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चांदी के भाव में ₹5000 की गिरावट, सोने के रेट में भी बड़ी गिरावट, जानिए आज का 10 ग्राम गोल्ड प्राइस

इंदौर   शादियों के सीजन में बड़ी खबर सोने-चांदी के भाव को लकर आ रही है। आज सर्राफा बाजारों में सोना-चांदी के रेट में भारी गिरावट है। 28 अप्रैल को 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1629 रुपये सस्ता हो गया है। आज यह 159557 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। चांदी 5381 रुपये सस्ती होकर 238339 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 22 कैरेट गोल्ड और 18 कैरेट के रेट आईबीजेए के मुताबिक आज 10 ग्राम 22 कैरेट गोल्ड के भाव 1492 रुपये सस्ता होकर 136994 रुपये पर आ गया है। इस पर 3 प्रतिशत जीएसटी नहीं लगा है। जीएसटी समेत यह 141103 रुपये का पड़ेगा। 18 कैरेट गोल्ड का रेट भी आज 1222 टूटकर बिना जीएसटी 112168 रुपये हो गया है। जीएसटी के साथ इसका भाव 115533 रुपये हो जाएगा। 14 और 23 कैरेट गोल्ड के रेट सर्राफा बजारों में आज 23 कैरेट गोल्ड की कीमत 1623 रुपये गिरकर 148958 रुपये पर पहुंच गई है। जबकि, 14 कैरेट गोल्ड की कीमत 953 रुपये कम होकर 87491 रुपये प्रति 10 ग्राम है। आईबीजेए दिन में दो बार रेट जारी करता है। एक बार दोपहर 12 या सवा 12 बजे के करीब दूसरा 5 बजे के आसपास। अभी यह रेट दोपहर सवा 12 बजे वाला है। IBJA रेट के मुताबिक अब सोना सर्राफा मार्केट के अपने ऑल टाइम हाई 176121 से 26564 रुपये सस्ता हो गया है। जबकि, चांदी के भाव में ऑल टाइम हाई से 1447594 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। अगर युद्ध के बीच की बात करें तो सोना अबतक 9540 रुपये और चांदी 29561 रुपये गिर चुकी है। क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम युद्ध के बीच सर्राफा बाजार में सोने-चांदी गिरती की कीमतों के कारणों के बारे में केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया ने बताया कि बाजार नियामकों ने सोने के कारोबार में मार्जिन की दरें बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर छोटे निवेशकों पर पड़ा है। ऊंची मार्जिन के चलते सट्टेबाजी करने वालों की संख्या में कमी आई है। कीमतों में अब नरमी है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर जिन निवेशकों को शेयरों में नुकसान उठाना पड़ता है, वे अक्सर अपने दूसरे निवेश को बेचकर पैसा निकालने लगते हैं। सोना-चांदी उनकी पहली पसंद बनता है, क्योंकि यह मुनाफे में होता है। इस बिकवाली के दबाव ने भी सोने और चांदी की कीमतों को नीचे लाने में अहम भूमिका निभाई है। दूसरी ओर अब गोल्ड में इन्वेस्टमेंट की रफ्तार ठंडी पड़ गई है। यही वजह है कि बाजार में अब बड़ी तेजी के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे। डॉलर की मजबूती ने डाला दबाव अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती ने भी सोने की कीमतों को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घट जाती है।

US-ईरान वार्ता में अड़चन, शेयर बाजार में सुस्ती, सेंसेक्स-निफ्टी कमजोर

मुंबई  शेयर मार्केट (Share Market) में मंगलवार को सुस्ती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई. अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से लेकर होर्मुज स्ट्रेट खोलने तक पर बात अटकी है और इसे लेकर सेंसेक्स-निफ्टी (Sensex-Nifty) भी कन्फ्यूज नजर आए हैं. विदेशी शेयर बाजारों से मिले निगेटिव सिग्नल ने भी भारतीय स्टॉक मार्केट पर दबाव बढ़ाया है. इन सबके बीच दोनों इंडेक्स कभी रेड, तो कभी ग्रीन जोन में कारोबार करते दिखे।  बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलने के साथ ही पहले 200 अंक से ज्यादा फिसल गया, फिर अचानक ग्रीन जोन में ट्रेड करता नजर आया. तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 इंडेक्स भी सेंसेक्स की तरह ही ओपनिंग के साथ फिसला और फिर अचानक ग्रीन जोन में आ गया. इस सुस्ती के बीच SBI, IndiGo, Adani Power जैसे शेयर धड़ाम दिखाई दिए।  ऐसी रही सेंसेक्स-निफ्टी की ओपनिंग  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत के साथ बीएसई का सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 77,303.63 की तुलना में गिरावट के साथ 77,094 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर अचानक फिसलकर 76,973.54 के लेवल पर आ गया. कुछ देर गिरावट में कारोबार करने के बाद इसने ग्रीन जोन में छलांग लगाई और BSE Sensex 77,335 पर ट्रेड करता दिखा और फिर अगले ही पल टूट भी गया।  NSE Nifty की चाल पर नजर डालें, तो ये भी सेंसेक्स की तरह ही बदली-बदली नजर आई. अपने सोमवार के बंद 24,092 की तुलना में ये इंडेक्स फिसलकर 24,049 पर खुला था और फिर मिनटों में ये फिसलकर 23,999 के लेवल पर आ गया. हालांकि, 24 हजार के नीचे फिसलने के बाद अचानक ये मामूली रिकवरी लिए हुए भी दिखाई दिया।  गिरावट में कारोबार कर रहे ये शेयर  शेयर बाजार में सुस्ती के बीच Eternal, IndiGo, SBI जैसे लार्जकैप स्टॉक गिरावट के साथ रेड जोन में कारोबार कर रहे थे. वहीं मिडकैप में शामिल Phoenix, TIIndia, Laurus Labs और IDFC First Bank जैसे शेयरों में गिरावट देखने को मिली. बीएसई की स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल शेयरों पर नजर दौड़ाएं, तो KIMS Share, Wockpharma Share, APAR India Share के साथ ही FSL Stock फिसले हुए नजर आए।  इन कारणों से बाजार पर दबाव शेयर बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों की बात करें, तो अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर सेंसेक्स-निफ्टी पर भी है. दोनों देशों के बीच न तो सीजफायर को लेकर और न ही होर्मुज खोलने को लेकर कोई सहमति बन पा रही है. Hormuz Strait को लेकर ईरान का प्रपोजल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रास नहीं आ रहा है, दूसरी ओर क्रूड की कीमतों में उछाल ने टेंशन बढ़ाने का काम किया है। 

क्रिसिल की रिपोर्ट: भारत में कमर्शियल व्हीकल मार्केट 2027 में 12.4 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री के लिए तैयार

मुंबई  क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री फिस्कल साल 2027 में रिकॉर्ड 12.4 लाख यूनिट्स की बिक्री तक पहुंचने वाली है, जो वित्त वर्ष 2019 के पिछले पीक को पार कर जाएगी, लेकिन वित्त वर्ष 2026 में 13 परसेंट की मज़बूत वापसी के बाद ग्रोथ 5-6 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है।  वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री की घरेलू रिकवरी कई वजहों से हुई, जिसमें सितंबर 2025 में GST रेट को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना भी शामिल है, जिससे परचेज़ इकोनॉमिक्स में सुधार हुआ और डेफर्ड डिमांड अनलॉक हुई. इंटरेस्ट रेट में कमी, बेहतर फ्रेट यूटिलाइजेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर और माइनिंग एक्टिविटी में बढ़ोतरी ने भी वॉल्यूम को सपोर्ट किया।  वित्त वर्ष 2027 में घरेलू डिमांड सपोर्टिव रहने की उम्मीद है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित एक्टिविटी, लगातार रिप्लेसमेंट डिमांड और बेहतर अफोर्डेबिलिटी का सपोर्ट मिलेगा. हालांकि, क्रिसिल ने कहा कि वेस्ट एशिया में चल रहे संकट की वजह से एक्सपोर्ट में जल्द ही रुकावट आ सकती है, जिससे डिमांड खत्म होने के बजाय डिस्पैच में देरी होने की संभावना है।  मार्केट ज़्यादातर घरेलू है, जिसमें लगभग 92 प्रतिशत वॉल्यूम भारत से आता है और बाकी एक्सपोर्ट से आता है. यह इंडस्ट्री मोटे तौर पर हल्के कमर्शियल व्हीकल (LCVs) में बंटी हुई है, जो वॉल्यूम का 60 प्रतिशत हिस्सा हैं, और मीडियम और भारी कमर्शियल व्हीकल (MHCVs) हैं, जिनमें बसें हर एक में एक सब-सेगमेंट के तौर पर हैं।  ई-कॉमर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी की मांग की वजह से LCV की ग्रोथ 5-6 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इस सेगमेंट में, 2 टन से ज़्यादा ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) वाली गाड़ियां अब LCV सेल्स का 73 प्रतिशथ हिस्सा हैं, जो वित्त वर्ष 2020 में 60 प्रतिशत था, क्योंकि फ्लीट ऑपरेटर ज़्यादा यूनिट जोड़ने के बजाय पेलोड एफिशिएंसी को प्राथमिकता दे रहे हैं।  MHCV वॉल्यूम में 4-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है, जिसे माल ढुलाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च से मदद मिलेगी. बेहतर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से ज़्यादा टन वाले व्हीकल की तरफ़ झुकाव, वॉल्यूम ग्रोथ को कम कर सकता है, भले ही अंदरूनी डिमांड स्थिर रहे।  दोनों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर – लुधियाना से सोननगर तक पूर्वी DFC और दादरी से JNPT तक पश्चिमी DFC, जो अप्रैल 2026 में पूरी तरह चालू हो जाएंगे – के पूरा होने से लंबी दूरी के माल के लिए रेल से कॉम्पिटिशन भी शुरू होगा, जिससे रिप्लेसमेंट डिमांड पर असर पड़ सकता है।  बस सेगमेंट की बात करें तो इसमें वित्त वर्ष 2027 में 3-4 प्रतिशत की ग्रोथ होने की उम्मीद है, जिसे रिप्लेसमेंट डिमांड और सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक बस खरीदने से सपोर्ट मिलेगा. हालांकि यह अभी भी एक छोटा सब-सेगमेंट है, लेकिन यहां इलेक्ट्रिफिकेशन दूसरी CV कैटेगरी के मुकाबले तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, हालांकि इसकी पहुंच अभी भी कम सिंगल डिजिट में है।  एक्सपोर्ट की बात करें तो, क्रिसिल को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में ग्रोथ तेज़ी से घटकर 2-4 प्रतिशत हो जाएगी, जो वित्त वर्ष 2026 में 17 प्रतिशत थी. वेस्ट एशिया, जो एक्सपोर्ट का लगभग एक चौथाई हिस्सा है, शिपिंग में रुकावटों की वजह से मुख्य रुकावट है. फिर भी, टॉप MHCV बनाने वाले देशों में से एक के तौर पर भारत की बढ़ती स्थिति एक मज़बूत बेस देती है, और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को फ़ाइनल करने से मीडियम टर्म में एक्सपोर्ट बढ़ सकता है।  सोच-समझकर कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से रेवेन्यू ग्रोथ, वॉल्यूम ग्रोथ से थोड़ी ज़्यादा रहने की संभावना है. लेकिन जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण स्टील, एल्युमीनियम और फ्यूल की बढ़ती इनपुट कॉस्ट से ऑपरेटिंग मार्जिन वित्त वर्ष 2026 के 12 प्रतिशत से 40-50 बेसिस पॉइंट कम होकर 11.5-11.6 प्रतिशत हो सकता है. अगर एग्रेसिव प्राइस पास-थ्रू से डिमांड पर असर पड़ता है, तो कॉस्ट में ज़्यादा बढ़ोतरी से मार्जिन और खराब हो सकता है।  इंडस्ट्री को बढ़ते कम्प्लायंस कॉस्ट का भी सामना करना पड़ रहा है. नए मॉडल्स के लिए एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम मैंडेट अप्रैल 2026 से और सभी प्रोडक्शन के लिए अक्टूबर 2026 से लागू होंगे, इसके बाद अप्रैल 2027 से कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी-III नॉर्म्स और उसके तुरंत बाद प्रपोज़्ड भारत स्टेज VII लागू होंगे।  R&D, टूलिंग और सर्टिफिकेशन में इन्वेस्टमेंट से वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 तक गाड़ियों की कीमतें बढ़ने की संभावना है, जिससे जल्द ही रिप्लेसमेंट डिमांड बढ़ सकती है. वॉल्यूम और मार्जिन प्रेशर में कमी के बावजूद, क्रिसिल ने कहा कि इंडस्ट्री का क्रेडिट प्रोफ़ाइल स्टेबल बना हुआ है, जिसे मज़बूत कैश फ़्लो और हेल्दी बैलेंस शीट का सपोर्ट मिला है।  इस फ़ाइनेंशियल ईयर में सालाना कैपिटल खर्च 5,500 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल के हिसाब से मॉडर्नाइज़ेशन और रेगुलेटरी कम्प्लायंस पर फ़ोकस करेगा. कैपेक्स-टू-EBITDA रेश्यो 0.3x से नीचे रहने की उम्मीद है. क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई, ब्याज दरें और लॉजिस्टिक्स लागत पर असर डालने वाले जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट पर नज़र रखने लायक मुख्य बातें बनी हुई हैं, क्योंकि इनसे डिमांड और मार्जिन के नज़रिए में बड़ा बदलाव आ सकता है। 

अमेरिका की दिग्गज कंपनी का भारत में बड़ा कदम, 1.10 लाख करोड़ में फर्म खरीदी, शेयर बने रॉकेट

मुंबई  भारत की बड़ी फार्मा कंपनी ने अमेरिका की एक बड़ी कंपनी को खरीदने का ऐलान किया है. यह कंपनी अमेरिका के स्‍टॉक एक्‍सचेंज में लिस्‍ट भी है. इस डील के बाद भारत की कंपनी सन फार्मा की ग्‍लोबल स्‍तर पर पकड़ और भी मजबूत हो जाएगी. इस ऐलान के बाद जैसे ही शेयर बाजार खुला, सन फर्मा के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली।  सन फार्मा ने जिस अमेरिकी कंपनी को खरीदने का फैसला किया है, उसका नाम ऑर्गेनॉन है. यह कोई छोटी डील नहीं है, बल्कि  11.75 अरब डॉलर या करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की डील है. यह भारतीय फार्मा सेक्‍टर के इतिहा की सबसे बड़ी विदेशी खरीद में से एक मानी जा रही है।  सन फार्मा इस कंपनी की 100 फीसदी हिस्‍सेदारी खरीदेगी, जिसके तहत अमेरिकी कंपनी के शेयर होल्‍डर्स को 14 डॉलर प्रति इक्विटी कैश मिलेगा. यह कीमत ऑर्गेनॉन के शुक्रवार के बंद भाव से करीब 24% प्रीमियम पर है. यानी सन फार्मा कंपनी को बाजार भाव से ज्यादा कीमत देकर खरीद कर रही है।  शेयर में आई धांसू तेजी सन फार्मा के शेयर सोमवार को शानदार तेजी पर कारोबार करते हुए दिखाई दिए. कंपनी के शेयर 4.85% चढ़कर 1,699 रुपये पर पहुंच गए. हालांकि, एक साल, छह महीने और एक महीने के दौरान शेयर ने मामूली निगेटिव रिटर्न दिया है. लेकिन पांच सालों के दौरान इस शेयर में 160 फीसदी की तेजी आई है।  क्‍यों खास मानी जा रही ये डील?  सन फार्मा की ये डील कई स्‍तरों पर खास मानी जा रही है. अभी तक यह जेनेरिक दवाओं के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन इस डील के बाद इसे एक नई ताकत मिलेगी. यह कई और स्‍तर पर अपनी पहचान बना सकता है और कारोबार का विस्‍तार कर सकता है. ग्‍लोबल स्‍तर पर भी इसकी पकड़ मजबूत होने वाली है।  महिला स्‍वास्‍थ्‍य: ऑर्गेनॉन दुनिया की टॉप 3 महिला स्वास्थ्य कंपनियों में गिनी जाती है. इसका एक बड़ा नेटवर्क अब सनफार्मा को मिलेगा।  बायोसिमिलर में एंट्री: सन फार्मा की बायोसिमिलर में मौजूदगी सीमित थी. अब यह डील कंपनी को दुनिया का सातवां सबसे बड़ा बायोसिमिलर प्‍लेयर बन सकता है।  ग्लोबल स्केल बढ़ेगा: दोनों कंपनियों की कुल आमदानी 12.4 अरब डॉलर या करीब 1.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। 

नर्चर वेल इंडस्ट्रीज बना मल्टीबैगर स्टॉक, 5 साल में 24970% रिटर्न

नई दिल्ली शेयर बाजार में कई ऐसे स्टॉक हैं जिन्होंने लॉन्ग टर्म में निवेशकों को मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। ऐसा ही एक स्टॉक-नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड है। इस स्टॉक की कीमत पांच साल पहले 14 पैसे थी, जो अब 35 रुपये के स्तर पर है। इस पांच साल की अवधि में शेयर ने 24970% से अधिक का रिटर्न दिया है। रकम के हिसाब से इस रिटर्न की बात करें तो अगर किसी निवेशक ने पांच साल पहले एक लाख रुपये निवेश किया था तो अब उसकी रकम लगभग 2.50 करोड़ रुपये हो गई होगी। शेयर का परफॉर्मेंस नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर की बात करें तो 34.08 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले करीब ढाई पर्सेंट चढ़कर 34.90 रुपये पर पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान शेयर 35.69 रुपये पर पहुंच गया। 17 फरवरी 2026 को शेयर 46 रुपये पर था, जो 52 हफ्ते का हाई भी है। सिंतबर 2025 में शेयर 17 रुपये पर था। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो है। बता दें कि नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने साल 2024 में स्टॉक स्प्लिट और बोनस इश्यू का ऐलान किया था। स्प्लिट के तहत एक शेयर को 10 टुकड़ों में बांटा गया था तो एक शेयर के बदले एक बोनस शेयर मिलेगा। शेयरहोल्डिंग पैटर्न FY26 की मार्च तिमाही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमोटर की हिस्सेदारी 53.81 प्रतिशत पर स्थिर रही। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs की हिस्सेदारी साल-दर-साल (YoY) 4.25 प्रतिशत से गिरकर 0.18 प्रतिशत रह गई जबकि घरेलू निवशकों यानी DIIs की हिस्सेदारी 0.07 प्रतिशत पर बनी रही। पब्लिक शेयरहोल्डिंग 41.86 प्रतिशत से बढ़कर 45.94 प्रतिशत हो गई, जो कंपनी में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है। हाल ही में नर्चर वेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने बोर्ड की बैठक में बड़े बदलाव की घोषणा की। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) अनिल कुमार ने व्यक्तिगत व्यस्तताओं के कारण अपना इस्तीफा दे दिया है, जो 20 अप्रैल 2026 को कारोबार समाप्त होने के साथ प्रभावी हो गया। उनके स्थान पर बोर्ड ने नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की सिफारिश पर शीतल सोनी को 21 अप्रैल 2026 से कंपनी की नई CFO नियुक्त कर दिया है। यह जानकारी सेबी (LODR) रेगुलेशन 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंज को दी गई है। कैसे रहे तिमाही नतीजे FY26 की दिसंबर तिमाही में परिचालन से राजस्व 1.04 प्रतिशत बढ़कर 290 करोड़ रुपये हो गया और परिचालन मार्जिन आधार पर 11 प्रतिशत पर स्थिर रहा। इसके साथ ही, नेट प्रॉफिट 31 करोड़ रुपये हो गया। EPS (प्रति शेयर आय) में 3.9 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह 1.06 रुपये हो गया।

एक्सपर्ट्स की सलाह,IRFC, पॉलीकैब और बजाज फाइनेंस में सोमवार को खरीदारी के संकेत

नई दिल्ली सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवर को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी हलचल हो सकती है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। इस माहौल के बीच कुछ शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी। ये शेयर- इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प यानी आईआरएफसी, पॉलीकैब इंडिया, बजाज फाइनेंस, एसबीआई, कोल इंडिया और ग्रासिम हैं। एक्सपर्ट ने खरीदने की दी सलाह आनंद राठी में टेक्निकल रिसर्च के सीनियर मैनेजर गणेश डोंगरे ने इन तीनों शेयर को सोमवार को खरीदने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्प के शेयर को ₹103-106 पर खरीदा जा सकता है। इस शेयर का टारगेट प्राइस ₹111 और स्टॉप लॉस ₹98 रखने की सलाह दी गई है। इसी तरह, पॉलीकैब इंडिया के शेयर को ₹8040-8070 रेंज पर खरीदने की सलाह दी गई है। शेयर के लिए टारगेट प्राइस ₹8300 और स्टॉप लॉस ₹7900 तय किया है। वहीं, बजाज फाइनेंस की बात करें तो ₹921 पर खरीदने और टारगेट प्राइस ₹965 तय किया है। इस शेयर के लिए स्टॉप लॉस ₹900 तय है। बाजार पर क्या बोले? गणेश डोंगरे ने कहा कि हाल के जियो पॉलिटिक्स के हालात ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आने वाला सप्ताह बहुत अहम होगा, क्योंकि निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत से जुड़ी अपडेट्स पर नजर रखेंगे। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे सोच-समझकर दांव लगाएं, रिस्क मैनेजमेंट में अनुशासन बनाए रखें और खबरों से होने वाली उतार-चढ़ाव के प्रति सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर पर किसी भी तरह के तनाव या समाधान का बाजार की दिशा पर बड़ा असर पड़ सकता है। Nifty 50 के आउटलुक पर डोंगरे ने कहा कि लगातार तीसरे सप्ताह इस इंडेक्स ने अपनी रिकवरी जारी रखी, जो घरेलू बाजारों में बेहतर होते सेंटिमेंट को दिखाता है। हालांकि, इंडेक्स ने 25,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से अहम स्तर के पास कुछ हिचकिचाहट दिखाई। टेक्नीकल नजरिए से Nifty के लिए तुरंत सपोर्ट 23,500–23,800 की रेंज में है जबकि 24,800–25,000 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस बैंड बना हुआ है। किसी भी करेक्शन के दौर में 23,000–23,500 का जोन एक मजबूत डिमांड एरिया के तौर पर काम करने की उम्मीद है। एसबीआई, कोल इंडिया और ग्रासिम एक अन्य एक्सपर्ट और चॉइस ब्रोकिंग के कार्यकारी निदेशक सुमीत बगड़िया ने भी तीन शेयरों पर दांव लगाने की सलाह दी है। सुमीत बगड़िया ने SBI, कोल इंडिया और ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदने की सलाह दी। एक्सपर्ट ने SBI के लिए ₹1101 पर खरीदने की सलाह दी है। शेयर के लिए टारगेट ₹1180 और स्टॉप लॉस ₹1048 रखा है। वहीं, कोल इंडिया को ₹456 पर खरीदने की सलाह दी गई है। इस शेयर का टारगेट ₹488 और स्टॉप लॉस ₹440 है। इसके अलावा, ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर को ₹2739 पर खरीदने की सलाह है। शेयर का टारगेट ₹2915 और स्टॉप लॉस ₹2626 तय किया गया है।

भारत में लॉन्च हुआ Range Rover Sport, 242Kmph स्पीड, रेफ्रिजरेटर जैसी अनोखी सुविधाओं के साथ

  नई दिल्ली Land Rover (लैंड रोवर) ने भारत में असेंबल हुई रेंज रोवर स्पोर्ट ऑटोबायोग्राफी (Range Rover Sport Autobiography) को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस कार को भारतीय बाजार में लॉन्च किया है. ये पहला मौका है जब लोकली प्रोड्यूस रेंज रोवर स्पोर्ट को ऑटोबायोग्राफी ट्रिम में ऑफर किया गया है।  कार की बुकिंग शुरू हो गई है. ऑटोबायोग्राफी ट्रिम में स्टैंडर्ड वेरिएंट के मुकाबले कई सारे अपग्रेड्स देखने को मिलते हैं. इस कार में 22 इंच एक एलॉय व्हील्स दिए गए हैं. आइए जानते हैं इस कार के कीमत और क्या कुछ खास मिलेगा।  कितनी है कीमत?  लैंड रोवर ने भारत में असेंबल हुई रेंज रोवर स्पोर्ट ऑटोबायोग्राफी ट्रिम को 1.60 करोड़ रुपये की एक्स शोरूम की कीमत पर लॉन्च किया है. इस कार की बुकिंग शुरू हो चुकी है. ऑटोबायोग्राफी ट्रिम के लोकल प्रोडक्शन से कार के टॉप वेरिएंट की कीमत मेनस्ट्रीम डायनामिक एचएसई के क्लोज आ गई है।  डिजाइन की बात करें तो इस वेरिएंट में स्टैंडर्ड वेरिएंट के मुकाबले कई सारे अपग्रेड्स मिलते हैं. कार में 22 इंच के फ्रोज्ड एलॉय व्हील्स मिलते हैं, जो स्टेन ब्लैक फिनिश के साथ आते हैं. इसमें रेड ब्रेक कैलिपर्स और ऑटोबायोग्राफी की बैजिंग मिलती है. एसयूवी में फ्लश डोर हैंडल्स मिलते हैं।  इसके अलावा गेस्चर कंट्रोल टेलगेट, पावर फोल्डिंग मिरर्स मिलते हैं, जो मेमोरी फंक्शन के साथ आते हैं. कार कई कलर ऑप्शन में मिलेगी. ऑटोबायोग्राफी ट्रिम में हायर लेवल इंटीरियर और एक्सटीरियर डिटेलिंग मिलती हैं. कार में लेदर अपहोल्स्ट्री, एम्बिएंट लाइटिंग, वेंटिलेटेड सीट्स, फ्रंट सेंटर कंसोल रेफ्रिजरेटर और कई दूसरे फीचर्स मिलेंगे. फ्रंट सीट को 22 तरीके से एडजस्ट किया जा सकता है।  इंजन और पावर  चूंकि अब इस कार को भारत में असेंबल किया जा रहा है, इसलिए कई पावरट्रेन का विकल्प मिल जाता है. इसमें 3.0 लीटर का पेट्रोल और डीजल वर्जन मिलता है. कार में 4.4 लीटर का वी8 इंजन भी मिलेगा. बात करें 3.0 लीटर वाले इंजन की तो इसमें 8 स्पीड ऑटोमेटिक गियरबॉक्स मिलता है।  डी350 डीजल इंजन 351 एचपी की पावर और 700 एनएम का टॉर्क ऑफर करता है. कार 0 से 100 Kmph की स्पीड सिर्फ 5.8 सेकंड में पकड़ लेती है. वहीं कार की मैक्सिमम स्पीड 234 किलोमीटर प्रति घंटे की है. जबकि पी400 पेट्रोल इंजन 400 एचपी की पावर और 550 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है।  ये वेरिएंट सिर्फ 5.5 सेकंड में 0 से 100 Kmph की स्पीड पकड़ लेती है. कार की टॉप स्पीड 242 किलोमीटर प्रति आवर की है. 4.4 लीटर वाला वी8 इंजन इंपोर्टेड वर्जन में मिलेगा। 

पेट्रोल-डीजल के बाद खाने और नहाने की चीज़ों के बढ़े दाम, मुसीबत कहां से आ रही है?

नई दिल्ली  ईरान युद्ध की वजह से भारत में तेल का एक और बड़ा संकट खड़ा हो सकता है. पेट्रोल-डीज़ल नहीं. वो तो अलग मसला है. एक और मसला जो खड़ा हो रहा है वो है पाम ऑयल का. दुनिया में सबसे ज़्यादा पाम ऑयल भारत इंपोर्ट करता है. भारत हर साल लगभग 95 लाख टन पाम ऑयल इस्तेमाल करता है. और भारत में पाम ऑयल पैदा होता 4 लाख टन से भी कम. यानी सारा बाहर से ही आता है. क्योंकि पाम के पेड़ जिनसे पाम ऑयल बनता है उनको लगातार बारिश चाहिए होती है, बहुत पानी चाहिए होता है. तो ये दक्षिण पूर्व एशिया में बहुत ज़्यादा होते हैं पाम के पेड़. उनसे तेल निकाल कर पाम ऑयल बनाया जाता है. और दुनिया भर में भेजा जाता है. भारत भी वहीं से लेता है. ज़्यादातर इंडोनेशिया से और मलेशिया से. हम कोई 90 लाख टन पाम ऑयल वहां से मंगाते हैं।   भारत में कुल खाने का तेल जो इस्तेमाल होता है उसका 40% ये पाम ऑयल ही है. क्योंकि एक तो ये बाक़ी खाने के तेलों से सस्ता पड़ता है और लंबे टाइम तक ख़राब नहीं होता. तो कई परिवारों में सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है खाना पकाने के लिए।  पाम ऑयल से देश में क्या-क्या बनता है? अनुमान है कि देश के आधे परिवारों में खाना पाम ऑयल से बनता है. या ऐसे तेलों से बनता है जिनमें पाम ऑयल मिलाया हुआ होता है. औऱ ये जो चिप्स, नमकीन, भुजिया, समोसे, वड़े, फ्रेंच फ्राइज़, डोनट वगैरह जो डीप फ़्राई होते हैं बाज़ार में ये सब कंपनियां पाम ऑयल ही इस्तेमाल करती हैं. क्योंकि ये गर्म होने पर स्थिर भी रहता है और चीज़ें लंबे समय तक खस्ता रहती हैं।      बिस्किट, कुकीज़, केक, पेस्ट्री, बाक़ी बेकरी की चीज़ें, ये सब भी पाम ऑयल से बनती हैं. इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, आइसक्रीम,सब पाम ऑयल से बनाई जा रही हैं आजकल.     सारा रेडी-टू-ईट खाना, सॉस, ग्रेवी, ब्रेड, पीत्ज़ा, इन सब में भी पाम ऑयल ही इस्तेमाल किया जा रहा है. कुल मिलाकर ये समझ लीजिये कि खाद्य उद्योग में 70% से ज्यादा पाम ऑयल जाता है.     होटेल हों, रेस्ट्रॉन्ट हों या छोटी खाने-पीने की दुकानें, ढाबे, स्ट्रीट फ़ूड वाले, सब लोग फ्राई करने के लिए, तड़का लगाने के लिए बड़े पैमाने पर पाम ऑयल का ही इस्तेमाल करते हैं. और त्योहारों में तो मिठाइयों और तले हुए खाने की मांग बढ़ने से पाम ऑयल की खपत बहुत बढ़ जाती है।      खाने की चीज़ों की ही बात नहीं है. साबुन, शैम्पू, बॉडी वॉश, इन सब में जो झाग बनता है वो झाग बनाने का काम इनमें मिला हुआ पाम ऑयल करता है।      क्रीम में पाम ऑयल है, लोशन में पाम ऑयल है, मॉइश्चराइजर में पाम ऑयल है, आपकी लिपस्टिक में पाम ऑयल है. टूथपेस्ट तक में पाम ऑयल होता है. और कपड़े धोने के साबुन पाउडर भी पाम ऑयल से बनते हैं. पेंट में भी पाम ऑयल डलता है।  मतलब पाम ऑयल भारत की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हर जगह घुसा हुआ है. सुबह की पूड़ी से लेकर शाम के बिस्किट, साबुन और शैम्पू तक. खाने की चीजों में इसका 70-90% इस्तेमाल होता है, बाकी साबुन-कॉस्मेटिक्स वगैरह और दूसरी चीज़ों में।  भारत अपनी पाम ऑयल जरूरत का बड़ा हिस्सा इंडोनेशिया से मंगाता है।  पाम ऑयल का इतना इस्तेमाल क्यों? मुख्य कारण ये हैं कि ये सस्ता होता है. पाम ऑयल समझ लो अगर थोक में 125 रुपये लीटर होता है तो बाक़ी तेल 150-175 रुपये लीटर होते हैं. दाम ऊपर नीचे होते रहते हैं लेकिन मुख्य वजह पाम ऑयल की इस्तेमाल की यही है कि ये सस्ता पड़ता है और बड़ी मात्रा में मिल जाता है और भारत में इतना खाने के तेल का उत्पादन होता नहीं तो हमें तो ये बाहर से ही मंगाना पड़ता है।  साबुन, शैम्पू, बिस्किट और चिप्स जैसे प्रोडक्ट्स में पाम ऑयल का भारी इस्तेमाल होता है. सप्लाई घटने से अब इन सबकी कीमतें आसमान छू सकती हैं।  सवाल ये कि ईरान युद्ध का इससे क्या लेना-देना? ये अगर दक्षिण-पूर्व एशिया से आ रहा है, यानी इंडोनेशिया, मलेशिया वगैरह से आ रहा है, तो उधर से आने पर स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मूज़ तो पड़ता नहीं. तो इसमें कौनसी दिक़्क़त आ गई कि अब इसका भी संकट आने वाला है? तो वो दिक़्क़त ये है कि इंडोनेशिया ने बोल दिया कि वो अब इसको बाहर बेचने पर कंट्रोल लगाएगा. ख़ुद ही इस्तेमाल करेगा।      इंडोनेशिया ये कर रहा है तो बाक़ी देशों से भी ऐसे ही संकेत आ रहे हैं कि वो सब भी अब पाम ऑयल ज़्यादा बाहर भेजने पर कंट्रोल लगाने वाले हैं. लेकिन वो क्यों? क्या करेंगे वो पाम ऑयल का? वो इसका डीज़ल बनाएंगे. जी. पाम ऑयल से बायो-डीज़ल भी बनाया जाता है. और इंडोनेशिया में तो डीज़ल में इसको मिलाया भी जाता है. 40% तक पाम ऑयल वाला डीज़ल मिलाते हैं वो।      मलेशिया में भी बनाते हैं पाम ऑयल से डीज़ल. लेकिन अभी तक क्या था कि इससे डीज़ल बनाने से सस्ता ओरिजिनल डीज़ल पड़ रहा था. तो वो सोचते थे कि डीज़ल तो खाड़ी देशों से मंगा लो, और इसको खाने के तेल के रूप में एक्सपोर्ट कर दो. बारिश बेहिसाब होती ही है वहां पर तो खेती बढ़िया हो रही थी. लेकिन ईरान युद्ध ने सारी तस्वीर ही बदल दी है।      कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. और सबसे बड़ी बात अनिश्चितता बढ़ गई है. कि आगे क्या होगा, कब तक युद्ध चलेगा और युद्ध बंद भी हो गया तब भी हॉर्मूज़ पर टोल की बातें हो रही है, तो पेट्रोल-डीज़ल का मामला तो बहुत ऊपर-नीचे होता रहेगा ये दिख ही रहा है. तो इन देशों ने सोचा कि अपना तेल ख़ुद बनाने का हमारे पास तो रास्ता है ही. हम ये खाड़ी देशों के सहारे क्यों बैठे रहें?     इंडोनेशिया ने ऐलान कर दिया है कि वो जुलाई से अपने देश में डीज़ल में 50% पाम ऑयल मिलाकर बायोडीज़ल बनाने जा रहे हैं. मतलब, पहले वो डीजल में 40% पाम ऑयल मिलाता था, उसको कहते हैं B40, अब इसे बढ़ाकर … Read more

बिखरे बाजार और 2 बड़े कारण: सेंसेक्स में 1000 अंक की गिरावट, भारी नुकसान

मुंबई  24 अप्रैल का दिन भारतीय शेयर बाजारों के लिए ब्लैक फ्राइडे साबित हुआ। लगातार तीसरे दिन गिरावट झेलते हुए बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स लगभग 1000 अंकों की गिरावट के साथ 76,664.21 पर और निफ्टी 275.10 अंकों की गिरावट के साथ 23,897.95 पर बंद हुआ। निफ्टी पर सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में हैं। सबसे ज्यादा 5 प्रतिशत निफ्टी आईटी टूटा है। फार्मा इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत और हेल्थकेयर व रियल्टी इंडेक्स 1 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आए हैं। बाजार की गिरावट में निवेशकों के 4.90 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। गुरुवार, 23 अप्रैल को मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,66,39,864.88 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को बाजार बंद होने पर यह घटकर 4,61,49,758.18 करोड़ रुपये पर आ गया। यानि कि 4,90,106.7 करोड़ रुपये की कमी। शुक्रवार को सेंसेक्स लाल निशान में 77,483.80 पर खुला। फिर पिछली क्लोजिंग से 1260.13 अंकों तक लुढ़ककर 76,403.87 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,100.55 पर खुला और फिर पिछली क्लोजिंग से लगभग 359.4 अंक गिरकर 23,813.65 के लो तक गया। क्यों फिसल रहा है बाजार अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत रुकने से कच्चा तेल एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 105.97 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से माहौल और अनिश्चित हो गया है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में लगातार सेलर बने हुए हैं। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को उन्होंने 3,254.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। रुपये में जारी गिरावट भी एक वजह है। शुक्रवार को घरेलू मुद्रा में लगातार पांचवें सत्र में गिरावट रही।रुपया 22 पैसे गिरकर 94.23 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव कायम है। वैश्विक बाजारों की कमजोरी भी भारतीय बाजारों को प्रभावित कर रही है। अमेरिकी बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए। भारत के अलावा कई अन्य एशियाई बाजारों में भी शुक्रवार को गिरावट है। जकार्ता कंपोजिट 3 प्रतिशत गिरा है। शंघाई कंपोजिट, सेट कंपोजिट में भी गिरावट है। हालांकि निक्केई, हेंग सेंग और ताइवान वेटेड हरे निशान में हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए तक बढ़ोतरी का अनुमान, आम जनता को होगा बड़ा असर

मुंबई   पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर बड़ी अपडेट सामने आ रही है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम 25 से 28 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाए जा सकते हैं। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के आधार पर लगाया गया है, जो फिलहाल करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। तमिलनाडु में आज सभी सीटों के लिए मतदान हो रहा है जबकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने वाली रिपोर्ट्स को खारिज किया केंद्र सरकार ने गुरुवार को उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वर्तमान में चल रहे विधानसभा चुनावों के बाद, देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25-28 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसे फेक न्यूज बताते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि सरकार के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।" इस तरह की खबरें नागरिकों में भय और दहशत पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जाती हैं और ये शरारतपूर्ण और भ्रामक होती हैं। पोस्ट में अंत में लिखा, "भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली तीव्र वृद्धि से बचाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।" इससे पहले दैनिक प्रेस ब्रीफिंग में बुधवार को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल या गैस की जल्दबादी में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। सरकार के मुताबिक, देश भर में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की 100 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। 23 मार्च 2026 से अब तक 20 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर (एफटीएल) बेचे जा चुके हैं, जो खासकर प्रवासी मजदूरों के लिए राहत का काम कर रहे हैं। सरकार ने इन सिलेंडरों की सप्लाई भी दोगुनी कर दी है ताकि जरूरतमंदों तक आसानी से गैस पहुंच सके। क्यों बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जबकि भारत में उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन मिल रहा है। इस अंतर का बोझ तेल कंपनियां उठा रही हैं। ऐसे में नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। अगर अनुमान के मुताबिक बढ़ोतरी होती है, तो पेट्रोल की कीमत कई शहरों में 120 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच सकती है। इसका असर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कंपनियों पर बढ़ता दबाव रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने करीब 27,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यह नुकसान कच्चे तेल की ऊंची कीमत और कम रिटेल कीमत के बीच के अंतर की वजह से हो रहा है। लंबे समय तक इस स्थिति को बनाए रखना कंपनियों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। सरकार के राहत कदम सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती और विंडफॉल टैक्स जैसे कदम उठाए हैं। हालांकि, ये उपाय आंशिक राहत ही दे पा रहे हैं और मूल समस्या अब भी बनी हुई है। अभी क्या है भाव? फिलहाल राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपए प्रति लीटर पर मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो ब्रेंट क्रूड करीब 102.4 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है, जबकि WTI क्रूड लगभग 93.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर है।