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कागज नहीं, अब प्लास्टिक के होंगे भारतीय नोट! जानिए RBI का पूरा प्लान

नई दिल्ली  भारतीय करेंसी नोट पर बड़ा अपडेट आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्लास्टिक या पॉलीमर नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है। पॉलिमर नोटों की टिकाऊपन और कम उत्पादन लागत के कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है। प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों की जगह क्यों लाए जा रहे? इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण लागत और नोटों का टिकाऊपन है। RBI सूत्रों के अनुसार, पॉलिमर नोटों की उत्पादन लागत वर्तमान में चल रहे कागज के नोटों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, भारत तकनीकी रूप से आधुनिक हो चुका है और देश के एटीएम को इन प्लास्टिक नोटों को आसानी से निकालने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। पुराने और गंदे नोटों को नष्ट करने में क्या दिक्कतें आ रही हैं? कागजी नोट ज्यादा साल तक नहीं चल पाते हैं, जिससे वे मूल कागज और गंदे नोटों की तुलना में निम्न गुणवत्ता के होते हैं। आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में ही लगभग ₹23.8 अरब मूल्य के नोट नष्ट किए गए, जो पिछले वर्ष ₹21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। इनमें सबसे अधिक संख्या ₹500 और ₹100 के नोटो की थी। इतनी बड़ी मात्रा में करेंसी नोटों को नष्ट करना और नए नोट छापना सरकारी खर्च पर भारी बोझ डालता है। वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने की लागत ₹6,372.8 करोड़ थी, जो पिछले वर्ष (₹5,101.4 करोड़) की तुलना में काफी अधिक है। प्लास्टिक नोटों की शुरुआत से इस खर्च में काफी कमी आएगी। डिजिटल पेमेंट के युग में भी कैश की मांग क्यों बढ़ी? देश में यूपीआई और डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी (कैश) की मांग में कोई बदलाव नहीं आया है। 15 मई तक, बाजार में कुल नकदी (सीआईसी) 11.5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ₹42.86 लाख करोड़ के उच्च स्तर पर पहुंच गई। छोटे नोटों (10 और 20 रुपये) की मांग अधिक होने के बावजूद, कुल सीआईसी में उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 0.7% और 0.8% है। सरकार ने सिक्कों को बढ़ावा देने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। 2012 का ट्रायल फेल, अब क्या नया बदलाव? भारत में प्लास्टिक नोटों पर चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। 2012 में, तत्कालीन यूपीए सरकार ने पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर 1 अरब प्लास्टिक के 10 रुपये के नोट जारी करने का फैसला किया था। हालांकि, एटीएम और बैंकों में तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना को रोक दिया गया था। हालांकि, पिछले एक दशक में तकनीक में काफी बदलाव आया है। रिपोर्ट्स का कहना है कि अब एटीएम इन टूल्स से आसानी से पुराने और पुराने तकनीकी छात्रों को आसानी से पहचाना जा सकता है। दुनिया में किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट? पॉलिमर या प्लास्टिक के नोट वर्तमान में लगभग 60 देशों में चल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया 1988 में प्लास्टिक का 10 डॉलर का नोट जारी करने वाला पहला देश था। सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, रोमानिया और कनाडा जैसे देशों ने भी बाद में इन्हें अपना लिया। वहीं, अमेरिकी डॉलर अभी भी कपास और लिनन के विशेष मिश्रण से बनाया जाता है।  

NEET RE-Exam में होगी हाई सिक्योरिटी, पेपर भेजने के लिए वायुसेना के विमानों की तैयारी

नई दिल्ली सरकार अब नीट-यूजी दोबारा परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी में जुट गई है। पेपर लीक विवाद के बाद इस बार परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए भारतीय वायुसेना यानी आईएएफ की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए वायुसेना के विमानों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मुद्दे पर गुरुवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार बैठक में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परिवहन और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। खास तौर पर इस बात पर विचार किया गया कि क्या पेपर ट्रांसपोर्ट के लिए वायुसेना के विमान इस्तेमाल किए जा सकते हैं ताकि लीक या छेड़छाड़ की कोई संभावना न रहे। हालांकि अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि इस पूरी योजना को अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री खुद 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं और उन्हें हर स्तर की जानकारी दी जा रही है। पीएम मोदी को दी जा रही हर अपडेट इस पूरे प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखा जाएगा. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी खुद NEET री-एग्जाम की तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं और उन्हें लगातार अपडेट दिए जा रहे हैं।  सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, पूरी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा बैठक में केवल प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्ट पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग, पैकिंग, स्टोरेज और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षा व्यवस्था के हर फेज की समीक्षा की गई. इस दौरान NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह समेत कई सीनियर ऑफिसर मौजूद रहे।  कैसे शुरू हुआ विवाद? NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देशभर के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी. परीक्षा के बाद पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए, जिसके बाद मामला बढ़ता गया. 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया. फिलहाल इस मामले की जांच CBI कर रही है।  बैठक में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इस दौरान प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उनकी छपाई, पैकिंग, ट्रांसपोर्ट और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षा व्यवस्था के हर पहलू की समीक्षा की गई। दरअसल, नीट-यूजी परीक्षा इस साल तीन मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। करीब 23 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। लेकिन परीक्षा के कुछ दिनों बाद पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए। एनटीए के मुताबिक सात मई की शाम को परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी मिली, जिसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा किया गया। इसके बाद बढ़ते विवाद और जांच के बीच 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है। शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर दर्ज केस में देशभर में कई जगह छापेमारी की गई है। अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर समेत कई शहरों से 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सीबीआई का दावा है कि पेपर लीक के असली स्रोत का पता लगा लिया गया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। ऐसे में अब सरकार की कोशिश यही है कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराई जाए ताकि छात्रों का भरोसा फिर से कायम हो सके।

अब नहीं चलेगी अनंत सुनवाई! SC ने हाईकोर्ट को मामलों के निपटारे की समयसीमा दी

 नई दिल्ली देश की न्यायपालिका में सुधार की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा कदम उठाया है। अब देश के सभी हाईकोर्ट्स को किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद उसे अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाना होगा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन एम पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया है कि अदालती कार्यवाही में बेवजह की देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालतों में लंबित मामलों और फैसलों में होने वाली देरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं. शीर्ष अदालत ने आरक्षित फैसलों, जमानत आदेशों और उनके कारणों को सार्वजनिक करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है।  सुरक्षित फैसलों को अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाना होगा सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित (Reserved Judgment) रखे जाने के बाद उसे अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाया जाना चाहिए. वहीं जमानत से जुड़े मामलों में आदेश आदर्श रूप से अगले दिन जारी किया जाए और उसी दिन जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाए।  जमानत के मामलों में ‘इमीडिएट’ कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हुए जमानत (Bail) के मामलों में बेहद सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि:     जमानत की अर्जी पर फैसला उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनाया जाना चाहिए।     आदेश को तुरंत जेल अधिकारियों को भेजा जाए ताकि 24 से 48 घंटे के भीतर आरोपी की रिहाई सुनिश्चित हो सके।     ट्रायल कोर्ट्स को अब इन मामलों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) संबंधित हाईकोर्ट को सौंपनी होगी। फैसला न आने पर अब केस हो सकेगा ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट ने इन दिशानिर्देशों को सिर्फ एक सुझाव नहीं, बल्कि अनिवार्य नियम बनाया है। यदि किसी मामले में फैसला तीन महीने की समय सीमा के भीतर नहीं आता है, तो प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रार जनरल को मामले को तुरंत हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के संज्ञान में लाना होगा। यदि इसके बाद भी देरी होती है, तो मामला किसी दूसरी बेंच को सौंप दिया जाएगा। इतना ही नहीं, यदि फैसला आने के 15 दिनों के भीतर विस्तृत आदेश वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जाता, तो संबंधित पक्ष इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। देरी के 30 दिन पूरे होने पर केस को दूसरी बेंच में स्थानांतरित (Transfer) करने का विकल्प भी खुला रहेगा। पारदर्शिता के लिए डिजिटल बदलाव न्यायालय ने यह भी अनिवार्य किया है कि अब हर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर यह स्पष्ट रूप से दिखेगा कि किस तारीख को फैसला सुरक्षित रखा गया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पोर्टल्स पर जरूरी तकनीकी बदलाव करें ताकि फैसले सुरक्षित रखने, सुनाने और अपलोड करने की तारीखें जनता के लिए पारदर्शी हों। क्यों पड़ी इस कदम की जरूरत? यह फैसला झारखंड हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले के बाद आया है, जिसमें दिसंबर 2025 में फैसला होने के बावजूद वह महीनों तक न तो अपलोड हुआ और न ही वादी को मिल सका। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने 15 साल के अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा कि वह अपने कार्यकाल में हमेशा तीन महीने के भीतर निर्णय देने के मानक का पालन करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ये निर्देश किसी जज या कोर्ट के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायिक कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए हैं। इससे पहले नवंबर 2025 से ही सुप्रीम कोर्ट सभी हाईकोर्ट्स से लंबित मामलों और उनके डेटा की रिपोर्ट मांग रहा था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्याय मिलने में देरी न हो। जमानत पाए कैदियों कि रिहाई उसी दिन हो सुनिश्चित अदालत ने यह भी कहा कि जिन अंडरट्रायल कैदियों को जमानत मिल चुकी है, उनकी रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनिश्चित की जानी चाहिए. नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अदालत पहले आदेश का प्रभावी हिस्सा (Operative Part) खुले कोर्ट में सुनाएगी और उसके विस्तृत कारण सात दिनों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे. साथ ही, जिस दिन फैसला सुरक्षित रखा गया हो, उसकी जानकारी भी संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी।  सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया जाता है तो मामला किसी अन्य पीठ को सौंपा जा सकता है. वहीं, यदि फैसले के कारण 30 दिनों के भीतर अपलोड नहीं किए जाते हैं तो मामला वापस लेकर नई पीठ के समक्ष भेजा जा सकता है. शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे इन दिशानिर्देशों को संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। 

ड्रग्स तस्करी का इंटरनेशनल खेल बेनकाब! 7 देशों का चक्कर काटकर भारत पहुंचा जहाज, ऐसे पकड़ा गया

अहमदाबाद  अहमदाबाद से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. गुजरात एटीएस के अधिकारियों ने भारत की अब तक की सबसे बड़ी समुद्री ड्रग्स की जब्ती की है. जहाज में रखी यह ड्रग्स 7 देशों में घूम आई लेकिन किसी भी जगह इसकी भनक तक नहीं लगी. जैसे ही यह भारतीय बंदरगाह पर पहुंची तो अधिकारियों ने इसे अपने कब्जे में ले लिया।  गुजरात एटीएस के अधिकारियों ने इस जहाज से 1150 करोड़ रुपये की कोकेन जब्त की है. बताया जा रहा है कि यह अभी तक की सबसे ज्यादा कीमत की ड्रग्स है. इससे पहले इतनी बड़ी मात्रा में डग्स बरामद नहीं की गई है।  सबसे खास बात है कि इस कोकेन की तस्करी दक्षिण भारतीय फिल्म ‘पुष्पा’ स्टाइल में की जा रही थी. यही वजह थी कि इंजन रूम में कोकेन रखकर यह जहाज 196 दिनों तक समुद्र की यात्रा करता रहा. इस दौरान यह मालवाहक जहाज 7 देशों के 23 बंदरगाहों पर ठहरा या वहां से गुजरा लेकिन कहीं भी यह पकड़ा नहीं गया।  एमवी यूरोप नाम का यह जहाज सबसे पहले ब्राजील से शुरू हुआ और अपनी समुद्री यात्रा में अर्जेंटीना, उरुग्वे, पनामा, बहामा, डोमिनिकन रिपब्लिक और अमेरिका तक गया. वहां से यह भारत के मुंद्रा बंदरगाह की तरफ बढ़ने लगा।  गुजरात एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि इतने देशों में घूमने के बाद भी कभी भी किसी सुरक्षा एजेंसी को इस ड्रग की भनक तक नहीं लगी।  आखिरकार जब यह जहाज मुंद्रा पहुंचा, तो भारतीय अधिकारियों ने इसे पकड़ लिया।  एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस शिप से ड्रग्स की सप्लाई की जानकारी पिछले साल मई में ही मिल गई थी. यह वह समय था जब ये ड्रग्स पैक किए जा रहे थे. एटीएस तभी से इसे ट्रैक कर रहे थे. शिपिंग रिकॉर्ड के अनुसार, जहाज का पहला रुकाव ब्राजील के साओ विकेंटे बंदरगाह पर 11 नवंबर 2025 को हुआ।  उसके बाद जहाज ब्राजील, अर्जेंटीना और उरुग्वे होते हुए पनामा नहर पार किया. फिर बहामा, डोमिनिकन रिपब्लिक और अमेरिका के पूर्वी तट के कई बंदरगाहों पर गया. जहाज कुछ बंदरगाहों पर बार-बार रुका, कुल 40 बार रुकाव दर्ज हुए।  टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक एक वरिष्ठ एटीएस अधिकारी ने कहा, “हमें समझ नहीं आ रहा कि ब्राजील से निकली ये कोकीन महीनों तक जहाज के इंजन रूम में छुपी रही. जहाज कई देशों से गुजरा, फिर भी कोई नहीं पकड़ पाया।  आखिर में जहाज दक्षिण एशिया की ओर मुड़ा. 19 मई को मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर पहुंचा, 22 मई को पाकिस्तान के पोर्ट कासिम गया और 26 मई को मुंद्रा पहुंचा।  मुंद्रा में जहाज दो दिन तक रुका रहा. यहां प्लान के अनुसार दूसरा जहाज आने वाला था, जिसे ड्रग ट्रांसफर होना था लेकिन कोस्ट गार्ड और एटीएस की निगरानी के कारण यह प्लान फेल हो गया. जैसे ही कोस्ट गार्ड की टीम जहाज के पास पहुंची तो क्रू मेंबर्स ने कोकीन भरे बैग समुद्र में फेंक दिए. समुद्र में से 5 बैग बरामद हुए, जिनमें 115 पैकेट कोकीन थी।  एटीएस ने बताया कि कोकीन को आउटर एंकरेज में एक छोटी नाव पर उतारना था. अधिकारी मानते हैं कि पूरा माल भारत में ही नहीं रखना था. संभव है कि भारत सिर्फ डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट हो सकता था। 

जहरीली शराब पीने से महाराष्ट्र में 15 की मौत, कई गंभीर; प्रशासन में मचा हड़कंप

 पुणे  महाराष्‍ट्र में चौंकाने वाली घटना सामने आई है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में जहरीली शराब पीने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्‍य की हालत गंभीर बताई जा रही है. पिंपरी-चिंचवाड़ के दापोडी और फुगेवाड़ी इलाके में आठ लोगों ने दम तोड़ा, जबकि पुणे के काले पड़ल इलाके में तीन और हडपसर इलाके में दो लोगों की मौत हुई. घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और प्रभावित इलाकों में जांच तेज कर दी गई है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जहरीली शराब आरोपी योगेश वानखेडे ने तैयार की थी, जो कथित तौर पर अवैध शराब कारोबार से जुड़ा हुआ है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. उसके खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं।  जानकारी के अनुसार, यह जहरीली और स्पिरिट युक्त शराब योगेश वानखेडे नाम के व्यक्ति ने तैयार की थी. इस शराब को पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के अलग-अलग इलाकों में बेची गई थी. दापोडी, फुगेवाड़ी, हडपसर और काले पड़ल इलाके में लोगों ने यह शराब पी. कुछ समय बाद अचानक उनकी हालत बिगड़ गई और मुंह से झाग निकलने लगा. इसके कुछ देर बाद ही उनकी मौत हो गई. इलाज के लिए ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया. योगेश वानखेडे एक अवैध शराब विक्रेता बताया जा रहा है. उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।  पुलिस का अलग राग फुगेवाड़ी इलाके में अवैध हाथभट्टी और देसी शराब के अड्डे धड़ल्ले से चलने के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और दबी जुबान में चर्चा है कि ये मौतें जहरीली शराब के कारण हुई हैं, लेकिन दापोडी पुलिस ने इसे अफवाह बताया है. शुरुआती जांच के बाद दावा किया है कि ये सभी मौतें अलग-अलग और स्वतंत्र कारणों से हुई हैं।  पुलिस की नजर में मौत की वजह क्‍या? पुलिस के अनुसार, पांडुरंग फुगे (57) की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है. विजय राठौड़ (31) और राजेंद्र राठौड़ (34) दो सगे भाइयों की मौत दिल का दौरा पड़ने से होने की आशंका है. राजेंद्र राजपूत (51) की मौत बाथरूम में चक्कर खाकर गिरने की वजह से हुई. अकबर पठान (52) पिछले 15 वर्षों से अत्यधिक शराब पीने के आदी थे। 

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव! ईरान ने US फाइटर जेट गिराने का दावा किया, गाजा पर इजरायल का बड़ा प्लान

तेहरान  पश्चिम एशिया में हालात ऐसे हैं कि एक हाथ में बंदूक है और दूसरे में शांति समझौते का ड्राफ्ट. ईरान ने अमेरिकी जेट गिराने का दावा किया है. इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में गुरुवार को ईरान ने चार जहाजों पर चेतावनी फायरिंग करने का दावा किया, जबकि कुछ घंटे बाद ही अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के संघर्षविराम विस्तार को लेकर शुरुआती समझौते की खबर सामने आ गई. इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों में जल्द शांति हो सकती है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नेवी ने कहा कि चार जहाज बिना पूर्व इजाजत और समन्वय के होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे थे. इसी वजह से चेतावनी फायरिंग की गईं. IRGC के मुताबिक, इसी ‘फायर एक्सचेंज’ की वजह से धमाकों की आवाजें सुनी गईं. वहीं ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि दक्षिणी हिस्से से कुछ ‘निर्धारित लक्ष्यों’ पर मिसाइलें दागी गईं. हालांकि इन लक्ष्यों की पहचान नहीं बताई गई. अमेरिका-ईरान डील पर बड़ा अपडेट तनाव के बीच अल जजीरा ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान 60 दिन तक संघर्षविराम बढ़ाने और युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करने पर एक शुरुआती MoU तक पहुंच गए हैं. हालांकि यह समझौता अभी अंतिम नहीं है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. ईरान ने किया इनकार इसी बीच ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अमेरिकी दावों पर सवाल उठाए हैं. वार्ता से जुड़े एक सूत्र के हवाले से एजेंसी ने कहा, ‘अगर समझौता वास्तव में अंतिम रूप ले चुका है तो ईरान खुद इसकी जानकारी पाकिस्तानी मध्यस्थ और अपने लोगों को देगा. उससे पहले पश्चिमी स्रोतों की कोई भी कहानी मान्य नहीं है.’ ईरान का अमेरिकी जेट गिराने का दावा इस बीच ईरान ने एक बड़ा दावा किया है. ईरान ने कहा कि गुरुवार की बुशेहर प्रांस में एयर डिफेंस ने उसके हवाई क्षेत्र में घुसे एक विमान को मार गिराया. हालांकि अमेरिका का इस दावे पर कुछ और ही कहना है. अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन दावों पर तुरंत रिएक्शन दिया है. कमांड ने कगा कहा कि उसका कोई भी फाइटर जेट नहीं गिरा है.  भारत के लिए राहत, तेल लेकर आ रहा टैंकर होर्मुज पार कर निकला  भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर आ रहा एक बड़ा तेल टैंकर सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और अब विशाखापत्तनम की ओर बढ़ रहा है. समुद्री ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला टैंकर ‘निसोस केरोस’ 21 मई को शारजाह से रवाना हुआ था और शुक्रवार सुबह भारत के पश्चिमी तट के पास उत्तरी अरब सागर में देखा गया. रिपोर्ट के अनुसार, यह टैंकर 3 जून को विशाखापत्तनम पहुंच सकता है. ऐसे समय में इसकी सुरक्षित आवाजाही को अहम माना जा रहा है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना हुआ है और दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. इस बीच ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में IRGC नौसेना ने औपचारिक समन्वय के बाद 23 वाणिज्यिक जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी.  अमेरिका में आज रुबियो-डार की अहम मुलाकात  अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज वॉशिंगटन डीसी में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार से मुलाकात करेंगे. अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, यह बैठक स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे (14:00 GMT) शुरू होगी. यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं. पाकिस्तान पिछले कई हफ्तों से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. हाल के दिनों में पाकिस्तान के कई वरिष्ठ अधिकारी ईरान का दौरा भी कर चुके हैं और दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.  न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी ने युद्ध पर उठाए सवाल, बोले- अब इसे खत्म होना चाहिए न्यूयॉर्क सिटी के मेयर Zohran Mamdani ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि यह संघर्ष अब खत्म होना चाहिए. सोशल मीडिया पर जारी बयान में ममदानी ने कहा कि तीन महीने पहले शुरू हुए इस युद्ध के लिए जनता ने कोई वोट नहीं दिया था, लेकिन इसकी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है. ममदानी ने कहा, ‘हजारों नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं और 13 अमेरिकी सैनिक कभी अपने परिवारों के पास नहीं लौट पाएंगे.’ उन्होंने आरोप लगाया कि इस युद्ध का आर्थिक बोझ भी आम लोगों पर पड़ा है. उनके मुताबिक, अमेरिका में पेट्रोल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे कामकाजी परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ा है.  भारत के लिए नेतन्याहू का बड़ा बयान, बोले- यहां मेरे सबसे ज्यादा फॉलोअर्स  इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत की खुलकर तारीफ करते हुए कहा है कि दुनिया के कई हिस्सों में आलोचना झेल रहे इजरायल को भारत में जबरदस्त समर्थन मिलता है. वेस्ट बैंक में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में हमें वैधता पर सवालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन भारत में नहीं. नेतन्याहू ने कहा कि भारत में इजरायल के प्रति लोगों का प्यार बिलकुल पागलपन की हद तक है. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, मुझे लगता है कि भारत से मेरे फॉलोअर्स दुनिया के किसी भी दूसरे देश से ज्यादा हैं.  समझौते की उम्मीद से तेल हुआ सस्ता, लेकिन पूरी राहत नहीं  अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने को लेकर चल रही बातचीत के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. बाजार को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते का रास्ता निकल सकता है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कम होगी. हालांकि गिरावट सीमित रही, क्योंकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि दोनों पक्ष समझौते के करीब जरूर पहुंचे हैं, लेकिन अभी अंतिम डील नहीं हुई है. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड जुलाई डिलीवरी के लिए 35 सेंट यानी 0.37 फीसदी गिरकर 93.36 डॉलर प्रति बैरल … Read more

अब और ताकतवर हुई ED, सरकार ने बढ़ाई ताकत; भ्रष्टाचारियों की बढ़ेंगी मुश्किलें

नई दिल्ली व‍िपक्ष बार-बार शोर मचाता है क‍ि ईडी को सरकार ने व‍िपक्षी नेताओं के पीछे छोड़ रखा है. इसके बावजूद सरकार ने ऐलान कर द‍िया है क‍ि जो घालमेल करेगा, वो नपेगा. सरकार ने ईडी की ताकत अचानक बढ़ा दी है. दरअसल सरकार ने ईडी में बड़े स्तर पर कैडर र‍िस्‍ट्रक्‍चर‍िंग को मंजूरी दे दी है.इसका सीधा मतलब है कि बड़ी संख्‍या में ईडी में अफसरों की तैनाती की जाएगी. यह बढ़ोतरी कोई छोटी मोटी नहीं है, बल्‍क‍ि दोगुनी तीन गुनी हो गई. अब ईडी में बड़े अफसरों से लेकर जमीन पर जाकर रेड मारने वाले अधिकारियों तक, सबकी फौज बड़ी होने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा बढ़ोतरी डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों में की गई है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ED की क्षमता मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया गया है. यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है और इसका खर्च ED के मौजूदा बजट से ही उठाया जाएगा। क्‍या होने जा रहा?     एडिशनल डायरेक्टर के पद 10 से बढ़ाकर 24 किए गए हैं।     जॉइंट डायरेक्टर के पद 28 से बढ़ाकर 49 किए गए हैं.     डिप्टी डायरेक्टर के पद 148 से बढ़ाकर 267 कर दिए गए हैं.     असिस्टेंट डायरेक्टर के पद 255 से बढ़ाकर 531 किए गए हैं.     एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 355 से बढ़ाकर 606 किए गए हैं.     असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 425 से बढ़ाकर 803 कर दिए गए हैं.     इसके अलावा ED की लीगल टीम में भी भारी मैनपावर द‍िया गया है. एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए गए हैं. ग्राउंड फोर्स हुई डबल से भी ज्यादा! इस आंकड़े को ध्यान से देखिए. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कहां हुई है? डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों पर. ये वो लोग होते हैं जो सिर्फ फाइलों में साइन नहीं करते, बल्कि कोर्ट-कचहरी की दौड़ भाग संभालते हैं, मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग ढूंढते हैं, रेड मारने जाते हैं और आरोपियों से पूछताछ की कमान संभालते हैं। इसके अलावा, बात सिर्फ अधिकारियों तक सीमित नहीं है। सरकार ने ईडी के लीगल, एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए हैं. यानी कि अब अगर ईडी किसी पर हाथ डालेगी, तो उसके पास कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकीलों की फौज भी बड़ी होगी और डेटा खंगालने के लिए डिजिटल सिस्टम के उस्ताद भी ज्यादा होंगे। लेकिन अचानक इतनी ताकत क्यों? सरकार का इसके पीछे सिंपल तर्क है। देश में आर्थिक अपराधों का ग्राफ और डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए होने वाले हेर-फेर के मामले तेजी से बढ़े हैं. पीएमएलए और फेमा के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ईडी की कार्यक्षमता को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया था. अब जब मैनपावर बढ़ गई है, तो मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा से जुड़े मामलों की जांच में और तेजी आएगी। टाइमिंग बेहद खास यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईडी को लेकर देश में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है. विपक्ष के तमाम नेता चाहे वो कांग्रेस के हों, आप के हों, टीएमसी के हों या आरजेडी के हमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से कर रही है। चुन-चुनकर विपक्षी नेताओं के घरों पर रेड मारी जाती है, उन्हें परेशान किया जाता है, ताकि विपक्ष को कमजोर किया जा सके. इन आरोपों की तपिश के बीच सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि एजेंसियां कमजोर नहीं होंगी, बल्कि उन्हें और धारदार बनाया जाएगा. राजनीति अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई अब और तेज और आक्रामक होगी।

न्यायपालिका पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, बोला- जजों को पवित्र मानने की जरूरत नहीं

चेन्नई “इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। भ्रष्ट जज कल भी थे और आज भी हैं।” ये बातें खुद हाईकोर्ट ने कही है। सुनकर भले ही हैरत हो लेकिन मद्रास हाईकोर्ट की एक बेंच ने हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बातें कही हैं। इस दौरान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में फैले भ्रष्टाचार पर आधारित तमिल फिल्म 'करुप्पु' पर प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया। बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट में आर एस तमिलवेंदम नाम के वकील ने फिल्म पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि निर्देशक आरजे बालाजी के निर्देशन और सुपरस्टार सूर्या और तृषा अभिनीत फिल्म 'करुप्पु' में अदालतों और कानूनी व्यवस्था का बेहद आपत्तिजनक चित्रण किया गया है। उन्होंने दलील दी थी कि फिल्म पूरी न्यायिक प्रणाली को बदनाम करती है। भ्रष्ट जज पहले भी थे और आज भी हैं- HC हालांकि याचिका को सिरे से खारिज करते हुए जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार हैं। HC ने कहा, "इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। भ्रष्ट जज पहले भी थे और आज भी हैं। जजों के साथ 'होली काउ' जैसा व्यवहार करने की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट और जजों को आम आदमी की आलोचना से ऊपर नहीं माना जा सकता।” इस दौरान हाईकोर्ट ने देश पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसपी भरूचा के उस बयान का भी जिक्र दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के लगभग 20 फीसदी जज भ्रष्ट हैं। वहीं HC ने वरिष्ठ वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण के बयानों का भी जिक्र किया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे बढ़ा चढ़ा कर दिखाई गई छवि का पूरी तरह समर्थन नहीं करती, लेकिन सच से आंखें भी नहीं मूंद सकती। कोर्ट ने कहा, “हम न्यायिक भ्रष्टाचार के मामलों से अच्छी तरह वाकिफ हैं और हमारे सामने ऐसे उदाहरण आते रहे हैं। मद्रास हाईकोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए ऐसे जजों को नौकरी से बर्खास्त कर बाहर का रास्ता भी दिखाती रहती है।” 'करुप्पु' पर क्या है बवाल? रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म की कहानी 'सेवन वेल्स' नाम की एक काल्पनिक कोर्ट के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया गया है कि उस अदालत का जज बेहद भ्रष्ट है और वह एक वकील के साथ मिलकर अदालत के कामकाज और फैसलों को अपनी उंगलियों पर नचाता है। जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने आदेश में दर्ज किया कि उन्होंने खुद यह फिल्म देखी है और इसे बैन किया जाना सही नहीं। याचिकाकर्ता की इस दलील पर कि फिल्म में सिस्टम को बहुत खराब दिखाया गया है, हाईकोर्ट ने बेहद मजेदार अंदाज में टिप्पणी की। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक HC ने कहा, "यह सच है कि फिल्म में सिस्टम का चित्रण काफी बढ़ा-चढ़ाकर किया गया है। लेकिन तमिल फिल्मों को बनाने का अंदाज ही यही है। हमारी फिल्मों में हीरो अकेला ही अपने एक दर्जन गुंडों को धूल चटा देता है। तमिल सिनेमा में सब कुछ मेलोड्रामैटिक होता है। इसलिए, 'करुप्पु' को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।"

कैंसर से जंग लड़ रहीं पंकज भदौरिया, फैंस से बोलीं- प्रार्थनाओं की जरूरत है

मुंबई मास्टरशेफ पंकज भदौरिया को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपना हेल्थ अपडेट देकर लोगों से दुआएं करने की प्रार्थना की है। पंकज के पोस्ट पर कई लोगों के कमेंट्स दिख रहे हैं जो उनके ठीक होने की विशेज भेज रह हैं। बता दें कि कुछ रोज पहले वह फुल बॉडी चेकअप के लिए गई थीं। इससे जुड़ा पोस्ट उन्होंने सोशल मीडिया पर डाला था। बता दें कि पंकज भदौरिया 2010 के मास्टरशेफ सीजन 1 की विजेता रह चुकी हैं। कुछ दिन पहले करवाया था चेकअप पंकज ने 17 मई को पोस्ट किया था कि उन्होंने प्रिवेंटिव चेकअप करवाया है। उन्होंने लिखा था, 'मैं अपने फुल बॉडी चेकअप के लिए गई थी। मुझे लगता है कि अगर आप 45 साल से ऊपर हैं तो आपको हर साल यह चेकअप करवाना जरूरी है, या अगर आपके पेरेंट्स 45 साल से ऊपर हैं तो इसको पढ़िए। हेल्थ सिर्फ बीमारी ठीक करना नहीं, बल्कि इसके शुरू होने से पहले बचाव करना भी है। रेग्युलर हेल्थ चेकअप से हेल्थ प्रॉब्लम जल्दी पता चल जाती हैं, आउटकम सही रहता है और आपको मेंटल पीस मिलती है। लक्षणों का इंतजार मत कीजिए, बाद में आपका भविष्य आपको धन्यवाद कहेगा। ' नहीं मिला स्टेज का अपडेट पंकज भदौरिया को किस स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है, अभी इससे जुड़ी जानकारी नहीं मिल पाई है। उनके इंस्टापेज पर कई सारे कमेंट्स दिख रहे हैं। मास्टरशेफ गुरकीरत ने लिखा है, बहुत सारा प्यार, अच्छी वाइब्स और हीलिंग एनर्जी भेज रहा हूं। उनकी फॉलोअर ने लिखा है, आप जल्दी ठीक हो जाएंगी। एक फैन ने लंबा नोट लिखा है, आप जल्दी ठीक हो जाएंगी। आप वॉरियर हैं और मैंने आपकी जर्नी देखी है। आप यह युद्ध जीतेंगी। आज के समय में अगर अच्छा डॉक्टर और परिवार का साथ मिले तो कैंसर को हराना मुश्किल नहीं है। मैं भी स्टेज 3 कैंसर सर्वाइवर हूं और 5 साल हो गए हैं। बहादुरी से लड़िए आप जल्दी ठीक होंगी। टीचर से शेफ बनी थीं पंकज पंकज भदौरिया साल 2010 में मास्टरशेफ की विनर थीं। उन्होंने कुकिंग के लिए पैशन के चलते अपना 16 साल पुराना टीचिंग करियर छोड़ दिया था। पंकज लखनऊ में इंग्लिश की टीचर थीं। पंकज दिल्ली से हैं। पंकज भदौरिया के इंस्टाग्राम पेज पर 2.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इस पर वह लोगों के साथ रेसिपीज और किचन टिप्स साझा करती रहती हैं। लखनऊ में पंकज की कुलिनरी अकैडमी भी है।

बाबा केदार के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानिए हेलिकॉप्टर यात्रा का खर्च और रूट

हरिद्वार वर्ष 2026 की केदारनाथ यात्रा ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कपाट खुलने के शुरुआती 35 दिनों में ही रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं. हर रोज करीब 30,000 लोग केदारनाथ पहुंच रहे हैं. ऐसे में अगर आप भारी भीड़, लंबे जाम और 16 किलोमीटर की थका देने वाली पैदल चढ़ाई से बचना चाहते हैं, तो हवाई सफर (By Flight/Air) आपके लिए सबसे बेस्ट और आरामदायक विकल्प है. आइए जानते हैं दिल्ली और देहरादून से केदारनाथ धाम तक के हवाई सफर के दोनों बड़े विकल्प, रूट और खर्च का पूरा ब्योरा। दिल्ली से देहरादून (फ्लाइट द्वारा) आपकी हवाई यात्रा देश की राजधानी से शुरू होगी.  दिल्ली से उत्तराखंड के लिए सीधी फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। फ्लाइट रूट: दिल्ली (DEL) से देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (DED). समय: मात्र 50 मिनट से 1 घंटे 10 मिनट. खर्च: एडवांस बुकिंग पर आने-जाने (राउंड ट्रिप) का किराया लगभग ₹6,800 से ₹7,800 प्रति व्यक्ति आता है। देहरादून से आगे केदारनाथ के लिए हवाई विकल्प देहरादून पहुंचने के बाद आपके पास बाबा के धाम तक पहुंचने के लिए दो बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं:  बेस कैंप से हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप सड़क मार्ग से सीधे नीचे दिए गए प्रमुख बेस कैंप हेलीपैड पर पहुंच सकते हैं, जहां से नियमित हेलीकॉप्टर सेवाएं दी जाती हैं: प्रमुख लोकेशंस: गुप्तकाशी (Guptkashi), सिरसी (Sirsi) और फाटा (Phata). समय: हेलीपैड से मंदिर तक का सफर महज 10 से 15 मिनट का होता है। खर्च: आने-जाने का कुल किराया (Return Ticket) लगभग ₹5,500 से ₹8,500 प्रति व्यक्ति के बीच होता है (यह आपके द्वारा चुने गए हेलीपैड पर निर्भर करता है). जरूरी नोट: हेलीकॉप्टर टिकटों में होने वाली धोखाधड़ी से बचें.  इसकी बुकिंग सिर्फ और सिर्फ IRCTC की आधिकारिक हेलीयात्रा वेबसाइट से ही कराना सही रहता है. विकल्प 2: देहरादून से डायरेक्ट चार्टर सेवा अगर आप बिना किसी कतार और बिना किसी झंझट के प्रीमियम सफर चाहते हैं, तो देहरादून से सीधे प्राइवेट चार्टर सर्विस ले सकते हैं। रूट प्लान: प्राइवेट चार्टर सेवा प्रदाता सीधे देहरादून से केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं. इसके अलावा आप अपनी पसंद के अनुसार यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ (चार धाम) या फिर सिर्फ केदारनाथ और बद्रीनाथ (दो धाम) का कस्टमाइज्ड ट्रिप भी बुक कर सकते हैं। केदारनाथ के मुख्य आकर्षण: क्या देखें? हवाई सफर से उतरते ही आप सीधे बाबा के धाम पहुंचेंगे, जहां आपको इन मुख्य स्थलों के दर्शन जरूर करने चाहिए: ऐतिहासिक मंदिर व भीम शिला: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भव्य मंदिर.  इसके ठीक पीछे स्थित भीम शिला ने 2013 की भीषण बाढ़ के पानी को दो हिस्सों में बांटकर मंदिर की रक्षा की थी। आदि शंकराचार्य समाधि: मुख्य मंदिर के ठीक पीछे स्थित, जहां महान संत आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त किया था। भैरव नाथ मंदिर: मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है.  इन्हें केदारनाथ का रक्षक माना जाता है, जो सर्दियों में कपाट बंद होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं. रुद्र मेडिटेशन केव (मोदी गुफा): मंदिर परिसर से 2 किमी दूर बनी एक भूमिगत गुफा, जहां साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने 17 घंटे ध्यान लगाया था.