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बंगाल में जांच एजेंसियों को बड़ी राहत! शुभेंदु सरकार ने CBI पर लगी रोक हटाई

 कोलकाता पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सीबीआई को जांच करने की पूरी छूट देने का बड़ा फैसला किया है. होम एंड हिल अफेयर्स विभाग की तरफ से 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट, 1946 के तहत सीबीआई को राज्य में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मियों और उनसे जुड़े मामलों की जांच करने की अनुमति दी गई है।  इस नोटिफिकेशन का सीधा मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को राज्य में कुछ मामलों की जांच करने के लिए फिर से सामान्य सहमति (General Consent) दे दी है, लेकिन यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है।  यह अधिकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत दिया गया है. नोटिफिकेशन 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो रहा है।  किन मामलों में जांच कर सकेगी CBI?     केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों से जुड़े मामले.     अगर किसी शख्स पर केंद्रीय कर्मचारियों या केंद्रीय उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप हो, तो उनके खिलाफ भी जांच की जा सकेगी. किन मामलों में CBI सीधे जांच नहीं कर सकेगी? पश्चिम बंगाल सरकार के नियंत्रण वाले राज्य सरकारी कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई सीधे जांच नहीं कर सकती है. ऐसे मामलों में सीबीआई को पहले राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी. यह कहना कि 'बंगाल ने CBI को सभी मामलों की जांच की पूरी छूट दे दी' पूरी तरह सही नहीं होगा. नोटिफिकेशन पढ़ने पर साफ है कि छूट मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय उपक्रमों और उनसे जुड़े मामलों के लिए दी गई है. राज्य सरकार के अधिकारियों पर CBI अभी भी बिना अनुमति सीधे जांच नहीं कर सकती।  भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की सीबीआई को दी खुली छूट  मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछली सरकार ने 4 वर्षों से सीबीआई की कार्रवाई को रोक रखा था. कानून के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या अभियोजन शुरू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है।  ममता बनर्जी पर भ्रष्ट नौकरशाहों को संरक्षण देने का आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने जान-बूझकर इन फाइलों को अटकाये रखा, ताकि उनके खास अधिकारियों को बचाया जा सके. मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल 3 प्रमुख विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच की सीबीआई को आवश्यक मंजूरी दे दी गयी है. इसकी प्रतियां केंद्रीय एजेंसी को भेज दी गयी हैं।  रडार पर शिक्षक भर्ती और नगर निकाय भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड     शिक्षक भर्ती घोटाला (WBSSC) स्कूलों में अवैध नियुक्तियों से जुड़ा मामला है. इस केस में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ अब सीबीआई सीधे आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी।      नगर निकाय भर्ती घोटाला वो केस है, जिसमें बंगाल के विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई नौकरियों की बंदरबांट हुई थी. अब इसकी जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।  कानून का हथियार बनाकर भ्रष्टाचारियों को दिया गया था सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने कानून को ढाल बनाकर भ्रष्टाचारियों को कवच प्रदान किया था. उन्होंने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है. जो फाइलें सचिवालय की आलमारियों में बंद थीं, उन्हें अब खोल दिया गया है, ताकि जनता का पैसा लूटने वालों को सजा मिल सके। 

बिल्डिंग मालिक का फूटा गुस्सा, TMC से मांगा मुख्यालय खाली करने का जवाब

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। खबर है कि तृणमूल कांग्रेस का मुख्यायल जिस भवन में है, उसके मालिक ने पार्टी से जगह खाली करने के लिए कहा है। इस संबंध में पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब टीएमसी में बगावत जारी है और विधायक पहले ही दो गुट तैयार कर चुके हैं। टीएमसी के मौजूद मुख्यालय का पता A/P-1/A कैनाल साउथ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के संपत्ति मालिक मोंटू साहा है और वह चाहते हैं कि टीएमसी उनकी संपत्ति को खाली कर दे। उनका कहना है कि टीएमसी के साथ कराया गया समझौता साल 2025 में ही खत्म हो गया है और वह पार्टी से लंबे समय से जगह खाली करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन उसपर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस में शिकायत जगह खाली नहीं करने को लेकर जारी विवाद के बाद साहा अपने बेटे अमित के साथ रविवार को प्रॉपर्टी पर पहुंचे थे। वह टीएमसी नेताओं से बात करने पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई भी पदाधिकारी मौजूद नहीं था। ऐसे में उन्होंने पुलिस का रुख किया है। खबर है कि पिता पुत्र कुछ घंटों तक इंतजार करने के बाद पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हुए थे। क्या है प्लान उन्होंने संकेत दिए हैं कि पार्टी को प्रॉपर्टी से बाहर निकालने के लिए कानूनी मदद ली जा सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अमित का कहना है, 'पिछले साल के आखिर में जब कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया, तो हमने उनसे कई बार संपर्क किया और कहा कि हमें हमारी बिल्डिंग वापस चाहिए। इस बिल्डिंग में मरम्मत का काम होना है और हमें अपने बिजनेस के लिए भी इसकी जरूरत है।' अमित ने कहा, 'उन्होंने हमसे कहा था कि वे जुलाई तक बिल्डिंग खाली कर देंगे, लेकिन हमें यह अभी वापस चाहिए। पिछले कुछ समय से पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस बारे में बात करने के लिए उपलब्ध नहीं है। हमारे पास पुलिस के पास जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था।' रिपोर्ट के अनुसार, टीएएमसी के एक नेता का कहना है कि साहा ने संपत्ति किराये पर देकर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि इसके बदले में कई कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए हैं। TMC हेडक्वार्टर्स खास बात है कि टीएमसी के असली मुख्यालय पर भी विवाद जारी है। तृणमूल भवन नाम से पहचाने वाली इस बिल्डिंग पर बागी विधायक जावेद खान ने अपना दावा पेश कर दिया है। उनका कहना है कि तृणमूल भवन जिस जमीन पर बना हुआ है, वह उनके परिवार की है। उन्होंने कहा था, 'मेरे पास यह साबित करने के लिए पूरे सबूत हैं कि तोपसिया रोड प्लॉट मेरे परिवार का है।' दरअसल, यहां रिनोवेशन का काम शुरू होने के बाद टीएमसी 2022 में साहा की प्रॉपर्टी में शिफ्ट हुई थी। साहा परिवार का कहना है कि यह जगह टीएमसी को साल 2022 में किराये पर दी गई थी। इससे पहले साहा यहां अरब रेसीडेंसी नाम का होटल चलाते थे।

करीबी की कॉल बनी सुराग, नेपाल सीमा क्षेत्र में किराये के मकान से पकड़ा गया जहांगीर खान

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक जहांगीर खान पर कानून का शिकंजा कस गया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जहांगीर को गिरफ्तार कर लिया है. जहांगीर को नेपाल की सीमा के समीप से पकड़ा गया है. जहांगीर फलता चुनाव में नाम वापसी का ऐलान करने के बाद से ही अंडरग्राउंड चल रहा था।  जहांगीर खान की गिरफ्तारी को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक वह नेपाल की सीमा से सटे इलाके में किराये का मकान लेकर अपने परिवार के साथ रह रहा था. एसटीएफ को आधा दर्जन से अधिक मामलों में जहांगीर की तलाश थी. एसटीएफ ने जहांगीर की गिरफ्तारी के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था।  पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने जहांगीर खान के करीबी सहयोगियों के फोन भी ट्रेस करना शुरू कर दिया. जहांगीर ने इसी बीच अपने एक करीबी सहयोगी से संपर्क किया और यही फोन कॉल एसटीएफ के लिए उस तक पहुंचने का रास्ता तैयार कर गई. एसटीएफ ने मोबाइल नेटवर्क के जरिये लोकेशन का पता लगा लिया. एसटीएफ ने तसल्ली से पहले जहांगीर खान का ठिकाना चिह्नित किया।  एसटीएफ जब जहांगीर खान के ठिकाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हो गई, 7 और 8 जून की रात छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. जहांगीर के खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली समेत कई गंभीर धाराओं में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. जहांगीर खान हालिया बंगाल चुनाव में फलता विधानसभा सीट से टीएमसी का उम्मीदवार था. जहांगीर खान ने सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।  आईपीएस अजयपाल शर्मा के साथ हुआ था विवाद फाल्टा में चुनाव के दौरान टीएमसी नेता जहांगीर खान पर ईवीएम में छेड़खानी के आरोप लगे थे। इसके अलावा चुनाव ऑब्जर्वर बनाए गए आईपीएस अजयपाल शर्मा की सख्ती के बाद उनके बयानों ने सुर्खियां बटोरी थीं। जहांगीर खान ने कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा सिंघम है तो वह पुष्पा हैं। चुनाव में गड़बड़ी की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने फाल्टा का चुनाव रद्द कर दिया था। 26 मई को फाल्टा में दोबारा मतदान हुआ। तब जहांगीर खान ने वोटिंग से दो दिन पहले खुद को चुनाव से अलग कर लिया। फाल्टा में बीजेपी की जीत हुई और जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे। जहांगीर खान को टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। फाल्टा में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर भी काफी हंगामा हुआ और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठे। जहांगीर खान के खिलाफ दर्ज थे ये केस     जहांगीर खान के खिलाफ जबरन वसूली, धमकी देने, राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने से जुड़े सात से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।     जहांगी इन सभी मामलों में लगातार फरार चल रहा था।     पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही थी।     स्थानीय स्तर पर प्रभाव और दबदबे के कारण जहांगीर खान को लोग ‘फाल्टा का पुष्पा’ भी कहकर बुलाते थे। खुद को बताया था पुष्पा बता दें कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी को पहली बार पश्चिम बंगाल में सफलता मिली। सत्ता संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने फाल्टा में चुनाव प्रचार भी किया। प्रचार के दौरान उन्होंने जहांगीर खान को चुनौती देते हुए कहा था कि जनता अब 'पुष्पा' को हराएगी। बता दें कि चुनाव के दौरान जहांगीर खान ने आईपीएस अजयपाल शर्मा को ललकारते हुए कहा था कि अगर वह सिंघम हैं तो हम भी पुष्पा हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन बुधवार को भी शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी उम्मीदवार के साथ रोड शो किया। फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को मतदान होगा और 24 मई को वोटों की गिनती होगी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने जहांगीर खान को फलता चुनाव तक के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी थी. जहांगीर ने फिर हाईकोर्ट का रुख कर इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस बार उसे झटका दे दिया. जहांगीर खान ने फलता चुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद से ही वह अंडरग्राउंड चल रहा था।  नतीजों के बाद हुए गायब पश्चिम बंगाल में 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही राजनीतिक समीकरण बदल गए थे। इसके बाद 21 मई तक जहांगीर खान पूरी तरह से परिदृश्य से ‘गायब’ हो चुके थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने चुनाव से ठीक दो दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया था। नाम वापस लेने के बाद से ही वे लगातार पुलिस की टीम को चकमा देकर भाग रहे थे। आखिरकार उनकी यह फरारी आज सुबह नेपाल सीमा के पास हमेशा के लिए समाप्त हो गई। वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप चुनावी प्रक्रिया के दौरान एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई अवैध गतिविधियों के आरोप थे। उन पर सरकारी बीएलओ को डरा-धमकाकर अपने पक्ष में प्रभावित करने का बेहद गंभीर आरोप लगा था। इसके अलावा उन्होंने वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए मृतकों के नाम भी सूची में शामिल करवाए थे। इन सभी जालसाजियों के सबूत सामने आने के बाद से ही पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इन हरकतों ने चुनाव की पूरी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। अजय पाल शर्मा की तैनाती इलाके में जहांगीर खान द्वारा लोगों को धमकाने और डराने के आरोपों पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं इन घटनाओं के खिलाफ बहुत मजबूती से अपनी आवाज उठाई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजय पाल शर्मा को नियुक्त किया। उन्हें विशेष पर्यवेक्षक के रूप में जिम्मेदारी सौंपकर डुंडी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में भेजा गया था। इस नियुक्ति का उद्देश्य इलाके में पूरी तरह से कानून व्यवस्था बहाल करना था। मशीनों पर टेप और दोबारा चुनाव फालता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दिन बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली और अराजकता देखने को मिली थी। वोटिंग के दौरान ही कई ईवीएम मशीनों पर सेलोटेप चिपकाए जाने की चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई थीं। इस … Read more

समंदर में उठी तबाही की आशंका! फिलीपींस में शक्तिशाली भूकंप के बाद सुनामी चेतावनी जारी

मनीला दक्षिणी फिलीपींस के मिंडानाओ में सोमवार सुबह जोरदार भूकंप से धरती कांप उठी है। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 8.2 रही है, जिसके बाद फिलीपींस और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में चेतावनी जारी की गई है। चेतावनी में तटीय इलाके में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने को कहा गया है। भूकंप जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिससे झटके और जोर से महसूस किए गए। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने शुरू में इसकी तीव्रता 7.2 बताई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 8.2 कर दिया। भूकंप के बाद अमेरिका के सुनामी चेतावनी सिस्टम ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है। इसने चेतावनी दी कि खतरनाक लहरें इलाके के तटीय इलाकों को प्रभावित कर सकती हैं। इंडोनेशिया में भी सुनामी की चेतावनी इंडोनेशिया की जियोफिजिस्ट एजेंसी ने देश के उत्तर-पूर्वी तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है। इसमें लोगों से सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा है। इंडोनेशियाई एजेंसी ने भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.7 मापी है। फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्कानोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी ने भूकंप के 7.0 तीव्रता का होने का अनुमान लगाया है। इसने एक मीटर ऊंची सुनामी की लहरें उठने की चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने कहा है कि भूकंप के बाद ये लहरें कई घंटे तक रह सकती हैं। जापान, इंडोनेशिया समेत इन देशों में अलर्ट अलजजीरा के मुताबिक, फिलीपींस के पास आए जबरदस्त भूकंप के बाद जापान ने अपने प्रशांत महासागर तट के कुछ हिस्सों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग का अनुमान है कि जापान के कुछ इलाकों में एक मीटर तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं।  भूकंप के बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने सुनामी का खतरा बताते हुए चेतावनी जारी की है. एजेंसी के मुताबिक, खतरनाक लहरें समुद्र तट पर स्थित द्वीप को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसके बाद इंडोनेशिया की जियोफिजिक्स एजेंसी ने भी देश के उत्तरपूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की और अपने नागरिकों को सतर्क रहने के साथ-साथ निर्देशों का पालन करने की अपील की।  चेतावनी में कहा गया है कि शक्तिशाली भूकंप से काफी नुकसान हो सकता है और आने वाले घंटों और दिनों में इसके बाद तेज झटके आ सकते हैं. बीते रविवार को भी भारत समेत कई देशों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे. भारत के साथ-साथ नेपाल, चीन और भूटान में आए भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.3 मापी गई थी. इस भूकंप का केंद्र भूटान था।  किसी के मारे जाने की खबर नहीं इंडोनेशिया और फिलीपींस में अभी तक किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। अधिकारियों ने भूकंप के केंद्र के पास जोरदार झटके आने की बात कही है, जिससे भारी नुकसान हो सकता है। लोगों से सावधान रहने को कहा गया है, क्योंकि आने वाले घंटों और झटके महसूस किए जा सकते हैं। इलाके में एजेंसियां समुद्र के जलस्तर पर नजर रख रही हैं। दक्षिणी फिलीपींस के सारांगनी प्रांत में स्थित अलाबेल के पुलिस चीफ बेंजी अंचेता ने बताया कि भूकंप के बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन की इमारत में दरार पड़ गई। अंचेता ने बताया कि तत्काल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। उन्होंने कहा, "यह अब तक का सबसे जोरदार भूकंप है, जो हमने महसूस किया है।" 

तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान STF के शिकंजे में, सीमा क्षेत्र से हुई गिरफ्तारी

कोलकत्ता  फालता से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को राज्य पुलिस की STF ने गिरफ्तार किया है। उन्हें आज सुबह नेपाल बॉर्डर इलाके से गिरफ्तार किया गया है। काफी दिनों से फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया है। जहांगीर खान पर लगे थे कई आरोप बंगाल के चुनावी नतीजे आने के बाद से जहांगीर फरार था। उसकी तलाश जारी थी। आखिरकार आज एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। चुनाव से पहले एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई आरोप लगे थे। उन पर बीएलओ को प्रभावित करने और मृतकों के नाम सूची में जोड़ने का आरोप था। जहांगीर खान की गिरफ्तारी किस जगह से और कब की गई, इस संबंध में अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जहांगीर खान की गिरफ्तारी के संबंध में अधिक जानकारी साझा कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक जहांगीर खान फलता विधानसभा सीट के लिए हाल ही में हुए चुनाव के बाद से लापता चल रहा था।  पश्चिम बंगाल पुलिस और एसटीएफ को कई मामलों में जहांगीर खान की तलाश थी. जहांगीर खान के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं. एसटीएफ ने जहांगीर खान को पकड़ने के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया. जहांगीर खान के एक सहयोगी का फोन जब ट्रैक किया गया, एसटीएफ जहांगीर खान तक पहुंच गई।  लोगों को धमकाने का भी आरोप भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं उनके खिलाफ आवाज उठाई थी। इसके बाद चुनाव से पहले इलाके में धमकाने के आरोप भी लगे। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुठभेड़ विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में डुंडी पुलिस स्टेशन भेजा था। बता दें कि दक्षिण 24 परगना की फलता सीट से जहांगीर खान टीएमसी के उम्मीदवार थे। चुनाव के वक्त उनपर हिंसा और लोगों को धमकाने का आरोप लगा था। चुनाव में गड़बड़ियों की शिकायत के बाद इस सीट पर दोबारा चुनाव हुआ और बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की। वहीं जहांगीर खान पहले ही हथियार डाल चुके थे। चुनाव में भी वह चौथे नंबर पर खिसक गए। उनपर फलता थाने में धमकी देने, जबरन वसूली, हिंसा, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने समेत सात केस दर्ज हुए थे। वह चुनाव के बाद से ही फरार थे। वहीं एसटीएफ उनकी तलाश में जुटी थी।

ट्रंप की मनाही बेअसर! इजरायल ने ईरान पर बरसाए बम, जवाबी हमले से दहला येरूशलम

वॉशिंगटन/तेल अवीव हिज्बुल्लाह पर इजरायल के हमले के बाद ईरान ने 8 अप्रैल के बाद पहली बार इजरायल पर मिसाइल हमले किए। जिसके बाद आज सुबह इजरायल ने भी ईरान में जमीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं। इसके बाद एक बार फिर से युद्ध छिड़ने की आशंका काफी तेज हो गई है। इजरायल डिफेंस फोर्स ने कहा है कि कुछ देर पहले इजरायली वायु सेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी आतंकी शासन के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। खास बात ये है कि इजरायल ने तब हमला किया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू से हमला नहीं करने को कहा था इसीलिए सवाल ये हैं कि अगर ये जंग फिर शुरू होता है तो क्या अमेरिका, इजरायल के साथ खड़ा रहेगा? इसके अलावा मिसाइलों के आदान प्रदान के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते में मुश्किलें आ सकती हैं। ट्रंप उम्मीद कर रहे थे कि इस मामले को दबाकर रखा जाए। उन्हें उम्मीद होगी कि यह मामला अप्रैल 2024 जैसा ही रहेगा जब इजराइल और ईरान ने एक-दूसरे पर हमले किए थे लेकिन कुछ दिनों बाद मामला शांत हो गया और यह बड़े संघर्ष में नहीं बदला जिसकी उस समय चिंता थी। लेकिन इस बार मामला अलग तरीके का है। इजरायल-ईरान के बीच क्या टूट गया युद्धविराम? डोनाल्ड ट्रंप को अभी भी उम्मीद हो सकती है कि ईरान और इजरायल एक बार फिर से युद्ध में नहीं फंसेगे लेकिन ऐसा होना मुश्किल है। ट्रंप ने कुछ देर पहले ही फाइनेंशियल टाइम्स से कहा था कि वो ईरान युद्ध से जुड़े सारे फैसले वही लेते हैं। ट्रंप ने सोमवार को फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास ईरान के साथ डील मानने के अलावा 'कोई चारा नहीं' होगा। ट्रंप ने कहा 'फैसले मैं ही लेता हूं, सारे फैसले मैं ही लेता हूं, वह फैसले नहीं लेते।' लेकिन इजरायल ने ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर साबित कर दिया है कि ट्रंप सारे फैसले नहीं लेते हैं। ईरान-अमेरिका जंग में पिस रही दुनिया, होर्मुज के बाद बाब अल मंडेब बंद करने की धमकी FT के मुताबिक ट्रंप ने यह भी कहा कि रविवार को इजरायल पर हुए ईरानी मिसाइल हमले का 'डील पर कोई असर नहीं' पड़ेगा। ट्रंप के साथ बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने यह साफ कर दिया होगा कि भले ही ट्रंप इजरायल से शांति बनाए रखना चाह रहे हों लेकिन इजरायल अपनी मर्जी से काम करेगा। इसीलिए ट्रंप के लिए स्थिति काफी मुश्किल होने वाली है। ईरान और इजरायल को फिर से युद्धविराम के लिए मनाना आसान नहीं होगा। इजरायली पीएम नेतन्याहू पहले से ही युद्धविराम समझौतों से नाराज थे। उन्हें युद्धविराम की शर्तें भी पसंद नहीं हैं लेकिन असल सवाल ये है कि क्या ईरान अगर नये सिरे से हमले करता है तो क्या अमेरिका, इजरायल की मदद करेगा? ट्रंप अब क्या कर सकते हैं? ट्रंप के पास नाजुक युद्धविराम को बचाने का बहुत कम रास्ते बचे हैं। वो अब बेंजामिन नेतन्याहू पर भारी प्रेशर बना सकते हैं कि वो ईरान के अगले हमलों का जवाब ना दें। लेकिन ऐसा होना नामुमकिन की तरह है। इजरायल पर यमन की तरफ से भी हमले किए गये हैं और इजरायल हिज्बुल्लाह पर हमले जारी रखेगा। इसके अलावा ट्रंप अगर युद्ध में फिर से शामिल होता है तो ईरान के हमले मध्य पूर्व के देशों जैसे सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर पर फिर से शुरू हो जाएंगे। 8 अप्रैल से चल रहे युद्धविराम के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता फिर से हासिल कर ली है। इसीलिए आगे का रास्ता बहुत मुश्किल नजर रहा है कि युद्धविराम जारी रह सके। अभिजात शेखर आजाद

रूस-चीन रक्षा साझेदारी मजबूत, एयर डिफेंस यूनिट विजिट से नई हलचल

मॉस्को रूस और चीन के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है। रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एक निरीक्षण टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले में कई ठिकानों का दौरा किया। इसमें सुदूर-पूर्वी ज्यूइश ऑटोनॉमस रीजन में मौजूद एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यह दौरा यह दौरा दशकों पुराने 'भरोसा बढ़ाने वाले तंत्र' के तहत किया गया। इसी दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन और रूस को कुदरती सहयोगी और पार्टनर बताया और जोर दिया कि उनके बीच बढ़ता सैन्य सहयोग किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने जिला कमांड के प्रेस ऑफिस का हवाला देते हुए बताया कि 2-3 जून को PLA का यह निरीक्षण दौरा चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच हुए समझौतों के तहत एक सामान्य जांच प्रक्रिया थी। सीमावर्ती इलाकों में सैन्य क्षेत्र में भरोसा बढ़ाने पर 1996 का समझौता और सीमावर्ती इलाकों में सैन्य बलों में आपसी कटौती पर 1997 का समझौता उस कूटनीतिक ढांचे का हिस्सा थे, जो बाद में 'शंघाई फाइव' तंत्र और अंततः चीन और रूस के नेतृत्व वाले 'शंघाई सहयोग संगठन' (SCO) ब्लॉक में बदल गया। रूस ने चीनी सेना को मिलिट्री बेस का दौरा क्यों कराया? रूसी पक्ष ने PLA के इस दौरे को इस बात का सबूत बताया कि तीन दशक पहले बनाए गए तंत्र आज भी असरदार और प्रासंगिक हैं। TASS ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "निरीक्षण के दौरान, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पुष्टि की कि रूसी संघ ने अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाया है और चीन के साथ समझौतों के तहत स्थापित निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता की तारीफ की।" चीनी सेना ने रूस की तारीफ की रूसी समाचार वेबसाइट इजवेस्टिया के अनुसार, चीनी टीम का नेतृत्व कर रहे सीनियर कर्नल लियू जिन्सॉन्ग ने कंट्रोल सिस्टम की पारदर्शिता और संगठन व लॉजिस्टिक्स के मामले में मिले सहयोग की तारीफ की। लियू ने कहा, "दोनों पक्षों के रणनीतिक नेतृत्व में… हम आपसी समझ बनाएंगे और दोनों देशों के बीच दोस्ती को और मजबूत करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा, "और खासकर इन पांच देशों के बीच हुए समझौते के दायरे में, हम इस क्षेत्र का विकास करना जारी रखेंगे और अपने आपसी फायदे वाले सहयोग को और मजबूत करेंगे।" रूसी प्रेस रिपोर्टों के अनुसार, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सैन्य जिले में 'इटरनल फ्लेम मेमोरियल कॉम्प्लेक्स' पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। हम स्वाभाविक सहयोगी और साझेदार हैं। हम पड़ोसी हैं। पड़ोसी चुने नहीं जाते। हम बस चीन के साथ काम करते हैं और दोस्त हैं – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के हितों के लिए। रूस ने एयर डिफेंस यूनिट की जानकारी छिपाई लेकिन मीडिया रिपोर्टों में इस दौरे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई, जिसमें शामिल विशिष्ट एयर-डिफेंस यूनिट के बारे में भी कोई ब्योरा नहीं था। 1996 और 1997 के समझौते, चीन और सोवियत संघ के बीच दशकों तक चली सीमा पर तनाव और 1969 में उत्तर-पूर्वी चीन के हेइलोंगजियांग प्रांत में उसुरी नदी के पास हुई सशस्त्र झड़पों के बाद हुए थे। उस समय परमाणु शक्ति संपन्न ये पड़ोसी देश एक-दूसरे को गहरे शक की नजर से देखते थे – यह स्थिति 1990 के दशक की शुरुआत तक बनी रही। रूस-चीन सैन्य सहयोग उच्चतम स्तर पर पिछले दशक में, चीन और रूस ने नियमित संयुक्त अभ्यास, प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक बॉम्बर गश्त, कई क्षेत्रों में नौसैनिक अभ्यास और सेनाओं के बीच लगातार बेहतर होते आदान-प्रदान के जरिए अपने रक्षा सहयोग का विस्तार किया है। पुतिन ने 20 मई को चीन की 25वीं आधिकारिक यात्रा के दौरान बीजिंगमें कहा कि चीन के साथ संबंध "अभूतपूर्व उच्च स्तर" पर पहुंच गए हैं। गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान बोलते हुए, रूसी नेता ने उन सुझावों को खारिज कर दिया कि उन्होंने यूक्रेन युद्ध के बाद चीन के प्रति "कोई यू-टर्न" लिया है। उन्होंने कहा, "हम स्वाभाविक सहयोगी और साझेदार हैं। हम पड़ोसी हैं। पड़ोसी चुने नहीं जाते।" रूस-चीन दोस्ती से भारत को कैसे खतरा? भारत सैन्य साजोसामान के लिए लंबे समय से रूस पर निर्भर है। आज भी भारतीय सेना के लगभग 50% से 90% सैन्य उपकरण और हथियार रूस (या पूर्व सोवियत संघ) से आते हैं। यह रूसी साजोसामान भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना की रीढ़ हैं। एयर डिफेंस के मामले में भी भारत बहुत हद तक रूसी सिस्टमों का इस्तेमाल करता है। इनमें अत्याधुनिक S-400 मिसाइल सिस्टम से लेकर इगला-एस MANPADS, कुब (KUB) और पेचोरा (Pechora) एयर डिफेंस सिस्टम प्रमुख हैं। ऐसे में इन सिस्टमों तक चीन की पहुंच भारत के लिए खतरे की बात है। चीन इस डिफेंस सिस्टम की कमजोरियों का पता लगा सकता है। इसके अलावा चीन के साथ संघर्ष की स्थिति में रूस खुद को तटस्थ बना सकता है, जिससे भारत के लिए जरूरी सैन्य साजोसामान की आपूर्ति में समस्या आ सकती है।  

मॉनसून की दस्तक से पहले मौसम का बदला मिजाज, कई राज्यों में तेज हवाओं की चेतावनी

नई दिल्ली दिनभर भीषण गर्मी के बाद कई दिनों से शाम के समय आंधी-तूफान और बारिश का क्रम जारी है। ये सिलसिला उत्तर भारत के कई राज्यों में देखा जा रहा है। हालांकि, अभी मॉनसून केरल से आगे बढ़कर महाराष्ट्र पहुंचा है। देश की राजधानी दिल्ली तक मॉनसून 25 जून के बाद ही पहुंचेगा और इसके बाद यहां से देश के दूरे इलाकों में जाएगा। इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटे के अंदर 11 राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 80 की स्पीड से हवाएं चल सकती हैं। IMD के मुताबिक केरल के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों में बारिश का अलर्ट है। अगले 2 से 5 दिनों में मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों की तरफ आगे बढ़ सकता है। वहीं 8 से 12 जून के बीच राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ओडिशा समेत कई इलाकों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली-NCR में कल कैसा रहेगा मौसम  दिल्ली-NCR (8 जून से 11 जून) दिल्ली-एनसीआर में भीषण गर्मी से राहत बनी रहेगी। फिलहाल अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। कहीं-कहीं आंधी, गरज-चमक, बारिश तथा तेज सतही हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी। 8 जून को तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। 9 जून, 10 जून और 11 जून को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान क्रमशः 26, 27 और 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। उत्तर प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम यूपी (8 जून से 12 जून): आजमगढ़, मऊ, देवरिया, जौनपुर, वाराणसी, संतरकरीबनगर, मिर्जापुर, प्रयागराज, सोनभद्र, कौशांबी, प्रतापगढ़, अमेठी, अयोध्या, गोंडा समेत पूर्वांचल के कई जिलों में मौसम विभाग ने गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती है। IMD के अनुसार, पूर्वी यूपी में 10-12 जून को बारिश/गरज-चमक की संभावना है। बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम  बिहार (8 जून से 12 जून): सारण, बक्सर, कैमूर, औरंगाबाद, रोहतास, गया, नालंदा, वैशाली, पटना, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय में 8 जून को आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भागलपुर और बांका में भारी बारिश की संभावना है। IMD के मुताबिक, 9-10 जून को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम मध्य प्रदेश (8 जून): विदिशा, रायसेन (भीमबेटका और सांची सहित), नर्मदापुरम (पचमढ़ी), हरदा, खंडवा (ओंकारेश्वर) और शहडोल जिलों में मध्यम स्तर की गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि और 70 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। श्योपुर (कूनो नेशनल पार्क), देवास, सीहोर, मुरैना, राजगढ़, उज्जैन (महाकालेश्वर), शिवपुरी, आगर, शाजापुर, इंदौर, खरगोन, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, भोपाल (बैरागढ़), नरसिंहपुर, सागर, सतना (चित्रकूट), मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों में हल्की गरज-चमक के साथ 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम  राजस्थान (8 जून से 11 जून): कोटपूतली, बहरोड़, बीकानेर, डूंगरगढ़, झालावाड़ में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कुछ भागों में आंधी- बारिश की गतिविधियां अभी एक-दो दिन जारी रहने की संभावना है। इसके बाद भी पूर्वी राजस्थान में छुटपुट स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। आठ जून से आंधी बारिश की गतिविधियों में कमी होने तथा तापमान में 2-3 डिग्री बढ़ोतरी होने का अनुमान है। पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में आठ से 11 जून तक कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम महाराष्ट्र (8 जून से 15 जून): विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी में बारिश का अनुमान है। 9 जून तक इन क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। विभाग ने नागरिकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, टिन शेड, विद्युत ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभों और खुले बिजली के तारों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। केरल में कल कैसा रहेगा मौसम केरल (8 जून से 10 जून): मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। पत्तनमथिट्ठा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, त्रिशूर और पलक्कड़ के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ है। 8 से 10 जून तक केरल में गरज के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। तमिलनाडु में कल कैसा रहेगा मौसम तमिलनाडु (8 जून): इरोड, सलेम, धर्मपुरी, कृष्णागिरी, तिरुपत्तूर, वेल्लोर, रानीपेट, तिरुप्पुर, मदुरै, विरुधुनगर, कन्याकुमारी, तेनकासी और तिरुनेलवेली में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान है। नीलगिरी, थेनी और दिंडीगुल जिलों के साथ-साथ कोयंबटूर जिले के घाट क्षेत्रों में बारिश होगी। गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं की चेतावनी है। आंध्र प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम आंध्र प्रदेश (8 जून से 17 जून): आंध्र प्रदेश में मानसून की शुरुआत अनंतपुर, तिरुपति और चित्तूर क्षेत्र से हुई है और अगले दो से तीन दिनों में इसके राज्य के अन्य हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून के सक्रिय होने से खेती-किसानी को बड़ा लाभ मिलेगा। आने वाले सात दिनों के दौरान रायलसीमा क्षेत्र में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। फिलहाल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है, लेकिन सातवें दिन यानी 13-14 जून के आसपास तटीय आंध्र प्रदेश में भी वर्षा की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

QR कोड स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी, अमरनाथ यात्रा में हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था

श्रीनगर इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. इस बार दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा के बेहद कड़े और आधुनिक इंतजाम किए हैं. अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की जा रही है. इतिहास में पहली बार, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सेवा देने वाले सभी टट्टू वालों (घोड़े वाले), कुलियों, दुकानदारों और टैक्सी ड्राइवरों को एक विशेष 'पहचान' ऐप (Pehchan App) से जोड़ा गया है. 'पहचान' ऐप के तहत, पुलिस वेरिफिकेशन के बाद इन सभी सेवा देने वालों को एक विशेष क्यूआर कोड जारी किया जा रहा है. यात्रा पर आने वाला कोई भी श्रद्धालु अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करके उस व्यक्ति की सही पहचान कर सकता है. क्या है 'पहचान' ऐप और कैसे करेगा काम? अनंतनाग के SSP आमोद अशोक नागपुरे ने बताया कि इस साल की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव 'पहचान' ऐप की शुरुआत है. उन्होंने कहा, ये एक बहुत एडवांस और अनोखी पहल है. इसके जरिए यात्रा मार्ग पर काम करने वाले सभी सेवा प्रदाताओं- जैसे घोड़े वाले, पिट्ठू (कुली) और टैक्सी ड्राइवरों का ऐप आधारित वेरिफिकेशन किया जा रहा है. एसएसपी ने आगे कहा, जांच पूरी होने के बाद पुलिस की तरफ से उन्हें एक खास क्यूआर कोड दिया जाता है. इस क्यूआर कोड की सबसे बड़ी खासियत ये है कि कोई भी पर्यटक, श्रद्धालु या सुरक्षाकर्मी अपने साधारण मोबाइल फोन से इसे स्कैन कर सकता है. स्कैन करते ही उस सेवा प्रदाता की पूरी क्रेडेंशियल सामने आ जाएगी. इससे यात्री पूरी तरह आश्वस्त हो सकेंगे कि उनके साथ मौजूद व्यक्ति पुलिस की ओर से वेरिफाइड है. तैनात होंगी केंद्रीय बलों की 140 कंपनियां SSP आमोद अशोक नागपुरे ने सुरक्षा तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस साल तीर्थयात्रा की सुरक्षा के लिए अकेले पूरे जिले में CAPF की 140 कंपनियां तैनात की जा रही हैं. इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कई नए और कड़े कदम भी उठाए गए हैं. श्रद्धालुओं को मिलेगा डर से छुटकारा जम्मू-कश्मीर पुलिस के इस हाई-टेक कदम से अमरनाथ यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी. पहले यात्रा के दौरान अनजान सेवा प्रदाताओं पर भरोसा करना यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती होता था. लेकिन अब 'पहचान' ऐप और क्यूआर कोड तकनीक के आने से किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा. स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि इस तकनीक की मदद से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं के बीच भरोसा भी बढ़ेगा. फिलहाल, प्रशासन यात्रा शुरू होने से पहले सभी दुकानदारों और मजदूरों का वेरिफिकेशन काम तेजी से पूरा करने में जुटा है.

अमेरिका-इजरायल रिश्तों में दरार? ईरान वार्ता को लेकर खुफिया विवाद तेज

नई दिल्ली ईरान पर साथ मिलकर हमला करने वाले अमेरिका और इजरायल अब आपस में ही उलझते हुए नजर आ रहे हैं। यह पूरा मामला अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट में इस बात के संकेत दिए हैं कि इजरायल ने ईरान और अमेरिका की बातचीत में हिस्सा ले रहे अधिकारियों की निगरानी करनी शुरू कर दी है। बता दें, इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां आपस में बेहद दोस्ताना रवैया रखती हैं, लेकिन इसके बाद भी ईरान के मुद्दे पर दोनों देशों की सरकार की राय अलग-अलग होने की वजह से परेशानी बढ़ गई है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की खुफिया एजेंसी, ईरान के साथ जारी बातचीत की स्थिति को समझने के लिए अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी करने की कोशिश कर रहा है। मामले से परिचित अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इजरायली जासूसी एजेंसी ने उन लोगों पर ध्यान केंद्रित किया होगा, जो ईरान के साथ शांति वार्ता में प्रमुख रूप से भूमिका निभा रहे हैं। इसमें सबसे पहले ट्रंप के प्रमुख वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के अधिकारी एल्ब्रिुज ए कोल्बी, माइकल पी. डिमिनो शामलि हो सकते हैं गौरतलब है कि आपस में खुफिया जानकारी साझा करने वाले यह दोनों देश इस बात को भली भांति जानते कि वह एक-दूसरे की जासूसी करते हैं। लेकिन ईरान का मुद्दा अलग है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान के मुद्दे पर जानकारी निकालने के लिए इजरायली जासूस जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका की रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल में तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके मोबाइल फोन में निगरानी करने वाला साफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया है। इस खबर के बाहर आते ही अमेरिका ने अपने सभी अधिकारियों के कम्युनिकेशन डिवाइसेस की सुरक्षा कड़ी कर दी। अमेरिका की नहीं, ट्रंप की नस पकड़ने की कोशिश में इजरायल अमेरिका और इजरायल आपस में ज्यादातर खुफिया जानकारी साझा करते हैं। दोनों देश साथ में कई युद्ध भी लड़ चुके हैं। ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल की दिलचस्पी अमेरिका की रणनीति या अधिकारियों की जासूसी में नहीं हैं। इजरायल, इस समय राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से दिए जा रहे संकेतों को समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर ट्रंप ईरान के साथ वार्ता में किस हद तक जा सकते हैं। हालांकि, खुफिया आधार पर सामने आई इस रिपोर्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यलय ने खारिज किया है। वाइट हाउस की तरफ से बताया गया कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी है। इजरायल अमेरिकी सरकारी अधिकारियों या संस्थानों की जासूसी नहीं करता है। उन्होंने आगे कहा, “इजरायल की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिशें उसके दुश्मनों पर केंद्रित हैं न कि उसके सहयोगियों पर। इसके विपरीत कोई भी दावा या तो गलत जानकारी पर आधारित है या राजनीतिक रूप से प्रेरित है।” वहीं इजरायल की तरफ से भी इन तमाम रिपोर्ट्स को खारिज किया गया है। ईरान पर अलग-अलग क्यों दिख रहे इजरायल और अमेरिका 28 फरवरी को ईरान पर साथ मिलकर हमला करने वाले इजरायल और अमेरिका ने इस युद्ध को कुछ दिनों का सोचा था। लेकिन बाद में हालात ऐसे बिगड़े कि ट्रंप को सीजफायर करना पड़ा। इसी सीजफायर के बाद इजरायल और अमेरिका के बीच में हालात बिगड़ने लगे। अमेरिका चाहता है कि शांति वार्ता हो और ईरान के साथ दोबारा युद्ध शुरू न हो, जबकि गाजा में लंबे युद्ध लड़ चुका इजरायल लगातार ईरान पर हमला करने के प्रयास में है। इतना ही नहीं अमेरिका को सीधे तौर पर हिज्बुल्लाह से कोई परेशानी नहीं। ऐसे में ट्रंप ने नहीं चाहते कि इजरायल लेबनान पर हमला करे। लेकिन नेतन्याहू साफ तौर पर कह चुके हैं कि अगर लेबनान में हिज्बुल्लाह उसे थोड़ा सा भी खतरा समझ आता है, तो वह हमला करेंगे। अभी हाल में ही इसी मुद्दे को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू की तीखी बहस भी हो गई थी, जिसमें ट्रंप ने बीबी को अपशब्द तक कह दिए थे।