samacharsecretary.com

एयरपोर्ट सुरक्षा में हाई अलर्ट, बम की धमकी को लेकर तीन बार कंट्रोल रूम में कॉल

 मुंबई मुंबई पुलिस कंट्रोल रूम को एक के बाद एक तीन अलग-अलग नंबरों से आए धमकी भरे कॉल ने शुक्रवार को हड़कंप मचा दिया. कॉलर ने दावा किया कि मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बम रखा है और कुछ ही देर में जोरदार धमाका होने वाला है.  इस कॉल के बाद मुंबई पुलिस तुरंत अलर्ट हो गई और एयरपोर्ट पर पुलिस अधिकारियों के साथ बम स्क्वॉड की टीम भी पहुंच गई. घंटों तक चले सघन तलाशी अभियान के बाद भी कुछ भी संदिग्ध बरामद नहीं हुआ. पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अज्ञात कॉलर ने मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 पर बम विस्फोट होने की धमकी दी थी. सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस के आला अधिकारी और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच गए. एयरपोर्ट के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई, लेकिन पुलिस को कोई भी ऐसी चीज नहीं मिली जिससे बम होने की पुष्टि हो सके. असम-बंगाल सीमा से जुड़े धमकी भरे कॉल के तार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये धमकी भरे कॉल असम और पश्चिम बंगाल सीमा के पास सक्रिय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके किए गए थे. मुंबई की आज़ाद मैदान पुलिस ने अज्ञात कॉलर के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है ताकि धमकी देने वाले शख्स तक पहुंचा जा सके और उसके इरादों का पता लगाया जा सके.

IRCTC आईडी पर बड़ा अपडेट: रेलवे ने 2.5 करोड़ अकाउंट किए डीएक्टिवेट, बदली गाइडलाइन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्‍टम में दुरुप्रयोग को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है. भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर्स आईडी डीएक्टिवट हो चुके हैं. संदिग्‍ध बुकिंग पैटर्न और फेक यूजर्स की पहचान के बाद IDs डीएक्टिवेट की गई हैं. संसद में सांसद ए.डी. सिंह के सवाल पर सरकार ने इसकी जानकारी दी गई है. इन अकाउंट के डीएक्टिव होने से पहले तत्‍काल टिकट बुकिंग में कई तरह की समस्‍याएं आ रही थीं. अक्‍सर देखा जा रहा था कि तत्‍काल बुकिंग विंडो खुलने के कुछ ही मिनटों में टिकट गायब हो जाते थे, क्‍योंकि बॉट्स का यूज करके एजेंट सारे टिकट गायब कर देते थे, जिससे आम यात्री टिकट बुक नहीं कर पाता था. हालांकि अब बदलाव के बाद रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है.  सरकार ने क्‍या दी जानकारी?  संसद में सरकार ने बताया कि टिकट बुकिंग सिस्‍टम में गड़बड़‍ियों को रोकने के लिए IRCTC ने हाल ही में 2.5 करोड़ से ज्‍यादा यूजर आईडी डीएक्टिव किए हैं. क्‍योंकि ये यूजर्स आईडी संदिग्‍ध पाए गए थे. सरकार ने बताया कि भारतीय रेलवे ने कंफर्म टिकट बुकिंग और डिजिटल को बढ़ावा देने के लिए कुछ और बदलाव किए हैं.  रेलवे ने  बदले हैं ये नियम     रिजर्व टिकट ऑनलाइन या कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) काउंटरों पर 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर बुक किए जा सकते हैं.  हालांकि कुल टिकटों का लगभग 89% ऑनलाइन माध्यम से बुक हो रहा है.      PRS काउंटर्स पर डिजिटल माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.     1 जुलाई 2025 से तत्‍काल योजना के तहत टिकट केवल आधार वेरिफाई यूजर्स द्वारा ही आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप के माध्‍यम से बुक किए जा सकते हैं.      एजेंटों को तत्‍काल रिजर्व खुलने के पहले 30 मिनट के दौरान तत्‍काल टिकट बुक करने से रोक दिया गया है.      ट्रेनों की वेटिंग लिस्‍ट का स्‍टेटस की नियमित आधार पर निगरानी की जाती है और अतिरिक्‍त मांग को पूरा करने के लिए, भारतीय रेलवे स्पेशल ट्रेनें चला रहा है.  इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव  सरकार ने इमरजेंसी कोटा को लेकर भी बदलाव किया है. पहले इमरजेंसी कोटा के तहत टिकट बुकिंग करने के लिए यात्रा वाले दिन ही आवेदन किया जा सकता था, लेकिन अब 1 दिन पहले इमरजेंसी कोटा के लिए अप्‍लाई करना होगा. यह कोटा सांसद, उच्‍च अधिकारी, मेडिकल इमरजेंसी और सीनियर सिटीजन के लिए होता है. 

लोकसभा-राज्यसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गूंज, पीएम मोदी की भागीदारी संभव

नई दिल्ली संसद के दोनों सदनों में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा में होगी। जानकारी के मुताबिक, सोमवार यानी 28 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। चर्चा में भाग लेने वाले अन्य मंत्रियों में गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हैं। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और निशिकांत दुबे भी इसमें भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे ही राज्यसभा में 29 जुलाई को 'ऑपरेशन सिंधु पर चर्चा  शुरू होगी। इसमें राजनाथ सिंह, जयशंकर और अन्य मंत्री भाग लेंगे। उच्च सदन में भी प्रधानमंत्री मोदी के चर्चा में हिस्सा लेने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों सदनों में इस विषय पर 16 घंटे की चर्चा होगी। विपक्षी दलों से संसद की कार्यवाही बाधित न करने का आग्रह केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'मानसून सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मांग की थी कि 'ऑपरेशन सिंदूर' और पहलगाम आतंकी हमले पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। सरकार ने कहा कि हम इस पर चर्चा के लिए तैयार हैं। विपक्ष पहले दिन से ही संसद में हंगामा कर रहा है। संसद के अंदर और बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। सदन को चलने नहीं दे रहा है। संसद के मानसून सत्र के पहले हफ्ते में हम केवल एक विधेयक पारित कर पाए हैं। मैं सभी विपक्षी दलों से संसद की कार्यवाही बाधित न करने का आग्रह करता हूं।' 'सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा नहीं हो सकती' रिजिजू ने कहा, 'आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक बुलाई और यह दोहराया गया कि हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए तैयार हैं। आज यह निर्णय लिया गया है कि सोमवार (28 जुलाई) को पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा नहीं हो सकती। विपक्ष ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया समेत कई मुद्दे उठाए हैं। हमने उन्हें बताया है कि पहले ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा होगी। उसके बाद हम तय करेंगे कि किन मुद्दों पर चर्चा होगी। 'न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा' उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार के मामले में फंसे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा। हमें किसी भी संदेह में नहीं रहना चाहिए। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को हटाने की कार्यवाही लोकसभा में शुरू होगी। नोटिस को उच्च सदन में स्वीकार नहीं किया गया सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा में इसी तरह के प्रस्ताव के लिए विपक्ष की ओर से प्रायोजित नोटिस को उच्च सदन में स्वीकार नहीं किया गया है, जिससे निचले सदन में इस प्रक्रिया को शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति की घोषणा करने की उम्मीद है। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम क्या कहता है? न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के अनुसार, लोकसभा में कार्यवाही समाप्त होने के बाद कार्यवाही राज्यसभा में स्थानांतरित की जाएगी। सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के 150 से अधिक सांसदों ने लोकसभा में नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे।

SC में केंद्र का हलफनामा: नाबालिग की सहमति भी अवैध यौन संबंध में शामिल

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि यौन संबंधों के लिए सहमति की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष से कम नहीं हो सकती। यह बयान एक याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें यौन सहमति की उम्र को कम करने की मांग की गई थी। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि मौजूदा कानून, विशेष रूप से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) और भारतीय न्याय संहिता, नाबालिगों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। सरकार का तर्क है कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण और दुरुपयोग से बचाने के लिए यह उम्र सीमा आवश्यक है। सरकार ने कहा कि मौजूदा उम्र संबंधि प्रावधान नाबालिगों को यौन शोषण से विशेष रूप से उनके परिचितों द्वारा होने वाले अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। हालांकि, सरकार ने यह स्वीकार किया कि किशोरावस्था में प्रेम संबंधों और आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों के मामलों में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया जा सकता है। 18 साल उम्र- एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी द्वारा प्रस्तुत विस्तृत लिखित जवाब में केंद्र ने कहा, "भारतीय कानून के तहत 18 वर्ष की सहमति की उम्र एक सोच-समझकर लिया गया विधायी निर्णय है, जो बच्चों के लिए एक गैर-परक्राम्य सुरक्षा ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से किया गया है।" सरकार ने कहा कि भारत के संविधान के तहत बच्चों को प्रदत्त संरक्षण के मद्देनजर यह आयु सीमा तय की गई है और इसे कमजोर करना दशकों से चली आ रही बाल सुरक्षा कानूनों की प्रगति को पीछे धकेलने जैसा होगा। केंद्र ने यह भी कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 और हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे कानून इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति यौन गतिविधि के लिए वैध और सूचित सहमति देने में सक्षम नहीं होते। सरकार ने यह भी चेताया कि यदि इस आयु सीमा में कोई छूट दी जाती है, तो यह कानून का दुरुपयोग करने वालों को बचाव का रास्ता देगा, जो पीड़ित की भावनात्मक निर्भरता या चुप्पी का फायदा उठाते हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी बताई सरकार ने सहमति की उम्र में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता, 1860 में यह उम्र 10 साल थी। इसके बाद 1891 के ऐज ऑफ कंसेंट एक्ट में इसे 12 साल किया गया। 1925 और 1929 में इसे बढ़ाकर 14 साल किया गया। 1940 में यह 16 वर्ष और अंततः 1978 में इसे 18 वर्ष किया गया, जो अब तक लागू है। कोर्ट में न्यायिक विवेक की गुंजाइश हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि न्यायपालिका विशिष्ट मामलों में विवेक का प्रयोग कर सकती है, खासकर तब जब मामला दो किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने प्रेम संबंध का हो और दोनों की उम्र 18 वर्ष के आसपास हो। ऐसे मामलों में "close-in-age" छूट पर विचार किया जा सकता है। अपराधियों को संरक्षण न मिले केंद्र ने कहा कि NCRB और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों जैसे सेव द चिल्ड्रन और हक सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि 50% से अधिक बाल यौन अपराध ऐसे लोगों द्वारा किए जाते हैं जो पीड़ित को जानते हैं या जिन पर बच्चे भरोसा करते हैं, जैसे परिजन, शिक्षक, पड़ोसी आदि। सरकार ने चेताया कि यदि सहमति की उम्र घटाई गई, तो ऐसे ही अपराधियों को यह कहकर राहत मिल सकती है कि यौन संबंध सहमति से हुए थे, जिससे POCSO कानून की मंशा पर कुठाराघात होगा। बच्चों को दोषी ठहराने का खतरा सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि यौन शोषण करने वाला व्यक्ति माता-पिता या कोई नजदीकी रिश्तेदार हो, तो बच्चा विरोध करने या शिकायत करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे मामलों में 'सहमति' की दलील देना बच्चे को ही दोषी ठहराने जैसा है, और इससे बच्चे के शरीर और गरिमा की सुरक्षा कमजोर होती है।

HIV मामलों में वृद्धि के बीच Meghalaya में शादी से पहले compulsory टेस्टिंग क़ानून की तैयारी

शिलांग देश के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में अब शादी से पहले एचआईवी टेस्ट को अनिवार्य बनाने की तैयारी चल रही है। हेल्थ मिनिस्टर एंपरीन लिंगदोह ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए विवाह से पहले जांच अनिवार्य करने के लिए नया कानून लाने पर विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि मेघालय एचआईवी/एड्स प्रसार के मामले में देश में छठे स्थान पर है और पूर्वोत्तर क्षेत्र पर इसका अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। लिंगदोह ने कहा, ‘अगर गोवा ने विवाह से पहले एचआईवी जांच को अनिवार्य कर दिया है तो मेघालय को भी इस तरह का कानून क्यों नहीं लागू करना चाहिए? यह पूरे समाज के लिए फायदेमंद होगा।’ स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग की अध्यक्षता में एक बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें समाज कल्याण मंत्री पॉल लिंगदोह और ईस्ट खासी हिल्स जिले के आठ विधायक भी शामिल हुए। इस बैठक में एचआईवी/एड्स पर एक नीति बनाने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में कैबिनेट नोट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही इसी तरह की बैठकें गारो हिल्स और जैंतिया हिल्स क्षेत्रों में आयोजित की जाएंगी ताकि क्षेत्रवार रणनीति तैयार की जा सके। स्वास्थ्य मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि सिर्फ ईस्ट खासी हिल्स जिले में ही अब तक एचआईवी/एड्स के 3,432 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से केवल 1,581 मरीज ही उपचार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में इस संक्रमण का प्रमुख कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं। मंत्री ने कहा, ‘हमें सुनिश्चित करना होगा कि जांच के बाद संक्रमित पाए गए हर व्यक्ति का इलाज कराया जाए। एचआईवी/एड्स घातक नहीं है, अगर इसका समय पर और सही तरीके से इलाज हो।’ बता दें कि गोवा में भी ऐसे तमाम मामले पाए जाने के बाद एचआईवी टेस्ट को लेकर नियम बनाया गया है।

LOC पर बारूदी सुरंग का धमाका, एक वीर जवान शहीद, दो सैनिक घायल

पुंछ पुंछ जिले के कृष्णा घाटी उपजिला में बारूदी सुरंग के धमाके से एक जवान बलिदान और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब भारतीय सेना की 7वीं रेजिमेंट के नायब सूबेदार हरि राम, हवलदार गजेंद्र सिंह और सिपाही ललित कुमार अपनी अग्रीम चोकी के पास नियमित गश्त कर रहे थे। इसी दौरान वे क्षेत्र में दबी एम-16 माइन के विस्फोट की चपेट में आ गए। धमाके में नायब सूबेदार हरि राम बलिदान हो गए, जबकि हवलदार गजेंद्र सिंह और सिपाही ललित कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटना की जानकारी अधिकारियों को मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।

एफटीए से किसानों को होगा सीधा लाभ, कृषि निर्यात में आएगी तेजी : शिवराज सिंह

नई दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा किए गए भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता का कृषि क्षेत्र पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसे लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन करते हुए किसान भाइयों-बहनों को बधाई दी है। शिवराज सिंह ने कहा कि यह समझौता अद्भुत, अभूतपूर्व, ऐतिहासिक और राष्ट्र तथा किसानों के व्यापक हित में है। दिल्ली में मीडिया को दिए वक्तव्य में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमारा यूके के साथ जो व्यापक आर्थिक व्यापार समझौता हुआ है, वो भारतीय कृषि और किसानों के लिए वरदान है। भारत ट्रेड सरप्लस देश है, मतलब यूके को हम निर्यात करते हैं 8 हजार 500 करोड़ के कृषि उत्पाद और वहां से हम आयात करते हैं। 3 हजार 200 करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद। मतलब, हमारा निर्यात ज्यादा है व आयात कम है और इसका फायदा निर्यात ज्यादा होने से होगा। इससे निश्चित तौर पर भारत को मिलेगा। विज्ञापन शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के हितों का पूरी तरह संरक्षण किया गया है। किसान हित हमारे लिए सर्वोपरि है। किसानों की सेवा भगवान की पूजा जैसी है। इसलिए, ऐसी चीजें, जिनके आयात से हमारे किसानों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता था, उनमें कोई रियायत समझौते पर नहीं दी गई है। गेहूं, चावल, मक्का, अनाजों में जिनका व्यापक उत्पादन होता है हमारे यहां, भारत ने कोई कन्सेशन नहीं दिया है। अगर हम फलों में देखें तो सेब, अनार, अंगूर, नाशपाती, आलू बुखारा, फलों का राजा आम, अमरूद इन पर भी हमने कोई कन्सेशन नहीं दिया है। हम ऑयल सीड्स को देखें, तिलहन को देखे तो सोयाबीन, मूंगफली, सरसों में हमने कोई रियायत नहीं दी है। वहीं, नट्स को देखें तो काजू, बादाम, अखरोट इन पर हमने कोई रियायत नहीं दी है। सब्जियों में आलू, प्याज़, टमाटर, लहसुन, मटर जो हमारे यहां व्यापक पैमाने पर होता है, हमने यूके को कोई कन्सेशन नहीं दिया है। इसी तरह, दलहन में काला चना, चना, उड़द, मूंग, मसूर, राजमा, तुअर इन पर हमने कोई छूट यूके को नहीं दी है। फूलों में गुलाब, लीली, ऑर्किड इन पर हमने कोई रियायत नहीं दी है। मसालों में हल्दी, बड़ी इलायची जैसे मसालों पर भी हमने कोई छूट नहीं दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि इसका मतलब है कि ये चीजें भारत में यूके से सस्ती नहीं आएंगी तो किसानों के आर्थिक हित सुरक्षित रखे गए हैं। दूसरी तरफ यूके ने जिन चीजों पर 0% इम्पोर्ट ड्यूटी की है, यूके को हमारा कृषि उत्पाद जाता है, चाहे फसलें हो, फल-सब्जियां हो, उन पर इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी, लेकिन व्यापक पैमाने पर, इसलिए क्योंकि सभी प्रमुख कृषि उत्पादों पर इम्पोर्ट ड्यूटी 0% कर दी गई है। मतलब, यूके की जनता अब भारत से जो कृषि उत्पाद जाएंगे, उन्हें सस्ता खरीद सकती है, क्योंकि इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। अगर इम्पोर्ट ड्यूटी लगती तो वहां महंगा होता, और अगर वहां महंगा होता तो ख़रीद की संभावनाएं कम होती। और उस श्रेणी में देखें तो सारे फल, सूखे मेवे, सभी सब्जियां, सभी तिलहन मतलब सरसों हो, सोयाबीन, मूंगफली हो, सभी दलहन, जितनी भी दालें हैं, सभी फूल, सभी औषधि पौधे, इन पर इम्पोर्ट ड्यूटी जीरो कर दी गई है। उन्होंने कहा, इसका मतलब है अब हमारे ये कृषि उत्पाद व्यापक पैमाने पर वहां जा सकेंगे। हमारा निर्यात बढ़ेगा, वहीं आयात पर हमने कोई रियायत नहीं दी है, लेकिन निर्यात पर 0% इम्पोर्ट ड्यूटी पर ये चीजें जाएंगी हमारी, तो वहां इम्पोर्ट ड्यूटी 0% है, जिससे इनका व्यापार बढ़ेगा, निर्यात ज़्यादा होगा। और, डेरी उत्पादों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है।

बांग्लादेश : महिला कर्मचारियों का पहनावा तय करने वाले निर्देश के खिलाफ बवाल, वापस ली ‘तालिबानी’ ड्रेस पॉलिसी

ढाका  बांग्लादेश में तालिबान की तरह मोरल पुलिसिंग करने की मोहम्मद यूनुस सरकार की कोशिश मुंह के बल गिरी है. बांग्लादेश के सेंट्रल बैंक ने ऑर्डर जारी कर कहा था कि दफ्तर महिला अधिकारियों को शॉर्ट ड्रेस, शॉर्ट स्लीव और लेगिंग्स पहनने की अनुमति नहीं होगी. बांग्लादेश के केंद्रीय बैंक ने तीन दिन पहले महिला कर्मचारियों को 'शालीन और पेशेवर' कपड़े पहनकर दफ्तर आने कहा था. बांग्लादेश बैंक के मानव संसाधन विभाग ने यह भी चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन सोशल मीडिया में तूफान उठ खड़ा हुआ. लोग बांग्लादेश बैंक मैनेजमेंट को फेसबुक और एक्स पर 'शालीन और पेशेवर' की परिभाषा बताने लगे. बात इतनी बढ़ी कि फिलहाल बांग्लादेश बैंक ने आदेश वापस ले लिया है. कई लोगों ने इस आदेश की तुलना तालिबानी ऑर्डर की.  रद्द किए गए आदेश के तहत पुरुष कर्मचारियों को लंबी या आधी बाजू वाली औपचारिक शर्ट, औपचारिक पैंट और जूते पहनने का निर्देश दिया गया था, जबकि जींस और फैंसी पजामे पहनने की अनुमति नहीं थी.  महिलाओं के लिए जारी निर्देश में सभी महिलाओं को साड़ी, सलवार-कमीज, कोई अन्य सादा, शालीन, पेशेवर परिधान, साधारण हेडस्कार्फ़ अथवा हिजाब पहनने के लिए कहा गया था. इस आदेश के तहत उन्हें औपचारिक सैंडल या जूते पहनने की अनुमति दी. केंद्रीय बैंक के आदेश में महिलाओं को छोटी बाजू के कपड़े या लंबे ढीले पोशाक और लेगिंग पहनने से मना किया गया था.  निर्देश में कहा गया था कि, "सभी स्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों को देश के सामाजिक मानदंडों के अनुरूप शालीन और पेशेवर ढंग से कपड़े पहनने चाहिए." इस आदेश का विरोध करते हुए एक्स पर एक यूजर ने लिखा कि इस्लामिक एजेंडे के तहत बांग्लादेश बैंक ने महिला अधिकारियों को शॉर्ट स्लीव और लैंगिंग्स नहीं पहनने को कहा है. लेकिन बांग्लादेश बैंक के गवर्नर की बेटी अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी पहनती है. इसके अलावा सभी विभागों को ड्रेस कोड दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था.  कुछ लोगों ने इस आदेश की तुलना अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के आदेशों से भी की जिसमें सभी महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सिर से पांव तक कपड़े पहनने का आदेश दिया गया है. एक यूजर ने ट्वीट किया, "नए तालिबानी युग में एक सतर्क तानाशाह का शासन." बांग्लादेश महिला परिषद की अध्यक्ष फ़ौजिया मुस्लिम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बांग्लादेश में ऐसा निर्देश अभूतपूर्व है. उन्होंने कहा, "एक खास सांस्कृतिक माहौल को आकार दिया जा रहा है, और यह निर्देश उसी प्रयास को दर्शाता है." सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बीच बांग्लादेश बैंक ने गुरुवार को यह निर्देश वापस ले लिया. प्रवक्ता आरिफ़ हुसैन खान ने कहा कि, "यह सर्कुलर पूरी तरह से एक सलाह है. हिजाब या बुर्का पहनने के संबंध में कोई बाध्यता नहीं लगाई गई है." वहीं इस विवाद के बीच बुधवार रात पारित एक अध्यादेश ने नागरिकों को और भी ज्यादा नाराज कर दिया है. इसमें सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव है. बांग्लादेश में बढ़ता तालिबानी असर गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल के कुछ महीनों में कट्टरपंथी तत्वों का उभार हुआ है. यहां तालिबानी विचारधारा का फुटप्रिंट भी बढ़ा है. रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में इस्लामिक विचारधारा का प्रभाव इतना बढ़ा है कि युवा अब तालिबान और TTP की ओर आकर्षित हो रहे हैं. बांग्लादेश से कम से कम दो पाकिस्तानी तालिबानी सदस्यों के पाकिस्तान होते हुए अफ़ग़ानिस्तान जाने के सबूत मिले हैं. उनमें से एक अप्रैल में वज़ीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना के साथ मुठभेड़ में मारा गया था. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मलेशिया ने जून में 36 बांग्लादेशी नागरिकों को आतंकवादी नेटवर्क से कथित संबंधों के आरोप में हिरासत में लिया था. 

वायरल वीडियो बना कारण? कोल्डप्ले कॉन्सर्ट के बाद HR हेड ने छोड़ा पद

वाशिंगटन पिछले दिनों अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एस्ट्रोनॉमर (Astronomer) के सीईओ एंडी बायरन और कंपनी की एचआर हेड क्रिस्टिन कैबोट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वायरल वीडियो में वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में नजर आ रहे हैं. ये वीडियो बोस्टन के गिलेट स्टेडियम में कोल्डप्ले के हालिया कॉन्सर्ट के वक्त बनाया गया था. वीडियो वायरल होने के बाद पहले एंडी बायरन ने इस्तीफा दिया और अब क्रिस्टिन कैबोट ने भी टेक फर्म छोड़ दिया है.  कैबोट और एंडी बायरन उस वक्त शॉक हो गए थे, जब बोस्टन के जिलेट स्टेडियम में 55 हजार लोगों के सामने एक बड़ी स्क्रीन पर उनके मुस्कुराते हुए चेहरे दिखाई दिए थे. स्क्रीन पर खुद की तस्वीरें देखने के बाद बायरन और सुश्री कैबोट खचाखच भरे स्टेडियम में शर्मिंदगी महसूस करने के बाद छिपने के लिए दौड़ते देखे गए थे. बता दें कि दोनों के पास अपना परिवार है. विदेशी मीडिया के मुताबिक, एस्ट्रोनॉमर के एक कर्मचारी ने बताया, "क्रिस्टिन कैबोट अब एस्ट्रोनॉमर में नहीं हैं, उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया है." 'आचरण और जवाबदेही…' यह खबर बायरन द्वारा 'कंपनी के मानकों पर खरा न उतरने' के बाद अपने पद से इस्तीफ़ा देने के कुछ ही दिनों बाद आई है. कंपनी ने एक बयान में कहा, "जैसा कि पहले कहा गया है, एस्ट्रोनॉमर उन मूल्यों और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्ध है, जो हमारी फाउंडिंग के वक्त से ही हमें आगे का रास्ता दिखाते रहे हैं. हमारे ऑफिसर्स से आचरण और जवाबदेही दोनों में मानक स्थापित करने की अपेक्षा की जाती है, और हाल ही में, उस मानक को पूरा नहीं किया गया." कंपनी ने कहा कि एंडी बायरन ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया है और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने उसे स्वीकार कर लिया है. बोर्ड हमारे अगले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तलाश शुरू करेगा क्योंकि को-फाउंडर और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर पीट डेजॉय अंतरिम सीईओ के रूप में काम करना जारी रखेंगे. ऐसे नजर आया कपल… दरअसल, बुधवार रात कोल्डप्ले के कॉन्सर्ट के दौरान जब किस कैम ने दर्शकों में मौजूद कपल्स पर फोकस किया तो कैमरा एंडी बायरन और क्रिस्टिन कैबोट पर रुक गया. वीडियो में दोनों एक-दूसरे की बाहों में नजर आए. लेकिन जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि वह स्क्रीन पर दिखाए जा रहे हैं, तो बायरन ने जल्दी से खुद को छिपाने की कोशिश की और कैबोट ने अपने चेहरे को हाथों से ढक लिया. इसके बाद मौके की नजाकत को समझते हुए सिंगर क्रिस मार्टिन ने कहा, 'ओह… या तो ये दोनों अफेयर में हैं या फिर बहुत शर्मीले हैं.'

श्रद्धा का सैलाब: बाबा बर्फानी के लिए एक और जत्था रवाना

जम्मू,  दक्षिण कश्मीर हिमालय स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बफार्नी के दर्शन करने के लिये 2,896 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था शुक्रवार सुबह 'बम बम भोले' का जयघोष करते हुए यात्री निवास भगवती नगर आधार शिविर से रवाना हुआ। सरकारी सूत्रों ने बताया “ आज सुबह 2,896 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जम्मू आधार शिविर से कश्मीर स्थित श्री अमरनाथ यात्रा गुफा मंदिर के लिए रवाना हुआ।” उन्होंने बताया कि 790 तीर्थयात्री पहलगाम और 2,106 तीर्थयात्री बालटाल के लिए 117 वाहनों के बेड़े में रवाना हुए, जिनमें हल्के मोटर वाहन और भारी वाहन शामिल हैं। यह वार्षिक तीर्थयात्रा दो जुलाई को दोनों मार्गों से शुरू हुई थी और 09 अगस्त को रक्षाबंधन पर समाप्त होगी। अब तक तीन लाख से अधिक तीर्थयात्री पवित्र हिमलिंग के दर्शन कर चुके हैं।