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दक्षिण कोरिया-अमेरिका की नई पहल: वीजा प्रक्रिया आसान करने के लिए वर्किंग ग्रुप लॉन्च होगा

सियोल दक्षिण कोरिया और अमेरिका साथ मिलकर कोरियाई कामगारों के लिए वीजा प्रणाली में सुधार के लिए इस हफ्ते एक कार्य समूह का गठन करेंगे। इस बात की जानकारी राजनयिक सूत्रों ने दी। हाल ही में अमेरिका के जॉर्जिया में हुंडई प्लांट पर इमिग्रेशन एनफोर्समेंट ऑपरेशन के तहत छापेमारी की थी। छापेमारी के बाद करीब 475 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 300 दक्षिण कोरिया के रहने वाले हैं। जॉर्जिया में हुंडई प्लांट पर सितंबर की शुरुआत में हुई इस छापेमारी के बाद दक्षिण कोरियाई कामगारों को वीजा नियमों के स्पष्ट उल्लंघन के आरोप में एक हफ्ते तक हिरासत में रखा गया। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, राजनयिक बातचीत के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि सियोल के विदेश मंत्रालय और अमेरिकी विदेश विभाग इस कार्य समूह का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग और वाणिज्य विभाग भी इस समूह में भाग ले सकते हैं। ऐसे समय में जब कोरियाई कंपनियां अमेरिका में बड़ी विनिर्माण परियोजनाएं चला रही हैं, दोनों देशों के बीच दक्षिण कोरियाई श्रमिकों के लिए अमेरिकी वीजा प्रणाली को बेहतर बनाने पर चर्चा होने की व्यापक संभावना है। बता दें, हिरासत में लिए गए कई लोग बी1 वीजा पर अमेरिका आए थे, जो व्यावसायिक उद्देश्यों, जैसे बैठकों में भाग लेने या अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने, या अल्पकालिक प्रवास के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम फॉर ट्रैवल ऑथराइजेशन (ईएसटीए) वीजा छूट कार्यक्रम के तहत जारी किया गया था। दोनों देशों के बीच बी1 वीजा को हल्के तरीके से लागू करने पर चर्चा होने की संभावना है। अगर बी1 वीजा के तहत व्यावसायिक उद्देश्यों का दायरा स्पष्ट हो जाता है, तो अमेरिका मौजूदा वीजा प्रणाली में बदलाव किए बिना दक्षिण कोरियाई व्यापारियों की कठिनाइयों का तुरंत समाधान कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका में निवेश करने वाले कोरियाई लोगों के लिए अमेरिका स्थित दक्षिण कोरियाई दूतावास में एक अलग वीजा डेस्क स्थापित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। चर्चा यह भी थी कि इन सभी लोगों को इन सभी श्रमिकों को वापस कोरिया भेज दिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया जाहिर की थी। प्रतिभाशाली लोगों को कानूनी तरीके से अमेरिका आने को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूथ सोशल' पर लिखा कि आपके निवेश का स्वागत है, और हम विश्वस्तरीय उत्पाद बनाने के लिए अपने बेहद कुशल और तकनीकी रूप से प्रतिभाशाली लोगों को कानूनी तौर पर लाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और हम इसे आपके लिए शीघ्र और कानूनी रूप से संभव बना देंगे। बदले में हम आपसे यही मांग करते हैं कि आप अमेरिकी कर्मचारियों को नियुक्त करें और प्रशिक्षित करें। हम सब मिलकर अपने देश को न केवल उत्पादक बनाने के लिए, बल्कि पहले से कहीं अधिक एकजुट बनाने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे।  

भ्रष्टाचार पर चीन का बड़ा प्रहार: पूर्व मंत्री तांग रेनजियान को रिश्वतखोरी में मौत की सज़ा

शेन्जेन चीन के पूर्व कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्री तांग रेनजियान को भ्रष्टाचार और घुसखोरी के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। उन पर अपने मंत्री रहने के दौरान 3 अरब रुपये से ज्यादा की रिश्वतखोरी का आरोप है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने 2007 से 2024 तक पद पर रहते हुए अकूत संपत्तियां बनाई थीं। जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में यह साबित हुआ है कि उन्होंने आय से ज्यादा की कमाई की और अपने पद का दुरुपयोग किया। ऐसे में कोर्ट ने न सिर्फ संपत्ति जब्त कर ली, बल्कि तांग रेनजियान को मौत की सजा भी सुनाई है। पूर्व मंत्री ने कमाए थे 3 अरब रुपये चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पूर्व कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्री तांग रेनजियान को रविवार को जिलिन प्रांत की एक अदालत में रिश्वतखोरी के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि तांग ने 2007 से 2024 तक विभिन्न पदों पर रहते हुए 268 मिलियन युआन (37.6 मिलियन डॉलर) से अधिक मूल्य की नकदी और संपत्ति सहित रिश्वत ली। चांगचुन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी मृत्युदंड की सजा दो साल के लिए निलंबित कर दी कि उन्होंने अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं। तांग को कम्युनिष्ट पार्टी ने किया निष्कासित चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था द्वारा जांच के दायरे में रखे जाने और पद से हटाए जाने के छह महीने बाद, नवंबर 2024 में तांग को निष्कासित कर दिया था। तांग की जांच असामान्य रूप से तेज थी और रक्षा मंत्री ली शांगफू और उनके पूर्ववर्ती वेई फेंगहे के खिलाफ भी इसी तरह की जांच की गई थी। जिनपिंग ने चलाया है शुद्धिकरण अभियान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2020 में चीन के घरेलू सुरक्षा तंत्र के शुद्धिकरण का अभियान शुरू किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुलिस, अभियोजक और न्यायाधीश "पूरी तरह से वफादार, पूरी तरह से शुद्ध और पूरी तरह से विश्वसनीय" हों। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और ग्रामीण मामलों के मंत्री नियुक्त होने से पहले, तांग 2017 से 2020 तक पश्चिमी प्रांत गांसु के गवर्नर थे। जनवरी में, शी ने कहा था कि भ्रष्टाचार चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है और यह लगातार बढ़ रहा है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पूर्व कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्री तांग रेनजियान को रविवार को जिलिन प्रांत की एक अदालत में रिश्वतखोरी के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि तांग ने 2007 से 2024 तक विभिन्न पदों पर रहते हुए 268 मिलियन युआन (37.6 मिलियन डॉलर) से अधिक मूल्य की नकदी और संपत्ति सहित रिश्वत ली। चांगचुन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी मृत्युदंड की सजा दो साल के लिए निलंबित कर दी कि उन्होंने अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं। तांग को कम्युनिष्ट पार्टी ने किया निष्कासित चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था द्वारा जांच के दायरे में रखे जाने और पद से हटाए जाने के छह महीने बाद, नवंबर 2024 में तांग को निष्कासित कर दिया था। तांग की जांच असामान्य रूप से तेज थी और रक्षा मंत्री ली शांगफू और उनके पूर्ववर्ती वेई फेंगहे के खिलाफ भी इसी तरह की जांच की गई थी। जिनपिंग ने चलाया है शुद्धिकरण अभियान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2020 में चीन के घरेलू सुरक्षा तंत्र के शुद्धिकरण का अभियान शुरू किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुलिस, अभियोजक और न्यायाधीश "पूरी तरह से वफादार, पूरी तरह से शुद्ध और पूरी तरह से विश्वसनीय" हों। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और ग्रामीण मामलों के मंत्री नियुक्त होने से पहले, तांग 2017 से 2020 तक पश्चिमी प्रांत गांसु के गवर्नर थे। जनवरी में, शी ने कहा था कि भ्रष्टाचार चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है और यह लगातार बढ़ रहा है।

पाकिस्तान की नींद उड़ी! POK में कुछ बड़ा होने की खबर, जॉइंट अवामी कमेटी ने किया ऐलान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pok) में जनाक्रोश और विरोध प्रदर्शनों के कारण तनाव चरम पर पहुंच गया है। नीलम वैली पब्लिक एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने जनता की लंबे समय से लंबित मांगों ( जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं ) को पूरा करने के दबाव में पूरे क्षेत्र को पूरी तरह से बंद करने की घोषणा कर दी है। उन्होंने चेतावनी जारी की है कि लोगों का सब्र अब अपनी हद पार कर चुका है और यह वर्षों की सरकारी उपेक्षा, भ्रष्टाचार तथा संसाधनों के दुरुपयोग का सीधा परिणाम है, जहां राजनीतिक संरक्षण और रिश्वतखोरी पर धन बर्बाद हो रहा है। उनके इस आह्वान पर व्यापक बहस छिड़ गई है कि क्या कुछ बड़ा होने वाला है? शौकत नवाज मीर की अपील के बाद पीओके में तनाव है। दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शन को बलपूर्वक दमन करने की धमकी दी है। कमेटी के प्रवक्ता के रूप में मीर ने कहा कि लोगों का सब्र अब अंतिम सीमा पर पहुंच चुका है और यह बंद सरकारी लापरवाही तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधा प्रतिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें और स्वच्छ जल से नागरिकों को वंचित रखा जा रहा है, जबकि फंड राजनीतिक संरक्षण और रिश्वतखोरी में उड़ाए जा रहे हैं। दूसरी ओर सरकार की बल प्रयोग की चेतावनी ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे जनता का रोष और भड़क गया। स्थानीय वकीलों ने पब्लिक एक्शन कमेटी का खुला समर्थन किया और हड़ताल को लोकतांत्रिक हक करार दिया। उन्होंने सरकार से दमन के बजाय शिकायतों का निपटारा करने की अपील की। मुफ्तीराबाद के एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि लोगों की मांगें पूरी होनी चाहिए, उन्हें कुचलना नहीं। कानूनी बिरादरी प्रदर्शनकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। बताया जा रहा है कि पूरे पीओजेके में हड़ताल से सामान्य जीवन ठप होने की पूरी आशंका है। दुकानें, बाजार और परिवहन सेवाएं बंद रहेंगी। नागरिक समाज का मानना है कि बल प्रयोग से तनाव और बढ़ेगा, जिससे अशांति फैल सकती है। वहीं कई लोग सरकार के कठोर रवैये को असहमति दबाने की साजिश बता रहे हैं। विभिन्न जिलों की पब्लिक एक्शन कमेटियां पारदर्शी फंड वितरण, आरक्षण और स्थानीय शासन में भ्रष्टाचार खत्म करने जैसी मांगों पर लोगों को एकजुट कर रही हैं। ऐसे में पीओके पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां सरकार और जनता के बीच टकराव तेज होता नजर आ रहा है।  

खुद को झुकाने को तैयार पाकिस्तान? शहबाज-मुनीर ने ट्रंप के सामने पेश किया खास तोहफा

वॉशिंगटन  पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रिझाने में जुटा हुआ है। इसके लिए वह हर तरह के जतन कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर ट्रंप के लिए खास तोहफा लेकर पहुंचे। जानकारी के मुताबिक दोनों ने रेयर अर्थ मटीरियल लकड़ी के बक्से में रखकर ट्रंप के लिए पेश किया। माना जा रहा है कि उनकी यह कोशिश अमेरिका की नजरों में खास मुकाम हासिल करने के लिए है। बता दें कि ट्रंप इस बेहद अहम मिनरल सप्लाई चेन पर चीन के प्रभुत्व को खत्म करना चाहते हैं। व्हाइट हाउस ने एक तस्वीर जारी की है। इसमें पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर एक खास लकड़ी का बॉक्स पकड़े नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बॉक्स में रेयर अर्थ मटीरियल भी रखा हुआ है। वहीं, बगल में खड़े पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। यह फोटो अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बंद दरवाजों के पीछे हुई मीटिंग के बाद आई है। इससे करीब हफ्ते भर पहले अमेरिका की मेटल कंपनी और पाकिस्तान के बीच 500 मिलियन डॉलर की डील हुई है। वहीं, इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान की एक आर्मी इंजीनियरिंग संस्था ने मिसौरी-स्थित यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स ने देश में एक पॉली-मेटैलिक रिफाइनरी स्थापित करने के लिए के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अगस्त में, इस्लामाबाद ने अमेरिका के सामने मुनीर ने खजाना पेश किया और समझौते पर पहुंचे। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह उसके खनिज और तेल भंडार में अमेरिकी निवेश को आकर्षित करेगा। मुनीर ने पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट जियो ग्रुप के वरिष्ठ संपादक सुहैल वारैच को बताया कि पाकिस्तान के पास दुर्लभ पृथ्वी का खजाना है। इस खजाने से पाकिस्तान का कर्ज भी कम होगा और पाकिस्तान जल्द ही सबसे समृद्ध हो जाएगा।

टैरिफ पर डींगें हांकने वाले ट्रंप के करीबी भी भारत के साथ समझौते पर सहमत

वाशिंगटन  भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने के बाद अब अमेरिका का कहना है कि वह भारत के साथ डील करके इसका हल निकालना चाहता है। अमेरिकी वित्त मंत्री हावर्ड लटनिक ने कहा कि हमें भारत समेत कई देशों के साथ समझौता करना है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि भारत को हमसे माफी मांगनी पड़ेगी। वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत और ब्राजील को अमेरिका को सही प्रतिक्रिया देनी चाहिए और अपने बाजार को खोल दना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी कोई नीति नहीं बनानी चाहिए जिससे कि अमेरिका को नुकसान हो।उन्होंने कहा, हमें कई देशों से बात करके हल निकालना है। इनमें भारत, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देश हैं। लटनिक ने दावा किया था कि एक या दो महीने में ही भारत बात करने के लिए टेबल पर आ जाएगा और उसे माफी मांगनी पड़ेगी। हालांकि भारत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है और अमेरिका की धमकियों को नजरअंदाज कर विकल्प तलाशने में जुटा है। यह अमेरिका के लिए परेशानी का सबब बन गया है। लटनिक ने कहा था कि अमेरिका की नीतियां मोदी सरकार को अमेरिका के साथ डील करने को मजबूर कर देंगी। लटनिक ने कहा था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है और यह बहत ही हास्यास्पद है। उन्होंने कहा था कि भारत को ही फैसला करना होगा कि वह अमेरिका की ओर है या रूस की ओर। उन्होंने कहा था कि अमेरिका की कंज्यूमर मार्केट बहुत बड़ी है। ऐसे में सबको ही उनको ग्राहकों के पास लौटना ही पड़ेगा और ग्राहक हमेशा सही होता है। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80 वें सत्र से इतर शुक्रवार को भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्यों ने व्यापार-प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के प्रसार पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चाहे ये प्रतिबंध टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में अंधाधुंध वृद्धि के रूप में हों, या संरक्षणवाद के रूप में, विशेष रूप से दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले उपायों के रूप में इनसे वैश्विक व्यापार में कमी, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापारिक गतिविधियों में अनिश्चितता पैदा होने का खतरा पैदा होता है।  

बदरा बरसे मुंबई पर, मराठवाड़ा में बारिश ने मचाया कहर; CM ने राहत कार्यों का जायजा लिया

मुंबई सितंबर का महीना खत्म होने वाला है, लेकिन महाराष्ट्र के तमाम जिलों में लौटते मानसून का कहर जारी है। मुंबई और आसपास के जिलों में शनिवार देर रात से मूसलाधार बारिश हो रही है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने रविवार के लिए मुंबई, ठाणे, रायगढ़ और पालघर जिलों में 'रेड अलर्ट' जारी किया है। कई इलाकों में 100 मिमी से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। भारी बारिश के कारण ठाणे में एक व्यक्ति नदी में बह गया। मुंबई में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित शनिवार रात आधी रात के बाद मुंबई में तेज बारिश शुरू हुई। शुरुआती घंटों में बारिश की रफ्तार बहुत तेज रही, लेकिन रविवार तड़के इसमें थोड़ी कमी आई। अब शहर के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बीच-बीच में तेज बौछारें पड़ रही हैं।   24 घंटे में बारिश का आंकड़ा (सुबह 8.30 बजे तक)     कोलाबा: 120.8 मिमी     सांताक्रुज: 83.8 मिमी     जुहू: 88 मिमी     बांद्रा: 82.5 मिमी     महालक्ष्मी: 28 मिमी  

पंडाल विवाद: महिषासुर नहीं, ट्रंप की मूर्ति! क्या यह पीएम मोदी को चेतावनी है?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में इन दिनों जोरों शोरों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर राज्य में हजारों की सख्यां में दुर्गा पंडाल लगाए गए है और दूर दूर से लोग मां के दर्शन करने यहां पहुंच रहे है। इन पंडालों को अलग अलग थीम और अलग अलग आइडिया के अनुसार तैयार किया जाता है जो दर्शकों के लिए काफि रोचक होता है। ऐसा ही एक अनोखा पंडाल इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लेकिन इसके वायरल होने की वजह इसकी सजावट थीम नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप है। पीएम मोदी ट्रंप को अपना दोस्त माना उन्होंने धोखा दिया इस पंडाल समिति ने मां दुर्गा के साथ किसी राक्षसी रूप के महिषासुर की नहीं बल्कि ट्रंप की महिषासुर वाली मूर्ति लगाई है, जो काफी वायरल हो रही है। बहरामपुर में खागड़ा क्रेमेटोरियम घाट दुर्गा पूजा समिति ने यह महिषासुर ट्रंप की मूर्ति लगाई है। समिति ने बताया कि ट्रंप ने भारत को धोखा दिया इसलिए उनकी ऐसी मूर्ति लगाई गई है। समिति ने कहा, वह भारत पर लगे 50 प्रतिशत टैरिफ को एक धोखा मानते है। उन्होंने कहा कि, पीएम मोदी ट्रंप को अपना दोस्त मानते थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने टैरिफ के रूप में भारत को धोखा दिया इसलिए यह मूर्ति लगाई गई है।   हजारों की संख्या में मूर्ति देखने पहुंचे लोग ट्रंप की इस खास महिषासुर अवतार वाली मूर्ति को आसिम पाल नामक कलाकार ने तैयार किया था। इसके उद्घाटन के बाद से ही हजारों की संख्या में लोग इसे देखने पहुंच रहे है। साथ ही सोशल मीडिया पर भी इस मूर्ति और इसके पीछे के आइडिया को काफि पसंद किया जा रहा है। बता दे कि ट्रंप ने हाल ही भारत पर पहले 25 प्रतिशत टैरिफ लगा कर बाद में उसे 50 प्रतिशत कर दिया था। इसके चलते अमेरिकी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैक्स बढ़ गया है और उनकी मांग घटने लगी है।

यूएन में भारत का बड़ा कदम, पाकिस्तान ने अपनी गलती कबूल कर दी सामने वाले देशों के बीच!

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अपनी समझदारी से पाकिस्तान को दुनिया के सामने एक्सपोज कर दिया। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जनरल असेंबली से अपील करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत को आजादी के बाद से ही यह चुनौती झेलनी पड़ी है, क्योंकि उसका पड़ोसी देश वैश्विक आतंकवाद का केंद्र रहा है। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन यह एक जाल था और पाकिस्तान उसमें फंस गया। इतना सुनने के बाद यूएन मिशन में पाकिस्तान के दूसरे सेक्रेटरी मोहम्मद राशिद ने जयशंकर के भाषण पर जवाब देते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की छवि खराब करने की कोशिश थी। इस पर भारत ने तुरंत पलटवार करते हुए उसे उसके अपने ही बयानों के जाल में फंसा दिया। भारत ने क्या कहा? भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन में दूसरे सचिव रेंटला श्रीनिवास ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि जिस पड़ोसी देश का नाम नहीं लिया गया, उसने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और सीमा पार आतंकवाद की अपनी पुरानी नीति को स्वीकार किया।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की छवि सबके सामने है। आतंकवाद के निशान इतने साफ हैं कि  यह कई देशों में दिखता है। यह न सिर्फ पड़ोसियों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने आगे कहा कि कोई तर्क या झूठ 'आतंकिस्तान' के अपराधों को छिपा नहीं सकता। इतना सुनने के बाद राशिद गुस्से में वापस लौटा। उसने स्वीकार कर लिया कि पाकिस्तान टेररिस्तान है। 'टेररिस्तान' शब्द के इस्तेमाल का विरोध करते हुए, राशिद ने कहा कि भारत एक देश के नाम को, जो संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है, विकृत कर रहा है। वहीं, राशिद के बोलते समय भारत ने सभा कक्ष से वॉकआउट कर दिया। गुस्से में प्रतिक्रिया देना आरोप स्वीकार करने जैसा गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र में यह आम बात है कि देश तब तक जवाब देने का अधिकार नहीं इस्तेमाल करते, जब तक उनका नाम स्पष्ट रूप से न लिया जाए, भले ही उनके बारे में इशारों या संकेतों से बात की जाए। सार्वजनिक रूप से गुस्से में प्रतिक्रिया देना यह स्वीकार करने जैसा है कि उनके खिलाफ ही कोई आरोप या अप्रिय टिप्पणी की गई थी। क्या बोले जयशंकर? अपने भाषण में जयशंकर ने कहा कि दशकों से बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हमलों का संबंध एक ही देश से जोड़ा जाता है। संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची में उस देश के नागरिकों के नाम भरे पड़े हैं। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि हाल ही में अप्रैल में पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या सीमा पार बर्बरता का उदाहरण है। 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम लिए बिना उसका बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार इस्तेमाल किया और इसके आयोजकों व अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया। आतंकवाद एक साझा खतरा है, इसलिए इसके खिलाफ गहरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।” जयशंकर ने दी चेतावनी जयशंकर ने कहा कि जब देश खुले तौर पर आतंकवाद को अपनी नीति घोषित करते हैं, जब आतंक के अड्डे बड़े पैमाने पर काम करते हैं, जब आतंकियों का सार्वजनिक रूप से महिमामंडन होता है, तो ऐसी हरकतों की कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों का समर्थन करते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि यह उनके लिए भी खतरनाक साबित होगा।

पंडाल उद्घाटन के बाद विवाद: ऑपरेशन सिंदूर लाइट शो रद्द करने का आरोप

कोलकाता कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल के आयोजकों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित लाइट एंड साउंड शो को रोकने की कोशिश की। भाजपा नेता सजल घोष ने भी धमकी दी कि अगर दबाव की रणनीति बंद नहीं हुई तो वे पंडाल को बंद कर देंगे और मूर्ति का समय से पहले विसर्जन कर देंगे। इस पंडाल का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते दिनों किया था। वहीं, कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए चिंतित है क्योंकि संकरी जगह में भारी भीड़ जमा हो रही है। कोलकाता नगर निगम के पार्षद घोष ने पंडाल के मैदान में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया, 'पुलिस ने ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित लाइट एंड साउंड शो को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस शो में आतंकवादियों की ओर से पहलगाम नरसंहार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन और भारत की ओर से पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर जवाबी हमला दिखाया गया था। यह शो केवल तीन से चार मिनट लंबा था।' सजल घोष ने कहा कि शहर और राज्य में अन्य स्थानों पर पहले और इस उत्सव के दौरान भी कई लाइट एंड साउंड शो आयोजित हुए हैं। कई अन्य पूजा पंडालों में भारी भीड़ उमड़ी है। लेकिन कहीं भी पुलिस ने इस तरह की सख्ती का हवाला नहीं दिया। पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप बीजेपी नेता ने दावा किया कि पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रास्ते को संकरा कर दिया, जिससे लोगों को पूजा देखने के लिए 2 किलोमीटर से अधिक चलना पड़ रहा है। किसी भी नजदीकी एंट्री गेट से यह दूरी 700 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आयोजकों को सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के बाद भी शो चलाने की इजाजत नहीं दी गई, तो वे लाइट बंद कर देंगे। देवी के चेहरे पर काले कपड़े डाल देंगे और पुजारियों से सलाह लेने के बाद विजय दशमी से पहले मूर्ति का विसर्जन कर देंगे। उन्होंने आरोप लगाया, 'यह सिर्फ असहयोग नहीं, बल्कि एक साजिश है। टीएमसी शासन में देशभक्ति वाले शो की भी अनुमति नहीं है।' भाजपा पार्षद ने दावा किया कि दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में ऑपरेशन सिंदूर थीम पर आधारित पूजा को भी रोका गया था।

विजय की पार्टी ने लगाया साजिश का आरोप, पुलिस कार्रवाई पर भड़की राजनीति

चेन्नई  अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके की रैली में मंगलवार को भारी अफरातफरी मच गई। रैली के दौरान अचानक पथराव हुआ और हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस भगदड़ में कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। घटना के बाद टीवीके नेताओं ने आरोप लगाया कि रैली को असफल करने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई थी। पार्टी ने कहा कि अचानक हुए पथराव से भीड़ में भगदड़ मची, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई से हालात और बिगड़े। टीवीके ने इस पूरे मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में पार्टी ने मांग की है कि घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और इसके पीछे की साजिशकर्ताओं को बेनकाब किया जाए। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हालात बेकाबू होने के कारण लाठीचार्ज करना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और घायलों का इलाज चल रहा है। करूर भगदड़ के बाद टीवीके प्रमुख विजय ने मृतकों के परिजनों के लिए 20-20 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। घायल हुए लोगों के लिए दो-दो लाख रुपये देने की बात कही है। उन्होंने इसे अपूरणीय क्षति बताया है। वहीं, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) महासचिव के. पलानीस्वामी ने रविवार को दावा किया कि शनिवार को यहां टीवीके की राजनीतिक रैली में हुई भगदड़ पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा में हुई चूक का सबूत है। पलानीस्वामी ने कहा कि अगर पुलिस और राज्य सरकार ने पर्याप्त एहतियाती कदम उठाए होते तो ऐसी ‘‘त्रासदी’’ टाली जा सकती थी। इस हादसे में 39 बेकसूर लोगों की जान चली गई और 51 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पलानीस्वामी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय की तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की सभा में सुरक्षा चूक के सबूत हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण अफरा-तफरी और भगदड़ मची। टीवीके को अपने पार्टी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए एहतियाती कदम उठाने चाहिए थे, क्योंकि उसने अब तक चार सभाएं की हैं।’’ उन्होंने कहा कि पुलिस को टीवीके की पिछली सभाओं में जुटी भीड़ को ध्यान में रखते हुए और करूर सभा की मौजूदा स्थिति के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था करनी चाहिए थी और उसे मजबूत करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सरकार और टीवीके नेतृत्व को भी सुरक्षा व्यवस्था पर विचार करना चाहिए था।