि दो आत्मघाती विस्फोट हुए. एक विस्फोट मेन गेट पर हुआ. दूसरा धमाका मुख्यालय परिसर में मोटरसाइकिल स्टैंड के पास हुआ. मोटरसाइकिल स्टैंड अर्धसैनिक बलों के मुख्यालय के परिसर में स्थित है. पेशावर हमले की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई है. सामने आए सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि मेन गेट के बार एक धमाका होता है और आग की लपटें दिख रही हैं.एक शख्स इसके बाद मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करता भी नजर आ रहा है. इलाके में अब भी गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई दे रही है. सुरक्षाबलों और हमलावरों के बीच गोलीबारी जारी है.  

दुबई इवेंट में बड़ा फैसला: अमेरिकी पायलट ने नमांश के समर्थन में अपना शो वापस लिया

दुबई        दुबई में एयर शो के दौरान तेजस विमान क्रैश होने के बाद भी शो जारी रखने पर एक अमेरिकी पायलट ने आयोजकों को कड़ी फटकार लगाई है. दुबई एयर शो में हिस्सा ले रहे इस पायलट ने कहा कि उनके लिए ये यकीन करना मुश्किल था कि इस क्रैश के कुछ ही देर बाद वहां सब कुछ नॉर्मल था. कमेंट्री करने वाले शख्स के शब्दों में पहले जैसा ही जोश था, लोग उसी तरह तालियां बजा रहे थे. लेकिन वहां एक हादसा हो चुका था. उन्होंने कहा कि हादसे के बाद शो जारी रखना हैरान करने वाला फैसला था. अमेरिकी वायुसेना के इस पायलट का नाम मेजर टेलर फेमा हिएस्टर है. F-16 से आसमान में कलाबाजी दिखाने वाले अमेरिकी एयरफोर्स के टीम कमांडर ने  इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखकर कहा कि, 'टीम ने पायलट नमांश, उनके साथियों और परिवार के सम्मान में कुछ और लोगों के साथ एयर शो में अपनी आखिरी परफॉर्मेंस कैंसिल करने का फैसला किया है.' घटनास्थल का वर्णन करते हुए उन्होंने लिखा है, "जब उन्होंने आग बुझा दी, और मुझे एयर शो के ऑर्गनाइज़र ने बताया कि फ्लाइंग डिस्प्ले जारी रहेगा, तो मैंने तय किया कि हम इसे कैंसिल कर देंगे. मैं शायद एक या दो घंटे बाद शो साइट पर गया, यह सोचकर कि वहां खाली होगा, लोग चले गए होंगे, लेकिन ऐसा नहीं था."  उन्होंने आगे कहा, "अनाउंनसर अभी भी उत्साह से भरा था, भीड़ ने अगले कई शो रूटीन उत्साह के साथ देखे और जब शो खत्म हुआ तो फिर अनाउंस हुआ- हमारे सभी प्रायोजकों, कलाकारों को बधाई और हम आपसे 2027 में मिलेंगे. विंग कंमाडर नमांश स्याल की मृत्यु के बाद भी एयर शो जारी रखने के लिए उन्होंने आयोजकों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "दुबई एयरशो के आखिरी दिन इंडियन एयर फोर्स के विंग कमांडर नमांश स्याल तेजस से एक्रोबैटिक डेमो करते हुए दुर्घटना का शिकार हो गए और उनकी मृत्यु हो गई. हमारी टीम भी अपने प्लेन के साथ तैयारी कर रही थी. हमें अपना शो करना था." अमेरिकी एयरफोर्स के पायलट का पोस्ट उन्होंने आगे कहा, "हालांकि शो  के आयोजकों ने घटना के बाद भी फ्लाइंग शेड्यूल को जारी रखने का फैसला लिया, हमारी टीम के अलावा कुछ और लोगों ने अपना अंतिम परफॉर्मेंस रद्द करने का फैसला किया, ये उस पायलट, उसके साथी और उसके परिवार के सम्मान में लिया गया फैसला था." शो जारी रखने पर हिएस्टर ने कहा, "उनके लिए यह सोचना अजीब था कि उनकी टीम शो साइट से उनके "बिना" रॉक एंड रोल टेक के बाहर निकल रही है, जबकि अगला परफॉर्मर परफॉर्म करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है.  अमेरिकी वायुसेना के पायलट हिएस्टर ने कहा, "शो चलते रहना चाहिए (The show must go on) लोग हमेशा यही कहते हैं. और यह सही हैं. लेकिन बस याद रखें कि आपके जाने के बाद भी कोई यही कहेगा."   नमांश स्याल का अंतिम संस्कार  इस बीच रविवार को विंग कमांडर नमांश स्याल का कांगड़ा स्थित उनके पैतृक गांव में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान नमांश स्याल के पिता जगन्नाथ स्याल ने कहा कि देश ने एक बेहतरीन पायलट खो दिया है और मैंने एक जवान बेटा खो दिया. जगन्नाथ स्याल ने कहा कि उसकी जिंदगी में कभी कोई पल बोरिंग नहीं रहा और उसने हर उस कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया.

‘चार बार डाला वोट’, अवैध घुसपैठियों का खुलासा; हाकिमपुर सीमा पर भारी भीड़ जुटी

उत्तर 24 परगना पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर बीएसएफ चौकी के पास एक कच्चे, धूल भरे रास्ते पर शनिवार को असामान्य सी हलचल दिखी। बरगद के पेड़ की छांव तले, छोटे बैग लिए परिवार, बच्चों के हाथों में पानी की बोतलें, और चुपचाप बैठे पुरुष- सब एक ही अपील दोहराते दिखे: 'हमें घर जाने दीजिए।' ये वे लोग हैं जिन्हें सुरक्षा एजेंसियां 'अवैध बांग्लादेशी निवासी' बता रही हैं, ऐसे लोग जिन्होंने वर्षों तक पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में रहकर काम किया, पहचान पत्र बनवाए, और अब अचानक वापस लौटने की कोशिश में हैं। इस असामान्य उलटी पलायन की वजह है पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) – यानी मतदाता सूची की सख्त जांच। 'अब डर लग रहा है… वापस जाना ही ठीक है' खुलना जिले की रहने वाली शाहिन बीबी अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क किनारे इंतजार कर रही थीं। वो न्यू टाउन, कोलकाता में घरों में काम करके 20000 रुपये महीना कमाती थीं। उन्होंने साफ कहा, 'हम गरीबी के कारण आए थे। दस्तावेज ठीक नहीं थे। अब जांच हो रही है, इसलिए लौटना ही बेहतर लग रहा है।' कई लोग मानते हैं कि उन्होंने आधार, राशन कार्ड या वोटर आईडी जैसे कागज दलाल और बिचौलियों के जरिए बनवाए थे। एसआईआर में इन पुराने कागजों की दोबारा जांच हो रही है, इसलिए लोग पूछताछ और हिरासत से बचने के लिए खुद ही सीमा पर आ पहुंचे हैं। एक युवा वेटर बोला, 'आठ साल रह लिया। अगर पुराने कागज मांगे तो क्या दिखाएंगे? जाने में ही भलाई है।' कतार तंबू बन गई, सड़क इंतजारगाह बीएसएफ अधिकारियों के मुताबिक, हर दिन 150-200 लोग पकड़े जा रहे हैं और जांच के बाद उन्हें 'वापस भेजा' जा रहा है। 4 नवंबर, यानी एसआईआर शुरू होने के बाद से ही भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। सभी लोगों के बायोमैट्रिक डेटा लेकर पुलिस और प्रशासन को भेजा जाता है। भीड़ ज्यादा होने पर दो-तीन दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। गेट के अंदर बीएसएफ खाना दे रहा है। बाहर इंतजार कर रहे लोग सड़क किनारे चाय-ढाबों पर निर्भर हैं। 40 रुपये में चावल-अंडा और 60 रुपये में चावल-मछली मिल रहा है। 'कागज बनवाने में 20000 रुपये लगे थे…अब सब बेकार' ढुलागोरी की फैक्टरी में काम करने वाले 29 वर्षीय मनीरुल शेख बताते हैं, 'हमने 5000 से 7000 रुपये देकर भारत में एंट्री ली थी। लेकिन कागज बनवाने में 20000 रुपये तक खर्च हो गया। अब एसआईआर की जांच से सब डर गए हैं।' इमरान गाजी नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि, 'मैंने 2016, 2019, 2021 और 2024 में चार बार वोट दिया है। पर 2002 का कोई असली कागज नहीं। इसलिए लौट रहा हूं।' वहीं एक पुलिस अधिकारी का कहना था, 'दो दिन में 95 लोग आए थे। हमारे पास इतनी जगह ही नहीं है। बाद में हमने हिरासत लेना बंद कर दिया।' 'हम यहां दोस्त छोड़कर जा रहे हैं…' कतार में खड़ी छह साल की बच्ची ने अपनी मां से कहा, 'न्यू टाउन में अपने दोस्तों को याद करूंगी।' उसकी मां ने बताया कि वे पिछले साल 25,000 टका देकर बॉर्डर पार करके भारत आए थे। पिता, जो रिक्शा चलाते थे, बोले, 'गरीबी लाई थी… डर वापस ले जा रहा है।' वहीं हाकिमपुर ट्रेडर्स एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा, 'दिल्ली, ढाका, कोलकाता अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ें, पर यहां सड़क पर बैठे इन परिवारों की पीड़ा कौन देखेगा?' स्थानीय व्यापारी और युवा मिलकर खिचड़ी बांट रहे थे। 'अंधेरे में आए थे, उजाले में जा रहे हैं…' बीएसएफ का एक जवान लाइन को देखते हुए बोला, 'ये लोग रात के अंधेरे में आए थे… अब दिन की रोशनी में लौट रहे हैं। फर्क बस इतना ही है।' पिछले छह दिनों में करीब 1,200 लोग आधिकारिक प्रक्रिया पूरी कर बांग्लादेश लौट चुके हैं। शनिवार को करीब 60 लोग अभी भी इंतजार कर रहे थे। 99 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं को दिए गए फॉर्म- ECI वहीं चुनाव आयोग के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के फेज-2 के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग के अनुसार अब तक 99 प्रतिशत से अधिक यानी 50.47 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को एसआईआर फॉर्म मिल चुके हैं। इनमें से 20 करोड़ से अधिक फॉर्म, लगभग 40 प्रतिशत, पहले ही डिजिटाइज कर लिए गए हैं। आयोग का कहना है कि डिजिटल प्रोसेसिंग से सत्यापन और अपडेट कार्य की गति बढ़ी है। लक्ष्य है कि पात्र मतदाताओं के नाम समय पर सूची में शामिल हों और त्रुटियों को न्यूनतम किया जाए। चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर राज्यवार सूची भी जारी की है।  

वेतन से लेकर ओवरटाइम तक सब बदल गया! नया Labour Code लागू, कर्मचारियों के लिए क्या मतलब?

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने देश के श्रम कानूनों में दशकों बाद सबसे व्यापक सुधार करते हुए 21 नवंबर से नए लेबर कोड्स लागू कर दिए हैं। सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया है और उनकी जगह चार नए लेबर कोड लागू किए हैं। इसे आत्मनिर्भर भारत रिफार्म का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन नए बदलावों से देश की रोजगार व्यवस्था, उद्योगों का संचालन और कामगारों की सुरक्षा—तीनों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। नए प्रावधानों से लगभग 40 करोड़ कामगारों को पहली बार सोशल सिक्योरिटी कवरेज मिलने जा रहा है, जो भारत के श्रम बाजार में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। पुराने कानून हुए खत्म, नए लेबर कोड में क्या है खास देश में लंबे समय से लागू श्रम कानून 1930 से 1950 के बीच के थे, जिन्हें समय के साथ पुराना और अप्रासंगिक माना जाता रहा। इन पुराने कानूनों में गिग वर्कर्स, प्लेटफार्म वर्कर्स, माइग्रेंट वर्कर्स  जैसे आधुनिक कार्य-प्रकारों की कोई परिभाषा मौजूद नहीं थी। नए लेबर कोड लागू होने के साथ ही ये सभी पुराने 29 कानून अब अप्रभावी हो चुके हैं। हर कर्मचारी को Appointment Letter अनिवार्य नए लेबर कोड के मुताबिक, अब देश में किसी भी कर्मचारी को भर्ती करते समय Appointment Letter देना अनिवार्य होगा। साथ ही देशभर में Minimum Wage का दायरा सभी श्रमिकों पर लागू होगा, जिससे किसी भी कर्मचारी को जीवन-यापन के लायक वेतन सुनिश्चित किया जा सके। समय पर वेतन भुगतान भी अब कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है। पहली बार लेबर कोड में Platform Work, Aggregators और सभी Gig Workers को कानूनी पहचान दी गई है। इन कामगारों को अब Social Security Benefits मिलेंगे। इसके लिए Aggregator कंपनियों को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1-2% योगदान करना होगा। नए कोड में फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी स्थायी कर्मचारियों जिते अधिकार दिए गए हैं—जैसे छुट्टी, चिकित्सा सुविधाएं और सिर्फ एक साल बाद Gratuity का अधिकार। मीडिया, खदान और डिजिटल वर्कर्स भी सुरक्षा के दायरे में नए नियमों में बागान मजदूर, डिजिटल मीडिया वर्कर्स, ऑडियो-विजुअल कर्मचारी, डबिंग आर्टिस्ट, स्टंट पर्सन, और खदान मजदूरों को भी शामिल किया गया है। खतरनाक उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों की On-Site Safety Monitoring के मानक भी तय किए गए हैं। साथ ही IT, ITES, पोर्ट सेक्टर और Export Industry के कर्मचारियों के लिए 7 तारीख तक वेतन भुगतान का प्रावधान अनिवार्य किया गया है। Labour Dispute समाधान और उद्योगों को बड़ी राहत लेबर कोड में विवादों के तेजी से समाधान के लिए दो सदस्यीय Industrial Tribunal बनाए जाएंगे। कंपनियों के लिए Single Registration, Single License और Single Return System लागू हुआ है, जिससे paperwork काफी कम होगा। 500 से अधिक कर्मचारियों वाली यूनिट्स में सुरक्षा समितियां अनिवार्य होंगी, जबकि छोटी यूनिट्स के लिए अनुपालन का बोझ घटाया गया है। सरकार बोली—नए नियम बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने नए लेबर कोड को “कामगारों के कल्याण के लिए ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि इससे श्रमिकों की Minimum Wage, Social Security, और Employment Conditions मजबूत होंगे। सरकार का कहना है कि पुराने कानून नई अर्थव्यवस्था और नए रोजगार मॉडल के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे, जबकि नए लेबर कोड दोनों—कामगार और उद्योग—को मजबूती देंगे।