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ट्रंप के फैसले का बाजार पर नहीं दिखा असर, TCS-Infosys समेत IT शेयरों में उछाल

मुंबई       अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा TCS, इंफोसिस, विप्रो और HCLTech समेत आठ बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े PERM प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने के बावजूद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों में तेजी देखने को मिली. 9 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई. मार्केट खुलते ही सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी में 200 से अधिक अंकों की बढ़त दर्ज की गई. वहीं, रुपये में भी डॉलर के मुकाबले मजबूती देखने को मिली. रुपया 4 पैसे मजबूत होकर 96.74 प्रति डॉलर पर खुला. गुरुवार को कारोबार बंद होने के समय यह 96.78 प्रति डॉलर पर था।  शुरुआती कारोबार में TCS, इंफोसिस, HCLTech समेत प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर ग्रीन जोन में कारोबार करते नजर आए. शुरुआती कारोबार में इंफोसिस के शेयरों में 2.62%, टीसीएस के शेयरों में 3.39%, एचसीएल के शेयरों में 2.53% और विप्रो के शेयरों में 2.47% की तेजी देखने को मिली. अमेरिकी कार्रवाई के बीच विदेशी बाजारों में भी आईटी कंपनियों के शेयरों में मिलाजुला रुख देखने को मिला. नैस्डैक (Nasdaq) पर माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 1.35% तक लुढ़क गए, जबकि कॉग्निजेंट के शेयरों में 5.15% की तेजी दर्ज की गई. वहीं, पेरिस स्टॉक एक्सचेंज में कैपजेमिनी के शेयर 0.045% की मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे. नैस्डैक पर एडोबी के शेयरों में भी 3.56% का उछाल दर्ज किया गया।  8 IT कंपनियों पर अमेरिकी एक्शन अमेरिकी सरकार की ओर से TCS, इंफोसिस, विप्रो, HCLTech समेत आठ बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से सस्पेंड किए जाने के बाद माना जा रहा था कि इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिल सकता है. वजह यह है कि प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट (PERM) अमेरिका में रोजगार के आधार पर विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. इस पर रोक से प्रभावित कंपनियों के जरिए स्थायी निवास पाने की तैयारी कर रहे विदेशी कर्मचारियों के मामले अटक सकते हैं. इससे कंपनियों की रिक्रूटमेंट स्ट्रैटेजी और कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी सवाल उठ रहे थे।  हालांकि, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती चाल इसके उलट रही. भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुला और प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे. इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने फिलहाल अमेरिकी फैसले को लेकर तत्काल बड़ी बिकवाली नहीं की. हालांकि, केवल शुरुआती तेजी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि इस कार्रवाई का कंपनियों के कारोबार या शेयरों पर आगे कोई असर नहीं पड़ेगा. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कंपनियों के बयानों, अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम और इस फैसले के वास्तविक कारोबारी असर पर रहेगी।  इस पूरे मामले में एक अहम बात यह है कि PERM से सस्पेंशन और कंपनियों के रोजमर्रा के कारोबार पर असर, दोनों अलग-अलग पहलू हैं. PERM मुख्य रूप से रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है. इस पर रोक लगने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अमेरिका में कारोबार नहीं कर सकेंगी या वहां काम कर रहे सभी विदेशी कर्मचारियों के वीजा रद्द हो जाएंगे. यही वजह है कि इस फैसले का बाजार पर तत्काल असर नहीं दिखा. इसके साथ-साथ कंपनियों के कारोबार पर इसके वास्तविक प्रभाव को अगले कुछ कारोबारी सत्रों में देखना अहम रहेगा।  एक्शन पर IT कंपनियों ने दी प्रतिक्रया भारत में सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के संगठन नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (NASSCOM) ने कहा है कि अमेरिकी सरकार की ओर से आईटी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने का फैसला ग्रीन कार्ड पाने के एक खास रास्ते को प्रभावित करता है, न कि H-1B वीजा कार्यक्रम को. संगठन ने यह भी कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों ने H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता कम की है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्तियां बढ़ाई हैं. ये कंपनियां अमेरिकी कारोबारों को सहयोग देने के साथ वहां जॉब क्रिएशन में भी योगदान दे रही हैं।  वहीं, TCS ने साफ किया है कि इस कार्रवाई से उसकी अमेरिकी भर्ती रणनीति पर खास असर पड़ने की आशंका नहीं है. कंपनी अगले पांच साल में अमेरिका में 15,000 लोगों को नौकरी देने की योजना पर कायम है. TCS के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन एक अंक में रहे हैं और अमेरिका में उसकी भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देने पर केंद्रित है. माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में उसने करीब 6,000 H-1B वीजा आवेदन किए थे।  इनमें से 80 फीसदी आवेदन पहले से कंपनी में काम कर रहे कर्मचारियों के वीजा की अवधि बढ़ाने या उनकी वीजा स्थिति में बदलाव के लिए थे, न कि नए लोगों को नौकरी देने के लिए. माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक, नए कर्मचारियों के लिए किए गए बाकी आवेदन उन लोगों के थे, जो पहले से कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे थे और कंपनी में नौकरी करने का फैसला लिया था. कंपनी ने कहा कि ये आवेदन अमेरिका में उसके कुल कर्मचारियों की संख्या का महज एक फीसदी थे।   

Mahindra ला रही CNG SUV, 15 अक्टूबर को होगी लॉन्च; XUV 3XO में मिल सकता है नया अवतार

 नई दिल्ली     महिंद्रा नवरात्रि में एक नई कार लॉन्च करने वाली है. कंपनी 15 अक्टूबर को नई एसयूवी पेश करेगी. महिंद्रा का एसयूवी लॉन्च करना कोई बड़ी चर्चा की बात नहीं है. बल्कि असली चर्चा हो रही है सीएनजी कार की. दावा किया जा रहा है कि 15 अक्टूबर को महिंद्रा कॉम्पैक्ट एसयूवी एक्सयूवी 3एक्सओ (Mahindra XUV 3XO) का सीएनजी वर्जन लॉन्च कर सकती है।  15 अक्टूबर को महिंद्रा अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी का नया वर्जन लॉन्च करने वाली है. अगर कंपनी कार का सीएनजी अवतार लॉन्च करती है, तो ये ब्रांड के पोर्टफोलियो में चौथा पावरट्रेन होगा. अब तक कंपनी की कारें पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक अवतार में आती हैं. अब सीएनजी का विकल्प भी कंज्यूमर्स को मिल सकता है।  सीएनजी की एंट्री के साथ महिंद्रा का सीधा मुकाबला टाटा मोटर्स से होगा. जहां टाटा मोटर्स की नेक्सॉन और पंच सीएनजी में आने वाली छोटी एसयूवीज हैं. वहीं महिंद्रा के पास इनका कोई जवाब नहीं था. एक्सयूवी 3एक्सओ सीएनजी को लॉन्च करके कंपनी पूरा खेल पलट सकती है।  क्या होगा कार में खास?  फिलहाल महिंद्रा एक्सयूवी 3एक्सओ में दो पेट्रोल इंजन का विकल्प मिलता है. ये छोटी एसयूवी 111 एचपी पावर वाले 1.2 लीटर एमपीएफआई टर्बो पेट्रोल इंजन और 131 एचपी पावर वाले 1.2 लीटर डायरेक्ट इंजेक्शन टर्बो पेट्रोल इंजन के साथ आती है. अब इन दोनों के अलावा हमें फैक्टरी फिटेड सीएनजी का विकल्प मिल सकता है।   हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. एमपीएफआई इंजन को मैन्युफैक्चर करना सस्ता होता है और ये इंजन सीएनजी को आसानी से एडॉप्ट कर लेता है. महिंद्रा इस इंजन को ही सीएनजी के साथ दे सकती है. कंपनी सीएनजी का विकल्प ऐसे मौके पर लेकर आ रही है, जब पैसेंजर व्हीकल मार्केट में ये दूसरे सबसे ज्यादा बिकने वाला फ्यूल ऑप्शन है।  महिंद्रा के लिए एक्सूयवी 3एक्सओ में सीएनजी जोड़ना चुनौती से भरा होने वाला है. चूंकि इस कार में सेगमेंट का सबसे कम बूट स्पेस मिलता है. ऐसे में सीएनजी टैंक जोड़ने का मतलब है कि बूट स्पेस और भी कम होगा. महिंद्रा टाटा की तरह डुअल सिलेंडर सेटअप का भी इस्तेमाल कर सकती है।  कंपनी ने आधिकारिक तौर पर सीएनजी इंजन को कन्फर्म नहीं किया है. छोटी गाड़ियों में लोग सीएनजी इंजन को काफी पसंद कर रहे हैं. इसकी बड़ी वजह पेट्रोल के मुकाबले कम रनिंग कॉस्ट का होना है. वहीं अब लोगों के पास छोटी गाड़ियों में डीजल का विकल्प बचा नहीं है। 

Jio ने 6G की ओर बढ़ाया बड़ा कदम, प्री-6G टेक्नोलॉजी के पेटेंट किए फाइल; सैटेलाइट कनेक्टिविटी पर फोकस

मुंबई  रिलायंस जियो अब सिर्फ 5G नेटवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहता. कंपनी अगली पीढ़ी की टेलीकॉम टेक्नोलॉजी यानी 6G की तैयारी में अभी से जुट गई है. रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने गुरुवार को कहा कि कंपनी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी स्टैक विकसित करने पर काम कर रही है और प्री-6G टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पेटेंट भी फाइल कर चुकी है।  आकाश अंबानी ने 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दौरान एएनआई से बातचीत में जियो की भविष्य की टेक्नोलॉजी योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित वॉयस और डेटा सर्विस, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और 6G जैसी नई तकनीकों पर है।  भारत की अपनी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी तैयार कर रहा Jio आकाश अंबानी ने कहा कि जियो सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. कंपनी ऐसी स्वदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी विकसित करने पर काम कर रही है, जिसे भारत से बाहर भी इस्तेमाल किया जा सके।  इसका मतलब साफ है कि जियो आने वाले समय में सिर्फ मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस तक अपनी तकनीक को सीमित नहीं रखना चाहता. कंपनी सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र में भी अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने की तैयारी कर रही है।  6G में भारत को आगे ले जाने की तैयारी आकाश अंबानी ने कहा कि भारत ने 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य रखा है और जियो इस दिशा में रिसर्च, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास के जरिए योगदान देगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 6G के मामले में भारत को दुनिया का नेतृत्व करने की बात कही है और भारत से आने वाले 6G पेटेंट में 10 फीसदी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया है. अंबानी के मुताबिक, जियो इस लक्ष्य में बड़ा योगदान देने की तैयारी कर रहा है।  6G लॉन्च होने से पहले ही पेटेंट पर काम जियो ने 6G के व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल में आने से पहले ही इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर दिया है. आकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी ने प्री-6G के दौर में ही पेटेंट के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है. यानी जियो का फोकस सिर्फ मौजूदा नेटवर्क को बेहतर बनाने पर नहीं है, बल्कि अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए जरूरी तकनीक और बौद्धिक संपदा तैयार करने पर भी है।  AI से बदल सकती है मोबाइल की वॉयस और डेटा सर्विस आकाश अंबानी ने कहा कि जियो पारंपरिक टेलीकॉम सेवाओं को एआई की मदद से और बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है. कंपनी वॉयस और डेटा सेवाओं में एआई के इस्तेमाल पर काम कर रही है।  उनके मुताबिक, एआई की मदद से वॉयस और डेटा सर्विस में नए तरह के इनोवेशन किए जा सकते हैं, जिसका फायदा भारत के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को मिल सकता है।  इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखा Jio का अगला विजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली में चल रहे 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस में जियो अपनी डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े विजन को प्रदर्शित कर रहा है. इस आयोजन में 5G, 6G, एआई आधारित नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है।  आकाश अंबानी के मुताबिक, जियो यहां अपने पूरे डिजिटल सोसाइटी विजन को सामने रखने की कोशिश कर रहा है. कंपनी का जोर आने वाले वर्षों में कनेक्टिविटी, एआई और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को जोड़कर नई डिजिटल सेवाएं तैयार करने पर है.

Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, निवेशकों को ₹10 लाख करोड़ का झटका

मुंबई  घरेलू शेयर बाजार में आज भारी गिरावट रही। घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन गिरावट दिख रही है। RBI की सख्त पॉलिसी, FII की लगातार बिकवाली और दूसरी वजहों से इन्वेस्टर्स डर गए। कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 2% गिरकर अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचले लेवल पर आ गया। इंडेक्स 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,179 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 1,200 पॉइंट से ज्यादा गिरकर 71,400 के लेवल से नीचे फिसला। इस गिरावट ने BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का टोटल मार्केट कैप करीब 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक गिरकर 460 लाख करोड़ रुपये रह गया। रियल्टी, एनर्जी और इंफ्रा में सबसे ज्यादा नुकसान लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर है निफ्टी रियल्टी इंडेक्स, जिसमें 2.98% की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी एनर्जी (-2.87%), निफ्टी इंफ्रा (-2.66%), निफ्टी पीएसई (-2.47%), निफ्टी फार्मा (-2.38%) और निफ्टी एफएमसीजी (-2.01%) 2 से 3 फीसदी तक टूट गए। वहीं, भारी बिकवाली के बीच केवल निफ्टी आईटी (+0.04%) मामूली बढ़त बनाकर हरे निशान में टिकने में सफल रहा। कौन से शेयर चमके और किसमें हुई भारी बिकवाली? बाजार में मंदी के बावजूद केवल चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी देखी गई। फोसिस (+0.50%), टेक महिंद्रा (+0.34%) और एक्सिस बैंक (+0.20%) जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, सबसे बड़ा नुकसान अडानी एंटरप्राइजेज (-5.36%), जेएसडब्ल्यू स्टील (-4.46%), आईटीसी (-4.03%), मैक्स हेल्थकेयर (-3.81%), इंडिगो (-3.55%) और श्रीराम फाइनेंस (-3.24%) में दर्ज किया गया। गिरावट की क्या बड़ी वजह? भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण रहे। RBI ने तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया और नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। 30 साल की यील्ड 5.71% और 10 साल की 5.3% से ऊपर पहुंच गई। ऐसे में बॉन्ड निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। महंगे कच्चे तेल से भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है। सेंसेक्स 1045.46 अंक यानी 1.44% गिरावट के साथ 71,593.24 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। आईटीसी में सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी गिरावट रही। एनएसई का निफ्टी50 इंडेक्स 371.25 अंक यानी 1.64% फिसलकर 22,231.80 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले कारोबार के दौरान ITC, अडानी पोर्ट्स, इंडिगो, पावर ग्रिड और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 4% तक गिरकर सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। आज की गिरावट के मुख्य कारण: 1) RBI की सख्त पॉलिसी RBI ने करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है लेकिन मार्केट एनालिस्ट्स ने कहा कि मुश्किल ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बैकग्राउंड के बीच सेंट्रल बैंक का अपना रुख 'न्यूट्रल' से 'सख्त' में बदलने का फैसला ज्यादा जरूरी था। जेफरीज को उम्मीद है कि RBI मौजूदा साइकिल में ब्याज दरों में करीब 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। नोमुरा के मुताबिक रुख में बदलाव एक सरप्राइज़ था। 2) बॉन्ड यील्ड 24 साल के हाई पर ग्लोबल बॉन्ड में बिकवाली बढ़ने से बॉन्ड यील्ड कई साल के हाई पर पहुंच गई। अमेरिका में 30-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.71% से ऊपर चली गई। बेंचमार्क 10-साल के नोट्स की यील्ड 5.3% से ऊपर है जबकि दो-साल के नोट्स की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आमतौर पर डेट मार्केट को इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। इससे उभरते इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ता है। 3) कच्चे तेल की कीमत ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आज 2% तेजी के साथ $102 प्रति बैरल को पार कर गईं। इसकी वजह यह है कि गल्फ और होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट पर बढ़ते हमलों के बीच इन्वेस्टर्स मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर चिंतित हैं। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने बुधवार को कहा कि कतर के उत्तर में एक टैंकर कई प्रोजेक्टाइल से टकरा गया, जिससे कई लोग मारे गए। एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक पिछले हफ्ते क्रूड का स्टॉक 3.2 मिलियन बैरल घटकर 424.1 मिलियन बैरल रह गया। 4) FII की भारी बिकवाली NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक विदेशी इन्वेस्टर्स ने भारतीय बाजार में 6,121 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। FIIs ने बुधवार तक लगातार नौवें सेशन में लगभग 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय इक्विटीज बेचे हैं। कुल मिलाकर, सितंबर की शुरुआत से अब तक FIIs 25 में से 20 सेशन में भारतीय इक्विटीज़ के नेट सेलर बने हुए हैं। 5) फेड रेट बढ़ने की चिंता मिनट्स के मुताबिक पिछले महीने फेड के पॉलिसीमेकर्स इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के पीछे के कारण को लेकर बंटे हुए थे। कुछ पार्टिसिपेंट्स एनर्जी और दूसरे प्राइस शॉक के असर को दूर रखने के लिए बढ़ोतरी को जरूरी मान रहे थे। वहीं कुछ इसे उभरती डिमांड से चलने वाली महंगाई से बचने के लिए जरूरी मान रहे थे। CME के ​​फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स दिसंबर में बढ़ोतरी की 80% संभावना मान रहे हैं। 6) कमजोर ग्लोबल संकेत ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिल रहे हैं। साउथ कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा गिरा, जबकि जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग 1% से ज्यादा गिरे। वॉल स्ट्रीट और यूरोपियन मार्केट भी पिछले सत्र में लाल निशान पर बंद हुए जबकि डाउ जोन्स फ्यूचर्स आज अमेरिकी स्टॉक मार्केट में और गिरावट का संकेत दे रहे हैं। 7) टेक्निकल लेवल टूटे शेयर मार्केट में गिरावट बीच के कारोबारी घंटों में और तेज हो गई क्योंकि निफ्टी जरूरी सपोर्ट लेवल को तोड़ गया, जिससे बिकवाली तेज हो गई। एक्सिस डायरेक्ट में डेरिवेटिव्स और टेक्निकल रिसर्च के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमांग गोर ने चेतावनी दी थी कि जब तक निफ्टी 22,800 से नीचे है, मार्केट का माहौल बहुत कमजोर बना हुआ है। इसके 52-हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,180 के पास पहुंचने की संभावना है।

Jaguar Type-01 EV: 720KM की रेंज, 13 मिनट की चार्जिंग में 321KM का सफर; जानें खूबियां

 नई दिल्ली जगुअर ने अपनी इलेक्ट्रिक कार टाइप-01 (Jaguar Type 01) से पर्दा उठा दिया है. ये ब्रिटिश ब्रांड की नई शुरुआत है. 2024 में कंपनी ने जगुअर टाइप-00 को पेश किया था और टाइप-01 उससे काफी ज्यादा इंस्पायर्ड है. इस कार को कंपनी ने जगुआर इलेक्ट्रिक आर्किटेक्चर पर तैयार किया है।  टाइप-01 कंपनी की दूसरी कारों से काफी अलग डिजाइन के साथ आती है. ये लग्जरी मार्केट को टार्गेट करता है. इस कार में 1000 बीएचपी से ज्यादा पावर और 720 किलोमीटर तक की क्लेम्ड रेंज मिलेगी. इसमें 4 लोगों के लिए स्पेस दिया गया है. आइए जानते हैं इस कार की खास बातें।  बैटरी और रेंज  टाइप-01 में दमदार परफॉर्मेंस वाले हार्डवेयर के साथ आती है. इसमें तीन मोटर का सेटअप दिया गया है, जिसमें दो रियर साइड में और एक फ्रंट में दिया गया है. ये सेटअप 1030 एचपी की पावर और 1365 एनएम तक का टॉर्क ऑफर करता है. इस कार का वजन लगभग 2.7 टन है।  ये कार 3.2 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. कार में 120kWh की बैटरी मिलती है, जिसकी डब्लूएलटीपी क्लेम्ड रेंज 720 किलोमीटर है. जगुआर टाइप-01 को सिर्फ 13 मिनट चार्ज करके 321 किलोमीटर का सफर तय किया जा सकता है. 10 से 80 परसेंट तक चार्ज को चार्ज होने में सिर्फ 22 मिनट का वक्त लगता है।  ये कार चार अलग-अलग जोन में बटी हुई है. डैशबोर्ड पर कार के बोनट वाला ही पैटर्न देखने को मिलेगा. कार में फिजिकल बटन्स नहीं दी गई हैं. सेंटर टचस्क्रीन से ही क्लाइमेट कंट्रोल और दूसरे फीचर्स का एक्सेस मिलेगा. इस स्क्रीन को ऐसे प्लेस किया गया है कि ड्राइवर को इसे इस्तेमाल करने में दिक्कत नहीं हो।  कार में 24 इंच का ओएलईडी डिस्प्ले दिया गया है. जगुआर की सेल्स में तेजी से गिरावट आई है और इसे रोकने के लिए कंपनी को नए कंज्यूमर्स को जोड़ना होगा. यही वजह है कि कंपनी नए डिजाइन के साथ एंट्री कर रही है. कार की कीमतों को लेकर कंपनी ने कोई ऐलान नहीं किया है।  जगुआर टाइप-01 की कीमत रोल्स रॉयस जितनी तो नहीं होगी, लेकिन ब्रांड की पुरानी फ्लैगशिप कार से ज्यादा होगी. इसकी डिलीवरी मिड 2027 में शुरू हो सकती है. ये कार भारत में भी लॉन्च होगी. जहां इसकी कीमत 2 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है। 

Airtel Postpaid यूजर्स को झटका! प्लान हुए ₹50 महंगे, विदेश में मिलेगा फ्री डेटा और कॉलिंग

मुंबई  Airtel ने अपने पोस्टपेड ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव किया है। कंपनी 8 अक्टूबर 2026 से अपने सभी पोस्टपेड प्लान को 50 रुपए महंगा करने वाली है। नई कीमत कल से लागू हो जाएगी है। कंपनी ने अपने पुराने प्लान्स को नए पोर्टफोलियो में डाल दिया है और इन सभी प्लान्स के साथ हर साल एक Free International Roaming Trip का फायदा भी जोड़ा गया है। सबसे सस्ता नया Individual Postpaid Plan अब 499 रुपए का होगा, जबकि पहले Airtel का Individual Plan 449 रुपए से शुरू होता था। यानी इस एंट्री लेवल प्लान की कीमत में सीधे 50 रुपए का इजाफा हुआ है। Airtel के पुराने और नए Family Plans की कीमतों में भी 50 रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिलती है। हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि 50 रुपए की बढ़ोतरी सिर्फ एक ही प्लान तक सीमित नहीं है। Airtel ने अपना पूरा पोस्टपेड पोर्टफोलियो बदला है। कंपनी के नए प्लान 499 रुपए से शुरू होकर 1799 रुपए तक जाते हैं। बदले में सभी नए प्लान में हर साल एक Free International Roaming Trip शामिल की गई है। इस फ्री रोमिंग पैक में 5GB डेटा, 60 मिनट कॉलिंग Calling और 25 Outgoing SMS मिलेंगे। ध्यान दें कि यह फायदा 5 दिनों के लिए वैलिड होगा। 499 रुपए वाले Airtel Postpaid Plan में मिलते हैं ये फायदे नए पोर्टफोलियो का सबसे सस्ता Individual Plan 499 रुपए का है। इसमें एक SIM कनेक्शन मिलता है। इसके साथ Unlimited Data और Calling के अलावा Spam और Fraud Protection जैसे फीचर्स मिलते हैं। प्लान में Airtel Xstream Play Premium और Google One जैसे फायदे भी शामिल हैं। सबसे बड़ा नया फायदा Free International Roaming है। इसका मतलब है कि अगर आप साल में एक बार विदेश जाते हैं तो अलग से बेसिक रोमिंग पैक लेने की जरूरत कम हो सकती है। Free International Roaming बेनिफिट में क्या मिलेगा? Airtel के नए पोस्टपेड प्लान्स में मिलने वाले इंटरनेशनल रोमिंग का फायदा 5 दिनों के लिए होगा। इसमें ग्राहक को 5GB डेटा, 60 मिनट कॉलिंग और 25 Outgoing SMS मिलेंगे। Incoming SMS के लिए कोई अलग चार्ज नहीं होगा। खास बात यह है कि ग्राहक को यह रोमिंग पैक तुरंत एक्टिवेट करने की जरूरत नहीं है। विदेश यात्रा के दौरान अपनी जरूरत के हिसाब से इसे एक्टिवेट किया जा सकेगा। यानी अगर अभी प्लान लिया है लेकिन विदेश यात्रा कुछ महीने बाद करनी है, तो रोमिंग बेनिफिट को उसी समय इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी के मुताबिक इस Free International Roaming Benefit की कीमत करीब 2,000 रुपए तक है। ऐसे में साल में कम से कम एक बार विदेश जाने वाले ग्राहकों के लिए यह नया फायदा खास हो सकता है। Family Plan में हर SIM को मिलेगा Free Roaming Airtel के फैमिली पोस्टपेड प्लान इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को इस ऑफर का फायदा हर SIM पर मिलेगा। यानी फैमिली प्लान में जितने SIM शामिल हैं, हर SIM को साल में एक मुफ़्त इंटरनेशनल रोमिंग ट्रिप मिलेगी। अगर परिवार में चार लोग एक ही एयरटेल फैमिली पोस्टपेड प्लान के तहत जुड़े हैं तो चारों SIM को अपने-अपने लिए एक Free International Roaming Trip मिल सकती है। इस तरह परिवार के अलग-अलग सदस्य अपनी विदेश यात्रा के दौरान अपने रोमिंग बेनिफिट का इस्तेमाल कर सकते हैं। Airtel के नए Family Plans की कीमत Airtel का नया फैमिली पोस्टपेड पोर्टफोलियो 749 रुपए से शुरू होता है। 749 रुपए वाले प्लान में दो SIM शामिल हैं। इसके बाद 1049 रुपए वाले प्लान में तीन SIM, 1249 रुपए और 1449 रुपए वाले प्लान में चार SIM साथ ही 1799 रुपए वाले प्लान पांच SIM मिलते हैं। जैसे-जैसे प्लान की कीमत बढ़ती है, मनोरंजन और क्लाउड सेवा के फायदे भी बढ़ते जाते हैं। अलग-अलग प्लान में Amazon Prime, JioHotstar, Apple Music, Apple iCloud+ और Netflix जैसे Subscription मिलते हैं। सबसे महंगे 1799 रुपए वाले प्लान में Netflix Standard समेत कई अन्य फायदे शामिल हैं।

महंगा हुआ IndiGo का हवाई सफर, घरेलू फ्लाइट्स पर ₹375 से ₹1,300 तक बढ़ा फ्यूल चार्ज

मुंबई  हवाई सफर करने वालों के लिए टिकट महंगा हो सकता है. देश की बड़ी एयरलाइन IndiGo ने घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए फ्यूल चार्ज बढ़ाने का फैसला किया है. नए चार्ज 6 अक्टूबर 2026 की रात 12:01 बजे के बाद की जाने वाली नई बुकिंग पर लागू होंगे. यानी इस समय के बाद टिकट बुक करने वाले यात्रियों को पहले के मुकाबले ज्यादा फ्यूल चार्ज देना होगा. घरेलू उड़ानों में चार्ज यात्रा की दूरी के हिसाब से तय होगा. इसमें 100 रुपये से लेकर 350 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।  सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की घरेलू उड़ानों पर हुई है. वहीं, 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ान पर यात्रियों को 300 रुपये ज्यादा देने होंगे. अगर एक परिवार में चार लोग सफर कर रहे हैं, तो दूरी के हिसाब से उन्हें एक तरफ की यात्रा पर अधिकतम 1,200 रुपये तक अतिरिक्त फ्यूल चार्ज देना पड़ सकता है. हालांकि, यह बढ़ोतरी टिकट के बेस किराए से अलग होगी।  दूरी के हिसाब से लगेगा नया फ्यूल चार्ज IndiGo ने घरेलू उड़ानों को अलग-अलग दूरी की कैटेगरी में बांटा है. जितनी लंबी उड़ान होगी, फ्यूल चार्ज उतना ही ज्यादा होगा. 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ान पर अब ₹900 फ्यूल चार्ज लगेगा. वहीं, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा करने वाले यात्रियों से ₹1,300 लिया जाएगा।  उड़ान की दूरी नया फ्यूल चार्ज 0–500 किमी ₹375 501–1,000 किमी ₹600 1,001–1,500 किमी ₹900 1,501–2,000 किमी ₹1,150 2,000 किमी से ज्यादा ₹1,300 100 से 350 रुपये तक बढ़ा चार्ज  नई दरों के मुताबिक घरेलू उड़ानों पर फ्यूल चार्ज में ₹100 से ₹350 तक की बढ़ोतरी हुई है. 1,001-1,500 किलोमीटर की उड़ान के लिए चार्ज ₹300 बढ़ा है. वहीं, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ान पर ₹350 की बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर परिवार के बजट पर पड़ सकता है. उदाहरण के लिए, अगर चार लोग ऐसी उड़ान लेते हैं जिसमें प्रति यात्री ₹350 की बढ़ोतरी हुई है, तो एक तरफ की यात्रा में परिवार को ₹1,400 ज्यादा देने होंगे. आने-जाने की यात्रा में यह अतिरिक्त खर्च ₹2,800 तक हो सकता है. इंटरनेशनल फ्लाइट पर भी बढ़ा फ्यूल चार्ज IndiGo ने इंटरनेशनल फ्लाइट के लिए भी फ्यूल चार्ज में बदलाव किया है. अलग-अलग क्षेत्रों के लिए चार्ज अलग रखा गया है. SAARC  सेक्टर की उड़ानों पर चार्ज ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 किया गया है. यूरोप जाने वाली उड़ानों के लिए फ्यूल चार्ज ₹10,000 रखा गया है. क्षेत्र फ्यूल चार्ज SAARC ₹3,000 दक्षिण-पूर्व एशिया ₹5,500 GCC और मिडिल ईस्ट ₹5,500 उत्तर और पूर्वी एशिया ₹5,500 अफ्रीका ₹6,000 यूरोप ₹10,000 ATF महंगा होने से बढ़ा खर्च  IndiGo के मुताबिक, एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है. एयरलाइन के लिए ईंधन एक बड़ा खर्च होता है. जब ATF महंगा होता है, तो उड़ानों के संचालन की लागत भी बढ़ जाती है. एयरलाइन का कहना है कि बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई करने के लिए फ्यूल चार्ज में इससे ज्यादा बढ़ोतरी करनी पड़ सकती थी. लेकिन यात्रियों पर बोझ कम रखने के लिए चार्ज में सीमित बढ़ोतरी की गई है.

Maruti की नई Baleno ने मचाया धमाल! लॉन्च के पहले महीने में 25 हजार से ज्यादा कारें बिकीं

मुंबई  मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने पिछले महीने अपनी प्रीमियम हैचबैक – Baleno का फेसलिफ्ट लॉन्च किया था। यह फेसलिफ्ट कई शानदार अपग्रेड्स से लैस है। इसके फ्रंट लुक को भी कंपनी ने पहले से ज्यादा बोल्ड और अग्रेसिव बना दिया है। यही कारण है कि सेल के मामले में 2026 बलेनो ने कमाल कर दिया है। कारवाले की रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने इसकी सेल 25 हजार यूनिट से ज्यादा रही है। पहले महीने हुई शानदार सेल का यह माइलस्टोन बता रहा है कि नई बलेनो अपने सेगमेंट पर राज करने के मूड से आई है। आइए जानते हैं नई बलेनो में क्या कुछ है खास। 5.99 लाख रुपये शुरुआती कीमत नेक्सा की वेबसाइट पर नई बलेनो 5.99 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ लिस्ट है। इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 9.99 लाख रुपये तक जाती है। दोनों कीमतें एक्स-शोरूम हैं। फीचर्स की बात करें, तो बलेनो फेसलिफ्ट में आपको 1.2 लीटर का थ्री-सिलेंडर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन मिलेगा। यह नया इंजन 82bhp की पावर और 114Nm का टॉर्क ऑफर करता है। कंपनी नई बलेनो (AMT) का माइलेज 24.77 kmpl तक का क्लेम करती है। बलेनो मैन्युअल और AMT गियरबॉक्स ऑप्शन के साथ आती है। खास बात है कि बलेनो में आपको सीएनजी के साथ एएमटी का भी ऑप्शन मिलेगा। नई बलेनो में हुए ये बदलाव बलेनो के एक्सटीरियर में हुए बदलावों की बात करें, तो अब इसमें ब्लैक हॉरिजॉन्टल स्लैट्स वाली बड़ी फ्रंट ग्रिल ऑफर की जा रही। वहीं, हेडलैंप और टेल लैंप पहले जैसे ही हैं। नए फॉग लैंप हाउसिंग के साथ बंपर में थोड़ा बदलाव किया गया है। हैचबैक के 16-इंच के अलॉय व्हील्स और शार्क फिन एंटीना को भी डिजाइन दिया गया है। गाड़ी के डाइमेंशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बलेनो की लंबाई अभी भी 3,990mm है और इसका व्हीलबेस 2,520mm है। इंटीरियर की जहां तक बात है, तो केबिन का लेआउट पहले जैसा ही है। इसमें नौ-इंच का टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम और सेमी-डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है। इस बार इसमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, टायर प्रेशर मॉनिटर और लेवल 2 ADAS-बेस्ड सेफ्टी फीचर्स भी दिए गए हैं। पुराने मॉडल से लिए गए फीचर्स में हाइट-एडजस्टेबल ड्राइवर सीट, वायरलेस चार्जर, हेड-अप डिस्प्ले, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल और 360-डिग्री कैमरा शामिल हैं। आने वाला है फ्रॉन्क्स का फेसलिफ्ट कंपनी बलेनो के बाद अपनी कई और कारों को अपडेट देने वाली है। फ्रॉन्क्स इन्हीं में से एक है। मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स का फेसलिफ्ट इसी साल नवंबर में मार्केट में एंट्री कर सकता है। इसमें कंपनी नया फ्रंट ग्रिल, अपडेटेड बंपर और नई एलईडी लाइट्स के साथ डिजाइन में छोटे-मोटे बदलाव कर सकती है। इंटीरयर में आपको बड़ा टचस्क्रीन, अपडेटेड डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, सनरूफ और वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स जैसे फीचर देखने को मिल सकते हैं। इसमें लेवल-2 ADAS भी दिया जा सकता है।

UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर: ₹2,000 तक पेमेंट पर राहत, बड़े ट्रांजैक्शन पर नया चार्ज

नई दिल्ली UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए 15 अक्टूबर 2026 से कुछ बदलाव लागू होने जा रहे हैं। नए MDR (Merchant Discount Rate) नियम के तहत कुछ चुनिंदा P2M (Person-to-Merchant) UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहकों को हर बार अतिरिक्त पैसा देना होगा। MDR मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी पक्ष पर लागू होगा। खास बात यह है कि ₹2,000 तक के P2M पेमेंट इस नए MDR इंफ्रास्ट्रक्चर से बाहर रहेंगे ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर क्या असर होगा? कम पैसे के UPI मर्चेंट पेमेंट को नए चार्ज से राहत मिलेगी। ₹2,000 या उससे कम के P2M ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार करीब 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि इनमें से ज्यादातर या तो ₹2,000 से कम हैं या जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आते हैं। इसका मतलब है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों पर इस बदलाव का सीधा असर सीमित रहेगा। ₹2,000 से ऊपर के P2M पेमेंट पर कितना MDR? 15 अक्टूबर से एलिजिबल P2M UPI ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से ज्यादा की रकम पर 0.4% MDR लागू होगा। यह शुल्क ग्राहक से सीधे वसूलने के बजाय मर्चेंट साइड पर लगाया जाएगा। साथ ही बड़े पेमेंट के लिए एक मैक्सिमम कैप (Maximum Cap) भी रखा गया है। ₹75,000 या उससे अधिक के UPI पेमेंट पर MDR अधिकतम ₹300 होगा। उदाहरण के लिए ₹1 लाख के पेमेंट पर 0.4% के हिसाब से ₹400 बनता है, लेकिन कैप की वजह से मर्चेंट से अधिकतम ₹300 ही लिया जाएगा। P2M और P2P में क्या अंतर है? P2M यानी पर्सन-टू-मर्चेंट का मतलब है, जब कोई व्यक्ति किसी दुकान, बिजनेस या सर्विस प्रोवाइडर को UPI से भुगतान करता है। उदाहरण के लिए किसी दुकान का QR कोड स्कैन करके सामान खरीदने के लिए पैसे देना P2M ट्रांजैक्शन है। वहीं, P2P यानी पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजता है। ऐसे UPI ट्रांसफर पर नया MDR लागू नहीं होगा, यानी परिवार या दोस्तों को UPI के जरिए पैसे भेजने पर रकम चाहे जितनी हो, इस नियम के तहत MDR नहीं लगेगा। छोटे दुकानदारों को भी देना होगा MDR? हर छोटे मर्चेंट पर 0.4% MDR लागू नहीं होगा। P2PM यानी पर्सन-टू-पर्सन मर्चेंट(Person-to-Person-Merchant कैटेगरी में आने वाले छोटे वेंडर्स के लिए जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। इस कैटेगिरी में वे छोटे कारोबारी शामिल हैं, जो QR कोड के जरिए अपने पर्सनल बैंक अकाउंट में UPI पेमेंट लेते हैं और जिनका मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है। खास बात यह है कि इस छूट के लिए GST रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है, यानी पात्रता मर्चेंट के बैंक अकाउंट क्लासिफिकेशन और मंथली कलेक्शन लिमिट पर निर्भर करेगी। रेलवेज से लेकर स्टॉक मार्केट तक अलग नियम कुछ खास सेक्टर्स के लिए MDR की दर अलग रखी गई है। रेलवेज, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी कैटेगिरी में ₹2,000 से ऊपर के एलिजिबल ट्रांजैक्शन पर 0.4% के बजाय ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR लागू होगा। वहीं, म्युच्युअल फंड्स, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर्स से जुड़े पेमेंट पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। इस बदलाव का सबसे अहम पहलू यह है कि MDR कस्टूमर फ्री नहीं है। इसलिए आम ग्राहक को UPI पेमेंट करते समय अलग से MDR देने की जरूरत नहीं होगी। वहीं छोटे पेमेंट और P2P ट्रांसफर को नए नियमों से बाहर रखा गया है, जिससे रोजमर्रा के UPI इस्तेमाल पर असर सीमित रहने की उम्मीद है।  

Royal Enfield की इस बाइक की बुकिंग हुई बंद, नए अवतार में जल्द होगी वापसी

 नई दिल्ली रॉयल एनफील्ड ने हाल में ही हिमालयन 440 (Royal Enfield Himalayan 440) को लॉन्च किया है. इस बाइक को लॉन्चिंग के बाद बंपर बुकिंग मिली है. यहां तक की कंपनी ने कुछ वक्त के लिए इस बाइक की बुकिंग को बंद भी किया है. अब कंपनी एक और हिमालयन लाने की तैयारी में जुटी है।  हाल में ही रॉयल एनफील्ड हिमालयन 750 को स्पॉट किया गया है. बाइक को टीवीसी (टीवी कमर्शियल) शूट के दौरान स्पॉट किया गया है. इससे पहले भी कार को कई बार स्पॉट किया गया है. हाल में आई फोटोज में बाइक का बॉडीवर्क, ग्राफिक्स और हार्डवेयर कई डिटेल्स सामने आई हैं।  चार कलर में आएगी बाइक पहले आई लीक्स से साफ है कि हिमालयन 750 चार कलर ऑप्शन में आएगी. ये बाइक ग्रे, ग्रीन, मरून और वॉइट कलर ऑप्शन में आ सकती है. इनके साथ कुछ-कुछ कलर्स का कॉम्बिनेशन भी देखने को मिलेगा. जैसे ग्रे के साथ इसमें ब्राउन कलर की फिनिश दिखेगी. बाइक के साइड में 750 और हिमालयन का ग्राफिक्स मिलेगा. फिलहाल इसके कलर्स की आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। इस बाइक में हमें कई व्हील सेटअप देखने को मिल सकते हैं. यानी इसमें एलॉय और स्पोक व्हील दोनों का विकल्प मिलेगा. इसमें 19 इंच के फ्रंट और 17 इंच के रियर व्हील मिल सकते हैं. हालांकि, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।  मिलेगा दमदार इंजन हिमालयन 750 में राउंड हेडलैम्प मिलेगा, जो होरिजेंटल लाइटिंग एलिमेंट के साथ आएगी. इसमें बड़ी विंडस्क्रीन मिलेगी. साइड बॉडीवर्क पर इंडीकेटर मिलेंगे. इसमें बड़ा फ्यूल टैंक मिलेगा. इसके अलावा बाइक में स्टेप्ड सीट, रियर लगेज रैक, राउंड मिरर्स और लो-माउंटेड फ्रंट मडगार्ड भी मिलेंगे।  बात करें इंजन की तो इस बाइक में हमें 55 बीएचपी पावर और 60 एनएम टॉर्क वाला इंजन मिलेगा, जो 6 स्पीड गियरबॉक्स के साथ आएगा. इसमें क्रूज कंट्रोल जैसा फीचर मिलेगा. कंपनी इस बाइक को अगले महीने होने वाले ईआईसीएमए (EICMA) इवेंट में रिवील कर सकती है. वहीं भारत में ये बाइक मोटोवर्स में रिवील हो सकती है।