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तेल के दामों में फिर बढ़ोतरी, डीजल ₹25 और पेट्रोल ₹7.4 महंगा, नायरा के बाद इस कंपनी ने भी बढ़ाए रेट

नई दिल्‍ली  नायरा के बाद निजी क्षेत्र की कंपनी शेल इंडिया (Shell India) ने भी पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए उछाल के कारण तेल के दाम बढ़ाए गए हैं. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेल ने डीजल की कीमतों में सीधे ₹25.01 प्रति लीटर की वृद्धि की है. पेट्रोल की कीमतों में ₹7.41 प्रति लीटर की बढोतरी की गई है. इस वृद्धि के बाद सामान्य डीजल की कीमत शेल इंडिया के पंपों पर ₹123.52 और प्रीमियम वेरिएंट की कीमत ₹133.52 प्रति लीटर तक पहुंच गई है।  वहीं, बेंगलुरु में अब सामान्य पेट्रोल ₹119.85 और पावर वेरिएंट ₹129.85 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है. स्थानीय करों (VAT) और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग राज्यों और शहरों में इन कीमतों में मामूली अंतर हो सकता है, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में शेल के आउटलेट्स पर अब ग्राहकों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।  सरकारी कंपनियों ने नहीं बढ़ाए दाम जहां सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकार के हस्तक्षेप के कारण खुदरा कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं, वहीं निजी कंपनियों को ऐसा करने पर सरकार से कोई वित्तीय मुआवजा या सब्सिडी नहीं मिलती. घाटे से बचने के लिए निजी कंपनियों के पास कीमतों को बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।  कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे मुख्य कारण कच्‍चे तेल के बढ़े दाम हैं. फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60 फीसदी तक का उछाल आया है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 फीसदी आयात करता है। 

Gold-Silver Prices Crash: चांदी 13,000 रुपये सस्ती, सोने में भी भारी गिरावट, जानें 3 मुख्य कारण

इंदौर  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के संबोधन के बाद सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. ट्रंप के बयान से यह क्लियर होता हुआ दिख रहा है कि दो से तीन हफ्तों में कुछ बड़ा एक्‍शन हो सकता है. वहीं ट्रंप ने होर्मुज को लेकर कहा कि हम उस रास्‍ते से तेल लेकर नहीं आते हैं, जो देश उस रास्‍ते से तेल लेकर गुजरते हैं, वे चिंता करें और आगे आएं. अमेरिका मदद कर सकता है।  इस बयान के बाद डॉलर में काफी मजबूती देखने को मिली, जिस कारण ग्‍लोबल से लेकर MCX पर सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट आई. 5 मई वायदा के लिए चांदी का भाव करीब 13,000 रुपये टूटकर 2,29,888 रुपये प्रति किलो पर आ गया।  इसी तरह, सोने के भाव में भी भारी गिरावट रही. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने का भाव 2200 रुपये टूटकर 1,51,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।  इंटरनेशनल मार्केट में भी बड़ी गिरावट ग्‍लोबल मार्केट में भी सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है. इंटरनेशनल मार्केट में सोने का भाव 2.15 फीसदी टूटकर 4,710.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गए. इसकी के साथ चांदी के भाव में भी तेज गिरावट आई और यह 5.20 फीसदी गिरकर 72.108  डॉलर प्रति औंस पर आ गया।  सोने-चांदी के गिरावट के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट आई है. सेंसेक्‍स में 1500 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 420 अंको से ज्‍यादा टूटा है।  क्‍यों आई सोने-चांदी के भाव में इतनी बड़ी गिरावट     ट्रंप के संबोधन से बाजार का मूड बिगड़ा है. ट्रंप ने कहा है कि हम 2 से 3 हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करेंगे. इस बयान के बाद जंग के हालात और बिगड़ते हुए दिख रहे हैं, जिस कारण सोने-चांदी के भाव में भी गिरावट देखी जा रही है।        कच्‍चे तेल के दाम में भी भारी तेजी आई है. कल की तुलना में कच्‍चे तेल का भाव 8 डॉलर प्रति बैरल से ज्‍यादा चढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है।      डॉलर इंडेक्‍स में तेजी देखी जा रही है, जो अब करीब 100 के करीब पहुंच रहा है. वहीं रुपया डॉलर की तुलना में 94 लेवल के करीब है. डॉलर की मजबूती से सोने-चांदी के भाव में भारी गिरावट है।    

ईरान युद्ध का असर: शोरूम में धूल खा रही रोल्स-रॉयस से लेकर फेरारी तक लग्जरी कारें

 नई दिल्ली ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बीच पश्चिमी एशिया इस समय बारूद की गंध के साये में सांस ले रहा है. आसमान तक उठती आग की लपटें और धुएं के गुबार सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं हैं, उनका असर सीधे बाजारों और लोगों के भरोसे पर दिख रहा है. जिन सड़कों पर कभी दौलत का रौब और लग्जरी कारों की चमक नजर आती थी, वहां अब ठहराव और खामोशी है. करोड़ों की गाड़ियां बेचने वाले शोरूमों में आज वीरानी छाई हुई है. कारोबारी हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती चिंता गिन रहे हैं. यह जंग सिर्फ सरहदों की नहीं है, यह उस चमक-दमक पर भी वार है जिसने मिडिल ईस्ट को दुनिया का सबसे मुनाफे वाला बाजार बना दिया था।  दुनिया की सबसे महंगी और शाही कार बनाने वाली कंपनियों के लिए पश्चिमी एशिया हमेशा से सोने की खान रहा है. लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. जंग के चलते यहां का लग्जरी कार बाजार हिल गया है और करोड़ों रुपये की कारें भी शोरूम में खड़ी रह जा रही हैं. हाल ही में रोल्स-रॉयस ने दुबई के एक ग्राहक के लिए बेहद शानदार स्पेशल “फैंटम अरबेस्क” मॉडल पेश किया था, लेकिन इसके कुछ ही समय बाद हालात ऐसे बदले कि पूरी इंडस्ट्री चिंता में आ गई है।  शाही कारों में खास डिजाइन का जलवा रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रोल्स-रॉयस के इस स्पेशल मॉडल में अरब आर्किटेक्चर से इंस्पायर्ड लेजर-एंग्रेव्ड बोनट और ख़ास वुडेन मेड (लकड़ी से बना हुआ) इंटीरियर दिया गया था. यह कार खास तौर पर अमीर ग्राहकों के लिए बनाई गई थी. आम तौर पर रोल्स-रॉयस फैंटम की कीमत करीब 5.7 लाख डॉलर (लगभग 5.36 करोड़ रुपये) से शुरू होती है, लेकिन खास कस्टमाइजेशन के बाद इसकी कीमत दोगुनी या तिगुनी हो जाती है।  मिडिल ईस्ट का बाजार कुल बिक्री का 10% से भी कम होता है, लेकिन मुनाफे के मामले में यह मार्केट बड़ा कॉन्ट्रिब्यूशन देता है. ऐसे में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे जंग के बाद बाजार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. जंग शुरू होने के बाद कई लग्जरी कार शोरूम अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. फेरारी और मासेराती जैसी कंपनियों ने कुछ समय के लिए डिलीवरी भी रोक दी है।  30% तक गिरा कारोबार रिपोर्ट के अनुसार, दुबई की मशहूर लग्जरी कार डीलरशिप फर्स्ट मोटर्स का कहना है कि, जंग के बाद कारोबार में करीब 30% की गिरावट आई है. ये डीलरशिप दुबई में फेरारी और बुगाटी की लग्ज़री स्पोर्ट कारें बेचता है. जब युद्ध शुरू हुआ तो शोरूम को बंद करना पड़ा था. हालांकि कुछ दिनों के बाद शोरूम को फिर से खोला गया लेकिन लोगों की आवाजाही बेहद कम है और बमुश्किल कारोबार करने की कोशिश की जा रही है. डीलरशिप के डायरेक्टर क्रीस बुल ने मीडिया को बताया कि, कुछ ग्राहक तो 70 लाख डॉलर की कार को दूसरे देश भेजने के लिए 30 हजार यूरो तक खर्च करने को तैयार हैं।  लैंबॉर्गिनी, बेंटले, फेरारी, जगुआर लैंड रोवर और पोर्श जैसी कंपनियां इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. उनका कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा. मिडिल ईस्ट में स्पेशल एडिशन और कस्टम कारों पर कंपनियां काफी ज्यादा कमाई करती हैं, जो अब लगभग रुक गई है।  कंपनियों के लिए क्यों जरूरी ये बाजार पश्चिमी एशिया की खास बात यह रही है कि यहां ग्राहक लिमिटेड एडिशन और खास डिजाइन वाली कारों पर भारी रकम खर्च करते हैं. इसके अलावा ग्राहक गाड़ियों में स्पेसिफिक कस्टमाइजेशन भी कराते हैं, जिनके बाद कारों की कीमत काफी बढ़ जाती है. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि, 2024 में रेंज रोवर स्पोर्ट के “Sadaf” एडिशन की सिर्फ एक एसयूवी 3.3 लाख पाउंड (लगभग 4.09 करोड़ रुपये) में बेची गई थी. इस दौरान कंपनी ने इसके कुल 20 यूनिट बेचे थे. जो इसकी रेगुलर प्राइसिंग से तकरीबन 3 गुना ज्यादा थी. लेकिन अब ऐसे ऑर्डर लगभग बंद हो चुके हैं।  पहले ही अमेरिका में टैरिफ और चीन-यूरोप में गिरती मांग से जूझ रही लग्जरी कार कंपनियों के लिए मिडिल ईस्ट आखिरी बाजार था. अब वहां भी हालात खराब हो रहे हैं. कुछ कंपनियां तो प्रोडक्शन घटाने तक पर विचार कर रही हैं. ऑटो इंडस्ट्री के दिग्गजों का कहना है कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं. उनके मुताबिक, खासकर प्रीमियम और लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियों के लिए यह स्थिति किसी बड़े संकट से कम नहीं है. अगर जल्द शांति नहीं बनी, तो आने वाले समय में इसका असर और गहरा हो सकता है। 

MG की नई पावरफुल SUV, Tata और Mahindra को देगी कड़ी टक्कर

 नई दिल्ली जेएसडब्लू-एमजी मोटर साल 2026 में कई लॉन्चिंग करने वाले हैं. कंपनी भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक व्हीकल, इंटरनल कंबस्चन इंजन और प्लग-इन हाइब्रिड कार्स को लॉन्च कर सकती है. इसमें से एक वूलिंग स्टारलाइट 560 (Wuling Starlight 560) हो सकती है. इस कार का भारत में पेटेंट फाइल हुआ है।  हाल के दिनों में इसे भारत में टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है. ये कार एमजी की ब्रांडिंग के साथ आएगी. पेटेंट फाइल होने से पहले ही इसे कई बार टेस्ट करते हुए पाया गया है. ये दोनों ही पॉइंट्स इसकी भारत में एंट्री का साफ संकेत दे रहे हैं. ध्यान रखें कि एमजी और वूलिंग दोनों की ब्रांड का मालिकाना अधिकार चीन की SAIC मोटर के पास है।  एक्सटीरियर और इंटीरियर  Starlight 560 चार मीटर से लंबी कार है. इसकी लंबाई 4745 एमएम, चौड़ाई 1850 एमएम और हाइट 1750 एमएम है. कार का व्हीलबेस 2810 एमएम का है. एक्सटीरियर की बात करें, तो इसमें फुल एलईडी लाइटिंग का सेटअप मिलता है. स्टारलाइट 560 में रूफ रेल, स्किड प्लेट्स, 18-इंच के डुअल टोन एलॉय और स्प्लिट टेल लैम्प मिलता है।  वहीं इंटीरियर की बात करें, तो इसमें टू-स्पोक स्टीयरिंग व्हील, 3.5 इंच का इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले और 12.8 इंच का टच स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है, जो वायरलेस कनेक्टिविटी के साथ आता है. कैबिन में लेदर अपहोल्स्ट्री मिलेगी. भारतीय बाजार में कंपनी इसे कुछ बदलाव के साथ लॉन्च कर सकती है।  इंजन और पावर  इस SUV में मल्टीपल पावरट्रेन का विकल्प मिलता है. इसमें 1.5 लीटर का टर्बो पेट्रोल इंजन आता है, जो 174 बीएचपी की पावर ऑफर करता है, जो मैन्युअल या सीवीटी गियरबॉक्स के साथ आएगा. मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ ये इंजन 260 एनएम का और ऑटोमेटिक के साथ 290 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  इसके अलावा ये एसयूवी 1.5 लीटर के इंजन के साथ हाइब्रिड में भी आती है. कार में प्लग-इन हाइब्रिड सिस्टम मिलता है, जो 194 बीएचपी की पावर और 230 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. इसका ऑल इलेक्ट्रिक वर्जन भी आता है, जो 134 बीएचपी की पावर और 200 एनएम का टॉर्क ऑफर करता है।  भारत में इस कार का सीधा मुकाबला टाटा हैरियर और महिंद्रा एक्सयूवी 7एक्स0 से होगा. हालांकि, इसका कंपटीशन पूरी तरह से निर्भर करता है कि ये कार किस पावरट्रेन के साथ आती है. ज्यादा संभावना है कि कंपनी इसे प्लगइन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वर्जन में लॉन्च कर सकती है। 

तेल-गैस की तलाश में मेगा गेम शुरू, कीमतों में गिरावट और निवेश का मौका

नई दिल्ली  भारत सरकार ने तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए देश के 2.62 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोल दिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. सरकार का मकसद साफ है कि आने वाले वर्षों में देश को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाया जाए और घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जाए।  क्या है पूरा फैसला और कितना बड़ा है इसका दायरा: सरकार ने कुल 2,62,817 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोला है, जिसमें जमीन के साथ साथ समुद्री क्षेत्र भी शामिल हैं. यह कोई छोटा कदम नहीं है, बल्कि भारत के कुल सेडिमेंटरी बेसिन का बड़ा हिस्सा अब कंपनियों के लिए उपलब्ध हो गया है. इसका मतलब है कि अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा इलाकों में तेल और गैस की तलाश की जा सकेगी।  OALP मॉडल क्या है और कंपनियों को कैसे फायदा मिलेगा: यह पूरा प्रोसेस ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम यानी OALP के तहत किया जा रहा है. इस मॉडल की खास बात यह है कि इसमें सरकार खुद ब्लॉक ऑफर करने के बजाय कंपनियों को यह आजादी देती है कि वे अपनी पसंद के इलाकों को पहचान कर वहां के लिए बोली लगा सकें. इससे कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ती है और एक्सप्लोरेशन ज्यादा टारगेटेड तरीके से हो पाता है।  किन इलाकों में होगा एक्सप्लोरेशन और क्या है संभावना: इस फैसले के तहत 26 सेडिमेंटरी बेसिन के ब्लॉक्स को शामिल किया गया है. ये वही इलाके होते हैं जहां भूगर्भीय संरचना ऐसी होती है कि तेल और गैस मिलने की संभावना ज्यादा रहती है. हालांकि संभावना होना और असल में रिजर्व मिलना दो अलग बातें हैं, इसलिए हर ब्लॉक में सफलता की गारंटी नहीं होती। समुद्र पर बढ़ता फोकस और समुद्र मंथन पहल: सरकार इस बार खासतौर पर डीप सी एक्सप्लोरेशन पर जोर दे रही है, जो प्रधानमंत्री के समुद्र मंथन इनिशिएटिव का हिस्सा है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर जैसे इलाकों में बड़ी संभावनाएं मानी जाती हैं, लेकिन यहां काम करना तकनीकी रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण और महंगा होता है।  विदेशी और निजी कंपनियों के लिए बड़ा मौका: इस कदम के जरिए सरकार ने साफ तौर पर ग्लोबल ऑयल और गैस कंपनियों को भारत में निवेश के लिए न्योता दिया है. रिलायंस, ओएनजीसी के अलावा बीपी, शेल, टोटल और एक्सॉन जैसी विदेशी कंपनियां भी इसमें दिलचस्पी दिखा सकती हैं. इससे न सिर्फ निवेश आएगा बल्कि नई तकनीक और विशेषज्ञता भी देश में आएगी।  भारत की आयात निर्भरता कम करने की कोशिश: भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ डालता है. अगर घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ता है, तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक कीमतों में उतार चढ़ाव का असर भी कम होगा. यही इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी रणनीतिक सोच है।  चुनौतियां भी कम नहीं हैं, समय और लागत दोनों भारी: तेल और गैस की खोज कोई आसान या जल्दी होने वाली प्रक्रिया नहीं है. इसमें कई साल लग जाते हैं और भारी निवेश करना पड़ता है. कई बार कंपनियों को सालों की मेहनत के बाद भी कुछ नहीं मिलता, इसलिए जोखिम भी काफी ज्यादा होता है।  कब दिखेगा असर और क्या है आगे की तस्वीर: इस फैसले का असर तुरंत नहीं दिखेगा क्योंकि एक्सप्लोरेशन से लेकर प्रोडक्शन तक पहुंचने में 5 से 10 साल तक का समय लग सकता है. लेकिन अगर कुछ बड़े रिजर्व मिलते हैं, तो आने वाले समय में भारत की ऊर्जा स्थिति मजबूत हो सकती है और देश को आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।   

सोने की कीमत फिर पहुंची 1 लाख 50 हजार के पास, चांदी भी हुई 9 हजार रुपये महंगी, देखें आज का रेट

इंदौर  भारतीय सर्राफा बाजार में महीने के पहले दिन आज, 01 अप्रैल 2026 को सोना-चांदी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है. 24 कैरेट सोना एक झटके में ही 2836 रुपये महंगा हुआ है तो वहीं, चांदी के भाव में 9348 रुपये प्रति किलो का उछाल आया है।  इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट ibjarates.com पर 01 अप्रैल 2026 की सुबह जारी रेट्स के मुताबिक, 22 कैरेट सोने का रेट 137005 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जो बीते कारोबारी दिन यानी 30 मार्च की शाम को 134407 रुपये था।  चांदी का रेट क्या है? चांदी की कीमत में भी भारी उछाल देखने को मिला है.  चांदी का रेट बढ़ोतरी के साथ आज 239483 रुपये किलो पहुंच गया है।  बता दें कि ibja की ओर से केंद्रीय सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों के अलावा शनिवार और रविवार को रेट जारी नहीं किए जाते हैं. बीते दिन यानी 31 मार्च को महावीर जयंती के अवकाश के कारण सर्राफा बाजार के रेट्स जारी नहीं किए गए थे. आइए जानते हैं बीते कारोबारी दिन की तुलना में आज सोना-चांदी कितने रुपये हुआ महंगा?   शुद्धता सोमवार, 30 मार्च शाम के रेट बुधवार, 1 अप्रैल सुबह की कीमतें कितने बदले रेट सोना (प्रति 10 ग्राम) 999     146733 149569 2836 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 995      146145 148970 2825 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 916      134407 137005  2598 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 750      110050 112177 2127 रुपये महंगा सोना (प्रति 10 ग्राम) 585      85839 87498 1659 रुपये महंगा चांदी (प्रति 10 ग्राम) 999      230135 239483 9348 रुपये महंगी बता दें कि इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (Indian Bullion Jewelers Association) की ओर से जारी कीमतों से अलग-अलग प्योरिटी के सोने के स्टैंडर्ड भाव की जानकारी मिलती है. इसमें टैक्स, मेकिंग चार्ज एवं जीएसटी शामिल नहीं होता है.

प्रीमियम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई का असर, घर से निकलने से पहले चेक करें

नई दिल्ली प्रीमियम पेट्रोल के दाम में आज बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर XP100 पेट्रोल 149 से 160 रुपये प्रति लीटर और एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल 91.49 से 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गया है। दूसरी ओर कच्चे तेल में उछाल के बावजूद आज भी IOCL, HPCL, भारत पेट्रोलियम समेत ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सामान्य पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ाए हैं। जबकि, कमर्शियल सिलेंडर के दाम में आज भारी बढ़ोतरी की गई है। 1 अप्रैल की सुबह छह बजे जारी रेट के मुताबिक दिल्ली के इंडियन ऑयल के पंपों पर साधारण पेट्रोल की रिटेल कीमत ₹94.77 और डीजल 87.67 रुपये लीटर है। भारत में सबसे सस्ता तेल पोर्ट ब्लेयर में है। यहां पेट्रोल ₹82.46 प्रति लीटर है तो डीजल ₹78.05 प्रति लीटर। पेट्रोल पर कितना टैक्स दिल्ली में 1 अप्रैल 2026 से सामान्य पेट्रोल की कीमत तय करने में कई हिस्से शामिल हैं। सबसे पहले डीलर्स को बिना वैट के जो बेस प्राइस दिया जाता है। आज 1 अप्रैल को इंडियन ऑयल द्वारा जारी डेटा के मुताबिक यह ₹74.97 प्रति लीटर है। इसके ऊपर औसतन ₹4.40 प्रति लीटर डीलर कमीशन जोड़ा गया है। इसके बाद वैट (जिसमें डीलर कमीशन पर लगने वाला टैक्स भी शामिल है) ₹15.40 प्रति लीटर लगाया गया है। इन सभी को मिलाकर दिल्ली में आज 1 अप्रैल को पेट्रोल की खुदरा कीमत करीब ₹94.77 प्रति लीटर बैठती है। डीजल की कीमत का पूरा हिसाब सामान्य डीजल की कीमत भी इसी तरह तय होती है, जिसमें सबसे पहले डीलर्स का कमीशन, वैट आदि जुड़े होते हैं। आज जारी प्राइस बिल्डअप के मुताबिक दिल्ली में एक लीटर डीजल की कीमत ₹87.67 है। इसका बेस प्राइस बिना वैट के ₹71.81 प्रति लीटर है। इसके बाद औसतन ₹3.03 प्रति लीटर डीलर कमीशन और फिर वैट (जिसमें कमीशन पर टैक्स भी शामिल है) ₹12.83 प्रति लीटर शामिल है। आज पश्चिम बंगाल के शहरों में पेट्रोल के दाम कोलकाता में ₹ 104.99, अलीपुर में पेट्रोल ₹ 104.99 प्रति लीटर, बहरामपुर में ₹ 106.12, बांकुड़ा में ₹ 105.19, बारासात में ₹ 105.24, वर्धमान में ₹ 105.33, कूचबिहार में ₹ 106.14, हुगली में ₹ 105.52, हावड़ा में ₹ 104.99, कृष्णानगर में ₹ 106.07, मेदिनीपुर में ₹ 105.37, पुरुलिया में ₹ 106.05, रायगंज में ₹ 105.36, सूरी में ₹ 105.43 और तामलुक में ₹ 104.61 प्रति लीटर है। कच्चे तेल का क्या है हाल अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के बीच कच्चे तेल के रेट में उछाल है। ब्रेंट क्रूड 1.71 डॉलर उछलकर 105.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। जबकि, WTI क्रूड 1.44 डॉलर उछलकर 102.82 डॉलर प्रति बैरल पर है। एक अन्य खबर की बात करें तो होर्मूज स्ट्रेट के बंद होने से अमेरिका में औसत गैस की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन के पार चली गईं।

शेयर बाजार में जोरदार शुरुआत, सेंसेक्स 73,600 के करीब और निफ्टी 500 अंक उछला

मुंबई  ईरान और इजराइल युद्ध के चलते पिछले एक महीने से शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है. आज 1 अप्रैल को पॉजिटिव शुरुआत हुई है. सेंसेक्स निफ्टी 2 फीसदी के उछाल के साथ खुला. इससे पहले ही गिफ्ट निफ्टी इंडेक्स 450 अंक की बढ़त के साथ 22854 के करीब करते हुए नजर आया था. एशियाई बाजारों में भी बढ़त से कारोबार होते हुए नजर आया. KOPSI इंडेक्स 6 फीसदी उछलकर कारोबार करते हुए नजर आया. निक्कई में 3.91 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।  शेयर बाजार में तेजी जारी शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है. सेंसेक्स 1,879.76 अंक यानी 2.61% बढ़कर 73,827.31 पर पहुंच गया है. वहीं निफ्टी 570.25 अंक यानी 2.55% की तेजी के साथ 22,901.65 पर ट्रेड कर रहा है. बाजार में चौतरफा खरीदारी दिख रही है. करीब 3,351 शेयर बढ़े हैं, जबकि 268 शेयर गिरे हैं और 90 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।  चांदी के रेट में गिरावट एमसीएक्स पर सोने के भाव में 1.73 फीसदी की बढ़त देखी जा रही है. वहीं, चांदी के रेट में गिरावट देखने को मिल रही है।  सभी सेक्टोरल इंडेक्स में तेजी सभी सेक्टर्स में खरीदारी देखने को मिल रही है. मेटल, ऑटो, आईटी, मीडिया में 3 फीसदी से ज्यादा तेजी देखने को मिल रही है।  Escorts Kubota Limited की सेल्स में बढ़त Escorts Kubota Limited के एग्री मशीनरी बिजनेस ने मार्च 2026 में 12,119 ट्रैक्टर सेल किए हैं. यह पिछले साल मार्च 2025 के 11,374 ट्रैक्टरों के मुकाबले 6.6% की बढ़त है. घरेलू बाजार में कंपनी की बिक्री और बेहतर रही. मार्च 2026 में 11,582 ट्रैक्टर बिके, जो मार्च 2025 के 10,775 ट्रैक्टरों के मुकाबले 7.5% ज्यादा है।  IndiGo को मिला नया CEO InterGlobe Aviation ने विलियम वॉल्श को नया CEO नियुक्त किया है. वॉल्श फिलहाल International Air Transport Association (IATA) से जुड़े हुए हैं. उनका कार्यकाल वहां 31 जुलाई 2026 को खत्म होगा और इसके बाद वे 3 अगस्त 2026 तक कंपनी जॉइन कर सकते हैं।   

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल को पार, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

मुंबई  ब्रेंट क्रूड की कीमत आज 30 मार्च 2026 को 116.4 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. ये पिछले सेशन से 3.41% बढ़ गई है. WTI क्रूड भी 103.1 डॉलर पर पहुंच गया है. इस महीने ब्रेंट में 59% की तेज उछाल आया है, जो 1990 के गल्फ वॉर के बाद सबसे तेज मंथली उछाल है. ईरान युद्ध में हूती विद्रोहियों के शामिल होने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरे और अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में सैनिक बढ़ाने से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है।  भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर बड़ा खतरा बन गया है. ब्रेंट क्रूड विश्व का सबसे मेन ऑयल बेंचमार्क है, जिसकी कीमत पर दुनिया भर के तेल के दाम निर्भर करते हैं।  क्यों ब्रेंट क्रूड के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल अहम लेवल है? जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पार करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘मिडफ्लाइट टर्बुलेंस’ जैसा होता है. सामान्य व्यापार ठप पड़ जाता है और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो बड़ा नुकसान हो सकता है. इस बार स्थिति पहले से अलग है. मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय ब्रेंट 117.2 डॉलर था और डॉलर 76.24 रुपये पर था, तो एक बैरल तेल की कीमत भारतीय रुपए में 8,935 रुपये थी. मार्च 2026 में ब्रेंट 118.4 डॉलर पर था लेकिन डॉलर 93.35 रुपये पर पहुंच गया, जिससे एक बैरल तेल 11,052 रुपये का हो गया, यानी 23.6% महंगा. तेल डॉलर में खरीदा जाता है, इसलिए रुपए की कमजोरी भारत को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए यह कीमत सीधे इंपोर्ट बिल बढ़ाती है. 100 डॉलर तेल दुनियाभर में महंगाई को कैसे प्रभावित करता है? जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पार करता है तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ जाती है. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत बढ़ जाती है. इससे हर चीज का दाम ऊपर जाता है – खाना, सफर और सामान. कई देशों में मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) 4-5% या उससे ज्यादा पहुंच सकती है।  भारत में भी यही असर पड़ता है. अगर तेल की औसत कीमत 100 डॉलर पर बनी रही तो GDP ग्रोथ 6% से नीचे आ सकती है और महंगाई बढ़ सकती है. सरकार को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करनी पड़ सकती है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि 100 डॉलर तेल भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को 1.9-2.2% तक बढ़ा सकता है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो फैक्टरियां प्रभावित होंगी, रोजगार पर असर पड़ेगा और आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा।  ब्रेंट क्रूड की कीमत भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों को कैसे प्रभावित कर सकती है? भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रूड की कीमत, डॉलर की दर, रिफाइनरी मार्जिन और सरकार की ड्यूटी पर निर्भर करती हैं. 100 डॉलर से ऊपर क्रूड होने पर रिफाइनरी को कच्चा तेल महंगा पड़ता है, जिसका असर अंत में पेट्रोल पंप पर पड़ता है।  पिछले सालों में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखीं, जिससे जब क्रूड सस्ता था तो फायदा हुआ, लेकिन अब महंगा होने पर नुकसान हो रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें क्रूड बढ़ने के अनुपात में नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पूर्ण रूप से महंगाई से बचना मुश्किल है. अगर क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिका रहा तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं या सरकार को ड्यूटी काटनी पड़ सकती है, जिससे राजस्व कम होगा. भारत सरकार के पास 60 दिनों का तेल स्टॉक है, इसलिए तुरंत कमी नहीं होगी. लेकिन लंबे समय तक युद्ध चला तो आयात बिल 20-25 बिलियन डॉलर अतिरिक्त बढ़ सकता है. इससे रुपया और कमजोर हो सकता है और महंगाई बढ़ेगी।  इस बार 100 डॉलर तेल पहले से ज्यादा दर्द दे रहा है क्योंकि रुपया कमजोर है और तेल डॉलर में महंगा पड़ रहा है. आम लोगों को पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों पर असर दिखेगा. सरकार को सतर्क रहना होगा. ड्यूटी में बदलाव, स्टॉक मैनेजमेंट और ऑप्शन ऊर्जा पर जोर देकर इस चुनौती से निपटना होगा. अगर युद्ध जल्दी थमा तो राहत मिल सकती है, वरना अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। 

Apple की योजना: इस साल लॉन्च होंगे 11 प्रोडक्ट, iPhone 18 Pro सहित कई नामी डिवाइस

नई दिल्ली  अमेरिकी कंपनी ऐपल ने साल 2026 के लिए बड़ी तैयारी करके रखी है. कंपनी इस साल 11 डिवाइस को लॉन्च करने जा रही है, जिसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से मिली है. इसमें iPhone 18 Pro, iPad 12 समेत कई नाम शामिल हैं।  साल 2026 के खत्म होने से पहले कंपनी टोटल 11 प्रोडक्ट को अनवील करेगी, जिसमें न्यू आईफोन, आईपैड, मैक और ऐपल वॉच का नाम शामिल हैं. हालांकि ऐपल की तरफ से सभी प्रोडक्ट की लॉन्चिंग को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं दी गई है।   आ रहे हैं iPhone 18 Pro और 18 प्रो मैक्स Apple हर साल सितंबर में अपनी फ्लैगशिप सीरीज को अनवील करता है, जिसमें बीते साल iPhone 17 Pro को लॉन्च किया था. अब इस साल कंपनी iPhone 18 Pro सीरीज को लेकर आ रही है. पुराने ट्रेंड को फॉलो करते हुए कंपनी इस साल भी सितंबर में ही लॉन्च करेगी।   लीक्स और मीडिया रिपोर्ट्स में दावे किए जा चुके हैं कि इस साल लॉन्च होने वाले iPhone 18 Pro सीरीज में कई अपडेट दिखाई देंगे. साथ ही कुछ फीचर्स तो पहली बार देखने को मिलेंगे।   iPhone 18 Pro सीरीज में बेहतर कैमरा सेंसर नजर आएंगे. साथ ही न्यू चिपसेट और पुराने वर्जन की तुलना में छोटा डाइनैमिक आइलैंड अनवील किया जाएगा।  ऐपल वॉच, आईपैड और मैक आदि होंगे लॉन्च  ऐपल आईफोन 18 प्रो सीरीज के अलावा अन्य डिवाइसों को भी अनवील किया जाएगा. इसमें ऐपल वॉच, आईपैड और मैक के नाम शामिल हैं।  कंपनी इस साल iPad की न्यू लाइनअप को अनवील करेगी. iPad 12 के साथ फास्ट चिपसेट का यूज किया जाएगा, जिससे ऐपल इंटेलीजेंस का सपोर्ट मिलेगा. iPad Mini के अंदर OLED डिस्प्ले के साथ अपग्रेड किया जा सकेगा।  Mac को लेकर भी रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं. इस साल के अंत तक मैंक स्टूडियो, मैक मिनी और आईमैक को लॉन्च किया जाएगा. इनमें नेक्स्ट जनरेशन M5 चिपसेट का यूज किया गया है. मैकबुक प्रो को एक OLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया जाएगा।